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	<title>parliament Archives - आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</title>
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	<description>आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</description>
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		<title>मुद्दत बाद दिल्ली के संसद मार्ग पर सांसद दिखे SIR के खिलाफ आंदोलन के तेवर में</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 11 Aug 2025 12:09:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[commission]]></category>
		<category><![CDATA[election]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>संसद मार्ग (नई दिल्ली) : कांग्रेस को पदच्युत करने के लिए जयप्रकाश नारायण के अगुवाई वाली &#8216;सम्पूर्ण क्रांति&#8217; (1974) से एक वर्ष पहले भारतीय जनता पार्टी के तत्कालीन नेता अटल बिहारी वाजपेयी साल 1973 में पेट्रोल और किरासन तेल में बेतहाशा वृद्धि के खिलाफ संसद में &#8216;बैलगाड़ी&#8217; से आये थे। शांतिपूर्ण प्रदर्शन था सत्ता के खिलाफ। आज [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>संसद मार्ग (नई दिल्ली) : कांग्रेस को पदच्युत करने के लिए जयप्रकाश नारायण के अगुवाई वाली &#8216;सम्पूर्ण क्रांति&#8217; (1974) से एक वर्ष पहले भारतीय जनता पार्टी के तत्कालीन नेता अटल बिहारी वाजपेयी साल 1973 में पेट्रोल और किरासन तेल में बेतहाशा वृद्धि के खिलाफ संसद में &#8216;बैलगाड़ी&#8217; से आये थे। शांतिपूर्ण प्रदर्शन था सत्ता के खिलाफ। आज शायद सम्पूर्ण क्रांति के बाद पहली बार गैर-राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की राजनीतिक पार्टियां कांग्रेस नेता राहुल गांधी की अगुवायी में नए-पुराने संसद भवनों के बीच से भारत के निर्वाचन आयोग तक के लिए शांतिपूर्ण मार्च किया &#8211; वोट चोरी के खिलाफ, जो सत्तारूढ़ पार्टी को मंजूर नहीं था। स्वाभाविक है रास्ते में अवरोध होगा, गिरफ्तार करना। </strong></p>
<blockquote><p>आज की घटना को &#8216;हाई ड्रामा&#8217; शब्द से अलंकृत कर अख़बार के पन्नों पर, टीवी के स्क्रीनों पर लिखें, कहें; आज मुद्दत बाद (शायद लोगों को याद भी न हो) सैकड़ों विपक्षी दलों के सांसदों ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और कथित ‘‘वोट चोरी’’ के खिलाफ संसद भवन परिसर से संसद मार्ग के रास्ते, अशोक रोड स्थित भारत का चुनाव आयोगतक मार्च निकला। विपक्षी दलों ने एकजुटता दिखाने के साथ ही यह भी कहा कि देश साफ-सुथरी मतदाता सूची चाहता है और चुनाव आयोग ‘चुराव आयोग’ नहीं हो सकता।</p></blockquote>
<p>हालांकि पुलिस ने उन्हें संसद मार्ग पर ही रोक दिया था, बाद में हिरासत में ले लिया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, राज्यसभा में विपक्ष के नेता एवं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा और कई विपक्षी सांसदों को हिरासत में लिया गया। विरोध प्रदर्शन में राकांपा (शरद पवार) के अध्यक्ष शरद पवार ने भी हिस्सा लिया। हिरासत में लिए गए नेताओं को संसद मार्ग थाने ले जाया गया, जहां पुलिस ने बाद में उन्हें छोड़ दिया। </p>
<p>उधर पटना में, बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, जिन्हें कथित तौर पर दो मतदाता पहचान पत्र रखने के लिए चुनाव आयोग ने नोटिस भेजा है। सिन्हा ने कहा कि वह संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करते हैं और चुनाव आयोग के सवालों का जवाब देंगे। सिन्हा ने कहा, &#8220;मैं देश के संविधान और सभी संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करता हूँ। मैं राहुल गांधी और तेजस्वी यादव जैसा नहीं हूँ।&#8221;</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/Rally-2.jpg"><img fetchpriority="high" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/Rally-2.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-7055" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/Rally-2.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/Rally-2-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/Rally-2-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/Rally-2-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/Rally-2-1536x1026.jpg 1536w" sizes="(max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p><strong>जबकि दिल्ली के संसद मार्ग पर राहुल गांधी ने कहा, ‘‘सच्चाई देश के सामने है। यह लड़ाई राजनीतिक नहीं है, यह संविधान को बचाने की लड़ाई है, ‘एक व्यक्ति एक वोट’ की लड़ाई है। हम एक साफ-सुथरी और सही मतदाता सूची चाहते हैं।’’ खरगे ने ‘कहा कि ‘‘भाजपा की कायराना तानाशाही नहीं चलेगी। ये जनता के वोट के अधिकार को बचाने की लड़ाई है। यह लोकतंत्र को बचाने का संघर्ष है। ‘इंडिया’ गठबंधन के साथी संविधान की धज्जियां उड़ाने वाली इस भाजपाई साजिश को बेनक़ाब करके ही रहेंगे। राहुल गांधी ने कहा, &#8220;&#8230;सच्चाई पूरे देश के सामने है।&#8221;</strong></p>
<p>संसद के मकर द्वार के सामने मार्च शुरू करने से पहले विपक्षी सांसदों ने राष्ट्रगान गाया। पुलिस ने उनका मार्च रोकने के लिए संसद मार्ग पर पीटीआई बिल्डिंग के सामने बैरिकेड लगा रहे थे। पुलिस द्वारा रोके जाने पर विपक्षी सांसद सड़क पर ही बैठ गए और ‘‘वोट चोरी बंद करो’’, ‘‘तानाशाही नहीं चलेगी’’, ‘‘मोदी सरकार हाय-हाय’’ जैसे नारे लगाने लगे। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पुलिस के रोके जाने के बाद बैरीकेड फांदकर दूसरी तरफ चले गए। उन्होंने कहा, ‘‘हम वोट बचाने के लिए बैरिकेड फांद रहे हैं। जिन लोगों ने वोट काटे हैं, उनके खिलाफ चुनाव आयोग को कार्रवाई करनी चाहिए। 18 हजार वोटों को मतदाता सूची से हटाया था, जिनकी सूची मैंने खुद दी है। आयोग ने हलफनामा मांगा, हमने दे दिया। हर किसी को मतदान करने का अवसर मिलना चाहिए।’’ </p>
<p>दिल्ली पुलिस के विपक्षी सांसदों को हिरासत में लेने पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि यह संविधान बचाने की लड़ाई है, इसलिए हमें साफ वोटर लिस्ट चाहिए। संवाददाताओं से बात करते मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, &#8221;अगर सरकार हमें चुनाव आयोग तक पहुंचने नहीं देती, तो हमें समझ नहीं आता उसे किस बात का डर है? इस मार्च में सभी सांसद थे, हम शांतिपूर्ण ढंग से मार्च निकाल रहे थे. हम चाहते थे कि चुनाव आयोग सभी सांसदों को बुलाता, हम मीटिंग करते और अपना-अपना पक्ष रखते, लेकिन चुनाव आयोग कह रहा है कि सिर्फ 30 मेंबर आएं। ऐसा कैसे संभव है?&#8221;</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/Rally-4.jpg"><img decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/Rally-4.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-7056" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/Rally-4.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/Rally-4-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/Rally-4-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/Rally-4-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/Rally-4-1536x1026.jpg 1536w" sizes="(max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p>अखिलेश यादव ने सोमवार को चुनाव आयोग पर उत्तर प्रदेश चुनाव सहित बड़े पैमाने पर हुई अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई करने में विफल रहने का आरोप लगाया और आरोप लगाया कि अधिकारियों ने सत्तारूढ़ भाजपा के साथ मिलकर &#8220;वोट लूटने&#8221; की कोशिश की। यादव ने कहा कि आयोग ने चुनावी कदाचार को लेकर उनकी पार्टी की बार-बार की गई शिकायतों को नज़रअंदाज़ किया है। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा, सागरिका घोष और सुष्मिता देव और कांग्रेस की संजना जाटव, जोथिमनी, पुलिस द्वारा आगे बढ़ने से रोके जाने पर पीटीआई भवन के बाहर लगे बैरिकेड्स पर चढ़ गए और चुनाव आयोग के खिलाफ नारे लगाए। अखिलेश यादव एसआईआर के खिलाफ नारे लगाए।</p>
<p><strong>प्रदर्शनकारी सांसदों के सामने एक बैनर था जिस पर लिखा था, &#8220;SIR+वोट चोरी=लोकतंत्र की हत्या&#8221;। प्रदर्शनकारी सांसदों द्वारा लिए गए एक अन्य बैनर पर लिखा था, &#8220;SIR &#8211; लोकतंत्र पर वार&#8221;। सांसदों ने चुनाव आयोग और सरकार के बीच मिलीभगत का आरोप लगाने वाले पोस्टरों के साथ-साथ &#8220;SIR पर छुपी क्यों&#8221; लिखे हुए पोस्टर भी लिए हुए थे। कई सांसदों ने &#8220;वोट चोरी&#8221; का आरोप लगाते हुए पोस्टर और तख्तियां भी ले रखी थीं, यह आरोप राहुल गांधी ने लगाया था, लेकिन चुनाव आयोग ने इसका खंडन किया था।</strong></p>
<p>कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि संसद के ठीक बाहर लोकतंत्र पर &#8220;हमला और हत्या&#8221; की जा रही है, क्योंकि विपक्षी सांसदों को चुनाव आयोग कार्यालय तक विरोध मार्च निकालने से रोक दिया गया। चुनाव आयोग से हमारी मांग बिल्कुल साफ़ थी, सभी विपक्षी सांसद शांतिपूर्ण मार्च निकाल रहे हैं। मार्च के अंत में हम सामूहिक रूप से SIR और अन्य मुद्दों पर एक ज्ञापन सौंपना चाहते हैं। हमने किसी प्रतिनिधिमंडल की मांग नहीं की थी। भाषा साफ़ थी, सभी विपक्षी सांसद सामूहिक रूप से चुनाव आयोग को एक ज्ञापन सौंपना चाहते हैं। अब हमें निर्वाचन सदन तक पहुँचने की भी अनुमति नहीं है, हमें पीटीआई भवन में ही रोक दिया गया है। संसद के ठीक सामने लोकतंत्र पर हमला हो रहा है, लोकतंत्र की हत्या की जा रही है। चुनाव आयोग का यह बहुत ही चालाक और बेबाक जवाब है।&#8221;</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/Rally-7.jpg"><img decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/Rally-7.jpg" alt="" width="2043" height="1094" class="aligncenter size-full wp-image-7057" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/Rally-7.jpg 2043w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/Rally-7-300x161.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/Rally-7-1024x548.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/Rally-7-768x411.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/08/Rally-7-1536x823.jpg 1536w" sizes="(max-width: 2043px) 100vw, 2043px" /></a></p>
<p>आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह भी मार्च का हिस्सा बने। आप ने हाल में ‘इंडिया’ गठबंधन से अलग होने की घोषणा की थी। सांसदों ने सिर पर सफेद रंग की टोपी पहन रखी थी जिस पर ‘एसआईआर’ और ‘वोट चोरी’ लिखा था तथा उन पर लाल रंग के क्रॉस का निशान भी था। राहुल गांधी नारेबाजी कर रहे सांसदों को पानी की बोतल वितरित करते हुए देखे गए। उधर, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोग दल देश में अराजकता पैदा करना चाहते हैं तथा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी संविधान विरोधी गतिविधियों में लिप्त लोगों के नेता बन गए हैं। </p>
<p>राहुल गांधी द्वारा मतदाता सूची में कथित धांधली का आरोप लगाए जाने और इस संबंध में कुछ खुलासे करने का दावा किए जाने के बाद विपक्षी दलों का यह पहला विरोध प्रदर्शन है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बेंगलुरु के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र के आंकड़े सामने रखते हुए सात अगस्त को आरोप लगाया था कि मतदाता सूची में हेरफेर करके ‘‘वोट चोरी’’ का मॉडल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को फायदा पहुंचाने के लिए लागू किया गया है। उन्होंने दिल्ली में संवाददाताओं के समक्ष महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र के मतदाता सूची के आंकड़े प्रस्तुत किए थे। राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि बेंगलुरु मध्य लोकसभा सीट के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में 1,00,250 मतों की चोरी की गई जबकि यह सीट पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 32,707 मतों के अंतर से जीती थी।</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/politics/mp-march-to-election-commission">मुद्दत बाद दिल्ली के संसद मार्ग पर सांसद दिखे SIR के खिलाफ आंदोलन के तेवर में</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>&#8220;मैं ही सही हूँ, बाकी सब गलत है &#8211; यह लोकतंत्र नहीं है।​ यह अहंकार है। यह उद्दंडता है​&#8221;, अपने अंतिम भाषण में धनकड़ &#8216;प्रधानमंत्री का नाम तक नहीं लिया&#8221;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 22 Jul 2025 08:02:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
		<category><![CDATA[dhankad]]></category>
		<category><![CDATA[narendra modi]]></category>
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		<category><![CDATA[prime minister]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>रायसीना पहाड़, नई दिल्ली : ​रुद्राक्ष के माला में 108 दाना होता है, बहुत शुभ माना जाता है। लेकिन भारतीय संसद से पचास कदम दूर 108-चर्च रोड का नया आवास भारत के तत्कालीन उप-राष्ट्रपति जगदीप धनकड़ के लिए &#8216;खास&#8217; नहीं बन पाया। इस भवन में 110 दिन रहने के बाद धनकड़ &#8216;पूर्व-उप-राष्ट्रपति&#8217; हो गए। वास्तु [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/dhankar-did-not-even-take-the-name-of-the-prime-minister-in-his-last-speech">&#8220;मैं ही सही हूँ, बाकी सब गलत है &#8211; यह लोकतंत्र नहीं है।​ यह अहंकार है। यह उद्दंडता है​&#8221;, अपने अंतिम भाषण में धनकड़ &#8216;प्रधानमंत्री का नाम तक नहीं लिया&#8221;</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>रायसीना पहाड़, नई दिल्ली : ​रुद्राक्ष के माला में 108 दाना होता है, बहुत शुभ माना जाता है। लेकिन भारतीय संसद से पचास कदम दूर 108-चर्च रोड का नया आवास भारत के तत्कालीन उप-राष्ट्रपति जगदीप धनकड़ के लिए &#8216;खास&#8217; नहीं बन पाया। इस भवन में 110 दिन रहने के बाद धनकड़ &#8216;पूर्व-उप-राष्ट्रपति&#8217; हो गए। वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में भारत के कोई भी उपराष्ट्रपति अपना आवास बनाने से पूर्व 108 बार सोचेंगे अवश्य। जिस सम्मान के साथ इस आवास में धनकड़ आये थे, शायद उस सम्मान के साथ वे शायद नहीं निकले। यह बात धनकड़ तो जानते ही होंगे, &#8216;वे&#8217; भी &#8216;भिज्ञ&#8217; होंगे ही। </strong></p>
<p><em>रायसीना पहाड़ पर अभी ​भारतीय राजनीति के इतिहास का पन्ना गरम है। वजह भी है &#8216;क्षणभर में ​उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ का &#8216;पूर्व-उपराष्ट्रपति&#8217; होना। स्वतंत्र भारत के राजनीतिक इतिहास में धनकड़ तीसरे उपराष्ट्रपति हैं जो अपने कार्यकाल के दौरान ही राष्ट्रपति को अपना त्यागपत्र सौंपे। वैसे रायसीना पहाड़ पर &#8216;अचानक की इस घटना पर शोध जारी है &#8211; क्या हुआ? क्यों ऐसा निर्णय लिए? किसने उन्हें मजबूर किया? देखने में तो ऐसा नहीं लग रहा था कि त्यागपत्र का कारण उनका स्वास्थ्य हो सकता है? कहीं को फोन पर संवाद आया और वे निर्णय ले लिए? या फिर कोई &#8216;ऊपर से अपना संवाद वाहक भेजकर उन्हें ऐसा करने का आदेश दिया? अब कौन उपराष्ट्रपति होंगे? कौन-कौन लोग प्रबल दावेदार हैं ? क्या बिहार की राजनीति पर कब्ज़ा करने के लिए नीतीश कुमार को 108-चर्च रोड में आवास दिया जाएगा? क्या आदित्य योगीनाथ को उत्तर प्रदेश से यहाँ लाया जायेगा? क्या जम्मू कश्मीर से मनोज सिन्हा को बुलाया जायेगा? क्या महिला सशक्तिकरण के खातिर उपराष्ट्रपति के पद पर वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण को पदस्थापित किया जायेगा? मंत्रिमंडल का भी विस्तार होने का समय है। </em></p>
<blockquote><p>कई लोग यह कह रहे हैं कि सेन्ट्रल विस्टा क्षेत्र में महान स्वतंत्रता सेनानी, स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षामंत्री, जामिया मिलिया इस्लामिया, इंडियन काउन्सिल फॉर कल्चरल रिलेशंस के अलावे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान​, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के संस्थापक भारत रत्न मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के नाम से अंकित 6​-मौलाना आज़ाद ​मार्ग से 108-चर्च रोड का आवास वास्तु के हिसाब से गंवारा नहीं हुआ धनकड़ साहब को । विगत 3 अप्रैल को उपराष्ट्रपति संसद भवन परिसर के पास चर्च रोड स्थित अपने नए आधिकारिक आवास में ​आये थे। उनका सचिवालय भी &#8216;उपराष्ट्रपति एन्क्लेव&#8217; में स्थानांतरित हो गया ​था ।​ खैर। </p></blockquote>
<p><strong>आर्यवर्तइण्डियननेशन.कॉम अनेकों लोगों से गुफ्तगू किया। &#8220;स्वास्थ्य&#8221; कोई कारण नहीं हो सकता है &#8220;देश के शीर्षस्थ पदों में राष्ट्रपति के बाद उप-राष्ट्रपति के पद से इस्तीफा देना। कुछ तो &#8220;विशेष&#8221; कारण है, अथवा &#8220;कोई तो विशेष व्यक्ति है&#8221; जिसे शायद कोई तो है रायसीना पहाड़ पर जिन्हें धनकड़ के शब्द हजम नहीं हुए। ​त्यागपत्र से पांच घंटे पहले धनकड़ 23 जुलाई, 2025 को एक दिवसीय दौरे पर जयपुर, राजस्थान जाएंगे​ की जानकारी पत्र सूचना कार्यालय दिया। अपनी इस​यात्रा के दौरान, ​उपराष्ट्रपति​ जयपुर​ स्थित​ रामबाग पैलेस में ​कन्फेडरेशन ऑफ़ रियर एस्टेट डेवेलपर्स ऑफ़ इंडिया, राजस्थान की ​नव-निर्वाचित समिति​ के सदस्यों से संवाद करेंगे।​ ​पांच घंटे के बीच में ही अचानक ऐसा क्या हुआ कि उन्हें अपने पद से त्यागपत्र देना पड़ा वह भी &#8220;स्वास्थ्य को प्राथमिकता&#8221; देकर। उनके पत्र में लिखा था, &#8220;स्वास्थ्य सेवा को प्राथमिकता देने और चिकित्सीय सलाह का पालन करने के लिए, मैं भारत के उपराष्ट्रपति पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देता हूँ।&#8221; लेकिन इन विगत दिनों में धनकड़, जैसा कि सूत्रों का कहना है, किसी भी चिकित्सक से नहीं मिले हैं और ना ही उन्हें सलाह दिया गया है &#8211; कम काम करें। </strong> </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-7.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-7.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-6991" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-7.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-7-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-7-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-7-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-7-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p>जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा था: &#8220;मैं सही समय पर, अगस्त 2027 में, ईश्वरीय कृपा के अधीन, सेवानिवृत्त हो जाऊँगा।&#8221;​ 14वें उपराष्ट्रपति के रूप में श्री धनखड़ का पाँच वर्षीय कार्यकाल 10 अगस्त, 2027 को समाप्त होना था।​ भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए द्वारा उपराष्ट्रपति चुने जाने से पहले, उन्होंने 2019 से 2022 तक पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में कार्य किया। वैसे यह भी कहा जाता है कि धनखड़ की हाल ही में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में एंजियोप्लास्टी हुई थी।​ </p>
<p>वीवी गिरि और आर वेंकटरमन के बाद धनकड़ अपने कार्यकाल के दौरान इस्तीफा देने वाले भारत के तीसरे उपराष्ट्रपति हैं। हालाँकि, गिरि और वेंकटरमन ने राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था।​ लेकिन धनकड़ के साथ बात कुछ और है। नियमों के अनुसार, उपराष्ट्रपति पद के लिए अगले छह महीनों के भीतर चुनाव कराना आवश्यक है। अपने &#8216;बेबाक बयानों&#8217; के कारण कई बार सुर्खियां में रहे। उन पर राज्यसभा में पक्षपात का आरोप भी लगाया गया था। </p>
<blockquote><p>चलिए कुछ शब्दों पर शोध करते हैं। अपने त्यागपत्र से तक़रीबन 48-घंटा पहले धनकड़ राज्यसभा के आठवें बैच के प्रतिभागियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते कहा था: “हमें दृढ़ रहना होगा। हमें अपने दृष्टिकोण पर विश्वास करना होगा। लेकिन हमें दूसरे के दृष्टिकोण का भी सम्मान करना होगा। अगर हम अपने दृष्टिकोण पर विश्वास करते हैं और सोचते हैं, &#8216;मैं ही सही हूँ और बाकी सब गलत हैं&#8217; &#8211; यह लोकतंत्र नहीं है। यह हमारी संस्कृति नहीं है। यह अहंकार है। यह उद्दंडता है। हमें अपने अहंकार पर नियंत्रण रखना होगा। हमें अपनी उद्दंडता पर नियंत्रण रखना होगा। हमें यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि दूसरा व्यक्ति अलग दृष्टिकोण क्यों रखता है &#8211; यही हमारी संस्कृति है।&#8221;</p></blockquote>
<p>&#8220;मैं ही सही हूँ, बाकी सब गलत है &#8211; यह लोकतंत्र नहीं है। यह हमारी संस्कृति नहीं है। यह अहंकार है। यह उद्दंडता है। हमें अपने अहंकार पर नियंत्रण रखना होगा। हमें अपनी उद्दंडता पर नियंत्रण रखना होगा,&#8221; &#8211; ये शब्द किसे ख़राब लग सकता है?  यह गहन शोध का विषय है आखिर धनकड़ अपने मस्तिष्क में किस मान्यवर या माननीया की तस्वीर को रखकर कहे थे। इससे भी बड़ी बिडम्बना यह है कि अपने कार्यकाल के दौरान शायद ही कोई भाषण रहा होगा जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार और मोदी के कार्यों का उल्लेख नहीं किया हो। जिस प्रकार भाजपा या मोदी के मंत्रिमंडल के अन्य सदस्य करते हैं। लेकिन राज्यसभा के आठवें बैच के प्रतिभागियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह भाषण में &#8216;एक शब्द भी प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी अथवा उनकी सरकार के कार्यों के बारे में जिक्र नहीं किया।</p>
<figure id="attachment_6992" aria-describedby="caption-attachment-6992" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-6992" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6992" class="wp-caption-text">उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ग्रहण करते</figcaption></figure>
<p>धनकड़ टेलीविजन पर चर्चा कार्यक्रमों में झलकती राजनीतिक दलों की कटुता की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा था: “प्रत्येक राजनीतिक दल का नेतृत्व परिपक्व होता है। सभी राजनीतिक दल, चाहे वह बड़ा हो या छोटा, राष्ट्रीय विकास के लिए प्रतिबद्ध होता है और इसलिए युवाओं का कर्तव्य है कि वे इस मानसिकता को सुनिश्चित करें। यह विचार प्रक्रिया सोशल मीडिया में आनी चाहिए और एक बार जब आपको हमारी टेलीविजन चर्चाएं सुखदायक, सकारात्मक और आकर्षक लगेंगी, तो कल्पना कीजिए कि कितना बड़ा बदलाव आ सकता है &#8211; बस एक पल के लिए ध्यान दीजिए।&#8221; इन शब्दों में देश के उपराष्ट्रपति होने के नाते &#8216;प्रत्येक राजनीतिक दाल का नेतृत्व परिपक्क होता है&#8217;, किसके तरफ &#8216;इशारा था&#8217;, और &#8216;किसे इन शब्दों से नसीयत देना चाहते थे&#8217;, जिसका उन्हें &#8216;पदत्याग&#8217; करने से करना पड़ा। कोई तो है, कुछ तो है।  </p>
<p><strong>इस महाशय या माननीया के तरफ शब्दों से इशारा करते धनकड़ ने कहा कि &#8220;हम आमतौर पर क्या देखते हैं? हम क्या सुनते हैं? क्या यह कानों को थका नहीं देता? हमारे कान तो थक गए हैं ना? भाई, ऐसा क्यों है? हम एक महान संस्कृति से आते हैं। हमारी विचारधारा का एक आधार है। हमारे विचारों में मतभेद हो सकते हैं &#8211; हमारे विचारों में भिन्नता हो सकती है &#8211; लेकिन हमारे दिलों में कटुता कैसे हो सकती है? हम भारतीय हैं। हमारी संस्कृति हमें क्या सिखाती है? अनंतवाद &#8211; अंतहीन संवाद में विश्वास। अनंतवाद का क्या अर्थ है? इसका अर्थ है चर्चा और बहस। चर्चा और बहस का क्या अर्थ है? इसका अर्थ है अभिव्यक्ति। और अभिव्यक्ति का अर्थ है &#8211; अपने विचारों को खुलकर कहें, लेकिन अपनी ही राय पर इतना आश्वस्त न हो जाएँ कि आप उस पर विश्वास कर लें और यह मान लें कि अही अंतिम और पूर्ण सत्य है। यह मत मानिए कि किसी और का दृष्टिकोण आपसे अलग हो ही नहीं सकता।”</strong></p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-5.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-5.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-6995" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-5.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-5-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-5-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-5-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-5-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p>उसी उद्घाटन संवाद में धनकड़ ने कहा था कि “हममें मर्यादा और परस्पर सम्मान की पूर्ण भावना होनी चाहिए — और यही हमारी संस्कृति की मांग है। अन्यथा हमारी विचार प्रक्रिया में एकता नहीं हो सकती… विश्वास कीजिए, अगर राजनीतिक संवाद उच्च स्तर पर हो, अगर नेता अधिक बार मिलते-जुलते रहें, वे आपस में अधिक संवाद करें। वे व्यक्तिगत स्तर पर विचारों का आदान-प्रदान करें — तो राष्ट्र हित की पूर्ति होगी… हमें आपस में क्यों लड़ना चाहिए? हमें अपने भीतर शत्रुओं की तलाश नहीं करनी चाहिए। मेरी जानकारी के अनुसार, प्रत्येक भारतीय राजनीतिक दल और प्रत्येक सांसद अंततः एक राष्ट्रवादी है। वह एक राष्ट्र की भावना में विश्वास करता है। वह राष्ट्र की प्रगति में विश्वास करता है… लोकतंत्र कभी ऐसा नहीं होता कि एक ही पार्टी सत्ता में आए।&#8221;</p>
<p>इतना ही नहीं, वे आगे भी कहे थे: “मित्रों, एक समृद्ध लोकतंत्र निरंतर कटुता का वातावरण सहन नहीं कर सकता&#8230; जब आप राजनीतिक कटुता, राजनीतिक वातावरण को अलग दिशा में पाते हैं, तो आपका मन विचलित हो जाता होगा। मैं देश के सभी लोगों से आग्रह करता हूँ कि राजनीतिक तापमान को कम किया जाए। राजनीति टकराव नहीं है, राजनीति कभी भी एकतरफा नहीं हो सकती। अलग-अलग राजनीतिक विचार प्रक्रियाएँ होंगी, लेकिन राजनीति का अर्थ है एक ही लक्ष्य को प्राप्त करना, लेकिन किसी न किसी तरह अलग-अलग माध्यमों से। मेरा दृढ़ विश्वास है कि इस देश में कोई भी व्यक्ति राष्ट्र के विरुद्ध नहीं सोचेगा। मैं किसी राजनीतिक दल को भारत की अवधारणा के विरुद्ध नहीं देख सकता। उनके अलग-अलग माध्यम, अलग-अलग सोच हो सकती है; लेकिन उन्हें एक-दूसरे के साथ चर्चा करना, एक-दूसरे के साथ संवाद करना सीखना होगा। टकराव कोई रास्ता नहीं है। जब हम आपस में लड़ते हैं, यहाँ तक कि राजनीतिक क्षेत्र में भी, तो हम अपने दुश्मन को मजबूत कर रहे होते हैं। हम उन्हें हमें विभाजित करने के लिए पर्याप्त सामग्री दे रहे होते हैं। इसलिए, युवा प्रतिभाओं एक बड़ा दबाव समूह है। आपके पास बहुत मजबूत शक्ति है। आपकी विचार प्रक्रिया राजनेता, आपके सांसद, आपके विधायक, आपके पार्षद को नियंत्रित करेगी। राष्ट्र के बारे में सोचें। विकास के बारे में सोचें।&#8221;</p>
<figure id="attachment_6993" aria-describedby="caption-attachment-6993" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6-1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6-1.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-6993" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6-1.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6-1-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6-1-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6-1-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6-1-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6993" class="wp-caption-text">पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में शपथ ग्रहण करते</figcaption></figure>
<p><strong>एक उपराष्ट्रपति होने के नाते अगर उन्होंने इन शब्दों का प्रयोग करते कहा कि &#8220;जब राष्ट्रीय हित की बात हो तो हमें राजनीति नहीं करनी चाहिए, जब विकास की बात हो तो हमें राजनीति नहीं करनी चाहिए, जब राष्ट्र के विकास की बात हो तो हमें राजनीति नहीं करनी चाहिए। जब राष्ट्रीय सुरक्षा, राष्ट्रीय चिंता का विषय हो तो हमें राजनीति नहीं करनी चाहिए ​. &#8220;मैं राजनीतिक जगत के सभी लोगों से अपील करता हूँ कि कृपया परस्पर सम्मान रखें। कृपया टेलीविज़न पर या किसी भी पार्टी के नेतृत्व के विरुद्ध अभद्र भाषा का प्रयोग न करें। यह संस्कृति हमारी सभ्यता का सार नहीं है। हमें अपनी भाषा का ध्यान रखना होगा&#8230; व्यक्तिगत आक्षेपों से बचें। मैं राजनेताओं से अपील करता हूँ। अब समय आ गया है कि हम राजनेताओं को गालियाँ देना बंद करें। जब विभिन्न राजनीतिक दलों में लोग दूसरे राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं को गालियाँ देते हैं, तो यह हमारी संस्कृति के लिए अच्छा नहीं है।&#8221;</strong></p>
<p>अंत में, धनकड़ का कहना था की &#8220;भारत ऐतिहासिक रूप से किस लिए जाना जाता है? संवाद, वाद-विवाद, विचार-विमर्श। आजकल, हम संसद में यह सब होते नहीं देखते। मुझे लगता है कि आगामी सत्र एक महत्वपूर्ण सत्र होगा। मुझे पूरी आशा है कि सार्थक चर्चाएँ और गंभीर विचार-विमर्श होंगे जो भारत को नई ऊँचाइयों पर ले जाएँगे। ऐसा नहीं है कि सब कुछ सही है। हम कभी भी ऐसे समय में नहीं रहेंगे जहाँ सब कुछ सही हो। किसी भी समय कुछ क्षेत्रों में सदैव कुछ कमियाँ रहेंगी। इसके साथ ही सदैव सुधार की गुंजाइश है। अगर कोई किसी चीज़ में सुधार का सुझाव देता है, तो वह निंदा नहीं है। यह आलोचना नहीं है। यह केवल आगे के विकास के लिए एक सुझाव है। इसलिए, मैं राजनीतिक दलों से रचनात्मक राजनीति करने की अपील करता हूँ। और जब मैं यह कहता हूँ, तो मैं अपील करता हूँ &#8211; सत्ता पक्ष, सत्तारूढ़ दल और विपक्ष सभी दलों से अपील करता हूँ।”</p>
<figure id="attachment_6994" aria-describedby="caption-attachment-6994" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-8.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-8.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-6994" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-8.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-8-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-8-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-8-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-8-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6994" class="wp-caption-text">जगदीप धनखड़ 06 जून, 2023 को उप-राष्ट्रपति निवास, नई दिल्ली में भारतीय रक्षा संपदा सेवा (आईडीईएस) के परिवीक्षाधीन अधिकारियों से बातचीत करते हुए।</figcaption></figure>
<p>​ज्ञातव्य हो कि इससे पहले न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के आवास पर मिले जले हुए नकदी के बंडलों के मामले में उन्हें हटाने के लिए विपक्ष द्वारा प्रायोजित एक नोटिस उन्हें सौंपा गया था, और उन्होंने सदन में इसका उल्लेख किया और महासचिव से आगे आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब सत्तारूढ़ गठबंधन ने लोकसभा में इसी तरह का एक नोटिस प्रायोजित किया था और विपक्ष को भी इसमें शामिल किया था। </p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/dhankar-did-not-even-take-the-name-of-the-prime-minister-in-his-last-speech">&#8220;मैं ही सही हूँ, बाकी सब गलत है &#8211; यह लोकतंत्र नहीं है।​ यह अहंकार है। यह उद्दंडता है​&#8221;, अपने अंतिम भाषण में धनकड़ &#8216;प्रधानमंत्री का नाम तक नहीं लिया&#8221;</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>देश के 143+ करोड़ लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाले विधायक, सांसद जब &#8216;विधानसभा और संसद में असंवैधानिक शब्दों का प्रयोग&#8217; करेंगे, तो भारत के बच्चे क्या सोचेंगे</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 04 Jun 2025 12:21:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
		<category><![CDATA[goverment]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>रायसीना पहाड़ (नई दिल्ली) : भारत के राष्ट्रकवि रामधारी सिंह &#8216;दिनकर&#8217; जब शब्दों का विन्यास कर भारत का गौरव गुणगान करने के लिए &#8216;किसको नमन करूँ मैं भारत &#8211; किसको नमन करूँ मैं&#8221; लिखे होंगे, उनके मन के किसी कोने में कोई शक नहीं हुआ होगा कि आने वाले दिनों में इस देश के प्रजातान्त्रिक [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/what-will-the-children-of-india-think-when-mlas-mps-use-unconstitutional-words">देश के 143+ करोड़ लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाले विधायक, सांसद जब &#8216;विधानसभा और संसद में असंवैधानिक शब्दों का प्रयोग&#8217; करेंगे, तो भारत के बच्चे क्या सोचेंगे</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>रायसीना पहाड़ (नई दिल्ली) : भारत के राष्ट्रकवि रामधारी सिंह &#8216;दिनकर&#8217; जब शब्दों का विन्यास कर भारत का गौरव गुणगान करने के लिए &#8216;किसको नमन करूँ मैं भारत &#8211; किसको नमन करूँ मैं&#8221; लिखे होंगे, उनके मन के किसी कोने में कोई शक नहीं हुआ होगा कि आने वाले दिनों में इस देश के प्रजातान्त्रिक मंदिर में, चाहे प्रदेश में विधान सभा हो हो अथवा दिल्ली के रायसीना पहाड़ी पर लोकसभा, में चयनित विधायक और सांसद &#8216;असंसदीय&#8217; शब्दों का प्रयोग कर संसद ही नहीं, भारत की गरिमा को, प्रजातंत्र की रीढ़ को कमजोर बनाएंगे। </strong></p>
<p>दिनकर ने लिखा भी : </p>
<p><strong>भारत नहीं स्थान का वाचक, गुण विशेष नर का है,<br />
एक देश का नहीं शील यह भूमंडल भर का है।<br />
जहाँ कहीं एकता अखंडित, जहाँ प्रेम का स्वर है,<br />
देश-देश में वहाँ खड़ा भारत जीवित भास्वर है!<br />
निखिल विश्व की जन्म-भूमि-वंदन को नमन करूँ मैं?<br />
किसको नमन करूँ मैं भारत! किसको नमन करूँ मैं?</strong></p>
<blockquote><p>खैर। देश के बड़े-बड़े शोधकर्ता इस कार्य में लगे है कि आखिर समाज में नैतिकता का पतन क्यों हो रहा है ?  भारत के कुल 780 जिलों के जिला परिषदों, 28 राज्यों और केंद्र शाषित प्रदेशों के विधान सभाओं, लोक सभा या राज्य सभा में बैठे चयनित सदसयगण भी आखिर इसी समाज से जाते हैं और समाज की व्यवस्था का उन पर प्रभाव नहीं पड़ेगा, यह हो नहीं सकता, तभी तो कहीं वे देश के सरकारी अधिकारियों का गरेवान पकड़ रहे हैं, कहीं जिला परिषद्, विधान सभा और लोकसभा में टेबुल-कुर्सी पटक रहे हैं, अपशब्दों का प्रयोग कर रहे हैं। अततः विश्व के सर्वश्रेष्ठ प्रजातंत्र के संसद को इन वारदातों पर नियंत्रण हेतु अनुशासनिक कार्रवाई भी करनी पड़ती है और असंवैधानिक शब्दों के प्रयोग पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने हेतु निर्णय लेना पड़ता है।</p></blockquote>
<p>आज विजय-चौक पर बैठे-बैठे सोच रहा हूँ कि देश की आवादी 1952 में मात्र 38 करोड़ थी, आज 143.81+ करोड़ है। उन दिनों लोक सभा में सीटों की संख्या 489 थी, आज 543 है। साल 1952 में लोक सभा में प्रतिनिधित्व करने वाले सांसद आठ लाख लोगों के बीच से आते थे, आज यह संख्या 25 लाख से भी अधिक हो गयी है। संसद बनने के बाद पहला अविश्वास प्रस्ताव 1963 में पहली बार पेश किया गया था, और 1967 के बाद आज तक कुल 39 अविश्वास प्रस्ताव/विश्वास प्रस्ताव पेश किए गए, जिसमें साल 1979, 1990, 1996, 1997 और 1999 में, कुल पांच बार तत्कालीन प्रधानमंत्री सदन में बहुमत साबित नहीं कर पाए। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Par-2.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Par-2.jpg" alt="" width="2200" height="1263" class="aligncenter size-full wp-image-6702" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Par-2.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Par-2-300x172.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Par-2-1024x588.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Par-2-768x441.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Par-2-1536x882.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Par-2-2048x1176.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a></p>
<p>यह भी सोच रहा था कि कहने को तो देश में साक्षरता दर लगातार बढ़ रही है। स्वतंत्रता के समय भारत की केवल 14% आवादी साक्षर थी, जबकि आज रायसीना पहाड़ी के आंकड़े 76.32+% बता रहे हैं। आखिर इन विगत वर्षों में कुछ तो गलत हो रहा है, जिससे समाज भी प्रदूषित हो रही है और समाज से चयनित लोग भी प्रजातंत्र के मंदिरों को प्रदूषित कर रहे हैं। </p>
<p><strong>रायसीना पहाड़ी से नीचे लुढ़कती सड़क कर्तव्य पथ, जो विजय चौक से इण्डिया गेट परिसर की ओर जाती है, पूरे इलाके को तो दो फांक में बाँटती ही है, भारत के 543 लोकसभा क्षेत्रों से चयनित होकर आने वाले सम्मानित सांसदों की मानसिकता को भी सहस्त्र फांकों में शायद बांट दी है। यह अलग बात है कि भारत के लोकतांत्रिक परिदृश्य के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर यह है कि नव-निर्वाचित 18वीं लोकसभा में कोई भी निरक्षर सांसद नहीं है, लेकिन उनके व्यवहार और संसद में असंवैधानिक शब्दों का प्रयोग भी गहन शोध की ओर इशारा करता है। </strong></p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/G-1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/G-1.jpg" alt="" width="1917" height="1308" class="aligncenter size-full wp-image-6709" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/G-1.jpg 1917w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/G-1-300x205.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/G-1-1024x699.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/G-1-768x524.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/G-1-1536x1048.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/G-1-218x150.jpg 218w" sizes="auto, (max-width: 1917px) 100vw, 1917px" /></a></p>
<p>कहते हैं कि 2024 के लोकसभा चुनावों में खुद को निरक्षर घोषित करने वाले सभी 121 उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत सके। 18वीं लोकसभा में नवनिर्वाचित सांसदों में बहुत बड़ा हिस्सा उच्च शिक्षित है, केवल एक सांसद ने खुद को साक्षर बताये। बाकी चुने गए प्रतिनिधियों के पास शिक्षा की विभिन्न डिग्री हैं, जो प्राथमिक विद्यालय से लेकर उच्च शिक्षा तक की योग्यता को दर्शाती हैं। वैसे इसी संसद में लगभग 105 या 19 प्रतिशत ने अपनी शैक्षणिक योग्यता कक्षा 5वीं पास और कक्षा 12वीं के बीच है। </p>
<p>इतना ही नहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 240 सांसदों में 64 स्नातक और 49 स्नातकोत्तर हैं। 99 सीटों वाली कांग्रेस में 24 स्नातक, 27 स्नातकोत्तर और 21 सांसदों के पास पेशेवर स्नातक की डिग्री है। जनता दल (यूनाइटेड) के एक सांसद एकमात्र साक्षर सांसद हैं, जो नई लोकसभा में सबसे कम शैक्षणिक योग्यता रखते हैं। कुल 147 सांसदों के पास स्नातक की डिग्री है, और अन्य 147 के पास स्नातकोत्तर योग्यता है। इसके अतिरिक्त, 98 सांसद स्नातक पेशेवर और डिप्लोमा योग्यता वाले हैं। 5 प्रतिशत सांसदों के पास डॉक्टरेट की डिग्री है, जिसमें तीन महिला सांसद शामिल हैं। लेकिन यह बात समझ से परे है कि इन शिक्षित सांसदों का भी व्यवहार कभी-कभी इधर-उधर क्यों हो जाता है ?</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Par-4.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Par-4.jpg" alt="" width="2200" height="1263" class="aligncenter size-full wp-image-6703" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Par-4.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Par-4-300x172.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Par-4-1024x588.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Par-4-768x441.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Par-4-1536x882.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Par-4-2048x1176.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a></p>
<p>इसी 18वीं लोकसभा में चुने गए सांसदों की औसत आयु 56 वर्ष है, जो 17वीं लोकसभा में 59 वर्ष से थोड़ी कम है। 11 प्रतिशत सांसद 40 वर्ष या उससे कम आयु के हैं, और 38 प्रतिशत 41 से 55 वर्ष की आयु के हैं। लगभग 52 प्रतिशत सांसद 55 वर्ष से अधिक आयु के हैं और सबसे बुजुर्ग सांसद 82 वर्ष के हैं। लेकिन इन सांसदों की मानसिकता में इतनी गिरावट क्यों आ गयी या आ रही है कि भारतीय प्रजातंत्र के इस मंदिर को सांसदों द्वारा प्रयोग की जाने वाली शब्दों पर नियंत्रण लगाने की बात सोचने पड़ी। वैसे, यह पहली बार नहीं है, विगत कई वर्षों में &#8216;असंसदीय अभिव्यक्ति&#8217; के लिए सदन द्वारा उचित कार्रवाई हुयी हैं, लेकिन शिष्टाचार बढ़ने के बजाय अधोगति क्यों हो रहा है &#8211; यह गहन शोध का विषय है। </p>
<p><strong>ज्ञातव्य हो कि कुछ समय पहले 13 जुलाई, 2022 को संसद द्वारा &#8216;असंसदीय शब्दों&#8217; की एक सूची जारी की गयी। कुछ असंसदीय शब्दों में &#8216;जुमलाजीवी, कोविड फैलाने वाला, स्नूपगेट, बाल बुद्धि&#8217; शामिल हैं। इसमें &#8216;शर्मिंदा, विश्वासघात, पाखंड, गाली, ड्रामा और अक्षम&#8217; जैसे शब्द भी शामिल हैं। जैसे ही यह सूची जारी हुई, लोकसभा सचिवालय की अद्यतन पुस्तिका पर तीखी प्रतिक्रिया शुरू हो गई। पुस्तिका में कुछ ऐसे शब्दों की सूची दी गई है, जिन्हें लोकसभा के साथ-साथ राज्यसभा में भी असंसदीय माना जाता है।लोकसभा के अध्यक्ष के अनुसार, यह सूची केवल उन शब्दों का संकलन है, जिन्हें पिछले दिनों रिकॉर्ड से हटा दिया गया था। </strong></p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/G-2.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/G-2.jpg" alt="" width="1897" height="876" class="aligncenter size-full wp-image-6711" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/G-2.jpg 1897w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/G-2-300x139.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/G-2-1024x473.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/G-2-768x355.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/G-2-1536x709.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1897px) 100vw, 1897px" /></a></p>
<p>कहते हैं कि पहले सचिवालय कागजों की बर्बादी से बचने के लिए ऐसे असंसदीय शब्दों की एक पुस्तक जारी करता था। अब सरकार ने इस सूची को इंटरनेट पर डाल दिया है। यह सूची पहले 1954, 1986, 1992, 1999, 2004, 2009, 2010 में जारी की जा चुकी है। वर्ष 2010 में इसे वार्षिक आधार पर जारी करना शुरू किया गया। इसमें शकुनि, तानाशाह, तानाशाह, विनाश पुरुष, खून की खेती, जयचंद जैसे शब्दों का उल्लेख है, जिन्हें बहस के दौरान या अन्य किसी भी तरह से इस्तेमाल किए जाने पर हटा दिया जाएगा। दोहरा चरित्र, नौटंकी, बेहरी सरकार, ढिंढोरा पीटना जैसे शब्दों के साथ भी इसी तरह का व्यवहार किया जाएगा। हालांकि, शब्दों और अभिव्यक्तियों को हटाने के बारे में राज्यसभा के सभापति और लोकसभा के अध्यक्ष का अंतिम निर्णय होगा। </p>
<p>जुमलाजीवी, बाल बुद्धि, बहरी सरकार, उल्टा चोर कोतवाल को डांटे, उचक्के, अहंकार, कांव-कांव करना, काला दिन, गुंडागर्दी, गुलछर्रा, गुल खिलाना, गुंडों की सरकार, दोहरा चरित्र, चोर-चोर मौसेरे भाई, चौकड़ी, तड़ीपार, तलवे चाटना, तानाशाह, दादागिरी, दंगा सहित कई अंग्रेजी के शब्दों का इस्तेमाल भी अब लोकसभा या राज्यसभा में बहस के दौरान कार्यवाही में शामिल नहीं किया जायेगा। <br />
अंग्रेज़ी शब्दों की फ़ेहरिस्त में अब्यूज़्ड, ब्रिट्रेड, करप्ट, ड्रामा, हिपोक्रेसी और इनकॉम्पिटेंट, कोविड स्प्रेडर और स्नूपगेट शामिल हैं। इसके अलावा अध्यक्ष पर आक्षेप को लेकर इस्तेमाल किए गए कई वाक्यों को भी असंसदीय अभिव्यक्ति की श्रेणी में रखा गया है, मसलन- आप मेरा समय खराब कर रहे हैं, आप हम लोगों का गला घोंट दीजिए, चेयर को कमज़ोर कर दिया गया है, मैं आप सब से यह कहना चाहती हूं कि आप किसके आगे बीन बजा रहे हैं? </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Par-3.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Par-3.jpg" alt="" width="2200" height="1263" class="aligncenter size-full wp-image-6704" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Par-3.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Par-3-300x172.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Par-3-1024x588.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Par-3-768x441.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Par-3-1536x882.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Par-3-2048x1176.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a></p>
<p>सूत्रों का कहना है कि यह सूची लोकसभा-राज्यसभा के साथ ही विधानसभा की कार्यवाहियों के दौरान अमर्यादित घोषित किए गए शब्दों को मिलाकर बनती है। इसे प्रत्येक वर्ष संशोधित भी किया जाता है। सूची लोकसभा के अधिकारी निकालते हैं लेकिन ये राज्यसभा के लिए भी लागू होती है। असंसदीय शब्द अपमानजनक या असभ्य शब्द या अभिव्यक्ति हैं जिन्हें संसद में उपयोग के लिए अनुपयुक्त माना जाता है। असंसदीय शब्दों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 105 (2) के अनुसार विनियमित किया जाता है। </p>
<p><strong>अनुच्छेद 105 (2) </strong>के तहत, संसद में एक सांसद का भाषण संसदीय नियमों के अनुशासन और सदस्यों की अच्छी समझ के अधीन है। सदन के अध्यक्ष या अध्यक्ष को इस पर नज़र रखने का अधिकार है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सांसद संसद के अंदर &#8216;अपमानजनक या अशोभनीय असंसदीय शब्दों&#8217; का इस्तेमाल न करें। &#8216;लोकसभा में प्रक्रिया और कार्य संचालन के नियम&#8217; के नियम 380 और नियम 381 &#8216;विलोपन (असंसदीय शब्दों को हटाना)&#8217; से संबंधित है। </p>
<p>भारतीय संविधान के अनुच्छेद 105(2) के तहत संसद सदस्यों को संसद में उनके बयान के लिये न्यायालयी कार्यवाही से सुरक्षा प्राप्त है। यानी संसद में या किसी समिति में संसद के किसी सदस्य द्वारा कही गई किसी बात या दिये गए किसी मत के संबंध में उसके विरुद्ध किसी न्यायालय में कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी और किसी व्यक्ति के विरुद्ध संसद के किसी सदन के प्राधिकार द्वारा या उसके अधीन किसी प्रतिवेदन, पत्र, या कार्यवाहियों के प्रकाशन के संबंध में इस प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी। एक संसद सदस्य जो कुछ भी कहता है वह संसद के नियमों के अनुशासन, सदस्यों की अच्छी समझ और पीठासीन अधिकारी द्वारा कार्यवाही के नियंत्रण के अधीन है। </p>
<p>यह सुनिश्चित करता है कि संसद सदस्य सदन के अंदर &#8216;अपमानजनक या अभद्र या अनिर्दिष्ट या असंसदीय शब्द&#8217; का उपयोग नहीं कर सकते हैं। लोकसभा की प्रक्रिया और कार्य सञ्चालन नियमों के नियम संख्या 380 के तहत अध्यक्ष को वाद-विवाद में प्रयुक्त मानहानिकारक, अशोभनीय अथवा असंसदीय शब्द या अभिव्यक्ति को हटाने का अधिकार प्राप्त है। लोकसभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालक विषयक नियम 381 के अनुसार, &#8216;सदन की कार्यवाही का वह भाग जो समाप्त हो गया है, तारांकन द्वारा चिन्हित किया जाएगा और कार्यवाही में एक व्याख्यात्मक टीका इस प्रकार डाला जाएगा: &#8216;अध्यक्ष द्वारा आदेशित’।&#8217; </p>
<blockquote><p>यदि पीठासीन अधिकारी महिला है तो कोई भी संसद सदस्य उसे &#8220;प्रिय अध्यक्ष&#8217; के रूप में संबोधित नहीं कर सकता है। </p></blockquote>
<p>सरकार या किसी अन्य संसद सदस्य पर &#8216;झांँसा देने&#8217; का आरोप नहीं लगाया जा सकता। रिश्वत, ब्लैकमेल, रिश्वतखोर, चोर, डाकू, लानत, धोखा, नीच, और डार्लिंग जैसे शब्द असंसदीय हैं। इनका प्रयोग संसद सदस्यों के लिये नहीं किया जा सकता।संसद सदस्य या पीठासीन अधिकारियों पर &#8220;कपटी&#8221; होने का आरोप भी नहीं लगाया जा सकता है। एक संसद सदस्य को ठग, कट्टरपंथी, चरमपंथी, भगोड़ा नहीं कहा जा सकता। किसी भी सदस्य या मंत्री पर जान-बूझकर तथ्यों को छिपाने, भ्रमित करने या जानबूझकर भ्रमित होने का आरोप नहीं लगाया जा सकता है। किसी भी अनपढ़ संसद सदस्य को ‘अंँगूठा छाप’ नहीं कहा जा सकता है।</p>
<p>विशेषज्ञों के अनुसार, सदन की कार्यवाही के दौरान जब सत्ता पक्ष या विपक्ष के सांसद ऐसे शब्दों का प्रयोग करते हैं जो संसदीय शिष्टाचार के अनुरूप न हो तो पीठासीन अधिकारी को स्वयं अथवा संसद के किसी अन्य सदस्य द्वारा जताई गई आपत्ति के मद्देनजर ऐसे शब्दों को विधायिका (संसद व विधानसभाएं) की मुद्रित एवं दृश्य-श्रव्य कार्यवाही से हटाने का अधिकार होता है। कुछ मामलों में कार्यवाही से आपत्तिजनक शब्द हटाने का निर्णय हाथों हाथ हो जाता है तो कुछ में ऐसा होता है कि स्पीकर सदन में हुई बहस का पाठ्य रूपांतरण पढ़ने के बाद निर्णय लेते हैं। </p>
<p>संसदीय सचिवालय समय-समय पर अस्वीकार्य अभिव्यक्तियों को संकलित कर उनकी सूची जारी करता है ताकि भविष्य के लिए सदस्यों के समक्ष संदर्भ रहे। समय के साथ ऐसे शब्दों और अभिव्यक्तियों की संख्या बढ़ गई है, जिन्हें असंसदीय माना गया। हिन्दी-अंग्रेजी के असंसदीय शब्दों की नवीनतम सूची 40 से अधिक पृष्ठों की है। समय के साथ यह अवधारणा भी बदली है कि असंसदीय क्या है और इस सूची में कई शब्द जुड़ते चले गए। जैसे 1950 के दशक में &#8216;नाटकीय&#8217; शब्द का सदन में प्रयोग अनुचित माना गया। 70 व 80 के दशक में विधान सभाओं और संसद के कई अध्यक्षों ने पाया कि &#8216;एक झूठ&#8217;, &#8216;झूठ&#8217; और &#8216;पूरा झूठ&#8217; असंसदीय शब्द हैं। गैर अनुमति शब्दों की नई सूची में शामिल हैं &#8211; &#8216;बचकाना&#8217;, &#8216;असत्य&#8217; और &#8216;ड्रामा&#8217;। </p>
<figure id="attachment_6705" aria-describedby="caption-attachment-6705" style="width: 1739px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Par-4-jharkhand.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Par-4-jharkhand.jpg" alt="" width="1739" height="1254" class="size-full wp-image-6705" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Par-4-jharkhand.jpg 1739w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Par-4-jharkhand-300x216.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Par-4-jharkhand-1024x738.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Par-4-jharkhand-768x554.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Par-4-jharkhand-1536x1108.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Par-4-jharkhand-324x235.jpg 324w" sizes="auto, (max-width: 1739px) 100vw, 1739px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6705" class="wp-caption-text">झारखण्ड विधान सभा का दृश्य</figcaption></figure>
<p>विशेषज्ञ कहते हैं कि हालांकि लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला के स्पष्टीकरण के बाद विवाद थम गया लेकिन दो सवाल अहम हैं। </p>
<p><strong>पहला,</strong> हमारे सांसदों-विधायकों को सदन में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि वे आक्रामक/रोषपूर्ण भाषा का प्रयोग कर सकते हैं। पीठासीन अधिकारी विधायिका के संरक्षक होते हैं और सदन की व्यवस्था बनाए रखना व गौरव का संरक्षण करना इनका दायित्व है। वे कैसे ऐसा संतुलन स्थापित करें कि सांसदों को सदन में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार मिले और विधायिका की गरिमा भी अक्षुण्ण रहे। इस सवाल का जवाब देना आसान है। परस्पर सम्मान बनाए रखना ही संसदीय चर्चा में शिष्टाचार का मुख्य आधार है। असंसदीय अभिव्यक्तियों को सदन की चर्चा में तभी स्थान मिलता है, जब चर्चा मुद्दों पर केंद्रित न हो कर व्यक्तिगत हो जाए। सांसद व विधायक सदन में जिस भाषा का इस्तेमाल करते हैं, वह समाज में बहस का स्तर तय करते हैं। इसलिए जनप्रतिनिधियों का दायित्व है कि वे इस प्रकार चर्चा करें जो न केवल बहस की गुणवत्ता बढ़ाए बल्कि हमारी विधायी संस्थाओं का गौरव भी बढ़ाए। </p>
<p><strong>दूसरा सवाल</strong>, क्या यह संभव है कि कोई शब्द असंसदीय है या नहीं, यह तय करने के लिए एक कठोर रूपरेखा अपनाई जाए? यह मुश्किल है क्योंकि जो कुछ भी बोला गया है, वह संदर्भ पर निर्भर करता है और इस बात पर कि पीठासीन अधिकारी ने किस शब्द को अस्वीकार्य माना। हो सकता है एक विधानसभा में जिस शब्द को एक पीठासीन अधिकारी असंसदीय करार दे, दूसरी में कोई अन्य पीठासीन अधिकारी न दे। 1926 में भारत की विधायिकाओं के पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन में यह मुद्दा उठाया गया था। तय किया गया कि असंसदीय अभिव्यक्ति &#8216;ऐसा विषय है, जिस पर कोई कठोर व सशक्त नियम लागू नहीं होते और ये प्रत्येक मामले की परिस्थिति पर निर्भर करता है।&#8217; 1969 में जब कुछ अभिव्यक्तियों को असंसदीय घोषित करने के लिए दिशा-निर्देश बनाने की बात आई तब भी यही बात दोहराई गई। </p>
<figure id="attachment_6706" aria-describedby="caption-attachment-6706" style="width: 1736px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Par-6-JK.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Par-6-JK.jpg" alt="" width="1736" height="1136" class="size-full wp-image-6706" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Par-6-JK.jpg 1736w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Par-6-JK-300x196.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Par-6-JK-1024x670.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Par-6-JK-768x503.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Par-6-JK-1536x1005.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1736px) 100vw, 1736px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6706" class="wp-caption-text">जम्मू और कश्मीर विधानसभा का दृश्य</figcaption></figure>
<p>ऐसा नहीं हो सकता कि बोला गया शब्द सुना न जाए। इतना ही किया जा सकता है कि कोई असंसदीय टिप्पणी आधिकारिक रेकॉर्ड से हटा दी जाए। सीधे प्रसारण एवं सोशल मीडिया के जमाने में विधायक एवं सांसद असंसदीय को मिटा तो सकेंगे लेकिन उनके लिए ऐसा करना मुश्किल होगा कि जनता को पता ही न चले कि हमारे सदनों में ऐसे शब्दों का प्रयोग होता है। असंसदीय शब्दों को कार्यवाही से हटाने के बावजूद विधायिका की कार्यवाही जनता से छिपी नहीं रहती। बीते वर्षों में लोकसभा और राज्यसभा में सदस्यों ने असंसदीय व्यवहार कर कामकाज में बाधा पहुंचाई, नारे लगाए, बैनर दिखाए, कागज फाड़े और उछाले। </p>
<p>ज्ञातव्य हो कि 2022 में संसद के मानसून सत्र के पहले सप्ताह में महंगाई व जीएसटी पर चर्चा की मांग के बीच कामकाज बार-बार स्थगित हुआ। लोकसभा में 15 प्रतिशत तो राज्यसभा में 23 प्रतिशत ही कामकाज हुआ। पिछले साल के मानसून सत्र में भी ऐसा ही हुआ था। व्यापक पैमाने पर तुलना की जाए तो पिछली (16वीं) लोकसभा का 16 प्रतिशत कामकाजी समय अवरोधों की भेंट चढ़ गया तो 15वीं लोकसभा का 37 प्रतिशत। विधायिका के लोकतांत्रिक संचालन में बाधाएं पहुंचाने से होने वाले नुकसान की भरपाई किसी भी तरह नहीं की जा सकती। लिखित संसदीय रेकॉर्ड को असंसदीय शब्द हटा कर साफ किया जा सकता है, पर असंसदीय व्यवहार के दृश्य लम्बे समय तक हमारे मानसपटल पर अंकित रहेंगे। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Par-5-jharkhand.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Par-5-jharkhand.jpg" alt="" width="1736" height="1136" class="aligncenter size-full wp-image-6707" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Par-5-jharkhand.jpg 1736w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Par-5-jharkhand-300x196.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Par-5-jharkhand-1024x670.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Par-5-jharkhand-768x503.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Par-5-jharkhand-1536x1005.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1736px) 100vw, 1736px" /></a></p>
<p>विडंबना यह है कि उस अधिसूचना के बाद लोकसभा सचिवालय ने सांसदों को सूचित किया कि ‘असंसदीय अभिव्यक्ति 2009’ शीर्षक से प्रकाशन बिक्री के लिये उपलब्ध है जिसमें भारत की संविधान सभा, अंतरिम संसद, पहली से लेकर चौदहवीं लोकसभा (1952 से फरवरी 2009), राज्यसभा, राज्य विधानमंडलों एवं राष्ट्रमंडल के कुछ देशों की संसदों में ‘असंसदीय घोषित शब्दों एवं अभिव्यक्तियों’ का संकलन है। इस संकलन की कीमत 1700 रूपये है । हालांकि सांसदों को 25 प्रतिशत की छूट दी जायेगी और वे निजी उपयोग के लिये इसकी केवल एक प्रति खरीद सकेंगे। जो संसद भवन में लोकसभा सचिवालय के बिक्री काउंटर पर उपलब्ध होगा। कहा जाता है कि इस संकलन की इतनी बिक्री नहीं हुई जितनी अपेक्षा थी। खैर। </p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/what-will-the-children-of-india-think-when-mlas-mps-use-unconstitutional-words">देश के 143+ करोड़ लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाले विधायक, सांसद जब &#8216;विधानसभा और संसद में असंवैधानिक शब्दों का प्रयोग&#8217; करेंगे, तो भारत के बच्चे क्या सोचेंगे</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>एक समय लोकतंत्र का मंदिर समझा जाने वाला सदन अब कुश्ती का मैदान, युद्ध का मैदान बन गया है, अब गरिमा की अवधारणा नहीं रही : उपराष्ट्रपति</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 23 Jan 2025 03:24:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[democracy]]></category>
		<category><![CDATA[dhankar]]></category>
		<category><![CDATA[house]]></category>
		<category><![CDATA[parliament]]></category>
		<category><![CDATA[sansad]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली : उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ ने कहा कि हाल के वर्षों में न्यायपालिका तक पहुंचने को हथियार बना लिया गया है और यह हमारे शासन व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती है। भारतीय लोकतांत्रिक नेतृत्व संस्थान (आईआईडीएल) के प्रतिनिधियों के साथ उपराष्ट्रपति आवास में बातचीत करते हुए श्री धनखड़ ने कहा कि देश में हमारे पास [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली : उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ ने कहा कि हाल के वर्षों में न्यायपालिका तक पहुंचने को हथियार बना लिया गया है और यह हमारे शासन व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती है। भारतीय लोकतांत्रिक नेतृत्व संस्थान (आईआईडीएल) के प्रतिनिधियों के साथ उपराष्ट्रपति आवास में बातचीत करते हुए श्री धनखड़ ने कहा कि देश में हमारे पास मौलिक अधिकार है जो हमें न्यायपालिका तक पहुंचने का अधिकार देता है। लेकिन पिछले कुछ दशक में इसे दूसरी तरह का हथियार बना लिया गया है जो हमारे शासन, हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए बड़ी चुनौती है।</strong></p>
<p>उपराष्‍ट्रपति ने मौजूदा स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हर दिन आप देखते हैं कि सलाहें जारी की जा रही हैं, कार्यकारी कार्य ऐसे निकायों द्वारा किए जा रहे हैं जिनके पास उन्‍हें करने का कोई अधिकार क्षेत्र या न्यायिक अधिकार अथवा क्षमता नहीं है। आम आदमी की भाषा में कहें तो एक तहसीलदार कभी प्राथमिकी दर्ज नहीं करा सकता चाहे वह कुछ भी कर ले। हमारा संविधान संस्थाओं को अपने क्षेत्राधिकार में काम करना निर्देशित करता है। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।</p>
<p>उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि संस्थाएं अपनी सुविधा के लिए अन्य संस्थाओं के सामने झुक रही हैं पर खुश करने के ये तरीके अल्पकालिक लाभ तो दे सकते हैं, लेकिन लंबे समय में ये संस्‍थानों के आंतरिक तंत्र को ऐसी क्षति पहुंचा सकते हैं कि जिसकी कल्‍पना भी नहीं की जा सकती। उन्होंने इस पर विचार करने का आग्रह किया। उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि इस विचार से लोगों को भी जोड़ना होगा। उन्हें बताना होगा कि भारत का विश्‍व में सबसे विशाल मानव संसाधन है पर खुद का आकलन करना होगा कि दिखावटी उपलब्ध्यिों के सहारे नहीं रहा जा सकता।</p>
<p>प्रतिनिधियों से बातचीत में उपराष्ट्रपति ने संसद में व्हिप के प्रावधानों पर कहा कि व्हिप क्यों होना चाहिए? व्हिप का मतलब है कि आप अभिव्यक्ति पर अंकुश लगा रहे हैं, आप स्वतंत्रता नियंत्रित कर रहे हैं और अपने पार्टी प्रतिनिधियों को आदेश पालक बना रहे हैं। आप उन्‍हें अपने विवेक के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दे रहे हैं। आप खुद देखें कि अमरीका में व्हिप है या नहीं, पता लगाएं कि पिछले दस वर्षों में सीनेट के फैसले किस तरह से समझाने-बुझाने से प्रभावित हुए हैं। लेकिन जब आप व्हिप जारी करते हैं, तो इसमें कोई विमर्श नहीं होता है। किसी को समझाया-बुझाया नहीं जाता, केवल आदेश किया जाता है। राजनीतिक दलों से लोकतंत्र को बढ़ावा देने की अपेक्षा की जाती है, लेकिन चुने हुए प्रतिनिधियों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के आड़े व्हिप आ जाता है।</p>
<blockquote><p>संसद में हंगामे और गतिरोध पर श्री धनखड़ ने कहा कि एक समय लोकतंत्र का मंदिर रहा सदन अब कुश्ती का मैदान, युद्ध का मैदान जैसा बन गया है। संसद में अमर्यादित व्‍यवहार किया जा रहा है और अब गरिमा की अवधारणा नहीं बची है।</p></blockquote>
<p>उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि सदन में अराजकता, व्यवधान, गड़बड़ी रिमोट कंट्रोल से संचालित हो रही है। सदन में कुछ सदस्‍य यह सोचकर कदम रखते हैं कि आज संसद या विधानमंडल में अव्यवस्था उत्‍पन्‍न करने के आदेश को कैसे अंजाम दें।उपराष्‍ट्रपति ने जनप्रतिनिधियों को उत्‍तरदायी बनाने के लिए युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि वे उन्‍हें जवाबदेह बनाने के लिए शक्तिशाली दबाव समूह के रूप में काम करें। उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि आज युवा सोशल मीडिया की ताकत से संपन्‍न है और संसदीय संस्थाओं, उनके कामकाज, सांसदों के प्रदर्शन का लेखा-जोखा का ब्‍योरा प्रकाशित-प्रसारित कर सकते हैं। </p>
<p>उन्‍होंने कहा कि आप उन लोगों को आईना दिखा सकते हैं जो अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन करने की बजाय ऐसे कार्यों में लिप्‍त हो रहे हैं जिन्हें कोई भी माता-पिता अपने बच्चों को नहीं दिखाना चाहेंगे। उपराष्‍ट्रपति ने इस परिदृश्य को बदलने का आह्वान किया।राजनीति में प्रतिभाशाली लोगों की आवश्यकता बताते हुए उपराष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि नीति निर्माण में प्रशिक्षित लोगों की जरूरत है जो राजनीति जानते-समझते हों। उन्‍होंने कहा कि सरकार को जवाबदेह बनाना आसान नहीं है। इसका एक मात्र तरीका विधायिका के मंच से संभव है, क्‍योंकि तभी सरकार को बताया जा सकता है कि कहां सुधार की आवश्यकता है।</p>
<p><strong>अभिव्यक्ति और संवाद के महत्व पर जोर देते हुए, श्री धनखड़ ने कहा कि हमें गर्व है कि हम लोकतंत्र की जननी हैं। हम लोकतांत्रिक देश हैं लेकिन इसके विपरित राजनीतिक दलों के बीच कोई सार्थक संवाद नहीं है। वे राष्ट्रवाद, सुरक्षा या विकास के मुद्दों पर विचार-विमर्श नहीं करते, केवल टकराव का रुख रखते हैं। उन्‍होंने अशांति को एक राजनीतिक रणनीति का हथियार बना लिया है। वे अशोभनीय भाषा का इस्‍तेमाल करते हैं जो न केवल भारतीय जनमानस को महत्‍वहीन महसूस कराता है बल्कि भारतीय सभ्यता को भी कलंकित करता है।श्री धनखड़ ने कहा कि देश के उपराष्ट्रपति के रूप में वे इस बात से चिंतित हैं कि अभिव्‍यक्ति और संवाद जैसे लोकतांत्रिक मूल्यों का तेजी से ह्रास हो रहा है।</strong></p>
<p>सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों को इसके लिए जवाबदेह ठहराने का आह्वान करते हुए श्री धनखड़ ने कहा कि ट्रेनों पर पथराव करने, सरकारी इमारतों में आग लगाने सहित सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाली घटनाओं में शामिल समाज के ऐसे तत्‍वों का नाम उजागर करने और उन्हें शर्मिंदा करने के लिए लोगों को एकजुट होना होगा। शासन व्‍यवस्‍था को ऐसे तरीके अपनाने होंगे जो इन तत्‍वों को जवाबदेह ठहराकर उन्‍हें आर्थिक रूप से दंडित कर सके।कानून के उल्लंघन और सार्वजनिक अव्यवस्था पर अपनी चिंता व्‍यक्‍त करते हुए श्री धनखड़ ने कहा कि हमें सार्वजनिक व्यवस्था में व्यवधान पर नरमी नहीं बरतनी चाहिए।  </p>
<p>अगर किसी को एक वैध प्राधिकारी नोटिस दी जाती है और अगर वह राजनेता हो तो उसके समर्थक सड़कों पर उतर आते हैं। यह कानून का उल्लंघन, बर्बरता और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का अनादर है। उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि कुछ, उच्च-शक्तिशाली लोग ऐसा कर रहे हैं लेकिन इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्‍होंने कहा कि लोकतंत्र में सार्वजनिक व्यवस्था को परिभाषित करना होगा कि जब राजनीतिक लाभ के लिए सार्वजनिक अव्यवस्था फैलाई जाती है या किसी व्यक्ति की ताकत बढ़ाने के लिए ऐसा किया जाता है तो यह आम जनजीवन को अस्‍त-व्‍यस्‍त कर देता है, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।</p>
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		<title>अखिल भारतीय न्यायिक सेवा ही क्यों, अखिल भारतीय राजनीतिक सेवा के लिए भी तो परीक्षा हो सकती है, अपराधियों का राजनीतिकरण तो नहीं होगा</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/why-only-all-india-judicial-service-there-can-be-an-examination-for-all-india-political-service-also</link>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 09 Aug 2024 12:42:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
		<category><![CDATA[examination]]></category>
		<category><![CDATA[house]]></category>
		<category><![CDATA[judiciary]]></category>
		<category><![CDATA[parliament]]></category>
		<category><![CDATA[politics]]></category>
		<category><![CDATA[services]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>रायसीना पर्वत शिखर (नई दिल्ली) : पिछले दिनों भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आयोजित संविधान दिवस समारोह में बोलते कही थी देश में एक अखिल भारतीय न्यायिक सेवा हो सकती है जो प्रतिभाशाली युवाओं का चयन कर सकती है और उनकी प्रतिभा को निचले स्तर से उच्च स्तर तक [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/why-only-all-india-judicial-service-there-can-be-an-examination-for-all-india-political-service-also">अखिल भारतीय न्यायिक सेवा ही क्यों, अखिल भारतीय राजनीतिक सेवा के लिए भी तो परीक्षा हो सकती है, अपराधियों का राजनीतिकरण तो नहीं होगा</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>रायसीना पर्वत शिखर (नई दिल्ली) : पिछले दिनों भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आयोजित संविधान दिवस समारोह में बोलते कही थी देश में एक अखिल भारतीय न्यायिक सेवा हो सकती है जो प्रतिभाशाली युवाओं का चयन कर सकती है और उनकी प्रतिभा को निचले स्तर से उच्च स्तर तक पोषित और बढ़ावा दे सकती है। राष्ट्रपति महोदया यह भी कही कि बेंच की सेवा करने की इच्छा रखने वालों को देश भर से चुना जा सकता है ताकि प्रतिभाओं का एक बड़ा समूह बनाया जा सके। ऐसी प्रणाली कम प्रतिनिधित्व वाले सामाजिक समूहों को भी अवसर प्रदान कर सकती है। बहुत बेहतर विचार है सम्मानित राष्ट्रपति महोदया का। </strong></p>
<p>संविधान के अनुच्छेद 312 में अखिल भारतीय न्यायिक सेवा (AIJS) की स्थापना का प्रावधान है, जिसमें जिला न्यायाधीश से कमतर कोई पद शामिल नहीं होगा। संवैधानिक प्रावधान जिला न्यायाधीश स्तर पर AIJS के निर्माण को सक्षम बनाता है। सरकार के विचार में, समग्र न्याय वितरण प्रणाली को मजबूत करने के लिए एक उचित रूप से तैयार अखिल भारतीय न्यायिक सेवा महत्वपूर्ण है। यह एक उचित अखिल भारतीय योग्यता चयन प्रणाली के माध्यम से चयनित उपयुक्त रूप से योग्य नई कानूनी प्रतिभाओं को शामिल करने का अवसर प्रदान करेगा और साथ ही समाज के हाशिए पर पड़े और वंचित वर्गों को उपयुक्त प्रतिनिधित्व प्रदान करके सामाजिक समावेशन के मुद्दे को संबोधित करेगा।</p>
<p>राष्ट्रपति ने कहा कि आज हम संविधान में निहित मूल्यों का जश्न मनाते हैं और राष्ट्र के दैनिक जीवन में उन्हें बनाए रखने के लिए खुद को फिर से समर्पित करते हैं। न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल्य वे सिद्धांत हैं जिन पर हम एक राष्ट्र के रूप में खुद को संचालित करने के लिए सहमत हुए हैं। इन मूल्यों ने हमें स्वतंत्रता हासिल करने में मदद की। यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि इनका प्रस्तावना में विशेष उल्लेख है और ये हमारे राष्ट्र निर्माण प्रयासों का मार्गदर्शन करना जारी रखते हैं। उनका कहना था कि न्याय का उद्देश्य सबसे बेहतर तरीके से तभी पूरा हो सकता है जब इसे सभी के लिए सुलभ बनाया जाए। इससे समानता भी मजबूत होती है। हमें खुद से पूछना चाहिए कि क्या हर नागरिक न्याय पाने की स्थिति में है। आत्मनिरीक्षण करने पर हमें पता चलता है कि इस राह में कई बाधाएं हैं। लागत सबसे महत्वपूर्ण कारक है। भाषा जैसी अन्य बाधाएं भी हैं, जो अधिकांश नागरिकों की समझ से परे हैं।</p>
<p><strong>राष्ट्रपति ने कहा कि बेंच और बार में भारत की अनूठी विविधता का अधिक विविध प्रतिनिधित्व निश्चित रूप से न्याय के उद्देश्य को बेहतर ढंग से पूरा करने में मदद करता है। इस विविधीकरण प्रक्रिया को तेज करने का एक तरीका एक ऐसी प्रणाली का निर्माण हो सकता है जिसमें न्यायाधीशों को योग्यता आधारित, प्रतिस्पर्धी और पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से विभिन्न पृष्ठभूमि से भर्ती किया जा सके। एक अखिल भारतीय न्यायिक सेवा हो सकती है जो प्रतिभाशाली युवाओं का चयन कर सकती है और उनकी प्रतिभा को निचले स्तर से उच्च स्तर तक पोषित और बढ़ावा दे सकती है। बेंच की सेवा करने की इच्छा रखने वालों को देश भर से चुना जा सकता है ताकि प्रतिभाओं का एक बड़ा समूह बनाया जा सके। ऐसी प्रणाली कम प्रतिनिधित्व वाले सामाजिक समूहों को भी अवसर प्रदान कर सकती है।</strong></p>
<p>राष्ट्रपति ने कहा कि न्याय तक पहुँच को बेहतर बनाने के लिए हमें समग्र प्रणाली को नागरिक-केंद्रित बनाने का प्रयास करना चाहिए। हमारी प्रणालियाँ समय की देन हैं; अधिक सटीक रूप से कहें तो उपनिवेशवाद की देन हैं। इसके अवशेषों को मिटाने का काम जारी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि हम अधिक सचेत प्रयासों से सभी क्षेत्रों में उपनिवेशवाद के उन्मूलन के शेष भाग को गति दे सकते हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि संविधान दिवस मनाते समय हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि संविधान आखिरकार एक लिखित दस्तावेज ही है। यह तभी जीवंत होता है और जीवंत बना रहता है जब इसकी विषय-वस्तु को व्यवहार में लाया जाता है। इसके लिए व्याख्या की आवश्यकता होती है। उन्होंने हमारे संस्थापक दस्तावेज की अंतिम व्याख्याकार की भूमिका को बखूबी निभाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस न्यायालय के न्यायाधीशों ने न्यायशास्त्र के मानकों को लगातार ऊंचा उठाया है। उनकी कानूनी सूझबूझ और विद्वता सर्वोत्कृष्ट रही है। हमारे संविधान की तरह हमारा सर्वोच्च न्यायालय भी कई अन्य देशों के लिए आदर्श रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि एक जीवंत न्यायपालिका के साथ, हमारे लोकतंत्र का स्वास्थ्य कभी भी चिंता का विषय नहीं होगा।</p>
<figure id="attachment_5647" aria-describedby="caption-attachment-5647" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/H20230620133688.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/H20230620133688.jpg" alt="" width="2200" height="1467" class="size-full wp-image-5647" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/H20230620133688.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/H20230620133688-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/H20230620133688-1024x683.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/H20230620133688-768x512.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/H20230620133688-1536x1024.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/H20230620133688-2048x1366.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5647" class="wp-caption-text">भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू और उप-राष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ अपनी पत्नी के साथ</figcaption></figure>
<p>अखिल भारतीय न्यायिक सेवा (AIJS) के गठन के लिए एक व्यापक प्रस्ताव तैयार किया गया था और नवंबर, 2012 में सचिवों की समिति द्वारा इसे मंजूरी दी गई थी। देश में कुछ बेहतरीन प्रतिभाओं को आकर्षित करने के अलावा, यह न्यायपालिका में हाशिए के वर्गों और महिलाओं से सक्षम व्यक्तियों को शामिल करने में भी मदद कर सकता है। अप्रैल, 2013 में आयोजित मुख्यमंत्रियों और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के सम्मेलन में इस प्रस्ताव को एजेंडा आइटम के रूप में शामिल किया गया था और यह निर्णय लिया गया था कि इस मुद्दे पर आगे विचार-विमर्श और विचार-विमर्श की आवश्यकता है।​ प्रस्ताव पर राज्य सरकारों और उच्च न्यायालयों की राय मांगी गई थी। अखिल भारतीय न्यायिक सेवा के गठन पर राज्य सरकारों और उच्च न्यायालयों के बीच मतभेद था। जहाँ कुछ राज्य सरकारें और उच्च न्यायालय प्रस्ताव के पक्ष में थे, वहीं कुछ अखिल भारतीय न्यायिक सेवा के गठन के पक्ष में नहीं थे, जबकि कुछ अन्य केंद्र सरकार द्वारा तैयार किए गए प्रस्ताव में बदलाव चाहते थे।</p>
<p>जिला न्यायाधीशों के पदों पर भर्ती में सहायता करने तथा सभी स्तरों पर न्यायाधीशों/न्यायिक अधिकारियों की चयन प्रक्रिया की समीक्षा के लिए न्यायिक सेवा आयोग के गठन का मामला भी 3 और 4 अप्रैल, 2015 को आयोजित मुख्य न्यायाधीशों के सम्मेलन के एजेंडे में शामिल किया गया था, जिसमें यह संकल्प लिया गया था कि जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए रिक्तियों को शीघ्रता से भरने के लिए मौजूदा प्रणाली के भीतर उपयुक्त तरीके विकसित करने के लिए संबंधित उच्च न्यायालयों को स्वतंत्र छोड़ दिया जाए । उच्च न्यायालयों तथा राज्य सरकारों से प्राप्त विचारों के साथ अखिल भारतीय न्यायिक सेवा के गठन का प्रस्ताव भी 5 अप्रैल, 2015 को आयोजित मुख्यमंत्रियों तथा उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के संयुक्त सम्मेलन के एजेंडे में शामिल किया गया था ।</p>
<p><strong>अखिल भारतीय न्यायिक सेवा की स्थापना के प्रस्ताव पर 16 जनवरी 2017 को विधि एवं न्याय मंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में पात्रता, आयु, चयन मानदंड, योग्यता, आरक्षण आदि बिंदुओं पर फिर से चर्चा की गई। इस बैठक में विधि एवं न्याय राज्य मंत्री, भारत के अटॉर्नी जनरल, भारत के सॉलिसिटर जनरल, न्याय विभाग, विधिक मामलों के विभाग और विधायी विभाग के सचिव उपस्थित थे। मार्च, 2017 में संसदीय परामर्शदात्री समिति और 22.02.2021 को अनुसूचित जातियों/अनुसूचित जनजातियों के कल्याण संबंधी संसदीय समिति की बैठक में भी एआईजेएस की स्थापना पर विचार-विमर्श किया गया। प्रमुख हितधारकों के बीच मौजूदा मतभेद को देखते हुए, वर्तमान में अखिल भारतीय न्यायिक सेवा की स्थापना के प्रस्ताव पर कोई आम सहमति नहीं है।</strong></p>
<p>क्या ऐसे विचार राजनीतिक क्षेत्र में लागू नहीं हो सकता है। पंचायत से संसद तक चुनाव पद्धति को समाप्त कर एक राज्यीय-राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा का आयोजन किया जा सकता है?  पंचायत से लेकर विधान सभा, विधान परिषद के रास्ते लोकसभा और राज्यसभा में अपना स्थान प्राप्त करने के लिए अभ्यर्थियों को परीक्षा में बैठना और उत्तीर्ण करना आवश्यक और बाध्यकारी नहीं बनाया जा सकता ? जब भारत का निर्वाचन आयोग पर ही समय-समय पर &#8216;उंगलियां उठती&#8217; रही है। राज्यपालों या राष्ट्रपति की नियुक्ति राष्ट्रीय मेधावी परीक्षा के आधार पर नहीं हो सकता है? अगर ऐसा होता है तो पंचायत से लेकर विधानसभा, विधान परिषद्, लोकसभा और राज्यसभा में सदस्यों की गुणवत्ता तो बढ़ेगी ही, इन संवैधानिक सभाओं में शिक्षित, विचारवान, संवेदनशील व्यक्तियों का जमघट होगा। इससे राष्ट्र का कल्याण तो होगा ही, समाज के प्रत्येक स्तर पर गुणवत्ता का स्तर भी बढ़ेगा।</p>
<p>चुनाव निगरानी संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स के अनुसार, लोकसभा चुनाव 2024 में 8,337 उम्मीदवारों में से 20 प्रतिशत ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं। लगभग 14 प्रतिशत ने गंभीर आपराधिक मामले घोषित किए हैं जिनमें बलात्कार, हत्या, हत्या के प्रयास और महिलाओं के खिलाफ अपराध से संबंधित आरोप शामिल हैं। एडीआर ने इन आम चुनावों में 8,360 उम्मीदवारों में से 8,337 के स्व-शपथ पत्रों का विश्लेषण किया। इनमें से 1,333 उम्मीदवार राष्ट्रीय पार्टियों से, 532 उम्मीदवार राज्य पार्टियों से, 2,580 उम्मीदवार पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त पार्टियों से और 3,915 उम्मीदवार स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ रहे हैं। एडीआर द्वारा विश्लेषण किए गए लोकसभा चुनाव 2024 में 8,337 उम्मीदवारों में से 1,643 (20 प्रतिशत) ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं। </p>
<p>एडीआर के अनुसार, लोकसभा चुनाव 2024 में चुनाव लड़ने वाले लगभग 1,191 (14 प्रतिशत) उम्मीदवारों ने गंभीर आपराधिक मामले घोषित किए हैं, जिनमें बलात्कार, हत्या, हत्या का प्रयास, अपहरण, महिलाओं के खिलाफ अपराध आदि से संबंधित आरोप शामिल हैं। पार्टियों में भारतीय जनता पार्टी के 440 उम्मीदवारों में से 191 (43 प्रतिशत), कांग्रेस के 327 उम्मीदवारों में से 143 (44 प्रतिशत), बसपा के 487 उम्मीदवारों में से 63 (13 प्रतिशत), बसपा के 487 उम्मीदवारों में से 33 (63 प्रतिशत) एडीआर की रिपोर्ट में कहा गया है कि सीपीआई (एम) द्वारा मैदान में उतारे गए 52 उम्मीदवारों और 3,903 निर्दलीय उम्मीदवारों में से 550 (14 प्रतिशत) ने अपने हलफनामों में अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं।</p>
<p><strong>यह तो लोकसभा की बात हुई। एडीआर के अनुसार भारत भर में राज्य विधानसभाओं में लगभग 44 प्रतिशत विधायकों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं। विश्लेषण में देश भर में राज्य विधानसभाओं और केंद्र शासित प्रदेशों में वर्तमान विधायकों के स्व-शपथ पत्रों की जांच की गई। यह डेटा विधायकों द्वारा उनके हालिया चुनाव लड़ने से पहले दायर किए गए हलफनामों से निकाला गया था। विश्लेषण में 28 राज्य विधानसभाओं और दो केंद्र शासित प्रदेशों में सेवारत 4,033 व्यक्तियों में से कुल 4,001 विधायकों को शामिल किया गया। एडीआर ने कहा कि विश्लेषण किए गए विधायकों में से 1,136 या लगभग 28 प्रतिशत ने अपने खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले घोषित किए हैं, जिनमें हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण और महिलाओं के खिलाफ अपराध से संबंधित आरोप शामिल हैं।</strong></p>
<figure id="attachment_5648" aria-describedby="caption-attachment-5648" style="width: 1200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/PR-1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/PR-1.jpg" alt="" width="1200" height="900" class="size-full wp-image-5648" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/PR-1.jpg 1200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/PR-1-300x225.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/PR-1-1024x768.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/PR-1-768x576.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1200px) 100vw, 1200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5648" class="wp-caption-text">भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू संसद की ओर</figcaption></figure>
<p>इतना ही नहीं, रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 2016-17 और 2021-22 के बीच 10,122.03 करोड़ रुपये के दान की घोषणा की, इसके बाद कांग्रेस (1,547.43 करोड़ रुपये) और तृणमूल कांग्रेस (823.30 करोड़ रुपये) का स्थान रहा। इसमें कहा गया है कि भाजपा द्वारा घोषित कुल चंदा अन्य सभी राष्ट्रीय दलों द्वारा घोषित कुल चंदे से तीन गुना से अधिक है। 4,614.53 करोड़ रुपये का दान, कुल का लगभग 28 प्रतिशत, कॉर्पोरेट क्षेत्र से प्राप्त हुआ और 2,634.74 करोड़ रुपये (16.03 प्रतिशत) अन्य स्रोतों से प्राप्त हुआ। एडीआर ने कहा कि 80 प्रतिशत से अधिक दान, लगभग 13,190.68 करोड़ रुपये, राष्ट्रीय दलों को और 3,246.95 करोड़ रुपये (19.75 प्रतिशत) क्षेत्रीय दलों को प्राप्त हुए।</p>
<p>काश !!! राष्ट्रपति महोदया कभी देश में विधायकों और सांसदों पर &#8216;उनके विधानपालिका और संसदीय क्षेत्रों के विकास के नाम पर होने वाले खर्चों की तुलना उक्त क्षेत्रों में हुए विकासों से करती।  लेकिन ऐसा नहीं होता। सरकारी आंकड़ों को यह जोड़-घटाव-गुणा करते हैं तो सं 2011-12 से लेकर आज तक देश के 4123 विधायकों और लोक सभा के 543 तथा राज्य सभा के 245 सांसदों को उनके कोष में 256100 करोड़ रुपयों का आवंटन किया गया है। राशियां पानी की तरह बहाया भी गया है। लेकिन शायद विकास का कार्य भी उसी पानी में बह गया। अगर ऐसा नहीं है तो आज भारत के विभिन्न राज्यों के सम्मानित विधायक और विभिन्न रेयान तथा केंद्र शासित प्रदेशों से दिल्ली में लोकसभा और राज्यसभा में बैठने वाले सांसद इतने अमीर कैसे होते? आज सैकड़ों विधायक और सांसद ऐसे हैं जिनके विरुद्ध भारत के विभिन्न न्यायालयों में मुकदमें चल रहे हैं, लंबित हैं। </p>
<p>लोक सभा के 543 और राज्य सभा के 245 सांसदों के अलावे देश से २८ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुछ 4123 विधायक हैं। मसलन: आंध्र प्रदेश &#8211; 175, अरुणाचल प्रदेश &#8211; 60, असम &#8211; 126, बिहार &#8211; 243, छत्तीसगढ़ &#8211; 90, दिल्ली &#8211; 70, गोवा &#8211; 40, केरल &#8211; 140, मध्यप्रदेश &#8211; 288, मणिपुर &#8211; 60, मेघालय &#8211; 60, मिजोरम &#8211; 40, नागालैंड &#8211; 60, ओडिशा &#8211; 147, पुडुचेरी &#8211; 30, त्रिपुरा &#8211; 60, उत्तर प्रदेश &#8211; 403, उत्तराखंड &#8211; 70, पश्चिम बंगाल &#8211; 294, गुजरात &#8211; 182, हरयाणा &#8211; 90, हिमाचल प्रदेश &#8211; 68, जम्मू और कश्मीर &#8211; 90, झारखण्ड &#8211; 81, कर्नाटक &#8211; 224, पंजाब &#8211; 117, राजस्थान &#8211; 200, सिक्किम &#8211; 32, तमिल नाडु &#8211; 234, तेलंगाना &#8211; 119 &#8211; आंकड़ों के अनुसार राज्यों के विधायकों को उनके विधानपालिका क्षेत्र के विकास हेतु प्रत्येक वर्ष 3 करोड़ रुपये (3 करोड़ x 5 वर्ष = 15 करोड़) और सांसदों को 5 करोड़ प्रतिवर्ष (5 करोड़/वर्ष x 5 वर्ष = 25 करोड़) दिए जाते हैं। जिससे वे अपने क्षेत्र का विकास कर सकें। लेकिन आज जो स्थिति हैं वह सर्वविदित हैं। </p>
<p><strong>वापस संविधान की बात करते हैं। आज़ादी के बाद और खासकर भारत का संविधान देश में लागू होने के बाद विगत 74 वर्षों में अब तक 103 संशोधन किये गए हैं संविधान में और इसके लिए 124 संविधान संशोधन विधेयक पारित किये गए।28 मार्च 1989 संविधान के 61 वें संशोधन कर मताधिकार के लिए उम्र 21 से घटाकर 18 किया गया, क्या जिस उद्देश्य से यह किया गया था, उस उद्येश्य को प्राप्त कर सका? 12 दिसंबर, 2002 को संविधान के 86 संसोधन के द्वारा चौदह वर्ष की आयु तक शिक्षा का अधिकार प्रदान किया गया।  एएसईआर के एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में 3-16 वर्ष की आयु के 50 से अधिक फीसदी बच्चे पढ़-लिक नहीं सकते।  इतना ही नहीं 5 वर्ष से 16 वर्ष की आयु वाले बच्चों को गणितीय ज्ञान नहीं है। आकंड़ा तो यह भी कहता है की देश में 2021 तक 287 मिलियन भारतीय पढ़-लिख नहीं सकते। </strong></p>
<p>आज तो कुछ और हो रहा है। विद्यालय के किताबों से संविधान का प्रस्तावना ही हटा दिया गया है। एनसीईआरटी की किताबों से संविधान की प्रस्तावना को हटा दिया गया है। छोटी क्लास से ही बच्चे संविधान और देश को मिली आजादी का महत्व इस प्रस्तावना के जरिए जानना शुरू करते हैं लेकिन ठीक उसी वर्ग को अब संविधान की प्रस्तावना पढ़ने से रोक दिया गया है। अब यह प्यारा शब्द &#8230;हम भारत के लोग&#8230; छोटी क्लास के बच्चे नहीं पढ़ सकेंगे। इस साल, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने कक्षा 3 और कक्षा 6 की कई पाठ्यपुस्तकों से संविधान की प्रस्तावना को हटा दिया है। प्रस्तावना की जगह भाषा और पर्यावरण अध्ययन (ईवीएस) जैसे विषय पढ़ाए जा रहे हैं। प्रस्तावना पहले दोनों ग्रेडों की पुस्तकों के पहले पन्नों में छपती थी। प्रस्तावना कक्षा III की सभी पाठ्यपुस्तकों में नहीं है, हालाँकि यह कक्षा VI की केवल दो पुस्तकों में शामिल है: हिंदी पुस्तक मल्हार और विज्ञान पुस्तक क्यूरियोसिटी। हाल ही में लागू राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष कक्षा III और VI के लिए नई पाठ्यपुस्तकें जारी की गई हैं। </p>
<p>एनसीईआरटी के पाठ्यचर्या अध्ययन और विकास विभाग की प्रमुख प्रोफेसर रंजना अरोड़ा के अनुसार, इस दावे का समर्थन करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं है कि प्रस्तावना को एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकों से हटा दिया गया। प्रस्तावना, मौलिक कर्तव्य, मौलिक अधिकार और राष्ट्रगान भारतीय संविधान के उन पहलुओं में से हैं जिन पर एनसीईआरटी अब पहली बार उच्च प्राथमिकता दे रहा है। यह समझ कि केवल प्रस्तावना ही संविधान और संवैधानिक मूल्यों को प्रतिबिंबित करती है, त्रुटिपूर्ण और संकीर्ण सोच है। बच्चों को प्रस्तावना के साथ-साथ मौलिक कर्तव्यों, मौलिक अधिकारों और राष्ट्रगान से संवैधानिक मूल्य क्यों नहीं प्राप्त होने चाहिए? हम समग्र विकास के लिए इन सभी को समान महत्व देते हैं।&#8221; एनसीईआरटी और अन्य स्कूल बोर्डों ने तो महात्मा गांधी, भगत सिंह, अंबेडकर से जुड़े कई चैप्टर पिछले साल ही हटा दिए थे। मुगलों से जुड़े इतिहास के कई चैप्टर तमाम किताबों से हटा दिए गए हैं। अकबर को महान बताने वाले चैप्टर हटाए जा चुके हैं। यह सब एक साजिश के तहत हो रहा है। देश की आजादी से जुड़ा दक्षिणपंथियों का कोई इतिहास नहीं है, इसलिए यह सारी छटपटाहट दिखती है। जिनकी भूमिका आजादी की लड़ाई में रही है, वे उनका नामोनिशान मिटाने पर तुल गए हैं।</p>
<p>फिर वापस न्यायपालिका के तरफ चलते हैं। कभी सोचे हैं कि भारत में तक़रीबन 1,99,404.76 लोगों पर एक अदालत है। अदालतों में हम जिला अदालत से लेकर भारत के सर्वोच्च न्यायालय तक मानते हैं। भारत में कुल 25 उच्च न्यायालय हैं और कुछ केंद्र शासित प्रदेशों का न्यायिक भार एक से अधिक उच्च न्यायालयों पर है। देश में तक़रीबन 672 जिला न्यायालय हैं और एक सर्वोच्च न्यायालय। यानी 698 न्यायालय। देश की आवादी अगर हम 134 करोड़ माने तो इस संख्या के आधार पर और देश में उपलब्ध न्यायालयों की संख्या के आधार पर देश के कुल 199404.76 लोगों को न्यायिक न्याय दिलाने का भार एक न्यायालय पर है। देश में तक़रीबन 14 लाख &#8216;निबंधित&#8217; सम्मानित अधिवक्तागण हैं। आज दिल्ली में जिस कदर न्यायालय &#8216;सुरक्षा कवच&#8217; के अधीन है, अथवा कुछ ख़ास प्रदेश के मुख्यालयों में स्थित न्यायालयों को जो &#8216;सुरक्षा-कवच&#8217; के अधीन रखा गया हैं; को छोड़कर देश के अन्य न्यायालयों में उपलब्ध सुरक्षा व्यवस्था &#8211; एक शोध का विषय है, आप माने अथवा नहीं। </p>
<p>विगत दिनों रामप्रसाद बिस्मिल, अस्फाकुल्लाह खान, रोशन सिंह, प्रेम कृष्णा खन्ना, बनवारी लाल, हरगोविंद, इंद्रभूषण, जगदीश, बनारसी इत्यादि जैसे क्रांतिकारियों, जिन्होंने मातृभूमि की स्वाधीनता के लिए कुछ भी कर गुजरने को सज्ज थे, किये; उनके ही शहर शाहजहांपुर में एक 57-वर्षीय अधिवक्ता को &#8216;भूमि विवाद&#8217; में अदालत के प्रांगण में ढ़िशूम-ढ़िशूम कर दिया गया। अधिवक्ता मृत्यु को प्राप्त किये। मोहनदास करमचंद गाँधी के चम्पारण में, जहाँ से गाँधी भारत की आज़ादी और अंग्रेजी अफसरानों के अत्याचार के खिलाफ अपना आंदोलन प्रारम्भ किये थे, कुछ अपराधी किस्म के लोग अदालत परिसर में ही एक कर्मचारी को ठांय-ठांय कर मृत्यु को प्राप्त करा दिए। इसी तरह पंजाब के सोलान के एक अदालत में एक कैदी को, जब उसे एक मुकदमें की सुनवाई के लिए अदालत में पेश किया जा रहा था, ढ़िशूम-ढ़िशूम कर दिया और वह वहीँ अंतिम सांस लिया।आपको याद भी होगा कि विगत दिनों दिल्ली के रोहिणी अदालत में दो दिल्ली पुलिसकर्मी सहित एक अधिवक्ता पर बेतहाशा गोलियों की बारिश की गयी। तीन व्यक्ति वहीँ मृत्यु को प्राप्त किये। तीन महिला विधवा हो गई। तीनों के बच्चे अनाथ हो गए। जब घटना घटी, सम्मानित न्यायमूर्ति अदालत में उपस्थित थे। </p>
<p>भारत सरकार के एक आंकड़े के अनुसार इस वर्ष के मई महीने तक भारत के विभिन्न अदालतों में &#8211; सर्वोच्च न्यायालय से जिला न्यायालयों तक &#8211; कुल चार करोड़ सात लाख मुकदमें लाल रंग के वस्त्रों में बंधे हैं। इसमें तक़रीबन 87.4 फीसदी सबॉर्डिनेट कोर्ट्स में लंबित हैं। करीब 12.4 फीसदी उच्च न्यायालयों में लंबित हैं। इसी तरह कुल 71,411 मुकदमें देश के सर्वोच्च न्यायालय में लंबित हैं। सर्वोच्च न्यायालय में लंबित मुकदमों में कुल 56,365 सीविल मुकदमें हैं और 15,076 आपराधिक मुकदमें लंबित हैं। इतना ही नहीं, करीब 10,491 लंबित मुकदमें &#8216;डिस्पोजल&#8217; के लिए दशकों के पड़े हैं। इसी तरह देश के सभी 25 उच्च न्यायालयों में कुल 59,55,907 मुकदमें, जिसमें 42,99,954 सिविल मुकदमे हैं और 16,55,953 आपराधिक मुकदमे हैं। कई मुकदमे ऐसे हैं जिसमें &#8220;आदेश&#8221; नहीं लिखा गया है और &#8220;लंबित&#8221; हैं। न्यायिक व्यवस्था से जब भी आवाज उठती है सरकार अपना पल्लू झाड़ने की कोशिश करती है। लेकिन कभी किसी भी न्यायालयों से सम्बंधित कार्यकारिणी के सम्मानित लोग, निजी तौर पर देश की न्यायिक व्यवस्था को किस कदर वादी-प्रतिवादी के बीच &#8216;फ्रेंडली&#8217; बनाया जाय, अपने-अपने कक्षों से बाहर निकलकर देश के न्यायालयों में आये, शायद नहीं। वैसी स्थिति में आखिर सम्मानित न्यायमूर्ति, सम्मानित न्यायाधीश, सम्मानित अधिवक्तागण क्या कर सकते हैं ? </p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/why-only-all-india-judicial-service-there-can-be-an-examination-for-all-india-political-service-also">अखिल भारतीय न्यायिक सेवा ही क्यों, अखिल भारतीय राजनीतिक सेवा के लिए भी तो परीक्षा हो सकती है, अपराधियों का राजनीतिकरण तो नहीं होगा</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>केंद्रीय मंत्रिमंडल की ओर जाने वाली &#8216;पटना-जम्मू अर्चना एक्सप्रेस&#8217; में नहीं &#8216;बैठा&#8217; सके नीतीश कुमार अपने शयनकक्ष तक आने वाले तीन &#8216;संजयों&#8217; में संजय झा को, &#8216;कुर्सी&#8217; पर ललन सिंह का &#8216;कब्ज़ा&#8217;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 12 Jun 2024 06:41:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
		<category><![CDATA[bihar]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>रायसीना हिल (नई दिल्ली) : दिल्ली के पत्रकारों को शायद गूगल पर यह नहीं मिले, लेकिन पटना के श्री भोला बाबू की बात कल फिर सच साबित हो गयी। बाइस-वर्ष बाद भी 3289-3290 पटना-जम्मू अर्चना एक्सप्रेस के आगे जनता दल (यूनाइटेड) के आलाकमान और भारतीय जनता पार्टी समर्थित जनता दल (यूनाइटेड) के नीतीश कुमार सरकार [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/nitish-bowed-before-lalan-singh-made-him-minister">केंद्रीय मंत्रिमंडल की ओर जाने वाली &#8216;पटना-जम्मू अर्चना एक्सप्रेस&#8217; में नहीं &#8216;बैठा&#8217; सके नीतीश कुमार अपने शयनकक्ष तक आने वाले तीन &#8216;संजयों&#8217; में संजय झा को, &#8216;कुर्सी&#8217; पर ललन सिंह का &#8216;कब्ज़ा&#8217;</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>रायसीना हिल (नई दिल्ली) : दिल्ली के पत्रकारों को शायद गूगल पर यह नहीं मिले, लेकिन पटना के श्री भोला बाबू की बात कल फिर सच साबित हो गयी। बाइस-वर्ष बाद भी 3289-3290 पटना-जम्मू अर्चना एक्सप्रेस के आगे जनता दल (यूनाइटेड) के आलाकमान और भारतीय जनता पार्टी समर्थित जनता दल (यूनाइटेड) के नीतीश कुमार सरकार की नहीं चली। केंद्रीय मंत्रिमंडल की दिशा में &#8216;अर्चना एक्सप्रेस&#8217; की गति इतनी तेज थी कि नीतीश कुमार अपने शयनकक्ष तक आने वाले तीन &#8216;संजयों&#8217; में एक श्री संजय झा को केंद्रीय मंत्रिमंडल की कुर्सी पर नहीं बैठा पाए। यह इस बात को सिद्ध करता है कि &#8216;आज भी नीतीश कुमार को श्री राजीव रंजन @ ललन सिंह के प्रति संजय झा से अधिक &#8220;स्नेह&#8221; है और यह &#8220;स्नेह&#8221; विगत दिनों पटना में नीतीश कुमार के प्रति दिए गए &#8220;अपशब्दों&#8221; का परिणाम भी हो सकता है। रामचरितमानस में उद्धृत भी है &#8220;भय बिनु होत न प्रीत।&#8221;</strong><strong></p>
<p>जब अटल बिहार वाजपेयी दूसरी पारी में सरकार बनाए थे, उनके मंत्रिमंडल में &#8216;समता पार्टी&#8217; के रूप में नीतीश कुमार केंद्रीय मंत्रिमंडल में &#8216;रेल मंत्री&#8217; के रूप में रेल भवन में विराजमान हुए। यह कालखंड 19 मार्च, 1998 से 5 अगस्त, 1999 का था। नीतीश कुमार कुल एक वर्ष 139 दिन स्वतंत्र  भारत के 27वें रेल मंत्री थे। वाजपेयी &#8211; III में बाबू नीतीश कुमार 20 मार्च, 2001 से 22 मई, 2004 तक तीन वर्ष 363 दिनों के लिए पुनः रेल भवन में अपनी उपस्थिति दर्ज किये केंद्रीय रेल मंत्री के रूप में। इसी काल खंड में 3289-3290 संख्या के रूप में पटना से जम्मू के लिए एक नई ट्रेन चलाई गई जिसमें 15 डब्बे लगाए गए और पटना से जम्मू की करीब 1500 किलोमीटर की दूरी वाराणसी-लखनऊ-मोरादाबाद-सहारनपुर-अम्बाला कैंट-लुधियाना के रास्ते इस ट्रेन अपने गंतव्य पर पहुँचने के लिए 30 घंटे का समय दिया गया। वैसे नीतीश बाबू के मन में &#8216;शायद&#8217; वैष्णोदेवी की पूजा-अर्चना के निमित्त इस ट्रेन को चलाना था, इसलिए इस ट्रेन का नाम &#8216;पटना-जम्मू अर्चना एक्सप्रेस&#8217; रखा गया। </p>
<p>लेकिन पटना से दिल्ली तक के राजनीतिक गलियारे में बिजली की तरह यह बात फ़ैल गयी कि ट्रेन का नामकरण &#8220;श्री राजीव रंजन सिंह @ लल्लन सिंह ​एक निकट संबंधी का नाम पर किया गया है।&#8221; संयोग से &#8220;अर्चना&#8221; उनका नाम है। इस ट्रेन के उद्घाटन के बाद पटना में शायद की कोई राजनेता थे, चाहे जनता दल (युनाइटेड) के हों या राष्ट्रीय जनता दल के या लोक शक्ति पार्टी के या अन्य, जो &#8220;अर्चना एक्सप्रेस&#8217; के नाम को &#8220;ललन सिंह की बहन से नहीं जोड़े थे। लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी श्रीमती राबड़ी देवी आदि नेता तो खुलेआम &#8216;सार्वजनिक&#8217; रूप से इस बात को उठाया।</p>
<figure id="attachment_5524" aria-describedby="caption-attachment-5524" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/H20240610160485.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/H20240610160485.jpg" alt="" width="2200" height="1450" class="size-full wp-image-5524" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/H20240610160485.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/H20240610160485-300x198.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/H20240610160485-1024x675.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/H20240610160485-768x506.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/H20240610160485-1536x1012.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/H20240610160485-2048x1350.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5524" class="wp-caption-text">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीसरी पारी की तैयारी<br /></figcaption></figure>
<blockquote><p>इस घटना के बाद नीतीश &#8211; ललन बाबू के बीच &#8216;दरार&#8217; पड़ा और वह दरार रेलवे ठेकेदारी में ललन सिंह की &#8216;कटौती&#8217; सार्वजनिक &#8216;गाली-गलौज&#8217; की राजनीति में बदल गया । पटना के वातानुकूलित कक्ष में अनेकों बार संवाददाता सम्मेलन कर ललन सिंह नीतीश कुमार को खुलेआम अपशब्दों से अलंकृत किये। इतना ही नहीं, समयांतराल, एक बार ललन सिंह जनता दल (यूनाइटेड) के सात विधायकों को राष्ट्रीय जनता दल के दरवाजे तक ले गए। नीतीश कुमार &#8216;हक्का-बक्का&#8217; थे कहीं सरकार नं गिर जाय। पटना से लेकर दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, चेन्नई के अख़बारों में &#8216;अर्चना एक्सप्रेस के बहाने नीतीश कुमार &#8211; ललन सिंह की कहानियां &#8216;अपशब्दों&#8217; के साथ &#8216;शब्दों&#8217; में बसरने लगे। </p></blockquote>
<p>बहरहाल, वैसे दिल्ली के बड़े-बड़े &#8216;स्वयंभू महारथ&#8217; पत्रकार बंधु-बांधव से लेकर वातानुकूलित कक्ष में सिगरेट और विस्की का सेवन कर कलम और कंप्यूटर पर राजनीतिक समीक्षा लिखने वाले दावा करते हैं की वे बिहार के बख्तियारपुर वाले नीतीश कुमार को गर्दन भर पहचानते हैं। लेकिन पटना के डाक बंगला चौराहे से जो रास्ता गांधीमैदान की ओर उन्मुख है, नुक्कड़ पर बैठा भोला बाबू अपने प्रदेश के छात्र नेता से मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने वाले श्री कुमार साहब को भलीभांति जानते यहीं, पहचानते भी हैं। आधुनिक बिहार के राजनीतिक इतिहास में शायद श्री भोला बाबू से बेहतर बिहार के किसी भी नेता को नहीं जानने वाला नहीं है । </p>
<p>पटना के पत्रकार बंधु बांधव जो सन सत्तर के प्रारंभिक वर्षों से पत्रकारिता कर रहे हैं, श्री भोला बाबू के पास जानकारी लेने पहुँचते हैं। भोला बाबू पटना के गांधी मैदान की ओर जाने वाली सड़क पर दाहिने हाथ लखनऊ स्वीट्स हॉउस के सामने पान की दुकान से बीस कदम आगे पटना टेलीफोन विभाग के जम्फर के पास जूता की सिलाई मुद्दत से करते थे। उन दिनों उनकी &#8216;बैठकी&#8217; के बगल में एक &#8216;नऊआ&#8217; की दुकान भी थी जो पटना के मूंछ उभरती नेताओं का बाबड़ी सीटते थे। उसके बाद राजधानी होटल, एक परचून की दूकान आदि थी। </p>
<figure id="attachment_5525" aria-describedby="caption-attachment-5525" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/H20240610160439.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/H20240610160439.jpg" alt="" width="2200" height="1467" class="size-full wp-image-5525" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/H20240610160439.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/H20240610160439-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/H20240610160439-1024x683.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/H20240610160439-768x512.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/H20240610160439-1536x1024.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/H20240610160439-2048x1366.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5525" class="wp-caption-text">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीसरी पारी की तैयारी<br /></figcaption></figure>
<p>श्री भोला बाबू कहते थे &#8220;जयप्रकाश नारायण के आंदोलन के बाद कुकुरमुत्तों की तरह जितने नेता जन्म लिए, जब वे बूढ़े हो जायेंगे, दंतहीन हों जाएँ, लेकिन बत्तीस क्या बासठ दांत बड़ी और छोटी अमाशय में विराजमान रहेगा। नीतीश कुमार जी को जो मुंह के दांत से नहीं, पेट के दांत से ऐसा काटेंगे, सामने वाला समझ भी नहीं पाएंगे। यह कार्य प्रदेश के विकास के लिए, लोगों के रोजी-रोटी के लिए नहीं, बल्कि अपने हितों के रक्षार्थ किया जायेगा। मूंछ नहीं रखने वाले भी मूंछ की लड़ाई लड़ेंगे।&#8221; श्री भोला बाबू की बातें भले पचास वर्ष पुरानी हो गई है, लेकिन जिस समय इन शब्दों का उल्लेख हुआ था, उस समय पटना के डाक बंगला चौराहे पर, फ़्रेज़र रोड पर, बुद्ध मार्ग पर, आकाशवाणी के पास यही नेता लोग मक्खी जैसा भिनभिनाते थे ताकि समाचार एजेंसी से श्री बी एन झा जी, श्री केशरी जी, श्री धैर्या बाबू, श्री दुर्गानाथ झा, श्री सीता शरण जी, श्री केश्वाव कुमार, श्री फिलीप साहब, श्री मुक्त किशोर, श्री कृपाकरण जी, श्री उपाध्याय जी कुछ शब्द निर्गतकर दें, कुछ शब्द अख़बारों के पन्नों पर प्रकाशित कर दें। खैर। </p>
<p>श्री भोला जी यह भी कहते थे कि &#8220;आदमी के शरीर में छोटी और बड़ी अमाशय की लम्बाई मिलकर 15 से 16 फुट होता है। लेकिन बिहार के इन नेताओं का अमाशय उनकी शरीर की लम्बाई से पांच-छह गुना अधिक है। आने वाले दिनों में देखिएगा कि कब ये सभी नेता लोग अपने-अपने स्वार्थ सिद्धि के लिए सामने वाले को अपने अमाशय में लपेट लेते हैं। आज पचास वर्ष बाद भोला जी बहुत याद आ रहे हैं, खासकर विगत दिनों जब श्री नरेंद्र दामोदर मोदी की अगुआई में भारतीय जनता पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) के नीतीश कुमार और तेलगु देशम पार्टी के श्री चंद्रबाबू नायडू के समर्थन से तीसरी बार रायसीना हिल पर शपथ ले रहे थे। अगर नीतीश कुमार और श्री नायडू आगे नहीं आते तो सम्मानित श्री नरेंद्र मोदी अपने दूसरे कालखंड में अपने द्वारा बनाये गए नए संसद भवन में तीसरी पारी कैसे खेलते ?</p>
<p>लेकिन उससे भी बड़ा प्रश्न तो अभी आने वाला है। बस समय का इतंज़ार करें क्योंकि क्योंकि नीतीश कुमार और चंद्र बाबू नायडु इन बातों का चिंतन जरूर करेंगे कि कहीं आने वाले दिनों में उन्हें वह दिन देखना नहीं पड़े, जब एक दिन सुबह वह उठेंगे तो उनके सारे सांसद मय पार्टी के भाजपा में शामिल हो चुके होंगे और वे निपट अकेले खड़े होंगे। में श्री नरेंद्र मोदी की महारथ उनके कनिष्ठ और गृह मंत्री श्री अमित शाह से बहुत काम हैं। इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि आने वाले दिनों में भारत के विद्यालयीय और उच्चतर विद्यालयीय पाठ्यक्रमों में &#8216;राजनीतिक कूटनीति&#8217; में श्री शाह के लिए एक अलग अध्याय जुड़ जाय क्योंकि शरद पवार और उद्धव ठाकरे यह दर्द झेल चुके हैं।</p>
<figure id="attachment_5526" aria-describedby="caption-attachment-5526" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/Cover-2.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/Cover-2.jpg" alt="" width="2200" height="1467" class="size-full wp-image-5526" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/Cover-2.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/Cover-2-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/Cover-2-1024x683.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/Cover-2-768x512.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/Cover-2-1536x1024.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/Cover-2-2048x1366.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5526" class="wp-caption-text">राजीव रंजन सिंह कैबिनेट मंत्री का शपथ लेने के बाद हस्ताक्षर करते<br /></figcaption></figure>
<p><strong>इतना ही नहीं, भारतीय राजनीतिक उठापटक का वर्तमान इतिहास इस बात का गवाही देता है कि कई वर्ष तक पर्दे के पीछे से बार बार भाजपा की मदद करने वाले नवीन पटनायक आज अपने राज्य से बेदखल हो चुके हैं। न जाने किस अज्ञात दबाव में भाजपा से डरने वाली मायावती जी भारत की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी से शून्य पर पहुँच चुकी है। कभी पंजाब में दबदबा रखने वाले भाजपा के लंबे समय से गठबंधन सहयोगी रहे अकाली आज एक सीट पर सिमट गए हैं। भाजपा की सोहबत में रह कर कभी तमिलनाडु की बहुत बड़ी शक्ति होने वाली जयललिता की पार्टी आज मृतप्राय हो चुकी है। हरियाणा में कुछ साल पहले नई शक्ति के तौर पर उभरी जजपा एक ही बार भाजपा के मोहपाश में फंसी और राजनीतिक रसातल में पहुंच गई। भाजपा के साथ कश्मीर में सरकार चलाने वाली महबूबा मुफ्ती की पार्टी का आज कुछ पता नहीं है। और ख़ुद नीतीश कुमार बिहार की सबसे बड़ी शक्ति से घटकर विधानसभा चुनाव में तीसरे नंबर की पार्टी बन गए थे। भाजपा से पुराने रिश्तों के कारण ही चंद्रबाबू नायडू एक ज़माने में आंध्र प्रदेश के सर्वोच्च नेता से घटते घटते ग़ायब हो गए थे और फिर क़िस्मत से वापस आए हैं। ममता बनर्जी ने समय रहते भाजपा से अपना संबंध खत्म कर दिया था और वे आज भी शान से बंगाल की मुख्यमंत्री है। खैर। </strong></p>
<p>बहरहाल, श्री नरेन्द्र मोदी 9 अगस्त से दो माह पूर्व 9 जून, 2024 को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में लगातार तीसरी बार भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने प्रधानमंत्री और उनके मंत्रिमंडल के  सहयोगियों को शपथ दिलाई।प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया: &#8220;आज शाम आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। मैं 140 करोड़ देशवासियों की सेवा करने तथा देश को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए मंत्रिपरिषद के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध हूं।&#8221; इस बार, मोदी और नयी मंत्रिपरिषद के शपथ ग्रहण समारोह में राजनीतिक नेताओं और समाज के विभिन्न क्षेत्रों की जानी-मानी हस्तियों के अलावा ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्यों के साथ ही सफाई कर्मचारी और मजदूर भी शामिल हुए. इस भव्य आयोजन के लिए राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में लगभग 9,000 लोग उपस्थित थे। </p>
<p>प्रधानमंत्री ने यह भी लिखा कि &#8220;आज शपथ लेने वाले सभी साथियों को बहुत-बहुत बधाई। मंत्रियों की यह टीम युवा जोश और अनुभव का बेहतरीन संगम है। हम सभी देशवासियों का जीवन बेहतर बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। मैं शपथ ग्रहण समारोह का हिस्सा बनने वाले सभी विदेशी गणमान्य व्यक्तियों का आभारी हूँ। भारत हमेशा मानवता की प्रगति की दिशा में अपने सम्मानित सहयोगियों के साथ मिलकर काम करेगा। राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में आज शाम हुए समारोह में मैंने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। मैं और मंत्रिपरिषद के मेरे सहयोगी, 140 करोड़ देशवासियों की सेवा करने और देश को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। एनडीए सरकार में मंत्री के रूप में शपथ लेने वाले सभी साथियों को बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं। मंत्रियों की इस टीम में युवा जोश और अनुभव का अद्भुत संगम है। हम सभी देशवासियों का जीवन बेहतर बनाने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखेंगे। मैं शपथ ग्रहण समारोह का हिस्सा बने दुनियाभर के गणमान्य अतिथियों का भी हृदय से आभारी हूं। विश्व बंधु के रूप में भारत सदैव अपने निकट साझेदारों के साथ मिलकर मानवता के हित में काम करता रहेगा।&#8221;</p>
<p>नरेंद्र मोदी के साथ, राजनाथ सिंह, अमित शाह, नितिन गडकरी, निर्मला सीतारमण और एस जयशंकर सहित भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने राष्ट्रपति भवन में कैबिनेट मंत्रियों के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मोदी और 30 कैबिनेट मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। 73 वर्षीय मोदी ने ईश्वर के नाम पर शपथ ली। जवाहरलाल नेहरू के बाद मोदी लगातार तीसरी बार यह उपलब्धि हासिल करने वाले दूसरे प्रधानमंत्री हैं। वैसे हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनावों में, भाजपा बहुमत हासिल करने में विफल रही। इस वजह से वह उन सहयोगी दलों पर निर्भर हो गई, जिनके सांसदों ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली। मोदी की कैबिनेट में उनके अलावा 30 मंत्री शामिल हुए जिसमें पांच मंत्रियों (स्वतंत्र प्रभार) को जगह मिली। इसके अलावा 36 राज्य मंत्रियों को शपथ दिलाई गई। शपथ ग्रहण कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी शामिल हुए। भारत के पड़ोसी देशों के नेता, मसलन मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना, नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल &#8216;प्रचंड&#8217; और भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे ने समारोह में हिस्सा लिया। </p>
<p>मोदी &#8216;मॉडिफाइएड&#8217; वाली तीसरे कालखंड में राजनाथ सिंह, अमित शाह, नितिन गडकरी के अलावे जेपी नड्डा, शिवराज सिंह, निर्मला सीतरमण, एस जयशंकर, मनोहर लाल खट्टर, एचडी कुमारस्वामी, पीयूष गोयल, धर्मेंद्र प्रधान, जीतनारम मांझी, राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह, सर्वानंद सोनेवाल, डॉक्टर वीरेंद्र कुमार, राम मोहन नायडू, प्रह्लाद जोशी, जुएल ओरांव, गिरिराज सिंह, अश्विनी वैष्णव, ज्योतिरादित्य सिंधिया, भूपेंद्र यादव, गजेंद्र सिंह शेखावत, अन्नपूर्णा देवी, किरण रिजिजू, हरदीप पुरी, मनसुख मांडविया, जी किशन रेड्डी, चिराग पासवान और सीआर पाटिल कैबिनेट मंत्री बने।  इसके अलावे राव इंद्रजीत सिंह,  जितेंद्र सिंह, अर्जुन राम मेघवाल, प्रतापराव गणपतराव जाधव और जयंत चौधरी को राज्यमंत्री   (स्वतंत्र भार) दिया गया जबकि जितिन प्रसाद, श्रीपद यशो नाइक, पंकज चौधरी, कृष्णपाल गुर्जर, रामदास अठावले, रामनाथ ठाकुर, नित्यानंद राय, अनुप्रिया पटेल, वी सोमन्ना, चंद्रशेखर पेम्मासानी, एसपी सिंह बघेल, शोभा करांदलाजे, कीर्तिवर्धन सिंह, बीएल वर्मा, शांतनु ठाकुर, सुरेश गोपी, एल मुरगन, अजय टमटा, बंदी संजय, कमलेश पासवान, भागीरथ चौधरी, सतीश दुबे, संजय सेठ, रवनीत सिंह बिट्टू, दुर्गादास सुइके, रक्षा खडसे, सुकांता मजूमदार, सावित्री ठाकुर, तोखन साहू, राजभूषण चौधरी, श्रीपति वर्मा, श्रीनिवास वर्मा नरसापुरम, हर्ष मल्होत्रा, नीमूबेन बमभानिया, मुरलीधर मोहोल, जॉर्ज कुरियन और  पबित्रा मार्गेरिटा राज्यमंत्री बने । </p>
<p>नीतीश कुमार से छत्तीस का आंकड़ा रखने वाले भारतीय जनता पार्टी के गठबंधन सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नवनिर्वाचित सांसद चिराग पासवान ने नरेंद्र मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में मंत्री पद की शपथ ली।  दिवंगत पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान का राजनीतिक सफर काफी महत्वपूर्ण रहा है। वे 2014 में लोकसभा के लिए चुने गए थे और अपने कार्यकाल के दौरान विभिन्न समितियों के सदस्य रहे. सितंबर 2020 से वे उद्योग संबंधी स्थायी समिति के सदस्य थे। 2024 के लोकसभा चुनाव में चिराग पासवान हाजीपुर लोकसभा क्षेत्र से जीते। 2014 के चुनाव में चिराग पासवान ने जमुई लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था। उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल के निकटतम प्रतिद्वंद्वी सुधांशु शेखर भास्कर को हराकर सीट जीती थी। पासवान ने 2019 के चुनाव में अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भूदेव चौधरी को हराकर अपनी सीट बरकरार रखी।</p>
<p>ये तो बात हुई मंत्री और मंत्रिमंडल बनने की। लेकिन दिल्ली के द्वारका सेक्टर-4, जहाँ बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र, वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ-साथ उनके &#8216;शयन कक्ष&#8217; तक बेरोक-टोक के तीन संजयों &#8211; संजय गाँधी, संजय कुमार सिंह और संजय कुमार झा) में संजय झा का भी आलीशान आवास है, के लोगों का कहना है कि &#8220;यह तो महज एक शुरुआत है। बिहार के मतदाता की सोच इतनी नहीं है कि वे अपने हितों की बात सोचे। समय दूर नहीं है जब बिहार को विशेष दर्जा की बात को लेकर नीतीश कुमार खेला करेंगे। दुर्भाग्य यह है कि आजादी के बाद 76 वर्षों में विगत 34 वर्षों से (1990 के बाद) कांग्रेस पार्टी बिहार में नहीं है। अगर बिहार को नेश्तोनाबूद करने में कांग्रेस के नेताओं का हाथ रहा (यह सच है), तो इन 34 वर्षों में गैर-कांग्रेसी नेताओं ने भी बिहार का कोई भला नहीं किया चाहे लालू प्रसाद यादव हों, उनकी पत्नी मुख्यमंत्री श्रीमती राबड़ी देवी हों, जीतन राम मांझीं हों या नितीश कुमार हो । अगर 76 वर्ष आज़ादी के बाद आज भी बिहार को जीवित रहने के लिए, रखने के लिए &#8216;भीख&#8217; ही मांगना पड़े &#8216;विशेष दर्जा&#8217; के रूप में, तो इससे शर्म की बात और क्या हो सकती है। </p>
<figure id="attachment_5527" aria-describedby="caption-attachment-5527" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/H20240610160478.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/H20240610160478.jpg" alt="" width="2200" height="1467" class="size-full wp-image-5527" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/H20240610160478.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/H20240610160478-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/H20240610160478-1024x683.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/H20240610160478-768x512.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/H20240610160478-1536x1024.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/H20240610160478-2048x1366.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5527" class="wp-caption-text">तीसरी पारी की तैयारी<br /></figcaption></figure>
<p><strong>द्वारका सेक्टर-4 आवासीय क्षेत्र में बिहार, बंगाल और उत्तर प्रदेश के लोग (अधिकारी-पदाधिकारी सहित) बहुत ऐसे लोग रहते हैं जो सत्ता के गलियारे में अपना हस्ताक्षर कर चुके हैं। उन लोगों का कहना है कि &#8220;मॉडिफाइएड मोदी-III मंत्रिमंडल में जाना तो झाजी को था, लेकिन ललन  सिंह के सामने न केवल संजय झा बौना हुए, बल्कि नीतीश कुमार भी बौना हो गए। उनका कहना है कि &#8220;प्रदेश को विशेष दर्जा की मांग प्रदेश के विकास के लिए नहीं, बल्कि प्रदेश के विकास के निमित्त केंद्रीय कोषागार से आर्थिक मदद की बात है। वैसे आज तक प्रदेश के विधायक और सांसद अपने विधायक-सांसद कोषों  का भरपूर इस्तेमाल कर अपने-अपने क्षेत्रों का विकास किये होते तो शायद प्रदेश के विधानपालिका और संसदीय क्षेत्र के मतदाताओं  का यह हश्र नहीं होता। हकीकत तो यह है कि विशेष दर्जा के नाम पर केंद्रीय पैसों का लूट कैसे हो, मार्ग प्रशस्त किया जा रहा है।&#8221;</strong></p>
<p>विशेष दर्जा की राजनीति  नीतीश कुमार आज से नहीं कर रहे हैं। हालांकि चौदहवां वित्त आयोग बिहार को विशेष दर्जा देने  के मुद्दे पर कानून में प्रावधान नहीं होने की बात कह खारिज कर चुका है। लेकिन जैसा लोग कह रहे हैं &#8220;मोदी है तो मुमकिन है&#8221;, वैसी स्थिति में सत्ता में बने रहने के लिए अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारत के मतदाताओं पर प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष करारोपण  कर, करारोपण के नए तरीके निकालकर बिहार ही नहीं, सभी 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को &#8216;विशेष दर्जा&#8217; दे ही दिए, तो उनका क्या जाता है। वे जब संविधान बदल सकते हैं तो नई परिस्थिति में कानून में फेर बदल भी कर सकते हैं। आखिर सत्ता और कुर्सी की बात है। </p>
<p>राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार जैसे गरीब राज्य के लिए नीतीश कुमार विशेष दर्जा प्राप्त कर आने वाले विधानसभा चुनाव में वहां की जनता को विशेष उपहार सौंपना चाह रहे हैं। इतना ही नहीं, 94 लाख लोगों को जो गरीबी रेखा से नीचे हैं उन्हें दो लाख रूपये देने के वादे को भी नीतीश पूरा करना चाहते हैं। नितीश कुमार चाहते हैं कि विधान सभा में विपक्ष समाप्त हो जाय और इसके लिए &#8216;विशेष दर्जा&#8217; बहुत बड़ा ब्रह्मास्त्र हो सकता है। </p>
<p>साल 1969 में पहली बार पांचवें वित्त आयोग ने गाडगिल फॉर्मूले के आधार पर तीन राज्यों जम्मू-कश्मीर, असम और नागालैंड को विशेष राज्य का दर्जा दिया था। इसका आधार इन तीनों राज्यों का सामाजिक, आर्थिक और भौगोलिक पिछड़ापन था. विशेष राज्य का दर्जा देने का उद्देश्य इन राज्यों का पिछड़ापन दूर करना था। इसके अलावा राष्ट्रीय विकास परिषद की ओर से राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा देने को कुछ मापदंड भी बनाए गए थे। इनमें इस बात का ध्यान रखा जाता है कि किसी राज्य के संसाधन क्या हैं, वहां प्रति व्यक्ति आय कितनी है, राज्य की आमदनी का जरिया क्या है? जनजातीय आबादी, पहाड़ी या दुर्गम इलाका, जनसंख्या घनत्व, प्रतिकूल स्थान और अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास स्थित होने के कारण भी राज्यों को विशेष दर्जा दिया जा सकता है। </p>
<figure id="attachment_5528" aria-describedby="caption-attachment-5528" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/Nitish-Modi1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/Nitish-Modi1.jpg" alt="" width="2200" height="1444" class="size-full wp-image-5528" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/Nitish-Modi1.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/Nitish-Modi1-300x197.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/Nitish-Modi1-1024x672.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/Nitish-Modi1-768x504.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/Nitish-Modi1-1536x1008.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/Nitish-Modi1-2048x1344.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5528" class="wp-caption-text">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और &#8216;विशेष राज्य का दर्जा&#8217; हेतु गुलदस्ता<br /></figcaption></figure>
<p>विशेष श्रेणी का दर्जा (SCS) एक ऐसा दर्जा है जो किसी राज्य को उसकी विकास दर और पिछड़ेपन के आधार पर दिया जाता है। अगर कोई राज्य भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ा हो, तो उसे यह दर्जा दिया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य उन राज्यों को वित्तीय और अन्य सहायता प्रदान करना है ताकि वे भी राष्ट्रीय औसत के बराबर विकास कर सकें। अनुच्छेद 371 के जरिए राज्यों के लिए विशेष प्रावधान कर, उनकी विरासत और स्थानीय लोगों के अधिकारों को बचाया जाता है। विशेष राज्य का दर्जा मिलने पर किसी राज्य को खास छूट के साथ ही खास अनुदान भी मिलता है। देश में योजना आयोग के समय तो केंद्र सरकार के कुल योजनागत खर्च का लगभग 30 फीसदी हिस्सा इन्हीं राज्यों को मिल जाता था। इस धन को खर्च करने के लिए भी विशेष राज्यों को छूट थी। यदि केंद्र से दी गई धनराशि किसी एक वित्त वर्ष में पूरी तरह से खर्च नहीं हो पाती थी तो वह अगले वित्त वर्ष के लिए जारी कर दी जाती थी। अमूमन किसी एक वित्त वर्ष में जारी राशि खर्च नहीं होने पर लैप्स हो जाती है। इसके अलावा विशेष राज्यों को कर्ज स्वैपिंग स्कीम और कर्ज राहत योजना का लाभ भी मिलता था. इन सबका उद्देश्य ऐसे राज्यों में विकास को आगे बढ़ाना होता है। </p>
<p>उधर, चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी की ओर से जो सबसे जरूरी शर्त रखी गई है, वो है लोकसभा अध्यक्ष का पद। यानी कि चंद्रबाबू नायडू चाहते हैं कि सरकार के समर्थन के बदले उनकी पार्टी को केंद्रीय कैबिनेट में तो जगह मिले ही मिले, लोकसभा अध्यक्ष का पद भी उनकी ही पार्टी के पास रहे। चंद्र बाबू नायडू की पार्टी का जो इतिहास रहा है और बतौर लोकसभा अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू की पार्टी के सांसद ने इतिहास में बीजेपी के कद्दावर नेता अटल बिहारी वाजपेयी के साथ जो किया है, उसे शायद ही बीजेपी के लोग भूल पाए होंगे। तो आखिर इतिहास में टीडीपी ने ऐसा क्या किया है कि बीजेपी नायडू की पार्टी को लोकसभा अध्यक्ष का पद देने से हिचकिचा रही है और आखिर क्या है वो कहानी, जिसे अगर तेलगु देशम पार्टी दोहरा दे तो फिर नरेंद्र मोदी के लिए प्रधानमंत्री के पद पर बने रहना बहुत बड़ी चुनौती हो जाएगी। </p>
<p>भारतीय संविधान के आर्टिकल 93 और 178 में लोकसभा के अध्यक्ष पद का जिक्र है।  इन्हीं दो आर्टिकल में लोकसभा अध्यक्ष की ताकत का भी विस्तार से जिक्र किया गया है। लोकसभा अध्यक्ष की सबसे बड़ी ताकत तब होती है, जब सदन की कार्यवाही चल रही होती है। यानी कि संसद का सत्र चल रहा हो, तो लोकसभा अध्यक्ष ही उस सत्र का कर्ता-धर्ता होता है. लोकसभा और राज्यसभा के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करने की जिम्मेदारी भी स्पीकर की ही होती है। लोकसभा में विपक्ष के नेता को मान्यता देने का काम भी स्पीकर का ही होता है। स्पीकर ही तय करता है कि बैठक का एजेंडा क्या है। सदन कब चलेगा, कब स्थगित होगा, किस बिल पर कब वोटिंग होगी, कौन वोट करेगा, कौन नहीं करेगा जैसे तमाम मुद्दे पर फैसला स्पीकर को ही लेना होता है. यानी कि संसद के लिहाज से देखें तो स्पीकर का पद सबसे महत्वपूर्ण हो जाता है. जब सदन चल रहा होता है तो सैद्धांतिक तौर पर लोकसभा अध्यक्ष का पद किसी पार्टी से जुड़ा न होकर बिल्कुल निष्पक्ष होता है। </p>
<figure id="attachment_5529" aria-describedby="caption-attachment-5529" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/Nitish-MODI.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/Nitish-MODI.jpg" alt="" width="2200" height="1444" class="size-full wp-image-5529" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/Nitish-MODI.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/Nitish-MODI-300x197.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/Nitish-MODI-1024x672.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/Nitish-MODI-768x504.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/Nitish-MODI-1536x1008.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/06/Nitish-MODI-2048x1344.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5529" class="wp-caption-text">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चंद्र बाबू नायडू</figcaption></figure>
<p>अब ये तो तय है कि सरकार बीजेपी की नहीं बल्कि एनडीए की है। यानी कि नरेंद्र मोदी अब गठबंधन के प्रधानमंत्री है। ऐसे में अगर कभी किसी वक्त में टीडीपी या कहिए कि चंद्रबाबू नायडू की बात नहीं मानी गई या जिन शर्तों के साथ टीडीपी ने बीजेपी को समर्थन दिया है, कभी उन शर्तों को तोड़ा गया और चंद्रबाबू नायडू ने सरकार से समर्थन वापस लिया तो जिम्मेदारी स्पीकर की होगी कि वो नरेंद्र मोदी को बहुमत साबित करने के लिए कह दे। इस दौरान अगर किसी दूसरे दल के सांसद ने पक्ष में या विपक्ष में वोटिंग की तो फिर स्पीकर के पास अधिकार होगा कि वो उस सदस्य को अयोग्य घोषित कर दे. अविश्वास प्रस्ताव आने की स्थिति में दलों में टूट स्वाभाविक होती है और दल-बदल के तहत किसी सांसद को अयोग्य घोषित करने का अधिकार स्पीकर के पास ही होता है। स्पीकर चाहे तो संसद के सदस्यों को कुछ वक्त के लिए सदन से निलंबित करके सदन के संख्या बल को भी प्रभावित कर सकता है। लिहाजा अविश्वास प्रस्ताव के दौरान स्पीकर का पद सबसे अहम हो जाता है. और भविष्य में कभी ऐसी नौबत आती है तो ताकत चंद्रबाबू नायडू के हाथ में ही रहे, इसलिए वो स्पीकर का पद अपनी पार्टी में चाहते हैं। </p>
<p>वैसे बीजेपी स्पीकर का पद नायडू को देने से कतरा क्यों रही है, इसकी एक पुरानी कहानी है। ये कहानी करीब 25 साल पुरानी है. तब अटल बिहारी वाजपेयी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया था। उन्हें सदन में अपना बहुमत साबित करना था। 17 अप्रैल 1999 को इस प्रस्ताव पर वोटिंग होनी थी. तब वाजपेयी के चाणक्य कहे जाने वाले प्रमोद महाजन ने अनुमान लगा लिया था कि बहुमत उनके साथ है और वाजपेयी अपनी कुर्सी बचा लेंगे। मायावती सरकार से अलग हो चुकी थीं। जयललिता के समर्थन वापसी की वजह से ही ये नौबत आई भी थी। बाकी नेशनल कॉन्फ्रेंस के सैफुद्दीन सोज भी वाजपेयी सरकार के खिलाफ हो गए थे. फिर भी वाजपेयी सरकार को बहुमत था, लेकिन खेल तब पलट गया जब कांग्रेस के एक और सांसद गिरधर गमांग को लोकसभा में वोट देने का अधिकार मिल गया। </p>
<p>गिरधर गमांग कांग्रेस के सांसद थे, लेकिन 17 फरवरी 1999 को ही वो ओडिशा के मुख्यमंत्री बन गए थे। प्रमोद महाजन इस गलतफहमी में थे कि गिरधर गमांग ने सांसद पद से इस्तीफा दे दिया है और वो सिर्फ मुख्यमंत्री हैं। कांग्रेस को याद था कि उनका मुख्यमंत्री सांसद भी है। तो लंबे वक्त तक संसद से बाहर रहे गिरधर गमांग अचानक से 17 अप्रैल को लोकसभा में पहुंच गए। उनकी मौजूदगी से सत्ता पक्ष में खलबची मच गई। मामला लोकसभा अध्यक्ष तक पहुंच गया। तब लोकसभा के अध्यक्ष हुआ करते थे इन्हीं चंद्रबाबू नायडू की तेलगु देशम पार्टी के सांसद जीएम बालयोगी। जीएम बालयोगी ने अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करके तब के लोकसभा के सेक्रेटरी जनरल एस गोपालन की तरफ एक पर्ची बढ़ाई। गोपालन ने उस पर कुछ लिखा और उसे टाइप कराने के लिए भेज दिया। उस कागज में जीएम बालयोगी ने रूलिंग दी कि गिरधर गमांग अपने विवेक के आधार पर वोटिंग करें। गमांग ने अपनी पार्टी की बात सुनी और वाजपेयी सरकार के खिलाफ वोट किया। यही वो एक वोट था, जिसकी वजह से अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार गिर गई। तब सरकार के पक्ष में 269 वोट और सरकार के खिलाफ कुल 270 वोट पड़े थे। </p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/nitish-bowed-before-lalan-singh-made-him-minister">केंद्रीय मंत्रिमंडल की ओर जाने वाली &#8216;पटना-जम्मू अर्चना एक्सप्रेस&#8217; में नहीं &#8216;बैठा&#8217; सके नीतीश कुमार अपने शयनकक्ष तक आने वाले तीन &#8216;संजयों&#8217; में संजय झा को, &#8216;कुर्सी&#8217; पर ललन सिंह का &#8216;कब्ज़ा&#8217;</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>वोट देने के लिए रिश्वत लेने पर सांसदों, विधायकों को अभियोजन से कोई छूट नहीं: न्यायालय</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 04 Mar 2024 12:35:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[सम्पादकीय]]></category>
		<category><![CDATA[bribe]]></category>
		<category><![CDATA[jharkhand]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने आज कहा कि सांसदों और विधायकों को सदन में वोट डालने या भाषण देने के लिए रिश्वत लेने के मामले में अभियोजन से छूट नहीं होती। प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली सात-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) रिश्वत मामले में पांच न्यायाधीशों की [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने आज कहा कि सांसदों और विधायकों को सदन में वोट डालने या भाषण देने के लिए रिश्वत लेने के मामले में अभियोजन से छूट नहीं होती। प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली सात-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) रिश्वत मामले में पांच न्यायाधीशों की पीठ द्वारा सुनाए गए 1998 के फैसले को सर्वसम्मति से पलट दिया। </strong><strong></strong></p>
<p>पांच न्यायाशीधों की पीठ के फैसले के तहत सांसदों और विधायकों को सदन में वोट डालने या भाषण देने के लिए रिश्वत लेने के मामले में अभियोजन से छूट दी गई थी।प्रधान न्यायाधीश ने फैसला सुनाते हुए कहा कि रिश्वतखोरी के मामलों में संसदीय विशेषाधिकारों के तहत संरक्षण प्राप्त नहीं है और 1998 के फैसले की व्याख्या संविधान के अनुच्छेद 105 और 194 के विपरीत है। अनुच्छेद 105 और 194 संसद और विधानसभाओं में सांसदों और विधायकों की शक्तियों एवं विशेषाधिकारों से संबंधित हैं। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने पीठ के लिए फैसले का मुख्य भाग पढ़ते हुए कहा कि रिश्वतखोरी के मामलों में इन अनुच्छेदों के तहत छूट नहीं है क्योंकि यह सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी को नष्ट करती है। </p>
<p>अभी तक निर्वाचित जनप्रतिनिधि वोट के बदले रिश्वतखोरी करने पर आपराधिक मुकदमे से बच जाते थे। इसकी वजह 1998 में आया सुप्रीम कोर्ट का पीवी नरसिम्हा राव बनाम संघ (1998) निर्णय था। तब पांच न्यायाधीशों की पीठ के फैसले में कहा गया था कि संसद में एक निश्चित तरीके से वोट देने के लिए रिश्वत लेने वाले सांसदों को संविधान द्वारा संरक्षित किया जाता है। अब सात न्यायाधीशों की पीठ ने अनुच्छेद 105 और अनुच्छेद 195 के तहत राज्य विधानमंडलों और संसद के सदस्यों को दी गई छूट को खत्म कर दिया है। बता दें कि अनुच्छेद 105 में संसद सदस्यों जबकि अनुच्छेद 195 में राज्य विधानमंडलों के सदस्यों के विशेषाधिकार दिए गए हैं। सांसद और विधायक को यह सुनिश्चित करने के लिए कुछ अधिकार और छूट दी जाती है कि वे सदन में अपने कर्तव्यों को प्रभावी ढंग से पूरा कर सकें। </p>
<p><a href="https://youtu.be/JW2YaZ7QQtU">वोट देने के लिए रिश्वत लेने पर सांसदों, विधायकों को अभियोजन से कोई छूट नहीं</a></p>
<p>1991 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल की थी और पीवी नरसिम्हा राव देश के प्रधानमंत्री बनाए गए थे। चुनाव के करीब दो साल बाद जुलाई 1993 में नरसिम्हा राव सरकार को अविश्वास मत का सामना करना पड़ा। हालांकि, सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव 14 वोटों से गिर गया जब पक्ष में 251 वोट और विरोध में 265 वोट पड़े। इसके बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (पीसीए) के तहत एक शिकायत दर्ज की गई जिसमें आरोप लगाया गया कि अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ वोट करने के लिए कुछ सांसदों को रिश्वत दी गई थी। </p>
<p>जब मामला देश की सर्वोच्च अदालत पहुंचा जिसमें रिश्वत लेने के आरोपी सांसदों ने दो अहम तर्क प्रस्तुत किए। सबसे पहला तर्क था कि उन्हें संसद में उनके द्वारा डाले गए किसी भी वोट और ऐसे वोट डालने से जुड़े किसी भी कार्य के लिए संविधान के अनुच्छेद 105 के तहत छूट प्राप्त थी। दूसरा तर्क यह था कि सांसद सार्वजनिक पद पर नहीं होते हैं और इसलिए उन्हें पीसीए के दायरे में नहीं लाया जा सकता। न्यायालय इन तर्कों से सहमत हुआ और अप्रैल 1998 में तीन-दो के बहुमत से फैसला सुनाया। इसमें कहा गया था कि सांसदों को न केवल संसद में उनके द्वारा दिए गए वोटों के लिए, बल्कि मतदान से जुड़े किसी भी कार्य के लिए भी अभियोजन (मुकदमे) से छूट है। फैसले का मतलब यह था कि यदि किसी सांसद को संसद में वोट देने के लिए किसी भी तरह से रिश्वत दी गई थी, तो इस रिश्वत लेने का कृत्य अनुच्छेद 105 (2) द्वारा संरक्षित किया जाएगा और वे पीसीए के दायरे में नहीं आएंगे।<br />
 <br />
देश की सर्वोच्च अदालत में मामला दोबारा पहुंचे के पीछे सीता सोरेन का केस था। दरअसल, 2012 में झारखंड मुक्ति मोर्चा की विधायक सीता सोरेन पर राज्यसभा चुनाव 2012 में एक उम्मीदवार को वोट देने के लिए रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया था। बाद में जब चुनाव आयोग ने पाया कि राज्यसभा चुनावों में समझौता किया गया था तो चुनावों को रद्द कर दिया। इसी मामले में उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया। सीता सोरेन विधायी छूट का दावा करते हुए झारखंड उच्च न्यायालय पहुंच गईं। सुनवाई के दौरान सीता सोरेन ने तर्क दिया था कि राज्य विधानमंडल के सदन में उनके द्वारा डाले गए किसी भी वोट के लिए उन्हें अनुच्छेद 194(2) के तहत छूट प्राप्त है। नरसिम्हा राव मामले के हवाले से जेएमएम विधायक ने तर्क दिया था कि अनुच्छेद 194(2) के तहत छूट न केवल विधायिका में उनके द्वारा डाले गए किसी भी वोट के लिए बल्कि ऐसे वोट डालने से जुड़े सभी कार्यों के लिए भी है। झारखंड उच्च न्यायालय ने विधायी छूट का दावा करने वाली सोरेन की याचिका खारिज कर दिया। </p>
<p>सीता सोरेन ने झारखंड उच्च न्यायालय के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। याचिका की सुनवाई करने वाली तीन जजों की बेंच ने माना कि मामले में उठाए गए मुद्दे व्यापक सार्वजनिक महत्व के हैं। लिहाजा मार्च 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने मामले को पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ को भेज दिया। सितंबर 2023 को मामले की सुनवाई कर रही पांच जजों की बेंच ने बताया कि झारखंड उच्च न्यायालय का फैसला और सीता सोरेन का बचाव दोनों नरसिम्हा राव वाले मामले पर निर्भर थे। इसके अलावा बेंच ने कहा कि नरसिम्हा राव मामले की फिर से जांच करनी पड़ सकती है। इस तरह से मामला सात न्यायाधीशों की पीठ को भेज दिया गया।</p>
<p>नोट के बदले वोट के इसी मामले में 4 मार्च 2024 को सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की संविधान पीठ ने बड़ा फैसला सुनाया है। पीठ में मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के अलावा जस्टिस ए एस बोपन्ना, जस्टिस एम एम सुंदरेश, जस्टिस पी एस नरसिम्हा, जस्टिस जेपी पारदीवाला, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस मनोज मिश्रा शामिल रहे। फैसला सुनाते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि पीठ के सभी जज इस मुद्दे पर एकमत हैं कि पीवी नरसिम्हा राव मामले मे दिए फैसले से हम असहमत हैं। नरसिम्हा राव मामले में अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने सांसदों-विधायकों को वोट के बदले नोट लेने के मामले में अभियोजन (मुकदमे) से छूट देने का फैसला सुनाया था। </p>
<p>मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि माननीयों को मिली छूट यह साबित करने में विफल रही है कि उन्हें अपने विधायी कार्यों में इस छूट की अनिवार्यता है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 105 और 194 में रिश्वत से छूट का प्रावधान नहीं है क्योंकि रिश्वतखोरी आपराधिक कृत्य है और ये सदन में भाषण देने या वोट देने के लिए जरूरी नहीं है। पीवी नरसिम्हा राव मामले में दिए फैसले की जो व्याख्या की गई है, वो संविधान के अनुच्छेद 105 और 194 के विपरीत है।</p>
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		<title>17वीं लोकसभा की बैठक समाप्त, 18वीं की तैयारी, आम चुनाव के लिए नेता और मतदाता सज्ज</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 11 Feb 2024 06:45:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[election]]></category>
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		<category><![CDATA[India]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कल वर्तमान लोकसभा की आखिरी बैठक को संबोधित किया। यह संबोधन आगामी 18 वीं लोक सभा के गठन हेतु आम चुनाव का भी आगाज है। पिछले 5 वर्षों की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए पीएम मोदी ने कहा कि सरकार ने कई पीढ़ियों से लटके सपनों को पूरा किया है । देश तेज गति से बड़े बदलावों की ओर बढ़ा [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कल वर्तमान लोकसभा की आखिरी बैठक को संबोधित किया। यह संबोधन आगामी 18 वीं लोक सभा के गठन हेतु आम चुनाव का भी आगाज है। पिछले 5 वर्षों की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए पीएम मोदी ने कहा कि सरकार ने कई पीढ़ियों से लटके सपनों को पूरा किया है । देश तेज गति से बड़े बदलावों की ओर बढ़ा है और सदन के सभी सदस्यों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है।</strong></p>
<p>सदन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का अवसर भारत के लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री मोदी ने महत्वपूर्ण निर्णय लेने और देश को दिशा देने में 17वीं लोकसभा के सभी सदस्यों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज का दिन राष्ट्र को अपनी वैचारिक यात्रा और उसकी बेहतरी के लिए समय समर्पित करने का विशेष अवसर है। प्रधानमंत्री ने कहा, “सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन पिछले 5 वर्षों से मंत्र रहा है” और इसे आज पूरा देश अनुभव कर सकता है। प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि भारत के लोग 17वीं लोकसभा को उसके प्रयासों के लिए आशीर्वाद देना जारी रखेंगे। श्री मोदी ने सदन के सभी सदस्यों के योगदान को रेखांकित करते हुए उनके प्रति और विशेषकर सदन के लोकसभा अध्यक्ष के प्रति आभार व्यक्त किया। प्रधानमंत्री ने लोकसभा अध्यक्ष को धन्यवाद दिया और सदन को हमेशा मुस्कुराते हुए, संतुलित और निष्पक्ष तरीके से चलाने के लिए उनकी सराहना की।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने इस दौरान मानवता पर आई सदी की सबसे बड़ी आपदा यानी कोरोना महामारी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि संसद में व्यवस्थाएं की गईं और सदन में देश का काम नहीं रुकने दिया गया। उन्होंने सांसद निधि को छोड़ने और महामारी के दौरान सदस्यों द्वारा अपने वेतन में 30 प्रतिशत की कटौती के लिए भी सदस्यों को धन्यवाद दिया। उन्होंने सदस्यों के लिए सब्सिडी वाली कैंटीन सुविधाओं को हटाने के लिए भी लोकसभा अध्यक्ष को धन्यवाद दिया, जिस पर लोगों की प्रतिकूल टिप्पणियों आती थीं।</p>
<figure id="attachment_5339" aria-describedby="caption-attachment-5339" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/02/2.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/02/2.jpg" alt="" width="2200" height="1608" class="size-full wp-image-5339" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/02/2.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/02/2-300x219.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/02/2-1024x748.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/02/2-768x561.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/02/2-1536x1123.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/02/2-2048x1497.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5339" class="wp-caption-text">PM addresses the Members of Parliament at the Central Hall of the old Parliament building, in New Delhi on September 19, 2023. PIB Photo</figcaption></figure>
<p>प्रधानमंत्री ने नए संसद भवन के निर्माण के बारे में सभी सदस्यों को एकमत करने के लिए लोकसभा अध्यक्ष की सराहना की, जिसके चलते नए संसद भवन का निर्माण हुआ और अब वर्तमान सत्र यहां हो रहा है। नए संसद भवन में स्थापित सेनगोल के बारे में बोलते हुए, प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि यह भारत की विरासत के पुनर्ग्रहण और स्वतंत्रता के पहले क्षण की याद का प्रतीक है। उन्होंने सेनगोल को वार्षिक समारोह का हिस्सा बनाने के लोकसभा अध्यक्ष के फैसले की भी सराहना की और कहा कि यह भविष्य की पीढ़ियों को उस क्षण से जोड़ेगा जब भारत ने प्रेरणा का स्रोत होने के साथ-साथ स्वतंत्रता हासिल की थी।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने जी20 शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता द्वारा लाई गई वैश्विक मान्यता का उल्लेख किया और जिसके लिए प्रत्येक राज्य ने अपनी राष्ट्रीय क्षमताओं का प्रदर्शन किया। इसी तरह, पी20 शिखर सम्मेलन ने लोकतंत्र की जननी के रूप में भारत की साख को मजबूत किया। प्रधानमंत्री ने भाषण और निबंध प्रतियोगिताओं का आयोजन करके राष्ट्रव्यापी कार्यक्रमों में अनुष्ठानिक वर्षगांठ पुष्पांजलि के विस्तार की ओर भी इशारा किया। हर राज्य से शीर्ष 2 दावेदार दिल्ली आते हैं और गणमान्य व्यक्ति के संबंध में बात करते हैं। पीएम मोदी ने कहा, इसने लाखों छात्रों को देश की संसदीय परंपरा से जोड़ा। प्रधानमंत्री ने संसद पुस्तकालय को आम नागरिकों के लिए खोलने के महत्वपूर्ण निर्णय का भी उल्लेख किया।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा अध्यक्ष द्वारा पेश की गई पेपरलैस संसद और डिजिटल प्रौद्योगिकी के कार्यान्वयन की अवधारणा के बार में बात करते हुए इस पहल के लिए उन्हें धन्यवाद दिया। प्रधानमंत्री ने 17वीं लोकसभा की उत्पादकता को लगभग 97 प्रतिशत तक ले जाने के लिए सदस्यों के संयुक्त प्रयास और लोकसभा अध्यक्ष के कौशल तथा सदस्यों की जागरूकता को श्रेय दिया। भले ही यह एक उल्लेखनीय संख्या है, प्रधानमंत्री ने सदस्यों से संकल्प लेने और 18वीं लोकसभा की शुरुआत में उत्पादकता को 100 प्रतिशत तक बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने सदन को सूचित किया कि 7 सत्र 100 प्रतिशत से अधिक उत्पादक रहे हैं जब सदन ने आधी रात तक अध्यक्षता की और सभी सदस्यों को अपने मन की बात कहने की अनुमति दी। प्रधानमंत्री ने बताया कि 17वीं लोकसभा के पहले सत्र में 30 विधेयक पारित हुए जो एक रिकॉर्ड है।</p>
<figure id="attachment_5340" aria-describedby="caption-attachment-5340" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/02/3.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/02/3.jpg" alt="" width="2200" height="1477" class="size-full wp-image-5340" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/02/3.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/02/3-300x201.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/02/3-1024x687.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/02/3-768x516.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/02/3-1536x1031.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/02/3-2048x1375.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5340" class="wp-caption-text">PM addresses the Members of Parliament at the Central Hall of the old Parliament building, in New Delhi on September 19, 2023. PIB Photo</figcaption></figure>
<p>आजादी का अमृत महोत्सव के दौरान सांसद होने की खुशी का उल्लेख करते हुए, प्रधानमंत्री ने महोत्सव को अपने निर्वाचन क्षेत्रों में एक जन आंदोलन बनाने के लिए सदस्यों की प्रशंसा की। इसी तरह, संविधान के 75वें साल ने भी सभी को प्रेरित किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी के भारत की मजबूत नींव को उस दौर के गेम-चेंजर सुधारों में देखा जा सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा, “हम बड़े संतोष के साथ कह सकते हैं कि 17वीं लोकसभा के माध्यम से कई चीजें पूरी हुईं, जिनका पीढ़ियां इंतजार करती थीं।” उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 हटने से संविधान का पूरा वैभव प्रकट हुआ है। उन्होंने कहा, इससे संविधान निर्माताओं को खुशी हुई होगी। पीएम मोदी ने कहा, “आज सामाजिक न्याय के प्रति हमारी प्रतिबद्धता जम्मू-कश्मीर के लोगों तक पहुंच रही है।”</p>
<p>आतंकवाद के संकट को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सदन द्वारा बनाए गए कड़े कानूनों ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को सशक्त किया है। उन्होंने कहा, इससे उन लोगों का आत्मविश्वास बढ़ा है जो आतंकवाद के खिलाफ लड़ रहे हैं और आतंकवाद का पूर्ण खात्मा निश्चित रूप से पूरा होगा।<br />
प्रधानमंत्री ने नए कानूनों को अपनाने का जिक्र करते हुए कहा, “हम गर्व से कह सकते हैं कि यह देश 75 वर्षों तक दंड संहिता के तहत जरूर रहा है मगर अब हम न्याय संहिता के तहत रह रहे हैं।”</p>
<p>प्रधानमंत्री ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के पारित होने के साथ नए संसद भवन में कार्यवाही शुरू करने के लिए लोकसभा अध्यक्ष को भी धन्यवाद दिया। भले ही पहला सत्र बाकी सत्रों की तुलना में छोटा था, प्रधानमंत्री ने कहा कि यह नारी शक्ति वंदन अधिनियम के पारित होने का परिणाम है कि आने वाले समय में सदन महिला सदस्यों से भर जाएगा। उन्होंने 17वीं लोकसभा में महिलाओं के अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए तीन तलाक को खत्म करने की भी बात कही।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने देश के लिए अगले 25 वर्षों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश ने अपने सपनों को पूरा करने का संकल्प लिया है। महात्मा गांधी द्वारा 1930 में शुरू किए गए नमक सत्याग्रह और स्वदेशी आंदोलन के बारे में बोलते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि ये घटनाएँ इसकी शुरुआत के समय महत्वहीन हो सकती थीं, लेकिन उन्होंने अगले 25 वर्षों के लिए नींव तैयार की, जिससे 1947 में भारत की आजादी हुई। उन्होंने कहा कि ऐसी ही भावना देश के भीतर भी महसूस की जा सकती है, जहां हर व्यक्ति ने 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है।</p>
<p>युवाओं के लिए पहल और कानूनों की ओर इशारा करते हुए, प्रधानमंत्री ने पेपर लीक की समस्या के खिलाफ मजबूत कानून का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने अनुसंधान के महत्व पर जोर दिया और राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन अधिनियम के दूरगामी महत्व को स्वीकार किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह अधिनियम भारत को अनुसंधान और नवाचार का वैश्विक केंद्र बनाने में मदद करेगा। </p>
<p>यह देखते हुए कि 21वीं सदी में दुनिया में बुनियादी ज़रूरतें बदल गई हैं, प्रधानमंत्री ने डेटा के मूल्य का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट के पारित होने से वर्तमान पीढ़ी के डेटा की सुरक्षा हुई है और दुनिया भर से इसमें रुचि भी पैदा हुई है। भारत में इसके महत्व को रेखांकित करते हुए, प्रधानमंत्री ने देश की विविधता और देश के भीतर उत्पन्न होने वाले विविध डेटा पर प्रकाश डाला। प्रधानमंत्री ने सुरक्षा के नए आयामों का जिक्र करते हुए समुद्री, अंतरिक्ष और साइबर सुरक्षा के महत्व पर बात की। प्रधानमंत्री ने कहा, “हमें इन क्षेत्रों में सकारात्मक क्षमताएं पैदा करनी होंगी और नकारात्मक ताकतों से निपटने के लिए साधन भी विकसित करने होंगे।” उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष सुधार दीर्घकालिक प्रभाव के साथ दूरदर्शी हैं।</p>
<figure id="attachment_5341" aria-describedby="caption-attachment-5341" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/02/4.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/02/4.jpg" alt="" width="2200" height="1264" class="size-full wp-image-5341" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/02/4.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/02/4-300x172.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/02/4-1024x588.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/02/4-768x441.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/02/4-1536x883.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/02/4-2048x1177.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5341" class="wp-caption-text">PM addresses the Members of Parliament at the Central Hall of the old Parliament building, in New Delhi on September 19, 2023. PIB Photo</figcaption></figure>
<p>17वीं लोकसभा द्वारा किए गए आर्थिक सुधारों पर बात करते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि आम नागरिकों के जीवन को आसान बनाने के लिए हजारों अनुपालन हटा दिए गए थे। प्रधानमंत्री ने ‘न्यूनतम सरकार और अधिकतम शासन‘ में विश्वास दोहराते हुए कहा कि नागरिकों के जीवन में न्यूनतम सरकारी हस्तक्षेप सुनिश्चित करके किसी भी लोकतंत्र की क्षमताओं को अधिकतम किया जा सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि 60 से अधिक अप्रचलित कानून हटाये गये। उन्होंने कहा कि कारोबार सुगमता में सुधार के लिए यह जरूरी है। पीएम मोदी ने नागरिकों पर भरोसा करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि जन विश्वास अधिनियम ने 180 गतिविधियों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया है। मध्यस्थता अधिनियम ने अनावश्यक मुकदमेबाजी से संबंधित मुद्दों को सुलझाने में मदद की है।</p>
<p>ट्रांसजेंडर समुदाय की दुर्दशा का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने समुदाय के लिए अधिनियम लाने के लिए सदस्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि कमजोर वर्गों के लिए संवेदनशील प्रावधान वैश्विक सराहना का विषय हैं। उन्होंने कहा कि ट्रांसजेंडर लोगों को एक पहचान मिल रही है और वे सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर उद्यमी बन रहे हैं। पद्म पुरस्कार विजेताओं की सूची में ट्रांसजेंडर का भी नाम शामिल है। प्रधानमंत्री ने उन सदस्यों के लिए गहरा दुख व्यक्त किया, जिन्होंने कोविड महामारी के कारण अपनी जान गंवा दी। कोविड के चलते सदन की कार्यवाही लगभग 2 वर्षों तक प्रभावित रही।</p>
<p>पीएम मोदी ने कहा, ”भारत के लोकतंत्र की यात्रा शाश्वत है और देश का उद्देश्य पूरी मानवता की सेवा करना है” और कहा कि दुनिया भारत की जीवन शैली को स्वीकार कर रही है और सदस्यों से इस परंपरा को आगे बढ़ाने का आग्रह किया। आगामी चुनावों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि चुनाव लोकतंत्र का एक स्वाभाविक और आवश्यक आयाम है। प्रधानमंत्री ने कहा, ”मुझे विश्वास है कि चुनाव हमारे लोकतंत्र की गरिमा के अनुरूप होंगे।”</p>
<p>प्रधानमंत्री ने 17वीं लोकसभा के कामकाज में योगदान के लिए सदन के सभी सदस्यों को धन्यवाद दिया। राम मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह को लेकर आज पारित प्रस्ताव का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे देश की भावी पीढ़ियों को अपनी विरासत पर गर्व करने की संवैधानिक शक्तियां मिलेंगी। उन्होंने कहा कि इस मजबूत इरादे में ‘संवेदना‘, ‘संकल्प‘ और ‘सहानुभूति‘ के साथ-साथ ‘सबका साथ-सबका विकास‘ का मंत्र शामिल है।<br />
संबोधन का समापन करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि संसद अपने सदस्यों को भावी पीढ़ियों के लिए विरासत छोड़ने और अपने सभी सदस्यों के सामूहिक प्रयास से भावी पीढ़ियों के सपनों और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए काम करने के लिए प्रेरित करती रहेगी।</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/politics/17th-lok-sabha-sittings-ends">17वीं लोकसभा की बैठक समाप्त, 18वीं की तैयारी, आम चुनाव के लिए नेता और मतदाता सज्ज</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>&#8216;महिला ही महिलाओं की दुश्मन हैं&#8217; कहावत को झुठलाना होगा, खेत-खलिहानों की महिलाओं के हितों के बारे में भी सोचना होगा संसद में बैठने वाली महिलाओं को</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/chutkulanands-letter/the-saying-women-are-the-enemies-of-women-must-be-refuted</link>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 08 Feb 2024 01:23:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चुटकुलानन्द की चिठ्ठी]]></category>
		<category><![CDATA[lok sabha]]></category>
		<category><![CDATA[member]]></category>
		<category><![CDATA[parliament]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली : सोचता हूँ कि आने वाले दिनों में जब 181 महिलाएं &#8216;देशी-विदेशी सुगन्धित इत्र, परफ्यूम से स्नान कर, वस्त्रों पर छिड़क कर संसद में बैठेंगी तो कहीं पुरुष पूछ न बैठें &#8216;यह कौन सा इत्र है मोहतरमा?&#8217; यह भी हो सकता कि महिलाओं की उतनी बड़ी तायदात देख वे हीन भावना से ग्रसित [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/chutkulanands-letter/the-saying-women-are-the-enemies-of-women-must-be-refuted">&#8216;महिला ही महिलाओं की दुश्मन हैं&#8217; कहावत को झुठलाना होगा, खेत-खलिहानों की महिलाओं के हितों के बारे में भी सोचना होगा संसद में बैठने वाली महिलाओं को</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली : सोचता हूँ कि आने वाले दिनों में जब 181 महिलाएं &#8216;देशी-विदेशी सुगन्धित इत्र, परफ्यूम से स्नान कर, वस्त्रों पर छिड़क कर संसद में बैठेंगी तो कहीं पुरुष पूछ न बैठें &#8216;यह कौन सा इत्र है मोहतरमा?&#8217; यह भी हो सकता कि महिलाओं की उतनी बड़ी तायदात देख वे हीन भावना से ग्रसित हो जाएँ। यह फिर सोचने लगे कि नरेंद्र मोदी पहले प्रधानमंत्री क्यों नहीं बने, महिला सशक्तिकरण के लिए विधेयक पहले क्यों नहीं आया? क्योंकि कुर्सियों पर महिला बैठेंगी तो कितना खूबसूरत संसद होगा। </strong></p>
<p>राष्ट्र की राजधानी नई दिल्ली में नवनिर्मित संसद भवन और कर्तव्य पथ के बीच रायसीना हिल की ओर टुकुर-टुकुर देख रहा था। जहाँ मैं बैठा था वही सामने उस क्षेत्र में अखबार बांटने वाले अख़बार विक्रेता अपनी साईकिल को रखते मुस्कुरा रहे थे। मेरे बाएं हाथ में मोबाईल कैमरा अपने स्टैंड से जुड़ा था और कुछ कागजात भी हाथ की उंगलियों के बीच लटका था। झोला बगल में रखा था। मन में कई बातें उठ रही थी। खुद प्रश्नकर्ता था, खुद उत्तरदाता भी। </p>
<p>फिर सोचने लगा सन 1911 के बाद किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि इतनी बुरी हार के एक साल बाद ही मोहम्मद गौरी वापस आएगा। लेकिन तक़रीबन 832 साल पहले सन 1192 में मोहम्मद गौरी लौट आया। समय बदल रहा था और हवाओं में गद्दारी की बू भी आने लगी थी। दृष्टान्त जयचंद की गद्दारी थी जो मोहम्मद गौरी से जा मिला था। इतिहासकार कहते हैं कि उन दिनों पृथ्वीराज चौहान के साथ मोहम्मद गौरी की लड़ाई हुई। कहते हैं 18वीं बार हुए उस युद्ध में मोहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज चौहान को मात दिया और उन्हें बंदी बनाकर अपने साथ ले गया। </p>
<p>मैं वायु सेना भवन-मौलाना आज़ाद रोड, उद्योग भवन, करियप्पा मार्ग से रफ़ी मार्ग के रास्ते आती-जाती वाहनों को देख रहा था। कभी कभार लाल-नीली बत्ती वाली पों-पां करती चार पहिया वाहन भी आ-जा रही थी। फिर सोचने लगा कि उस युद्ध में पृथ्वीराज चौहान के साथ उनके मित्र चंदबरदाई को भी बंदी बना लिया था मोहम्मद गौरी ने। इतिहासकार कहते हैं कि सजा के तौर पर गर्म सलाखों से पृथ्वीराज की आंखें फोड़ दी थी। </p>
<p>मेरे बाबूजी कभी कभार गीता के उपदेश और श्लोकों से अलग हटकर पृथ्वीराज चौहान की भी बातें कहते थे दृष्टान्त के तौर पर। बाबूजी कहते थे &#8216;हिम्मत-ए  मर्दा &#8211; मदद ए खुदा&#8217; पर हमेशा विश्वास रखना। हिम्मत कभी नहीं हारना। हिम्मत को कभी भी पस्त नहीं होने देना। जीवन में आगे ही बढ़ोगे। रफ़ी मार्ग पर बैठकर बाबूजी और उनका पटना का अशोक राजपथ बहुत याद आ रहा था। </p>
<p><strong>सोच रहा रहा उस घायल अवस्था में, जबकि आँखें फूटी हुई थी, पृथ्वीराज चौहान की हिम्मत पूजनीय है, वंदनीय है, तभी तो आज 832+ वर्ष के बाद भी वे जीवित हैं। यहाँ तो लोग बाग पार्थिव शरीर के अंतिम संस्कार में जब शमशान जाते हैं तो बात-बार घडी देखते रहते हैं। इतना ही नहीं, तेरहवीं के बाद तो अच्छे-अच्छे लोग अच्छे-अच्छों को भूल जाते हैं।  कहते भी हैं &#8216;लाइफ गोज ऑन।&#8221; खैर। </strong></p>
<p>मोहम्मद गोरी को पृथ्वीराज चौहान के शब्दभेदी बाण चलाने वाली कला के बारे में पता था। आखिरी इच्छा के रूप में चंदबरदाई के कहने पर इसके प्रदर्शन की इजाजत दे दी। यहीं पर “चार बांस, चौबीस गज, अंगुल अष्ट प्रमाण &#8230; .. ता ऊपर सुल्तान है, मत चूको चौहान” ऐतिहासिक शब्द, दोहा प्रयोग हुआ था जो आज भी जीवित है। मन ही मन हंसी भी आ रही थी। सामने बस स्टैंड के पास कुछ सुन्दर बालाएं कड़ी हो गई थी अब तक।  वे सभी दक्षिण दिल्ली की ओर जाने वाली बसों का इन्तजार कर रही थी। </p>
<p>पृथ्वीराज चौहान के लिए मोहम्मद गोरी की दूरी मापने के लिए चंदबरदाई का यह संकेत काफी था। मोहम्मद गौरी ने जैसे ही शाबाश बोला, आवाज सुनकर पृथ्वीराज चौहान ने शब्द भेदी बाण चला डाला और मोहम्मद गौरी की मृत्यु हो गई। </p>
<p>पीछे जलाशय, आगे रायसीना हिल पर राष्ट्रपति भवन, बाएं-दाहिने रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय, संसद के सामने इस कदर बैठना मेरे लिए भी उसी जीत के बराबर ही थी। मैं भी अशोक राजपथ पटना से जीवन की शुरुआत कर भारत के करोड़ों-करोड़ लोगों में, लाखो लाख अख़बार विक्रेताओं में अकेले समस्याओं से जूझते, समस्याओं को चीरते-फाड़ते मेहनत करते आगे निकला था तभी तो एक अखबार विक्रेता से देश-विदेश के पत्र-पत्रिकाओं, रेडियो, टीवी के लिए कहानी लिख सका और आज एक संवादताता के रूप में यहाँ बैठा था &#8211; फक्र से। मैं तो अपना पीठ खुद थपथपाता हूँ, सदैव। </p>
<p><strong>फिर सोचने लगा कि क्या भारत के &#8216;पुरुष सांसद&#8217; या &#8216;पुरुष विधायक&#8217; आने वाले दिनों में, संसद और विधान सभा में अपनी कुर्सी के बगल में बराबरी की ताकत रखने वाली महिलाओं को देख पाएंगे? भारत के इस पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं को तो &#8216;पैर की जूती&#8221; समझते हैं (अपवाद छोड़कर), कहते भी हैं खुलेआम। </strong></p>
<p>लड़कियों के ससुराल में जब बहु को बच्चा होता है तो बेटी होने पर लाखों यातनाएं आज भी देते हैं। सभी सास को &#8216;पोता&#8217; ही चाहिए। अब पढ़ी होती तो शायद समझ जाती कि उनके बेटे का क्रोमोजोम कमजोर है। शराब पीता है, सिगरेट पीता है तो क्रोमोजोम कहाँ से ताकतवर होगा। कमजोर होता है तो &#8216;हार&#8217; जाता है अपनी पत्नी के क्रोमोजोम से। स्वाभाविक है बेटा नहीं, बेटी होगी। </p>
<p>मन-ही-मन संसद के सामने बैठकर संसद भवन में रखी कुर्सियों को देख रहा था। सोच रहा था कि आने वाले दिनों में संसद में प्रत्येक चौथी कुर्सी के बाद महिला की कुर्सी होगी। अब तक सत्रह लोक सभा में महिला संसद किसी कोने में दिखती थी। </p>
<p>यह तो संसद की बात हुई अपना बिहार में 243 कुर्सी वाली विधान सभा में प्रत्येक तीसरी कुर्सी के बाद कोई माथे पर पल्लू लिए, तो कोई सलवार सूट में, कोई आधुनिक जींस और कुर्ती में, माथे पर काले चश्मा चढ़ाई महिलाएं जब पुरुष विधायक को दिखेंगी पुरुषों का क्या हाल होगा। उन्हें तो विधान सभा में &#8216;अपशब्द&#8217; के इस्तेमाल, मार-पीट, गाली-गलौज, कुर्सी &#8211; टेबुल का फेका फेंकी बंद करना होगा। &#8216;अपवाद&#8217; छोड़कर। </p>
<p>वजह भी है &#8211; आज कल तो संसद और विधान सभा की कार्रवाई लाइव दिखता है। उनके घर में उनकी पत्नी, उनके बच्चे सभी &#8216;पप्पा&#8217; का कमाल, धमाल देख्नेगे। क्योंकि अखबारवाला, टीवी वाला, खासकर कैमरामैन तो किसी का नहीं होता। अनेकानेक बातें मन में चल रही थी क्योंकि महिला आरक्षण बिल तो लोक सभा में पेश हो गया है 128 वे संविधान संशोधन विधेयक, 2023 के रूप में। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल इस ऐतिहासिक को किये थे। इस विधेयक के कानून बनने के बाद लोक सभा में 181 महिला सांसद हो जाएँगी। </p>
<figure id="attachment_5329" aria-describedby="caption-attachment-5329" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/02/Cover2-fotor.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/02/Cover2-fotor.jpg" alt="" width="2200" height="1321" class="size-full wp-image-5329" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/02/Cover2-fotor.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/02/Cover2-fotor-300x180.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/02/Cover2-fotor-1024x615.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/02/Cover2-fotor-768x461.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/02/Cover2-fotor-1536x922.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/02/Cover2-fotor-2048x1230.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5329" class="wp-caption-text">नए संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वर्तमान महिला सांसद</figcaption></figure>
<p><strong>बिल का उद्देश्य राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर नीति-निर्माण में महिलाओं की अधिक भागीदारी को सक्षम बनाना है। इसमें कहा गया है कि परिसीमन प्रक्रिया शुरू होने के बाद आरक्षण लागू होगा और 15 वर्षों तक जारी रहेगा। विधेयक के अनुसार, प्रत्येक परिसीमन प्रक्रिया के बाद लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों की अदला बदली होगी। पारित हो जाने के बाद परिसीमन प्रक्रिया शुरू होगी और उसके बाद महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित की जाएंगी। </strong></p>
<p>इस प्रक्रिया में बिहार की कुल 243 सीटों में से 81 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। 243 में से 38 सीटें अनुसूचित जाति और दो सीट अनूसूचित जनजाति के लिए पहले से ही आरक्षित हैं। इस तरह राज्य में कुल 121 सीटें आरक्षित हो जाएंगी, जो कुल सीटों का करीब 50 फीसदी है। <br />
इसी तरह, उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं। इममें से 84 सीटें अनुसूचित जाति के लिए और दो सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। महिला आरक्षण लागू होने के बाद 134 सीटें महिलाओं के लिए सुरक्षित हो जाएंगी। इस तरह 403 सीटों में से कुल 220 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएंगी। यह 50 फीसदी के मनोवैज्ञानिक स्तर से ज्यादा है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि 17वीं लोकसभा के लिए देश ने सबसे अधिक 78 महिला सदस्य चुनकर भेजी थीं । हाल ही में राज्यसभा में 61 नए सांसद चुने गए हैं। इनमें 4 महिला सांसद भी हैं। नई महिला सांसदाें के साथ ही संसद में कुल महिला सदस्यों की संख्या 103 हाे गई है। जिसमें लोकसभा में 78 और राज्यसभा में 25  महिला सांसद हैं। </p>
<p>राजस्थान से महिला सांसद जसकौर मीणा मानती है कि संसद में उनकी भागीदारी संसद में बढ़ती हुई उनकी भागीदारी का आजाद भारत में महिला सशक्तिकरण का एक बेजोड़ नमूना है । उन्होंने माना कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं की समाज में भागीदारी तेजी से बढ़ रही है। महिला सांसदों को सदन में प्रतिशत के रूप में देखें तो लोकसभा में 14.36% और राज्यसभा में 10% से अधिक महिला सदस्य हाे गई हैं। लोकसभा में 1951 से 2019 तक लगातार महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ी है। </p>
<p>नई नीति के मुताबिक आंध्रप्रदेश में कुल सीट 175 है और आरक्षण के बाद महिलाओं की संख्या 58 होगी। अरुणाचल प्रदेश में कुछ सीट 60 और आरक्ष्ण के बाद महिलाऐं 20 कुर्सियों पर बैठेंगी। असम में 126 कुल  सीटों में 42 सीट महिलाओं के लिए होंगी। बिहार में 243 में 81 स्थान महिलाओं के लिए, जबकि छत्तीसगढ़ में 90 में 30 सीट महिलाओं की होंगी। दिल्ली में 70 में 23 स्थान महिलाओं की होगी। गोआ में 40 में 13 स्थान महिलाओं के लिए। गुजरात में 182 सीटों में 61 सीट महिलाओं के लिए सुरक्षित होंगी। </p>
<p>इसी तरह हरियाणा में 90 में 30, हिमाचल प्रदेश में 68 में 23, जम्मू कश्मीर में 90 में 30 झारखंड में 81 में 27, कर्नाटक में 224 में 75, केरल में 140 में 47 और मध्यप्रदेश में 230 में 77 सीटें महिलाओं के लिए होंगी। महाराष्ट्र में 288 में 96, मणिपुर में 60 में 20, मेघालय में 60 में 20, मिजोरम में 40 में 13, नागालैंड में 60 में 20, ओडिशा में 147 में 49, पुडुचेरी में 30 में 10, पंजाब में 117 में 39, राजस्थान में 200 में 67, सिक्किम में 32 में 11, तमिलनाडु में 234 में  78,  तेलंगाना में 119 में 40, त्रिपुरा में 60 में 20, उत्तराखंड में 70 में 23 और पश्चिम बंगाल में 294 में 98 कुर्सियां महिलाओं के लिए। </p>
<p>लोकसभा के लिए निर्वाचित महिलाओं की सबसे कम संख्या 1977 में थी जब केवल 19 महिलाएँ निचले सदन तक पहुँचीं, जो कुल लोकसभा सीटों (उस समय 542) का केवल 3.50% थी। 1996 में सबसे अधिक 599 महिला उम्मीदवार मैदान में थीं, उसके बाद 2009 में 556 महिला उम्मीदवार और 2004 में 355 महिला उम्मीदवार मैदान में थीं। </p>
<p>चुनाव लड़ने में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों की तुलना में काफी कम रही है। नौवें आम चुनाव तक महिलाओं की भागीदारी पुरुषों की तुलना में 30 गुना कम थी, हालांकि दसवें आम चुनाव के बाद भागीदारी में सुधार हुआ। लेकिन मजेदार बात यह है कि पहले चुनाव से पंद्रहवीं लोकसभा के गठन तक महिला प्रतियोगियों की जीत का प्रतिशत हमेशा पुरुष प्रतियोगियों की तुलना में अधिक रहा है। </p>
<p><strong>आज की तारीख तक लोक सभा के लिए सत्रह आम चुनाव हुए हैं। पहला आम चुनाव 25 अक्टूबर, 1951 से 21 फरवरी, 1952 तक होने के बाद 17 अप्रैल, 1952 को पहला लोक सभा का गठन हुआ और लोक सभा का प्रथम सत्र 13 मई 1952 को आरम्भ हुआ। जी. वी. मावलंकर लोकसभा (15 मई 1952 – 27 फरवरी 1956) के प्रथम अध्‍यक्ष थे। इसके बाद दूसरा आम चुनाव 24 फरवरी से 14 मार्च, 1957 तक और तीसरा 19 से 25 फरवरी 1962 तथा चौथा 17 से 21 फरवरी 1967, पांचवां 1 से 10 मार्च 1971, छठा 16 से 20 मार्च 1977, सातवां 3 से 6 जनवरी 1980, आठवां 24 से 28 दिसम्बर 1984, नौवां 22 से 26 नवम्बर 1989, दसवां 20 मई से 15 जून 1991, ग्‍यारहवां 27 अप्रैल से 30 मई 1996, बारहवां 16 फरवरी से 23 फरवरी 1998, तेरहवां 5 सितंबर से 6 अक्टूबर 1999, चौदहवां 20 अप्रैल से 10 मई 2004, पंद्रहवाँ 16 अप्रैल से 13 मई 2009 के बीच, सोलहवाँ 7 अप्रैल 2014 से 12 मई 2014 के बीच और सत्रहवाँ आम चुनाव 11 अप्रैल से 19 मई 2019 के बीच हुआ था। और देश अठारहवाँ आम चुनाव के लिए सज्ज हो रहा है। </strong></p>
<p>वर्तमान लोकसभा का कार्यकाल 16 जून 2024 को समाप्त होने वाला है। पिछले आम चुनाव अप्रैल-मई 2019 में हुए थे। चुनाव के बाद, भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने केंद्र सरकार बनाई, जिसमें नरेंद्र मोदी दूसरी बार प्रधान मंत्री बने। सभी 543 निर्वाचित सांसद फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट वोटिंग का उपयोग करके एकल सदस्यीय निर्वाचन क्षेत्रों से चुने जाते हैं। संविधान के 104वें संशोधन ने उन दो सीटों को प्रभावी रूप से समाप्त कर दिया जो एंग्लो-इंडियन समुदाय के लिए आरक्षित थीं। आज लोक सभा में भारतीय जनता पार्टी  के 301 सदस्य हैं जबकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 53 सदस्य है।</p>
<p>विगत दिनों वरिष्ठ पत्रकार के.विक्रम राव  दृष्टान्त दिया था। लोकसभा से बड़ी संख्या में सदस्यों के निष्कासन पर ब्रिटिश विचारक जान स्टुअर्ट मिल का कथन अनायास ही याद आता है। उन्होंने कहा था : “निन्यानबे लोगों को भी यह अधिकार नही है कि वे किसी एक असहमत व्यक्ति की अभिव्यक्ति का अधिकार छीन लें।” वर्तमान संदर्भ में सांसदों को सदन से सस्पेंड करने का मतलब यह हुआ कि उनके लाखों वोटरों की आवाज दबाना। अब वे आम जन की आवाज नहीं उठा पाएंगे। इसीलिए राजनीति शास्त्र के छात्र होने के नाते, मेरा यह विचार है कि अध्यक्ष ओम विरला को ऐसा विरला निर्णय करने के पूर्व भली भांति परामर्श करना चाहिए था। आखिर संसद राष्ट्रीय इच्छा की अभिव्यक्ति का माध्यम तो ही है। </p>
<p>वे कहते हैं कि विगत दिनों के संसदीय हादसे से 15 मार्च 1989 की घटना याद आती है जब अध्यक्ष बलराम झाखड़ ने एक झटके में 63 सदस्यों को सदन से निष्कासित कर दिया था। यह वाकया इंदिरा गांधी की हत्या के ठीक बाद हुआ था। प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे। सुप्रीम कोर्ट के जज न्यायमूर्ति मनोहरलाल प्राणलाल ठक्कर की अध्यक्षता में न्यायिक जांच समिति बनी। इसमें कई तथ्यों का उल्लेख किया जो रोमहर्षक थे। </p>
<p>वे कहते हैं कि एक संदर्भ था कि न्यायमूर्ति ने संदेह की सुई दिवंगत प्रधानमंत्री के वर्षों तक निजी सचिव रहे राजिन्दर कुमार धवन की ओर दिखायी थी। हत्या के षड्यंत्र में धवन की संलिप्तता का जिक्र था। सदन में 63 सदस्यों ने इस मसले पर बवाल उठाया था। राजीव गांधी प्रधानमंत्री के रूप में अपने निजी सचिव पर कुछ भी सुनने के लिए तैयार नहीं थे। </p>
<p>नतीजन सदन में शोर शराबा हुआ था। अध्यक्ष बलराम झाखड ने सभी 63 को निष्कासित कर दिया। यह कदम झाखड ने नियम 373 के तहत उठाया था। अर्थात यदि लोकसभा स्पीकर को ऐसा लगता है कि कोई सांसद लगातार सदन की कार्रवाई बाधित कर रहा है तो वह उसे उस दिन के लिए सदन से बाहर कर सकते हैं, या बाकी बचे पूरे सेशन के लिए भी सस्पेंड कर सकते हैं। वहीं इससे ज्यादा अड़ियल सदस्यों से निपटने के लिए स्पीकर रूल 374 और 374-ए के तहत कार्रवाई कर सकते हैं। </p>
<p>लोकसभा स्पीकर उन सांसदों के नाम का ऐलान कर सकते हैं, जिसने आसन की मर्यादा तोड़ी हो या नियमों का उल्लंघन किया हो। जानबूझकर सदन की कार्यवाही में बाधा पहुंचाई हो। जब स्पीकर ऐसे सांसदों के नाम का ऐलान करते हैं, तो वह सदन के पटल पर एक प्रस्ताव रखते हैं। प्रस्ताव में हंगामा करने वाले सांसद का नाम लेते हुए उसे सस्पेंड करने की बात कही जाती है। इसमें सस्पेंशन की अवधि का जिक्र होता है। </p>
<p>यह अवधि अधिकतम सत्र के खत्म होने तक हो सकती है। सदन चाहे तो वह किसी भी समय इस प्रस्‍ताव को रद्द करने का आग्रह भी कर सकता है। ठीक 5 दिसंबर 2001 को रूल बुक में एक और नियम जोड़ा गया था। इसे ही रूल 374ए कहा जाता है। यदि कोई सांसद स्पीकर के आसन के निकट आकर या सभा में नारे लगाकर या अन्य प्रकार से कार्यवाही में बाधा डालकर जानबूझकर नियमों का उल्लंघन करता है तो उस पर इस नियम के तहत कार्रवाई की जाती है। </p>
<p>लोकसभा स्पीकर द्वारा ऐसे सांसद का नाम लिए जाने पर वह पांच बैठकों या सत्र की शेष अवधि के लिए (जो भी कम हो) स्वतः निलंबित हो जाता है। स्पीकर को किसी सांसद को सस्पेंड करने का अधिकार है, लेकिन सस्पेंशन को वापस लेने का अधिकार उसके पास नहीं है। यह अधिकार सदन के पास होता है। सदन चाहे तो एक प्रस्ताव के जरिए सांसदों का सस्पेंशन वापस ले सकता है।</p>
<p><strong>अब गौर कर लें इंदिरा गांधी हत्या पर हुई ठक्कर जांच समिति की रपट के उस वाक्य पर जिसमें धवन का उल्लेख था। न्यायमूर्ति ने कहा : “कई सूचक मिलते हैं, यह इंगित करते हैं कि प्रधानमंत्री की हत्या में धवन संलिप्त रहे।” इस वाकायांश पर पूरा सदन उत्तेजित हो गया था क्योंकि तब राजीव गांधी ने भी धवन को अपना विश्वस्त सहायक नियुक्त कर दिया था। बाद में धवन सांसद और मंत्री तक बने थे। अब इन 63 सांसदों का उत्तेजित होकर सदन में हंगामा करना स्वाभाविक था। पर अपने अपार (400 से अधिक सदस्यों) के बल पर राजीव गांधी ने 63 सांसदों को सदन के बाहर करा दिया।</strong></p>
<p>वह मसला तो आज की घटना की तुलना में बहुत कम गंभीर है। इस बार तो केवल चंद सिरफिरे युवाओं की बेजा और घृणित सस्ती हरकत के मामले पर सदन में रोष व्यक्त किया गया। तब तो (1989 में) प्रधानमंत्री की हत्या की न्यायिक जांच रपट में इन्दिरा गांधी के निजी सहायक धवन पर शक की सुई की चर्चा थी। </p>
<p>फिर भी तुलनात्मक रूप से देखें तो इतनी बड़ी संख्या में सांसदों का निष्कासन न तो तब (1989) और न तो अब (2023) में स्वीकार्य हो सकता है। अर्थात अब अध्यक्ष महोदय को स्वयं उपाय खोजने होंगे कि सदन की गरिमा संजोई रहे। आखिर इसका सीधा प्रभाव पड़ता है सामान्य वोटरों पर। कहा था डॉ. राममनोहर लोहिया ने कि “सड़क खामोश हो जाएगी तो संसद आवारा हो जाएगी।” आज ठीक उल्टा हो रहा है। संसद उद्विग्न हो रही है, तो वोटरों के असंतोष का उद्रेक तो बढ़ेगा ही। समाधान सदन में है। स्पीकर के पास है।</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/chutkulanands-letter/the-saying-women-are-the-enemies-of-women-must-be-refuted">&#8216;महिला ही महिलाओं की दुश्मन हैं&#8217; कहावत को झुठलाना होगा, खेत-खलिहानों की महिलाओं के हितों के बारे में भी सोचना होगा संसद में बैठने वाली महिलाओं को</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>पुराने संसद भवन को नमन और नए संसद भवन में ऐतिहासिक सत्र प्रारम्भ,  &#8216;नारी शक्ति वंदन अधिनियम प्रस्तुत&#8217;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 19 Sep 2023 12:37:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली: प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी आज संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में अंतिम भाषण देते कहा कि आज नए संसद भवन में हम सब मिलकर के नए भविष्य का श्रीगणेश करने जा रहे हैं। आज हम यहां विकसित भारत का संकल्प दोहराना फिर एक बार संकल्पबद्ध होना और उसको परिपूर्ण करने के लिए जी-जान [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली: प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी आज संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में अंतिम भाषण देते कहा कि आज नए संसद भवन में हम सब मिलकर के नए भविष्य का श्रीगणेश करने जा रहे हैं। आज हम यहां विकसित भारत का संकल्प दोहराना फिर एक बार संकल्पबद्ध होना और उसको परिपूर्ण करने के लिए जी-जान से जुटने के इरादे से नए भवन की तरफ प्रस्थान कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि ये भवन और उसमें भी ये सेंट्रल हॉल एक प्रकार से हमारी भावनाओं से भरा हुआ है। हमें भावुक भी करता है और हमें हमारे कर्तव्य के लिए प्रेरित भी करता है। आजादी के पूर्व ये खंड एक प्रकार से लाइब्रेरी के रूप में इस्तेमाल होता था। लेकिन बाद में संविधान सभा की बैठक यहां शुरू हुई और उन संविधान सभा के बैठकों के द्वारा गहन चर्चा, विचार करके हमारे संविधान ने यही पर आकार लिया। यही पर 1947 में अंग्रेजी हुकूमत ने सत्ता हस्तांतरण किया, उस प्रक्रिया का भी साक्षी हमारा ये सेंट्रल हॉल है। इसी सेंट्रल हॉल में भारत के तिरंगे को अपनाया गया, हमारे राष्ट्रगान को अपनाया गया। और ऐतिहासिक अवसरों पर आजादी के बाद भी सभी सरकारों के दरमियान अनेक अवसर आए जब दोनों सदनों ने मिलकर के यहां पर भारत के भाग्य को गढ़ने की बात पर विचार किया, सहमति बनाई और निर्णय भी लिए। </strong></p>
<p>आज हम यहां से विदाई ले करके नए भवन में जा रहे हैं। संसद के नए भवन में बैठने वाले हैं। और ये शुभ है, गणेश चतुर्थी के दिन बैठ रहे हैं। लेकिन मैं आप दोनों महानुभावों को एक प्रार्थना कर रहा हूं, एक विचार आपके सामने रख रहा हूं। मैं आशा करता हूं कि आप दोनों मिल करके उस विचार पर जहां भी जरूरत पड़े मंथन करके कुछ निर्णय अवश्‍य करिए। और मेरी प्रार्थना है, मेरा सुझाव है कि अब हम जब नए सदन में जा रहे हैं, तब इसकी गरिमा कभी भी कम नहीं होनी चाहिए। इसे सिर्फ पुरानी पार्लियामेंट कह करके छोड़ दें, ऐसा नहीं होना चाहिए। और इसलिए मेरी प्रार्थना है कि भविष्‍य में अगर आप सहमति दें दोनों महानुभाव, तो इसको संविधान सदन के रूप में जाना जाए। ताकि ये हमेशा-हमेशा के लिए हमारी जीवन प्रेरणा बना रहेगा और जब संविधान सदन कहेंगे तब उन महापुरुषों की याद इसके साथ जुड़ जाएगी जो कभी संविधान सभा में यहां बैठा करते थे, गणमान्‍य महापुरुष बैठा करते थे, और इसलिए भावी पीढ़ी को ये तोहफा भी देने का अवसर हमें जाने नहीं देना चाहिए। </strong></p>
<figure id="attachment_5091" aria-describedby="caption-attachment-5091" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/2.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/2.jpg" alt="" width="2200" height="1225" class="size-full wp-image-5091" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/2.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/2-300x167.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/2-1024x570.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/2-768x428.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/2-1536x855.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/2-2048x1140.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5091" class="wp-caption-text">19 सितंबर, 2023 को नई दिल्ली में नए संसद भवन में प्रधानमंत्री</figcaption></figure>
<p>मैं फिर एक बार इस पवित्र भूमि को प्रणाम करता हूं। यहां पर जो तपस्‍या हुई है, जनकल्‍याण के लिए संकल्‍प हुए हैं, उसको परिपूर्ण करने के लिए सात दशक से भी अधिक समय से जो पुरुषार्थ हुआ है, उन सबको प्रणाम करते हुए मैं मेरी वाणी को विराम देता हूं और नए सदन के लिए आप सबको शुभकामनाएं देता हूं। ये भवन नया है, यहां सबकुछ नया है, सारी व्यवस्थाएं नई हैं, यहां तक आपके सब साथियों को भी आपने एक नए रंग-रूप के साथ प्रस्तुत किया है। सब कुछ नया है लेकिन यहां पर कल और आज को जोड़ती हुई एक बहुत बड़ी विरासत का प्रतीक भी मौजूद है, वो नया नहीं है, वो पुराना है। और वो आजादी की पहली किरण का स्वयं साक्षी रहा है जो आज अभी हमारे बीच उपस्थित है। वो हमारे समृद्ध इतिहास को जोड़ता है और जब आज हम नए सदन में प्रवेश कर रहे हैं, संसदीय लोकतंत्र का जब ये नया गृहप्रवेश हो रहा है तो यहां पर आजादी की पहली किरण का साक्षी, जो आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरणा देने वाला है, वैसा पवित्र सैंगोल और ये वो सैंगोल है जिसको भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित नेहरू का स्पर्श हुआ था, ये पंडित नेहरू के हाथों में पूजाविधि कर-करके आजादी के पर्व का प्रारंभ हुआ था। और इसलिए एक बहुत महत्वपूर्ण अतीत को उसके साथ ये सैंगोल हमें जोड़ता है। तमिलनाडु की महान परंपरा का वो प्रतीक तो है ही देश को जोड़ने का भी, देश की एकता का भी वो प्रतीक है। और हम सभी माननीय सांसदों को हमेशा जो पवित्र सैंगोल पंडित नेहरू के हाथ में शोभा देता था वो आज हम सबकी प्रेरणा का कारण बन रहा है, इससे बड़ा गर्व क्या हो सकता है।  </p>
<p>1952 के बाद दुनिया के करीब 41 राष्ट्राध्यक्षों ने इस सेंट्रल हॉल में हमारे सभी माननीय सांसदों को संबोधित किया है। हमारे राष्ट्रपति महोदयों के द्वारा 86 बार यहां संबोधन किया गया है। बीते 7 दशकों में जो भी साथी इन जिम्मेदारियों से गुजरे हैं, जिम्मेदारियों को संभाली हैं, अनेक कानूनों, अनेक संशोधन और अनेक सुधारों का हिस्सा रहे हैं। अभी तक लोकसभा और राज्यसभा ने मिलकर करीब-करीब 4 हजार से अधिक कानून पास किए हैं। और कभी जरूरत पड़ी तो Joint Session के माध्यम से भी कानून पारित करने की दिशा में रणनीति बनानी पड़ी और उसके तहत भी दहेज रोकथाम कानून हो, बैंकिग सर्विस कमिशन बिल हो, आतंक से लड़ने के लिए कानून हो, ये संयुक्त सत्र में पास किए गए हैं, इसी गृह में पास किए गए हैं। इसी संसद में मुस्लिम बहन, बेटियों को न्याय की जो प्रतीक्षा थी, शाहबानो केस के कारण गाड़ी कुछ उल्टी पाटी पर चल गई थी, इसी सदन ने हमारी उस गलतियों को ठीक किया और तीन तलाक के विरूद्ध कानून हम सबने मिलकर के पारित किया। संसद ने बीते वर्षों में ट्रांसजेंडर को न्याय देने वाले कानूनों का भी निर्माण किया। इसके माध्यम से हम ट्रांसजेंडर के प्रति सद्भाव और सम्मान के भाव के साथ उनको नौकरी, शिक्षा, स्वास्थ्य बाकी जो सुविधाएं हैं, एक गरिमा के साथ प्राप्त कर सकें, इसकी दिशा में हम आगे बढ़े हैं। हम सभी ने मिलकर हमारे दिव्यांगजनों के लिए भी, उनकी जरूरतों को देखते हुए, उनके aspirations को देखते हुए ऐसे कानूनों को निमार्ण किया जो उनके उज्ज्वल भविष्य की गारंटी बन गए। आर्टिकल-370 हटाने से लेकर, वो विषय ऐसा रहा शायद ही कोई दशक ऐसा होगा कि जिसमें चर्चा न हुई हो, चिंता न हुई हो और मांग न हुई हो, आक्रोश भी व्यक्त हुआ, सभागृह में भी हुआ, सभागृह के बाहर भी हुआ, लेकिन हम सबका सौभाग्य है कि हमें इस सदन में आर्टिकल-370 से मुक्ति पाने का, अलगावाद आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ने का एक बड़ा महत्वपूर्ण कदम। और इस महत्वपूर्ण काम में माननीय सांसदों की, संसद की बहुत बड़ी भूमिका है। जम्मू-कश्मीर में इसी सदन में निर्मित हुआ संविधान, हमारे पूर्वजों ने जिसे दिया वो महामूल्य दस्तावेज, जम्मू-कश्मीर में लागू करते हैं तो इस मिट्टी को प्रणाम करने का मन कर रहा है।</p>
<figure id="attachment_5092" aria-describedby="caption-attachment-5092" style="width: 1800px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/3.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/3.jpg" alt="" width="1800" height="1233" class="size-full wp-image-5092" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/3.jpg 1800w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/3-300x206.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/3-1024x701.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/3-768x526.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/3-1536x1052.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/3-100x70.jpg 100w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/3-218x150.jpg 218w" sizes="auto, (max-width: 1800px) 100vw, 1800px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5092" class="wp-caption-text">19 सितंबर, 2023 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री और अन्य सांसद पुरानी संसद से नए संसद भवन तक पैदल चलते हुए।</figcaption></figure>
<p><strong>केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार द्वारा आज लोक सभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम प्रस्तुत करने के लिए प्रधानमंत्री जी का आभार प्रकट किया। X प्लेटफॉर्म पर अपनी पोस्ट में श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने आज भारत की सनातन संस्कृति के अनुरूप “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता:” को देश के लोकतंत्र में चरितार्थ करके दिखाया है। उन्होंने कहा कि आज लोकसभा में पेश हुआ &#8216;नारी शक्ति वंदन अधिनियम&#8217; एक ऐसा निर्णय है, जिससे हमारी नारी शक्ति को सही मायने में उनका अधिकार मिलेगा। श्री शाह ने कहा कि मोदी जी ने दिखाया है कि ‘Women led Empowerment’ मोदी सरकार के लिए एक नारा नहीं, बल्कि एक संकल्प है, और, इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए करोड़ों देशवासियों की ओर से मोदी जी का हृदय से अभिनंदन करता हूँ।</strong></p>
<p>केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि चाहे नीति हो या नेतृत्व, भारत की नारी शक्ति ने साबित किया है कि वे किसी भी क्षेत्र में किसी से कम नहीं हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार का मानना है कि नारी शक्ति के सहयोग और सामर्थ्य के बिना एक सशक्त और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण संभव नहीं है। श्री शाह ने कहा कि देश की महिला शक्ति को उनका अधिकार देने वाला मोदी सरकार का यह निर्णय, आने वाले समय में एक विकसित और समृद्ध भारत के निर्माण का मुख्य स्तंभ बनेगा।</p>
<p>आज जम्मू और कश्मीर शांति और विकास के रास्ते पर चलने के लिए प्रतिबद्ध हुआ है और नए उमंग, नए उत्साह, नए संकल्प के साथ जम्मू-कश्मीर के लोग आगे बढ़ने का कोई मौका अब छोड़ना नहीं चाहते हैं। ये दिखाता है कि संसद के सदस्यों ने मिलकर के संसद के भवन में कितने महत्वपूर्ण काम किए हैं। माननीय सांसदगण लालकिले से मैंने कहा था, यही समय है, सही समय है। एक के बाद एक घटनाओं की तरफ हम नजर करेंगे, हर घटना इस बात का गवाह दे रही है कि आज भारत एक नई चेतना के साथ पुर्नजागृत हो चुका है। भारत नई ऊर्जा से भर चुका है और यही चेतना यही ऊर्जा इस देश के कोटि-कोटि जनों के सपनों को संकल्प में परिवर्तित कर सकती है और संकल्प को परिश्रम की पराकष्ठा कर-करके सिद्धी तक पहुंचा सकती है, ये हम देख सकते हैं। और मेरा विश्वास है, देश जिस दिशा में चल पड़ा है इच्छित परिणाम अवश्य प्राप्त होंगे। हम गति जितनी तेज करेंगे, परिणाम उतने जल्दी मिलेंगे। </p>
<p>आज भारत पांचवी अर्थव्यवस्था पर पहुंचा है। लेकिन पहले तीन में पहुंचने के संकल्प के साथ बढ़ रहा है। और मैं जिस स्थान पर बैठा हूं, जो जानकारियां प्राप्त होती हैं उसके आधार पर, विश्व के गणमान्य लोगों से बातचीत करता हूं उसके आधार पर, मैं बड़े विश्वास से कह रहा हूं, हम में से कुछ लोगों को निराशा हो सकती है। लेकिन दुनिया आश्वस्त है, ये भारत टॉप-3 में पहुंच कर रहेगा। भारत का बैंकिंग सेक्टर आज अपनी मजबूती के कारण से फिर एक बार दुनिया में सकारात्मक चर्चा का केंद्र बना हुआ है। भारत का गर्वनेंस का मॉडल, यूपीआई , डिजिटल स्टेक। मैं इस जी-20 में देख रहा था, मैंने बाली में भी देखा। टेक्नॉलोजी की दुनिया को लेकर के भारत का नौजवान जिस प्रकार से आगे बढ़ रहा है, पूरे विश्व के लिए कौतुहल भी है, आकर्षण भी है और स्वीकृति भी है। हम सब उस ऐसे कालखंड में हैं। मैं कहूंगा हम लोग एक भाग्यवान लोग हैं।</p>
<figure id="attachment_5093" aria-describedby="caption-attachment-5093" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/5.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/5.jpg" alt="" width="2200" height="1935" class="size-full wp-image-5093" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/5.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/5-300x264.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/5-1024x901.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/5-768x675.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/5-1536x1351.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/5-2048x1801.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5093" class="wp-caption-text">19 सितंबर, 2023 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री और अन्य सांसद पुरानी संसद से नए संसद भवन तक पैदल चलते हुए।</figcaption></figure>
<p>सामाजिक न्याय, ये हमारी पहली शर्त है। बिना सामाजिक न्याय, बिना संतुलन, बिना समभाव, बिना समत्व हम इच्छित परिणामों को घर के भीतर प्राप्त नहीं कर सकते हैं। लेकिन सामाजिक न्याय की चर्चा बहुत सीमित बनकर रह गई है, हमें उसको व्यापक रूप में देखना होगा। हम किसी गरीब को कोई सुविधा दें, किसी समाज में दबे-कुचले व्यक्ति को कोई सुविधा दें, वो तो सामाजिक न्याय की एक प्रक्रिया है, लेकिन उसके घर तक पक्की सड़क बन जाए ना वो भी सामाजिक न्याय के लिए उसको मजबूती देती है। उसके घर के नजदीक में बच्चों के लिए अगर स्कूल खुल जाएं तो वो भी उसको सामाजिक न्याय की मजबूती देती है। उसको बिना खर्च अगर आरोग्य में, समय के जरूरत पड़ने पर वो मिले, तब जाकर के सामाजिक न्याय की मजबूती मिलती है। और इसलिए जिस प्रकार से समाज व्यवस्था में सामाजिक न्याय की जरूरत है, वैसी ही राष्ट्र व्यवस्था में सामाजिक न्याय की आवश्यकता है। </p>
<p>आज विश्‍व की नजर भारत पर है। शीत युद्ध के समय हमारी पहचान गुटनिरपेक्ष देश के रूप में रही है। उस समय की जो जरूरत थी, उसके जो लाभ होने थे, उस समय से हम गुजरे हैं। लेकिन अब भारत का स्‍थान कुछ और बना है। और इसलिए उस समय गुट निरपेक्ष की आवश्‍यकता अवश्य रही होगी, आज हम उस नीति को ले करके चल रहे हैं, जिस नीति को अगर हमें पहचानना है तो विश्‍वमित्र के रूप में हम आगे बढ़ रहे हैं, हम दुनिया से मित्रता कर रहे हैं। दुनिया हमारे में मित्र खोज रही है। ये शायद विश्‍व में भारत ने और दूरी नहीं, जितनी हो सके उतनी निकटता के जरिए, उस रास्‍ते पर चल करके हम अपने विश्‍वमित्र के भाव को आज सफलतापूर्वक आगे बढ़ा रहे हैं और मुझे लगता है कि इसका लाभ आज भारत को हो रहा है। </p>
<p>हमारे यहां कहा जाता है ‘यद भावं तद भवति’ और इसलिए हमारा भाव जैसा होता है वैसे ही कुछ घटित होता है ‘यद भावं तद भवति’ और इसलिए हम जैसी भावना करते हैं और हमने जैसी भावना करके प्रवेश किया है, मुझे विश्वास है, भावना भीतर जो होगी हम भी वैसे ही खुद भी बनते जाएंगे और वो बहुत स्वाभाविक है। भवन बदला है मैं चाहूंगा भाव भी बदलना चाहिए, भावना भी बदलनी चाहिए। </p>
<p>संसद राष्ट्र सेवा का सर्वोच्च स्थान है। ये संसद दलहित के लिए नहीं है, हमारे संविधान निर्माताओं ने इतनी पवित्र संस्था का निर्माण दलहित के लिए नहीं सिर्फ और सिर्फ देशहित के लिए किया है। नए भवन में हम सभी अपने वाणी से, विचार से, आचार से संविधान के जो स्पिरिट है उन मानदंडों को लेकर के नए संकल्पों के अनुसार नवी भाव को लेकर के, नई भावना को लेकर के, मैं आशा करता हूं अध्यक्ष जी आप कल भी कह रहे थे, आज भी कह रहे थे, कभी स्पष्ट कह रहे थे, कभी थोड़ा लपेट कर भी कह रहे थे हम सांसदों के व्यवहार के संबंध में, मैं मेरी तरफ से आपको आश्वासन देता हूं कि हमारा पूरा प्रयास रहेगा और मैं चाहूंगा कि सदन के नेता के नाते हम सभी सांसद आपकी आशा-अपेक्षा में खरे उतरें। हम अनुशासन का पालन करें देश हमें देखता है, आप जैसा दिशानिर्देश करे।   </p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/nation/salutation-to-the-old-parliament-house-and-historic-session-begins-in-the-new-parliament-house">पुराने संसद भवन को नमन और नए संसद भवन में ऐतिहासिक सत्र प्रारम्भ,  &#8216;नारी शक्ति वंदन अधिनियम प्रस्तुत&#8217;</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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