ऐसी भी क्या नाराजगी श्रीमान ज्ञानेश कुमार जी ‘आम’ फुटपाथ को ‘खास’ बना दिए, भवन के सामने ‘मोर्चाबंदी’ कर दिए

​गोल डाकखाना की दिशा में पटेल चौक से दस कदम आगे बढ़ने पर महादेव रोड की ओर और जाती सड़क के दाहिने हाथ भारत का चुनाव आयोग का कार्यालय। सड़क के दूसरे तरफ दिल्ली पुलिस का मुख्यालय, जो पहले आईटीओ पर था, स्थित है। चुनाव आयोग का दफ्तर जितनी दुरी तक है, दिल्ली पुलिस द्वारा घेराबंदी में है। तस्वीर: संजय शर्मा

अशोक रोड, नई दिल्ली : विडम्बना देखिये। ‘निष्पक्ष चुनाव’ का विश्वास दिलाते भारत का चुनाव आयोग एक तरफ जहाँ आगामी महीने में देश के चार राज्यों – असम, केरल, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी – में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए आदेश दे दिया है। साथ ही, यह भी फरमान जारी कर दिया है कि  कोई भी मतदाता मतदान केंद्रों के अंदर मोबाइल फोन नहीं ले जा सकते हैं, ले जाने की अनुमति नहीं होगी, और मतदाताओं को उन्हें फोन बूथ के बाहर रखना होगा। वहीँ, नई दिल्ली में देश के पहले उप-प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के नाम से अंकित पटेल चौक के रास्ते, अपने दाहिने हाथ पटेल भवन को छोड़ते जब आप अशोक रोड पर आगे बढ़ेंगे, बाएं हाथ जाने वाली सड़क – महादेव रोड – के दाहिने हाथ लाल रंग वाला भारत का निर्वाचन भवन जहाँ से शुरू होता है, वहां से गोल डाकखाना की दिशा में परिसर के अंतिम सीमा तक दिल्ली पुलिस का ‘बैरिकेट’ तो लगा ही है, भारत का निर्वाचन आयोग ‘स्वयं’ सुरक्षा कवच में तो है ही, वहां पदस्थापित सुरक्षाकर्मियों को आदेश है – नो फोटोग्राफी – आप तस्वीर नहीं ले सकते हैं । ऐसी भी क्या नाराजगी श्रीमान ज्ञानेश कुमार जी ‘आम’ फुटपाथ को ‘खास’ बना दिए।

सुरक्षाकर्मियों का कहना है कि धेराबन्द परिसर के अंदर आकर किसी भी प्रकार की तस्वीर नहीं लिया जा सकता हैं, वीडियो नहीं बनाया जा सकता है। सुरक्षा की दृष्टि से ऐसा आदेश है। चाहे किसी अखबार या पत्रिका के लिए चुनाव आयोग पत्रकारों का बीट हो या फिर प्रदेश सरकार यह भारत के पत्र सूचना कार्यालय द्वारा निर्गत कार्डधारक पत्रकार हों, आदेश सभी पर लागू है। लेकिन पटेल चौक की दिशा में महादेव रोड से आगे या फिर दिल्ली पुलिस मुख्यालय भवन के तरफ से या फिर गोल डाकखाना की दिशा में चुनाव आयोग सीमा रेखा के बाद तस्वीर लेने के बारे में वे कुछ नहीं कहे। अब आवक-जावक यातायात की तस्वीर में दिल्ली पुलिस का बैरिकेड आता है तो क्या कर सकते हैं।” खैर। 

भारत के चुनाव आयोग के पहले आयुक्त सुकुमार सेन से लेकर श्रीमती वी एस रमा देवी (,सुकुमार सेन, कल्याण सुंदरम, एसपी सेन वर्मा, नागेंद्र सिंह, टी स्वामीनाथन, एसएल सकधर, आरके त्रिवेदी, आरएसवी पेरी शास्त्री और श्रीमती वीएस रमा देवी (1950-1990) के बारे में किताबों में ही पढ़ा, उन्हें देखा और मिला नहीं। लेकिन जब पटना की पत्रकारिता से कलकत्ता की पत्रकारिता के रास्ते दिल्ली की पत्रकारिता में प्रवेश लिए, पटेल चौक के आगे बाएं हाथ अशोक रोड पर स्थित भारत के चुनाव के कार्यालय में टीएन शेषन चुनाव आयुक्त के रूप में विराजमान हो गए थे। टीएन शेषन के बाद वर्तमान भारत के चुनाव आयुक्त की संख्या 17 वां है। इस बीच एमएस गिल, जेएम लिंगदोह, टीएस कृष्णमूर्ति, बीबी टंडन, एन गोपालस्वामी, नवीन चावला, एसवाई कुरैशी, वीएस संपत, हरिशंकर ब्रह्मा, नसीम जैदी, अचल कुमार ज्योति, ओम प्रकाश रावत, सुनील अरोड़ा, सुशिल चंद्रा, राजीव कुमार और ज्ञानेश कुमार मुख्य चनाव आयुक्त के कार्यालय में विराजमान हुए और अपनी पारी खेलकर नमस्कार करते निकल गए। 

नब्बे के दशक के बाद दिल्ली के अख़बार वालो, पत्रकारों, छायाकारों, चुनाव विशेषज्ञों, संपादक, राजनीतिक विश्लेषकों और समाज के अन्य संभ्रांत लोगों का भारत के मुख्य चुनाव आयुक्तों के साथ साथ अन्य आयुक्तों के बीच कभी भी, किसी भी विषय को लेकर ऐसी कोई रस्सा-कस्सी नहीं हुआ। यदि हुआ भी (याद नहीं है) तो उसे प्रतिबंधित नहीं किया गया। सम्मानित भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और उनके दो अन्य आयुक्त – डॉ. सुखबीर सिंह संधू  और डॉ. विवेक जोशी – इस विषय पर विचार जरूर करेंगे। सब समय है। लेकिन यह भी शोध का विषय है कि निर्वाचन आयोग के दफ्तर के ऐसा क्या हुआ था जो फोटोग्राफी के लिए इतनी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था कर दी गयी। 

चार राज्यों में विधानसभा चुनाव 

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बहरहाल, भारत का चुनाव आयोग विगत दिनों असम, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में विधानसभा चुनावों की तारीख घोषित कर दिया। असम, केरल और पुडुचेरी में एक चरण में 9 अप्रैल को चुनाव होंगे। जबकि, पश्चिम बंगाल में दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को और तमिलनाडु में एक चरण में 23 अप्रैल को मतदान होगा। इन सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश के चुनावों के नतीजे 4 मई को जारी किए जाएंगे। 

पांचों राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चुनाव की घोषणा होने के साथ ही तत्काल प्रभाव से आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। पांच राज्यों-एक केंद्र शासित प्रदेश में 17.4 करोड़ मतदाता हैं। यहां 824 स्थानों पर चुनाव होने हैं। 2021 में इन सभी पांच राज्यों के चुनाव का ऐलान 26 फरवरी को किया गया था। पिछली बार बंगाल में 8 चरणों में चुनाव हुए थे।जिन पांच राज्यों में चुनाव होने जा रहे हैं, उनमें SIR के बाद तमिलनाडु से सबसे ज्यादा वोटर्स के नाम कटे हैं। चुनाव आयोग ने अनुसार, 27 अक्टूबर 2025 को SIR प्रक्रिया शुरू होने के दौरान राज्य में कुल 6,41,14,587 वोटर थे। करीब चार महीने चली SIR में 74,07,207 लोगों के नाम हटाए गए हैं। राज्य में अब 5,67,07,380 मतदाता पंजीकृत हैं। 

पश्चिम बंगाल दूसरे नंबर पर है जहां करीब 58 लाख लोगों के नाम कटे हैं। फिर केरल में 8 लाख, असम में 2 लाख और पुडुचेरी में सबसे कम 77 हजार लोगों के नाम SIR प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची से हटाए गए। असम में स्पेशल रिवीजन कराया गया था।राजनीतिक विशेष्यों का मानना है कि 14 साल से CM ममता के सामने भाजपा के लिए मुख्य चुनौती है। अगर इस चुनाव में टीएमसी जीती तो ममता बनर्जी लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनेंगी। जयललिता के नाम पांच बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड है।294 सीटों वाली पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस सत्ता में है और यहां बहुमत का आंकड़ा 148 सीटों का है। वर्तमान में टीएमसी के पास 223 सीटें हैं। हालांकि राज्य में 2021 के चुनावों में तृणमूल कांग्रेस ने 213 और बीजेपी ने 77 सीटें जीती थी।राज्य में हुमायूं कबीर ने टीएमसी से बग़ावत कर अपनी नई पार्टी बना ली है और उन्होंने कुछ इलाकों में एक नया सियासी समीकरण बनाने की कोशिश की है। 

​अशोक रोड पर स्थित भारत का चुनाव आयोग का कार्यालय। तस्वीर: संजय शर्मा

उधर, पश्चिम बंगाल के चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद निर्वाचन आयोग ने राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती, गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीना, पुलिस महानिदेशक पीयूष पांडेय और कोलकाता पुलिस आयुक्त सुप्रतीम सरकार को हटा दिया। आयोग ने कहा कि हटाए गए अधिकारियों को चुनाव से जुड़ा कोई दायित्व नहीं दिया जाएगा। चुनाव तैयारियों की समीक्षा के बाद यह फैसला लिया गया। तृणमूल कांग्रेस पश्चिम बंगाल में निर्वाचन आयोग द्वारा वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के फेरबदल को “एक ऐसी पार्टी की घबराहट भरी प्रतिक्रिया” बताया, जिसे यह एहसास हो गया है कि वह लोकतांत्रिक तरीकों से चुनाव नहीं जीत सकती . हालाँकि, भारतीय जनता पार्टी और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने इस फेरबदल को “स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की दिशा में एक कदम” बताया। 

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जबकि, टीएमसी के प्रवक्ता कुनाल घोष का कहना है कि भाजपा पश्चिम बंगाल की जनता और मुख्यमंत्री के बीच के संबंध को कमजोर नहीं कर पाएगी। भाजपा या केंद्र सरकार राज्यपाल या वरिष्ठ अधिकारियों को बदल सकती है, लेकिन पश्चिम बंगाल के मतदाताओं की सोच नहीं बदल सकती। उनके अनुसार, “आप जिसे चाहें बदल लें, लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को नहीं बदल सकते। वह भारत की शेरनी हैं और जितना विपक्ष उन्हें निशाना बनाएगा, पार्टी उतनी ही मजबूत होकर उभरेगी।” आरोप लगाया कि आयोग ने राज्य की पहली महिला मुख्य सचिव को “मनमाने और अलोकतांत्रिक तरीके से” हटाया है। उन्होंने केंद्र सरकार पर मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं के लिए राज्य के 1.96 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बकाया राशि रोकने का भी आरोप लगाया। वहीं राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि ईमानदार और निष्पक्ष आईएएस व आईपीएस अधिकारियों को अब कानून-व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी दी गई है, जिससे शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित हो सके। 

तमिलनाडु में बीजेपी लगातार अपनी सियासी ताकत बढ़ाने के प्रयास में लगी है। यहां विधानसभा की 234 सीटें है। पिछले विधानसभा चुनाव में डीएमके गठबंधन ने 159 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि एआईएडीएमके को 75 सीटों पर जीत मिली थी। बीजेपी ने पिछले विधानसभा चुनाव में तमिलनाडु की 4 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की थी। जबकि कांग्रेस को 18 सीटों पर जीत मिली थी। तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन ने राज्य में डिलिमिटेशन को एक बड़ा मुद्दा बनाया है और केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि वो दक्षिण भारतीय राज्यों की राजनीतिक ताकत को कम करने की कोशिश कर रही है।  इस बार के चुनाव में तमिलनाडु का मुक़ाबला भी काफ़ी रोचक हो सकता है। 

आजादी के बाद लगभग दो दशक तक यहां कांग्रेस की सरकार रही। 1967 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस हार गई और इसके साथ ही राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव आया। 1967 के बाद से तमिलनाडु की राजनीति मुख्य रूप से एआईएडीएमके और डीएमके के बीच घूमती रही है। वर्तमान में एमके स्टालिन की अगुवाई में डीएमके की सरकार है, जो 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता में आई। पार्टी ने कांग्रेस, वीसीके और वामपंथी दल के साथ गठबंधन किया है। बीजेपी ने कई चुनावों में एआईएडीएमके जैसे दलों के साथ गठबंधन जरूर किया, लेकिन राज्य में उसकी अपनी सरकार नहीं रही। 

​अशोक रोड पर स्थित भारत का चुनाव आयोग का कार्यालय और घेराबन्दी । तस्वीर: संजय शर्मा

इसी तरह, केरल देश का इकलौता राज्य है, जहां आज भी वाम पार्टी सत्ता में है। यहां सत्ता बदलने की परंपरा रही है, लेकिन 2021 में वाम मोर्चा ने इस ट्रेंड को तोड़ते हुए लगातार दूसरी बार सरकार बनाई। कांग्रेस गठबंधन की कोशिश इस बार एंटी इनकम्बेंसी को कैश करानी की रहेगी। वहीं, भारतीय जनता पार्टी अब तक केरल में एक भी विधानसभा सीट जीत पाई है। पिछले लोकसभा चुनाव में यहां उसने त्रिशूर लोकसभा सीट जीती थी। इसके अलावा दिसंबर 2025 में भी भाजपा ने पहली बार त्रिवेंद्रम (तिरुवनंतपुरम) नगर निगम का चुनाव जीता।उन्होंने बताया कि आयोग ने युवाओं और पहली बार मतदान करने जा रहे मतदाताओं से भी संवाद किया। इसके अलावा चुनाव प्रक्रिया को सुचारू बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले बूथ लेवल ऑफिसर्स (बीएलओ) के काम की भी सराहना की गई। 

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केरल में विधानसभा की 140 सीटें हैं। 2021 में हुए चुनावों में वामपंथी गठबंधन लेफ़्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट ने जीत हासिल की थी। एलडीएफ ने इन चुनावों में 99 सीटों पर जीत हासिल की थी। जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन यूडीएफ़ को 41 सीटें मिली थी।राज्य में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 115 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए थे। हालांकि उसे किसी भी सीट पर जीत नहीं मिली थी और पार्टी के 84 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी। 

जबकि, असम में 10 साल से भाजपा की सरकार है।  126 सीटों वाली असम विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 20 मई, 2026 को खत्म होने वाला है। 2016 में 60 सीटों पर जीत हासिल कर पहली बार सत्ता में आई बीजेपी ने 2021 में भी एक जैसा ही प्रदर्शन किया था। बीजेपी ने कुल 93 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 60 सीट पर जीत दर्ज की और उसके नेतृत्व वाले एनडीए ने कुल 126 सीटों में से 75 सीटों पर जीत दर्ज की थी। हालांकि, 2016 के मुकाबले एनडीए को बीते चुनाव में 11 सीटों का घाटा हुआ था। असम में बीते कुछ दिनों से अल्पसंख्यकों का मुद्दा काफी सुर्खियों में रहा है। राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा कई बार अपने बयानों की वजह से विवादों में भी रहे हैं। 

बहरहाल, मुख्य चुनाव आयोग के अनुसार, ये पांचों राज्य और केंद्र शासित प्रदेश भौगोलिक और सांस्कृतिक रूप से एक-दूसरे से काफी अलग हैं। ऐसे में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण कराया गया, ताकि कोई भी योग्य मतदाता वोट देने से वंचित न रह जाए और कोई अयोग्य व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल न हो सके।उन्होंने कहा, “मैं युवाओं से कहना चाहता हूं कि अब आप एक बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने जा रहे हैं, मतदान का अधिकार। अपने वोट का इस्तेमाल गर्व और जिम्मेदारी के साथ करें। आपका वोट आपकी आवाज है। चुनाव का पर्व हम सबका गर्व है।” चुनाव आयोग के अनुसार इन पांच राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में कुल 17.4 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। यह संख्या ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, दक्षिण अफ्रीका, जर्मनी और कनाडा जैसे कई देशों की कुल आबादी के बराबर है। 

आयोग के अनुसार, इन चुनावों के लिए 824 विधानसभा सीटों पर मतदान कराया जाएगा। चुनाव प्रक्रिया को संपन्न कराने के लिए 2.19 लाख मतदान केंद्र बनाए गए हैं। इसके अलावा पूरे चुनाव को निष्पक्ष और सुचारू तरीके से कराने के लिए करीब 25 लाख चुनाव अधिकारी और कर्मचारी तैनात किए जाएंगे। वहीं, सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी आयोग ने व्यापक तैयारी की है। मुख्य चुनाव आयुक्त के मुताबिक चुनाव के दौरान करीब 8.50 लाख सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएंगे, ताकि मतदान शांतिपूर्ण और सुरक्षित माहौल में हो सके। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि मतदान के बाद तुरंत मतदान प्रतिशत की जानकारी जारी की जाएगी। मतदान केंद्रों के अंदर मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति नहीं होगी, और मतदाताओं को उन्हें फोन बूथ के बाहर रखना होगा। 

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