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	<title>narendra modi Archives - आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</title>
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		<title>आज रात 8.30 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी​ &#8216;संभवतः&#8217; राष्ट्र को सम्बोधित करेंगे, यह पिछले 12 साल में &#8217;13 वां&#8217; संबोधन होगा </title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 18 Apr 2026 12:40:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 18 अप्रैल​:​ संसद में महिला आरक्षण अधिनियम से संबंधित ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’ पास नहीं होने के कारण ​संभवतः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ​आज रात 8:30 बजे राष्ट्र को संबोधित करने वाले हैं। यह संबोधन ऐसे समय में हो रहा है जब सरकार को एक बड़ा विधायी झटका लगा है और भू-राजनीतिक चिंताएं [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/nation/prime-minister-narendra-modi-will-likely-address-the-nation-tonight-at-830-pm">आज रात 8.30 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी​ &#8216;संभवतः&#8217; राष्ट्र को सम्बोधित करेंगे, यह पिछले 12 साल में &#8217;13 वां&#8217; संबोधन होगा </a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली, 18 अप्रैल​:​ संसद में महिला आरक्षण अधिनियम से संबंधित ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’ पास नहीं होने के कारण ​संभवतः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ​आज रात 8:30 बजे राष्ट्र को संबोधित करने वाले हैं। यह संबोधन ऐसे समय में हो रहा है जब सरकार को एक बड़ा विधायी झटका लगा है और भू-राजनीतिक चिंताएं बढ़ रही हैं। इस बहुप्रतीक्षित प्रसारण को सरकार के राजनीतिक और नीतिगत संदेश के लिए एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।​ संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 विधेयक लंबे समय से चर्चा में रहे &#8216;महिला आरक्षण&#8217; के ढांचे से जुड़ा था, लेकिन इसे लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका।</strong></p>
<blockquote><p>प्रधानमंत्री द्वारा यह संभावित सम्बोधन पिछले 12 वर्षों (2014-2026) में लगभग तेरहवां संबोधन होगा।  8 नवंबर, 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक टेलीविज़न संबोधन में घोषणा की कि आधी रात से ₹500 और ₹1,000 के नोट अब वैध मुद्रा नहीं रहेंगे; इसका उद्देश्य काले धन, भ्रष्टाचार और जाली मुद्रा पर लगाम लगाना था। नोटबंदी को घोषणा के बाद 31 दिसंबर 2016 को नए साल की पूर्व संध्या पर नरेंद्र मोदी राष्ट्र को संबोधित किये थे। 27 मार्च 2019 को एंटी-सैटेलाइट मिसाइल टेस्ट के अवसर पर, फिर 8 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35A का निष्प्रभावी होने के बाद, मार्च-मई 2020 में जनता कर्फ्यू (19 मार्च), लॉकडाउन (24 मार्च, 3 अप्रैल) और आत्मनिर्भर भारत अभियान (12 मई) की घोषणाएं किये थे। </p></blockquote>
<p>इस विधेयक में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रस्ताव था। इसके साथ ही, इसमें एक &#8216;परिसीमन&#8217; प्रक्रिया का भी प्रावधान था, जिससे लोकसभा (निचले सदन) की सदस्य संख्या बढ़कर 816 हो जाती। हालांकि, एक तीखी और ध्रुवीकृत बहस के बाद यह विधेयक पारित नहीं हो सका, क्योंकि विपक्षी दलों ने इसे अपना समर्थन नहीं दिया।​ हालांकि प्रधानमंत्री कार्यालय ने आधिकारिक तौर पर इस संबोधन का एजेंडा स्पष्ट नहीं किया है, लेकिन सरकारी सूत्रों ने संकेत दिया है कि प्रधानमंत्री अपने भाषण में इस अटके हुए विधेयक, महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े व्यापक सवालों और भविष्य के लिए सरकार के &#8216;रोडमैप&#8217; पर बात कर सकते हैं।</p>
<p>यह घटना एक दुर्लभ उदाहरण है, जिसमें एक उच्च-स्तरीय संवैधानिक संशोधन अपने अंतिम चरण में आकर विफल हो गया। यह घटना सत्ताधारी गठबंधन और विपक्षी दलों के बीच बढ़ती हुई गहरी दरारों को भी उजागर करती है।​ सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने संकेत दिया कि मोदी इस मंच का उपयोग सीधे जनता से अपील करने के लिए कर सकते हैं। वे इस विधेयक को &#8216;लैंगिक समानता&#8217; की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम के रूप में प्रस्तुत कर सकते हैं, जिसे &#8216;राजनीतिक स्वार्थों&#8217; के चलते बाधित किया गया।</p>
<p><strong>हालांकि, इस विधेयक को &#8216;परिसीमन&#8217; प्रक्रिया से जोड़ने का मुद्दा एक विवाद का विषय बन गया। विपक्षी दलों ने तर्क दिया कि इस तरह की क्रमबद्धता के कारण विधेयक के कार्यान्वयन में देरी हो सकती है, और इससे विभिन्न राज्यों के बीच राजनीतिक संतुलन भी बिगड़ सकता है। बिल के पास न हो पाने से जो राजनीतिक असर पड़ा है, उसके प्रधानमंत्री के भाषण में हावी रहने की उम्मीद है, खासकर तब जब सरकार आने वाले चुनावों से पहले अपनी बात को मज़बूती से रखना चाहती है। जानकारों का कहना है कि यह भाषण सरकार के सुधार एजेंडे का बचाव करने और लोगों की सोच को बदलने की एक सोची-समझी कोशिश, दोनों का काम कर सकता है। संसदीय मामलों के जानकार एक राजनीतिक विश्लेषक ने कहा, &#8220;ऐसे हालात में देश के नाम संबोधन शायद ही कभी सामान्य होता है—इसका मकसद अक्सर अपनी बात को नए सिरे से रखना और लोगों का समर्थन जुटाना होता है।&#8221;</strong></p>
<p>इस संबोधन को और भी ज़्यादा ज़रूरी बनाने वाली बात संसद के बाहर हो रहे घटनाक्रम हैं। दिन की शुरुआत में, मोदी ने सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति और आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति की बैठकें कीं, जहाँ कथित तौर पर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और भारत की ऊर्जा आपूर्ति, खाद्य सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर इसके संभावित असर पर चर्चा हुई। वैश्विक बाज़ारों में उतार-चढ़ाव के संकेत दिख रहे हैं, ऐसे में प्रधानमंत्री इस संबोधन का इस्तेमाल नागरिकों को यह भरोसा दिलाने के लिए भी कर सकते हैं कि सरकार बाहरी झटकों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।</p>
<p>घरेलू राजनीतिक उथल-पुथल और अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितता के मेल ने इस भाषण को लेकर उत्सुकता और बढ़ा दी है, और सरकार के अगले कदमों के संकेतों का इंतज़ार उसके समर्थक और आलोचक, दोनों ही कर रहे हैं। यह देखना होगा कि क्या यह संबोधन आम सहमति बनाने के मकसद से सुलह का रास्ता अपनाता है, या विपक्ष के खिलाफ ज़्यादा आक्रामक रुख अपनाता है; आने वाले हफ़्तों में देश की राजनीतिक चर्चा का रुख इसी बात से तय हो सकता है।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/Bill-1.jpg"><img fetchpriority="high" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/Bill-1.jpg" alt="" width="2125" height="1159" class="aligncenter size-full wp-image-7632" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/Bill-1.jpg 2125w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/Bill-1-300x164.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/Bill-1-1024x559.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/Bill-1-768x419.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/Bill-1-1536x838.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/Bill-1-2048x1117.jpg 2048w" sizes="(max-width: 2125px) 100vw, 2125px" /></a></p>
<p><strong>​ज्ञातव्य हो कि कल केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों पर महिला आरक्षण का विरोध करने का आरोप लगाते हुए लोकसभा में कहा कि देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनके ‘‘रास्ते का रोड़ा’’ कौन है और विपक्ष के नेताओं को चुनाव में महिलाओं के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा। शाह ने महिला आरक्षण अधिनियम से संबंधित ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’, ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ पर सदन में चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि जो लोग परिसीमन का विरोध कर रहे हैं, वे कहीं न कहीं अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (एससी-एसटी) के लिए आरक्षित सीटों में बढ़ोतरी का विरोध कर रहे हैं।</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन के सभी सदस्यों ने ‘‘अगर-मगर, किंतु-परंतु का उपयोग करके स्पष्ट रूप से महिला आरक्षण का विरोध किया है। यह दिखाने का प्रयास किया गया कि विरोध हमारे क्रियान्वयन के तरीके पर है। मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि यह विरोध क्रियान्वयन का नहीं, बल्कि केवल महिला आरक्षण का विरोध है।’’​ नरेन्द्र मोदी सरकार महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देकर रहेगी। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रधानमंत्री मोदी का उद्देश्य महिला सशक्तीकरण करने वाले इस संविधान सुधार को समयबद्ध तरीके से लागू करके 2029 का चुनाव महिला आरक्षण के साथ करने का है।</p>
<p>शाह ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि अगर ये (विपक्ष) वोट नहीं देंगे तो संविधान संशोधन विधेयक सदन में गिर जाएगा, लेकिन विपक्षी दलों के नेताओं को चुनाव में महिलाओं के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा। चुनाव में वे जब जाएंगे तब मातृशक्ति हिसाब मांगेगी।’’​ शाह के जवाब के बाद, मत विभाजन में महिला आरक्षण और परिसीमन से संबंधित ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’ गिर गया। इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े।​ लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है।​ संविधान संशोधन विधेयक गिरने के बाद इससे संबंधित दोनों विधेयकों परिसीमन विधेयक, 2026 और संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 को आगे नहीं बढ़ाया जा सका।</p>
<p>इससे पहले, शाह ने अपने जवाब में कहा कि कांग्रेस ने सत्ता में रहते हुए भी विधायिका में महिलाओं के 33 प्रतिशत आरक्षण को बार-बार रोका और अब विपक्ष में रहते हुए भी इसे रोक रही है।​ उन्होंने कहा, ‘‘2023 में प्रधानमंत्री मोदी जानबूझकर महिला आरक्षण विधेयक लाए क्योंकि 2024 का चुनाव था और उन्हें पता था कि कांग्रेस विरोध नहीं कर पाएगी। तब पहली बार इसे सर्वसम्मति से पारित किया गया। हमें लगता था कि तब हो गया तो अब भी पारित हो जाएगा, लेकिन ये (विपक्ष) ‘किंतु-परंतु, अगर-मगर’ करके पांचवीं बार फिर विरोध कर रहे हैं।’’</p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी के सभी कामों का विरोध करने की ठान रखी है और उसने अनुच्छेद 370 को समाप्त करने का, राम मंदिर (निर्माण) का, तीन तलाक को समाप्त करने का, जीएसटी का विरोध किया। उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस ने नये संसद भवन का, सहकारिता मंत्रालय का विरोध किया, सर्जिकल स्ट्राइक का, एयर स्ट्राइक का और ऑपरेशन सिंदूर तक का विरोध किया।’’​ शाह ने कहा कि महिला आरक्षण से कांग्रेस के पीछे हटने का कारण यह है कि वह इसका श्रेय प्रधानमंत्री मोदी को नहीं देना चाहती।</p>
<figure id="attachment_7634" aria-describedby="caption-attachment-7634" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/Nitish-2-1.jpg"><img decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/Nitish-2-1.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-7634" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/Nitish-2-1.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/Nitish-2-1-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/Nitish-2-1-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/Nitish-2-1-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/Nitish-2-1-1536x1026.jpg 1536w" sizes="(max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-7634" class="wp-caption-text">​सन्नाटा विजय चौक पर &#8211; तस्वीर: संजय शर्मा</figcaption></figure>
<blockquote><p>गृह मंत्री ने कहा कि इन विधेयकों का उद्देश्य संविधान की ‘एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य (वैल्यू)’ की भावना को लागू करना भी है।​ उन्होंने कहा कि देश में 127 से अधिक लोकसभा क्षेत्र 20 लाख से अधिक मतदाताओं वाले हैं, और कुछ सीटों पर 28 लाख से 48 लाख तक मतदाता हैं, ऐसे में जन प्रतिनिधि के रूप में सांसद कैसे अच्छी तरह जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकते हैं।​ उन्होंने कहा कि इसे देखते हुए संविधान में समय-समय परिसीमन का प्रावधान किया गया है और उसी से एससी, एसटी की सीटें भी बढ़ने का प्रावधान है।​ उन्होंने कहा, ‘‘इस तरह परिसीमन का विरोध करने वाले एक तरह से एससी-एसटी सीटें बढ़ने का विरोध कर रहे हैं।’’</p></blockquote>
<p>उन्होंने 2026 में संविधान संशोधन विधेयक लाने के विपक्ष के सवालों पर कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम (2023) में जिक्र है कि 2026 के बाद होने वाली जनगणना के बाद जो परिसीमन होगा, उसमें महिला आरक्षण सुनिश्चित करेंगे।​ शाह ने कहा कि 1976 में कांग्रेस की सरकार के समय से 2026 तक, 50 वर्षों तक देश में लोकसभा सीटों की संख्या ‘फ्रीज’ थी और जनता को जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व नहीं मिला। उन्होंने कहा, ‘‘2026 में यह सीमा समाप्त हो गई। अब परिसीमन करते हैं तो 2029 से पहले समाप्त नहीं हो सकता। इसलिए 2029 का चुनाव नारी शक्ति वंदन अधिनियम की भावना से करना चाहते हैं और आधी आबादी को 33 प्रतिशत आरक्षण देना चाहते हैं तो इसे अभी लाना होगा।’’​ उन्होंने कहा कि 140 करोड़ जनता के मन में किसी तरह की भ्रांति, भ्रम नहीं हो, इसलिए ‘‘मैं फिर से स्पष्ट करना चाहता हूं कि प्रधानमंत्री मोदी की कैबिनेट ने जाति जनगणना का जो निर्णय लिया है वह 2026 की जनगणना के साथ कराने का है।’’</p>
<p>शाह ने 2011 की जनगणना के अनुसार परिसीमन के साथ महिला आरक्षण लागू होने से दक्षिणी राज्यों के साथ अन्याय होने के विपक्ष के दावों को खारिज करते हुए दोहराया कि दक्षिणी राज्यों का इस सदन पर उतना ही अधिकार है जितना उत्तर के राज्यों का।​ उन्होंने कहा, ‘‘हम उत्तर-दक्षिण का भेद नहीं होने देंगे।’’​ गृह मंत्री ने विपक्षी नेताओं को आड़े हाथ लेते हुए कहा, ‘‘आप ऐसी धारणा पैदा करके लोकप्रिय नहीं हो पाओगे, बाल सफेद हो जाएंगे लेकिन यहां (सत्तापक्ष में) नहीं बैठ पाओगे।’’ </p>
<p><strong>शाह ने कहा कि दक्षिणी राज्यों &#8212; कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना और केरल की इस समय लोकसभा में 129 सीटें हैं जिनका (वर्तमान में) कुल 543 सीटों में प्रतिशत 23.76 है। उन्होंने कहा कि सीटों में 50 प्रतिशत वृद्धि के साथ इन पांचों राज्यों में सीटें 195 हो जाएंगी जो कुल 816 सीटों में 23.87 प्रतिशत होंगी।​ उन्होंने यह भी कहा कि यदि विधेयक में सीटों की संख्या 50 प्रतिशत बढ़ाने का लिखित उल्लेख नहीं होने के कारण विपक्षी दल विरोध कर रहे हैं तो एक घंटे का समय दें, वह इस बारे में तत्काल संशोधन ले आएंगे।​ शाह ने महिला आरक्षण में मुस्लिम आरक्षण की समाजवादी पार्टी की मांग पर कहा कि संविधान के तहत धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता।</strong></p>
<p>उन्होंने ओबीसी महिलाओं के आरक्षण की मांग के संबंध में कहा कि जाति जनगणना के बाद रिपोर्ट आएगी और उस पर इस सदन में विचार करने के बाद जो भी सामूहिक मत बनेगा, उस बारे में आगे बढ़ा जा सकता है।​ शाह ने कांग्रेस पर लंबे अरसे तक ओबीसी का आरक्षण रोकने का आरोप लगाया।​ उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस ने बार-बार ओबीसी आरक्षण को रोका और अब, जब वे चुनाव हारते जा रहे हैं तो ओबीसी के हितैषी बनने आए हैं। कांग्रेस ने अब तक एक भी ओबीसी प्रधानमंत्री नहीं दिया, वहीं भाजपा ने अति पिछड़े समाज के मोदी जी को प्रधानमंत्री बनाया।’’</p>
<p>शाह ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर सदन में प्रधानमंत्री के लिए असंसदीय शब्दों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए कहा, ‘‘विपक्ष के नेता का व्यवहार किस प्रकार का है। उनकी भाषा किस प्रकार की है, देश भी सुन रहा है। आप अपने वरिष्ठों से सीख लें, नहीं तो अपनी बहन प्रियंका जी से सीख लें कि सदन में कैसे बोलते हैं।’’<br />
​&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;</p>
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		<title>&#8216;चिठ्ठी-चिठ्ठी खेलते&#8217; यूनाइटेड न्यूज ऑफ़ इंडिया &#8216;अस्तित्वहीन&#8217; हो गया, वह कहने से &#8216;कतराते&#8217; रहे, वे सुनने के लिए &#8216;तरसते&#8217; रहे (भाग-3)</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 28 Mar 2026 12:24:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
		<category><![CDATA[eviction]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>रफ़ी मार्ग, नई दिल्ली : बड़े बुजुर्ग कहते हैं हकलाकर ही सही, तुतलाकर ही सही बोलो ज़रूर। लेकिन देश का प्रसिद्ध न्यूज़ एजेंसी यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया, जिसने भारतीय पत्रकारिता को मूर्धन्य हस्ताक्षरों से अलंकृत किया, न वह और उसके लोग मुख से अपनी बात, परेशानी उनसे बोल सके जो कुछ भी करने की ताकत [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/united-news-of-india-became-non-existent-while-playing-letters">&#8216;चिठ्ठी-चिठ्ठी खेलते&#8217; यूनाइटेड न्यूज ऑफ़ इंडिया &#8216;अस्तित्वहीन&#8217; हो गया, वह कहने से &#8216;कतराते&#8217; रहे, वे सुनने के लिए &#8216;तरसते&#8217; रहे (भाग-3)</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>रफ़ी मार्ग, नई दिल्ली : बड़े बुजुर्ग कहते हैं हकलाकर ही सही, तुतलाकर ही सही बोलो ज़रूर। लेकिन देश का प्रसिद्ध न्यूज़ एजेंसी यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया, जिसने भारतीय पत्रकारिता को मूर्धन्य हस्ताक्षरों से अलंकृत किया, न वह और उसके लोग मुख से अपनी बात, परेशानी उनसे बोल सके जो कुछ भी करने की ताकत रखते थे, और वे इंतज़ार करते कार्यालय से बाहर होते गए। बस,  चिट्ठी-चिट्ठी खेलते यूएनआई एक दिन 9-रफ़ी मार्ग से बेदखल हो गया।</strong>  </p>
<blockquote><p>जिस कालखंड में यूनाइटेड न्यूज ऑफ़ इंडिया को सरकार के तरफ़ से देश के संसद और प्रधानमंत्री कार्यालय से सौ कदम दूर भूखंड का आवंटन हुआ, उस भूखंड से यूएनआई को न्यायालय के आदेश पर बाहर निकालने के बीच श्रीमती  इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, पीवी नरसिंहराव, अटल बिहारी वाजपेयी, डॉ मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी जैसे पत्रकार और पत्रकारिता को समझने वाले प्रधानमंत्री आए। लेकिन इन छह दशकों में यूएनआई सरकार, शासन, व्यवस्था, विभागों के साथ चिठ्ठी-चिट्ठी खेलता रहा और एक दिन सरकार द्वारा आवंटित भूखंड से बेदखल होकर बाहर कर दिया गया। लोग बाग कहते हैं यह पत्रकारिता पर कुठाराघात है, जबकि सत्ता के गलियारे में बैठे उन दिनों के लोगों का कहना है “वे खुलकर कहने से कतराते रहे, हम खुलकर सुनने को तरसते रहे। न वे 9-रफ़ी मार्ग से विजय चौक के रास्ते रायसीना पहाड़ी पर आए और न हमें कभी मसले को सुलझाने के लिए बुलाए। जो गए वे राजनीति की रोटियां सेक कर निकल गए।”</p></blockquote>
<p>समयांतराल देश के राजनीतिक गलियारे में भ्रष्टाचार का आलम इतना अधिक हो गया कि उस यूएनआई को जी-टीवी के मालिक सुभाष चंद्रा द्वारा ख़रीदने की खबर एजेंसी के तत्कालीन अधिकारी, पदाधिकारी, रक्षक, संरक्षक सबों को राष्ट्रीय जनता दल के नेता लालू प्रसाद यादव और उनके सहयोगी तथा राज्यसभा के सदस्य प्रेमचंद गुप्ता से मिली थी। कहते हैं लालू यादव ने हँसकर कहा था: &#8220;मेरा मित्र यूएनआई को खरीद लिया है,&#8221; यही सात शब्द थे जो उस दिन आग की तरह देश की राजधानी दिल्ली से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में &#8216;बिजली की तरह&#8217; फैली थी। </p>
<p><strong>दुर्भाग्य यह है कि अपने स्थापना काल से लेकर आज तक, जिन-जिन लोगों के बारे में लिखकर यूएनआई के शब्द उन्हें &#8216;आम आदमी&#8217; से &#8216;खास आदमी&#8217; तक बनाया, &#8216;शोहरत&#8217; दिलाया, सबों ने एजेंसी के अस्तित्व के साथ &#8216;तथाकथित तौर पर राजनीति ही किये&#8217;, किसी ने भी आगे बढ़कर समस्याओं के समाधान का मार्ग नहीं ढूंढा, ढूंढने में मदद नहीं किया। इधर, यूएनआई के कार्यालय में तो राजनीति चरम की ओर अग्रसर थी ही। </strong></p>
<p>आज स्थिति यह है कि यूएनआई, जिसकी तूती कभी 9-रफ़ी मार्ग से बोली जाती थी, जहाँ से कहानियों के माध्यम से शब्दों का अलंकरण होता था, आज एजेंसी के सभी पत्रकार और गैर-पत्रकार अपने-अपने कार्य तो कर रहे हैं, लेकिन अपने-अपने घरों से, मीडिया सेंटर से, सड़क के किनारे चाय की दुकानों पर बैठकर अपने लैपटॉप से कहानियां भेज रहे हैं। दफ्तर में जहाँ लोगबाग एक-दूसरे से मिलकर अपना-अपना सुख-दुःख बांटते थे, आज व्हाटएप पर संवाद का आदान-प्रदान कर रहे हैं। जो भी सब्सक्राइबर्स बचे हैं, उन तक अपनी सेवा उपलब्ध कराने के लिए निजी क्षेत्र की कंपनी को रखकर वेबसाइट चला रहे हैं। यूएनआई का क्रियाकलाप पुनः कोरोना काल में प्रवेश कर चुका है। </p>
<p>यूएनआई कर्मचारी यूनियन के पूर्व अध्यक्ष और कन्फेडरेशन ऑफ़ न्यूजपेपर्स एंड न्यूज एजेंसीज एम्पलॉयज ऑर्गेनाइजेशन के कोषाध्यक्ष एम एल जोशी, जो यूएनआई को विगत चार दशकों से देखते आ रहे हैं, कहते हैं: &#8220;यूएनआई को इस स्थिति तक लाने में कौन दोषी है, कौन नहीं, इस बात पर चर्चा सार्वजनिक होनी चाहिए। साथ ही, इस ऐतिहासिक एजेंसी के अस्तित्व को पुनः स्थापित करने की कोशिश भी होनी चाहिए। हमें दुख है की देश का कोई भी नेता इसे बचाने के लिए आगे नहीं आए। लेकिन जब यह पूछा कि यूएनआई इन वर्षों में निजी तौर पर कितने प्रधान मंत्रियों से मिलकर, बात कर इस मसले को सुलझाने का पहल किया ? वे कहते हैं “चिट्ठी लिखी गई थी।” </p>
<p><strong>कौन हैं 29+ फीसदी शेयर के मालिक अवीक सरकार </strong></p>
<p>बहरहाल, शेष बातें तो इतिहासकार बताएँगे, लेकिन एक बात तो तय है कि कलकत्ता में प्रफुल्ल कुमार सरकार (जिनके नाम से प्रफुल्ल सरकार स्ट्रीट भी है) और सुरेश चंद्र मजूमदार द्वारा तत्कालीन ब्रितानिया सरकार के शासन के विरुद्ध आनंद बाजार पत्रिका अख़बार का प्रकाशन प्रारम्भ हुआ था। दोनों ने मिलकर बंगाल के लोगों, खासकर क्रांन्तिकारियों, श्रमिकों की आवाज बुलंद करने के लिए 13 मार्च, 1922 को इस अख़बार को स्थापित किये थे। उन दिनों यह अख़बार चार पन्नों में संध्याकाल प्रकाशित होता था इस विश्वास के साथ कि यह का सूर्योदय बेहतर होगा। आज का सांध्यकालीन अख़बार कल का प्रातःकालीन बनेगा। ऐसा हुआ भी। लेकिन कल का यूएनआई, जो क्षितिज पर चमक रहा था, आज उसके लिए अवसान हो गया &#8211; यह भी उतना ही सच है। </p>
<figure id="attachment_7530" aria-describedby="caption-attachment-7530" style="width: 643px" class="wp-caption alignright"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/Aveek_Sarkar_-_Kolkata_2011-12-08_7542_Cropped.jpeg"><img decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/Aveek_Sarkar_-_Kolkata_2011-12-08_7542_Cropped.jpeg" alt="" width="643" height="939" class="size-full wp-image-7530" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/Aveek_Sarkar_-_Kolkata_2011-12-08_7542_Cropped.jpeg 643w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/Aveek_Sarkar_-_Kolkata_2011-12-08_7542_Cropped-205x300.jpeg 205w" sizes="(max-width: 643px) 100vw, 643px" /></a><figcaption id="caption-attachment-7530" class="wp-caption-text">अवीक सरकार</figcaption></figure>
<p>बिस्मिल्लाह खान का जन्म हो गया था और वे शहनाई की दुनिया में अपना नाम स्थापित करने के लिए शहनाई में अपने मामा अली बक्स &#8216;विलायतु&#8217; खान के साथ बनारस स्थित विश्वनाथ मंदिर के चबूतरे पर &#8216;उस्ताद&#8217; बनने के लिए अपनी साँसें फूंक चुके थे। बिस्मिल्लाह खान का जन्म 21 मार्च, 1916 को डुमरांव (बिहार) में हुआ था, जबकि प्रफुल्ल सरकार को आनंद बाजार पत्रिका स्थापित करने के 23 वर्ष बाद 9 जून, 1945 उनके पुत्र अशोक कुमार सरकार को अवीक सरकार के रूप में पुत्ररत्न प्राप्त हुआ था। यानी प्रफुल्ल सरकार दादा बन गए। समय का खेल देखिए &#8211; आनंद बाजार पत्रिका भी क्षितिज पर पहुंचा, बिस्मिल्लाह खान भी विश्वनाथ मंदिर के चबूतरे से उठकर भारत रत्न बन गए; लेकिन अवीक सरकार और एबीपी समूह द्वारा लगभग 30 फीसदी यूनाइटेड न्यूज ऑफ़ इंडिया में शेयर होने के बाद भी यूएनआई रोता-बिलखता अपने परिसर से बाहर निकाल दिया गया।  </p>
<p><strong>जिस दिन श्री अवीक सरकार का जन्म हुआ था, उस कालखंड में सन 1942 में शुरू हुए &#8216;अंग्रेज भारत छोड़ो&#8217; आंदोलन अपने अंतिम चरण में लगभग प्रवेश कर चुका था। 9 जून, 1945 को कांग्रेसी नेता जवाहरलाल नेहरू को बरेली केंद्रीय कारा में स्थानांतरित किया गया था, और छह दिन बाद, उन्हें रिहा किया गया था। यह दौर एक तरफ जहाँ कलकत्ता से प्रकाशित समाचार पत्रों, मसलन आनंद बाजार पत्रिका, अमृत बाजार पत्रिका, बंदेमातरम, युगांतर जैसे क्रांतिकारी विचारधारा वाले अख़बारों के लिए क्षितिज पर छाने का समय था, पाठकों का विश्वास जितने का समय था, वहीँ वह दौर अंग्रेजी हुकूमत के लिए सूर्यास्त का समय संकेत दे रहा था। द्वितीय विश्वयुद्ध भी समाप्त हो गया था और सभी का ध्यान भारत की स्वतंत्रता पर केंद्रित हो रहा था।</strong> </p>
<p>आज अवीक सरकार, आनंद बाजार पत्रिका प्रकाशन समूह के उपाध्यक्ष और एडिटर एमेरिटस हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक किया। अपने ब्रिटेन प्रवास के दौरान उन्होंने &#8216;द संडे टाइम्स&#8217; के संपादक सर हेरोल्ड इवांस के अधीन प्रशिक्षण ली। &#8220;पेपर टाइगर्स&#8221; के लेखक निकोलस कोलरिज ने अपनी किताब में अवीक सरकार को &#8220;भारत का सबसे परिष्कृत अख़बार मालिक&#8221; बताया है, और आगे उन्हें &#8220;बेहद उम्दा पसंद और चुनाव वाला व्यक्ति&#8221; बताया है &#8211; फिर चाहे वह उनके खाने की बात हो या उनके कपड़ों की। आज अवीक सरकार &#8216;प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया&#8217;, &#8216;एबीपी न्यूज़ नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड&#8217;, &#8216;सीमा गैलरी प्राइवेट लिमिटेड&#8217; और &#8216;सरकार कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड&#8217; के निदेशक भी हैं। लेकिन यूएनआई के मामले में अवीक सरकार के साथ-साथ अन्य 26 शेयर होल्डरों ने जो &#8216;बर्ताव&#8217; किया, शायद समय में लिखा जायेगा। </p>
<p><strong>कितने-कितने शेयर के मालिक हैं कौन-कौन?  </strong></p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Share-1-2.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Share-1-2.jpg" alt="" width="2047" height="1365" class="aligncenter size-full wp-image-7532" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Share-1-2.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Share-1-2-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Share-1-2-1024x683.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Share-1-2-768x512.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Share-1-2-1536x1024.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p>आप कहेंगे कि यहाँ आविक सरकार पर इतनी बातें क्यों कही जा रही है। जरूरी है। यदि यूनाइटेड न्यूज ऑफ़ इंडिया के स्थापना काल के शेयरहोल्डिंग पैटर्न को देखा जाय (जो दस्तावेज कहता है), कुल 27 शेयर होल्डरों में आनंदबाजार पत्रिका प्राइवेट लिमिटेड, 6-प्रफुल्ल सरकार स्ट्रीट, कलकत्ता-700001 का 2214 (फेस वैल्यू 100) यानी कुल शेयर का 21.73 प्रतिशत के साथ-साथ आविक सरकार C/o एबीपी लिमिटेड, 6-प्रफुल्ल सरकार स्ट्रीट, कलकत्ता का 759 शेयर (7.45 %) और भी है। यानी कुल 2973 शेयर अर्थात 21.73 + 7.43 = 29.16 प्रतिशत उनका ही है। शेष में 70.84 फीसदी में 26 अन्य शेयर होल्डर्स हैं। इसके अन्य शेयर होल्डरों में दूसरे स्थान पर 1200 (फेस वैल्यू 100) शेयर के साथ &#8216;द स्टेट्समैन&#8217; शामिल है, जिसका प्रतिशत में 11.78 प्रतिशत है। तीसरे स्थान पर एक्सप्रेस पब्लिकेशन (मदुरै) लिमिटेड, एक्सप्रेस गार्डन्स, 29-2, मेनरोड, अम्बत्तुर इंडस्ट्रियल एस्टेट, चेन्नई-600058 है, जिनके पास 801 शेयर (7.86 %) के अलावे दी इंडियन एक्सप्रेस लिमिटेड, एक्सप्रेस टावर्स, नरीमन पॉइंट, मुंबई- का 125 शेयर (1.23 %) है।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Share-3-4.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Share-3-4.jpg" alt="" width="2047" height="1365" class="aligncenter size-full wp-image-7533" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Share-3-4.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Share-3-4-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Share-3-4-1024x683.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Share-3-4-768x512.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Share-3-4-1536x1024.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p>अमृत बाजार पत्रिका, 9-इंडिया एक्सचेंज प्लेस, 7 वां तल्ला, रूम नंबर-1A, कलकत्ता-700001 का 744 शेयर (7.3 %) और तुषार कांति घोष का 5 शेयर (0.05 %) है। बेनेट कोलेमन एंड कंपनी लिमिटेड का 548 शेयर (5.38 %) है, मणिपाल मीडिया नेटवर्क लिमिटेड का 600 शेयर (5.89%), दी प्रिंटर (मैसूर) लिमिटेड का 600 (5.89 %), नवा समाज लिमिटेड का 50 शेयर (0.49%), एच.टी. मीडिया लिमिटेड का 738 शेयर (7.24%)  संतोषनाथ, हिंदुस्तान टाइम्स लिमिटेड का 1 शेयर (0.01%), कस्तूरी एंड साँस लिमिटेड, कस्तूरी बिल्डिंग, माउन्ट रोड, चेन्नई का 345 शेयर (3.39%), सकल पेपर्स प्राइवेट लिमिटेड, पुणे का 100 शेयर (0.98%), जुगांतर लिमिटेड का 5 शेयर (0.05%), न्यूजपेपर्स एंड पब्लिकेशंस लिमिटेड, माझारूलहक पथ, पटना का 736 शेयर (7.24%),  नव भारत, नागपुर का 250 शेयर (2.45 %) , जागरण प्रकाशन लिमिटेड का 150 शेयर (1.47%) के साथ पीसी गुप्ता, जागरण प्रकाशन लिमिटेड का 1 शेयर (0.01%), एससी रॉय, 36-न्यू रोड, अलीपुर, कोलकाता का 2 शेयर (0.02%), राइटर्स एंड पब्लिशर्स लिमिटेड, जी-3A, काननवाले चैम्बर्स, माहिम वेस्ट, मुंबई का 100 शेयर (0.98%), एसोसिएटेड पब्लिशर्स (मद्रास) लिमिटेड का 5 शेयर (0.05%), सर्वेंट्स ऑफ़ पीपुल्स सोसाइटी, गोपालबंधु भवन, कटक का 100 शेयर (0.98%), राम एस तरनेजा और रानी तरनेजा, 4-पश्मीना, 33 A, पेडर रोड, मुंबई का 6 शेयर (0.06%), मोहम्मद यूनुस असोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड, हेराल्ड हॉउस, बहादुरशाह ज़फर मार्ग,नई दिल्ली का 1 शेयर (0.01%), और जी कस्तूरी का 1 शेयर (0.01%) है। </p>
<figure id="attachment_7531" aria-describedby="caption-attachment-7531" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Photo-3.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Photo-3.jpg" alt="" width="2047" height="1365" class="size-full wp-image-7531" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Photo-3.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Photo-3-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Photo-3-1024x683.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Photo-3-768x512.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Photo-3-1536x1024.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-7531" class="wp-caption-text">यूएनआई परिसर का दृश्य जिस रात परिसर को न्यायालय के आदेश से खाली कराया गया था। तस्वीर: संजय शर्मा</figcaption></figure>
<p><strong>क्या कहते हैं यूएनआई कर्मचारी के नेता एम एल जोशी </strong></p>
<p>यूएनआई कर्मचारी यूनियन के पूर्व अध्यक्ष और कन्फेडरेशन ऑफ़ न्यूजपेपर्स एंड न्यूज एजेंसीज एम्पलॉयज ऑर्गेनाइजेशन के कोषाध्यक्ष एम एल जोशी <strong>आर्यावर्तइंडियननेशन.कॉम </strong>से बात करते हुए कहते हैं: &#8220;इतने बड़े-बड़े लोगों के शेयर होल्डर्स होते हुए भी कोई यूएनआई को बचाने में आगे नहीं आये। वैसे यूएनआई के सम्पूर्ण हादसे के लिए एबीपी सम्पूह और समूह के स्वामी अवीक सरकार को दोषी हैं ।&#8221; आर्यावर्तइंडियननेशन।कॉम अवीक सरकार की बातों को जानने के लिए ईमेल भी किया ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्या सच में एबीपी समूह दोषी है? लेकिन इस कहानी को लिखते समय तक उनका कोई उत्तर नहीं आया। </p>
<blockquote><p>जोशी का कहना है कि सन 1979 में पालेकर वेज बोर्ड आया था। न्यायमूर्ति (अवकाशप्राप्त) डीजी पालेकर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश रह चुके थे। पालेकर के बाद मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश यू.एन. बछावत का वेज बोर्ड बना था, जो बछावत वेज बोर्ड के नाम से जाना गया। यह वेज बोर्ड 1989 में अपना अनुशंसा प्रस्तुत किया। बछावत के बाद गौहाटी उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति के.पी.एस. मणिसाना की अध्यक्षता वाला मणिसाना वेज बोर्ड 2000 में अपना रिपोर्ट प्रस्तुत किया और अंत में मुंबई उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरबख्श राय मजिथा की वेजबोड अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत किया। </p></blockquote>
<figure id="attachment_7534" aria-describedby="caption-attachment-7534" style="width: 2560px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/4-scaled.jpeg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/4-scaled.jpeg" alt="" width="2560" height="1707" class="size-full wp-image-7534" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/4-scaled.jpeg 2560w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/4-300x200.jpeg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/4-1024x683.jpeg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/4-768x512.jpeg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/4-1536x1024.jpeg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/4-2048x1365.jpeg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></a><figcaption id="caption-attachment-7534" class="wp-caption-text">यूएनआई परिसर से सभी कर्मचारियों, पत्रकारों, गैर-पत्रकारों को हटाने के बाद प्रवेश द्वार सील करते अधिकारी &#8211; तस्वीर: संजय शर्मा<br /></figcaption></figure>
<p>जोशी का कहना है कि उस समय तक हिंदुस्तान टाइम्स समूह के वरिष्ठ अधिकारी नरेश मोहन यूएनआई की देखरेख करने के लिए आ गए थे। मणिसाना वेज बोर्ड पत्रकारों और ग़ैर-पत्रकारों के वेतन और अन्य आर्थिक सुविधाओं में लाभ अनुशंसित किया था। उस समय एक जॉइंट एक्शन कमिटी भी बना जो यह निर्णय लिए की वेज बोर्ड के अनुशंसा को तीन बार में लागू कर भुगतान किया जायेगा। अगर देखा जाय तो यूएनआई की आर्थिक स्थिति में अधोमुखी गिरावट यहीं से प्रारम्भ हुआ। वैसे इसके लिए सिर्फ नरेश मोहन (अब दिवंगत) को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है, उनके अलावे सभी शेयर होल्डर उतने ही दोषी हैं। नरेश मोहन के समय यूएनआई के पास 25 करोड़ रूपये का एफडीआर था। लेकिन वेज बोर्ड लागु होने के साथ ही, एफडीआर क्रमशः समाप्त होने लगा। इसका मुख्य कारण था आमदनी के अन्य श्रोतों की कमी। </p>
<p><strong>जब उनसे पूछा कि यूएनआई एक प्रतिष्ठित और विश्वसनीय समाचार सेवा होने के बाद भी इसका सब्सक्रिप्शन समाप्त क्यों होता गया? जोशी का कहना था कि &#8220;आम तौर पर दोनों समाचार एजेंसियों में नब्बे फीसदी से अधिक शेयर होल्डर्स एक ही है। यह कहना मुश्किल है, लेकिन जब व्यवहार को देखते हैं तो यही प्रतीत होता है कि उन लोगों का पीटीआई के प्रति एक अलग सोच है और यूएनआई के प्रति अलग। परिणामस्वरूप वे पीटीआई के सब्सक्रिप्शन को बरकरार रखते यूएनआई का सब्सक्रिप्शन समाप्त करने लगे। सब्सक्रिप्शन का समाप्त होना आर्थिक रूप से कमजोर करने का तरीका बना। इतना ही नहीं, उन शेयर होल्डरों का यूएनआई के क्रियाकलाप में भी कोई दिलचस्पी नहीं रहा। साथ ही, यूएनआई के तरफ से अगर कोई भी सकारात्मक पहल की जाती थी, तो उसमें उनका समर्थन तो नहीं ही रहता था, अलबत्ता रोड़े भी अटकने लगे थे। जब वित्तीय स्थिति ख़राब होने लगी थी, कई मर्तबा फाइनेंसियल मोबिलाइजेशन के लिए जो भी प्रस्ताव लाये जाते थे, उसे ठुकराना उन शेयर होल्डरों की एक आदत हो गयी थी। यूएनआई में 27 शेयर होल्डर्स थे, उनमें कई &#8216;निष्क्रिय&#8217; थे। इसका सबसे बड़ा कारण था मुनाफा का नहीं बाँट पाना।&#8221;</strong></p>
<p>जोशी का कहना है कि जब भी बाहर से पैसे एकत्रित करने का प्रयास किया गया, स्वाभाविक है पैसा निवेश करने वाला अपना आधिपत्य भी चाहेगा, लेकिन ये शेयर धारक ऐसा नहीं होने देना चाहते थे। साल 2006 में जब वित्तीय स्थिति संकट में आने लगी, यूएनआई के साथ-साथ कर्मचारियों का भविष्य भी संकट में दिखने लगा, नरेश मोहन पत्रकार और गैर-पत्रकारों के साथ बैठक किये। अब तक संस्थान में पुरानी पद्धतियां, तकनीक बदलने लगी थी, लोगों की जरूरतें कम होने लगी थी, स्वाभाविक है प्रबंधन अतिरिक्त लोगों को हटाने पर आमादा होगी, नरेश मोहन ने भी यही किया था। उनके अनुसार करीब 350 &#8216;अनुत्पादक&#8217;, &#8216;अतिरिक्त&#8217; लोगों को या तो बाहर निकालने पर जोर दे रहे थे, या फिर यह कर रहे थे कि वेतन को कम करना होगा, इसके अतिरिक्त दूसरा कोई विकल्प नहीं था। यूनियन का प्रतिनिधि होने के कारण यह दोनोने शर्त हमें मंजूर नहीं थी। नरेश मोहन जाने से पहले एक कमेटी बनाकर चले गए जिसका कर्ताधर्ता एम.के लौल थे। अब तक वित्तीय स्थित बैकलॉग में चली गयी थी। </p>
<p><strong>जब जी टीवी के मालिक सुभाष चंद्रा यूएनआई आये </strong></p>
<p>जोशी आगे कहते हैं कि 2006 में निदेशक मंडलों का निर्णय हुआ कि एजेंसी का शेयर किसी और के हाथों बेचा जाए ताकि पैसे का एकत्रीकरण हो। और यहीं आगमन हुआ &#8211; एस्सेल ग्रुप के प्रमुख सुभाष चंद्रा का, जो यूएनआई का 51 प्रतिशत हिस्सेदारी 32 करोड़ रुपये में खरीद कर आगे आये। इसमें चार अन्य बोली लगाने वाले भी थे, लेकिन सुभाष चंद्रा को &#8216;अप्रूव&#8217; किया गया। जब उनसे पूछा कि आखिर इतने शेयर होल्डरों की उपस्थिति में, उसमें भी धनाढ्यों की उपस्थिति में सुभाष चंद्रा कहाँ से अवतरित हो गए और बोर्ड ने उन्हें कैसे &#8216;अप्रूव&#8217; कर दिया? शेष अन्य चार बोली लगाने वालों का क्या हुआ? जोशी कहते हैं 26 सितंबर, 2006 को बोर्ड की वार्षिक आम बैठक हुई। उस बैठक में कुछ हो अथवा नहीं, &#8216;लोब्बिंग&#8217; प्रारम्भ हो गया। दो फांक में बंट गए। लेफ्ट विंग और राइट विंग हो गया। इसमें दिल्ली के साथ साथ राष्ट्रीय नेताओं ने भी आकर विरोध करने लगे। इस बात पर दो राय नहीं थी की यूएनआई को पैसों की ज़रूरत थी ताकि तत्कालीन आर्थिक विपन्नता और मुसीबतों का सामना किया जा सके। लेकिन इस बात का भी उतना ही भय था की सुभाष चंद्रा यूएनआई पर कब्ज़ा भी कर सकते हैं या फिर इस प्रतिष्ठित समाचार एजेंसी का उपयोग अपनी संस्थान को मजबूत करने में भी कर सकते हैं। चार शेयर होल्डरों &#8211; एबीपी समूह, दी हिन्दू समूह, मणिपाल और डेक्कन हेराल्ड इस मसले को लेकर दोनों शेयर धारक और कुछ अन्य &#8216;कंपनी लॉ बोर्ड&#8217; पहुँच गए।&#8221;</p>
<figure id="attachment_7535" aria-describedby="caption-attachment-7535" style="width: 800px" class="wp-caption alignleft"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/zee.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/zee.jpg" alt="" width="800" height="450" class="size-full wp-image-7535" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/zee.jpg 800w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/zee-300x169.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/zee-768x432.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 800px) 100vw, 800px" /></a><figcaption id="caption-attachment-7535" class="wp-caption-text">सुभाष चंद्रा, जी-टीवी के मालिक </figcaption></figure>
<p>3 अक्टूबर, 2006 को सुभाष चंद्रा यूएनआई दफ्तर आये। चारो तरफ से उनका घेराव भी हुआ था। वह बात भी करना चाहे, यह भी कहे कि किसी को नहीं निकला जाएगा। तीन घंटे तक हो-हल्ला होता राह। लेकिन वह नहीं हो सका जो वे चाहते थे। 5 अक्टूबर, 2006 को धरना-प्रदर्शन भी हुआ। इस कालखंड में प्रियरंजन दास मुंशी, जनार्दन द्विवेदी और अन्य नेताओं ने भी इस प्रकरण में शामिल हुए। जो बैठक यूएनआई के परिसर में होना था, वह ललित होटल में चला गया। इस बीच, कंपनी लॉ बोर्ड ने सुभाष चंद्र की खरीद को निरस्त का दिया और यूएनआई को अपने स्तर पर अन्य उपायों के साथ धन एकत्रित करने को कहा। साथ ही, यह भी कहा कि अगर शेयरहोल्डर्स खुद ही इस न्यूज़ एजेंसी की सेवाओं का सब्सक्रिप्शन ले लें, तो इससे बहुत मदद मिलेगी। सब्सक्रिप्शन की दरें अखबार के प्रसार के आधार पर हर महीने 10,000 रुपये से लेकर 7 लाख रुपये तक की है ।</p>
<p><strong>इस बीच, यूएनआई को एक और आर्थिक धक्का लगा जब अचानक 17 लाख रुपये मासिक की सब्सिडी समाप्त हो गयी। यह सब्सिडी नेशनल काउंसिल फॉर प्रमोशन ऑफ़ उर्दू लैंग्वेज&#8217; से मिलती थी केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के तहत उर्दू भाषा को बढ़ावा देने के लिए मुख्य निगरानी संस्था के तौर पर काम करती है। यह सब्सिडी उन छोटे और मध्यम प्रसार वाले उर्दू अखबारों के लिए एक वित्तीय सहायता थी, जिसके जरिए वे यूएनआई की सेवा 50 प्रतिशत कम कीमत पर हासिल कर सकते थे। सब्सिडी रद्द होने के कारण कई उर्दू अखबारों ने यूएनआई से अपनी सदस्यता वापस ले ली।</strong> </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-1-scaled.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-1-scaled.jpg" alt="" width="1067" height="2560" class="aligncenter size-full wp-image-7536" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-1-scaled.jpg 1067w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-1-125x300.jpg 125w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-1-427x1024.jpg 427w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-1-768x1842.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-1-640x1536.jpg 640w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-1-854x2048.jpg 854w" sizes="auto, (max-width: 1067px) 100vw, 1067px" /></a></p>
<p>ज्ञातव्य हो कि यूएनआई 1992 में उर्दू टेलीप्रिंटर सेवा प्रारम्भ करने वाली पहली समाचार एजेंसी थी। इस घटना के बाद भी यूएनआई को आर्थिक झटका लगा। वैसे आज तक इस बात का खुलासा नहीं हो पाया कि इतने बड़े समाचार एम्पायर का मालिक होने के बाद भी अचानक सुभाष चंद्रा को यूएनआई जैसी संस्था के प्रति लगाव कैसे हो गया? लोगों का कहना है कि शायद यूएनआई जिस स्थान पर स्थित था, वह जमीन किसी को भी अपनी ओर आकर्षित कर सकता है, खासकर जो &#8216;व्यवसायी&#8217; हैं। इस दृष्टि से अगर एबीपी, या दी हिन्दू, या मणिपाल, या डेक्कन हेराल्ड सुभाष चंद्रा के खरीद-फरोश के लिए कंपनी लॉ बोर्ड के पास गया तो क्या गलत किया ?</p>
<p><strong>क्या कहते हैं भूमि और विकास मंत्रालय के एक अवकाश प्राप्त अधिकारी </strong></p>
<p>बहरहाल, भारत सरकार के <strong>भूमि और विकास मंत्रालय</strong> के एक अवकाश प्राप्त अधिकारी (अपना नाम नहीं लिखने के शर्त पर) <strong>आर्यावर्तइंडियननेशन.कॉम</strong> को कहते हैं: &#8220;शेयरहोल्डर तो यह कंपनी (दी न्यूजपेपर एंड पब्लिकेशन लिमिटेड) भी था। सवा-सात प्रतिशत शेयर का मालिक था यह कंपनी। इस कंपनी के तत्कालीन प्रबंधन उपेंद्र आचार्य के नेतृत्व में शुरुआती दिनों में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाया। यहाँ तक कि पटना के अलावे भी यूएनआई को स्थापित करने में मदद किये। लेकिन अचानक संस्थान के स्वामी महाराजाधिराज डॉ. सर कामेश्वर सिंह की मृत्यु के बाद जो हश्र उनकी कंपनी का हुआ, दरभंगा राज का हुआ; आज यूएनआई उसी रास्ते पर है। यूएनआई के स्थापना के बीस वर्ष बाद दिल्ली शहर के सबसे महत्वपूर्ण इलाके में कार्यालय के लिए भूमि आवंटित हुआ। 1979 के बाद, केंद्र सरकार में कई ऐसे अवसर थे, जिस अवसर का लाभ उठाकर यूएनआई 9-रफ़ी मार्ग पर एक बेहतरीन और आकर्षक भवन खड़ा कर सकता था। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-2.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-2.jpg" alt="" width="1617" height="1355" class="aligncenter size-full wp-image-7537" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-2.jpg 1617w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-2-300x251.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-2-1024x858.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-2-768x644.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-2-1536x1287.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1617px) 100vw, 1617px" /></a></p>
<p><strong>वे आगे कहते हैं: &#8220;अपनी मृत्यु से कुछ पूर्व तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के मंत्रिमंडल में भीष्म नारायण सिंह  और बूटा सिंह शहरी विकास और हाउसिंग मंत्री थे। उस समय कुछ चर्चाएं भी हुयी थी। अगर कोई आगे बढ़ता तो मामला उसी समय निपट जाता। इसके बाद राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने। राजीव गांधी पत्रकारों और पत्रकारिता के साथ बहुत मधुर सम्बन्ध था। एक बार उन्होंने इस विषय की चर्चा भी किये थे। फिर पीवी नरसिम्हा राव आये, अटल बिहार वाजपेयी और डॉ. मनमोहन सिंह आये। यूएनआई के साथ-साथ यूएनआई के संवाददाताओं और प्रबंधकों के साथ (कुछ खास शेयर होल्डर सहित) इन प्रधानमंत्रियों का जितना बेहतर सम्बन्ध था, शायद आज के लोग सोच भी नहीं सकते। सत्ता के गलियारे में इस बात की चर्चा भी थी कि अगर यूएनआई सरकार से देश की बेहतर पत्रकारिता के नाम पर आर्थिक मदद (बैंक ऋण सहित) मांगता है, तो शायद न तो प्रधानमंत्री कार्यालय और ना ही शहरी विकास मंत्रालय पीछे होता। लेकिन यहां तो यूएनआई के तत्कालीन अधिकारियों, यहाँ तक कि पत्रकारगण भी, सरकार और मंत्रालय के साथ चिठ्ठी-चिठ्ठी खेलने में लगे रहे और चिठ्ठी-चिठ्ठी का वह खेल इतना भयंकर हो गया कि देश का एक महत्वपूर्ण समाचार एजेंसी अपनी जमीन और जमीर से बेदखल हो गया &#8211; यह दुर्भाग्य है।&#8221;</strong></p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-3.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-3.jpg" alt="" width="1399" height="1965" class="aligncenter size-full wp-image-7538" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-3.jpg 1399w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-3-214x300.jpg 214w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-3-729x1024.jpg 729w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-3-768x1079.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-3-1094x1536.jpg 1094w" sizes="auto, (max-width: 1399px) 100vw, 1399px" /></a></p>
<p>भूमि और विकास मंत्रालय के अधिकारी आगे कहते हैं: &#8220;मेरी आयु आज 85+ वर्ष की है। मेरी आयु के लोग जो यूएनआई से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जुड़े थे, आज उनकी संख्यां ऊँगली की गिनती पर आ गयी है, आज के लोग, चाहे वे सत्ता के गलियारे में हैं या सत्ता के बाहर, या फिर सत्ता में अपनी पहचान बनाने के लिए सभी तरह के कर्मकांड कर रहे हैं, वे उस दौड़ के बारे में सोच भी नहीं सकते जब यूएनआई के पत्रकार से लेकर गैर-पत्रकार तक, इस संस्थान को बनाने में कितनी मेहनत किये थे। लेकिन, 1979 के बाद से लगातार, यूएनआई के तत्कालीन और आने वाले अधिकारी चिठ्ठी-चिठ्ठी का खेल खेलते इसके अस्तित्व पर ही प्रश्नचिन्ह लगा दिए। हम सिर्फ शेयर होल्डर्स को दोषी नहीं करार कर सकते हैं। यहाँ कार्य करने वाले लोग, चाहे पत्रकार हो या गैर पत्रकार उतना ही दोषी हैं। आज भी समय है कि लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस विषय का निदान के लिए गुहार करें। गुहार करने से हम छोटे नहीं हो जायेंगे और अगर सैकड़ों परिवारों के हित के लिए छोटे हो भी जाते हैं (जैसा लोग सोचते हैं) तो इसमें कोई बुराई नहीं है। यह मेरी सोच है। ऐसा नहीं कि हमें क्या लाभ होगा, बल्कि इसलिए की यूएनआई की पत्रकारिता बच पायेगी।&#8221;</p>
<p><strong>चिठ्ठी-चिठ्ठी का खेला </strong></p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-4.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-4.jpg" alt="" width="1422" height="1352" class="aligncenter size-full wp-image-7539" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-4.jpg 1422w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-4-300x285.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-4-1024x974.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-4-768x730.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-4-24x24.jpg 24w" sizes="auto, (max-width: 1422px) 100vw, 1422px" /></a></p>
<p><strong>*</strong> 14.12.1979 को भूमि और विकास कार्यालय (L&#038;DO) द्वारा यूएनआई के पक्ष में एक आवंटन पत्र जारी किया गया था, जिसके द्वारा 9, रफी मार्ग, नई दिल्ली में स्थित भूमि आवंटित की गई थी। उक्त पत्र में भूखंड का क्षेत्रफल 1.453 एकड़ (0.588 हेक्टेयर) दर्ज किया गया था। यह आवंटन न केवल यूएनआई के लाभ के लिए किया गया था, बल्कि चार अन्य सहभागी समाचार मीडिया संस्थानों &#8211; प्रेस एसोसिएशन ऑफ इंडिया, प्रेस इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, समाचार भारती और हिंदुस्तान समाचार &#8211; के संबंध में भी किया गया था; इसका उद्देश्य एक संयुक्त कार्यालय परिसर का निर्माण करना था, जिसमें उक्त समाचार मीडिया संगठनों के कार्यालय स्थित हो सकें।</p>
<p><strong>*</strong> 08.08.1980 को, दिनांक 14.12.1979 के आवंटन पत्र में संशोधन किया गया, जिसके तहत प्लॉट के क्षेत्रफल के साथ-साथ उससे संबंधित देय प्रीमियम और ज़मीनी किराए के संबंध में कुछ छोटे-मोटे बदलाव किए गए। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-5a-scaled.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-5a-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1709" class="aligncenter size-full wp-image-7540" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-5a-scaled.jpg 2560w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-5a-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-5a-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-5a-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-5a-1536x1025.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-5a-2048x1367.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></a></p>
<p><strong>*</strong> 14.12.1979 की आवंटन चिट्ठी के अनुसार, जमीन का औपचारिक कब्जा सौंपे जाने की तारीख से दो साल के अंदर प्रस्तावित इमारत का निर्माण पूरा करना ज़रूरी था। </p>
<p><strong>* </strong>यूएनआई दावा किया कि उक्त आवंटन चिट्ठी में तय किया गया प्रीमियम और जमीन का किराया विधिवत चुका दिया गया था, और प्लॉट पर मौजूद मौजूदा ऊपरी ढांचे की घटी हुई लागत भी जमा कर दी गई थी। इसके अलावा यह भी कहा गया है कि 22.01.1981 का एक समझौता ज्ञापन, और उसके साथ 25.02.1981 की एक सुधार विलेख, जिसमें उक्त समझौता ज्ञापन में संशोधन करने की मांग की गई थी, निष्पादित किए गए थे। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-5b-scaled.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-5b-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1709" class="aligncenter size-full wp-image-7541" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-5b-scaled.jpg 2560w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-5b-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-5b-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-5b-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-5b-1536x1025.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-5b-2048x1367.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></a></p>
<p><strong>*</strong> 07.11.1986 की एक संशोधित आवंटन चिट्ठी जारी की गई, जिसने 08.08.1980 की पिछली कार्यालय चिट्ठी संख्या L-I-II-I(576)/78 का स्थान ले लिया।</p>
<p><strong>*</strong> 07.11.1986 के आवंटन पत्र के खंड (xi) में यह प्रावधान था कि उक्त मीडिया संस्थानों को आपस में एक समझौता करना होगा, जिसमें यह तय किया जाएगा कि प्रस्तावित भवन के निर्माण की लागत किस आधार पर आपस में बांटी जाएगी; साथ ही, इसमें अन्य प्रासंगिक मामलों को भी शामिल किया जाएगा, जिनमें संपत्ति के निर्माण, प्रबंधन और रखरखाव की व्यवस्थाएं शामिल हैं। यह स्वीकार्य है कि 07.11.1986 के आवंटन पत्र के अनुसार जो आवश्यक कदम उठाए जाने थे, वे नहीं उठाए गए; क्योंकि न तो संबंधित आवंटियों के बीच कोई समझौता किया गया और न ही आवश्यक निर्माण कार्य शुरू करने के लिए कोई कदम उठाया गया।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-6-scaled.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-6-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1785" class="aligncenter size-full wp-image-7542" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-6-scaled.jpg 2560w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-6-300x209.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-6-1024x714.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-6-768x536.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-6-1536x1071.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-6-2048x1428.jpg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-6-100x70.jpg 100w" sizes="auto, (max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></a></p>
<p><strong>*</strong> 17.06.1999 को, 9, रफी मार्ग, नई दिल्ली में स्थित ज़मीन के संबंध में एक और आवंटन पत्र जारी किया गया। उक्त पत्र में यह दर्ज है कि प्लॉट का कुल क्षेत्रफल 1.841 एकड़ था, जिसमें से 1 एकड़ जमीन पहले ही यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया, प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया और प्रेस एसोसिएशन को संयुक्त रूप से आवंटित की जा चुकी थी। इस पत्र में आगे शेष 0.841 एकड़ जमीन प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और विदेश व्यापार संयुक्त महानिदेशक, वाणिज्य मंत्रालय को आवंटित करने का प्रस्ताव था। इसमें आगे यह भी परिकल्पना की गई थी कि पूरे प्लॉट पर एक मिश्रित भवन का निर्माण केंद्रीय लोक निर्माण विभाग द्वारा किया जाएगा, जिसमें विभिन्न आवंटिती उक्त आवंटन पत्र में निर्दिष्ट अनुपात में निर्मित स्थान को साझा करने के हकदार होंगे।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-7-scaled.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-7-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1785" class="aligncenter size-full wp-image-7543" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-7-scaled.jpg 2560w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-7-300x209.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-7-1024x714.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-7-768x536.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-7-1536x1071.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-7-2048x1428.jpg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-7-100x70.jpg 100w" sizes="auto, (max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></a></p>
<p><strong>*</strong> 27.06.2000 की तारीख वाले पत्र का उद्देश्य प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया, प्रेस एसोसिएशन और वाणिज्य मंत्रालय के विदेश व्यापार के संयुक्त महानिदेशक के पक्ष में पहले किए गए आवंटनों को रद्द करना था।  उक्त संचार में आगे प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को 1244.76 वर्ग मीटर और याचिकाकर्ता को 620.76 वर्ग मीटर अतिरिक्त भूमि आवंटित करने का प्रावधान है; यह आवंटन उस 1400 वर्ग मीटर भूमि के अतिरिक्त है जो पहले ही प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को आवंटित की जा चुकी थी, और उस 2024 वर्ग मीटर भूमि के अतिरिक्त है जो पहले ही याचिकाकर्ता/यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया को आवंटित की जा चुकी थी।</p>
<p><strong>*</strong> इसके बाद, L&#038;DO द्वारा 30.03.2005 को यूएनआई को भेजे गए संचार के माध्यम से, 620.76 वर्ग मीटर का वह अतिरिक्त क्षेत्र रद्द कर दिया गया, जो यूएनआई को मूल रूप से आवंटित 2024 वर्ग मीटर भूमि के अतिरिक्त आवंटित किया गया था।<br />
 <br />
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<p><strong>*</strong> 09.10.2012 के पत्र के माध्यम से यह सूचित किया गया था कि सक्षम प्राधिकारी ने 9, रफी मार्ग, नई दिल्ली में प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और यूनाइटेड न्यूज़ ऑफ इंडिया के लिए एक मिश्रित भवन के निर्माण हेतु नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन लिमिटेड के माध्यम से स्वीकृति प्रदान कर दी है; यह स्वीकृति सेंट्रल पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट के स्थान पर दी गई है, जिसे पहले निष्पादन एजेंसी के रूप में परिकल्पित किया गया था। </p>
<p><strong>*</strong> 20.02.2018 को, यूएनआई ने भूमि और विकास कार्यालय (L&#038;DO) को एक पत्र भेजा, जिसमें यह स्पष्टीकरण मांगा गया था कि क्या याचिकाकर्ता, भारतीय प्रेस परिषद और शहरी विकास मंत्रालय के बीच एक त्रिपक्षीय समझौता किया जाना चाहिए, इस तथ्य को देखते हुए कि तब तक लगभग 620 वर्ग मीटर का अतिरिक्त क्षेत्र केंद्रीय लोक निर्माण विभाग /सरकारी उपयोग के लिए निर्धारित किया जा चुका था। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-9-scaled.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-9-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1785" class="aligncenter size-full wp-image-7545" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-9-scaled.jpg 2560w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-9-300x209.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-9-1024x714.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-9-768x536.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-9-1536x1071.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-9-2048x1428.jpg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-9-100x70.jpg 100w" sizes="auto, (max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></a></p>
<p><strong>*</strong> यूएनआई ने L&#038;DO को 30.05.2018 को एक रिमाइंडर भेजा, जिसमें उसने इस मामले में स्पष्टीकरण के लिए अपने अनुरोध को दोहराया।</p>
<p><strong>*</strong> यूएनआई ने L&#038;DO को 09.12.2019 को एक और पत्र भेजा, जिसमें L&#038;DO के कार्यालय में 29.11.2018 को हुई एक बैठक का ज़िक्र किया गया था। उस बैठक में यह बात सामने आई कि 620 वर्ग मीटर का वह अतिरिक्त क्षेत्र, जो पहले याचिकाकर्ता को आवंटित किया गया था और जिसका आवंटन बाद में 30.03.2005 के पत्र के ज़रिए रद्द कर दिया गया था, अब &#8216;प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया&#8217; को आवंटित करने का प्रस्ताव था। इसके परिणामस्वरूप, 620.76 वर्ग मीटर का वह क्षेत्र, अंततः 15.03.2021 के पत्र के जरिए &#8216;प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया&#8217; को आवंटित कर दिया गया। </p>
<p><strong>*</strong> 26. 23.11.2022 के एक पत्र के माध्यम से, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने एक आपत्ति उठाई, जिसमें कहा गया था कि यूएनआई ने कथित तौर पर 620 वर्ग मीटर भूमि के उस हिस्से पर एक रेस्तरां/कैंटीन चलाना शुरू कर दिया है, जो प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को आवंटित किया गया था; और यह कार्य उसने बिना किसी पूर्व सूचना के तथा आवंटन को नियंत्रित करने वाले नियमों और शर्तों का उल्लंघन करते हुए किया है।</p>
<p><strong>*</strong> 24.01.2022 के एक पत्र के माध्यम से, प्रस्तावित भवन के निर्माण के बाद और उसका कब्जा प्राप्त करने के उपरांत, उस भवन के 70% (सत्तर प्रतिशत) तक हिस्से को व्यावसायिक रूप से पट्टे पर देने की अनुमति मांगी थी। हालांकि, यूएनआई  ने प्रस्तावित इमारत के बन जाने के बाद उसके एक हिस्से को कमर्शियल तौर पर लीज़ पर देने की जो अनुमति माँगी थी, उसे L&#038;DO ने 29.03.2022 की बातचीत के ज़रिए नामंज़ूर कर दिया। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-10.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-10.jpg" alt="" width="1577" height="1864" class="aligncenter size-full wp-image-7546" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-10.jpg 1577w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-10-254x300.jpg 254w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-10-866x1024.jpg 866w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-10-768x908.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-10-1300x1536.jpg 1300w" sizes="auto, (max-width: 1577px) 100vw, 1577px" /></a></p>
<p><strong>*</strong> 18.05.2022 के एक ईमेल के ज़रिए बताया कि, मौजूदा आर्थिक हालात को देखते हुए, वह फ़िलहाल प्रस्तावित मिली-जुली इमारत के निर्माण में हिस्सा लेने में असमर्थ है और उसने प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया से अनुरोध किया कि या तो वह अपने शेयरधारकों द्वारा प्रस्तावित फ़ंड आने के नतीजे का इंतज़ार करे या फिर ज़मीन के अपने अलॉट किए गए हिस्से पर निर्माण का काम आगे बढ़ाए।</p>
<p><strong>*</strong> 19.07.2022 की एक चिट्ठी में यह दर्ज है कि प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया ने कई मौकों पर याचिकाकर्ता से 620 वर्ग मीटर ज़मीन खाली करने का अनुरोध किया था, जो उसे आवंटित की गई थी।  प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने 20.07.2022 के पत्र के ज़रिए L&#038;DO से इस मुद्दे को सुलझाने के लिए एक मीटिंग बुलाने का अनुरोध किया। हालांकि, यह मामला अनसुलझा ही रहा।</p>
<p><strong>*</strong> 08.08.2022 को यूएनआई द्वारा प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया को भेजे गए एक ई-मेल में, यूएनआई ने फिर से कहा कि वह आर्थिक दिक्कतों की वजह से प्रस्तावित इमारत के निर्माण में हिस्सा लेने की स्थिति में नहीं है। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-11.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-11.jpg" alt="" width="1577" height="1864" class="aligncenter size-full wp-image-7547" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-11.jpg 1577w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-11-254x300.jpg 254w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-11-866x1024.jpg 866w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-11-768x908.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-11-1300x1536.jpg 1300w" sizes="auto, (max-width: 1577px) 100vw, 1577px" /></a></p>
<p><strong>* </strong>12.01.2023 को L&#038;DO द्वारा यूएनआई को एक &#8216;कारण बताओ नोटिस&#8217; जारी किया गया।  </p>
<p><strong>*</strong>  14.02.2023 को &#8216;कारण बताओ नोटिस&#8217; के संबंध में एक अस्पष्ट और मनमाना जवाब प्रस्तुत किया। यूएनआई, अन्य बातों के साथ-साथ, यह कहा कि चूंकि उस समय उसके पास &#8216;निदेशक मंडल&#8217; नहीं था, इसलिए वह उक्त &#8216;कारण बताओ नोटिस&#8217; का समुचित जवाब देने में असमर्थ होगा।  </p>
<p><strong>*</strong> 29.03.2023 का वह विवादित निरस्तीकरण पत्र जारी किया गया, जिसके द्वारा यूएनआई के पक्ष में किया गया आवंटन रद्द कर दिया गया।</p>
<p><strong>*</strong> 12.02.2025 को CIRP की प्रक्रिया NCLT द्वारा को पारित एक आदेश के साथ समाप्त हुई, जिसके तहत सफल रिज़ॉल्यूशन आवेदक, यानी &#8216;द स्टेट्समैन लिमिटेड&#8217; द्वारा प्रस्तुत रिज़ॉल्यूशन योजना को मंज़ूरी दे दी गई। </p>
<p><strong>*</strong>  08.07.2025 को, प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया ने एक आवेदन दायर किया, जिसमें अन्य बातों के अलावा यह आरोप लगाया गया कि यूएनआई विचाराधीन ज़मीन पर अनधिकृत निर्माण कार्य कर रहा है; इसके साथ ही, यह निर्देश देने की मांग की गई कि उस स्थल (साइट) पर सभी प्रकार के निर्माण कार्य तत्काल रोक दिए जाएं। <br />
<strong><br />
*</strong> 13.08.2025 को, प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया ने इसके बाद एक और आवेदन दायर किया, जिसमें अन्य बातों के अलावा यह निर्देश देने की मांग की गई कि यूएनआई को किसी भी प्रकार की बाधा या रुकावट पैदा करने से रोका जाए। </p>
<p><strong>*</strong> 11.07.2025 और 18.08.2025 के आदेशों के माध्यम से, न्यायालय ने भूमि और विकास कार्यालय को निर्देश दिया कि वह संबंधित स्थल का भौतिक निरीक्षण करे, ताकि यह जांच की जा सके कि क्या वहाँ कोई नया निर्माण हुआ है, और उसके बाद एक स्थिति रिपोर्ट रिकॉर्ड पर प्रस्तुत करे।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-12.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-12.jpg" alt="" width="1168" height="1862" class="aligncenter size-full wp-image-7548" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-12.jpg 1168w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-12-188x300.jpg 188w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-12-642x1024.jpg 642w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-12-768x1224.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-12-964x1536.jpg 964w" sizes="auto, (max-width: 1168px) 100vw, 1168px" /></a></p>
<p><strong>* </strong>14.07.2025 को, उक्त निरीक्षण किया गया और इस संबंध में एक निरीक्षण/स्थिति रिपोर्ट L&#038;DO द्वारा दिनांक 04.08.2025 को दायर की गई, जिसमें यह आरोप लगाया गया था कि यूएनआई द्वारा अनधिकृत निर्माण गतिविधियाँ की जा रही थी, और ऐसी गतिविधियों के परिणामस्वरूप संबंधित भूखंड की प्रकृति में बदलाव आ गया था। </p>
<p><strong>*</strong> 24.09.2025 को, यूएनआई आरोपों का खंडन करते हुए एक जवाब दाखिल किया, और यह तर्क देने की मांग की कि केवल मरम्मत और नवीनीकरण का काम किया गया था, और संबंधित ज़मीन पर कोई स्थायी ढांचा नहीं बनाया गया था।</p>
<p><strong>* </strong>09.07.2025 को, याचिकाकर्ता ने भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष को एक पत्र लिखा, जिसमें उसने तत्काल आधार पर निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने का अपना इरादा व्यक्त किया। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-13.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-13.jpg" alt="" width="1161" height="1316" class="aligncenter size-full wp-image-7549" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-13.jpg 1161w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-13-265x300.jpg 265w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-13-903x1024.jpg 903w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letter-13-768x871.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1161px) 100vw, 1161px" /></a></p>
<p><strong>*</strong> 19.08.2025 के पत्र के माध्यम से, यूएनआई ने भारतीय प्रेस परिषद को एक और पत्र लिखा, जिसमें उसने भारतीय प्रेस परिषद द्वारा एकतरफा रूप से संपत्ति की स्थिति को बदलने के प्रयास पर आपत्ति जताई; इस प्रयास में संबंधित ज़मीन पर अपना बोर्ड लगाना भी शामिल था। </p>
<p><strong>*</strong>  21.08.2025 को भारतीय प्रेस परिषद ने पत्र के माध्यम से यूएनआई को एक जवाब भेजा, जिसमें यह दावा किया गया कि आवंटन पत्रों में निहित शर्तों के अनुसार निर्माण कार्य न कर पाने का कारण यूएनआई की ओर से हुई चूक थी।<br />
 <br />
<strong>*</strong> 27.08.2025 को L&#038;DO द्वारा याचिकाकर्ता को एक पत्र भेजा गया। </p>
<p><strong>*</strong> 19.09.2025 को न्यायालय द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में, विचाराधीन संपत्ति का एक और संयुक्त निरीक्षण किया गया। </p>
<p><strong>*</strong> 24.09.2025 की निरीक्षण रिपोर्ट से पुनः यह संकेत मिलता है कि यूएनआई द्वारा संपत्ति पर कुछ अनधिकृत निर्माण किए गए थे, जो न्यायालय द्वारा पारित &#8216;यथास्थिति&#8217; आदेश का स्पष्ट उल्लंघन है। </p>
<p><strong>*</strong>  24.09.2025 की उक्त निरीक्षण रिपोर्ट पर यूएनआई आपत्ति जताई है और जवाब में तर्क दिया है कि कोई भी अनाधिकृत निर्माण कार्य नहीं किया गया था, और मौजूदा संरचना पर केवल नवीनीकरण और मरम्मत का काम किया गया था।</p>
<figure id="attachment_7550" aria-describedby="caption-attachment-7550" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-5-1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-5-1.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-7550" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-5-1.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-5-1-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-5-1-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-5-1-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-5-1-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-7550" class="wp-caption-text">यूएनआई कार्यालय से न्यायालय आदेश के बाद पत्रकारों, गैर-पत्रकारों को परिसर खाली कराते दिल्ली पुलिस के कर्मी। तस्वीर: संजय शर्मा </figcaption></figure>
<p><strong>आगे क्या हुआ सभी जानते हैं। </strong></p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/united-news-of-india-became-non-existent-while-playing-letters">&#8216;चिठ्ठी-चिठ्ठी खेलते&#8217; यूनाइटेड न्यूज ऑफ़ इंडिया &#8216;अस्तित्वहीन&#8217; हो गया, वह कहने से &#8216;कतराते&#8217; रहे, वे सुनने के लिए &#8216;तरसते&#8217; रहे (भाग-3)</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>इसमें इतना शोरगुल क्यों? वित्त मंत्री बजट में ₹214.82 लाख करोड़ कर्ज बताई थी, मोदी जी की &#8216;विदेश यात्रा खर्च&#8217; उसी खाते में जोड़ दिया जाय</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 15 Feb 2026 12:09:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>कर्तव्य पथ (नई दिल्ली) : कर्तव्य पथ पर दो मतदाता इस बात पर जिरह कर रहे थे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वतंत्र भारत में अब तक बने और रायसीना पहाड़ी वाले कार्यालय में बैठे सभी प्रधान मंत्रियों में सबसे अधिक विदेश भ्रमण किये हैं और पैसा खर्च किये हैं। दोनों जिरह करने वाले महानुभाव में एक [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कर्तव्य पथ (नई दिल्ली) : कर्तव्य पथ पर दो मतदाता इस बात पर जिरह कर रहे थे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वतंत्र भारत में अब तक बने और रायसीना पहाड़ी वाले कार्यालय में बैठे सभी प्रधान मंत्रियों में सबसे अधिक विदेश भ्रमण किये हैं और पैसा खर्च किये हैं। दोनों जिरह करने वाले महानुभाव में एक दरभंगा महाराजा के राज के निवासी थे और दूसरा बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार के राज्य जी नहीं, उनके जिला और गाँव के भी थे। वे बख्तियारपुर स्टेशन उतरकर ही घर पहुँचते हैं।</strong></p>
<blockquote><p>दोनों कहते हैं कि नरेंद्र मोदी भारत के 14वें प्रधानमंत्री के रूप में 26 मई, 2014 को शपथ लिए। इनके साथ 45 अन्य मंत्री ने भी पहली पारी में सरकार चलाने में शरीक हुए। कोई 20 दिन बाद, यानी 14 जून, 2014 को पहली बार यात्रा शुरू किये, गंतव्य देशज &#8216;गोआ&#8217; था और विगत 1 फरवरी, 2026 को देशज &#8216;पंजाब&#8217; गए थे। इन दो तारीखों के बीच इस बीच देश-विदेशज यात्रायें कितनी हुई, यह तो आने वाले दिनों में गहन शोध का विषय होगा। खैर, विदेश मंत्रालय ने जो आंकड़े भारत के सदन के पटल पर रखे हैं उसके अनुसार, 2015 से 2025 के बीच पिछले दस वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी की विदेश यात्राओं पर कुल ₹762.47 करोड़ खर्च किए गए। सरकार ने यह भी बताया कि इतने व्यापक स्तर पर विदेश यात्राएं करने वाले वे पहले प्रधानमंत्री हैं।</p></blockquote>
<p>तभी दरभंगा वाले एक मतदाता कहते हैं: &#8220;अरे !! यह कौन सी नई बात हो गयी। पिछले दिनों ही तो भारत सरकार के वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश की और बजट में भारत पर देशज-विदेशज कर्ज का बोझ बताई थी। उनके अनुसार कुल कर्ज़ का अनुमान (2026-27) ₹214.82 लाख करोड़, जिसमें ₹207.7 लाख करोड़ का अंदरूनी कर्ज़ और ₹7.11 लाख करोड़ का बाहरी कर्ज़ शामिल है। क्या होगा? इतना कर्ज है ही, तो मोदीजी की विदेश यात्रा का खर्च भी उसी खाते में जोड़ दिया जाय। इसमें इतना शोरगुल क्यों? कर्जा तो घर-परिवार को चलने के लिए की ही जाती है। मोदी जी का तो पूरा भारतवर्ष अपना घर ही तो है। </p>
<p><strong>उधर, विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान आवास और आतिथ्य खर्च मेजबान देश वहन करता है। भारत सरकार केवल सुरक्षा व्यवस्था, आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल, मीडिया और तकनीकी आवश्यकताओं पर खर्च करती है। आमतौर पर प्रधानमंत्री के साथ 27 से 72 सदस्य जाते हैं, जबकि पिछले वर्ष पांच देशों के दौरे के दौरान यह संख्या 95 तक पहुंच गई। सरकार का कहना है कि खर्च में वृद्धि का कारण महंगाई, रुपये की कमजोरी, यात्राओं की संख्या और लंबी दूरी की यात्राएं हैं। वर्ष 2015 में विदेश यात्राओं पर ₹91.5 करोड़ खर्च हुए थे, जो 2024 तक बढ़कर ₹109 करोड़ से अधिक हो गए। वर्ष 2025 में सबसे अधिक ₹175.19 करोड़ खर्च हुए, क्योंकि उस वर्ष प्रधानमंत्री ने यूरोप, अमेरिका, अफ्रीका और एशिया के कई देशों का दौरा किया।</strong> </p>
<p>बख्तियारपुर वाले महाशय दरभंगा वाले की बात को गंभीरता से सुन रहे थे। तभी वे कहते हैं: जब मोदी जी पहली बार 2014 में चुनाव लड़ रहे थे तो भारत के मतदाता को गछे थे कि अगर भारतीय जनता पार्टी को आप सभी मिलकर जिताए, हम प्रधानमंत्री बन गए, आप सभी बना दिए तो आप सभी लोगों के बैंक एकाउंट में 15-15 लाख रुपये, जो विदेश में कालाधन के रूप में विपक्षी पार्टी और पार्टी के लोग, व्यापारी रखे हैं; उसे भारत वापस लेकर आप लोगों को बाँट देंगे। अब तक तो 11-साल ही बिता है, उस बात को।&#8217; </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-4.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-4.jpg" alt="" width="2039" height="1143" class="aligncenter size-full wp-image-7363" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-4.jpg 2039w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-4-300x168.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-4-1024x574.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-4-768x431.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-4-1536x861.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2039px) 100vw, 2039px" /></a></p>
<blockquote><p>&#8216;अब अगर वे 15-15 लाख रुपये भारत के लोगों के, मतदाताओं के बैंक अकाउंट में नहीं जमा कर सके तो प्रति व्यक्ति पर 4.8 लाख का कर्जा तो लिखवा ही सकते हैं न। इस कर्ज में वृद्धि पिछले वर्ष की तुलना में 25.7 फीसदी अधिक है। आखिर विदेश जाने, आने, रहने, वहां के लोगों से बतियाने में खर्चा तो होगा ही न। यह बात विदेश मंत्रालय भी सदन में कहा है। आखिर महंगाई तो इन 11-वर्षों में बढ़ी ही है, यह बात देश के लोग कितना भी चिचियाकर कहेगा, अधिकारी-पदाधिकारी झड़प देंगे; लेकिन विदेश मंत्रालय तो मान ही लिया मंहगाई के कारण खर्च बढ़ा है। </p></blockquote>
<p>तभी दरभंगा वाले महाशय कहते हैं: &#8220;फकरा समझते हैं &#8216;लोकोक्ति&#8217;, बूढ़-पुरनियां गाँव-घर में कहते हैं। वैसे यह संस्कृत का श्लोक है जो चार्वाक दर्शन से उद्धृत हैं। उनके अनुसार &#8220;यावज्जीवेत सुखं जीवेद ऋणं कृत्वा घृतं पिवेत, भस्मीभूतस्य देहस्य पुनरागमनं कुतः&#8221; यानी &#8216;जब तक जियो (रिलायंस वाले का जियो नहीं समझियेगा) सुख से जियो, चाहे कर्ज लेकर ही सही, धी, मलाई, रसगुल्ला खाना-पीना पड़े, कोई बात नहीं। क्योंकि मरने के बाद शरीर जलकर राख हो जाता है और जो भी यह कहता है कि आत्मा अमर है, पुनर्जन्म होता है, सब बकवास है, गलत है। </p>
<p>वैसी स्थिति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी देश को कर्ज में डुबोकर ही सही, विदेश भ्रमण पर खर्चा पर खर्चा किये जा रहे हैं तो क्या गलत है? आखिर 2015 में देश की आबादी 1,328,024,498 थी, 11-वर्ष बाद 2025 में 1,463,865,525 हो गयी है। अब अकेले मोदी जी क्या-क्या संभालेंगे? कभी सोचे, विचार किये?</p>
<p>बहरहाल, संसद के पटल पर प्रस्तुत आंकड़े के अनुसार, 2021 और 2025 के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरों पर सरकार का लगभग 362 करोड़ रुपये खर्च हुआ। अकेले 2025 में, अमेरिका और फ्रांस की हाई-प्रोफाइल यात्राओं सहित पांच देशों की उनकी यात्राओं पर 67 करोड़ रुपये से ज़्यादा खर्च हुए। खर्च की जानकारी विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने तृणमूल सांसद डेरेक ओ&#8217;ब्रायन के एक सवाल के जवाब में दे रहे थे । आंकड़ों के अनुसार, 2025 में सबसे महंगी यात्रा फ्रांस की थी, जिस पर 25 करोड़ रुपये से ज़्यादा खर्च हुए, इसके बाद अमेरिका का नंबर आता है, जहां इस यात्रा पर 16 करोड़ रुपये से ज़्यादा खर्च हुए।</p>
<p>विगत 13 फरवरी, 2026 को एक लिखित जवाब में, केंद्रीय विदेश मंत्रालय ने बताया कि 2015 और 2025 के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेशी दौरों पर सरकारी खजाने पर 762 करोड़ रुपये खर्च हुए। ये आंकड़े हाल के वर्षों में सालाना खर्च में तेज़ी से बढ़ोतरी दिखाते हैं। जहाँ 2024 में इन दौरों पर खर्च 100 करोड़ रुपये को पार कर गया, वहीं 2025 में यह 175 करोड़ रुपये से ज़्यादा हो गया, यह साल यूरोप, अमेरिका, अफ्रीका और पूर्वी एशिया में लंबी दूरी और कई देशों के टूर सहित बड़े पैमाने पर यात्राओं के लिए जाना जाता है।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-3.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-3.jpg" alt="" width="2039" height="1143" class="aligncenter size-full wp-image-7364" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-3.jpg 2039w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-3-300x168.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-3-1024x574.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-3-768x431.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-3-1536x861.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2039px) 100vw, 2039px" /></a></p>
<p><strong>वैसे विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि विदेशी दौरों के दौरान प्रधानमंत्री को मेहमान देश के मेहमान की तरह माना जाता है, जो मेहमाननवाज़ी का काफी खर्च उठाता है। भारत के खर्च में ऑफिशियल डेलीगेशन, सुरक्षा इंतज़ाम, मीडिया दल और लॉजिस्टिक सपोर्ट से जुड़े खर्च शामिल हैं। जवाब के मुताबिक, मई 2014 से प्रधानमंत्री के डेलीगेशन में आम तौर पर काम की जरूरतों के हिसाब से 27 से 72 सदस्य होते थे, और 2025 में पांच देशों के दौरे में 95 अधिकारी शामिल होंगे। महामारी के तुरंत बाद के समय में खर्च काफी कम रहा, लेकिन जैसे-जैसे दो-तरफ़ा बातचीत और मल्टीलेटरल समिट तेज़ हुए, खर्च लगातार बढ़ता गया। जवाब में दिए गए डॉक्यूमेंट्स से पता चलता है कि सबसे कम खर्च Covid-19 की रुकावटों के बाद के समय में हुआ, लेकिन जैसे-जैसे इंटरनेशनल ट्रैवल और डिप्लोमैटिक बातचीत बड़े पैमाने पर फिर से शुरू हुई, खर्च फिर से बढ़ गया।</strong></p>
<p>सरकार ने रेफरेंस के लिए पहले के प्रधानमंत्रियों के दौरों का भी जिक्र किया, जिसमें बताया गया कि 2011 में अमेरिका के लिए 10.74 करोड़ रुपये, 2013 में रूस के लिए 9.95 करोड़ रुपये, 2011 में फ्रांस के लिए 8.33 करोड़ रुपये और 2013 में जर्मनी के लिए 6.02 करोड़ रुपये खर्च हुए, जिसमें महंगाई या करेंसी में उतार-चढ़ाव को एडजस्ट नहीं किया गया। विदेश मंत्रालय के जवाब से यह भी पता चला कि मनमोहन सिंह सरकार ने इन यात्राओं पर बहुत कम खर्च किया – 2011 में अमेरिका के लिए 10.74 करोड़ रुपये, 2013 में रूस के लिए 9.95 करोड़ रुपये, 2011 में फ्रांस के लिए 8.33 करोड़ रुपये और 2013 में जर्मनी के लिए 6.02 करोड़ रुपये – लेकिन यह भी कहा कि खर्च में बढ़ोतरी महंगाई, करेंसी के उतार-चढ़ाव, और कवर किए गए देशों की संख्या, यात्रा की दूरी, सुरक्षा ज़रूरतें और डेलीगेशन के आकार जैसे कारणों से हुई। अधिकारियों ने कहा कि खर्च मुख्य रूप से कवर किए गए देशों की संख्या, यात्रा की दूरी, सुरक्षा ज़रूरतें और डेलीगेशन के आकार के कारण अलग-अलग होता है। खैर। </p>
<p>पिछले सालों की बात करें तो, सांख्यिकी से पता चलता है कि 2024 में रूस और यूक्रेन समेत 16 देशों में 109 करोड़ रुपये खर्च हुए। 2023 में, लगभग Rs 93 करोड़ खर्च हुए, जबकि 2022 और 2021 के लिए यह आंकड़ा Rs 55.82 करोड़ और Rs 36 करोड़ था। 2023 में प्रधानमंत्री के अमेरिका दौरे पर, जिसमें वे उस समय के प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप से मिले थे,  22 करोड़ से ज़्यादा खर्च हुए। इन मुलाकातों में अक्सर ट्रेड, इन्वेस्टमेंट और सिक्योरिटी पर बातचीत होती है, जो भारत की ग्रोथ और स्टेबिलिटी के लिए ज़रूरी हैं। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-3-1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-3-1.jpg" alt="" width="2039" height="1143" class="aligncenter size-full wp-image-7365" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-3-1.jpg 2039w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-3-1-300x168.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-3-1-1024x574.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-3-1-768x431.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-3-1-1536x861.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2039px) 100vw, 2039px" /></a></p>
<p>2021 में बांग्लादेश, इटली और यूनाइटेड किंगडम के दौरे भी खर्च में शामिल थे, अकेले अमेरिका दौरे पर 19 करोड़ रुपये से ज़्यादा खर्च हुए। 2022 में, खास खर्चों में जर्मनी और जापान के दौरे शामिल थे, जिनमें से हर एक पर क्रम से 9 करोड़ रुपये और 8 करोड़ रुपये से ज़्यादा खर्च हुए। इतना ही नहीं, सांख्यिकी के अनुसार, इन दौरों से जुड़े पब्लिक एंगेजमेंट, एडवरटाइजिंग और ब्रॉडकास्टिंग कॉस्ट की डिटेल्स भी शामिल थीं। उदाहरण के लिए, 2023 में मिस्र के दौरे पर एडवरटाइजिंग पर 11.90 लाख रुपये खर्च हुए। क्योंकि इंटरनेशनल ट्रैवल मोदी की फॉरेन पॉलिसी का एक अहम हिस्सा बना हुआ है, इसलिए इन ट्रिप्स के फाइनेंशियल पहलू सरकारी और पब्लिक फोरम पर दिलचस्पी और जांच का मुद्दा बने हुए हैं।</p>
<blockquote><p>ज्ञातव्य हो कि राइट टू इन्फॉर्मेशन कैंपेनर और रिटायर्ड नेवी कमोडोर लोकेश बत्रा ने अपने RTI आवेदन के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके पहले के मनमोहन सिंह की विदेश यात्राओं का विस्तार माँगा था। प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्रालय ने सुरक्षा की वजह से विस्तृत विवरण देने से मना कर दिया था। कमोडोर बत्रा ने दावा किया था कि वह पैसे की तंगी से जूझ रही एयरलाइन एयर इंडिया को प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा भुगतान में देरी के पीछे की वजह की अध्ययन करना चाहते हैं।</p></blockquote>
<p>उन दिनों दिल्ली और देश के अखबार, टीवी पर प्रकाशित समाचारों के के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी पर एयरलाइन का 134 करोड़ रुपये बकाया है, क्योंकि उन्होंने जून और दिसंबर 2015 के बीच कम से कम 10 बार चार्टर्ड फ्लाइट्स लीं। कंपनी ने इन सभी ट्रिप्स के इनवॉइस बनाए हैं, लेकिन जैसा कि आम बात हो गई है, बिल अभी तक क्लियर नहीं हुए हैं। बत्रा प्रश्न उठाये थे कि &#8220;यह एक कैश की कमी वाली एयरलाइन है जो पैसा नहीं कमाती। देश के सबसे बड़े ऑफिस की तरफ से इन बिलों को चुकाने में इतनी देरी क्यों हो रही है? ब्याज का खर्च कौन उठाएगा? आम तौर पर प्रधानमंत्री कार्यालय को इनवॉइस मिलने के एक महीने के अंदर इनमें से हर बिल का पेमेंट कर देना चाहिए।&#8221;</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-2.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-2.jpg" alt="" width="2039" height="1143" class="aligncenter size-full wp-image-7366" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-2.jpg 2039w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-2-300x168.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-2-1024x574.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-2-768x431.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-2-1536x861.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2039px) 100vw, 2039px" /></a></p>
<p><strong>एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि प्रधानमंत्री कार्यालय खुद मोदी की हर विदेश यात्रा के खर्च का खुलासा करने में सावधान रहा है। आरटीआई आवेदन से छोटे-छोटे जवाब मिलते हैं, और अक्सर &#8220;बिल प्रोसेस में है&#8221; या &#8220;बिल नहीं मिला&#8221; जैसे कारण बताए जाते हैं। एयर इंडिया को मिलने वाली रकम के बारे में जानकारी तब सामने आई जब बत्रा ने सीधे एयर इंडिया को एक अलग आरटीईआई फाइल की। पिछले साल के आंकड़े से खर्च बढ़ा है या घटा है, जिसमें पिछले सालों के मुकाबले 80 परसेंट से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई थी। एक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2015-16 में प्रधानमंत्री मोदी और उनके कैबिनेट साथियों की यात्राओं पर Rs 567 करोड़ खर्च हुए, जो पिछले साल के मुकाबले काफी ज़्यादा थी। </strong></p>
<p>प्रधानमंत्री और उनके मंत्रियों का कुल यात्रा खर्च, वित्तीय वर्ष 2015-16 की शुरुआत में बजट में अनुमानित Rs 269 करोड़ से बढ़कर, साल के आखिर में रिवाइज्ड अनुमानों के मुताबिक Rs 567 करोड़ हो गया। इसके अलावा, 2014-15 तक तीन सालों में नौकरशाहों का कुल टूर खर्च Rs 1,500 करोड़ से ज़्यादा था। पिछली सरकार ने अपने पांच साल के कार्यकाल में ट्रैवल पर Rs 1,500 करोड़ खर्च किए थे। इसकी तुलना में, रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सिर्फ़ तीन सालों (2014-15 और 2016-17 के बीच) में NDA सरकार का ट्रैवल बिल लगभग Rs 1,140 करोड़ है। 2024 में इन विदेश यात्राओं पर सालाना खर्च 100 करोड़ रुपये से ज़्यादा था, जबकि 2025 में यह 175 करोड़ रुपये को पार कर गया।</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/%e2%82%b9762-47-cr-was-spent-on-pm-modis-foreign-visits-in-the-last-ten-years">इसमें इतना शोरगुल क्यों? वित्त मंत्री बजट में ₹214.82 लाख करोड़ कर्ज बताई थी, मोदी जी की &#8216;विदेश यात्रा खर्च&#8217; उसी खाते में जोड़ दिया जाय</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>राष्ट्रीय रेडियो संग्रहालय-भाग-1: &#8216;कभी मेरे मन की बात भी सुनें माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी&#8217;: आपका पुराना रेडियो</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/establish-national-museum-of-radio</link>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 06 Feb 2026 03:17:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
		<category><![CDATA[aakashvani]]></category>
		<category><![CDATA[all india radio]]></category>
		<category><![CDATA[narendra modi]]></category>
		<category><![CDATA[national radio museum]]></category>
		<category><![CDATA[prime minister]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>* भारत की आज़ादी की खबर 15 अगस्त, 1947 की सुबह 5:30 बजे ऑल इंडिया रेडियो पर आधिकारिक तौर पर प्रसारित की गई थी । जाने-माने एक्टर और न्यूज़रीडर पूर्णम विश्वनाथन ने 5:30 बजे ऑल इंडिया रेडियो पर घोषणा की। ऑल इंडिया रेडियो ने सत्ता के ऐतिहासिक हस्तांतरण का प्रसारण किया। जवाहरलाल नेहरू का मशहूर &#8220;ट्रिस्ट विद [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><em>* भारत की आज़ादी की खबर 15 अगस्त, 1947 की सुबह 5:30 बजे ऑल इंडिया रेडियो पर आधिकारिक तौर पर प्रसारित की गई थी । जाने-माने एक्टर और न्यूज़रीडर पूर्णम विश्वनाथन ने 5:30 बजे ऑल इंडिया रेडियो पर घोषणा की। ऑल इंडिया रेडियो ने सत्ता के ऐतिहासिक हस्तांतरण का प्रसारण किया। जवाहरलाल नेहरू का मशहूर &#8220;ट्रिस्ट विद डेस्टिनी&#8221; भाषण आधी रात को देशभर में प्रसारित किया गया।</p>
<p>* उस दिन शुक्रवार था। शाम के 5:20 बजे थे। महात्मा गांधी को गोली मारी थी। महात्मा गांधी की मौत की खबर ऑल इंडिया रेडियो 6:00 प्रसारित किया था। इस प्रसारण के बाद बाद प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का रेडियो पर प्रसारण हुआ &#8216;लाइट स्नफड आउट&#8217; ।</p>
<p>* प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की ताशकंद में मौत की खबर का ऐलान ऑल इंडिया रेडियो ने 11 जनवरी, 1966 को उनकी मौत के कुछ ही समय बाद आधिकारिक तौर पर किया था। शास्त्री का निधन 11 जनवरी, 1966 को सुबह 1:32 बजे (ताशकंद समय) हुआ, जो भारतीय समय के अनुसार लगभग 2:02 बजे था।</p>
<p>* 1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के दौरान, ऑल इंडिया रेडियो और कोलकाता में गुप्त &#8220;स्वाधीन बांग्ला बेतार केंद्र&#8221;  25 मार्च, 1971 को पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई के तुरंत बाद युद्ध की खबरें एक्टिव रूप से प्रसारित करना शुरू कर दिया था। स्वतंत्रता की घोषणा और 10 अप्रैल को अंतरिम सरकार के गठन सहित मुख्य घटनाओं को प्रसारित किया गया। ऑल इंडिया रेडियो के समाचार वाचक देबदुलाल बंद्योपाध्याय भारत और पूर्वी पाकिस्तान दोनों में श्रोताओं के लिए एक प्रमुख आवाज़ बन गए थे।</p>
<p>* इंदिरा गांधी की मौत की आधिकारिक घोषणा ऑल इंडिया रेडियो ने 31 अक्टूबर, 1984 की शाम करीब 6:00 बजे की थी, जबकि उन्हें सुबह 9:20 बजे गोली मारी गई थी। गोलीबारी की खबरें पहले ही फैल गई थीं, लेकिन उनकी मौत की आधिकारिक पुष्टि शाम तक नहीं की गई थी।</p>
<figure id="attachment_7334" aria-describedby="caption-attachment-7334" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-4.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-4.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-7334" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-4.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-4-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-4-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-4-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-4-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-7334" class="wp-caption-text">गूल्येल्मो मार्कोनी</figcaption></figure>
<p>* 23 मार्च, 1979 को दोपहर 1:10 बजे अपने रेगुलर प्रोग्राम को रोककर यह घोषणा की कि जयप्रकाश नारायण का बॉम्बे के जसलोक अस्पताल में निधन हो गया है, यह जानकारी प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने लोकसभा को गलत दी थी। इस गलती को लगभग 30-60 मिनट बाद सुधारा गया, जिससे जनता पार्टी सरकार को बहुत शर्मिंदगी हुई। वास्तविक रूप में 8 अक्टूबर, 1979 को जेपी का निधन पटना में उनके घर पर सुबह लगभग 5:45 बजे हुआ। कुछ पल बाद, इस खबर की पुष्टि होने के बाद ऑल इंडिया रेडियो पर प्रसारित की गई।</em> </p>
<p><strong>सन 1947 में, जब देश आज़ाद हुआ था, देश की आवादी करीब 39 करोड़ थी। आज 145 करोड़ है। संवाद के क्षेत्र में भले आज उम्मीद से अधिक परिवर्तन हुआ हो, भारत के लगभग 40 करोड़ से अधिक लोग रेडियो के श्रोता है, चाहे वे दिल्ली के कर्तव्य पथ पर सुनते हों या बिहार के दरभंगा ले लालबाग चौक पर या लखनऊ के घंटाघर और बड़ा इमामबाड़ा में। लोग माने अथवा नहीं, विज्ञान में इतने विकास के बाद भी, रेडियो आज भी  भारत सरकार या सत्ता के गलियारे में बैठे लोगों के लिए, सरकार की नीतियों के लिए, सरकार की आवाज के लिए, बल्कि भारत के आम लोगों के लिए कल भी एक महत्वपूर्ण यंत्र था, आज भी अपनी औकात बरकरार रखे है, बिना किसी आंच के । </strong></p>
<p>देश के करीब 40 करोड़ से अधिक रेडियो के श्रोता, जो मतदाता भी हैं, और देश की संस्कृति के साथ-साथ ऐतिहासिक घरोहरों को संजोने में भी विश्वास भी रखते हैं। सन 2014 में जब नरेंद्र मोदी देश का प्रधानमंत्री बने, उस वर्ष महात्मा गांधी के जन्मदिवस के दूसरे दिन, यानी 3 अक्टूबर, 2014 से रेडियो पर &#8216;मन की बात&#8217; का प्रसारण होना शुरू हुआ। प्रधानमंत्री अलग-अलग सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर अपने मन की बात कहते गए। भारत के श्रोताओं ने उनके शब्दों को ह्रदय से ग्रहण किया। विगत माह 25 जनवरी, 2026 तक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के &#8220;मन की बात&#8221; रेडियो प्रोग्राम के 130 एपिसोड प्रसारित हो चुके हैं। 130वां एपिसोड 2026 का पहला प्रसारण था।</p>
<blockquote><p>आज समय आ गया है कि देश के करीब 40 करोड़ से अभी अधिक रेडियो श्रोता, जो मतदाता भी हैं, और देश की संस्कृति के साथ-साथ ऐतिहासिक घरोहरों को संजोने में भी विश्वास रखते हैं, के मन की बात को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुनें। साथ ही, उसपर यथाशीघ्र निर्णय लेने के लिए अनुरोध किया है। मन की बात सुनने, सुनाने का कार्य एकतरफा नहीं हो। साल 2011 में यूनेस्को के सदस्य देशों द्वारा घोषित और 2012 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (A/RES/67/124) द्वारा एक अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में अपनाए जाने के बाद, 13 फरवरी विश्व रेडियो दिवस के अवसर पर देश के सैकड़ों रेडियो श्रोता संघ ने देश में एक राष्ट्रीय रेडियो संग्रहालय की स्थापना के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी रेडियो दिवस मनाने का आग्रह किया है। </p></blockquote>
<figure id="attachment_7335" aria-describedby="caption-attachment-7335" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-6.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-6.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-7335" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-6.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-6-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-6-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-6-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-6-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-7335" class="wp-caption-text">दशकों पहले मद्रास ऑल इंडिया रेडियो</figcaption></figure>
<p>भारत के कोने-कोने में आज भी अनेक रेडियो प्रेमी, तकनीकी जानकार एवं संग्राहक ऐसे हैं, जिन्होंने निजी स्तर पर दशकों पुराने, दुर्लभ और ऐतिहासिक रेडियो सेट सुरक्षित रखे हुए हैं। ये रेडियो केवल यंत्र नहीं हैं, बल्कि भारत के सामाजिक जीवन, सूचना क्रांति, स्वतंत्रता आंदोलन और वैज्ञानिक प्रगति के साक्षी रहे हैं। यह पहल किसी एक समाज, वर्ग या संगठन तक सीमित नहीं है। यह सम्पूर्ण भारत की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और तकनीकी विरासत से जुड़ा हुआ विषय है, जिसमें हर समाज की सहभागिता आवश्यक है। यह महज विरासत के संरक्षण का ही मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय रेडियो संग्रहालय होने से  आने वाली पीढ़ियों के लिए इतिहास को सुरक्षित करने का भी प्रयास होगा। </p>
<p>देश के रेडियो श्रोता संघों का कहना है कि रेडियो अपनी सभी विविधताओं में मानवता का जश्न मनाने का एक शक्तिशाली माध्यम तो है ही, यह लोकतांत्रिक चर्चा के लिए एक मंच है। वैश्विक स्तर पर, रेडियो सबसे ज़्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला माध्यम कल भी था और आज भी बना हुआ है। सबसे ज़्यादा श्रोताओं तक पहुँचने की इस अनोखी क्षमता का मतलब है कि रेडियो समाज के विविधता के अनुभव को आकार दे सकता है, सभी आवाज़ों को बोलने, प्रतिनिधित्व करने और सुने जाने का एक मंच बन सकता है, बशर्ते समाज और व्यवस्था इसे वह सम्मान दे, जिसे यह हकदार है । क्योंकि रेडियो हमेशा से विविध समुदायों की सेवा करती आयी है विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों से, दृष्टिकोण और सामग्रियों को प्रदान कर श्रोताओं की विविधताओं को प्रतिबिंबित करता आया है, कर रहा है। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-6-1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-6-1.jpg" alt="" width="1361" height="1598" class="aligncenter size-full wp-image-7336" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-6-1.jpg 1361w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-6-1-256x300.jpg 256w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-6-1-872x1024.jpg 872w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-6-1-768x902.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-6-1-1308x1536.jpg 1308w" sizes="auto, (max-width: 1361px) 100vw, 1361px" /></a></p>
<p><strong>बीकानेर (राजस्थान) के रेडियो संग्रहकर्ता दिनेश माथुर</strong> का कहना है कि रेडियो को दुनिया भर में सबसे ज़्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले माध्यमों में से एक माना जाता है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, रेडियो में &#8220;समाज के विविधता को देखने के तरीके को प्रभावित करने की शक्ति है। यह सभी आवाजों को बोलने के लिए एक मंच प्रदान करता है। रेडियो कैसे काम करता है? यह रेडियो तरंगों को प्रसारित और प्राप्त करके काम करता है, जो एक प्रकार का इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन है। ट्रांसमीटर एंटीना में बहने वाली बिजली इलेक्ट्रॉनों को ऊपर और नीचे कंपन कराती है। इससे रेडियो तरंगें उत्पन्न होती हैं। रेडियो तरंगों की एक आवृत्ति होती है, जो प्रति सेकंड एक निश्चित बिंदु से गुज़रने वाली तरंगों की संख्या होती है। AM रेडियो आवृत्ति को मापने के लिए किलोहर्ट्ज़ (kHz) का उपयोग करता है। FM रेडियो आवृत्ति को मापने के लिए मेगाहर्ट्ज़ (MHz) का उपयोग करता है। </p>
<p>इतना ही नहीं, वे यह भी कहते हैं कि रेडियो एक कम लागत वाला माध्यम है जो विशेष रूप से दूरदराज के समुदायों और कमज़ोर लोगों तक पहुँचने के लिए उपयुक्त है, जो लोगों के शैक्षिक स्तर की परवाह किए बिना सार्वजनिक बहस में हस्तक्षेप करने के लिए एक मंच प्रदान करता है। यह आपातकालीन संचार और आपदा राहत में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। रेडियो समुदायों को एक साथ लाने और बदलाव के लिए सकारात्मक बातचीत को बढ़ावा देने के लिए विशिष्ट रूप से स्थित है। अपने दर्शकों को सुनकर और उनकी ज़रूरतों का जवाब देकर, रेडियो सेवाएँ उन चुनौतियों का सामना करने के लिए आवश्यक विचारों और आवाज़ों की विविधता प्रदान करती हैं जिनका हम सभी सामना करते हैं।</p>
<p><strong>बहरहाल, राजनीतिक मानचित्र पर वायसराय लिनलिथगो के कालखंड (1936-1944) में कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटी, कुछ मीठी तो कुछ खट्टी। लेकिन उनके कालखंड में जो हुआ वह भारत के इतिहास में मील का पत्थर भी सिद्ध हुआ। वायसराय लिनलिथगो सबसे लम्बे समय तक सेवा करने वाले वायसराय रहे। अगर द्वितीय विश्वयुद्ध की घटना को, जिसमें भारतीय समर्थन के लिए क्रिप्स मिशन आया था, कुछ पल के लिए दर किनार कर दें, तो उनके समय में भारत सरकार अधिनियम, 1935 लागू हुआ, 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन का सूत्रपात भी उन्हीं के समय में हुआ, भले उसे दबाने की कोशिश की गई हो। आज़ाद हिन्द फ़ौज का गठन भी उन्हीं के कालखंड में हुआ। बंगाल का विनाशकारी अकाल भी इन्हीं के समय में हुआ। लेकिन इनके ही कालखंड में जो हुआ वह भारत की आवाज भी बन गयी &#8211; आप माने अथवा नहीं। </strong></p>
<figure id="attachment_7332" aria-describedby="caption-attachment-7332" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-10.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-10.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-7332" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-10.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-10-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-10-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-10-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-10-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-7332" class="wp-caption-text">वायसराय लिनलिथगो, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद और पंडित जवाहरलाल नेहरू</figcaption></figure>
<p>इतिहास के अनुसार ब्रॉडकास्टिंग के पहले कंट्रोलर लियोनेल फील्डन ने एक दावत के बाद वायसराय लिनलिथगो को कहा कि इंडियन स्टेट ब्रॉडकास्टिंग सर्विस, जो 1930 में दो साल के लिए एक्सपेरिमेंटल बेसिस पर शुरू हुई थी, नाम काफी नौकरशाही था। वायसराय मानना था कि यह नाम काफी लंबा है। जब ब्रॉडकास्टर उनसे बार-बार कुछ अलग सुझाने के लिए निवेदन कर रहा था तो वायसराय लिनलिथगो ने धीरे से कहा, &#8220;ऑल इंडिया रेडियो&#8221;, अच्छा रहेगा? ब्रॉडकास्टर ख़ुशी से नाच उठे। कितना बेहतरीन &#8216;आद्याक्षर (इनिशियल्स)&#8217; हैं! अतः ऑल इंडिया रेडियो नाम जब भी होठों पर आएगा, वायसराय लिनलिथगो का नाम स्वतः आएगा, आप माने अथवा नहीं। </p>
<p><strong>रायपुर (मध्यप्रदेश) के रेडियो संग्रहकर्ता मनोहर डेनवानी</strong> का कहना है कि आज देश में कई लोग ऐसे हैं जिन्होंने अपना जीवन रेडियो को समर्पित कर दिया है। आज भी उनके पास सैकड़ों ही नहीं, हज़ारों की संख्या में पुराने और दुर्लभ रेडियो उपलब्ध हैं। और अपने संसाधनों से इस विरासत को संजोकर रखा है। परंतु अब इन धरोहरों के संरक्षण, रखरखाव और भावी पीढ़ी तक सुरक्षित रूप से पहुँचाने में गंभीर कठिनाइयाँ सामने आ रही हैं।वैसी स्थिति में अगर दिल्ली के पालिका बाजार स्थित &#8216;चरखा संग्रहालय&#8217; के तर्ज पर यदि देश में राष्ट्रीय स्तर का रेडियो संग्रहालय स्थापित किया जाता है, तो ⁠इन अमूल्य रेडियो सेटों का वैज्ञानिक व ऐतिहासिक संरक्षण संभव होगा, ⁠युवा पीढ़ी भारत के संचार इतिहास से परिचित हो सकेगी, ⁠रेडियो से जुड़े अनाम योगदानकर्ताओं को राष्ट्रीय पहचान मिलेगी, ⁠भारत की तकनीकी विरासत को वैश्विक मंच पर सम्मान प्राप्त होगा। </p>
<p>विश्व रेडियो दिवस 13 फरवरी को मनाया जाता है। इस दिन का मकसद रेडियो के ज़रिए शिक्षा, जानकारी और अभिव्यक्ति की आज़ादी को बढ़ावा देना है। इस साल, 2025 में, विश्व रेडियो दिवस की थीम है &#8211; &#8220;रेडियो और जलवायु परिवर्तन: जलवायु कार्रवाई के लिए एक शक्तिशाली उपकरण&#8221;। ऑल इंडिया रेडियो दुनिया के सबसे बड़े रेडियो नेटवर्कों में से एक है। 3 जुलाई 2001 को, रेडियो सिटी बैंगलोर लॉन्च हुआ, जो पहला निजी FM रेडियो स्टेशन बना। रेडियो का आविष्कार गुग्लिल्मो मार्कोनी ने किया था। उन्होंने 1890 के दशक में रेडियो ट्रांसमीटर का आविष्कार किया था। हालांकि, जगदीश चंद्र बोस पहले व्यक्ति थे जिन्होंने रेडियो तरंगों को पकड़ने के पीछे के वैज्ञानिक सिद्धांतों का प्रदर्शन किया। उन्हें अक्सर वायरलेस दूरसंचार का जनक कहा जाता है।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-8.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-8.jpg" alt="" width="1361" height="1598" class="aligncenter size-full wp-image-7337" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-8.jpg 1361w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-8-256x300.jpg 256w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-8-872x1024.jpg 872w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-8-768x902.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-8-1308x1536.jpg 1308w" sizes="auto, (max-width: 1361px) 100vw, 1361px" /></a></p>
<p>भारत में राष्ट्रीय प्रसारण दिवस 1927 में शुरू होने के बाद से देश के प्रसारण क्षेत्र के विकास की याद दिलाता है। यह दिन भारत के विकास, शैक्षिक पहुंच और सांस्कृतिक संरक्षण में प्रसारण द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालता है। सामुदायिक रेडियो जैसी पहलों पर सरकार का जोर दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंचने और स्थानीय विकास को बढ़ावा देने में प्रसारण के स्थायी महत्व को रेखांकित करता है। जैसे ही भारत एक और राष्ट्रीय प्रसारण दिवस मना रहा है, वह एक ऐसे भविष्य की कल्पना करता है जहां प्रसारण राष्ट्रीय एकता, शिक्षा और नागरिक सशक्तिकरण के लिए एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में अनुकूलन और सेवा करना जारी रखेगा।</p>
<p>जैसे-जैसे भारत डिजिटल युग में आगे बढ़ रहा है, ध्यान एक व्यापक, समावेशी और तकनीकी रूप से उन्नत प्रसारण प्रणाली बनाने पर केंद्रित हो रहा है जो वैश्विक गुणवत्ता मानकों को पूरा करते हुए अपनी आबादी की विविध आवश्यकताओं को पूरा करती है। भारत की रेडियो यात्रा राज्य के दखल से बहुत पहले, कलकत्ता (1923) और मद्रास (1924) में शौकिया रेडियो क्लबों के साथ शुरू हुई। 23 जुलाई, 1927 को, बॉम्बे स्टेशन ने इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी (IBC) के तहत भारत का पहला औपचारिक प्रसारण किया।IBC आर्थिक रूप से विफल हो गई और 1930 में ब्रिटिश सरकार ने इसे इंडियन स्टेट ब्रॉडकास्टिंग सर्विस (ISBS) के रूप में अपने कब्जे में ले लिया। 1936 में, ISBS का पुनर्गठन किया गया और इसका नाम बदलकर ऑल इंडिया रेडियो (AIR) कर दिया गया, जिसे श्रम और उद्योग विभाग के तहत रखा गया। </p>
<p>ऑल इंडिया रेडियो 1936 में इंडियन स्टेट ब्रॉडकास्टिंग सर्विस से विकसित होकर उभरा। स्वतंत्रता के बाद, ऑल इंडिया रेडियो का तेजी से विस्तार हुआ, और 1956 में &#8220;आकाशवाणी&#8221; नाम अपनाया। आज, ऑल इंडिया रेडियो 591 स्टेशनों का संचालन करता है, जो भारत की 98% आबादी तक पहुंचता है और 23 भाषाओं और 146 बोलियों में प्रसारण करता है।विविध भारती 1957 में लॉन्च किया गया था, जिसमें लोकप्रिय मनोरंजन और फिल्मी संगीत शामिल था। 1947 में AIR के पास सिर्फ 6 स्टेशन थे, जो भारत के 2.5% क्षेत्र और 11% आबादी को कवर करते थे। </p>
<p><strong>गाजियाबाद के अधिवक्ता और दशकों से रेडियो श्रोता सुदीप शाहू </strong>कहते हैं: &#8220;भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी हर माह के आखिरी इतवार को मन की बात कार्यक्रम के माध्यम से राष्ट्र को संबोधित करते हैं। &#8216;मन की बात&#8217; में वो उन लोगों की बातें करते हैं जिनको दुनिया नहीं जानती है। विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करते हैं। हम रेडियो प्रेमी और देश भर के पुराने रेडियो के संग्रहकर्ताओं की प्रधानमंत्री जी से गुजारिश करते हैं कि देश की राजधानी में राष्ट्रीय चरखा संग्रहालय के तर्ज पर एक राष्ट्रीय रेडियो संग्रहालय की भी स्थापना हो। रेडियो संग्रहालय स्थापित करने की घोषणा 13 फरवरी विश्व रेडियो दिवस पर प्रधानमंत्री स्वयं करें तो बेहद खुशी होगी। उत्तर प्रदेश गजरौला निवासी राम सिंह बौद्ध , बीकानेर राजस्थान निवासी दिनेश माथुर , रायपुर छत्तीस गढ़ निवासी मनोहर लाल डेंगियानी, संभाजी नगर के संजय पवार, जमशेदपुर के चिन्मया महतो, बंगलौर कर्नाटक के उदय कलबुर्गी, गुवाहटी असम के परिवहन विभाग के देबो कुमार, पुथियारा चकवाड के सेथालीकुट्टी देश के रेडियो संग्रहकर्ता हैं। सभी चाहते हैं कि उनके संग्रह को राष्ट्रीय रेडियो संग्रहालय बनाकर सुरक्षित और संरक्षित किया जाये।&#8221; </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-2.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-2.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-7338" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-2.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-2-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-2-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-2-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-2-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p>ऑल इंडिया रेडियो का बाहरी सेवा प्रभाग 100 से अधिक देशों में प्रसारण करता है, जो विश्व स्तर पर भारत की आवाज को प्रोजेक्ट करता है और प्रवासी भारतीयों से जुड़ता है। FM चैनलों की शुरुआत और डिजिटल रेडियो मोंडियल (DRM) तकनीक का उपयोग करके डिजिटल प्रसारण में संक्रमण ऑल इंडिया रेडियो की आधुनिकीकरण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। भारत में ब्रॉडकास्टिंग की शुरुआत आज़ादी से पहले के समय से हुई है और तब से इसमें काफी बदलाव आया है। इस क्षेत्र को नियंत्रित करने वाली नीतियां सख्त सरकारी नियंत्रण से बदलकर ज़्यादा उदार और विविध हो गई हैं। ये बदलाव तकनीकी प्रगति, सामाजिक ज़रूरतों और बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार को दर्शाते हैं। </p>
<p>नियामक ढांचा सार्वजनिक हित, राष्ट्रीय सुरक्षा और विविध कंटेंट की बढ़ती मांग को संतुलित करने के लिए लगातार खुद को ढालता रहा है। भारत की ब्रॉडकास्टिंग नीतियां सरकारी नियंत्रण से एक विविध, विनियमित इकोसिस्टम में विकसित हुई हैं, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सामाजिक ज़िम्मेदारी के साथ संतुलित करती हैं। यह ढांचा पारंपरिक से डिजिटल मीडिया तक, तकनीकी बदलावों के अनुसार खुद को ढालता है। जैसे-जैसे यह क्षेत्र विकसित होता रहेगा, नीतियां इस संतुलन को बनाए रखने के लिए खुद को समायोजित करती रहेंगी, साथ ही इनोवेशन को बढ़ावा देंगी और नई चुनौतियों का सामना करेंगी।</p>
<p><strong>सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा शुरू की गई राष्ट्रीय प्रसारण नीति 2024 का लक्ष्य प्रसारण क्षेत्र के लिए एक मज़बूत भविष्य को परिभाषित करना है। यह एक ऐसे जीवंत उद्योग की कल्पना करती है जो भारत की सांस्कृतिक विविधता को बढ़ावा दे और डिजिटल अर्थव्यवस्था में उसके बदलाव का समर्थन करे। परामर्श और हितधारकों के साथ बातचीत के बाद, TRAI ने सितंबर 2023 में एक प्री-कंसल्टेशन पेपर जारी किया, जिसमें सुझाव आमंत्रित किए गए और 2023 के अंत और 2024 की शुरुआत में देश भर में बैठकें आयोजित की गईं। यह प्रक्रिया एक कंसल्टेशन पेपर में समाप्त हुई जो इनपुट को संश्लेषित करता है और राष्ट्रीय प्रसारण नीति के लिए रणनीतिक दिशाओं की रूपरेखा तैयार करता है, जो भारत के प्रसारण परिदृश्य में संरचित विकास और तकनीकी अनुकूलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।</strong></p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-1.jpg" alt="" width="2046" height="938" class="aligncenter size-full wp-image-7339" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-1.jpg 2046w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-1-300x138.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-1-1024x469.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-1-768x352.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-1-1536x704.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2046px) 100vw, 2046px" /></a></p>
<p>सरकारी सूत्रों का कहना है कि प्रसारण क्षेत्र को मजबूत करने के लिए सरकारी पहल डिजिटल इंडिया: इस प्रमुख कार्यक्रम का लक्ष्य भारत को एक डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था में बदलना है। भारतनेट परियोजना का उद्देश्य देश की सभी ग्राम पंचायतों को ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान करना है। ब्रॉडकास्ट इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क डेवलपमेंट योजना का उद्देश्य प्रसार भारती के प्रसारण बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है। प्रसारण का स्वचालन सम्बन्धी पहल AIR और दूरदर्शन के स्थलीय ट्रांसमीटरों और स्टूडियो के डिजिटलीकरण पर केंद्रित है। सामुदायिक रेडियो सहायता योजना यह योजना सामुदायिक रेडियो स्टेशन स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है। पिछले 9 वर्षों में, इस क्षेत्र में काफी वृद्धि हुई है और सामुदायिक रेडियो स्टेशनों की संख्या 2014 में 140 से बढ़कर 2023 में 481 हो गई है।</p>
<p>इतना ही नहीं, भारत सरकार देशव्यापी रेडियो कवरेज का विस्तार करने के उद्देश्य से FM रेडियो चैनल आवंटन के लिए एक पारदर्शी ई-नीलामी प्रणाली लागू कर रही है। वर्तमान में, रेडियो भारत के 80% भौगोलिक क्षेत्र और 90% से अधिक आबादी तक पहुँचता है। इस पहुँच को और बढ़ाने के लिए, सरकार ने ई-नीलामी के तीसरे बैच के तहत 284 शहरों में 808 चैनलों की नीलामी की घोषणा की है। इस पहल को देशव्यापी रेडियो पहुंच बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है, जो संभावित रूप से पहले से वंचित क्षेत्रों और आबादी तक रेडियो सेवाएं ला सकता है। (क्रमशः &#8230;..)</p>
<p><strong>आगे पढ़िए : जब रायपुर (मध्य प्रदेश) में &#8216;टाईल्स&#8217; का व्यापारी &#8216;रेडियो संग्रहकर्ता&#8217; बन गया, नाम है मनोहर डेनवानी </strong></p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/establish-national-museum-of-radio">राष्ट्रीय रेडियो संग्रहालय-भाग-1: &#8216;कभी मेरे मन की बात भी सुनें माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी&#8217;: आपका पुराना रेडियो</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>छायाकार कृष्ण मुरारी किशन की वह &#8216;ब्रेकहीन, घंटीहीन, मडगार्डहीन साईकिल&#8217; और प्रधानमंत्री द्वारा पूर्णिया हवाई अड्डा का लोकार्पण </title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 04 Oct 2025 12:13:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चुटकुलानन्द की चिठ्ठी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>पूर्णिया / नई दिल्ली : विगत माह 15 सितम्बर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, प्रदेश के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ मिथिलांचल के पूर्णिया में जब हवाई अड्डा का आधिकारिक तौर पर बिहार के लोगों को समर्पित कर रहे थे, उस क्षण विश्व के किसी भी कोने में रहने वाले पूर्णिया के लोग अपने शहर से जुड़ने की बात [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>पूर्णिया / नई दिल्ली : विगत माह 15 सितम्बर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, प्रदेश के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ मिथिलांचल के पूर्णिया में जब हवाई अड्डा का आधिकारिक तौर पर बिहार के लोगों को समर्पित कर रहे थे, उस क्षण विश्व के किसी भी कोने में रहने वाले पूर्णिया के लोग अपने शहर से जुड़ने की बात सोच रहे हों, मेरी आँखों के सामने बिहार के एक सम्मानित छायाकार की छवि नाचने लगा था। काश !! नीतीश कुमार पुनः मुख्यमंत्री बनने के साथ, कृष्ण मुरारी किशन को राष्ट्रीय नागरिक सम्मान से अलंकृत करने की सिफारिश करते। </strong></p>
<blockquote><p>सोचने लगा काश !!! वह छायाकार आज जीवित होता तो अपनी &#8216;ब्रेकहीन&#8217;, &#8216;घंटीहीन&#8217;, &#8216;मडगार्डहीन&#8217;, &#8216;चेनकवरहीन&#8217; साईकिल की ओर प्रधानमंत्री को जरूर लाता, या फिर प्रधानमंत्री स्वयं पैदल चलकर उस छायाकार के रॉकेटनुमा साईकिल को &#8216;नमन&#8217; करने जरूर आते, जिसने सत्तर के दशक में बिहार की सड़कों पर, खेतों में, खलिहानों में, शैक्षणिक संस्थानों में, अस्पतालों में, कारावासों में उस छायाकार का साथ देकर तस्वीरों से इतिहास रचा था। यह अलग बात है कि उसी कालखंड में पटना की सडकों पर अपने चप्पलों के साथ-साथ अपनी राजनीतिक भविष्य को रगड़ने वाले नीतीश कुमार को वह छायाकार याद भी नहीं आया होगा। नेता ऐसे ही होते हैं।</p></blockquote>
<p>कृष्ण मुरारी &#8216;किशन&#8217; जिसने बिहार की राजधानी पटना की सड़कों पर अपनी साईकिल की पहियों से फोटोग्राफी का बुनियाद रखा था। आज जब पटना का हवाई अड्डा का रनवे नई रोशनी में जगमगा रहा था, बिहटा उड़ान भरने की तैयारी हो रही थी, दरभंगा दैनिक प्रस्थान के साथ गुनगुना रहा था, गया आस्था और इतिहास के माध्यम से महाद्वीपों को जोड़ रहा था, और पूर्णिया अपने पहले यात्रियों का स्वागत करने के लिए सज्ज था &#8211; कृष्ण मुरारी किशन की आत्मा अपनी उस ऐतिहासिक साईकिल के साथ खड़े-खड़े प्रदेश के उज्जवल भविष्य को देख रहा था। आज हवाई अड्डों पर कर्मियों के साथ-साथ, मंत्रियों और अधिकारियों के हाथ में &#8216;स्मार्ट फोन&#8217; था, जो तस्वीर खींच रहे थे, वीडियो बना रहे थे। उन दिनों ऐसी बात नहीं थी। </p>
<p><strong>उन दिनों, आर्यावर्त, द इंडियन नेशन, सर्चलाइट और प्रदीप बिहार के प्रमुख समाचार पत्र थे। फोटो पत्रकारिता के बारे में कोई नहीं जानता था। किशन नियमित रूप से इंडियन नेशन और आर्यावर्त को जेपी आंदोलन की तस्वीरें उपलब्ध कराते थे। अवध कुमार झा, जो दोनों समाचार पत्रों को प्रकाशित करने वाले समूह के मुख्य संवाददाता थे, ने उन्हें यह काम सौंपा था। अखबार उन्हें पारिश्रमिक तो देते ही थे, जेपी उन्हें तस्वीरें बनाने में खर्च होने वाले पैसे भी वापस कर देते थे। उस समय आंदोलन की शुरुआत की नींव रखी जा रही थी। किशन का मिशन राज्य और राष्ट्रीय मीडिया, दोनों को आंदोलन की गतिविधियों से अवगत कराना था। किशन का 1 फरवरी 2015 को निधन हो गया।</strong></p>
<p>इधर, पूर्णिया में हवाई अड्डा के लोकार्पण के बाद यह कहा जाने लगा कि पटना में एक धुंध भरी सर्दियों की सुबह, जैसे ही दिन की पहली उड़ान धुंध को चीरती हुई गुज़रती है, सैकड़ों यात्री नए टर्मिनल पर बेसब्री से प्रतीक्षा करते हैं। परीक्षा देने जा रहे घबराए हुए छात्रों के अलावा विवाह में जाने के लिए उत्साहित परिवारों से लेकर व्यापार की तलाश में लगे कुशल उद्यमियों तक, टर्मिनल उड़ान भरने के लिए तैयार कहानियों से गुलज़ार है। कुछ समय पहले तक, इन यात्राओं का अर्थ सिर्फ ट्रेन या बस में घंटों सफ़र करना होता था। आज, बिहार का आसमान नए टर्मिनलों, नए मार्गों और बढ़ते पंखों की एक अलग कहानी बयां कर रहा है। समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और बढ़ती आर्थिक आकांक्षाओं से युक्त राज्य बिहार में, विमानन क्षेत्र राष्ट्रीय और वैश्विक पहुंच के साथ एक परिवर्तनकारी परिवर्तन के दौर से गुज़र रहा है।</p>
<p>हाल की परियोजनाओं ने पटना, दरभंगा, गया, बिहटा और पूर्णिया को शेष भारत से जोड़ते हुए बिहार को पहले से कहीं अधिक प्रमुखता से विमानन मानचित्र पर ला दिया है। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने पूर्णिया हवाई अड्डे के न्यू सिविल एन्क्लेव में अंतरिम टर्मिनल भवन का उद्घाटन करते हुए हवाई संपर्क के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाया। नई सुविधा यात्री प्रबंधन क्षमता को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाती है, जिससे क्षेत्र में हवाई यात्रा की बढ़ती मांग को बेहतर ढंग से पूरा करने के लिए हवाई अड्डे की स्थिति  और अत्याधुनिक बन जाती है। यह न केवल बिहार के विमानन बुनियादी ढांचे को मजबूत करता है, बल्कि राज्य के प्रमुख जिलों में से एक में आर्थिक गतिविधि, पर्यटन और पहुंच को बढ़ावा देने का भी वादा करता है।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/2-scaled.jpeg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/2-scaled.jpeg" alt="" width="2560" height="1526" class="aligncenter size-full wp-image-7108" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/2-scaled.jpeg 2560w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/2-300x179.jpeg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/2-1024x610.jpeg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/2-768x458.jpeg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/2-1536x915.jpeg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/2-2048x1221.jpeg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></a></p>
<p>उधर पटना में भी, लोग कह रहे हैं कि विशाल लाउंज, कुशल चेक-इन सिस्टम और आराम के लिए निर्मित सुविधाओं के साथ, एक चमचमाता हुआ नया टर्मिनल अब पटना के जय प्रकाश नारायण अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर तैयार है और बिहार की विमानन यात्रा में एक गौरवपूर्ण उपलब्धि है। आधुनिक वास्तुकला और उन्नत यात्री सुविधाओं के साथ डिज़ाइन किया गया, टर्मिनल वार्षिक 10 मिलियन यात्रियों को संभाल सकता है, एक ऐसा पैमाना जो बिहार की बढ़ती आकांक्षाओं से मेल खाता है। वर्ष  2014 से 2024 के दौरान, पटना हवाई अड्डा बिहार के विमानन नेटवर्क में एक प्रमुख नोड के रूप में उभरा, जिसने लगभग 3 करोड़ यात्रियों को संभाला, लगभग 83,000 टन माल ढुलाई की और सालाना 24,026 औसत विमानों की आवाजाही दर्ज की। </p>
<p><strong>विमानन गति को बढ़ावा देने की एक और उपलब्धि बिहटा हवाई अड्डे का विकास है। 1,413 करोड़ रूपए के निवेश वाली एक परियोजना, बिहटा वायु सेना स्टेशन में नए सिविल एन्क्लेव की आधारशिला रखी गई है जो पटना के पश्चिम में एक प्रमुख केंद्र के रूप में कार्य करेगी। 50 लाख यात्रियों को संभालने के लिए डिज़ाइन की गई इसकी आधुनिक सुविधाएं पटना के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की पूरक होंगी, जिससे क्षेत्र की कनेक्टिविटी और मजबूत होगी। बिहटा टर्मिनल आधुनिक विमानन वास्तुकला को बिहार के सुनहरे अतीत की गूँज के साथ मिश्रित करता है, जो मौर्य और गुप्त राजवंशों की भव्यता के साथ-साथ नालंदा और विक्रमशिला की विद्वतापूर्ण विरासतों से प्रेरणा लेता है। बिहटा न केवल उत्कृष्ट बुनियादी ढांचे में, बल्कि दृष्टिकोण के मामले में उन्नत है। यह बिहार के विमानन विकास के अगले चरण के लिए एक लॉन्चपैड बनने की ओर अग्रसर है, इससे आसान यात्रा को सक्षम बनाया जाएगा, व्यापार का समर्थन होगा और यह राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए नए अवसरों को आकर्षित करेगा।</strong></p>
<p>वर्ष 2020 में उड़ान क्षेत्रीय संपर्क योजना के तहत चालू होने के बाद से, दरभंगा हवाई अड्डा तेजी से बिहार के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी बन चुका है। दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे प्रमुख महानगरों के लिए सीधी उड़ानों के साथ, इसने देश भर में अवसरों और गंतव्यों के द्वार खोल दिए हैं। अकेले वित्त वर्ष 2023-24 में, 5 लाख से अधिक यात्रियों ने दरभंगा को अपने लॉन्चपैड के रूप में चुना, प्रत्येक उड़ान एक संकेत है कि कनेक्टिविटी उनके द्वार पर पहुंच चुक है। दरभंगा का बढ़ता उड़ान नेटवर्क समावेशन का प्रतीक है। यह उत्तर बिहार के लोगों को भारत के शहरी केंद्रों के करीब लाता है, साथ ही उनकी संस्कृति, प्रतिभा और उद्यम को राज्य की सीमाओं से परे भी ले जाता है।</p>
<p>कुछ हवाई अड्डे गया की तरह इतिहास और आधुनिक यात्रा दोनों का प्रबंधन संभालते हैं। हर साल, यह छात्रों और पेशेवरों का स्वागत करता है, साथ ही बोधगया में बुद्ध के मार्ग पर चलने वाले हजारों तीर्थयात्रियों, भिक्षुओं और साधकों के लिए अपने द्वार भी खोलता है। 954 एकड़ में फैला और सटीकता के साथ निर्मित, यह 250 आगमन और 250 प्रस्थान  को संभालने में सक्षम है ।गया हवाई अड्डा बिहार को दुनिया के बौद्ध स्थलों से जोड़ने वाले एक सांस्कृतिक सेतु के रूप में निरंतर प्रगति कर रहा है। यह बिहार की कालातीत विरासत को वैश्विक दर्शकों से जोड़ता है और भारत के विमानन मानचित्र पर राज्य को दृढता से स्थापित करता है।</p>
<blockquote><p>बहरहाल, सत्तर के दशक से अपने जीवन की अंतिम सांस तक कृष्ण मुरारी किशन बिहार राज्य में हुए लगभग हर महत्वपूर्ण सामाजिक-राजनीतिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक घटनाक्रम के प्रत्यक्षदर्शी थे। उन्होंने कई ब्रेकिंग न्यूज़ स्टोरीज़ की तस्वीरें खींचीं। जोखिम उठाने से कभी नहीं हिचकिचाते हुए, उन्हें दो बार गोली लगी थी। वे कई मीडिया संस्थानों और समाचार एजेंसियों से जुड़े रहे। वे बिहार में समाचार फोटोग्राफी के एक स्तंभ थे। किशन का फोटोग्राफी करियर ऐतिहासिक बिहार आंदोलन के दिनों में शुरू हुआ। वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्य थे और संगठन की गतिविधियों में भाग लेने के लिए पटना के कदमकुआं स्थित कांग्रेस मैदान में अक्सर आते थे। </p></blockquote>
<p>कहते हैं, एक बार, मैदान से लौटते समय, वे जेपी से मिलने गए। किशन ने पानी पिया, कुछ देर बैठे और फिर घर चले गए। उनके अपने शब्दों में, &#8220;इस तरह, हम जेपी से लगभग हर दिन मिलते थे। उन दिनों, वे बिहार राहत समिति में एक उच्च पद पर थे। वे हमें नान खटाई परोसते थे। मुझे याद भी नहीं कि उन्होंने मुझे फोटोग्राफी के लिए कैसे और क्यों प्रेरित किया।&#8221; रघु राय और सत्यनारायण के साथ, वे बिहार आंदोलन का इतिहास लिखने वाले शीर्ष फोटोग्राफरों में से एक थे।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/3-scaled.jpeg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/3-scaled.jpeg" alt="" width="2560" height="1575" class="aligncenter size-full wp-image-7109" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/3-scaled.jpeg 2560w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/3-300x185.jpeg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/3-1024x630.jpeg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/3-768x472.jpeg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/3-1536x945.jpeg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/3-2048x1260.jpeg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/3-356x220.jpeg 356w" sizes="auto, (max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></a></p>
<p>उन दिनों फोटो पत्रकारिता का कोई अस्तित्व नहीं था और अखबारों की संख्या बहुत कम थी। डिजिटल मीडिया अभी भी भविष्य में था। तस्वीरों को डेवलप करके &#8220;ब्लॉक&#8221; पर उकेरा जाता था। ब्लॉक तैयार करवाने के लिए उन्हें घंटों स्टूडियो में बैठना पड़ता था और फिर राष्ट्रीय अखबारों में छपवाने के लिए साइकिल से हवाई अड्डे जाना पड़ता था। लेकिन उन्होंने आंदोलन के हर पहलू को कैमरे में कैद करने का अपना दृढ़ संकल्प कभी नहीं छोड़ा, चाहे इसके लिए उन्हें पुलिस की लाठियों के कुछ वार ही क्यों न सहने पड़े। एक फोटोग्राफर के रूप में किशन का सफ़र कितना महँगा, जोखिम भरा और संघर्षों से भरा रहा होगा, इसकी कल्पना ही की जा सकती है।</p>
<p>किशन का जन्म (1952) एक पिछड़े लुहार (लोहार) परिवार में हुआ था। उनके पिता द्वारिका विश्वकर्मा पटना के दरियापुर गोला मोहल्ले में साइकिल मरम्मत की दुकान चलाते थे। किशन दुकान में अपने पिता का हाथ बटाते थे। बाद में, उन्होंने 20-25 साइकिल रिक्शा खरीदे और उन्हें किराए पर देकर जीविका चलाने लगे। किशन ने पटना कॉलेजिएट स्कूल से शिक्षा प्राप्त की और 1968 में मैट्रिक की परीक्षा पास की। उन्होंने 1977 में पटना के कॉमर्स कॉलेज से आई.कॉम. की डिग्री हासिल की। वह चार्टर्ड अकाउंटेंट बनना चाहते थे। हालाँकि, अपनी पीढ़ी के कई लोगों की तरह, वह बिहार आंदोलन में शामिल होने के आह्वान का विरोध नहीं कर सके और कैमरा चलाने का फैसला किया, और अंततः एक प्रसिद्ध फोटो पत्रकार बन गए।</p>
<p><strong>कहते हैं कि जब वे अपनी प्री-यूनिवर्सिटी डिग्री की पढ़ाई कर रहे थे, तो जेब खर्च के लिए वे दो-तीन ट्यूशन लिया करते थे। संयोगवश, जिन लड़कियों को वे पढ़ाते थे, उनमें से एक के पिता के पास एक फोल्डिंग कोडक कैमरा था (जिससे एक फिल्म रोल में आठ तस्वीरें ली जा सकती थीं)। इसी कैमरे का इस्तेमाल शुरू करते ही फोटोग्राफी के प्रति उनका प्रेम शुरू हुआ। जल्द ही उन्होंने एक ल्यूबिटेल-2 कैमरा खरीद लिया, जिसकी कीमत उस समय ₹350 थी।</strong></p>
<p>किशन ने खुद को बिहार आंदोलन के दस्तावेजीकरण तक ही सीमित नहीं रखा। अपने लंबे करियर में, उन्होंने फोटो पत्रकारिता के सर्वोच्च मानक स्थापित किए। वे अपने काम के प्रति समर्पित थे और डर उनके लिए बिलकुल भी मायने नहीं रखता था। चाहे पुलिस अत्याचार हो या सामंती उत्पीड़न, या राजनीतिक उथल-पुथल या जनांदोलन, वे हमेशा मौके पर पहुँचने वाले पहले फोटोग्राफर होते थे। भागलपुर में अंधाधुंध गोलीबारी, इंदिरा गांधी की बेलछी यात्रा और अपने इलाके के लोगों को आतंकित करने वाले डाकू मोहन बिंद की उनकी तस्वीरें उनके करियर के मील के पत्थर साबित हुईं। उन्होंने ये तस्वीरें बिना किसी जोखिम की परवाह किए लीं। उनकी तस्वीरें रविवार, धर्मयुग और इलस्ट्रेटेड वीकली ऑफ इंडिया जैसे प्रतिष्ठित प्रकाशनों में नियमित रूप से प्रकाशित होती रहीं। उनका मानना था कि उनकी तस्वीरें उस स्थान के इतिहास को बताये। </p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/chutkulanands-letter/photographer-krishn-murari-kishan-should-be-awarded-with-padma">छायाकार कृष्ण मुरारी किशन की वह &#8216;ब्रेकहीन, घंटीहीन, मडगार्डहीन साईकिल&#8217; और प्रधानमंत्री द्वारा पूर्णिया हवाई अड्डा का लोकार्पण </a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>​लाल किले के प्राचीर से 103 मिनट के संबोधन में 92-बिंदुओं पर व्याख्यान &#8216;आसान&#8217; नहीं है</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/nation/narendr-modi-addressed-nation-on-79th-independence-day</link>
					<comments>http://www.aryavartaindiannation.com/nation/narendr-modi-addressed-nation-on-79th-independence-day#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 16 Aug 2025 05:03:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
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		<category><![CDATA[India]]></category>
		<category><![CDATA[narendra modi]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लाल किला (पुरानी दिल्ली) : प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नई दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन में कहा कि अब आतंकवाद के खिलाफ हमने एक न्यू नॉर्मल स्थापित किया है। प्रधानमंत्री 103 मिनट के &#8216;ऐतिहासिक&#8217; भाषण में 92-बिंदुओं पर अपना विचार रखें। उन्होंने कहा कि आतंक [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>लाल किला (पुरानी दिल्ली) : प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नई दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन में कहा कि अब आतंकवाद के खिलाफ हमने एक न्यू नॉर्मल स्थापित किया है। प्रधानमंत्री 103 मिनट के &#8216;ऐतिहासिक&#8217; भाषण में 92-बिंदुओं पर अपना विचार रखें। उन्होंने कहा कि आतंक और आतंकी को पालने-पोसने वालों तथा आतंकियों को ताकत देने वालों को अब हम अलग-अलग नहीं मानेंगे। वो मानवता के समान दुश्मन है, उनके बीच कोई फर्क नहीं है। प्रधानमंत्री ने कहा कि अब भारत ने तय कर लिया है कि न्यूक्लियर धमकियों को अब हम सहने वाले नहीं हैं। न्यूक्लियर ब्लैकमेल लंबे अरसे से चला आया है, अब वो ब्लैकमेल नहीं सहा जाएगा।</strong></p>
<p>अपने संबोधन में भारत की आत्मनिर्भरता और परिवर्तन की यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में भारत में रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांस्फॉर्म हो रहा है, लेकिन अब और भी मजबूती के साथ आगे बढ़ने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि सरकार एक आधुनिक, कुशल और नागरिक-अनुकूल इकोसिस्टम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, जहां कानूनों, विनियमों और प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाए, उद्यमिता को प्रोत्साहित किया जाए और प्रत्येक भारतीय विकसित भारत के निर्माण में योगदान दे सके।</p>
<p>प्रधानमंत्री श्री मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत में कहा कि पिछले वर्षों में, सरकार ने सुधारों का एक ऐतिहासिक अभियान चलाया है और 40,000 से अधिक अनावश्यक अनुपालनों को समाप्त कर दिया है। श्री मोदी ने कहा कि 1,500 से अधिक पुराने कानूनों को निरस्त कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि संसद में दर्जनों अन्य कानूनों को सरल बनाया गया, जिसमें नागरिकों के हितों को सदैव सबसे आगे रखा गया। श्री मोदी ने कहा कि केवल वर्तमान सत्र में, 280 से अधिक प्रावधानों को हटा दिया गया, जिससे शासन को हर भारतीय के लिए सरल और अधिक सुलभ बनाया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने जोर देकर कहा कि सुधार केवल अर्थशास्त्र के बारे में नहीं है, यह नागरिकों के रोजमर्रा के जीवन को बदलने के बारे में भी है।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815188971.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815188971.jpg" alt="" width="2200" height="1343" class="aligncenter size-full wp-image-7061" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815188971.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815188971-300x183.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815188971-1024x625.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815188971-768x469.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815188971-1536x938.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815188971-2048x1250.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a></p>
<p>तीन नए आपराधिक कानूनों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अंग्रेजों के जमाने से हम दंड संहिता में दबे पड़े थे, दंड का भय दिखाकर जीवन चल रहा था और आजादी के 75 साल ऐसे ही गए। उन्होंने कहा कि हम दंड संहिता को खत्म कर न्याय संहिता लाए हैं। न्याय संहिता में भारत के नागरिक के प्रति विश्वास का भाव है। उन्होंने कहा कि हमने रिफॉर्म की यात्रा को तेज करने के लिए बीड़ा उठाया है और हम बहुत तेजी से आगे बढ़ना चाहते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि चाहे स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स हो या रेगुलेटरी, पॉलिसी, प्रोसेस या कांस्टीट्यूशनल रिफॉर्म हो, आज हम हर प्रकार के रिफॉर्म्स को मकसद बनाकर चले हैं। हमारे देश में, छोटी-छोटी चीजों के लिए जेल में डालने के कानून हैं और हैरानी की बात है कि किसी ने इस पर नजर नहीं दौड़ाई। उन्होंने कहा कि जो अनावश्यक कानून हैं वो खत्म होने चाहिए। हम संसद में पहले भी बिल लाए थे, इस बार भी लेकर आए हैं।</p>
<p><strong>प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने कहा कि हम समृद्धि की ओर जा रहे हैं, लेकिन समृद्धि का रास्ता सुरक्षा से गुजरता है। उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में राष्ट्र सुरक्षा, राष्ट्र रक्षा, राष्ट्र के नागरिकों की रक्षा, इन सभी मोर्चों पर हमने पूरे समर्पण भाव से काम किया है और बदलाव लाने में सफल हुए हैं। उन्होंने कहा कि हमारे देश का बहुत बड़ा जनजातीय क्षेत्र पिछले कई दशकों से नक्सलवाद, माओवाद की चपेट में लहू लुहान हो चुका था। प्रधानमंत्री ने कहा कि सबसे ज्यादा नुकसान मेरे आदिवासी परिवारों को हुआ। आदिवासी माताओं-बहनों ने अपने होनहार बच्चों को खो दिया। नौजवान बेटे गलत रास्‍ते पर खींच लिए गए, भटकाए गए, उनके जीवन को तबाह कर दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी जी ने कहा कि हमने फौलादी हाथ से काम लिया। एक समय था जब सवा सौ से ज्यादा जिलों में नक्सलवाद अपनी जड़े जमा चुका था और हमारे जनजातीय क्षेत्र और जनजातीय नौजवान माओवाद के चंगुल में फंसे हुए थे। आज सवा सौ जिलों को हम 20 पर ले आए हैं। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की हमने सबसे बड़ी सेवा की है।</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि एक जमाना था जब बस्तर को याद करते ही माओवाद नक्सलवाद बम-बंदूक की आवाज सुनाई देती थी। उसी बस्तर में आज माओवाद, नक्सलवाद से मुक्त होने के बाद जब हजारों नौजवान ओलंपिक में भाग लेते है और भारत माता की जय बोलकर खेल के मैदान में उतरते हैं तो पूरा वातावरण उत्साह से भर जाता है। उन्होंने कहा कि पूरा देश यह बदलाव देख रहा है। प्रधानमंत्री मोदी जी ने कहा कि जो क्षेत्र कभी रेड कॉरिडोर के रूप में जाने जाते थे, वे आज विकास के ग्रीन कॉरिडोर बन रहे हैं, हमारे लिए यह गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि भारत के नक्शे में जिन क्षेत्रों को लहू लुहान कर दिया गया था, लाल रंग से रंग दिया गया था, हमने वहां संविधान, कानून और विकास का तिरंगा फहरा दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती का अवसर है। इस अवसर पर इन जनजातीय क्षेत्रों को नक्सलवाद से मुक्त कर और जनजातीय नौजवानों की जिंदगी बचा कर हमने भगवान बिरसा मुंडा को एक सच्ची श्रद्धांजलि दी है।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189004.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189004.jpg" alt="" width="2200" height="2110" class="aligncenter size-full wp-image-7062" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189004.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189004-300x288.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189004-1024x982.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189004-768x737.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189004-1536x1473.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189004-2048x1964.jpg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189004-24x24.jpg 24w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a></p>
<p>प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने कहा कि एक षड्यंत्र और सोची समझी साजिश के तहत देश की डेमोग्राफी को बदला जा रहा है। एक नए संकट के बीज बोए जा रहे हैं और घुसपैठिए देश के नौजवानों की रोजी-रोटी छीन रहे हैं। ये घुसपैठिए देश की बहन बेटियों को निशाना बना रहे हैं, यह बर्दाश्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि ये घुसपैठिए भोले भाले आदिवासियों को भ्रमित करके उनकी जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश यह सहन नहीं करेगा। जब डेमोग्राफी परिवर्तन होता है, सीमावर्ती क्षेत्रों में डेमोग्राफी में परिवर्तन होता है, तब राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए संकट पैदा होता है। देश की एकता, अखंडता और प्रगति के लिए यह संकट पैदा करता है और सामाजिक तनाव के बीज बो देता है।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि कोई देश अपने को घुसपैठियों के हवाले नहीं कर सकता है। जब दुनिया का कोई देश ऐसा नहीं कर सकता है, तो भारत कैसे कर सकता है? उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने त्याग और बलिदान से आजादी पाई और हमें स्वतंत्र भारत दिया। उन महापुरुषों के प्रति हमारा कर्तव्य हैं कि हम अपने देश में ऐसी हरकतों को स्वीकार न करें, उनके प्रति यह हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि इसलिए आज लाल किले की प्राचीर से मैं यह कहना चाहता हूँ कि हमने एक हाई पावर डेमोग्राफी मिशन शुरू करने का निर्णय किया है। भारत पर जो यह भीषण संकट मंडरा रहा है उससे निपटने में यह मिशन तय समय में सुविचारित और निश्चित रूप से अपना कार्य करेगा।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189013.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189013.jpg" alt="" width="2200" height="1318" class="aligncenter size-full wp-image-7063" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189013.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189013-300x180.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189013-1024x613.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189013-768x460.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189013-1536x920.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189013-2048x1227.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a></p>
<p><strong>प्रधानमंत्री के संबोधन के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं: </strong></p>
<p>* आजादी का यह महापर्व 140 करोड़ संकल्पों का पर्व है। आजादी का यह पर्व सामूहिक सिद्धियों का, गौरव का पल है और हृदय उमंग से भरा हुआ है। देश एकता की भावना को निरंतर मजबूती दे रहा है। </p>
<p>* 140 करोड़ देशवासी आज तिरंगे के रंग में रंगे हैं। हर घर तिरंगा, भारत के हर कोने से चाहे रेगिस्तान हो, या हिमालय की चोटियां, समुद्र के तट हो या घनी आबादी वाले क्षेत्र, हर तरफ से एक ही गूंज है, एक ही जयकारा है, हमारे प्राण से भी प्यारी मातृभूमि का जयगान है। </p>
<p>* पूज्य बापू के सिद्धांतों पर चलते हुए, संविधान सभा के सदस्यों ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण दायित्व निभाया। भारत का संविधान जब 75 वर्ष से एक प्रकाश स्तंभ बनाकर के हमें मार्ग दिखाता रहा है। </p>
<p>* भारत के संविधान निर्माता अनेक विद महापुरुष डॉ राजेंद्र प्रसाद, बाबा साहब अंबेडकर, पंडित नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी, इतना ही नहीं हमारी नारी शक्ति का भी योगदान कम नहीं था। हंसा मेहता जी, दक्षयानी वेलायुद्धन जैसी विदुषियों ने भी भारत के संविधान को सशक्त करने में अपनी भूमिका निभाई थी। </p>
<p>* हम आज डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती भी मना रहे हैं। संविधान के लिए बलिदान, धारा 370 की दीवार गिराकर, एक देश एक संविधान के मंत्र को जब हमने साकार किया, तो हमने डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी को सच्ची श्रद्धांजलि दी। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189018.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189018.jpg" alt="" width="2200" height="1469" class="aligncenter size-full wp-image-7064" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189018.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189018-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189018-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189018-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189018-1536x1026.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189018-2048x1368.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a></p>
<p>* प्रकृति हम सब की परीक्षा ले रही है। पिछले कुछ दिनों में प्राकृतिक आपदाएं, भूस्खलन, बादलों का फटना, न जाने कितनी-कितनी आपदाएं हम झेल रहे हैं। पीड़ितों के साथ हमारी संवेदना है, राज्य सरकारें और केंद्र सरकार मिलकर के बचाव के काम, राहत के काम, पुनर्वासन के काम में पूरी शक्ति से जुटे हुए हैं। </p>
<p>* मुझे बहुत गर्व हो रहा है, आज मुझे लाल किले की प्राचीर से ऑपरेशन सिंदूर के वीर जांबाजों को सैल्यूट करने का अवसर मिला है। हमारे वीर जांबाज सैनिकों ने, दुश्मनों को उनकी कल्पना से परे सजा दी है। </p>
<p>* 22 तारीख के बाद हमने हमारे सेना को खुली छूट दे दी। रणनीति वो तय करें, लक्ष्य वो तय करें, समय भी वो चुने और हमारी सेना ने वो करके दिखाया, जो कई दशकों तक कभी हुआ नहीं था। सैकड़ों किलोमीटर दुश्मन की धरती पर घुसकर के आतंकी हेडक्वार्टर्स को मिट्टी में मिला दिया, आतंकी इमारतों को खंडहर बना दिया। पाकिस्तान की नींद अभी भी उड़ी हुई है। </p>
<p>* अब हमने एक न्यू नॉर्मल स्थापित किया, आतंक को और आतंकी को पालने-पोसने वालों को, आतंकियों को ताकत देने वालों को, अब हम अलग-अलग नहीं मानेंगे। </p>
<p>* वो मानवता के समान दुश्मन है, उनके बीच कोई फर्क नहीं है। अब भारत ने तय कर लिया है, कि इन न्यूक्लियर की धमकियों को अब हम सहने वाले नहीं हैं, न्यूक्लियर ब्लैकमेल लंबे अरसे से चला आया है, अब वो ब्लैकमेल नहीं सहा जाएगा। <br />
आगे भी अगर दुश्मनों ने ये कोशिश जारी रखी, हमारी सेना तय करेगी, सेना की शर्तों पर, सेना जो समय निर्धारित करे उस समय पर, सेना जो तौर तरीके तय करें उस तौर तरीके से, सेना जो लक्ष्य तय करे उस लक्ष्य को अब हम अमल में लाकर के रहने वाले हैं। हम मुंह तोड़ जवाब देंगे।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189021.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189021.jpg" alt="" width="2200" height="1184" class="aligncenter size-full wp-image-7065" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189021.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189021-300x161.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189021-1024x551.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189021-768x413.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189021-1536x827.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189021-2048x1102.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a></p>
<p>* अब भारत ने तय कर लिया है, खून और पानी एक साथ नहीं बहेंगे। अब देशवासियों को भली-भांति पता चला है कि सिंधु का समझौता कितना अन्यायपूर्ण है, कितना एकतरफा है। ये ऐसा समझौता था, जिसने पिछले 7 दशक से मेरे देश के किसानों का अकल्पनीय नुकसान किया है। अब हिंदुस्तान के हक का जो पानी है उस पर अधिकार सिर्फ और सिर्फ हिंदुस्तान का है, हिंदुस्तान के किसानों का है। </p>
<p>* भारत कतई सिंधु समझौते को, उस स्वरूप को दशकों तक सहा है, उस स्वरूप को आगे नहीं सहा जाएगा। किसान हित में, राष्ट्रहित में, यह समझौता हमें मंजूर नहीं है।</p>
<p>* एक राष्ट्र के लिए आत्मसम्मान की सबसे बड़ी कसौटी आज भी उसकी आत्मनिर्भरता है। विकसित भारत का आधार भी है आत्मनिर्भर भारत। आत्मनिर्भरता का नाता हमारे सामर्थ्य से जुड़ा हुआ है और जब आत्मनिर्भरता खत्म होने लगती है, तो सामर्थ्य भी निरंतर क्षीण होता जाता है और इसलिए हमारे सामर्थ्य को बचाए रखने, बनाए रखने और बढ़ाए रखने के लिए, आत्मनिर्भर होना बहुत अनिवार्य है!</p>
<p>* हमने ऑपरेशन सिंदूर में देखा है, मेड इन इंडिया की कमाल क्या थी। दुश्मन को पता तक ना चला, कि कौन से शस्त्र-अस्त्र हैं, ये कौन सा सामर्थ्य है, जो पलक भर में उनको नष्ट कर रहा है। </p>
<p>* मेड इन इंडिया की शक्ति हमारे हाथ में थी, सेना के हाथ में थी, इसलिए बिना चिंता, बिना रुकावट, बिना हिचकिचाहट, हमारी सेना अपना पराक्रम करती रही और यह पिछले 10 साल से लगातार डिफेंस के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर हम एक मिशन लेकर के चलें हैं, उसके नतीजे आज नजर आ रहे हैं।</p>
<p>* आज हमने उस बोझ से मुक्त होकर के मिशन मोड में सेमीकंडक्टर के काम के आगे बढ़ाया है। 6 अलग-अलग सेमीकंडक्टर के यूनिट्स जमीन पर उतर रहे हैं, चार नए यूनिट्स को हमने ऑलरेडी हरी झंडी दिखा दी है, ग्रीन सिग्नल दे दिया है। इसी वर्ष के अंत तक मेड इन इंडिया भारत की बनी हुई, भारत में बनी हुई, भारत के लोगों द्वारा बनी हुई मेड इन इंडिया चिप्स, बाजार में आ जाएगी। </p>
<p>* हमने बीड़ा उठाया और आज 11 वर्ष में सोलर एनर्जी 30 गुना बढ़ चुकी है। हम नए-नए डेम बना रहे हैं, ताकि हाइड्रो का विस्तार हो और हमें क्लीन एनर्जी उपलब्ध हो। भारत मिशन ग्रीन हाइड्रोजन लेकर के आज हजारों करोड़ रुपए इन्वेस्ट कर रहा है। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189016.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189016.jpg" alt="" width="2200" height="1263" class="aligncenter size-full wp-image-7066" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189016.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189016-300x172.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189016-1024x588.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189016-768x441.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189016-1536x882.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189016-2048x1176.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a></p>
<p>* भविष्य की ऊर्जा को ध्यान में रखकर के, ऊर्जा के क्षेत्रों को ध्यान में रखकर के, भारत न्यूक्लियर एनर्जी पर भी बहुत बड़े इनीशिएटिव ले रहा है। न्यूक्लियर एनर्जी में 10 नए न्यूक्लियर रिएक्टर तेजी से कम कर रहे हैं। 2047 तक, जोकि हमने विकसित भारत का लक्ष्य तय किया है। जब देश की आजादी के 100 साल होंगे, हम परमाणु ऊर्जा क्षमता 10 गुना से भी अधिक बढ़ाने का संकल्प लेकर के आगे बढ़ रहे हैं।</p>
<p>* हम न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में बहुत बड़े रिफॉर्म लेकर के आए हैं। अब हमने प्राइवेट सेक्टर के लिए भी परमाणु ऊर्जा को उसके द्वार खोल दिए हैं, हम शक्ति को जोड़ना चाहते हैं।</p>
<p>* भारत ने तय किया था, कि हम 2030 तक क्लीन एनर्जी भारत में 50% पहुंचा देंगे। यह लक्ष्य हमारा 2030 तक था। मेरे देशवासियों का सामर्थ्य देखिए, मेरे देशवासियों की संकल्प शक्ति देखिए, मेरे देशवासियों को विकसित भारत बनाने का संकल्प को पूर्ण करने के लिए उनकी दौड़ देखिए, हमने जो लक्ष्य 2030 में तय किया था, वो 50% क्लीन एनर्जी का लक्ष्य 2025 में हमने कर लिया, 5 साल पहले हमने अचीव कर लिया।</p>
<p>* हम आत्मनिर्भर बनने की दिशा में काम कर रहे हैं। देश को विकसित बनाने के लिए हम अब समुद्र मंथन की तरफ भी जा रहे हैं। </p>
<p>* हमारे समुद्र के मंथन को आगे बढ़ाते हुए, हम समुद्र के भीतर के तेल के भंडार, गैस के भंडार, उसको खोजने की दिशा में एक मिशन मोड में काम करना चाहते हैं और इसलिए भारत नेशनल डीप वाटर एक्सप्लोरेशन मिशन शुरू करने जा रहा है। यह ऊर्जा इंडिपेंडेंट बनने के लिए यह हमारी महत्वपूर्ण घोषणा है।</p>
<p>* आज पूरा विश्व क्रिटिकल मिनरल को लेकर के बहुत ही सतर्क हो गया है, उसके सामर्थ्य को लोग भली-भांति समझने लगे हैं। हमारे लिए भी क्रिटिकल मिनरल्स में आत्मनिर्भरता बहुत अनिवार्य है। एनर्जी का सेक्टर हो, इंडस्ट्री का सेक्टर हो, रक्षा क्षेत्र हो, टेक्नोलॉजी का हर क्षेत्र हो, आज क्रिटिकल मिनरल्स की टेक्नोलॉजी के अंदर बहुत अहम भूमिका है और इसलिए नेशनल क्रिटिकल मिशन हमने लॉन्च किया है</p>
<p>* 1200 से अधिक स्थानों पर खोज का अभियान चल रहा है, और हम क्रिटिकल मिनरल में भी आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। </p>
<p>* हमारे ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला स्पेस स्टेशन से लौट चुके हैं और आने वाले कुछ दिनों में वो भारत भी आ रहे हैं। हम स्पेस में भी अपने दम पर आत्मनिर्भर भारत गगनयान की तैयारी कर रहे हैं। हम अपने बलबूते पर हमारा अपना स्पेस स्टेशन बनाने की दिशा में हम काम कर रहे हैं।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189023.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189023.jpg" alt="" width="2200" height="1630" class="aligncenter size-full wp-image-7067" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189023.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189023-300x222.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189023-1024x759.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189023-768x569.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189023-1536x1138.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189023-2048x1517.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a></p>
<p>* पिछले दिनों स्पेस में जो रिफॉर्म किए गए, मुझे बहुत गर्व हो रहा है, मेरे देश के 300 से ज्यादा स्टार्टअप्स अब सिर्फ और सिर्फ स्पेस सेक्टर में काम कर रहे हैं और उन 300 स्टार्टअप्स में हजारों नौजवान पूरे सामर्थ्य के साथ जुटे हैं। ये है मेरे देश के नौजवानों की ताकत और ये है हमारा हमारे देश के नौजवानों के प्रति विश्वास।</p>
<p>* आज मेरा लाल किले की प्राचीर से, मेरे देश के युवा वैज्ञानिकों को, मेरे टैलेंटेड यूथ को, मेरे इंजीनियर्स को और प्रोफेशनल्स को, और सरकार के हर विभागों को भी मेरा आह्वान है, क्या हमारा अपना मेड इन इंडिया फाइटर जेट्स के लिए जेट इंजन हमारा होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए? </p>
<p>* हम फार्मा ऑफ द वर्ल्ड माने जाते हैं। वैक्सीन में हम नए-नए विक्रम स्थापित करते हैं, लेकिन क्या समय की मांग नहीं है, कि हम रिसर्च और डेवलपमेंट में और ताकत लगाएं, हमारे अपने पेटेंट हो, हमारे अपनी बनाई हुई मानव जाति के कल्याण की सस्ते से सस्ती और सबसे कारगर नई-नई दवाइयों की शोध हो, और संकट में साइड इफेक्ट के बिना मानव जाति के कल्याण में काम आए</p>
<p>* BioE3 पॉलिसी भारत सरकार ने बनाई है, मैं देश के नौजवानों को कहता हूं आइये, BioE3 पॉलिसी का अध्ययन करके आप कदम उठाइए, देश का भाग्य बदलना है, आपका सहयोग चाहिए।</p>
<p>* दुनिया को हमने दिखा दिया है, यूपीआई का हमारा अपना प्लेटफार्म आज दुनिया को अजूबा कर रहा है। हमारे में सामर्थ्य है रियल टाइम ट्रांजैक्शन में 50% अकेला भारत यूपीआई के माध्यम से कर रहा है। मेरे देश के किसान भी फर्टिलाइजर का सही उपयोग कर करके धरती माता की सेवा कर सकते हैं। अनाप-शनाप उपयोग से भी धरती मां को बहुत नुकसान पहुंचा रहे हैं। </p>
<p>* आने वाला युग ईवी (EV) का है। अब ईवी बैटरी क्या हम नहीं बनाएंगे, हम निर्भर रहेंगे। सोलर पैनल की बात हो, इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल्स के लिए जिन-जिन चीजों की आवश्यकताएं है, वो हमारी अपनी होनी चाहिए।</p>
<p>* कोविन प्लेटफार्म हमारा अपना होना चाहिए, देश ने करके दिखाया। करोड़ों-करोड़ों लोगों की जिंदगी बचाने का काम हमने किया है। पिछले 11 साल में एंटरप्रेन्योरशिप उद्यमशीलता को बहुत बड़ी ताकत मिली। आज लाखों स्टार्टअप टीयर-2, टीयर-3 सिटी में देश की अर्थशक्ति को, देश के इनोवेशन को, ताकत दे रहे हैं। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189020.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189020.jpg" alt="" width="2200" height="1127" class="aligncenter size-full wp-image-7068" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189020.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189020-300x154.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189020-1024x525.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189020-768x393.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189020-1536x787.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189020-2048x1049.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a></p>
<p>* उसी प्रकार से मुद्रा योजना से हमारे देश के करोड़ों नौजवान उसमें भी हमारी बेटियां करोड़ों-करोड़ों लोग मुद्रा से लोन लेकर के अपना खुद का कारोबार कर रहे हैं। पिछले 10 साल में वूमेन सेल्फ हेल्प ग्रुप ने कमाल करके दिखाया। आज उनका प्रोडक्ट दुनिया के बाजार में जाने लगे हैं। लाखों करोड़ों का कारोबार हमारे वूमेन सेल फाइल्स ग्रुप कर रहे हैं।</p>
<p>* मैंने एक बार मन की बात में खिलौने की बात कही थी। हम करोड़ों करोड़ों रुपए के खिलौने विदेश से लाते थे। मैंने ऐसे ही मन की बात में कहा, कि अरे मेरे देश के नौजवानों ऐसा भी करेंगे क्या, खिलौने भी बाहर से लाएंगे और आज मैं गर्व से कहता हूं, कि मेरा देश खिलौने एक्सपोर्ट करने लग गया है। </p>
<p>* मैं देश के युवाओं से कहता हूं, आईये आप इनोवेटिव आईडियाज लेकर के आए, आपके आइडियाज को मरने मत देना दोस्तों, आज का आपका आईडिया हो सकता है आने वाली पीढ़ी का भविष्य बना सकता है। मैं आपके साथ खड़ा हूं, मैं आपके लिए काम करने के लिए तैयार हूं, आपका साथी बनकर काम करने को तैयार हूं। आप आईये, हिम्मत जुटाईये, इनीशिएटिव लीजिए।</p>
<p>* आज नेशनल मैन्युफैक्चरिंग मिशन पर बहुत तेजी से कम हो रहा है। हमारे MSMEs उसका लोहा दुनिया मानती है, जो दुनिया में बड़ी-बड़ी चीजें बनती है ना, कुछ ना कुछ तो औजार हमारे देश के MSMEs के द्वारा जाते हैं। बड़े गर्व के साथ जाते हैं, लेकिन हम कंप्रिहेंसिव इंटीग्रेटेड विकास की राह पर जाना चाहते हैं, और इसलिए उनकी शक्ति बढ़े और उसमें भी मैंने पहले एक बार लाल किले से कहा था, जीरो डिफेक्ट जीरो इफेक्ट। </p>
<p>* हम सभी जो उत्पादन के क्षेत्र में लगे हैं, उन सबका मंत्र होना चाहिए, दाम कम लेकिन दम ज्यादा। हमारी हर प्रोडक्ट का दम ज्यादा हो, लेकिन दाम कम हो, इस भाव को लेकर के हमें आगे बढ़ना है।</p>
<p>* आज समय की मांग है, स्वतंत्र भारत का मंत्र लेकर के जीने वालों ने हमें स्वतंत्र भारत दिया। आज 140 करोड़ देशवासियों का एक ही मंत्र होना चाहिए समृद्ध भारत। मैं सभी राजनीतिक दलों  को, राजनेताओं को, सबसे कहता हूं कि आईये, यह किसी राजनीतिक दल का एजेंडा नहीं है, भारत हम सब का है, हम मिलकर के वोकल फॉर लोकल, उस मंत्र को हर नागरिक के जीवन का मंत्र बनाएं। </p>
<p>* भारत में बनी हुई, भारत के नागरिकों के पसीने से बनी हुई वो चीजें, जिसमें भारत की मिट्टी की महक हो और जो भारत की आत्मनिर्भरता के संकल्प को ताकत देता हो, हम उसी को खरीदेंगे, हम उसी का उपयोग करेंगे, हम उस दिशा में आगे आए, यह हमारा सामूहिक संकल्प हो, देखते ही देखते हम दुनिया बदल देंगे दोस्तों। </p>
<p>* मैं चाहता हूं, देश में ऐसे व्यापारी आगे आए, ऐसे दुकानदार आए, कि यहां स्वदेशी माल बिकता है, वो बोर्ड लगाए। हम स्वदेशी का गर्व करने लगे, हम स्वदेशी मजबूरी में नहीं, मजबूती के साथ उपयोग करेंगे। मजबूती के लिए उपयोग करेंगे और जरूरत पड़ी तो औरों को मजबूर करने के लिए उपयोग करेंगे, यह हमारी ताकत होनी चाहिए।</p>
<p>* बीता दशक रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफार्म का रहा है। लेकिन अब हमें और नई ताकत से जुड़ना है। पिछले दिनों हमने कई रिफॉर्म्स किए हैं, एफडीआई हो, इंश्योरेंस कंपनी की बात हो, विश्व की यूनिवर्सिटीज को भारत के अंदर स्थान देने की बात हो, कई रिफॉर्म्स किए हैं। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189007.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189007.jpg" alt="" width="2200" height="1668" class="aligncenter size-full wp-image-7069" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189007.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189007-300x227.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189007-1024x776.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189007-768x582.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189007-1536x1165.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189007-2048x1553.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a></p>
<p>* 40000 से ज्यादा अनावश्यक कंप्लायंसेस को हमने खत्म किया है। इतना ही नहीं, 1500 से अधिक पुराने कानून जो बाबा आदम के जमाने के थे, उन सबको हमने खत्म कर दिया है। हमने दर्जनों कानूनों को सरल करने के लिए संसद में जाकर के जनता के हितों को सर्वोपरि रख करके बदलाव किए हैं। </p>
<p>* लेकिन एक बहुत बड़ा रिफॉर्म इनकम टैक्स एक्ट में हुआ है। करीब 280 से ज्यादा धाराएं हमने समाप्त करने का निर्णय किया है। और साथियों, सिर्फ आर्थिक मोर्चे पर ही रिफॉर्म नहीं, हमने नागरिक के जीवन को भी आसान बनाने के लिए रिफॉर्म किए हैं। इनकम टैक्स रिफंड की बात हो, रिफॉर्म का परिणाम है। कैशलेस असेसमेंट की बात हो, रिफॉर्म का परिणाम है। </p>
<p>* 12 लाख तक आज इनकम टैक्स से मुक्ति दे देना, देश का जो भविष्य बनाने में उत्सुक है ऐसे मेरा मध्यम वर्ग का परिवार, आज फुला नहीं समा रहा है। जब देश का सामर्थ्य बढ़ता है, तो देशवासियों को लाभ मिलता है। अंग्रेजों के जमाने से दंड संहिता में हम दबे पड़े थे, दंड का भय दिखाकर के जीवन चल रहा था, 75 साल आजादी के ऐसे ही गए, हमने दंड संहिता को खत्म कर दिया, न्याय संहिता को ले आए हैं। न्याय संहिता में भारत के नागरिक के प्रति विश्वास का भाव है।</p>
<p>* मैं चाहता हूं देशवासियों, देश के लिए कर रहा हूं, मैं मेरे लिए नहीं कर रहा हूं, किसी का बुरा करने के लिए नहीं कर रहा हूं। मेरे राजनीतिक दल, मेरे प्रतिस्पर्धी साथी भी, देश के इस उज्ज्वल भविष्य के लिए आगे आएं, हमारा साथ दें। </p>
<p>* स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स की बात हो, रेगुलेटरी रिफॉर्म्स की बात हो, पॉलिसी रिफॉर्म की चर्चा हो, प्रोसेस रिफॉर्म की चर्चा हो, कांस्टीट्यूशनल रिफॉर्म करने की जरूरत हो, हर प्रकार के रिफॉर्म्स, ये आज हम मकसद बनाकर के चले हैं। नेक्स्ट जनरेशन रिफॉर्म्स के लिए हमने एक टास्क फोर्स गठित करने का निर्णय किया है। यह टास्क फोर्स समय सीमा में इस काम को पूरा करें। </p>
<p>* हमारे स्टार्टअप्स हो, हमारे लघु उद्योग हो, हमारे गृह उद्योग हो, उन उद्यमियों को उनकी कंप्लायंस कास्ट बहुत कम हो जाएगी और उसके कारण उनको एक नई ताकत मिलेगी। जो एक्सपोर्ट की दुनिया में उनको लॉजिस्टिक सपोर्ट के कारण, व्यवस्थाओं में बदलाव के कारण उनको एक बहुत बड़ी ताकत मिलेगी।</p>
<p>* ऐसे-ऐसे कानून हैं हमारे देश में, छोटी-छोटी चीजों के लिए जेल में डालने के कानून हैं, आप हैरान हो जाएंगे, किसी ने नजर नहीं दौड़ाई। मैं पीछे लगा हूं, ये मेरे देश के नागरिकों को जेल में बंद करने वाले जो अनावश्यक कानून हैं, वो खत्म होने चाहिए। हम संसद में पहले भी बिल लाए थे, इस बार भी लेकर के आए हैं।</p>
<p>* हम नेक्स्ट जनरेशन जीएसटी रिफॉर्म्स लेकर के आ रहे हैं, ये दिवाली के अंदर आपके लिए तोहफा बन जाएंगे, सामान्य मानवीय की जरूरत के टैक्स भारी मात्रा में काम कर दिए जाएंगे, बहुत बड़ी सुविधा बढ़ेंगी। </p>
<p>* हमारे एमएसएमई, हमारे लघु उद्यमी, इनको बहुत बड़ा लाभ मिलेगा। रोजमर्रा की चीजें बहुत सस्ती हो जाएगी और उससे इकोनामी को भी एक नया बल मिलने वाला है। आज देश तीसरी बड़ी इकोनॉमी बनने की दिशा में तेज गति से आगे बढ़ रहा है।</p>
<p>* आज इन्फ्लेशन कंट्रोल में है, फॉरेक्स एक्सचेंज रिजर्व हमारे बहुत मजबूत हैं, हमारे मैक्रोइकोनॉमिक इंडिकेटर्स बहुत मजबूत हैं, ग्लोबल रेटिंग एजेंसी भी लगातार भारत की सराहना करती है, भारत की अर्थव्यवस्था पर ज्यादा से ज्यादा विश्वास व्यक्त कर रही है। </p>
<p>* यह बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था का लाभ मेरे देश के गरीबों को मिले, मेरे देश के किसानों को मिले, मेरे देश की नारी शक्ति को मिले, मेरे देश के मध्यम वर्ग को मिले, मेरे देश के विकास धरा को ताकत देने वाला बने, उस दिशा हम नए प्रयास कर रहे हैं।</p>
<p>* आज 15 अगस्त के ही दिन मेरे देश के युवाओं के लिए एक लाख करोड़ रुपए की योजना हम लागू कर रहे हैं। आज से प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना आज ही 15 अगस्त को लागू हो रही है, ये आपके लिए बहुत खुशखबरी है। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189022.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189022.jpg" alt="" width="2200" height="1424" class="aligncenter size-full wp-image-7070" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189022.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189022-300x194.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189022-1024x663.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189022-768x497.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189022-1536x994.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189022-2048x1326.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a></p>
<p>* इस योजना के तहत निजी क्षेत्र में पहले नौकरी पाने वाले नौजवान को बेटे बेटी को 15000 रुपया सरकार की तरफ से दिए जाएंगे। कंपनियों को भी नए रोजगार देने के अवसर जो भी ज्यादा जुटाएगा, उनको भी प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना करीब करीब साढ़े तीन करोड़ नौजवानों को रोजगार के नए अवसर बनाएगी। </p>
<p>* देश गर्व से भर गया, जब एनडीए की वूमेन कैंडिडेट्स उनका पहला पास आउट हुआ था। पूरा देश गर्व से भर गया था, सारे टीवी चैनल उसी के पीछे लगे हुए थे। सेल्फ हेल्प ग्रुप, 10 करोड़ सेल्फ हेल्प ग्रुप के बहनें, क्या कमाल कर रही हैं। नमो ड्रोन दीदी नारी शक्ति एक नई पहचान बनी। </p>
<p>* हमने 3 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का संकल्प लिया था। 3 करोड़ और मुझे संतोष है कि हम तेज गति से कम कर रहे हैं। समय से  पहले 3 करोड़ का लक्ष्य पर कर लेंगे और आज मैं खुशी से देश को बताना चाहता हूं, कि मेरी नारी शक्ति का सामर्थ्य देखिए, देखते ही देखते दो करोड़ महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। </p>
<p>* पिछले साल अनाज के उत्पादन में, मेरे देश के किसानों ने पुराने सारे विक्रम तोड़ दिए, ये सामर्थ्य है मेरे देश का। उतनी ही जमीन लेकिन व्यवस्थाएं बदली पानी पहुंचने लगा, अच्छे सीड्स मिलने लगे, किसानों को अच्छी सुविधाएं मिलने लगी हैं, तो  वो अपना सामर्थ्य देश के लिए बढ़ा रहा है। </p>
<p>* आज भारत दूध, दाल, जूट जैसे उत्पादन में नंबर वन है दुनिया में। आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा फिश प्रोड्यूसर मेरे मछुआरे भाई बहनों के ताकत देखिए, फिश प्रोड्यूसर में दुनिया में हम दूसरे नंबर पर  पहुंच चुके हैं। आज भारत चावल, गेहूं,फल और सब्जी के उत्पादन में भी दुनिया में दूसरे नंबर पर पहुंच चुका है।</p>
<p>* आपको खुशी होगी मेरे देश के किसान जो पैदाई देते हैं आज वह उत्पादन दुनिया के बाजार में पहुंच रहा है। 4 लाख करोड़ रूपया एग्रो प्रोडक्ट का एक्सपोर्ट हुआ है। ये मेरे देश के किसानों ने हमें ताकत दिखाई है। पीएम किसान सम्मान निधि हो, रेन वाटर हार्वेस्टिंग हो, सिंचाई की योजनाएं हो, क्वालिटीज सीड्स हो, फर्टिलाइजर की आवश्यकता हो, हर क्षेत्र में आज और किसान को एक भरोसा हो गया है फसल बीमा का। </p>
<p>* हमारे देश के पशुधन को बचाने के लिए, हम एक कोविड की वैक्सीन मुफ्त में मिली वो तो हमें याद है, लेकिन हम पशुधन के लिए भी अब तक 125 डोज मुफ्त में पशुओं को लगा चुके हैं। </p>
<p>* भारत के किसान, भारत के पशुपालक, भारत के मछुआरे, ये हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। भारत के किसान, भारत के मछुआरे, भारत के पशुपालक, उनसे जुड़ी किसी भी अहितकारी नीति के आगे मोदी दीवार बनके खड़ा है। भारत अपने किसानों, अपने पशुपालकों, अपने मछुआरों के संबंध में कभी भी कोई समझौता नहीं स्वीकार करेगा।</p>
<p>* दलित हो, पीड़ित हो, शोषित हो, वंचित हो, उनके लिए सकारात्मक रूप से सरकारें प्रो एक्टिव हो, सरकारें प्रो पीपल हो, उस दिशा में हम निरंतर प्रयास कर रहे हैं। सामाजिक न्याय का अगर कोई सच्चा से सच्चा एक्जीक्यूशन है, तो सैचुरेशन में है, जिसमें कोई हकदार छूटे नहीं, हकदार के घर तक सरकार जाए और उसे अपने हक की चीजें मिले, उसके लिए हम काम कर रहे हैं।</p>
<p>* जनधन अकाउंट जब खोले गए ना, वह सिर्फ बैंक का अकाउंट था ऐसा नहीं है उससे एक स्वाभिमान मिला था। </p>
<p>* आयुष्मान भारत ने बीमारी को सहने की आदत से मुक्ति दिलाने का और उनको अच्छे स्वास्थ्य के लिए मदद करने का काम और जब हम वरिष्ठ नागरिकों को ₹500000 से ज्यादा मदद कर करके उनके आरोग्य की चिंता करते हैं।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189024.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189024.jpg" alt="" width="2200" height="1031" class="aligncenter size-full wp-image-7071" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189024.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189024-300x141.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189024-1024x480.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189024-768x360.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189024-1536x720.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189024-2048x960.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a></p>
<p>* आज पीएम आवास 4 करोड़ गरीबों को घर मिलना, मतलब जिंदगी के नए सपने वहां बसते हैं। वो सिर्फ चार दीवारें नहीं है दोस्तों। रेहड़ी पटरी वालों के लिए पीएम स्वनिधि योजना जो कभी ब्याज के चक्कर में फंसा रहता था, आज पीएम स्वनिधि से रेहड़ी पटरी वाला भी और आपने देखा होगा वह यूपीआई से पैसे लेता है, यूपीआई से पैसे देता है।</p>
<p>* एक समय था, गरीब हो, पीड़ित हो, आदिवासी हो, वंचित हो, दिव्यांग हो, हमारी विधवाएं माताएं बहने हो, अपने हक के लिए दर-दर भटकते रहते थे, सरकारी दफ्तरों में चक्कर लगाते लगाते जिंदगी पूरी हो जाती थी। आज सरकार आपके दरवाजे पर आती है, सैचुरेशन की अप्रोच को लेकर के आती है, करोड़ों लाभार्थियों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर एक बहुत बड़ा क्रांतिकारी काम हुआ है।</p>
<p>* गरीबी हटाओ के नारे देश ने बहुत सुने हैं, लाल किले से भी सुने हैं और देश सुन सुन करके थक गया था और देश ने मान लिया था, कि गरीबी हट नहीं सकती है। लेकिन जब हम योजनाओं को गरीब के घर तक ले जाते हैं, विश्वास को गरीब के मन में हम पैदा करते हैं, तो मेरे देश के 25 करोड़ गरीब, गरीबी को परास्त कर करके, गरीबी से बाहर निकल करके एक नया इतिहास बनाते हैं। आज 10 करोड़ गरीब और 10 वर्ष में 25 करोड़ से ज्यादा गरीब ग़रीबी को परास्त कर करके गरीबी से बाहर निकले है और एक नियो मिडिल क्लास तैयार हुआ है।</p>
<p>* यह नियो मिडिल क्लास और मिडिल क्लास एक ऐसी जुगलबंदी है, जिसमें एस्पिरेशन भी है, एफर्ट्स भी हैं, वह देश को आगे बढ़ाने के लिए बहुत बड़ा सामर्थ्य बनने वाली हैं।</p>
<p>* बहुत ही निकट भविष्य में महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले जी की 200वीं जयंती आ रही है। हम उस जयंती के समारोह शुरू करने जा रहे हैं और महात्मा ज्योतिबा फुले के सिद्धांत, उन्होंने जो मंत्र दिए उसमें हमारे लिए प्रेरणा है- पिछड़े को प्राथमिकता। </p>
<p>* रेहड़ी पटरी वालों के लिए स्वनिधि योजना हो या हमारे हुनर वाले हाथ से काम करने वाले विश्वकर्मा योजना की बात हो आदिवासी में भी जो पिछड़े रह गए हैं उनके लिए पीएम जन मन की योजना की बात हो, हमारे पूर्वी भारत को विकास में पूरे देश के अंदर बराबरी में लाना और उनको नेतृत्व देने की दिशा में काम हो, हम सिर्फ समाज पिछड़े हो, उनकी चिंता में अटकने वाले नहीं है, जो क्षेत्र पिछड़े हैं, उनको भी हम प्राथमिकता देना चाहते हैं। </p>
<p>* जो जिले पिछड़े रहे हैं हम उनको प्राथमिकता देना चाहते हैं, जो ब्लॉक पिछड़े रहे हैं उनको प्राथमिकता देना चाहते हैं, हमने 100 एस्पिरेशनल डिस्‍ट्रिक्‍ट, 500 एस्पिरेशनल ब्लॉक, उसी मिशन में काम किया है। हमने पूर्वी भारत के विकास के लिए हजारों करोड़ रुपए के इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रोजेक्ट पर बल दिया है, हमने पूर्वी भारत के जीवन को बदलकर के देश की विकास यात्रा में भागीदार बनने का।</p>
<p>* खेल को बढ़ावा देने के लिए हमने नेशनल स्पोर्ट्स पॉलिसी, कई दशकों के बाद हम देश में खेलो भारत नीति को लेकर के आए हैं, ताकि ये खेल जगत का सर्वांगीण विकास का प्रयास हो। स्कूल से लेकर के ओलंपिक तक हम एक पूरा इकोसिस्टम डेवलप करना चाहते हैं, चाहे कोचिंग की व्यवस्था हो, फिटनेस की बात हो, खेल के मैदान हों, खेल की व्यवस्थाएं हो, खेल के लिए आवश्यक साधन हों, लघु उद्योगों को भी खेल के साधन बनाने में मदद करने की बात हो। </p>
<p>* हमें मोटापे से बचाना है, ओबेसिटी से बचाना है। और इसलिए मैंने, बाकी सब करना पड़ेगा, लेकिन एक छोटा सा सुझाव दिया था कि परिवार तय करें कि जब खाने का तेल घर में आएगा 10 परसेंट कम ही आएगा और 10 परसेंट कम ही उपयोग करेंगे, और हम ओबेसिटी के खिलाफ लड़ाई को जीतने की दिशा में हम अपना योगदान देंगे।</p>
<p>* आज ये वर्ष, गुरु तेग बहादुर जी का 350वां शहीदी वर्ष है, देश की संस्कृति की रक्षा, भारत के मूल्यों की रक्षा के लिए उन्होंने अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। मैं आज उनको नमन करता हूं।</p>
<p>* हमने प्रयागराज के महाकुंभ में देखा है, भारत की विविधता को कैसे जिया जाता है। हमारा देश भाषाओं की विविधता से बहुत ही भरा हुआ है, पुलकित है। और इसलिए हमने मराठी, असमिया,  बांग्ला, पाली, प्राकृत को क्लासिकल लैंग्वेज का दर्जा दिया है। </p>
<p>* इस बार हमने ज्ञान भारतम् योजना के तहत देशभर में जहां भी हस्तलिखित ग्रंथ है, जहां पांडुलिपियां हैं, सदियों पुराने जो दस्तावेज हैं, उनको खोज-खोज करके आज की टेक्नोलॉजी का उपयोग करते हुए, उस ज्ञान की समृद्धि को आने वाली पीढ़ियों के लिए काम आए, उस दिशा में काम कर रहे हैं।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189044.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189044.jpg" alt="" width="2200" height="988" class="aligncenter size-full wp-image-7072" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189044.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189044-300x135.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189044-1024x460.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189044-768x345.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189044-1536x690.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/H20250815189044-2048x920.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a></p>
<p>* सेवा, समर्पण, संगठन और अप्रतिम अनुशासन, यह जिसकी पहचान रही है, ऐसा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दुनिया का यह सबसे बड़ा एनजीओ है एक प्रकार से, 100 साल का उसका समर्पण का इतिहास है। मैं आज यहां लाल किले के प्राचीर से 100 साल की इस राष्ट्र सेवा की यात्रा में योगदान करने वाले सभी स्वयंसेवकों को आदरपूर्वक स्‍मरण करता हूं और देश गर्व करता है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की इस 100 साल की भव्‍य, समर्पित यात्रा को और हमें प्रेरणा देता रहेगा।</p>
<p>* एक समय था, कभी सवा सौ से ज्यादा जिलों में नक्सलवाद अपनी जड़े जमा चुका था। माओवाद की चंगुल में हमारे जनजातीय क्षेत्र, हमारे जनजातीय नौजवान फंसे हुए थे और आज सवा सौ जिलों में से कम होते-होते हम 20 पर ले आए हैं। जो क्षेत्र कभी रेड कॉरिडोर के रूप में जाने जाते थे, वह आज विकास के ग्रीन कॉरिडोर बन रहे हैं साथियों, हमारे लिए गर्व की बात है। भारत के नक्शे में जिन क्षेत्रों को लहू लुहान कर दिया गया था, लाल रंग से रंग दिया गया था, हमने वहां संविधान, कानून और विकास का तिरंगा फहरा दिया है।</p>
<p>* यह भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती का अवसर है, तब इन जनजातीय क्षेत्रों को नक्सल से मुक्त कर करके, मेरे जनजातीय परिवार के नौजवानों की जिंदगी बचा करके, हमने भगवान बिरसा मुंडा को एक सच्ची श्रद्धांजलि दी है।</p>
<p>* मैं आज देश के सामने एक चिंता, एक चुनौती के संबंध में आगाह करना चाहता हूं। षड्यंत्र के तहत, सोची समझी साजिश के तहत देश की डेमोग्राफी को बदला जा रहा है। एक नए संकट के बीच बोए जा रहे हैं और यह घुसपैठिए, मेरे देश के नौजवानों के रोजी-रोटी छीन रहे हैं। </p>
<p>* हमने एक हाई पावर डेमोग्राफी मिशन शुरू करने का निर्णय किया है। यह मिशन, इस मिशन के द्वारा यह जो भीषण संकट नजर आ रहा है, भारत पर मंडरा रहा है यह जो संकट है, उसको निपटाने के लिए तय समय में सुविचारित निश्चित रूप से अपने कार्य को करेगा, उस दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं।</p>
<p>* जब मुझे भगवान श्री कृष्ण याद आते हैं, तो हम देख रहे हैं कि पूरे विश्व में आज युद्ध के तौर-तरीके बदल रहे हैं। हमने देखा है कि भारत युद्ध के हर नए तौर तरीकों से निपटने में समृद्ध है। हमने ऑपरेशन सिंदूर में ये दिखा दिया है, टेक्नोलॉजी में जो भी महारत थी। </p>
<p>* पाकिस्तान ने हमारे सैन्य ठिकानों पर, हमारे एयरबेस पर, हमारे संवेदनशील स्थानों पर, हमारे आस्था के केंद्रों पर, हमारे नागरिकों पर मिसाइल्‍स, ड्रोन अनगिनत मात्रा में उन्होंने वार किया। देश ने देखा है, लेकिन देश को सुरक्षित रखने के जो प्रयास पिछले 10 साल में हुए हैं, उस ताकत का परिणाम था कि उनके हर हमले को हमारे जाबाजों ने और हमारी टेक्नोलॉजी ने तिनके की तरह बिखेर दिया। </p>
<p>* रत्ती भर नुकसान नहीं कर पाए और इसलिए जब युद्ध के मैदान में टेक्नोलॉजी का विस्तार हो रहा है, टेक्नोलॉजी हावी हो रही है, तब राष्ट्र की रक्षा के लिए, देश के नागरिकों की सुरक्षा के लिए हमें भी हमने जो आज महारत पाई है, उस महारत का और विस्तार करने की जरूरत है। हमने आज जो महारत पाई है, उसको लगातार अपग्रेड करते रहने की आवश्यकता है। </p>
<p>* और इसलिए मैं आज लाल किले की प्राचीर से कह रहा हूं, आने वाले 10 साल में, 2035 तक राष्ट्र के सभी महत्वपूर्ण स्थलों, जिनमें सामरिक के साथ-साथ सिविलियन क्षेत्र भी शामिल हैं, जैसे अस्पताल हो, रेलवे हो, जो भी आस्था के केंद्र हो, उन्हें टेक्नोलॉजी के नए प्लेटफॉर्म द्वारा पूरी तरह सुरक्षा का कवच दिया जाएगा। </p>
<p>* और इसलिए भगवान श्री कृष्ण से प्रेरणा पाकर के हमने श्री कृष्ण का जो सुदर्शन चक्र था, उस सुदर्शन चक्र की राह को चुना है। अब देश सुदर्शन चक्र मिशन लॉन्च करेगा। यह मिशन सुदर्शन चक्र एक पावरफुल वेपन सिस्टम दुश्मन के हमले को न्यूट्रलाइज तो करेगा ही करेगा, लेकिन कई गुना ज्यादा दुश्मन पर हिट बैक करेगा। </p>
<p>* हम इस सुदर्शन चक्र के द्वारा भी टारगेटेड प्रिसाइज़ एक्शन के लिए भी व्यवस्था को विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे और इसलिए युद्ध के बदलते तौर-तरीकों में राष्ट्र की सुरक्षा, नागरिकों की सुरक्षा के लिए मैं बड़ी प्रतिबद्धता के साथ इस कार्य को आगे बढ़ाने के लिए वचन देता हूं।</p>
<p>* जब हम लोकतंत्र की बात करते हैं, स्वतंत्र भारत की बात करते हैं, तब हमारा संविधान हमारे लिए सर्वोत्तम दीप स्तंभ होता है, हमारा प्रेरणा का केंद्र होता है, लेकिन आज से 50 साल पहले भारत के संविधान का गला घोंट दिया गया था। भारत के संविधान की पीठ में छुरा घोंप दिया गया था, देश को जेल खाना बना दिया गया था, आपातकाल लगा दिया गया था, इमरजेंसी थोप दी गई थी। इमरजेंसी के 50 साल हो रहे हैं, देश की किसी भी पीढ़ी को संविधान की हत्या के इस पाप को कभी भूलना नहीं चाहिए। संविधान की हत्या करने वाले पापियों को नहीं भूलना चाहिए और हमें भारत के संविधान के प्रति अपने समर्पण को और मजबूती देते हुए आगे बढ़ना चाहिए, वह हमारी प्रेरणा है।</p>
<p>* मैंने इसी लाल किले से पंच प्रण की बात कही थी। मैं आज लाल किले से फिर से एक बार मेरे देशवासियों का पुनः स्मरण जरूर करना चाहता हूं। विकसित भारत बनाने के लिए ना हम रुकेंगे, ना हम झुकेंगे, हम परिश्रम की पराकाष्ठा करते रहेंगे और अपनी आंखों के सामने 2047 में विकसित भारत बना करके रहेंगे।</p>
<p>* हमारा दूसरा प्रण है कि हम हमारे जीवन में, हमारी व्यवस्थाओं में, हमारे नियम कानून परंपराओं में, गुलामी का एक भी कण अब बचने नहीं देंगे। हम हर प्रकार की गुलामी से मुक्ति पाकर के ही रहेंगे। हम अपनी विरासत पर गर्व करेंगे। हमारी इस पहचान का सबसे बड़ा आभूषण, सबसे बड़ा गहना, सबसे बड़ा मुकुटमणि, हमारी विरासत है, हम विरासत का गर्व करेंगे। इन सबके लिए एकता, यह मंत्र सबसे बड़ा शक्तिशाली मंत्र है और इसलिए एकता की डोर को कोई काट ना सके यह हमारा सामूहिक संकल्प होगा।</p>
<p>* मां भारती के प्रति कर्तव्य निभाना, यह पूजा से कम नहीं है, तपस्या से कम नहीं है, आराधना से कम नहीं है और उसी भाव से हम सब मातृभूमि के कल्याण के लिए, परिश्रम की पराकाष्ठा करते हुए, 2047 विकसित भारत के लक्ष्य को पार करने के लिए अपने आप को खपा देंगे, अपने आप को झोंक देंगे, जो भी सामर्थ्य हैं, कोई भी अवसर को छोड़ेंगे नहीं, इतना ही नहीं, नए अवसरों का निर्माण करेंगे और निर्मित करने के बाद हम 140 करोड़ देशवासियों के सामर्थ्य से आगे बढ़ते ही रहेंगे, बढ़ते ही रहेंगे, बढ़ते ही रहेंगे। हमें याद रखना है, 140 करोड़ देशवासियों को याद रखना है, परिश्रम में जो तपा है, उसने ही तो इतिहास रचा है। जिसने फौलादी चट्टानों को तोड़ा है, उसने ही समय को मोड़ा है। और समय को मोड़ देने का भी यही समय है, सही समय है।</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/nation/narendr-modi-addressed-nation-on-79th-independence-day">​लाल किले के प्राचीर से 103 मिनट के संबोधन में 92-बिंदुओं पर व्याख्यान &#8216;आसान&#8217; नहीं है</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>जो खिल सके न वो फूल हम हैं &#8211; तुम्हारे चरणों की धूल हम हैं &#8211; दया की दृष्टि सदा ही रखना 🙏</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/chutkulanands-letter/who-will-be-the-next-cm-of-bihar</link>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 03 Aug 2025 12:58:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चुटकुलानन्द की चिठ्ठी]]></category>
		<category><![CDATA[bihar]]></category>
		<category><![CDATA[bjp]]></category>
		<category><![CDATA[election]]></category>
		<category><![CDATA[jdu]]></category>
		<category><![CDATA[narendra modi]]></category>
		<category><![CDATA[Nitish Kumar]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>रायसीना पहाड़ / अशोक रोड (नई दिल्ली) : दिल्ली के कर्तव्य पथ इण्डिया गेट से रायसीना पहाड़ की ओर जाते भारतीय जनता पार्टी के दो शीर्षस्थ नेताओं के बीच वार्तालाप जारी है। दोनों का मानना है कि यह तय करना बहुत कठिन है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>रायसीना पहाड़ / अशोक रोड (नई दिल्ली) : दिल्ली के कर्तव्य पथ इण्डिया गेट से रायसीना पहाड़ की ओर जाते भारतीय जनता पार्टी के दो शीर्षस्थ नेताओं के बीच वार्तालाप जारी है। दोनों का मानना है कि यह तय करना बहुत कठिन है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार किसी भी तथ्य को कितना &#8216;गोपनीय&#8217; रख सकते हैं, यह कहना कठिन है। लेकिन वर्तमान राजनीतिक परिवेश के मद्दे नजर उन्होंने कोई 13-करोड़ के प्रश्न पर चर्चाएं छेड़े कि आगामी 2 नवम्बर को देवोत्थान एकदशी और तीन दिन बाद 5 नवम्बर को कार्तिक पूर्णिमा के बाद बिहार का मुख्यमंत्री कौन होगा? नीतीश कुमार रहेंगे या नीतीश कुमार पूर्व-मुख्यमंत्री की कतार में पंक्तिबद्ध होने वाले हैं। भारतीय जनता पार्टी के आला नेताओं का नाम बिना अपने होठों पर लाये दोनों एक स्वर में कहते हैं: &#8216;कुछ ऐसा ही होने वाला है।&#8217;</strong></p>
<p>दोनों नेता आपस में इस बात पर चर्चा करते हैं कि कल के जिस किंग्सवे और राजपथ को हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने कर्तव्य पथ का नाम देकर भारत के लोगों को अपने-अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक होने का आह्वान किया, विगत कुछ महीनों में प्रधानमंत्री का तीन-तीन बार बिहार का भ्रमण-सम्मेलन के साथ-साथ केंद्रीय मंत्रिमंडल के मंत्रियों का बिहार का दौरा करना इस बात का सूचक है कि श्री मोदी जी अब अधिक संख्या होने के बाद भी भारतीय जनता पार्टी को &#8216;सहायक&#8217; के रूप में और उसके नेताओं को &#8216;जनता दल यूनाइटेड&#8217; के नीचे नहीं रहने देना चाहते हैं। कर्तव्यपथ के दोनों तरफ की हरियाली को देखते, उस पर सकारात्मक टिपण्णी करते पहले कहते हैं कि &#8216;आज भारत का शायद ही कोई व्यक्ति होगा तो पैदल इस चमचमाते सड़क पर नहीं चलना चाहेगा। आज अगर राज कपूर जीवित होते, या फिर सत्यजीत रे जीवित होते, बिमल राय जीवित होते, गुरु दत्त जीवित होते, यश चोपड़ा जीवित होते, बीआर चोपड़ा जीवित होते तो मोदी जी की इस महानतम उपहार को देखकर कर्तव्यपथ को अपने किसी न किसी सिनेमा में स्थान अवश्य देते। </p>
<p><strong>तभी एक नेता कहते हैं, आज भी बिहार में प्रदेश के मुख्यमंत्री जो भी दावा कर रहे हैं कि उन्होंने प्रदेश के विकास में चार चाँद लगा दिया है, यह कहने में हिचकी लेने लगते हैं कि विगत 11-वर्षों में अगर प्रधानमंत्री का सहयोग नहीं रहता उन्हें तो कुर्सी पर भी विराजमान नहीं होते। अब आप ही सोचिये, वर्तमान विधानसभा में भाजपा की जितनी संख्या (80) है, उसकी आधी संख्या (45) है जनता दल यूनाइटेड है। वैसी स्थिति में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठना नीतीश कुमार के लिए तो सपना ही होता न। वह तो प्रधानमंत्री की उदारता है कि उन्हें बैठा दिए। लेकिन अगर यह प्रक्रिया इस बार भी दोहराते हैं तो भाजपा के प्रादेशिक नेताओं का अपमान होगा। यह बात मोदी जी जानते हैं।</strong> </p>
<p>अब तक दोनों नेता मौलाना आज़ाद रोड और सेना भवन की ओर से आने वाली सड़क जो कर्तव्य पथ से मिलती आगे निकल जाती है, पहुँच गए थे। तभी दूसरे नेता कहते हैं, नवम्बर 22 को बिहार का वर्तमान विधानसभा का काल समाप्त होने जा रहा है। स्वाभाविक है चुनाव के मद्दे नजर, खासकर आचार संहिता लगने से पूर्व, दिल्ली से पटना तक, प्रधानमंत्री से मुख्यमंत्री तक सबकी निगाहें मुख्यमंत्री कार्यालय में लगी कुर्सी पर टिकी है। वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मन में मनभर का लड्डू फूटना स्वाभाविक है &#8211; फिर एक बार मुख्यमंत्री बनने के लिए। लेकिन दिल्ली के दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर नवनिर्मित कॉर्पोरेट कार्यालय नुमा भारतीय जनता पार्टी के कार्यालय में एक ओर जहाँ मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नजर टिकी हैं, वहीं दूसरी ओर मंथन जारी है कि बिहार में राजनीतिक किला फतह के लिए बिहार से ही उपराष्ट्रपति लाना होगा, वह भी ब्राह्मण, क्षत्रिय नहीं, अपितु वैश्य या शूद्र। गणना आप सभी ज्ञानी महात्मा करें।  </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/Nitish-2.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/Nitish-2.jpg" alt="" width="2032" height="1268" class="aligncenter size-full wp-image-7044" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/Nitish-2.jpg 2032w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/Nitish-2-300x187.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/Nitish-2-1024x639.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/Nitish-2-768x479.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/Nitish-2-1536x958.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2032px) 100vw, 2032px" /></a></p>
<p>इस बात को सुनते है पहले नेता कहते हैं आपको याद होगा ही कि 2014 में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री कार्यालय में बैठने के बाद बिहार के तत्कालीन राज्यपाल रामनाथ कोविंद जिन्हे राष्ट्र का गोविन्द बनाया गया था, दलित समुदाय से थे। परिणाम यह हुआ कि 2019 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश के मुख्यमंत्री अपनी पार्टी के 30 से अधिक स्थानों को प्रधानमंत्री के चरणों में अर्पित कर दिए। इसका फल उन्हें 42 संख्या आने के बाद भी मुख्यमंत्री की कुर्सी मिली। आप माने अथवा नहीं, साल 2019 से अभी तक, सैद्धांतिक रूप से भले नीतीश कुमार प्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर विराजमान हैं, व्यावहारिक रूप से नियंत्रण भाजपा के राष्ट्रीय कार्यालय से ही है। वैसी स्थिति में आगामी चुनाव में जनता दल यूनाइटेड 42 से 20 पर आएंगे या 2 पर, यह तो नीतीश कुमार की आत्मा ही जानती है; लेकिन दीनदयाल उपाध्याय मार्ग की हवाएं यह बता रही है कि इस बार भारतीय जनता पार्टी के आला कमान इस बात से आश्वस्त हैं कि उन्हें प्रदेश में सरकार बनाने में &#8216;बैसाखी&#8217; की जरूरत नहीं होनी चाहिए। </p>
<p><strong>वैसे रायसीना पहाड़ी पर आते आते दोनों नेता दो दिशाओं में हो गए, लेकिन जाने से पहले दोनों इस बात पर जोर से ठहाका लगाए कि सन 1990 से पहले बिहार के मुख्यमंत्री दिल्ली की ओर टकटकी निगाहों से देखते रहते थे। कई मर्तबा तो एक ही विधानसभा काल में चार-पांच मुख्य मंत्री कुर्सी पर बैठे। आया-राम-गया-राम का मुहाबरा बिहार से ही चला। राष्ट्रीय जनता दल की सरकार तो प्रदेश को सत्यानाश कर ही दिया। लेकिन जब से नीतीश कुमार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने उनकी भी रीढ़ की हड्डी उतनी मजबूत नहीं रही। कभी इधर, कभी उधर देखते, नाप-जोख करते कुर्सी पर विराजमान रहे। जब से मोदी जी प्रधानमंत्री बने, तबसे नीतीश कुमार भी उन्हें उसी तरह देखते आ रहे हैं &#8216;अपेक्षा की नज़रों&#8217; से जैसे कांग्रेस के कालखंड में मुख्यमंत्री दिल्ली की ओर इंदिरा गांधी को देखते थे। वह तो मोदी जी सब कुछ जानकार भी अनजान बने हैं। </strong></p>
<p>बहरहाल, भारत के 17वां उपराष्ट्रपति के निर्वाचन हेतु निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव की अधिसूचना 7 अगस्त, 2025 को जारी की जाएगी। नाम-निर्देशन करने की अंतिम तारीख 21 अगस्त, 2025 और नाम-निर्देशनों की संवीक्षा की तारीख 22 अगस्त, 2025 होगी। अभ्यर्थिताएं वापस लेने की अंतिम तारीख  25 अगस्त, 2025, मतदान की तारीख 9 सितंबर, 2025 और मतदान की और गणना 9  सितम्बर को ही होगी।  राष्ट्रपतीय और उपराष्ट्रपतीय निर्वाचन नियम, 1974 के नियम 8 के अनुसार, निर्वाचन के लिए मतदान संसद भवन में आयोजित किया जाएगा। मतदान, यदि आवश्यक हुआ तो, कमरा सं. एफ-101, वसुधा, प्रथम तल, संसद भवन, नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा।</p>
<p>निर्वाचन आयोग ने केंद्र सरकार के परामर्श से, 25 जुलाई, 2025 की अधिसूचना के माध्यम से भारत के उपराष्ट्रपति के पद के वर्तमान निर्वाचन के लिए रिटर्निंग अधिकारी के रूप में राज्य सभा के महासचिव को नियुक्त किया है। आयोग ने 25 जुलाई, 2025 की अधिसूचना के माध्यम से संसद भवन (राज्य सभा) में रिटर्निंग अधिकारी की सहायता करने के लिए दो सहायक रिटर्निंग अधिकारियों की भी नियुक्ति की है। 17वें उपराष्ट्रपति निर्वाचन, 2025 के लिए निर्वाचक-मंडल में निम्न शामिल हैं:  राज्य सभा के 233 निर्वाचित सदस्य (वर्तमान में 05 सीटें रिक्त हैं), राज्य सभा के 12 मनोनीत सदस्य, और लोक सभा के 543 निर्वाचित सदस्य (वर्तमान में 01 सीट रिक्त है) निर्वाचक मंडल में संसद के दोनों सदनों के कुल 788 सदस्य (वर्तमान में 782 सदस्य) शामिल हैं। चूंकि, सभी निर्वाचक संसद के दोनों सदनों के सदस्य हैं, इसलिए संसद के प्रत्येक सदस्य के मत का मान एक समान अर्थात 1 (एक) होगा। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/Nitish-4.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/Nitish-4.jpg" alt="" width="2032" height="1268" class="aligncenter size-full wp-image-7045" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/Nitish-4.jpg 2032w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/Nitish-4-300x187.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/Nitish-4-1024x639.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/Nitish-4-768x479.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/Nitish-4-1536x958.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2032px) 100vw, 2032px" /></a></p>
<p><strong>बहरहाल, चुनाव आयोग द्वारा नए उप-राष्ट्रपति के चुनाव की घोषणा के साथ ही, इस संवैधानिक पद पर अगला पदभार ग्रहण करने वाले व्यक्ति को लेकर अटकलें शुरू हो गई हैं। कहा जा रहा था कि चूंकि इस चुनाव के लिए कोई समय सीमा नहीं है, इसलिए इसमें देरी हो सकती है, क्योंकि राज्यसभा के उपसभापति उच्च सदन के मुख्य पीठासीन अधिकारी होंगे। हालांकि, चुनाव की घोषणा से संकेत मिलता है कि भाजपा इस मुद्दे पर किसी भी तरह की अटकलों को खत्म करने के लिए जल्द ही नए उपराष्ट्रपति का चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध है।</strong></p>
<p>पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ पर अपने कार्यकाल के दौरान हर मुद्दे पर बोलने और पक्ष लेने के कारण सदन की मर्यादाओं का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया था। इस संदर्भ में, यह याद रखना होगा कि जब 2022 में धनखड़ उपराष्ट्रपति चुने गए थे, तब भाजपा के पास पूर्ण बहुमत था, इसलिए उन्हें उपराष्ट्रपति पद दिलाने में कोई समस्या नहीं थी। 2024 के चुनावों के बाद कम संख्या बल के साथ, भाजपा, अपने उम्मीदवार को निर्वाचित कराने की स्पष्ट स्थिति में है, लेकिन उसे अपने गठबंधन सहयोगियों की संवेदनशीलता का भी ध्यान रखना होगा। आज की स्थिति में, सहयोगी दल पूरी तरह से भाजपा नेतृत्व के साथ हैं, और अगर विपक्ष अपना उम्मीदवार खड़ा करके कोई औपचारिक लड़ाई नहीं लड़ने का फैसला करता है, तो अगला उप-राष्ट्रपति सर्वसम्मति से चुना जाएगा। ऐसी खबरें भी हैं कि इस मामले में आरएसएस की भूमिका हो सकती है, इसलिए उसकी स्वीकृति भी आवश्यक होगी।</p>
<p><strong>वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक समीक्षक पंकज वोहरा का मानना है कि &#8216;कई राजनीतिक विश्लेषक नए उप-राष्ट्रपति के चयन को अगले भाजपा अध्यक्ष के फैसले से भी जोड़ रहे हैं। यह सर्वविदित है कि वर्तमान भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा का विस्तारित कार्यकाल जल्द ही समाप्त होने वाला है, और यदि उनके उत्तराधिकारी का चयन नहीं हो पाया है, तो इसका मुख्य कारण पार्टी नेतृत्व और आरएसएस के बीच किसी एक नाम पर सहमति न बन पाना है। कई नाम सार्वजनिक रूप से सामने आए, लेकिन एक-एक करके, आम सहमति के अभाव में वे गायब हो गए। भाजपा के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि वह अगले उपराष्ट्रपति के रूप में अपना उम्मीदवार चुने, ताकि राजनीतिक हलकों में इस मामले में उसकी पूर्ण भागीदारी का स्पष्ट संदेश जाए। उपराष्ट्रपति की भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि वह राज्यसभा के सभापति भी हैं।&#8217;</strong></p>
<p>उनका कहना है कि जो लोग भाजपा-आरएसएस संबंधों पर, खास कर पिछले एक साल से, नज़र रखे हुए हैं, उनके लिए आरएसएस केवल उसी व्यक्ति को हाँ कहेगा जिसका संघ के संबंध में एक सिद्ध ट्रैक रिकॉर्ड हो। इससे धनखड़ जैसे किसी भी व्यक्ति का चयन संभव नहीं है, जिन्हें चुना गया, हालांकि उनके करियर के अलग-अलग दौर में जनता दल और कांग्रेस, दोनों के साथ रहने का अनुभव रहा है। दूसरे शब्दों में, अगला उप-राष्ट्रपति संघ परिवार से ही होना चाहिए, जब तक कि भाजपा मोहन भागवत और उनके साथियों को ऐसे चुनाव में आने वाले राजनीतिक लाभ के बारे में समझाने में सफल न हो जाए।</p>
<p>हालाँकि, संघ के भीतर के माहौल को देखते हुए, यह करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। एक तरीका यह हो सकता है कि अगर भाजपा का वर्तमान नेतृत्व और संघ, पार्टी के अगले अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, दोनों पर एक साथ सहमति बना लें, तो आरएसएस इस पर सहमत हो सकता है। अगर अगले पार्टी प्रमुख के लिए आरएसएस की बात मान ली जाती है, तो वह अगले उपराष्ट्रपति के लिए भाजपा की पसंद को स्वीकार कर सकता है। यह एक तरह से लेन-देन जैसा हो सकता है। इस बात की भी ज़ोरदार अटकलें हैं कि मानसून सत्र के तुरंत बाद मंत्रिमंडल में फेरबदल हो सकता है। यह निश्चित रूप से प्रधानमंत्री का विशेषाधिकार है, लेकिन इस प्रक्रिया का उपयोग सभी हितधारकों को संतुष्ट करने और आगे आने वाली किसी भी नई चुनौती का सामना करने के लिए किया जा सकता है।</p>
<p>मंत्रिमंडल में फेरबदल और पार्टी का पुनर्गठन, दोनों ही शायद यह सुनिश्चित करने की कुंजी होंगे कि भाजपा और संघ के बीच सौहार्द किसी भी तरह से न बिगड़े। अगले उपाध्यक्ष पद के लिए कई नाम चर्चा में हैं। यह चयन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अगला उपाध्यक्ष वर्तमान राष्ट्रपति का कार्यकाल समाप्त होने पर भारत के राष्ट्रपति के चुनाव के लिए भी योग्य होगा। कई उपराष्ट्रपति आगे चलकर राष्ट्रपति बने हैं, लेकिन ऐसे भी कई उदाहरण हैं जो राष्ट्रपति नहीं बन पाए। उपराष्ट्रपति पद के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का नाम भी चर्चा में है, जिन्हें संघ के कुछ प्रमुख पदाधिकारियों का समर्थन प्राप्त है और वे अपने विरोधियों को भी स्वीकार्य हैं।</p>
<p>सवाल यह उठेगा कि क्या प्रधानमंत्री उन्हें उनके वर्तमान पद से मुक्त करना चाहेंगे, क्योंकि सरकार के अनुसार &#8220;ऑपरेशन सिंदूर&#8221; अभी भी &#8220;जारी&#8221; है। कुछ हलकों में अटकलें लगाई जा रही हैं कि जम्मू-कश्मीर के वर्तमान उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, जो प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह दोनों के करीबी हैं, के नाम पर भी विचार किया जा सकता है। उनका चयन संघ की स्वीकृति पर निर्भर करेगा। आरिफ मोहम्मद खान, गुलाम नबी आज़ाद और नीतीश कुमार जैसे अन्य नाम भी चर्चा में हैं।</p>
<p>हालांकि, मुख्य मुद्दा यह है कि अगला भाजपा अध्यक्ष कौन होगा, क्योंकि दोनों मामलों पर एक साथ निर्णय लिया जाएगा और वे किसी न किसी तरह आपस में जुड़े हुए हैं। आरएसएस ने भाजपा के शीर्ष पद के लिए अपनी प्राथमिकताएँ पहले ही बता दी हैं और अब भाजपा की प्रतिक्रिया का इंतज़ार कर रहा है। यह भविष्य के भाजपा-आरएसएस संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण चरण है।</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/chutkulanands-letter/who-will-be-the-next-cm-of-bihar">जो खिल सके न वो फूल हम हैं &#8211; तुम्हारे चरणों की धूल हम हैं &#8211; दया की दृष्टि सदा ही रखना 🙏</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>&#8220;मैं ही सही हूँ, बाकी सब गलत है &#8211; यह लोकतंत्र नहीं है।​ यह अहंकार है। यह उद्दंडता है​&#8221;, अपने अंतिम भाषण में धनकड़ &#8216;प्रधानमंत्री का नाम तक नहीं लिया&#8221;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 22 Jul 2025 08:02:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
		<category><![CDATA[dhankad]]></category>
		<category><![CDATA[narendra modi]]></category>
		<category><![CDATA[parliament]]></category>
		<category><![CDATA[prime minister]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>रायसीना पहाड़, नई दिल्ली : ​रुद्राक्ष के माला में 108 दाना होता है, बहुत शुभ माना जाता है। लेकिन भारतीय संसद से पचास कदम दूर 108-चर्च रोड का नया आवास भारत के तत्कालीन उप-राष्ट्रपति जगदीप धनकड़ के लिए &#8216;खास&#8217; नहीं बन पाया। इस भवन में 110 दिन रहने के बाद धनकड़ &#8216;पूर्व-उप-राष्ट्रपति&#8217; हो गए। वास्तु [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/dhankar-did-not-even-take-the-name-of-the-prime-minister-in-his-last-speech">&#8220;मैं ही सही हूँ, बाकी सब गलत है &#8211; यह लोकतंत्र नहीं है।​ यह अहंकार है। यह उद्दंडता है​&#8221;, अपने अंतिम भाषण में धनकड़ &#8216;प्रधानमंत्री का नाम तक नहीं लिया&#8221;</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>रायसीना पहाड़, नई दिल्ली : ​रुद्राक्ष के माला में 108 दाना होता है, बहुत शुभ माना जाता है। लेकिन भारतीय संसद से पचास कदम दूर 108-चर्च रोड का नया आवास भारत के तत्कालीन उप-राष्ट्रपति जगदीप धनकड़ के लिए &#8216;खास&#8217; नहीं बन पाया। इस भवन में 110 दिन रहने के बाद धनकड़ &#8216;पूर्व-उप-राष्ट्रपति&#8217; हो गए। वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में भारत के कोई भी उपराष्ट्रपति अपना आवास बनाने से पूर्व 108 बार सोचेंगे अवश्य। जिस सम्मान के साथ इस आवास में धनकड़ आये थे, शायद उस सम्मान के साथ वे शायद नहीं निकले। यह बात धनकड़ तो जानते ही होंगे, &#8216;वे&#8217; भी &#8216;भिज्ञ&#8217; होंगे ही। </strong></p>
<p><em>रायसीना पहाड़ पर अभी ​भारतीय राजनीति के इतिहास का पन्ना गरम है। वजह भी है &#8216;क्षणभर में ​उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ का &#8216;पूर्व-उपराष्ट्रपति&#8217; होना। स्वतंत्र भारत के राजनीतिक इतिहास में धनकड़ तीसरे उपराष्ट्रपति हैं जो अपने कार्यकाल के दौरान ही राष्ट्रपति को अपना त्यागपत्र सौंपे। वैसे रायसीना पहाड़ पर &#8216;अचानक की इस घटना पर शोध जारी है &#8211; क्या हुआ? क्यों ऐसा निर्णय लिए? किसने उन्हें मजबूर किया? देखने में तो ऐसा नहीं लग रहा था कि त्यागपत्र का कारण उनका स्वास्थ्य हो सकता है? कहीं को फोन पर संवाद आया और वे निर्णय ले लिए? या फिर कोई &#8216;ऊपर से अपना संवाद वाहक भेजकर उन्हें ऐसा करने का आदेश दिया? अब कौन उपराष्ट्रपति होंगे? कौन-कौन लोग प्रबल दावेदार हैं ? क्या बिहार की राजनीति पर कब्ज़ा करने के लिए नीतीश कुमार को 108-चर्च रोड में आवास दिया जाएगा? क्या आदित्य योगीनाथ को उत्तर प्रदेश से यहाँ लाया जायेगा? क्या जम्मू कश्मीर से मनोज सिन्हा को बुलाया जायेगा? क्या महिला सशक्तिकरण के खातिर उपराष्ट्रपति के पद पर वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण को पदस्थापित किया जायेगा? मंत्रिमंडल का भी विस्तार होने का समय है। </em></p>
<blockquote><p>कई लोग यह कह रहे हैं कि सेन्ट्रल विस्टा क्षेत्र में महान स्वतंत्रता सेनानी, स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षामंत्री, जामिया मिलिया इस्लामिया, इंडियन काउन्सिल फॉर कल्चरल रिलेशंस के अलावे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान​, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के संस्थापक भारत रत्न मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के नाम से अंकित 6​-मौलाना आज़ाद ​मार्ग से 108-चर्च रोड का आवास वास्तु के हिसाब से गंवारा नहीं हुआ धनकड़ साहब को । विगत 3 अप्रैल को उपराष्ट्रपति संसद भवन परिसर के पास चर्च रोड स्थित अपने नए आधिकारिक आवास में ​आये थे। उनका सचिवालय भी &#8216;उपराष्ट्रपति एन्क्लेव&#8217; में स्थानांतरित हो गया ​था ।​ खैर। </p></blockquote>
<p><strong>आर्यवर्तइण्डियननेशन.कॉम अनेकों लोगों से गुफ्तगू किया। &#8220;स्वास्थ्य&#8221; कोई कारण नहीं हो सकता है &#8220;देश के शीर्षस्थ पदों में राष्ट्रपति के बाद उप-राष्ट्रपति के पद से इस्तीफा देना। कुछ तो &#8220;विशेष&#8221; कारण है, अथवा &#8220;कोई तो विशेष व्यक्ति है&#8221; जिसे शायद कोई तो है रायसीना पहाड़ पर जिन्हें धनकड़ के शब्द हजम नहीं हुए। ​त्यागपत्र से पांच घंटे पहले धनकड़ 23 जुलाई, 2025 को एक दिवसीय दौरे पर जयपुर, राजस्थान जाएंगे​ की जानकारी पत्र सूचना कार्यालय दिया। अपनी इस​यात्रा के दौरान, ​उपराष्ट्रपति​ जयपुर​ स्थित​ रामबाग पैलेस में ​कन्फेडरेशन ऑफ़ रियर एस्टेट डेवेलपर्स ऑफ़ इंडिया, राजस्थान की ​नव-निर्वाचित समिति​ के सदस्यों से संवाद करेंगे।​ ​पांच घंटे के बीच में ही अचानक ऐसा क्या हुआ कि उन्हें अपने पद से त्यागपत्र देना पड़ा वह भी &#8220;स्वास्थ्य को प्राथमिकता&#8221; देकर। उनके पत्र में लिखा था, &#8220;स्वास्थ्य सेवा को प्राथमिकता देने और चिकित्सीय सलाह का पालन करने के लिए, मैं भारत के उपराष्ट्रपति पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देता हूँ।&#8221; लेकिन इन विगत दिनों में धनकड़, जैसा कि सूत्रों का कहना है, किसी भी चिकित्सक से नहीं मिले हैं और ना ही उन्हें सलाह दिया गया है &#8211; कम काम करें। </strong> </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-7.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-7.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-6991" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-7.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-7-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-7-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-7-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-7-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p>जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा था: &#8220;मैं सही समय पर, अगस्त 2027 में, ईश्वरीय कृपा के अधीन, सेवानिवृत्त हो जाऊँगा।&#8221;​ 14वें उपराष्ट्रपति के रूप में श्री धनखड़ का पाँच वर्षीय कार्यकाल 10 अगस्त, 2027 को समाप्त होना था।​ भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए द्वारा उपराष्ट्रपति चुने जाने से पहले, उन्होंने 2019 से 2022 तक पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में कार्य किया। वैसे यह भी कहा जाता है कि धनखड़ की हाल ही में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में एंजियोप्लास्टी हुई थी।​ </p>
<p>वीवी गिरि और आर वेंकटरमन के बाद धनकड़ अपने कार्यकाल के दौरान इस्तीफा देने वाले भारत के तीसरे उपराष्ट्रपति हैं। हालाँकि, गिरि और वेंकटरमन ने राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था।​ लेकिन धनकड़ के साथ बात कुछ और है। नियमों के अनुसार, उपराष्ट्रपति पद के लिए अगले छह महीनों के भीतर चुनाव कराना आवश्यक है। अपने &#8216;बेबाक बयानों&#8217; के कारण कई बार सुर्खियां में रहे। उन पर राज्यसभा में पक्षपात का आरोप भी लगाया गया था। </p>
<blockquote><p>चलिए कुछ शब्दों पर शोध करते हैं। अपने त्यागपत्र से तक़रीबन 48-घंटा पहले धनकड़ राज्यसभा के आठवें बैच के प्रतिभागियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते कहा था: “हमें दृढ़ रहना होगा। हमें अपने दृष्टिकोण पर विश्वास करना होगा। लेकिन हमें दूसरे के दृष्टिकोण का भी सम्मान करना होगा। अगर हम अपने दृष्टिकोण पर विश्वास करते हैं और सोचते हैं, &#8216;मैं ही सही हूँ और बाकी सब गलत हैं&#8217; &#8211; यह लोकतंत्र नहीं है। यह हमारी संस्कृति नहीं है। यह अहंकार है। यह उद्दंडता है। हमें अपने अहंकार पर नियंत्रण रखना होगा। हमें अपनी उद्दंडता पर नियंत्रण रखना होगा। हमें यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि दूसरा व्यक्ति अलग दृष्टिकोण क्यों रखता है &#8211; यही हमारी संस्कृति है।&#8221;</p></blockquote>
<p>&#8220;मैं ही सही हूँ, बाकी सब गलत है &#8211; यह लोकतंत्र नहीं है। यह हमारी संस्कृति नहीं है। यह अहंकार है। यह उद्दंडता है। हमें अपने अहंकार पर नियंत्रण रखना होगा। हमें अपनी उद्दंडता पर नियंत्रण रखना होगा,&#8221; &#8211; ये शब्द किसे ख़राब लग सकता है?  यह गहन शोध का विषय है आखिर धनकड़ अपने मस्तिष्क में किस मान्यवर या माननीया की तस्वीर को रखकर कहे थे। इससे भी बड़ी बिडम्बना यह है कि अपने कार्यकाल के दौरान शायद ही कोई भाषण रहा होगा जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार और मोदी के कार्यों का उल्लेख नहीं किया हो। जिस प्रकार भाजपा या मोदी के मंत्रिमंडल के अन्य सदस्य करते हैं। लेकिन राज्यसभा के आठवें बैच के प्रतिभागियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह भाषण में &#8216;एक शब्द भी प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी अथवा उनकी सरकार के कार्यों के बारे में जिक्र नहीं किया।</p>
<figure id="attachment_6992" aria-describedby="caption-attachment-6992" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-6992" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6992" class="wp-caption-text">उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ग्रहण करते</figcaption></figure>
<p>धनकड़ टेलीविजन पर चर्चा कार्यक्रमों में झलकती राजनीतिक दलों की कटुता की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा था: “प्रत्येक राजनीतिक दल का नेतृत्व परिपक्व होता है। सभी राजनीतिक दल, चाहे वह बड़ा हो या छोटा, राष्ट्रीय विकास के लिए प्रतिबद्ध होता है और इसलिए युवाओं का कर्तव्य है कि वे इस मानसिकता को सुनिश्चित करें। यह विचार प्रक्रिया सोशल मीडिया में आनी चाहिए और एक बार जब आपको हमारी टेलीविजन चर्चाएं सुखदायक, सकारात्मक और आकर्षक लगेंगी, तो कल्पना कीजिए कि कितना बड़ा बदलाव आ सकता है &#8211; बस एक पल के लिए ध्यान दीजिए।&#8221; इन शब्दों में देश के उपराष्ट्रपति होने के नाते &#8216;प्रत्येक राजनीतिक दाल का नेतृत्व परिपक्क होता है&#8217;, किसके तरफ &#8216;इशारा था&#8217;, और &#8216;किसे इन शब्दों से नसीयत देना चाहते थे&#8217;, जिसका उन्हें &#8216;पदत्याग&#8217; करने से करना पड़ा। कोई तो है, कुछ तो है।  </p>
<p><strong>इस महाशय या माननीया के तरफ शब्दों से इशारा करते धनकड़ ने कहा कि &#8220;हम आमतौर पर क्या देखते हैं? हम क्या सुनते हैं? क्या यह कानों को थका नहीं देता? हमारे कान तो थक गए हैं ना? भाई, ऐसा क्यों है? हम एक महान संस्कृति से आते हैं। हमारी विचारधारा का एक आधार है। हमारे विचारों में मतभेद हो सकते हैं &#8211; हमारे विचारों में भिन्नता हो सकती है &#8211; लेकिन हमारे दिलों में कटुता कैसे हो सकती है? हम भारतीय हैं। हमारी संस्कृति हमें क्या सिखाती है? अनंतवाद &#8211; अंतहीन संवाद में विश्वास। अनंतवाद का क्या अर्थ है? इसका अर्थ है चर्चा और बहस। चर्चा और बहस का क्या अर्थ है? इसका अर्थ है अभिव्यक्ति। और अभिव्यक्ति का अर्थ है &#8211; अपने विचारों को खुलकर कहें, लेकिन अपनी ही राय पर इतना आश्वस्त न हो जाएँ कि आप उस पर विश्वास कर लें और यह मान लें कि अही अंतिम और पूर्ण सत्य है। यह मत मानिए कि किसी और का दृष्टिकोण आपसे अलग हो ही नहीं सकता।”</strong></p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-5.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-5.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-6995" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-5.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-5-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-5-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-5-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-5-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p>उसी उद्घाटन संवाद में धनकड़ ने कहा था कि “हममें मर्यादा और परस्पर सम्मान की पूर्ण भावना होनी चाहिए — और यही हमारी संस्कृति की मांग है। अन्यथा हमारी विचार प्रक्रिया में एकता नहीं हो सकती… विश्वास कीजिए, अगर राजनीतिक संवाद उच्च स्तर पर हो, अगर नेता अधिक बार मिलते-जुलते रहें, वे आपस में अधिक संवाद करें। वे व्यक्तिगत स्तर पर विचारों का आदान-प्रदान करें — तो राष्ट्र हित की पूर्ति होगी… हमें आपस में क्यों लड़ना चाहिए? हमें अपने भीतर शत्रुओं की तलाश नहीं करनी चाहिए। मेरी जानकारी के अनुसार, प्रत्येक भारतीय राजनीतिक दल और प्रत्येक सांसद अंततः एक राष्ट्रवादी है। वह एक राष्ट्र की भावना में विश्वास करता है। वह राष्ट्र की प्रगति में विश्वास करता है… लोकतंत्र कभी ऐसा नहीं होता कि एक ही पार्टी सत्ता में आए।&#8221;</p>
<p>इतना ही नहीं, वे आगे भी कहे थे: “मित्रों, एक समृद्ध लोकतंत्र निरंतर कटुता का वातावरण सहन नहीं कर सकता&#8230; जब आप राजनीतिक कटुता, राजनीतिक वातावरण को अलग दिशा में पाते हैं, तो आपका मन विचलित हो जाता होगा। मैं देश के सभी लोगों से आग्रह करता हूँ कि राजनीतिक तापमान को कम किया जाए। राजनीति टकराव नहीं है, राजनीति कभी भी एकतरफा नहीं हो सकती। अलग-अलग राजनीतिक विचार प्रक्रियाएँ होंगी, लेकिन राजनीति का अर्थ है एक ही लक्ष्य को प्राप्त करना, लेकिन किसी न किसी तरह अलग-अलग माध्यमों से। मेरा दृढ़ विश्वास है कि इस देश में कोई भी व्यक्ति राष्ट्र के विरुद्ध नहीं सोचेगा। मैं किसी राजनीतिक दल को भारत की अवधारणा के विरुद्ध नहीं देख सकता। उनके अलग-अलग माध्यम, अलग-अलग सोच हो सकती है; लेकिन उन्हें एक-दूसरे के साथ चर्चा करना, एक-दूसरे के साथ संवाद करना सीखना होगा। टकराव कोई रास्ता नहीं है। जब हम आपस में लड़ते हैं, यहाँ तक कि राजनीतिक क्षेत्र में भी, तो हम अपने दुश्मन को मजबूत कर रहे होते हैं। हम उन्हें हमें विभाजित करने के लिए पर्याप्त सामग्री दे रहे होते हैं। इसलिए, युवा प्रतिभाओं एक बड़ा दबाव समूह है। आपके पास बहुत मजबूत शक्ति है। आपकी विचार प्रक्रिया राजनेता, आपके सांसद, आपके विधायक, आपके पार्षद को नियंत्रित करेगी। राष्ट्र के बारे में सोचें। विकास के बारे में सोचें।&#8221;</p>
<figure id="attachment_6993" aria-describedby="caption-attachment-6993" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6-1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6-1.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-6993" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6-1.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6-1-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6-1-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6-1-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6-1-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6993" class="wp-caption-text">पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में शपथ ग्रहण करते</figcaption></figure>
<p><strong>एक उपराष्ट्रपति होने के नाते अगर उन्होंने इन शब्दों का प्रयोग करते कहा कि &#8220;जब राष्ट्रीय हित की बात हो तो हमें राजनीति नहीं करनी चाहिए, जब विकास की बात हो तो हमें राजनीति नहीं करनी चाहिए, जब राष्ट्र के विकास की बात हो तो हमें राजनीति नहीं करनी चाहिए। जब राष्ट्रीय सुरक्षा, राष्ट्रीय चिंता का विषय हो तो हमें राजनीति नहीं करनी चाहिए ​. &#8220;मैं राजनीतिक जगत के सभी लोगों से अपील करता हूँ कि कृपया परस्पर सम्मान रखें। कृपया टेलीविज़न पर या किसी भी पार्टी के नेतृत्व के विरुद्ध अभद्र भाषा का प्रयोग न करें। यह संस्कृति हमारी सभ्यता का सार नहीं है। हमें अपनी भाषा का ध्यान रखना होगा&#8230; व्यक्तिगत आक्षेपों से बचें। मैं राजनेताओं से अपील करता हूँ। अब समय आ गया है कि हम राजनेताओं को गालियाँ देना बंद करें। जब विभिन्न राजनीतिक दलों में लोग दूसरे राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं को गालियाँ देते हैं, तो यह हमारी संस्कृति के लिए अच्छा नहीं है।&#8221;</strong></p>
<p>अंत में, धनकड़ का कहना था की &#8220;भारत ऐतिहासिक रूप से किस लिए जाना जाता है? संवाद, वाद-विवाद, विचार-विमर्श। आजकल, हम संसद में यह सब होते नहीं देखते। मुझे लगता है कि आगामी सत्र एक महत्वपूर्ण सत्र होगा। मुझे पूरी आशा है कि सार्थक चर्चाएँ और गंभीर विचार-विमर्श होंगे जो भारत को नई ऊँचाइयों पर ले जाएँगे। ऐसा नहीं है कि सब कुछ सही है। हम कभी भी ऐसे समय में नहीं रहेंगे जहाँ सब कुछ सही हो। किसी भी समय कुछ क्षेत्रों में सदैव कुछ कमियाँ रहेंगी। इसके साथ ही सदैव सुधार की गुंजाइश है। अगर कोई किसी चीज़ में सुधार का सुझाव देता है, तो वह निंदा नहीं है। यह आलोचना नहीं है। यह केवल आगे के विकास के लिए एक सुझाव है। इसलिए, मैं राजनीतिक दलों से रचनात्मक राजनीति करने की अपील करता हूँ। और जब मैं यह कहता हूँ, तो मैं अपील करता हूँ &#8211; सत्ता पक्ष, सत्तारूढ़ दल और विपक्ष सभी दलों से अपील करता हूँ।”</p>
<figure id="attachment_6994" aria-describedby="caption-attachment-6994" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-8.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-8.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-6994" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-8.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-8-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-8-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-8-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-8-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6994" class="wp-caption-text">जगदीप धनखड़ 06 जून, 2023 को उप-राष्ट्रपति निवास, नई दिल्ली में भारतीय रक्षा संपदा सेवा (आईडीईएस) के परिवीक्षाधीन अधिकारियों से बातचीत करते हुए।</figcaption></figure>
<p>​ज्ञातव्य हो कि इससे पहले न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के आवास पर मिले जले हुए नकदी के बंडलों के मामले में उन्हें हटाने के लिए विपक्ष द्वारा प्रायोजित एक नोटिस उन्हें सौंपा गया था, और उन्होंने सदन में इसका उल्लेख किया और महासचिव से आगे आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब सत्तारूढ़ गठबंधन ने लोकसभा में इसी तरह का एक नोटिस प्रायोजित किया था और विपक्ष को भी इसमें शामिल किया था। </p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/dhankar-did-not-even-take-the-name-of-the-prime-minister-in-his-last-speech">&#8220;मैं ही सही हूँ, बाकी सब गलत है &#8211; यह लोकतंत्र नहीं है।​ यह अहंकार है। यह उद्दंडता है​&#8221;, अपने अंतिम भाषण में धनकड़ &#8216;प्रधानमंत्री का नाम तक नहीं लिया&#8221;</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>​वर्षाकालीन सत्र आज से: राजनीतिक दलों के बीच सौहार्द और परस्पर सम्मान का आह्वान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 21 Jul 2025 06:03:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[jp nadda]]></category>
		<category><![CDATA[lok sabha]]></category>
		<category><![CDATA[narendra modi]]></category>
		<category><![CDATA[parliemant]]></category>
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		<category><![CDATA[session]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>संसद भवन (नई दिल्ली) : ​भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ आज राज्यसभा के आठवें बैच के प्रतिभागियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम (आरएसआईपी) के उद्घाटन समारोह को संबोधित​ करते कहा कि &#8216;हममें मर्यादा और परस्पर सम्मान की पूर्ण भावना होनी चाहिए और यही हमारी संस्कृति की मांग है। और इसके लिए राजनितिक दलों के बीच सौहार्द और [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>संसद भवन (नई दिल्ली) : ​भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ आज राज्यसभा के आठवें बैच के प्रतिभागियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम (आरएसआईपी) के उद्घाटन समारोह को संबोधित​ करते कहा कि &#8216;हममें मर्यादा और परस्पर सम्मान की पूर्ण भावना होनी चाहिए और यही हमारी संस्कृति की मांग है। और इसके लिए राजनितिक दलों के बीच सौहार्द और परस्पर सम्मान का वातावरण होना आवश्यक है। </strong></p>
<p>उधर आज से शुरू हो रहे मानसून सत्र के लिए आयोजित सर्वदलीय बैठक में सरकार ने कहा कि वह ऑपरेशन सिंदूर सहित सभी मुद्दों पर संसद में चर्चा के लिए तैयार है। साथ ही, उसने विपक्ष को आगाह किया कि इस विषय पर कोई भी बहस निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के भीतर होनी चाहिए। </p>
<p>केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, रसायन एवं उर्वरक मंत्री तथा राज्यसभा में सदन के नेता जगत प्रकाश नड्डा की अध्यक्षता में संसद भवन परिसर, नई दिल्ली में राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ एक बैठक आयोजित की गई। यह बैठक केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा बुलाई गई थी। बैठक में केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और संसदीय कार्य राज्य मंत्री तथा सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन भी उपस्थित थे। बैठक में मंत्रियों सहित कुल 40 राजनीतिक दलों के 54 नेताओं ने भाग लिया।</p>
<p>आरंभ में, जगत प्रकाश नड्डा ने परिचयात्मक टिप्पणी की और बैठक में भाग लेने वाले सभी नेताओं का स्वागत किया। तत्पश्चात, संसदीय कार्य मंत्री ने बैठक का संचालन किया। उन्होंने नेताओं को सूचित किया कि संसद का मानसून सत्र, 2025 21 जुलाई से 21 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान, दोनों सदन मंगलवार, 12 अगस्त, 2025 को स्थगित होकर सोमवार, 18 अगस्त, 2025 को पुनः समवेत होंगे ताकि स्वतंत्रता दिवस समारोहों का आयोजन किया जा सके। इस सत्र में 32 दिनों की अवधि में कुल 21 बैठकें होंगी।</p>
<p>रिजिजू ने बताया कि इस सत्र के दौरान उठाए जाने वाले विधायी और अन्य कामकाज के 17 विषयों की अस्थायी रूप से पहचान की गई है। संसदीय कार्य मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार दोनों सदनों के नियमों के अनुसार सदनों में किसी भी अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने संसद के आगामी मानसून सत्र में उनके द्वारा उठाए जाने वाले संभावित विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त किए और सरकार को पूर्ण सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/H20250720187495.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/H20250720187495.jpg" alt="" width="2200" height="1376" class="aligncenter size-full wp-image-6985" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/H20250720187495.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/H20250720187495-300x188.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/H20250720187495-1024x640.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/H20250720187495-768x480.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/H20250720187495-1536x961.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/H20250720187495-2048x1281.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a></p>
<p>लदान विधेयक, 2024, समुद्री माल परिवहन विधेयक, 2024, तटीय नौवहन विधेयक, 2024, गोवा राज्य के विधानसभा क्षेत्रों में अनुसूचित जनजातियों के प्रतिनिधित्व का पुनर्समायोजन विधेयक, 2024, व्यापारी नौवहन विधेयक, 2024, भारतीय बंदरगाह विधेयक, 2025, आयकर विधेयक, 2025, मणिपुर माल एवं सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2025 &#8211; एक अध्यादेश का स्थान लेने के लिए, जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक, 2025, भारतीय प्रबंधन संस्थान (संशोधन) विधेयक, 2025, कराधान विधि (संशोधन) विधेयक, 2025, भू-विरासत स्थल एवं भू-अवशेष (संरक्षण एवं रखरखाव) विधेयक, 2025, खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2025, राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक, 2025, राष्ट्रीय डोपिंग रोधी संशोधन विधेयक, 2025 के अलावे वर्ष 2025-26 के लिए अनुदान मांगों (मणिपुर) पर चर्चा एवं मतदान तथा संबंधित विनियोग विधेयक का पुरःस्थापन, विचार एवं पारित/वापस और मणिपुर राज्य के संबंध में भारत के संविधान के अनुच्छेद 356(1) के अंतर्गत 13 फरवरी, 2025 को राष्ट्रपति द्वारा जारी उद्घोषणा के माध्यम से लगाए गए राष्ट्रपति शासन के विस्तार के अनुमोदन हेतु संकल्पित है। </p>
<p>इससे पहले, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने राजनीतिक दलों के बीच सौहार्द और परस्पर सम्मान का आह्वान किया है। धनखड़ ने कहा, &#8220;मैं राजनीतिक जगत के सभी लोगों से अपील करता हूँ कि कृपया परस्पर सम्मान रखें। कृपया टेलीविज़न पर या किसी भी पार्टी के नेतृत्व के विरुद्ध अभद्र भाषा का प्रयोग न करें। यह संस्कृति हमारी सभ्यता का सार नहीं है। हमें अपनी भाषा का ध्यान रखना होगा&#8230; व्यक्तिगत आक्षेपों से बचें। मैं राजनेताओं से अपील करता हूँ। अब समय आ गया है कि हम राजनेताओं को गालियाँ देना बंद करें। जब विभिन्न राजनीतिक दलों में लोग दूसरे राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं को गालियाँ देते हैं, तो यह हमारी संस्कृति के लिए अच्छा नहीं है।&#8221;</p>
<p><strong>उपराष्ट्रपति ने कहा, “हममें मर्यादा और परस्पर सम्मान की पूर्ण भावना होनी चाहिए — और यही हमारी संस्कृति की मांग है। अन्यथा हमारी विचार प्रक्रिया में एकता नहीं हो सकती… विश्वास कीजिए, अगर राजनीतिक संवाद उच्च स्तर पर हो, अगर नेता अधिक बार मिलते-जुलते रहें, वे आपस में अधिक संवाद करें। वे व्यक्तिगत स्तर पर विचारों का आदान-प्रदान करें — तो राष्ट्र हित की पूर्ति होगी… हमें आपस में क्यों लड़ना चाहिए? हमें अपने भीतर शत्रुओं की तलाश नहीं करनी चाहिए।</strong></p>
<p>मेरी जानकारी के अनुसार, प्रत्येक भारतीय राजनीतिक दल और प्रत्येक सांसद अंततः एक राष्ट्रवादी है। वह एक राष्ट्र की भावना में विश्वास करता है। वह राष्ट्र की प्रगति में विश्वास करता है… लोकतंत्र कभी ऐसा नहीं होता कि एक ही पार्टी सत्ता में आए। हमने अपने जीवनकाल में देखा है कि परिवर्तन राज्य स्तर पर, पंचायत स्तर पर, नगरपालिका स्तर पर होता है, यह एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया है। लेकिन एक बात निश्चित है, विकास की निरंतरता, हमारी सभ्यतागत लोकाचार की निरंतरता होनी चाहिए, और यह केवल एक पहलू से आती है। हमें लोकतांत्रिक संस्कृति का सम्मान करना चाहिए।”</p>
<p>धनखड़ ने कहा, “एक समृद्ध लोकतंत्र निरंतर कटुता का वातावरण सहन नहीं कर सकता&#8230; जब आप राजनीतिक कटुता, राजनीतिक वातावरण को अलग दिशा में पाते हैं, तो आपका मन विचलित हो जाता होगा। मैं देश के सभी लोगों से आग्रह करता हूँ कि राजनीतिक तापमान को कम किया जाए। राजनीति टकराव नहीं है, राजनीति कभी भी एकतरफा नहीं हो सकती। अलग-अलग राजनीतिक विचार प्रक्रियाएँ होंगी, लेकिन राजनीति का अर्थ है एक ही लक्ष्य को प्राप्त करना, लेकिन किसी न किसी तरह अलग-अलग माध्यमओं से।&#8221;</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Vice-President-of-India-Shri-Jagdeep-Dhankhar-pib.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Vice-President-of-India-Shri-Jagdeep-Dhankhar-pib.jpg" alt="" width="2100" height="1400" class="aligncenter size-full wp-image-6986" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Vice-President-of-India-Shri-Jagdeep-Dhankhar-pib.jpg 2100w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Vice-President-of-India-Shri-Jagdeep-Dhankhar-pib-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Vice-President-of-India-Shri-Jagdeep-Dhankhar-pib-1024x683.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Vice-President-of-India-Shri-Jagdeep-Dhankhar-pib-768x512.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Vice-President-of-India-Shri-Jagdeep-Dhankhar-pib-1536x1024.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Vice-President-of-India-Shri-Jagdeep-Dhankhar-pib-2048x1365.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2100px) 100vw, 2100px" /></a></p>
<p>उन्होंने कहा कि &#8220;मेरा दृढ़ विश्वास है कि इस देश में कोई भी व्यक्ति राष्ट्र के विरुद्ध नहीं सोचेगा। मैं किसी राजनीतिक दल को भारत की अवधारणा के विरुद्ध नहीं देख सकता। उनके अलग-अलग माध्यम, अलग-अलग सोच हो सकती है; लेकिन उन्हें एक-दूसरे के साथ चर्चा करना, एक-दूसरे के साथ संवाद करना सीखना होगा। टकराव कोई रास्ता नहीं है। जब हम आपस में लड़ते हैं, यहाँ तक कि राजनीतिक क्षेत्र में भी, तो हम अपने दुश्मन को मजबूत कर रहे होते हैं। हम उन्हें हमें विभाजित करने के लिए पर्याप्त सामग्री दे रहे होते हैं। इसलिए, युवा प्रतिभाओं एक बड़ा दबाव समूह है। आपके पास बहुत मजबूत शक्ति है। आपकी विचार प्रक्रिया राजनेता, आपके सांसद, आपके विधायक, आपके पार्षद को नियंत्रित करेगी। राष्ट्र के बारे में सोचें। विकास के बारे में सोचें।&#8221;</p>
<p>उपराष्ट्रपति ने इस बात पर बल दिया, &#8220;जब राष्ट्रीय हित की बात हो तो हमें राजनीति नहीं करनी चाहिए, जब विकास की बात हो तो हमें राजनीति नहीं करनी चाहिए, जब राष्ट्र के विकास की बात हो तो हमें राजनीति नहीं करनी चाहिए। जब राष्ट्रीय सुरक्षा, राष्ट्रीय चिंता का विषय हो तो हमें राजनीति नहीं करनी चाहिए और ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि भारत को विभिन्न राष्ट्रों के बीच गर्व के साथ खड़ा होना है। दुनिया में हमारा अच्छा सम्मान है। यह विचार कि भारत को बाहर से नियंत्रित किया जा सकता है, हमारे दावे के खिलाफ जाता है। हम एक राष्ट्र हैं, एक संप्रभु राष्ट्र हैं। हमारा राजनीतिक एजेंडा भारत की विरोधी ताकतों द्वारा क्यों निर्धारित किया जाना चाहिए? हमारे एजेंडे को हमारे दुश्मनों द्वारा भी क्यों प्रभावित किया जाना चाहिए?&#8221;</p>
<p><strong>उपराष्ट्रपति ने टेलीविजन पर चर्चा कार्यक्रमों में झलकती राजनीतिक दलों की कटुता की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा, “प्रत्येक राजनीतिक दल का नेतृत्व परिपक्व होता है। सभी राजनीतिक दल, चाहे वह बड़ा हो या छोटा, राष्ट्रीय विकास के लिए प्रतिबद्ध होता है और इसलिए युवाओं का कर्तव्य है कि वे इस मानसिकता को सुनिश्चित करें। यह विचार प्रक्रिया सोशल मीडिया में आनी चाहिए और एक बार जब आपको हमारी टेलीविजन चर्चाएं सुखदायक, सकारात्मक और आकर्षक लगेंगी, तो कल्पना कीजिए कि कितना बड़ा बदलाव आ सकता है &#8211; बस एक पल के लिए ध्यान दीजिए। हम आमतौर पर क्या देखते हैं? हम क्या सुनते हैं? क्या यह कानों को थका नहीं देता? हमारे कान तो थक गए हैं ना? भाई, ऐसा क्यों है? हम एक महान संस्कृति से आते हैं। हमारी विचारधारा का एक आधार है। </strong></p>
<p>हमारे विचारों में मतभेद हो सकते हैं &#8211; हमारे विचारों में भिन्नता हो सकती है &#8211; लेकिन हमारे दिलों में कटुता कैसे हो सकती है? हम भारतीय हैं। हमारी संस्कृति हमें क्या सिखाती है? अनंतवाद &#8211; अंतहीन संवाद में विश्वास। अनंतवाद का क्या अर्थ है? इसका अर्थ है चर्चा और बहस। चर्चा और बहस का क्या अर्थ है? इसका अर्थ है अभिव्यक्ति। और अभिव्यक्ति का अर्थ है &#8211; अपने विचारों को खुलकर कहें, लेकिन अपनी ही राय पर इतना आश्वस्त न हो जाएँ कि आप उस पर विश्वास कर लें और यह मान लें कि अही अंतिम और पूर्ण सत्य है। यह मत मानिए कि किसी और का दृष्टिकोण आपसे अलग हो ही नहीं सकता।”</p>
<p>मॉनसून सत्र में सार्थक चर्चा की आवश्यकता पर प्रकाश डालते उपराष्ट्रपति ने कहा कि “हमें दृढ़ रहना होगा। हमें अपने दृष्टिकोण पर विश्वास करना होगा। लेकिन हमें दूसरे के दृष्टिकोण का भी सम्मान करना होगा। अगर हम अपने दृष्टिकोण पर विश्वास करते हैं और सोचते हैं, &#8220;मैं ही सही हूँ और बाकी सब गलत हैं&#8221; &#8211; यह लोकतंत्र नहीं है। यह हमारी संस्कृति नहीं है। यह अहंकार है। यह उद्दंडता है। हमें अपने अहंकार पर नियंत्रण रखना होगा। हमें अपनी उद्दंडता पर नियंत्रण रखना होगा। हमें यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि दूसरा व्यक्ति अलग दृष्टिकोण क्यों रखता है &#8211; यही हमारी संस्कृति है। भारत ऐतिहासिक रूप से किस लिए जाना जाता है? संवाद, वाद-विवाद, विचार-विमर्श। आजकल, हम संसद में यह सब होते नहीं देखते। </p>
<p>उन्होंने कहा कि &#8220;मुझे लगता है कि यह सत्र एक महत्वपूर्ण सत्र होगा। मुझे पूरी आशा है कि सार्थक चर्चाएँ और गंभीर विचार-विमर्श होंगे जो भारत को नई ऊँचाइयों पर ले जाएँगे। ऐसा नहीं है कि सब कुछ सही है। हम कभी भी ऐसे समय में नहीं रहेंगे जहाँ सब कुछ सही हो। किसी भी समय कुछ क्षेत्रों में सदैव कुछ कमियाँ रहेंगी। इसके साथ ही सदैव सुधार की गुंजाइश है। अगर कोई किसी चीज़ में सुधार का सुझाव देता है, तो वह निंदा नहीं है। यह आलोचना नहीं है। यह केवल आगे के विकास के लिए एक सुझाव है। इसलिए, मैं राजनीतिक दलों से रचनात्मक राजनीति करने की अपील करता हूँ। और जब मैं यह कहता हूँ, तो मैं अपील करता हूँ &#8211; सत्ता पक्ष, सत्तारूढ़ दल और विपक्ष सभी दलों से अपील करता हूँ।”</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/politics/monsoon-session-of-parliament-begins">​वर्षाकालीन सत्र आज से: राजनीतिक दलों के बीच सौहार्द और परस्पर सम्मान का आह्वान</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>भाजपा को नया अध्यक्ष&#8217; मिल गया है, &#8216;स्थायी&#8217; नहीं, &#8216;तत्काल के लिए&#8217;, क्योंकि &#8216;जग घूमेया थारे जैसा ना कोई 👁 &#8216;नड्डा&#8217;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 08 Jul 2025 03:53:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[advani]]></category>
		<category><![CDATA[amit shah]]></category>
		<category><![CDATA[bjp]]></category>
		<category><![CDATA[narendra modi]]></category>
		<category><![CDATA[national president]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>दीनदयाल उपाध्याय मार्ग (नई दिल्ली) : साल 2014 में नरेंद्र मोदी द्वारा प्रधानमंत्री पद के शपथ ग्रहण के दो साल बाद अली अब्बास की कथा और निर्देशन में एक फिल्म बनी थी &#8216;सुलतान&#8217;, जिसे आदित्य चोपड़ा ने बनाया था। इस फिल्म में सलमान खान, अनुष्का शर्मा, रणदीप हुडा, अमित साध जैसे कलाकार काम किये थे। इस [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>दीनदयाल उपाध्याय मार्ग (नई दिल्ली) : साल 2014 में नरेंद्र मोदी द्वारा प्रधानमंत्री पद के शपथ ग्रहण के दो साल बाद अली अब्बास की कथा और निर्देशन में एक फिल्म बनी थी &#8216;सुलतान&#8217;, जिसे आदित्य चोपड़ा ने बनाया था। इस फिल्म में सलमान खान, अनुष्का शर्मा, रणदीप हुडा, अमित साध जैसे कलाकार काम किये थे। इस फिल्म में सलमान खान और अनुष्का शर्मा पर एक रूमानी गीत फिल्माया गया था जिसके शब्द थे इरशाद कामिल की, संगीत दिया था विशाल-शेखर का और गाये थे रहत फ़तेह अली खान साहब ने। गीत के बोल थे :</strong></p>
<p><em>ओ.. ना वो अखियाँ रूहानी कहीं<br />
ना वो चेहरा नूरानी कहीं<br />
कहीं दिल वाली बातें भी ना<br />
ना वो सजरी जवानी कहीं<br />
जग घूमेया थारे जैसा ना कोई<br />
जग घूमेया थारे जैसा ना कोई</p>
<p>ना तो हंसना रूमानी कहीं<br />
ना तो खुशबू सुहानी कहीं<br />
ना वो रंगली अदाएं देखीं<br />
ना वो प्यारी सी नादानी कहीं<br />
जैसी तू है वैसी रहना</em></p>
<figure id="attachment_6910" aria-describedby="caption-attachment-6910" style="width: 1600px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/nadda-1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/nadda-1.jpg" alt="" width="1600" height="900" class="size-full wp-image-6910" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/nadda-1.jpg 1600w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/nadda-1-300x169.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/nadda-1-1024x576.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/nadda-1-768x432.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/nadda-1-1536x864.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1600px) 100vw, 1600px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6910" class="wp-caption-text">जगत प्रकाश नड्डा</figcaption></figure>
<p><strong>आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह को जब देखता हूँ तो कहीं न कहीं वर्तमान भाजपा के अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा के प्रति उनके मन में इस गीत का स्वर गुनगुनाते पाता हूँ। क्योंकि न तो मोदी जी को और ना ही अमित शाह को अभी तक जगत प्रकाश नड्डा के बराबर, या फिर कुछ हद तक ही सही&#8217;, समरूप गुणों वाले व्यक्ति, विश्वासपात्र, भाजपा के प्रति समर्पित अभ्यर्थी नहीं मिल पाये हैं, जिनके नाम भाजपा का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष का मुहर लगा दें। आप इस बात को स्वीकार करें अथवा नहीं। </strong></p>
<p>जगत प्रकाश नड्डा के बाद भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी पर कौन बैठेंगे? कोई कह रहे हैं &#8216;पुरुष&#8217; बैठेंगे, कोई महिला सशक्तिकरण का दृष्टान्त देकर कह रहे हैं &#8216;महिला&#8217; बैठेंगी। लेकिन भाजपा में सत्ता के गलियारे में &#8216;गोपनीयता&#8217; अटल बिहार वाजपेयी के ज़माने में भी थी और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कालखंड में तो है ही, वह भी &#8216;उत्कर्ष&#8217; पर। बहरहाल, गिनती शुरू कर दें क्योंकि भाजपा को &#8220;तत्कालीन अध्यक्ष&#8221; मिल गया है और जगत प्रकाश नड्डा के समतुल्य अभ्यर्थी की खोज जारी है। </p>
<p><strong>आज भी याद है जब 1998 में प्रधानमंत्री कार्यालय से दिल्ली के अख़बारों के दफ्तर में फोन की घंटी टनटनाया और कहा गया कि &#8216;वाजपेयी जी अख़बार वालों से तुरंत मिलना चाहते हैं&#8217;, दिल्ली दरबार के पत्रकार अपने-अपने कार्यालयों से निकल कर गंतव्य तक पहुँचने में &#8216;क्या-क्या नहीं सोचे&#8217;, कहानियां भी गढ़े, इंट्रो भी बनाये। लेकिन किसी को भी पता नहीं वाजपेयी जी किस विषय पर बोलने वाले हैं। पोखरण-II परमाणु परीक्षण  में सोचना तो नामुमकिन था। </strong></p>
<figure id="attachment_6911" aria-describedby="caption-attachment-6911" style="width: 894px" class="wp-caption alignleft"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Screenshot-2025-07-08-at-9.08.01-AM.png"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Screenshot-2025-07-08-at-9.08.01-AM.png" alt="" width="894" height="588" class="size-full wp-image-6911" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Screenshot-2025-07-08-at-9.08.01-AM.png 894w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Screenshot-2025-07-08-at-9.08.01-AM-300x197.png 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Screenshot-2025-07-08-at-9.08.01-AM-768x505.png 768w" sizes="auto, (max-width: 894px) 100vw, 894px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6911" class="wp-caption-text">अटल बिहारी वाजपेयी</figcaption></figure>
<p>मई 1998 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में पोखरण-II परमाणु परीक्षण किए गए थे। आधिकारिक तौर पर ऑपरेशन शक्ति के रूप में जाने जाने वाले इन परीक्षणों में राजस्थान के पोखरण परीक्षण रेंज में पाँच परमाणु विस्फोट शामिल थे। पहले तीन परीक्षण 11 मई, 1998 को और शेष दो 13 मई, 1998 को किए गए थे। इन परीक्षणों को करने का निर्णय एक महत्वपूर्ण निर्णय था। तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस ने परीक्षणों का समर्थन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जब वाजपेयी जी सैकड़ों संवाददाताओं और छायाकारों के बीच पोखरण परीक्षण के बारे में बताये, अखबार वाले, टीवी वाले सभी एक-दूसरे का चेहरा देखने लगे। उधर दफ्तर में संपादक महोदय भाजपा और प्रधानमंत्री कार्यालय को कवर करने वालों को भृकुटि तान कर देख रहे थे। </p>
<p>उस घटना के 27-साल बाद विगत मई, 2025 को जब वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में &#8216;ऑपरेशन सिंदूर&#8217; किया गया, इस बात का गंध लोगों को, खासकर प्रधानमंत्री कार्यालय, रक्षा मंत्रालय या सत्ता के गलियारे में चहलकदमी करने वाले किसी भी पत्रकार बंधू-बांधवों को गंध&#8217; तक नहीं लगा। सत्ता के गलियारे में &#8216;गोपनीयता&#8217; अपने उत्कर्ष पर होता है। इस घटना के बाद लेखक, विश्लेषक, आलोचक जो भी लिखें। आजकल दिल्ली सल्तनत में भारतीय जनता पार्टी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन होगा चर्चाएं आम है। कोई पुरुष नेताओं को आगे बढ़ा रहे हैं तो कोई महिला नेताओं को। लेकिन दीनदयाल उपाध्याय मार्ग स्थित भाजपा के राष्ट्रीय कार्यालय से लेकर झंडेवालान स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यालय तक, सभी चुप हैं। </p>
<p>ज्ञातव्य हो कि 1980 में भाजपा के गठन के बाद <strong>अटल बिहारी वाजपेयी</strong> इसके पहले अध्यक्ष बने। उनके नेतृत्व में भाजपा ने खुद को एक मध्यमार्गी पार्टी के रूप में पेश किया जो भारतीय जनसंघ की कटु राजनीति से अलग हटकर थी। वाजपेयी, जिन्हें अक्सर भाजपा के उदारवादी चेहरे के रूप में देखा जाता था। बाद में वाजपेयी देश का प्रधानमंत्री भी बने और अपना कार्यकाल भी पूरा किया। </p>
<figure id="attachment_6912" aria-describedby="caption-attachment-6912" style="width: 966px" class="wp-caption alignright"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Screenshot-2025-07-08-at-7.59.01-AM.png"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Screenshot-2025-07-08-at-7.59.01-AM.png" alt="" width="966" height="580" class="size-full wp-image-6912" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Screenshot-2025-07-08-at-7.59.01-AM.png 966w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Screenshot-2025-07-08-at-7.59.01-AM-300x180.png 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Screenshot-2025-07-08-at-7.59.01-AM-768x461.png 768w" sizes="auto, (max-width: 966px) 100vw, 966px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6912" class="wp-caption-text">लाल कृष्ण आडवाणी</figcaption></figure>
<p>1986 में अटल बिहारी वाजपेयी के बाद <strong>लाल कृष्ण आडवाणी</strong> भाजपा के अध्यक्ष बने। कहते हैं यह घटना आमतौर पर भाजपा की विचारधारा में कट्टर हिंदुत्व की ओर बदलाव से जुड़ी है, जिसका उदाहरण 1990 में आडवाणी द्वारा हिंदू राष्ट्रवाद की अपील करके चुनावी समर्थन जुटाने के प्रयास के तहत निकाली गई राम रथ यात्रा है। उन्होंने 1973 में भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया था। भाजपा के विचारक मुरली मनोहर जोशी 1991 में भाजपा अध्यक्ष बने। वे कई दशक से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े थे। अपने पूर्ववर्ती लालकृष्ण आडवाणी की तरह, उन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन में बड़ी भूमिका निभाई। बाद में उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में कार्य किया। उनके कार्यकाल के दौरान, भाजपा पहली बार मुख्य विपक्षी दल बनी।</p>
<figure id="attachment_6918" aria-describedby="caption-attachment-6918" style="width: 1024px" class="wp-caption alignleft"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-6.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-6.jpg" alt="" width="1024" height="683" class="size-full wp-image-6918" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-6.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-6-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-6-768x512.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6918" class="wp-caption-text">मुरली मनोहर जोशी</figcaption></figure>
<p>आडवाणी के आक्रामक प्रचार अभियान ने 1996 के चुनावों के बाद भारतीय संसद के निचले सदन में भाजपा को सबसे बड़ी पार्टी बनने में मदद की। हालांकि वाजपेयी प्रधानमंत्री बने, लेकिन आडवाणी को पार्टी के भीतर ताकत के रूप में देखा गया और बाद में उन्होंने उप प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया। </p>
<figure id="attachment_6919" aria-describedby="caption-attachment-6919" style="width: 1024px" class="wp-caption alignright"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-3.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-3.jpg" alt="" width="1024" height="683" class="size-full wp-image-6919" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-3.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-3-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-3-768x512.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6919" class="wp-caption-text">कुषा भाऊ ठाकरे</figcaption></figure>
<p>कुषा भाऊ ठाकरे 1942 से ही आरएसएस से जुड़े हुए थे। 1998 में जब वे भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के सत्ता में आने के कुछ महीने बाद अध्यक्ष बने, तब वे भाजपा के बाहर ज़्यादा मशहूर नहीं थे। कहते हैं कि उनके कार्यकाल के दौरान भाजपा ने हिंदुत्व पर अपना ज़ोर कम कर दिया, जैसे कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 को हटाने की मांग, ताकि एक बड़े गठबंधन के विचारों को समायोजित किया जा सके।</p>
<figure id="attachment_6913" aria-describedby="caption-attachment-6913" style="width: 1024px" class="wp-caption alignleft"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-4.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-4.jpg" alt="" width="1024" height="683" class="size-full wp-image-6913" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-4.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-4-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-4-768x512.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6913" class="wp-caption-text">बंगारू लक्ष्मण</figcaption></figure>
<p>लंबे समय से आरएसएस के सदस्य रहे <strong>बंगारू लक्ष्मण</strong> 2000 में भाजपा के पहले दलित अध्यक्ष बने। एक साल बाद तहलका पत्रिका के स्टिंग ऑपरेशन में उन्हें रिश्वत लेते हुए दिखाया गया, जिसके बाद लक्ष्मण ने तुरंत इस्तीफा दे दिया। वे 2012 तक पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में रहे, जब उन्हें भ्रष्टाचार के लिए दोषी ठहराया गया और उन्होंने इस्तीफा दे दिया। लक्ष्मण के इस्तीफे के बाद <strong>जाना कृष्णमूर्ति</strong> कार्यवाहक अध्यक्ष बने और कुछ ही समय बाद राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने उन्हें अध्यक्ष के रूप में पुष्टि कर दी। एक साल बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया जब वे अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में कैबिनेट फेरबदल के तहत मंत्री बन गए।</p>
<figure id="attachment_6914" aria-describedby="caption-attachment-6914" style="width: 1024px" class="wp-caption alignright"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-5.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-5.jpg" alt="" width="1024" height="683" class="size-full wp-image-6914" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-5.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-5-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-5-768x512.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6914" class="wp-caption-text">जाना कृष्णमूर्ति</figcaption></figure>
<p>जाना कृष्णमूर्ति को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने के बाद <strong>वेंकैया नायडू</strong> भाजपा अध्यक्ष चुने गए। टिप्पणीकारों ने उनके चुनाव को लालकृष्ण आडवाणी और पार्टी के रूढ़िवादी हिंदू-राष्ट्रवादी विंग द्वारा फिर से नियंत्रण स्थापित करने के उदाहरण के रूप में देखा। हालांकि नायडू को पूर्ण कार्यकाल के लिए चुना गया, लेकिन एनडीए द्वारा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए से 2004 के भारतीय आम चुनाव हारने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया। उस समय लोकसभा में विपक्ष के नेता के रूप में कार्यरत आडवाणी, 2004 के भारतीय आम चुनाव के बाद वेंकैया नायडू के इस्तीफा देने के बाद तीसरी बार भाजपा अध्यक्ष बने। आडवाणी विपक्ष के नेता के रूप में अपने पद पर बने रहे। 2005 में आडवाणी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया, जब उन्होंने मोहम्मद अली जिन्ना को एक धर्मनिरपेक्ष नेता के रूप में वर्णित किया, जिससे विवाद पैदा हो गया।</p>
<figure id="attachment_6915" aria-describedby="caption-attachment-6915" style="width: 942px" class="wp-caption alignleft"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Screenshot-2025-07-08-at-9.12.54-AM.png"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Screenshot-2025-07-08-at-9.12.54-AM.png" alt="" width="942" height="602" class="size-full wp-image-6915" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Screenshot-2025-07-08-at-9.12.54-AM.png 942w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Screenshot-2025-07-08-at-9.12.54-AM-300x192.png 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Screenshot-2025-07-08-at-9.12.54-AM-768x491.png 768w" sizes="auto, (max-width: 942px) 100vw, 942px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6915" class="wp-caption-text">वेंकैया नायडू</figcaption></figure>
<p>दिसंबर 2005 में <strong>राजनाथ सिंह सिंह</strong> ने आडवाणी के कार्यकाल के शेष समय के लिए भाजपा अध्यक्ष का पद संभाला। उन्हें 2006 में पूर्ण कार्यकाल के लिए फिर से नियुक्त किया गया। सिंह ने आरएसएस और भाजपा के लिए कई पदों पर कार्य किया, जिसमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और भाजपा की युवा शाखा के अध्यक्ष के रूप में कार्य करना शामिल है। उन्होंने हिंदुत्व मंच पर वापसी की वकालत की। एनडीए के 2009 के भारतीय आम चुनाव हारने के बाद सिंह ने इस्तीफा दे दिया। साल 2009 में <strong>नितिन गडकरी</strong> भाजपा के सबसे युवा अध्यक्ष बने। लंबे समय से आरएसएस के सदस्य रहे गडकरी महाराष्ट्र में गठबंधन सरकार में मंत्री और भाजपा युवा शाखा के अध्यक्ष रह चुके हैं। उन्हें आरएसएस नेतृत्व का भरपूर समर्थन प्राप्त था। गडकरी ने मंत्री रहते हुए घोटाले और वित्तीय अनियमितताओं के अन्य आरोपों के बाद 2013 में इस्तीफा दे दिया था।</p>
<figure id="attachment_6916" aria-describedby="caption-attachment-6916" style="width: 1024px" class="wp-caption alignright"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-10.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-10.jpg" alt="" width="1024" height="683" class="size-full wp-image-6916" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-10.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-10-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-10-768x512.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6916" class="wp-caption-text">राजनाथ सिंह</figcaption></figure>
<p>2013 में गडकरी के पद छोड़ने के बाद राजनाथ सिंह को दूसरे कार्यकाल के लिए अध्यक्ष चुना गया। सिंह ने 2014 के भारतीय आम चुनाव के लिए भाजपा के अभियान में बड़ी भूमिका निभाई, जिसमें भाजपा के भीतर विरोध के बावजूद नरेंद्र मोदी को पार्टी का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करना भी शामिल था। पार्टी की शानदार जीत के बाद, सिंह ने गृह मंत्री का पद संभालने के लिए पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। वर्तमान प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी विश्वासपात्र <strong>अमित शाह</strong>, राजनाथ सिंह के पहले मोदी मंत्रिमंडल में शामिल होने के बाद उनके कार्यकाल के शेष समय के लिए भाजपा अध्यक्ष बने। टिप्पणीकारों ने शाह की नियुक्ति को भाजपा पर मोदी के नियंत्रण का प्रदर्शन बताया। शाह को 2016 में पूरे तीन साल के कार्यकाल के लिए फिर से चुना गया।</p>
<figure id="attachment_6917" aria-describedby="caption-attachment-6917" style="width: 1024px" class="wp-caption alignleft"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-7.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-7.jpg" alt="" width="1024" height="683" class="size-full wp-image-6917" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-7.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-7-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-7-768x512.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6917" class="wp-caption-text">नितिन गडकरी</figcaption></figure>
<p>इसके बाद,राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से लंबे समय से जुड़े जगत प्रकाश नड्डाको 2019 में भाजपा का &#8220;कार्यकारी अध्यक्ष&#8221; चुना गया और अध्यक्ष चुने जाने से पहले उन्होंने एक साल तक अमित शाह के साथ पार्टी चलाने की जिम्मेदारी साझा की और आज तक बने हैं । <br />
<strong>भाजपा के स्थापना काल से अब तक 11 अध्यक्ष बने हैं और बारहवें की खोज जारी है। लेकिन यह आश्चर्यजनक है, अगर चौंकाने वाला नहीं है, तो यह है कि मोदी और शाह पिछले एक साल में नड्डा का विकल्प नहीं ढूंढ पाए। ऐसा नहीं है कि मोदी-शाह ने कोशिश नहीं की, लेकिन ऐसा लगता है कि वे सफल नहीं हुए। नड्डा को पहले ही दो बार सेवा विस्तार मिल चुका है। नड्डा को मोदी का करीबी माना जाता है। नड्डा, जो केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हैं, 2020 से पार्टी अध्यक्ष पद पर हैं। उनका कार्यकाल 2023 में समाप्त हो रहा था, लेकिन भाजपा ने इसे 2024 तक बढ़ा दिया ताकि वह लोकसभा चुनावों में पार्टी का नेतृत्व कर सकें।</strong></p>
<p>अख़बारों में, टीवी के स्क्रीन पर आजकल मनोहर लाल खट्टर, भूपेंद्र यादव और धर्मेंद्र प्रधान के नाम कभी आते हैं, कभी गायब हो जाते हैं। ऐसी अटकलें भी लोग लगा रहे हैं कि भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए महिला चेहरे की तलाश कर रही है, क्योंकि पार्टी ने हाल के दिनों में महिला मतदाताओं को प्रभावित करने में सफलता देखी है। इसके अलावा, भाजपा ने 2023 में महिला आरक्षण विधेयक पर भी जोर दिया, जिसे संसद के दोनों सदनों ने मंजूरी दे दी। विधेयक में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की मांग की गई है। पार्टी के लिए एक महिला अध्यक्ष की नियुक्ति से यह स्पष्ट संदेश भी जाएगा कि भाजपा इस विधेयक के साथ है।</p>
<p><strong>लोगबाग यह भी लिख रहे हैं कि निर्मला सीतारमण को भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जा सकता हैं क्योंकि वह पार्टी की सबसे प्रभावशाली महिलाओं में से एक हैं। उल्लेखनीय है कि वह 2019 से वित्त मंत्री का पद संभाल रही हैं, जब भाजपा दूसरी बार सत्ता में आई थी। इसके अलावा, तमिलनाडु में उनकी जड़ें भी भाजपा के लिए एक फायदा हो सकती हैं, क्योंकि पार्टी दक्षिण में आगे बढ़ रही है। अगर सीतारमण को चुना जाता है, तो यह भाजपा के दक्षिणी क्षेत्र में पहुंच बनाने में मदद कर सकता है और परिसीमन के बाद लोकसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के साथ तालमेल का संकेत दे सकता है।</strong></p>
<p>इसी तरह, <strong>दग्गुबाती पुरंदेश्वरी</strong> के नाम पर भी लोग लिख रहे हैं  जो भाजपा की पूर्व आंध्र प्रदेश इकाई की प्रमुख थीं। वह सरकार के ऑपरेशन सिंदूर प्रतिनिधिमंडल का भी हिस्सा थीं, जिसने यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जर्मनी, यूरोपीय संघ, इटली और डेनमार्क में देश के आतंकवाद विरोधी रुख का प्रतिनिधित्व किया था। कई भाषाओं में पारंगत पुरंदेश्वरी ने मंत्री पद और संसदीय अनुभव के साथ एक बहुपक्षीय राजनीतिक करियर बनाया है। वनथी श्रीनिवासन  उछाल रहे हैं जो भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुकी हैं। 2021 में उन्होंने अभिनेता और मक्कल निधि मैयम (एमएनएम) के संस्थापक कमल हासन को हराकर तमिलनाडु की कोयंबटूर (दक्षिण) सीट जीती थी। वह 1993 से भाजपा से जुड़ी हैं और 2022 में भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति की सदस्य बनीं।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-7-1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-7-1.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-6920" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-7-1.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-7-1-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-7-1-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-7-1-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-7-1-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p>वैसे उम्मीद है कि आगामी दस दिनों में भारत को भाजपा का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल जायेगा। अपवाद छोड़कर, अधिकांश राज्यों में संगठनात्मक चुनाव पूरे हो चुके हैं और पदाधिकारियों का चुनाव हो चुका है, और शेष कुछ राज्यों में जल्द ही चुनाव पूरे हो जाएंगे। भाजपा की 36 संगठनात्मक इकाइयों में से 32 में राज्य इकाई के चुनाव महीनों पहले शुरू हो चुके थे, जिनमें राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं।</p>
<p><strong>वैसे आरएसएस ने साफ कर दिया है कि वह दूसरे दलों से आए नेताओं के बजाय घरेलू नेताओं को प्राथमिकता देता है। सांसदों को राज्य प्रमुख नियुक्त करने से हतोत्साहित किया गया। इसके बजाय, राज्य स्तर के विधायकों, एमएलसी और अनुभवी संगठनात्मक कार्यकर्ताओं पर ध्यान केंद्रित किया गया। जो लोग अपने राज्यों से अच्छी तरह वाकिफ हैं, जिन्होंने जमीनी स्तर पर काम किया है और संगठन के पुनर्निर्माण पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। दलबदलुओं की नियुक्ति अपवाद होगी, नियम नहीं। तरीके में यह बदलाव चुने गए नामों में स्पष्ट है। </strong></p>
<p>मध्य प्रदेश में विष्णु दत्त शर्मा की जगह गोपाल खंडेलवाल को चुना गया। पश्चिम बंगाल में भाजपा के राज्यसभा सांसद समिक भट्टाचार्य को पार्टी का नेतृत्व करने के लिए चुना गया। महाराष्ट्र में पुराने नेताओं में से एक भरोसेमंद नेता रवींद्र चव्हाण को नियुक्त किया गया। मिजोरम को डॉ. के. बेचुआ मिले, जो एक अनुभवी राजनेता हैं और 2023 में भाजपा में शामिल हो गए थे। आंध्र प्रदेश ने पी.वी.एन. माधव को लाया, जबकि तेलंगाना में एन. रामचंदर राव की वापसी हुई। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में क्रमशः राजीव बिंदल और महेंद्र भट्ट की फिर से नियुक्ति हुई &#8211; दोनों को ही आरएसएस से मजबूत जुड़ाव वाले स्थिर व्यक्तित्व के रूप में देखा गया। पुडुचेरी में वी.पी. रामलिंगम को चुना गया और अंडमान और निकोबार में अनिल तिवारी ने कार्यभार संभाला।</p>
<p>हालांकि, पार्टी के तीन सबसे महत्वपूर्ण गढ़ों- उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और गुजरात में भाजपा अभी तक नए राज्य प्रमुखों पर आम सहमति नहीं बना पाई है। ये देरी आकस्मिक नहीं है। तीनों राज्यों में आंतरिक गुटबाजी और रणनीतिक दांव अधिक हैं। संघ कथित तौर पर गहरी वैचारिक नींव वाले उम्मीदवारों पर जोर दे रहा है, जबकि राज्य के नेता राजनीतिक रूप से सुविधाजनक नामों की पैरवी कर रहे हैं। पुरानी प्रवृत्ति और नए अनुशासन के बीच संघर्ष के कारण इन राज्यों में अभी भी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। जाहिर है, भाजपा ने आरएसएस से विभिन्न राज्य इकाइयों में संगठन मंत्री (महासचिव-संगठन) के रूप में 14 पूर्णकालिक प्रचारकों को नियुक्त करने के लिए कहा है। संगठन मंत्रियों के लिए इस नए प्रयास को व्यापक संगठनात्मक कसावट के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-9.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-9.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-6921" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-9.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-9-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-9-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-9-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-9-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p><strong>आंतरिक सूत्रों का कहना है कि एकीकरण का यह चरण इस बात को रेखांकित करता है कि भाजपा अब संघ की प्राथमिकताओं के साथ कितनी निकटता से जुड़ी हुई है। भले ही मोदी और शाह का प्रभाव अभी भी बहुत ज्यादा है, लेकिन राज्य स्तर की नियुक्तियों में उनकी भूमिका स्पष्ट रूप से कम हो गई है। सूत्रों के अनुसार नया अध्यक्ष कोई स्थायी व्यक्ति नहीं हो सकता। मोदी पहले ही अपने तीसरे कार्यकाल में हैं और भाजपा अपने चरमोत्कर्ष के बाद के चरण में प्रवेश कर रही है, इसलिए अगला पार्टी प्रमुख वह व्यक्ति हो सकता है जिसे 2029 में संगठन का नेतृत्व करने का काम सौंपा गया हो।</strong></p>
<p>अटकलें यह भी बढ़ रही हैं कि यह संगठनात्मक फेरबदल केंद्र में कैबिनेट फेरबदल के साथ हो सकता है। इस विषय पर <strong>वरिष्ठ पत्रकार अभिनन्दन मिश्र</strong> लिखते हैं कि 15 जुलाई या उससे पहले भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति के साथ ही बिहार, पश्चिम बंगाल और असम में विधानसभा चुनावों के मद्देनजर पार्टी के केंद्रीय संगठन में बड़े पैमाने पर फेरबदल होने की संभावना है। </p>
<figure id="attachment_6922" aria-describedby="caption-attachment-6922" style="width: 783px" class="wp-caption alignleft"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/rsz_abhi.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/rsz_abhi.jpg" alt="" width="783" height="605" class="size-full wp-image-6922" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/rsz_abhi.jpg 783w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/rsz_abhi-300x232.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/rsz_abhi-768x593.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 783px) 100vw, 783px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6922" class="wp-caption-text">अभिनन्दन मिश्र</figcaption></figure>
<p>अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, पार्टी स्तर पर ये बदलाव दिखावटी नहीं बल्कि महत्वपूर्ण होने की संभावना है। छह राष्ट्रीय महासचिवों में से कम से कम दो को बदले जाने की संभावना है और ग्यारह राष्ट्रीय सचिवों में से कई को भी हटाया जा सकता है या फिर उनकी जगह नई जिम्मेदारी दी जा सकती है। यह व्यवस्था के भीतर गतिरोध को दूर करने, नए चेहरों के लिए जगह बनाने और उच्च-दांव वाले चुनावों से पहले दिशा-निर्देशों को सही करने के लिए किया जा रहा है। जिन लोगों पर इसका असर पड़ने की संभावना है, उनमें वे नेता भी शामिल हैं जो अपने-अपने राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में थे और जिनके नाम मीडिया में मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा के संभावित प्रतिस्थापन के रूप में सामने आ रहे थे।</p>
<p><strong>अभिनन्दन मिश्र</strong> का कहना है कि इसके साथ ही, मंत्रिस्तरीय प्रदर्शन के आंतरिक आकलन के आधार पर केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल की भी संभावना है। पिछले कई महीनों से शासन का मुख्य काम मुख्य रूप से प्रधानमंत्री मोदी, पीएमओ और कुछ प्रमुख मंत्रालयों के पास रहा है। कई अन्य कमज़ोर पड़ गए हैं &#8211; ख़ास तौर पर काम के निष्पादन के मामले में। सूत्रों ने बताया कि उनके पदों की समीक्षा की गई है और उन्हें कमज़ोर पाया गया है। हटाए गए कुछ मंत्रियों को संगठनात्मक भूमिकाओं में भेजा जाएगा, जबकि कुछ &#8211; ख़ास तौर पर बिहार से &#8211; को आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए कहा जा सकता है, जैसा कि मध्य प्रदेश में किया गया था। बिहार में, राजनीतिक संदर्भ इन बदलावों को और भी महत्वपूर्ण बनाता है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राजनीतिक करियर के अंत के करीब होने के साथ, भाजपा राज्य में प्रमुख ताकत के रूप में उभरने के लिए काम कर रही है।</p>
<p>हालांकि, पार्टी मुख्यमंत्री पद का चेहरा पेश किए बिना चुनाव में उतरेगी। इसके दो मुख्य कारण हैं। पहला, भाजपा के पास वर्तमान में राज्य में कोई ऐसा नेता नहीं है जिसकी पूरे बिहार में मौजूदगी हो या जिसे व्यापक स्वीकार्यता हो और जिसे मुख्यमंत्री के रूप में पेश किया जा सके। दूसरा, और उतना ही महत्वपूर्ण, नीतीश कुमार चुनाव परिणाम घोषित होने तक मुख्यमंत्री बने रहेंगे और भाजपा चुनाव से पहले इस नाजुक व्यवस्था को &#8211; थोड़ा भी &#8211; बदलने के लिए इच्छुक नहीं है। बिहार भाजपा के भीतर भी मंथन चल रहा है। पिछले कुछ सालों में दरकिनार किए गए कई वरिष्ठ नेता आगामी फेरबदल को एक संभावित अवसर के रूप में देख रहे हैं। उनके समर्थकों को उम्मीद है कि नए पार्टी अध्यक्ष के तहत, पहले हाशिए पर धकेले गए कुछ लोगों को फिर से प्रमुखता दी जा सकती है। हालांकि, केंद्रीय पार्टी पदाधिकारियों ने संकेत दिया है कि राज्य में वर्तमान में प्रमुख लोगों में से कुछ को हटाया भी जा सकता है। अगर ऐसा होता है, तो उन्हें हटाया जाना मौजूदा निर्णयों के पैटर्न के अनुरूप होगा।</p>
<figure id="attachment_6923" aria-describedby="caption-attachment-6923" style="width: 1024px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-2.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-2.jpg" alt="" width="1024" height="683" class="size-full wp-image-6923" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-2.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-2-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-2-768x512.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6923" class="wp-caption-text">भाजपा मुख्यालय</figcaption></figure>
<p><strong>केंद्रीय नेतृत्व ने हाल के महीनों में वरिष्ठता या दृश्यता के बजाय प्रदर्शन और राजनीतिक उपयोगिता को स्पष्ट प्राथमिकता दी है। संगठन/मंत्रिमंडल में महत्वपूर्ण पद की प्रबल उम्मीद रखने वालों में कुछ ऐसे चेहरे भी हैं, जिन्हें मोदी सरकार के पहले दो कार्यकाल में जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन बाद में उन्हें हटा दिया गया। समग्र राजनीतिक कैलेंडर समयसीमा को और भी तंग कर देता है। प्रधानमंत्री मोदी के 10 जुलाई तक अपने पांच दिवसीय विदेश दौरे से लौटने की उम्मीद है। संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई से 21 अगस्त तक निर्धारित है। अधिकांश अपेक्षित निर्णय &#8211; नए पार्टी अध्यक्ष की नियुक्ति, संगठनात्मक बदलाव और कैबिनेट फेरबदल &#8211; इस तीन सप्ताह की अवधि के भीतर होने की संभावना है। अगस्त के बाद बहुत कम समय बचा है। </strong></p>
<p>यदि बिहार चुनाव अक्टूबर में होते हैं, जैसा कि व्यापक रूप से अनुमान लगाया जा रहा है, तो पार्टी के पास इन बदलावों को लागू करने और उन्हें व्यवस्थित करने के लिए एक संकीर्ण समय होगा। यह उल्लेख करना उचित है कि एक अत्यधिक देरी के बाद, तेजी से आगे बढ़ते हुए, भाजपा ने दस दिनों में अपने संगठनात्मक अभियान के हिस्से के रूप में आठ नए राज्य/इकाई अध्यक्षों की नियुक्ति की है। इनमें महाराष्ट्र शामिल है, जहां मराठा नेता रवींद्र चव्हाण ने कार्यभार संभाला है; पश्चिम बंगाल, जहां अब समिक भट्टाचार्य शीर्ष पर हैं; आंध्र प्रदेश, जहां पी.वी.एन. माधव ने डी. पुरंदेश्वरी का स्थान लिया है; और तेलंगाना, जहां एन. रामचंदर राव ने जी. किशन रेड्डी का स्थान लिया है। मध्य प्रदेश में, वी.डी. शर्मा की जगह हेमंत खंडेलवाल को नया प्रमुख नियुक्त किया गया। पार्टी ने डॉ. के. बेचुआ को मिजोरम का अध्यक्ष और वी.पी. रामलिंगम को पुडुचेरी का अध्यक्ष नियुक्त किया। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में, अनिल तिवारी को नए पार्टी अध्यक्ष के रूप में प्रभार दिया गया। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि क्या भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम को अंतिम रूप देने से पहले उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, हरियाणा, ओडिशा और गुजरात में नए प्रमुखों की नियुक्ति करेगी।</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/politics/bjp-has-got-a-new-president-not-a-permanent-one-but-an-immediate-one">भाजपा को नया अध्यक्ष&#8217; मिल गया है, &#8216;स्थायी&#8217; नहीं, &#8216;तत्काल के लिए&#8217;, क्योंकि &#8216;जग घूमेया थारे जैसा ना कोई 👁 &#8216;नड्डा&#8217;</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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