“​नैना से नैना जो मिला के देखे – मौसम के साथ मुस्कुरा के देखे – दुनिया उसी का है जो आगे देखे” – नमन आपको आशा ताई

आशा भोसले - नमन आपको

15 जुलाई, 2006 को शनिवार था। मुद्दत बाद दिल्ली के इंडिया गेट परिसर से ‘कार्यक्रम करने/कराने पर प्रतिबंध’ भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा एक दिन के लिए हटाया गया था। वजह थी – शहनाई सम्राट उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की अंतिम अभिलाषा को पूरा करना। 

उसी वर्ष मार्च के महीने में, जिस महीने में उस्ताद का जन्म बिहार के डुमरांव में हुआ था (21 मार्च, 1916) के 7 तारीख (7 मार्च, 2006) को बनारस में संकट मोचन सहित कई स्थानों पर बम विस्फोट हुआ था। कई लोग मृत्यु को प्राप्त किये थे। स्वाभाविक है बनारस का लाल, जिसे बनारस ही नहीं, पूरे विश्व के लोग पसंद करते थे, उन मृतकों के सम्मान में अपने 91-वां जन्म दिन उस तारीख को मनाने से मना कर दिए। शहर के कई सम्मानित लोगों के अनुरोध पर चार दिन बाद अपने घर सराय हरहा के दूसरे मंजिल पर अपना जन्म दिन मनाये बिस्मिल्लाह खान । 

इस निमित्त 91-किलो का केक बनवाया था, वह घर की सीढ़ियों की संकीर्णता के कारण दूसरी मंजिल पर नहीं जा सकता था और उस्ताद अपनी बीमारी के कारण नीचे के आँगन में नहीं आ सकते थे। फिर शहनाई और उनके सम्मान में बनी पुस्तक ‘मोनोग्राफ ऑन उस्ताद बिस्मिल्लाह खान’ को लोकार्पित करते, सैकड़ों लोगों की उपस्थिति में मेरी पत्नी श्रीमती नीना झा का हाथ पकड़कर कहते हैं:

“आप तो दरभंगा की बहु हैं, मिथिला की बेटी हैं, आप मेरी एक अंतिम अभिलाषा पूरी कर दें। मैं अपनी अंतिम सांस लेने से पहले दिल्ली के इंडिया गेट पर शहीदों के सम्मानार्थ अपने शहनाई में अपनी सांस फूंकना चाहता हूँ। शहनाई के धुन से शहीदों को आमंत्रित करना चाहता हूँ और फिर शहनाई के धुन से ही उन्हें विसर्जित कर इस दुनिया से कूच करना चाहता हूँ। और वे रोने लगे।” सम्पूर्ण वातावरण अश्रुपूरित हो गया था।

फिर मैं अपनी सांसों को सँभालते उस्ताद से कहा: “मैं बहुत छोटा सा पत्रकार हूँ दिल्ली सल्तनत में। मेरी औकात कीड़े-मकोड़ों से भी कम है। लेकिन आप जैसे बड़े-बुजुर्गों से ही सुना हूँ कि ‘कोशिश करने वालों की हार नहीं होती।’ अतः मैं कोशिश करने से पहले हार नहीं मानूंगा। आपकी अंतिम अभिलाषा पूरा करने में अपना सम्पूर्ण योगदान दे दूंगा। मेरे और मेरी पत्नी के अनुरोध पर भारत सरकार का गृह मंत्रालय ‘प्रतिबंध’ को हटाकर, एक छोटा सा कार्यक्रम कर उनकी अंतिम इच्छा पूरा करने का इजाजत दिया। 

15 जुलाई, 2006 को तारीख मुक़र्रर हुआ। इस तारीख को एपीजे अब्दुल कलाम (तत्कालीन राष्ट्रपति) के अलावे, भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान, भारत रत्न पंडित रवि शंकर, भारत रत्न अमर्त्य सेन, भारत रत्न लता मंगेशकर और भारत रत्न एमएस शुभलक्ष्मी को कुछ समय के लिए ही सही, इंडिया गेट पर अंकित हुतात्माओं के साथ-साथ भारत की जंगे आज़ादी में अपने प्राणों को अर्पित करने वाले शहीदों को शहनाई सम्राट के समर्पण घुन के समय उनकी उपस्थिति के लिए प्रर्थना कर रहा था। बात बिस्मिल्लाह खान की अंतिम अभिलाषा की थी। 

अप्रैल, 2006 में लता मंगेशकर तक पहुँचने के लिए एक दिन फोन किया ताकि मुंबई पहुंचकर उनसे प्रार्थना कर सकूँ। फोन की घंटी चार बार बजी थी – ट्रिंग-ट्रिंग-ट्रिंग-ट्रिंग – पांचवी बार बजने से पूर्व दूसरे छोड़ से आवाज आयी “हेलो!!!!” मैं समझ गया था की यह आशा भोसले की आवाज है। इससे पहले कि मैं कुछ कहूं, वे कहती हैं: “मैं आशा बोल रहीं हूँ, बताएं …” मैं फोन पर ही चरण स्पर्श करते अपनी बात उनसे कहा। वे फिर कहती हैं कि ‘आपकी चिठ्ठी भी आयी है। दीदी उसे देखी भी हैं। तब तक लता जी फोन पर आयी और कहीं कि “उस महीने में दिल्ली में बहुत गर्मी होती है, इसलिए मेरे लिए यह संभव नहीं है कि मैं आ सकूँ । मेरी शुभकामनाएं हैं कि खान साहब के निमित्त आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम सफल हो, ऐतिहासिक हो।” फिर मई महीना के मध्य में 11 मई 2006 को लिखा एक पत्र प्राप्त हुआ – Your Sincerely, Lata Mangeshkar, 

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आज जब आशा भोसले अंतिम सांस ली तो दो दशक पूर्व का वह टेलीफोनिक वार्ता याद आ गया। किस्ती सहृदय थी आप आशा जी।

बहरहाल, साल 1955 में ख़्वाजा अहमद अब्बास – वी.पी. साठे के कहानी पर राज कपूर-नरगिस-ललिता पवार-नादिरा अभिनीत और राज कपूर के निर्देशन में फिल्म आयी थी ‘श्री 420’ और उस फिल्म में  एक मधुर गीत था। उस गीत के गीतकार थे शैलेन्द्र, संगीतकार थे शंकर-जयकिशन और गया था  आशा भोसले तथा मन्ना डे। गीत के बोल थे:

मुड-मुड के ना देख, मुड-मुड के 
मुड-मुड के ना देख, मुड-मुड के
मुड-मुड के ना देख, मुड-मुड के
मुड-मुड के ना देख, मुड-मुड के
नैना से नैना जो मिला के देखे
मौसम के साथ मुस्कुरा के देखे
दुनिया उसी की है जो आगे देखे
नैना से नैना जो मिला के देखे
मौसम के साथ मुस्कुरा के देखे
दुनिया उसी की है जो आगे देखे, होए!

आज आशा भोसले की आवाज भी शांत हो गयी – संगीत से नैना मिलाते, मौसम के साथ मुस्कुराते आशा ताई दुनिया से आगे निकल गयी। आशा भोसले, जो न केवल अपनी बहन की महानता की छाया में रहीं, बल्कि अपनी अनोखी आवाज़ के दम पर उस छाया से बाहर निकलकर हिंदी पार्श्व गायन की दुनिया में अपना एक अलग मुकाम बनाया, का आज निधन हो गया। वह 92 वर्ष की थीं। मंगेशकर बहनों में से एक, आशा – जिनकी बहुमुखी प्रतिभा की तुलना उनकी अपनी बहन से भी नहीं की जा सकती थी – को शनिवार शाम सीने में संक्रमण और अत्यधिक थकान के कारण ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यह जानकारी उनकी पोती ज़नाई भोसले ने दी। 

जिस दिन श्री 420 फिल्म के लिए आशा भोंसले और मन्ना डे इस गीत को गायी थी, वे महज 22-वर्ष की थी। इस गीत को गाने से छः वर्ष पूर्व 1949 में 16 वर्ष की आयु में गणपतराव भोसले से उनका विवाह हुआ था। बाद में अपने सहयोगी व संगीतकार आर.डी. बर्मन से शादी की। आशा भोसले अपने पीछे अपने बेटे आनंद और अपने पोते-पोतियों को छोड़ गई हैं।

भोसले ने विभिन्न भारतीय भाषाओं में 12,000 से अधिक गाने रिकॉर्ड किए और पद्मिनी एवं वैजयंती माला जैसी दक्षिण भारतीय अभिनेत्रियों से लेकर मीना कुमारी, मधुबाला, जीनत अमान, काजोल और उर्मिला मातोंडकर सहित कई प्रमुख अभिनेत्रियों को अपनी आवाज दी। उन्होंने 2023 में अपने जन्मदिन के उपलक्ष्य में दुबई में आयोजित एक विशेष संगीत कार्यक्रम ‘आशा 90: लाइव इन कॉन्सर्ट’ में प्रस्तुति दी थी।

आशा भोसले, जिन्होंने अपनी गायकी से श्रोताओं को “आजा, आजा” गाने पर थिरकने पर मजबूर कर दिया, ठीक उतने ही कुशलता से उन्होंने “चैन से हमको कभी” गाने के ज़रिए श्रोताओं को बिछड़े प्यार का मातम मनाने पर भी विवश किया। आशा और उनकी बहन लता ने सात दशकों तक हिंदी पार्श्व गायन की दुनिया पर राज किया; इस दौरान बॉलीवुड में नायिकाओं के लिए रिकॉर्ड किए गए लगभग हर गाने में इन्हीं दोनों की आवाज़ का इस्तेमाल किया गया। 

आशा भोसले का पहला गाना 1943 में, जब वह केवल 10 वर्ष की थीं, मराठी फ़िल्म “माझा बाल” के लिए रिकॉर्ड किया गया था। उन्होंने 2010 के दशक के अंत तक और उसके बाद भी गायन जारी रखा, जिससे वह वैश्विक संगीत इतिहास में सबसे लंबे समय तक सक्रिय रहने वाली गायिकाओं में से एक बन गईं। आठ दशकों से अधिक लंबे करियर में आशा भोसले अपनी बहुमुखी प्रतिभा के लिए जानी जाती थीं। उन्होंने रोमांटिक गीतों से लेकर गजलों तक कई यादगार नगमे गाए। साथ ही कई ऐसे गीत भी गाए, जिन्होंने लोगों को थिरकने के लिए मजबूर कर दिया। आशा के सबसे मशहूर गानों में “अभी न जाओ छोड़ कर”, “इन आँखों की मस्ती”, “दिल चीज़ क्या है”, “पिया तू अब तो आजा”, “दुनिया में लोगों को” और “ज़रा सा झूम लूँ मैं” जैसे गाने शामिल हैं। 

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लता का निधन छः फरवरी 2022 को 92 वर्ष की आयु में निधन हुआ था। और आशा भोसले भी 12 अप्रैल, 2026 को 92 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली। जहाँ एक ओर, सुरों और ग़ज़लों के उस्ताद संगीत निर्देशक मदन मोहन की पहली पसंद लता थीं, वहीं आशा भी इस विधा में उतनी ही पारंगत थीं। आज भी उन्हें फ़िल्म “उमराव जान” में गाई गई अपनी ग़ज़लों के लिए विशेष रूप से याद किया जाता है। इस फ़िल्म के लिए उन्हें राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। 

लेकिन उन्होंने अपनी एक अलग पहचान भी बनाई; पहले उन्होंने ओ.पी. नैयर के साथ मिलकर उनके लयबद्ध और जोशीले गानों में काम किया, और बाद में आर.डी. बर्मन के साथ ऐसे गाने गाए जो कैबरे, रोमांस, दर्द और हर तरह के जज़्बाती अंदाज़ से प्रेरित थे।फिर भी, उन दोनों बहनों के बीच कभी कोई आपसी होड़ या जलन नहीं दिखी, जिन्होंने भारत के गायन जगत में लगभग एक बराबर ऊँचा मुकाम हासिल किया था। 

पद्म विभूषण और दादा साहब फाल्के से सम्मानित से सम्मानित आशा भोसले को कार्डियक अरेस्ट के साथ-साथ फेफड़ों से जुड़ी कुछ समस्याएं भी थीं, जिसके कारण उनकी मृत्यु हो गई। अस्पताल की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, आशा ताई को कार्डियक अरेस्ट और सीने में इन्फेक्शन की शिकायत के बाद कल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिवार के अनुसार, कल सुबह 11 बजे लोअर परेल स्थित उनके निवास ‘कासा ग्रैंड’ में अंतिम दर्शन के लिए पार्थिव शरीर रखा जाएगा, जहां लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे सकेंगे। इसके बाद शाम 4 बजे मुंबई के शिवाजी पार्क में उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।

मशहूर गायिका आशा भोसले के बेटे आनंद भोसले ने कहा, ‘मेरी मां का आज निधन हो गया। लोग कल सुबह 11 बजे लोअर परेल स्थित कासा ग्रैंड में उन्हें अपनी अंतिम श्रद्धांजलि दे सकते हैं, जहां वे रहती थीं। उनका अंतिम संस्कार कल शाम 4 बजे शिवाजी पार्क में किया जाएगा।’ शुरुआती सूचनाओं में दावा किया गया कि आशा भोसले को हार्ट अटैक हुआ था, पर बाद में पोती ने इसका खंडन किया और छाती में इंफेक्शन की बात बताई थी। बाद में आशा भोसले को डॉक्टरों ने मल्टिपल ऑर्गन फेलियर के कारण मृत घोषित कर दिया। 

8 सितंबर, 1935 को सांगली (महाराष्ट्र) में जन्मी आशा को संगीत की शुरुआती तालीम उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर से मिली थी, ठीक वैसे ही जैसे उनकी बहन को मिली थी। शायद संगीत ही उनकी किस्मत में लिखा था। चार बहनों में से लता, उषा और आशा तो पार्श्व गायिकाएँ बनी, जबकि मीना एक संगीतकार हैं। उनके भाई हृदयनाथ मंगेशकर भी एक संगीतकार हैं। कई पुरस्कारों से सम्मानित आशा एक सफल उद्यमी भी थीं; उन्होंने दुबई और ब्रिटेन में ‘आशा’ नाम से एक लोकप्रिय रेस्टोरेंट भी चलाया। उन्हें दादासाहेब फाल्के पुरस्कार, पद्म विभूषण, राष्ट्रीय पुरस्कार और संगीत जगत के कई अन्य प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाज़ा गया।

आशा भोसले ने एक साल पहले अमृता राव और आरजे अनमोल के पॉडकास्ट में अपनी आखिरी इच्छा के बारे में बताया था। आशा भोसले ने कहा था कि वह अपने आखिरी पल गाते हुए बिताना चाहती हैं क्योंकि उन्हें गाना बहुत पसंद है।आशा भोसले पब्लिकली बेहद कम नजर आती थीं, पर लगातार म्यूजिक प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही थीं। वह आखिरी बार 5 मार्च 2026 को मुंबई में सचिन तेंदुलकर के बेटे क्रिकेटर अर्जुन तेंदुलकर और सानिया चंडोक की शादी में नजर आई थीं।

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बहरहाल, दिग्गज गायिका और संगीत जगत की महान हस्ती आशा भोसले के निधन से पूरे फिल्म जगत में शोक की लहर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आशा भोसले के निधन पर शोक जताया। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आशा भोसले के निधन पर गहरा शोक जताया है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा-‘भारत की सबसे मशहूर और बहुमुखी आवाज़ों में से एक, आशा भोसले जी के निधन से मैं बहुत दुखी हूं। दशकों तक चली उनकी असाधारण संगीत यात्रा ने हमारी सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध किया और दुनिया भर में अनगिनत दिलों को छुआ। चाहे उनकी दिल को छू लेने वाली धुनें हों या उनकी जोशीली रचनाएं, उनकी आवाज़ में हमेशा एक बेमिसाल चमक रही। उनके साथ हुई मेरी मुलाक़ातों की यादें मैं हमेशा संजोकर रखूंगा।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आशा भोसले के निधन को कला और संगीत जगत की अपूरणीय क्षति बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा-‘भारतीय संगीत जगत की सुर साम्राज्ञी, सुरों की महान उस्ताद, ‘पद्म विभूषण’ आशा भोसले जी का निधन बहुत दुखद है और कला की दुनिया के लिए एक ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई नहीं हो सकती। उनकी बेमिसाल गायकी ने भारतीय संगीत को नई ऊंचाइयां दीं। उनकी मीठी धुनें हमेशा देश के लोगों के दिलों में गूंजती रहेंगी। मैं भगवान श्री राम से प्रार्थना करता हूं कि दिवंगत आत्मा को शांति मिले, और शोकाकुल परिवार और चाहने वालों को यह बहुत बड़ा दुख सहने की शक्ति मिले। ॐ शांति!

अक्षय कुमार से लेकर करण जौहर तक कई बड़ी हस्तियों ने उनके निधन पर शोकर जाहिर किया है। रविवार को 92 वर्ष की उम्र में आशा भोसले का निधन हो गया। उनका इलाज करने वाले चिकित्सकों की टीम में शामिल डॉ. प्रतीत समदानी ने बताया कि उनके कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। भोसले को शनिवार शाम सीने में संक्रमण और कमजोरी के चलते मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी पोती जनाई भोसले ने एक मीडिया पोस्ट में यह जानकारी साझा की थी। अक्षय कुमार ने एक्स पर लिखा, “आशा भोसले जी के जाने से मुझे जो नुकसान हुआ है, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। उनकी सुरीली आवाज हमेशा हमेशा के लिए अमर रहेगी। ओम शांति”

फिल्म निर्माता मधुर भंडारकर ने कहा, “मुझे बहुत दुख है कि आशा ताई, एक सिंगर जो दुनिया भर में इतनी मशहूर थीं और जिन्होंने इतने गाने गाए, अब हमारे बीच नहीं रहीं। उन्होंने इतने सालों में कई पीढ़ियों को इंस्पायर किया। एक फिल्ममेकर के तौर पर, मुझे उनके साथ काम करने का मौका मिला। उन्होंने फिल्मों में कई गाने गाए…उनकी कमी खलेगी।”

लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने कहा, “हमारे दिलों पर राज करने वाली आशा ताई अब नहीं रहीं। यह सोचना भी बहुत दुख देता है कि अब हम उनके बिना रह जाएंगे। आशा ताई ने बहुत बड़ी विरासत बनाई। एक बड़े बरगद के पेड़ के नीचे नई पहचान बनाना आसान नहीं होता। लेकिन आशा ताई ने लता जी से पहले गाया। और उन्होंने क्या गायकी की! उन्होंने अपनी काबिलियत साबित की…मुझे लगता है, अपने गानों से उन्होंने एक एम्पायर बनाया और वह दुनिया भर के कला प्रेमियों के दिलों पर राज करती रहेंगी।”

ममता बनर्जी ने आशा भोसले के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया और उन्हें “संगीत जगत की महान हस्ती” करार देते हुए पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया। बनर्जी ने ‘एक्स’ पर अपने संदेश में कहा, “संगीत जगत की महान हस्ती आशा भोसले के निधन से गहरा दुख हुआ है। वह एक ऐसी प्रेरणादायी और मंत्रमुग्ध कर देने वाली गायिका थीं, जिन्होंने पीढ़ियों तक हमारे दिलों पर राज किया।” 

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