संसद मार्ग (नई दिल्ली) : कांग्रेस को पदच्युत करने के लिए जयप्रकाश नारायण के अगुवाई वाली ‘सम्पूर्ण क्रांति’ (1974) से एक वर्ष पहले भारतीय जनता पार्टी के तत्कालीन नेता अटल बिहारी वाजपेयी साल 1973 में पेट्रोल और किरासन तेल में बेतहाशा वृद्धि के खिलाफ संसद में ‘बैलगाड़ी’ से आये थे। शांतिपूर्ण प्रदर्शन था सत्ता के खिलाफ। आज शायद सम्पूर्ण क्रांति के बाद पहली बार गैर-राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की राजनीतिक पार्टियां कांग्रेस नेता राहुल गांधी की अगुवायी में नए-पुराने संसद भवनों के बीच से भारत के निर्वाचन आयोग तक के लिए शांतिपूर्ण मार्च किया – वोट चोरी के खिलाफ, जो सत्तारूढ़ पार्टी को मंजूर नहीं था। स्वाभाविक है रास्ते में अवरोध होगा, गिरफ्तार करना।
आज की घटना को ‘हाई ड्रामा’ शब्द से अलंकृत कर अख़बार के पन्नों पर, टीवी के स्क्रीनों पर लिखें, कहें; आज मुद्दत बाद (शायद लोगों को याद भी न हो) सैकड़ों विपक्षी दलों के सांसदों ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और कथित ‘‘वोट चोरी’’ के खिलाफ संसद भवन परिसर से संसद मार्ग के रास्ते, अशोक रोड स्थित भारत का चुनाव आयोगतक मार्च निकला। विपक्षी दलों ने एकजुटता दिखाने के साथ ही यह भी कहा कि देश साफ-सुथरी मतदाता सूची चाहता है और चुनाव आयोग ‘चुराव आयोग’ नहीं हो सकता।
हालांकि पुलिस ने उन्हें संसद मार्ग पर ही रोक दिया था, बाद में हिरासत में ले लिया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, राज्यसभा में विपक्ष के नेता एवं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा और कई विपक्षी सांसदों को हिरासत में लिया गया। विरोध प्रदर्शन में राकांपा (शरद पवार) के अध्यक्ष शरद पवार ने भी हिस्सा लिया। हिरासत में लिए गए नेताओं को संसद मार्ग थाने ले जाया गया, जहां पुलिस ने बाद में उन्हें छोड़ दिया।
उधर पटना में, बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, जिन्हें कथित तौर पर दो मतदाता पहचान पत्र रखने के लिए चुनाव आयोग ने नोटिस भेजा है। सिन्हा ने कहा कि वह संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करते हैं और चुनाव आयोग के सवालों का जवाब देंगे। सिन्हा ने कहा, “मैं देश के संविधान और सभी संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करता हूँ। मैं राहुल गांधी और तेजस्वी यादव जैसा नहीं हूँ।”
जबकि दिल्ली के संसद मार्ग पर राहुल गांधी ने कहा, ‘‘सच्चाई देश के सामने है। यह लड़ाई राजनीतिक नहीं है, यह संविधान को बचाने की लड़ाई है, ‘एक व्यक्ति एक वोट’ की लड़ाई है। हम एक साफ-सुथरी और सही मतदाता सूची चाहते हैं।’’ खरगे ने ‘कहा कि ‘‘भाजपा की कायराना तानाशाही नहीं चलेगी। ये जनता के वोट के अधिकार को बचाने की लड़ाई है। यह लोकतंत्र को बचाने का संघर्ष है। ‘इंडिया’ गठबंधन के साथी संविधान की धज्जियां उड़ाने वाली इस भाजपाई साजिश को बेनक़ाब करके ही रहेंगे। राहुल गांधी ने कहा, “…सच्चाई पूरे देश के सामने है।”
संसद के मकर द्वार के सामने मार्च शुरू करने से पहले विपक्षी सांसदों ने राष्ट्रगान गाया। पुलिस ने उनका मार्च रोकने के लिए संसद मार्ग पर पीटीआई बिल्डिंग के सामने बैरिकेड लगा रहे थे। पुलिस द्वारा रोके जाने पर विपक्षी सांसद सड़क पर ही बैठ गए और ‘‘वोट चोरी बंद करो’’, ‘‘तानाशाही नहीं चलेगी’’, ‘‘मोदी सरकार हाय-हाय’’ जैसे नारे लगाने लगे। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पुलिस के रोके जाने के बाद बैरीकेड फांदकर दूसरी तरफ चले गए। उन्होंने कहा, ‘‘हम वोट बचाने के लिए बैरिकेड फांद रहे हैं। जिन लोगों ने वोट काटे हैं, उनके खिलाफ चुनाव आयोग को कार्रवाई करनी चाहिए। 18 हजार वोटों को मतदाता सूची से हटाया था, जिनकी सूची मैंने खुद दी है। आयोग ने हलफनामा मांगा, हमने दे दिया। हर किसी को मतदान करने का अवसर मिलना चाहिए।’’
दिल्ली पुलिस के विपक्षी सांसदों को हिरासत में लेने पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि यह संविधान बचाने की लड़ाई है, इसलिए हमें साफ वोटर लिस्ट चाहिए। संवाददाताओं से बात करते मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, ”अगर सरकार हमें चुनाव आयोग तक पहुंचने नहीं देती, तो हमें समझ नहीं आता उसे किस बात का डर है? इस मार्च में सभी सांसद थे, हम शांतिपूर्ण ढंग से मार्च निकाल रहे थे. हम चाहते थे कि चुनाव आयोग सभी सांसदों को बुलाता, हम मीटिंग करते और अपना-अपना पक्ष रखते, लेकिन चुनाव आयोग कह रहा है कि सिर्फ 30 मेंबर आएं। ऐसा कैसे संभव है?”
अखिलेश यादव ने सोमवार को चुनाव आयोग पर उत्तर प्रदेश चुनाव सहित बड़े पैमाने पर हुई अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई करने में विफल रहने का आरोप लगाया और आरोप लगाया कि अधिकारियों ने सत्तारूढ़ भाजपा के साथ मिलकर “वोट लूटने” की कोशिश की। यादव ने कहा कि आयोग ने चुनावी कदाचार को लेकर उनकी पार्टी की बार-बार की गई शिकायतों को नज़रअंदाज़ किया है। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा, सागरिका घोष और सुष्मिता देव और कांग्रेस की संजना जाटव, जोथिमनी, पुलिस द्वारा आगे बढ़ने से रोके जाने पर पीटीआई भवन के बाहर लगे बैरिकेड्स पर चढ़ गए और चुनाव आयोग के खिलाफ नारे लगाए। अखिलेश यादव एसआईआर के खिलाफ नारे लगाए।
प्रदर्शनकारी सांसदों के सामने एक बैनर था जिस पर लिखा था, “SIR+वोट चोरी=लोकतंत्र की हत्या”। प्रदर्शनकारी सांसदों द्वारा लिए गए एक अन्य बैनर पर लिखा था, “SIR – लोकतंत्र पर वार”। सांसदों ने चुनाव आयोग और सरकार के बीच मिलीभगत का आरोप लगाने वाले पोस्टरों के साथ-साथ “SIR पर छुपी क्यों” लिखे हुए पोस्टर भी लिए हुए थे। कई सांसदों ने “वोट चोरी” का आरोप लगाते हुए पोस्टर और तख्तियां भी ले रखी थीं, यह आरोप राहुल गांधी ने लगाया था, लेकिन चुनाव आयोग ने इसका खंडन किया था।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि संसद के ठीक बाहर लोकतंत्र पर “हमला और हत्या” की जा रही है, क्योंकि विपक्षी सांसदों को चुनाव आयोग कार्यालय तक विरोध मार्च निकालने से रोक दिया गया। चुनाव आयोग से हमारी मांग बिल्कुल साफ़ थी, सभी विपक्षी सांसद शांतिपूर्ण मार्च निकाल रहे हैं। मार्च के अंत में हम सामूहिक रूप से SIR और अन्य मुद्दों पर एक ज्ञापन सौंपना चाहते हैं। हमने किसी प्रतिनिधिमंडल की मांग नहीं की थी। भाषा साफ़ थी, सभी विपक्षी सांसद सामूहिक रूप से चुनाव आयोग को एक ज्ञापन सौंपना चाहते हैं। अब हमें निर्वाचन सदन तक पहुँचने की भी अनुमति नहीं है, हमें पीटीआई भवन में ही रोक दिया गया है। संसद के ठीक सामने लोकतंत्र पर हमला हो रहा है, लोकतंत्र की हत्या की जा रही है। चुनाव आयोग का यह बहुत ही चालाक और बेबाक जवाब है।”
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह भी मार्च का हिस्सा बने। आप ने हाल में ‘इंडिया’ गठबंधन से अलग होने की घोषणा की थी। सांसदों ने सिर पर सफेद रंग की टोपी पहन रखी थी जिस पर ‘एसआईआर’ और ‘वोट चोरी’ लिखा था तथा उन पर लाल रंग के क्रॉस का निशान भी था। राहुल गांधी नारेबाजी कर रहे सांसदों को पानी की बोतल वितरित करते हुए देखे गए। उधर, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोग दल देश में अराजकता पैदा करना चाहते हैं तथा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी संविधान विरोधी गतिविधियों में लिप्त लोगों के नेता बन गए हैं।
राहुल गांधी द्वारा मतदाता सूची में कथित धांधली का आरोप लगाए जाने और इस संबंध में कुछ खुलासे करने का दावा किए जाने के बाद विपक्षी दलों का यह पहला विरोध प्रदर्शन है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बेंगलुरु के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र के आंकड़े सामने रखते हुए सात अगस्त को आरोप लगाया था कि मतदाता सूची में हेरफेर करके ‘‘वोट चोरी’’ का मॉडल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को फायदा पहुंचाने के लिए लागू किया गया है। उन्होंने दिल्ली में संवाददाताओं के समक्ष महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र के मतदाता सूची के आंकड़े प्रस्तुत किए थे। राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि बेंगलुरु मध्य लोकसभा सीट के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में 1,00,250 मतों की चोरी की गई जबकि यह सीट पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 32,707 मतों के अंतर से जीती थी।


















