‘लपकने’ की जल्दवाजी नहीं करें, ‘क्रॉस-चेक’ करना जरुरी है, वरना ‘आपका’ प्रदीप ‘हरियाणा’ का हो जायेगा 

संघ लोक सेवा आयोग कार्यालय - भारतीय युवक-युवतियों का भाग्य-निर्माता 
संघ लोक सेवा आयोग कार्यालय - भारतीय युवक-युवतियों का भाग्य-निर्माता 

संघ लोक सेवा आयोग द्वारा संचालित भारतीय प्रशासनिक सेवा का परिणाम कल घोषित हुआ। लेकिन सोसल मीडिया पर जिस तरह लोग बिहार के प्रदीप सिंह को चिपकाने  लगे “टॉपर” के रूप में, चौदह-वर्ष पुरानी एक घटना तरोताज़ा हो गयी – क्योंकि जबरदस्ती के “खरखाँहीं” लूटने में बिहारी बंधू-बांधव तो अब्बल है हीं। 

बिहार में लोगों को “लपकने” की गजबे आदत है, बिना “क्रॉस-चेक” किये, चाहे सूचना अथवा संवाद कितना भी संवेदनशील क्यों न हो ।  कल संघ लोक सेवा आयोग द्वारा संचालित  भारतीय प्रशासनिक सेवा परीक्षा परिणाम एक ज्वलंत उदाहरण है। इसे देखकर 2006 की बिस्मिल्लाह खान साहेब की घटना याद आ गयी। 

बात सन 2002 की है और खबर निकली थी बनारस के सराय-हरहा से। यहाँ रहते थे भारत रत्न शहनाई उस्ताद बिस्मिल्लाह खान साहेब। जब सम्मानित अटल बिहारी वाजपेयी जी प्रधान मंत्री थे, तब देश के अख़बारों में, टीवी पर खान साहेब से सम्बंधित एक कहानी चली – खान साहेब प्रधान मंत्री से मदद की गुजारिश किये हैं। खान साहेब के लिए एक कार्यक्रम का आयोजन हुआ और उन्हें कुछ मौद्रिक सहायता प्रदान किया गया। मैं उस समय स्टेट्समैन अखबार में विशेष सम्वाददाता था। कार्यक्रम के बाद मौद्रिक सहायता करना और फिर अखबार में सरकार की बाहबाही, हजम नहीं हुआ क्योंकि उस्ताद भारत रत्न से अलंकृत थे। 

खैर, उस्ताद को मैं बहुत बेहतर तरीके से जानता था। मैं एक किताब का  कल्पना किया जिसमें उस्ताद होंगे, उनकी शहनाई होगी, गंगाजी होंगी, बाबा विश्वनाथ होंगे, बिहार का डुमराँव होगा, खान साहेब के मामा होंगे, राज कजरी होगा, राग भैरवी होगा, शादी का मंडप होगा – यानि कैसे गाँव-देहात में घरों से कोई बीस-फीट दूर दरी पर बैठे उस्ताद और शहनाई उठकर-चलकर विश्व के कोने-कोने में पहुंचा, लोगों के लिए कर्णप्रिय हुआ और उस्ताद बिस्मिल्लाह खान “भारत रत्न” बने – का समावेश था, रंगीन-सचित्र किताब। 

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इस किताब को उस्ताद बिस्मिल्लाह खान  अपने 91 वां जन्मदिन पर अपने ही हाथों, अपने ही घर पर 91 किलो का केट काटकर लोकार्पित किया। दिन था 25 मार्च, 2006 – वैसे 21 मार्च को जन्मदिन था, लेकिन बनारस ब्लॉस्ट, जिसमे अनेकानेक लोग मारे गए थे, चार दिन आगे मनाया गया। खान साहेब और वहां उपस्थित गणमान्य व्यक्ति शायद नहीं जानते थे की यह जन्मदिन समारोह उस्ताद के जीवन का अंतिम समारोह है, जिसे बिहार के मिथिलाञ्चल की एक दम्पत्ति आयोजन किये हैं। 

उस दिन उस्ताद मेरी पत्नी श्रीमती नीना झा का हाथ पकड़कर प्रार्थना किये की वह उनकी कुछ िक्षा पूरी कर दें । “आप दरभंगा की बहु हैं” – खान साहेब अपना बचपन भी गुजारे थे दरभंगा में  । खान साहेब इन्डिया गेट पर बजाने की ईक्षा जाहिर , जिसे भारत सरकार का गृह मंत्रालय मेरी पत्नी और मुझे अनुमति दिया था (15 जुलाई, 2006, फिर 9 अगस्त 2006) . खान साहेब की यह भी िक्षा जाहिर किये की उन्हें दरभंगा ले चलो जहाँ राजा साहेब के पोखर में वे उसी तरह स्नान करेंगे, जैसे बचपन में किया  करते थे। यह खबर अख़बारों का हेडलाईन बना। 

बस क्या था – खबर अखबार में क्या छापा, सुवह-सुवह बिना शौचालय गए मिथिला विश्वविद्यालय के अधिकारीगण, झाजी, मिश्रजी, ठाकुरजी, चौधरीजी कुदक गए। चिठ्ठी-पत्री कुलपति को लिख डाले।  रजिस्ट्रार साहेब से मिलने दौड़ पड़े – हम लेने जायेंगे तो हम लेने जायेंगे का नारा मिथिला विश्वविद्यालय में गूंजने लगा। कार्यालय से आवक-जावक यात्रा कोष जारी हो गया।  एक नहीं कई लोग बनारस-यात्रा में शामिल हो गए और पहुँच गए सराय-हरहा उस्ताद को ले जाने। लेकिन उस्ताद को जब मालूमात हुआ तो वे कहे की यह बात तो आपसे नहीं हुयी थी, वह तो उस किताब की सह-लेखिका है, जो दरभंगा की बहु भी है। वह ले जाएगी  मुझे। अगर आप ले जाना चाहते हैं तो “मुद्रा लगेगा”, मैं शहनाई भी बजाऊंगा। 

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फिर क्या था – मँगनी के चन्दन लागब रघुनन्दन। सभी वापस आये और फिर स्थानीय मीडिया में चिचिया गए की को लेने गए थे लेकिन वे दरभंगा आने के लिए पैसा मांगे। यानि न तो स्थानीय अखबार वाले क्रॉस-चेक किये और अधिकारीगण तो पांच शब्द निकालकर, जो उनके हितकारी था, शेष को डकार गए। 

कल, भी कुछ ऐसा ही हुआ – समाचार का क्रॉस-चेक नहीं हुआ और फेसबुक पर बिहारी भाई लोग, चाहे पटना में रहते हों या दरभंगा में या नोयडा में या बंगलोर में खटाखट बिहारी प्रदीप सिंह को टॉप करा दिए। संघ लोक सेव आयोग द्वारा संचालित भारतीय प्रशासनिक सेवा परीक्षा परिणाम प्रकाशित में दो नाम एक ही है – प्रदीप सिंह।  श्री प्रदीप सिंह का नाम सूची में सबसे ऊपर है, यानि “टॉप” किये। बस बिहारी भाईलोग “लपक लिए” और “बिहारी प्रदीप सिंह को टॉप करा दिया” – बिना जांच-पड़ताल किये, क्रॉस-चेक किये। जबकि टॉपर प्रदीप सिंह सोनीपत, हरियाणा के हैं।  अरे भैय्या !! इतना उताबलापन अच्छा नहीं है – अगर इतनी ही तपरता से आप इम्तिहान दिए होते तो आप भी अब्बल आये होते। 

बहरहाल, यूपीएससी ने कुल 927 रिक्तियों के लिए कुल 839 उम्मीदवारों को नियुक्ति के लिए अनुशंसा की है। सरकार द्वारा घोषित कुल 927 रिक्तियों में से 180 भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), 24 भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस), 150 भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस), 438 केंद्रीय सेवाएं ग्रुप ‘क’ और 135 ग्रुप ‘ख’ की हैं। 

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