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	<title>prime minister Archives - आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</title>
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		<title>आज रात 8.30 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी​ &#8216;संभवतः&#8217; राष्ट्र को सम्बोधित करेंगे, यह पिछले 12 साल में &#8217;13 वां&#8217; संबोधन होगा </title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 18 Apr 2026 12:40:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 18 अप्रैल​:​ संसद में महिला आरक्षण अधिनियम से संबंधित ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’ पास नहीं होने के कारण ​संभवतः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ​आज रात 8:30 बजे राष्ट्र को संबोधित करने वाले हैं। यह संबोधन ऐसे समय में हो रहा है जब सरकार को एक बड़ा विधायी झटका लगा है और भू-राजनीतिक चिंताएं [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/nation/prime-minister-narendra-modi-will-likely-address-the-nation-tonight-at-830-pm">आज रात 8.30 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी​ &#8216;संभवतः&#8217; राष्ट्र को सम्बोधित करेंगे, यह पिछले 12 साल में &#8217;13 वां&#8217; संबोधन होगा </a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली, 18 अप्रैल​:​ संसद में महिला आरक्षण अधिनियम से संबंधित ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’ पास नहीं होने के कारण ​संभवतः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ​आज रात 8:30 बजे राष्ट्र को संबोधित करने वाले हैं। यह संबोधन ऐसे समय में हो रहा है जब सरकार को एक बड़ा विधायी झटका लगा है और भू-राजनीतिक चिंताएं बढ़ रही हैं। इस बहुप्रतीक्षित प्रसारण को सरकार के राजनीतिक और नीतिगत संदेश के लिए एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।​ संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 विधेयक लंबे समय से चर्चा में रहे &#8216;महिला आरक्षण&#8217; के ढांचे से जुड़ा था, लेकिन इसे लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका।</strong></p>
<blockquote><p>प्रधानमंत्री द्वारा यह संभावित सम्बोधन पिछले 12 वर्षों (2014-2026) में लगभग तेरहवां संबोधन होगा।  8 नवंबर, 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक टेलीविज़न संबोधन में घोषणा की कि आधी रात से ₹500 और ₹1,000 के नोट अब वैध मुद्रा नहीं रहेंगे; इसका उद्देश्य काले धन, भ्रष्टाचार और जाली मुद्रा पर लगाम लगाना था। नोटबंदी को घोषणा के बाद 31 दिसंबर 2016 को नए साल की पूर्व संध्या पर नरेंद्र मोदी राष्ट्र को संबोधित किये थे। 27 मार्च 2019 को एंटी-सैटेलाइट मिसाइल टेस्ट के अवसर पर, फिर 8 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35A का निष्प्रभावी होने के बाद, मार्च-मई 2020 में जनता कर्फ्यू (19 मार्च), लॉकडाउन (24 मार्च, 3 अप्रैल) और आत्मनिर्भर भारत अभियान (12 मई) की घोषणाएं किये थे। </p></blockquote>
<p>इस विधेयक में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रस्ताव था। इसके साथ ही, इसमें एक &#8216;परिसीमन&#8217; प्रक्रिया का भी प्रावधान था, जिससे लोकसभा (निचले सदन) की सदस्य संख्या बढ़कर 816 हो जाती। हालांकि, एक तीखी और ध्रुवीकृत बहस के बाद यह विधेयक पारित नहीं हो सका, क्योंकि विपक्षी दलों ने इसे अपना समर्थन नहीं दिया।​ हालांकि प्रधानमंत्री कार्यालय ने आधिकारिक तौर पर इस संबोधन का एजेंडा स्पष्ट नहीं किया है, लेकिन सरकारी सूत्रों ने संकेत दिया है कि प्रधानमंत्री अपने भाषण में इस अटके हुए विधेयक, महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े व्यापक सवालों और भविष्य के लिए सरकार के &#8216;रोडमैप&#8217; पर बात कर सकते हैं।</p>
<p>यह घटना एक दुर्लभ उदाहरण है, जिसमें एक उच्च-स्तरीय संवैधानिक संशोधन अपने अंतिम चरण में आकर विफल हो गया। यह घटना सत्ताधारी गठबंधन और विपक्षी दलों के बीच बढ़ती हुई गहरी दरारों को भी उजागर करती है।​ सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने संकेत दिया कि मोदी इस मंच का उपयोग सीधे जनता से अपील करने के लिए कर सकते हैं। वे इस विधेयक को &#8216;लैंगिक समानता&#8217; की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम के रूप में प्रस्तुत कर सकते हैं, जिसे &#8216;राजनीतिक स्वार्थों&#8217; के चलते बाधित किया गया।</p>
<p><strong>हालांकि, इस विधेयक को &#8216;परिसीमन&#8217; प्रक्रिया से जोड़ने का मुद्दा एक विवाद का विषय बन गया। विपक्षी दलों ने तर्क दिया कि इस तरह की क्रमबद्धता के कारण विधेयक के कार्यान्वयन में देरी हो सकती है, और इससे विभिन्न राज्यों के बीच राजनीतिक संतुलन भी बिगड़ सकता है। बिल के पास न हो पाने से जो राजनीतिक असर पड़ा है, उसके प्रधानमंत्री के भाषण में हावी रहने की उम्मीद है, खासकर तब जब सरकार आने वाले चुनावों से पहले अपनी बात को मज़बूती से रखना चाहती है। जानकारों का कहना है कि यह भाषण सरकार के सुधार एजेंडे का बचाव करने और लोगों की सोच को बदलने की एक सोची-समझी कोशिश, दोनों का काम कर सकता है। संसदीय मामलों के जानकार एक राजनीतिक विश्लेषक ने कहा, &#8220;ऐसे हालात में देश के नाम संबोधन शायद ही कभी सामान्य होता है—इसका मकसद अक्सर अपनी बात को नए सिरे से रखना और लोगों का समर्थन जुटाना होता है।&#8221;</strong></p>
<p>इस संबोधन को और भी ज़्यादा ज़रूरी बनाने वाली बात संसद के बाहर हो रहे घटनाक्रम हैं। दिन की शुरुआत में, मोदी ने सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति और आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति की बैठकें कीं, जहाँ कथित तौर पर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और भारत की ऊर्जा आपूर्ति, खाद्य सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर इसके संभावित असर पर चर्चा हुई। वैश्विक बाज़ारों में उतार-चढ़ाव के संकेत दिख रहे हैं, ऐसे में प्रधानमंत्री इस संबोधन का इस्तेमाल नागरिकों को यह भरोसा दिलाने के लिए भी कर सकते हैं कि सरकार बाहरी झटकों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।</p>
<p>घरेलू राजनीतिक उथल-पुथल और अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितता के मेल ने इस भाषण को लेकर उत्सुकता और बढ़ा दी है, और सरकार के अगले कदमों के संकेतों का इंतज़ार उसके समर्थक और आलोचक, दोनों ही कर रहे हैं। यह देखना होगा कि क्या यह संबोधन आम सहमति बनाने के मकसद से सुलह का रास्ता अपनाता है, या विपक्ष के खिलाफ ज़्यादा आक्रामक रुख अपनाता है; आने वाले हफ़्तों में देश की राजनीतिक चर्चा का रुख इसी बात से तय हो सकता है।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/Bill-1.jpg"><img fetchpriority="high" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/Bill-1.jpg" alt="" width="2125" height="1159" class="aligncenter size-full wp-image-7632" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/Bill-1.jpg 2125w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/Bill-1-300x164.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/Bill-1-1024x559.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/Bill-1-768x419.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/Bill-1-1536x838.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/Bill-1-2048x1117.jpg 2048w" sizes="(max-width: 2125px) 100vw, 2125px" /></a></p>
<p><strong>​ज्ञातव्य हो कि कल केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों पर महिला आरक्षण का विरोध करने का आरोप लगाते हुए लोकसभा में कहा कि देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनके ‘‘रास्ते का रोड़ा’’ कौन है और विपक्ष के नेताओं को चुनाव में महिलाओं के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा। शाह ने महिला आरक्षण अधिनियम से संबंधित ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’, ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ पर सदन में चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि जो लोग परिसीमन का विरोध कर रहे हैं, वे कहीं न कहीं अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (एससी-एसटी) के लिए आरक्षित सीटों में बढ़ोतरी का विरोध कर रहे हैं।</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन के सभी सदस्यों ने ‘‘अगर-मगर, किंतु-परंतु का उपयोग करके स्पष्ट रूप से महिला आरक्षण का विरोध किया है। यह दिखाने का प्रयास किया गया कि विरोध हमारे क्रियान्वयन के तरीके पर है। मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि यह विरोध क्रियान्वयन का नहीं, बल्कि केवल महिला आरक्षण का विरोध है।’’​ नरेन्द्र मोदी सरकार महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देकर रहेगी। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रधानमंत्री मोदी का उद्देश्य महिला सशक्तीकरण करने वाले इस संविधान सुधार को समयबद्ध तरीके से लागू करके 2029 का चुनाव महिला आरक्षण के साथ करने का है।</p>
<p>शाह ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि अगर ये (विपक्ष) वोट नहीं देंगे तो संविधान संशोधन विधेयक सदन में गिर जाएगा, लेकिन विपक्षी दलों के नेताओं को चुनाव में महिलाओं के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा। चुनाव में वे जब जाएंगे तब मातृशक्ति हिसाब मांगेगी।’’​ शाह के जवाब के बाद, मत विभाजन में महिला आरक्षण और परिसीमन से संबंधित ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’ गिर गया। इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े।​ लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है।​ संविधान संशोधन विधेयक गिरने के बाद इससे संबंधित दोनों विधेयकों परिसीमन विधेयक, 2026 और संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 को आगे नहीं बढ़ाया जा सका।</p>
<p>इससे पहले, शाह ने अपने जवाब में कहा कि कांग्रेस ने सत्ता में रहते हुए भी विधायिका में महिलाओं के 33 प्रतिशत आरक्षण को बार-बार रोका और अब विपक्ष में रहते हुए भी इसे रोक रही है।​ उन्होंने कहा, ‘‘2023 में प्रधानमंत्री मोदी जानबूझकर महिला आरक्षण विधेयक लाए क्योंकि 2024 का चुनाव था और उन्हें पता था कि कांग्रेस विरोध नहीं कर पाएगी। तब पहली बार इसे सर्वसम्मति से पारित किया गया। हमें लगता था कि तब हो गया तो अब भी पारित हो जाएगा, लेकिन ये (विपक्ष) ‘किंतु-परंतु, अगर-मगर’ करके पांचवीं बार फिर विरोध कर रहे हैं।’’</p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी के सभी कामों का विरोध करने की ठान रखी है और उसने अनुच्छेद 370 को समाप्त करने का, राम मंदिर (निर्माण) का, तीन तलाक को समाप्त करने का, जीएसटी का विरोध किया। उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस ने नये संसद भवन का, सहकारिता मंत्रालय का विरोध किया, सर्जिकल स्ट्राइक का, एयर स्ट्राइक का और ऑपरेशन सिंदूर तक का विरोध किया।’’​ शाह ने कहा कि महिला आरक्षण से कांग्रेस के पीछे हटने का कारण यह है कि वह इसका श्रेय प्रधानमंत्री मोदी को नहीं देना चाहती।</p>
<figure id="attachment_7634" aria-describedby="caption-attachment-7634" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/Nitish-2-1.jpg"><img decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/Nitish-2-1.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-7634" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/Nitish-2-1.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/Nitish-2-1-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/Nitish-2-1-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/Nitish-2-1-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/Nitish-2-1-1536x1026.jpg 1536w" sizes="(max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-7634" class="wp-caption-text">​सन्नाटा विजय चौक पर &#8211; तस्वीर: संजय शर्मा</figcaption></figure>
<blockquote><p>गृह मंत्री ने कहा कि इन विधेयकों का उद्देश्य संविधान की ‘एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य (वैल्यू)’ की भावना को लागू करना भी है।​ उन्होंने कहा कि देश में 127 से अधिक लोकसभा क्षेत्र 20 लाख से अधिक मतदाताओं वाले हैं, और कुछ सीटों पर 28 लाख से 48 लाख तक मतदाता हैं, ऐसे में जन प्रतिनिधि के रूप में सांसद कैसे अच्छी तरह जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकते हैं।​ उन्होंने कहा कि इसे देखते हुए संविधान में समय-समय परिसीमन का प्रावधान किया गया है और उसी से एससी, एसटी की सीटें भी बढ़ने का प्रावधान है।​ उन्होंने कहा, ‘‘इस तरह परिसीमन का विरोध करने वाले एक तरह से एससी-एसटी सीटें बढ़ने का विरोध कर रहे हैं।’’</p></blockquote>
<p>उन्होंने 2026 में संविधान संशोधन विधेयक लाने के विपक्ष के सवालों पर कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम (2023) में जिक्र है कि 2026 के बाद होने वाली जनगणना के बाद जो परिसीमन होगा, उसमें महिला आरक्षण सुनिश्चित करेंगे।​ शाह ने कहा कि 1976 में कांग्रेस की सरकार के समय से 2026 तक, 50 वर्षों तक देश में लोकसभा सीटों की संख्या ‘फ्रीज’ थी और जनता को जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व नहीं मिला। उन्होंने कहा, ‘‘2026 में यह सीमा समाप्त हो गई। अब परिसीमन करते हैं तो 2029 से पहले समाप्त नहीं हो सकता। इसलिए 2029 का चुनाव नारी शक्ति वंदन अधिनियम की भावना से करना चाहते हैं और आधी आबादी को 33 प्रतिशत आरक्षण देना चाहते हैं तो इसे अभी लाना होगा।’’​ उन्होंने कहा कि 140 करोड़ जनता के मन में किसी तरह की भ्रांति, भ्रम नहीं हो, इसलिए ‘‘मैं फिर से स्पष्ट करना चाहता हूं कि प्रधानमंत्री मोदी की कैबिनेट ने जाति जनगणना का जो निर्णय लिया है वह 2026 की जनगणना के साथ कराने का है।’’</p>
<p>शाह ने 2011 की जनगणना के अनुसार परिसीमन के साथ महिला आरक्षण लागू होने से दक्षिणी राज्यों के साथ अन्याय होने के विपक्ष के दावों को खारिज करते हुए दोहराया कि दक्षिणी राज्यों का इस सदन पर उतना ही अधिकार है जितना उत्तर के राज्यों का।​ उन्होंने कहा, ‘‘हम उत्तर-दक्षिण का भेद नहीं होने देंगे।’’​ गृह मंत्री ने विपक्षी नेताओं को आड़े हाथ लेते हुए कहा, ‘‘आप ऐसी धारणा पैदा करके लोकप्रिय नहीं हो पाओगे, बाल सफेद हो जाएंगे लेकिन यहां (सत्तापक्ष में) नहीं बैठ पाओगे।’’ </p>
<p><strong>शाह ने कहा कि दक्षिणी राज्यों &#8212; कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना और केरल की इस समय लोकसभा में 129 सीटें हैं जिनका (वर्तमान में) कुल 543 सीटों में प्रतिशत 23.76 है। उन्होंने कहा कि सीटों में 50 प्रतिशत वृद्धि के साथ इन पांचों राज्यों में सीटें 195 हो जाएंगी जो कुल 816 सीटों में 23.87 प्रतिशत होंगी।​ उन्होंने यह भी कहा कि यदि विधेयक में सीटों की संख्या 50 प्रतिशत बढ़ाने का लिखित उल्लेख नहीं होने के कारण विपक्षी दल विरोध कर रहे हैं तो एक घंटे का समय दें, वह इस बारे में तत्काल संशोधन ले आएंगे।​ शाह ने महिला आरक्षण में मुस्लिम आरक्षण की समाजवादी पार्टी की मांग पर कहा कि संविधान के तहत धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता।</strong></p>
<p>उन्होंने ओबीसी महिलाओं के आरक्षण की मांग के संबंध में कहा कि जाति जनगणना के बाद रिपोर्ट आएगी और उस पर इस सदन में विचार करने के बाद जो भी सामूहिक मत बनेगा, उस बारे में आगे बढ़ा जा सकता है।​ शाह ने कांग्रेस पर लंबे अरसे तक ओबीसी का आरक्षण रोकने का आरोप लगाया।​ उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस ने बार-बार ओबीसी आरक्षण को रोका और अब, जब वे चुनाव हारते जा रहे हैं तो ओबीसी के हितैषी बनने आए हैं। कांग्रेस ने अब तक एक भी ओबीसी प्रधानमंत्री नहीं दिया, वहीं भाजपा ने अति पिछड़े समाज के मोदी जी को प्रधानमंत्री बनाया।’’</p>
<p>शाह ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर सदन में प्रधानमंत्री के लिए असंसदीय शब्दों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए कहा, ‘‘विपक्ष के नेता का व्यवहार किस प्रकार का है। उनकी भाषा किस प्रकार की है, देश भी सुन रहा है। आप अपने वरिष्ठों से सीख लें, नहीं तो अपनी बहन प्रियंका जी से सीख लें कि सदन में कैसे बोलते हैं।’’<br />
​&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;</p>
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		<title>इसमें इतना शोरगुल क्यों? वित्त मंत्री बजट में ₹214.82 लाख करोड़ कर्ज बताई थी, मोदी जी की &#8216;विदेश यात्रा खर्च&#8217; उसी खाते में जोड़ दिया जाय</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 15 Feb 2026 12:09:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>कर्तव्य पथ (नई दिल्ली) : कर्तव्य पथ पर दो मतदाता इस बात पर जिरह कर रहे थे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वतंत्र भारत में अब तक बने और रायसीना पहाड़ी वाले कार्यालय में बैठे सभी प्रधान मंत्रियों में सबसे अधिक विदेश भ्रमण किये हैं और पैसा खर्च किये हैं। दोनों जिरह करने वाले महानुभाव में एक [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कर्तव्य पथ (नई दिल्ली) : कर्तव्य पथ पर दो मतदाता इस बात पर जिरह कर रहे थे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वतंत्र भारत में अब तक बने और रायसीना पहाड़ी वाले कार्यालय में बैठे सभी प्रधान मंत्रियों में सबसे अधिक विदेश भ्रमण किये हैं और पैसा खर्च किये हैं। दोनों जिरह करने वाले महानुभाव में एक दरभंगा महाराजा के राज के निवासी थे और दूसरा बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार के राज्य जी नहीं, उनके जिला और गाँव के भी थे। वे बख्तियारपुर स्टेशन उतरकर ही घर पहुँचते हैं।</strong></p>
<blockquote><p>दोनों कहते हैं कि नरेंद्र मोदी भारत के 14वें प्रधानमंत्री के रूप में 26 मई, 2014 को शपथ लिए। इनके साथ 45 अन्य मंत्री ने भी पहली पारी में सरकार चलाने में शरीक हुए। कोई 20 दिन बाद, यानी 14 जून, 2014 को पहली बार यात्रा शुरू किये, गंतव्य देशज &#8216;गोआ&#8217; था और विगत 1 फरवरी, 2026 को देशज &#8216;पंजाब&#8217; गए थे। इन दो तारीखों के बीच इस बीच देश-विदेशज यात्रायें कितनी हुई, यह तो आने वाले दिनों में गहन शोध का विषय होगा। खैर, विदेश मंत्रालय ने जो आंकड़े भारत के सदन के पटल पर रखे हैं उसके अनुसार, 2015 से 2025 के बीच पिछले दस वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी की विदेश यात्राओं पर कुल ₹762.47 करोड़ खर्च किए गए। सरकार ने यह भी बताया कि इतने व्यापक स्तर पर विदेश यात्राएं करने वाले वे पहले प्रधानमंत्री हैं।</p></blockquote>
<p>तभी दरभंगा वाले एक मतदाता कहते हैं: &#8220;अरे !! यह कौन सी नई बात हो गयी। पिछले दिनों ही तो भारत सरकार के वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश की और बजट में भारत पर देशज-विदेशज कर्ज का बोझ बताई थी। उनके अनुसार कुल कर्ज़ का अनुमान (2026-27) ₹214.82 लाख करोड़, जिसमें ₹207.7 लाख करोड़ का अंदरूनी कर्ज़ और ₹7.11 लाख करोड़ का बाहरी कर्ज़ शामिल है। क्या होगा? इतना कर्ज है ही, तो मोदीजी की विदेश यात्रा का खर्च भी उसी खाते में जोड़ दिया जाय। इसमें इतना शोरगुल क्यों? कर्जा तो घर-परिवार को चलने के लिए की ही जाती है। मोदी जी का तो पूरा भारतवर्ष अपना घर ही तो है। </p>
<p><strong>उधर, विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान आवास और आतिथ्य खर्च मेजबान देश वहन करता है। भारत सरकार केवल सुरक्षा व्यवस्था, आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल, मीडिया और तकनीकी आवश्यकताओं पर खर्च करती है। आमतौर पर प्रधानमंत्री के साथ 27 से 72 सदस्य जाते हैं, जबकि पिछले वर्ष पांच देशों के दौरे के दौरान यह संख्या 95 तक पहुंच गई। सरकार का कहना है कि खर्च में वृद्धि का कारण महंगाई, रुपये की कमजोरी, यात्राओं की संख्या और लंबी दूरी की यात्राएं हैं। वर्ष 2015 में विदेश यात्राओं पर ₹91.5 करोड़ खर्च हुए थे, जो 2024 तक बढ़कर ₹109 करोड़ से अधिक हो गए। वर्ष 2025 में सबसे अधिक ₹175.19 करोड़ खर्च हुए, क्योंकि उस वर्ष प्रधानमंत्री ने यूरोप, अमेरिका, अफ्रीका और एशिया के कई देशों का दौरा किया।</strong> </p>
<p>बख्तियारपुर वाले महाशय दरभंगा वाले की बात को गंभीरता से सुन रहे थे। तभी वे कहते हैं: जब मोदी जी पहली बार 2014 में चुनाव लड़ रहे थे तो भारत के मतदाता को गछे थे कि अगर भारतीय जनता पार्टी को आप सभी मिलकर जिताए, हम प्रधानमंत्री बन गए, आप सभी बना दिए तो आप सभी लोगों के बैंक एकाउंट में 15-15 लाख रुपये, जो विदेश में कालाधन के रूप में विपक्षी पार्टी और पार्टी के लोग, व्यापारी रखे हैं; उसे भारत वापस लेकर आप लोगों को बाँट देंगे। अब तक तो 11-साल ही बिता है, उस बात को।&#8217; </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-4.jpg"><img decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-4.jpg" alt="" width="2039" height="1143" class="aligncenter size-full wp-image-7363" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-4.jpg 2039w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-4-300x168.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-4-1024x574.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-4-768x431.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-4-1536x861.jpg 1536w" sizes="(max-width: 2039px) 100vw, 2039px" /></a></p>
<blockquote><p>&#8216;अब अगर वे 15-15 लाख रुपये भारत के लोगों के, मतदाताओं के बैंक अकाउंट में नहीं जमा कर सके तो प्रति व्यक्ति पर 4.8 लाख का कर्जा तो लिखवा ही सकते हैं न। इस कर्ज में वृद्धि पिछले वर्ष की तुलना में 25.7 फीसदी अधिक है। आखिर विदेश जाने, आने, रहने, वहां के लोगों से बतियाने में खर्चा तो होगा ही न। यह बात विदेश मंत्रालय भी सदन में कहा है। आखिर महंगाई तो इन 11-वर्षों में बढ़ी ही है, यह बात देश के लोग कितना भी चिचियाकर कहेगा, अधिकारी-पदाधिकारी झड़प देंगे; लेकिन विदेश मंत्रालय तो मान ही लिया मंहगाई के कारण खर्च बढ़ा है। </p></blockquote>
<p>तभी दरभंगा वाले महाशय कहते हैं: &#8220;फकरा समझते हैं &#8216;लोकोक्ति&#8217;, बूढ़-पुरनियां गाँव-घर में कहते हैं। वैसे यह संस्कृत का श्लोक है जो चार्वाक दर्शन से उद्धृत हैं। उनके अनुसार &#8220;यावज्जीवेत सुखं जीवेद ऋणं कृत्वा घृतं पिवेत, भस्मीभूतस्य देहस्य पुनरागमनं कुतः&#8221; यानी &#8216;जब तक जियो (रिलायंस वाले का जियो नहीं समझियेगा) सुख से जियो, चाहे कर्ज लेकर ही सही, धी, मलाई, रसगुल्ला खाना-पीना पड़े, कोई बात नहीं। क्योंकि मरने के बाद शरीर जलकर राख हो जाता है और जो भी यह कहता है कि आत्मा अमर है, पुनर्जन्म होता है, सब बकवास है, गलत है। </p>
<p>वैसी स्थिति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी देश को कर्ज में डुबोकर ही सही, विदेश भ्रमण पर खर्चा पर खर्चा किये जा रहे हैं तो क्या गलत है? आखिर 2015 में देश की आबादी 1,328,024,498 थी, 11-वर्ष बाद 2025 में 1,463,865,525 हो गयी है। अब अकेले मोदी जी क्या-क्या संभालेंगे? कभी सोचे, विचार किये?</p>
<p>बहरहाल, संसद के पटल पर प्रस्तुत आंकड़े के अनुसार, 2021 और 2025 के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरों पर सरकार का लगभग 362 करोड़ रुपये खर्च हुआ। अकेले 2025 में, अमेरिका और फ्रांस की हाई-प्रोफाइल यात्राओं सहित पांच देशों की उनकी यात्राओं पर 67 करोड़ रुपये से ज़्यादा खर्च हुए। खर्च की जानकारी विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने तृणमूल सांसद डेरेक ओ&#8217;ब्रायन के एक सवाल के जवाब में दे रहे थे । आंकड़ों के अनुसार, 2025 में सबसे महंगी यात्रा फ्रांस की थी, जिस पर 25 करोड़ रुपये से ज़्यादा खर्च हुए, इसके बाद अमेरिका का नंबर आता है, जहां इस यात्रा पर 16 करोड़ रुपये से ज़्यादा खर्च हुए।</p>
<p>विगत 13 फरवरी, 2026 को एक लिखित जवाब में, केंद्रीय विदेश मंत्रालय ने बताया कि 2015 और 2025 के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेशी दौरों पर सरकारी खजाने पर 762 करोड़ रुपये खर्च हुए। ये आंकड़े हाल के वर्षों में सालाना खर्च में तेज़ी से बढ़ोतरी दिखाते हैं। जहाँ 2024 में इन दौरों पर खर्च 100 करोड़ रुपये को पार कर गया, वहीं 2025 में यह 175 करोड़ रुपये से ज़्यादा हो गया, यह साल यूरोप, अमेरिका, अफ्रीका और पूर्वी एशिया में लंबी दूरी और कई देशों के टूर सहित बड़े पैमाने पर यात्राओं के लिए जाना जाता है।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-3.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-3.jpg" alt="" width="2039" height="1143" class="aligncenter size-full wp-image-7364" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-3.jpg 2039w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-3-300x168.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-3-1024x574.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-3-768x431.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-3-1536x861.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2039px) 100vw, 2039px" /></a></p>
<p><strong>वैसे विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि विदेशी दौरों के दौरान प्रधानमंत्री को मेहमान देश के मेहमान की तरह माना जाता है, जो मेहमाननवाज़ी का काफी खर्च उठाता है। भारत के खर्च में ऑफिशियल डेलीगेशन, सुरक्षा इंतज़ाम, मीडिया दल और लॉजिस्टिक सपोर्ट से जुड़े खर्च शामिल हैं। जवाब के मुताबिक, मई 2014 से प्रधानमंत्री के डेलीगेशन में आम तौर पर काम की जरूरतों के हिसाब से 27 से 72 सदस्य होते थे, और 2025 में पांच देशों के दौरे में 95 अधिकारी शामिल होंगे। महामारी के तुरंत बाद के समय में खर्च काफी कम रहा, लेकिन जैसे-जैसे दो-तरफ़ा बातचीत और मल्टीलेटरल समिट तेज़ हुए, खर्च लगातार बढ़ता गया। जवाब में दिए गए डॉक्यूमेंट्स से पता चलता है कि सबसे कम खर्च Covid-19 की रुकावटों के बाद के समय में हुआ, लेकिन जैसे-जैसे इंटरनेशनल ट्रैवल और डिप्लोमैटिक बातचीत बड़े पैमाने पर फिर से शुरू हुई, खर्च फिर से बढ़ गया।</strong></p>
<p>सरकार ने रेफरेंस के लिए पहले के प्रधानमंत्रियों के दौरों का भी जिक्र किया, जिसमें बताया गया कि 2011 में अमेरिका के लिए 10.74 करोड़ रुपये, 2013 में रूस के लिए 9.95 करोड़ रुपये, 2011 में फ्रांस के लिए 8.33 करोड़ रुपये और 2013 में जर्मनी के लिए 6.02 करोड़ रुपये खर्च हुए, जिसमें महंगाई या करेंसी में उतार-चढ़ाव को एडजस्ट नहीं किया गया। विदेश मंत्रालय के जवाब से यह भी पता चला कि मनमोहन सिंह सरकार ने इन यात्राओं पर बहुत कम खर्च किया – 2011 में अमेरिका के लिए 10.74 करोड़ रुपये, 2013 में रूस के लिए 9.95 करोड़ रुपये, 2011 में फ्रांस के लिए 8.33 करोड़ रुपये और 2013 में जर्मनी के लिए 6.02 करोड़ रुपये – लेकिन यह भी कहा कि खर्च में बढ़ोतरी महंगाई, करेंसी के उतार-चढ़ाव, और कवर किए गए देशों की संख्या, यात्रा की दूरी, सुरक्षा ज़रूरतें और डेलीगेशन के आकार जैसे कारणों से हुई। अधिकारियों ने कहा कि खर्च मुख्य रूप से कवर किए गए देशों की संख्या, यात्रा की दूरी, सुरक्षा ज़रूरतें और डेलीगेशन के आकार के कारण अलग-अलग होता है। खैर। </p>
<p>पिछले सालों की बात करें तो, सांख्यिकी से पता चलता है कि 2024 में रूस और यूक्रेन समेत 16 देशों में 109 करोड़ रुपये खर्च हुए। 2023 में, लगभग Rs 93 करोड़ खर्च हुए, जबकि 2022 और 2021 के लिए यह आंकड़ा Rs 55.82 करोड़ और Rs 36 करोड़ था। 2023 में प्रधानमंत्री के अमेरिका दौरे पर, जिसमें वे उस समय के प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप से मिले थे,  22 करोड़ से ज़्यादा खर्च हुए। इन मुलाकातों में अक्सर ट्रेड, इन्वेस्टमेंट और सिक्योरिटी पर बातचीत होती है, जो भारत की ग्रोथ और स्टेबिलिटी के लिए ज़रूरी हैं। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-3-1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-3-1.jpg" alt="" width="2039" height="1143" class="aligncenter size-full wp-image-7365" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-3-1.jpg 2039w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-3-1-300x168.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-3-1-1024x574.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-3-1-768x431.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-3-1-1536x861.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2039px) 100vw, 2039px" /></a></p>
<p>2021 में बांग्लादेश, इटली और यूनाइटेड किंगडम के दौरे भी खर्च में शामिल थे, अकेले अमेरिका दौरे पर 19 करोड़ रुपये से ज़्यादा खर्च हुए। 2022 में, खास खर्चों में जर्मनी और जापान के दौरे शामिल थे, जिनमें से हर एक पर क्रम से 9 करोड़ रुपये और 8 करोड़ रुपये से ज़्यादा खर्च हुए। इतना ही नहीं, सांख्यिकी के अनुसार, इन दौरों से जुड़े पब्लिक एंगेजमेंट, एडवरटाइजिंग और ब्रॉडकास्टिंग कॉस्ट की डिटेल्स भी शामिल थीं। उदाहरण के लिए, 2023 में मिस्र के दौरे पर एडवरटाइजिंग पर 11.90 लाख रुपये खर्च हुए। क्योंकि इंटरनेशनल ट्रैवल मोदी की फॉरेन पॉलिसी का एक अहम हिस्सा बना हुआ है, इसलिए इन ट्रिप्स के फाइनेंशियल पहलू सरकारी और पब्लिक फोरम पर दिलचस्पी और जांच का मुद्दा बने हुए हैं।</p>
<blockquote><p>ज्ञातव्य हो कि राइट टू इन्फॉर्मेशन कैंपेनर और रिटायर्ड नेवी कमोडोर लोकेश बत्रा ने अपने RTI आवेदन के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके पहले के मनमोहन सिंह की विदेश यात्राओं का विस्तार माँगा था। प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्रालय ने सुरक्षा की वजह से विस्तृत विवरण देने से मना कर दिया था। कमोडोर बत्रा ने दावा किया था कि वह पैसे की तंगी से जूझ रही एयरलाइन एयर इंडिया को प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा भुगतान में देरी के पीछे की वजह की अध्ययन करना चाहते हैं।</p></blockquote>
<p>उन दिनों दिल्ली और देश के अखबार, टीवी पर प्रकाशित समाचारों के के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी पर एयरलाइन का 134 करोड़ रुपये बकाया है, क्योंकि उन्होंने जून और दिसंबर 2015 के बीच कम से कम 10 बार चार्टर्ड फ्लाइट्स लीं। कंपनी ने इन सभी ट्रिप्स के इनवॉइस बनाए हैं, लेकिन जैसा कि आम बात हो गई है, बिल अभी तक क्लियर नहीं हुए हैं। बत्रा प्रश्न उठाये थे कि &#8220;यह एक कैश की कमी वाली एयरलाइन है जो पैसा नहीं कमाती। देश के सबसे बड़े ऑफिस की तरफ से इन बिलों को चुकाने में इतनी देरी क्यों हो रही है? ब्याज का खर्च कौन उठाएगा? आम तौर पर प्रधानमंत्री कार्यालय को इनवॉइस मिलने के एक महीने के अंदर इनमें से हर बिल का पेमेंट कर देना चाहिए।&#8221;</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-2.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-2.jpg" alt="" width="2039" height="1143" class="aligncenter size-full wp-image-7366" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-2.jpg 2039w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-2-300x168.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-2-1024x574.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-2-768x431.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Modi-2-1536x861.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2039px) 100vw, 2039px" /></a></p>
<p><strong>एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि प्रधानमंत्री कार्यालय खुद मोदी की हर विदेश यात्रा के खर्च का खुलासा करने में सावधान रहा है। आरटीआई आवेदन से छोटे-छोटे जवाब मिलते हैं, और अक्सर &#8220;बिल प्रोसेस में है&#8221; या &#8220;बिल नहीं मिला&#8221; जैसे कारण बताए जाते हैं। एयर इंडिया को मिलने वाली रकम के बारे में जानकारी तब सामने आई जब बत्रा ने सीधे एयर इंडिया को एक अलग आरटीईआई फाइल की। पिछले साल के आंकड़े से खर्च बढ़ा है या घटा है, जिसमें पिछले सालों के मुकाबले 80 परसेंट से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई थी। एक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2015-16 में प्रधानमंत्री मोदी और उनके कैबिनेट साथियों की यात्राओं पर Rs 567 करोड़ खर्च हुए, जो पिछले साल के मुकाबले काफी ज़्यादा थी। </strong></p>
<p>प्रधानमंत्री और उनके मंत्रियों का कुल यात्रा खर्च, वित्तीय वर्ष 2015-16 की शुरुआत में बजट में अनुमानित Rs 269 करोड़ से बढ़कर, साल के आखिर में रिवाइज्ड अनुमानों के मुताबिक Rs 567 करोड़ हो गया। इसके अलावा, 2014-15 तक तीन सालों में नौकरशाहों का कुल टूर खर्च Rs 1,500 करोड़ से ज़्यादा था। पिछली सरकार ने अपने पांच साल के कार्यकाल में ट्रैवल पर Rs 1,500 करोड़ खर्च किए थे। इसकी तुलना में, रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सिर्फ़ तीन सालों (2014-15 और 2016-17 के बीच) में NDA सरकार का ट्रैवल बिल लगभग Rs 1,140 करोड़ है। 2024 में इन विदेश यात्राओं पर सालाना खर्च 100 करोड़ रुपये से ज़्यादा था, जबकि 2025 में यह 175 करोड़ रुपये को पार कर गया।</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/%e2%82%b9762-47-cr-was-spent-on-pm-modis-foreign-visits-in-the-last-ten-years">इसमें इतना शोरगुल क्यों? वित्त मंत्री बजट में ₹214.82 लाख करोड़ कर्ज बताई थी, मोदी जी की &#8216;विदेश यात्रा खर्च&#8217; उसी खाते में जोड़ दिया जाय</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>राष्ट्रीय रेडियो संग्रहालय-भाग-1: &#8216;कभी मेरे मन की बात भी सुनें माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी&#8217;: आपका पुराना रेडियो</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 06 Feb 2026 03:17:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
		<category><![CDATA[aakashvani]]></category>
		<category><![CDATA[all india radio]]></category>
		<category><![CDATA[narendra modi]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>* भारत की आज़ादी की खबर 15 अगस्त, 1947 की सुबह 5:30 बजे ऑल इंडिया रेडियो पर आधिकारिक तौर पर प्रसारित की गई थी । जाने-माने एक्टर और न्यूज़रीडर पूर्णम विश्वनाथन ने 5:30 बजे ऑल इंडिया रेडियो पर घोषणा की। ऑल इंडिया रेडियो ने सत्ता के ऐतिहासिक हस्तांतरण का प्रसारण किया। जवाहरलाल नेहरू का मशहूर &#8220;ट्रिस्ट विद [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><em>* भारत की आज़ादी की खबर 15 अगस्त, 1947 की सुबह 5:30 बजे ऑल इंडिया रेडियो पर आधिकारिक तौर पर प्रसारित की गई थी । जाने-माने एक्टर और न्यूज़रीडर पूर्णम विश्वनाथन ने 5:30 बजे ऑल इंडिया रेडियो पर घोषणा की। ऑल इंडिया रेडियो ने सत्ता के ऐतिहासिक हस्तांतरण का प्रसारण किया। जवाहरलाल नेहरू का मशहूर &#8220;ट्रिस्ट विद डेस्टिनी&#8221; भाषण आधी रात को देशभर में प्रसारित किया गया।</p>
<p>* उस दिन शुक्रवार था। शाम के 5:20 बजे थे। महात्मा गांधी को गोली मारी थी। महात्मा गांधी की मौत की खबर ऑल इंडिया रेडियो 6:00 प्रसारित किया था। इस प्रसारण के बाद बाद प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का रेडियो पर प्रसारण हुआ &#8216;लाइट स्नफड आउट&#8217; ।</p>
<p>* प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की ताशकंद में मौत की खबर का ऐलान ऑल इंडिया रेडियो ने 11 जनवरी, 1966 को उनकी मौत के कुछ ही समय बाद आधिकारिक तौर पर किया था। शास्त्री का निधन 11 जनवरी, 1966 को सुबह 1:32 बजे (ताशकंद समय) हुआ, जो भारतीय समय के अनुसार लगभग 2:02 बजे था।</p>
<p>* 1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के दौरान, ऑल इंडिया रेडियो और कोलकाता में गुप्त &#8220;स्वाधीन बांग्ला बेतार केंद्र&#8221;  25 मार्च, 1971 को पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई के तुरंत बाद युद्ध की खबरें एक्टिव रूप से प्रसारित करना शुरू कर दिया था। स्वतंत्रता की घोषणा और 10 अप्रैल को अंतरिम सरकार के गठन सहित मुख्य घटनाओं को प्रसारित किया गया। ऑल इंडिया रेडियो के समाचार वाचक देबदुलाल बंद्योपाध्याय भारत और पूर्वी पाकिस्तान दोनों में श्रोताओं के लिए एक प्रमुख आवाज़ बन गए थे।</p>
<p>* इंदिरा गांधी की मौत की आधिकारिक घोषणा ऑल इंडिया रेडियो ने 31 अक्टूबर, 1984 की शाम करीब 6:00 बजे की थी, जबकि उन्हें सुबह 9:20 बजे गोली मारी गई थी। गोलीबारी की खबरें पहले ही फैल गई थीं, लेकिन उनकी मौत की आधिकारिक पुष्टि शाम तक नहीं की गई थी।</p>
<figure id="attachment_7334" aria-describedby="caption-attachment-7334" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-4.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-4.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-7334" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-4.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-4-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-4-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-4-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-4-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-7334" class="wp-caption-text">गूल्येल्मो मार्कोनी</figcaption></figure>
<p>* 23 मार्च, 1979 को दोपहर 1:10 बजे अपने रेगुलर प्रोग्राम को रोककर यह घोषणा की कि जयप्रकाश नारायण का बॉम्बे के जसलोक अस्पताल में निधन हो गया है, यह जानकारी प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने लोकसभा को गलत दी थी। इस गलती को लगभग 30-60 मिनट बाद सुधारा गया, जिससे जनता पार्टी सरकार को बहुत शर्मिंदगी हुई। वास्तविक रूप में 8 अक्टूबर, 1979 को जेपी का निधन पटना में उनके घर पर सुबह लगभग 5:45 बजे हुआ। कुछ पल बाद, इस खबर की पुष्टि होने के बाद ऑल इंडिया रेडियो पर प्रसारित की गई।</em> </p>
<p><strong>सन 1947 में, जब देश आज़ाद हुआ था, देश की आवादी करीब 39 करोड़ थी। आज 145 करोड़ है। संवाद के क्षेत्र में भले आज उम्मीद से अधिक परिवर्तन हुआ हो, भारत के लगभग 40 करोड़ से अधिक लोग रेडियो के श्रोता है, चाहे वे दिल्ली के कर्तव्य पथ पर सुनते हों या बिहार के दरभंगा ले लालबाग चौक पर या लखनऊ के घंटाघर और बड़ा इमामबाड़ा में। लोग माने अथवा नहीं, विज्ञान में इतने विकास के बाद भी, रेडियो आज भी  भारत सरकार या सत्ता के गलियारे में बैठे लोगों के लिए, सरकार की नीतियों के लिए, सरकार की आवाज के लिए, बल्कि भारत के आम लोगों के लिए कल भी एक महत्वपूर्ण यंत्र था, आज भी अपनी औकात बरकरार रखे है, बिना किसी आंच के । </strong></p>
<p>देश के करीब 40 करोड़ से अधिक रेडियो के श्रोता, जो मतदाता भी हैं, और देश की संस्कृति के साथ-साथ ऐतिहासिक घरोहरों को संजोने में भी विश्वास भी रखते हैं। सन 2014 में जब नरेंद्र मोदी देश का प्रधानमंत्री बने, उस वर्ष महात्मा गांधी के जन्मदिवस के दूसरे दिन, यानी 3 अक्टूबर, 2014 से रेडियो पर &#8216;मन की बात&#8217; का प्रसारण होना शुरू हुआ। प्रधानमंत्री अलग-अलग सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर अपने मन की बात कहते गए। भारत के श्रोताओं ने उनके शब्दों को ह्रदय से ग्रहण किया। विगत माह 25 जनवरी, 2026 तक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के &#8220;मन की बात&#8221; रेडियो प्रोग्राम के 130 एपिसोड प्रसारित हो चुके हैं। 130वां एपिसोड 2026 का पहला प्रसारण था।</p>
<blockquote><p>आज समय आ गया है कि देश के करीब 40 करोड़ से अभी अधिक रेडियो श्रोता, जो मतदाता भी हैं, और देश की संस्कृति के साथ-साथ ऐतिहासिक घरोहरों को संजोने में भी विश्वास रखते हैं, के मन की बात को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुनें। साथ ही, उसपर यथाशीघ्र निर्णय लेने के लिए अनुरोध किया है। मन की बात सुनने, सुनाने का कार्य एकतरफा नहीं हो। साल 2011 में यूनेस्को के सदस्य देशों द्वारा घोषित और 2012 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (A/RES/67/124) द्वारा एक अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में अपनाए जाने के बाद, 13 फरवरी विश्व रेडियो दिवस के अवसर पर देश के सैकड़ों रेडियो श्रोता संघ ने देश में एक राष्ट्रीय रेडियो संग्रहालय की स्थापना के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी रेडियो दिवस मनाने का आग्रह किया है। </p></blockquote>
<figure id="attachment_7335" aria-describedby="caption-attachment-7335" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-6.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-6.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-7335" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-6.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-6-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-6-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-6-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-6-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-7335" class="wp-caption-text">दशकों पहले मद्रास ऑल इंडिया रेडियो</figcaption></figure>
<p>भारत के कोने-कोने में आज भी अनेक रेडियो प्रेमी, तकनीकी जानकार एवं संग्राहक ऐसे हैं, जिन्होंने निजी स्तर पर दशकों पुराने, दुर्लभ और ऐतिहासिक रेडियो सेट सुरक्षित रखे हुए हैं। ये रेडियो केवल यंत्र नहीं हैं, बल्कि भारत के सामाजिक जीवन, सूचना क्रांति, स्वतंत्रता आंदोलन और वैज्ञानिक प्रगति के साक्षी रहे हैं। यह पहल किसी एक समाज, वर्ग या संगठन तक सीमित नहीं है। यह सम्पूर्ण भारत की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और तकनीकी विरासत से जुड़ा हुआ विषय है, जिसमें हर समाज की सहभागिता आवश्यक है। यह महज विरासत के संरक्षण का ही मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय रेडियो संग्रहालय होने से  आने वाली पीढ़ियों के लिए इतिहास को सुरक्षित करने का भी प्रयास होगा। </p>
<p>देश के रेडियो श्रोता संघों का कहना है कि रेडियो अपनी सभी विविधताओं में मानवता का जश्न मनाने का एक शक्तिशाली माध्यम तो है ही, यह लोकतांत्रिक चर्चा के लिए एक मंच है। वैश्विक स्तर पर, रेडियो सबसे ज़्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला माध्यम कल भी था और आज भी बना हुआ है। सबसे ज़्यादा श्रोताओं तक पहुँचने की इस अनोखी क्षमता का मतलब है कि रेडियो समाज के विविधता के अनुभव को आकार दे सकता है, सभी आवाज़ों को बोलने, प्रतिनिधित्व करने और सुने जाने का एक मंच बन सकता है, बशर्ते समाज और व्यवस्था इसे वह सम्मान दे, जिसे यह हकदार है । क्योंकि रेडियो हमेशा से विविध समुदायों की सेवा करती आयी है विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों से, दृष्टिकोण और सामग्रियों को प्रदान कर श्रोताओं की विविधताओं को प्रतिबिंबित करता आया है, कर रहा है। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-6-1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-6-1.jpg" alt="" width="1361" height="1598" class="aligncenter size-full wp-image-7336" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-6-1.jpg 1361w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-6-1-256x300.jpg 256w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-6-1-872x1024.jpg 872w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-6-1-768x902.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-6-1-1308x1536.jpg 1308w" sizes="auto, (max-width: 1361px) 100vw, 1361px" /></a></p>
<p><strong>बीकानेर (राजस्थान) के रेडियो संग्रहकर्ता दिनेश माथुर</strong> का कहना है कि रेडियो को दुनिया भर में सबसे ज़्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले माध्यमों में से एक माना जाता है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, रेडियो में &#8220;समाज के विविधता को देखने के तरीके को प्रभावित करने की शक्ति है। यह सभी आवाजों को बोलने के लिए एक मंच प्रदान करता है। रेडियो कैसे काम करता है? यह रेडियो तरंगों को प्रसारित और प्राप्त करके काम करता है, जो एक प्रकार का इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन है। ट्रांसमीटर एंटीना में बहने वाली बिजली इलेक्ट्रॉनों को ऊपर और नीचे कंपन कराती है। इससे रेडियो तरंगें उत्पन्न होती हैं। रेडियो तरंगों की एक आवृत्ति होती है, जो प्रति सेकंड एक निश्चित बिंदु से गुज़रने वाली तरंगों की संख्या होती है। AM रेडियो आवृत्ति को मापने के लिए किलोहर्ट्ज़ (kHz) का उपयोग करता है। FM रेडियो आवृत्ति को मापने के लिए मेगाहर्ट्ज़ (MHz) का उपयोग करता है। </p>
<p>इतना ही नहीं, वे यह भी कहते हैं कि रेडियो एक कम लागत वाला माध्यम है जो विशेष रूप से दूरदराज के समुदायों और कमज़ोर लोगों तक पहुँचने के लिए उपयुक्त है, जो लोगों के शैक्षिक स्तर की परवाह किए बिना सार्वजनिक बहस में हस्तक्षेप करने के लिए एक मंच प्रदान करता है। यह आपातकालीन संचार और आपदा राहत में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। रेडियो समुदायों को एक साथ लाने और बदलाव के लिए सकारात्मक बातचीत को बढ़ावा देने के लिए विशिष्ट रूप से स्थित है। अपने दर्शकों को सुनकर और उनकी ज़रूरतों का जवाब देकर, रेडियो सेवाएँ उन चुनौतियों का सामना करने के लिए आवश्यक विचारों और आवाज़ों की विविधता प्रदान करती हैं जिनका हम सभी सामना करते हैं।</p>
<p><strong>बहरहाल, राजनीतिक मानचित्र पर वायसराय लिनलिथगो के कालखंड (1936-1944) में कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटी, कुछ मीठी तो कुछ खट्टी। लेकिन उनके कालखंड में जो हुआ वह भारत के इतिहास में मील का पत्थर भी सिद्ध हुआ। वायसराय लिनलिथगो सबसे लम्बे समय तक सेवा करने वाले वायसराय रहे। अगर द्वितीय विश्वयुद्ध की घटना को, जिसमें भारतीय समर्थन के लिए क्रिप्स मिशन आया था, कुछ पल के लिए दर किनार कर दें, तो उनके समय में भारत सरकार अधिनियम, 1935 लागू हुआ, 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन का सूत्रपात भी उन्हीं के समय में हुआ, भले उसे दबाने की कोशिश की गई हो। आज़ाद हिन्द फ़ौज का गठन भी उन्हीं के कालखंड में हुआ। बंगाल का विनाशकारी अकाल भी इन्हीं के समय में हुआ। लेकिन इनके ही कालखंड में जो हुआ वह भारत की आवाज भी बन गयी &#8211; आप माने अथवा नहीं। </strong></p>
<figure id="attachment_7332" aria-describedby="caption-attachment-7332" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-10.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-10.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-7332" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-10.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-10-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-10-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-10-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-10-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-7332" class="wp-caption-text">वायसराय लिनलिथगो, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद और पंडित जवाहरलाल नेहरू</figcaption></figure>
<p>इतिहास के अनुसार ब्रॉडकास्टिंग के पहले कंट्रोलर लियोनेल फील्डन ने एक दावत के बाद वायसराय लिनलिथगो को कहा कि इंडियन स्टेट ब्रॉडकास्टिंग सर्विस, जो 1930 में दो साल के लिए एक्सपेरिमेंटल बेसिस पर शुरू हुई थी, नाम काफी नौकरशाही था। वायसराय मानना था कि यह नाम काफी लंबा है। जब ब्रॉडकास्टर उनसे बार-बार कुछ अलग सुझाने के लिए निवेदन कर रहा था तो वायसराय लिनलिथगो ने धीरे से कहा, &#8220;ऑल इंडिया रेडियो&#8221;, अच्छा रहेगा? ब्रॉडकास्टर ख़ुशी से नाच उठे। कितना बेहतरीन &#8216;आद्याक्षर (इनिशियल्स)&#8217; हैं! अतः ऑल इंडिया रेडियो नाम जब भी होठों पर आएगा, वायसराय लिनलिथगो का नाम स्वतः आएगा, आप माने अथवा नहीं। </p>
<p><strong>रायपुर (मध्यप्रदेश) के रेडियो संग्रहकर्ता मनोहर डेनवानी</strong> का कहना है कि आज देश में कई लोग ऐसे हैं जिन्होंने अपना जीवन रेडियो को समर्पित कर दिया है। आज भी उनके पास सैकड़ों ही नहीं, हज़ारों की संख्या में पुराने और दुर्लभ रेडियो उपलब्ध हैं। और अपने संसाधनों से इस विरासत को संजोकर रखा है। परंतु अब इन धरोहरों के संरक्षण, रखरखाव और भावी पीढ़ी तक सुरक्षित रूप से पहुँचाने में गंभीर कठिनाइयाँ सामने आ रही हैं।वैसी स्थिति में अगर दिल्ली के पालिका बाजार स्थित &#8216;चरखा संग्रहालय&#8217; के तर्ज पर यदि देश में राष्ट्रीय स्तर का रेडियो संग्रहालय स्थापित किया जाता है, तो ⁠इन अमूल्य रेडियो सेटों का वैज्ञानिक व ऐतिहासिक संरक्षण संभव होगा, ⁠युवा पीढ़ी भारत के संचार इतिहास से परिचित हो सकेगी, ⁠रेडियो से जुड़े अनाम योगदानकर्ताओं को राष्ट्रीय पहचान मिलेगी, ⁠भारत की तकनीकी विरासत को वैश्विक मंच पर सम्मान प्राप्त होगा। </p>
<p>विश्व रेडियो दिवस 13 फरवरी को मनाया जाता है। इस दिन का मकसद रेडियो के ज़रिए शिक्षा, जानकारी और अभिव्यक्ति की आज़ादी को बढ़ावा देना है। इस साल, 2025 में, विश्व रेडियो दिवस की थीम है &#8211; &#8220;रेडियो और जलवायु परिवर्तन: जलवायु कार्रवाई के लिए एक शक्तिशाली उपकरण&#8221;। ऑल इंडिया रेडियो दुनिया के सबसे बड़े रेडियो नेटवर्कों में से एक है। 3 जुलाई 2001 को, रेडियो सिटी बैंगलोर लॉन्च हुआ, जो पहला निजी FM रेडियो स्टेशन बना। रेडियो का आविष्कार गुग्लिल्मो मार्कोनी ने किया था। उन्होंने 1890 के दशक में रेडियो ट्रांसमीटर का आविष्कार किया था। हालांकि, जगदीश चंद्र बोस पहले व्यक्ति थे जिन्होंने रेडियो तरंगों को पकड़ने के पीछे के वैज्ञानिक सिद्धांतों का प्रदर्शन किया। उन्हें अक्सर वायरलेस दूरसंचार का जनक कहा जाता है।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-8.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-8.jpg" alt="" width="1361" height="1598" class="aligncenter size-full wp-image-7337" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-8.jpg 1361w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-8-256x300.jpg 256w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-8-872x1024.jpg 872w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-8-768x902.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-8-1308x1536.jpg 1308w" sizes="auto, (max-width: 1361px) 100vw, 1361px" /></a></p>
<p>भारत में राष्ट्रीय प्रसारण दिवस 1927 में शुरू होने के बाद से देश के प्रसारण क्षेत्र के विकास की याद दिलाता है। यह दिन भारत के विकास, शैक्षिक पहुंच और सांस्कृतिक संरक्षण में प्रसारण द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालता है। सामुदायिक रेडियो जैसी पहलों पर सरकार का जोर दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंचने और स्थानीय विकास को बढ़ावा देने में प्रसारण के स्थायी महत्व को रेखांकित करता है। जैसे ही भारत एक और राष्ट्रीय प्रसारण दिवस मना रहा है, वह एक ऐसे भविष्य की कल्पना करता है जहां प्रसारण राष्ट्रीय एकता, शिक्षा और नागरिक सशक्तिकरण के लिए एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में अनुकूलन और सेवा करना जारी रखेगा।</p>
<p>जैसे-जैसे भारत डिजिटल युग में आगे बढ़ रहा है, ध्यान एक व्यापक, समावेशी और तकनीकी रूप से उन्नत प्रसारण प्रणाली बनाने पर केंद्रित हो रहा है जो वैश्विक गुणवत्ता मानकों को पूरा करते हुए अपनी आबादी की विविध आवश्यकताओं को पूरा करती है। भारत की रेडियो यात्रा राज्य के दखल से बहुत पहले, कलकत्ता (1923) और मद्रास (1924) में शौकिया रेडियो क्लबों के साथ शुरू हुई। 23 जुलाई, 1927 को, बॉम्बे स्टेशन ने इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी (IBC) के तहत भारत का पहला औपचारिक प्रसारण किया।IBC आर्थिक रूप से विफल हो गई और 1930 में ब्रिटिश सरकार ने इसे इंडियन स्टेट ब्रॉडकास्टिंग सर्विस (ISBS) के रूप में अपने कब्जे में ले लिया। 1936 में, ISBS का पुनर्गठन किया गया और इसका नाम बदलकर ऑल इंडिया रेडियो (AIR) कर दिया गया, जिसे श्रम और उद्योग विभाग के तहत रखा गया। </p>
<p>ऑल इंडिया रेडियो 1936 में इंडियन स्टेट ब्रॉडकास्टिंग सर्विस से विकसित होकर उभरा। स्वतंत्रता के बाद, ऑल इंडिया रेडियो का तेजी से विस्तार हुआ, और 1956 में &#8220;आकाशवाणी&#8221; नाम अपनाया। आज, ऑल इंडिया रेडियो 591 स्टेशनों का संचालन करता है, जो भारत की 98% आबादी तक पहुंचता है और 23 भाषाओं और 146 बोलियों में प्रसारण करता है।विविध भारती 1957 में लॉन्च किया गया था, जिसमें लोकप्रिय मनोरंजन और फिल्मी संगीत शामिल था। 1947 में AIR के पास सिर्फ 6 स्टेशन थे, जो भारत के 2.5% क्षेत्र और 11% आबादी को कवर करते थे। </p>
<p><strong>गाजियाबाद के अधिवक्ता और दशकों से रेडियो श्रोता सुदीप शाहू </strong>कहते हैं: &#8220;भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी हर माह के आखिरी इतवार को मन की बात कार्यक्रम के माध्यम से राष्ट्र को संबोधित करते हैं। &#8216;मन की बात&#8217; में वो उन लोगों की बातें करते हैं जिनको दुनिया नहीं जानती है। विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करते हैं। हम रेडियो प्रेमी और देश भर के पुराने रेडियो के संग्रहकर्ताओं की प्रधानमंत्री जी से गुजारिश करते हैं कि देश की राजधानी में राष्ट्रीय चरखा संग्रहालय के तर्ज पर एक राष्ट्रीय रेडियो संग्रहालय की भी स्थापना हो। रेडियो संग्रहालय स्थापित करने की घोषणा 13 फरवरी विश्व रेडियो दिवस पर प्रधानमंत्री स्वयं करें तो बेहद खुशी होगी। उत्तर प्रदेश गजरौला निवासी राम सिंह बौद्ध , बीकानेर राजस्थान निवासी दिनेश माथुर , रायपुर छत्तीस गढ़ निवासी मनोहर लाल डेंगियानी, संभाजी नगर के संजय पवार, जमशेदपुर के चिन्मया महतो, बंगलौर कर्नाटक के उदय कलबुर्गी, गुवाहटी असम के परिवहन विभाग के देबो कुमार, पुथियारा चकवाड के सेथालीकुट्टी देश के रेडियो संग्रहकर्ता हैं। सभी चाहते हैं कि उनके संग्रह को राष्ट्रीय रेडियो संग्रहालय बनाकर सुरक्षित और संरक्षित किया जाये।&#8221; </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-2.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-2.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-7338" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-2.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-2-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-2-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-2-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-2-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p>ऑल इंडिया रेडियो का बाहरी सेवा प्रभाग 100 से अधिक देशों में प्रसारण करता है, जो विश्व स्तर पर भारत की आवाज को प्रोजेक्ट करता है और प्रवासी भारतीयों से जुड़ता है। FM चैनलों की शुरुआत और डिजिटल रेडियो मोंडियल (DRM) तकनीक का उपयोग करके डिजिटल प्रसारण में संक्रमण ऑल इंडिया रेडियो की आधुनिकीकरण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। भारत में ब्रॉडकास्टिंग की शुरुआत आज़ादी से पहले के समय से हुई है और तब से इसमें काफी बदलाव आया है। इस क्षेत्र को नियंत्रित करने वाली नीतियां सख्त सरकारी नियंत्रण से बदलकर ज़्यादा उदार और विविध हो गई हैं। ये बदलाव तकनीकी प्रगति, सामाजिक ज़रूरतों और बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार को दर्शाते हैं। </p>
<p>नियामक ढांचा सार्वजनिक हित, राष्ट्रीय सुरक्षा और विविध कंटेंट की बढ़ती मांग को संतुलित करने के लिए लगातार खुद को ढालता रहा है। भारत की ब्रॉडकास्टिंग नीतियां सरकारी नियंत्रण से एक विविध, विनियमित इकोसिस्टम में विकसित हुई हैं, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सामाजिक ज़िम्मेदारी के साथ संतुलित करती हैं। यह ढांचा पारंपरिक से डिजिटल मीडिया तक, तकनीकी बदलावों के अनुसार खुद को ढालता है। जैसे-जैसे यह क्षेत्र विकसित होता रहेगा, नीतियां इस संतुलन को बनाए रखने के लिए खुद को समायोजित करती रहेंगी, साथ ही इनोवेशन को बढ़ावा देंगी और नई चुनौतियों का सामना करेंगी।</p>
<p><strong>सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा शुरू की गई राष्ट्रीय प्रसारण नीति 2024 का लक्ष्य प्रसारण क्षेत्र के लिए एक मज़बूत भविष्य को परिभाषित करना है। यह एक ऐसे जीवंत उद्योग की कल्पना करती है जो भारत की सांस्कृतिक विविधता को बढ़ावा दे और डिजिटल अर्थव्यवस्था में उसके बदलाव का समर्थन करे। परामर्श और हितधारकों के साथ बातचीत के बाद, TRAI ने सितंबर 2023 में एक प्री-कंसल्टेशन पेपर जारी किया, जिसमें सुझाव आमंत्रित किए गए और 2023 के अंत और 2024 की शुरुआत में देश भर में बैठकें आयोजित की गईं। यह प्रक्रिया एक कंसल्टेशन पेपर में समाप्त हुई जो इनपुट को संश्लेषित करता है और राष्ट्रीय प्रसारण नीति के लिए रणनीतिक दिशाओं की रूपरेखा तैयार करता है, जो भारत के प्रसारण परिदृश्य में संरचित विकास और तकनीकी अनुकूलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।</strong></p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-1.jpg" alt="" width="2046" height="938" class="aligncenter size-full wp-image-7339" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-1.jpg 2046w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-1-300x138.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-1-1024x469.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-1-768x352.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/02/Radio-1-1536x704.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2046px) 100vw, 2046px" /></a></p>
<p>सरकारी सूत्रों का कहना है कि प्रसारण क्षेत्र को मजबूत करने के लिए सरकारी पहल डिजिटल इंडिया: इस प्रमुख कार्यक्रम का लक्ष्य भारत को एक डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था में बदलना है। भारतनेट परियोजना का उद्देश्य देश की सभी ग्राम पंचायतों को ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान करना है। ब्रॉडकास्ट इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क डेवलपमेंट योजना का उद्देश्य प्रसार भारती के प्रसारण बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है। प्रसारण का स्वचालन सम्बन्धी पहल AIR और दूरदर्शन के स्थलीय ट्रांसमीटरों और स्टूडियो के डिजिटलीकरण पर केंद्रित है। सामुदायिक रेडियो सहायता योजना यह योजना सामुदायिक रेडियो स्टेशन स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है। पिछले 9 वर्षों में, इस क्षेत्र में काफी वृद्धि हुई है और सामुदायिक रेडियो स्टेशनों की संख्या 2014 में 140 से बढ़कर 2023 में 481 हो गई है।</p>
<p>इतना ही नहीं, भारत सरकार देशव्यापी रेडियो कवरेज का विस्तार करने के उद्देश्य से FM रेडियो चैनल आवंटन के लिए एक पारदर्शी ई-नीलामी प्रणाली लागू कर रही है। वर्तमान में, रेडियो भारत के 80% भौगोलिक क्षेत्र और 90% से अधिक आबादी तक पहुँचता है। इस पहुँच को और बढ़ाने के लिए, सरकार ने ई-नीलामी के तीसरे बैच के तहत 284 शहरों में 808 चैनलों की नीलामी की घोषणा की है। इस पहल को देशव्यापी रेडियो पहुंच बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है, जो संभावित रूप से पहले से वंचित क्षेत्रों और आबादी तक रेडियो सेवाएं ला सकता है। (क्रमशः &#8230;..)</p>
<p><strong>आगे पढ़िए : जब रायपुर (मध्य प्रदेश) में &#8216;टाईल्स&#8217; का व्यापारी &#8216;रेडियो संग्रहकर्ता&#8217; बन गया, नाम है मनोहर डेनवानी </strong></p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/establish-national-museum-of-radio">राष्ट्रीय रेडियो संग्रहालय-भाग-1: &#8216;कभी मेरे मन की बात भी सुनें माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी&#8217;: आपका पुराना रेडियो</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>&#8220;मैं ही सही हूँ, बाकी सब गलत है &#8211; यह लोकतंत्र नहीं है।​ यह अहंकार है। यह उद्दंडता है​&#8221;, अपने अंतिम भाषण में धनकड़ &#8216;प्रधानमंत्री का नाम तक नहीं लिया&#8221;</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/dhankar-did-not-even-take-the-name-of-the-prime-minister-in-his-last-speech</link>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 22 Jul 2025 08:02:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
		<category><![CDATA[dhankad]]></category>
		<category><![CDATA[narendra modi]]></category>
		<category><![CDATA[parliament]]></category>
		<category><![CDATA[prime minister]]></category>
		<category><![CDATA[resignation]]></category>
		<category><![CDATA[vice president]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>रायसीना पहाड़, नई दिल्ली : ​रुद्राक्ष के माला में 108 दाना होता है, बहुत शुभ माना जाता है। लेकिन भारतीय संसद से पचास कदम दूर 108-चर्च रोड का नया आवास भारत के तत्कालीन उप-राष्ट्रपति जगदीप धनकड़ के लिए &#8216;खास&#8217; नहीं बन पाया। इस भवन में 110 दिन रहने के बाद धनकड़ &#8216;पूर्व-उप-राष्ट्रपति&#8217; हो गए। वास्तु [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/dhankar-did-not-even-take-the-name-of-the-prime-minister-in-his-last-speech">&#8220;मैं ही सही हूँ, बाकी सब गलत है &#8211; यह लोकतंत्र नहीं है।​ यह अहंकार है। यह उद्दंडता है​&#8221;, अपने अंतिम भाषण में धनकड़ &#8216;प्रधानमंत्री का नाम तक नहीं लिया&#8221;</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>रायसीना पहाड़, नई दिल्ली : ​रुद्राक्ष के माला में 108 दाना होता है, बहुत शुभ माना जाता है। लेकिन भारतीय संसद से पचास कदम दूर 108-चर्च रोड का नया आवास भारत के तत्कालीन उप-राष्ट्रपति जगदीप धनकड़ के लिए &#8216;खास&#8217; नहीं बन पाया। इस भवन में 110 दिन रहने के बाद धनकड़ &#8216;पूर्व-उप-राष्ट्रपति&#8217; हो गए। वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में भारत के कोई भी उपराष्ट्रपति अपना आवास बनाने से पूर्व 108 बार सोचेंगे अवश्य। जिस सम्मान के साथ इस आवास में धनकड़ आये थे, शायद उस सम्मान के साथ वे शायद नहीं निकले। यह बात धनकड़ तो जानते ही होंगे, &#8216;वे&#8217; भी &#8216;भिज्ञ&#8217; होंगे ही। </strong></p>
<p><em>रायसीना पहाड़ पर अभी ​भारतीय राजनीति के इतिहास का पन्ना गरम है। वजह भी है &#8216;क्षणभर में ​उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ का &#8216;पूर्व-उपराष्ट्रपति&#8217; होना। स्वतंत्र भारत के राजनीतिक इतिहास में धनकड़ तीसरे उपराष्ट्रपति हैं जो अपने कार्यकाल के दौरान ही राष्ट्रपति को अपना त्यागपत्र सौंपे। वैसे रायसीना पहाड़ पर &#8216;अचानक की इस घटना पर शोध जारी है &#8211; क्या हुआ? क्यों ऐसा निर्णय लिए? किसने उन्हें मजबूर किया? देखने में तो ऐसा नहीं लग रहा था कि त्यागपत्र का कारण उनका स्वास्थ्य हो सकता है? कहीं को फोन पर संवाद आया और वे निर्णय ले लिए? या फिर कोई &#8216;ऊपर से अपना संवाद वाहक भेजकर उन्हें ऐसा करने का आदेश दिया? अब कौन उपराष्ट्रपति होंगे? कौन-कौन लोग प्रबल दावेदार हैं ? क्या बिहार की राजनीति पर कब्ज़ा करने के लिए नीतीश कुमार को 108-चर्च रोड में आवास दिया जाएगा? क्या आदित्य योगीनाथ को उत्तर प्रदेश से यहाँ लाया जायेगा? क्या जम्मू कश्मीर से मनोज सिन्हा को बुलाया जायेगा? क्या महिला सशक्तिकरण के खातिर उपराष्ट्रपति के पद पर वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण को पदस्थापित किया जायेगा? मंत्रिमंडल का भी विस्तार होने का समय है। </em></p>
<blockquote><p>कई लोग यह कह रहे हैं कि सेन्ट्रल विस्टा क्षेत्र में महान स्वतंत्रता सेनानी, स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षामंत्री, जामिया मिलिया इस्लामिया, इंडियन काउन्सिल फॉर कल्चरल रिलेशंस के अलावे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान​, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के संस्थापक भारत रत्न मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के नाम से अंकित 6​-मौलाना आज़ाद ​मार्ग से 108-चर्च रोड का आवास वास्तु के हिसाब से गंवारा नहीं हुआ धनकड़ साहब को । विगत 3 अप्रैल को उपराष्ट्रपति संसद भवन परिसर के पास चर्च रोड स्थित अपने नए आधिकारिक आवास में ​आये थे। उनका सचिवालय भी &#8216;उपराष्ट्रपति एन्क्लेव&#8217; में स्थानांतरित हो गया ​था ।​ खैर। </p></blockquote>
<p><strong>आर्यवर्तइण्डियननेशन.कॉम अनेकों लोगों से गुफ्तगू किया। &#8220;स्वास्थ्य&#8221; कोई कारण नहीं हो सकता है &#8220;देश के शीर्षस्थ पदों में राष्ट्रपति के बाद उप-राष्ट्रपति के पद से इस्तीफा देना। कुछ तो &#8220;विशेष&#8221; कारण है, अथवा &#8220;कोई तो विशेष व्यक्ति है&#8221; जिसे शायद कोई तो है रायसीना पहाड़ पर जिन्हें धनकड़ के शब्द हजम नहीं हुए। ​त्यागपत्र से पांच घंटे पहले धनकड़ 23 जुलाई, 2025 को एक दिवसीय दौरे पर जयपुर, राजस्थान जाएंगे​ की जानकारी पत्र सूचना कार्यालय दिया। अपनी इस​यात्रा के दौरान, ​उपराष्ट्रपति​ जयपुर​ स्थित​ रामबाग पैलेस में ​कन्फेडरेशन ऑफ़ रियर एस्टेट डेवेलपर्स ऑफ़ इंडिया, राजस्थान की ​नव-निर्वाचित समिति​ के सदस्यों से संवाद करेंगे।​ ​पांच घंटे के बीच में ही अचानक ऐसा क्या हुआ कि उन्हें अपने पद से त्यागपत्र देना पड़ा वह भी &#8220;स्वास्थ्य को प्राथमिकता&#8221; देकर। उनके पत्र में लिखा था, &#8220;स्वास्थ्य सेवा को प्राथमिकता देने और चिकित्सीय सलाह का पालन करने के लिए, मैं भारत के उपराष्ट्रपति पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देता हूँ।&#8221; लेकिन इन विगत दिनों में धनकड़, जैसा कि सूत्रों का कहना है, किसी भी चिकित्सक से नहीं मिले हैं और ना ही उन्हें सलाह दिया गया है &#8211; कम काम करें। </strong> </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-7.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-7.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-6991" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-7.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-7-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-7-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-7-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-7-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p>जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा था: &#8220;मैं सही समय पर, अगस्त 2027 में, ईश्वरीय कृपा के अधीन, सेवानिवृत्त हो जाऊँगा।&#8221;​ 14वें उपराष्ट्रपति के रूप में श्री धनखड़ का पाँच वर्षीय कार्यकाल 10 अगस्त, 2027 को समाप्त होना था।​ भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए द्वारा उपराष्ट्रपति चुने जाने से पहले, उन्होंने 2019 से 2022 तक पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में कार्य किया। वैसे यह भी कहा जाता है कि धनखड़ की हाल ही में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में एंजियोप्लास्टी हुई थी।​ </p>
<p>वीवी गिरि और आर वेंकटरमन के बाद धनकड़ अपने कार्यकाल के दौरान इस्तीफा देने वाले भारत के तीसरे उपराष्ट्रपति हैं। हालाँकि, गिरि और वेंकटरमन ने राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था।​ लेकिन धनकड़ के साथ बात कुछ और है। नियमों के अनुसार, उपराष्ट्रपति पद के लिए अगले छह महीनों के भीतर चुनाव कराना आवश्यक है। अपने &#8216;बेबाक बयानों&#8217; के कारण कई बार सुर्खियां में रहे। उन पर राज्यसभा में पक्षपात का आरोप भी लगाया गया था। </p>
<blockquote><p>चलिए कुछ शब्दों पर शोध करते हैं। अपने त्यागपत्र से तक़रीबन 48-घंटा पहले धनकड़ राज्यसभा के आठवें बैच के प्रतिभागियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते कहा था: “हमें दृढ़ रहना होगा। हमें अपने दृष्टिकोण पर विश्वास करना होगा। लेकिन हमें दूसरे के दृष्टिकोण का भी सम्मान करना होगा। अगर हम अपने दृष्टिकोण पर विश्वास करते हैं और सोचते हैं, &#8216;मैं ही सही हूँ और बाकी सब गलत हैं&#8217; &#8211; यह लोकतंत्र नहीं है। यह हमारी संस्कृति नहीं है। यह अहंकार है। यह उद्दंडता है। हमें अपने अहंकार पर नियंत्रण रखना होगा। हमें अपनी उद्दंडता पर नियंत्रण रखना होगा। हमें यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि दूसरा व्यक्ति अलग दृष्टिकोण क्यों रखता है &#8211; यही हमारी संस्कृति है।&#8221;</p></blockquote>
<p>&#8220;मैं ही सही हूँ, बाकी सब गलत है &#8211; यह लोकतंत्र नहीं है। यह हमारी संस्कृति नहीं है। यह अहंकार है। यह उद्दंडता है। हमें अपने अहंकार पर नियंत्रण रखना होगा। हमें अपनी उद्दंडता पर नियंत्रण रखना होगा,&#8221; &#8211; ये शब्द किसे ख़राब लग सकता है?  यह गहन शोध का विषय है आखिर धनकड़ अपने मस्तिष्क में किस मान्यवर या माननीया की तस्वीर को रखकर कहे थे। इससे भी बड़ी बिडम्बना यह है कि अपने कार्यकाल के दौरान शायद ही कोई भाषण रहा होगा जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार और मोदी के कार्यों का उल्लेख नहीं किया हो। जिस प्रकार भाजपा या मोदी के मंत्रिमंडल के अन्य सदस्य करते हैं। लेकिन राज्यसभा के आठवें बैच के प्रतिभागियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह भाषण में &#8216;एक शब्द भी प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी अथवा उनकी सरकार के कार्यों के बारे में जिक्र नहीं किया।</p>
<figure id="attachment_6992" aria-describedby="caption-attachment-6992" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-6992" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6992" class="wp-caption-text">उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ग्रहण करते</figcaption></figure>
<p>धनकड़ टेलीविजन पर चर्चा कार्यक्रमों में झलकती राजनीतिक दलों की कटुता की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा था: “प्रत्येक राजनीतिक दल का नेतृत्व परिपक्व होता है। सभी राजनीतिक दल, चाहे वह बड़ा हो या छोटा, राष्ट्रीय विकास के लिए प्रतिबद्ध होता है और इसलिए युवाओं का कर्तव्य है कि वे इस मानसिकता को सुनिश्चित करें। यह विचार प्रक्रिया सोशल मीडिया में आनी चाहिए और एक बार जब आपको हमारी टेलीविजन चर्चाएं सुखदायक, सकारात्मक और आकर्षक लगेंगी, तो कल्पना कीजिए कि कितना बड़ा बदलाव आ सकता है &#8211; बस एक पल के लिए ध्यान दीजिए।&#8221; इन शब्दों में देश के उपराष्ट्रपति होने के नाते &#8216;प्रत्येक राजनीतिक दाल का नेतृत्व परिपक्क होता है&#8217;, किसके तरफ &#8216;इशारा था&#8217;, और &#8216;किसे इन शब्दों से नसीयत देना चाहते थे&#8217;, जिसका उन्हें &#8216;पदत्याग&#8217; करने से करना पड़ा। कोई तो है, कुछ तो है।  </p>
<p><strong>इस महाशय या माननीया के तरफ शब्दों से इशारा करते धनकड़ ने कहा कि &#8220;हम आमतौर पर क्या देखते हैं? हम क्या सुनते हैं? क्या यह कानों को थका नहीं देता? हमारे कान तो थक गए हैं ना? भाई, ऐसा क्यों है? हम एक महान संस्कृति से आते हैं। हमारी विचारधारा का एक आधार है। हमारे विचारों में मतभेद हो सकते हैं &#8211; हमारे विचारों में भिन्नता हो सकती है &#8211; लेकिन हमारे दिलों में कटुता कैसे हो सकती है? हम भारतीय हैं। हमारी संस्कृति हमें क्या सिखाती है? अनंतवाद &#8211; अंतहीन संवाद में विश्वास। अनंतवाद का क्या अर्थ है? इसका अर्थ है चर्चा और बहस। चर्चा और बहस का क्या अर्थ है? इसका अर्थ है अभिव्यक्ति। और अभिव्यक्ति का अर्थ है &#8211; अपने विचारों को खुलकर कहें, लेकिन अपनी ही राय पर इतना आश्वस्त न हो जाएँ कि आप उस पर विश्वास कर लें और यह मान लें कि अही अंतिम और पूर्ण सत्य है। यह मत मानिए कि किसी और का दृष्टिकोण आपसे अलग हो ही नहीं सकता।”</strong></p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-5.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-5.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-6995" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-5.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-5-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-5-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-5-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-5-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p>उसी उद्घाटन संवाद में धनकड़ ने कहा था कि “हममें मर्यादा और परस्पर सम्मान की पूर्ण भावना होनी चाहिए — और यही हमारी संस्कृति की मांग है। अन्यथा हमारी विचार प्रक्रिया में एकता नहीं हो सकती… विश्वास कीजिए, अगर राजनीतिक संवाद उच्च स्तर पर हो, अगर नेता अधिक बार मिलते-जुलते रहें, वे आपस में अधिक संवाद करें। वे व्यक्तिगत स्तर पर विचारों का आदान-प्रदान करें — तो राष्ट्र हित की पूर्ति होगी… हमें आपस में क्यों लड़ना चाहिए? हमें अपने भीतर शत्रुओं की तलाश नहीं करनी चाहिए। मेरी जानकारी के अनुसार, प्रत्येक भारतीय राजनीतिक दल और प्रत्येक सांसद अंततः एक राष्ट्रवादी है। वह एक राष्ट्र की भावना में विश्वास करता है। वह राष्ट्र की प्रगति में विश्वास करता है… लोकतंत्र कभी ऐसा नहीं होता कि एक ही पार्टी सत्ता में आए।&#8221;</p>
<p>इतना ही नहीं, वे आगे भी कहे थे: “मित्रों, एक समृद्ध लोकतंत्र निरंतर कटुता का वातावरण सहन नहीं कर सकता&#8230; जब आप राजनीतिक कटुता, राजनीतिक वातावरण को अलग दिशा में पाते हैं, तो आपका मन विचलित हो जाता होगा। मैं देश के सभी लोगों से आग्रह करता हूँ कि राजनीतिक तापमान को कम किया जाए। राजनीति टकराव नहीं है, राजनीति कभी भी एकतरफा नहीं हो सकती। अलग-अलग राजनीतिक विचार प्रक्रियाएँ होंगी, लेकिन राजनीति का अर्थ है एक ही लक्ष्य को प्राप्त करना, लेकिन किसी न किसी तरह अलग-अलग माध्यमों से। मेरा दृढ़ विश्वास है कि इस देश में कोई भी व्यक्ति राष्ट्र के विरुद्ध नहीं सोचेगा। मैं किसी राजनीतिक दल को भारत की अवधारणा के विरुद्ध नहीं देख सकता। उनके अलग-अलग माध्यम, अलग-अलग सोच हो सकती है; लेकिन उन्हें एक-दूसरे के साथ चर्चा करना, एक-दूसरे के साथ संवाद करना सीखना होगा। टकराव कोई रास्ता नहीं है। जब हम आपस में लड़ते हैं, यहाँ तक कि राजनीतिक क्षेत्र में भी, तो हम अपने दुश्मन को मजबूत कर रहे होते हैं। हम उन्हें हमें विभाजित करने के लिए पर्याप्त सामग्री दे रहे होते हैं। इसलिए, युवा प्रतिभाओं एक बड़ा दबाव समूह है। आपके पास बहुत मजबूत शक्ति है। आपकी विचार प्रक्रिया राजनेता, आपके सांसद, आपके विधायक, आपके पार्षद को नियंत्रित करेगी। राष्ट्र के बारे में सोचें। विकास के बारे में सोचें।&#8221;</p>
<figure id="attachment_6993" aria-describedby="caption-attachment-6993" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6-1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6-1.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-6993" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6-1.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6-1-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6-1-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6-1-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6-1-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6993" class="wp-caption-text">पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में शपथ ग्रहण करते</figcaption></figure>
<p><strong>एक उपराष्ट्रपति होने के नाते अगर उन्होंने इन शब्दों का प्रयोग करते कहा कि &#8220;जब राष्ट्रीय हित की बात हो तो हमें राजनीति नहीं करनी चाहिए, जब विकास की बात हो तो हमें राजनीति नहीं करनी चाहिए, जब राष्ट्र के विकास की बात हो तो हमें राजनीति नहीं करनी चाहिए। जब राष्ट्रीय सुरक्षा, राष्ट्रीय चिंता का विषय हो तो हमें राजनीति नहीं करनी चाहिए ​. &#8220;मैं राजनीतिक जगत के सभी लोगों से अपील करता हूँ कि कृपया परस्पर सम्मान रखें। कृपया टेलीविज़न पर या किसी भी पार्टी के नेतृत्व के विरुद्ध अभद्र भाषा का प्रयोग न करें। यह संस्कृति हमारी सभ्यता का सार नहीं है। हमें अपनी भाषा का ध्यान रखना होगा&#8230; व्यक्तिगत आक्षेपों से बचें। मैं राजनेताओं से अपील करता हूँ। अब समय आ गया है कि हम राजनेताओं को गालियाँ देना बंद करें। जब विभिन्न राजनीतिक दलों में लोग दूसरे राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं को गालियाँ देते हैं, तो यह हमारी संस्कृति के लिए अच्छा नहीं है।&#8221;</strong></p>
<p>अंत में, धनकड़ का कहना था की &#8220;भारत ऐतिहासिक रूप से किस लिए जाना जाता है? संवाद, वाद-विवाद, विचार-विमर्श। आजकल, हम संसद में यह सब होते नहीं देखते। मुझे लगता है कि आगामी सत्र एक महत्वपूर्ण सत्र होगा। मुझे पूरी आशा है कि सार्थक चर्चाएँ और गंभीर विचार-विमर्श होंगे जो भारत को नई ऊँचाइयों पर ले जाएँगे। ऐसा नहीं है कि सब कुछ सही है। हम कभी भी ऐसे समय में नहीं रहेंगे जहाँ सब कुछ सही हो। किसी भी समय कुछ क्षेत्रों में सदैव कुछ कमियाँ रहेंगी। इसके साथ ही सदैव सुधार की गुंजाइश है। अगर कोई किसी चीज़ में सुधार का सुझाव देता है, तो वह निंदा नहीं है। यह आलोचना नहीं है। यह केवल आगे के विकास के लिए एक सुझाव है। इसलिए, मैं राजनीतिक दलों से रचनात्मक राजनीति करने की अपील करता हूँ। और जब मैं यह कहता हूँ, तो मैं अपील करता हूँ &#8211; सत्ता पक्ष, सत्तारूढ़ दल और विपक्ष सभी दलों से अपील करता हूँ।”</p>
<figure id="attachment_6994" aria-describedby="caption-attachment-6994" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-8.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-8.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-6994" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-8.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-8-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-8-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-8-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-8-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6994" class="wp-caption-text">जगदीप धनखड़ 06 जून, 2023 को उप-राष्ट्रपति निवास, नई दिल्ली में भारतीय रक्षा संपदा सेवा (आईडीईएस) के परिवीक्षाधीन अधिकारियों से बातचीत करते हुए।</figcaption></figure>
<p>​ज्ञातव्य हो कि इससे पहले न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के आवास पर मिले जले हुए नकदी के बंडलों के मामले में उन्हें हटाने के लिए विपक्ष द्वारा प्रायोजित एक नोटिस उन्हें सौंपा गया था, और उन्होंने सदन में इसका उल्लेख किया और महासचिव से आगे आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब सत्तारूढ़ गठबंधन ने लोकसभा में इसी तरह का एक नोटिस प्रायोजित किया था और विपक्ष को भी इसमें शामिल किया था। </p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/dhankar-did-not-even-take-the-name-of-the-prime-minister-in-his-last-speech">&#8220;मैं ही सही हूँ, बाकी सब गलत है &#8211; यह लोकतंत्र नहीं है।​ यह अहंकार है। यह उद्दंडता है​&#8221;, अपने अंतिम भाषण में धनकड़ &#8216;प्रधानमंत्री का नाम तक नहीं लिया&#8221;</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>अवसर महिला सशक्तिकरण का था, सामने प्रधानमंत्री देवी अहिल्याबाई होल्कर के बारे में अन्तः आत्मा से कह रहे थे, महिलाएं तस्वीर खींच रही थी</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/politics/modi-was-speaking-from-the-heart-about-devi-ahilyabai-holkar-women-were-taking-pictures</link>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 01 Jun 2025 13:46:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[ahilyabai holkar]]></category>
		<category><![CDATA[bhopal]]></category>
		<category><![CDATA[empowerment]]></category>
		<category><![CDATA[madhya Pradesh]]></category>
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		<category><![CDATA[prime minister]]></category>
		<category><![CDATA[women]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>भोपाल (मध्य प्रदेश) : कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भोपाल में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जन्म जयंती के अवसर पर महिला सशक्तिकरण महासम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उनके संबोधन मंच से कुछ दूरी पर आज की महिलाएं, युवतियां अपने-अपने मोबाइल से प्रधानमंत्री की तस्वीर उतार रही थी । उससे एक दिन पहले भारतीय दूरसंचार [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/politics/modi-was-speaking-from-the-heart-about-devi-ahilyabai-holkar-women-were-taking-pictures">अवसर महिला सशक्तिकरण का था, सामने प्रधानमंत्री देवी अहिल्याबाई होल्कर के बारे में अन्तः आत्मा से कह रहे थे, महिलाएं तस्वीर खींच रही थी</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>भोपाल (मध्य प्रदेश) : कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भोपाल में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जन्म जयंती के अवसर पर महिला सशक्तिकरण महासम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उनके संबोधन मंच से कुछ दूरी पर आज की महिलाएं, युवतियां अपने-अपने मोबाइल से प्रधानमंत्री की तस्वीर उतार रही थी । उससे एक दिन पहले भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण की ओर से भारत में मोबाइल उपभोक्ताओं की संख्या भी सार्वजनिक की गयी थी। जब प्रधानमंत्री के सामने आज की महिलाओं को, अहिल्याबाई  होल्कर को और मोबाइल उपभोक्ताओं को एक साथ देखा तो यह निर्णय नहीं ले पाया कि क्या तस्वीर खींचती ये महिलाएं देवी अहिल्याबाई होल्कर को जानती भी हैं? या देवी अहिल्याबाई जो भारत की विरासत का प्रतीक हैं, आज के युवक-युवतियां पहचानती भी हैं? शायद नहीं &#8211; क्योंकि यह सेल्फी का युग है।</strong></p>
<blockquote><p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जितनी तन्मयता के साथ देवी अहिल्याबाई के बारे में एक-एक शब्द बोल रहे थे, इन महिलाओं को देखकर नहीं लगा कि वे प्रधानमंत्री की बहुमूल्य बातों को सुन रही हैं। वैसे उनके मोबाइल पर भी देवी अहिल्याबाई होल्कर के बारे में वृतांत उपलब्ध है, लेकिन पढ़ेगा कौन यह एक नहीं 140 करोड़ का प्रश्न है। </p></blockquote>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/4.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/4.jpg" alt="" width="2200" height="1457" class="aligncenter size-full wp-image-6686" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/4.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/4-300x199.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/4-1024x678.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/4-768x509.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/4-1536x1017.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/4-2048x1356.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a></p>
<p>भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण के अनुसार भारत में कुल मोबाइल उपभोक्ताओं की संख्या फरवरी-25 के अंत में 1,154.05 मिलियन थी जो बढ़कर मार्च-25 के अंत में 1,156.99 मिलियन हो गई। प्राधिकरण ने यह दवा भी किया कि यह वृद्धि औसतन 0. 25 फीसदी मासिक है। प्राधिकरण के अनुसार शहरी क्षेत्रों में मोबाइल उपभोक्ताओं की संख्या जो फरवरी-25 के अंत में 627.94 मिलियन थी, बढ़कर मार्च-25 के अंत में 628.31 मिलियन हो गई और इसी अवधि के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में वायरलेस (मोबाइल) उपभोक्ताओं की संख्या भी 526.11 मिलियन से बढ़कर 528.68 मिलियन हो गई। शहरी और ग्रामीण मोबाइल उपभोक्ताओं की मासिक वृद्धि दर क्रमशः 0.06% और 0.49% रही। यानी शहरों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल के उपभोक्ताओं में वृद्धि दर अधिक है। </p>
<blockquote><p>वैसे भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजी-रोटी के अवसर नहीं होने के कारण लोगों का, खासकर पुरुषों का पलायन भारत के शहरों की ओर होना स्वाभाविक है, अतः मोबाइल सेवाओं की उपभोक्ता &#8216;पुरुष&#8217; नहीं, बल्कि &#8216;महिलाएं&#8217; हैं भारत के ग्रामीण इलाकों में। महिला सशक्तिकरण का इससे बड़ा दृष्टान्त और क्या हो सकता है।</p></blockquote>
<p>दुर्भाग्य देखिये। मोबाइल सेवा प्रदाताओं में सरकारी क्षेत्र के भारत संचार निगम लिमिटेड का उपभोक्ता-बेस चौथे स्थान पर (29.94 फीसदी) है, जबकि रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड का उपभोक्ता-बेस पहले स्थान पर (465.10), भारती एयरटेल लिमिटेड का उपभोक्ता-बेस दूसरे स्थान (280.76) पर, वोडाफोन आइडिया लिमिटेड का उपभोक्ता-बेस तीसरे स्थान (125.63) पर है और पांचवें स्थान पर दर्ज है आईबस वर्चुअल नेटवर्क सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड। खैर। </p>
<figure id="attachment_6681" aria-describedby="caption-attachment-6681" style="width: 2196px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/1.jpg" alt="" width="2196" height="1465" class="size-full wp-image-6681" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/1.jpg 2196w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/1-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/1-1024x683.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/1-768x512.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/1-1536x1025.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/1-2048x1366.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2196px) 100vw, 2196px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6681" class="wp-caption-text">प्रधानमंत्री देवी अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि करते</figcaption></figure>
<p>लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर का नाम सुनकर गहरी श्रद्धा व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके असाधारण व्यक्तित्व का वर्णन करने के लिए शब्द कम पड़ जाएंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देवी अहिल्याबाई दृढ़ इच्छाशक्ति और दृढ़ संकल्प का प्रतीक हैं, जो दर्शाती हैं कि चाहे कितनी भी प्रतिकूल परिस्थितियां क्यों न हों, परिवर्तनकारी परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। ढाई सौ से तीन सौ साल पहले, जब देश उत्पीड़न की जंजीरों में जकड़ा हुआ था, ऐसे असाधारण कार्य करना &#8211; इतने बड़े कि पीढ़ियां आज भी उनको याद करती हैं &#8211; कोई आसान काम नहीं था।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर ने कभी भी ईश्वर की सेवा और लोगों की सेवा के बीच अंतर नहीं किया। वे हमेशा अपने साथ शिवलिंग रखती थीं। यह उनकी गहरी भक्ति को दर्शाता है। उस समय की चुनौतियों पर विचार करते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे युग में राज्य का नेतृत्व करना कांटों का ताज पहनने के समान था। फिर भी, लोकमाता अहिल्याबाई ने अपने राज्य की समृद्धि को एक नई दिशा प्रदान की, स्वयं को सबसे गरीब लोगों को सशक्त बनाने के लिए समर्पित कर दिया। अहिल्याबाई भारत की विरासत की एक महान संरक्षक थी। उन्होंने काशी विश्वनाथ सहित देश भर में कई मंदिरों के जीर्णोद्धार में उनके योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने उसी शहर वाराणसी में सेवा करने का अवसर मिलने पर अपना सौभाग्य व्यक्त किया, जहां लोकमाता अहिल्याबाई ने अनेक विकास कार्य किए थे।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि माता अहिल्याबाई ने एक अनुकरणीय शासन मॉडल लागू किया जिसमें गरीबों और हाशिए पर पड़े लोगों के कल्याण को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की। उन्होंने कृषि, वन उपज पर आधारित कुटीर उद्योगों और हस्तशिल्प को बढ़ावा दिया। कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए, उन्होंने छोटी नहरें बनवाई और लगभग 250-300 साल पहले कई तालाबों का निर्माण करवाकर जल संरक्षण के प्रयास किए। उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने और फसल विविधता को बढ़ावा देने के लिए कपास और मसालों की खेती को प्रोत्साहित किया। मोदी ने आदिवासी समुदायों और खानाबदोश समूहों के लिए उनके दूरदर्शिता पर जोर दिया। उन्होंने इन समूहों की आजीविका बढ़ाने के लिए अप्रयुक्त भूमि पर कृषि में सहयोग दिया।मोदी ने कहा कि भारत की आदिवासी महिला राष्ट्रपति- श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के निर्देशन में काम करना उनका सौभाग्य है।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/5.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/5.jpg" alt="" width="2197" height="1155" class="aligncenter size-full wp-image-6682" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/5.jpg 2197w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/5-300x158.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/5-1024x538.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/5-768x404.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/5-1536x808.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/5-2048x1077.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2197px) 100vw, 2197px" /></a></p>
<p><strong>मोदी ने कहा, &#8220;देवी अहिल्याबाई होल्कर को हमेशा लड़कियों की शादी की न्यूनतम आयु बढ़ाने, महिलाओं के संपत्ति के अधिकार को सुरक्षित करने और विधवाओं के पुनर्विवाह का समर्थन करने जैसे उनके महत्वपूर्ण सामाजिक सुधारों के लिए याद किया जाएगा। ये ऐसे मुद्दे हैं जिन पर उनके समय में चर्चा करना भी मुश्किल था।&#8221; उन्होंने जोर देकर कहा कि सामाजिक चुनौतियों के बावजूद, देवी अहिल्याबाई ने इन प्रगतिशील सुधारों का पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने मालवा सेना में एक विशेष महिला यूनिट भी बनाई और गांवों में महिला सुरक्षा समूह स्थापित किए जिससे सुरक्षा और सशक्तिकरण सुनिश्चित हुआ। उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए और सभी पर उनके आशीर्वाद की कामना करते हुए कहा, ‘’माता अहिल्याबाई राष्ट्र निर्माण में महिलाओं के अमूल्य योगदान का प्रतीक हैं’’।</strong></p>
<p>देवी अहिल्याबाई होल्कर के एक प्रेरक कथन को याद करते हुए, जिसमें उन्होंने इस बात पर जोर दिया था कि जो कुछ भी प्राप्त हुआ है वह लोगों का ऋण है, जिसे चुकाना होगा, प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि उनकी सरकार उनके मूल्यों के अनुरूप काम कर रही है और &#8216;नागरिक देवो भव&#8217; के सिद्धांत पर कार्य कर रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं के नेतृत्व में विकास के दृष्टिकोण को राष्ट्र की प्रगति के मूल में रखा जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार की हर बड़ी पहल माताओं, बहनों और बेटियों को सशक्त बनाने पर केंद्रित है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वंचितों के लिए चार करोड़ घर बनाए गए हैं जिनमें से अधिकांश महिलाओं के नाम पर पंजीकृत हैं। उन्होंने बताया कि यह पहली बार है कि उनका नाम संपत्ति के स्वामित्व से जुड़ा है। यह एक ऐतिहासिक बदलाव को दर्शाता है जहां देश भर में करोड़ों महिलाएं पहली बार घर की मालकिन बनी हैं।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि पहले कई महिलाओं को अपनी स्वास्थ्य समस्याओं को छिपाने के लिए मजबूर होना पड़ता था, अक्सर वित्तीय परेशानी के कारण गर्भावस्था के दौरान अस्पताल जाने से बचती थी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आयुष्मान भारत योजना ने इस समस्या को समाप्त कर दिया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के साथ-साथ वित्तीय स्वतंत्रता भी महिला सशक्तीकरण के लिए महत्वपूर्ण है। जब एक महिला के पास अपनी आय होती है तो उसका आत्म-सम्मान बढ़ता है और घर के निर्णय लेने में उसकी भागीदारी बढ़ती है। प्रधानमंत्री ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए पिछले 11 वर्षों में सरकार के निरंतर प्रयासों का उल्लेख किया। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/8.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/8.jpg" alt="" width="2200" height="1344" class="aligncenter size-full wp-image-6683" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/8.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/8-300x183.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/8-1024x626.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/8-768x469.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/8-1536x938.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/8-2048x1251.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a></p>
<p>उन्होंने बताया कि 2014 से पहले 30 करोड़ से अधिक महिलाओं के पास बैंक खाता नहीं था। सरकार ने उनके लिए जन धन खाते खोलने की सुविधा प्रदान की जिनमें अब विभिन्न योजनाओं से धन सीधे हस्तांतरित किया जा रहा है। उन्होंने टिप्पणी की कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिलाएं मुद्रा योजना द्वारा समर्थित काम और स्वरोजगार में तेजी से शामिल हो रही हैं।  यह योजना बिना किसी जमानत के ऋण प्रदान करती है। प्रधानमंत्री ने वित्तीय समावेशन पर इस पहल के प्रभाव को बताते हुए कहा, &#8220;मुद्रा के 75 प्रतिशत से अधिक लाभार्थी महिलाएं हैं।&#8221;</p>
<p>इस बात पर जोर देते हुए कि देश भर में 10 करोड़ महिलाएं अब स्वयं सहायता समूहों का हिस्सा हैं। ये समूह सरकार से पर्याप्त वित्तीय सहायता से आय के नए स्रोत बना रहे हैं, मोदी ने 3 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी के रूप में सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया और संतोष व्यक्त किया कि 1.5 करोड़ से अधिक महिलाएं पहले ही यह उपलब्धि हासिल कर चुकी हैं। उन्होंने बैंक सखियों की भूमिका का उल्लेख किया जो गांवों में लोगों को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ रही हैं, और बीमा सखियों की स्थापना के लिए सरकार की पहल पर जोर देते हुए कहा कि महिलाएं और बेटियां अब देश भर में बीमा कवरेज का विस्तार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।</p>
<p><strong>प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि एक समय था जब महिलाओं को उभरती हुई तकनीकों से दूर रखा जाता था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश उस युग से आगे निकल चुका है, यह सुनिश्चित करते हुए कि महिलाएं तकनीकी प्रगति में सक्रिय रूप से भाग लें और उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं और बेटियों को आधुनिक तकनीक में नेतृत्व की भूमिका निभाने में सक्षम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कृषि में ड्रोन क्रांति की ओर इशारा करते हुए इस बात पर जोर दिया कि ग्रामीण महिलाएं इस परिवर्तन का नेतृत्व कर रही हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, &#8220;नमो ड्रोन दीदी पहल ग्रामीण महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा रही है और उनकी आय के अवसरों को बढ़ा रही है और उनके लिए एक विशिष्ट पहचान बना रही है।&#8221;</strong></p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/9.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/9.jpg" alt="" width="2200" height="1317" class="aligncenter size-full wp-image-6684" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/9.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/9-300x180.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/9-1024x613.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/9-768x460.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/9-1536x920.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/9-2048x1226.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a></p>
<p>इस बात पर जोर देते हुए कि देश भर में बड़ी संख्या में बेटियां वैज्ञानिक, डॉक्टर, इंजीनियर और पायलट के रूप में अपना करियर बना रही हैं, श्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि विज्ञान और गणित की शिक्षा में लड़कियों का नामांकन लगातार बढ़ रहा है। श्री मोदी ने कहा, “आज, हमारे सभी प्रमुख अंतरिक्ष अभियानों में बड़ी संख्या में महिला वैज्ञानिक काम कर रही हैं”, उन्होंने उल्लेख किया कि चंद्रयान-3 अभियान में 100 से अधिक महिला वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने योगदान दिया। उन्होंने स्टार्टअप क्षेत्र में महिलाओं के उल्लेखनीय योगदान पर टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत में लगभग 45 प्रतिशत स्टार्टअप में कम से कम एक महिला निदेशक है और यह संख्या लगातार बढ़ रही है।</p>
<p>नीति निर्माण में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पिछले दशक में उठाए गए प्रगतिशील कदमों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पहली बार भारत को एक पूर्णकालिक महिला रक्षा मंत्री और एक महिला वित्त मंत्री मिली हैं। उन्होंने आगे जोर देकर कहा कि पंचायतों से लेकर संसद तक महिलाओं का प्रतिनिधित्व लगातार बढ़ा है। वर्तमान में 75 महिलाएं संसद सदस्य के रूप में काम कर रही हैं। प्रधानमंत्री ने इस भागीदारी को और बढ़ाने के महत्व पर जोर दिया, उन्होंने रेखांकित किया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम इस दृष्टिकोण का प्रतीक है। उन्होंने टिप्पणी की कि हालांकि इस कानून में वर्षों का विलंब हुआ लेकिन सरकार ने इसे सफलतापूर्वक पारित किया, संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के आरक्षण को मजबूत किया। उन्होंने फिर से दोहराया कि उनकी सरकार हर स्तर पर और हर क्षेत्र में महिलाओं को सशक्त बना रही है।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/7.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/7.jpg" alt="" width="2200" height="1696" class="aligncenter size-full wp-image-6685" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/7.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/7-300x231.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/7-1024x789.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/7-768x592.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/7-1536x1184.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/7-2048x1579.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a></p>
<p>प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि अपने शासनकाल में देवी अहिल्याबाई ने न केवल विकास को आगे बढ़ाया बल्कि भारत की विरासत का भी संरक्षण किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक भारत भी उसी रास्ते पर चल रहा है। प्रगति का सांस्कृतिक संरक्षण के साथ संतुलन बना रहा है। उन्होंने आज के कार्यक्रम का उदाहरण देते हुए बुनियादी ढांचे के विकास में तेजी लाने के लिए राष्ट्र की प्रतिबद्धता का उल्लेख किया।  “भारत इतिहास के एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है, जहां राष्ट्र को अपनी सुरक्षा, शक्ति और सांस्कृतिक विरासत पर एक साथ काम करना चाहिए।” उन्होंने बढ़ते प्रयासों के महत्व पर बल दिया और देश के भविष्य को आकार देने में मातृशक्ति &#8211; भारत की माताओं, बहनों और बेटियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई, रानी दुर्गावती, रानी कमलापति, अवंतीबाई लोधी, कित्तूर रानी चेन्नम्मा, रानी गाइडिन्ल्यू, वेलु नचियार और सावित्रीबाई फुले जैसी महान महिला नेताओं की विरासत के साथ-साथ लोकमाता अहिल्याबाई की प्रेरणा का आह्वान किया। </p>
<p><strong>प्रधानमंत्री ने  लोकमाता देवी अहिल्याबाई को समर्पित एक स्मारक डाक टिकट और एक विशेष सिक्का जारी किया। 300 रुपये के सिक्के पर अहिल्याबाई होल्कर का चित्र होगा। उन्होंने आदिवासी, लोक और पारंपरिक कलाओं में योगदान के लिए एक महिला कलाकार को राष्ट्रीय देवी अहिल्याबाई पुरस्कार भी प्रदान किया।</strong></p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/politics/modi-was-speaking-from-the-heart-about-devi-ahilyabai-holkar-women-were-taking-pictures">अवसर महिला सशक्तिकरण का था, सामने प्रधानमंत्री देवी अहिल्याबाई होल्कर के बारे में अन्तः आत्मा से कह रहे थे, महिलाएं तस्वीर खींच रही थी</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>प्रधानमंत्री जी, उन लोगों की &#8216;कल्पना वाला बिहार&#8217; की बात नहीं करें, उनके अनुयायी &#8216;नेस्तनाबूद&#8217; कर दिए 😢 आप &#8216;अपनी सोच को जमीन पर उतारें&#8217;, लोग साथ खड़े मिलेंगे 👣 बशर्ते 👁</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 31 May 2025 12:25:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
		<category><![CDATA[bihar]]></category>
		<category><![CDATA[caste war]]></category>
		<category><![CDATA[development]]></category>
		<category><![CDATA[narendra modi]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>पटना / नई दिल्ली: पटना हवाई अड्डे पर जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समस्तीपुर के ताजपुर प्रखंड के प्रतिभाशाली युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी और उनके माता-पिता से मुलाक़ात कर, दो-टूक बात कर वैभव को आशीष दिए, शायद पटना के खेल-कूद के इतिहास में ऐसी घटना पहले कभी नहीं हुई थी। अपनी व्यस्तता भरे समय से चार [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/prime-minister-ji-should-not-talk-about-their-imaginary-bihar-their-followers-have-been-destroyed">प्रधानमंत्री जी, उन लोगों की &#8216;कल्पना वाला बिहार&#8217; की बात नहीं करें, उनके अनुयायी &#8216;नेस्तनाबूद&#8217; कर दिए 😢 आप &#8216;अपनी सोच को जमीन पर उतारें&#8217;, लोग साथ खड़े मिलेंगे 👣 बशर्ते 👁</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>पटना / नई दिल्ली: पटना हवाई अड्डे पर जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समस्तीपुर के ताजपुर प्रखंड के प्रतिभाशाली युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी और उनके माता-पिता से मुलाक़ात कर, दो-टूक बात कर वैभव को आशीष दिए, शायद पटना के खेल-कूद के इतिहास में ऐसी घटना पहले कभी नहीं हुई थी। अपनी व्यस्तता भरे समय से चार मिनट चौबीस सेकेंड्स का समय निकालकर हवाई अड्डे की तपती धूप में वैभव के खेलों की प्रशंसा करना या भविष्य के प्रयासों के किये शुभकामनायें देना, प्रधानमंत्री की खेल के प्रति, खिलाड़ी के प्रति उनकी &#8216;अपनी सोच&#8217; को उजागर करता है &#8211; भले इस रंगमंच का निर्माण राजनीतिक लाभ लेने के लिए ही किया गया हो। </strong></p>
<p>लेकिन जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार में बिजली के बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देते हुए औरंगाबाद जिले में 29,930 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली नबीनगर सुपर थर्मल पावर परियोजना, चरण-II (3&#215;800 मेगावाट) की आधारशिला रखते यह कहे कि &#8216;बिहार को बाबा साहब अंबेडकर, कर्पूरी ठाकुर, बाबू जगजीवन राम और जयप्रकाश नारायण द्वारा कल्पित बिहार में बदलने के विजन को रेखांकित कर विकसित बिहार बनाने का लक्ष्य है&#8217;, मन में सैकड़ों प्रश्न उपस्थित हो गए। सभी प्रश्नों के अंत में &#8216;तारांकित सवाल&#8217; था &#8216;क्या सच में वर्तमान राजनीतिक वातावरण और नेतृत्व में उनकी कल्पनाओं को दिशा दिया जा सकता है? अगर विगत 35-वर्षों का गैर-कांग्रेसी और जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से निकलने नेताओं के नेतृत्व और उनके द्वारा कार्यों के निष्पादन को देखते हैं तो लगता है शायद &#8216;नहीं&#8217; दे पाएंगे। यह असली राजनीति है। </p>
<figure id="attachment_6671" aria-describedby="caption-attachment-6671" style="width: 1597px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/rsz_3.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/rsz_3.jpg" alt="" width="1597" height="1190" class="size-full wp-image-6671" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/rsz_3.jpg 1597w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/rsz_3-300x224.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/rsz_3-1024x763.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/rsz_3-768x572.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/rsz_3-1536x1145.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1597px) 100vw, 1597px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6671" class="wp-caption-text">पटना हवाई अड्डे पर प्रधानमंत्री और वैभव सूर्यवंशी के माता-पिता</figcaption></figure>
<p><strong>डॉ. बी.आर. अंबेडकर की अन्य सोचों को छोड़ कर अगर सिर्फ सामाजिक न्याय को लेते हैं तो उन्होंने &#8216;सामाजिक न्याय को एक ऐसी व्यवस्था के रूप में देखा जो जाति, नस्ल, लिंग, शक्ति, पद या धन के बावजूद सभी मनुष्यों के लिए स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा सुनिश्चित करती हो। उनकी दृष्टि जाति व्यवस्था जैसी दमनकारी संरचनाओं को खत्म करने और एक ऐसे समाज की वकालत करने पर केंद्रित थी जहाँ व्यक्तियों का मूल्य जन्म से नहीं बल्कि योग्यता और उपलब्धि से निर्धारित होता है।&#8217;</strong> </p>
<blockquote><p>लेकिन राजनीतिक लाभ के लिए प्रदेश की सत्तारूढ़ सरकार और राजनीतिक पार्टियां प्रदेश में सम्पादित जातीय जनगणना के आधार पर मतदाताओं सहित, प्रदेश के लोगों को 215 जातियों में चीड़-फाड़ कर दिए। अन्य जातियों को छोड़िये, अनुसूचित जाति को 22 खण्डों में, अनुसूचित जनजाति को 32 फांकों में, पिछड़ी जाति को 30 फांकों में, अत्यंत पिछड़ी जाती को 113 भागों में चीड़फाड़ दिए। ऊंची जाति सात के सात ही रहे क्योंकि प्रदेश के मतदाताओं की संख्या में उनकी भागीदारी औसतन कम है। वैसी स्थिति में बाबा साहेब की सोच वाली बिहार बनना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है। शब्द कटु है, लेकिन सत्य यही है।</p></blockquote>
<p> <br />
शायद प्रधानमंत्री यह भी नहीं सोचे की भारतरत्न कर्पूरी ठाकुर प्रदेश में जिस &#8216;समतावादी&#8217; समाज की स्थापना करना चाह रहे थे, जिसके लिए जीवन पर्यन्त लड़ते रहे, लेकिन बदलते राजनीतिक माहौल में सिर्फ उनका नाम बिका, उनकी जाति बिकी और उनकी सोच और उनका समाज जस-का-तस रहा। इतना ही नहीं, साल 1994 में तत्कालीन नेता जॉर्ज फर्नांडिस की अगुवाई में &#8216;समता पार्टी&#8217; बनी। &#8216;समता पार्टी&#8217; के अभ्यर्थी के रूप में नीतीश कुमार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। गुटबाजी शुरू हुआ और &#8216;समता पार्टी&#8217; लालू प्रसाद यादव वाली &#8216;राष्ट्रीय जनता दल&#8217; के नक़्शे कदम पर &#8216;जनता दल (यूनाइटेड) बनी। &#8216;समता पार्टी&#8217; प्रदेश के मतदाताओं को &#8216;युनाइट&#8217; करने में असमर्थ रही। आज बिहार में &#8216;समता पार्टी&#8217; को कोई जानता भी नहीं है, फिर भारतरनत कर्पूरी ठाकुर की समतावादी समाज को कौन पूछता है। विश्वास नहीं होता तो जांच-पड़ताल करा लें। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/2-3.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/2-3.jpg" alt="" width="2200" height="1475" class="aligncenter size-full wp-image-6672" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/2-3.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/2-3-300x201.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/2-3-1024x687.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/2-3-768x515.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/2-3-1536x1030.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/2-3-2048x1373.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a></p>
<p>जहाँ तक बाबू जगजीवन राम की सोच वाली समाज और प्रदेश का सवाल है, उनकी इच्छा थी कि प्रदेश में भेदभाव और असमानता से मुक्त समाज हो, विशेष रूप से दलितों और हाशिए पर पड़े लोगों के लिए। वे अखिल भारतीय दलित वर्ग लीग में गहराई से शामिल थे, जिसका उद्देश्य अछूतों के लिए समानता हासिल करना था। उनका दृष्टिकोण सामाजिक न्याय, समानता और दलितों के उत्थान के प्रति प्रतिबद्धता में निहित था।  </p>
<p>लेकिन प्रदेश में जब 22 खण्डों में अनुसूचित जाति, 32 खण्डों में जनजाति, 30 खण्डों में पिछड़ी जाति और 113 खण्डों में अत्यंत पिछड़ी जाति बन गयी हो; तो बाबू जगजीवन राम की सोच सासाराम ही नहीं, पटना की सड़कों पर तहस-नहस हो गयी। इतना ही नहीं, बाबू जगजीवन राम की सुपुत्री और भारतीय विदेश सेवा की शीर्षस्थ अधिकारी, जो लोकसभा की अध्यक्ष भी बने, बिहार के विकास में, अपने पिता बाबू जगजीवन राम की सोच को जमीनी स्तर पर उतारने में क्या की? यह तो प्रदेश का मतदाता जानता ही है। यदि देखा जाय तो बिहार की स्थिति जितना भयानक विगत 35 वर्षों में ही हुआ, पहले कभी नहीं हुआ था। और इस कालखंड में राष्ट्रीय जनता दल के मुखिया लालू प्रसाद यादव और उनका परिवार के साथ-साथ जनता दल (यूनाइटेड) के मुखिया नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री कार्यालय में विराजमान रहे। </p>
<p><strong>अब जहाँ तक लोकनायक जयप्रकाश नारायण की सामाजिक सोच और विचारधारा का प्रश्न है, नब्बे के मार्च महीने में उनके सबसे प्रिय नेता लालू प्रसाद यादव मुख्यमंत्री कार्यालय में विराजमान हुए। फिर उनकी पत्नी श्रीमती राबड़ी देवी कुर्सी पर बैठीं। पुत्र भी उप-मुख्यमंत्री के पद पर आसीन हुए।  दूसरे पुत्र भी मंत्री बने। परिवार के अन्य सदस्य लोकसभा, राज्य सभा को सुशोभित किये। समय निकलता गया और विराजमान हो गए जयप्रकाश नारायण द्वारा आंदोलन के लिए निर्मित समिति के प्रमुख सदस्य नीतीश कुमार मुख्यमंत्री कार्यालय में। </strong></p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/1-5.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/1-5.jpg" alt="" width="2200" height="1144" class="aligncenter size-full wp-image-6673" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/1-5.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/1-5-300x156.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/1-5-1024x532.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/1-5-768x399.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/1-5-1536x799.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/1-5-2048x1065.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a></p>
<p>प्रधानमंत्री जी आप तो गवाह रहे हैं कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे रहने के लिए कभी लालू की पार्टी को साथ लिए, कभी आपकी पार्टी से हाथ मिलाये; कभी लालू को झटका दिए तो कभी बीजेपी को करेंट लगाए। जयप्रकाश नारायण की आत्मा आज बिलखती होती यह देखकर कि जिस सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक परिवेश को बदलने के लिए सम्पूर्ण क्रांति की लड़ाई लड़ी गयी थी, उस आंदोलन से उभरे नेताओं ने प्रदेश का क्या हाल कर दिया। अगर विश्वास नहीं हो तो जयप्रकाश नारायण के आंदोलन के कालखंड के पत्रकारों से, नेताओं से, सामान्य लोगों से पूछ कर देखिये। या फिर कभी मौका लगे तो जयप्रकाश नारायण के कदमकुआं स्थित घर &#8211; चरखा समिति &#8211; में भ्रमण, सम्मेलन करके देखिये। खैर। </p>
<blockquote><p>हाँ, आपकी यह बात लोगों को स्वीकार होगा जब आपने कहा कि &#8220;जब भी बिहार ने प्रगति की है, भारत ने विश्व स्तर पर नई ऊंचाइयों को छुआ है। आप विश्वास भी व्यक्त किये कि सभी लोग मिलकर विकास की गति को तेज करेंगे।&#8221; अतः आप अपनी सोच वाली बिहार का निर्माण करें ताकि प्रदेश के लोगों का जीवन में बदलाव आये। </p></blockquote>
<p>बहरहाल,  काराकाट में 48,520 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली कई विकास परियोजनाओं की आधारशिला रख कर राष्ट्र को समर्पित किये । सासाराम के महत्व पर टिप्पणी करते हुए तथा इस बात पर बल देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इसका नाम भी भगवान राम की विरासत को दर्शाता है।  वे भगवान राम की वंशावली की गहरी जड़ों वाली परंपराओं पर प्रकाश डाला, तथा अटूट प्रतिबद्धता के सिद्धांत – एक बार जो वादा किया जाता है, उसे पूरा किया जाना चाहिए- को रेखांकित किया।</p>
<p>बिहार के रेलवे बुनियादी ढांचे में आए बदलाव का उल्लेख करते हुए मोदी ने बिहार में विश्वस्तरीय वंदे भारत ट्रेनों की शुरुआत और रेलवे लाइनों के दोहरीकरण और तिहरेकरण की चल रही है। उन्होंने कहा कि छपरा, मुजफ्फरपुर और कटिहार जैसे क्षेत्रों में में काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। सोन नगर और अंडाल के बीच मल्टी-ट्रैकिंग का काम चल रहा है, जिससे ट्रेनों की आवाजाही में काफी सुधार होगा। उन्होंने यह भी घोषणा की कि अब सासाराम में 100 से अधिक ट्रेनें रुकती हैं, जो इस क्षेत्र की बढ़ती कनेक्टिविटी को दर्शाता है। उन्होंने पुष्टि की कि लंबे समय से चली आ रही चुनौतियों का समाधान किया जा रहा है, साथ ही रेलवे नेटवर्क को आधुनिक बनाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि ये विकास पहले भी क्रियान्वित किए जा सकते थे, लेकिन बिहार की रेलवे प्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए जिम्मेदार लोगों ने निजी लाभ के लिए भर्ती प्रक्रियाओं का फायदा उठाया और लोगों को उनके सही अवसरों से वंचित किया। उन्होंने बिहार के लोगों से उन लोगों के धोखे और झूठे वादों के प्रति सतर्क रहने का आग्रह किया, जिन्होंने पहले &#8216;जंगल राज&#8217; के तहत शासन किया था। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/7.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/7.jpg" alt="" width="2200" height="1273" class="aligncenter size-full wp-image-6674" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/7.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/7-300x174.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/7-1024x593.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/7-768x444.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/7-1536x889.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/7-2048x1185.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a></p>
<p>यह रेखांकित करते हुए कि बिजली के बिना विकास अधूरा है, उन्होंने कहा कि औद्योगिक प्रगति और जीवन की सुगमता विश्वसनीय बिजली आपूर्ति पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि एक दशक पहले की तुलना में बिहार में बिजली की खपत चार गुना बढ़ गई है। प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि नबीनगर में 30,000 करोड़ रुपये के निवेश से एक प्रमुख एनटीपीसी बिजली परियोजना निर्माणाधीन है और यह परियोजना बिहार को 1,500 मेगावाट बिजली प्रदान करेगी। उन्होंने बक्सर और पीरपैंती में नए थर्मल विद्युत संयंत्रों की शुरुआत पर भी प्रकाश डाला। भविष्‍य पर ध्यान देने, विशेष रूप से बिहार को हरित ऊर्जा की ओर आगे बढ़ाने पर सरकार के फोकस को रेखांकित करते हुए, प्रधानमंत्री ने राज्य की अक्षय ऊर्जा पहल के हिस्से के रूप में कजरा में एक सौर पार्क के निर्माण पर प्रकाश डाला। </p>
<p><strong>उन्होंने कहा की कि पीएम-कुसुम योजना के तहत, किसानों को सौर ऊर्जा के माध्यम से आय उत्पन्न करने के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं, जबकि अक्षय कृषि फीडर खेतों को बिजली की आपूर्ति कर रहे हैं, जिससे कृषि उत्पादकता में और सुधार हो रहा है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप, लोगों के जीवन में सुधार हुआ है, और महिलाएं सुरक्षित महसूस करती हैं। आधुनिक बुनियादी ढाँचा गाँवों, गरीबों, किसानों और छोटे उद्योगों को सबसे अधिक लाभ पहुँचाता है, क्योंकि वे बड़े राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों से जुड़ सकते हैं। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि राज्य में नए निवेश से नए अवसर पैदा होते हैं और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है। </strong></p>
<p>बिहार में किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार के निरंतर प्रयासों को रेखांकित करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि बिहार में 75 लाख से अधिक किसान पीएम-किसान सम्मान निधि योजना के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने मखाना बोर्ड की स्थापना की घोषणा की और जोर देकर कहा कि बिहार के मखाना को जीआई टैग दिया गया है, जिससे मखाना किसानों को अत्यंत लाभ हुआ है। इस साल के बजट में बिहार में राष्ट्रीय खाद्य प्रसंस्करण संस्थान की घोषणा भी शामिल है। प्रधानमंत्री ने टिप्पणी की कि अभी दो-तीन दिन पहले ही कैबिनेट ने खरीफ सीजन के लिए धान सहित 14 फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि को मंजूरी दी है और जोर देकर कहा कि इस निर्णय से किसानों की उपज का बेहतर मूल्य सुनिश्चित होगा और उनकी आय बढ़ेगी।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/8-1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/8-1.jpg" alt="" width="2200" height="1482" class="aligncenter size-full wp-image-6675" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/8-1.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/8-1-300x202.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/8-1-1024x690.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/8-1-768x517.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/8-1-1536x1035.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/8-1-2048x1380.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a></p>
<p>विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जिन लोगों ने बिहार को सबसे अधिक धोखा दिया है, वे अब सत्ता हासिल करने के लिए सामाजिक न्याय के झूठे आख्यानों का उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि उनके शासन के दौरान, बिहार के गरीब और हाशिए के समुदायों को बेहतर जीवन की तलाश में राज्य छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। प्रधानमंत्री ने कहा, “दशकों तक, बिहार में दलितों, पिछड़े वर्गों और आदिवासी समुदायों के पास बुनियादी स्वच्छता सुविधाएं भी नहीं थीं”, ये समुदाय बैंकिंग की सुविधा से वंचित थे, अक्सर उन्हें बैंकों में प्रवेश नहीं करने दिया जाता था और व्यापक स्तर पर बेघर बने रहे। लाखों लोगों के पास उचित आश्रय नहीं था। उन्होंने प्रश्न किया कि क्या पिछली सरकारों के दौरान बिहार के लोगों द्वारा सहे गए दुख, कठिनाई और अन्याय ही विपक्षी दलों द्वारा वादा किया गया सामाजिक न्याय था। प्रधानमंत्री ने कहा कि अब जबकि दलितों, हाशिए पर पड़े समूहों और पिछड़े समुदायों ने विपक्ष की गलत कृत्यों के कारण उससे दूरी बना ली है, पार्टी सामाजिक न्याय का हवाला देकर अपनी पहचान पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रही है।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि कोई भी गांव या पात्र परिवार उसके कल्याणकारी कार्यक्रमों से वंचित न रहे और उन्होंने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि बिहार ने इसी विजन के साथ डॉ. भीमराव अंबेडकर समग्र सेवा अभियान शुरू किया है। उन्होंने रेखांकित किया कि इस अभियान के तहत सरकार 22 अनिवार्य योजनाओं के साथ गांवों और समुदायों तक एक साथ पहुंच रही है और इसका उद्देश्य दलितों, महादलितों, पिछड़े वर्गों और गरीबों को सीधे लाभ पहुंचाना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि अब तक 30,000 से अधिक शिविर आयोजित किए जा चुके हैं और लाखों लोग इस अभियान से जुड़ चुके हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब सरकार सीधे लाभार्थियों तक पहुंचती है, तो भेदभाव और भ्रष्टाचार खत्म हो जाता है और इसे एक ऐसा दृष्टिकोण बताया जो सामाजिक न्याय का सच्चा अवतार है।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/9-1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/9-1.jpg" alt="" width="2200" height="1602" class="aligncenter size-full wp-image-6676" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/9-1.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/9-1-300x218.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/9-1-1024x746.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/9-1-768x559.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/9-1-1536x1118.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/9-1-2048x1491.jpg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/9-1-324x235.jpg 324w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a></p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि &#8216;हमारी लड़ाई देश के हर दुश्मन से है, फिर वो चाहे सीमा पार हो, या देश के भीतर हो। बीते वर्षों में हमने हिंसा और अशांति फैलाने वालों का कैसे खात्मा किया है, बिहार के लोग इसके साक्षी हैं। आप याद करिए, कुछ साल पहले तक सासाराम, कैमूर, और आसपास के इन जिलों में क्या हालात थे? नक्सलवाद कैसे हावी था, मुंह पर नकाब लगाए, हाथों में बंदूक थामे, नक्सली कब-कहाँ सड़कों पर निकल आयें, हर किसी को ये खौफ रहता था। सरकारी योजना आती थी, पर नागरिकों तक पहुंचती ही नहीं थी। नक्सल प्रभावित गांव में न तो अस्पताल होता था, न मोबाइल टावर। कभी स्कूल जलाए जाते थे, कभी सड़क बनाने वालों को मार दिया जाता था। इन लोगों का बाबा साहेब अंबेडकर के संविधान पर कोई विश्वास नहीं था।&#8217;</p>
<p><strong>2014 के बाद से हमने इस दिशा में और तेजी से काम किया। हमने माओवादियों को उनके किए की सजा देनी शुरू की। हम युवाओं को विकास की मुख्यधारा में भी लेकर आए। 11 सालों की दृढ़ प्रतिज्ञा का फल आज देश को मिलना शुरू हुआ है। 2014 से पहले देश में सवा सौ से ज़्यादा ज़िले नक्सल प्रभावित थे, अब सिर्फ, सवा सौ से ज़्यादा, अब सिर्फ 18 जिले नक्सल प्रभावित बचे हैं। अब सरकार सड़क भी दे रही है, रोजगार भी दे रही है। वो दिन दूर नहीं जब माओवादी हिंसा का पूरी तरह से खात्मा हो जाएगा, शांति, सुरक्षा, शिक्षा और विकास गाँव-गाँव तक बिना रुकावट के पहुंचेंगे।</strong></p>
<p>कभी बिहार में एक ही एयरपोर्ट था– पटना। आज दरभंगा एयरपोर्ट भी शुरू हो गया है। अब यहां से दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे शहरों की फ्लाइट मिलती है। बिहार के लोगों की लंबे समय से मांग थी कि पटना एयरपोर्ट के टर्मिनल को आधुनिक बनाया जाए, अब ये मांग भी पूरी हो गई है। कल शाम मुझे पटना एयरपोर्ट की नई टर्मिनल बिल्डिंग का लोकार्पण करने का सौभाग्य मिला है। ये नया टर्मिनल अब 1 करोड़ यात्रियों को संभाल सकता है। बिहटा एयरपोर्ट पर भी 1400 करोड़ रुपए का निवेश हो रहा है। बिहार में आज हर तरफ फोर लेन और सिक्स लेन सड़कों का जाल बिछ रहा है। पटना से बक्सर, गयाजी से डोभी, पटना से बोधगया जी, पटना–आरा–सासाराम ग्रीनफील्ड कॉरिडोर, हर तरफ तेजी से काम हो रहा है। गंगा, सोन, गंडक, कोसी समेत सभी प्रमुख नदियों पर नए पुल बनाए जा रहे हैं। हजारों करोड़ की ऐसी परियोजनाएं बिहार में नए अवसरों और संभावनाओं का निर्माण कर रही हैं। इन प्रोजेक्ट्स से हजारों युवाओं को रोज़गार मिलेगा। यहाँ टूरिज्म और व्यापार दोनों को फायदा होगा।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/H20250529184355.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/H20250529184355.jpg" alt="" width="2200" height="1576" class="aligncenter size-full wp-image-6677" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/H20250529184355.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/H20250529184355-300x215.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/H20250529184355-1024x734.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/H20250529184355-768x550.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/H20250529184355-1536x1100.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/H20250529184355-2048x1467.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a></p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि &#8220;मैं आपसे पूछता हूँ, बिहार के लोगों की ये दुर्दशा, ये पीड़ा, ये तकलीफ, क्या ये काँग्रेस और आरजेडी का, क्या यही सामाजिक न्याय था? गरीबों को इस प्रकार से मजबूरी में जीने के लिए सारी नीतियां बनाने के आदी लोग, साथियों इससे ज्यादा अन्याय कोई नहीं हो सकता है। कांग्रेस और आरजेडी वालों, इन्होंने कभी दलित, पिछड़ों की इतनी तकलीफ़ों की चिंता तक नहीं की। ये लोग विदेशियों को बिहार की गरीबी दिखाने के लिए घुमाने लाते थे। अब जब दलित, वंचित और पिछड़ा समाज ने कांग्रेस को उसके पापों की वजह से छोड़ दिया है, तो इन्हें अपना अस्तित्व बचाने के लिए सामाजिक न्याय की बातें याद आ रही हैं।&#8221;</p>
<p><strong>&#8220;हम चाहते हैं कि कोई भी गांव छूटे नहीं, कोई भी हकदार परिवार सरकार की योजनाओं से वंचित न रह जाए। मुझे खुशी है, इसी सोच के साथ बिहार सरकार ने डॉ. भीमराव अंबेडकर समग्र सेवा अभियान शुरू किया है। इस अभियान में 22 ज़रूरी योजनाएं एक साथ लेकर सरकार गांव-गांव, टोला-टोला पहुँच रही है। हमारा लक्ष्य है– हर दलित, महादलित, पिछड़े, अति-पिछड़े गरीब के घर तक सीधे पहुंचना। जब सरकार खुद लाभार्थियों तक पहुंचती है, तो ना कोई भेदभाव होता है, और ना ही कोई भ्रष्टाचार होता है। और तभी सच्चा-सामाजिक न्याय होता है।</strong></p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/prime-minister-ji-should-not-talk-about-their-imaginary-bihar-their-followers-have-been-destroyed">प्रधानमंत्री जी, उन लोगों की &#8216;कल्पना वाला बिहार&#8217; की बात नहीं करें, उनके अनुयायी &#8216;नेस्तनाबूद&#8217; कर दिए 😢 आप &#8216;अपनी सोच को जमीन पर उतारें&#8217;, लोग साथ खड़े मिलेंगे 👣 बशर्ते 👁</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>​राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सर्वोच्च न्यायालय से सलाह लेने की जरूरत क्यों पड़ी? कहते हैं: &#8216;​देर से असंतोष बढ़ता है, काम जल्द निबटाइए-देश को आगे बढ़ाइए​&#8217;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 24 May 2025 11:40:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चुटकुलानन्द की चिठ्ठी]]></category>
		<category><![CDATA[appointment of governor]]></category>
		<category><![CDATA[bihar]]></category>
		<category><![CDATA[democracy]]></category>
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		<category><![CDATA[president]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>​नई दिल्ली : क्या देश में राज्यपालों की नियुक्ति के लिए भारत के संविधान में एक और संशोधन की आवश्यकता है? समय की जरुरत को माने तो &#8216;हां&#8217; &#8211; भले अपवाद के तौर पर ही सही। सैद्धांतिक रूप से राज्यों के राज्यपाल प्रदेशों में भले राष्ट्रपति का प्रतिनिधित्व करें, व्यावहारिक रूप से केंद्र सरकार की [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/chutkulanands-letter/delay-increases-discontent-finish-the-work-quickly">​राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सर्वोच्च न्यायालय से सलाह लेने की जरूरत क्यों पड़ी? कहते हैं: &#8216;​देर से असंतोष बढ़ता है, काम जल्द निबटाइए-देश को आगे बढ़ाइए​&#8217;</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>​नई दिल्ली : क्या देश में राज्यपालों की नियुक्ति के लिए भारत के संविधान में एक और संशोधन की आवश्यकता है? समय की जरुरत को माने तो &#8216;हां&#8217; &#8211; भले अपवाद के तौर पर ही सही। सैद्धांतिक रूप से राज्यों के राज्यपाल प्रदेशों में भले राष्ट्रपति का प्रतिनिधित्व करें, व्यावहारिक रूप से केंद्र सरकार की इच्छाओं के विरुद्ध नहीं जा सकते हैं। अगर ऐसा नहीं होता तो गैर-केंद्रीय सत्ता के राजनीतिक पार्टियों वाली प्रदेश की सरकारों के साथ, मुख्यमंत्रियों के साथ छत्तीस का आंकड़ा नहीं होता।</strong> </p>
<p>​दर्जनों दृष्टांतों में सबसे बड़ा दृष्टान्त 13 मई 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संविधान के अनुच्छेद 200 और 201 के तहत राज्यपाल और राष्ट्रपति द्वारा राज्य विधेयकों को मंजूरी देने के संबंध में 14 प्रश्नों पर सुप्रीम कोर्ट से सलाह ​मांगने की है । तमिलनाडु के राज्यपाल मामले पर हाल ही में आए फैसले के विभिन्न पहलुओं को संबोधित किया गया है, जहां सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु विधानसभा द्वारा पारित 10 विधेयकों को राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित करने के राज्यपाल के फैसले को खारिज कर दिया था। उसने माना कि विधेयकों पर राष्ट्रपति द्वारा उठाए गए सभी परिणामी कदम निरर्थक थे।</p>
<p>इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत अपने अंतर्निहित अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करते हुए इन विधेयकों को राज्यपाल के समक्ष प्रस्तुत किए जाने की तिथि पर स्वीकृत घोषित कर दिया, यह देखते हुए कि उन्हें बहुत लंबे समय तक लंबित रखा गया था। मजे की बात यह है कि संदर्भ में सावधानीपूर्वक फैसले का कोई उल्लेख नहीं किया गया है, जैसे कि इस विषय पर कानून के बारे में राष्ट्रपति के ‘संदेह’ स्वतंत्र रूप से उत्पन्न हुए हों।</p>
<blockquote><p>लोक सभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के पोस्ट को शेयर करते हुए आरोप लगाया है कि मोदी सरकार राज्यों की आवाज़ को दबाने और निर्वाचित राज्य सरकारों को परेशान करने के लिए राज्यपालों का इस्तेमाल कर रही है।&#8221;</p></blockquote>
<figure id="attachment_6610" aria-describedby="caption-attachment-6610" style="width: 2560px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/Rahut-scaled.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/Rahut-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1699" class="size-full wp-image-6610" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/Rahut-scaled.jpg 2560w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/Rahut-300x199.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/Rahut-1024x680.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/Rahut-768x510.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/Rahut-1536x1019.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/Rahut-2048x1359.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6610" class="wp-caption-text">राहुल गाँधी</figcaption></figure>
<p>भारत के संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत सुप्रीम कोर्ट को सौंपे गए इस ज्ञापन में, राष्ट्रपति ने कुछ सवाल पूछे हैं। इन नोट में यह सवाल भी शामिल है कि &#8220;क्या राज्य विधानमंडल से पारित विधेयक राज्यपाल की स्वीकृति के बिना लागू किया जा सकता है?&#8221; यह भी पूछा गया है कि क्या राष्ट्रपति और राज्यपालों के लिए राज्य विधानमंडल में पारित विधेयकों को मंजूरी देने के लिए समय-सीमा निर्धारित करना संभव है? </p>
<p>आठ अप्रैल को तमिलनाडु सरकार की एक याचिका पर फैसला सुनाते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि राज्यपाल विधेयकों को लंबे समय तक रोक कर नहीं रख सकते है। सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्ति का प्रयोग करते हुए तमिलनाडु सरकार के विधेयकों को अपनी स्वीकृति दी थी, जिसमें कहा गया कि राज्यपाल का तमिलनाडु सरकार द्वारा पारित विश्वविद्यालयों से संबंधित विधेयकों को अपनी स्वीकृति न देना &#8216;अवैध&#8217; है। सर्वोच्च न्यायालय ने राज्यपाल द्वारा विधेयकों को स्वीकृति देने के लिए समय-सीमा भी निर्धारित की थी। इस फैसले के साथ ही विधेयकों पर फैसला लेने के लिए समय-सीमा राष्ट्रपति के लिए भी निर्धारित की थी।</p>
<figure id="attachment_6611" aria-describedby="caption-attachment-6611" style="width: 1860px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/PM-Buddha-8.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/PM-Buddha-8.jpg" alt="" width="1860" height="1287" class="size-full wp-image-6611" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/PM-Buddha-8.jpg 1860w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/PM-Buddha-8-300x208.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/PM-Buddha-8-1024x709.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/PM-Buddha-8-768x531.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/PM-Buddha-8-1536x1063.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/PM-Buddha-8-100x70.jpg 100w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/PM-Buddha-8-218x150.jpg 218w" sizes="auto, (max-width: 1860px) 100vw, 1860px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6611" class="wp-caption-text">यह तस्वीर 5 सितम्बर 2015 की है जब प्रधानमंत्री तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन के समापन समारोह में भाग लेने के लिए बोध​ गया ​आये थे । ​उन दिनों बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद ​थे जो बाद में देश के राष्ट्रपति पर पर आसीन हुए।</figcaption></figure>
<p><strong>ज्ञातव्य हो कि केरल के पूर्व राज्यपाल (अब बिहार के राज्यपाल हैं) आरिफ मोहम्मद खान अपने कार्यकाल के दौरान आठ विधेयकों को दो वर्षों से रोके थे । बिलों को रोकने की वजहें कभी साफ-साफ नहीं बताया । बाद में केरल सरकार इस मामले को लेकर सर्वोच्च न्यायालय पहुंची । हालांकि अकेले आरिफ ही नहीं हैं, बल्कि तीन और भी राज्यपालों का नाम भी चर्चा में रहा जिनके खिलाफ मामला सर्वोच्च न्यायालय पहुँच था । पंजाब के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित और तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि के खिलाफ तमिलनाडु सरकार ने अदालत में याचिका दायर की थी । विपक्ष का सीधा आरोप था भी, और है भी, कि केंद्र सरकार विपक्षी शासित राज्यों के खिलाफ राज्यपालों का इस्तेमाल एक औजार के रूप में कर रही है। केरल सरकार ने अपनी याचिका में कहा था कि &#8220;राज्यपाल का मौजूदा आचरण कानून के शासन और लोकतांत्रिक व्यवस्था सहित हमारे संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।</strong> </p>
<p>इनके अलावा झारखंड, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, बिहार के राज्यपालों के बारे में भी चर्चाएं खुलेआम हुयी थी। महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोशयारी इतना बदनाम हुए कि अदालत को तीखी टिप्पणियां तक करना पड़ीं। पंजाब सरकार ने भी विधेयकों की मंजूरी रोकने के लिए राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया। हालांकि, इसके बाद, पंजाब माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2023 और भारतीय स्टाम्प (पंजाब संशोधन) विधेयक, 2023 सहित दो विधेयकों पर अपनी सहमति दे दी। लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि इतने दिनों से विधेयकों को रोककर क्यों बैठे थे।</p>
<figure id="attachment_6612" aria-describedby="caption-attachment-6612" style="width: 2043px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/G-4.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/G-4.jpg" alt="" width="2043" height="1227" class="size-full wp-image-6612" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/G-4.jpg 2043w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/G-4-300x180.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/G-4-1024x615.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/G-4-768x461.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/G-4-1536x923.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2043px) 100vw, 2043px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6612" class="wp-caption-text">​देश के एक राज्य का राज्यपाल निवास</figcaption></figure>
<p><strong>दिल्ली में उपराज्यपाल वीके सक्सेना और आम आदमी पार्टी सरकार का विवाद भी दिल्ली की सडकों पर यात्रा-तत्र सर्वत्र दिखा । कई बार अदालतों ने भी हस्तक्षेप किया है, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है। इसी तरह तेलंगाना भी राज्यपाल विवाद से अछूता नहीं रहा है।  किसी भी राज्य में राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद को लेकर इस तरह के विवाद बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं।</strong></p>
<blockquote><p>बहरहाल, भारतीय संविधान का प्रारूप 1948 के अनुच्छेद 131 के अनुसार, किसी राज्य के राज्यपाल का चुनाव उन सभी व्यक्तियों के प्रत्यक्ष मत द्वारा किया जाएगा, जिन्हें राज्य की विधान सभा के लिए आम चुनाव में मतदान का अधिकार है। और फिर वैकल्पिक रूप में यह भी कहा गया है कि &#8216;किसी राज्य के राज्यपाल को राष्ट्रपति अपने हस्ताक्षर और मोहर सहित अधिपत्र द्वारा चार अभ्यर्थियों के पैनल में से नियुक्त करेगा, जो उस राज्य की विधान सभा के सदस्यों द्वारा, या जहां राज्य में विधान परिषद है, वहां उस राज्य की विधान सभा और विधान परिषद के सभी सदस्यों द्वारा संयुक्त अधिवेशन में समवेत होकर आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा निर्वाचित किए जाएंगे और ऐसे चुनाव में मतदान गुप्त होगा।&#8217;</p></blockquote>
<p>कहते हैं कि 30 मई और 31 मई 1949 को को ड्राफ्ट आर्टिकल 131 (आर्टिकल 155) पर बहस हुई। इस ड्राफ्ट आर्टिकल के दो संस्करण थे &#8211; एक में राज्यपाल के चुनाव की प्रक्रिया बताई गई थी और दूसरे में नियुक्ति की प्रक्रिया बताई गई थी। बहस इस बात पर केंद्रित थी कि राज्यपाल को चुनाव के माध्यम से चुना जाना चाहिए या नियुक्ति के द्वारा। चुनाव के पक्ष में कुछ सदस्यों ने बताया  कि विधानसभा ने दो साल पहले एक प्रस्ताव पारित किया था जिसमें कहा गया था कि राज्यपाल का चुनाव चुनाव के माध्यम से किया जाएगा। एक सदस्य ने तर्क दिए कि नियुक्त राज्यपाल किसी भी राज्य से हो सकता है, और इसलिए वह एक अक्षम प्रशासक होगा क्योंकि उसे लोगों या भाषा का कोई ज्ञान नहीं होगा।</p>
<p>कई सदस्यों ने नियुक्ति की प्रणाली का समर्थन किया, लेकिन मसौदा अनुच्छेद में निर्धारित प्रक्रिया को अस्वीकार कर दिया। एक सदस्य ने तर्क दिया कि प्रांतीय स्वायत्तता और सफल राज्य कैबिनेट सरकारें केवल &#8216;काफी निष्पक्ष संवैधानिक प्रमुख के अस्तित्व&#8217; से ही सुनिश्चित की जा सकती हैं। उन्होंने मसौदा अनुच्छेद में उम्मीदवारों के पैनल से नियुक्ति की प्रणाली का भी विरोध किया क्योंकि यह सौहार्दपूर्ण संबंधों के लिए अनुकूल नहीं था। इसमें किसी पार्टी के भीतर गुटबाजी को बढ़ावा मिलेगा। </p>
<figure id="attachment_6613" aria-describedby="caption-attachment-6613" style="width: 2043px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/G-5.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/G-5.jpg" alt="" width="2043" height="1227" class="size-full wp-image-6613" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/G-5.jpg 2043w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/G-5-300x180.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/G-5-1024x615.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/G-5-768x461.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/G-5-1536x923.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2043px) 100vw, 2043px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6613" class="wp-caption-text">​देश के एक राज्य का राज्यपाल निवास</figcaption></figure>
<p>मसौदा समिति के एक सदस्य ने भी सहमति जताई और कहा कि नियुक्ति अधिक उपयुक्त थी क्योंकि राज्यपाल का कार्य &#8216;संवैधानिक प्रमुख, एक बुद्धिमान परामर्शदाता और मंत्रालय का सलाहकार होना था जो मुश्किलों में तेल डाल सकता है&#8217;। प्रधानमंत्री ने इन तर्कों से सहमति जताई और कहा कि नियुक्ति यह सुनिश्चित करेगी कि राज्यपाल राज्य की राजनीति से अलग रहे और निष्पक्ष और निष्पक्ष रूप से काम करने में सक्षम हो। एक अन्य सदस्य ने तर्क दिया कि नियुक्ति करने की शक्ति राष्ट्रपति में निहित होनी चाहिए।</p>
<p><strong>एक सदस्य ने मसौदा अनुच्छेद को पूरी तरह से बदलने का प्रस्ताव रखा, जिसमें कहा गया कि &#8216;राज्य के राज्यपाल को राष्ट्रपति द्वारा अपने हस्ताक्षर और मुहर के तहत वारंट द्वारा नियुक्त किया जाएगा ।&#8217; उन्होंने तर्क दिया कि मसौदा अनुच्छेद की भाषा विधानमंडल को बहुत अधिक छूट देती है और राष्ट्रपति की पसंद को प्रतिबंधित करती है। उनके अनुसार, संशोधन की प्रक्रिया को सरल बना दिया है और राष्ट्रपति को राज्यपाल नियुक्त करने का अप्रतिबंधित अधिकार दिया है। इसे मसौदा समिति के सदस्यों सहित विधानसभा का लोकप्रिय समर्थन प्राप्त हुआ। विधानसभा ने राज्यपाल को नियुक्ति द्वारा चुनने के पक्ष में मतदान किया और प्रस्तावित एकमात्र संशोधन को  स्वीकार कर लिया। संशोधित मसौदा अनुच्छेद 31 मई 1949 को अपनाया गया। </strong></p>
<p>यह भी कहा जाता है कि संविधान निर्माण के दौरान, संविधान सभा ने गवर्नर की नियुक्ति की चार वैकल्पिक योजनाओं पर विचार किया &#8211;  वयस्क मताधिकार के आधार पर चुनाव;  विधानमंडल द्वारा चुनाव;  प्रांतीय विधानमंडल द्वारा प्रस्तुत नामों के पैनल में से राष्ट्रपति द्वारा नामांकन; और  राष्ट्रपति द्वारा विवेकाधीन नियुक्ति। </p>
<blockquote><p>बहरहाल, पहला सुझाव संविधान सभा के विचारार्थ मसौदा संविधान में शामिल किया गया था। हालांकि, संविधान निर्माताओं ने तर्क दिया कि, यदि राज्यपाल सीधे निर्वाचित होता है, तो वह राजनीतिक महत्वाकांक्षा से ऊपर नहीं हो सकता है, और वह कुछ स्थितियों में वास्तविक शक्ति का दावा कर सकता है। राज्यपाल के लोकप्रिय प्रतिनिधित्व के दावे के कारण, मुख्यमंत्री के साथ टकराव आम बात होगी। संविधान सभा ने विधानमंडल द्वारा चुनाव के दूसरे विचार को अस्वीकार कर दिया। </p></blockquote>
<p>इस स्थिति में यह बताया गया कि वह स्थानीय प्रमुख पार्टी के हाथों में एक शक्तिहीन साधन होगा और इस तरह की नियुक्ति से राज्यपाल की स्वतंत्रता ख़तरे में पड़ जाएगी। राष्ट्रपति द्वारा विधायिका या मंत्रिमंडल द्वारा प्रस्तुत चार व्यक्तियों की सूची में से राज्यपाल को चुनने का सुझाव भी अस्वीकार कर दिया गया। ऐसा माना गया कि ऐसी स्थिति में मतभेद और गुटबाजी उभरेगी, जिससे बहुमत-समेकित पार्टी की स्थिति खराब होगी। और इन मौजूदा प्रथाओं के पक्ष और विपक्ष पर विचार करते समय, हमारे संविधान निर्माताओं ने कनाडाई मॉडल को चुना।</p>
<figure id="attachment_6614" aria-describedby="caption-attachment-6614" style="width: 2043px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/G-7.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/G-7.jpg" alt="" width="2043" height="1227" class="size-full wp-image-6614" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/G-7.jpg 2043w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/G-7-300x180.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/G-7-1024x615.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/G-7-768x461.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/G-7-1536x923.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2043px) 100vw, 2043px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6614" class="wp-caption-text">​देश के एक राज्य का राज्यपाल निवास</figcaption></figure>
<p>अनुच्छेद 155 के अनुसार, राष्ट्रपति को राज्यपाल के नामांकन पर पूर्ण और अप्रतिबंधित नियंत्रण दिया गया था। आलोचकों के अनुसार केंद्र ऐसे व्यापक अधिकार का दुरुपयोग कर सकता है। हालांकि, इसे नियंत्रित रखने के लिए कुछ नियम हैं: ऐसा माना जाता है कि यदि कोई निवासी किसी अन्य राज्य का निवासी है तो उसके उस राज्य के राजनीतिक मामलों में शामिल होने की संभावना कम होगी, और इसलिए वह अधिक ईमानदारी और निष्पक्षता से व्यवहार करेगा। इससे इतने बड़े और विविध समुदाय के बीच विद्यमान एकजुटता और एकजुटता की उच्च भावनाओं को भी बढ़ावा मिलेगा। </p>
<p>1956 में भारत की संसद में राज्य पुनर्गठन अधिनियम पारित किया गया था, जिसके तहत 14 राज्य और 5 केंद्र शासित प्रदेशों की स्थापना की गई थी। संशोधन की घोषणा के कारण महाराष्ट्र राज्य के लोगों ने व्यापक दंगे किए और लगभग अस्सी लोग मारे गए। इसके कारण बॉम्बे राज्य का विभाजन गुजरात और महाराष्ट्र में हो गया, जिसके बाद बॉम्बे एक अलग राज्य बन गया, जिसे बाद में निरंतर विरोध और सार्वजनिक आक्रोश के कारण महाराष्ट्र का हिस्सा बना दिया गया। मई 1960 में बॉम्बे को महाराष्ट्र की राजधानी और अहमदाबाद को गुजरात की राजधानी घोषित किया गया। 1956 के राज्य पुनर्गठन अधिनियम के भाग II के रूप में, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को संविधान की चौथी अनुसूची के पूर्ण संशोधन में शामिल किया गया था, जिसमें राज्य परिषद की सीटें मौजूदा राज्यों को आवंटित की गई थीं।</p>
<p><strong>भारत के राष्ट्रपति ने 7वें संविधान संशोधन अधिनियम के अनुच्छेद 258 ए के तहत संशोधन नीतियों के तहत केंद्र शासित प्रदेशों का नेतृत्व राज्य के राज्यपालों को सौंप दिया। हालांकि, राज्यपाल इस अनुच्छेद के तहत केंद्र सरकार को केंद्र शासित प्रदेशों का नेतृत्व या कार्य नहीं सौंप सकते। नेतृत्व के इस हस्तांतरण मुद्दे को बाद में राष्ट्रपति कानून का उपयोग करते हुए अनुच्छेद 258 ए में संशोधित किया गया। </strong></p>
<p>इसके अलावा, राज्यों के राज्यपालों को भारत की केंद्र सरकार के साथ चर्चा करके राज्य को सौंपे गए अधिकारियों को कार्य या कोई जिम्मेदारी सौंपने की शक्ति दी गई। जब तक राज्य के कानूनों का पालन किया जा रहा था, भारत के राज्यपाल ने कर्तव्यों के इस हस्तांतरण की अनुमति दी। एक अन्य अनुच्छेद 258A यह प्रावधान करने के लिए जोड़ा गया कि किसी राज्य का राज्यपाल भारत सरकार की सहमति से केंद्र सरकार या उसके अधिकारियों के साथ राज्य के किसी भी पद को साझा कर सके। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/G-11.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/G-11.jpg" alt="" width="2043" height="1227" class="aligncenter size-full wp-image-6615" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/G-11.jpg 2043w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/G-11-300x180.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/G-11-1024x615.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/G-11-768x461.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/G-11-1536x923.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2043px) 100vw, 2043px" /></a></p>
<p><strong>वैसे संविधान स्वीकार करने के बाद से, भारतीय संविधान में अब तक 106 संशोधन किए जा चुके हैं। पहला संशोधन 1951 में किया गया था और नवीनतम संशोधन 2023 में हुआ।कहते हैं कि संशोधन भारतीय संविधान को समय के साथ बदलने और सुधारने की एक प्रक्रिया है जो अनुच्छेद 368 के तहत निर्धारित है। सबसे महत्वपूर्ण संशोधन 1976 में 42 वां के रूप में जाना जाता है जिसमें  राष्ट्रपति, संसद और न्यायपालिका की शक्तियों को प्रभावित किया था। 44 वां संशोधन आपातकाल के दौरान हुआ था। साल 1992 में पंचायती राज को संवैधानिक मान्यता देने के लिए 73 वां संशोधन किया गया था और फिर 2002 में 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाने के लिए 86 वां संशोधन किया गया। संविधान के संशोधन के क्रम में सत्तारूढ़ पार्टी कटी है कि यह संशोधन संविधान को गतिशिक और लचीला बनाने के लिए किया जाता है जो समय के साथ देश की जरूरतों के अनुरूप बदलता रहता है।</strong> </p>
<p>नरेंद्र मोदी जब साल 2014 में प्रधानमंत्री बने, तब से अब तक (2014 से 2025 तक) भी ​सात बार संविधान में संशोधन किये गए हैं। साल 2015 में 99 वां संशोधन हुआ जिसके तहत राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग की स्थापना की गयी, जो न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम प्रणाली की जगह लेने वाला था।हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय ने बाद में इसे असंवैधानिक घोषित कर दिया। एक साल बाद साल 2016 में वस्तु एवं सेवा कर लागू किया जो देश में कर प्रणाली में एक महत्वपूर्ण बदलाव था। यह 101 वां संशोधन के रूप में जाना गया। दो साल बाद 2018 में 102 वां संशोधन किया गया जिससे राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया गया। उसके अगले वर्ष 103 वां संशोधन के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को शिक्षा और नौकरी में 10% आरक्षण की अनुमति दी गयी। </p>
<blockquote><p>विगत पांच वर्षों में भी तीन संशोधन किये गए। 2020 में 104 वां संशोधन के लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एससी और एसटी के लिए सीटों की समाप्ति की समय सीमा 70 से बढ़ाकर 80 साल कर दी। फिर 2023 में 106 वां संशोधन के तहत लोकसभा, राज्य विधान सभाओं और दिल्ली विधान सभा में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण की व्यवस्था की गयी, जो महिला आरक्षण अधिनियम के नाम से भी जाना जाता है।</p></blockquote>
<p>आज जब इन तमाम परिदृश्यों को देखते भारत के राज्यों में पदस्थापित राज्यपालों को देखता तो सोचता हूँ कि देश के 28 राज्यों और आठ केंद्र शासित प्रदेशों का प्रथम नागरिक, वास्तविक तौर पर उस राज्य का नागरिक होता ही नहीं है। दिल्ली के कनॉट प्लेस से भारत के संसद को मिलाने वाली सड़क संसद मार्ग पर राजनेताओं का कहना है यही परंपरा है। नेतागण कहते हैं कि &#8216;राज्यपाल प्रदेश में राष्ट्रपति की भूमिका अदा करते हैं और हमेशा केंद्र सरकार के निर्देशों का अक्षरशः अनुपालन करते हैं। राज्यपाल का दूसरे प्रदेश का नागरिक होना कोई कानूनी बाध्यता नहीं हैं, एक परंपरा है। इस दृष्टि से यह कहा जा सकता है कि केंद्र सरकार अपनी राजनीतिक उद्देश्य की पूर्ति राजपाल के द्वारा करा सकती है। क्योंकि औसतन राज्यपालों को अपनी कुर्सी पर जमे रहने के लिए केंद्र सरकार के आदेश को मानना ही होगा।</p>
<figure id="attachment_6607" aria-describedby="caption-attachment-6607" style="width: 696px" class="wp-caption alignleft"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/Pankaj-Vohra.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/Pankaj-Vohra-1024x737.jpg" alt="" width="696" height="501" class="size-large wp-image-6607" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/Pankaj-Vohra-1024x737.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/Pankaj-Vohra-300x216.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/Pankaj-Vohra-768x553.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/Pankaj-Vohra-1536x1105.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/Pankaj-Vohra.jpg 1698w" sizes="auto, (max-width: 696px) 100vw, 696px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6607" class="wp-caption-text">वरिष्ठ पत्रकार पंकज वोहरा</figcaption></figure>
<p><strong>वरिष्ठ पत्रकार पंकज वोहरा</strong> कहते हैं की &#8220;बेशक। समय की जरूरत के हिसाब से बदलाव करना पड़ता है। हालांकि यह अपवाद के तौर पर ही होना चाहिए और ऐसे मामलों में कोई सख्त नियम नहीं हो सकता। एक समय में, किसी खास राज्य के निवासी या मतदाता ही उस प्रांत से राज्यसभा में हो सकते थे। समय के साथ राजनेताओं ने अपने हिसाब से बदलाव किए। इसके बावजूद राज्यसभा को काउंसिल ऑफ स्टेट्स कहा जाता है।&#8221; </p>
<p><strong>ज्ञातव्य हो कि सर्वोच्च न्यायालय ने संवैधानिक तंत्र की विफलता के उदाहरणों को चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया: राजनीतिक संकट.आंतरिक तोड़फोड़,  शारीरिक टूटन, संघ कार्यकारिणी के संवैधानिक निर्देशों का अनुपालन न करना। ज्ञातव्य हो कि एसआर बोम्मई मामले (1994) में , सरकारिया आयोग की सिफारिशों के बाद, सर्वोच्च न्यायालय ने रेखांकित किया कि संवैधानिक तंत्र के टूटने से राज्य में शासन चलाने में मात्र कठिनाई नहीं, बल्कि लगभग असंभवता का संकेत मिलता है। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि यद्यपि इस तरह की विफलता के संबंध में राष्ट्रपति की व्यक्तिपरक सन्तुष्टि न्यायिक जांच से परे है, फिर भी जिस सामग्री पर ऐसी संतुष्टि आधारित है, उसका विश्लेषण निश्चित रूप से राज्यपाल की रिपोर्ट सहित न्यायपालिका द्वारा किया जा सकता है। न्यायालय ने अरुणाचल प्रदेश और उत्तराखंड में मनमाने ढंग से राष्ट्रपति शासन लागू किये जाने के बाद निलंबित की गई सरकारों को बहाल कर दिया।</strong>  </p>
<p><strong>नबाम रेबिया</strong> मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 2016 में फैसला सुनाया था कि राज्यपाल के विवेकाधिकार का प्रयोग अनुच्छेद 163 के तहत सीमित है और उनके द्वारा किया जाने वाला कार्य मनमाना या काल्पनिक नहीं होना चाहिए। यह तर्क से प्रेरित, सद्भावना से प्रेरित और सावधानी से किया जाने वाला निर्णय होना चाहिए। प्रशासनिक सुधार आयोग (1968) ने सिफारिश की थी कि राष्ट्रपति शासन के संबंध में राज्यपाल की रिपोर्ट वस्तुनिष्ठ होनी चाहिए तथा राज्यपाल को इस संबंध में स्वयं निर्णय लेना चाहिए। राजमन्नार समिति (1971) ने भारत के संविधान से अनुच्छेद 356 और 357 को हटाने की सिफारिश की थी । अनुच्छेद 356 के तहत केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी की मनमानी कार्रवाई के खिलाफ सुरक्षा के लिए आवश्यक प्रावधानों को संविधान में शामिल किया जाना चाहिए। राजमन्नार समिति ने इस बात पर जोर दिया कि राज्य के राज्यपाल को स्वयं को केंद्र का एजेंट नहीं समझना चाहिए, बल्कि राज्य के संवैधानिक प्रमुख के रूप में अपनी भूमिका निभानी चाहिए। </p>
<p><strong>सरकारिया आयोग</strong> (1988) ने सिफारिश की थी कि अनुच्छेद 356 का प्रयोग अत्यंत दुर्लभ मामलों में किया जाना चाहिए, जब राज्य में संवैधानिक तंत्र की विफलता को पुनः स्थापित करना अपरिहार्य हो जाए। आयोग ने सिफारिश की कि अनुच्छेद 356 के तहत कार्रवाई करने से पहले राज्य सरकार को चेतावनी जारी की जानी चाहिए कि वह संविधान के अनुसार काम नहीं कर रही है। फिर, न्यायमूर्ति वी. चेल्लिया आयोग (2002) ने सिफारिश की थी कि  अनुच्छेद 356 का प्रयोग संयम से किया जाना चाहिए तथा अनुच्छेद 256, 257 और 355 के तहत सभी कार्रवाइयों के समाप्त हो जाने के बाद इसे अंतिम उपाय के रूप में ही प्रयोग किया जाना चाहिए । &#8220;पंछी आयोग&#8221; ने सिफारिश की थी कि इन अनुच्छेदों 355 और 356 में संशोधन किया जाना चाहिए। इसने केंद्र द्वारा इनके दुरुपयोग को रोकने की कोशिश करके राज्यों के हितों की रक्षा करने की कोशिश की।</p>
<figure id="attachment_6608" aria-describedby="caption-attachment-6608" style="width: 696px" class="wp-caption alignright"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/Pankaj-Vohra1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/Pankaj-Vohra1-1024x737.jpg" alt="" width="696" height="501" class="size-large wp-image-6608" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/Pankaj-Vohra1-1024x737.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/Pankaj-Vohra1-300x216.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/Pankaj-Vohra1-768x553.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/Pankaj-Vohra1-1536x1105.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/Pankaj-Vohra1.jpg 1698w" sizes="auto, (max-width: 696px) 100vw, 696px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6608" class="wp-caption-text">​वरिष्ठ पत्रकार और अधिवक्ता बिराजा महापात्रा</figcaption></figure>
<p><strong>प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया के पूर्व विधि संवाददाता और वर्तमान में अधिवक्ता बिराजा महापात्रा</strong> कहते हैं कि &#8216;राज्यपाल की नियुक्ति भारत के संविधान के अनुच्छेद 155 के तहत भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। कानूनी तौर पर गृह राज्य से राज्यपाल नियुक्त करने में कोई बाधा नहीं है। लेकिन राज्यपाल सिर्फ राज्य का औपचारिक मुखिया नहीं होता। वह केंद्र के एजेंट के तौर पर भी काम करता है। राज्यपाल से यह अपेक्षा की जाती है कि वह राज्यपाल के तौर पर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए निष्पक्षता और तटस्थता बनाए रखे। बी.जी. खेर, के.एन. काटजू और पी. सुब्बारायण की संविधान सभा की एक उप समिति ने सुझाव दिया था कि राज्यपाल को मुख्यमंत्री की तरह ही एक निर्वाचित प्रतिनिधि होना चाहिए। लेकिन संविधान सभा मुख्यमंत्री और राज्यपाल की शक्तियों के बीच टकराव की आशंका के कारण इससे सहमत नहीं थी।&#8217;</p>
<p>महापात्रा के अनुसार, अगर आपको 1994 का एस.आर. बोम्मई मामला याद हो, तो सुप्रीम कोर्ट ने लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकारों को तोड़ने के लिए राज्यपाल की संस्था का इस्तेमाल किया। राज्यपाल के पद के दुरुपयोग के आरोप मणिपुर, गोवा (2017), मेघालय, कर्नाटक (2018) और हाल ही में तमिलनाडु से जुड़े कई मामलों में सुप्रीम कोर्ट में आए हैं। हालांकि राज्यपाल की दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट द्वारा न्यायिक जांच के दायरे में आती है, लेकिन ऐसा शायद ही कभी होता है। शायद हाल ही में तमिलनाडु का मामला इसका अपवाद है। इसलिए यह महत्वपूर्ण नहीं है कि राज्यपाल राज्य से है या नहीं। महत्वपूर्ण बात यह है कि राज्यपाल को निष्पक्ष रोल मॉडल होना चाहिए और अपने संवैधानिक कर्तव्यों का निर्वहन करते समय तटस्थता बनाए रखनी चाहिए।&#8217;</p>
<p>ज्ञातव्य हो कि स्वतंत्रता के बाद पहली भारतीय राज्य राज्यपाल सरोजिनी नायडू थीं, जिन्होंने 1947 से 1949 तक उत्तर प्रदेश की राज्यपाल के रूप में कार्य किया। उनकी नियुक्ति से पहले, उत्तर प्रदेश को संयुक्त प्रांत के रूप में जाना जाता था। इसी तरह कर्नाटक में जयचामराजेंद्र वाडियार, केरल में बुर्गुला रामकृष्ण राव, मध्य प्रदेश में डॉ. पट्टाभि सीतारमैया, महाराष्ट्र में राजा सर महाराज सिंह नियुक्त हुए थे। राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिशों के आधार पर, 1 नवंबर 1956 ई. से राजप्रमुख की संस्था को 7वें संविधान संशोधन द्वारा समाप्त कर दिया गया था। श्री गुरुमुख निहाल सिंह को 25 अक्टूबर 1956 ई. को राजस्थान के पहले राज्यपाल के रूप में नियुक्त किया गया था। </p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/chutkulanands-letter/delay-increases-discontent-finish-the-work-quickly">​राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सर्वोच्च न्यायालय से सलाह लेने की जरूरत क्यों पड़ी? कहते हैं: &#8216;​देर से असंतोष बढ़ता है, काम जल्द निबटाइए-देश को आगे बढ़ाइए​&#8217;</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>&#8216;महिला अधिकार&#8217; ही &#8216;मानव अधिकार&#8217; है ✍ बिहार में 8058 ग्राम पंचायतों में ​4209 में महिला मुखिया,​ लेकिन पंचायती राज कार्यक्रम में मंच पर पुरुषों का कब्ज़ा​ और महिलाएं जमीन पर 😢</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 28 Apr 2025 12:09:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
		<category><![CDATA[bihar]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>मधुबनी (बिहार) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के महामहिम आरिफ़ मोहम्मद खान के साथ-साथ मंच पर उपस्थित सभी गणमान्य लोगों के सामने लाल, पीली, हरी, बैगनी रंगबिरंगी साड़ियों में, भर मांग सिन्दूर भरी बिहार की इन महिलाओं को शायद मालुम नहीं होगा कि भारत में ना सही, आज भी विश्व के अनेकों भाग में जब [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/womens-rights-are-human-rights-in-the-world">&#8216;महिला अधिकार&#8217; ही &#8216;मानव अधिकार&#8217; है ✍ बिहार में 8058 ग्राम पंचायतों में ​4209 में महिला मुखिया,​ लेकिन पंचायती राज कार्यक्रम में मंच पर पुरुषों का कब्ज़ा​ और महिलाएं जमीन पर 😢</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मधुबनी (बिहार) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के महामहिम आरिफ़ मोहम्मद खान के साथ-साथ मंच पर उपस्थित सभी गणमान्य लोगों के सामने लाल, पीली, हरी, बैगनी रंगबिरंगी साड़ियों में, भर मांग सिन्दूर भरी बिहार की इन महिलाओं को शायद मालुम नहीं होगा कि भारत में ना सही, आज भी विश्व के अनेकों भाग में जब महिलाएं बोलती हैं, तो उस देश के पुरुष ही नहीं, पूरे विश्व के पुरुष उनकी बातों को तन्मयता के साथ सुनते हैं। इन महिलाओं को यह भी मालूम नहीं होगा कि विश्व के एक कोने में एक महिला अपने देश (अमेरिका) ही नहीं, बल्कि विश्व की महिलाओं के लिए कही थी &#8216;महिला अधिकार ही मानव अधिकार है।&#8221;</strong></p>
<p>यह बात इस मंच पर लागू नहीं होता है क्योंकि यह बिहार है। बिहार में पुरुष प्रधानता अधिक है। मंच के सामने बैठी महिलाओं को शायद यह नहीं मालुम होगा कि जिस अवसर पर प्रधानमंत्री बिहार के इस मिथिला क्षेत्र में प्रदेश के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ-साथ उनके मंत्रिमंडल और केंन्द्रीय मंत्री मंच का शोभा बढ़ा रहे हैं ताकि किसी भी तरह प्रधानमंत्री की नज़रों में आएं, बरकार रहें, यह अवसर पंचायत राज का सम्मेलन वाला अवसर है। लेकिन दुर्भाग्य यह है कि बिहार में प्रजातंत्र की पहली सीढ़ी (पंचायत) पर प्रदेश की महिलाओं का पुरुषों से अधिक भागीदारी होते हुए भी वे नीचे जमीन पर बैठी हैं। क्योंकि वे सभी औरत हैं, अशिक्षित हैं, अर्थ से कमजोर हैं। वे बोल नहीं सकती पुरुषों के सामने, न तो घरों और ना ही बाहर में। दृष्टान्त सामने हैं। समय दूर नहीं है जब बिहार में महिलाओं की यह दुर्दशा एक गहन शोध का विषय होगा। </p>
<p>2020 की गर्मियों में, जब कोविड-19 महामारी अपने चरम पर थी, अमेरिका के पूर्व प्रथम महिला मिशेल ओबामा ने &#8216;गर्ल्स अप लीडरशिप समिट&#8217; में बोलते हुए लड़कियों और युवा महिलाओं के लिए शिक्षा का समान पहुँच का आह्वान करते अपनी आवाज बुलंद की।  मिशेल ओबामा ने कहा कि &#8220;जब हम लड़कियों को सीखने का अवसर देते हैं, तो हम उन्हें अपनी क्षमता को पूर्ण करने, स्वस्थ परिवार बनाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए अपने देश की अर्थव्यवस्था में योगदान करने का अवसर देते हैं।&#8221; जब मिशेल ओबामा बोल रही थीं, उस वक्त विश्व के सभी पुरुष उनकी आवाज सुन रहे थे। </p>
<figure id="attachment_6396" aria-describedby="caption-attachment-6396" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182404.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182404.jpg" alt="" width="2200" height="1395" class="size-full wp-image-6396" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182404.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182404-300x190.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182404-1024x649.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182404-768x487.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182404-1536x974.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182404-2048x1299.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6396" class="wp-caption-text">प्रधानमंत्री 24 अप्रैल, 2025 को बिहार के मधुबनी में राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस कार्यक्रम में</figcaption></figure>
<p><strong>इसी तरह, अमेरिका के प्रथम महिला के रूप में अपने कार्यकाल की शुरुआत में, हिलेरी क्लिंटन ने महिलाओं के लिए सबसे प्रसिद्ध भाषण दी । बीजिंग में महिलाओं पर संयुक्त राष्ट्र के चौथे विश्व सम्मेलन में बोलते हुए, उन्होंने अपनी भाषा को संयमित करने के दबावों को दरकिनार करते हुए महिलाओं के प्रति दुनिया भर में हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई। हिलेरी क्लिंटन ने कहा, &#8220;अब समय आ गया है कि हर जगह महिलाओं के हित में काम किया जाए। अगर हम महिलाओं के जीवन को बेहतर बनाने के लिए साहसिक कदम उठाते हैं, तो हम बच्चों और परिवारों के जीवन को भी बेहतर बनाने के लिए साहसिक कदम उठाने होंगे। यानी, उनके अनुसार, &#8216;महिला अधिकार ही मानव अधिकार है।&#8217; </strong></p>
<p>आज़ादी के बाद विगत 78 वर्षों में बिहार में (अपवाद छोड़कर) शायद ही कोई महिला उठ पायी जो विश्व की अन्य महिला वक्ताओं &#8211; सोजर्नर ट्रुथ, मलाला यूसुफ़ज़ी, मिशेल ओबामा, चिमामांडा नगोजी अदिची, एम्मा वाटसन, एमेलिन पैंकहर्स्ट, सुसान बी. एंथनी, एमेलिन पैंकहर्स्ट आदि &#8211; के जैसी बनकर अपने ही प्रदेश की महिलाओं का भाग्य बदलने में आगे आयी होंगी। यह अलग बात है कि बिहार की सैकड़ों नहीं, हज़ारों महिलाएं आज अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, जर्मनी, स्विटरलैंड और न जाने किन-किन देशों में रहती हैं। मधुबनी भी अछूता नहीं होगा। यह तस्वीर गवाह है कि बिहार की महिलाओं को अपनी बात खुद बोलना होगा। अन्यथा सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के पंचायतों में 55 फीसदी हिस्सा होने के बाद भी, पंचायत दिवस के सम्मलेन में नीचे जमीन पर ही बैठी रह जाएँगी और मंच पर आधिपत्य पुरुष नेताओं का बरकरार रहेगा। </p>
<p>पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मधुबनी आये थे। प्रदेश के विद्वान, विदुषियों से लेकर लेखक, लेखिकाओं तक, नेताओं से लेकर कार्यकर्ताओं तक, मंत्रियों से लेकर मुख्यमंत्री तक, अधिकारियों से लेकर चपरासियों तक, संचार साधनों में दिल्ली-कलकत्ता के अख़बारों के मधुबनी में पदस्थापित स्ट्रिंगरों से लेकर सम्पादकों तक &#8211; सभी अपनी-अपनी नजरों से सम्मानित प्रधानमंत्री का कार्यक्रम देखे, सुने, लिखे। लेकिन मेरा ध्यान दो चीजों पर अटक गया। </p>
<p><strong>एक: </strong>हरी झंडी लिए प्रधानमंत्री जब ऑनलाइन एक रेल सेवा का उद्घाटन कर रहे थे, मंच पर सिर्फ &#8216;पुरुषों&#8217; का एकाधिकार था। कम से कम रेलगाड़ी (स्त्रीलिंग) के सम्मानार्थ मंच पर एक भी महिला को स्थान दे देते। प्रदेश में शायद एक भी महिला उस योग्य उन महात्मनों की नज़रों में नहीं थी, जो मंच पर प्रधानमंत्री, प्रदेश के लाट साहेब. मुख्यमंत्री या अन्य &#8216;स्वयंभू बिहार के भाग्य विधाताओं के साथ खड़ी हो सकें। सुनते हैं, प्रधानमंत्री की अगुआई में बिहार ही नहीं, देश में महिला सशक्तिकरण पर ग्रन्थ लिखे जा रहे हैं। </p>
<p><strong>दो:</strong> हज़ारों की संख्या में लाल, पीली, हरी, बैगनी, सफ़ेद, रंग-बिरंगी साड़ियों में महिलाओं की उपस्थिति दिखी। यह नहीं कहूंगा की बिहार के पुरुष नहीं थे, लेकिन महिलाओं की तुलना में पुरुषों की उपस्थिति खल रही थी। इतना ही नहीं,  जनता जीव क्रेन प्राइवेट लिमिटेड के स्वामित्व वाले कारण पचास फुट लम्बे डंडे पर कैमरा बंधा दिखा, ताकि तस्वीरों की किल्लत नहीं हो देश दुनिया को दिखने के लिए। अवसर था पंचायती राज दिवस को मनाना जिसमें प्रधानमंत्री ने कहाँ कि पूरा देश मिथला और बिहार से जुड़ा हुआ है। </p>
<figure id="attachment_6397" aria-describedby="caption-attachment-6397" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182418.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182418.jpg" alt="" width="2200" height="1538" class="size-full wp-image-6397" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182418.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182418-300x210.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182418-1024x716.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182418-768x537.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182418-1536x1074.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182418-2048x1432.jpg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182418-100x70.jpg 100w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6397" class="wp-caption-text">24 अप्रैल, 2025 को बिहार के मधुबनी में विभिन्न विकास परियोजनाओं के उद्घाटन, शिलान्यास और राष्ट्र को समर्पण के अवसर पर एकत्रित होते हुए। इस अवसर पर प्रधानमंत्री संबोधित करते हुए।</figcaption></figure>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का भी नाम लिए, राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के पुण्यतिथि पर भी श्रद्धांजलि दिए। यह भी कहे कि प्रदेश के विकास के लिए हज़ारों-हज़ार करोड़ रुपए की परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन भी किये। यह भी ध्यान आकर्षित किये कि भारत का तीव्र विकास तभी संभव है जब इसके गांव मजबूत हों और पंचायती राज की अवधारणा इसी भावना में निहित है। प्रधानमंत्री यह भी कहे कि ग्राम पंचायतों के सामने सबसे बड़ी समस्या भूमि विवाद से जुड़ी है। उन्होंने इस बात पर अक्सर असहमति जताई कि कौन-सी भूमि आवासीय है, कृषि योग्य है, पंचायत के स्वामित्व वाली है या सरकारी स्वामित्व वाली है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस समस्या के समाधान के लिए भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया जा रहा है, जिससे अनावश्यक विवादों को प्रभावी ढंग से हल करने में मदद मिली है।</p>
<blockquote><p>लेकिन मोदी जी वह नहीं कहे जो राष्ट्र के प्रधानमंत्री के रूप में उन्हें कहना चाहिए था। बिहार के लोगों से, खासकर महिलाओं से यह नहीं पूछे की आखिर प्रदेश में शिक्षा का दर अन्य प्रदेशों की तुलना में कम क्यों है? उन्होंने यह भी नहीं कहा कि भारत सरकार प्रदेश में शिक्षा को बढ़ने के लिए अनेकानेक कार्यक्रम चला रही है। हम चाहते हैं कि प्रत्येक घर का बच्चा स्वयं चलकर विद्यालय तक पहुंचे &#8211; बिना किसी लोभ के। </p></blockquote>
<p>मोदी जी को यह भी पूछना चाहिए की क्या आज़ादी के 78 वर्ष बाद भी सरकार, या शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोग आपके बच्चों को भोजन पर लुभा कर, टिफिन पर लुभाकर, साईकिल पर लुभाकर, या ने सामग्रियों का लुभावना देकर विद्यालय बुलाये, तभी बच्चे आएंगे। हम नारा देते थक गए कि पढ़ेगा इण्डिया तो बढ़ेगा इण्डिया&#8217;, लेकिन आप तो माता है, पहली शिक्षिका है घर-समाज की; फिर आप अपने कर्तव्यों का पालन क्यों नहीं करती? आपके बच्चे पढ़ेंगे तो आपका ही विकास पहले होगा, समाज और राष्ट्र का विकास बाद में। </p>
<blockquote><p>राष्ट्र के एक अभिभावक के रूप में मिथिला की भूमि पर, जहाँ आज शायद ही लोग अपनी बेटियों का नाम &#8216;सीता&#8217; रखते हैं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह पूछना चाहिए था कि बिहार के सभी 38 जिलों में, सभी 45103 गांव में आज भी इतनी दर्दनाक स्थिति क्यों है? आज़ादी के बाद विगत 78 वर्षों में केंद्र सरकार की ओर से गंगा की धारा जैसा पानी बिहार के विकास में खर्च किया गया है। भारत सरकार ही नहीं, प्रदेश की सरकार के वित्त विभाग के पास उपलब्ध दस्तावेजों में सभी अंकित है। लेकिन वे इस बात को प्रदेश के मुख्यमंत्री से लेकर शहरी और ग्रामीण विकास मंत्री तक, जिलों में पदस्थापित भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों से पूछने की हिम्मत नहीं किये कि आखिर पैसे कहाँ जाते हैं ? </p></blockquote>
<p>मुद्दत पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने कहने की हिम्मत किये थे कि &#8216;हम अगर एक रुपया भेजते हैं गाँव के एक व्यक्ति के विकास के लिए तो उसे दस नया पैसा ही मिल पाता है, वह भी बहुत मशक्कत के बाद। शेष नब्बे पैसे रास्ते में खा लेते हैं लोग &#8211; यह दुर्भाग्य है। हमें यकीन है कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बात को पूछते, राष्ट्र के हेडमास्टर के रूप में, तो शायद मंच पर खड़े किसी भी व्यक्ति के मुंह से आवाज नहीं निकलती। प्रदेश के मुख्यमंत्री सहित सभी मूकबधिर हो जाते। लेकिन उन्होंने नहीं पूछा, अलबत्ता वे कहते रहे &#8216;हमने यह किया, हमने वह किया&#8217;, और महिला विहीन मंच के नीचे दूर तक बांस के बेड़ा के बाद बैठी महिलाएं ताली बजाती रहीं, क्योंकि कैमरा उनके ऊपर था और पंचायत के मुखिया से लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री की निगाहें उन पर रुकी थी। </p>
<figure id="attachment_6398" aria-describedby="caption-attachment-6398" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182401.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182401.jpg" alt="" width="2200" height="1575" class="size-full wp-image-6398" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182401.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182401-300x215.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182401-1024x733.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182401-768x550.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182401-1536x1100.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182401-2048x1466.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6398" class="wp-caption-text">प्रधानमंत्री 24 अप्रैल, 2025 को बिहार के मधुबनी में अमृत भारत एक्सप्रेस और नमो भारत रैपिड रेल को हरी झंडी</figcaption></figure>
<p>प्रधानमंत्री अपने कार्यों की लम्बी सूची पढ़ रहे थे, वे और उनकी सरकार क्या की, क्या कर रही है, कंठस्त रूप में कहते जा रहे थे। यह भी पूरे जोर से कहे कि सरकार महिलाओं की आय बढ़ाने और रोजगार तथा स्वरोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए मिशन मोड में काम कर रही है। फिर बिहार में &#8216;जीविका दीदी&#8217; कार्यक्रम पर चर्चा किये और कहे कि यह कार्यक्रम अनेक महिलाओं के जीवन को बदल दिया है। फिर पैसे की बात किये और कहे कि आज बिहार में महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को लगभग 1,000 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है जो महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण को और मजबूत करेगा और देश भर में 3 करोड़ लखपति दीदी बनाने के लक्ष्य में योगदान देगा। </p>
<p><strong>बिहार में करीब 8053 ग्राम पंचायत, 533 पंचायत समिती और 38 जिला परिषद् कार्यरत हैं। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि पंचायत राज सम्मेलन के अवसर पर जहाँ सरकारी आंकड़ों के मुताबिक बिहार की महिलाएं की स्थानीय सरकारों में भागीदारी 55.35 प्रतिशत बता रही है। वैसे पंचायत चुनाव के आंकड़े बताते हैं कि बिहार में त्रिस्तरीय ग्राम पंचायत और ग्राम कचहरी के कुल 247671 पदों में से कुल 110964 पद महिलाओं के लिए आरक्षित किये गये थे। इन कुल पदों में महिलाओं ने 138503 पदों जीत दर्ज की थी। राज्य में 8058 ग्राम पंचायतों में महिला मुखिया की भागीदारी अभी 4209 है। </strong></p>
<p>इसमें अत्यंत पिछड़ा वर्ग की 692, अनुसूचित जाति की 692 और अनुसूचित जनजाति वर्ग की 52 मुखिया भी शामिल हैं। पंचायत समिति सदस्यों की कुल 11092 पदों में 5982 महिला प्रतिनिधि निर्वाचित हुई हैं। जिला परिषद सदस्य के 1159 पदों में 654 पदों पर महिलाओं ने जीत दर्ज की। राज्य की 8059 ग्राम कचहरियों में 3833 सरपंच महिला हैं और इसके अलावा ग्राम कचहरी के पंच के कुल 107431 पदों में 63974 पदों पर महिलाओं का कब्जा है। लेकिन इस मंच पर एक भी महिला नजर नहीं आयी। पुरुषों का बाहुल्य था।</p>
<p><strong>प्रधानमंत्री अगर प्रदेश में कालखंड में &#8216;रिकॉर्ड बनाने वाले मुख्यमंत्री&#8217; नीतीश कुमार से काश पूछते कि आखिर बिहार से श्रमिकों का, छात्र-छात्राओं का, नौकरी-पेशा ढूंढने वालों का नित्य पलायन क्यों हो रहा है? काश वे यह भी पूछते की केंद्रीय राशि मिलने के बाद भी बिहार प्रदेश के लोगों का वजन दूसरे प्रदेश की सरकार क्यों ढोयेगी?  बिहार एक ऐसा राज्य है जो अपनी समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है, लेकिन पिछले कई दशकों से एक गंभीर समस्या से जूझ रहा है और वो है- लोगों का पलायन और यह पलायन न केवल राज्य की सामाजिक और अर्थव्यवस्था ताने-बाने पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है, बल्कि बिहार के युवाओं के भविष्य पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा रहा है। हर साल बिहार के हजारों युवा बेहतर रोजगार की तलाश में दूसरे राज्य पहुंचते है। </strong></p>
<figure id="attachment_6399" aria-describedby="caption-attachment-6399" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182423-1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182423-1.jpg" alt="" width="2200" height="1369" class="size-full wp-image-6399" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182423-1.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182423-1-300x187.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182423-1-1024x637.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182423-1-768x478.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182423-1-1536x956.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182423-1-2048x1274.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6399" class="wp-caption-text">24 अप्रैल, 2025 को बिहार के मधुबनी में विभिन्न विकास परियोजनाओं के उद्घाटन, शिलान्यास और राष्ट्र को समर्पण के अवसर पर एकत्रित होते हुए। इस अवसर पर प्रधानमंत्री संबोधित करते हुए।</figcaption></figure>
<p>बिहार के विधानसभा में कुल 243 विधायक बैठे हैं। लोक सभा के प्रदेश 40 सांसदों को भेजता है। क्या कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या प्रदेश के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार के सांसदों से, विधायकों से यह प्रश्न पूछने की हिम्मत जुटा पाए कि उनके संसदीय अथवा विधानसभा  क्षेत्र के विकास के निमित्त जो राशि आवंटित की जाती है, उसका उपयोग क्यों नहीं होता? शायद नहीं। आज भारत सरकार और प्रदेश सरकार के कोषागारों के अलावे, प्रदेश के जिलाधिकारियों, उपायुक्तों के पास कितना हज़ार करोड़ रुपये पड़ा होगा, आंकना संभव नहीं है। आज से 10 वर्ष पूर्व, यानी 2013 में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री श्रीकांत कुमार जेना ने कहा था कि सांसदों द्वारा उपयोग नहीं की जाने वाली राशि आज लगभग 4300 करोड़ के आसपास है। इस मामले में न तो प्रधानमंत्री और ना ही लोकसभा या राज्य सभा के अध्यक्ष और सभापति सम्मानित सांसदों से पूछे कि जनता के कल्याणार्थ उन पैसों का सकारात्मक उपयोग क्यों नहीं होता?</p>
<p><strong>भूमि, कानून-व्यवस्था और पुलिस &#8216;राज्य का विषय&#8217; होने के बाद भी, एक अभिभावक के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विगत दस वर्षों में प्रदेश के मुख्यमंत्री से पूछते कि बिहार में रोजगार का सृजन क्यों नहीं होता? बिहार में उद्योगों का विकास क्यों नहीं होता? रुग्ण उद्योगों को जीवित क्यों नहीं किया जाता? जो पलायन का सबसे बड़ा कारण है। कृषि क्षेत्र उतना रोजगार उत्पन्न नहीं कर पाता, क्योंकि आधुनिक तकनीकों और पर्याप्त निवेश की कमी के कारण यह काफी हद तक सीमित है। वैसी स्थिति में युवाओं को रोजगार के लिए राज्य के बाहर देखना उनकी मजबूरी है।  लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बिहार में खराब शिक्षा व्यवस्था और कौशल विकास के स्तर में कमी पलायन का सबसे बड़ा कारण है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए युवा पीढ़ी को अन्य राज्यों जैसे दिल्ली, महाराष्ट्र, पंजाब और कर्नाटक की ओर रुख करना पड़ता है। लेकिन प्रधानमंत्री कभी नहीं पूछे की नीतीश जी ऐसी स्थिति क्यों है आपके राज्य में ? </strong> </p>
<p>सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बिहार से करीब 2.9 करोड़ लोग काम की तलाश में दूसरे राज्यों में पलायन कर चुके हैं, जो बिहार की कुल आबादी यानी लगभग 20 प्रतिशत है। इसकी जानकारी केंद्र सरकार ने पिछले साल संसद में राजद के राज्यसभा सांसद संजय यादव के सवाल के जवाब में दी थी। केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार, 26 जुलाई 2024 तक ई-श्रम पोर्टल पर लगभग 29.83 करोड़ लोगों ने अपना रजिस्ट्रेशन करवाया है, जिसमें से बिहार से 2.9 करोड़ लोग शामिल है। लेकिन, ये सिर्फ वे लोग हैं, जिन्होंने ई-श्रम पोर्टल पर अपना नाम रजिस्टर कराया है। पलायन करने वाले करोड़ों ऐसे हैं जिन्होंने कभी ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्टर ही नहीं किया। ऐसे में पलायन करने वालों का असली आंकड़ा काफी ज्यादा है। प्रधानमंत्री इस बात को नहीं पूछेंगे। </p>
<blockquote><p>इसका परिणाम यह हो रहा है कि पलायन के कारण बिहार में परिवार, समाज, गाँव सभी ध्वस्त होते चाहे जा रहे हैं। आज स्थिति यह है कि प्रदेश का प्रत्येक गाँव के दस घरों में आठ घरों में पुरुष दिखाई नहीं देते। आज बहुत वुजूर्गों को छोड़कर, सभी उम्र के पुरुष रोजी-रोटी की तलाश में गाँव की सीमा पार कर रहे हैं। गाँव में महिलाओं, बच्चियों की संख्या पुरुषों के तुलना में कई गुना अधिक है। वैसी स्थिति में जब दिल्ली, कलकत्ता, चेन्नई, कानपूर, नागपुर, लखनऊ, राजस्थान, पंजाब, जम्मू-कश्मीर के नेतागण बिहार आएंगे तो उनके सम्मानार्थ ताली बजने के लिए ही सही, राजनीतिक ठेकेदार ट्रक-बस में भरकर गावों से महिलाओं को ही लाएंगे न भीड़ जुटाने के लिए, ताली बजने के लिए। </p></blockquote>
<figure id="attachment_6400" aria-describedby="caption-attachment-6400" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182421.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182421.jpg" alt="" width="2200" height="1413" class="size-full wp-image-6400" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182421.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182421-300x193.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182421-1024x658.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182421-768x493.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182421-1536x987.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/H20250424182421-2048x1315.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6400" class="wp-caption-text">24 अप्रैल, 2025 को बिहार के मधुबनी में विभिन्न विकास परियोजनाओं के उद्घाटन, शिलान्यास और राष्ट्र को समर्पण के अवसर पर एकत्रित होते हुए। इस अवसर पर प्रधानमंत्री संबोधित करते हुए।</figcaption></figure>
<p>पिछले वर्ष <strong>&#8216;डाउन टू अर्थ&#8217;</strong> पत्रिका में भारत में 2021 के दौरान सभी प्रवासियों में से करीब 10.7 फीसदी ने रोजगार संबंधी कारणों से पलायन किया था। इनके पलायन के लिए बेहतर रोजगार की तलाश, नौकरी में ट्रांसफर, काम से निकटता और अवसरों की कमी जैसे कारण जिम्मेदार थे। यह जानकारी अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) और इंस्टीट्यूट फॉर ह्यूमन डेवलपमेंट (आईएचडी) ने अपनी नई इंडिया एम्प्लॉयमेंट रिपोर्ट 2024 में साझा की है। रिपोर्ट के मुताबिक रोजगार के लिए पलायन करने वालों का यह अनुपात महिलाओं में बेहद कम महज 1.7 फीसदी था। वहीं देश में 49.6 फीसदी पुरुषों के पलायन के लिए रोजगार और उससे जुड़े कारण जिम्मेवार थे। आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि रोजगार संबंधी कारणों से प्रवास करने वाले पुरुषों के मामले में दिल्ली अव्वल है, जहां 87.1 फीसदी पुरुषों ने रोजगार की वजह से प्रवास किया था। वहीं कर्नाटक में यह आंकड़ा 63.2, जबकि महाराष्ट्र में 59.9 फीसदी दर्ज किया गया। </p>
<p>ऐसा ही कुछ देश के अन्य राज्यों में भी देखने को मिला है, जहां तेलंगाना में 56.2 फीसदी, छत्तीसगढ में 54.9 फीसदी, असम में 54.7 फीसदी, हरियाणा में 54.7 फीसदी, गुजरात में 51.4 फीसदी, मध्य प्रदेश में 50.9 फीसदी और तेलंगाना सहित आंध्र प्रदेश में 50.2 फीसदी पुरुषों के प्रवास के पीछे की वजह रोजगार रही। वहीं दूसरी तरफ रोजगार की वजह से प्रवास करने वाले पुरुषों का आंकड़ा उत्तरप्रदेश में सबसे कम 35.9 फीसदी दर्ज किया गया। इसी तरह केरल में 37.2 फीसदी, जम्मू कश्मीर में 38.3 फीसदी, बिहार में 39 फीसदी, और पंजाब में 44.4 फीसदी पुरुषों ने रोजगार कारणों से पलायन किया था। यदि पिछले दो दशकों में 2000 से 2021 के बीच भारत में प्रवासन की दर को देखें तो उसमें 2.1 फीसदी का मामूली इजाफा हुआ है। प्रवासन की यह दर 26.8 फीसदी से बढ़कर 28.9 फीसदी पर पहुंच गई है। वहीं दूसरी तरफ बिहार में प्रवासन की दर सबसे कम 14.2 फीसदी रिकॉर्ड की गई है। इसी तरह जम्मू और कश्मीर में यह आंकड़ा 22.1, असम में 23.7, तेलंगाना में 25.2 फीसदी, दिल्ली में 27.6, झारखंड में 28.3 और उत्तरप्रदेश में 28.5 फीसदी दर्ज किया गया है।</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/womens-rights-are-human-rights-in-the-world">&#8216;महिला अधिकार&#8217; ही &#8216;मानव अधिकार&#8217; है ✍ बिहार में 8058 ग्राम पंचायतों में ​4209 में महिला मुखिया,​ लेकिन पंचायती राज कार्यक्रम में मंच पर पुरुषों का कब्ज़ा​ और महिलाएं जमीन पर 😢</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>एक दिव्यांग खिलाड़ी का देश के प्रधानमंत्री से प्रार्थना : मैं तिरंगा के ख़ातिर इंग्लिश चैनल तैर कर पार करना चाहता हूँ, मदद करें</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 02 Feb 2025 11:08:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[खेल]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली : क्या विडंबना है। भारत सरकार के खेल मंत्रालय के पास देश में कितने दिव्यांग खिलाड़ी हैं, से सम्बंधित आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। यह अलग बात है कि विगत वर्ष तक देश में करीब तीन करोड़ लोग दिव्यांग थे, जो अपनी-अपनी पहुँच के अनुसार दिव्यांगों के निमित्त प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर की योजनाओं का लाभ उठा रहे [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली : क्या विडंबना है। भारत सरकार के खेल मंत्रालय के पास देश में कितने दिव्यांग खिलाड़ी हैं, से सम्बंधित आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। यह अलग बात है कि विगत वर्ष तक देश में करीब तीन करोड़ लोग दिव्यांग थे, जो अपनी-अपनी पहुँच के अनुसार दिव्यांगों के निमित्त प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर की योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं। औसतन 99 फ़ीसदी दिव्यांग खिलाड़ी अपनी मेहनत, अपने पैसे से राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खेलों में भाग लेकर राष्ट्र की गरिमा को बढ़ा रहे हैं। हाँ, जीत हासिल करने के बाद, स्वर्ण, चांदी और कांस्य पदक जीतने के बाद प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर के नेता उन्हें कुछ क्षण के लिए सम्मानित अवश्य करते हैं, ताकि अख़बारों के पन्नों पर तस्वीरों के साथ सुर्खियां प्रकाशित हो सके। फिर सभी भूल जाते हैं और ये दिव्यांग खिलाड़ी गुमनाम हो जाते हैं। </strong></p>
<p>अगर ऐसा नहीं होता तो शायद बलिया के बांसडीह तहसील के हालपुर गांव निवासी और राष्ट्रीय तैराक दिव्यांग लक्ष्मी साहनी को राष्ट्र की गरिमा को बढ़ाने के लिए दर-दर का ठोकर नहीं खाना होता। अखबारवाला(डॉट)कॉम से बात करते हुए लक्ष्मी साहनी, जो जाति से मछुआरा हैं, कहते हैं: &#8220;चाहत तो हैं भारत का तिरंगा विश्व में लहराऊँ। हम तो शरीर से दिव्यांग हैं, फिर भी तैर सकते हैं; जो आत्मा से दिव्यांग जीवन जी रहे हैं, सत्ता के सिंहासन पर बैठे हैं, वे हमारी याचना को कैसे समझेंगे?&#8221;</p>
<p><strong>साहनी का कहना है कि &#8220;प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को, प्रदेश के मुख्यमंत्री सम्मानित आदित्यनाथ योगी जी को अपने देश में, प्रदेश में, एक ऐसे प्रशिक्षण केंद्रों को अपनी-अपनी निगरानी में जन्म देना होगा, जहाँ सरकारी महकमें के अधिकारियों को को संवेदनशीलता का पाठ और प्रशिक्षण देने की व्यवस्था होगी। जो दिव्यांगों की पीड़ा को समझेंगे। हम शरीर से लाचार हैं, फिर भी देश के लिए कुछ करना चाहते हैं। लेकिन जो शरीर से लाचार नहीं हैं, उनकी मानसिकता में लोच नहीं हैं &#8211; यह दुखद है।&#8221;</strong></p>
<p>वैसे भारत का संविधान अपने सभी नागरिकों के लिए समानता, स्वतंत्रता, न्याय व गरिमा सुनिश्चित करता है और स्पष्ट रूप से यह विकलांग व्यक्तियों समेत एक संयुक्त समाज बनाने पर जोर डालता है। लेकिन इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि हाल के वर्षों में विकलांगों के प्रति समाज का नजरिया तेजी से बदला है। लोग यह मानने लगे हैं कि यदि विकलांग व्यक्तियों को समान अवसर तथा प्रभावी पुनर्वास की सुविधा मिले तो वे बेहतर गुणवत्तापूर्ण जीवन व्यतीत कर सकते हैं। </p>
<p>उधर उत्तर प्रदेश सरकार भी दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग ने दिव्यांगों की सुविधा के लिए कई योजनाओं का संचालन शुरू किया है। इनमें दिव्यांग भरण पोषण अनुदान (दिव्यांग पेंशन) योजना, कृत्रिम अंग/ सहायक उपकरण योजना, दुकान निर्माण/संचालन ऋण योजना, शादी- प्रोत्साहन योजना, दिव्यांगता निवारण के लिए शल्य चिकित्सा के लिए अनुदान योजना आदि सम्मिलित है। </p>
<p>इन बातों को यहाँ इसलिए जिक्र कर रहा हूँ कि क्या यह योजनाएं व्यवहार में सम्पूर्णता के साथ हैं भी या सिर्फ कागजों पर दौड़ रहे हैं ? </p>
<p>वजह यह है कि बलिया के बांसडीह तहसील अंतर्गत हालपुर गांव निवासी राष्ट्रीय तैराक दिव्यांग लक्ष्मी साहनी विगत दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखे हैं जिसमें वे उनसे अनुरोध किये हैं कि उन्हें आगामी पैरा ओलम्पिक खेलों में भाग लेने के लिए मार्ग प्रशस्त करें। दिव्यांग लक्ष्मी साहनी की कहानी अविश्वसनीय है। अपने पैर न होने के बावजूद भी लगातार 72 घंटे पानी पर लेट कर पूजा करना, खाना खाना, मोबाइल पर बात करना अपने दैनिक दिनचर्या को पूरा करते हैं। लक्ष्मी साहनी अपने इस प्रतिभा के कारण कई बार उन्हें सम्मानित भी हुए हैं। </p>
<p>ऐसा माना जाता है कि देश में तक़रीबन तीन करोड़ से अधिक लोग दिव्यांग हैं। लेकिन उन दिव्यांगों में खेल-कूद की दुनिया से ताल्लुकात रखने वाले कितने खिलाड़िओ हैं, इसका आंकड़ा भारत सरकार के पास नहीं है। लेकिन 2024 पेरिस में सम्पन्न पैरा-ओलम्पिक खेल में भारत से 84 खिलाडी भाग लिए थे, जो अब तक ऐसे खेलों में भेजे गए खिलाड़ियों की संख्यां में सबसे अधिक थी। पेरिस पैरा-ओलम्पिक खेल में भारत को 29 पदक मिले थे, जिसमें सात स्वर्ण, 9 चांदी और 13 ताम्बे के थे। </p>
<p>वैसे आधिकारिक रूप से न सही, अन्तःमन से खेल की दुनिया से जुड़े खिलाड़ियों से लेकर अधिकारियों और राजनेताओं तक, सभी इस बात को स्वीकारते हैं कि भारत में दिव्यांग खिलाड़ियों के सामने हिमालय की चोटी की ऊंचाई जैसी चुनौतियाँ खड़ी होती हैं। मसलन, सुविधाओं और विशेष उपकरणों तक उनकी पहुँच सीमित है, भेदभाव उत्कर्ष पर होता है, वित्तीय सुविधायें नहीं के बराबर मिलती हैं और सरकारी नुमाईंदे की आँखों में तो वे सुहाते नहीं हैं। </p>
<p>पिछले महीने श्रीलंका के कोलंबो में आयोजित पीडी चैम्पियंस ट्रॉफी 2025 की विजेता भारतीय दिव्यांग क्रिकेट टीम, जिसने असाधारण कौशल स्थिति अनुरूप प्रदर्शन करते हुए टूर्नामेंट के फाइनल में इंग्लैंड को पराजित किया था, केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समावेशी खेल भागीदारी दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए दिव्यांग खिलाड़ियों को सहयोग देने की सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। </p>
<p><strong>उन्होंने कहा भी कि “माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने दिव्यांग खिलाड़ियों के सहयोग के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की है। अगर आप दिव्यांग हैं, तो इसका अर्थ यह नहीं कि आप देश को गौरवान्वित नहीं कर सकते&#8230; और आपकी जीत इसका प्रमाण है। भारतीय दिव्यांग क्रिकेट टीम ने चयन की कठोर प्रक्रिया से लेकर श्रीलंका में प्रदर्शन तक जो जुनून दिखाया है, वह आपकी अपार क्षमता को उजागर करता है।&#8221; डॉ. मांडविया इस बात को स्वीकारे थे कि पेरिस पैरालंपिक से लेकर पीडी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 तक दिव्यांग एथलीटों ने खेल के क्षेत्र में देश के लिए उपलब्धियां हासिल की। उन्होंने यह भी कहा था कि &#8220;हमारे &#8216;दिव्यांग&#8217; एथलीटों ने अपने प्रदर्शन से हमें गौरवान्वित किया है।</strong> </p>
<p>इतना ही नहीं, 2023 में, दिव्यांग खेलों के लिए अटल बिहारी प्रशिक्षण केंद्र खोले गए जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किये थे। उस समय यह कहा गया था कि यह पहल सभी के लिए खेल समावेशिता और पहुंच को बढ़ावा देने की हमारे देश की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। दिव्यांग खेलों के लिए अटल बिहारी प्रशिक्षण केंद्र विकलांग व्यक्तियों को खेल में समान अवसर प्रदान करने, उनकी प्रतिभा को बढ़ावा देने और विभिन्न खेल विषयों में उनकी भागीदारी को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम का प्रतिनिधित्व करता है।</p>
<figure id="attachment_6135" aria-describedby="caption-attachment-6135" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/Paira-2.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/Paira-2.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-6135" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/Paira-2.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/Paira-2-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/Paira-2-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/Paira-2-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/Paira-2-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6135" class="wp-caption-text">राष्ट्रीय एकलव्य सेना​ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष कश्यप​ के साथ साहनी</figcaption></figure>
<p><strong>लेकिन राष्ट्रीय एकलव्य सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष कश्यप, जिन्होंने साहिनी को अंतराष्ट्रीय मंच पर ले जाने का वचन दिया है, कहते हैं कि &#8220;हमें, यानी दिव्यांग खिलाड़ियों को) यह भी विस्वास दिलाया गया था कि खेलों में बाधाओं को पार करने और व्यक्तियों को उनकी शारीरिक क्षमताओं की परवाह किए बिना सरकार की नीतियां प्रेरित करने के लिए वचनबद्ध है। उसी वचनबद्धता का एक कदम था  दिव्यांग खेलों के लिए अटल बिहारी प्रशिक्षण केंद्र।  जिसमें कहा गया था कि यहाँ अत्याधुनिक सुविधा है जो विकलांग एथलीटों के प्रशिक्षण और पोषण के लिए समर्पित होगा। यहाँ दिव्यांग एथलीटों के लिए सर्वोत्तम संभव प्रशिक्षण वातावरण प्रदान करने के लिए विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचा और कोचिंग स्टाफ मौजूद होगा। इसमें दिव्यांग एथलीटों के लिए सर्वोत्तम संभव प्रशिक्षण वातावरण प्रदान करने के लिए विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचा और कोचिंग स्टाफ मौजूद होगा।</strong></p>
<p>कश्यप आगे कहते हैं कि &#8221; लेकिन सवाल यह है कि यहाँ तक भारत के गाँव से, कस्बों से, पंचायतों से, जिलों से दिव्यांग खिलाड़ी पहुंचेंगे कैसे? क्योंकि खिलाड़ियों और खेल की दशा और दिशा को निर्धारित करनेवाले अधिकारियों, पदाधिकारियों, नेताओं के बीच मानसिक रूप से, व्यावहारिक रूप से एक विशाल खाई है, जिसे आज की तारीख में दिव्यांग खिलाड़ी भरने की कूबत नहीं रखते हैं। </p>
<p>अटल बिहारी वाजपेयी दिव्यांग खेल प्रशिक्षण केंद्र- ग्वालियर (पूर्व में विकलांगता खेल केंद्र) भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा स्थापित एक स्वायत्त निकाय है। इस केंद्र को एमपी सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1973 दिनांक: 22.09.2021 के तहत एक सोसायटी के रूप में पंजीकृत किया गया है और इसकी गतिविधियों की देखरेख करने के लिए गवर्निंग बॉडी और कार्यकारी समिति गठित है। यह केंद्र निम्नलिखित लक्ष्य और उद्देश्यों के साथ कार्य करता है:-</p>
<p>* मानदंडों के अनुसार पूरी तरह से पहुंच के साथ पैरा खिलाड़ियों (पीडब्ल्यूडी) के लिए खेल के लिए एक अत्याधुनिक अंतर्राष्ट्रीय स्तर का उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करना।<br />
* विशेष खेल बुनियादी ढांचे का निर्माण करना ताकि पैरा खिलाड़ी केंद्र में कठोर और विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर सकें।<br />
* दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए दुनिया में अन्य जगहों पर उपलब्ध नवीनतम सुविधाओं के बराबर प्रशिक्षण सुविधाएं प्रदान करना।<br />
* अधिक संख्या में खेल गतिविधियों में दिव्यांगजनों की भागीदारी सुनिश्चित करना और उन्हें अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में प्रभावी ढंग से प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाना।<br />
* समाज में उनके एकीकरण को सुविधाजनक बनाने के लिए दिव्यांगजनों में आत्मविश्वास पैदा करने और अपनेपन की भावना विकसित करने में मदद करना। <br />
* मंत्रीमंडल ने केंद्र की स्थापना के लिए 34 एकड़ क्षेत्र में 151.16 करोड़ के बजट को मंजूरी दी है।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/Paira-5.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/Paira-5.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-6137" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/Paira-5.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/Paira-5-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/Paira-5-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/Paira-5-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/Paira-5-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p>साहनी कहते हैं: &#8220;मैं बहुत साधारण परिवार का रहने वाला हूं। बचपन से दोनों पैर तो नहीं थे, लेकिन सपना था कि मैं वह काम करें, जो ऐसी स्थिति में करना असंभव माना जाता है। मैंने पहले अपने गांव की छोटी बड़ी नदियों में प्रयास किया, मेरे कुछ मित्रों ने साथ दिया और मैं तैरना सीखा। वाराणसी के अस्सी घाट से बलिया तक का सफर गंगा नदी से साढ़े 17 घंटे में तैरकर रिकॉर्ड बनाया था। यही नहीं, एक मिनट में 50 मीटर तैराकी का मिसाल भी कायम किया था। लेकिन सभी प्रयास अपने स्तर से किये हैं। व्यवस्था की और से किसी भी प्रकार की कोई सहायता नहीं है, चाहे आर्थिक मदद हो, स्वास्थ्य दुरुस्त रखने के लिए खाने-पीने की बात है, प्रशिक्षण की सुविधा की बात है। चेन्नई, महाराष्ट्र, इलाहाबाद और पश्चिम बंगाल में आयोजित राष्ट्रिय खेलों में मैं अब तक सात पदक जीता हूँ, जिसमें पांच स्वर्ण पदक हैं, एक सिल्वर और एक ब्रॉन्ज।&#8221;</p>
<p>सरकारी योजनाओं के तहत, दिव्यांग भरण-पोषण अनुदान (दिव्यांग पेंशन) योजना के तहत कम से कम 40 प्रतिशत दिव्यांगता से प्रभावित 18 से अधिक आयु वर्ग के लोगों को उनके भरण-पोषण के लिए 500 रुपये और उस अवस्था से ग्रसित दिव्यांगजन को 2500 रुपये प्रति माह दिया जाता है। कृत्रिम अंग/ सहायक उपकरण योजना के तहत कम से कम 40 प्रतिशत दिव्यांगता से प्रभावित गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले व्यक्ति को कृत्रिम अंग/ सहायक उपकरण जैसे- ट्राई साइकिल, वैशाखी, व्हीलचेयर, कान की मशीन, वाकर, कैलिपर्स आर्टिफिशियल हाथ-पैर आदि निशुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं। इतना ही नहीं, प्रदेश सरकार ने दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए लक्ष्मण पुरस्कार और रानी लक्ष्मी बाई पुरस्कार की योजना शुरू की है. इस योजना के तहत, राज्य सरकार 31 खेलों में पुरुष खिलाड़ियों को लक्ष्मण पुरस्कार और महिला खिलाड़ियों को रानी लक्ष्मी बाई पुरस्कार से सम्मानित करती है। लेकिन यह सभी बातें कहाँ हैं? </p>
<p>सुभाष कश्यप, जिन्होंने साहनी को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर किसी भी हालत में ले जाने के लिए कृतसंकल्प हैं, कहते हैं: &#8220;वर्ण-व्यवस्था पर आज चाहे कितना भी विचार और संगोष्ठी हो जाय, आज भी हमारा समाज मछुआरे का समाज, विकास की मुख्यधारा में प्रवेश से वंचित है। ऐसी बात नहीं है कि हमारे समाज में ऐसे युवकों, युवतियों की किल्लत है, चतुर्दिक भरे-परे हैं; लेकिन सभी अवसर की तलाश में हैं। सभी चाहते हैं कि चाहे शिक्षा का क्षेत्र हो, या विज्ञानं का, खेल-कूद का हो या अधिकारी-पदाधिकारी बनने का, मछुआरे समाज के बच्चे-बच्चियां भी आगे बढ़ना चाहते हैं। लेकिन उन्हें अवसर नहीं मिलता। उनकी पहुँच आज भी मीलों दूर है और इसका दृष्टान्त है साहनी।&#8221;</p>
<p>कश्यप आगे कहते हैं कि &#8220;साहनी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने समाज को, जिला को, प्रदेश को और राष्ट्र को ऊँचा करना चाहते है। इसी उद्देश्य से विगत दिनों उससे मुलाकात किये। उसकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ नहीं है। आर्थिक स्थिति से कमजोर होने के कारण वह अपनी प्रतिभा को एक नई उड़ान नहीं दे पायेगा। इसलिए हम आगे आये। अंतराष्ट्रीय खेलों में उसकी भागीदारी के लिए जितने भी विधि-विधान हैं, हमारी कोशिश होगी, उसे पूरा करें। उसे वहां तक पहुँचाने के लिए जो भी आर्थिक व्यय होंगे (करीब 25+ लाख) हम खर्च करने को सज्ज हैं। उसकी िक्षा है कि वह इंग्लिश चैनल को पार कर इतिहास रचे, हम सभी मछुआरे समाज के लोग राष्ट्रीय एकलव्य सेना के तहत खड़े यहीं।&#8221;</p>
<p><strong>उधर साहनी का कहना है कि पिछले कई वर्षों में वह जिला स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर के नेताओं के पैर पकड़े हैं, निहोरा, विनती किये, ताकि उसके सपने को उड़ान मिले, लेकिन सबों ने आश्वासन देकर आगे निकल गए और वे वहीँ का वहीँ पड़े रहे। साहनी कहते हैं &#8220;कश्यप जी का सहयोग प्राप्त कर एक उम्मीद की लकीर दिखी है। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी को भी ईमेल किया हूँ और उनसे निवेदन किया हूँ कि मुझे इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए मार्ग प्रशस्त करें &#8211; मैं शरीर से दिव्यांग हूँ, परन्तु मानसिकता और मेहनत से राष्ट्रीय ध्वज को ऊँचा करना चाहता हूँ। </strong></p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/sports/an-appeal-to-prime-minister">एक दिव्यांग खिलाड़ी का देश के प्रधानमंत्री से प्रार्थना : मैं तिरंगा के ख़ातिर इंग्लिश चैनल तैर कर पार करना चाहता हूँ, मदद करें</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>यमुना के किनारे निगम बोध घाट पर लाखों आत्माओं का जमघट, चट-चट-फट-फट-चटाक-पटाक-फुस्स ध्वनियों के बीच &#8216;शव&#8217; और &#8216;शिव&#8217; का मिलाप</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/lakhs-of-souls-gathered-at-nigam-bodh-ghat-on-the-banks-of-yamuna</link>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 30 Dec 2024 11:01:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
		<category><![CDATA[death]]></category>
		<category><![CDATA[ganga river]]></category>
		<category><![CDATA[manikarnika]]></category>
		<category><![CDATA[manmohan singh]]></category>
		<category><![CDATA[nigambodh ghat]]></category>
		<category><![CDATA[prime minister]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>निगमबोध घाट (यमुना नदी के किनारे दिल्ली छोड़ पर) : शिव को श्मशान का मालिक माना गया है। &#8216;शव&#8217;, यानी पार्थिव शरीर का अंतिम स्थान &#8216;श्मशान&#8217; है। &#8216;शव&#8217; में जब छोटी इ की मात्रा लग जाती है, यानी जहाँ मनुष्य अथवा किसी भी जीव का अहंकारी रूपी शरीर का अस्त होता है, वहीँ शिव का अभ्युदय होता है। श्मशानों [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/lakhs-of-souls-gathered-at-nigam-bodh-ghat-on-the-banks-of-yamuna">यमुना के किनारे निगम बोध घाट पर लाखों आत्माओं का जमघट, चट-चट-फट-फट-चटाक-पटाक-फुस्स ध्वनियों के बीच &#8216;शव&#8217; और &#8216;शिव&#8217; का मिलाप</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>निगमबोध घाट (यमुना नदी के किनारे दिल्ली छोड़ पर) : शिव को श्मशान का मालिक माना गया है। &#8216;शव&#8217;, यानी पार्थिव शरीर का अंतिम स्थान &#8216;श्मशान&#8217; है। &#8216;शव&#8217; में जब छोटी इ की मात्रा लग जाती है, यानी जहाँ मनुष्य अथवा किसी भी जीव का अहंकारी रूपी शरीर का अस्त होता है, वहीँ शिव का अभ्युदय होता है। श्मशानों की अपनी एक ख़ास विशेषता होती है। बिना किस द्वेष के वह सबकी होती है। सभी शमशानों का राग, ताल, बोल, सुर, संगीत एक ही होता है। प्रत्येक श्मशानों की अपनी कहानियां होती हैं। प्रत्येक श्मशानों के लिए आगंतुक भी पूर्व से निर्धारित होते हैं। श्मशानों में धधकती चिताओं से निकलने वाली चट &#8211; चट &#8211; फट &#8211; फट -चटाक -फटाक -फुस्स जैसी ध्वनि को सभी लोग नहीं ग्राह्य कर सकते हैं।<br />
 <br />
<em>इस पृथ्वी पर श्मशान को एक बेहतरीन पाठशाला माना गया है जहाँ हर मनुष्य कुछ सीख सकता हैं। गौतम बुद्ध भी &#8216;भिक्षुक&#8217; होने के लिए, अपने शिष्यों को दीक्षा देने से पहले उन्हें न्यूनतम एक माह की अवधि के लिए अपने समीप के सबसे व्यस्त श्मशान में बैठकर देखने को कहते थे कि शरीर के साथ क्या हो रहा है। यह बात मेरे बाबूजी भी कहते थे कि श्मशानों की ध्वनि को, वातावरण में उपस्थित तेज को, पार्थिव शरीर से  ज्वालाओं को जैसे-जैसे वरन करते जाओगे, तुम्हारे इर्द-गिर्द एक ऐसी शक्ति का सृजन होगा जो तुम्हें अन्य मनुष्य से अलग कर देगा। कहते भी हैं कि समय, परिवर्तन, शक्ति, सृजन, संरक्षण और विनाश का प्रतिनिधित्व करता है श्मशान जहाँ एक तरफ काली का विभिन्न स्वरूप होता है, वहीँ शिव की उपस्थिति होती है। शास्त्रों के अनुसार, मातंगी, सिद्ध काली, धूमावती, आर्द्रपटी चामुण्डा, नीला, नील सरस्वती, घर्मटी, भर्कटी, उन्मुखी तथा हंसी ये सभी श्मशान-कालिका के भेद रुप हैं।</em> </p>
<p>बनारस पर कार्य करने के क्रम में विगत दस वर्षों में कितनी बार बनारस यात्रा किया, यह नहीं कह सकता हूँ। जितने बार बनारस पहुंचा दो श्मशानों की यात्रा करना अनिवार्य था। हरिश्चंद्र घाट और मणिकर्णिका घाट। इन घाटों में धधकती चिताओं से चट &#8211; चट &#8211; फट &#8211; फट -चटाक -फटाक -फुस्स जैसी ध्वनि को समझना अनिवार्य था। बनारस का दो श्मशान &#8211; हरिश्चंद्र घाट और मणिकर्णिका घाट &#8211; पर भले पार्थिव शरीरों का अंतिम संस्कार किया जाता है, लेकिन दोनों श्मशानों के लिए भी पार्थिव शरीरों का आगमन पूर्व सुनिश्चित होता है, अन्यथा हरिश्चंद्र घाट और मणिकर्णिका घाट की दूरी कितनी है? दोनों एक ही शहर में, एक ही गंगा प्रवाह के बीच एक किलोमीटर दूरी के अंदर ही अवस्थित हैं। लेकिन यहाँ भी मनुष्य के पार्थिव शरीरों का प्रारब्ध कार्य करता है। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/2-1-scaled.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/2-1-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1555" class="aligncenter size-full wp-image-5989" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/2-1-scaled.jpg 2560w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/2-1-300x182.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/2-1-1024x622.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/2-1-768x466.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/2-1-1536x933.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/2-1-2048x1244.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></a></p>
<blockquote><p>इस पृथ्वी के प्रत्येक श्मशानों पर प्रत्येक व्यक्ति का नाम अंकित है। किसे अपने देश की मिट्टी में मिलना है, अपने गाँव, शहर, नदी के किनारे स्थित श्मशानों में अपने शरीर को त्यागकर आगे बढ़ना है &#8211; यह सभी बातें पूर्व नियोजित हैं। बाबूजी तो यह भी कहते थे जीवन में कोई कितना भी अर्जित कर ले, सैकड़ों, हज़ारों एकड़ भूमि का मालिक हो ले, सैकड़ों बैंकों का मालिक हो ले, अंतिम विश्राम के लिए महज तीन फुट चौड़ा और छह फुट लम्बा जगह के साथ-साथ साढ़े सात मन लकड़ी ही पर्याप्त है एक शरीर को मिट्टी में मिलने के लिए। पुष्प-माला-सुगंध आधी तो मानव निर्मित योजनाएं हैं।</p></blockquote>
<p>कोई आठ दशक पहले बाबूजी मणिकर्णिका पर साधना करने के बाद कामाख्या में अपनी साधना पूर्ण किये थे। वे कहते थे जब भी किसी श्मशान में खड़े होगे तो पहले आत्मा से स्वयं को श्मशानों की देवी को सौंप दो, फिर चतुर्दिक देखो, तुम्हें यथार्थ दिखेगा, सच दिखेगा। धधकती चिताओं पर ही तुम्हे वस्त्र दिखेंगे। वे सभी साज-श्रृंगार से परिपूर्ण दिखेंगे। अनेकानेक आत्माएं उनके चतुर्दिक खड़े, वार्तालाप करते, हँसते, मुस्कुराते, प्रसन्न दिखेंगे। ऐसा लगेगा जैसे उनकी दुनिया अलग है &#8211; निश्छल, पवित्र, समर्पित। शेष जो दिखेंगे, वे नग्न दिखेंगे। बाबूजी की बातों में बहुत ताकत होती थी। </p>
<p><strong>आज शाहजहानाबाद जिसका निर्माण कोई पौने चार शताब्दी पहले 1649 में हुआ था, के सामने स्थित निगमबोध घाट के प्रवेश द्वार पर खड़ा होकर बाबूजी की बातें याद आ रही है। प्रवेश द्वार पर लिखा भी देख रहा हूँ : &#8220;मुझे यहाँ तक पहुँचाने वालों तुम्हारा धन्यवाद &#8211; आगे हम अकेले ही चले जायेंगे।&#8221; सामने मानव-दानव-पशु-पक्षियों के जीवित शरीर को पार्थिव बनाकर निकलने वाली आत्माएं यमुना के किनारे विचरण करते देख रहा हूँ। उस दृश्य का अवलोकन कर रहा हूँ जब मुग़ल साम्राज्य के आने के कई सौ साल पहले से यमुना की धारा भी दिल्ली सल्तनत की मिट्टी को स्पर्श करते आगे बढ़ती थी। वजह भी था। यह तो इंद्रप्रस्थ था। कहते हैं इसी यमुना के किनारे ब्रह्मा को भी ज्ञान प्राप्त हुआ था जब वे इस स्थान पर यमुना में स्नान किये थे । </strong></p>
<p>यह भी कहा जाता है कि इसी स्थान पर युधिष्ठिर ने नारायण को साक्षी मानकर नीली छतरी वाले महादेव की स्थापना किये थे। और यह भी सत्य है कि भारतीय पौराणिक कथाओं को, इतिहास को न तो मुगलों ने मिटाया और ना ही अंग्रेजों ने। बहुत ही सम्मान के साथ मुग़ल बादशाह अपने शाहजहानाबाद के चौदह द्वारों में एक द्वार निगमबोध घाट को समर्पित किया। विद्वान और विदुषी कहते हैं कि महाभारत काल में भी यमुना नदी के किनारे इसी स्थान पर निगमबोध घाट अपने अस्तित्व में था। ख़ैर। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/4-scaled.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/4-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1550" class="aligncenter size-full wp-image-5990" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/4-scaled.jpg 2560w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/4-300x182.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/4-1024x620.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/4-768x465.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/4-1536x930.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/4-2048x1240.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></a></p>
<p>दिल्ली सल्तनत को बाहर से बाँधने वाली सड़क रिंग रोड से यमुना की ओर जो रास्ता निगम बोध घाट की ओर बढ़ती है, मैं भी आगे बढ़ रहा हूँ। प्रवेश के साथ यमुना का पानी काफी दूर दिख रहा है। कौए, कुत्ते, चील, अन्य पक्षी यमुना के पानी में गिरे, परे, मरे, सड़े पदार्धों को भोज्य तलाश कर रहे हैं। आगे दाहिने हाथ कुछ &#8216;जीवित प्राणियों&#8217; के लिए कुर्सियां लगी दिख रही हैं और सामने उनके सम्बन्धियों, परिजनों का आत्मा रहित शरीर, यानी उनका पार्थिव शरीर रखा है। कई शरीरों के लिए चिताओं का साज-श्रृंगार हो रहा है। बीच में भैरव भी &#8216;काल&#8217; बनकर निरीक्षण कर रहे हैं। उन पार्थिव शरीरों के पास उनके पूर्वजों की आत्माएं भी दिख रही हैं। सभी के चेहरों पर प्रसन्नता दिख रही हैं। यह अलग बात है कि सामने मेज पर बैठे लोग दुखी दिख रहे हैं, लेकिन बाबूजी की बातों को याद कर श्मशान की भव्यता दिखाई दे रही हैं। </p>
<blockquote><p>वैसे तो श्मशान पर महादेव और अग्नि का साम्राज्य होता है, लेकिन कुछ कदम पर बाएं हाथ श्मशान का देख-रेख करने वाले अधिकारी की कुर्सी देख रहा हूँ जो शीशे के दरवाजे के अंदर है। यहीं से बाएं हाथ एक रास्ता जाती है जिसका अंत एक ऊँचे स्थान पर सजे सज्जा पर होता हैं। उस सय्या से निकलती अग्नि की ज्वाला चतुर्दिक प्रज्वलित कर रहा है। यहाँ आस पास महादेव की तस्वीरें लगी है और फिर आगे दाहिने तथा बाएं यमुना तक पर दर्जनों धधकती चिताएं दिख रही हैं। इन चिताओं के बीच जहाँ मैं खड़ा हूँ चतुर्दिक लाखों की तायदात में प्रसन्नचित आत्माएं पंक्तिबद्ध हैं। यमुना के किनारे, यमुना के उस पार, पानी में,  नौका पर सभी आत्माएं,  कुछ आम लोगों की,  कुछ शिक्षाविदों की,  कुछ व्यवसायियों की,  कुछ चिकित्सकों की,  कुछ अधिवक्ताओं की, कुछ न्यायमूर्तियों की, कुछ आर्थिक रूप से विपन्नता का जीवन जीने वालों की, यानी समाज के सभी वर्गों के लोगों की, आम आदमियों की आत्माएं हाथ में पुष्प लिए पंक्तिबद्ध दिख रही थी। यहाँ न पूंजीवाद है और ना ही साम्यवाद। समाजवाद की वास्तविक परिभाषा ये आत्माएं ही लिख रही हैं।</p></blockquote>
<p>महात्मा का पार्थिव शरीर इस निगमबोध घाट से कोई दो तीन किलोमीटर दूर दिल्ली गेट और यमुना नदी के बीच अग्नि को सुपुर्द किया गया था कोई 76 वर्ष पहले। उनके आस पास ही पंडित जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, लाल बहादुर शास्त्री, जगजीवन राम, राजीव गांधी, संजय गांधी, चरण सिंह, ललिता शास्त्री, जैल सिंह, शंकर दयाल शर्मा, देवी लाल, के आर नारायणन, चंद्रशेखर, पीवी नरसिम्हा राव, स्वामी वेंकटरमन, इंद्र कुमार गुजराल, अटल बिहारी वाजपेयी जैसे लोगों का पार्थिव शरीर अग्नि को सुपुर्द किया गया था। आज उन सभी लोगों की आत्माएं भी यहाँ पंक्तिबद्ध दिख रहे हैं। हो भी क्यों नहीं। दिल्ली सल्तनत का ही एक पति, एक पिता, एक शिक्षक, एक अधिकारी, एक अर्थशास्त्री, एक राजनेता, एक प्रधानमंत्री का पार्थिव शरीर रखा है जिसके सामने उसकी आत्मा हजारों आत्माओं के साथ खड़ी है। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/3-scaled.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/3-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1619" class="aligncenter size-full wp-image-5991" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/3-scaled.jpg 2560w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/3-300x190.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/3-1024x648.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/3-768x486.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/3-1536x972.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/3-2048x1296.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></a></p>
<p>यमुना किनारे दिल्ली सल्तनत में जंगे आज़ादी के कालखंड से अब तक मिट्टी में मिले पार्थिव शरीरों से निकली आत्माएं, चाहे यमुना के इस पार की हों या यमुना के उस पार की &#8211; सभी एक दूसरों का हाथ पकडे, बिना किसी &#8216;इज्म&#8217; के, यानि सोसिअलिज्म, कम्युनलिज्म आदि भेद-भाव के, मुस्कुराते विचरण करते देख रहा हूँ। बीच-बीच में नेहरू की निगाह, गांधी की निगाह, वाजपेयी जी की निगाह निगम बोध घाट पर शरीर के साथ बैठे महानुभावों की ओर मुड़ते देख रहा हूँ। आज इस शमशान की भूमि पर, यहाँ की लकड़ियों पर, यही की अग्नि पर, यहाँ के परिवेश पर भारतवर्ष के एक शिक्षक, अर्थशास्त्री, विशेषज्ञ, बेहतरीन इंसान और अंततः पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का &#8216;आत्मा रहित शरीर&#8217; का नाम लिखा है। यही उनका प्रारब्ध था। ऐसा लग रहा था कि  बनारस के मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर अग्नि के रास्ते महादेव के पास पहुंचे मानव शरीरों की आत्माओं का जीवित स्वरुप टकटकी निगाहों से डॉ. सिंह के पार्थिव शरीर की प्रतीक्षा कर रहा हो। मणिकर्णिका और हरिशचंद्र घाटों की आत्माओं के साथ-साथ निगम बोध गहत पर नश्वर शरीर को छोड़कर जाने वाली सभी आत्माएं डॉ. सिंह के सम्मान में प्रसन्न मुद्रा में स्वागतार्थ खड़े हों। सभी आत्माओं के चेहरों पर तेज था। </p>
<blockquote><p>आत्माएं आपस में वार्तालाप कर रही थीं।  कह रही थी &#8220;देखो जीवित लोग कैसे आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं और सिंह साहब आराम से सो रहे हैं। सिंह साहब एक शिक्षाविद थे। उन्हें क्या ? तभी नरसिम्हा राव की आत्मा सामने आयी और कही भी मैं भी राष्ट्र के लिए बहुत कुछ किया था, लेकिन मुझे भी लोग अनेक चीजों के लिए आरोपित किये। मेरे लिए में मेमोरियल की बात राजनीतिक उद्देश्य से की गई। अब इन जीवित लोगों को कौन समझाए कि हम सभी को वे नहीं देख सकते, लेकिन हम सभी उनके कारनामों को देख रहे हैं। वे सभी सोच रहे हैं वे ऐसे ही कुर्सियों से चिपके रहेंगे। उन्हें कौन समझाए कि उनके बदल में लालकिला के निर्माता शाहजहां और मुगलों के कई पीढ़ियों की आत्माएं बैठी हैं। निगमबोध घाट पर आत्माएं बात कर रही थी और कह रही थी भारत के चौदहवें प्रधानमंत्री डॉ. सिंह विचारक और विद्वान के रूप में प्रसिद्ध है। वह अपनी नम्रता, कर्मठता और कार्य के प्रति प्रतिबद्धता के लिए जाने जाते हैं। यमुना के किनारे निगमबोध घाट पर आत्माओं का जमघट, कह रही थी &#8216;शिक्षक की समाधि नहीं होती&#8217;, उनकी बातों को अमल करो, वही श्रद्धांजलि होगा। </p></blockquote>
<p>बहरहाल, सिंह साहब का पार्थिव शरीर को निगमबोध घाट तक साथ देने हेतु राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, सोनिया गांधी और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे। डॉ. सिंह की विधवा गुरशरण कौर, बड़ी बेटी उपिंदर सिंह, दमन सिंह और अमृत सिंह भी अपने पिता के अंतिम दर्शन हेतु उपस्थित थी।  डॉ. सिंह का जन्म 26 सितम्बर 1932 को अविभाजित भारत के पंजाब प्रान्त के एक गाँव में हुआ था। डॉ. सिंह ने वर्ष 1948 में पंजाब विश्वविद्यालय से मेट्रिक की शिक्षा पूरी की। उसके बाद उन्होंने अपनी आगे की शिक्षा ब्रिटेन के कैंब्रिज विश्वविद्यालय से प्राप्त की। सन 1957 में उन्होंने अर्थशास्त्र में प्रथम श्रेणी से ऑनर्स की डिग्री अर्जित की। इसके बाद 1962 में उन्होंने ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय के नूफिल्ड कॉलेज से अर्थशास्त्र में डी.फिल किया। उन्होंने अपनी पुस्तक “भारत में निर्यात और आत्मनिर्भरता और विकास की संभावनाएं” में भारत में निर्यात आधारित व्यापार नीति की आलोचना की थी। </p>
<figure id="attachment_5992" aria-describedby="caption-attachment-5992" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/1-fotor-2024123016727.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/1-fotor-2024123016727.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-5992" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/1-fotor-2024123016727.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/1-fotor-2024123016727-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/1-fotor-2024123016727-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/1-fotor-2024123016727-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/1-fotor-2024123016727-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5992" class="wp-caption-text">डॉ. मनमोहन सिंह का पार्थिव शरीर निगमबोध घाट पर अग्नि की प्रतीक्षा में</figcaption></figure>
<p>पंजाब विश्वविद्यालय और दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स में डॉ. सिंह ने शिक्षक के रूप में कार्य किया। इसी बीच में कुछ वर्षों के लिए उन्होंने यूएनसीटीएडी सचिवालय के लिए भी कार्य किया। इसी के आधार पर उन्हें 1987 और 1990 में जिनेवा में दक्षिण आयोग के महासचिव के रूप में नियुक्ति किया गया। 1971 में डॉ. सिंह वाणिज्य मंत्रालय में आर्थिक सलाहकार के रूप में शामिल हुए। 1972 में उनकी नियुक्ति वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार के रूप में हुई। डॉ. सिंह ने वित्त मंत्रालय के सचिव; योजना आयोग के उपाध्यक्ष; भारतीय रिजर्व बैंक के अध्यक्ष; प्रधानमंत्री के सलाहकार; विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। डॉ सिंह ने 1991 से 1996 तक भारत के वित्त मंत्री के रूप में कार्य किया जो स्वतंत्र भारत के आर्थिक इतिहास में एक निर्णायक समय था। आर्थिक सुधारों के लिए व्यापक नीति के निर्धारण में उनकी भूमिका को सभी ने सराहा है। भारत में इन वर्षों को डॉ. सिंह के व्यक्तित्व के अभिन्न अंग के रूप में जाना जाता है।</p>
<p>डॉ. सिंह को मिले कई पुरस्कारों और सम्मानों में से सबसे प्रमुख सम्मान है – भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण(1987); भारतीय विज्ञान कांग्रेस का जवाहरलाल नेहरू जन्म शताब्दी पुरस्कार (1995); वर्ष के वित्त मंत्री के लिए एशिया मनी अवार्ड (1993 और 1994); वर्ष के वित्त मंत्री के लिए यूरो मनी अवार्ड (1993), कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय (1956) का एडम स्मिथ पुरस्कार; कैम्ब्रिज के सेंट जॉन्स कॉलेज में विशिष्ट प्रदर्शन के लिए राइट पुरस्कार (1955)। डॉ. सिंह को जापानी निहोन किजई शिम्बुन एवं अन्य संघो द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। डॉ. सिंह को कैंब्रिज एवं ऑक्सफ़ोर्ड तथा अन्य कई विश्वविद्यालयों द्वारा मानद उपाधियाँ प्रदान की गई हैं। डॉ. सिंह ने कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों और सम्मेलनों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। उन्होंने 1993 में साइप्रस में राष्ट्रमंडल प्रमुखों की बैठक में और वियना में मानवाधिकार पर हुए विश्व सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया है।</p>
<figure id="attachment_5993" aria-describedby="caption-attachment-5993" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/2-fotor-2024123016659.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/2-fotor-2024123016659.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-5993" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/2-fotor-2024123016659.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/2-fotor-2024123016659-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/2-fotor-2024123016659-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/2-fotor-2024123016659-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/2-fotor-2024123016659-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5993" class="wp-caption-text">राजकीय सम्मान</figcaption></figure>
<p>अपने राजनीतिक जीवन में डॉ. सिंह 1991 से भारतीय संसद के उच्च सदन (राज्य सभा) के सदस्य रहे जहाँ वे 1998 से 2004 तक विपक्ष के नेता थे। डॉ. सिंह ने 2004 के आम चुनाव के बाद 22 मई 2004 को प्रधानमंत्री के रूप के शपथ ली और 22 मई 2009 को दूसरी बार प्रधानमंत्री बने। सिंह ने एक दशक से अधिक समय तक अभूतपूर्व वृद्धि और विकास का नेतृत्व किया। डॉ. सिंह के नेतृत्व में, भारत ने अपने इतिहास में सबसे अधिक वृद्धि दर देखी, जो औसतन 7.7% रही और लगभग दो ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन गई। डॉ. सिंह के सत्ता में आने के बाद भारत दसवें स्थान से उछलकर 2014 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया, जिससे लाखों लोगों का जीवन स्तर ऊपर उठा। डॉ. सिंह के भारत के विचार के मूल में सिर्फ़ उच्च विकास ही नहीं बल्कि समावेशी विकास और ऐसी लहरों का विश्वास था जो सभी नावों को ऊपर उठा सकें। यह विश्वास उन विधेयकों के पारित होने में निहित था, जिन्होंने नागरिकों को भोजन का अधिकार, शिक्षा का अधिकार, काम का अधिकार और सूचना का अधिकार सुनिश्चित किया। डॉ. सिंह की अधिकार-आधारित क्रांति ने भारतीय राजनीति में एक नए युग की शुरुआत की।</p>
<p>जुलाई 1991 में, डॉ. मनमोहन सिंह ने अपने बजट भाषण का समापन इन शब्दों के साथ किया, &#8220;दुनिया की कोई भी ताकत उस विचार को नहीं रोक सकती जिसका समय आ गया है। मैं इस सम्मानित सदन को सुझाव देता हूं कि दुनिया में एक प्रमुख आर्थिक शक्ति के रूप में भारत का उदय एक ऐसा ही विचार है।&#8221; यहीं से उनके भारत के विचार की शुरुआत हुई। यह वह दौर था जिसने भारत को आर्थिक महाशक्ति बनने की राह पर अग्रसर किया और डॉ. सिंह की एक नवोन्मेषी विचारक और प्रशासक के रूप में साख को भी चमकाया। हालांकि, डॉ. सिंह के विश्वासों और सार्वजनिक सेवा के प्रति उनके समर्पण की नींव उनके बीसवें दशक की शुरुआत और उनके करियर की शुरुआत में ही देखी जा सकती है। विकास के प्रति डॉ. सिंह की प्रतिबद्धता और उनकी अनेक उपलब्धियों को उन अनेक सम्मानों के माध्यम से मान्यता मिली है जो उन्हें प्रदान किए गए हैं। इनमें 1987 में पद्म विभूषण, 1993 में वित्त मंत्री के लिए यूरो मनी पुरस्कार, 1993 और 1994 में वित्त मंत्री के लिए एशिया मनी पुरस्कार और 1995 में भारतीय विज्ञान कांग्रेस का जवाहरलाल नेहरू जन्म शताब्दी पुरस्कार शामिल हैं।</p>
<figure id="attachment_5994" aria-describedby="caption-attachment-5994" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/3-fotor-2024123016755.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/3-fotor-2024123016755.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-5994" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/3-fotor-2024123016755.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/3-fotor-2024123016755-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/3-fotor-2024123016755-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/3-fotor-2024123016755-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/3-fotor-2024123016755-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5994" class="wp-caption-text">राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, रक्षामंत्री का अंतिम श्रद्धांजलि </figcaption></figure>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाँ कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह जी के निधन ने हम सभी के हृदय को गहरी पीड़ा पहुंचाई है। उनका जाना, एक राष्ट्र के रूप में भी हमारे लिए बहुत बड़ी क्षति है। विभाजन के उस दौर में बहुत कुछ खोकर भारत आना और यहां जीवन के हर क्षेत्र में उपलब्धियां हासिल करना, ये सामान्य बात नहीं है। अभावों और संघर्षों से ऊपर उठकर कैसे ऊंचाइयों को हासिल किया जा सकता है, उनका जीवन ये सीख भावी पीढ़ी को देता रहेगा। एक नेक इंसान के रूप में, एक विद्वान अर्थशास्त्री के रूप में और रिफॉर्म्स के प्रति समर्पित लीडर के रूप में उन्हें हमेशा याद किया जाएगा। एक अर्थशास्त्री के रूप में उन्होंने अलग-अलग स्तर पर भारत सरकार में अनेक सेवाएं दीं। एक चुनौतीपूर्ण समय में उन्होंने रिजर्व बैंक के गवर्नर की भूमिका निभाई।&#8221;<br />
व्हाइट हाउस से जारी बयान में कहा गया है कि &#8216;आज संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के बीच सहयोग का अभूतपूर्व स्तर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की रणनीतिक दृष्टि और राजनीतिक साहस के बिना संभव नहीं होता।&#8217; अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के निधन पर दुख जताते हुए उन्हें सच्चा राजनेता बताया। व्हाइट हाउस की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि भारत और अमेरिका के बीच आज जिस तरह का सहयोग है, वह मनमोहन सिंह के विजन के बिना संभव नहीं था। मनमोहन सिंह साल 2004 से 2014 तक 10 साल तक भारत के प्रधानमंत्री रहे। गुरुवार रात को 92 साल की उम्र में मनमोहन सिंह का निधन हो गया। </p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/lakhs-of-souls-gathered-at-nigam-bodh-ghat-on-the-banks-of-yamuna">यमुना के किनारे निगम बोध घाट पर लाखों आत्माओं का जमघट, चट-चट-फट-फट-चटाक-पटाक-फुस्स ध्वनियों के बीच &#8216;शव&#8217; और &#8216;शिव&#8217; का मिलाप</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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