‘लॉकडाउन’ ने बच्चों को ‘पापाओं’ से चारो-पहर मिला दिया, ‘मम्मी’ तो ”खुश” हैं ही – थैंक्यू मोदीजी ! तुस्सी ग्रेट हो !!

कोई रोड पर नहीं निकलो 
कोई रोड पर नहीं निकलो 

आजकल भारत के बच्चे, खासकर जो नासमझ हैं और बाहरी-हवा से मष्तिष्क प्रदूषित नहीं हुआ है, काफी खुश हैं । जानते हैं क्यों? एक तो अपने-अपने “पापाओं” से नित्य चारो-पहर साक्षात्कार हो रहा है और दूसरा – स्कूल नहीं जाना पड़ रहा है। यदि देखा जाय तो इस भाग-दौड़ के जीवन में, जहाँ “पिता की घरों में उपस्थिति”, वह भी “निट्ठल्ले” होकर; 21वीं सदी के इतिहास के प्रस्तावना जैसा है। 

बच्चे और बच्चे की माँ आजकल देश के युवा प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदीजी को तहेदिल से, ह्रदय के अन्तः कोने से धन्यवाद अर्पित कर रहे हैं। लेकिन कभी-कभी चेहरे पर थकावट होने के कारण अपने-अपने इष्टदेव से प्रार्थना भी कर रहीं हैं की हे भगवान् !! “को” “रोना” को भगाओ तभी राष्ट्र बचेगा और “हम” भी। 

कोरोना वायरस से भले ही देश में भय का वातावरण व्याप्त हो, देश के बच्चे इसलिए प्रसन्न हैं कि उन्हें सुवह में, दोपहर में, शाम में, रात में – चारो-पहर पिता के साथ खेलने का अवसर मिल रहा है और पिता यह कहकर नकार नहीं सकते की उन्हें कार्यालय जाना है या छुट्टी नहीं है। सामने खड़ी बच्चे की माँ मन-ही-मन मुस्कुराती रहती है आया ऊंट पहाड़ के नीचे। अब तो मामुमात होगा “बच्चों को पालना बच्चों का खेल नहीं है।”  

प्रधान मंत्री द्वारा, विभिन्न प्रदेशों के मुख्य मंत्रियों के आह्वान पर कोरोना खिलाफ देश में/ राज्यों में पूर्ण रूपेण लॉक डाउन बना रहे और इस भयंकर बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सके, इसलिए लगभग सभी माता-पिता अपने-अपने घरों में, छतों पर उपलब्ध खाली स्थानों को खेल का मैदान बना लिए हैं। घरों के छतों पर क्या बच्चे-क्या जवान-क्या युवतियां, क्या बूढ़े; सभी विभिन्न प्रकार के खेल खेलकर समय निकाल रहे हैं। कहीं-कहीं तो सास-बहुओं को भी एक-साथ मुस्कुराते देखते मिलते हैं। वजह भी हैं : कोई विकल्प नहीं है और चेहरों पर कोई सिकन भी नहीं क्योंकि प्रधान मंत्री का  साथ देना है और कोरोना पर विजय प्राप्त करना है । 

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अभी-अभी जिन कन्याओं की, पुरुषों की शादी हुयी है उन नयी-नवेली दुल्हनों को, बेटियों, बेटों को घर की वृद्ध महिलाएं, माताएं “हिदायत” भी देती सुनी जा रही हैं की “दोनों दूरियां बनाये रखो” – कुछ भी “कोरो” “ना”, वायरस फ़ैल सकता  है।  

भारत के बच्चे प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी को ह्रदय से बधाई दे रहे हैं भले ही उन्हें ऐतिहासिक फैसला लेकर सम्पूर्ण राष्ट्र में किसी भी प्रकार की गतिविधियों पर ताला लगा दिए हों।  

कोरोना वायरस (Coronavirus) के फैलते संक्रमण के बीच सरकार ने देश के 80 जिलों में लॉकडाउन लगा दिया है, जहां इसका खतरा महसूस हो रहा है। लॉकडाउन के साथ ही आम लोगों पर कई तरह की पाबंदियां लग गयी है। घर से बाहर निकलने पर भी रोक लगी है।  यह एक आपातकालीन व्यवस्था है जो सामान्य तौर पर लोगों को एक निश्चित इलाके में रोकने के लिए इस्तेमाल की जाती है। फुल लॉकडाउन की स्थिति में लोग अपने घरों से बिल्कुल बाहर नहीं निकल सकते जब तक कि कोई बेहद वाजिब वजह न हो या फिर कोई मेडिकल इमरजेंसी नहीं हो।

लॉकडाउन में सरकार ये चाहती है कि लोग एक जगह से दूसरी जगह आवाजाही नहीं करें। चूंकि ये लॉकडाउन कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए घोषित किया गया है, लिहाजा सरकार कतई नहीं चाहती कि कहीं भी लोगों का जमावड़ा और बाहर निकलने पर आप संक्रमण के शिकार हो जाए. बल्कि सरकार इसके जरिए आपको महफूज रखने का काम करती है –  इस पर अमल करना जरूरी है। 

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