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	<title>women Archives - आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</title>
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	<description>आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</description>
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		<title>न्याय, गरिमा और आर्थिक शक्ति​ विषय के साथ ​भारत में विधवाओं को हमें सशक्त करना होगा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 14 May 2026 02:54:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
		<category><![CDATA[India]]></category>
		<category><![CDATA[social justice]]></category>
		<category><![CDATA[widowhood]]></category>
		<category><![CDATA[widows]]></category>
		<category><![CDATA[women]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली: जनवरी को छोड़े। फरवरी महीने के 14 तारीख को जिस कदर विश्व के लोग &#8211; महिला, पुरुष, बच्चे &#8211; &#8216;प्यार का त्यौहार&#8217; (वेलेंटाइंस डे) मनाते हैं, मई के महीने में दूसरे रविवार को वैश्विक स्तर पर &#8216;मातृ दिवस&#8217; मनाते हैं, इसके अलावे संयुक्त राष्ट्र के निर्णयानुसार प्रत्येक वर्ष 365 दिनों में 218 दिनों [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली: जनवरी को छोड़े। फरवरी महीने के 14 तारीख को जिस कदर विश्व के लोग &#8211; महिला, पुरुष, बच्चे &#8211; &#8216;प्यार का त्यौहार&#8217; (वेलेंटाइंस डे) मनाते हैं, मई के महीने में दूसरे रविवार को वैश्विक स्तर पर &#8216;मातृ दिवस&#8217; मनाते हैं, इसके अलावे संयुक्त राष्ट्र के निर्णयानुसार प्रत्येक वर्ष 365 दिनों में 218 दिनों को मानव जीवन, इतिहास, पर्यावरण और अन्य के नाम पर मानते हैं ताकि विश्व में जागरूकता बनी रहे; क्या &#8216;विधवा दिवस&#8217; के प्रति हम जागरूक हो पाए हैं? शायद नहीं। आइये, आज समय आ गया है कि हमें भारत की नहीं, वैश्विक स्तर पर &#8216;विधवाओं&#8217;, जो सिर्फ पति हीन होती हैं, संतानहीन नहीं; के नाम पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित एक भारतीय की पहल को भारत के 28 राज्यों, आठ केंद्र शासित प्रदेशों के2,67,000 ग्राम पंचायतों में रहने वाले लोगों में जागरूकता फैलाएं, ताकि जीवन के अंतिम वसंत में एक पति हीन माँ, यानी विधवा, सम्मान के साथ जी सके।</strong></p>
<p><a href="https://youtu.be/WyEJFEeLH3o">#लूम्बा #फाउंडेशन के संस्थापक और #लंदन के #हॉउस #ऑफ़ #लॉर्ड्स के सदस्य #लार्ड #राज #लुम्बा</a></p>
<blockquote><p>&#8220;न्याय, गरिमा और आर्थिक शक्ति&#8221; &#8211; 23 जून, 2026 को संपन्न होने वाले अंतरराष्ट्रीय विधवा दिवस का विषय (थीम) है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत में औसतन 14 महिलाओं में एक विधवा होने के बाद भी, आज आज़ादी के 80 साल तक हम इन विधवाओं को सच में न्याय, गरिमा दे पाए या उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत कर पाए जिससे वे परिवार और समाज के सामने बिना अपना हाथ फैलाये अपने जीवन की शेष साँसे ले सकें? अगर सरकारी स्तर पर देखें तो प्रश्न उठना लाजिमी है। लेकिन जब निजी क्षेत्र के लोकोपकारकों को देखते हैं तो ऐसा संभव कर पाना &#8216;कठिन&#8217; नहीं दीखता।</p></blockquote>
<p>अगर वैश्विक स्टार पर देखें तो विश्व के किसी भी देशों की तुलना में भारत में विधवाओं की संख्या सबसे अधिक है। इतना ही नहीं, विश्व के अन्य देशों में पति हीन महिलाओं की जो स्थिति है, चाहे वह सामाजिक हो, पारिवारिक हो, शैक्षिक हो, आर्थिक हो, न्यायिक हो, की तुलना में भारत की विधवाओं की स्थिति सबसे अधिक दयनीय है। </p>
<figure id="attachment_7746" aria-describedby="caption-attachment-7746" style="width: 2033px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/05/W-6-1.jpg"><img fetchpriority="high" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/05/W-6-1.jpg" alt="" width="2033" height="1313" class="size-full wp-image-7746" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/05/W-6-1.jpg 2033w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/05/W-6-1-300x194.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/05/W-6-1-1024x661.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/05/W-6-1-768x496.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/05/W-6-1-1536x992.jpg 1536w" sizes="(max-width: 2033px) 100vw, 2033px" /></a><figcaption id="caption-attachment-7746" class="wp-caption-text">लार्ड राज लूम्बा और उनकी पत्नी</figcaption></figure>
<p><strong>आर्यावर्तइंडियननेशन(डॉट)कॉम</strong> से बात करते हुए वैश्विक स्तर पर स्थापित <strong>लूम्बा फाउंडेशन के संस्थापक और लन्दन के हॉउस ऑफ़ लॉर्ड्स के सदस्य राज लूम्बा </strong>का कहना है: &#8220;भारत की विधवाओं की दयनीय स्थिति को जड़ से मिटाने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं और कोशिश है कि हम भारत के सभी राज्यों और केंद्र शाषित प्रदेशों में स्थित लगभग 2,67,000 ग्राम पंचायतों के माध्यम से प्रत्येक घरों में रहने वाली विधवाओं तक पहुंचूं और उनके जीवन के अंतिम वसंत में ही सही, उन्हें जीने और हंसने का वजह दे सकूँ। मैं उनके मृत पतियों को जीवित नहीं कर सकता हूँ, लेकिन अपनी सोच से, अपने क्रियाकलाप से उन्हें इस उम्र में भी अर्थ से सक्षम बना सका हूँ कि वे शेष जीवन जी सकें।&#8221;</p>
<p>अंतर्राष्ट्रीय विधवा दिवस, हर साल 23 जून को मनाया जाता है। यह संयुक्त राष्ट्र द्वारा स्थापित एक विशेष दिन है। यह दिन लाखों विधवाओं और उनके आश्रितों द्वारा झेली जा रही गरीबी और अन्याय को दूर करने के लिए समर्पित है। संयुक्त राष्ट्र जनगणना ब्यूरो का कहना है कि अमेरिका में 13 मिलियन से ज्यादा ऐसे लोग हैं जिन्होंने अपने जीवनसाथी को खो दिया है, और इनमें से 11 मिलियन से ज्यादा महिलाएं हैं। अपने जीवनसाथी को खोना और फिर अकेला जीवन जीना कभी भी आसान नहीं होता। इसलिए हमारा, समाज का, परिवार का यह दायित्व है कि हम दुनिया भर की विधवाओं की स्थिति के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए एक कदम आगे बढ़ाएँ।</p>
<p><strong>वैश्विक स्तर पर, करीब 258 महिलाएं विधवा है और इसमें भारत का योगदान अधिक का है। आज देश की विधवाएं कई तरह की मुश्किलों का सामना कर रही हैं, और उन्हें ठीक से समझने और उनका समाधान करने के लिए यह बहुत ज़रूरी है कि हम उन इलाकों से जानकारी हासिल करें और समाधान का उपाय ढूंढें।</strong> </p>
<figure id="attachment_7747" aria-describedby="caption-attachment-7747" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/05/W-4.jpg"><img decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/05/W-4.jpg" alt="" width="2047" height="1356" class="size-full wp-image-7747" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/05/W-4.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/05/W-4-300x199.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/05/W-4-1024x678.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/05/W-4-768x509.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/05/W-4-1536x1017.jpg 1536w" sizes="(max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-7747" class="wp-caption-text">भारत की एक विधवा। तस्वीर: शिवनाथ झा</figcaption></figure>
<blockquote><p>लार्ड राज लूम्बा कहते हैं: &#8220;हमारी कोशिश है कि हम अपने स्तर पर लाखों ऐसी विधवाओं के दरवाजे तक पहुंचें और उनकी समस्याओं का समाधान करें। हमारी कोशिश यह भी है कि भारत के राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों में पदस्थापित करीब 800 से अधिक जिलाधिकारियों और हज़ारों अन्य अधिकारियों के माध्यम से, प्रदेशों के समाज कल्याण मंत्रालयों, बाल विकास मंत्रालयों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में, प्रखंडों में, अंचलों में रह रही ऐसी माताओं को ढूंढे और फिर एक स्थायी रूप से उन्हें सामाजिक न्याय के साथ-साथ गरिमा के साथ जीवन जीने का मार्ग प्रशस्त करें। मेरा मानना है कि मानवीयता के लिए यह कार्य सबसे बड़ा समर्पण होगा।&#8221;</p></blockquote>
<p>ज्ञातव्य हो कि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 दिसंबर, 2010 को 23 जून को आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय विधवा दिवस के रूप में अपनाया। हालांकि, अंतर्राष्ट्रीय विधवा दिवस 2005 से ही लूम्बा फाउंडेशन द्वारा मनाया जा रहा था। राजिंदर लूम्बा, जो यूनाइटेड किंगडम में हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स के सदस्य हैं, ने विकासशील देशों में विधवा होने पर महिलाओं को जिन समस्याओं का सामना करना पड़ता है, उन पर काम करने के लिए लूम्बा फाउंडेशन की स्थापना की। उन्हें इस फाउंडेशन को शुरू करने की प्रेरणा तब मिली, जब उन्होंने देखा कि उनकी माँ को 1954 में 37 साल की उम्र में विधवा होने के बाद किन-किन मुश्किलों से गुज़रना पड़ा था। </p>
<figure id="attachment_7748" aria-describedby="caption-attachment-7748" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/05/W-5.jpg"><img decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/05/W-5.jpg" alt="" width="2047" height="1356" class="size-full wp-image-7748" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/05/W-5.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/05/W-5-300x199.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/05/W-5-1024x678.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/05/W-5-768x509.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/05/W-5-1536x1017.jpg 1536w" sizes="(max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-7748" class="wp-caption-text">प्रेरणास्रोत: ​लार्ड राज लूम्बा की माँ श्रीमती पुष्पा वती लुम्बा (दिवंगत)</figcaption></figure>
<p>2005 में शुरू होने के बाद, लूम्बा फाउंडेशन ने संयुक्त राष्ट्र से मान्यता प्राप्त करने के लिए पाँच साल का एक वैश्विक अभियान चलाया। इसके परिणामस्वरूप, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सर्वसम्मति से अंतरराष्ट्रीय विधवा दिवस को एक वार्षिक &#8216;वैश्विक कार्य दिवस&#8217; के रूप में अपनाने का निर्णय लिया। चूंकि किसी भी रूप में किसी प्रियजन को खोना कठिन और दुखद होता है, इसलिए इस दिन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दुनिया भर की विधवाओं को उस बेहद कठिन समय से गुज़रने के लिए ज़रूरी सहायता मिले। क्योंकि कई देशों में, लोग—विशेषकर महिलाएँ जो विधवा हो जाती हैं—ऐसी स्थितियों में फँस जाती हैं जहाँ उन्हें विरासत के अपने अधिकार से वंचित कर दिया जाता है। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में कुछ ऐसी संस्कृतियाँ भी हैं, जहाँ विधवाओं को शापित माना जाता है या उन्हें जादू-टोने से जोड़कर देखा जाता है। यह गलत सोच उन्हें उनके समुदाय से, और यहाँ तक कि उनके अपने बच्चों से भी अलग कर देती है।</p>
<p><strong>लार्ड लूम्बा कहते हैं: &#8220;हमने यह समझा कि विधवा होना न केवल एक व्यक्तिगत दुख है, बल्कि यह एक वैश्विक मानवाधिकार का मुद्दा भी है &#8211; एक ऐसा मुद्दा जो गहरी जड़ों वाली सांस्कृतिक प्रथाओं, कानूनी बहिष्कार और सामाजिक उपेक्षा के कारण बना हुआ है। इस सच्चाई को बदलने के लिए अंतर्राष्ट्रीय जागरूकता, राजनीतिक इच्छाशक्ति और सामूहिक प्रयास की जरूरत है। इस बदलाव की शुरुआत करने के लिए, फाउंडेशन ने 26 मई 2005 को अंतर्राष्ट्रीय विधवा दिवस की शुरुआत की, और 23 जून &#8211; जिस तारीख को 1954 में मेरी माँ, श्रीमती पुष्पा वती लूम्बा विधवा हुई थीं &#8211; को वैश्विक कार्रवाई दिवस के रूप में घोषित किया। हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स में घोषित इस अभियान का उद्देश्य लाखों विधवाओं के अनदेखे दुखों को दुनिया के सामने लाना और दुनिया भर की सरकारों, गैर-सरकारी संस्थाओं, व्यवसायों और समुदायों को इस दिशा में सक्रिय करना था।&#8221;</strong></p>
<figure id="attachment_7750" aria-describedby="caption-attachment-7750" style="width: 2033px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/05/W-8.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/05/W-8.jpg" alt="" width="2033" height="1313" class="size-full wp-image-7750" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/05/W-8.jpg 2033w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/05/W-8-300x194.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/05/W-8-1024x661.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/05/W-8-768x496.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/05/W-8-1536x992.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2033px) 100vw, 2033px" /></a><figcaption id="caption-attachment-7750" class="wp-caption-text">भारत की एक विधवा। तस्वीर: शिवनाथ झा</figcaption></figure>
<p>लार्ड लूम्बा कहते हैं: &#8220;अपनी शुरुआत से ही, अंतर्राष्ट्रीय विधवा दिवस ने ज़ोर पकड़ा। 2005 में पहली बार यह दिवस लंदन, भारत, नेपाल, श्रीलंका, युगांडा और दक्षिण अफ्रीका में मनाया गया। अगले कुछ वर्षों में, फाउंडेशन ने अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और जन-जागरूकता अभियान आयोजित किए, जिनमें कोफी अन्नान और सीनेटर हिलेरी क्लिंटन से लेकर योको ओनो, प्रिंस ऑफ़ वेल्स और चेरी ब्लेयर जैसी वैश्विक हस्तियों ने हिस्सा लिया। 22 दिसंबर 2010 को, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सर्वसम्मति से अंतरराष्ट्रीय विधवा दिवस को संयुक्त राष्ट्र के एक आधिकारिक वैश्विक दिवस के रूप में मान्यता दे दी &#8211; यह एक असाधारण परिणाम था जो फाउंडेशन के दृढ़ संकल्प और गैबॉन के नेतृत्व में सदस्य देशों के समर्थन से संभव हुआ। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, हरदीप सिंह पुरी का अटूट समर्थन अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने में निर्णायक साबित हुआ।&#8221;</p>
<p><strong>ज्ञातव्य हो कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता प्राप्त पहला अंतर्राष्ट्रीय विधवा दिवस 23 जून 2011 को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में मनाया गया। इस अवसर पर संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष नेतृत्व, विभिन्न देशों के मंत्रियों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने लॉर्ड लूम्बा और फाउंडेशन की अध्यक्ष, चेरी ब्लेयर के साथ एक सम्मेलन में हिस्सा लिया, जिसकी अध्यक्षता महासचिव की पत्नी, यू सून-टैक ने की। आज, हर साल 23 जून को, संयुक्त राष्ट्र की महिलाएं, सभी सदस्य देशों के लिए विधवाओं की दुर्दशा पर एक बयान जारी करता है। संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा मान्यता मिलने के बाद से, फाउंडेशन एशिया, अफ्रीका, यूरोप और अमेरिका &#8211; लंदन ब्रिज और ट्राफलगर स्क्वायर से लेकर वाराणसी, नैरोबी और कोलंबो तक &#8211; विभिन्न जगहों पर कार्यक्रमों के माध्यम से दुनिया भर में जागरूकता फैलाने का काम लगातार कर रहा है। जमीनी स्तर के और राष्ट्रीय साझेदार रैलियों, सेमिनारों, व्यावसायिक सशक्तिकरण प्रदर्शनियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ इस दिन को मनाते हैं।</strong></p>
<p>अंतर्राष्ट्रीय विधवा दिवस मनाने का उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र द्वारा इस बात को स्वीकार करना है कि विधवाएँ नीति निर्माताओं की नज़र में अब तक अनदेखी रह गई हैं । नीतियाँ आम नागरिकों, मज़दूरों, बेरोज़गार युवाओं और समाज के अन्य पीड़ितों पर केंद्रित होती हैं; हालांकि, नीति-निर्माण बैठकों में विधवाओं के बारे में विशेष रूप से कोई चर्चा भी नहीं की जाती है। इस तरह के उपेक्षापूर्ण रवैये का मतलब है कि 258 मिलियन से अधिक लोगों के मुद्दे अनसुलझे रखना। यदि देखा जाय तो &#8216;अंतर्राष्ट्रीय विधवा दिवस&#8217; विधवाओं के खिलाफ भेदभाव को समाप्त करने के वैश्विक आंदोलन की धीरे-धीरे आधारशिला बन गया है, लेकिन आज भी जागरूकता की कमी है। </p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/one-in-every-fourteen-women-in-india-is-a-widow">न्याय, गरिमा और आर्थिक शक्ति​ विषय के साथ ​भारत में विधवाओं को हमें सशक्त करना होगा</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>सनद रहे: खेत में काम करने वाली महिला, महिला मतदाताओं का &#8220;हक़&#8221; राजधानी की संभ्रांत महिलाएं न &#8220;खा&#8221; लें प्रधानमंत्री जी &#8230;.</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/women-reservation-law-and-women-of-india</link>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 07 Apr 2026 11:57:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
		<category><![CDATA[illitrate voters]]></category>
		<category><![CDATA[India]]></category>
		<category><![CDATA[village women]]></category>
		<category><![CDATA[women]]></category>
		<category><![CDATA[women reservation law]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>संसद मार्ग, नई दिल्ली: भारत के संसद की ओर से आती सड़क संसद मार्ग जब सरदार बल्लभ भाई पटेल के नाम से अंकित पटेल चौक और पार्लियामेंट थाना को लांघते-फांदते, अपने दाहिने हाथ जयसिंह -II द्वारा निर्मित जंतर-मंतर और बाएं हाथ पार्क होटल से आगे 1929-1933 कालखंड में रोबर्ट रसल्ल के डिजाइन पर निर्मित और कोनॉट [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/women-reservation-law-and-women-of-india">सनद रहे: खेत में काम करने वाली महिला, महिला मतदाताओं का &#8220;हक़&#8221; राजधानी की संभ्रांत महिलाएं न &#8220;खा&#8221; लें प्रधानमंत्री जी &#8230;.</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>संसद मार्ग, नई दिल्ली: भारत के संसद की ओर से आती सड़क संसद मार्ग जब सरदार बल्लभ भाई पटेल के नाम से अंकित पटेल चौक और पार्लियामेंट थाना को लांघते-फांदते, अपने दाहिने हाथ जयसिंह -II द्वारा निर्मित जंतर-मंतर और बाएं हाथ पार्क होटल से आगे 1929-1933 कालखंड में रोबर्ट रसल्ल के डिजाइन पर निर्मित और कोनॉट और स्ट्रैथर्न के प्रथम ड्यूक प्रिंस आर्थर के नाम से अलंकृत कनाट प्लेस के बाहरी घेरा से मिलकर अपना अस्तित्व समाप्त करती है, वहीँ सड़क के दूसरे तरफ मुद्दत से गरीबी रेखा से मीलों दूर रहने वाली दिल्ली की एक महिला मतदाता &#8211; &#8216;महिला आरक्षण विधेयक&#8217; के बारे में नहीं जानती है। </strong></p>
<blockquote><p>लेकिन, संसद के तरफ ऊँगली उठाते सत्तर-वर्षीय महिला, जो मिट्टी को छलनी से छान रही थी, कहती है कि &#8220;क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने बाद देश की किसी महिला को प्रधानमंत्री बनाएंगे जिस तरह श्रीमती इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनी थी, शायद नहीं ।&#8221; वह महिला तो सिर्फ इतना जानती है कि न केवल वह, बल्कि उसके जैसी कई करोड़ महिला, जो दिल्ली सहित, भारत के 28 राज्यों, आठ केंद्र शासित प्रदेशों के तक़रीबन 5,97,608 गांव में रहती है, सिर्फ एक महिला मतदाता है और अपने जीवन के अंतिम सांस तक मतदाता ही रह जाएगी। उसका मानना है कि यहाँ से एक किलोमीटर दूर भारत के संसद में प्रस्तुत महिला आरक्षण कानून का लाभ, देश और राज्य के शहरी इलाकों में रहने वाली &#8220;तथाकथित संभ्रांत&#8221; महिलाएं लाभ उठाकर उन करोड़ों महिला मतदाताओं को &#8220;थम्सअप&#8221; करेगी। </p></blockquote>
<p>बहरहाल, आज 7 अप्रैल है। विश्व के देशों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए आपसी सहयोग एवं मानक विकसित करने का दायित्व निभाते हुए संयुक्त राष्ट्र ने <strong>7 अप्रैल 1948 को विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्थापना किया था</strong>। आज के दिन को भारतीय और वैश्विक इतिहास में &#8216;विश्व स्वास्थ्य दिवस&#8217; के रूप में मनाया जाता है। अगर आप दिल्ली में रहते हैं तो दिल्ली मेट्रो के रास्ते यमुना बैंक और इंद्रप्रस्थ के बीच रिंग रोड पर स्थित विश्व स्वास्थ्य संगठन का कार्यालय अवश्य देखे होंगे। नवनिर्मित गगनचुंबी इमारत के पीछे दिल्ली सचिवालय/आई.टी.ओ. की ओर से आता दुर्गंधित नाला इसी भवन के पीछे से निकलता है, जहाँ कई सौ झुग्गी और जानवर रहते हैं। खुली नाक से इस रास्ते जाना बीमारियों को साथ लाना है। </p>
<p>आज के ही दिन, यानी <strong>7 अप्रैल सन 1818 में अंग्रेजों द्वारा &#8216;बंगाल राज्य कैदी विनियमन अधिनियम&#8217;</strong> लागू किया था। इसका जिक्र यहाँ इसलिए नहीं कर रहा हूँ कि बंगाल में विधानसभा का चुनाव होने जा रहा है। वैसे इसी माह 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में 294 पश्चिम बंगाल विधानसभा के सदस्यों के लिए चुनाव होना निश्चित है। मतगणना और परिणाम की घोषणा 4 मई को होगा। 7 अप्रैल, 1920 को महान सितार वादक, जो बाद में भारतरत्न से भी अलंकृत हुए थे, पंडित रवि शंकर का भी जन्म हुआ था। 7 अप्रैल, 1969 को दुनिया में इंटरनेट का जन्म हुआ था। और आज के ही दिन कोई 199 वर्ष पहले, साल 1827 में महान रसायन शास्त्री जॉन वॉकर ने घर-घर की जरूरत माचिस की बिक्री शुरू की थी। </p>
<p><strong>और आज के ही दिन बिहार की राजधानी पटना की एक विशेष अदालत ने सन 1997 के अंतिम महीना (दिसंबर) के पहले दिन अरवल जिले के लखनपुर और बाथे गांव में 58 दलितों की निर्मम हत्या के मामले में 2010 में 16 दोषियों को फांसी और 10 को उम्र कैद की सजा सुनाई। लेकिन दुर्भाग्य यह रहा कि 2010 में निचली अदालत द्वारा फांसी और उम्र कैद के सजा सुनाने के तीन साल बाद 9 अक्टूबर, 2013 को पटना उच्च न्यायालय के एक फैसले ने सभी 26 अभियुक्तों को बा-इज्जत बरी कर दिया। यानी, 1997 में मारे गए 58 लोगों को कोई न्याय नहीं मिल पाया। उन 58 मृतकों में 27 महिलाएं थी, जिसमें करीब 8 गर्भ से थी, 16 बच्चे थे जिसमें एक की आयु एक वर्ष थी।</strong> </p>
<p>जिन आधारों पर दो न्यायमूर्तियों का पीठ ने अपना फैसला सुनाया, उनकी कानूनी वैधता या अन्यथा को एक तरफ़ रखते हुए पटना उच्च न्यायालय का कहा था कि जिन गवाहों के बयानों के आधार पर सेशंस जज ने आरोपियों को दोषी ठहराया था, वे भरोसेमंद नहीं थे। वह फैसला एक बार फिर गरीबों का गणतंत्र और संवैधानिक लोकतंत्र के सिद्धांतों पर से भरोसा डिगा दिया था। पटना उच्च न्यायालय ने अप्रैल 2012 में बथानी टोला (1996 में ऐसी ही परिस्थितियों में 21 दलितों की हत्या कर दी गई थी) मामले में दिए गए अपने फैसले को ही दोहराया। लक्ष्मणपुर-बाथे और बथानी टोला मामलों में आरोपियों का बरी होना कोई नई बात नहीं थी, आज भी नहीं है। </p>
<figure id="attachment_7577" aria-describedby="caption-attachment-7577" style="width: 1367px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/W-7.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/W-7.jpg" alt="" width="1367" height="2047" class="size-full wp-image-7577" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/W-7.jpg 1367w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/W-7-200x300.jpg 200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/W-7-684x1024.jpg 684w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/W-7-768x1150.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/W-7-1026x1536.jpg 1026w" sizes="auto, (max-width: 1367px) 100vw, 1367px" /></a><figcaption id="caption-attachment-7577" class="wp-caption-text">राष्ट्रपति भवन के पिछले हिस्से के प्रवेश द्वार पर पानी की बोतल बेचती एक वृद्ध महिला मतदाता। तस्वीर: संजय शर्मा</figcaption></figure>
<blockquote><p>आप कहेंगे कि आज के दिन इन बातों का जिक्र क्यों किया जा रहा है। आगामी 16, 17 और 18 अप्रैल को संसद का एक विशेष बैठक आहूत किया गया है। बैठक का उद्देश्य है &#8211; महिलाओं के सशक्तिकरण पर &#8216;विशेष ध्यान&#8217; सुनिश्चित करने के लिए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को लागू करने के उपायों में तेजी लाना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते हैं कि आगामी 2029 के आम चुनावों से इस अधिनियम को लागू कर दिया जाय। इससे बेहतर बात और क्या हो सकती है &#8211; देश की महिलाएं मजबूत हों, सशक्त हों, आत्मनिर्भर हों। </p></blockquote>
<p>लेकिन देश में आज भी महिलाओं की साक्षरता कागज पर 100 अंक में करीब 35 अंक पीछे हैं। देश की कुल महिला आबादी लगभग 715 मिलियन, यानी कुल आबादी में 48.5 फीसदी की भागीदारी है। अगर 2024 के लोकसभा चुनावों में मतदान केंद्रों पर वोट डालने के मामले में महिलाओं की तुलना पुरुषों से करें, तो ये महिलाएं पीछे छोड़ दी। महिलाओं का मतदान प्रतिशत 65.8 रहा था, जबकि पुरुषों का प्रतिशत 65.6 था। हालांकि, संसदीय चुनावों में कुल 8,360 उम्मीदवारों में से केवल 9.5% महिलाएं थीं, और इनमें से जो 74 महिलाएं चुनकर आई, वे लोकसभा की कुल सीटों का 13.6% थीं।लोकसभा के आम चुनावों के इतिहास में यह दूसरी बार है जब महिलाओं की मतदान में भागीदारी पुरुषों की भागीदारी से ज़्यादा रही है। कुल मतदाताओं में महिलाओं की हिस्सेदारी भी 2019 के आम चुनावों के 48.1% से बढ़कर 48.6% हो गई; इसी तरह, प्रति 1,000 पुरुष मतदाताओं पर महिला मतदाताओं की संख्या भी 2019 के चुनावों के 926 से बढ़कर 946 के नए उच्च स्तर पर पहुँच गई। </p>
<p>अगर इस ट्रेंड को आधार मानें तो आगामी 2029 लोकसभा चुनाव में महिला मतदाताओं की संख्या तक़रीबन 37+ करोड़ होगी, जबकि पुरुष मतदाता उस समय में महिलाओं की तुलना में पीछे (36+ करोड़) रहेंगे। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि भारत का लोकतांत्रिक ढांचा, जिसकी अक्सर उसकी संस्थागत मजबूती और चुनावी जीवंतता के लिए तारीफ की जाती है, अपने ग्रामीण इलाकों में एक सूक्ष्म लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव से गुज़र रहा है। इस बदलाव के मूल में ग्रामीण महिलाओं की बढ़ती राजनीतिक दृश्यता और भागीदारी है। इस बात से भी इंकार नहीं कर सकते हैं कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में ग्रामीण महिलाओं का प्रवेश न केवल घरों के भीतर, बल्कि जाति परिषदों, ग्राम सभाओं और पार्टी संरचनाओं के भीतर भी पितृसत्तात्मक सत्ता को चुनौती दे रही हैं।  </p>
<p><strong>लेकिन इस बात से भी इंकार नहीं कर सकते है कि आज भी भारत की कुल आबादी का आधा से अधिक हिस्सा 5,97,608 गांव में रहती है, जहाँ आज भी महिलाओं के घरों में शिक्षा की रोशनी नहीं पहुंची है। इस बात से भी इंकार नहीं कर सकते हैं कि इन महिलाओं को अपने-अपने मताधिकारों का इस्तेमाल करने में स्वतंत्रता है अथवा नहीं, क्या आज भी ये महिलाएं महज मूक दर्शक या आश्रित की भूमिका में हैं, यह भी एक शोध का विषय है। अब 100 अंक में 35 अंक पीछे की अशिक्षित होने का पदक लिए इन महिलाओं को अगर यह कहा जाता है कि भारत के संसद में उनकी भागीदारी के लिए 33 फीसदी स्थान आरक्षित किया गया है &#8211; तो क्या सच में यह आरक्षण इन &#8216;वास्तविक महिलाओं, मतदाताओं के लिए होगा, या शहर की महिलाएं महिला आरक्षण के नाम पर संसद में बैठेंगे? खैर। </strong></p>
<figure id="attachment_7578" aria-describedby="caption-attachment-7578" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/W-2.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/W-2.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-7578" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/W-2.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/W-2-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/W-2-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/W-2-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/W-2-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-7578" class="wp-caption-text">कर्तव्य पथ।  तस्वीर: संजय शर्मा</figcaption></figure>
<p>प्रथम आम चुनाव से लेकर 18 वें लोकसभा के गठन तक कुल 9546 लोकसभा सीटों पर 8766 पुरुषों का आधिपत्य  रहा, जबकि महिलाओं की संख्या मात्र 749 रही। प्रतिशत के हिसाब से यह 8.17% रहा। वैसे विद्वानों, विदुषियों, लेखकों ने अपना-अपना मंतव्य यह देते आये कि महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक निरक्षरता रही है। आम तौर पर, महिला उम्मीदवार पुरुष उम्मीदवारों की तुलना में कम शिक्षित और अनुभवी होती हैं। भारत में, पुरुषों की 82% साक्षरता दर की तुलना में महिलाओं की साक्षरता दर 65% है। इसके अलावे, राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी भी महिलाओं में बताया गया। यह तथ्य कि महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने वाला विधेयक बार-बार पारित नहीं हो पाया, यह दर्शाता है कि कानून निर्माताओं में राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी है। </p>
<p>सभी पार्टियों के घोषणापत्रों में यह उपाय अभी भी शामिल है, लेकिन इसे कभी भी अमल में नहीं लाया गया है। इसके अलावे, (अपवाद को छोड़कर) महिलाएं वास्तव में अपने अधिकार का अनुभव नहीं कर पातीं, क्योंकि उनके निर्णयों में अक्सर उनके पुरुष जीवन साथी या परिवार के अन्य सदस्यों का दखल होता है। पंचायतों में &#8216;सरपंच-पति&#8217; की प्रथा इसका एक स्पष्ट उदाहरण है। महिलाओं को अभी भी शिक्षा, संसाधनों के स्वामित्व और लोगों के दृष्टिकोण के मामले में लैंगिक पूर्वाग्रहों और असमानताओं के रूप में बाधाओं का सामना करना पड़ता है। आत्मविश्वास और वित्त की किल्लत भी महिलाओं को राजनीति में करियर बनाने से रोके रखा। इसके अलावे, श्रम का लैंगिक विभाजन एक ऐसी व्यवस्था रही है, और आज भी है, जिसमें घर की महिलाएं या तो घर के सारे काम खुद करती हैं या घरेलू सहायकों के माध्यम से करवाती हैं। इसका तात्पर्य यह है कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में घर और बच्चों की देखभाल में कहीं अधिक समय देती हैं।</p>
<figure id="attachment_7581" aria-describedby="caption-attachment-7581" style="width: 1367px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/W-8.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/W-8.jpg" alt="" width="1367" height="2047" class="size-full wp-image-7581" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/W-8.jpg 1367w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/W-8-200x300.jpg 200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/W-8-684x1024.jpg 684w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/W-8-768x1150.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/W-8-1026x1536.jpg 1026w" sizes="auto, (max-width: 1367px) 100vw, 1367px" /></a><figcaption id="caption-attachment-7581" class="wp-caption-text">क्या महिला आरक्षण अधिनियम इनके लिए भी है? तस्वीर: संजय शर्मा</figcaption></figure>
<p>यह बताते हुए कि लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देने वाला कानून एनडीए सरकार के शासनकाल में बनाया गया था, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को जम्मू और कश्मीर में 16, 17 और 18 अप्रैल को होने वाली संसद की बैठक का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि इस बैठक में &#8216;नारी शक्ति वंदन अधिनियम&#8217; में संशोधन पारित किया जाना है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के लोगों को एक बैठक के लिए बुलाया गया है और उन्हें उम्मीद है कि वे सरकार की बात &#8220;सुनेंगे&#8221;। उन्होंने कहा कि इसका मकसद 2029 से संसद में महिलाओं का 33% प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि &#8220;यह हमारी ही सरकार है जिसने लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण दिया है, उसका लाभ 2029 के लोकसभा चुनावों से मिलना शुरू हो जाना चाहिए। संसद में महिलाओं की 33% भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए एक कानून बनाने की ज़रूरत है।</p>
<blockquote><p>पहले आम चुनाव में 22 महिलाएं संसद में आयी थी, जबकि दूसरे लोक सभा में 27, तीसरे में 31, चौथे में 29, पांचवें में 28 छठे में 19, सातवें में 28, आठवें में 45, नवमी लोकसभा में 29, दसवीं लोक सभा में 39,  ग्यारहवीं में 40, बारहवीं में 43 तेरहवीं में 52, चौदहवीं लोकसभा में 45, पंद्रहवीं लोकसभा में 58, सोलहवीं में 62, सत्रहवीं में 78 और अठारहवीं लोक सभा में 74 महिलाएं लोकसभा में बैठीं। राज्यसभा की बात अलग है। </p></blockquote>
<p>बहरहाल, 1993 में पास हुए 73वें और 74वें संशोधन, जिन्होंने संविधान में पंचायतों और नगरपालिकाओं को शामिल किया, इन निकायों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित किया था। संविधान में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए, जनसंख्या में उनकी संख्या के अनुपात में सीटें आरक्षित करने का प्रावधान भी है। संविधान में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने का कोई प्रावधान नहीं है। 2015 में, &#8216;भारत में महिलाओं की स्थिति पर रिपोर्ट&#8217; में यह बात सामने आई कि राज्य विधानसभाओं और संसद में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अभी भी बहुत कम है। इसमें यह बताया गया कि राजनीतिक दलों में निर्णय लेने वाले पदों पर महिलाओं की उपस्थिति न के बराबर है। इसमें स्थानीय निकायों, राज्य विधानसभाओं, संसद, मंत्री स्तरों और सरकार के सभी निर्णय लेने वाले निकायों में महिलाओं के लिए कम से कम 50% सीटें आरक्षित करने की सिफारिश की गई थी। &#8216;महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए राष्ट्रीय नीति&#8217; (2001) में कहा गया था कि उच्च विधायी निकायों में आरक्षण पर विचार किया जाएगा।</p>
<p>संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने के लिए संविधान में संशोधन करने वाले विधेयक 1996, 1998, 1999 और 2008 में पेश किए गए थे। पहले तीन विधेयक अपनी-अपनी लोकसभाओं के भंग होने के साथ ही समाप्त हो गए। 2008 का विधेयक राज्यसभा में पेश किया गया और वहीं से पास भी हो गया, लेकिन 15वीं लोकसभा के भंग होने के साथ ही यह भी समाप्त हो गया। 1996 के विधेयक की जांच संसद की एक संयुक्त समिति ने की थी, जबकि 2008 के विधेयक की जांच कार्मिक, लोक शिकायत, कानून और न्याय संबंधी स्थायी समिति ने की थी। दोनों समितियों ने महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने के प्रस्ताव पर सहमति जताई थी। समितियों द्वारा दी गई कुछ सिफारिशों में ये शामिल हैं: (i) सही समय पर अन्य पिछड़े वर्गों की महिलाओं के लिए आरक्षण पर विचार करना, (ii) 15 साल की अवधि के लिए आरक्षण देना और उसके बाद उसकी समीक्षा करना, और (iii) राज्यसभा और राज्य विधान परिषदों में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने के तौर-तरीके तय करना। </p>
<figure id="attachment_7579" aria-describedby="caption-attachment-7579" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/W-1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/W-1.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-7579" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/W-1.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/W-1-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/W-1-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/W-1-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/W-1-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-7579" class="wp-caption-text">क्या महिला आरक्षण अधिनियम इनके लिए भी है? तस्वीर: संजय शर्मा</figcaption></figure>
<p><strong>बहरहाल, नया अधिनियम लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की विधानसभा में महिलाओं के लिए, जहाँ तक संभव हो, सभी सीटों में से एक-तिहाई सीटें आरक्षित करता है। यह लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों पर भी लागू होगा। यह आरक्षण इस बिल के लागू होने के बाद होने वाली जनगणना के प्रकाशित होने के बाद प्रभावी होगा। जनगणना के आधार पर, महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने हेतु परिसीमन किया जाएगा। यह आरक्षण 15 वर्षों की अवधि के लिए प्रदान किया जाएगा। हालांकि, यह तब तक जारी रहेगा जब तक संसद द्वारा बनाए गए किसी कानून द्वारा कोई तारीख निर्धारित नहीं कर दी जाती।</strong></p>
<p>ज्ञातव्य हो कि 2023 में, भारत की संसद ने संविधान (एक सौ छठा संशोधन) अधिनियम, 2023, &#8220;नारी शक्ति वंदन अधिनियम&#8221; पारित किया; जो संघीय ढांचे के सभी स्तरों पर सार्वजनिक जीवन में महिलाओं के समान प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देने की अपनी राष्ट्रीय यात्रा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुआ है। यह ऐतिहासिक कानून संसद के निचले सदन &#8211; लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं (जिसमें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की विधानसभा भी शामिल है) में महिलाओं के लिए कुल सीटों में से एक-तिहाई सीटें बारी-बारी से आरक्षित करता है। इस प्रकार यह सार्वजनिक निर्णय लेने के उच्चतम स्तरों पर राजनीति में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को संस्थागत रूप प्रदान करता है। सरकार ने &#8220;सशक्त पंचायत-नेत्री अभियान&#8221; शुरू किया है। यह एक व्यापक और लक्षित क्षमता-निर्माण पहल है, जिसका उद्देश्य पूरे देश में पंचायती राज संस्थाओं की महिला निर्वाचित प्रतिनिधियों को सशक्त बनाना है। इसका मुख्य ज़ोर उनके नेतृत्व कौशल को निखारने, उनकी निर्णय लेने की क्षमताओं को बढ़ाने और जमीनी स्तर के शासन में उनकी भूमिका को मजबूत करने पर है। </p>
<p>बिल में कहा गया है कि हर परिसीमन प्रक्रिया के बाद आरक्षित सीटें रोटेशन के आधार पर आवंटित की जाएंगी। इसका मतलब है कि लगभग हर 10 साल में रोटेशन होगा, क्योंकि 2026 के बाद हर जनगणना के बाद परिसीमन होना अनिवार्य है। आरक्षित सीटों के रोटेशन से सांसदों को अपने निर्वाचन क्षेत्रों के लिए काम करने का प्रोत्साहन कम हो सकता है, क्योंकि हो सकता है कि वे उस निर्वाचन क्षेत्र से दोबारा चुनाव लड़ने के योग्य न रहें। पंचायती राज मंत्रालय के एक अध्ययन में यह सुझाव दिया गया था कि पंचायत स्तर पर निर्वाचन क्षेत्रों का रोटेशन बंद कर देना चाहिए, क्योंकि लगभग 85% महिलाएं पहली बार चुनी गई थीं और केवल 15% महिलाएं ही दोबारा चुनी जा सकीं, क्योंकि जिन सीटों से वे चुनी गई थीं, उन्हें अनारक्षित कर दिया गया था। </p>
<p><strong>&#8216;महिलाओं के विरुद्ध सभी प्रकार के भेदभाव के उन्मूलन पर कन्वेंशन&#8217; यह प्रावधान करता है कि राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन में महिलाओं के विरुद्ध भेदभाव को समाप्त किया जाना चाहिए। हालांकि भारत इस कन्वेंशन का हस्ताक्षरकर्ता है, फिर भी निर्णय लेने वाले निकायों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व के मामलों में भेदभाव जारी रहा है। पंचायतों में महिलाओं के लिए आरक्षण के प्रभाव के बारे में 2003 के एक अध्ययन से पता चला कि आरक्षण नीति के तहत चुनी गई महिलाएं उन सार्वजनिक वस्तुओं में अधिक निवेश करती हैं जो महिलाओं की चिंताओं से निकटता से जुड़ी होती हैं।</strong></p>
<figure id="attachment_7580" aria-describedby="caption-attachment-7580" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/W-5.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/W-5.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-7580" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/W-5.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/W-5-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/W-5-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/W-5-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/W-5-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-7580" class="wp-caption-text">क्या महिला आरक्षण अधिनियम इनके लिए भी है? तस्वीर: संजय शर्मा</figcaption></figure>
<p>आरक्षण नीति के विरोधी यह तर्क देते हैं कि महिलाओं के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र न केवल उनके दृष्टिकोण को संकीर्ण करेंगे, बल्कि असमान स्थिति को भी बनाए रखेंगे, क्योंकि उन्हें योग्यता के आधार पर प्रतिस्पर्धा करने वाला नहीं माना जाएगा। उदाहरण के लिए, संविधान सभा में रेणुका रे ने महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने के विरुद्ध तर्क देते हुए कहा था: “जब महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित होती हैं, तो सामान्य सीटों के लिए उन पर विचार किए जाने का प्रश्न—भले ही वे कितनी भी सक्षम क्यों न हों—आमतौर पर उठता ही नहीं है। हमारा मानना है कि यदि विचार का आधार केवल योग्यता हो, तो महिलाओं को अधिक अवसर प्राप्त होंगे।” विरोधी यह तर्क भी देते हैं कि आरक्षण से महिलाओं का राजनीतिक सशक्तिकरण नहीं होगा, क्योंकि चुनावी सुधारों से जुड़े बड़े मुद्दे &#8211; जैसे राजनीति के अपराधीकरण पर रोक लगाने के उपाय, राजनीतिक दलों के भीतर आंतरिक लोकतंत्र और काले धन के प्रभाव को नियंत्रित करना &#8211; अभी तक हल नहीं किए गए हैं।</p>
<p>पिछले दिनों महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने राज्यसभा में एक प्रश्न का उत्तर देते कही थी कि हाल ही में, सरकार ने &#8220;आदर्श महिला-अनुकूल ग्राम पंचायत पहल&#8221; शुरू की है। इसका उद्देश्य देश के हर ज़िले में कम से कम एक ऐसी आदर्श ग्राम पंचायत स्थापित करना है, जो महिलाओं और लड़कियों, दोनों के लिए अनुकूल हो। यह पहल लैंगिक समानता और सतत ग्रामीण विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है। स्वयं सहायता समूहों को बदलाव के वाहक के रूप में देखते हुए, आज 10 करोड़ से अधिक महिलाएं 90 लाख से ज़्यादा समूह से जुड़ी हुई हैं। सरकार के सहयोग से ये महिलाएं ग्रामीण परिदृश्य में आर्थिक बदलाव ला रही हैं और जमीनी स्तर पर नेतृत्व की भूमिका में आगे बढ़ रही हैं।</p>
<p>विपक्ष के लोग यह भी कहते हैं कि 16, 17 और 18 अप्रैल को होने वाला संसद का सत्र आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है। उनका आरोप है कि इसका मकसद इस महीने के आखिर में होने वाले पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के नतीजों पर असर डालना है। कांग्रेस ने संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन के संबंध में संविधान में संशोधन करने में किसी भी तरह की जल्दबाजी के खिलाफ भी आगाह किया, और कहा कि यह एक संवेदनशील मामला है और इससे कई राज्यों को भारी नुकसान हो सकता है। </p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/women-reservation-law-and-women-of-india">सनद रहे: खेत में काम करने वाली महिला, महिला मतदाताओं का &#8220;हक़&#8221; राजधानी की संभ्रांत महिलाएं न &#8220;खा&#8221; लें प्रधानमंत्री जी &#8230;.</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>माधवेश्वर ​शमशान में ​भी दरभंगा राज की महिलाओं को​ वह सम्मान नहीं मिला​, जिसका वे भी हकदार थीं​ (मृत्योपरांत कहानी श्रृंखला-2)</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/even-at-madhaveshwar-crematorium-the-women-of-darbhanga-raj-did-not-receive-the-respect-they-deserved</link>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 20 Jan 2026 12:17:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
		<category><![CDATA[creamation]]></category>
		<category><![CDATA[darbhangaraaj]]></category>
		<category><![CDATA[female]]></category>
		<category><![CDATA[madhveshwar]]></category>
		<category><![CDATA[maharani]]></category>
		<category><![CDATA[women]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>दरभंगा : दरभंगा राज के अंतिम महाराजाधिराज डॉ. सर कामेश्वर सिंह की तीसरी और अंतिम पत्नी महारानी काम सुंदरी देवी की मृत्यु के बाद उनकी चिता स्थल पर मंदिर बनाने की चर्चा उत्कर्ष पर है। दरभंगा लाल किला (रामबाग किला) से कोई डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित है माधवेश्वर शमशान स्थल। इसी स्थान पर दरभंगा राज [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>दरभंगा : दरभंगा राज के अंतिम महाराजाधिराज डॉ. सर कामेश्वर सिंह की तीसरी और अंतिम पत्नी महारानी काम सुंदरी देवी की मृत्यु के बाद उनकी चिता स्थल पर मंदिर बनाने की चर्चा उत्कर्ष पर है। दरभंगा लाल किला (रामबाग किला) से कोई डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित है माधवेश्वर शमशान स्थल। इसी स्थान पर दरभंगा राज परिवार के लोगों के पार्थिव शरीर को अग्नि को सुपुर्द किया गया है। महाराजा डॉ. कामेश्वर सिंह के अनुज राजा बहादुर विश्वेश्वर सिंह चिता भूमि सामने दिख रहा है। एक विशालकाय वृक्ष और उसके चतुर्दिक चबूतरा। बरगद के इस वृक्ष के चारो तरफ दरभंगा की महिलाओं का वट सावित्री पूजन का गवाह &#8211; लाल रंग का घागा &#8211; दिख रहा है। चबूतरे के ऊपर स्थानीय लोग, जो इस चबूतरे का इस्तेमान &#8216;बैठकी&#8217; के लिए भी करते हैं, का जूता भी अपने स्वामी के पैर की प्रतीक्षा में है। इस स्थान का देखरेख करने वाले हाथ में फूलझाड़ू लिए वृक्ष से अलग हुए सूखे पत्तों की सफाई कर रहे हैं। </strong></p>
<blockquote><p>इसके अलावे इस चबूतरे का निर्माणकर्ताओं का नाम एक शिलालेख पर भी अंकित है ताकि इस शमशान में आने वाले भ्रमणकारी लोग देख सकें। पार्थिव शरीर तो पढ़ नहीं सकता। काले रंग के पत्थर पर राजा बहादुर के दो पोतों का नाम &#8211; राजेश्वर सिंह और कपिलेश्वर सिंह &#8211; अंकित है। दरभंगा के महाराजा अथवा उनके अनुज राजा बहादुर अपनी मृत्यु के बाद दरभंगा के लोगों के लिए सामाजिक कार्य हेतु जितनी सम्पतियाँ छोड़ गए, वे कभी नहीं सोचे होंगे कि जहाँ उनके मृत्यु के बाद चिता सजेगी, समयांतराल उस स्थान पर कुछ मिट्टी और कुछ ईंटों से चबूतरा बनाने के बाद उनका पोता अपना नाम गुदवायेगा।</p></blockquote>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madan-7-scaled.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madan-7-scaled.jpg" alt="" width="1808" height="2560" class="aligncenter size-full wp-image-7245" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madan-7-scaled.jpg 1808w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madan-7-212x300.jpg 212w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madan-7-723x1024.jpg 723w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madan-7-768x1087.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madan-7-1085x1536.jpg 1085w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madan-7-1447x2048.jpg 1447w" sizes="auto, (max-width: 1808px) 100vw, 1808px" /></a></p>
<p>दरभंगा ही नहीं देश के किसी कोने में रहने वाला कोई भी व्यक्ति अपने पूर्वज की चिता स्थल पर अपना नाम नहीं गुदवायेगा। अपने जीवन में अब तक ऐसा दृश्य नहीं देखा था। मन दुःखी हो गया। ईश्वर न करें किसी जीवित व्यक्ति का नाम शमशान भूमि में अंकित दिखे। इस दृश्य को देखकर सोचने को विवश हो गया कि कभी दरभंगा राज में विद्वान सिपा सलाहकार होते थे जो &#8216;मानवीय मूल्यों को बरकरार रखने का सलाह देते थे। आज चाटुकार, चापलूसों का साम्राज्य हो गया है।अच्छे,बुरे,शुभ,अशुभ में फ़र्क़ नहीं दिखता।</p>
<p><strong>वैसे राजेश्वर सिंह और कपिलेश्वर सिंह के पिता, यानी दिवंगत राजा बहादुर विश्वेश्वर सिंह के पुत्र दिवंगत कुमार शुभेश्वर सिंह अथवा उनकी दिवंगत पत्नी का अपने दिवंगत पूर्वजों के आँगन में कहीं नामोनिशान नहीं दिखा। राजा बहादुर के अन्य दो पुत्रों &#8211; जीवेश्वर सिंह और यज्ञेश्वर सिंह का चिता स्थल भी सुना-सुना दिखा। इतना ही नहीं, इस स्थान को शमशान भूमि में अंकित होने के बाद दरभंगा राज के अनेकानेक महिलाओं &#8211; रानियों, बहुओं &#8211; की भी मृत्यु हुई है, उन्हें भी इसी प्रांगण में अग्नि को सुपुर्द किया गया था। महाराजा रमेश्वर सिंह की बड़ी पत्नी &#8216;राजमाता&#8217; के चिता स्थल पर &#8216;अन्नपूर्णा मंदिर&#8217; भले स्थापित हो; श्यामा काली और अन्नपूर्णा मंदिर के बीच उनकी दूसरी पत्नी के चिता स्थल पर आज तक मंदिर कर कार्य पूरा नहीं हो सका। यह भी दुःख की ही बात है।</strong> </p>
<p>कहते हैं महाराजा लक्ष्मेश्वर सिंह की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी को काशी लाभ हुआ। श्यामा मंदिर के सामने &#8216;तारा माय&#8217; को समर्पित करते &#8216;तारा मंदिर&#8217; का निर्माण कर और उसमें एक छोटा सा शिवलिंग स्थापित कर उसे स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया। इसे अपवाद ही माना जा सकता है। अन्नपूर्णा मंदिर​ छोटी राजमाता की चिता स्थान पर है। इस अपवाद छोड़कर दरभंगा राज की किसी भी महिला, रानी को, पुत्र बधुओं  को माधवेश्वर शमशान प्रांगण में भले अंतिम संस्कार सम्पन्न हुआ हो, उन्हें अब तक वह सम्मान नहीं मिला जिसकी वे सभी हकदार थीं, जहाँ तक मंदिर निर्माण का सवाल है। विद्वान और विदुषी दरभंगा राज के बारे में जो भी शब्द का विन्यास करें, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि दरभंगा राज में न जीते जी और ना ही मरने के बाद, महिलाओं को जो शिक्षा और सम्मान मिलना चाहिए था, जिसके वे हकदार थीं, नहीं मिला। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madh-1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madh-1.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-7247" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madh-1.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madh-1-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madh-1-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madh-1-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madh-1-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p>वैसे राज परिसर से महिला सशक्तिकरण की बात करते लोग थकते नहीं। यथार्थ तो यह है कि इस शमशान भूमि में भी &#8216;पुरुषों&#8217; का बाहुल्य आज भी कायम है। पुरुषों में भी जो &#8216;अर्थ से संपन्न&#8217; थे, या महाराजा के &#8216;मन के लोग&#8217; थे। राजा माधव सिंह, जिनका देहावसान दरभंगा में नहीं हुआ था, उनके द्वारा निर्मित &#8216;माधवेश्वर महादेव मंदिर&#8217; प्रांगण में उनका अस्थि कलश अवस्थित है। इतना ही नहीं, लोगों का कहना है कि, परंपरा के अनुसार, इस प्रांगण में जितने भी पार्थिव शरीर लाये जाते हैं, सैद्धांतिक और व्यावहारिक रूप से उस पार्थिव शरीर को अग्नि को सुपुर्द करने के पूर्व यहाँ रखना आवश्यक है। </p>
<blockquote><p>&#8216;अन्नपूर्णा&#8217; और &#8216;श्याम तारा&#8217; मंदिर के अलावे दरभंगा राज की किसी भी महिलाओं को इस परिसर में वह सम्मान नहीं मिला, जिसका एक महारानी अथवा उनकी पुत्र वधु होने के कारण उनके पार्थिव शरीर को भी वह सम्मान मिलता। यह भी उतना ही सत्य है कि राजा बहादुर विश्वेश्वर सिंह के पुत्र कुमार शुभेश्वर सिंह और उनकी पत्नी का देहांत दरभंगा में नहीं हुआ, लेकिन उनके सम्मानार्थ उनके अस्थि कलश को इस धार्मिक भूमि में अर्पित किया जा सकता था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।</p></blockquote>
<p>विद्वज्जनों का कहना है कि <strong>संकर्षण ठाकुर</strong> के वंश में दसवें पीढ़ी पर थे चंद्रपति ठाकुर, जो चान ठाकुर के भी नाम से जाने जाते थे। ये दुबे ठाकुर के नाम से प्रसिद्द श्रीपति ठाकुर के पुत्र थे। तीन भाई थे ये &#8211; हरपति ठाकुर, नरपति ठाकुर और चंद्रपति ठाकुर। ये तीनों सोनकारियां-कर्माहा मूल के गंगेश्वर सूत श्रीधर के दोभित्र थे। इनके ही बालक थे महामहोपाध्याय महेश ठाकुर, जिन्हे अकबर से मिथिला राज्य के सनद प्राप्त हुआ था।  कहते हैं इनके शिष्य रघुनन्दन झा को सनद मिला था जो गुरुदक्षिणा में अपने गुरु महेश ठाकुर को दे दिए। यहीं से प्रारम्भ होता है दरभंगा राज और उसका इतिहास। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madh-2.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madh-2.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-7248" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madh-2.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madh-2-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madh-2-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madh-2-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madh-2-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p><strong>इस राज्य के पुरुष तो शुरू से ही शिक्षित, विद्वान, महामहोपाध्याय रहे थे, लेकिन स्त्री शिक्षा का सदैव अभाव रहा। दूसरे वंश से भी जो महिलाएं विवाहोपरांत इस वंश में आयीं, उन्हें भी शिक्षा में मामले में कोई प्रोत्साहन नहीं मिला। इसका ज्वलंत दृष्टान्त है राजा राघव सिंह की दो पत्नियों में बड़ी महारानी राघव कान्ता, जो अपने समय में अपने भाइयों को तो शिक्षित कर पायी, लेकिन अपनी प्रतिभा को दिखने से वंचित रह गयी। </strong></p>
<p>शिक्षा के मामले में यह भी कहा जाता है कि ओईनिवार मूल के राजा कंसनरायण लक्ष्मी नाथ के वंश में स्त्री शिक्षा को बहुत बढ़ावा मिला। कहा जाता है कि कंस नारायण का विवाह भी मनु झा की बेटी सूरमा से तभी हुआ जब वे शास्त्रार्थ में हिस्सा लिए। बाद में कविकोविद जैसे कई दरवारी विद्वानों ने अपने अपने गीतों में विदुषी सोरमा की योग्यता का उल्लेख किये हैं। इसी राज में दूसरी विदुषी थी &#8216;बहुला&#8217; जिनका श्लोक संस्कृत साहित्य में प्रसिद्द है। </p>
<p><strong>विहस्य यस्य षष्ट्यन्ते चतुर्थ्यन्त विहाय च<br />
द्वितीयंतमह: तस्य द्वितीया स्यामहं कथं </strong></p>
<p>दरभंगा के विद्वानों का कहना है कि दरभंगा राज के पिछले राजवंश में स्त्री शिक्षा को बहुत प्रश्रय मिला, लेकिन समयांतराल स्त्री शिक्षा की परंपरा कोई भी बचा कर नहीं रख सके। दरभंगा राज में 1557 से 1962 तक कायम रहा। इस बीच दरभंगा राज परिवार में 22 व्यक्ति राजा हुए, जिसमें 10 व्यक्ति अपने बड़े भाई से सत्ता हासिल किये। अनेकों राजा अपने-अपन नामों पर नगर बसाने के साथ-साथ पोखर बनबाये, दान दक्षिणा दिए, अपने भाई और भतीजे को राज्य सौंपते गए। लेकिन यह भी उतना ही सच है कि दरभंगा राज में अधिकांश राज &#8216;नावल्द&#8217; रहे। यह भी कहा जाता है कि जब मिथिला राज्य का अकबर से प्राप्त सनद को रघुनन्दन राय अपने गुरु को सौंप दिए, तब उनकी पत्नी महेश ठाकुर को श्राप दिए थे। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madh-4.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madh-4.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-7249" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madh-4.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madh-4-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madh-4-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madh-4-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madh-4-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p><strong>बहरहाल, राजा राघव सिंह की पहली पत्नी की मृत्यु के बाद इनकी छोटी (सौतन) राघवप्रिया के पुत्र राजा विष्णु सिंह इनके सारा पर, जहाँ इनका अंतिम संस्कार हुआ था, भौड़ागढ़ी (मधुबनी) में मंदिर बनाये। दरभंगा राज में &#8216;सारा&#8217; पर परिवार के सदस्य के सारा पर यह दूसरा मंदिर है। पहला मंदिर था अपने भाई महिनाथ ठाकुर से राज भार लेने वाले नरपति ठाकुर की धर्मपत्नी उर्वशी देवी के सारा पर रहिका (मधुबनी) में निर्माण। दरभंगा में सारा पर मंदिर बनाने का इसके बाद शुरू हुआ। माधवेश्वर मंदिर वैसे सारा पर नहीं है, लेकिन इस मंदिर के समक्ष माधव सिंह सिंह का अस्थि कलश रखा हुआ है। महाराज रामेश्वर सिंह के सारा पर श्यामा मंदिर है।</strong> </p>
<p>दरभंगा के लोगों का कहना है कि यह पूरा माधवेश्वर शमशान परिसर पचास एकड़ से अधिक भूमि में फैला हुआ है। प्रवेश द्वार पर महादेव की प्रतिमा है। स्वाभाविक भी है। मृत्योपरांत प्रत्येक शमशान में महादेव और उनके गनों का ही वास होता है। प्रवेश के साथ दाहिने हाथ माधवेश्वर मंदिर है। कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण महाराजा माधव सिंह आज से कोई 220 वर्ष पूर्व किये थे। इस परिसर का यह सबसे पुराना मंदिर हैं और यही कारण है कि इस पुरे परिसर को इस मंदिर के नाम से अलंकृत किया गया। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madh-5.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madh-5.jpg" alt="" width="2047" height="1275" class="aligncenter size-full wp-image-7250" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madh-5.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madh-5-300x187.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madh-5-1024x638.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madh-5-768x478.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madh-5-1536x957.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p>राजा माधव सिंह की मृत्यु दरभंगा में नहीं हुयी थी। इसलिए इस परिसर में उनकी चिता स्थान पर कोई मंदिर नहीं है। अलबत्ता, जिस मंदिर का निर्माण उनके काल खंड में हुआ था, उस मंदिर के आगे उनका अस्थि कलश रखा है। लोग यह भी कहते हैं कि इस परिसर में माधवेश्वर महादेव मंदिर के अलावे जितने भी मंदिर हैं उन सभी मंदिरों में देवी की प्रतिमा स्थापित है और तंत्र विद्या के साधक, चाहे वे मिथिला के किसी भी क्षेत्र में रहते हों, यहाँ अपनी साधना करने अवश्य आते हैं। अधिकांश साधकों के लिए देवी ही उनका इष्ट होती हैं। परिसर के लोगों का कहना है कि माधवेश्वर में महाराजा माधव सिंह के पुत्र महाराजा छत्र सिंह का भी चिता स्थल नहीं है, इसलिए मंदिर भी नहीं है। छत्र सिंह अपनी अंतिम सांस बनारस में लिए थे। हाँ, महाराजा छत्र सिंह के पुत्र महाराजा रूद्र सिंह की चिता भूमि पर एक मंदिर अवश्य है जो माँ रुद्रेश्वरी काली के नाम से जाना जाता है। </p>
<p>रामेश्वर सिंह महान तंत्र साधक थे, अतः उनके चिता पर श्यामा मंदिर का निर्माण कई। देवी श्यामा की इतनी बड़ी प्रतिमा महाराजा रामेश्वर सिंह जो कामाख्या से वापस आये थे, मधुबनी के राजनगर किला में स्थापित किया था। राजनगर में काली की जो प्रतिमा है वह उनका बात्सल्य रूप है जबकि दरभंगा के माधवेशत में देवी काली का रौद्र रूप हैं। इसका निर्माण 1933 में हुआ था जहाँ देवी काली भगवान् शिव के छाती पर अवस्थित हैं। इस मंदिर परिसर में प्रवेश के साथ ही नहीं, आस-पास भी एक अदृश्य आकर्षण का अनुभव होता है। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madan-8-scaled.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madan-8-scaled.jpg" alt="" width="1808" height="2560" class="aligncenter size-full wp-image-7251" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madan-8-scaled.jpg 1808w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madan-8-212x300.jpg 212w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madan-8-723x1024.jpg 723w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madan-8-768x1087.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madan-8-1085x1536.jpg 1085w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madan-8-1447x2048.jpg 1447w" sizes="auto, (max-width: 1808px) 100vw, 1808px" /></a></p>
<p><strong>मेरे पिता स्वयं तांत्रिक थे, और महाराजा रमेश्वर सिंह की तांत्रिक विद्या के साथ-साथ कामाख्या में उस सिद्ध पीठ के उपासक रहे थे। वे कहते थे कि पुरुषों के चिता स्थान की अपेक्षा महिलाओं कि चिता स्थान पर बने देवी की मंदिर अधिक शक्तिशाली होती है। वे यह भी कहते थे कि किसी भी शमशान में, जलते चिताओं के बीच एक अदृश्य शक्ति की उपस्थिति होती है। इस मंदिर में काल भैरव भी हैं, वटुक भैरव की भी उपस्थिति है और गणेश की प्रतिमा तो है ही। यह अलग बात है कि कालांतर में महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह के पिता रमेश्वर सिंह के सारा पर जब जब श्यामा मंदिर का निर्माण हुआ, परिसर उनके नाम से विख्यात हो गया। रमेश्वरी श्यामा मंदिर में तांत्रिक और वैदिक दोनों रीतियों से पूजा होती है, जबकि अन्य मदिरों में पूजा पद्धति तांत्रिक विधि पर आधारित है। यहाँ प्रत्येक मंदिर में &#8216;बलि प्रदान&#8217; होता है।</strong> </p>
<p>इस मंदिर से आगे पश्चिमी दिशा में दरभंगा राज की दो महारानियों महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह की बड़ी और मझली पत्नियों के पार्थिव शरीर को अग्नि को सुपुर्द किया जाया था। यहाँ कोई भी मंदिर अथवा सम्मानीय स्थान नहीं है। महारानियों के इस चिता स्थल से आगे ऐतिहासिक तालाब के दक्षिण भाग पर राजा बहादुर विश्वेशर सिंह के बड़े पुत्र राज कुमार जीवेश्वर सिंह के पार्थिव शरीर को अग्नि को सुपुर्द किया गया था। जीवेश्वर सिंह के चिता स्थल के पास ही उनके अनुज का अंतिम संस्कार किया गया था। </p>
<p>पोखर के आगे पश्चिम-दक्षिण भाग में दरभंगा के अंतिम संतानहीन राजा कामेश्वर सिंह के पार्थिव शरीर को अग्नि को सुपुर्द किया गया था। उनकी चिटा भूमि पर ही कामेश्वरी श्यामा मंदिर स्थित है। इस मंदिर का निर्माण महाराजा कामेश्वर सिंह की पहली पत्नी महारानी राजलक्ष्मी ने अपने सुहाग के गहने बेच कर कराया था। कामेश्वरी श्यामा मंदिर के पास ही महाराजा कामेश्वर सिंह के पहली पत्नी, यानी बड़ी महारानी राजलक्ष्मी का अंतिम संस्कार किया गया था। दुर्भाग्य यह है कि उनके सम्मान में भी यहाँ कोई घार्मिक मंदिर का निर्माण नहीं हो सका अब तक। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madan-10-scaled.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madan-10-scaled.jpg" alt="" width="1808" height="2560" class="aligncenter size-full wp-image-7252" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madan-10-scaled.jpg 1808w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madan-10-212x300.jpg 212w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madan-10-723x1024.jpg 723w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madan-10-768x1087.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madan-10-1085x1536.jpg 1085w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madan-10-1447x2048.jpg 1447w" sizes="auto, (max-width: 1808px) 100vw, 1808px" /></a></p>
<p><strong>बहरहाल, कहते हैं दरभंगा के अंतिम राजा महाराजाधिराज सर कामेश्वर सिंह अपनी मृत्यु से छः साल पहले महज 21,274/- रुपये के लिए पटना उच्च न्यायालय से भारत के सर्वोच्च न्यायालय तक एक कर दिये थे। यह पैसे महाराजा द्वारा बनाए गए धार्मिक न्यास को प्रदत्त भूमि से मिलने वाली कमाई का हिस्सा था। सरकार के नियमानुसार यह राशि “आयकर” नियमों के अधीन था, जबकि महाराजाधिराज के लोगों का कहना था कि चूँकि यह राशि महाराजाधिराज द्वारा धार्मिक न्यास को दी गयी कृषि-भूमि की कमाई का हिस्सा है, और न्यास को आयकर अधिनियम से छूट है; अतः यह राशि आयकर विभाग को भुगतान नहीं करनी चाहिए। आश्चर्य तो यह है कि उन दिनों भी महाराज के आस-पास रहने वाले मिथिला के विद्वान और विदुषी यह नहीं कह सके कि “एक ही राशि ‘दो व्यक्ति’ अथवा ‘दो संस्था’ के लिए अलग-अलग नियमों के अधीन होती है। जो राशि धार्मिक न्यास के लिए आयकर नियमों के अधीन नहीं है, वह राशि महाराजाधिराज के लिए आयकर अधिनियम के अधीन है।” परन्तु ‘बात तो दरभंगा राज की थी’, और उस दिन भी दरभंगा राज में राग-दरबारियों की किल्लत नहीं थी, आज तो पूछिए ही नहीं। </strong></p>
<p>जब मामला सर्वोच्च न्यायालय में आया तो सर्वोच्च न्यायालय के तत्कालीन  माननीय न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे सी शाह और  न्यायमूर्ति एस के दास “Income Tax- Exemption from taxation Agricultural income from trust properties-Trustee’s remuneration a Percentage of such income and  resting  on  trust deed-Remuneration,  whether agricultural  income-Indian  Income-tax Act,  1922  (11  of 1922), SS. 2(1),4(3)(viii) के मद्दे नजर महाराजाधिराज के याचिका की सुनवाई किए।  महाराजा ने दलील दिये कि वे एक ट्रस्टी के हैसियत से ट्रस्ट को प्रदान की गई भूमि से मिलने वाली आय का 15 फीसदी अपनी सेवा के लिए लेते थे, एक रेम्युनेरेशन के रूप में। उन्होंने आयकर विभाग को कहा कि उक्त भूमि के इस्तेमाल से एक ट्रस्टी के रूप में जो भी आमदनी उन्हें प्राप्त होती है वह कृषक सम्पत्तियों के इस्तेमाल से होने वाली कृषक आय है जो की भारतीय आयकर अधिनियम 1922 के धारा  s. 4 (3) (viii) के अधीन आयकर से मुक्त है, साथ ही, कृषि आय से उन्हें तो रेम्युनेरेशन दिया जाता है, वह भी आयकर से मुक्त है क्योंकि उस आय का स्रोत कृषि है जो मंदिरों, ठाकुरबाड़ियों को दी गयी है उसके सफल सञ्चालन के लिए।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madh-7.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madh-7.jpg" alt="" width="2047" height="1275" class="aligncenter size-full wp-image-7253" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madh-7.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madh-7-300x187.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madh-7-1024x638.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madh-7-768x478.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madh-7-1536x957.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p>महाराजाधिराज दरभंगा ही नहीं, बिहार प्रान्त और देश के अन्य हिस्सों में जिन-जिन मंदिरों, मठों और धार्मिक स्थानों की देख-रेख करने का दायित्व लिए थे, उसका समुचित संरक्षण हो; इस निमित्त अपने राज का एक बहुत बड़ा हिस्सा का कृषि जमीन कामेश्वर सिंह धार्मिक न्यास को दे दिए थे, ताकि आमदनी का स्रोत बना रहे । परन्तु, आज दरभंगा राज रेसिडुअरी ट्रस्ट, कामेश्वर सिंह चेरिटेबल ट्रस्ट या महाराजाधिराज द्वारा सामाजिक-धार्मिक कल्याणार्थ बनाये गए अन्य न्यासों से “अधिक स्वस्थ” कामेश्वर सिंह धार्मिक न्यास का भी नहीं है। </p>
<p>न्यास के बारे में बहुत बातें हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कामेश्वर सिंह धार्मिक न्यास के पास ‘सम्पूर्णता के साथ’ ऐसी कोई सूची है जिसके आधार पर यह कहा जा सके कि इस न्यास को बनाते समय महाराजधिराज ने अमुक-अमुक मंदिरों / मठों के निर्माण, रख-रखाव, पंडित/पुजारी के वेतन, प्रसाद, घुपबत्ती, अगरबती, घूमन, भगवान अथवा भगवती के लिए वस्त्र आदि-आदि मदों पर प्रत्येक दिन अथवा प्रत्येक वर्ष होने वाले खर्च कहाँ से आएंगे? क्या उन मंदिरों और मठों के निमित्त सुरक्षित जमीनों की सूची है कामेश्वर सिंह धार्मिक न्यास के पास ? क्या उन जमीनों के लिए न्यास सरकार के कोषागार में अथवा निबंधन कार्यालय में भूमि-कर का भुगतान कर रखा है? क्या कामेश्वर सिंह धार्मिक न्यास के तहत सभी मंदिरों, मठों की स्थिति बेहतर है? क्या उन भूमियों की खरीद-बिक्री में तो हाथ नहीं लगाया गया है? कामेश्वर सिंह धार्मिक न्यास के तहत संचालित और संरक्षित मंदिरों/मठों के पुजारियों की कोई सूची उपलब्ध है? </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madh-3.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madh-3.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-7254" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madh-3.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madh-3-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madh-3-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madh-3-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/01/Madh-3-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p><strong>सूत्रों का कहना है कि कोई 108 मंदिर और ठाकुरवाड़ी हैं जो कामेश्वर सिंह धार्मिक न्यास के अधीन माना जाता है। इतना ही नहीं, यह भी कहा जाता है कि कानपुर स्थित बाजीराव पेशवा – II के महल में स्थित मंदिर का देखभाल सहित, देश में अनेकानेक ‘ऐतिहासिक लोगों द्वारा स्थापित मंदिर है जिसका देखभाल महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह ने अपने जिम्मे लिय्या था और इसका दायित्व कामेश्वर सिंह धार्मिक न्यास को सौंपा था। बिहार के कुल 38 जिलों में तक़रीबन 534 ब्लॉक हैं और कोई 45,103 गाँव हैं। उन्हीं गाँव में दरभंगा में कुल 1251 गाँव है, और ऐसा कोई गाँव नहीं है जहाँ धार्मिक आस्था से जुड़े स्थान नहीं है। बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद ने 2007 में श्यामा माई मंदिर को अधिग्रहण किया। फिर श्यामा माई मंदिर न्यास समिति का गठन हुआ। </strong></p>
<p><strong>क्रमशः </strong></p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/even-at-madhaveshwar-crematorium-the-women-of-darbhanga-raj-did-not-receive-the-respect-they-deserved">माधवेश्वर ​शमशान में ​भी दरभंगा राज की महिलाओं को​ वह सम्मान नहीं मिला​, जिसका वे भी हकदार थीं​ (मृत्योपरांत कहानी श्रृंखला-2)</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>बिहार विधानसभा चुनाव : 35-वर्ष पहले जब आनंद मोहन &#8216;मेरा गाँव मेरा देश&#8217; सिनेमा का कॉपी-पेस्ट किये थे, आज महिला पत्रकार कर रहीं हैं</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 26 Oct 2025 13:03:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चुटकुलानन्द की चिठ्ठी]]></category>
		<category><![CDATA[anand mohan]]></category>
		<category><![CDATA[assembly]]></category>
		<category><![CDATA[bihar]]></category>
		<category><![CDATA[election]]></category>
		<category><![CDATA[journalist]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>डाक बंगला चौराहा (पटना) : बिहार विधानसभा चुनाव के लिए सज्ज हो रहा है। आगामी 6 और 11 नवम्बर को चुनाव होना है। विगत दिनों सोशल मिडिया के प्लेटफॉर्म पर एक महिला टीवी संवाददाता को विधानसभा के सामने घोड़ा पर बैठकर रिपोर्टिंग करते देखा। शायद पहली घटना होगी। मोहतरमा को देखकर सन 1971 में अख्तर रोमानी लिखित, राज खोसला द्वारा निर्देशित, लक्ष्मीकांत [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/chutkulanands-letter/bihar-assembly-elections-and-horseback-reportimg">बिहार विधानसभा चुनाव : 35-वर्ष पहले जब आनंद मोहन &#8216;मेरा गाँव मेरा देश&#8217; सिनेमा का कॉपी-पेस्ट किये थे, आज महिला पत्रकार कर रहीं हैं</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>डाक बंगला चौराहा (पटना) : बिहार विधानसभा चुनाव के लिए सज्ज हो रहा है। आगामी 6 और 11 नवम्बर को चुनाव होना है। विगत दिनों सोशल मिडिया के प्लेटफॉर्म पर एक महिला टीवी संवाददाता को विधानसभा के सामने घोड़ा पर बैठकर रिपोर्टिंग करते देखा। शायद पहली घटना होगी। मोहतरमा को देखकर सन 1971 में अख्तर रोमानी लिखित, राज खोसला द्वारा निर्देशित, लक्ष्मीकांत – प्यारेलाल द्वारा संगीतबद्ध और धर्मेंद्र &#8211; विनोद खन्ना द्वारा अभिनीत फिल्म “मेरा गाँव मेरा देश” के साथ-साथ बाहुबली से राजनेता बने &#8216;आनंद मोहन&#8217; एक साथ याद आ गया । घटना आज से 35-वर्ष पूर्व की है। </strong></p>
<p>शायद आज के पत्रकारों को मालूम नहीं होगा कि &#8216;मेरा गाँव मेरा देश&#8217; &#8216;अपराधी से राजनेता बने&#8217; उन दिनों के उभरते आनंद मोहन को बहुत अच्छा लगता था। आनंद मोहन उस सिनेमा में अभिनेताओं के साज-सज्जा को देखकर बहुत प्रभावित थे। जिसका प्रभाव आज तक जारी है। वे बॉलीवुड के कलाकार &#8216;जितेंद्र के सफ़ेद वस्त्र&#8217; से भी बहुत प्रभावित थे। </p>
<p>बिहार के लोग जो आज न्यूनतम 35 वर्ष के भी होंगे, उनके जन्म से पहले की यह तस्वीर है आनंद मोहन का। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर खुलेआम कहते थे कि धनबाद का कोयला माफिया सूर्यदेव सिंह और कोसी क्षेत्र का आनंद मोहन उनके ‘मित्रवत’ हैं और वे ‘मित्रता का सम्मान’ करते हैं। सूर्यदेव सिंह का कोयला माफिया होना, उनकी पेशा है कोयला के क्षेत्र में, हीरा ढूंढने के लिए अगर वे कुछ भी करते हैं तो यह उनका व्यावसायिक क्रियाकलाप है । </p>
<blockquote><p>उसी तरह कोशी के आनंद मोहन प्रदेश की राजनीति में ही नहीं, दिल्ली के राजपथ पर भी अपना अधिपत्य ज़माने की कोशिश कर रहे हैं, यह उनकी चाहत है, होनी भी चाहिए क्योंकि राजनीति में बहुत पापड़ बेलना होता है, और वे बेलन की लम्बाई, चौड़ाई और मोटाई माप रहे हैं, मापना भी चाहिए। चंद्रशेखर हमेशा चाहते थे कि आनंद मोहन “मजबूत” बने।  समाज में हरेक बड़े-बुजुर्ग युवकों को उनकी योग्यता के अनुसार “मजबूत” बनने की सलाह देते थे।</p></blockquote>
<p>इसलिए जिस क्षेत्र में “तेज और तर्रार” है, उसी में आगे बढ़े, आषीश देते हैं। फिर क्या था, आनंद मोहन “बाहुबली” बन गए। दोनों को चंद्रशेखर बहुत ही सम्मान करते थे। इधर सूर्यदेव सिंह और आनंद मोहन भी उनका उतना ही सम्मान करते थे। आज की नेताओं जैसा नहीं की जैसे ही अपना स्वार्थ सिद्ध हुआ, सामने वालों को पहचानने से भी मुकर जाते हैं। खैर।</p>
<p>यह उन दिनों की बात है जब चंद्रशेखर अपने राजनीतिक जीवन के उत्कर्ष पर थे और बिहार के लालू प्रसाद यादव चंद्रशेखर से आनंद मोहन के लिए ‘शिकायत’ किये थे। यह अलग बात थी कि उसी काल में पूर्णिया के पप्पू यादव भी कनक को बन्दुक की नोक पर रखे थे, अधिकारियों को पैर के नीचे रखते थे; लेकिन लालू प्रसाद के लिए पपू यादव का वह क्रिया-कलाप बचपना था, क्योंकि वे लालू के अपने थे। लालू प्रसाद अपने गुरुदेव चंद्रशेखर से यह भी निवेदन किये कि आनंद मोहन को रोकिये। क्योंकि आनंद मोहन को रोकने का कार्य उन दिनों भारत की चौहद्दी में सिर्फ और सिर्फ चंद्रशेखर ही कर सकते थे। लेकिन चंद्रशेखर लालू प्रसाद को खुश नहीं किये और कहे: “उसे रोको नहीं …छोड़ दो उसे। समय आने पर वह खुद समर्पित कर देगा।”</p>
<p>उस ज़माने में आनंद मोहन और पप्पू यादव में आज़ादी की दूसरी लड़ाई जैसी ताकत की आजमाइश हो रही थी। नित्य खेत-खलिहान, गली-कूची, सड़क, कारखाने में, या यूँ कहें कि उत्तर बिहार में सहरसा-मधेपुरा-सुपौल-पूर्णिया-कटिहार आदि क्षेत्रों में शायद ही कोई इलाका बचा होगा जहाँ खून की होली नहीं खेली गयी थी। चतुर्दिक दोनों गुटों के लोगों का जीता-जागता शरीर “पार्थिव” हो रहा था। सम्पूर्ण क्षेत्र में ख़ौफ़ का माहौल था। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/Aanand-Mohan-1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/Aanand-Mohan-1.jpg" alt="" width="1341" height="1883" class="aligncenter size-full wp-image-7161" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/Aanand-Mohan-1.jpg 1341w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/Aanand-Mohan-1-214x300.jpg 214w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/Aanand-Mohan-1-729x1024.jpg 729w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/Aanand-Mohan-1-768x1078.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/Aanand-Mohan-1-1094x1536.jpg 1094w" sizes="auto, (max-width: 1341px) 100vw, 1341px" /></a></p>
<p><strong>उन्ही दिनों पटना के बी एन कालेज का एक बंगाली छात्र, जो स्वयं को फोटोग्राफी की दुनिया में सुपुर्द कर देना चाहता था, हाथ में एक छोटा सा मैनुअल निकोन कैमरा लेकर अपनी किस्मत को आजमाने  पटना की सड़कों पर उतरा था। खाकी रंग का वाटर-प्रूफ कैमरा बैग अपने दाहिने कंधे पर लटकाकर एक स्ट्रिंगर के रूप में फोटो खींचना प्रारम्भ किया था अपनी रोजी-रोटी के लिए। इसी बीच, लालू-चद्रशेखर संवाद स्थानीय अख़बारों में प्रकाशित होती है। आनंद मोहन और पप्पू यादव को तत्कालीन स्थानीय अख़बारों में जगह तो मिलता था, लेकिन घटना के कई दिनों बाद। </strong></p>
<p>उस ज़माने में संचार के ऐसे कोई साधन नहीं थे जो क्षण-क्षण की सूचना को इस पार से उस पार कर दे। स्थानीय पत्रकार हाथ से लिखते थे, या फिर टाइप करते थे कहानियों को फिर डाक से भजते थे। टेलीप्रिंटर का जमाना था, लेकिन ‘समाचारों के लिए’, बड़ी-बड़ी कहानियां डाक से ही प्रेषित की जाती थी। अगर उन कहानियों के साथ कुछ तस्वीर मिली तो वाह-वाह , नहीं मिली तो भी वाह-वाह। समाचार जब तक प्रकाशित होता था तब तक दूसरी घटना हो जाती थी। टेलीप्रिंटर तो था, लेकिन  जिला संवाददाताओं के पास नहीं होता था। खैर। </p>
<p>उस ज़माने में इलाहाबाद से एक हिन्दी पत्रिका का प्रकाशन होता था। नाम “माया” था। “माया” के तत्कालीन बिहार के संवाददाता विकास कुमार झा आनंद मोहन पर एक कहानी करना चाहते थे। शायद विकास कुमार झा &#8216;पहला और अंतिम पत्रकार&#8217; हैं जो अपना पूरा नाम लिखते थे। आज तो &#8216;कुमार&#8217; शब्द में भी &#8216;छटनी&#8217; हो गया है और अधिकांश लोग कुमार को &#8216;के&#8217; में बदल दिए हैं। विकास कुमार झा का जन्म 1961 में बिहार के सीतामढ़ी जिले में हुआ। उन्होंने 18 वर्ष की आयु में बतौर पत्रकार जीवन प्रारम्भ किये थे। आनंद मोहन-पप्पू यादव पर कहानी के लिए  जरुरत थी तस्वीरों की, क्योंकि तस्वीरों के बिना कहानी विधवा जैसी होती है । </p>
<p><strong>यहीं उस बंगाली छायाकार की किस्मत आनंद मोहन के साथ जुड़ गयी। एक तस्वीर, एक ओर जहाँ आनंद मोहन को बिहार में ही नहीं, सम्पूर्ण देश में, विदेशों में बाहुबली बना दिया, नाम-शोहरत को दिल्ली के क़ुतुब मीनार पर चढ़ा दिया, उस छायाकार की भी उस ऐतिहासिक तस्वीर के लिए चर्चाएं होने लगी। उन दिनों उस तस्वीर को प्राप्त करने के लिए पटना के उस ज़माने के छायाकारों ने न जाने कितने लोभ-प्रलोभ दिए, लेकिन बंगाली छायाकार हिला नहीं। नाम संजीव बनर्जी है।  </strong></p>
<p>पटना ही नहीं बिहार के पत्रकार अथवा छायाकार आज शायद नहीं जानते होंगे की आनंद मोहन की उस  ऐतिहासिक तस्वीर का “फ्रेम” बनाने के लिए उन दिनों संजीव बनर्जी और सुनील झा किन-किन परिस्थितियों से गुजरे थे, आज के छायाकार कल्पना नहीं कर सकते हैं। संजीव बनर्जी और सुनील झा दोनों बस से पटना से सहरसा के लिए निकले। दोनों आनंद मोहन के एक हितैषी थे और कांग्रेस के नेता थे सुधीर मिश्रा जी से पहले संपर्क स्थापित कर लिए थे। </p>
<p><strong>सहरसा पहुँचने पर वे दोनों रात में वहीं रुके। मिश्रा जी के सहयोग से आनंद मोहन बाबा-आदम का एक पुराना, खटारा एम्बेसडर कार दोनों को लाने के लिए भेजे थे। सहरसा से दोनों आनंद मोहन के गांव पंचगछिया के लिए निकले। रात्रि विश्राम पंचगछिया में था। अगली सुबह दोनों एक गंतब्य स्थान के लिए उसी गाडी से निकले। साथ में आनंद मोहन के भी “आदमी” थे। कुछ  दूर निकलने के बाद संजीब बनर्जी और सुनील झा दोनों की आखों पर कपड़ा बाँध दिया गया ताकि रास्ते का अंदाजा नहीं मिल सके। सुधीर मिश्रा जी का ससुराल नेपाल की तराई में था, जहाँ आनंद मोहन अड्डा जमाये हुए थे। </strong></p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/Aanand-Mohan-2.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/Aanand-Mohan-2.jpg" alt="" width="1336" height="1662" class="aligncenter size-full wp-image-7162" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/Aanand-Mohan-2.jpg 1336w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/Aanand-Mohan-2-241x300.jpg 241w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/Aanand-Mohan-2-823x1024.jpg 823w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/Aanand-Mohan-2-768x955.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/Aanand-Mohan-2-1235x1536.jpg 1235w" sizes="auto, (max-width: 1336px) 100vw, 1336px" /></a></p>
<p>जिस स्थान पर आनंद मोहन अपना ठिकाना बनाये थे वहां पहुँचने पर ही आँखों से पट्टी हटाया गया। उद्देश्य तस्वीर तरोताजा तस्वीर खिंचा था जिससे विकास कुमार झा कहानी लिखें और तस्वीरों के साथ कहानी का प्रकाशन हो। दोनों पत्रकारों को आवभगत करने में आनंद मोहन और उनके लोग कोई कसार नहीं छोड़े थे, लेकिन दोनों पत्रकारों का रक्तचाप संतुलन से बहुत अधिक था। इस बात की कल्पना आज विधानसभा के सामने घोड़े पर बैठकर टीवी के लिए एंकरिंग करने वाली पत्रकार महोदय नहीं समझेंगी। </p>
<p>दर्जनों राइफल, दो नाली बन्दुक, पिस्टल और अन्य अस्त्र-शस्त्र के साथ सैकड़ों तस्वीरें क्लिक-क्लिक हुए। तभी आनंद मोहन को मेरा गाँव मेरा देश का विनोद खन्ना और धर्मेंद्र याद आ गए। वस्त्र बदला गया। सफ़ेद घोड़ा लाया गया। घोड़ा को साफ़-सुथरा किया गया। गद्दी लगाया गया। आंनद मोहन उस घोड़े पर विराजमान हुए। आनद मोहन बाएं हाथ से विनोद खन्ना जैसा घोड़ा का लगाम पकडे थे और दाहिने हाथ में पिस्तौल लिए दर्जनों फोटो क्लिक क्लिक हुआ । </p>
<p><strong>अब बात आयी एक ऐसी तस्वीर जो पत्रिका का कवर हो। बस क्या था सफ़ेद फुलपैंट, कमीज में तनिक तिरछा होकर बैठे।  पिस्तौल का नोक आसमान की ओर किये। आजु-बाजू आनंद मोहन के हितैषीगण, अंगरक्षक सभी बन्दुक, राइफल लेकर खड़े हो गए –  क्लिक-क्लिक हुआ। उस ज़माने में रंगीन तस्वीर बहुत कम खींची जाती थी।  रंगीन फोटो वाले निगेटिव को “टी पी” कहते थे। डिजिटल कैमरा भी नहीं था। अगर किन्ही के पास होता भी था तो वे समाज से अलग संभ्रांत छायाकार होते थे। अब इस बनर्जी के पास तो फिल्म खरीदने के लिए भी पैसे नहीं होते थे तो अधिक क्लिक-क्लिक भी नहीं कर सकता था। </strong></p>
<p>कहते हैं “जान बचे तो लाख उपाय”, दोनों हनुमान चालीसा पढ़ते पुनःमुसको भवः हुए – उसी तरह, आखों पर पट्टी बाँध दिया गया। वापसी में पहुंचे मधेरपुरा के जिलाधिकारी के पास। उस ज़माने में जयन्तो दासगुप्ता माडपुरा के जिलाधिकारी थे जो लालू के “खास” थे। मधेपुरा उन दिनों आनंद मोहन – पप्पू यादव का कुरुक्षेत्र था। दोनों में से कोई भी हथियार रखना नहीं कहते थे। खैर जयन्तो दासगुप्ता भी कदम कुआं पटना के थे।  उनके दादाजी थे प्रमाथो दासगुप्ता, जहाँ संजीव बनर्जी बचपन में खेलने-कूदने जाया करते थे।  बस क्या था – दो बंगाली इकठ्ठा हुए, बचपन की बातें दुहराई गयी और आनंद मोहन-पप्पू यादव कुरुक्षेत्र का विस्तार से विन्यास हुआ। सुनील झा सभी बातें अपनी डायरी पर लिख रहे थे। </p>
<p><strong>पटना आते ही, संजीव हम लोगों के ज़माने के माणिकदा @ सत्यजीत मुखर्जी के स्टूडियो “फोटो-मेकर” पहुंचे। निगेटिव साफ़-सुथरा हुआ, तस्वीर निकली और फिर ‘माया’ के दफ्तर में हाजिर हुए झाजी और बनर्जी। विकास कुमार झा कहानी लिख रहे थे। तस्वीर देखने के बाद विकास कुमार झा ने संजीव को तत्काल इलाहाबाद रावण किये तस्वीरों के साथ। इधर पटना में जब छायाकारों को मालूम हुआ की संजीब बनर्जी तस्वीर बनाकर लाये हैं, सभी “मुझे दो-मुझे दो” करने लगे। जब संजीब इलाहाबाद पहुंचे तब ‘माया’ पत्रिका में एक ‘लेखक-ब्रह्मास्त्र’ हुआ करते थे बाबूलाल शर्मा जी। बबूलाल जी तस्वीर देखे। विकास झा की कहानी को पढ़े और जो कहानी बनी वह ऐतिहासिक थी – ये है बिहार (माया, अंक 31 दिसंबर, 1991) </strong></p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/chutkulanands-letter/bihar-assembly-elections-and-horseback-reportimg">बिहार विधानसभा चुनाव : 35-वर्ष पहले जब आनंद मोहन &#8216;मेरा गाँव मेरा देश&#8217; सिनेमा का कॉपी-पेस्ट किये थे, आज महिला पत्रकार कर रहीं हैं</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>अवसर महिला सशक्तिकरण का था, सामने प्रधानमंत्री देवी अहिल्याबाई होल्कर के बारे में अन्तः आत्मा से कह रहे थे, महिलाएं तस्वीर खींच रही थी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 01 Jun 2025 13:46:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[ahilyabai holkar]]></category>
		<category><![CDATA[bhopal]]></category>
		<category><![CDATA[empowerment]]></category>
		<category><![CDATA[madhya Pradesh]]></category>
		<category><![CDATA[narendra modi]]></category>
		<category><![CDATA[prime minister]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>भोपाल (मध्य प्रदेश) : कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भोपाल में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जन्म जयंती के अवसर पर महिला सशक्तिकरण महासम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उनके संबोधन मंच से कुछ दूरी पर आज की महिलाएं, युवतियां अपने-अपने मोबाइल से प्रधानमंत्री की तस्वीर उतार रही थी । उससे एक दिन पहले भारतीय दूरसंचार [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/politics/modi-was-speaking-from-the-heart-about-devi-ahilyabai-holkar-women-were-taking-pictures">अवसर महिला सशक्तिकरण का था, सामने प्रधानमंत्री देवी अहिल्याबाई होल्कर के बारे में अन्तः आत्मा से कह रहे थे, महिलाएं तस्वीर खींच रही थी</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>भोपाल (मध्य प्रदेश) : कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भोपाल में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जन्म जयंती के अवसर पर महिला सशक्तिकरण महासम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उनके संबोधन मंच से कुछ दूरी पर आज की महिलाएं, युवतियां अपने-अपने मोबाइल से प्रधानमंत्री की तस्वीर उतार रही थी । उससे एक दिन पहले भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण की ओर से भारत में मोबाइल उपभोक्ताओं की संख्या भी सार्वजनिक की गयी थी। जब प्रधानमंत्री के सामने आज की महिलाओं को, अहिल्याबाई  होल्कर को और मोबाइल उपभोक्ताओं को एक साथ देखा तो यह निर्णय नहीं ले पाया कि क्या तस्वीर खींचती ये महिलाएं देवी अहिल्याबाई होल्कर को जानती भी हैं? या देवी अहिल्याबाई जो भारत की विरासत का प्रतीक हैं, आज के युवक-युवतियां पहचानती भी हैं? शायद नहीं &#8211; क्योंकि यह सेल्फी का युग है।</strong></p>
<blockquote><p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जितनी तन्मयता के साथ देवी अहिल्याबाई के बारे में एक-एक शब्द बोल रहे थे, इन महिलाओं को देखकर नहीं लगा कि वे प्रधानमंत्री की बहुमूल्य बातों को सुन रही हैं। वैसे उनके मोबाइल पर भी देवी अहिल्याबाई होल्कर के बारे में वृतांत उपलब्ध है, लेकिन पढ़ेगा कौन यह एक नहीं 140 करोड़ का प्रश्न है। </p></blockquote>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/4.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/4.jpg" alt="" width="2200" height="1457" class="aligncenter size-full wp-image-6686" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/4.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/4-300x199.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/4-1024x678.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/4-768x509.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/4-1536x1017.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/4-2048x1356.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a></p>
<p>भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण के अनुसार भारत में कुल मोबाइल उपभोक्ताओं की संख्या फरवरी-25 के अंत में 1,154.05 मिलियन थी जो बढ़कर मार्च-25 के अंत में 1,156.99 मिलियन हो गई। प्राधिकरण ने यह दवा भी किया कि यह वृद्धि औसतन 0. 25 फीसदी मासिक है। प्राधिकरण के अनुसार शहरी क्षेत्रों में मोबाइल उपभोक्ताओं की संख्या जो फरवरी-25 के अंत में 627.94 मिलियन थी, बढ़कर मार्च-25 के अंत में 628.31 मिलियन हो गई और इसी अवधि के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में वायरलेस (मोबाइल) उपभोक्ताओं की संख्या भी 526.11 मिलियन से बढ़कर 528.68 मिलियन हो गई। शहरी और ग्रामीण मोबाइल उपभोक्ताओं की मासिक वृद्धि दर क्रमशः 0.06% और 0.49% रही। यानी शहरों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल के उपभोक्ताओं में वृद्धि दर अधिक है। </p>
<blockquote><p>वैसे भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजी-रोटी के अवसर नहीं होने के कारण लोगों का, खासकर पुरुषों का पलायन भारत के शहरों की ओर होना स्वाभाविक है, अतः मोबाइल सेवाओं की उपभोक्ता &#8216;पुरुष&#8217; नहीं, बल्कि &#8216;महिलाएं&#8217; हैं भारत के ग्रामीण इलाकों में। महिला सशक्तिकरण का इससे बड़ा दृष्टान्त और क्या हो सकता है।</p></blockquote>
<p>दुर्भाग्य देखिये। मोबाइल सेवा प्रदाताओं में सरकारी क्षेत्र के भारत संचार निगम लिमिटेड का उपभोक्ता-बेस चौथे स्थान पर (29.94 फीसदी) है, जबकि रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड का उपभोक्ता-बेस पहले स्थान पर (465.10), भारती एयरटेल लिमिटेड का उपभोक्ता-बेस दूसरे स्थान (280.76) पर, वोडाफोन आइडिया लिमिटेड का उपभोक्ता-बेस तीसरे स्थान (125.63) पर है और पांचवें स्थान पर दर्ज है आईबस वर्चुअल नेटवर्क सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड। खैर। </p>
<figure id="attachment_6681" aria-describedby="caption-attachment-6681" style="width: 2196px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/1.jpg" alt="" width="2196" height="1465" class="size-full wp-image-6681" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/1.jpg 2196w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/1-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/1-1024x683.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/1-768x512.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/1-1536x1025.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/1-2048x1366.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2196px) 100vw, 2196px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6681" class="wp-caption-text">प्रधानमंत्री देवी अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि करते</figcaption></figure>
<p>लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर का नाम सुनकर गहरी श्रद्धा व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके असाधारण व्यक्तित्व का वर्णन करने के लिए शब्द कम पड़ जाएंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देवी अहिल्याबाई दृढ़ इच्छाशक्ति और दृढ़ संकल्प का प्रतीक हैं, जो दर्शाती हैं कि चाहे कितनी भी प्रतिकूल परिस्थितियां क्यों न हों, परिवर्तनकारी परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। ढाई सौ से तीन सौ साल पहले, जब देश उत्पीड़न की जंजीरों में जकड़ा हुआ था, ऐसे असाधारण कार्य करना &#8211; इतने बड़े कि पीढ़ियां आज भी उनको याद करती हैं &#8211; कोई आसान काम नहीं था।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर ने कभी भी ईश्वर की सेवा और लोगों की सेवा के बीच अंतर नहीं किया। वे हमेशा अपने साथ शिवलिंग रखती थीं। यह उनकी गहरी भक्ति को दर्शाता है। उस समय की चुनौतियों पर विचार करते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे युग में राज्य का नेतृत्व करना कांटों का ताज पहनने के समान था। फिर भी, लोकमाता अहिल्याबाई ने अपने राज्य की समृद्धि को एक नई दिशा प्रदान की, स्वयं को सबसे गरीब लोगों को सशक्त बनाने के लिए समर्पित कर दिया। अहिल्याबाई भारत की विरासत की एक महान संरक्षक थी। उन्होंने काशी विश्वनाथ सहित देश भर में कई मंदिरों के जीर्णोद्धार में उनके योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने उसी शहर वाराणसी में सेवा करने का अवसर मिलने पर अपना सौभाग्य व्यक्त किया, जहां लोकमाता अहिल्याबाई ने अनेक विकास कार्य किए थे।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि माता अहिल्याबाई ने एक अनुकरणीय शासन मॉडल लागू किया जिसमें गरीबों और हाशिए पर पड़े लोगों के कल्याण को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की। उन्होंने कृषि, वन उपज पर आधारित कुटीर उद्योगों और हस्तशिल्प को बढ़ावा दिया। कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए, उन्होंने छोटी नहरें बनवाई और लगभग 250-300 साल पहले कई तालाबों का निर्माण करवाकर जल संरक्षण के प्रयास किए। उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने और फसल विविधता को बढ़ावा देने के लिए कपास और मसालों की खेती को प्रोत्साहित किया। मोदी ने आदिवासी समुदायों और खानाबदोश समूहों के लिए उनके दूरदर्शिता पर जोर दिया। उन्होंने इन समूहों की आजीविका बढ़ाने के लिए अप्रयुक्त भूमि पर कृषि में सहयोग दिया।मोदी ने कहा कि भारत की आदिवासी महिला राष्ट्रपति- श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के निर्देशन में काम करना उनका सौभाग्य है।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/5.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/5.jpg" alt="" width="2197" height="1155" class="aligncenter size-full wp-image-6682" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/5.jpg 2197w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/5-300x158.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/5-1024x538.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/5-768x404.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/5-1536x808.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/5-2048x1077.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2197px) 100vw, 2197px" /></a></p>
<p><strong>मोदी ने कहा, &#8220;देवी अहिल्याबाई होल्कर को हमेशा लड़कियों की शादी की न्यूनतम आयु बढ़ाने, महिलाओं के संपत्ति के अधिकार को सुरक्षित करने और विधवाओं के पुनर्विवाह का समर्थन करने जैसे उनके महत्वपूर्ण सामाजिक सुधारों के लिए याद किया जाएगा। ये ऐसे मुद्दे हैं जिन पर उनके समय में चर्चा करना भी मुश्किल था।&#8221; उन्होंने जोर देकर कहा कि सामाजिक चुनौतियों के बावजूद, देवी अहिल्याबाई ने इन प्रगतिशील सुधारों का पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने मालवा सेना में एक विशेष महिला यूनिट भी बनाई और गांवों में महिला सुरक्षा समूह स्थापित किए जिससे सुरक्षा और सशक्तिकरण सुनिश्चित हुआ। उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए और सभी पर उनके आशीर्वाद की कामना करते हुए कहा, ‘’माता अहिल्याबाई राष्ट्र निर्माण में महिलाओं के अमूल्य योगदान का प्रतीक हैं’’।</strong></p>
<p>देवी अहिल्याबाई होल्कर के एक प्रेरक कथन को याद करते हुए, जिसमें उन्होंने इस बात पर जोर दिया था कि जो कुछ भी प्राप्त हुआ है वह लोगों का ऋण है, जिसे चुकाना होगा, प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि उनकी सरकार उनके मूल्यों के अनुरूप काम कर रही है और &#8216;नागरिक देवो भव&#8217; के सिद्धांत पर कार्य कर रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं के नेतृत्व में विकास के दृष्टिकोण को राष्ट्र की प्रगति के मूल में रखा जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार की हर बड़ी पहल माताओं, बहनों और बेटियों को सशक्त बनाने पर केंद्रित है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वंचितों के लिए चार करोड़ घर बनाए गए हैं जिनमें से अधिकांश महिलाओं के नाम पर पंजीकृत हैं। उन्होंने बताया कि यह पहली बार है कि उनका नाम संपत्ति के स्वामित्व से जुड़ा है। यह एक ऐतिहासिक बदलाव को दर्शाता है जहां देश भर में करोड़ों महिलाएं पहली बार घर की मालकिन बनी हैं।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि पहले कई महिलाओं को अपनी स्वास्थ्य समस्याओं को छिपाने के लिए मजबूर होना पड़ता था, अक्सर वित्तीय परेशानी के कारण गर्भावस्था के दौरान अस्पताल जाने से बचती थी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आयुष्मान भारत योजना ने इस समस्या को समाप्त कर दिया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के साथ-साथ वित्तीय स्वतंत्रता भी महिला सशक्तीकरण के लिए महत्वपूर्ण है। जब एक महिला के पास अपनी आय होती है तो उसका आत्म-सम्मान बढ़ता है और घर के निर्णय लेने में उसकी भागीदारी बढ़ती है। प्रधानमंत्री ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए पिछले 11 वर्षों में सरकार के निरंतर प्रयासों का उल्लेख किया। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/8.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/8.jpg" alt="" width="2200" height="1344" class="aligncenter size-full wp-image-6683" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/8.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/8-300x183.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/8-1024x626.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/8-768x469.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/8-1536x938.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/8-2048x1251.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a></p>
<p>उन्होंने बताया कि 2014 से पहले 30 करोड़ से अधिक महिलाओं के पास बैंक खाता नहीं था। सरकार ने उनके लिए जन धन खाते खोलने की सुविधा प्रदान की जिनमें अब विभिन्न योजनाओं से धन सीधे हस्तांतरित किया जा रहा है। उन्होंने टिप्पणी की कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिलाएं मुद्रा योजना द्वारा समर्थित काम और स्वरोजगार में तेजी से शामिल हो रही हैं।  यह योजना बिना किसी जमानत के ऋण प्रदान करती है। प्रधानमंत्री ने वित्तीय समावेशन पर इस पहल के प्रभाव को बताते हुए कहा, &#8220;मुद्रा के 75 प्रतिशत से अधिक लाभार्थी महिलाएं हैं।&#8221;</p>
<p>इस बात पर जोर देते हुए कि देश भर में 10 करोड़ महिलाएं अब स्वयं सहायता समूहों का हिस्सा हैं। ये समूह सरकार से पर्याप्त वित्तीय सहायता से आय के नए स्रोत बना रहे हैं, मोदी ने 3 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी के रूप में सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया और संतोष व्यक्त किया कि 1.5 करोड़ से अधिक महिलाएं पहले ही यह उपलब्धि हासिल कर चुकी हैं। उन्होंने बैंक सखियों की भूमिका का उल्लेख किया जो गांवों में लोगों को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ रही हैं, और बीमा सखियों की स्थापना के लिए सरकार की पहल पर जोर देते हुए कहा कि महिलाएं और बेटियां अब देश भर में बीमा कवरेज का विस्तार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।</p>
<p><strong>प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि एक समय था जब महिलाओं को उभरती हुई तकनीकों से दूर रखा जाता था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश उस युग से आगे निकल चुका है, यह सुनिश्चित करते हुए कि महिलाएं तकनीकी प्रगति में सक्रिय रूप से भाग लें और उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं और बेटियों को आधुनिक तकनीक में नेतृत्व की भूमिका निभाने में सक्षम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कृषि में ड्रोन क्रांति की ओर इशारा करते हुए इस बात पर जोर दिया कि ग्रामीण महिलाएं इस परिवर्तन का नेतृत्व कर रही हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, &#8220;नमो ड्रोन दीदी पहल ग्रामीण महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा रही है और उनकी आय के अवसरों को बढ़ा रही है और उनके लिए एक विशिष्ट पहचान बना रही है।&#8221;</strong></p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/9.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/9.jpg" alt="" width="2200" height="1317" class="aligncenter size-full wp-image-6684" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/9.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/9-300x180.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/9-1024x613.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/9-768x460.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/9-1536x920.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/9-2048x1226.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a></p>
<p>इस बात पर जोर देते हुए कि देश भर में बड़ी संख्या में बेटियां वैज्ञानिक, डॉक्टर, इंजीनियर और पायलट के रूप में अपना करियर बना रही हैं, श्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि विज्ञान और गणित की शिक्षा में लड़कियों का नामांकन लगातार बढ़ रहा है। श्री मोदी ने कहा, “आज, हमारे सभी प्रमुख अंतरिक्ष अभियानों में बड़ी संख्या में महिला वैज्ञानिक काम कर रही हैं”, उन्होंने उल्लेख किया कि चंद्रयान-3 अभियान में 100 से अधिक महिला वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने योगदान दिया। उन्होंने स्टार्टअप क्षेत्र में महिलाओं के उल्लेखनीय योगदान पर टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत में लगभग 45 प्रतिशत स्टार्टअप में कम से कम एक महिला निदेशक है और यह संख्या लगातार बढ़ रही है।</p>
<p>नीति निर्माण में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पिछले दशक में उठाए गए प्रगतिशील कदमों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पहली बार भारत को एक पूर्णकालिक महिला रक्षा मंत्री और एक महिला वित्त मंत्री मिली हैं। उन्होंने आगे जोर देकर कहा कि पंचायतों से लेकर संसद तक महिलाओं का प्रतिनिधित्व लगातार बढ़ा है। वर्तमान में 75 महिलाएं संसद सदस्य के रूप में काम कर रही हैं। प्रधानमंत्री ने इस भागीदारी को और बढ़ाने के महत्व पर जोर दिया, उन्होंने रेखांकित किया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम इस दृष्टिकोण का प्रतीक है। उन्होंने टिप्पणी की कि हालांकि इस कानून में वर्षों का विलंब हुआ लेकिन सरकार ने इसे सफलतापूर्वक पारित किया, संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के आरक्षण को मजबूत किया। उन्होंने फिर से दोहराया कि उनकी सरकार हर स्तर पर और हर क्षेत्र में महिलाओं को सशक्त बना रही है।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/7.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/7.jpg" alt="" width="2200" height="1696" class="aligncenter size-full wp-image-6685" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/7.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/7-300x231.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/7-1024x789.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/7-768x592.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/7-1536x1184.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/7-2048x1579.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a></p>
<p>प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि अपने शासनकाल में देवी अहिल्याबाई ने न केवल विकास को आगे बढ़ाया बल्कि भारत की विरासत का भी संरक्षण किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक भारत भी उसी रास्ते पर चल रहा है। प्रगति का सांस्कृतिक संरक्षण के साथ संतुलन बना रहा है। उन्होंने आज के कार्यक्रम का उदाहरण देते हुए बुनियादी ढांचे के विकास में तेजी लाने के लिए राष्ट्र की प्रतिबद्धता का उल्लेख किया।  “भारत इतिहास के एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है, जहां राष्ट्र को अपनी सुरक्षा, शक्ति और सांस्कृतिक विरासत पर एक साथ काम करना चाहिए।” उन्होंने बढ़ते प्रयासों के महत्व पर बल दिया और देश के भविष्य को आकार देने में मातृशक्ति &#8211; भारत की माताओं, बहनों और बेटियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई, रानी दुर्गावती, रानी कमलापति, अवंतीबाई लोधी, कित्तूर रानी चेन्नम्मा, रानी गाइडिन्ल्यू, वेलु नचियार और सावित्रीबाई फुले जैसी महान महिला नेताओं की विरासत के साथ-साथ लोकमाता अहिल्याबाई की प्रेरणा का आह्वान किया। </p>
<p><strong>प्रधानमंत्री ने  लोकमाता देवी अहिल्याबाई को समर्पित एक स्मारक डाक टिकट और एक विशेष सिक्का जारी किया। 300 रुपये के सिक्के पर अहिल्याबाई होल्कर का चित्र होगा। उन्होंने आदिवासी, लोक और पारंपरिक कलाओं में योगदान के लिए एक महिला कलाकार को राष्ट्रीय देवी अहिल्याबाई पुरस्कार भी प्रदान किया।</strong></p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/politics/modi-was-speaking-from-the-heart-about-devi-ahilyabai-holkar-women-were-taking-pictures">अवसर महिला सशक्तिकरण का था, सामने प्रधानमंत्री देवी अहिल्याबाई होल्कर के बारे में अन्तः आत्मा से कह रहे थे, महिलाएं तस्वीर खींच रही थी</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>&#8216;महिला अधिकार&#8217; ही &#8216;मानव अधिकार&#8217; है ✍ बिहार में 8058 ग्राम पंचायतों में ​4209 में महिला मुखिया,​ लेकिन पंचायती राज कार्यक्रम में मंच पर पुरुषों का कब्ज़ा​ और महिलाएं जमीन पर 😢</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/womens-rights-are-human-rights-in-the-world</link>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 28 Apr 2025 12:09:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
		<category><![CDATA[bihar]]></category>
		<category><![CDATA[empowermnent]]></category>
		<category><![CDATA[madhubani]]></category>
		<category><![CDATA[panchayat]]></category>
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		<category><![CDATA[prime minister]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>मधुबनी (बिहार) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के महामहिम आरिफ़ मोहम्मद खान के साथ-साथ मंच पर उपस्थित सभी गणमान्य लोगों के सामने लाल, पीली, हरी, बैगनी रंगबिरंगी साड़ियों में, भर मांग सिन्दूर भरी बिहार की इन महिलाओं को शायद मालुम नहीं होगा कि भारत में ना सही, आज भी विश्व के अनेकों भाग में जब [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/womens-rights-are-human-rights-in-the-world">&#8216;महिला अधिकार&#8217; ही &#8216;मानव अधिकार&#8217; है ✍ बिहार में 8058 ग्राम पंचायतों में ​4209 में महिला मुखिया,​ लेकिन पंचायती राज कार्यक्रम में मंच पर पुरुषों का कब्ज़ा​ और महिलाएं जमीन पर 😢</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मधुबनी (बिहार) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के महामहिम आरिफ़ मोहम्मद खान के साथ-साथ मंच पर उपस्थित सभी गणमान्य लोगों के सामने लाल, पीली, हरी, बैगनी रंगबिरंगी साड़ियों में, भर मांग सिन्दूर भरी बिहार की इन महिलाओं को शायद मालुम नहीं होगा कि भारत में ना सही, आज भी विश्व के अनेकों भाग में जब महिलाएं बोलती हैं, तो उस देश के पुरुष ही नहीं, पूरे विश्व के पुरुष उनकी बातों को तन्मयता के साथ सुनते हैं। इन महिलाओं को यह भी मालूम नहीं होगा कि विश्व के एक कोने में एक महिला अपने देश (अमेरिका) ही नहीं, बल्कि विश्व की महिलाओं के लिए कही थी &#8216;महिला अधिकार ही मानव अधिकार है।&#8221;</strong></p>
<p>यह बात इस मंच पर लागू नहीं होता है क्योंकि यह बिहार है। बिहार में पुरुष प्रधानता अधिक है। मंच के सामने बैठी महिलाओं को शायद यह नहीं मालुम होगा कि जिस अवसर पर प्रधानमंत्री बिहार के इस मिथिला क्षेत्र में प्रदेश के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ-साथ उनके मंत्रिमंडल और केंन्द्रीय मंत्री मंच का शोभा बढ़ा रहे हैं ताकि किसी भी तरह प्रधानमंत्री की नज़रों में आएं, बरकार रहें, यह अवसर पंचायत राज का सम्मेलन वाला अवसर है। लेकिन दुर्भाग्य यह है कि बिहार में प्रजातंत्र की पहली सीढ़ी (पंचायत) पर प्रदेश की महिलाओं का पुरुषों से अधिक भागीदारी होते हुए भी वे नीचे जमीन पर बैठी हैं। क्योंकि वे सभी औरत हैं, अशिक्षित हैं, अर्थ से कमजोर हैं। वे बोल नहीं सकती पुरुषों के सामने, न तो घरों और ना ही बाहर में। दृष्टान्त सामने हैं। समय दूर नहीं है जब बिहार में महिलाओं की यह दुर्दशा एक गहन शोध का विषय होगा। </p>
<p>2020 की गर्मियों में, जब कोविड-19 महामारी अपने चरम पर थी, अमेरिका के पूर्व प्रथम महिला मिशेल ओबामा ने &#8216;गर्ल्स अप लीडरशिप समिट&#8217; में बोलते हुए लड़कियों और युवा महिलाओं के लिए शिक्षा का समान पहुँच का आह्वान करते अपनी आवाज बुलंद की।  मिशेल ओबामा ने कहा कि &#8220;जब हम लड़कियों को सीखने का अवसर देते हैं, तो हम उन्हें अपनी क्षमता को पूर्ण करने, स्वस्थ परिवार बनाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए अपने देश की अर्थव्यवस्था में योगदान करने का अवसर देते हैं।&#8221; जब मिशेल ओबामा बोल रही थीं, उस वक्त विश्व के सभी पुरुष उनकी आवाज सुन रहे थे। </p>
<figure id="attachment_6396" aria-describedby="caption-attachment-6396" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182404.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182404.jpg" alt="" width="2200" height="1395" class="size-full wp-image-6396" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182404.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182404-300x190.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182404-1024x649.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182404-768x487.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182404-1536x974.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182404-2048x1299.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6396" class="wp-caption-text">प्रधानमंत्री 24 अप्रैल, 2025 को बिहार के मधुबनी में राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस कार्यक्रम में</figcaption></figure>
<p><strong>इसी तरह, अमेरिका के प्रथम महिला के रूप में अपने कार्यकाल की शुरुआत में, हिलेरी क्लिंटन ने महिलाओं के लिए सबसे प्रसिद्ध भाषण दी । बीजिंग में महिलाओं पर संयुक्त राष्ट्र के चौथे विश्व सम्मेलन में बोलते हुए, उन्होंने अपनी भाषा को संयमित करने के दबावों को दरकिनार करते हुए महिलाओं के प्रति दुनिया भर में हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई। हिलेरी क्लिंटन ने कहा, &#8220;अब समय आ गया है कि हर जगह महिलाओं के हित में काम किया जाए। अगर हम महिलाओं के जीवन को बेहतर बनाने के लिए साहसिक कदम उठाते हैं, तो हम बच्चों और परिवारों के जीवन को भी बेहतर बनाने के लिए साहसिक कदम उठाने होंगे। यानी, उनके अनुसार, &#8216;महिला अधिकार ही मानव अधिकार है।&#8217; </strong></p>
<p>आज़ादी के बाद विगत 78 वर्षों में बिहार में (अपवाद छोड़कर) शायद ही कोई महिला उठ पायी जो विश्व की अन्य महिला वक्ताओं &#8211; सोजर्नर ट्रुथ, मलाला यूसुफ़ज़ी, मिशेल ओबामा, चिमामांडा नगोजी अदिची, एम्मा वाटसन, एमेलिन पैंकहर्स्ट, सुसान बी. एंथनी, एमेलिन पैंकहर्स्ट आदि &#8211; के जैसी बनकर अपने ही प्रदेश की महिलाओं का भाग्य बदलने में आगे आयी होंगी। यह अलग बात है कि बिहार की सैकड़ों नहीं, हज़ारों महिलाएं आज अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, जर्मनी, स्विटरलैंड और न जाने किन-किन देशों में रहती हैं। मधुबनी भी अछूता नहीं होगा। यह तस्वीर गवाह है कि बिहार की महिलाओं को अपनी बात खुद बोलना होगा। अन्यथा सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के पंचायतों में 55 फीसदी हिस्सा होने के बाद भी, पंचायत दिवस के सम्मलेन में नीचे जमीन पर ही बैठी रह जाएँगी और मंच पर आधिपत्य पुरुष नेताओं का बरकरार रहेगा। </p>
<p>पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मधुबनी आये थे। प्रदेश के विद्वान, विदुषियों से लेकर लेखक, लेखिकाओं तक, नेताओं से लेकर कार्यकर्ताओं तक, मंत्रियों से लेकर मुख्यमंत्री तक, अधिकारियों से लेकर चपरासियों तक, संचार साधनों में दिल्ली-कलकत्ता के अख़बारों के मधुबनी में पदस्थापित स्ट्रिंगरों से लेकर सम्पादकों तक &#8211; सभी अपनी-अपनी नजरों से सम्मानित प्रधानमंत्री का कार्यक्रम देखे, सुने, लिखे। लेकिन मेरा ध्यान दो चीजों पर अटक गया। </p>
<p><strong>एक: </strong>हरी झंडी लिए प्रधानमंत्री जब ऑनलाइन एक रेल सेवा का उद्घाटन कर रहे थे, मंच पर सिर्फ &#8216;पुरुषों&#8217; का एकाधिकार था। कम से कम रेलगाड़ी (स्त्रीलिंग) के सम्मानार्थ मंच पर एक भी महिला को स्थान दे देते। प्रदेश में शायद एक भी महिला उस योग्य उन महात्मनों की नज़रों में नहीं थी, जो मंच पर प्रधानमंत्री, प्रदेश के लाट साहेब. मुख्यमंत्री या अन्य &#8216;स्वयंभू बिहार के भाग्य विधाताओं के साथ खड़ी हो सकें। सुनते हैं, प्रधानमंत्री की अगुआई में बिहार ही नहीं, देश में महिला सशक्तिकरण पर ग्रन्थ लिखे जा रहे हैं। </p>
<p><strong>दो:</strong> हज़ारों की संख्या में लाल, पीली, हरी, बैगनी, सफ़ेद, रंग-बिरंगी साड़ियों में महिलाओं की उपस्थिति दिखी। यह नहीं कहूंगा की बिहार के पुरुष नहीं थे, लेकिन महिलाओं की तुलना में पुरुषों की उपस्थिति खल रही थी। इतना ही नहीं,  जनता जीव क्रेन प्राइवेट लिमिटेड के स्वामित्व वाले कारण पचास फुट लम्बे डंडे पर कैमरा बंधा दिखा, ताकि तस्वीरों की किल्लत नहीं हो देश दुनिया को दिखने के लिए। अवसर था पंचायती राज दिवस को मनाना जिसमें प्रधानमंत्री ने कहाँ कि पूरा देश मिथला और बिहार से जुड़ा हुआ है। </p>
<figure id="attachment_6397" aria-describedby="caption-attachment-6397" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182418.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182418.jpg" alt="" width="2200" height="1538" class="size-full wp-image-6397" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182418.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182418-300x210.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182418-1024x716.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182418-768x537.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182418-1536x1074.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182418-2048x1432.jpg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182418-100x70.jpg 100w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6397" class="wp-caption-text">24 अप्रैल, 2025 को बिहार के मधुबनी में विभिन्न विकास परियोजनाओं के उद्घाटन, शिलान्यास और राष्ट्र को समर्पण के अवसर पर एकत्रित होते हुए। इस अवसर पर प्रधानमंत्री संबोधित करते हुए।</figcaption></figure>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का भी नाम लिए, राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के पुण्यतिथि पर भी श्रद्धांजलि दिए। यह भी कहे कि प्रदेश के विकास के लिए हज़ारों-हज़ार करोड़ रुपए की परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन भी किये। यह भी ध्यान आकर्षित किये कि भारत का तीव्र विकास तभी संभव है जब इसके गांव मजबूत हों और पंचायती राज की अवधारणा इसी भावना में निहित है। प्रधानमंत्री यह भी कहे कि ग्राम पंचायतों के सामने सबसे बड़ी समस्या भूमि विवाद से जुड़ी है। उन्होंने इस बात पर अक्सर असहमति जताई कि कौन-सी भूमि आवासीय है, कृषि योग्य है, पंचायत के स्वामित्व वाली है या सरकारी स्वामित्व वाली है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस समस्या के समाधान के लिए भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया जा रहा है, जिससे अनावश्यक विवादों को प्रभावी ढंग से हल करने में मदद मिली है।</p>
<blockquote><p>लेकिन मोदी जी वह नहीं कहे जो राष्ट्र के प्रधानमंत्री के रूप में उन्हें कहना चाहिए था। बिहार के लोगों से, खासकर महिलाओं से यह नहीं पूछे की आखिर प्रदेश में शिक्षा का दर अन्य प्रदेशों की तुलना में कम क्यों है? उन्होंने यह भी नहीं कहा कि भारत सरकार प्रदेश में शिक्षा को बढ़ने के लिए अनेकानेक कार्यक्रम चला रही है। हम चाहते हैं कि प्रत्येक घर का बच्चा स्वयं चलकर विद्यालय तक पहुंचे &#8211; बिना किसी लोभ के। </p></blockquote>
<p>मोदी जी को यह भी पूछना चाहिए की क्या आज़ादी के 78 वर्ष बाद भी सरकार, या शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोग आपके बच्चों को भोजन पर लुभा कर, टिफिन पर लुभाकर, साईकिल पर लुभाकर, या ने सामग्रियों का लुभावना देकर विद्यालय बुलाये, तभी बच्चे आएंगे। हम नारा देते थक गए कि पढ़ेगा इण्डिया तो बढ़ेगा इण्डिया&#8217;, लेकिन आप तो माता है, पहली शिक्षिका है घर-समाज की; फिर आप अपने कर्तव्यों का पालन क्यों नहीं करती? आपके बच्चे पढ़ेंगे तो आपका ही विकास पहले होगा, समाज और राष्ट्र का विकास बाद में। </p>
<blockquote><p>राष्ट्र के एक अभिभावक के रूप में मिथिला की भूमि पर, जहाँ आज शायद ही लोग अपनी बेटियों का नाम &#8216;सीता&#8217; रखते हैं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह पूछना चाहिए था कि बिहार के सभी 38 जिलों में, सभी 45103 गांव में आज भी इतनी दर्दनाक स्थिति क्यों है? आज़ादी के बाद विगत 78 वर्षों में केंद्र सरकार की ओर से गंगा की धारा जैसा पानी बिहार के विकास में खर्च किया गया है। भारत सरकार ही नहीं, प्रदेश की सरकार के वित्त विभाग के पास उपलब्ध दस्तावेजों में सभी अंकित है। लेकिन वे इस बात को प्रदेश के मुख्यमंत्री से लेकर शहरी और ग्रामीण विकास मंत्री तक, जिलों में पदस्थापित भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों से पूछने की हिम्मत नहीं किये कि आखिर पैसे कहाँ जाते हैं ? </p></blockquote>
<p>मुद्दत पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने कहने की हिम्मत किये थे कि &#8216;हम अगर एक रुपया भेजते हैं गाँव के एक व्यक्ति के विकास के लिए तो उसे दस नया पैसा ही मिल पाता है, वह भी बहुत मशक्कत के बाद। शेष नब्बे पैसे रास्ते में खा लेते हैं लोग &#8211; यह दुर्भाग्य है। हमें यकीन है कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बात को पूछते, राष्ट्र के हेडमास्टर के रूप में, तो शायद मंच पर खड़े किसी भी व्यक्ति के मुंह से आवाज नहीं निकलती। प्रदेश के मुख्यमंत्री सहित सभी मूकबधिर हो जाते। लेकिन उन्होंने नहीं पूछा, अलबत्ता वे कहते रहे &#8216;हमने यह किया, हमने वह किया&#8217;, और महिला विहीन मंच के नीचे दूर तक बांस के बेड़ा के बाद बैठी महिलाएं ताली बजाती रहीं, क्योंकि कैमरा उनके ऊपर था और पंचायत के मुखिया से लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री की निगाहें उन पर रुकी थी। </p>
<figure id="attachment_6398" aria-describedby="caption-attachment-6398" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182401.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182401.jpg" alt="" width="2200" height="1575" class="size-full wp-image-6398" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182401.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182401-300x215.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182401-1024x733.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182401-768x550.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182401-1536x1100.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182401-2048x1466.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6398" class="wp-caption-text">प्रधानमंत्री 24 अप्रैल, 2025 को बिहार के मधुबनी में अमृत भारत एक्सप्रेस और नमो भारत रैपिड रेल को हरी झंडी</figcaption></figure>
<p>प्रधानमंत्री अपने कार्यों की लम्बी सूची पढ़ रहे थे, वे और उनकी सरकार क्या की, क्या कर रही है, कंठस्त रूप में कहते जा रहे थे। यह भी पूरे जोर से कहे कि सरकार महिलाओं की आय बढ़ाने और रोजगार तथा स्वरोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए मिशन मोड में काम कर रही है। फिर बिहार में &#8216;जीविका दीदी&#8217; कार्यक्रम पर चर्चा किये और कहे कि यह कार्यक्रम अनेक महिलाओं के जीवन को बदल दिया है। फिर पैसे की बात किये और कहे कि आज बिहार में महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को लगभग 1,000 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है जो महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण को और मजबूत करेगा और देश भर में 3 करोड़ लखपति दीदी बनाने के लक्ष्य में योगदान देगा। </p>
<p><strong>बिहार में करीब 8053 ग्राम पंचायत, 533 पंचायत समिती और 38 जिला परिषद् कार्यरत हैं। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि पंचायत राज सम्मेलन के अवसर पर जहाँ सरकारी आंकड़ों के मुताबिक बिहार की महिलाएं की स्थानीय सरकारों में भागीदारी 55.35 प्रतिशत बता रही है। वैसे पंचायत चुनाव के आंकड़े बताते हैं कि बिहार में त्रिस्तरीय ग्राम पंचायत और ग्राम कचहरी के कुल 247671 पदों में से कुल 110964 पद महिलाओं के लिए आरक्षित किये गये थे। इन कुल पदों में महिलाओं ने 138503 पदों जीत दर्ज की थी। राज्य में 8058 ग्राम पंचायतों में महिला मुखिया की भागीदारी अभी 4209 है। </strong></p>
<p>इसमें अत्यंत पिछड़ा वर्ग की 692, अनुसूचित जाति की 692 और अनुसूचित जनजाति वर्ग की 52 मुखिया भी शामिल हैं। पंचायत समिति सदस्यों की कुल 11092 पदों में 5982 महिला प्रतिनिधि निर्वाचित हुई हैं। जिला परिषद सदस्य के 1159 पदों में 654 पदों पर महिलाओं ने जीत दर्ज की। राज्य की 8059 ग्राम कचहरियों में 3833 सरपंच महिला हैं और इसके अलावा ग्राम कचहरी के पंच के कुल 107431 पदों में 63974 पदों पर महिलाओं का कब्जा है। लेकिन इस मंच पर एक भी महिला नजर नहीं आयी। पुरुषों का बाहुल्य था।</p>
<p><strong>प्रधानमंत्री अगर प्रदेश में कालखंड में &#8216;रिकॉर्ड बनाने वाले मुख्यमंत्री&#8217; नीतीश कुमार से काश पूछते कि आखिर बिहार से श्रमिकों का, छात्र-छात्राओं का, नौकरी-पेशा ढूंढने वालों का नित्य पलायन क्यों हो रहा है? काश वे यह भी पूछते की केंद्रीय राशि मिलने के बाद भी बिहार प्रदेश के लोगों का वजन दूसरे प्रदेश की सरकार क्यों ढोयेगी?  बिहार एक ऐसा राज्य है जो अपनी समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है, लेकिन पिछले कई दशकों से एक गंभीर समस्या से जूझ रहा है और वो है- लोगों का पलायन और यह पलायन न केवल राज्य की सामाजिक और अर्थव्यवस्था ताने-बाने पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है, बल्कि बिहार के युवाओं के भविष्य पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा रहा है। हर साल बिहार के हजारों युवा बेहतर रोजगार की तलाश में दूसरे राज्य पहुंचते है। </strong></p>
<figure id="attachment_6399" aria-describedby="caption-attachment-6399" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182423-1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182423-1.jpg" alt="" width="2200" height="1369" class="size-full wp-image-6399" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182423-1.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182423-1-300x187.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182423-1-1024x637.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182423-1-768x478.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182423-1-1536x956.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182423-1-2048x1274.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6399" class="wp-caption-text">24 अप्रैल, 2025 को बिहार के मधुबनी में विभिन्न विकास परियोजनाओं के उद्घाटन, शिलान्यास और राष्ट्र को समर्पण के अवसर पर एकत्रित होते हुए। इस अवसर पर प्रधानमंत्री संबोधित करते हुए।</figcaption></figure>
<p>बिहार के विधानसभा में कुल 243 विधायक बैठे हैं। लोक सभा के प्रदेश 40 सांसदों को भेजता है। क्या कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या प्रदेश के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार के सांसदों से, विधायकों से यह प्रश्न पूछने की हिम्मत जुटा पाए कि उनके संसदीय अथवा विधानसभा  क्षेत्र के विकास के निमित्त जो राशि आवंटित की जाती है, उसका उपयोग क्यों नहीं होता? शायद नहीं। आज भारत सरकार और प्रदेश सरकार के कोषागारों के अलावे, प्रदेश के जिलाधिकारियों, उपायुक्तों के पास कितना हज़ार करोड़ रुपये पड़ा होगा, आंकना संभव नहीं है। आज से 10 वर्ष पूर्व, यानी 2013 में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री श्रीकांत कुमार जेना ने कहा था कि सांसदों द्वारा उपयोग नहीं की जाने वाली राशि आज लगभग 4300 करोड़ के आसपास है। इस मामले में न तो प्रधानमंत्री और ना ही लोकसभा या राज्य सभा के अध्यक्ष और सभापति सम्मानित सांसदों से पूछे कि जनता के कल्याणार्थ उन पैसों का सकारात्मक उपयोग क्यों नहीं होता?</p>
<p><strong>भूमि, कानून-व्यवस्था और पुलिस &#8216;राज्य का विषय&#8217; होने के बाद भी, एक अभिभावक के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विगत दस वर्षों में प्रदेश के मुख्यमंत्री से पूछते कि बिहार में रोजगार का सृजन क्यों नहीं होता? बिहार में उद्योगों का विकास क्यों नहीं होता? रुग्ण उद्योगों को जीवित क्यों नहीं किया जाता? जो पलायन का सबसे बड़ा कारण है। कृषि क्षेत्र उतना रोजगार उत्पन्न नहीं कर पाता, क्योंकि आधुनिक तकनीकों और पर्याप्त निवेश की कमी के कारण यह काफी हद तक सीमित है। वैसी स्थिति में युवाओं को रोजगार के लिए राज्य के बाहर देखना उनकी मजबूरी है।  लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बिहार में खराब शिक्षा व्यवस्था और कौशल विकास के स्तर में कमी पलायन का सबसे बड़ा कारण है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए युवा पीढ़ी को अन्य राज्यों जैसे दिल्ली, महाराष्ट्र, पंजाब और कर्नाटक की ओर रुख करना पड़ता है। लेकिन प्रधानमंत्री कभी नहीं पूछे की नीतीश जी ऐसी स्थिति क्यों है आपके राज्य में ? </strong> </p>
<p>सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बिहार से करीब 2.9 करोड़ लोग काम की तलाश में दूसरे राज्यों में पलायन कर चुके हैं, जो बिहार की कुल आबादी यानी लगभग 20 प्रतिशत है। इसकी जानकारी केंद्र सरकार ने पिछले साल संसद में राजद के राज्यसभा सांसद संजय यादव के सवाल के जवाब में दी थी। केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार, 26 जुलाई 2024 तक ई-श्रम पोर्टल पर लगभग 29.83 करोड़ लोगों ने अपना रजिस्ट्रेशन करवाया है, जिसमें से बिहार से 2.9 करोड़ लोग शामिल है। लेकिन, ये सिर्फ वे लोग हैं, जिन्होंने ई-श्रम पोर्टल पर अपना नाम रजिस्टर कराया है। पलायन करने वाले करोड़ों ऐसे हैं जिन्होंने कभी ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्टर ही नहीं किया। ऐसे में पलायन करने वालों का असली आंकड़ा काफी ज्यादा है। प्रधानमंत्री इस बात को नहीं पूछेंगे। </p>
<blockquote><p>इसका परिणाम यह हो रहा है कि पलायन के कारण बिहार में परिवार, समाज, गाँव सभी ध्वस्त होते चाहे जा रहे हैं। आज स्थिति यह है कि प्रदेश का प्रत्येक गाँव के दस घरों में आठ घरों में पुरुष दिखाई नहीं देते। आज बहुत वुजूर्गों को छोड़कर, सभी उम्र के पुरुष रोजी-रोटी की तलाश में गाँव की सीमा पार कर रहे हैं। गाँव में महिलाओं, बच्चियों की संख्या पुरुषों के तुलना में कई गुना अधिक है। वैसी स्थिति में जब दिल्ली, कलकत्ता, चेन्नई, कानपूर, नागपुर, लखनऊ, राजस्थान, पंजाब, जम्मू-कश्मीर के नेतागण बिहार आएंगे तो उनके सम्मानार्थ ताली बजने के लिए ही सही, राजनीतिक ठेकेदार ट्रक-बस में भरकर गावों से महिलाओं को ही लाएंगे न भीड़ जुटाने के लिए, ताली बजने के लिए। </p></blockquote>
<figure id="attachment_6400" aria-describedby="caption-attachment-6400" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182421.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182421.jpg" alt="" width="2200" height="1413" class="size-full wp-image-6400" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182421.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182421-300x193.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182421-1024x658.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182421-768x493.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182421-1536x987.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182421-2048x1315.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6400" class="wp-caption-text">24 अप्रैल, 2025 को बिहार के मधुबनी में विभिन्न विकास परियोजनाओं के उद्घाटन, शिलान्यास और राष्ट्र को समर्पण के अवसर पर एकत्रित होते हुए। इस अवसर पर प्रधानमंत्री संबोधित करते हुए।</figcaption></figure>
<p>पिछले वर्ष <strong>&#8216;डाउन टू अर्थ&#8217;</strong> पत्रिका में भारत में 2021 के दौरान सभी प्रवासियों में से करीब 10.7 फीसदी ने रोजगार संबंधी कारणों से पलायन किया था। इनके पलायन के लिए बेहतर रोजगार की तलाश, नौकरी में ट्रांसफर, काम से निकटता और अवसरों की कमी जैसे कारण जिम्मेदार थे। यह जानकारी अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) और इंस्टीट्यूट फॉर ह्यूमन डेवलपमेंट (आईएचडी) ने अपनी नई इंडिया एम्प्लॉयमेंट रिपोर्ट 2024 में साझा की है। रिपोर्ट के मुताबिक रोजगार के लिए पलायन करने वालों का यह अनुपात महिलाओं में बेहद कम महज 1.7 फीसदी था। वहीं देश में 49.6 फीसदी पुरुषों के पलायन के लिए रोजगार और उससे जुड़े कारण जिम्मेवार थे। आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि रोजगार संबंधी कारणों से प्रवास करने वाले पुरुषों के मामले में दिल्ली अव्वल है, जहां 87.1 फीसदी पुरुषों ने रोजगार की वजह से प्रवास किया था। वहीं कर्नाटक में यह आंकड़ा 63.2, जबकि महाराष्ट्र में 59.9 फीसदी दर्ज किया गया। </p>
<p>ऐसा ही कुछ देश के अन्य राज्यों में भी देखने को मिला है, जहां तेलंगाना में 56.2 फीसदी, छत्तीसगढ में 54.9 फीसदी, असम में 54.7 फीसदी, हरियाणा में 54.7 फीसदी, गुजरात में 51.4 फीसदी, मध्य प्रदेश में 50.9 फीसदी और तेलंगाना सहित आंध्र प्रदेश में 50.2 फीसदी पुरुषों के प्रवास के पीछे की वजह रोजगार रही। वहीं दूसरी तरफ रोजगार की वजह से प्रवास करने वाले पुरुषों का आंकड़ा उत्तरप्रदेश में सबसे कम 35.9 फीसदी दर्ज किया गया। इसी तरह केरल में 37.2 फीसदी, जम्मू कश्मीर में 38.3 फीसदी, बिहार में 39 फीसदी, और पंजाब में 44.4 फीसदी पुरुषों ने रोजगार कारणों से पलायन किया था। यदि पिछले दो दशकों में 2000 से 2021 के बीच भारत में प्रवासन की दर को देखें तो उसमें 2.1 फीसदी का मामूली इजाफा हुआ है। प्रवासन की यह दर 26.8 फीसदी से बढ़कर 28.9 फीसदी पर पहुंच गई है। वहीं दूसरी तरफ बिहार में प्रवासन की दर सबसे कम 14.2 फीसदी रिकॉर्ड की गई है। इसी तरह जम्मू और कश्मीर में यह आंकड़ा 22.1, असम में 23.7, तेलंगाना में 25.2 फीसदी, दिल्ली में 27.6, झारखंड में 28.3 और उत्तरप्रदेश में 28.5 फीसदी दर्ज किया गया है।</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/womens-rights-are-human-rights-in-the-world">&#8216;महिला अधिकार&#8217; ही &#8216;मानव अधिकार&#8217; है ✍ बिहार में 8058 ग्राम पंचायतों में ​4209 में महिला मुखिया,​ लेकिन पंचायती राज कार्यक्रम में मंच पर पुरुषों का कब्ज़ा​ और महिलाएं जमीन पर 😢</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>भारत में वेश्यावृति &#8220;कलंकित&#8221; है 😢 लेकिन उन महिलाओं का मत विधायकों और सांसदों का भविष्य निर्धारित करता है ✍</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 27 Dec 2024 04:47:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>रायसीना हिल (नई दिल्ली) : सन 1950 में भारत का संविधान लागू होने और स्वतंत्र भारत को एक गणराज्य घोषित होने के बाद विगत सितम्बर, 2024 तक संविधान में कुल 106 संशोधन किये गए हैं और उम्मीद है कि आने वाले दिनों में संविधान के पन्नों में कुछ और नए संशोधन किये जायेंगे। लेकिन, अगर सर्वोच्च न्यायालय [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/politics/prostitutes-and-battle-of-ballots">भारत में वेश्यावृति &#8220;कलंकित&#8221; है 😢 लेकिन उन महिलाओं का मत विधायकों और सांसदों का भविष्य निर्धारित करता है ✍</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>रायसीना हिल (नई दिल्ली) : सन 1950 में भारत का संविधान लागू होने और स्वतंत्र भारत को एक गणराज्य घोषित होने के बाद विगत सितम्बर, 2024 तक संविधान में कुल 106 संशोधन किये गए हैं और उम्मीद है कि आने वाले दिनों में संविधान के पन्नों में कुछ और नए संशोधन किये जायेंगे। लेकिन, अगर सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय देश में लगभग 30 लाख वेश्याओं के सामने चट्टान के तरह नहीं खड़ा हुआ होता, तो आज़ादी के 78 साल बाद भी देश के नेताओं की नजर में वेश्याओं का जीवन मूक-बधिर जानवरों के जीवन बराबर ही होता। वैसे सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद आज भी समाज के इन उपेक्षित महिलाओं का जीवन नारकीय जीवन से कम नहीं है, लेकिन न्यायालय का आदेश कुछ हद तक इन महिलाओं को &#8216;सांस लेने का संरक्षण&#8217; अवश्य दिया हैं। </strong></p>
<p>विगत दिनों एक महत्वपूर्ण आदेश में सर्वोच्च न्यायालय ने वेश्यावृत्ति को एक ‘पेशा’ के रूप में मान्यता दी है और कहा है कि इसके व्यवसायी कानून के तहत सम्मान और समान सुरक्षा के हकदार हैं। न्यायालय ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल किया। अनुच्छेद 142 सर्वोच्च न्यायालय को विवेकाधीन शक्ति प्रदान करता है, क्योंकि इसमें कहा गया है कि सर्वोच्च न्यायालय अपने अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करते हुए ऐसा आदेश पारित कर सकता है या ऐसा आदेश दे सकता है जो उसके समक्ष लंबित किसी मामले या मामले में पूर्ण न्याय करने के लिए आवश्यक हो। चार वर्ष पूर्व 2020 में, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने यौनकर्मियों को अनौपचारिक श्रमिकों के रूप में मान्यता दी थी ।</p>
<p>सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय की मुख्य बातें यह थी कि वेश्यावृत्ति में लिप्त महिलाएं कानून के समान संरक्षण के हकदार हैं और आपराधिक कानून सभी मामलों में ‘आयु’ और ‘सहमति’ के आधार पर समान रूप से लागू होना चाहिए। जब यह स्पष्ट हो जाता है कि सेक्स वर्कर वयस्क है और सहमति से भाग ले रही है, तो पुलिस को हस्तक्षेप करने या कोई आपराधिक कार्रवाई करने से बचना चाहिए। न्यायालय ने यह भी कहा कि अनुच्छेद 21 घोषित करता है कि कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही किसी व्यक्ति को उसके जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित किया जाएगा। यह अधिकार नागरिकों और गैर-नागरिकों दोनों को उपलब्ध है। न्यायालय का आदेश था कि जब भी किसी वेश्यालय पर छापा मारा जाता है, तो सेक्स वर्कर को “गिरफ्तार या दंडित या परेशान या पीड़ित” नहीं किया जाना चाहिए, “क्योंकि स्वैच्छिक सेक्स वर्क अवैध नहीं है और केवल वेश्यालय चलाना ही अवैध है”।</p>
<blockquote><p>न्यायालय ने यह भी स्वीकार किया कि वेश्याओं के बच्चे को केवल इस आधार पर माँ से अलग नहीं किया जाना चाहिए कि वह देह व्यापार में है। मानव शालीनता और गरिमा की बुनियादी सुरक्षा वेश्याओं और उनके बच्चों के लिए भी है। इसके अलावा, अगर कोई नाबालिग वेश्यालय में या वेश्याओं के साथ रहता हुआ पाया जाता है, तो यह नहीं माना जाना चाहिए कि बच्चे की तस्करी की गई है। अगर वेश्या दावा करता है कि वह उसका बेटा/बेटी है, तो यह निर्धारित करने के लिए परीक्षण किए जा सकते हैं कि क्या दावा सही है और अगर ऐसा है, तो नाबालिग को जबरन अलग नहीं किया जाना चाहिए। चिकित्सा देखभाल: यौन उत्पीड़न के शिकार सेक्स वर्करों को तत्काल चिकित्सा-कानूनी देखभाल सहित हर सुविधा प्रदान की जानी चाहिए। मीडिया की भूमिका: मीडिया को गिरफ्तारी, छापेमारी और बचाव अभियान के दौरान सेक्स वर्करों की पहचान उजागर न करने के लिए “अत्यंत सावधानी बरतनी चाहिए, चाहे वे पीड़ित हों या आरोपी और ऐसी कोई भी तस्वीर प्रकाशित या प्रसारित न करें जिससे ऐसी पहचान उजागर हो। </p></blockquote>
<p>यह तो संवैधानिक बातें हैं। अब राजनीतिक और प्रशासनिक बातों के लिए देश की राजधानी दिल्ली के कर्तव्य पथ के रास्ते रायसीना हिल पर चलते हैं और इस बात पर विचार करते हैं कि आज़ाद भारत में देश के लगभग 2.63 लाख पंचायतों, 787 जिलों, 28 राज्यों और आठ केंद्र शासित प्रदेश के रास्ते भारत के लोकसभा और राज्य सभा में बैठने वाले विधायक अथवा सांसद इन वेश्याओं के बारे में सोचे हैं कभी? शायद नहीं। </p>
<p>गृह मंत्री, प्रधानमंत्री और राष्ट्रूपति कार्यालय को जोड़ने वाली रायसीना हिल सड़क के बीचो बीच खड़े एक वरिष्ठ राजनेता कहते हैं: &#8220;मैं पांचवी लोक सभा से अठारहवीं लोकसभा तक आम चुनाव के साथ-साथ राज्यों के विधान सभाओं का चुनाव देखा हूँ। सन 1971 में संपन्न लोक सभा के कुल 518 सदस्यों की संख्या में तत्कालीन कांग्रेस पार्टी को 352 स्थान मिले थे और श्रीमती इंदिरागांधी प्रधानमंत्री कार्यालय में विराजमान हुई। करीब 53-साल बाद विगत 18 वें लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी संसद के कुल 543 स्थानों में 240 स्थान जीतकर प्रधानमंत्री कार्यालय तीसरे बार पहुंचे। लेकिन, पांचवीं लोक सभा से आज 18वीं लोक सभा के साथ साथ राज्यों के विधान सभाओं अथवा ने निर्वाचित निकायों में चुनकर आने वाले प्रतिनिधियों को कभी मैं इन वेश्याओं के दरवाजे पर मत मांगने जाते नहीं देखा। यह अलग बात है कि वर्षों तक काले अक्षरों वाली निर्वाचन सूचियों में इनका नाम दिखा नहीं।&#8221;</p>
<blockquote><p>कोई अस्सी बसंत की राजनीतिक हवाओं का अनुभव रखने वाले नेताजी आगे कहते हैं: &#8220;कभी उनके बच्चों को अपने गोद में उठाकर प्यार करते, तस्वीर खिंचवाते नहीं देखा। कभी इन महिलाओं या उनके बच्चों के कल्याणार्थ संसद अथवा विधान सभाओं में आवाज उठाते नहीं देखा, सुना। जो कल भी सत्ता में थे, आज भी सत्ता में हैं, जो कल भी नौकरशाह थे, जो आज नौकरशाह हैं, अधिकारी है, पदाधिकारी हैं &#8211; इन वेश्याओं और उनके परिवार, बच्चों के लिए नहीं सोचे हैं।”“अगर भारत का न्यायालय नहीं होता, अगर न्यायालय में बैठे सम्मानित न्यायमूर्ति संवेदनशील नहीं होते, समाज का एक खास संवेदनशील वर्ग उन वेश्याओं के जीवन के प्रति विवेकहीन होता, तो शायद इन वेश्याओं का हाल आज और भी बद्तर होता। सांख्यिकी कितना सही है यह तो सरकार के विभाग बताएंगे, लेकिन मेरा मानना है कि भारत में आज भी 30 + लाख वेश्याएं देहव्यापार के क्षेत्र में कार्यरत हैं। सभी के पास आधार कार्ड है।  सभी के पास मतदान का पहचान पत्र है जो भारत का निर्वाचन आयोग द्वारा जारी है।&#8221;</p></blockquote>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.29.52-PM.png"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.29.52-PM.png" alt="" width="1255" height="707" class="alignright size-full wp-image-5979" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.29.52-PM.png 1255w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.29.52-PM-300x169.png 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.29.52-PM-1024x577.png 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.29.52-PM-768x433.png 768w" sizes="auto, (max-width: 1255px) 100vw, 1255px" /></a></p>
<p>वे आगे कहते हैं: &#8220;अब सवाल यह है कि जब इन वेश्याओं का नाम निर्वाचन सूची में नहीं छपता था, उस कालखंड की बात छोड़ भी दें, आज अगर ये सभी 30+ लाख वेश्याएं सामाजिक प्रथा के तहत मान्य नहीं हैं तो इनके मत कैसे मान्य हो सकते हैं जो इन नेताओं के भविष्य का निर्माण करते हैं? नेता लोग, मंत्री लोग, अधिकारी लोग इन विषयों के दरवाजे तक, कोठों पर जाना अपने व्यक्तित्व और पुरुषार्थ के विरुद्ध समझते हैं।”“आपने कभी राजनेताओं को इन मतदाताओं के घरों में खाना खाते देखा है ? इनके बच्चों को गोदी उठाते देखा है ? बीमार, बिलखती, कलपती इन महिलाओं को सांत्वना देते देखा है ? फिर इनके मतों का इतना मोल क्यों ? कभी यह नहीं सोचते कि उनके जय-विजय में इन 30+ लाख वेश्याओं के मतों का भी मोल है। इस दृष्टि से अगर वेश्या कलंकित है, तो इन नेताओं का जय-विजय होना भी कलंक के दायरे में ही है।&#8221; वर्तमान में देश के 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के विधान सभाओं और परिषदों के कुल 4557 विधायक (विधानसभा: 4131 + विधान परिषद: 245) और 788 सांसद (लोकसभा: 543 + राज्यसभा: 245) हैं। आज़ादी के बाद से पहला और अठाहरवीं लोकसभा / विधानसभाओं के बीच सदस्यों की गणना कर लें। </p>
<p>सरकारी आंकड़ों के अनुसार आंध्र प्रदेश- 320024, अरुणाचल प्रदेश- 2750, असम- 52625, बिहार- 161321, छत्तीसगढ़- 12500, गोवा- 5375, गुजरात- 146950, हरयाणा- 15500, हिमाचल प्रदेश- 5375, जम्मू एवं कश्मीर- 15500, झारखंड- 20000, कर्नाटक- 200701, केरल- 68750, मध्य प्रदेश- 144338, महाराष्ट्र- 401300, मणिपुर- 4875, मेघालय- 4250, नागालैंड- 6000, उड़ीसा- 45066, पंजाब- 45000, राजस्थान-167305, सिक्किम- 425, तमिलनाडु- 303750, त्रिपुरा- 1375, उत्तर प्रदेश- 271868, उत्तराखंड- 8125, पश्चिम बंगाल- 367058, चंडीगढ़- 10750, दमन और दीव- 493, दिल्ली- 16785 और पुडुचेरी- 1400 कुल : 2827534 वेश्याएं थी दस वर्ष पूर्व। जबकि UNAIDS का आंकड़ा यह कहता है कि भारत में 2016 तक 657829 वेश्याएं हैं। </p>
<p>बहरहाल, पिछले दशक में युवा लड़कियों की तस्करी में वृद्धि सरकारी और गैर सरकारी संगठन दोनों हलकों में चिंता का कारण बन रही है। नेपाल में STOP और MAITI जैसे गैर सरकारी संगठनों की रिपोर्ट है कि भारत में (सीमा पार और देश के अंदर) सबसे अधिक तस्करी वेश्यावृत्ति के लिए होती है। और वेश्यावृत्ति में तस्करी करने वालों में से 60 प्रतिशत 12 से 16 वर्ष की आयु वर्ग की किशोर लड़कियाँ हैं। इन आंकड़ों की पुष्टि महिला एवं बाल विभाग द्वारा उत्तर प्रदेश के 13 संवेदनशील जिलों में किए गए एक अध्ययन से होती है। इससे पता चलता है कि इस सर्वेक्षण का हिस्सा बनने वाली सभी यौनकर्मियों ने युवा लड़कियों के रूप में इस पेशे में प्रवेश किया था। कई ट्रांससेक्सुअल यौनकर्मी हैं। उन्हें जनता के विरोध का सामना करना पड़ता है, और रोजगार से वंचित होने पर वे भीख मांगते हैं और फिर सेक्स बाजार में प्रवेश करते हैं।बालिका वेश्याएं मुख्य रूप से निम्न-मध्यम आय वाले क्षेत्रों और व्यावसायिक जिलों में स्थित हैं और अधिकारी उन्हें जानते हैं। वेश्यालय चलाने वाले नियमित रूप से युवा लड़कियों को भर्ती करते हैं। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.31.05-PM.png"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.31.05-PM.png" alt="" width="1264" height="705" class="alignleft size-full wp-image-5980" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.31.05-PM.png 1264w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.31.05-PM-300x167.png 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.31.05-PM-1024x571.png 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.31.05-PM-768x428.png 768w" sizes="auto, (max-width: 1264px) 100vw, 1264px" /></a></p>
<p>बालिका वेश्याओं को सामान्य वेश्याओं, गायिकाओं और नर्तकियों, कॉल गर्ल, धार्मिक वेश्याओं या देवदासी और पिंजरे में बंद वेश्यालय वेश्याओं के रूप में वर्गीकृत किया गया है। महाराष्ट्र और कर्नाटक की सीमा से लगे जिले, जिन्हें &#8220;देवदासी बेल्ट&#8221; के रूप में जाना जाता है, में विभिन्न स्तरों पर तस्करी संरचनाएं संचालित होती हैं। यहां महिलाएं या तो वेश्यावृत्ति में हैं क्योंकि उनके पतियों ने उन्हें छोड़ दिया है, या फिर जबरदस्ती और धोखे से उनकी तस्करी की जाती है। कई देवदासियां देवी येल्लम्मा के लिए वेश्यावृत्ति में समर्पित हैं।बालिका वेश्याओं को सामान्य वेश्याओं, गायिकाओं और नर्तकियों, कॉल गर्ल, धार्मिक वेश्याओं या देवदासी और पिंजरे में बंद वेश्यालय वेश्याओं के रूप में वर्गीकृत किया गया है। महाराष्ट्र और कर्नाटक की सीमा से लगे जिले, ह्यूमन राइट्स वॉच के अनुसार, भारत में लगभग 15 मिलियन वेश्याएँ हैं। एशिया के सबसे बड़े सेक्स उद्योग केंद्र बॉम्बे में 100,000 से अधिक महिलाएं वेश्यावृत्ति में हैं। भारत, पाकिस्तान और मध्य पूर्व में वेश्यावृत्ति में लड़कियों को प्रताड़ित किया जाता है, आभासी कारावास में रखा जाता है, यौन शोषण किया जाता है और बलात्कार किया जाता है।</p>
<p>जिन्हें &#8220;देवदासी बेल्ट&#8221; के रूप में जाना जाता है, में विभिन्न स्तरों पर तस्करी संरचनाएं संचालित होती हैं। यहां महिलाएं या तो वेश्यावृत्ति में हैं क्योंकि उनके पतियों ने उन्हें छोड़ दिया है, या फिर जबरदस्ती और धोखे से उनकी तस्करी की जाती है। कई देवदासियां देवी येल्लम्मा के लिए वेश्यावृत्ति में समर्पित हैं।ह्यूमन राइट्स वॉच के अनुसार, भारत में लगभग 15 मिलियन वेश्याएँ हैं। एशिया के सबसे बड़े सेक्स उद्योग केंद्र बॉम्बे में 100,000 से अधिक महिलाएं वेश्यावृत्ति में हैं। भारत, पाकिस्तान और मध्य पूर्व में वेश्यावृत्ति में लड़कियों को प्रताड़ित किया जाता है, आभासी कारावास में रखा जाता है, यौन शोषण किया जाता है और बलात्कार किया जाता है। बालिका वेश्याएं मुख्य रूप से निम्न-मध्यम आय वाले क्षेत्रों और व्यावसायिक जिलों में स्थित हैं और अधिकारी उन्हें जानते हैं। </p>
<p><strong>भारत में यौन कार्य की वैधता पर सवाल उठाते हुए नैतिकता, किसी के शरीर पर स्वायत्तता, गरिमा, शालीनता, बेरोजगारी, गरीबी और हताशा के सवाल उठाए गए हैं। एक पक्ष का तर्क है कि चूंकि यौन कार्य अपरिहार्य है, इसलिए इसे कानूनी पवित्रता प्रदान की जानी चाहिए ताकि अन्य कारकों के अलावा महिला यौनकर्मियों के लिए सुरक्षित कामकाजी परिस्थितियों, न्यायसंगत मुआवजा और गरिमा के सम्मान के लिए एक आचार संहिता स्थापित की जा सके। विरोधी दृष्टिकोण इसे &#8216;वैध दुरुपयोग&#8217; कहता है और तर्क देता है कि सरकार को इस तरह के काम के खिलाफ कड़ा रुख अपनाना चाहिए क्योंकि यह मानवीय गरिमा को कम करता है, मानसिक स्वास्थ्य को कमजोर करता है और व्यक्तियों को वित्तीय लाभ के लिए अपने शरीर का उपयोग करने के लिए मजबूर करता है। महिला यौनकर्मी अपने उच्च जोखिम वाले यौन व्यवहार (जैसे, कंडोम के बिना सेक्स, कई भागीदारों के साथ सेक्स) और मादक द्रव्यों के सेवन के कारण एड्स, एसटीआई और सर्वाइकल कैंसर जैसी बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं। </strong></p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.31.22-PM.png"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.31.22-PM.png" alt="" width="1265" height="709" class="alignright size-full wp-image-5981" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.31.22-PM.png 1265w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.31.22-PM-300x168.png 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.31.22-PM-1024x574.png 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.31.22-PM-768x430.png 768w" sizes="auto, (max-width: 1265px) 100vw, 1265px" /></a></p>
<p>जो लोग ऐसे वातावरण में काम करते हैं उन्हें शारीरिक, भावनात्मक और मानसिक आघात का अनुभव होने की अधिक संभावना होती है, जिसका प्रभाव न केवल उन पर पड़ता है, बल्कि उनकी आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ता है। <br />
यह कहा जाता है कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने एक पायलट परियोजना शुरू की है, जिसे राष्ट्रीय महिला संसाधन केंद्र और राज्य महिला संसाधन केंद्र के साथ निकट समन्वय में सामुदायिक संगठनों, वकालत एवं अनुसंधान केंद्र (सीएफएआर) द्वारा संयुक्त रूप से क्रियान्वित किया जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक राज्यों में कमजोर और हाशिए पर पड़े समुदायों के लिए सामाजिक समावेश योजना की प्रक्रिया तैयार करना और यौनकर्मियों तथा यौन अल्पसंख्यकों को मुख्यधारा में लाना है। भारत सरकार को देह व्यापार के पेशे को वैध बनाने और यौनकर्मियों तथा उनके बच्चों के कल्याण के लिए ठोस कदम उठाने का सुझाव मिला है। भारतीय दंड संहिता द्वारा अनुपूरित अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम, 1956 वेश्यावृत्ति के उद्देश्य से बच्चों सहित मानव तस्करी को प्रतिबंधित करता है और प्रक्रियाएं निर्धारित करता है।</p>
<p>महिला एवं बाल विकास मंत्रालय &#8220;उज्जवला&#8221; को क्रियान्वित कर रहा है &#8211; तस्करी की रोकथाम और वाणिज्यिक यौन शोषण के लिए तस्करी के पीड़ितों के बचाव, पुनर्वास, पुनः एकीकरण और प्रत्यावर्तन के लिए एक व्यापक योजना। आज तक, इस योजना के तहत 151 सुरक्षात्मक और पुनर्वास गृहों सहित 273 परियोजनाओं को सहायता दी गई है। इन पुनर्वास केंद्रों को आश्रय और भोजन, कपड़े, चिकित्सा देखभाल, कानूनी सहायता, पीड़ितों के बच्चों के मामले में शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने के साथ-साथ पीड़ितों को वैकल्पिक आजीविका विकल्प प्रदान करने के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण और आय सृजन गतिविधियों को शुरू करने के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है। </p>
<p>भारत में वेश्यावृत्ति स्वयं &#8216;अवैध&#8217; या &#8216;कानूनी&#8217; नहीं है। इससे जुड़ी कुछ गतिविधियाँ हैं जिन्हें अनैतिक तस्करी (रोकथाम) अधिनियम, 1956 [आईटीपीए] के तहत अवैध घोषित किया गया है, जैसे दलाली करना, दलाली करना, वेश्यालय चलाना आदि। 2011 में, बुद्धदेव कर्मस्कर बनाम पश्चिम बंगाल राज्य का मामला सामने आया। सुप्रीम कोर्ट (एससी) ने माना कि यौनकर्मियों को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सम्मान का अधिकार है, जो जीवन और आजीविका का अधिकार सुनिश्चित करता है। इस फैसले के माध्यम से, भारत में यौनकर्मियों के अधिकारों से संबंधित एक रिपोर्ट का मसौदा तैयार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक पैनल का गठन किया गया था। केंद्र ने 2016 में सुप्रीम कोर्ट को बताया कि पैनल की सिफारिशों को मसौदा कानून में शामिल किया गया था। हालाँकि, तब से कोई कानून नहीं बनाया गया है।</p>
<p>वेश्यावृत्ति से संबंधित मौजूदा कानून यौनकर्मियों के अधिकारों के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियां पैदा करते हैं। यह पुलिस अधिकारियों और मजिस्ट्रेटों को यौनकर्मियों को बचाने और पुनर्वास करने की व्यापक शक्तियां प्रदान करता है, जिसका पुलिस अक्सर असंवेदनशील और अपमानजनक तरीके से दुरुपयोग करती है। भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) का उपयोग अक्सर यौनकर्मियों पर &#8220;सार्वजनिक अभद्रता&#8221; या &#8220;सार्वजनिक उपद्रव&#8221; जैसे अस्पष्ट अपराधों का आरोप लगाने के लिए किया जाता है, बिना स्पष्ट रूप से परिभाषित किए कि इनमें क्या शामिल है। यहां तक कि व्यक्तियों की तस्करी (रोकथाम, देखभाल और पुनर्वास) पर मसौदा विधेयक में समुदाय-आधारित पुनर्वास, पुनर्वास घरों के लिए धन और एक मशीनीकृत बचाव प्रोटोकॉल पर स्पष्ट दिशानिर्देश शामिल नहीं हैं।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.31.56-PM.png"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.31.56-PM.png" alt="" width="1261" height="705" class="alignright size-full wp-image-5982" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.31.56-PM.png 1261w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.31.56-PM-300x168.png 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.31.56-PM-1024x572.png 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.31.56-PM-768x429.png 768w" sizes="auto, (max-width: 1261px) 100vw, 1261px" /></a></p>
<p><strong>2022 में, संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत प्रदत्त अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए, सुप्रीम कोर्ट की तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने दस दिशानिर्देश जारी किए, जिन्होंने यौन कार्य को एक पेशे के रूप में मान्यता दी और कहा कि यौनकर्मी कानून के तहत सम्मान और समान सुरक्षा के हकदार हैं। हालाँकि, ये दिशानिर्देश अस्थायी हैं और केंद्र द्वारा किसी भी समय इन्हें खारिज किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा, &#8221;यह कहने की जरूरत नहीं है कि पेशे के भारत में पहचानी गई 8.25 लाख महिला यौनकर्मियों (एफएसडब्ल्यू) में से आधे से अधिक पांच दक्षिणी राज्यों &#8211; आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और तेलंगाना से हैं। आंध्र प्रदेश में 1.33 लाख यौनकर्मी हैं जबकि कर्नाटक में 1.2 लाख हैं। उत्तर प्रदेश में 22,060 और नई दिल्ली में 46,787 एफएसडब्ल्यू हैं।</strong></p>
<p>बावजूद, इस देश में प्रत्येक व्यक्ति को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सम्मानजनक जीवन का अधिकार है। इस देश में सभी व्यक्तियों को जो संवैधानिक सुरक्षा दी गई है, उसे उन अधिकारियों द्वारा ध्यान में रखा जाएगा जिनका अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम, 1956 के तहत कर्तव्य है। भारत की तरह दुनिया भी वेश्यावृत्ति को कानूनी पेशे के रूप में मान्यता देने को लेकर बंटी हुई है। उरुग्वे, नीदरलैंड, जर्मनी, तुर्की और हंगरी जैसे कुछ देशों में, यौन कार्य न केवल कानूनी है बल्कि संगठित और विनियमित है। जबकि ईरान जैसे कुछ देशों में बार-बार अपराध करने वालों को फाँसी भी दी जा सकती है।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/5.png"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/5.png" alt="" width="1250" height="700" class="alignright size-full wp-image-5983" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/5.png 1250w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/5-300x168.png 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/5-1024x573.png 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/5-768x430.png 768w" sizes="auto, (max-width: 1250px) 100vw, 1250px" /></a></p>
<p>शीर्ष अदालत ने अब कहा है कि यौनकर्मी कानून के समान संरक्षण के हकदार हैं, पुलिस से उन मामलों में हस्तक्षेप करने या कोई आपराधिक कार्रवाई करने से बचने की अपेक्षा की जाती है जहां यह स्पष्ट है कि यौनकर्मी वयस्क है और सहमति से भाग ले रही है। शीर्ष अदालत के आदेश में कहा गया है कि यौनकर्मियों को पुलिस द्वारा परेशान, गिरफ्तार, दंडित या प्रताड़ित नहीं किया जाना चाहिए। सरकार भी, कठिन समय के दौरान यौनकर्मियों के समुदाय के बचाव में आई है। उदाहरण के लिए, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, सरकार ने कोविड-19 महामारी के दौरान यौनकर्मियों को सूखा राशन वितरित किया। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली पीठ के ताजा आदेश से इस पेशे से जुड़े लोगों को कई अन्य सुरक्षाएं दी गई हैं। पीठ ने कहा है कि यौनकर्मियों के बच्चों को जबरन उनसे अलग नहीं किया जाना चाहिए और यौनकर्मियों के साथ रह रहे किसी नाबालिग को तस्करी का शिकार नहीं माना जाना चाहिए।</p>
<p>अदालत ने पुलिस को यह भी निर्देश दिया कि यदि यौनकर्मी अपने खिलाफ हुए किसी यौन अपराध के बारे में शिकायत दर्ज करना चाहती हैं तो उनके साथ भेदभाव न किया जाए। इसने मीडिया से गिरफ्तारी, छापेमारी और बचाव कार्यों के दौरान यौनकर्मियों की पहचान उजागर न करने के लिए अत्यधिक सावधानी बरतने को कहा। इसने प्रशासन को यौन अपराध की शिकार किसी भी यौनकर्मी को तत्काल चिकित्सा-कानूनी देखभाल प्रदान करने का निर्देश दिया। इस बीच, वेश्यावृत्ति को एक पेशे के रूप में पहचानने और यौनकर्मियों को गरिमापूर्ण जीवन देने का निर्देश देने वाला सुप्रीम कोर्ट का आदेश पिछले चार वर्षों में दूसरा बड़ा फैसला है जो संविधान पीठ के बाद बड़ी संख्या में लोगों को समाज की मुख्यधारा में शामिल करने में मदद कर सकता है। शीर्ष अदालत ने 6 सितंबर, 2018 को फैसला सुनाया कि आईपीसी की धारा 377 के प्रावधान असंवैधानिक थे क्योंकि वे भारत में LGBTQIA+ समुदाय की स्वायत्तता, अंतरंगता और पहचान के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते थे।</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/politics/prostitutes-and-battle-of-ballots">भारत में वेश्यावृति &#8220;कलंकित&#8221; है 😢 लेकिन उन महिलाओं का मत विधायकों और सांसदों का भविष्य निर्धारित करता है ✍</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>&#8216;महिला ही महिलाओं की दुश्मन हैं&#8217; कहावत को झुठलाना होगा, खेत-खलिहानों की महिलाओं के हितों के बारे में भी सोचना होगा संसद में बैठने वाली महिलाओं को</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 08 Feb 2024 01:23:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चुटकुलानन्द की चिठ्ठी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली : सोचता हूँ कि आने वाले दिनों में जब 181 महिलाएं &#8216;देशी-विदेशी सुगन्धित इत्र, परफ्यूम से स्नान कर, वस्त्रों पर छिड़क कर संसद में बैठेंगी तो कहीं पुरुष पूछ न बैठें &#8216;यह कौन सा इत्र है मोहतरमा?&#8217; यह भी हो सकता कि महिलाओं की उतनी बड़ी तायदात देख वे हीन भावना से ग्रसित [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/chutkulanands-letter/the-saying-women-are-the-enemies-of-women-must-be-refuted">&#8216;महिला ही महिलाओं की दुश्मन हैं&#8217; कहावत को झुठलाना होगा, खेत-खलिहानों की महिलाओं के हितों के बारे में भी सोचना होगा संसद में बैठने वाली महिलाओं को</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली : सोचता हूँ कि आने वाले दिनों में जब 181 महिलाएं &#8216;देशी-विदेशी सुगन्धित इत्र, परफ्यूम से स्नान कर, वस्त्रों पर छिड़क कर संसद में बैठेंगी तो कहीं पुरुष पूछ न बैठें &#8216;यह कौन सा इत्र है मोहतरमा?&#8217; यह भी हो सकता कि महिलाओं की उतनी बड़ी तायदात देख वे हीन भावना से ग्रसित हो जाएँ। यह फिर सोचने लगे कि नरेंद्र मोदी पहले प्रधानमंत्री क्यों नहीं बने, महिला सशक्तिकरण के लिए विधेयक पहले क्यों नहीं आया? क्योंकि कुर्सियों पर महिला बैठेंगी तो कितना खूबसूरत संसद होगा। </strong></p>
<p>राष्ट्र की राजधानी नई दिल्ली में नवनिर्मित संसद भवन और कर्तव्य पथ के बीच रायसीना हिल की ओर टुकुर-टुकुर देख रहा था। जहाँ मैं बैठा था वही सामने उस क्षेत्र में अखबार बांटने वाले अख़बार विक्रेता अपनी साईकिल को रखते मुस्कुरा रहे थे। मेरे बाएं हाथ में मोबाईल कैमरा अपने स्टैंड से जुड़ा था और कुछ कागजात भी हाथ की उंगलियों के बीच लटका था। झोला बगल में रखा था। मन में कई बातें उठ रही थी। खुद प्रश्नकर्ता था, खुद उत्तरदाता भी। </p>
<p>फिर सोचने लगा सन 1911 के बाद किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि इतनी बुरी हार के एक साल बाद ही मोहम्मद गौरी वापस आएगा। लेकिन तक़रीबन 832 साल पहले सन 1192 में मोहम्मद गौरी लौट आया। समय बदल रहा था और हवाओं में गद्दारी की बू भी आने लगी थी। दृष्टान्त जयचंद की गद्दारी थी जो मोहम्मद गौरी से जा मिला था। इतिहासकार कहते हैं कि उन दिनों पृथ्वीराज चौहान के साथ मोहम्मद गौरी की लड़ाई हुई। कहते हैं 18वीं बार हुए उस युद्ध में मोहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज चौहान को मात दिया और उन्हें बंदी बनाकर अपने साथ ले गया। </p>
<p>मैं वायु सेना भवन-मौलाना आज़ाद रोड, उद्योग भवन, करियप्पा मार्ग से रफ़ी मार्ग के रास्ते आती-जाती वाहनों को देख रहा था। कभी कभार लाल-नीली बत्ती वाली पों-पां करती चार पहिया वाहन भी आ-जा रही थी। फिर सोचने लगा कि उस युद्ध में पृथ्वीराज चौहान के साथ उनके मित्र चंदबरदाई को भी बंदी बना लिया था मोहम्मद गौरी ने। इतिहासकार कहते हैं कि सजा के तौर पर गर्म सलाखों से पृथ्वीराज की आंखें फोड़ दी थी। </p>
<p>मेरे बाबूजी कभी कभार गीता के उपदेश और श्लोकों से अलग हटकर पृथ्वीराज चौहान की भी बातें कहते थे दृष्टान्त के तौर पर। बाबूजी कहते थे &#8216;हिम्मत-ए  मर्दा &#8211; मदद ए खुदा&#8217; पर हमेशा विश्वास रखना। हिम्मत कभी नहीं हारना। हिम्मत को कभी भी पस्त नहीं होने देना। जीवन में आगे ही बढ़ोगे। रफ़ी मार्ग पर बैठकर बाबूजी और उनका पटना का अशोक राजपथ बहुत याद आ रहा था। </p>
<p><strong>सोच रहा रहा उस घायल अवस्था में, जबकि आँखें फूटी हुई थी, पृथ्वीराज चौहान की हिम्मत पूजनीय है, वंदनीय है, तभी तो आज 832+ वर्ष के बाद भी वे जीवित हैं। यहाँ तो लोग बाग पार्थिव शरीर के अंतिम संस्कार में जब शमशान जाते हैं तो बात-बार घडी देखते रहते हैं। इतना ही नहीं, तेरहवीं के बाद तो अच्छे-अच्छे लोग अच्छे-अच्छों को भूल जाते हैं।  कहते भी हैं &#8216;लाइफ गोज ऑन।&#8221; खैर। </strong></p>
<p>मोहम्मद गोरी को पृथ्वीराज चौहान के शब्दभेदी बाण चलाने वाली कला के बारे में पता था। आखिरी इच्छा के रूप में चंदबरदाई के कहने पर इसके प्रदर्शन की इजाजत दे दी। यहीं पर “चार बांस, चौबीस गज, अंगुल अष्ट प्रमाण &#8230; .. ता ऊपर सुल्तान है, मत चूको चौहान” ऐतिहासिक शब्द, दोहा प्रयोग हुआ था जो आज भी जीवित है। मन ही मन हंसी भी आ रही थी। सामने बस स्टैंड के पास कुछ सुन्दर बालाएं कड़ी हो गई थी अब तक।  वे सभी दक्षिण दिल्ली की ओर जाने वाली बसों का इन्तजार कर रही थी। </p>
<p>पृथ्वीराज चौहान के लिए मोहम्मद गोरी की दूरी मापने के लिए चंदबरदाई का यह संकेत काफी था। मोहम्मद गौरी ने जैसे ही शाबाश बोला, आवाज सुनकर पृथ्वीराज चौहान ने शब्द भेदी बाण चला डाला और मोहम्मद गौरी की मृत्यु हो गई। </p>
<p>पीछे जलाशय, आगे रायसीना हिल पर राष्ट्रपति भवन, बाएं-दाहिने रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय, संसद के सामने इस कदर बैठना मेरे लिए भी उसी जीत के बराबर ही थी। मैं भी अशोक राजपथ पटना से जीवन की शुरुआत कर भारत के करोड़ों-करोड़ लोगों में, लाखो लाख अख़बार विक्रेताओं में अकेले समस्याओं से जूझते, समस्याओं को चीरते-फाड़ते मेहनत करते आगे निकला था तभी तो एक अखबार विक्रेता से देश-विदेश के पत्र-पत्रिकाओं, रेडियो, टीवी के लिए कहानी लिख सका और आज एक संवादताता के रूप में यहाँ बैठा था &#8211; फक्र से। मैं तो अपना पीठ खुद थपथपाता हूँ, सदैव। </p>
<p><strong>फिर सोचने लगा कि क्या भारत के &#8216;पुरुष सांसद&#8217; या &#8216;पुरुष विधायक&#8217; आने वाले दिनों में, संसद और विधान सभा में अपनी कुर्सी के बगल में बराबरी की ताकत रखने वाली महिलाओं को देख पाएंगे? भारत के इस पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं को तो &#8216;पैर की जूती&#8221; समझते हैं (अपवाद छोड़कर), कहते भी हैं खुलेआम। </strong></p>
<p>लड़कियों के ससुराल में जब बहु को बच्चा होता है तो बेटी होने पर लाखों यातनाएं आज भी देते हैं। सभी सास को &#8216;पोता&#8217; ही चाहिए। अब पढ़ी होती तो शायद समझ जाती कि उनके बेटे का क्रोमोजोम कमजोर है। शराब पीता है, सिगरेट पीता है तो क्रोमोजोम कहाँ से ताकतवर होगा। कमजोर होता है तो &#8216;हार&#8217; जाता है अपनी पत्नी के क्रोमोजोम से। स्वाभाविक है बेटा नहीं, बेटी होगी। </p>
<p>मन-ही-मन संसद के सामने बैठकर संसद भवन में रखी कुर्सियों को देख रहा था। सोच रहा था कि आने वाले दिनों में संसद में प्रत्येक चौथी कुर्सी के बाद महिला की कुर्सी होगी। अब तक सत्रह लोक सभा में महिला संसद किसी कोने में दिखती थी। </p>
<p>यह तो संसद की बात हुई अपना बिहार में 243 कुर्सी वाली विधान सभा में प्रत्येक तीसरी कुर्सी के बाद कोई माथे पर पल्लू लिए, तो कोई सलवार सूट में, कोई आधुनिक जींस और कुर्ती में, माथे पर काले चश्मा चढ़ाई महिलाएं जब पुरुष विधायक को दिखेंगी पुरुषों का क्या हाल होगा। उन्हें तो विधान सभा में &#8216;अपशब्द&#8217; के इस्तेमाल, मार-पीट, गाली-गलौज, कुर्सी &#8211; टेबुल का फेका फेंकी बंद करना होगा। &#8216;अपवाद&#8217; छोड़कर। </p>
<p>वजह भी है &#8211; आज कल तो संसद और विधान सभा की कार्रवाई लाइव दिखता है। उनके घर में उनकी पत्नी, उनके बच्चे सभी &#8216;पप्पा&#8217; का कमाल, धमाल देख्नेगे। क्योंकि अखबारवाला, टीवी वाला, खासकर कैमरामैन तो किसी का नहीं होता। अनेकानेक बातें मन में चल रही थी क्योंकि महिला आरक्षण बिल तो लोक सभा में पेश हो गया है 128 वे संविधान संशोधन विधेयक, 2023 के रूप में। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल इस ऐतिहासिक को किये थे। इस विधेयक के कानून बनने के बाद लोक सभा में 181 महिला सांसद हो जाएँगी। </p>
<figure id="attachment_5329" aria-describedby="caption-attachment-5329" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/02/Cover2-fotor.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/02/Cover2-fotor.jpg" alt="" width="2200" height="1321" class="size-full wp-image-5329" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/02/Cover2-fotor.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/02/Cover2-fotor-300x180.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/02/Cover2-fotor-1024x615.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/02/Cover2-fotor-768x461.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/02/Cover2-fotor-1536x922.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/02/Cover2-fotor-2048x1230.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5329" class="wp-caption-text">नए संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वर्तमान महिला सांसद</figcaption></figure>
<p><strong>बिल का उद्देश्य राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर नीति-निर्माण में महिलाओं की अधिक भागीदारी को सक्षम बनाना है। इसमें कहा गया है कि परिसीमन प्रक्रिया शुरू होने के बाद आरक्षण लागू होगा और 15 वर्षों तक जारी रहेगा। विधेयक के अनुसार, प्रत्येक परिसीमन प्रक्रिया के बाद लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों की अदला बदली होगी। पारित हो जाने के बाद परिसीमन प्रक्रिया शुरू होगी और उसके बाद महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित की जाएंगी। </strong></p>
<p>इस प्रक्रिया में बिहार की कुल 243 सीटों में से 81 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। 243 में से 38 सीटें अनुसूचित जाति और दो सीट अनूसूचित जनजाति के लिए पहले से ही आरक्षित हैं। इस तरह राज्य में कुल 121 सीटें आरक्षित हो जाएंगी, जो कुल सीटों का करीब 50 फीसदी है। <br />
इसी तरह, उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं। इममें से 84 सीटें अनुसूचित जाति के लिए और दो सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। महिला आरक्षण लागू होने के बाद 134 सीटें महिलाओं के लिए सुरक्षित हो जाएंगी। इस तरह 403 सीटों में से कुल 220 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएंगी। यह 50 फीसदी के मनोवैज्ञानिक स्तर से ज्यादा है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि 17वीं लोकसभा के लिए देश ने सबसे अधिक 78 महिला सदस्य चुनकर भेजी थीं । हाल ही में राज्यसभा में 61 नए सांसद चुने गए हैं। इनमें 4 महिला सांसद भी हैं। नई महिला सांसदाें के साथ ही संसद में कुल महिला सदस्यों की संख्या 103 हाे गई है। जिसमें लोकसभा में 78 और राज्यसभा में 25  महिला सांसद हैं। </p>
<p>राजस्थान से महिला सांसद जसकौर मीणा मानती है कि संसद में उनकी भागीदारी संसद में बढ़ती हुई उनकी भागीदारी का आजाद भारत में महिला सशक्तिकरण का एक बेजोड़ नमूना है । उन्होंने माना कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं की समाज में भागीदारी तेजी से बढ़ रही है। महिला सांसदों को सदन में प्रतिशत के रूप में देखें तो लोकसभा में 14.36% और राज्यसभा में 10% से अधिक महिला सदस्य हाे गई हैं। लोकसभा में 1951 से 2019 तक लगातार महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ी है। </p>
<p>नई नीति के मुताबिक आंध्रप्रदेश में कुल सीट 175 है और आरक्षण के बाद महिलाओं की संख्या 58 होगी। अरुणाचल प्रदेश में कुछ सीट 60 और आरक्ष्ण के बाद महिलाऐं 20 कुर्सियों पर बैठेंगी। असम में 126 कुल  सीटों में 42 सीट महिलाओं के लिए होंगी। बिहार में 243 में 81 स्थान महिलाओं के लिए, जबकि छत्तीसगढ़ में 90 में 30 सीट महिलाओं की होंगी। दिल्ली में 70 में 23 स्थान महिलाओं की होगी। गोआ में 40 में 13 स्थान महिलाओं के लिए। गुजरात में 182 सीटों में 61 सीट महिलाओं के लिए सुरक्षित होंगी। </p>
<p>इसी तरह हरियाणा में 90 में 30, हिमाचल प्रदेश में 68 में 23, जम्मू कश्मीर में 90 में 30 झारखंड में 81 में 27, कर्नाटक में 224 में 75, केरल में 140 में 47 और मध्यप्रदेश में 230 में 77 सीटें महिलाओं के लिए होंगी। महाराष्ट्र में 288 में 96, मणिपुर में 60 में 20, मेघालय में 60 में 20, मिजोरम में 40 में 13, नागालैंड में 60 में 20, ओडिशा में 147 में 49, पुडुचेरी में 30 में 10, पंजाब में 117 में 39, राजस्थान में 200 में 67, सिक्किम में 32 में 11, तमिलनाडु में 234 में  78,  तेलंगाना में 119 में 40, त्रिपुरा में 60 में 20, उत्तराखंड में 70 में 23 और पश्चिम बंगाल में 294 में 98 कुर्सियां महिलाओं के लिए। </p>
<p>लोकसभा के लिए निर्वाचित महिलाओं की सबसे कम संख्या 1977 में थी जब केवल 19 महिलाएँ निचले सदन तक पहुँचीं, जो कुल लोकसभा सीटों (उस समय 542) का केवल 3.50% थी। 1996 में सबसे अधिक 599 महिला उम्मीदवार मैदान में थीं, उसके बाद 2009 में 556 महिला उम्मीदवार और 2004 में 355 महिला उम्मीदवार मैदान में थीं। </p>
<p>चुनाव लड़ने में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों की तुलना में काफी कम रही है। नौवें आम चुनाव तक महिलाओं की भागीदारी पुरुषों की तुलना में 30 गुना कम थी, हालांकि दसवें आम चुनाव के बाद भागीदारी में सुधार हुआ। लेकिन मजेदार बात यह है कि पहले चुनाव से पंद्रहवीं लोकसभा के गठन तक महिला प्रतियोगियों की जीत का प्रतिशत हमेशा पुरुष प्रतियोगियों की तुलना में अधिक रहा है। </p>
<p><strong>आज की तारीख तक लोक सभा के लिए सत्रह आम चुनाव हुए हैं। पहला आम चुनाव 25 अक्टूबर, 1951 से 21 फरवरी, 1952 तक होने के बाद 17 अप्रैल, 1952 को पहला लोक सभा का गठन हुआ और लोक सभा का प्रथम सत्र 13 मई 1952 को आरम्भ हुआ। जी. वी. मावलंकर लोकसभा (15 मई 1952 – 27 फरवरी 1956) के प्रथम अध्‍यक्ष थे। इसके बाद दूसरा आम चुनाव 24 फरवरी से 14 मार्च, 1957 तक और तीसरा 19 से 25 फरवरी 1962 तथा चौथा 17 से 21 फरवरी 1967, पांचवां 1 से 10 मार्च 1971, छठा 16 से 20 मार्च 1977, सातवां 3 से 6 जनवरी 1980, आठवां 24 से 28 दिसम्बर 1984, नौवां 22 से 26 नवम्बर 1989, दसवां 20 मई से 15 जून 1991, ग्‍यारहवां 27 अप्रैल से 30 मई 1996, बारहवां 16 फरवरी से 23 फरवरी 1998, तेरहवां 5 सितंबर से 6 अक्टूबर 1999, चौदहवां 20 अप्रैल से 10 मई 2004, पंद्रहवाँ 16 अप्रैल से 13 मई 2009 के बीच, सोलहवाँ 7 अप्रैल 2014 से 12 मई 2014 के बीच और सत्रहवाँ आम चुनाव 11 अप्रैल से 19 मई 2019 के बीच हुआ था। और देश अठारहवाँ आम चुनाव के लिए सज्ज हो रहा है। </strong></p>
<p>वर्तमान लोकसभा का कार्यकाल 16 जून 2024 को समाप्त होने वाला है। पिछले आम चुनाव अप्रैल-मई 2019 में हुए थे। चुनाव के बाद, भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने केंद्र सरकार बनाई, जिसमें नरेंद्र मोदी दूसरी बार प्रधान मंत्री बने। सभी 543 निर्वाचित सांसद फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट वोटिंग का उपयोग करके एकल सदस्यीय निर्वाचन क्षेत्रों से चुने जाते हैं। संविधान के 104वें संशोधन ने उन दो सीटों को प्रभावी रूप से समाप्त कर दिया जो एंग्लो-इंडियन समुदाय के लिए आरक्षित थीं। आज लोक सभा में भारतीय जनता पार्टी  के 301 सदस्य हैं जबकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 53 सदस्य है।</p>
<p>विगत दिनों वरिष्ठ पत्रकार के.विक्रम राव  दृष्टान्त दिया था। लोकसभा से बड़ी संख्या में सदस्यों के निष्कासन पर ब्रिटिश विचारक जान स्टुअर्ट मिल का कथन अनायास ही याद आता है। उन्होंने कहा था : “निन्यानबे लोगों को भी यह अधिकार नही है कि वे किसी एक असहमत व्यक्ति की अभिव्यक्ति का अधिकार छीन लें।” वर्तमान संदर्भ में सांसदों को सदन से सस्पेंड करने का मतलब यह हुआ कि उनके लाखों वोटरों की आवाज दबाना। अब वे आम जन की आवाज नहीं उठा पाएंगे। इसीलिए राजनीति शास्त्र के छात्र होने के नाते, मेरा यह विचार है कि अध्यक्ष ओम विरला को ऐसा विरला निर्णय करने के पूर्व भली भांति परामर्श करना चाहिए था। आखिर संसद राष्ट्रीय इच्छा की अभिव्यक्ति का माध्यम तो ही है। </p>
<p>वे कहते हैं कि विगत दिनों के संसदीय हादसे से 15 मार्च 1989 की घटना याद आती है जब अध्यक्ष बलराम झाखड़ ने एक झटके में 63 सदस्यों को सदन से निष्कासित कर दिया था। यह वाकया इंदिरा गांधी की हत्या के ठीक बाद हुआ था। प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे। सुप्रीम कोर्ट के जज न्यायमूर्ति मनोहरलाल प्राणलाल ठक्कर की अध्यक्षता में न्यायिक जांच समिति बनी। इसमें कई तथ्यों का उल्लेख किया जो रोमहर्षक थे। </p>
<p>वे कहते हैं कि एक संदर्भ था कि न्यायमूर्ति ने संदेह की सुई दिवंगत प्रधानमंत्री के वर्षों तक निजी सचिव रहे राजिन्दर कुमार धवन की ओर दिखायी थी। हत्या के षड्यंत्र में धवन की संलिप्तता का जिक्र था। सदन में 63 सदस्यों ने इस मसले पर बवाल उठाया था। राजीव गांधी प्रधानमंत्री के रूप में अपने निजी सचिव पर कुछ भी सुनने के लिए तैयार नहीं थे। </p>
<p>नतीजन सदन में शोर शराबा हुआ था। अध्यक्ष बलराम झाखड ने सभी 63 को निष्कासित कर दिया। यह कदम झाखड ने नियम 373 के तहत उठाया था। अर्थात यदि लोकसभा स्पीकर को ऐसा लगता है कि कोई सांसद लगातार सदन की कार्रवाई बाधित कर रहा है तो वह उसे उस दिन के लिए सदन से बाहर कर सकते हैं, या बाकी बचे पूरे सेशन के लिए भी सस्पेंड कर सकते हैं। वहीं इससे ज्यादा अड़ियल सदस्यों से निपटने के लिए स्पीकर रूल 374 और 374-ए के तहत कार्रवाई कर सकते हैं। </p>
<p>लोकसभा स्पीकर उन सांसदों के नाम का ऐलान कर सकते हैं, जिसने आसन की मर्यादा तोड़ी हो या नियमों का उल्लंघन किया हो। जानबूझकर सदन की कार्यवाही में बाधा पहुंचाई हो। जब स्पीकर ऐसे सांसदों के नाम का ऐलान करते हैं, तो वह सदन के पटल पर एक प्रस्ताव रखते हैं। प्रस्ताव में हंगामा करने वाले सांसद का नाम लेते हुए उसे सस्पेंड करने की बात कही जाती है। इसमें सस्पेंशन की अवधि का जिक्र होता है। </p>
<p>यह अवधि अधिकतम सत्र के खत्म होने तक हो सकती है। सदन चाहे तो वह किसी भी समय इस प्रस्‍ताव को रद्द करने का आग्रह भी कर सकता है। ठीक 5 दिसंबर 2001 को रूल बुक में एक और नियम जोड़ा गया था। इसे ही रूल 374ए कहा जाता है। यदि कोई सांसद स्पीकर के आसन के निकट आकर या सभा में नारे लगाकर या अन्य प्रकार से कार्यवाही में बाधा डालकर जानबूझकर नियमों का उल्लंघन करता है तो उस पर इस नियम के तहत कार्रवाई की जाती है। </p>
<p>लोकसभा स्पीकर द्वारा ऐसे सांसद का नाम लिए जाने पर वह पांच बैठकों या सत्र की शेष अवधि के लिए (जो भी कम हो) स्वतः निलंबित हो जाता है। स्पीकर को किसी सांसद को सस्पेंड करने का अधिकार है, लेकिन सस्पेंशन को वापस लेने का अधिकार उसके पास नहीं है। यह अधिकार सदन के पास होता है। सदन चाहे तो एक प्रस्ताव के जरिए सांसदों का सस्पेंशन वापस ले सकता है।</p>
<p><strong>अब गौर कर लें इंदिरा गांधी हत्या पर हुई ठक्कर जांच समिति की रपट के उस वाक्य पर जिसमें धवन का उल्लेख था। न्यायमूर्ति ने कहा : “कई सूचक मिलते हैं, यह इंगित करते हैं कि प्रधानमंत्री की हत्या में धवन संलिप्त रहे।” इस वाकायांश पर पूरा सदन उत्तेजित हो गया था क्योंकि तब राजीव गांधी ने भी धवन को अपना विश्वस्त सहायक नियुक्त कर दिया था। बाद में धवन सांसद और मंत्री तक बने थे। अब इन 63 सांसदों का उत्तेजित होकर सदन में हंगामा करना स्वाभाविक था। पर अपने अपार (400 से अधिक सदस्यों) के बल पर राजीव गांधी ने 63 सांसदों को सदन के बाहर करा दिया।</strong></p>
<p>वह मसला तो आज की घटना की तुलना में बहुत कम गंभीर है। इस बार तो केवल चंद सिरफिरे युवाओं की बेजा और घृणित सस्ती हरकत के मामले पर सदन में रोष व्यक्त किया गया। तब तो (1989 में) प्रधानमंत्री की हत्या की न्यायिक जांच रपट में इन्दिरा गांधी के निजी सहायक धवन पर शक की सुई की चर्चा थी। </p>
<p>फिर भी तुलनात्मक रूप से देखें तो इतनी बड़ी संख्या में सांसदों का निष्कासन न तो तब (1989) और न तो अब (2023) में स्वीकार्य हो सकता है। अर्थात अब अध्यक्ष महोदय को स्वयं उपाय खोजने होंगे कि सदन की गरिमा संजोई रहे। आखिर इसका सीधा प्रभाव पड़ता है सामान्य वोटरों पर। कहा था डॉ. राममनोहर लोहिया ने कि “सड़क खामोश हो जाएगी तो संसद आवारा हो जाएगी।” आज ठीक उल्टा हो रहा है। संसद उद्विग्न हो रही है, तो वोटरों के असंतोष का उद्रेक तो बढ़ेगा ही। समाधान सदन में है। स्पीकर के पास है।</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/chutkulanands-letter/the-saying-women-are-the-enemies-of-women-must-be-refuted">&#8216;महिला ही महिलाओं की दुश्मन हैं&#8217; कहावत को झुठलाना होगा, खेत-खलिहानों की महिलाओं के हितों के बारे में भी सोचना होगा संसद में बैठने वाली महिलाओं को</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>75 वें गणतंत्र दिवस पर एक सवाल: क्या &#8216;सरला ग्रेवाल&#8217; भाप्रसे को छोड़कर आज़ाद भारत में कोई भी महिला कैबिनेट और गृह सचिव के लायक नहीं हुई?</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/no-woman-ias-in-independent-india-worthy-of-cabinet-and-home-secretary</link>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 25 Jan 2024 11:11:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली: स्वतंत्र भारत के 75 वे गणतंत्र दिवस के अवसर पर एक सवाल है भारत के राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू से। वही सवाल देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से है, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से है, गृहमंत्री अमित शाह से है, वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन् से है या उन सभी महानुभावों, मोहतरमाओं, राजनेताओं, अधिकारियों, पदाधिकारियों से जो देश के [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/no-woman-ias-in-independent-india-worthy-of-cabinet-and-home-secretary">75 वें गणतंत्र दिवस पर एक सवाल: क्या &#8216;सरला ग्रेवाल&#8217; भाप्रसे को छोड़कर आज़ाद भारत में कोई भी महिला कैबिनेट और गृह सचिव के लायक नहीं हुई?</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली: स्वतंत्र भारत के 75 वे गणतंत्र दिवस के अवसर पर एक सवाल है भारत के राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू से। वही सवाल देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से है, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से है, गृहमंत्री अमित शाह से है, वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन् से है या उन सभी महानुभावों, मोहतरमाओं, राजनेताओं, अधिकारियों, पदाधिकारियों से जो देश के प्रशासन, कानून व्यवस्था, प्रशासन से जुड़े हैं और सत्ता के गलियारे में क़ुतुब मीनार जैसा अस्तित्व रखते हैं।</strong>  </p>
<p><strong>क्या सुश्री सरला ग्रेवाल को छोड़कर आज़ाद भारत में विगत 77 वर्षों में कोई भी महिला भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी भारत सरकार के कैबिनेट सचिव और गृह सचिव की कुर्सी पर बैठने योग्य नहीं हुईं? </strong></p>
<p>इस पुरुष प्रधान नौकरशाही और राजनीतिक ब्रह्माण्ड में सुश्री सरला ग्रेवाल ही एक भाप्रसे के अधिकारी हो पायी जो कैबिनेट सचिव की कुर्सी तक पहुंची। अगर देश के वर्तमान प्रधानमंत्री की महिला सशक्तिकरण सम्बन्धी विभिन्न योजनाओं को देखें तो आखिर महिला भाप्रसे भी तो इसी देश की नागरिक है, मतदाता हैं और वे भी संविधान में प्रदत्त अधिकार-कर्तव्यों के अधीन हैं &#8211; फिर उनके साथ भेदभाव कैसा? प्रश्न जटिल अवश्य हैं लेकिन सोचनीय, शोधनीय भी हैं। </p>
<p>क्या महिला सशक्तिकरण की बात सिर्फ भारत के 664,369 गाँव में रहने वाली, खेतों की आड़ पर जीवन यापन करने वाली, पुरुषों की तुलना में 14.4 फीसदी कम साक्षरता का आंकड़ा (पुरुष: 84.7 फीसदी और महिला 70.3 फीसदी) वाला बोर्ड गर्दन में लटकाई महिलाओं के लिए ही है? </p>
<p>क्या भारत के शिक्षित, मेधावी, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वयं को, देश की गरिमा को स्थापित करने वाली महिलाएं उस सशक्तिकरण का हिस्सा नहीं है? घर में तो उन्हें &#8216;रसोई घर&#8217; में सीमित कर ही देते हैं परिवार के &#8216;पुरुष&#8217;, शैक्षिक रूप से अव्वल होने के बावजूद दफ्तर में भी &#8216;राजनीतिक मास्टर&#8217; और &#8216;पुरुष अधिकारी&#8217; &#8216;दरकिनार&#8217; कर देते हैं उन्हें ? फिर कैसा सशक्तिकरण? </p>
<p><strong>कहते हैं कि &#8220;भाप्रसे के अधिकारी (महिला सहित) इस संवर्ग के किसी भी पद को अपनी वरीयता एवं योग्यता के आधार पर पहुँच सकती हैं बशर्ते उन्हें किसी विभागीय कार्रवाई में सजा नहीं मिली हो या विजिलेंस क्लीयरेंस नहीं मिला हो को छोड़कर । विभागीय कार्रवाई और विजिलेंस क्लीयरेंस सबके लिए ज़रूरी है,&#8221; यह तो सत्यता का उत्कर्ष है।</strong> </p>
<p>परन्तु, केंद्रीय सतर्कता आयोग की &#8216;सतर्कता&#8217; पर कोई प्रश्नचिन्ह नहीं है। लेकिन अगर आज से 23-साल पहले 2001 में आयोग के तत्कालीन प्रमुख एन. विठ्ठल द्वारा केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के निदेशक पद पर नियुक्ति संबंधी केंद्र सरकार को प्रेषित &#8216;सिफारिश&#8217; को देखा जाय, तो इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि &#8216;कभी-कभी सतर्कता आयोग के आला अधिकारी भी पारदर्शी निर्णय नहीं लेते हैं। </p>
<p>ऐसा क्यों होता है यह वही जानते हैं या फिर जिनके कहने/सुनने पर निर्णय लिया जाता है, वे जानते हैं। और उनके उस निर्णय से किसी दूसरे अधिकारी को, चाहे वह सक्षमता के उत्कर्ष पर ही क्यों न हो, महिला अधिकारी ही क्यों न हो, पुरुष अधिकारी ही क्यों न हो, क्या प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, इस बात को दरकिनार कर दिया जाता है। यह भी सत्य है।  </p>
<figure id="attachment_5277" aria-describedby="caption-attachment-5277" style="width: 1280px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/north-block.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/north-block.jpg" alt="" width="1280" height="720" class="size-full wp-image-5277" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/north-block.jpg 1280w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/north-block-300x169.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/north-block-1024x576.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/north-block-768x432.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5277" class="wp-caption-text">रायसीना हिल का नार्थ ब्लॉक। काश यहाँ गृह मंत्रालय में महिला भाप्रसे के अधिकारी भी गृह सचिव होतीं </figcaption></figure>
<p><strong>यह बात यहाँ इसलिए लिख रहा हूँ कि स्वतंत्र भारत में भले लाखों लोग भारतीय प्रशासनिक सेवा के अभ्यर्थी से अधिकारी बने हों, लेकिन दुर्भाग्य यह है कि &#8216;एक महिला के अतिरिक्त&#8217; आज तक कोई भी भाप्रसे के महिला अधिकारी रायसीना हिल स्थित गृह मंत्रालय में गृह सचिव या फिर कैबिनेट सचिव नहीं बन पाई हैं। विगत 77 वर्षों में सिर्फ एक महिला कैबिनेट सचिव की कुर्सी तक पहुंची, जबकि देश में उत्तम श्रेणी के महिला भाप्रसे अधिकारियों की किल्लत नहीं है। यह एक गहन शोध का विषय है।</strong> </p>
<p>साल 2001 में देश का बागडोर राजनीतिक मर्मज्ञ अटल बिहारी वाजपेयी के हाथों था। उस  समय केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के निदेशक पद के लिए कई दावेदारों में सीबीआई के तत्कालीन अधिकारी पी सी शर्मा &#8216;प्रमुख दावेदार&#8217; थे। सीबीआई के निदेशक पद के लिए नाम लगभग तय हो गया था, अधिसूचना जारी नहीं हुआ था । लेकिन उस नाम में शर्मा का नाम नहीं था और जिसका नाम था वे दक्षिण भारत के अधिकारी थे। </p>
<p>इसी बीच एक पत्र जिसे तत्कालीन सीवीसी एन विठ्ठल ने प्रधानमंत्री कार्यालय में प्रेषित किया था, वह हस्तगत हो गया। वह पत्र दो पन्नों में लिखा था जिसमें पांच पैराग्राफ थे। उन पांचों पैराग्राफ में शायद ही कोई पैरा ऐसा था जो पी सी शर्मा के विरुद्ध नहीं था और यह नहीं अनुशंसित किया गया था कि वे इस पद के योग्य नहीं हैं। कारण तत्कालीन सीवीसी ही जानते हैं। </p>
<figure id="attachment_5278" aria-describedby="caption-attachment-5278" style="width: 1200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/amit-shah.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/amit-shah.jpg" alt="" width="1200" height="861" class="size-full wp-image-5278" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/amit-shah.jpg 1200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/amit-shah-300x215.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/amit-shah-1024x735.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/amit-shah-768x551.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1200px) 100vw, 1200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5278" class="wp-caption-text">गृह मंत्री श्री अमित शाह</figcaption></figure>
<p>मैं उन दिनों &#8216;दी स्टेट्समैन&#8217; अखबार में &#8216;विशेष संवाददाता&#8217; था और गृह मंत्रालय भी देखता था। उस पत्र के आधार पर एक कहानी लिखा जो अख़बार के अगले संस्करण में प्रकाशित हुआ। &#8216;दी स्टेट्समैन अख़बार भले दिल्ली के पाठक नहीं पढ़ते हों, देखते हों; लेकिन प्रधानमंत्री वाजपेयी के टेबुल पर वह पहुंचा गया था। फिर पीएमओ को प्रेषित चिठ्ठी निकली और पूर्व में बनी सूची निरस्त हो गई। दो दिन बात अधिसूचना जारी हुई &#8211; केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के अगले निदेशक पी सी शर्मा के नाम पर ठप्पा लग गया। </p>
<p>अब सवाल यह है कि क्या 15 अगस्त, 1947 को जब देश आज़ाद हुआ, उस दिवस से लेकर आज तक भारत में जितने भी भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हुए या हैं, उनमें कोई भी महिला अधिकारी (सुश्री ग्रेवाल को छोड़कर) ऐसी नहीं हो पायी जो भारत सरकार के कैबिनेट सचिव और गृह मंत्रालय के सचिव पद पर बैठ पाती? क्या इस पद पर पदस्थापित होने के लिए जितनी भी क़ानूनी-प्रक्रिया हैं, मसलन केंद्रीय सतर्कता आयोग द्वारा &#8216;क्लीयरेंस&#8217; प्रमाणपत्र, विभागीय जांच आदि में &#8216;सफल&#8217; नहीं हो पायी?  अगर ऐसा है तो या &#8216;एक शोध का विषय&#8217; है, अगर ऐसा नहीं है तो यह &#8216;विचारणीय विषय&#8217; है। </p>
<figure id="attachment_5279" aria-describedby="caption-attachment-5279" style="width: 1080px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/Patel-sahb.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/Patel-sahb.jpg" alt="" width="1080" height="1620" class="size-full wp-image-5279" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/Patel-sahb.jpg 1080w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/Patel-sahb-200x300.jpg 200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/Patel-sahb-683x1024.jpg 683w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/Patel-sahb-768x1152.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/Patel-sahb-1024x1536.jpg 1024w" sizes="auto, (max-width: 1080px) 100vw, 1080px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5279" class="wp-caption-text">सरदार वल्लभ भाई पटेल</figcaption></figure>
<p><strong>15 अगस्त, 1947 में जब सरदार वल्लभ भाई पटेल गृह मंत्री बने, उस समय से लेकर अमित शाह तक कुल 29 राजनेता नॉर्थ ब्लॉक के गृहमंत्री कार्यालय में विराजमान हुए।</strong> सरदार पटेल के बाद जवाहरलाल नेहरू, सी राजगोपालाचारी, कैलाशनाथ काटजू, गोविंद बल्लभ पंत, लाल बहादुर शास्त्री, गुलजारी लाल नंदा, यशवंत राव चवन, इंदिरा गांधी, उमा शंकर दीक्षित, के बी रेड्डी, चरण सिंह, मोरारजी देसाई, हिरुभाई पटेल, जैल सिंह, आर वेंकटरमण, पी सी सेठी, पी वी नरसिम्हा राव, बूटा सिंह, मुफ़्ती मोहम्मद सईद, चंद्रशेखर, शंकर राव चवन, मुरली मनोहर जोशी, देवगौड़ा,इंद्रजीत गुप्त, लालकृष्ण आडवाणी, शिवराज पाटिल, पी चिदंबरम, सुशील कुमार शिंदे, राजनाथ सिंह और अमित शाह गृह मंत्री की कुर्सी पर विराजमान हुए। </p>
<p><strong>लेकिन इन काल खण्डों में एक भी महिला भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी गृह मंत्रालय में गृह सचिव की कुर्सी तक नहीं आयी। एक अपवाद अवश्य है जब श्रीमती इंदिरा गांधी गृह मंत्री थी, उस समय महिला मंत्री और पुरुष गृह सचिव रहे। आज तक ऐसा कोई अवसर नहीं है जहाँ पुरुष गृहमंत्री और महिला गृह सचिव हों। व्यावहारिक रूप से प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश का केबिनेट कमिटी ही ऐसे वरिष्ठ पदों पर अधिकारियों की नियुक्ति करता है।</strong><br />
 <br />
पिछले दिनों (23 मार्च, 2022) को जब भारत के संसद में सरकार की ओर से कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में कहा कि भारत में (1 जनवरी, 2022 तक) कुल 5317 पद भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारियों के लिए है जिसमें 1472 पदों पर कोई नहीं हैं और रिक्त पड़े हैं &#8211; यह आंकड़ा स्वयं में ही एक शोध का विषय है कि राजनेता, मंत्री, विभाग, सरकार भाप्रसे के अधिकारियों को कितना महत्व देते हैं । आम तौर पर सरकार संघ लोक सेवा आयोग द्वारा संचालित परीक्षाओं के आधार पर प्रतिवर्ष 180 भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को नियुक्त करती है। </p>
<p>अब जहां तक आरक्षण का सवाल है उसमें सेंट्रल डेपुटेशन के लिए 40 %, राज्य डेपुटेशन के लिए 25%, ट्रेनिंग के लिए 3 . 5 % लीव/जूनियर के लिए 16. 5 % पद आरक्षित हैं। यह आरक्षण जाति के आधार वाले आरक्षण नहीं है। वैसे जाती के आधार पर अगर देखा जाय तो मसलन मुस्लिम, दलित, पिछड़ा वर्ग के अधिकारियों को शायद ही कभी गृह सचिव के पद पर आसीन किया गया होगा। वैसे यह शोध के अधीन है। पद पर आरक्षण कोटि से आने वाले अभ्यर्थियों की बात नहीं कर रहा हूँ। </p>
<p>ज्ञातव्य हो कि 5 मई 1947  से 2 जुलाई  1948 तक आर एन बनेर्जी पहला गृह सचिव बने केंद्र सरकार में। फिर आये एच वी आर अयंगर जो 1 अगस्त 1948 से 28 फरवरी 1953 तक विराजमान रहे। पहली मार्च 1953 को ए वी पाई नए गृह सचिव बने जो 14 जनवरी 1958 तक बने रहे। श्री पाई के बाद 15 जनवरी 1958 से 26 नवम्बर 1961 तक बी एन झा भारत सरकार के गृह सचिव रहे। </p>
<p>साठ के दशक में आये वी विश्वनाथन। विश्वनाथन 27 नवम्बर 1961 से 18 सितम्बर 1964 तक कार्यालय में रहे। फिर 18  सितम्बर 1964 से 1  जनवरी 1971 तक एल पी सिंह गृह सचिव रहे।इनके बाद आये गोविन्द नारायण जो 1  जनवरी 1971 से 18 मई 1973 तक कार्यालय में रहे। 4  जुलाई 1973 से 23 जून 1975 तक निर्मल कुमार मुखर्जी गृह सचिव रहे। 23 जून 1975 से 30 मार्च 1977 तक एस एल खुराना कार्यालय में रहे। टीसीए श्रीनिवास वर्धन 31 मार्च 1977 से 29 फरवरी 1980 तक गृह सचिव थे।  एस एम एच बर्नी 29 फरवरी 1980 से 12 अगस्त 1981 तक कार्यालय में रहे। फिर आये टी एन चतुर्वेदी जो 12 अगस्त 1981 से 29 फ़रवरी 1984 तक गृह सचिव थे। </p>
<figure id="attachment_5280" aria-describedby="caption-attachment-5280" style="width: 1200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/mha.png"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/mha.png" alt="" width="1200" height="675" class="size-full wp-image-5280" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/mha.png 1200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/mha-300x169.png 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/mha-1024x576.png 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/mha-768x432.png 768w" sizes="auto, (max-width: 1200px) 100vw, 1200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5280" class="wp-caption-text">गृह मंत्रालय</figcaption></figure>
<p>चतुर्वेदी के बाद क्रमशः एम एम के वाली (1 मार्च 1984 से 4 नवम्बर 1984), प्रेम कुमार (6  नवम्बर 1984 से 15 जनवरी 1985 तक) आर डी प्रधान (15 जनवरी 1985 से 30 जून 1986 तक), सी जी सोमाह (1 जुलाई 1986 से 16 अक्टूबर 1988 तक), जे ए कल्याणाकृष्णन (17 अक्टूबर 1988 से 29 दिसम्बर 1989 तक), सिरोमनि श्रम (29 दिसंबर 1989 से 20 मार्च 1990), नरेश चंद्र (21 मार्च 1990 से 11 दिसंबर 1990 तक), आर के भार्गव (12 दिसंबर 1990 से 3 अक्टूबर 1991), माधव गोडबोले (4 अक्टूबर 1991 से 23 मार्च 1993 तक) । फिर बने एन एन वोहरा जो 6 अप्रैल 1993 से 31 मई 1994 तक कार्यालय में रहे। वोहरा के बाद बने के पद्मनाभैया जो 1 जून 1994 से 31 अक्टूबर 1997 तक कार्यालय में रहे। फिर आये बाल्मीकि प्रसाद सिंह जो 1 नवम्बर 1997 से 4 मई 1999 तक गृह सचिव थे। </p>
<p>5 मई 1999 से 15 अक्टूबर 2002 तक कमल पांडे पद पर विराजमान रहे। फिर एन गोपालस्वामी (15 अक्टूबर 2002 से 8 फरवरी 2004 तक), अनिल बैजल (8 फरवरी 2004 से 1 जुलाई 2004), धीरेन्द्र सिंह (1 जुलाई 2004 से 31 मार्च 2005), वीके दुग्गल (31 मार्च 2005 से 31 मार्च 2007), मधुकर गुप्ता (31 मार्च 2007 से 30 जून 2009), गोपाल कृष्ण पिल्लई (30 जून 2009 से 30 जून 2011), आर के सिंह (30 जून 2011 से 30 जून 2013), अनिल गोस्वामी (30 जून 2013 से 4  फरवरी 2015) , फिर आये एल सी गोयल (5 फरवरी 2015 से 31 अगस्त 2015), राजीव महर्षि (31 अगस्त 2015 से 30 अगस्त 2017) राजीव गौबा (31 अगस्त 2017 से 22 अगस्त 2019) और फिर अजय कुमार भल्ला 22 अगस्त 2019 से पदस्थापित हैं। </p>
<p><strong>इसी तरह, स्वतंत्र भारत में अब तक 31 कैबिनेट सचिव बने। इसमें 30 पुरुष ही कुर्सी पर चिपके। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की प्रधान सचिव रही 1952 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी सुश्री सरला ग्रेवाल इकलौती महिला अधिकारी हैं जो कैबिनेट सचिव बन पायी।</strong> </p>
<p>सुश्री ग्रेवाल इस पुरुष प्रधान नौकरशाह और राजनेताओं की गढ़ को तोड़कर कैसे उस पद पर पहुंची यह भी एक शोध का विषय है। सुश्री ग्रेवाल 1989-90 में मध्य प्रदेश की राज्यपाल भी बनी। कहते हैं भारत के कैबिनेट सचिव भारत के सर्वोच्च कार्यकारी अधिकारी और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी हैं। कैबिनेट सचिव सिविल सेवा बोर्ड, कैबिनेट सचिवालय, भारतीय प्रशासनिक सेवा के  अध्यक्ष और भारत सरकार के नियमों के तहत सभी सिविल सेवाओं के प्रमुख हैं। </p>
<p>अब तक से अगर सभी कैबिनेट सचिव और गृह सचिवों के नामों का अवलोकन करते हैं तो इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि अब तक जितने भी अधिकारी इन पदों पर बैठे, वे प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से (अगर वरीयता को ध्यान में रखा जाए) किसी न किसी तरह अपने-अपने &#8216;राजनीतिक मास्टर के ब्लू-आइड ही रहे। अगर ऐसा नहीं होता तो अधिकारियों के संघ में भी मनमुटाव नहीं होता। </p>
<p>वैसे भारत का राष्ट्रीय महिला सशक्तीकरण नीति लिंग समानता का सिद्धांत भारतीय संविधान की प्रस्तावना, मौलिक अधिकारों, मौलिक कर्तव्यों और नीति निर्देशक सिद्धांतों में प्रतिपादित है। संविधान महिलाओं को न केवल समानता का दर्जा प्रदान करता है अपितु राज्‍य को महिलाओं के पक्ष में किसी भी प्रकार के भेदभाव को समाप्त करने की भी बात करता है।  अगर ऐसा है तो क्या यह उन महिलाओं के लिए नहीं है जो संघ लोक सेवा आयोग द्वारा संचालित देश के कठिनतम परीक्षाओं अव्वल आकर कुर्सी पर बैठती हैं। महाभारत में तो &#8216;अभिमन्यु&#8217; चक्रव्यूह को नहीं तोड़ सके, क्योंकि वे सो गए थे (भगवान् यही प्रारब्ध लिखे थे), लेकिन भारत की ये सभी महिलाएं इस राजनीतिक और पुरुष प्रधान नौकरशाही द्वारा रचित चक्रव्यूह को क्यों न तोड़ पा रही हैं?</p>
<figure id="attachment_5281" aria-describedby="caption-attachment-5281" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240124151313.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240124151313.jpg" alt="" width="2200" height="2177" class="size-full wp-image-5281" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240124151313.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240124151313-300x297.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240124151313-1024x1013.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240124151313-768x760.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240124151313-1536x1520.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240124151313-2048x2027.jpg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240124151313-24x24.jpg 24w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240124151313-48x48.jpg 48w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240124151313-96x96.jpg 96w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5281" class="wp-caption-text">केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह 24 जनवरी, 2024 को नई दिल्ली में जननायक कर्पूरी ठाकुर जी की 100वीं जयंती समारोह को संबोधित कर रहे हैं।</figcaption></figure>
<p>लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था के ढांचे के अंतर्गत हमारे कानूनों, विकास संबंधी नीतियों, योजनाओं और कार्यक्रमों में विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की उन्नति के उद्देश्य बनाया गया है। पांचवी पंचवर्षीय योजना (1974-78) से महिलाओं से जुड़े मुद्दों के प्रति कल्याण की बजाय विकास का दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है। हाल के वर्षों में, महिलाओं की स्थिति को अभिनिश्चित करने में महिला सशक्तिकरण को प्रमुख मुद्दे के रूप में माना गया है।</p>
<p>महिलाओं के अधिकारों एवं कानूनी हकों की रक्षा के लिए अनेकानेक कानून हैं भारत के संविधान में। भारत ने महिलाओं के समान अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध विभिन्न अंतरराष्ट्रीय अभिसमयों और मानवाधिकार लिखतों की भी पुष्टि की है। मेक्सिको कार्य योजना (1975), नैरोबी अग्रदर्शी रणनीतियां (1985), बीजिंग घोषणा और प्लेटफार्म फॉर एक्‍शन (1995) और जेंडर समानता तथा विकास और शांति पर संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र द्वारा 21वीं शताब्दी के लिए अंगीकृत &#8220;बीजिंग घोषणा एवं प्लेटफार्म फॉर एक्शन को कार्यान्वित करने के लिए और कार्रवाइयां एवं पहले&#8221; नामक परिणाम दस्‍तावेज को समुचित अनुवर्ती कार्रवाई के लिए भारत द्वारा पूर्णतया पृष्ठांकित कर दिया गया है।  </p>
<p>वैसे सरकार यह मानती है कि भारत में लिंग संबंधी &#8216;असमानता&#8217; है और यह लिंग संबंधी असमानता कई रूपों में उभरकर सामने आ रही हैं जिसमें से सबसे प्रमुख विगत कुछ दशकों में जनसंख्या में महिलाओं के अनुपात में निरंतर गिरावट की रूझान है। लेकिन संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित परीक्षाओं में तो ये महिलाएं पुरुषों के बराबर, अधिक ऊँचा स्थान बनती हैं ! </p>
<p>इन सशक्तिकरण और नीतियों की बात यहाँ इसलिए कर रहा हूँ क्योंकि देश में पुरुष, महिला या अन्य लिंग के रहने वाले सभी लोग, चाहे वे सरकारी क्षेत्र में, निजी क्षेत्र में कार्य करते हों अथवा नहीं। अगर देश के नागरिक हैं तो वे देश के नियम के अधीन हैं। मेरे मन में एक सवाल उठा रहा है कि क्या देश के संविधान, कानून व्यवस्था या अन्य लिखित विधि-विधानों के अंतर्गत, जिससे देश का कानून व्यवस्था, प्रशासन चलता हैं, उसमें ऐसी कोई बात उद्धृत हैं की भारत सरकार के गृह मंत्रालय के शीर्षस्थ अधिकारी, यानी गृह सचिव महिला योनि के नहीं होंगे। अगर ऐसा नहीं है तो अब तक बने 36 गृह सचिवों में महिला अधिकारी कोई क्यों नहीं नियुक्त/चयनित हुए। </p>
<p>यह अलग बात है कि स्वतन्त्रव भारत में अब तक 29 राजनेता भारत सरकार में गृह मंत्री बने हैं, जिसमें श्रीमती इंदिरा गाँधी को छोड़कर, शेष सभी 28 पुरुष हैं। श्रीमती इंदिरा गाँधी पहली बार 9 नवम्बर से 13 नवम्बर 1966 में चार दिन के लिए, फिर 27 जून, 1970 से 5 फरबरी, 1973 तक कुल दो वर्ष 223 दिन गृह मंत्री भी थी। वे यशवंतराव चवण से पदभार ग्रहण की थी और उमा शंकर दीक्षित को पदभार सौंपी थी। अब सवाल यह है कि 29 राजनेताओं में एक महिला गृहमंत्री बनी और 36 गृह सचिवों में एक भी महिला नहीं। जबकि हम अपनी आज़ादी का 77 वन और गणतंत्र का 75 वन वर्षगांठ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई में मना रहे हैं।  </p>
<p><strong>वैसे राज्य सरकारों में महिला गृह सचिवों का पदस्थापना देखने को मिलता है। वर्तमान काल में ही कोई 25 वर्ष बाद पश्चिम बंगाल सरकार श्रीमती नंदिनी चक्रवर्ती को गृह सच्ची बनायीं है। श्रीमती चक्रवर्ती बी पी गोपालिका से पढ़भर ग्रहण की हैं। श्री गोपालिका अब प्रदेश के मुख्य सचिव  पर बैठे हैं। किसी भी प्रदेश अथवा केंद्र सरकार के अधीन मंत्रालय में महिला सचिव का होना &#8216;आम बात&#8217; है। लेकिन जब मुख्य सचिव, गृह सचिव की बात होती है तब सरकार, सरकारी नियम, सरकारी नेता &#8216;महिला सशक्तिकरण&#8217; के बारे में क्यों नहीं सोचते ? पश्चिम बंगाल सरकार में 1996-1998 के कालखंड में सुश्री लीना चक्रवर्ती पहली महिला अधिकारी थी जो प्रदेश के गृह सचिव के पद पर आसीन हुई थी। </strong></p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/no-woman-ias-in-independent-india-worthy-of-cabinet-and-home-secretary">75 वें गणतंत्र दिवस पर एक सवाल: क्या &#8216;सरला ग्रेवाल&#8217; भाप्रसे को छोड़कर आज़ाद भारत में कोई भी महिला कैबिनेट और गृह सचिव के लायक नहीं हुई?</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>Rising number of women in public administration will pave the way for a more sensitive and well-rounded bureaucracy: Vice-President</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 20 Apr 2023 11:46:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[administration]]></category>
		<category><![CDATA[bureaucracy]]></category>
		<category><![CDATA[empowermenrt]]></category>
		<category><![CDATA[public]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>NEW DELHI: The Vice-President of India, Shri Jagdeep Dhankhar called upon the Civil Servants to facilitate uniformity in administration across the Union and the States ‘so that Federalism blossoms into Cooperative Federalism.’ Referring to Civil Services as the backbone of the governance, he acknowledged the role of Civil Servants as the ‘most visible and effective [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>NEW DELHI: The Vice-President of India, Shri Jagdeep Dhankhar called upon the Civil Servants to facilitate uniformity in administration across the Union and the States ‘so that Federalism blossoms into Cooperative Federalism.’ Referring to Civil Services as the backbone of the governance, he acknowledged the role of Civil Servants as the ‘most visible and effective agents of change’ in ensuring the inclusive development of the nation. The Vice President was addressing the large gathering of civil servants after Inaugurating the 16th Civil Services Day at Vigyan Bhawan here in New Delhi today.</p>
<p>Indian Constitution that seeks to secure Justice, Liberty, Equality and Fraternity for all its citizens. Highlighting the key Government Schemes like Aspirational Districts, Smart Cities, Jal Jeevan Mission, Digitisation of payments and PM Jan Aarogya Yojana, among others, he noted that these initiatives represent our march towards ‘a Viksit Bharat that is on the rise with primacy of citizen empowerment.’</p>
<p>Shri Dhankhar applauded the Mission Karamyogi- a National Programme for Civil Services Capacity Building, launched in September 2020, which is turning-out to be a game changer shaping the future–ready Civil Service with the right attitude, skills and knowledge, aligned to the vision of New India. He said that civil servants in Amrit Kaal are the Warriors of 2047 laying the foundations that will shape India that is Bharat, when it celebrates its Centenary of Independence.</p>
<p>He expressed his appreciation for the increasing representation of all sections of society, especially young talent from remote villages, belonging to humble family backgrounds as well as from marginalized communities who are joining the Civil Services in large numbers. The rising number of women in public administration, he noted in particular, will pave the way for a more sensitive and well-rounded bureaucracy.</p>
<figure id="attachment_4872" aria-describedby="caption-attachment-4872" style="width: 602px" class="wp-caption alignleft"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/04/2.jpeg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/04/2.jpeg" alt="" width="602" height="402" class="size-full wp-image-4872" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/04/2.jpeg 602w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/04/2-300x200.jpeg 300w" sizes="auto, (max-width: 602px) 100vw, 602px" /></a><figcaption id="caption-attachment-4872" class="wp-caption-text">Rising number of women in public administration will pave the way for a more sensitive and well-rounded bureaucracy: Vice-President</figcaption></figure>
<p>Shri Dhankhar said that India is on the rise as never before and the rise is no doubt, unstoppable. He said that due to effective implementation of affirmative and innovative initiatives and policies of the Government, India, today is the global destination of opportunities and investment. He said that India has become 5th largest Economy in the world in September, 2022 surpassing our erstwhile colonial rulers and by all the well recognised indications, it will become the Third Largest Global Economy at the turn of the decade.</p>
<p>Describing India as the largest and mother of democracy, the Vice President said that our democracy is the most functional and vibrant at all levels &#8211; the village, the municipalities, the states and at the centre. “Our level of freedom of expression is next to none and there is no tangible reflection of enforced silence,” he stressed. </p>
<figure id="attachment_4873" aria-describedby="caption-attachment-4873" style="width: 602px" class="wp-caption alignright"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/04/6.jpeg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/04/6.jpeg" alt="" width="602" height="402" class="size-full wp-image-4873" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/04/6.jpeg 602w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/04/6-300x200.jpeg 300w" sizes="auto, (max-width: 602px) 100vw, 602px" /></a><figcaption id="caption-attachment-4873" class="wp-caption-text">“Our level of freedom of expression is next to none &#038; there is no tangible reflection of enforced silence” – Vice President</figcaption></figure>
<p>Stating that it is painful to suffer some who adopt an ostrich stance to our phenomenal growth and flourishing democratic values, the Vice President expressed disapproval of those who “engage in misadventure to demean, decry, taint and tarnish our democracy and constitutional institutions.” He said that “it is baffling why some amongst us enjoyably resort to self-goals when it comes to economic growth, policy-making and implementation” and expressed the need for this unwholesome stance to be antidoted.</p>
<p>Congratulating the winners of the PM Awards for Excellence in Public Administration, Shri Dhankhar observed that these awards are a befitting tribute to the hard work and dedication of Civil Servants. They encourage constructive competition, innovation, replication and institutionalisation of best practices, and serve as an inspiration for the civil servants to strive for excellence in public administration, he further elaborated.</p>
<p>The Vice-President Shri Dhankhar drew special attention to the laudable role played by Civil Servants at all levels in the country in combating the COVID-19 pandemic, setting a new global benchmark through their tireless efforts. He also recognised the importance of technology in complementing the leadership of civil servants, for accelerated service delivery and citizen-centric governance. “Inclusive growth, a new norm, has revolutionised governance at all levels,” the Vice-President added.</p>
<figure id="attachment_4874" aria-describedby="caption-attachment-4874" style="width: 602px" class="wp-caption alignright"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/04/3.jpeg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/04/3.jpeg" alt="" width="602" height="402" class="size-full wp-image-4874" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/04/3.jpeg 602w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/04/3-300x200.jpeg 300w" sizes="auto, (max-width: 602px) 100vw, 602px" /></a><figcaption id="caption-attachment-4874" class="wp-caption-text">Vice-President inaugurates 16th Civil Services Day celebrations</figcaption></figure>
<p>Shri Dhankhar highlighted India’s stature as the largest democracy, with a ‘level of freedom of expression that is next to none’. The Parliament of India, he noted, embodies the voice of the people, and it is therefore the responsibility of the Parliament to safeguard the nation’s sovereignty and cultural integrity from both internal and external threats.</p>
<p>The Vice-President unveiled an e-book on ‘National Good Governance Webinar Series’ during the event. He also inaugurated an exhibition on ‘Good Governance Practices in India- Awarded Initiatives’. Shri Jitendra Singh, Minister of State for Personnel, Public Grievances and Pensions, Shri Rajiv Gauba, Cabinet Secretary, Shri Sunil Kumar Gupta, Secretary to the Vice-President of India, Shri V. Srinivas, Secretary, Department of Administrative Reforms and Public Grievances and other senior officers of the Government of India were also present in large numbers on the occasion.</p>
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