
जेवर (नोएडा, उत्तर प्रदेश) : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, योगी आदित्यनाथ और अन्य राजनेताओं के साथ-साथ हज़ारों लोगों की उपस्थिति में नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा यानी जेवर हवाई अड्डा राष्ट्र को समर्पित किया और कहा कि आज से ‘विकसित उत्तर प्रदेश, विकसित भारत अभियान’ में एक नया अध्याय शुरू हो रहा है। भारत का सबसे बड़ा राज्य अब अंतरराष्ट्रीय विमान पत्तनों की सबसे अधिक संख्या वाले राज्यों में से एक बन गया है। उन्होंने यह भी कहा कि “यह वही राज्य है जिसने मुझे अपना प्रतिनिधि चुना और सांसद बनाया, और अब इसकी पहचान इस शानदार विमान पत्तन से जुड़ गई है।” साथ ही, यह भी दोहराया कि उन्हें दोहरी खुशी है, पहली इस विमान पत्तन की नींव रखने और अब इसका उद्घाटन करने पर, और दूसरी इस भव्य विमान पत्तन का नाम उत्तर प्रदेश से जुड़ने पर।
अपने उद्घाटन भाषण में प्रधानमंत्री ने कहा कि “इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में, खेती-किसानी का बहुत महत्व है। मैं आज उन मेरे किसान भाई-बहनों का विशेष रूप से आभार व्यक्त करता हूं, जिन्होंने इस प्रोजेक्ट को साकार करने के लिए अपनी जमीनें दी है।’ साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि ‘आपके इस योगदान से ही, इस पूरे क्षेत्र में विकास का एक नया दौर शुरु होने जा रहा है। आधुनिक कनेक्टिविटी का जो विस्तार यहां हो रहा है, उससे पश्चिमी यूपी में फूड प्रोसेसिंग की संभावनाओं को और बल मिलेगा। अब यहां के कृषि उत्पाद दुनिया के बाजारों में और बेहतर तरीके से जा पाएंगे।’
2001 में जब आज के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, कल के उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, उन्होंने इस दिल्ली हवाई अड्डों पर बढ़ रही यात्रियों की भीड़ के मद्दे नजर, जेवर में एक हवाई अड्डा बनाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था। 8 मार्च, 2002 को राजनाथ सिंह मुख्यमंत्री कार्यालय से बाहर निकल गए और प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगा। इस राष्ट्रपति शासन के बाद 3 मई, 2002 को सुश्री मायावती मुख्यमंत्री कार्यालय में विराजमान हुई। राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के बावजूद, सुश्री मायावती हवाई अड्डे के निर्माण को लेकर केंद्र से वार्तालाप करने में कोई कोताही नहीं की।

राज्य में यह 14 वां विधानसभा का कालखंड था। इसी कालखंड में सुश्री मायावती के बाद समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव 29 अगस्त, 2003 को मुख्यमंत्री कार्यालय में पधारे। मुलायम सिंह यादव भी ‘जेवर’ परियोजना को तवज्जो दिया और तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ‘जेवर परियोजना’ का सम्मान करते प्रदेश के साथ साथ राष्ट्र के लोगों के लिए अपनी और केंद्र सरकार की स्वीकृति दे दी। ज्ञातव्य हो कि मुख्यमंत्री मायावती के कालखंड में 9 जून, 1997 को अगर गाजियाबाद और बुलंदशहर को काटकर गौतमबुद्ध नगर का निर्माण नहीं किया गया होता तो राष्ट्र को समर्पित ‘जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा’ बुलंदशहर का ‘जेबर’ होता।
2003 और 2026, कुल 23 वर्ष लगे। इन वर्षों में केंद्र में प्रधानमंत्री कार्यालय में जहाँ अटल बिहार वाजपेयी, डॉ. मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी आये; उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय में मुलायम सिंह यादव, सुश्री मायावती, अखिलेश यादव और योगी आदित्यनाथ विराजमान हुए। पांच वर्ष पहले, दिसंबर 2021 को तत्कालीन नागरिक उड्डयन मंत्रालय में राज्य मंत्री (अवकाशप्राप्त जनरल) वी.के. सिंह, ने कहा था कि भारत सरकार ने वर्ष 2018 में उत्तर प्रदेश सरकार को नोएडा (जेवर) इंटरनेशनल ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट स्थापित करने के लिए “सैद्धांतिक मंज़ूरी” दी थी। एयरपोर्ट प्रोजेक्ट को लागू करने की ज़िम्मेदारी, जिसमें प्रोजेक्ट के लिए फंड जुटाना भी शामिल है, संबंधित एयरपोर्ट डेवलपर की थी; यानी जेवर एयरपोर्ट प्रोजेक्ट के मामले में यह जिम्मेदारी राज्य सरकार की है।

जेवर एयरपोर्ट के लिए जमीन अधिग्रहण पर ₹8,000 करोड़ से ज़्यादा खर्च किए गए। पांच प्रस्तावित रनवे बनाने के लिए अलग-अलग चरणों में 12,000 एकड़ से ज्यादा जमीन अधिग्रहित की गई। अकेले पहले चरण में 1,334 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित करने के लिए ₹4,300 करोड़ से ज्यादा का निवेश हुआ है। पहले चरण के निर्माण और शुरुआती ज़मीन अधिग्रहण को मिलाकर, पूरे प्रोजेक्ट की कुल लागत लगभग ₹11,200 करोड़ है। इतना ही नहीं, विस्थापित परिवारों के पुनर्वास के लिए 52 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित करने पर अब तक लगभग ₹716 करोड़ खर्च किए गए। कहते हैं, हवाई अड्डा के आस-पास के विकास के लिए, YEIDA ने हाल ही में ₹4,856 करोड़ से ज़्यादा में 2,700 एकड़ जमीन अधिग्रहित की है।
बहरहाल, नए विमान पत्तन के दूरगामी प्रभाव का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि नोएडा विमान पत्तन से आगरा, मथुरा, अलीगढ़, गाजियाबाद, मेरठ, इटावा, बुलंदशहर और फरीदाबाद सहित विशाल क्षेत्र को लाभ होगा। यह विमान पत्तन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों, लघु एवं मध्यम उद्यमों और युवाओं के लिए अनेक नए अवसर लेकर आएगा। यहां से विमान दुनिया भर के लिए उड़ान भरेंगे, और यह विमान पत्तन विकसित उत्तर प्रदेश की उड़ान का प्रतीक बनेगा। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि 2004 से 2014 तक ये एयरपोर्ट फाइलों में ही दबा रहा। जब हमारी सरकार बनी तो यूपी में सपा की सरकार थी। शुरु के दो-तीन सालों में समाजवादी पार्टी वालों ने इस पर काम नहीं होने दिया। लेकिन जैसे ही यहां भाजपा-एनडीए की सरकार बनी, दिल्ली में भाजपा-एनडीए की सरकार बनी, तो जेवर एयरपोर्ट की नींव भी पड़ी, निर्माण भी हुआ और अब ये शुरु भी हो गया है।

मोदी ने कहा कि साल 2014 से पहले, देश में सिर्फ 74 एयरपोर्ट थे। आज 160 से अधिक एयरपोर्ट्स देश में हैं। अब महानगरों के अलावा, देश के छोटे-छोटे शहरों में भी हवाई कनेक्टिविटी पहुंच रही है। आने वाले वर्षों में इसके तहत, छोटे-छोटे शहरों में 100 नए एयरपोर्ट और 200 नए हेलीपैड बनाने की योजना है। यूपी को भी इससे बहुत अधिक लाभ होगा।भारत के 85 एयरपोर्ट, 85 परसेंट हवाई जहाजों को आज भी मैंटनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल यानी MRO के लिए, इस काम के लिए विदेश भेजना पड़ता है। इसलिए हमारी सरकार ने ठाना है कि MRO सेक्टर में भी भारत को आत्मनिर्भर बनाएंगे। अब भारत में ही, बहुत बड़े पैमाने पर MRO सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। आज यहां जेवर में भी MRO सुविधा का शिलान्यास हुआ है। ये सुविधा जब तैयार हो जाएगी, तो ये देश-विदेश के विमानों को सेवा देगी। इससे देश को कमाई भी होगी, हमारा पैसा भी देश में ही रहेगा, और युवाओं को अनेक रोजगार भी मिलेंगे।
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, यहां के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या, ब्रजेश पाठक, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी श्री राममोहन नायडू जी, पंकज चौधरी जी, ज्यूरिक एयरपोर्ट के चेयरमैन जोसेफ फेल्डर जी, अन्य मंत्रिगण, सांसद, विधायक सभी इस अवसर पर उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि ये एयरपोर्ट पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों, छोटे और लघु उद्योगों, यहां के नौजवानों के लिए, अनेक नए अवसर लेकर आने वाला है। यहां से दुनिया के लिए विमान तो उड़ेंगे ही, साथ ही, ये विकसित उत्तर प्रदेश की उड़ान का भी प्रतीक बनेगा। मोदी ने कहा कि आधुनिक संपर्क के विस्तार से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण की संभावनाओं को और बढ़ावा मिलेगा और उन्होंने आगे कहा, “यहां के कृषि उत्पाद अब वैश्विक बाजारों तक अधिक कुशलता से पहुंच सकेंगे।”
क्षेत्र के एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब के रूप में उभरती भूमिका की ओर ध्यान दिलाते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि यह क्षेत्र दो प्रमुख माल ढुलाई गलियारों का केंद्र बन रहा है। ये विशेष रेल पटरियां मालगाड़ियों के लिए बिछाई गई हैं, जिनसे उत्तर भारत का बंगाल और गुजरात के समुद्रों से संपर्क बढ़ा है। उन्होंने कहा कि दादरी वह महत्वपूर्ण केंद्र है जहां ये दोनों गलियारे मिलते हैं, जिसका अर्थ है कि यहां के किसान जो कुछ भी उगाते हैं और उद्योग जो कुछ भी उत्पादित करते हैं, वह अब सड़क और वायु मार्ग से विश्व के हर कोने तक तेजी से पहुंच सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “इस तरह का बहुआयामी संपर्क उत्तर प्रदेश को दुनिया भर के निवेशकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण बना रहा है।”

उड़ान योजना के प्रभाव का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने लगातार यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि विमान पत्तनों के निर्माण के साथ-साथ हवाई यात्रा का किराया आम परिवारों की पहुंच में रहे। श्री मोदी ने उल्लेख किया कि उड़ान योजना के तहत टिकट बुक करके एक करोड़ साठ लाख से अधिक नागरिकों ने किफायती दरों पर हवाई यात्रा की है। उन्होंने कहा, “हाल ही में केंद्र सरकार ने लगभग 29,000 करोड़ रुपये की मंजूरी के साथ उड़ान योजना का और विस्तार किया है, जिसके तहत आने वाले वर्षों में छोटे शहरों में 100 नए विमान पत्तन और 200 नए हेलीपैड बनाए जाएंगे। उत्तर प्रदेश को भी इससे बहुत लाभ होगा।”
भारत के तेजी से बढ़ते विमानन क्षेत्र के बारे में बात करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि नए विमान पत्तनों के निर्माण के साथ-साथ नए विमानों की मांग भी बढ़ रही है और विभिन्न एयरलाइंस सैकड़ों नए विमानों के ऑर्डर दे रही हैं। श्री मोदी ने कहा कि इससे पायलटों, केबिन क्रू और रखरखाव पेशेवरों सहित युवाओं के लिए अपार अवसर पैदा हो रहे हैं, और उन्होंने आगे कहा कि “हमारी सरकार इस बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए विमानन क्षेत्र में प्रशिक्षण सुविधाओं का विस्तार भी कर रही है।”
भारत के विमानन क्षेत्र में मौजूद एक गंभीर कमी का उल्लेख करते हुए, प्रधानमंत्री ने रखरखाव, मरम्मत और नवीनीकरण (एमआरओ) क्षेत्र की ओर ध्यान दिलाया और बताया कि 85 प्रतिशत भारतीय विमानों को अभी भी एमआरओ सेवाओं के लिए विदेश भेजना पड़ता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार ने एमआरओ क्षेत्र में भी भारत को आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प लिया है और बताया कि आज जेवर में एक एमआरओ सुविधा केंद्र की नींव रखी गई है। श्री मोदी ने घोषणा की, “तैयार होने पर, यह केंद्र भारत और विदेश के विमानों को सेवाएं प्रदान करेगा, जिससे देश को राजस्व प्राप्त होगा, हमारा पैसा भारत में ही रहेगा और युवाओं के लिए अनेक रोजगार सृजित होंगे।”
नागरिकों की सुविधा सुनिश्चित करने और उनके समय और धन की बचत करने को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए, प्रधानमंत्री ने मेट्रो और वंदे भारत जैसी आधुनिक रेल सेवाओं के विस्तार के बारे में बात की। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “दिल्ली-मेरठ नमो भारत रेल में ढाई करोड़ से अधिक यात्री यात्रा कर चुके हैं। दिल्ली और मेरठ के बीच की यात्रा, जिसमें पहले घंटों लगते थे, अब मिनटों में पूरी हो जाती है।”
विकसित भारत के लिए आधुनिक बुनियादी ढांचे में किए जा रहे अभूतपूर्व निवेश पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले ग्यारह वर्षों में बुनियादी ढांचे के बजट में छह गुना से अधिक की वृद्धि हुई है जिसमें राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर 17 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं और एक लाख किलोमीटर से अधिक राजमार्गों का निर्माण किया गया है। उन्होंने कहा कि रेल विद्युतीकरण 2014 से पहले 20,000 किलोमीटर से बढ़कर अब 40,000 किलोमीटर से अधिक हो गया है, और अब लगभग 100 प्रतिशत ब्रॉड-गेज नेटवर्क का विद्युतीकरण हो चुका है। प्रधानमंत्री ने बताया कि पहली बार कश्मीर घाटी और पूर्वोत्तर राज्यों की राजधानियों को रेल नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है, जबकि पिछले एक दशक में पत्तनों की क्षमता दोगुनी से अधिक हो गई है और अंतर्देशीय जलमार्गों की संख्या लगातार बढ़ रही है। श्री मोदी ने कहा, “भारत विकसित भारत के निर्माण के लिए आवश्यक हर क्षेत्र में तेजी से काम कर रहा है।”

वैश्विक चुनौतियों के सामने सामूहिक प्रयास और राष्ट्रीय एकता का आह्वान करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने संसद में विस्तार से बात की है और मुख्यमंत्रियों के साथ मौजूदा संघर्ष से उत्पन्न संकट से निपटने के बारे में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने जनता से इस संकट का सामना शांत मन और धैर्य से करने की अपील की और इसे भारतीयों की सबसे बड़ी ताकत बताया। प्रधानमंत्री मोदी ने दोहराया कि जो भारतीयों और भारत के हित में है, वही भारत सरकार की नीति और रणनीति है। श्री मोदी ने अपने संबोधन का समापन करते हुए कहा, “मुझे पूरा विश्वास है कि सभी राजनीतिक दल देश के एकजुट प्रयासों को मजबूती प्रदान करेंगे।”
तस्वीरें: पत्र सूचना कार्यालय, भारत सरकार, नई दिल्ली















