नई दिल्ली: भारत द्वारा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के मद्दे नजर भारत में अमेरिकी दूतावास और वाणिज्य दूतावास अपने वेबसाइट पर भारत यात्रा कर रहे अपने नागरिकों को ‘सचेत’ किया है। चेतावनी में अमेरिकी दूतावास ने अपने नागरिकों से कहा है कि वे जम्मू और कश्मीर की यात्रा करने से बचें। सुरक्षा अपडेट प्राप्त करने के लिए स्मार्ट ट्रैवलर एनरोलमेंट प्रोग्राम (STEP) में नामांकन अवश्य करा लें। चेतावनी में यह भी कहा है कि अपनी सुरक्षा के बारे में दोस्तों और परिवार को सूचित अवश्य करें, साथ ही, यह सुनिश्चित अवश्य करें कि आपका पासपोर्ट यात्रा के लिए वैध है।
नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास, मुंबई में अमेरिकी महावाणिज्य दूतावास, चेन्नई में अमेरिकी महावाणिज्य दूतावास, हैदराबाद में अमेरिकी महावाणिज्य दूतावास, कोलकाता में अमेरिकी महावाणिज्य दूतावास और राज्य विभाग – वाणिज्य दूतावास मामले में, सभी को प्रेषित ‘सुरक्षा चेतावनी’ में दूतावास ने कहा है कि “भारत यात्रा परामर्श में दी गई सलाह के अनुसार, अमेरिकी नागरिकों को जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश की यात्रा करने से बचना चाहिए। जैसा कि 23 अप्रैल, 2025 सुरक्षा अलर्ट में कहा गया है, अमेरिकी सरकार के कर्मियों को जम्मू और कश्मीर की यात्रा करने से प्रतिबंधित किया गया है। चेतावनी में यह उद्धृत किया गया है कि वैसे ‘अमेरिकी दूतावास और सभी वाणिज्य दूतावास नियमित व्यवसाय के लिए खुले रहेंगे, लेकिन ‘भारत भर में उड़ानों में व्यवधान की संभावना है।’
उधर, आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में नौ आतंकी ठिकानों पर भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा किए गए हमलों के लिए “ऑपरेशन सिंदूर” शब्द चुना था। उन्होंने बताया कि आतंकवादियों द्वारा 26 नागरिकों की हत्या किए जाने और उनमें से कई पीड़ितों की पत्नियां इस त्रासदी का चेहरा बन गईं, इसलिए जवाबी कार्रवाई के लिए “ऑपरेशन सिंदूर” नाम उपयुक्त माना गया। भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में नौ आतंकी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए, जिनमें जैश-ए-मोहम्मद का गढ़ बहावलपुर और मुरीदके में लश्कर-ए-तैयबा का ठिकाना शामिल है।
भारत सरकार के पत्र सूचना कार्यालय द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, “भारतीय सशस्त्र बलों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया, जिसके तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी बुनियादी ढांचे पर हमला किया गया, जहां से भारत के खिलाफ आतंकवादी हमलों की योजना बनाई गई और उन्हें निर्देशित किया गया। कुल मिलाकर, नौ साइटों को लक्षित किया गया है। हमारी कार्रवाई केंद्रित, नपी-तुली और गैर-बढ़ी हुई प्रकृति की रही है। किसी भी पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान को निशाना नहीं बनाया गया है। भारत ने लक्ष्यों के चयन और निष्पादन के तरीके में काफी संयम दिखाया है। ये कदम पहलगाम में हुए बर्बर आतंकवादी हमले के बाद उठाए गए हैं जिसमें 25 भारतीय और एक नेपाली नागरिक की हत्या कर दी गई थी। हम इस प्रतिबद्धता पर खरे उतर रहे हैं कि इस हमले के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।”
भारत की इस सर्जिकल स्ट्राइक के बाद देश में सुरक्षा अलर्ट जारी कर दिया गया है, खासकर पंजाब और जम्मू-कश्मीर जैसे सीमावर्ती राज्यों में। सुरक्षा एजेंसियां और खुफिया विभाग लगातार हालात पर नजर रखे हुए हैं। पंजाब और जम्मू-कश्मीर में सीमा सुरक्षा बल और अन्य केंद्रीय बलों को तैनात कर दिया गया है। सेना को आवश्यकतानुसार त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।पठानकोट जिला प्रशासन ने सभी स्कूलों को अगले 72 घंटों तक बंद रखने का आदेश दिया है। इसी प्रकार जम्मू, सांबा, कठुआ, राजौरी और पुंछ जिलों में भी सभी शैक्षणिक संस्थानों को एहतियात के तौर पर बंद किया गया है। सुरक्षा कारणों के चलते कई एयरपोर्ट्स पर फ्लाइट्स को रद्द कर दिया गया है। एयर इंडिया और स्पाइसजेट सहित कई एयरलाइनों ने जम्मू, श्रीनगर, लेह, जोधपुर, अमृतसर, भुज, जामनगर, चंडीगढ़ और राजकोट से आने-जाने वाली उड़ानों को रद्द कर दिया है। स्पाइसजेट ने जानकारी दी कि धर्मशाला, जम्मू, श्रीनगर और लेह के एयरपोर्ट अगले आदेश तक बंद रहेंगे।
उधर, दिल्ली पुलिस ने बुधवार को ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आतंकी ठिकानों पर भारत के हमले के बाद पूरे शहर में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। तीनों रक्षा बलों के मुख्यालयों, अर्धसैनिक प्रतिष्ठानों और अन्य सरकारी कार्यालयों के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है। नई दिल्ली जिले में रणनीतिक स्थानों पर अर्धसैनिक और स्थानीय पुलिस के साथ-साथ SWAT कमांडो सहित सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। स्थानीय पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों को दक्षिण दिल्ली के सीजीओ कॉम्प्लेक्स में भी तैनात किया गया है। सभी पुलिस उपायुक्तों को अलर्ट रहने और नागरिक सुरक्षा, दिल्ली अग्निशमन सेवा और अन्य सरकारी अधिकारियों के पूर्ण सहयोग से मॉक ड्रिल अभ्यास करने के लिए कहा गया है।
बुधवार देर रात भारतीय सेनाओं ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाकर पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में नौ आतंकी ठिकानों पर हमला किया। इसमें करीब 100 आतंकियों के मारे जाने की खबर है। ऑपरेशन सिंदूर के लिए जिन लक्ष्यों को चुना उनमें से चार पाकिस्तान में और पांच पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हैं। भारत ने इसी तरह का हमला फरवरी 2019 में उस समय किया था, जब जम्मू कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के एक काफिले को निशाना बनाया गया था। इस हमले का बदला लेने के लिए भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के बालाकोट में हमला कर आतंक के ठिकानों को तबाह कर दिया था। उस ऑपरेशन को नाम दिया गया था, ‘ऑपरेशन बंदर’।
ज्ञातव्य हो कि 22 अप्रैल 2025 को कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर आतंकी हमला हुआ। उसमें 25 पर्यटकों और एक नेपाली नागरिक की जान गई थी। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट कर दिया था कि भारत इसका जवाब देगा। इसके बाद 29 अप्रैल को सेना के तीनों प्रमुखों, सीडीएस और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार समेत वरिष्ठ मंत्रियों के साथ हुई बैठक में भी प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का जवाब किस तरह होगा और कब होगा, यह तय करने के लिए सेना को खुली छूट दी गई है। इसके बाद यह तय हो गया था कि भारत जल्द कार्रवाई करेगा।जम्मू कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी 2019 की शाम को सीआरपीएफ के एक काफिले को श्रीनगर-जम्मू हाईवे पर आतंकी हमला हुआ था। इस काफिले की 78 बसों में करीब 2500 जवान थे। इस हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे।
साल 1971 के बाद यह पहली बार था, जब भारतीय वायुसेना पाकिस्तान में हवाई हमला करने जा रही थी। वायु सेना ने हवाई हमले के लिए बालाकोट का चयन किया था। कनहर नदी के तट पर बसा बालाकोट पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के मनशेरा जिले में है। यह लाइन ऑफ कंट्रोल से करीब 50 किलोमीटर दूर है। वहां पुलवामा हमले की जिम्मेदारी लेने वाले जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर का करीबी यूसुफ अजहर रहता था जो तालीम-उल-कुरान नाम के मदरसे की आड़ में आतंक की फैक्ट्री चलाता था।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर भारत ने कहा है, ”इस ऑपरेशन में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ढांचे को निशाना बनाया गया है, जहां से भारत पर आतंकी हमलों की योजना बनाई गई थी और उन्हें अंजाम दिया गया था। सभी नौ ठिकानों पर हमले सफल रहे। ऑपरेशन सिंदूर को थल और वायुसेना ने मिलकर अंजाम दिया। पाकिस्तान में जिन नौ ठिकानों को निशाना बनाया गया उनमें बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद का मुख्यालय और मुरीदके में लश्कर-ए-तैयबा का मुख्यालय शामिल है। ये दोनों पाकिस्तान के पंजाब में हैं। वायुसेना ने जिन ठिकानों को निशाना बनाया उनमें बहावलपुर का मरकज सुभान अल्लाह, तेहरा कलां का सरजल, कोटली का मरकज अब्बास और मुजफ्फराबाद का सैयदना बिलाल कैंप शामिल है।

बहरहाल, वरिष्ठ पत्रकार के विक्रम राव कहते हैं कि पाकिस्तानी ठिकानों पर भारतीय थल सेना के हमलों का विवरण आज (07 मई 2025) राष्ट्रीय मीडिया को कर्नल सोफिया ताजुद्दीन कुरैशी ने दिया तो विश्व को अचरज तो हुआ होगा। आखिर सोफिया ही प्रवक्ता क्यों थीं। ? हालांकि उनके साथ वायु सेना की विंग कमांडर व्योमिका सिंह भी थीं। दोनों की जोड़ी बड़ी अद्भुत रही।
सोफिया कुरैश वंश की हैं। इसमें पैगंबर-ए-इस्लाम मोहम्मद साहब भी जन्मे थे। सोफिया के पति मेजर ताजुद्दीन कुरैशी इन्फेंट्री में अधिकारी हैं। चेन्नई सैनिक अकादमी में प्रशिक्षित हैं। साल 2016 में सोफिया ने ‘एक्सरसाइज फोर्स 18’ में भारतीय दल का नेतृत्व किया था, जो भारत की ओर से आयोजित सबसे बड़ा विदेशी सैन्य अभ्यास था। इस सैन्य अभ्यास में भाग लेने 18 देश के सैन्य दलों में कर्नल सोफिया कुरैशी एकमात्र महिला कमांडर थीं। वडोदरा (गुजरात) में विज्ञान (जैव रसायन) से स्नातकोत्तर डिग्री का चुकी सोफिया के दादा भी भारतीय सेना में थे। कर्नल सोफिया कुरैशी ने संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों के तहत छह सालों तक सेवाएं दी हैं। सोफिया ने साल 2006 में कांगो में संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना मिशन में सैन्य पर्यवेक्षक के रूप में सेवा दी।
मीडिया से वार्ता करते वायुसेना से विंग कमांडर व्योमिका सिंह थीं। वे हेलीकॉप्टर पायलट हैं। विंग कमांडर व्योमिका उच्च जोखिम वाले इलाकों में अनुभव रखने वाली पायलट हैं। उन्होंने जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर सहित कुछ सबसे कठिन इलाकों में चेतक और चीता जैसे हेलीकॉप्टरों का संचालन किया है। उन्होंने नवंबर 2020 में अरुणाचल प्रदेश में उनके द्वारा संचालित प्रमुख अभियानों में से एक था। ये अभियान ऊंचाई, कठिन मौसम और दूरदराज के स्थानों पर किए गए थे, जहां जीवन बचाने के लिए हवाई सहायता महत्वपूर्ण है। इन दोनों प्रवक्ताओं का महिला होना एक संदेश था देश और दुनिया को कि पूरा भारत एकजुट है।आज के प्रतिशोधात्मक हमले का नाम नरेंद्र मोदी द्वारा “सिंदूर” रखना भी कम दिलचस्प नहीं है।
जब 22 अप्रैल को यह हमला पहलगाम में हुआ था तो कुछ महिलाओं के सिंदूर मिट गए थे। विधवा हो गईं थीं। यही कारण रहा प्रधानमंत्री द्वारा इस पूरे हमले की कार्यवाही का नामकरण किया, ऑपरेशन “सिंदूर”। इस बार के पाकिस्तानी हमले पर तीव्र कार्यवाही इसलिए हुई क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थे। याद कीजिए (24 दिसंबर 1999) भारत का विमान हाईजैक करके आतंकी कंधार ले गए थे। तब प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई थे। भयभीत होकर तीनों आतंकियों को रिहा कर दिया था। जिसमें मसूद अजहर शामिल था। आज सुबह के हमले में जैश-ए-मोहम्मद का संस्थापक इस मसूद का पूरा परिवार बम से उड़ा दिया गया। अर्थात अटल बिहारी वाजपेई की भयंकर भूल का बदला आज ले लिया गया है।
मगर अटलजी की एक और भूल का खामियाजा लेना बाकी है। जब अटलजी प्रधानमंत्री थे तो भारत के दिल्ली में संसद भवन पर 13 दिसंबर 2001 को आतंकवादी हमला हुआ था। यह हमला करने वाला लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद नामक आतंकवादी संगठन के लोग थे। इस हमले में कुल 14 लोगों की जानें गई थी। इस भाजपाई प्रधानमंत्री ने सेना को आदेश दिया था कि पाकिस्तानी सीमा पर मुस्तैदी से खड़े रहो। मगर अटलजी आदेश देना भूल गए। सीमा पर भारतीय सेना के साथ कई दिनों तक बड़ा वीभत्स मजाक चलता रहा। कांधार और संसद पर हमले वाली घटनाओं पर अपने लिबलिबीपन के बावजूद अटल बिहारी वाजपेई प्रधानमंत्री बने रहे।
ऐसा ही वाकया कांग्रेसी प्रधानमंत्री सरदार मनमोहन सिंह के राज में हुआ था। तब एक पाकिस्तानी आतंकी गिरोह ने (26-29 नवंबर 2008) मुंबई में 166 भारतीयों को मार डाला था और 300 को घायल कर दिया था। अजमल कसाब इस प्रकरण का खलनायक था। तब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के लिजलिजेपन से मुंबई के कुछ आतंकी बचे रहे, सिवाय कसाब के। उनके गृहमंत्री शिवराज पाटिल के पास दिन में चार बार सूट बदलने का टाइम तो था। मगर मुंबई के आतंकियों के खिलाफ कार्यवाही पर शीघ्रता की सोच या जरूरत की भावना नहीं थी। पर वाह रे नरेंद्र मोदी ! जो कहा वो किया। इसीलिए उन्हें देश का सलाम। राजनाथ सिंह ने भारतीय सेना की समता अंजनी पुत्र बजरंगबली से की जिन्होंने अपनी पूंछ से लंका जला दी थी। एक बात विपक्षी राजनेताओं के बारे में। वे श्रेय सेना को देते हैं। मगर भूल गए सेना को आदेश कौन देता है ? इतनी वैचारिक तुच्छता और डाह मोदी से ? देश कभी भी माफ नहीं करेगा।



















Bahut sahi aur satik baat likhe hai Sir. Ek baat bhut ajib lagta hai ki manniye pradhan mantri jee dwara diye gaye aadesh ko Bharat ke dino sainik dwara itne satik tarike se operation sindur ke roop men wahan ke aatankbadi se badla lena kabile tariff hai. Sabne saraha lekin yahan baithe padhe likhe bhi (akalmand) ko PM Narendra Modi jee aur RSS se itni chidh hai ki ek sabda bhi sammnjanak nahin likhe. Unke soch ko dhikaar hai 🙁🙏
Bahut sahi aur satik baat likhe hai Sir. Ek baat bhut ajib lagta hai ki manniye pradhan mantri jee dwara diye gaye aadesh ko Bharat ke dino sainik dwara itne satik tarike se operation sindur ke roop men wahan ke aatankbadi se badla lena kabile tariff hai. Sabne saraha lekin yahan baithe padhe likhe bhi (akalmand) ko PM Narendra Modi jee aur RSS se itni chidh hai ki ek sabda bhi sammnjanak nahin likhe. Unke soch ko dhikaar hai 🙏