कर्तव्य पथ (नई दिल्ली) : प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कर्तव्य भवन को राष्ट्र को समर्पित करते हुए इसे जन-जन की सेवा के प्रति अटूट संकल्प और निरंतर प्रयासों का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि कर्तव्य भवन न केवल नीतियों और योजनाओं को लोगों तक तेजी से पहुंचाने में मददगार बनने वाला है, बल्कि इससे देश के विकास को भी एक नई गति मिलेगी।
“कर्तव्य भवन एक विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है”, शब्दों से अलंकृत करते प्रधानमंत्री ने कहा कि इसे गढ़ने वाले हमारे श्रमयोगियों की अथक मेहनत और संकल्प-शक्ति का आज देश साक्षी बना है। विभिन्न मंत्रालयों और विभागों को एक साथ लाकर कर्तव्य भवन में शिफ्ट किया जाएगा जिससे दक्षता, नवाचार और सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। इसमें गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, एमएसएमई मंत्रालय, कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी), पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय/विभाग और प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (पीएसए) के कार्यालय होंगे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस भवन के निर्माण में पर्यावरण संरक्षण का पूरा ध्यान रखा गया है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कर्तव्य भवन के प्रांगण में एक पौधा भी लगाया। सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत केंद्रीय मंत्रालयों व विभागों के लिए ऐसे कुल 10 भवनों का निर्माण होना है। इनमें से कर्तव्य भवन-3 बनकर तैयार हो गया है।
केंद्र सरकार के सभी 51 मंत्रालयों को 10 साझा केंद्रीय सचिवालय भवनों में एक साथ लाना संसाधनों की आवाजाही को सुचारू बनाएगा, जिसके परिणामस्वरूप अधिक कुशल और समन्वित प्रशासन होगा। अनुकूल और मॉड्यूलर फ्लोर डिजाइनों के साथ संयुक्त नजदीकी समन्वय विभागीय लेआउट सरकार को अधिक दक्षता और बढ़ी हुई उत्पादकता के साथ काम करने के लिए सशक्त बनाएगा। कार्यालय के विस्तार से मौजूदा क्षमता और बढ़ती मांग के बीच के अंतर को पाटा जा सकेगा और उत्पादकता को बढ़ावा देने वाले अत्याधुनिक कार्य वातावरण की शुरुआत की जा सकेगी। ये सुविधाएं बुनियादी ढांचे और प्रौद्योगिकी में वैश्विक मानदंडों को पूरा करेंगी। पुनर्विकास परियोजना हरित बुनियादी ढांचे और स्वच्छ परिवहन के माध्यम से स्थिरता को आगे बढ़ाएगी, सरकारी कार्यों में दक्षता और तालमेल बढ़ाएगी।
परियोजना पूरी होने के बाद किराये के तौर पर खर्च होने वाले 1500 करोड़ रुपये की बचत होगी। यह प्रशासन को सुव्यवस्थित करने और कुशल शासन का समर्थन करने के लिए डिज़ाइन की गई कई नियोजित सामान्य केंद्रीय सचिवालय इमारतों में से पहली है। यह लगभग 1.5 लाख वर्ग मीटर का एक आधुनिक कार्यालय परिसर होगा, जो दो बेसमेंट और सात मंजिलों में फैला होगा। इससे विभिन्न बिजली बचत और पुनर्चक्रण सुविधाओं के साथ स्थिरता में मदद मिलेगी, जिसके परिणामस्वरूप 30 प्रतिशत ऊर्जा की बचत होगी और वार्षिक 5 लाख 34 हजार यूनिट से अधिक बिजली का उत्पादन भी होगा।
प्रधानमंत्री ने कई पोस्टों में कहा; “कर्तव्य पथ पर कर्तव्य भवन जन-जन की सेवा के प्रति हमारे अटूट संकल्प और निरंतर प्रयास का प्रतीक है। ना केवल हमारे सदस्यों और लोगों तक की शिक्षा को तेजी से मित्रता में शामिल करने वाला है, बल्कि इससे देश के विकास को भी एक नई गति मिलेगी। मित्रता के सिद्धांत बने इस भवन को राष्ट्र को समर्पित कर बहुत ही गौरवान्वित हूं।”
भारत सरकार इतिहास की छाया में, भविष्य के सपनों के साथ नई दिल्ली के हृदय में एक साहसिक नया अध्याय रच रही है। सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना – ईंटों और इमारतों से कहीं बढ़कर, भारत की आत्मा का प्रतीक है। यह प्रशासनिक ढाँचों को एकीकृत करने और आपस में घनिष्ठ रूप से जुड़े, आधुनिक और उद्देश्यपूर्ण कार्यालयों के माध्यम से प्रशासनिक उत्पादकता में सुधार लाने की एक परियोजना है। सेंट्रल विस्टा कॉम्प्लेक्स भारत के प्रशासन का केंद्र होने के साथ-साथ एक प्रसिद्ध पर्यटक आकर्षण भी है जहाँ प्रमुख राष्ट्रीय त्यौहार और समारोह आयोजित किए जाते हैं। नई संसद, आधुनिक सचिवालय भवनों और हरित सार्वजनिक स्थलों के साथ, यह परियोजना दक्षता और स्थिरता के साथ नवाचार की आकांक्षा रखने वाले एक मज़बूत लोकतंत्र को दर्शाती है।
भारत की स्वतंत्रता के बाद, 1956 और 1968 के बीच उद्योग भवन, निर्माण भवन, शास्त्री भवन, रेल भवन और कृषि भवन सहित केंद्रीय सचिवालय भवनों की एक श्रृंखला का निर्माण किया गया। इन संरचनाओं का विकास केंद्र सरकार के मंत्रालयों के विस्तारित कार्यों को समायोजित करने के लिए कार्यालय स्थान की बढ़ती आवश्यकता को पूरा करने के लिए किया गया था। सेंट्रल विस्टा एवेन्यू, प्रतिष्ठित कर्तव्य पथ और इंडिया गेट के आसपास के हरे-भरे लॉन तक फैला हुआ है। राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ करना एक सार्थक बदलाव का प्रतीक है – सत्ता के प्रतीक से एक ऐसे मार्ग में परिवर्तित होना जो राष्ट्र निर्माण में जनता की भूमिका का उत्सव मनाता है। यह साझा दायित्व और लोकतांत्रिक गौरव को दर्शाता है।
सेंट्रल विस्टा डेवलपमेंट मास्टर प्लान, शासन के लिए उद्देश्य-संचालित, अत्याधुनिक कार्यालय स्थलों का निर्माण करके प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाने का एक परिवर्तनकारी प्रारूप है। इसका उद्देश्य भारत की संसद, कार्यपालिका और उपराष्ट्रपति एन्क्लेव तथा सभी मंत्रालयों के लिए एक एकीकृत केंद्रीय सचिवालय की गतिशील आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु आधुनिक, अनुकूलनीय और पर्यावरण-अनुकूल बुनियादी ढाँचा तैयार करना है। यह योजना कर्त्तव्य पथ को एक जन-केंद्रित नागरिक स्थल के रूप में पुनर्जीवित भी करती है। यह पहल शासन को सुव्यवस्थित करने के अलावा, पर्यावरणीय स्थिरता —सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को प्रोत्साहित करना, पैदल यात्रियों की पहुँच को प्राथमिकता देना और पुनर्विकसित क्षेत्रों में हरित क्षेत्र का विस्तार करने पर भी बल देती है। इन प्रयासों का उद्देश्य देश के लिए भविष्य के लिए तैयार प्रशासनिक ढांचे को आकार देते हुए कार्बन उत्सर्जन को कम करना है।
सेंट्रल विस्टा एवेन्यू जो प्रतिष्ठित कर्तव्य पथ और इंडिया गेट के आसपास के हरे-भरे लॉन में फैला हुआ है, उसमें समय के साथ कई बदलाव देखे गए हैं। हालांकि, इसने अपनी मुख्य पहचान को संरक्षित रखा है और राष्ट्रीय और सार्वजनिक आयोजनों की मेजबानी भी जारी है, यह एक बहुमूल्य नागरिक स्थान के रूप में स्थित है और पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है। नतीजतन, इसका पुनर्विकास सेंट्रल विस्टा मास्टर प्लान का एक प्रमुख केंद्र बन गया। कर्तव्य पथ के किनारे पक्के रास्ते से लेकर लॉन में पथ और पुनर्विकसित नहरों तक, कार्य एक वर्ष से भी कम समय में पूरा हो गया। सार्वजनिक पहुंच और नागरिक सुविधाओं को बढ़ाने के लिए 85.3 हेक्टेयर क्षेत्र का पुनर्विकास किया गया है। ग्रीन कवर में 4,087 पेड़ हैं, जो पहले 3,890 पेड़ थे। 16. 5 किलोमीटर लंबे पैदल मार्ग अब नए सिरे से तैयार की गई नहरों और लॉन के साथ पैदल चलने वालों की आवाजाही को सुगम बनाते हैं।
राष्ट्रीय संग्रहालय, आईजीएनसीए, सुधार किए गए कर्तव्य पथ, इंडिया गेट प्लाजा और लॉन सहित सेंट्रल विस्टा में बेहतर सार्वजनिक स्थान। उत्तर और दक्षिण ब्लॉकों के भीतर लगभग 80,000 वर्ग मीटर सरकारी स्थान को सार्वजनिक क्षेत्रों में पुनर्निर्मित किया जाएगा क्योंकि ये ऐतिहासिक इमारतें एक राष्ट्रीय संग्रहालय परिसर में बदल जाएंगी। पुनर्निर्मित एवेन्यू में सामाजिक समारोहों के लिए निर्दिष्ट क्षेत्र होंगे, जो पर्यटकों को आराम से गतिविधियों का आनंद लेने के लिए स्थलों की पेशकश करेंगे। सभी परियोजनाओं के लिए विस्तृत पर्यावरण प्रभाव आकलन किया गया। सेंट्रल विस्टा परियोजना के निर्माण चरण के दौरान इसके पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए सख्त उपाय किए गए। ये परियोजनाएं सामूहिक रूप से हरित क्षेत्र को बढ़ाएंगी क्योंकि कुल 40,573 पेड़ लगाए जा रहे हैं और किसी भी परियोजना में कोई मौजूदा पेड़ नहीं हटाया गया है। ध्वस्त भवनों से निकलने वाले कचरे का उपचार और पुनर्चक्रण एक समर्पित निर्माण और विध्वंस अपशिष्ट सुविधा में किया जाएगा जिसका उपयोग निर्माण में किया जाएगा।
भवन में सुरक्षित और आईटी-सक्षम कार्यस्थल, स्मार्ट एंट्री सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और कमांड सेंटर, सोलर पैनल, सौर वॉटर हीटर और ई-वाहन चार्जिंग स्टेशन जैसी सुविधाएं हैं। यह पर्यावरण के अनुकूल निर्माण को भी बढ़ावा देता है, जिसमें अपशिष्ट जल का पुन: उपयोग, ठोस कचरा प्रबंधन प्रणाली शामिल हैं। इमारत को ठंडा रखने और बाहरी ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिए इसमें कांच की विशेष खिड़कियां लगाई गई हैं।
शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि अगले महीने तक कर्तव्य भवन-1 और कर्तव्य भवन-2 भी बनकर तैयार जाएंगे। दोनों का काम लगभग अंतिम चरण में है। प्रस्तावित अन्य सात भवन भी अप्रैल 2027 तक बनकर तैयार हो जाएंगे। इस परियोजना पर करीब 1000 करोड़ रुपये खर्च होंगे। मंत्रालयों के लिए बनाए जा रहे इन भवनों में तकनीक, सुरक्षा व पर्यावरण अनुकूलता का पूरा ख्याल रखा गया है। खास बात यह है कि केंद्रीय मंत्रालयों व विभागों के लिए नवनिर्मित इन नए भवनों को पहले कामन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट (सीसीएस) नाम दिया गया था। इन कर्तव्य भवनों को मेट्रो लाइन से जोड़ने के लिए इंद्रप्रस्थ मेट्रो स्टेशन से एक नई लाइन बनाने का प्रस्ताव किया गया है।
कर्तव्य भवनों के तैयार होते ही नार्थ और साउथ ब्लाक में मौजूद सभी मंत्रालयों को वहां से स्थानांतरित कर दिया जाएगा। दोनों ही ब्लाक को खाली कराकर इनमें भारत संग्रहालय बनाया जाएगा। इस दौरान ढांचे के साथ किसी तरह का छेड़छाड़ किए बगैर इसमें महाभारत काल से लेकर देश के आज तक के इतिहास, कला व संस्कृति आदि को प्रदर्शित किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने बताया कि सेंट्रल विस्टा परियोजना का यह काम दिसंबर 2031 तक पूरा कर लिया जाएगा। इनमें ही प्रधानमंत्री के लिए नए आवास व कार्यालय भी बनाए जा रहे है। इसके लिए भी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।


















