सुब्रत रॉय सहारा की मृत्यु के 15 महीने बाद तिहाड़ के पूर्व अधिकारी का ‘बिस्फोटक’ दावा, कारावास में ‘एयर होस्टेस’ आती थी, केजरीवाल जानते थे, लेकिन ….

​सुब्रत रॉय 'सहारा' (दिवंगत)

नई दिल्ली : ईस्ट लंदन विश्वविद्यालय से बिजनेस लीडरशिप में डॉक्टरेट की उपाधि से अलंकृत​ थे सुब्रत रॉय ‘सहारा’।​ भारत ही नहीं, विश्व के कोने-कोने में बसे कोई 11+ लाख बेरोजगार लोगों का नियोक्ता थे सुब्रत रॉय। भारतीय क्रिकेट को दुनिया में शिखर पर ले जाने का श्रेय था उन्हें। ‘भारत भावना’ के माध्यम से राष्ट्र भक्ति और राष्ट्रीय चेतना जगाने वाले व्यक्ति भी थे सुब्रत रॉय। अपने जीवन काल में प्रदेशों की सरकारी विभागों में कार्य करने वाले चपरासी से लेकर अधिकारी, पदाधिकारी तक, विधान सभाओं, विधान परिषदों, लोकसभा और राज्य सभा में बैठने वाले सम्मानित विधायकों और सांसदों में (अपवाद छोड़कर) बिरले ही कोई व्यक्ति थे जो सुब्रत रॉय से ‘उपकृत’ नहीं थे।

लेकिन​ जब समय करवट लिया और सुब्रत रॉय का ‘दुर्दिन’ आया, तो सभी लोग कन्धा झुका दिए​, यह भी उतना ही सच है। यहाँ तक कि भय वश अपना पुत्र​ द्वय भी उन्हें मुखाग्नि नहीं दे पाया। भारत के गाँव के खेतों से देश के संसद तक​, अधिकारी से पदाधिकारी तक, नेता से अभिनेता तक, जो सहारा के चौखट पर ​’सहारा​’ मांगने पहुँचते थे, जीवन के अंतिम दिन में 75-वर्षीय वृद्ध को अकेला छोड़ दिया – अंतिम सांस के लिए। ​इतना ही नहीं, कोई चोर कहा, कोई बेईमान कहा, कोई भ्रष्ट कहा, कोई वुमेनाइजर शब्द से ​भी अलंकृत किया। लेकिन ​कोई भी इस बात को कोई अस्वीकार नहीं कर सकता कि सुब्रत रॉय के पास बहुत पैसे थे (चोरी, बेईमानी से ही सही) और अपने जीवन काल में उस पैसे से करोड़ों लोग लाभान्वित हुए​ जो आज भी सांस ले रहे हैं।

अपनी मृत्यु से दस वर्ष पूर्व जब सहारा के मुखिया के साथ सहारा के 11 लाख कर्मचारी 52 सेकेंड्स में समाप्त होने वाले राष्ट्रगान को 74 सेकेंड्स तक गाते रहे कीर्तिमान स्थापित करने के लिए​, उस दिन यह स्पष्ट हो गया था कि उनकी नज़रों में राष्ट्रगान का क्या मोल है? साल 2013 में सहारा के मुखिया की अगुआई में ‘भारत भावना दिवस’ मनाया गया था। उस समय सहारा के मुखिया मंच से कहे कि यह एक विश्व रिकॉर्ड होगा। उनके अनुसार मैदान में उपस्थित कर्मचारी ​के साथ-साथ सहारा के दफ्तरों में उपस्थित ​सभी कर्मचारी एक साथ राष्ट्रगान गाकर विश्व कीर्तिमान स्थापित करेंगे। ​

सुब्रत रॉय की मृत्यु के कोई पंद्रह महीने बाद एक तिहाड़ जेल के पूर्व जनसम्पर्क अधिकारी सुनील कुमार गुप्ता एक समाचार एजेंसी से बात करते हुए एक विस्फोटक दावा किया है कि सहारा एयरलाइंस की एयर होस्टेस जेल में सुब्रत रॉय के पास आती थीं और घंटों उनके साथ रहती थीं। साथ​ ही, कारावास के अंदर वे जो भी करते थे, उसकी जानकारी तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के साथ-साथ कई लोगों को थी, लेकिन वह कुछ नहीं किये। विगत दिनों नेटफ्लिक्स पर ‘ब्लैक वारंट’ श्रृंखला के असली हीरो ​सुनील कुमार गुप्ता की तिहाड़ जेल की यात्रा 1981 में शुरू हुई जब उन्होंने खाकी वर्दी पहनने के अपने सपने को पूरा करने के लिए भारतीय रेलवे की एक स्थिर नौकरी छोड़ दी। उनकी मामूली पृष्ठभूमि और शारीरिक रूप से मजबूत न होने के कारण, जैसा कि श्रृंखला में दिखाया गया है, उन्हें भारत की सबसे कुख्यात जेल में जेलर बनने से नहीं रोका, हालांकि उस समय जेल अधिकारियों के लिए उनके गुणों पर पारंपरिक रूप से जोर नहीं दिया जाता था।

​सुनील कुमार गुप्ता (दाहिने) और नेटफ्लिक्स का हीरो बाएं

​उन्होंने मंच से वहां उपस्थित कर्मचारियों​ को ‘भावनात्मक भाषण’ भी ​दिया। इस भारत भावना दिवस का प्रचार-प्रसार संवाद के विभिन्न माध्यमों में किया गया। उसी वर्ष बीबीसी विश्व सेवा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर एक सर्वेक्षण किया था। उस सर्वेक्षण में उस समय तक के सबसे ​प्रसिद्द दस गीतों का चयन करने के लिये विश्व के तक़रीबन 7000 गीतों को चुना गया था। इस सर्वेक्षण में विश्व के देशों के लोगों ने मतदान किया था। उस मतदान के बाद जो दस गीत चयनित हुए थे, दूसरे स्थान पर भारत का ‘राष्ट्रगीत’ था।

सहारा द्वारा आयोजित उस ‘भारत भावना दिवस’ में लोगों ने बहुत उत्साह के साथ राष्ट्रगान गाये थे। लेकिन गाते समय राष्ट्रगान गाने के लिए जो अनुशासित समय सीमा निर्धारित है, उसे नजरअंदाज करते निकलते गए। जिस राष्ट्रगान को गाने के लिए समय सीमा 52 सेकेंड्स है, सहारा के सम्मानित मुखिया के साथ-साथ सहारा के लोग, कर्मचारी 74 सेकेंड्स पहुँच गए। वह तो अन्तिम शब्द ‘जय हे !!” हो गया, अन्यथा वे रुकने का नाम नहीं लेते। उस राष्ट्रगान से विश्व कीर्तिमान स्थापित कर पाया सहारा अथवा नहीं, यह तो कीर्तिमान की गणना करने वाले सम्मानित लोग ही बताएंगे, न तो ‘सेबी’ डरा, न भारत सरकार के वित्तीय अन्वेषण विभाग, न अधिकारी, न न्यायालय।


मृत्योपरांत जो सुब्रत रॉय जीवन पर्यन्त दूसरों को, संस्था में कार्य करने वाले लोगों को, छोटे-बड़े सभी को ‘संस्कार’, चाहे पारिवारिक हो या सामाजिक, का पाठ पढ़ाये, ज्ञान बाँटें, लेकिन अपने दो-दो पुत्रों के होते हुए भी मरणोपरांत उनके पार्थिव शरीर को पुत्रों के हाथों मुखाग्नि नसीब नहीं हुआ। संस्कार देने-लेने में कहाँ चूक हुई ? मुंबई के एक निजी अस्पताल में लंबे समय से उनका इलाज चल रहा था। उस समय कंपनी के एक बयान में कहा गया है कि उनकी मृत्यु कार्डियोरेस्पिरेटरी अरेस्ट के कारण हुई। वे उच्च रक्तचाप और मधुमेह रोग से लंबे समय से जूझ रहे थे। तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें रविवार को मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

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​उसी दौर में, कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया ‘सेबी’ के अकाउंट में पड़ी 25163 करोड़ रुपये। ‘सेबी’ ​कहा कि उनकी मृत्यु से जारी मुकदमों/अन्वेषण पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। सहारा की स्थापना 1978 में हुयी। यह कहा जाता है कि आज सहारा इंडिया की कुल शुद्ध संपति 2,59,900 करोड़ से भी अधिक है। कोई आठ वर्ष पहले 2015 में फोर्ब्स ने लिखा था ‘सुब्रत राय की नेटवर्थ करीब 10 अरब डॉलर’ है। एक समय टाइम पत्रिका ने भारतीय रेलवे के बाद भारत में दूसरे सबसे बड़े नियोक्ता के रूप में प्रतिष्ठित किया था ​सहारा इंडिया को जिसमें बताया गया था कि लगभग 1.2 मिलियन लोग सहारा परिवार के साथ जुड़े हैं। सहारा समूह के पास 9 करोड़ से अधिक निवेशक हैं।

वैसे सुब्रत रॉय का जीवन कई उपलब्धियों के साथ साथ विवादों से भी भरा रहा। लोगों ने सहारा कंपनी की कई स्कीमों में अपना पैसा लगाया था, लेकिन लोगों के पैसों का भुगतान नहीं किया और मामला पटना हाईकोर्ट में चला गया। सहारा इंडिया के खिलाफ पटना हाईकोर्ट में मामला चल रहा था, लेकिन जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो सहारा प्रमुख को इस मामले में कोर्ट से राहत मिल गई। वे जमानत पर थे। सुब्रत रॉय को कई पुरस्कार और सम्मान प्राप्त भी मिले थे । उन्हें ईस्ट लंदन विश्वविद्यालय से बिजनेस लीडरशिप में डॉक्टरेट की उपाधि से भी अलंकृत किये गए थे।​

​बहरहाल, उनकी मृत्यु वर्ष में ही केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह केन्द्रीय पंजीयक – सहारा रिफंड पोर्टल का शुभारंभ किया। इस पोर्टल को सहारा समूह की 4 सहकारी समितियों – सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड, सहारायन यूनिवर्सल मल्टीपर्पज सोसाइटी लिमिटेड, हमारा इंडिया क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड और स्टार्स मल्टीपर्पज कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड के प्रामाणिक जमाकर्ताओं द्वारा दावे प्रस्तुत करने के लिए विकसित किया गया। अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि इस कार्यक्रम का महत्व इस दृष्टि से है कि जिन लोगों की गाढ़ी कमाई इन 4 सहकारी समितियों में फंसी है, उनके प्रति किसी का ध्यान नहीं गया। ऐसे मामलों में अक्सर मल्टी-ऐजेंसी सीज़र हो जाता है क्योंकि कोई ऐजेंसी निवेशक के बारे में नहीं सोचती।

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​शाह ने यह भी कहा कि इसके कारण कोऑपरेटिव सोसाटीज़ के प्रति बहुत बड़ी असुरक्षा और अविश्वास की भावना पैदा हो जाती है। कई बार घपले-घोटाले के आरोप लगते हैं और जो लोग इनमें निवेश करते हैं, उनकी पूंजी फंस जाती है, जैसे सहारा का उदाहरण सबके सामने है। कई सालों तक सुप्रीम कोर्ट में केस चला, ऐजेंसियों ने इनकी संपत्तियां और खाते सील कर दिए, और, ऐसा होने पर कोऑपरेटिव सोसायटीज़ की विश्वसनीयता समाप्त हो जाती है।​ शाह के अनुसार, पारदर्शी तरीके से निवेशकों को 5,000 करोड़ रूपए की राशि लौटाने की शुरूआत हो रही ​है। शाह ने कहा कि लगभग 1.78 करोड़ ऐसे छोटे निवेशकों, जिनका 30000 रूपए तक का पैसा फंसा है, को अपना पैसा वापस मिलेगा, ये एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।

​ज्ञातव्य हो कि माननीय उच्चतम न्यायालय ने 29 मार्च, 2023 के अपने आदेश में निर्देश दिया था कि सहारा समूह की सहकारी समितियों के प्रामाणिक जमाकर्ताओं के वैध बकाए के भुगतान के लिए “सहारा-सेबी रिफंड खाते” से 5000 करोड़ रुपये सहकारी समितियों के केन्द्रीय रजिस्ट्रार (सीआरसीएस) को हस्तांतरित किए जाएं। भुगतान की पूरी प्रक्रिया की निगरानी और इसका पर्यवेक्षण माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार माननीय सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर. सुभाष रेड्डी कर रहे हैं जिसमें उनकी सहायता के लिए वकील श्री गौरव अग्रवाल (Amicus Curiae) को नियुक्त किया गया है। इन चारों समितियों से संबंधित रिफंड प्रक्रिया में सहायता के लिए 4 वरिष्ठ अधिकारियों को ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (Officers on Special Duty) के रूप में नियुक्त किया गया है।

​बहरहाल, सुब्रत रॉय की मृत्यु के कोई पंद्रह महीने बाद एक तिहाड़ जेल के पूर्व जनसम्पर्क अधिकारी सुनील कुमार गुप्ता एक समाचार एजेंसी से बात करते हुए एक विस्फोटक दावा किया है कि सहारा एयरलाइंस की एयर होस्टेस जेल में सुब्रत रॉय के पास आती थीं और घंटों उनके साथ रहती थीं। यह सहारा समूह के दिवंगत संस्थापक को जेल में रहने के दौरान दी जाने वाली कई सुविधाओं में से एक थी। एएनआई को दिए गए एक साक्षात्कार में गुप्ता ने दावा किया कि दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को इन सबकी जानकारी थी, लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की।

सुब्रत रॉय के साथ अपने अनुभव को याद करते हुए गुप्ता ने कहा कि जब रॉय जेल में थे, तो उन्हें पहले एक नियमित जेल में रखा गया था। लेकिन उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा की आवश्यकता थी ताकि वे अपने होटलों के खरीदारों से बातचीत कर सकें और उसके बाद वे उधार दाताओं को पैसे वापस कर सकें। गुप्ता ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट के निर्देश में कहा गया था कि सब कुछ कानूनी तरीके से किया जाना चाहिए। लेकिन मैंने देखा कि बहुत सी अवैध चीजें हो रही थीं…इससे पहले, दिल्ली हाई कोर्ट ने मुझे बुलाया था और उसने कहा था कि जेल में रिश्वतखोरी और जबरन वसूली की कई शिकायतें हैं।”

गुप्ता के अनुसार, “उन्होंने डीजी जेल की अध्यक्षता वाली बैठकों में इस मुद्दे को उठाया था, लेकिन डीजी को लगा कि गुप्ता उनके खिलाफ शिकायत कर रहे हैं। फिर गुप्ता ने केजरीवाल से संपर्क किया और उन्हें उन सुविधाओं के बारे में बताया जो उन्हें लगता था कि उन्हें अवैध रूप से दी जा रही हैं।” पूर्व जेल अधिकारी ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर वीवीआईपी को बचाने का आरोप भी लगाया। गुप्ता के अनुसार, सहारा प्रमुख की सेल में शराब की बोतलें भी मिली थीं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने इस बारे में तत्कालीन सीएम अरविंद केजरीवाल से शिकायत की थी। लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की।

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सुब्रत रॉय को तिहाड़ जेल में दी गई सुविधाओं का खुलासा करते हुए सुनील गुप्ता ने कहा, “सुब्रत रॉय को जेल में नहीं रखा गया, उन्हें कोर्ट परिसर में रखा गया था। उन्हें अपने निवेशकों का काफी पैसा लौटाना था। सुब्रत रॉय ने कोर्ट से कहा था कि उन्हें अपनी संपत्तियां बेचनी होंगी और उनके ज्यादातर खरीदार यूरोप या पश्चिमी देशों में हैं। सुब्रत रॉय ने कोर्ट से कहा था कि उन्हें ऐसी जगह रखा जाए जहां मैं अपने खरीदारों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात कर सकूं।”

उन्होंने कहा कि सुब्रत रॉय को रात में परिसर में बंद कर दिया जाता ​था। जबकि अन्य कैदियों को रात होते ही अपने सेल में बंद कर दिया जाता ​है। सुब्रत रॉय ने कहा था कि उन्हें रात में कोर्ट परिसर में बाहर से बंद रखा ​जाए। कोर्ट ने उनकी मांग मान ​ली थी। इसलिए सुब्रत रॉय को बंद नहीं किया ​गया। उन्हें खाने-पीने की पूरी सुविधा दी ​गई। कोर्ट ने सुब्रत रॉय को एक निजी सचिव रखने की भी अनुमति दी ​थी। सुब्रत रॉय ने एक महिला सचिव को अपना सचिव बना रखा ​था। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने सुब्रत रॉय को सचिवालय की सुविधाओं का लाभ उठाने की अनुमति दी ​थी। लेकिन अब वे एयर होस्टेस बुला रहे ​थे।

सुनील गुप्ता ने कहा कि यह करीब छह महीने तक चलता रहा, लड़कियां आती ​रहीं। गुप्ता ने कहा, “मैं परेशान था और केजरीवाल के पास गया। मुझे इसकी कीमत चुकानी पड़ी। रॉय के खिलाफ कुछ नहीं किया गया और वे सुविधाओं का आनंद लेते रहे। उन्होंने कहा कि उन पर हमले भी हुए। गुप्ता ने कहा, “जब मैं सेवानिवृत्त हो रहा था, तो मुझे अनियमितताओं के संबंध में 15 पन्नों की चार्जशीट दी गई। चार-पांच साल बाद मुझे दोषमुक्त कर दिया गया, लेकिन मैं उन पांच सालों में बहुत परेशान रहा।”

उसी हफ्ते मेरे खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी गई। भारत में ऐसा होता है। यह चार्जशीट वित्तीय अनियमितताओं के लिए थी।” सुब्रत रॉय सहारा मार्च 2014 से मई 2016 तक तिहाड़ जेल में रहे। निवेशकों के करीब 24,000 करोड़ रुपये न लौटाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उन्हें गिरफ्तार किया गया था। “अरविंद केजरीवाल ने मुझसे पूछा कि क्या मैं इसका वीडियो शूट कर सकता हूं। मैंने उनसे कहा कि यह मेरे लिए सही नहीं होगा और वह यहां आकर खुद इसकी जांच कर सकते हैं। फिर उन्होंने कहा कि डीजी जेल एक आईपीएस अधिकारी हैं जो केंद्र सरकार के अधीन आते हैं और हमें नहीं पता कि हम उनके बारे में कुछ कर सकते हैं या नहीं​।​”

पूर्व पीआरओ ने दावा किया कि केजरीवाल ने शुरू में छापे में अवैध गतिविधियों का पता चलने पर कार्रवाई करने पर सहमति जताई थी, लेकिन बाद में पीछे हट गए। उन्होंने आरोप लगाया, “दो दिन बाद, डीजी ने मुझसे कहा कि मेरे (तत्कालीन सीएम) से संपर्क करना अच्छा नहीं था, और मैंने एक ‘गरीब आदमी’ को फंसाया… लेकिन इस बारे में कुछ नहीं किया गया।” उन्होंने आगे दावा किया कि जेल मंत्री ने जेल अधिकारियों को भविष्य में गलत व्यवहार के खिलाफ चेतावनी दी, “आखिरकार, कुछ भी ठोस नहीं किया गया। उन्होंने (सुब्रत रॉय सहारा) सुविधाओं का आनंद लेना जारी रखा। जेल प्रशासन उनके सामने झुक गया।” तिहाड़ जेल के पूर्व अधिकारी ने यह भी आरोप लगाया कि इन चिंताओं को उठाने के लिए उन्हें परेशान किया गया। उन्होंने कहा कि उन्होंने तत्कालीन उपराज्यपाल से संपर्क किया, जिन्होंने उन्हें अपने सचिव के पास जाने का निर्देश दिया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।

1 COMMENT

  1. Bastabikta kya hai wo bhagbaan jane. Jaise lekh ke madhyam aur jansamnya byakti se sunne ko milta tha ki! Health is loss Wealth is loss, Something is loss Nothing is loss, If carrector is loss everything is loss. Galat tarika se liya gaya labh ka tickta nahin hai. Prayas yahi hona chahiye ki samay ke sath imandari se kaam nilalte rahna chahiye. Usi se arjit sampati falta fulta badhiyan se hai. Jindgi men usse amanchain milta hai. Pranam 🙏🙏

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