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	<title>rajpath Archives - आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</title>
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		<title>13 फरवरी: वायसराय लॉर्ड इरविन &#8216;दिल्ली को राजधानी&#8217; के रूप में और नरेंद्र मोदी &#8216;सेवा तीर्थ&#8217; को &#8216;प्रधानमंत्री कार्यालय&#8217; के रूप में उद्घाटन किये</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 17 Feb 2026 11:25:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>विजय चौक (नई दिल्ली) : आज से 115-साल पहले 12 दिसंबर, 1911 को दिल्ली दरबार के दौरान किंग जॉर्ज V ने नई दिल्ली को ब्रिटिश इंडिया की राजधानी घोषित किया था। प्रशासनिक दक्षता को बेहतर बनाने और राजनीतिक माहौल को प्रभावकारी तरीके से प्रबंधन करने के लिए अविभाजित भारत की राजधानी को आधिकारिक रूप से कलकत्ता से दिल्ली [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/february-13-viceroy-lord-irwin-inaugurates-delhi-and-narendra-modi-inaugurates-seva-tirtha">13 फरवरी: वायसराय लॉर्ड इरविन &#8216;दिल्ली को राजधानी&#8217; के रूप में और नरेंद्र मोदी &#8216;सेवा तीर्थ&#8217; को &#8216;प्रधानमंत्री कार्यालय&#8217; के रूप में उद्घाटन किये</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>विजय चौक (नई दिल्ली) : आज से 115-साल पहले 12 दिसंबर, 1911 को दिल्ली दरबार के दौरान किंग जॉर्ज V ने नई दिल्ली को ब्रिटिश इंडिया की राजधानी घोषित किया था। प्रशासनिक दक्षता को बेहतर बनाने और राजनीतिक माहौल को प्रभावकारी तरीके से प्रबंधन करने के लिए अविभाजित भारत की राजधानी को आधिकारिक रूप से कलकत्ता से दिल्ली बदल दिया था। करीब 20 साल बाद 13 फरवरी, 1931 को वायसराय लॉर्ड इरविन ने नए शहर के रूप में दिल्ली को अविभाजित भारत का राजधानी के रूप में उद्घाटन किया था। इसी दिन, यानी 13 फरवरी को ही, लेकिन साल 1879 में महत्व स्वतंत्रता सेनानी सरोजनी नायडू का जन्म हुआ था। 13 फरवरी, 2011 को यूनेस्को ने अलग-अलग समुदायों के बीच जानकारी पहुँचाने, बोलने की आज़ादी और संवाद की कमी को पूरा करने में रेडियो की भूमिका का जश्न मनाने का ऐलान किया जिसे विश्व रेडियो दिवस के रूप में हम मनाते हैं। </strong></p>
<blockquote><p>और 13 फरवरी 2026 को भारत के 15वें प्रधानमंत्री &#8216;प्रधानमंत्री कार्यालय&#8217; के नाम को &#8216;निरस्त&#8217; कर रायसीना हिल स्थित साउथ ब्लॉक से नीचे आकर नए &#8216;सेवा तीर्थ&#8217; में प्रवेश लिए। प्रधानमंत्री का नया कार्यालय को अब &#8216;सेवातीर्थ&#8217; के नाम से जाना जाएगा। साउथ और नॉर्थ ब्लॉक का निर्माण अंग्रेजों द्वारा भारत को गुलामी की बेड़ियों में जकड़े रहने के लिए हुआ था। 1947 में भारत को गुलामी से तो मुक्ति मिली लेकिन इन भवनों को तत्कालीन सरकार द्वारा अपने कार्यों के निष्पादन हेतु बनाए रखा गया। स्वतंत्रता के बाद से ही प्रधानमंत्री कार्यालय साउथ ब्लॉक के इस भवन से कार्य करता रहा है। ज्ञातव्य हो कि &#8216;प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ)&#8217; को असल में 1977 तक प्रधानमंत्री सचिवालय कहा जाता था, जब मोरारजी देसाई के प्रधानमंत्री रहने के दौरान इसका नाम बदल दिया गया। अब यह सेवा तीर्थ के रूप में जाना जायेगा।</p></blockquote>
<figure id="attachment_7371" aria-describedby="caption-attachment-7371" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/A.jpg"><img fetchpriority="high" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/A.jpg" alt="" width="2200" height="1402" class="size-full wp-image-7371" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/A.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/A-300x191.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/A-1024x653.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/A-768x489.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/A-1536x979.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/A-2048x1305.jpg 2048w" sizes="(max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-7371" class="wp-caption-text">13 फरवरी, 2026 को नई दिल्ली में सेवा तीर्थ के उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री</figcaption></figure>
<p>विगत दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन-1 एवं 2 के उद्घाटन करते कहा कि &#8220;आज सभी एक नए इतिहास के निर्माण के साक्षी बन रहे हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि विक्रम संवत 2082, फाल्गुन कृष्ण पक्ष की विजया एकादशी, 24 माघ, शक संवत 1947, जो वर्तमान कैलेंडर के अनुसार 13 फरवरी 2026 है, यह दिन भारत की विकास यात्रा में एक नई शुरुआत का गवाह बना है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शास्त्रों में विजया एकादशी का अत्यंत महत्व है, क्योंकि इस दिन लिया गया संकल्प सदैव विजय की ओर ले जाता है। मोदी ने कहा कि आज विकसित भारत के संकल्प के साथ, हम सभी सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन में प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इस लक्ष्य में विजय प्राप्त करने के लिए दैवीय आशीर्वाद हमारे साथ है। प्रधानमंत्री ने सेवा तीर्थ और इन नए भवनों के लिए पीएमओ टीम, कैबिनेट सचिवालय और विभिन्न विभागों के कर्मचारियों सहित सभी को बधाई दी। उन्होंने इनके निर्माण से जुड़े सभी इंजीनियरों और श्रमिक साथियों के प्रति अपना आभार व्यक्त किया।</p>
<p><strong>सेवा तीर्थ परिसर सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का ही एक हिस्सा है और इसके निर्माण में करीब 1,200 करोड़ रुपए की लागत आई है। इसका निर्माण साल 2019 में शुरू हुआ। सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत बनी संसद की नई इमारत का उद्घाटन साल 2023 में और इसके बाद कॉमन केंद्रीय सचिवालय इमारतों का उद्घाटन 2025 में हुआ। सेवा तीर्थ लाल एवं पीले रंग के मिश्रण से युक्त एक तरह का एग्जीक्यूटिव इंक्लेव है और इसे खुले परिसर में बनाया गया है। इसमें भारतीय सभ्यता एवं आधुनिक डिजाइन दोनों का सम्मिश्रण है। साउथ ब्लाक से वित्त, रक्षा, स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, कॉरपोरेट अफेयर, शिक्षा, संस्कृति, कानून एवं न्याय, सूचना एवं प्रसारण, कृषि, किसान कल्याण, रसायन एवं आदिवासी मंत्रालय कर्तव्य भवन 1 एवं दो में शिफ्ट होंगे। </strong></p>
<p>आजादी के बाद से प्रधानमंत्री कार्यालय ऐतिहासिक साउथ ब्लॉक से चलता रहा है। अब तक यह देश के बड़े फैसलों का गवाह बना। इस दौर में इसने कई प्रधानमंत्री देखे। देश को दशा और दिशा लेने वाले फैसले यहीं लिए जाते रहे। साउथ ब्लॉक से पीएमओ का शिफ्ट होना उस औपनिवेशक अतीत से दूर जाना है, जिसकी परछाई से आज भी भारतीय शासन व्यवस्था पूरी तरह से मुक्ति नहीं हो पाई है। कहते हैं कि  यह &#8216;सेवा तीर्थ&#8217; बदले हुए भारत की आकांक्षाओं और सपनों का एक तरह से मूर्त रूप है। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/C.jpg"><img decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/C.jpg" alt="" width="2200" height="1328" class="aligncenter size-full wp-image-7372" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/C.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/C-300x181.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/C-1024x618.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/C-768x464.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/C-1536x927.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/C-2048x1236.jpg 2048w" sizes="(max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a></p>
<p>प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि स्वतंत्रता के पश्चात देश के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय और नीतियां साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक जैसे भवनों से बनाई गईं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इन इमारतों का निर्माण ब्रिटिश साम्राज्य के प्रतीकों के रूप में किया गया था, जिसका उद्देश्य भारत को सदियों तक गुलामी की बेड़ियों में जकड़े रखना था। उन्होंने कहा कि कोलकाता कभी देश की राजधानी हुआ करता था, लेकिन 1905 के बंगाल विभाजन के दौरान वह ब्रिटिश विरोधी आंदोलनों का एक सशक्त केंद्र बन गया था। इसी कारण, 1911 में अंग्रेजों ने राजधानी को कोलकाता से दिल्ली स्थानांतरित कर दिया।<br />
 <br />
उन्होंने उल्लेख किया कि इसके पश्चात, औपनिवेशिक शासन की आवश्यकताओं और मानसिकता को ध्यान में रखते हुए नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक का निर्माण शुरू हुआ। जब रायसीना हिल्स पर इन भवनों का उद्घाटन हुआ था, तब तत्कालीन वायसराय ने कहा था कि ये नई संरचनाएँ ब्रिटिश सम्राट की इच्छाओं के अनुरूप बनाई गई हैं—अर्थात, वे गुलाम भारत की धरती पर ब्रिटेन के राजा की सोच को थोपने का एक माध्यम थीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि रायसीना हिल्स का चयन इसलिए किया गया था ताकि ये इमारतें अन्य सभी से ऊपर रहें और कोई भी इनके बराबर खड़ा न हो सके। </p>
<blockquote><p>जबकि, भारत के पूर्व राष्ट्रपति आर. वेंकटरमन ने कहा था कि ‘‘इस पहाड़ी पर प्रासाद दृश्यावली का मुकुट लगती है। मीलों दूर से दिखने वाला यह प्रासाद क्षितिज पर एक ऐसे स्मारक की भांति स्थित है जो बिलकुल अलग प्रतीत होता है। यह इमारतों में एक कंचनजंघा है जिसे दिल्ली की गर्मी की धूल भरी धुंधलाहट तथा इसकी सर्दियों का कोहरा ढक देता है, अनावृत्त कर देता है और पुनः ढक देता है। एक आकर्षक ढांचा जो निकट भी और दूर भी लगता है, यह एकदम नजदीक प्रतीत होता है परंतु आवरण के पीछे छिप जाता है।’’</p></blockquote>
<p>ज्ञातव्य हो कि 12 दिसंबर को 1911 का दिल्ली दरबार किंग जॉर्ज पंचम के राज्याभिषेक के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। दरबार में सबसे महत्त्वपूर्ण घोषणा जिसे लगभग एक लाख लोगों ने सुना, ब्रिटिश भारत की राजधानी कलकत्ता से बदलकर दिल्ली करना था। कलकत्ता को वाणिज्य केंद्र के रूप में जाना जाता था जबकि दूसरी ओर, दिल्ली शक्ति और शान का प्रतीक थी। घोषणा के पश्चात, शाही आवास की खोज अत्यावश्यक हो गई थी। उत्तर का किंग्जवे कैंप पहली पसंद थी। </p>
<figure id="attachment_7373" aria-describedby="caption-attachment-7373" style="width: 2560px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/DSC_8730-scaled.jpg"><img decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/DSC_8730-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1709" class="size-full wp-image-7373" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/DSC_8730-scaled.jpg 2560w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/DSC_8730-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/DSC_8730-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/DSC_8730-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/DSC_8730-1536x1025.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/DSC_8730-2048x1367.jpg 2048w" sizes="(max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></a><figcaption id="caption-attachment-7373" class="wp-caption-text">विजय चौक से नार्थ ब्लॉक, साउथ ब्लॉक। तस्वीर: संजय शर्मा</figcaption></figure>
<p>एक ब्रिटिश वास्तुकार सर एडविन लुट्येन्स को भारत की नई राजधानी की योजना बनाने के लिए चुना गया और वह दिल्ली नगर योजना समिति का भाग थे जिसका कार्य स्थल और उसके नक्शे का निर्माण करना था। सर लुट्येंस और उनके सहयोगी, जो स्वच्छता विशेषज्ञ थे, को उत्तरी क्षेत्र यमुना नदी के समीप होने के कारण बाढ़ के प्रति अधिक संवेदनशील लगा। इस प्रकार, दक्षिणी ओर की रायसीना पहाड़ी, जहां खुलादार और ऊंचा स्थान और बेहतर जल निकासी थी, वायसराय हाऊस के लिए उपयुक्त स्थान प्रतीत हुआ। <br />
अन्य भवनों के अलावे इस ऐतिहासिक राष्ट्रपति भवन का वास्तुकार सर एडविन लुटियंस थे जो 1912-29 में बनाया गया था। महलनुमा घर में चार पंख और एक केंद्रीय खंड है जो 180 फीट (55 मीटर) ऊंचे तांबे के गुंबद से ढका है। इकतीस चौड़ी सीढ़ियां पोर्टिको और दरबार हॉल के मुख्य प्रवेश द्वार की ओर जाती हैं। हॉल एक गोलाकार संगमरमर का प्रांगण है, जो लगभग 75 फीट (23 मीटर) चौड़ा है। इस भवन में 300 से अधिक कमरे, कार्यालय, रसोई, एक डाकघर और आंगन हैं। घर 600 फीट (183 मीटर) से अधिक लंबा है और 4.5 एकड़ (1.8 हेक्टेयर) क्षेत्र में फैला है। </p>
<p>इतिहासकार कहते हैं कि इसके निर्माण के समय चुने गए स्थान की चट्टानी पहाडि़यों को विस्फोट से तोड़ा गया तथा वायसराय के आवास और अन्य कार्यालयी भवनों के निर्माण के लिए भूमि समतल की गई। इस स्थान पर शिलाओं ने मजबूत नींव के रूप में अतिरिक्त फायदा पहुंचाया। निर्माण सामग्री के लाने ले जाने के लिए इमारतों के चारों ओर विशेष तौर पर एक रेलवे लाइन बिछाई गई। चूंकि नगर की योजना नदी से दूर बनाई गई थी और दक्षिण में कोई नदी नहीं बहती थी इसलिए पानी की सभी जरूरतों के लिए जमीन के भीतर से पम्प द्वारा पानी निकाला गया। इस क्षेत्र की अधिकतर भूमि जयपुर के महाराजा की थी। </p>
<figure id="attachment_7374" aria-describedby="caption-attachment-7374" style="width: 2560px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/DSC_8698-scaled.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/DSC_8698-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1709" class="size-full wp-image-7374" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/DSC_8698-scaled.jpg 2560w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/DSC_8698-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/DSC_8698-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/DSC_8698-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/DSC_8698-1536x1025.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/DSC_8698-2048x1367.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></a><figcaption id="caption-attachment-7374" class="wp-caption-text">सेवाधर्म के स्थानांतरण के बाद विजय चौक । तस्वीर: संजय शर्मा </figcaption></figure>
<p>राष्ट्रपति भवन के अग्रप्रांगण में खड़ा जयपुर स्तंभ दिल्ली को नई राजधानी बनाने की स्मृति में जयपुर के महाराजा, सवाई माधो सिंह ने उपहार में दिया था। इसके निर्माण में सत्रह वर्ष से अधिक समय लगा। लॉर्ड हॉर्डिंग, तत्कालीन गवर्नर जनरल तथा वायसराय जिनके शासन काल में निर्माण कार्य आरंभ हुआ था, चाहते थे कि इमारत चार वर्ष में पूरी हो जाए। परंतु 1928 के शुरू में भी इमारत को अंतिम रूप देना असंभव था। तब तक प्रमुख बाहरी गुंबद बनना शुरू भी नहीं हुआ था। यह विलंब मुख्य रूप से प्रथम विश्व युद्ध के कारण हुआ था। अंतिम शिलान्यास भारत के वायसराय और गवर्नर जनरल लॉर्ड इरविन ने किया और वह 6 अप्रैल, 1929 को नवनिर्मित वायसराय हाउस के प्रथम आवासी बने। मुख्य भवन का निर्माण हारून-अल-रशीद ने किया जबकि अग्रप्रांगण को सुजान सिंह और उनके पुत्र शोभा सिंह ने बनाया। </p>
<p>ऐसा अनुमान है कि इस महलनुमा इमारत के निर्माण में सात सौ मिलियन ईंटें और तीन मिलियन क्यूबिक फुट पत्थर लगा और तकरीबन तेईस हजार श्रमिकों ने काम किया। वायसराय हाऊस के निर्माण की अनुमानित लागत 14 मिलियन रुपए आई। आखिरी पत्थर भारत के वाइसराय और गवर्नर-जनरल लॉर्ड इरविन, और 6 अप्रैल, 1 9 2 9 को नवनिर्मित वाइसराय हाउस के पहले अधिवासर द्वारा रखे गए थे। मुख्य भवन हरान-अल-रशीद ने बनाया था, जबकि फोरकोर्ट द्वारा किया गया था सुजन सिंह और उनके पुत्र सोभा सिंह यह अनुमान लगाया गया है कि सात सौ मिलियन ईंट और तीन लाख क्यूबिक फीट पत्थर इस विशाल संरचना के निर्माण के लिए चले गए थे जिसमें करीब 21 हजार मजदूर काम कर रहे थे। वाइसराय हाउस के निर्माण की अनुमानित लागत रू। 14 मिलियन लगा।<br />
 <br />
<strong>सर एडविन लुट्येंस का मानना था, ‘‘वास्तुशिल्प अन्य किसी कला से कहीं अधिक प्राधिकारी की बौद्धिक प्रगति को प्रस्तुत करता है।’’ लुट्येंस इस भवन के वास्तुशिल्प और अभिकल्पना के बारे में बहुत संजीदा थे तथा प्राचीन यूरोपीय शैली को पसंद करते थे। एच आकार का भवन एक भव्य शैली में विस्तृत भौगोलिक भिन्नताओं को दर्शाता है। आजादी पूर्व अंग्रेजी शासन के दौरान वायसराय हाउस को ब्रिटिश अधिनायकवाद और सार्वभौमिक सत्ता के सबसे बड़े प्रतीक के तौर पर बनाया गया था, जिसमें सम्राट के प्रतिनिधि के तौर पर वायसराय का निवास था। इसलिए इसे वायसराय हाउस कहा जाता था। 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता हासिल होने के बाद इसे गवर्नमेंट हाउस कहा जाने लगा, जिसमें पहले भारतीय गवर्नर जनरल के तौर पर 21 जून 1948 को चक्रवर्ती राजगोपालाचारी यानी राजा जी का प्रवेश हुआ। </strong></p>
<figure id="attachment_7375" aria-describedby="caption-attachment-7375" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/PMO.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/PMO.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-7375" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/PMO.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/PMO-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/PMO-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/PMO-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/PMO-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-7375" class="wp-caption-text">रायसीना हिल पर कल के प्रधानमंत्री कार्यालय के बाहर: तस्वीर: संजय शर्मा</figcaption></figure>
<p>भारतीय संविधान के लागू होने के बाद 26 जनवरी 1950 से ये राष्ट्रपति भवन के तौर पर जाना गया, राजेंद्र प्रसाद पहले राष्ट्रपति के तौर पर इसमें करीब सवा बारह वर्षों तक रहे। राजेंद्र बाबू के बाद एक के बाद एक तमाम राष्ट्रपतियों का निवास स्थल रहा। राजाजी के समय से ही देश के सर्वोच्च संवैधानिक आसन पर बैठने वाले सभी सोलह लोगों ने वायसराय के इस्तेमाल के लिए बने कमरों का कभी इस्तेमाल नहीं किया, बल्कि उसे गेस्ट हाउस में तब्दील कर अपेक्षाकृत छोटे कमरों में निवास किया। द्रौपदी मुर्मू भी उसी परंपरा का पालन कर रही हैं। वैसे प्रधान मंत्री ने विगत शुक्रवार को कहा भी कि राष्ट्रपति भवन परिसर में अनेकानेक परिवर्तन किए गए हैं। खैर। </p>
<p>प्रधानमंत्री का कहना है कि साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक का निर्माण औपनिवेशिक मानसिकता को लागू करने के लिए किया गया था, वहीं आज सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन भारत के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए बनाए गए हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यहाँ लिए जाने वाले निर्णय अब किसी सम्राट की सोच को प्रतिबिंबित नहीं करेंगे, बल्कि 140 करोड़ नागरिकों की अपेक्षाओं को आगे बढ़ाने की नींव बनेंगे। इसी भावना के साथ, प्रधानमंत्री ने सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन को भारत की जनता को समर्पित किया। </p>
<figure id="attachment_7376" aria-describedby="caption-attachment-7376" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/D.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/D.jpg" alt="" width="2200" height="1389" class="size-full wp-image-7376" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/D.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/D-300x189.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/D-1024x647.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/D-768x485.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/D-1536x970.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/D-2048x1293.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-7376" class="wp-caption-text">13 फरवरी, 2026 को नई दिल्ली में सेवा तीर्थ के उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री</figcaption></figure>
<p>ज्ञातव्य हो कि देश की आधुनिक राजधानी नई दिल्ली के बीचो-बीच बना भव्य रायसीना हिल्स भारत की राजनीति की दशा और दिशा तय करने वाली राजधानी के इस हिस्से से कई इतिहास जड़े हुए हैं। रायसीना हिल्स परिसर में इमारतों को बनाने के लिए रायसीना गांव के 300 परिवारों की जमीनों का अधिग्रहण किया गया था और करीब 4000 एकड़ जमीन पर इमारतें बनाई गईं। इमारतों को बनाने के लिए 4 साल का समय निर्धारित किया गया था। लेकिन विश्‍वयुद्ध के चलते इसे बनाने में लगभग 20 साल लग गए। भारत की राजधानी कलकत्‍ता (अब कोलकाता) से दिल्‍ली स्‍थानांतरित करने के लिए रायसीना हिल्‍स के बाकी के इलाके का अधिग्रहण किया गया और नए प्रशासनिक भवन बनाए गए, जिनमें नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक भी शामिल है।</p>
<p>नार्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक की इमारतें दिल्ली के इतिहास का अहम हिस्सा हैं। नॉर्थ और साउथ ब्लॉक की सचिवालय भवन  गुलाबी और हल्के पीले सैंडस्टोन से बनी हैं। यह स्ट्रक्चर उत्तर और दक्षिण दोनों तरफ से सिमेट्रिकल है, जो राजपथ के साथ बना है। इसे राष्ट्रपति भवन जैसे ही मटीरियल से बनाया गया है, राजस्थान से मंगाए गए लाल और क्रीम धौलपुर सैंडस्टोन से। हर ब्लॉक में चार मंज़िलें हैं और अंदर के आंगन के चारों ओर लगभग 1000 कमरे बने हैं। दोनों ब्लॉक में चौड़े हॉलवे और पैसेज भी हैं, जो उनके फॉर्म से वेंटिलेशन को बढ़ावा देते हैं, और ऊपर गुंबदों से ढके हुए हैं।</p>
<p>बिल्डिंग की बनावट मुगल और राजपूताना स्टाइल की झलक देती है। दोनों इमारतें पत्थर की स्क्रीन से अलंकृत हैं जिन्हें &#8216;जाली&#8217; के रूप में जाना जाता है। इमारतों को छत के साथ तिरछा प्रदान किया गया है जो इमारत की कलाकृति को गर्मी और मानसून की बौछारों से आश्रय देता है। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका की सरकारों ने चार डोमिनियन स्तंभ दान किए जो ग्रेट कोर्ट के भीतर खड़े हैं। कोर्ट के केंद्र को लाल बलुआ पत्थर के जयपुर स्तंभ से सुशोभित किया गया है, जिसमें सफेद अंडे, कांस्य कमल और भारत के छह-नुकीले कांच के सितारे की संरचनाएं हैं।</p>
<figure id="attachment_7377" aria-describedby="caption-attachment-7377" style="width: 2048px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/2.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/2.jpg" alt="" width="2048" height="1536" class="size-full wp-image-7377" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/2.jpg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/2-300x225.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/2-1024x768.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/2-768x576.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/2-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2048px) 100vw, 2048px" /></a><figcaption id="caption-attachment-7377" class="wp-caption-text">रायसीना हिल और वहां निर्माणाधीन भवन।  तस्वीर : राष्ट्रपति भवन पुरालेख से</figcaption></figure>
<p><strong>अगस्त 1947 में जब आज़ादी पास आ रही थी, तो हर्बर्ट बेकर के डिज़ाइन किए हुए साउथ और नॉर्थ ब्लॉक की लाइटें देर रात तक जलती रहती थीं। प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने आज़ादी और बंटवारे की प्रक्रिया को आखिरी रूप देने के लिए अपने साउथ ब्लॉक ऑफिस में अपने स्टाफ के साथ चौबीसों घंटे काम किया, जबकि गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने नॉर्थ ब्लॉक में 562 से ज़्यादा रियासतों को भारतीय संघ में आसानी से मिलाने के लिए मेहनत की। अपनी मशहूर किताब &#8216;फ्रीडम एट मिडनाइट&#8217; में, लैरी कॉलिन्स और डोमिनिक लैपिएरे ने दो सेक्रेटेरिएट बिल्डिंग के अंदर उन दिनों की इंटेंसिटी को दिखाया है।</strong></p>
<p>बहरहाल, विगत शुक्रवार को मोदी ने उल्लेख किया कि साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक में जगह की कमी और सीमित सुविधाएं थीं साथ ही, लगभग सौ साल पुराने होने के कारण वे भीतर से जर्जर हो रहे थे और कई अन्य चुनौतियों का सामना कर रहे थे। राष्ट्र को इन चुनौतियों के बारे में निरंतर अवगत कराना महत्वपूर्ण है। उन्होंने ध्यान दिलाया कि स्वतंत्रता के दशकों बाद भी, भारत सरकार के कई मंत्रालय दिल्ली में 50 से अधिक अलग-अलग स्थानों से कार्य कर रहे थे। उन्होंने रेखांकित किया कि हर साल इन मंत्रालयों के भवनों के किराए पर ₹1,500 करोड़ खर्च किए जा रहे थे, जबकि कार्यालयों के बीच आवाजाही करने वाले 8,000 से 10,000 कर्मचारियों के लिए दैनिक लॉजिस्टिक लागत भी वहन करनी पड़ती थी। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन के निर्माण से इन खर्चों में कमी आएगी और कर्मचारियों के समय की बचत होगी।</p>
<p><em>प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया कि इस परिवर्तन के बीच, पुराने भवनों में बिताए गए वर्षों की स्मृतियाँ सदैव शेष रहेंगी, क्योंकि वहीं से देश को नई दिशा देने वाले और सुधारों की शुरुआत करने वाले कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए थे। उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि वे परिसर भारत के इतिहास का एक अमर हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि &#8220;इसी भाव के साथ साउथ ब्लॉक के उ‌द्घाटन के करीब 95 वर्षों के बाद, आज 13 फरवरी 2026 को भारत सरकार इन भवनों को खाली कर रही है और &#8216;सेवातीर्थ&#8217; तथा &#8216;कर्तव्य भवनों&#8217; में स्थानांतरित हो रही है। यह प्रतीकात्मक रूप से गुलामी के अतीत से ‘विकसित भारत&#8217; के भविष्य की ओर बढ़ने की ओर देश का एक और कदम है। बीते वर्षों में देश में &#8216;सत्ता भाव&#8217; के बजाय &#8216;सेवा भाव&#8217; की संस्कृति सशक्त हुई है। आज का ये स्थानांतरण, इन संस्कारों को और मजबूती देगा। साथ ही, आज कैबिनेट यह संकल्प भी लेती है कि नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को &#8216;युगे युगीन भारत राष्ट्रीय संग्रहालय&#8217; का हिस्सा बनाया जाए, जो हमारी हजारों वर्ष पुरानी सभ्यता से पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। ये संग्रहालय, हमारी कालातीत और शाश्वत सांस्कृतिक विरासत का उत्सव मनाएगा और हमारे गौरवशाली अतीत को समृद्ध भविष्य से जोड़ेगा।</em></p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Rai.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Rai.jpg" alt="" width="2043" height="1320" class="aligncenter size-full wp-image-7378" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Rai.jpg 2043w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Rai-300x194.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Rai-1024x662.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Rai-768x496.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Rai-1536x992.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2043px) 100vw, 2043px" /></a></p>
<p>आज हमें हर्ष है कि साउथ ब्लॉक के इस कक्ष में अंतिम बार केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक हो रही है। ये केवल स्थान परिवर्तन का क्षण नहीं है, यह इतिहास और भविष्य के संगम के भी पल हैं। इस परिसर ने गुलामी से आज़ादी और फिर स्वतंत्र भारत की अनेक ऐतिहासिक घटनाओं को देखा है, गढ़ा है। इस परिसर ने देश के 16 प्रधानमंत्रियों के नेतृत्व में बनी कैबिनेट के महत्वपूर्ण फैसले होते देखे हैं। इसकी सीढ़ियों पर नेहरू जी से लेकर प्रधानमंत्री श्नरेंद्र मोदी जी तक के पदचिन्ह हैं। इस भवन की सीढ़ियों पर चढ़ते कदमों ने देश को नई ऊंचाई पर पहुंचाने में अहम योगदान दिया है।</p>
<p>बहरहाल, साउथ ब्लॉक के इन कमरों ने विभाजन की विभीषिका भी देखी, युद्ध और आपातकाल की चुनौतियों को भी देखा और शांतिकाल की नीतियों पर भी चिंतन और मनन किया। इन्होंने टाइपराइटर से लेकर डिजिटल गवर्नेंस तक, तकनीक की लंबी छलांग को महसूस किया है। यहाँ बैठकर अधिकारियों की कई पीढ़ियों ने ऐसे फैसले लिए, जिन्होंने भारत को आज़ादी के तुरंत बाद की अनिश्चितता से निकालकर स्थिरता की राह पर आगे बढ़ाया। सबके प्रयासों का परिणाम है कि आर्थिक चुनौतियों और संकटों से निकलकर, आज भारत एक आत्मविश्वासी राष्ट्र बनकर खड़ा हुआ है। आज का भारत दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। भारत आज एक सुरक्षित और सक्षम राष्ट्र के रूप में उभरकर सामने आया है और वैश्विक मंचों पर अपनी स्पष्ट और प्रभावशाली आवाज़ रख रहा है।</p>
<p><strong>ज्ञातव्य हो कि केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को यहां पत्रकारों के समक्ष पारित प्रस्ताव को पढ़ा जिसके मुताबिक यह कदम &#8216;महज स्थान परिवर्तन का क्षण नहीं है, बल्कि अतीत और भविष्य का संगम है।’ उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने भारत पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक का निर्माण किया था, लेकिन आजादी के बाद भी लगातार सरकारों ने इन इमारतों का इस्तेमाल कार्यालय के तौर पर किया। मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय और केंद्रीय सचिवालय के नए भवन ’विकसित भारत’ की दिशा में भारत की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील के पत्थर हैं और ये नागरिक-केंद्रित शासन और राष्ट्रीय प्रगति के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।</strong></p>
<figure id="attachment_7379" aria-describedby="caption-attachment-7379" style="width: 2048px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/3.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/3.jpg" alt="" width="2048" height="1536" class="size-full wp-image-7379" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/3.jpg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/3-300x225.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/3-1024x768.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/3-768x576.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/3-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2048px) 100vw, 2048px" /></a><figcaption id="caption-attachment-7379" class="wp-caption-text">रायसीना हिल और वहां निर्माणाधीन भवन।  तस्वीर : राष्ट्रपति भवन पुरालेख से</figcaption></figure>
<p>रायसीना हिल के दो ब्लॉक – नॉर्थ और साउथ ब्लॉक, जिन्हें राज के दौरान सेक्रेटेरिएट के नाम से जाना जाता था – एक नई ज़िंदगी की तैयारी कर रहे हैं। इन शानदार इमारतों को युगे युगीन भारत म्यूज़ियम में बदल दिया जाएगा, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा म्यूज़ियम माना जा रहा है, जो 155,000 स्क्वायर मीटर में फैला है। यह म्यूज़ियम देश के इतिहास को दिखाएगा, जिसका ये इमारतें लंबे समय से हिस्सा रही हैं। </p>
<p>1910 के दशक में, जब दिल्ली को ब्रिटिश इंडियन एम्पायर की राजधानी घोषित किया गया, तो एडवर्ड लुटियंस को वायसराय हाउस (अब राष्ट्रपति भवन) के साथ पूरे शहर की प्लानिंग करने के लिए अपॉइंट किया गया था। हर्बर्ट बेकर उनकी टीम का हिस्सा थे, और उन्होंने सेक्रेटेरिएट बिल्डिंग का डिज़ाइन तैयार किया था। अपनी-अपनी बिल्डिंग्स के कंस्ट्रक्शन के दौरान लुटियंस और बेकर के बीच अच्छे रिश्ते नहीं थे। लुटियंस चाहते थे कि सेक्रेटेरिएट की ऊंचाई वायसराय हाउस से कम हो, क्योंकि सेक्रेटेरिएट के सामने की पहाड़ी से पूरा व्यू ब्लॉक हो जाता था, लेकिन बेकर चाहते थे कि वे एक ही लेवल पर हों, और आखिरकार उन्होंने अपनी बात पर अड़े रहे।</p>
<p>हर्बर्ट बेकर एक ब्रिटिश आर्किटेक्ट थे जिन्होंने नई दिल्ली में सेक्रेटेरिएट बिल्डिंग का डिज़ाइन तैयार किया था। वे दिल्ली शहर के आर्किटेक्ट एडविन लुटियंस के अंडर सेकंड इन कमांड थे। हर्बर्ट बेकर एक ऐसे आर्किटेक्ट थे जिनका काम साउथ अफ्रीका में उनकी बिल्डिंग्स के ज़रिए सामने आया, जहाँ उन्होंने लगभग दो दशकों तक काम किया। भारत में, सेक्रेटेरिएट के अलावा, उन्होंने पार्लियामेंट मेंबर्स के बंगले और पार्लियामेंट हाउस का भी डिज़ाइन तैयार किया। अफ्रीका में हर्बर्ट बेकर की पिछली बिल्डिंग्स का असर सेक्रेटेरिएट बिल्डिंग में दिखता है। साउथ अफ्रीका के प्रिटोरिया में यूनियन बिल्डिंग और सेक्रेटेरिएट में काफी समानताएं हैं। एक जैसे टावर वाले एक जैसे सिमेट्रिक ब्लॉक और कोलोनेड बालकनी की वजह से, ये बिल्डिंग एक-दूसरे की कॉपी लगती हैं। दोनों बिल्डिंग में सबसे बड़ा अंतर यह है कि सेक्रेटेरिएट में, नॉर्थ और साउथ ब्लॉक अलग-अलग हैं और एक-दूसरे के आमने-सामने हैं, जबकि यूनियन बिल्डिंग में, दोनों ब्लॉक एक सेमी-सर्कुलर ब्रिज से जुड़े हुए हैं।</p>
<figure id="attachment_7380" aria-describedby="caption-attachment-7380" style="width: 2048px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/4.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/4.jpg" alt="" width="2048" height="1536" class="size-full wp-image-7380" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/4.jpg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/4-300x225.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/4-1024x768.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/4-768x576.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/4-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2048px) 100vw, 2048px" /></a><figcaption id="caption-attachment-7380" class="wp-caption-text">रायसीना हिल और वहां निर्माणाधीन भवन।  तस्वीर : राष्ट्रपति भवन पुरालेख से</figcaption></figure>
<p>बिल्डिंग को इंडो-सरसेनिक रिवाइवल आर्किटेक्चरल स्टाइल में डिज़ाइन किया गया है। यह स्टाइल उन आर्किटेक्चरल फीचर्स और एलिमेंट्स को बताता है जिनका इस्तेमाल ब्रिटिश आर्किटेक्ट्स ने भारतीय पब्लिक और सरकारी बिल्डिंग्स में खास तौर पर किया था। यह स्टाइल मुगल आर्किटेक्चर के साथ-साथ हिंदू मंदिर आर्किटेक्चर से भी इंस्पिरेशन लेता है और इसे गोथिक और नियो-क्लासिकल जैसे दूसरे रिवाइवल आर्किटेक्चरल स्टाइल के साथ मिलाता है। बिल्डिंग के मोटिफ्स और मीनारों में मुगल और राजस्थानी फीचर्स भी शामिल हैं। राजस्थानी किलों से इंस्पायर्ड जालियां (छेद वाली खिड़कियां) और झरोखे (डेकोरेटिव खिड़कियां) का इस्तेमाल किया गया है। ये जालियां शहर में लगातार पड़ने वाली धूप में दिलचस्प पैटर्न बनाती हैं और गर्मी और बारिश से भी कुछ राहत देती हैं। छतरियों (छातों) का भी इस्तेमाल किया गया था, जिनका इस्तेमाल पारंपरिक भारतीय गुंबदों में थके हुए यात्रियों को राहत देने के लिए ऐतिहासिक रूप से किया जाता था।</p>
<p><strong>स्ट्रक्चर की दीवारें ज़्यादातर खाली हैं, और ज़्यादातर डेकोरेशन छत पर है। हर बिल्डिंग के बीच में गुंबद हैं और मेन दरवाज़े कनाडा, साउथ अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के डोमिनियन कॉलम में बने हैं। इन कॉलम को हर ब्रिटिश कॉलोनी ने डोमिनियन के बीच दोस्ती और एकता की निशानी के तौर पर पेश किया था। कोलकाता के बाद सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी दूसरी सबसे बड़ी सेंट्रल गवर्नमेंट लाइब्रेरी है। इसमें 8.5 लाख से ज़्यादा किताबें और जर्नल हैं। लाइब्रेरी के रिसोर्स में आज़ादी से पहले की कई लाइब्रेरी और दूसरे पुराने इंस्टीट्यूशन, जैसे इंपीरियल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी का कलेक्शन है। बिल्डिंग से होकर एक रास्ता भी जाता है, जो ऑल इंडिया फाइन आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स सोसाइटी तक जाता है, जिसमें देश की सबसे पुरानी गैलरी में से एक है, जिसमें जाने-माने कलाकारों की कला और मूर्तियां हैं। बिल्डिंग मेट्रो स्टेशन से भी जुड़ी हुई है, जिसकी शहर के अलग-अलग हिस्सों में जाने के लिए कई लाइनें हैं। इस तरह, यह पक्का होता है कि शहर सरकारी बिल्डिंग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।</strong></p>
<p>हिंदुस्तान टाइम्स के एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी के पूर्व कमिश्नर (प्लानिंग) ए.के. जैन, जिन्होंने नई दिल्ली के बनने पर कई किताबें लिखी हैं, कहते हैं, “ब्रिटिश एक शानदार कैपिटल बनाना चाहते थे जो ब्रिटिश एम्पायर का शोपीस बने। बेकर, जिन्होंने सेक्रेटेरिएट बिल्डिंग डिज़ाइन की थी, उन्हें इंडियन आर्किटेक्चर बहुत पसंद था और उन्होंने इसे इंडो-सरसेनिक रिवाइवल स्टाइल में डिज़ाइन किया, जिसमें क्लासिकल यूरोपियन शान को इंडियन मोटिफ्स जैसे लाल और क्रीम रंग के धौलपुर सैंडस्टोन, बड़े डोम, कॉलोनेड वाली बालकनी, प्रोजेक्टिंग छज्जे, बारीक जालियां और झरोखे के साथ मिलाया गया।” इतिहासकार स्वप्ना लिडल ने अपनी किताब &#8216;कॉनॉट प्लेस एंड द मेकिंग ऑफ़ न्यू डेल्ही&#8217; में लिखा है, &#8220;सेक्रेटेरिएट की इमारतें गवर्नमेंट हाउस जितनी ही शानदार थीं। वे ग्रेट प्लेस से शान से ऊपर उठी हुई थीं, जिससे बेकर का बनाया &#8216;शानदार प्लेटफॉर्म&#8217; बन गया था। यह असर पूरी तरह से हुआ, क्योंकि भारतीयों ने जल्द ही सेक्रेटेरिएट को &#8216;रायसीना का किला&#8217; या &#8216;रायसीना का किला&#8217; कहना शुरू कर दिया। यहाँ, भारतीय चीज़ें ज़्यादा साफ़ थीं और लुटियंस के आर्किटेक्चर की तुलना में क्लासिकल वेस्टर्न चीज़ों के साथ कम आसानी से मिली हुई थीं।&#8221;</p>
<figure id="attachment_7382" aria-describedby="caption-attachment-7382" style="width: 2048px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/10.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/10.jpg" alt="" width="2048" height="1536" class="size-full wp-image-7382" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/10.jpg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/10-300x225.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/10-1024x768.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/10-768x576.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/10-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2048px) 100vw, 2048px" /></a><figcaption id="caption-attachment-7382" class="wp-caption-text">रायसीना हिल और वहां निर्माणाधीन भवन।  तस्वीर : राष्ट्रपति भवन पुरालेख से</figcaption></figure>
<p>कंस्ट्रक्शन में टकराव भी हुआ। लुटियंस और बेकर के बीच वायसराय हाउस, जो अब राष्ट्रपति भवन है, के मुकाबले सेक्रेटेरिएट को ऊँचा करने को लेकर मशहूर टकराव हुआ था। जबकि लुटियंस सेक्रेटेरिएट को नीचे चाहते थे, उन्हें डर था कि इससे वायसराय के घर का नज़ारा नहीं दिखेगा। लेकिन, बेकर ने बराबर अहमियत पर ज़ोर दिया – और आखिर में उनकी जीत हुई, जैन ने कहा। बेकर ने साउथ अफ्रीका में अपने पहले के काम से बहुत प्रेरणा ली। प्रिटोरिया में यूनियन बिल्डिंग – जो साउथ अफ़्रीकी सरकार की सीट है – दिल्ली सेक्रेटेरिएट से काफ़ी मिलती-जुलती है, जिसमें एक जैसे टावर वाले एक जैसे सिमेट्रिक ब्लॉक से लेकर इसकी बड़ी खंभों वाली बालकनी तक शामिल हैं। अपनी शान के बावजूद, 10 फरवरी, 1931 को नई दिल्ली के उद्घाटन को कई लोगों ने एक शाही थोपना माना, जैसा कि उस समय के कई अख़बारों की रिपोर्ट में बताया गया था, जिसमें हिसंदुस्तान टाइम्स भी शामिल है।</p>
<blockquote><p>लिडल अपनी किताब में द टाइम्स, लंदन की एक रिपोर्ट का ज़िक्र करती हैं, “यह दिखावा करना बेकार होगा कि समारोह को कोई पॉपुलर सपोर्ट मिला था। इसमें सिर्फ़ वही लोग शामिल हुए जिन्हें ऑफ़िशियल इनविटेशन पर आने दिया गया था। नई दिल्ली के सभी रास्तों पर हथियारबंद पुलिस तैनात थी, और जो कोई भी दोस्ताना या किसी और तरह से प्रदर्शन करना चाहता था, उसे बहुत कम बढ़ावा दिया गया।” उनकी किताब में 13 फरवरी के हिंदुस्तान टाइम्स के एडिटोरियल का भी ज़िक्र है: “कार्यवाही का पूरा माहौल शाही था और ऐसा लगता था कि इसे गोरे आदमी का दबदबा दिखाने के लिए डिज़ाइन किया गया था।”</p></blockquote>
<figure id="attachment_7383" aria-describedby="caption-attachment-7383" style="width: 2560px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Picture-327-scaled.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Picture-327-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1696" class="size-full wp-image-7383" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Picture-327-scaled.jpg 2560w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Picture-327-300x199.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Picture-327-1024x678.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Picture-327-768x509.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Picture-327-1536x1017.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Picture-327-2048x1356.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></a><figcaption id="caption-attachment-7383" class="wp-caption-text">रायसीना हिल  पड़ाव, राष्ट्रपति भवन ।  तस्वीर : संजय शर्मा</figcaption></figure>
<p>लेकिन, आज़ादी के बाद, ये गलियारे एक नए देश की नींव बन गए। भारत के पहले प्रधानमंत्री, जवाहरलाल नेहरू, साउथ ब्लॉक से काम करते थे, जबकि सरदार वल्लभभाई पटेल नॉर्थ ब्लॉक से काम करते थे, और 562 रियासतों के एकीकरण की देखरेख करते थे। इन दीवारों के अंदर पंचवर्षीय योजनाओं, युद्ध और शांति के फैसलों और आर्थिक सुधारों की दिशा तय होती थी। “नेहरू के समय में, जिसे PM सेक्रेटेरिएट के नाम से जाना जाता था, उसमें लगभग आठ लोग थे; लाल बहादुर शास्त्री के समय में PMO को संस्थागत बनाया गया और यह एक सलाहकार संस्था बन गई, और इंदिरा गांधी के समय में इसे ताकत का माहौल मिला। आज़ादी के बाद से शायद ही कोई बदलाव हुआ था, लेकिन राजीव गांधी के समय में, इसे कंप्यूटराइज़ किया गया, बेसमेंट को अपग्रेड किया गया, और नई कुर्सियाँ लगाई गईं,” हिमांशु रॉय, JNU के सेंटर फॉर पॉलिटिकल स्टडीज़ (CPS) के चेयरपर्सन और PMO: प्राइम मिनिस्टर्स ऑफिस थ्रू द इयर्स के लेखक ने कहा। “इमारत की शान ने इसमें ताकत का माहौल जोड़ा।”</p>
<p>इससे पहले, प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि इन निर्णयों के पीछे एक गहरा भाव और स्पष्ट दृष्टिकोण है, जो भारत के वर्तमान, अतीत और भविष्य को राष्ट्रीय गौरव के साथ जोड़ता है। उन्होंने समझाया कि जिस स्थान को कभी राजपथ के रूप में जाना जाता था, वहाँ आम नागरिकों के लिए पर्याप्त सुविधाओं और व्यवस्थाओं का अभाव था। आज उसे कर्तव्य पथ के रूप में पुनर्विकसित किया गया है, जो परिवारों, बच्चों और नागरिकों के लिए एक जीवंत सार्वजनिक स्थल बन चुका है। उन्होंने रेखांकित किया कि इसी परिसर में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की एक भव्य प्रतिमा स्थापित की गई है, जो यह सुनिश्चित करती है कि देश की राजधानी अब अपने महान नायकों का सम्मान करती है और नई पीढ़ी को प्रेरित करती है। </p>
<figure id="attachment_7384" aria-describedby="caption-attachment-7384" style="width: 2560px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Picture-324-scaled.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Picture-324-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1696" class="size-full wp-image-7384" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Picture-324-scaled.jpg 2560w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Picture-324-300x199.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Picture-324-1024x678.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Picture-324-768x509.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Picture-324-1536x1017.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Picture-324-2048x1356.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></a><figcaption id="caption-attachment-7384" class="wp-caption-text">रायसीना हिल ।  तस्वीर : संजय शर्मा</figcaption></figure>
<p><strong>मोदी ने आगे कहा कि राष्ट्रपति भवन परिसर में भी परिवर्तन किए गए हैं, जहाँ मुगल गार्डन का नाम बदलकर अमृत उद्यान किया गया। उन्होंने उल्लेख किया कि जब नए संसद भवन का निर्माण हुआ, तो पुराने भवन को भुलाया नहीं गया, बल्कि उसे &#8216;संविधान सदन&#8217; के रूप में एक नई पहचान दी गई। उन्होंने कहा कि जब मंत्रालयों को एक ही परिसर में साथ लाया गया, तो उन भवनों का नाम &#8216;कर्तव्य भवन&#8217; रखा गया। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि नाम बदलने की ये पहलें केवल शब्दों का परिवर्तन नहीं हैं, बल्कि ये एक निरंतर वैचारिक सोच को प्रतिबिंबित करती हैं—एक ऐसा स्वतंत्र भारत जिसकी अपनी पहचान हो और जो औपनिवेशिक स्मृतियों के प्रभाव से मुक्त हो।</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि पिछले ग्यारह वर्षों में गवर्नेंस का एक नया मॉडल उभर कर सामने आया है, जहाँ निर्णय प्रक्रिया के केंद्र में नागरिक है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि “नागरिक देवो भवः” केवल एक वाक्यांश नहीं है, बल्कि यह हमारी कार्य-संस्कृति है, जिसे इन नए भवनों में प्रवेश करते समय सभी अधिकारियों को आत्मसात करना चाहिए। श्री मोदी ने घोषणा की कि सेवा तीर्थ में लिया जाने वाला हर निर्णय, आगे बढ़ने वाली हर फाइल और यहाँ बिताया गया हर पल 140 करोड़ नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए समर्पित होना चाहिए। उन्होंने प्रत्येक अधिकारी, कर्मचारी और कर्मयोगी से आग्रह किया कि जब भी वे इस भवन में कदम रखें, तो एक पल के लिए रुकें और स्वयं से पूछें—क्या आज का उनका कार्य करोड़ों नागरिकों के जीवन को आसान बनाएगा। </p>
<p>उन्होंने जोर देकर कहा कि यही आत्म-चिंतन इस स्थान की सबसे बड़ी शक्ति बनेगा। प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि विकसित भारत 2047 केवल एक लक्ष्य नहीं, बल्कि विश्व के समक्ष भारत का एक अटूट संकल्प है। इसलिए, यहाँ बनने वाली हर नीति और लिया जाने वाला हर निर्णय निरंतर सेवा भाव से प्रेरित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक दिन, जब अधिकारी सेवानिवृत्त होंगे या इस भवन से विदा लेंगे, तो वे अपने यहाँ बिताए दिनों को याद करेंगे और इस संतोष के साथ सुकून पाएंगे कि सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन में उनका हर पल नागरिकों की सेवा के लिए समर्पित था और हर निर्णय राष्ट्रहित में लिया गया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि यही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि और व्यक्तिगत पूँजी होगी, जो उनके जीवन को गौरव से भर देगी।</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/february-13-viceroy-lord-irwin-inaugurates-delhi-and-narendra-modi-inaugurates-seva-tirtha">13 फरवरी: वायसराय लॉर्ड इरविन &#8216;दिल्ली को राजधानी&#8217; के रूप में और नरेंद्र मोदी &#8216;सेवा तीर्थ&#8217; को &#8216;प्रधानमंत्री कार्यालय&#8217; के रूप में उद्घाटन किये</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>​प्रधानमंत्री कर्तव्य भवन को राष्ट्र को समर्पित किया, कर्तव्य भवनों को इंद्रप्रस्थ मेट्रो स्टेशन से एक नई लाइन बनाने का प्रस्ताव है।</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 06 Aug 2025 13:41:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[dedicates]]></category>
		<category><![CDATA[India]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>कर्तव्य पथ (नई दिल्ली) :  प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कर्तव्य भवन को राष्ट्र को समर्पित करते हुए इसे जन-जन की सेवा के प्रति अटूट संकल्प और निरंतर प्रयासों का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि कर्तव्य भवन न केवल नीतियों और योजनाओं को लोगों तक तेजी से पहुंचाने में मददगार बनने वाला है, बल्कि इससे देश के विकास [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कर्तव्य पथ (नई दिल्ली) :  प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कर्तव्य भवन को राष्ट्र को समर्पित करते हुए इसे जन-जन की सेवा के प्रति अटूट संकल्प और निरंतर प्रयासों का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि कर्तव्य भवन न केवल नीतियों और योजनाओं को लोगों तक तेजी से पहुंचाने में मददगार बनने वाला है, बल्कि इससे देश के विकास को भी एक नई गति मिलेगी। </strong></p>
<p>&#8220;कर्तव्य भवन एक विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है&#8221;, शब्दों से अलंकृत करते प्रधानमंत्री ने कहा कि इसे गढ़ने वाले हमारे श्रमयोगियों की अथक मेहनत और संकल्प-शक्ति का आज देश साक्षी बना है। विभिन्न मंत्रालयों और विभागों को एक साथ लाकर कर्तव्य भवन में शिफ्ट किया जाएगा जिससे दक्षता, नवाचार और सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। इसमें गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, एमएसएमई मंत्रालय, कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी), पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय/विभाग और प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (पीएसए) के कार्यालय होंगे।</p>
<p><strong>प्रधानमंत्री ने कहा कि इस भवन के निर्माण में पर्यावरण संरक्षण का पूरा ध्यान रखा गया है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कर्तव्य भवन के प्रांगण में एक पौधा भी लगाया। सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत केंद्रीय मंत्रालयों व विभागों के लिए ऐसे कुल 10 भवनों का निर्माण होना है। इनमें से कर्तव्य भवन-3 बनकर तैयार हो गया है। </strong></p>
<p>केंद्र सरकार के सभी 51 मंत्रालयों को 10 साझा केंद्रीय सचिवालय भवनों में एक साथ लाना संसाधनों की आवाजाही को सुचारू बनाएगा, जिसके परिणामस्वरूप अधिक कुशल और समन्वित प्रशासन होगा। अनुकूल और मॉड्यूलर फ्लोर डिजाइनों के साथ संयुक्त नजदीकी समन्वय विभागीय लेआउट सरकार को अधिक दक्षता और बढ़ी हुई उत्पादकता के साथ काम करने के लिए सशक्त बनाएगा। कार्यालय के विस्तार से मौजूदा क्षमता और बढ़ती मांग के बीच के अंतर को पाटा जा सकेगा और उत्पादकता को बढ़ावा देने वाले अत्याधुनिक कार्य वातावरण की शुरुआत की जा सकेगी। ये सुविधाएं बुनियादी ढांचे और प्रौद्योगिकी में वैश्विक मानदंडों को पूरा करेंगी। पुनर्विकास परियोजना हरित बुनियादी ढांचे और स्वच्छ परिवहन के माध्यम से स्थिरता को आगे बढ़ाएगी, सरकारी कार्यों में दक्षता और तालमेल बढ़ाएगी। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250806188410.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250806188410.jpg" alt="" width="2200" height="1291" class="aligncenter size-full wp-image-7049" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250806188410.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250806188410-300x176.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250806188410-1024x601.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250806188410-768x451.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250806188410-1536x901.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250806188410-2048x1202.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a></p>
<p>परियोजना पूरी होने के बाद किराये के तौर पर खर्च होने वाले 1500 करोड़ रुपये की बचत होगी। यह प्रशासन को सुव्यवस्थित करने और कुशल शासन का समर्थन करने के लिए डिज़ाइन की गई कई नियोजित सामान्य केंद्रीय सचिवालय इमारतों में से पहली है। यह लगभग 1.5 लाख वर्ग मीटर का एक आधुनिक कार्यालय परिसर होगा, जो दो बेसमेंट और सात मंजिलों में फैला होगा। इससे विभिन्न बिजली बचत और पुनर्चक्रण सुविधाओं के साथ स्थिरता में मदद मिलेगी, जिसके परिणामस्वरूप 30 प्रतिशत ऊर्जा की बचत होगी और वार्षिक 5 लाख 34 हजार यूनिट से अधिक बिजली का उत्पादन भी होगा।</p>
<blockquote><p>प्रधानमंत्री ने कई पोस्टों में कहा; &#8220;कर्तव्य पथ पर कर्तव्य भवन जन-जन की सेवा के प्रति हमारे अटूट संकल्प और निरंतर प्रयास का प्रतीक है। ना केवल हमारे सदस्यों और लोगों तक की शिक्षा को तेजी से मित्रता में शामिल करने वाला है, बल्कि इससे देश के विकास को भी एक नई गति मिलेगी। मित्रता के सिद्धांत बने इस भवन को राष्ट्र को समर्पित कर बहुत ही गौरवान्वित हूं।&#8221;</p></blockquote>
<p>भारत सरकार इतिहास की छाया में, भविष्य के सपनों के साथ नई दिल्ली के हृदय में एक साहसिक नया अध्याय रच रही है। सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना &#8211; ईंटों और इमारतों से कहीं बढ़कर, भारत की आत्मा का प्रतीक है। यह प्रशासनिक ढाँचों को एकीकृत करने और आपस में घनिष्ठ रूप से जुड़े, आधुनिक और उद्देश्यपूर्ण कार्यालयों के माध्यम से प्रशासनिक उत्पादकता में सुधार लाने की एक परियोजना है। सेंट्रल विस्टा कॉम्प्लेक्स भारत के प्रशासन का केंद्र होने के साथ-साथ एक प्रसिद्ध पर्यटक आकर्षण भी है जहाँ प्रमुख राष्ट्रीय त्यौहार और समारोह आयोजित किए जाते हैं। नई संसद, आधुनिक सचिवालय भवनों और हरित सार्वजनिक स्थलों के साथ, यह परियोजना दक्षता और स्थिरता के साथ नवाचार की आकांक्षा रखने वाले एक मज़बूत लोकतंत्र को दर्शाती है।</p>
<p>भारत की स्वतंत्रता के बाद, 1956 और 1968 के बीच उद्योग भवन, निर्माण भवन, शास्त्री भवन, रेल भवन और कृषि भवन सहित केंद्रीय सचिवालय भवनों की एक श्रृंखला का निर्माण किया गया। इन संरचनाओं का विकास केंद्र सरकार के मंत्रालयों के विस्तारित कार्यों को समायोजित करने के लिए कार्यालय स्थान की बढ़ती आवश्यकता को पूरा करने के लिए किया गया था। सेंट्रल विस्टा एवेन्यू, प्रतिष्ठित कर्तव्य पथ और इंडिया गेट के आसपास के हरे-भरे लॉन तक फैला हुआ है। राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ करना एक सार्थक बदलाव का प्रतीक है &#8211; सत्ता के प्रतीक से एक ऐसे मार्ग में परिवर्तित होना जो राष्ट्र निर्माण में जनता की भूमिका का उत्सव मनाता है। यह साझा दायित्व और लोकतांत्रिक गौरव को दर्शाता है।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250806188434.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250806188434.jpg" alt="" width="2200" height="1358" class="aligncenter size-full wp-image-7050" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250806188434.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250806188434-300x185.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250806188434-1024x632.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250806188434-768x474.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250806188434-1536x948.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250806188434-2048x1264.jpg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250806188434-356x220.jpg 356w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a></p>
<p>सेंट्रल विस्टा डेवलपमेंट मास्टर प्लान, शासन के लिए उद्देश्य-संचालित, अत्याधुनिक कार्यालय स्थलों का निर्माण करके प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाने का एक परिवर्तनकारी प्रारूप है। इसका उद्देश्य भारत की संसद, कार्यपालिका और उपराष्ट्रपति एन्क्लेव तथा सभी मंत्रालयों के लिए एक एकीकृत केंद्रीय सचिवालय की गतिशील आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु आधुनिक, अनुकूलनीय और पर्यावरण-अनुकूल बुनियादी ढाँचा तैयार करना है। यह योजना कर्त्तव्य पथ को एक जन-केंद्रित नागरिक स्थल के रूप में पुनर्जीवित भी करती है। यह पहल शासन को सुव्यवस्थित करने के अलावा, पर्यावरणीय स्थिरता —सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को प्रोत्साहित करना, पैदल यात्रियों की पहुँच को प्राथमिकता देना और पुनर्विकसित क्षेत्रों में हरित क्षेत्र का विस्तार करने पर भी बल देती है। इन प्रयासों का उद्देश्य देश के लिए भविष्य के लिए तैयार प्रशासनिक ढांचे को आकार देते हुए कार्बन उत्सर्जन को कम करना है।</p>
<p><strong>सेंट्रल विस्टा एवेन्यू जो प्रतिष्ठित कर्तव्य पथ और इंडिया गेट के आसपास के हरे-भरे लॉन में फैला हुआ है, उसमें समय के साथ कई बदलाव देखे गए हैं। हालांकि, इसने अपनी मुख्य पहचान को संरक्षित रखा है और राष्ट्रीय और सार्वजनिक आयोजनों की मेजबानी भी जारी है, यह एक बहुमूल्य नागरिक स्थान के रूप में स्थित है और पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है। नतीजतन, इसका पुनर्विकास सेंट्रल विस्टा मास्टर प्लान का एक प्रमुख केंद्र बन गया। कर्तव्य पथ के किनारे पक्के रास्ते से लेकर लॉन में पथ और पुनर्विकसित नहरों तक, कार्य एक वर्ष से भी कम समय में पूरा हो गया। सार्वजनिक पहुंच और नागरिक सुविधाओं को बढ़ाने के लिए 85.3 हेक्टेयर क्षेत्र का पुनर्विकास किया गया है। ग्रीन कवर में 4,087 पेड़ हैं, जो पहले 3,890 पेड़ थे। 16. 5 किलोमीटर लंबे पैदल मार्ग अब नए सिरे से तैयार की गई नहरों और लॉन के साथ पैदल चलने वालों की आवाजाही को सुगम बनाते हैं।</strong> </p>
<p>राष्ट्रीय संग्रहालय, आईजीएनसीए, सुधार किए गए कर्तव्य पथ, इंडिया गेट प्लाजा और लॉन सहित सेंट्रल विस्टा में बेहतर सार्वजनिक स्थान। उत्तर और दक्षिण ब्लॉकों के भीतर लगभग 80,000 वर्ग मीटर सरकारी स्थान को सार्वजनिक क्षेत्रों में पुनर्निर्मित किया जाएगा क्योंकि ये ऐतिहासिक इमारतें एक राष्ट्रीय संग्रहालय परिसर में बदल जाएंगी। पुनर्निर्मित एवेन्यू में सामाजिक समारोहों के लिए निर्दिष्ट क्षेत्र होंगे, जो पर्यटकों को आराम से गतिविधियों का आनंद लेने के लिए स्थलों की पेशकश करेंगे। सभी परियोजनाओं के लिए विस्तृत पर्यावरण प्रभाव आकलन किया गया। सेंट्रल विस्टा परियोजना के निर्माण चरण के दौरान इसके पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए सख्त उपाय किए गए। ये परियोजनाएं सामूहिक रूप से हरित क्षेत्र को बढ़ाएंगी क्योंकि कुल 40,573 पेड़ लगाए जा रहे हैं और किसी भी परियोजना में कोई मौजूदा पेड़ नहीं हटाया गया है। ध्वस्त भवनों से निकलने वाले कचरे का उपचार और पुनर्चक्रण एक समर्पित निर्माण और विध्वंस अपशिष्ट सुविधा में किया जाएगा जिसका उपयोग निर्माण में किया जाएगा।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250806188415.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250806188415.jpg" alt="" width="2200" height="1537" class="aligncenter size-full wp-image-7051" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250806188415.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250806188415-300x210.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250806188415-1024x715.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250806188415-768x537.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250806188415-1536x1073.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250806188415-2048x1431.jpg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250806188415-100x70.jpg 100w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a></p>
<p>भवन में सुरक्षित और आईटी-सक्षम कार्यस्थल, स्मार्ट एंट्री सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और कमांड सेंटर, सोलर पैनल, सौर वॉटर हीटर और ई-वाहन चार्जिंग स्टेशन जैसी सुविधाएं हैं। यह पर्यावरण के अनुकूल निर्माण को भी बढ़ावा देता है, जिसमें अपशिष्ट जल का पुन: उपयोग, ठोस कचरा प्रबंधन प्रणाली शामिल हैं। इमारत को ठंडा रखने और बाहरी ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिए इसमें कांच की विशेष खिड़कियां लगाई गई हैं।</p>
<p>शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि अगले महीने तक कर्तव्य भवन-1 और कर्तव्य भवन-2 भी बनकर तैयार जाएंगे। दोनों का काम लगभग अंतिम चरण में है। प्रस्तावित अन्य सात भवन भी अप्रैल 2027 तक बनकर तैयार हो जाएंगे। इस परियोजना पर करीब 1000 करोड़ रुपये खर्च होंगे। मंत्रालयों के लिए बनाए जा रहे इन भवनों में तकनीक, सुरक्षा व पर्यावरण अनुकूलता का पूरा ख्याल रखा गया है। खास बात यह है कि केंद्रीय मंत्रालयों व विभागों के लिए नवनिर्मित इन नए भवनों को पहले कामन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट (सीसीएस) नाम दिया गया था। इन कर्तव्य भवनों को मेट्रो लाइन से जोड़ने के लिए इंद्रप्रस्थ मेट्रो स्टेशन से एक नई लाइन बनाने का प्रस्ताव किया गया है।</p>
<p>कर्तव्य भवनों के तैयार होते ही नार्थ और साउथ ब्लाक में मौजूद सभी मंत्रालयों को वहां से स्थानांतरित कर दिया जाएगा। दोनों ही ब्लाक को खाली कराकर इनमें भारत संग्रहालय बनाया जाएगा। इस दौरान ढांचे के साथ किसी तरह का छेड़छाड़ किए बगैर इसमें महाभारत काल से लेकर देश के आज तक के इतिहास, कला व संस्कृति आदि को प्रदर्शित किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने बताया कि सेंट्रल विस्टा परियोजना का यह काम दिसंबर 2031 तक पूरा कर लिया जाएगा। इनमें ही प्रधानमंत्री के लिए नए आवास व कार्यालय भी बनाए जा रहे है। इसके लिए भी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/nation/prime-minister-dedicates-kartavy-bhavan-to-nation">​प्रधानमंत्री कर्तव्य भवन को राष्ट्र को समर्पित किया, कर्तव्य भवनों को इंद्रप्रस्थ मेट्रो स्टेशन से एक नई लाइन बनाने का प्रस्ताव है।</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>#भारतकीसड़कों से #भारतकीकहानी (20) ✍ जंतर-मंतर धरना-स्थल &#8216;जलियांवाला बाग़&#8217; जैसा नहीं दीखता, बंद  😢</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 01 Sep 2022 13:52:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
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		<category><![CDATA[Delhi]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>दिल्ली के रायसीना हिल पर या प्रदूषित यमुना के तट पर आईटीओ के उपरगामी पथ के बाएं हाथ गगनचुंबी इमारत में बैठे गणमान्यों, शासन, प्रशासन, विधि-विधान, पुलिस व्यवस्था और सरकार के ख़िलाफ़ जो भी आवाज उठानी हो, भारत के आवाम के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में एक ही &#8220;धरना चौक या हड़ताली चौक है। दिल्ली [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>दिल्ली के रायसीना हिल पर या प्रदूषित यमुना के तट पर आईटीओ के उपरगामी पथ के बाएं हाथ गगनचुंबी इमारत में बैठे गणमान्यों, शासन, प्रशासन, विधि-विधान, पुलिस व्यवस्था और सरकार के ख़िलाफ़ जो भी आवाज उठानी हो, भारत के आवाम के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में एक ही &#8220;धरना चौक या हड़ताली चौक है। दिल्ली के संसद मार्ग, जनपथ और रायसीना रोड के बीच कोने का एक स्थल। यह क्षेत्र कभी जयसिंह -II द्वारा निर्मित ऐतिहासिक जंतर-मंतर पुरातत्व के नाम से जाना जाता था। आज लोग बाग़ भले जंतर मंतर का नाम उच्चारित करते हों, लेकिन अन्तःमन से उस स्थान का शाब्दिक अर्थ हड़ताली चौक से हैं। </strong></p>
<p>विगत कई वर्षों से भारत का आवाम यहीं आकर अपनी बातों को, भडासों को, तकलीफों को, मांगों को लाउडस्पीकरों पर, आधुनिक वाद्ययंत्रों से सज्ज अन्य ध्वनि उपकरणों से चिल्लाकर, कहकर भले स्वयं-संतुष्ट हो जाएँ, सोसल मीडिया के विभिन्न पन्नों पर, कुछ दैनिक अख़बारों में, टीवी चैनलों में कहानी और तस्वीरों को देखकर खुश हो जाएँ, कतरन काटकर आंदोलन-पुस्तिका में चिपका लें &#8211; हकीकत तो यही है कि इस स्थान से भारतीय संसद, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री कार्यालयों में कुछ की आवाज पहुँचती है, कुछ आवाज दिल्ली के प्रदूषित वायु में, प्रदूषित ध्वनियों में गुम हो जाती है। </p>
<p>एक संवाददाता के रूप में देश के कई शहरों में भारत की मतदाताओं को अपनी आवाज बुलंद करते देखा हूँ। उनकी आवाज़ को शंखनाद जैसा सुना हूँ। मसलन देश के व्यावसायिक शहर मुंबई में जब लोगों को अपनी आवाज बुलंद करनी होती है, वे आज़ाद मैदान में एकत्रित होते हैं। आज़ाद मैदान की आवाज मंत्रालय तक बेखौफ पहुँचती है गगनचुम्बी अट्टालिकाओं को चीरती-फाड़ती। पटना में हो तो बेलीरोड हड़ताली चौक पर। हैदराबाद में विरोध प्रदर्शन इंदिरा पार्क में धरना चौक पर एकत्रित होते हैं। हरियाणा-पंजाब सरकार के खिलाफ आवाज उठाने के लिए चंडीगढ़ रैली ग्राउंड में आते हैं। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हजरतगंज आते हैं चौराहे पर।कलकत्ता में बीबीडी बाग में और चेन्नई में चेपक स्टेडियम में। लेकिन जब राष्ट्रीय राजधानी में आवाज बुलंद करने की बात होती है तो लोगों को एक ऐसे स्थान पर धरना देने, अपनी आवाज उठाने के लिए दिया गया है, जहाँ आवाज तो उठती है, लेकिन बाहर नहीं निकल पाती &#8211; चतुर्दिक बंद। </p>
<p><iframe loading="lazy" title="#भारतकीसड़कों से #भारतकीकहानी (20) ✍  जंतर-मंतर धरना-स्थल &#039;जलियांवाला बाग़&#039; जैसा नहीं दीखता,  बंद  😢" width="696" height="392" src="https://www.youtube.com/embed/mDZpShnXu5g?start=29&#038;feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture" allowfullscreen></iframe></p>
<p>सन 1724 में जयपुर के महाराजा जयसिंह द्वितीय द्वारा निर्मित जंतर-मंतर आज संसद मार्ग के नुक्कड़ पर भले स्थित हो, इसका अंदर का परिसर शहर के मजनुओं, प्रेमी-प्रेयसी के अलावे अब किसी का नहीं है। देशी-विदेशी सभी पर्यटक यहाँ आते हैं इस ऐतिहासिक पुरातत्व को देखने के लिए, यहाँ प्रवेश द्वार पर सुरक्षाकर्मी भी है, अंदर का परिसर स्वच्छ और साफ़ भी है &#8211; लेकिन अंदर प्रवेश के साथ जब दूसरे छोड़ तक पहुँचते हैं, संभ्रांत पर्यटक &#8216;वापस&#8217; आ जाते हैं। ऐसी बात नहीं है कि शहर के मजनु, प्रेमी-प्रेयसी सिर्फ यहीं अपना ठिकाना बनाए हैं, दिल्ली का कोई भी ऐतिहासिक स्थान अब अछूता नहीं रहा। खैर।</p>
<p> इसी जंतर मंतर हड़ताली स्थल पर नर्मदा बचाओ का आंदोलन हुआ था, यहीं अन्ना हज़ारे भी &#8216;भ्रष्टाचार&#8217; के खिलाफ आवाज उठाये थे, लोकपाल बिल के लिए अनशन किये थे। आम आदमी पार्टी का जन्म भी हुआ। खैर। विस्तृत विवरण तो आप सभी जानते ही हैं। कहते हैं कि इस धरना-स्थल का &#8216;लोकतंत्र&#8217; से मजबूत रिश्ता हो गया है। है अथवा नहीं, या तो विद्वान-विदुषी अधिक जानते होंगे। </p>
<p>धरना स्थल के रूप में जंतर मंतर का जन्म 1993 में हुआ। धरना या हड़ताल जंतर-मंतर के पास आने से पहले बोट क्लब पर था। सन 1988 में उत्तर प्रदेश में किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत करीब पांच लाख किसानों और मवेशियों के साथ बोट क्लब पर अपना घर-द्वार बना लिए। दिल्ली कभी ऐसी भीड़ देखी नहीं थी। यहाँ से संसद ही नहीं, प्रधानमंत्री, उनका कार्यालय, राष्ट्रपति सभी बहुत नजदीक थे। फिर बोट क्लब पर धरना-प्रदर्शन &#8220;प्रतिबंधित&#8221; हो गया। 1993 में केंद्र सरकार के एक आदेश के बाद ही धरना और प्रदर्शन स्थल के तौर पर जंतर मंतर को चिन्हित किया गया। फिर 30 अक्टूबर 2018 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने दिल्ली की इस जगह पर आकर विरोध करने पर पाबंदी लगा दी। एनजीटी को लगा कि यहां प्रदर्शन होते रहने से इस जगह की हरियाली और पर्यावरण पर असर पड़ सकता है। खैर, फिर भारत का सर्वोच्च न्यायालय देश के लोगों की आवाज को प्रतिबंधित करने के खिलाफ ,सकारात्मक निर्णय दिया। आज भी जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी एकत्रित होते हैं, आवाज बुलंद करते हैं, चाहे उनकी आवाज संसद तक पहुंचे अथवा नहीं। </p>
<p>बहरहाल, इस कहानी को करने के क्रम में जंतर-मंतर के धरना स्थल पर बैठा था। एक अपराध संवाददाता के रूप में इस स्थान को देख रहा था। संसद की ओर से कनॉट प्लेस की ओर बढ़ने से जब हम पार्लियामेंट थाना-स्टेट बैंक ऑफ़ इण्डिया लाल बत्ती से दाहिने हाथ मुड़ते है, कुछ कदम चलने के बाद एक रास्ता जनपथ की ओर निकलती है और दूसरी सीधी अशोक रोड गोलचक्कर को पार करते रायसीना रोड की ओर। अशोक रोड गोल चक्कर और जंतर मंतर के इस छोड़ के बीच सड़क के बाएं-दाहिने दोनों तरफ कोई आठ फीट ऊँची दीवार भी है और सरकारी दफ़्तरें भी, जिसका प्रवेश कुछ इस तरफ से भी है। लेकिन प्रदर्शन के समय उम्मीद है इस तरफ का मार्ग कोई नहीं लेता होगा। इस धरना स्थल के प्रवेश और निकास के बीच जिस कदर बेर्रिकेट दिखा (प्रदर्शन के समय तो रहता ही है) लगा जैसे &#8216;दिल्ली के जलियांवाला बाग़ स्वरुप स्थान पर भारत के लोगों को अपनी आवाज उठाने की स्वीकृति मिलती है। क्या आज़ादी के 75 वर्ष बाद भी भारत के लोग खुले वातावरण में, स्वच्छ हवाओं में, अपनी आवाज बुलंद नहीं कर सकते ?</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/bharat-ki-sadkon-se-bharat-ki-kahani20">#भारतकीसड़कों से #भारतकीकहानी (20) ✍ जंतर-मंतर धरना-स्थल &#8216;जलियांवाला बाग़&#8217; जैसा नहीं दीखता, बंद  😢</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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