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	<title>new delhi Archives - आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</title>
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	<description>आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</description>
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		<title>पत्रकार, गैर-पत्रकार बिलखते रहे, दरभंगा राज की &#8216;गरिमा&#8217; को बचाने का &#8216;तथाकथित दावा&#8217; करने वाले महाराजा द्वारा स्थापित &#8216;यूएनआई&#8217; को बचाने के लिए ​कभी ​आगे नहीं आये</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 23 Mar 2026 03:24:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
		<category><![CDATA[aryavarta]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>पटना / नई दिल्ली: अपने स्थापना के 65वें वर्ष में भारत का एक विश्वसनीय समाचार एजेंसी &#8211; यूनाइटेड न्यूज ऑफ़ इंडिया &#8211; को बेघर इसलिए होना पड़ा कि उसके स्थापना काल के 27-शेयरधारकों ने इस संस्थान को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए शायद दशकों पहले ही मन बना चुके थे। संतानहीन दरभंगा के महाराजाधिराज डॉ.सर [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>पटना / नई दिल्ली: अपने स्थापना के 65वें वर्ष में भारत का एक विश्वसनीय समाचार एजेंसी &#8211; यूनाइटेड न्यूज ऑफ़ इंडिया &#8211; को बेघर इसलिए होना पड़ा कि उसके स्थापना काल के 27-शेयरधारकों ने इस संस्थान को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए शायद दशकों पहले ही मन बना चुके थे। संतानहीन दरभंगा के महाराजाधिराज डॉ.सर कामेश्वर सिंह और उनका &#8216;दी न्यूजपेपर्स एंड पब्लिकेशंस लिमिटेड&#8217; का यूएनआई के स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान था, की मृत्यु के बाद उनके परिवार के लोगों ने भी, एक महत्वपूर्ण शेयर होल्डर होने के वावजूद, पत्रकारिता के इस मंदिर को बचाने, दरभंगा राज की गरिमा को बरक़रार रखने के लिए एक भी कदम आगे नहीं बढ़ाये, जिसकी उम्मीद यहाँ के पत्रकार और गैर-पत्रकार किये थे। </strong></p>
<p>अगर ऐसा नहीं होता तो यूएनआई के स्थापना के 18 वर्ष बाद, तत्कालीन सरकार द्वारा आवंटित भूखंड &#8211; 9, रफ़ी मार्ग &#8211; पर एक आलीशान भवन बन गया होता। आज देश से प्रकाशित समाचार पत्र और पत्रिकाओं के मालिक/संपादक यूएनआई की सेवा (सब्सक्रिप्शन) लेते होते। आज यूएनआई जैसी पत्रकारिता से सम्बंधित विश्वसनीय संस्था को जीवन के इस वृद्धावस्था में बेघर नहीं होना होता। आज दशकों कार्य किये पत्रकार, गैर पत्रकारों को जीवन के अंतिम वसंत में रोजी-रोटी की तलाश में &#8216;अग्निपथ&#8217; पर नहीं चलना होता। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जिन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए यूएनआई की स्थापना की गई थी, आज संसद मार्ग से तत्कालीन योजना भवन से मुड़ती सड़क के सामने 9-रफ़ी मार्ग की मिट्टी भी बिलख रही है &#8211; स्थापना काल के शेयरधारकों ने छल कर दिया।<br />
 <br />
<strong>यह कहा जाता है कि औसतन यूएनआई के स्थापना काल में वे ही शेयर धारक बने तो पहले से ही एक दूसरे समाचार एजेंसी के भी शेयर धारक थे। यह भी कहा जाता है कि उस समाचार एजेंसी में नियमों/शर्तों में यह बात उद्धृत किया गया था कि &#8216;जो भी शेयरधारक हैं, उन्हें एजेंसी का सब्सक्रिप्शन लेना बाध्यकारी होगा।&#8217; यह शर्त यूएनआई के स्थापना काल में लोगों ने नहीं रखा। शायद यही कारण है कि स्थापना और सेवा शुरुआत के कुछ वर्षों के बाद ही शेयर धारकों ने न केवल अपनी भागीदारी यूएनआई के प्रति, उनके कार्य कलाप के प्रति, आमदनी-खर्च के प्रति अपनी जबाबदेही से हाथ धोने लगे, बल्कि समाचार, लेख और एजेंसी द्वारा प्रदत्त सभी सुविधाओं के सब्सक्रिप्शन को भी निरस्त करते गए। </strong></p>
<p>&#8216;वास्तविक यूएनआई&#8217; के लोगों का कहना है कि विगत दो दशकों और अधिक समय में यूएनआई के शेयर धारकों को न जाने कितने बार संपर्क स्थापित करने की कोशिश की गयी, निवेदन किया गया, विनती की गयी; दुर्भाग्यवश दरभंगा राज के दी न्यूजपेपर एंड पब्लिकेशन लिमिटेड, जो एक महत्वपूर्ण शेयर धारक थे, विनती को नहीं सुना। काश !! महाराजाधिराज जीवित होते। परिणाम यह हुआ कि यूनाइटेड न्यूज ऑफ़ इंडिया &#8216;तथाकथित आतंरिक राजनीतिक चक्रव्यूह के साथ-साथ विपन्नता से ग्रसित होता गया। कल जिसके शब्दों की तूती बोली जाती थी, आज उसके शब्दों को सुनने वाला कोई नहीं दिखा रहा है। यह अलग बात है कि अनेकानेक प्रेस विज्ञप्तियां जारी हो रही है, भर्त्सना की जा रही है।  </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-8.jpg"><img fetchpriority="high" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-8.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-7500" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-8.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-8-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-8-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-8-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-8-1536x1026.jpg 1536w" sizes="(max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<blockquote><p>शायद देश के पत्रकार इस बात से अनभिज्ञ होंगे कि यूनाइटेड न्यूज ऑफ़ इंडिया की स्थापना के बाद बिहार की राजधानी पटना में इसकी पहली शाखा &#8216;दी न्यूजपेपर्स एंड पब्लिकेशंस लिमिटेड (आर्यावर्त और दी इंडियन नेशन दैनिक समाचार पत्र का प्रकाशक) के मजहरूल हक़ रोड स्थित आलीशान भवन के परिसर में खुला था। &#8216;दी न्यूजपेपर्स एंड पब्लिकेशंस लिमिटेड&#8217; के मालिक दरभंगा के महाराजाधिराज डॉ. सर कामेश्वर सिंह यूएनआई के स्थापनकालीन 27-शेयर होल्डरों में प्रमुख थे।</p></blockquote>
<p>इस परिसर में कुछ वर्ष कार्य करने के बाद उसी मार्ग पर आगे डी लाल एंड संस के पीछे जाने वाली गली में स्थित होटल में दो कमरे से कार्य करना शुरू किया। सत्तर के दशक के प्रारंभिक वर्षों में आकाशवाणी, पटना के प्रवेश द्वार पर स्थित एक बंगाली परिवार के मकान के प्रथम मंजिल पर आया। उसी भवन के निचले तले में &#8216;मंगोलिया बार&#8217; खुला। यूएनआई का यह कार्यालय बिहार सहित राष्ट्रीय स्तर पर सत्तर के दशक और उसके बाद होने वाली राजनीतिक महाभारतों का प्रथम द्रष्टा रहा। </p>
<p><strong>ज्ञातव्य हो कि स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की मानसिक उपज से स्थापित साथ-सत्तर-अस्सी-नब्बे के ज़माने तक का भारत का सबसे अधिक जीवंत समाचार एजेंसी का आज़ादी के 78 वर्ष आते-आते यह हश्र हो गया । कहते हैं उन दिनों देश के प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू अपने आधिकारिक यात्रा पर जम्मू-कश्मीर गए थे। प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया अपना कार्य प्रारम्भ कर दिया था यूएनआई के स्थापना से पूर्व। जिस दिन पंडित नेहरू जम्मू और कश्मीर में थे, पीटीआई के पत्रकार और गैर-पत्रकार अपनी मांगों के समर्थजन में हड़ताल पर थे। परिणाम यह हुआ की पंडित नेहरू की यात्रा की खबर देश के अख़बारों में प्रकाशित नहीं हो पाया, सिवाय जम्मू और कश्मीर के स्थानीय अख़बारों को छोड़कर, या फिर टेलीफोन/ट्रंकाल से प्रेषित समाचार का प्रकाशन को छोड़कर। </strong></p>
<p>पंडित नेहरू तत्काल पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. विधानचंद्र रॉय को एक ऐसा समाचार एजेंसी बनाने को कहे, जिसमें देश के सभी अख़बारों के मालिकों का हिस्सा हो और वे निष्पक्षता के साथ-साथ शब्दों की गरिमा को बरकरार रखकर, समाचार और लेख उपलब्ध करा सके। यह भी कहा जाता है कि डॉ. रॉय इस सम्बन्ध में सबसे पहले दरभंगा के महाराजाधिराज डॉ. सर कामेश्वर सिंह से संपर्क स्थापित कर इस दिशा में पहल करने की बात की। यूनाइटेड न्यूज ऑफ़ इंडिया का गठन इसी सोच पर किया गया और उसकी पहली कहानी 21 मार्च, 1961 को टेलीप्रिंटर के माध्यम से देश के प्रमुख शहरों और राजधानियों से प्रकाशित अख़बारों में प्रकशित हुयी थी। </p>
<blockquote><p>दरभंगा के महाराजाधिराज डॉ. कामेश्वर सिंह द्वारा स्थापित और पटना से प्रकाशित &#8216;दी इंडियन नेशन (1930) और &#8216;आर्यावर्त (1940) के प्रकाशक &#8216;दी न्यूजपेपर्स एंड पब्लिकेशन्स लिमिटेड&#8217; के तत्कालीन महाप्रबंधक श्री उपेंद्र आचार्य को यूएनआई की बेहतर स्थापना कराने, भागीदारी निभाने (अर्थ और सामर्थ्य दोनों से) का दायित्व सौंपा गया। दी न्यूजपेपर एंड पब्लिकेशन्स लिमिटेड का इस एजेंसी की स्थापना में क्या योगदान रहा, यह आज की व्यवस्था या आज के पत्रकार नहीं समझ पाएंगे। उपेंद्र आचार्य जब कार्यालय से अवकाश मुक्त हुए तो उनके स्थान पर आये &#8216;मास्टर साहब&#8217; यानी काली कान्त झा। उस कालखंड में, जब यूएनआई अपने उत्कर्ष की ओर उन्मुख था, उसके इतिहास में शायद यह पहली घटना थी जब दी न्यूजपेपर एंड पब्लिकेशन्स लिमिटेड का प्रतिनिधित्व करते काली कान्त झा दो बार यूएनआई के अध्यक्ष बने थे। साल 1971 और 1972 का कालखंड था। </p></blockquote>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-1.jpg"><img decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-1.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-7501" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-1.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-1-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-1-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-1-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-1-1536x1026.jpg 1536w" sizes="(max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p>यूएनआई के स्थापना के अगले वर्ष 1 अक्टूबर, 1962 को महाराजाधिराज डॉ. कामेश्वर सिंह का निधन हो गया। महाराजाधिराज की मृत्यु के बाद &#8216;मास्टर साहब&#8217; अपने जीते-जी और सेवाकाल /अवकाश प्राप्त करने के बाद भी, यथासंभव अपने संस्थान के साथ-साथ यूएनआई के स्थापना उद्देश्य की प्राप्ति में भरपूर योगदान दिया। लेकिन कालांतर में यूएनआई के अन्य शेयरधारकों से वह सहयोग नहीं मिल पाया जिसकी अपेक्षा थी। परिणाम यह हुआ की वास्तविक यूएनआई &#8216;उपेक्षित&#8217; होता चला गया और अंततः यह आर पी गुप्ता का हो गया।  </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letyter-1-scaled.jpg"><img decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letyter-1-scaled.jpg" alt="" width="1159" height="2560" class="aligncenter size-full wp-image-7512" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letyter-1-scaled.jpg 1159w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letyter-1-136x300.jpg 136w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letyter-1-463x1024.jpg 463w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letyter-1-768x1697.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letyter-1-695x1536.jpg 695w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letyter-1-927x2048.jpg 927w" sizes="(max-width: 1159px) 100vw, 1159px" /></a></p>
<p><strong>और उसका ज्वलंत दृष्टान्त विगत दिनों देखा गया जब दिल्ली उच्च न्यायालय ने शहर के प्रमुख सेंट्रल दिल्ली इलाके में यूनाइटेड न्यूज़ ऑफ़ इंडिया को आवंटित की गई जमीन का आवंटन रद्द करने के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि कोई भी डिफ़ॉल्ट करने वाला लाइसेंसी, जो उस मकसद को ही पूरा करने में नाकाम रहा हो जिसके लिए उसे जमीन आवंटित की गई थी, सरकारी जमीन को &#8220;बंधक&#8221; बनाकर नहीं रख सकता। और शुक्रवार शाम को दिल्ली पुलिस ने रफ़ी मार्ग स्थित यूएनआई के दफ़्तर को सील कर दिया। यह कार्रवाई तब हुई जब दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सचिन दत्ता ने अपने 98 पन्नों के आदेश में कहा कि यह न्यूज़ एजेंसी अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने में नाकाम रहने के बावजूद, 45 साल से भी ज़्यादा समय से सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा जमाए बैठी थी।</strong></p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letyter-2-scaled.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letyter-2-scaled.jpg" alt="" width="1848" height="2560" class="aligncenter size-full wp-image-7514" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letyter-2-scaled.jpg 1848w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letyter-2-217x300.jpg 217w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letyter-2-739x1024.jpg 739w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letyter-2-768x1064.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letyter-2-1109x1536.jpg 1109w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-Letyter-2-1478x2048.jpg 1478w" sizes="auto, (max-width: 1848px) 100vw, 1848px" /></a></p>
<p>न्यायालय ने कहा कि यह ज़मीन असल में न्यूज़ मीडिया संगठनों के लिए एक कॉम्प्लेक्स ऑफ़िस बनाने के मकसद से आवंटित की गई थी, लेकिन दशकों तक इस पर कोई निर्माण कार्य नहीं हुआ। यूएनआई ने 2023 में उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था और लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफ़िस द्वारा जारी उस पत्र को चुनौती दी थी जिसमें शर्तों का उल्लंघन करने के आधार पर उसका आवंटन रद्द कर दिया गया था। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि इतने सालों में कई बार आवंटन पत्र जारी किए जाने और कई मौके दिए जाने के बावजूद, न तो निर्माण कार्य शुरू करने के लिए कोई ठोस कदम उठाया गया और न ही आवंटन की शर्तों का पालन किया गया।</p>
<p>न्यायालय ने कहा, &#8220;याचिकाकर्ता को अलग-अलग अलॉटमेंट पत्रों के ज़रिए जो अधिकार दिए गए हैं, वे एक &#8216;सामान्य लाइसेंसी&#8217; के अधिकारों जैसे ही हैं। ज़ाहिर है कि याचिकाकर्ता का लाइसेंस कभी भी रद्द किया जा सकता है, खासकर तब जब वह मकसद ही 45 साल से भी ज़्यादा समय से पूरी तरह से अधूरा पड़ा हो, जिसके लिए उसे यह लाइसेंस दिया गया था।&#8221; असल में, न्यायालय का मानना था कि लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफ़िस ने यूएनआई को लगातार डिफ़ॉल्ट करने और अपनी जिम्मेदारियों को पूरा न करने के बावजूद, ज़रूरत से ज़्यादा और असामान्य रियायतें दीं।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-2.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-2.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-7502" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-2.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-2-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-2-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-2-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-2-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p><strong>न्यायालय का मानना था कि &#8220;आवंटन रद्द करने का आदेश बिल्कुल सही है, क्योंकि इसमें इस बात का ध्यान रखा गया है कि याचिकाकर्ता इमारत बनाने में पूरी तरह से नाकाम रहा है और उसकी तरफ़ से लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिसका कोई उचित स्पष्टीकरण भी नहीं दिया गया।&#8221; न्यायालय ने आगे कहा कि इस मामले के तथ्यों से एक ऐसी स्थिति सामने आती है, जिसमें एक लाइसेंसी ने दशकों तक अपनी ज़िम्मेदारियों को पूरा न करके, सरकारी ज़मीन को असल में बंधक बनाकर रखा हुआ था। खैर।</strong> </p>
<p>बहरहाल, आज पटना ही नहीं, दिल्ली ही नहीं, भारत के किसी भी कोने में अगर संपादक की कुर्सी पर बैठे वरिष्ठतम पत्रकार इस बात को स्वीकार करेंगे कि अपने स्थापना काल से लेकर उस कालखंड तक, जब यूनाइटेड न्यूज ऑफ़ इण्डिया अधोगति की ओर उन्मुख हुआ, या अनेकानेक कारणों से उन्मुख होने लगा था, यूएनआई द्वारा जारी समाचार या लेख का एक-एक शब्द सत्यता की तराजू पर जितना जांचा-परखा, नपा-तौला होता था, उतना देश की किसी भी समाचार एजेंसी का नहीं था। </p>
<p>इस बात का जिक्र यहाँ इसलिए कर रहा हूँ कि अगर यूनाइटेड न्यूज ऑफ़ इंडिया को बचाने के क्रम में सबसे पहले इसके शेयर होल्डर्स आगे आये होते तो शायद आज अपने स्थापना के 65 वे वर्ष में, अपने पहली कहानी के निर्गत होने के 65वें वर्ष में यूएनआई कार्यालय के दफ्तर से देर रात पत्रकारों को, गैर पत्रकारों को, अधिकारियों को, चपरासियों को दिल्ली पुलिस बाहर नहीं निकाल पाती। इसमें दिल्ली पुलिस को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। उसे जो आदेश निर्गत हुआ, वह उसका पालन कर रहा था। लेकिन यूएनआई के स्थापना काल अथवा उसके कुछ समय बात तक भी यूएनआई के शेयर होल्डरों ने जो लुक्का-छिप्पी की राजनीति कर इस संस्थान में कार्य करने वाले हज़ारों कर्मियों और उनके परिवारों के साथ क्रूर मजाक किये।</p>
<p><strong>यूएनआई के शेयर होल्डरों में 27 लोगों/संस्थाओं का नाम है। यह नाम कोई साधारण नाम नहीं, बल्कि भारतीय पत्रकारिता में अपना हस्ताक्षर है। एसोसिएटेड पब्लिशर्स, 856/57, अन्ना सलाई, चेन्नई-600002, सर्वेन्ट्स ऑफ़ दी पीपुल्स सोसाइटी (दी समाज), गोपबंधु भवन, बक्शी बाजार, कटक; श्री जी कस्तूरी, दी हिन्दू, कस्तूरी बिल्डिंग्स, माउन्ट रोड, चेन्नई-600002; मोहम्मद यूनुस, एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड, हेराल्ड हॉउस, बहादुरशाह ज़फर मार्ग, ने दिल्ली- 110002; राम एस तरनेजा और रानी एस टरनेजा, फ्लेट-2012, प्लेनेट गोदरेज, एक्वा टावर-II, केके मार्ग, जैकब सर्किल, महालक्ष्मी, मुंबई-400001; दी स्टेट्समैन लिमिटेड, 4 चौरंगी स्क्वायर, कोलकाता-700001; बैनेट, कोलेमन एंड कंपनी लिमिटेड, डॉ. डीएन रोड, मुंबई-400001; मणिपाल मीडिया नेटवर्क लिमिटेड, उदयवाणी बिल्डिंग्स, मणिपाल-576119 (एसके); दी प्रिंटर्स (मैसूर) लिमिटेड, 16-महात्मा गाँधी रोड, बंगलोर-560001; नवा समाज लिमिटेड, 37-फार्मलैंण्ड लेआउट्स, रामदास पथ, नागपुर-440010; आनंद बाजार पत्रिका लिमिटेड, 6 &#8211; प्रफुल्ल सरकार स्ट्रीट, कोलकाता-700001; एचटी मिडिया लिमिटेड, हिंदुस्तान टाइम्स हॉउस, 18-20, कस्तूरबा गाँधी मार्ग, नई दिल्ली-110001; सकाळ पेपर प्राइवेट लिमिटेड, 595-बुधवार पथ, पुणे-411002; जुगांतर लिमिटेड, १४, आनंद चटर्जी लें, कोलकाता-700003; अमृत बाजार पत्रिका लिमिटेड, ९-इनिडा एक्सचेंज प्लेस, ७वां तल्ला, रम नंबर-1 ए, कोलकाता-700001; नेव्स्पपेर्स एंड पब्लिकेशंस लिमिटेड, मजहरुल हक़ पथ, पटना; दी इंडियन एक्सप्रेस लिमिटेड, एक्सप्रेस टावर, नरीमन पॉइंट, मुंबई-440021; नव भारत, नव भारत भवन, पीबी नंबर-382, नागपुर-440018; श्री अविक कुमार सरकार, C/o एबीपी लिमिटेड, 6-प्रफुल्ला सर्कार स्ट्रीट, कोलकाता-700001; एक्सप्रेस पब्लिकेशंस (मदुरै) लिमिटेड, एक्सप्रेस गार्डन्स, 29, 2मेन रोड, अम्बत्तूर इंडस्ट्रियल एस्टेट, चेन्नई-208005; श्री तुषार काँटी घोष, अमृत बाजार पत्रिका लिमिटेड, 72-1, बाघ बाजार स्ट्रीट, कोलकाता-700003; श्री एससी रॉय, 36, न्यू रोड, अलीपोल, कोलकाता-700021; श्री पीसी गुप्ता, जागरण प्रकाशन लिमिटेड, 2-सर्वोदय नगर, कानपूर; श्री संतोष नाथ, हिंदुस्तान टाइम्स लिमिटेड, कस्तूरबा गाँधी मार्ग, नई दिल्ली-110001 और मेसर्स राइटर्स एंड पब्लिसर्स लिमिटेड, जी-3ए, कानन वाले चैम्बर्स, मोगलाम, माहिम वेस्ट, मुंबई-400006 </strong></p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-4.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-4.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-7503" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-4.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-4-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-4-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-4-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-4-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p>इन 27 शेयर होल्डरों में 17वां नाम &#8216;न्यूजपेपर्स एंड पब्लिकेशंस लिमिटेड, मजहरुल हक़ पथ, पटना-800001&#8217; का है। यह प्रकाशन दरभंगा के महाराजाधिराज डॉ. सर कामेश्वर सिंह का था। यूएनआई के स्थापना के अगले वर्ष 1 अक्टूबर, 1962 को महाराजा अंतिम सांस लिए। महाराजा संतानहीन थे। अगर महाराजा की मृत्यु के बाद दरभंगा राज के लोग &#8211; जो उनकी संपत्ति के भागीदार हुए &#8211; यूएनआई की गरिमा के साथ महाराजा की गरिमा को बचने के लिए आगे आये होते, तो शायद कल का वास्तविक यूएनआई, आज का &#8216;गुप्ता जी के यूएनआई&#8217; नहीं होता। </p>
<p><strong>बहरहाल, दस्तावेजों के अनुसार, 14.12.1979 को भूमि और विकास कार्यालय (L&#038;DO), भारत सरकार द्वारा यूनाइटेड न्यूज़ ऑफ़ इंडिया के पक्ष में एक आवंटन पत्र जारी किया गया था, जिसके द्वारा 9, रफी मार्ग, नई दिल्ली में स्थित भूमि आवंटित की गई थी। उक्त पत्र में भूखंड का क्षेत्रफल 1.453 एकड़ (0.588 हेक्टेयर) दर्ज किया गया था। यह आवंटन न केवल यूएनआई के लाभ के लिए किया गया था, बल्कि चार अन्य सहभागी समाचार मीडिया संस्थानों &#8211; प्रेस एसोसिएशन ऑफ इंडिया, प्रेस इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, समाचार भारती और हिंदुस्तान समाचार &#8211; के संबंध में भी किया गया था; इसका उद्देश्य एक संयुक्त कार्यालय परिसर का निर्माण करना था, जिसमें उक्त समाचार मीडिया संगठनों के कार्यालय स्थित हो सकें।</strong></p>
<p>पत्र (भारत सरकार, कार्य और आवास मंत्रालय, भूमि और विकास कार्यालय, निर्माण भवन सं. L.II.1(576)/78, नई दिल्ली, दिनांक 14 दिसंबर 1979) में कहा गया था &#8220;मुझे यह कहने का निर्देश दिया गया है कि राष्ट्रपति महोदय ने यूनाइटेड न्यूज़ ऑफ़ इंडिया को &#8211; यूनाइटेड न्यूज़ ऑफ़ इंडिया तथा चार अन्य सहभागी समाचार मीडिया, यथा प्रेस एसोसिएशन ऑफ इंडिया, प्रेस इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, समाचार भारती और हिंदुस्तान समाचार की ओर से &#8211; रफी मार्ग, नई दिल्ली पर स्थित लगभग 1.453 एकड़ या 0.588 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले भूखंड (जैसा कि संलग्न L&#038;DO की योजना सं. 3453 में दर्शाया गया है) के आवंटन को मंजूरी प्रदान की है; यह आवंटन इन समाचार मीडिया संस्थानों के कार्यालयों को समायोजित करने हेतु एक संयुक्त कार्यालय परिसर के निर्माण के लिए किया गया है।&#8221; </p>
<p>पत्र में यह भी कहा गया कि &#8220;यह आवंटन &#8216;पट्टे और शाश्वत पट्टे के समझौते&#8217; में दी गई शर्तों और निबंधनों के अधीन है। 08.08.1980 को, दिनांक 14.12.1979 के उपर्युक्त आवंटन पत्र में संशोधन किया गया, जिसके तहत प्लॉट के क्षेत्रफल के साथ-साथ उससे संबंधित देय प्रीमियम और ज़मीनी किराए के संबंध में कुछ छोटे-मोटे बदलाव किए गए। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-5.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-5.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-7504" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-5.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-5-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-5-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-5-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-5-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p>14.12.1979 की आवंटन चिट्ठी के अनुसार, याचिकाकर्ता को जमीन का औपचारिक कब्जा सौंपे जाने की तारीख से दो साल के अंदर प्रस्तावित इमारत का निर्माण पूरा करना ज़रूरी था। इस बात पर कोई विवाद नहीं है कि याचिकाकर्ता द्वारा 14.12.1979 की आवंटन चिट्ठी में दी गई शर्तों के अनुसार इमारत/मिश्रित कार्यालय परिसर के निर्माण की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया था। इसके बावजूद, 07.11.1986 की एक संशोधित आवंटन चिट्ठी जारी की गई, जिसने 08.08.1980 की पिछली कार्यालय चिट्ठी संख्या L-I-II-I(576)/78 का स्थान ले लिया।</p>
<p><strong>पत्र के अनुसार, &#8216;इस कार्यालय के पत्र संख्या L-1(576)/78 दिनांक 8.8.80 को रद्द करते हुए, मुझे यह कहने का निर्देश दिया गया है कि राष्ट्रपति महोदय ने यूनाइटेड न्यूज़ ऑफ़ इंडिया, प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया और प्रेस एसोसिएशन के लिए एक संयुक्त कार्यालय परिसर के निर्माण हेतु, रफ़ी मार्ग, नई दिल्ली पर 1 एकड़ जमीन के एक भूखंड के आवंटन को मंजूरी देने की कृपा की है। यह आवंटन &#8216;समझौता ज्ञापन&#8217; और &#8216;स्थायी पट्टा&#8217; में दी गई शर्तों और निबंधनों के अधीन है, जिसमें निम्नलिखित बातें भी शामिल की गयी: (i) साइट के आवंटन की तारीख इस पत्र की तारीख मानी जाएगी और इस आवंटन के संबंध में सभी भुगतान, कब्ज़ा सौंपने के प्रस्ताव की तारीख या कब्ज़ा लेने की तारीख—इनमें से जो भी पहले हो—उस तारीख से देय हो जाएंगे। (ii) यूनाइटेड न्यूज़ ऑफ़ इंडिया, प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया और प्रेस एसोसिएशन को, जिस तारीख से पक्षों को जमीन में प्रवेश करने की अनुमति दी जाती है, उस तारीख से 24 महीनों के भीतर, क्षेत्र के वास्तुशिल्प परिवेश के अनुरूप भवन का निर्माण करना आवश्यक होगा। (iii) उक्त समाचार मीडिया को ज़मीन के लिए सुरक्षा राशि 3 लाख रुपये प्रति एकड़ की रियायती दर पर और लाइसेंस शुल्क सुरक्षा राशि का 2.1% प्रति वर्ष की दर से भुगतान करना आवश्यक होगा। पट्टा-धारण अधिकार  प्रदान किए जाने पर, सुरक्षा राशि को ज़मीन के लिए &#8216;प्रीमियम&#8217; माना जाएगा और उक्त समाचार मीडिया प्रीमियम के 2% की दर से वार्षिक ज़मीनी किराया देने के लिए उत्तरदायी होगा।</strong></p>
<p>यह भी उद्धृत किया गया कि ये मीडिया यूनिट्स आपस में एक समझौता करेंगी कि वे निर्माण की लागत किस आधार पर साझा करेंगी। इस समझौते में अन्य संबंधित मामलों का भी प्रावधान होगा, जिसमें निर्माण की व्यवस्था, संपत्ति का प्रबंधन आदि शामिल हैं। वे इस समझौते की तीन प्रतियां इस कार्यालय को भेजेंगी, और ये प्रतियां लाइसेंस समझौते (यानी, सरकार के साथ उनके द्वारा किए जाने वाले समझौता ज्ञापन) का हिस्सा बनेंगी। इस आवंटन के तहत सरकार को सुरक्षा राशि/लाइसेंस शुल्क/प्रीमियम/भूमि किराया और अन्य बकाया राशियों के भुगतान की जिम्मेदारी संयुक्त और पृथक होगी।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-6.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-6.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-7505" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-6.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-6-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-6-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-6-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-6-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p>जिन मीडिया यूनिट्स को संयुक्त रूप से भूमि आवंटित की गई है, वे उस भूमि को सीमांकन द्वारा विभाजित करने या उस पर संबंधित पक्षों के हिस्से को अलग से चिह्नित करने के हकदार नहीं होंगे। यदि इस संयुक्त आवंटन के पक्षों द्वारा कोई उल्लंघन किया जाता है, तो पुनः प्रवेश का अधिकार केवल भवन के उस हिस्से तक और चूक करने वाले पक्ष के भूमि में अविभाजित हित तक ही सीमित रहेगा। यह भी कहा गया कि भवन योजना पर स्पष्ट रूप से दर्शाएंगे कि इस आवंटन के तहत प्रत्येक पक्ष को कितनी जगह आवंटित की गई है, और उसे सरकार को भेजेंगे। यह योजना सरकार और पक्षों के बीच होने वाली पट्टा विलेख का हिस्सा बनेगी।</p>
<p><strong>यह भी उल्लेख किया गया कि यदि मीडिया यूनिट्स की आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद कोई अतिरिक्त जगह बच जाती है, तो सरकार को यह अधिकार होगा कि वह किसी अन्य समाचार संगठन को जगह खरीदने या उस संयुक्त कार्यालय भवन में आवास किराए पर लेने के लिए प्रायोजित करे। भूमि का उपयोग केवल उसी उद्देश्य के लिए किया जाएगा जिसके लिए इसे आवंटित किया गया है; पट्टादाता की पूर्व अनुमति के बिना इसका उपयोग किसी अन्य उद्देश्य के लिए बिल्कुल भी नहीं किया जाएगा। इस ज़मीन पर किसी भी तरह की रिहायशी यूनिट बनाने की इजाज़त नहीं होगी, सिवाय केयरटेकर या चौकीदार की यूनिट के। केयरटेकर या चौकीदार की रिहायशी यूनिट का प्लिंथ एरिया पट्टेदार अपनी पूरी मर्ज़ी से तय करेगा, लेकिन यह चौकीदार के रहने के लिए 34 वर्ग मीटर (365 वर्ग फ़ीट) से ज़्यादा नहीं होगा, और केयरटेकर के रहने के लिए 55.75 वर्ग मीटर (600 वर्ग फ़ीट) से ज़्यादा नहीं होगा।</strong></p>
<p>पत्र में यह भी लिखा गया कि अगर उक्त मीडिया यूनिट्स बनाने वाली कंपनी/सोसायटी/सहकारी सोसायटी बंद हो जाती है या मुनाफ़ा कमाने वाली कंपनी में बदल जाती है, तो सरकार के पास लाइसेंस (समझौता ज्ञापन) को रद्द करने या वापस लेने, या पट्टा विलेख को रद्द करने का अधिकार होगा।  यह तय किया गया था कि आवंटित भूखंड का क्षेत्रफल 1 एकड़ जमीन का संयुक्त आवंटन यूनाइटेड न्यूज़ ऑफ़ इंडिया (50%), प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया (25%) और प्रेस एसोसिएशन (25%) किया जायेगा। </p>
<p>07.11.1986 के आवंटन पत्र में यह प्रावधान था कि उक्त मीडिया संस्थानों को आपस में एक समझौता करना होगा, जिसमें यह तय किया जाएगा कि प्रस्तावित भवन के निर्माण की लागत किस आधार पर आपस में बांटी जाएगी; साथ ही, इसमें अन्य प्रासंगिक मामलों को भी शामिल किया जाएगा, जिनमें संपत्ति के निर्माण, प्रबंधन और रखरखाव की व्यवस्थाएं शामिल हैं। परन्तु, 07.11.1986 के आवंटन पत्र के अनुसार जो आवश्यक कदम उठाए जाने थे, वे नहीं उठाए गए; क्योंकि न तो संबंधित आवंटियों के बीच कोई समझौता किया गया और न ही आवश्यक निर्माण कार्य शुरू करने के लिए कोई कदम उठाया गया।</p>
<p>आगे, 17.06.1999 को जारी एक पत्र के अनुसार, 9, रफी मार्ग, नई दिल्ली में स्थित जमीन प्लॉट का कुल क्षेत्रफल 1.841 एकड़ था, जिसमें से 1 एकड़ जमीन पहले ही यूनाइटेड न्यूज़ ऑफ़ इंडिया, प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया और प्रेस एसोसिएशन को संयुक्त रूप से आवंटित की जा चुकी थी। इस पत्र में आगे शेष 0.841 एकड़ जमीन प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और विदेश व्यापार संयुक्त महानिदेशक, वाणिज्य मंत्रालय को आवंटित करने का प्रस्ताव था। इसमें आगे यह भी परिकल्पना की गई थी कि पूरे प्लॉट पर एक मिश्रित भवन का निर्माण केंद्रीय लोक निर्माण विभाग द्वारा किया जाएगा, जिसमें विभिन्न आवंटिती उक्त आवंटन पत्र में निर्दिष्ट अनुपात में निर्मित स्थान को साझा करने के हकदार होंगे। </p>
<p>परन्तु, 17.06.1999 की आवंटन पत्र की धारा (xi) में निहित शर्त के बावजूद, उक्त भूमि/आवंटित क्षेत्र के संबंध में कोई समझौता ज्ञापन या कोई पट्टा विलेख निष्पादित नहीं किया गया । इसके बाद, उक्त भूमि के संबंध में 27.06.2000 को एक संशोधित आवंटन पत्र जारी किया गया, जो 17.06.1999 के पिछले आवंटन पत्र में आंशिक संशोधन किया गया था, जिसके अनुसार, 5289.52 वर्ग मीटर भूमि के आवंटन की स्वीकृति प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और यूनाइटेड न्यूज़ ऑफ इंडिया के पक्ष में समान रूप से किया गया था।  इस पत्र के अनुसार, संयुक्त कार्यालय भवन का निर्माण करना था।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-7.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-7.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-7506" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-7.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-7-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-7-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-7-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-7-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p><strong>आगे, 27.06.2000 एक और पत्र जारी किया गया जिसका उद्देश्य प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया, प्रेस एसोसिएशन और वाणिज्य मंत्रालय के विदेश व्यापार के संयुक्त महानिदेशक के पक्ष में पहले किए गए आवंटनों को रद्द करना था । उक्त पत्र के अनुसार, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को 1244.76 वर्ग मीटर और यूएनआई को 620.76 वर्ग मीटर अतिरिक्त भूमि आवंटित करने का प्रावधान था।  यह आवंटन उस 1400 वर्ग मीटर भूमि के अतिरिक्त थी जो पहले ही प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया को आवंटित की जा चुकी थी, और उस 2024 वर्ग मीटर भूमि के अतिरिक्त थी जो पहले ही यूनाइटेड न्यूज़ ऑफ़ इंडिया को आवंटित की जा चुकी थी। पांच साल बाद, L&#038;DO द्वारा 30.03.2005 को यूएनआई को दी गयी 620.76 वर्ग मीटर का वह अतिरिक्त क्षेत्र रद्द कर दिया गया, जो मूल रूप से आवंटित 2024 वर्ग मीटर भूमि के अतिरिक्त आवंटित किया गया था। </strong></p>
<p>09.10.2012 के पत्र के माध्यम से यह बताया गया कि 9, रफी मार्ग, नई दिल्ली में प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और यूनाइटेड न्यूज़ ऑफ इंडिया के लिए एक मिश्रित भवन के निर्माण हेतु नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन लिमिटेड के माध्यम से स्वीकृति प्रदान कर दी है; यह स्वीकृति सेंट्रल पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट के स्थान पर दी गई है, जिसे पहले निष्पादन एजेंसी के रूप में परिकल्पित किया गया था। 20.02.2018 को, यूएनआई ने भूमि और विकास कार्यालय (L&#038;DO) को एक पत्र प्रेषित किया जिसमें यह स्पष्टीकरण मांगा गया था कि क्या यूएनआई, भारतीय प्रेस परिषद और शहरी विकास मंत्रालय के बीच एक त्रिपक्षीय समझौता किया जाना चाहिए, इस तथ्य को देखते हुए कि तब तक लगभग 620 वर्ग मीटर का अतिरिक्त क्षेत्र CPWD/सरकारी उपयोग के लिए निर्धारित किया जा चुका था। </p>
<p>तीन माह बाद,  यूएनआई ने L&#038;DO को 30.05.2018 को एक रिमाइंडर भेजा, जिसमें उसने इस मामले में स्पष्टीकरण के लिए अपने अनुरोध को दोहराया। इसके बाद, यूएनआई ने L&#038;DO को 09.12.2019 को एक और पत्र भेजा, जिसमें L&#038;DO के कार्यालय में 29.11.2018 को हुई एक बैठक का ज़िक्र किया गया था। उस बैठक में यह बात सामने आई कि 620 वर्ग मीटर का वह अतिरिक्त क्षेत्र, जो पहले याचिकाकर्ता को आवंटित किया गया था और जिसका आवंटन बाद में 30.03.2005 के पत्र के ज़रिए रद्द कर दिया गया था, अब &#8216;प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया&#8217; को आवंटित करने का प्रस्ताव था। इसके परिणामस्वरूप, 620.76 वर्ग मीटर का वह क्षेत्र, अंततः 15.03.2021 के पत्र के जरिए &#8216;प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया&#8217; को आवंटित कर दिया गया।</p>
<p>यानी, प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया को कुल 3,265.52 वर्ग मीटर का क्षेत्र आवंटित किया गया था, जिसमें 17.06.1999 के पत्र द्वारा आवंटित 1,400 वर्ग मीटर, 27.06.2000 के पत्र द्वारा आवंटित 1,244.76 वर्ग मीटर, और 15.03.2021 के पत्र द्वारा आवंटित 620.76 वर्ग मीटर शामिल थे। इसके विपरीत, यूएनआई के पास 2,024 वर्ग मीटर का आवंटन बना रहा। विशेष रूप से, इस तथ्य के बावजूद कि प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया को आवंटित भूमि का विस्तार यूएनआई को आवंटित भूमि से अधिक था। व्यावहारिक तौर पर प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया केवल नाममात्र के कब्जे में रहा, जबकि भूमि के पूरे भूखंड का वास्तविक भौतिक कब्जा यूएनआई के पास ही बना रहा।</p>
<p><strong>यदि देखा जाए तो 9, रफ़ी मार्ग, नई दिल्ली स्थित भूमि के संबंध में समय-समय पर कई आवंटन पत्र जारी किए गए। जिन संस्थाओं के पक्ष में आवंटन की परिकल्पना की गई थी, साथ ही उनमें से प्रत्येक को आवंटित की जाने वाली प्रस्तावित भूमि का विस्तार भी, कई अवसरों पर बदलता रहा। इन घटनाक्रमों के बावजूद, आवंटन का मूल उद्देश्य, यानी उक्त भूखंड पर एक मिश्रित कार्यालय भवन का निर्माण, किसी भी समय पूरा नहीं हो सका। इस बीच, 23.11.2022 के एक पत्र के माध्यम से, प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया ने एक आपत्ति उठाई, जिसमें कहा गया था कि याचिकाकर्ता ने कथित तौर पर 620 वर्ग मीटर भूमि के उस हिस्से पर एक रेस्तरां/कैंटीन चलाना शुरू कर दिया है, जो प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया को आवंटित किया गया था; और यह कार्य उसने बिना किसी पूर्व सूचना के तथा आवंटन को नियंत्रित करने वाले नियमों और शर्तों का उल्लंघन करते हुए किया है।</strong></p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-A-scaled.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-A-scaled.jpg" alt="" width="2123" height="2560" class="aligncenter size-full wp-image-7507" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-A-scaled.jpg 2123w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-A-249x300.jpg 249w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-A-849x1024.jpg 849w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-A-768x926.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-A-1274x1536.jpg 1274w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-A-1699x2048.jpg 1699w" sizes="auto, (max-width: 2123px) 100vw, 2123px" /></a></p>
<p>इतना ही नहीं, एक हलफनामे से यह पता चलता है कि, उससे भी पहले, यूएनआई ने 24.01.2022 के एक पत्र के माध्यम से, प्रस्तावित भवन के निर्माण के बाद और उसका कब्ज़ा प्राप्त करने के उपरांत, उस भवन के 70% तक हिस्से को व्यावसायिक रूप से पट्टे पर देने की अनुमति मांगी थी। यह कहा गया था कि यूएनआई बहुत ज़्यादा आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा था और उस पर अपने मौजूदा और पुराने कर्मचारियों को देने वाली सैलरी और दूसरे बकाए का काफ़ी बड़ा बोझ जमा हो गया था। हालांकि, यूएनआई ने प्रस्तावित इमारत के बन जाने के बाद उसके एक हिस्से को कमर्शियल तौर पर लीज़ पर देने की जो अनुमति माँगी थी, उसे L&#038;DO ने 29.03.2022 की बातचीत के ज़रिए नामंज़ूर कर दिया।</p>
<p>इस बीच, प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया, जिसे ज़मीन का एक बड़ा हिस्सा अलॉट किया गया था, उस ज़मीन पर मिली-जुली इमारत के तेज़ी से निर्माण के लिए लगातार ज़ोर देता रहा। परन्तु, 18.05.2022 के एक ईमेल के ज़रिए यूएनआई ने बताया कि, मौजूदा आर्थिक हालात को देखते हुए, वह फ़िलहाल प्रस्तावित मिली-जुली इमारत के निर्माण में हिस्सा लेने में असमर्थ है और उसने प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया से अनुरोध किया कि या तो वह अपने शेयरधारकों द्वारा प्रस्तावित फ़ंड आने के नतीजे का इंतज़ार करे या फिर ज़मीन के अपने अलॉट किए गए हिस्से पर निर्माण का काम आगे बढ़ाए। </p>
<p>जबकि, प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया द्वारा यूएनआई को संबोधित 19.07.2022 की एक चिट्ठी में यह दर्ज है कि प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया ने कई मौकों पर याचिकाकर्ता से 620 वर्ग मीटर जमीन खाली करने का अनुरोध किया था, जो उसे आवंटित की गई थी। प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया ने 20.07.2022 के पत्र के ज़रिए L&#038;DO से इस मुद्दे को सुलझाने के लिए एक मीटिंग बुलाने का अनुरोध किया। हालांकि, यह मामला अनसुलझा ही रहा। इसके अतिरिक्त, यह भी संज्ञान में आया है कि L&#038;DO द्वारा 29.09.2022 को लंबित मुद्दों पर विचार-विमर्श करने हेतु बुलाई गई बैठक में यूएनआई उपस्थित नहीं हुआ। </p>
<p>यदि देखा जाए तो यूएनआई कथित तौर पर संपत्ति के एक हिस्से का उपयोग ऐसे उद्देश्यों के लिए कर रहा था, जिसकी परिकल्पना आवंटन की शर्तों के तहत नहीं की गई थी; गंभीर वित्तीय बाधाओं के कारण प्रस्तावित मिश्रित भवन के निर्माण में भाग लेने में अपनी असमर्थता स्पष्ट रूप से व्यक्त कर दी थी; यूएनआई ने यह रुख अपनाया था कि भारतीय प्रेस परिषद, याचिकाकर्ता की भागीदारी के बिना, स्वतंत्र रूप से निर्माण कार्य आगे बढ़ा सकती है; और परियोजना से संबंधित लंबित मुद्दों को सुलझाने के लिए L&#038;DO द्वारा बुलाई गई बैठकों में भाग नहीं लिया। परिणाम यह हुआ कि L&#038;DO द्वारा यूएनआई को दिनांक 12.01.2023 का एक &#8216;कारण बताओ नोटिस&#8217; जारी किया गया। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-B.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-B.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-7508" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-B.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-B-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-B-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-B-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-B-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p><strong>एक महीने दो दिन बाद यूएनआई ने उपर्युक्त &#8216;कारण बताओ नोटिस&#8217; के संबंध में दिनांक 14.02.2023 को एक &#8216;अस्पष्ट&#8217; और &#8216;मनमाना&#8217; जवाब प्रस्तुत किया। अन्य बातों के साथ-साथ, यह कहा कि चूंकि उस समय उसके पास &#8216;निदेशक मंडल&#8217; (Board of Directors) नहीं था, इसलिए वह उक्त &#8216;कारण बताओ नोटिस&#8217; का समुचित जवाब देने में असमर्थ होगा। इन पृष्ठभूमि के तहत, दिनांक 29.03.2023 का वह विवादित निरस्तीकरण पत्र जारी किया गया, जिसके द्वारा याचिकाकर्ता के पक्ष में किया गया आवंटन रद्द कर दिया गया। बाद में, बैंकरप्सी कोड, 2016 के तहत, यूएनआई के कुछ कर्मचारियों/पूर्व-कर्मचारियों द्वारा, यूएनआई के विरुद्ध कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रिज़ॉल्यूशन प्रोसेस शुरू किया गया; यह प्रक्रिया नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल, नई दिल्ली बेंच (कोर्ट-II)  द्वारा दिनांक 19.05.2023 को पारित आदेश के माध्यम से शुरू हुई। परिणामस्वरूप, कोड की धारा 14 के प्रावधानों के अनुसार, एक मोरेटोरियम (स्थगन) लागू हो गया।</strong></p>
<p>इस बीच, 07.11.2023 को, प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया ने एक आवेदन (CM APPL. 58548/2023) दायर किया, जिसमें उसने मौजूदा कार्यवाही में खुद को शामिल करने की मांग की।  साथ ही, यह भी तर्क दिया कि, विचाराधीन ज़मीन के सह-आवंटी होने के नाते, कार्यवाही में उसकी भागीदारी के अभाव में उक्त संपत्ति में उसके अधिकारों की पर्याप्त रूप से रक्षा नहीं हो पाएगी। इसके बाद, चूंकि याचिकाकर्ता को कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रिज़ॉल्यूशन प्रोसेस में शामिल कर लिया गया था, इसलिए यूएनआई की ओर से एक आवेदन (CM APPL. 9313/2024) दायर किया गया, जिसमें यह मांग की गई कि IBC के तहत स्थगन अवधि (moratorium period) के समाप्त होने तक मौजूदा कार्यवाही को स्थगित रखा जाए।</p>
<p>कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रिज़ॉल्यूशन प्रोसेस की प्रक्रिया NCLT द्वारा 12.02.2025 को पारित एक आदेश के साथ समाप्त हुई, जिसके तहत सफल रिज़ॉल्यूशन आवेदक, यानी &#8216;द स्टेट्समैन लिमिटेड&#8217; द्वारा प्रस्तुत रिज़ॉल्यूशन योजना को मंज़ूरी दे दी गई। तत्पश्चात, 08.07.2025 को, प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया ने एक आवेदन (CM APPL. 39879/2025) दायर किया, जिसमें अन्य बातों के अलावा यह आरोप लगाया गया कि याचिकाकर्ता विचाराधीन ज़मीन पर अनधिकृत निर्माण कार्य कर रहा है; इसके साथ ही, यह निर्देश देने की मांग की गई कि उस स्थल (साइट) पर सभी प्रकार के निर्माण कार्य तत्काल रोक दिए जाएं ।</p>
<p>तत्पश्चात, 13.08.2025 को, प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया ने इसके बाद एक और आवेदन (CM APPL. 50043/2025) दायर किया, जिसमें अन्य बातों के अलावा यह निर्देश देने की मांग की गई कि याचिकाकर्ता को किसी भी प्रकार की बाधा या रुकावट पैदा करने से रोका जाए, अथवा 9, रफी मार्ग, नई दिल्ली स्थित उस ज़मीन के हिस्से तक पहुँचने या उसका उपयोग करने से किसी भी तरह से न रोका जाए, जिसे L&#038;DO द्वारा प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया को आवंटित किया गया है। इन बातों के मद्दे नजर, दिनांक 11.07.2025 और 18.08.2025 के आदेशों के माध्यम से, इस न्यायालय ने भूमि और विकास कार्यालय (Land and Development Office) को निर्देश दिया कि वह संबंधित स्थल का भौतिक निरीक्षण करे, ताकि यह जाँच की जा सके कि क्या वहाँ कोई नया निर्माण हुआ है, और उसके बाद एक स्थिति रिपोर्ट (status report) रिकॉर्ड पर प्रस्तुत करे।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-C.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-C.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-7509" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-C.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-C-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-C-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-C-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/03/UNI-C-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<blockquote><p>दिनांक 14.07.2025 को, उक्त निरीक्षण किया गया और इस संबंध में एक निरीक्षण/स्थिति रिपोर्ट L&#038;DO द्वारा दिनांक 04.08.2025 को दायर की गई, जिसमें यह आरोप लगाया गया था कि यूएनआई द्वारा अनधिकृत निर्माण गतिविधियाँ की जा रही थीं, और ऐसी गतिविधियों के परिणामस्वरूप संबंधित भूखंड की प्रकृति में बदलाव आ गया था। 24.09.2025 को, यूएनआई ने CM APPL. 50043/2025 में लगाए गए आरोपों का खंडन करते हुए एक जवाब दाखिल किया, और यह तर्क देने की मांग की कि केवल मरम्मत और नवीनीकरण का काम किया गया था, और संबंधित ज़मीन पर कोई स्थायी ढांचा नहीं बनाया गया था।</p></blockquote>
<p>09.07.2025 को, यूएनआई ने भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष को एक पत्र लिखा, जिसमें उसने तत्काल आधार पर निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने का अपना इरादा व्यक्त किया। इसके बाद, 19.08.2025 के पत्र के माध्यम से, याचिकाकर्ता ने भारतीय प्रेस परिषद को एक और पत्र लिखा, जिसमें उसने भारतीय प्रेस परिषद द्वारा एकतरफा रूप से संपत्ति की स्थिति को बदलने के प्रयास पर आपत्ति जताई; इस प्रयास में संबंधित ज़मीन पर अपना बोर्ड लगाना भी शामिल था। उक्त पत्र में, याचिकाकर्ता ने दावा किया कि पूरी ज़मीन L&#038;DO द्वारा 08.08.1980 के पत्र के माध्यम से &#8216;यूनाइटेड न्यूज़ ऑफ़ इंडिया&#8217; को आवंटित की गई थी।</p>
<p>इसके जवाब में, भारतीय प्रेस परिषद ने 21.08.2025 के पत्र के माध्यम से एक जवाब भेजा, जिसमें यह दावा किया गया कि आवंटन पत्रों में निहित शर्तों के अनुसार निर्माण कार्य न कर पाने का कारण उनकी ओर से हुई चूक थी। इसमें आगे इस बात पर भी ज़ोर दिया गया कि संबंधित ज़मीन में भारतीय प्रेस परिषद की हिस्सेदारी लगभग 62% है, और इसलिए उसे संबंधित ज़मीन पर अपना बोर्ड लगाने का पूरा अधिकार है। जबकि, दिनांक 24.09.2025 की निरीक्षण रिपोर्ट से पुनः यह संकेत मिलता है कि याचिकाकर्ता द्वारा संपत्ति पर कुछ अनधिकृत निर्माण किए गए थे, जो इस न्यायालय द्वारा दिनांक 19.09.2025 को पारित &#8216;यथास्थिति&#8217; (status quo) आदेश का स्पष्ट उल्लंघन है। हालाँकि, यूएनआई ने 24.09.2025 की उक्त निरीक्षण रिपोर्ट पर आपत्ति जताई है और एक जवाब दाखिल करते हुए यह तर्क दिया है कि कोई भी अनाधिकृत निर्माण कार्य नहीं किया गया था, और मौजूदा संरचना पर केवल नवीनीकरण और मरम्मत का काम किया गया था।</p>
<p><strong>सभी तस्वीरें &#8211; संजय शर्मा</strong><br />
<strong>क्रमशः&#8230;..</strong></p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/eviction-of-uni-news-agency">पत्रकार, गैर-पत्रकार बिलखते रहे, दरभंगा राज की &#8216;गरिमा&#8217; को बचाने का &#8216;तथाकथित दावा&#8217; करने वाले महाराजा द्वारा स्थापित &#8216;यूएनआई&#8217; को बचाने के लिए ​कभी ​आगे नहीं आये</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>भाजपा को नया अध्यक्ष&#8217; मिल गया है, &#8216;स्थायी&#8217; नहीं, &#8216;तत्काल के लिए&#8217;, क्योंकि &#8216;जग घूमेया थारे जैसा ना कोई 👁 &#8216;नड्डा&#8217;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 08 Jul 2025 03:53:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[advani]]></category>
		<category><![CDATA[amit shah]]></category>
		<category><![CDATA[bjp]]></category>
		<category><![CDATA[narendra modi]]></category>
		<category><![CDATA[national president]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>दीनदयाल उपाध्याय मार्ग (नई दिल्ली) : साल 2014 में नरेंद्र मोदी द्वारा प्रधानमंत्री पद के शपथ ग्रहण के दो साल बाद अली अब्बास की कथा और निर्देशन में एक फिल्म बनी थी &#8216;सुलतान&#8217;, जिसे आदित्य चोपड़ा ने बनाया था। इस फिल्म में सलमान खान, अनुष्का शर्मा, रणदीप हुडा, अमित साध जैसे कलाकार काम किये थे। इस [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/politics/bjp-has-got-a-new-president-not-a-permanent-one-but-an-immediate-one">भाजपा को नया अध्यक्ष&#8217; मिल गया है, &#8216;स्थायी&#8217; नहीं, &#8216;तत्काल के लिए&#8217;, क्योंकि &#8216;जग घूमेया थारे जैसा ना कोई 👁 &#8216;नड्डा&#8217;</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>दीनदयाल उपाध्याय मार्ग (नई दिल्ली) : साल 2014 में नरेंद्र मोदी द्वारा प्रधानमंत्री पद के शपथ ग्रहण के दो साल बाद अली अब्बास की कथा और निर्देशन में एक फिल्म बनी थी &#8216;सुलतान&#8217;, जिसे आदित्य चोपड़ा ने बनाया था। इस फिल्म में सलमान खान, अनुष्का शर्मा, रणदीप हुडा, अमित साध जैसे कलाकार काम किये थे। इस फिल्म में सलमान खान और अनुष्का शर्मा पर एक रूमानी गीत फिल्माया गया था जिसके शब्द थे इरशाद कामिल की, संगीत दिया था विशाल-शेखर का और गाये थे रहत फ़तेह अली खान साहब ने। गीत के बोल थे :</strong></p>
<p><em>ओ.. ना वो अखियाँ रूहानी कहीं<br />
ना वो चेहरा नूरानी कहीं<br />
कहीं दिल वाली बातें भी ना<br />
ना वो सजरी जवानी कहीं<br />
जग घूमेया थारे जैसा ना कोई<br />
जग घूमेया थारे जैसा ना कोई</p>
<p>ना तो हंसना रूमानी कहीं<br />
ना तो खुशबू सुहानी कहीं<br />
ना वो रंगली अदाएं देखीं<br />
ना वो प्यारी सी नादानी कहीं<br />
जैसी तू है वैसी रहना</em></p>
<figure id="attachment_6910" aria-describedby="caption-attachment-6910" style="width: 1600px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/nadda-1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/nadda-1.jpg" alt="" width="1600" height="900" class="size-full wp-image-6910" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/nadda-1.jpg 1600w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/nadda-1-300x169.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/nadda-1-1024x576.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/nadda-1-768x432.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/nadda-1-1536x864.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1600px) 100vw, 1600px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6910" class="wp-caption-text">जगत प्रकाश नड्डा</figcaption></figure>
<p><strong>आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह को जब देखता हूँ तो कहीं न कहीं वर्तमान भाजपा के अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा के प्रति उनके मन में इस गीत का स्वर गुनगुनाते पाता हूँ। क्योंकि न तो मोदी जी को और ना ही अमित शाह को अभी तक जगत प्रकाश नड्डा के बराबर, या फिर कुछ हद तक ही सही&#8217;, समरूप गुणों वाले व्यक्ति, विश्वासपात्र, भाजपा के प्रति समर्पित अभ्यर्थी नहीं मिल पाये हैं, जिनके नाम भाजपा का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष का मुहर लगा दें। आप इस बात को स्वीकार करें अथवा नहीं। </strong></p>
<p>जगत प्रकाश नड्डा के बाद भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी पर कौन बैठेंगे? कोई कह रहे हैं &#8216;पुरुष&#8217; बैठेंगे, कोई महिला सशक्तिकरण का दृष्टान्त देकर कह रहे हैं &#8216;महिला&#8217; बैठेंगी। लेकिन भाजपा में सत्ता के गलियारे में &#8216;गोपनीयता&#8217; अटल बिहार वाजपेयी के ज़माने में भी थी और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कालखंड में तो है ही, वह भी &#8216;उत्कर्ष&#8217; पर। बहरहाल, गिनती शुरू कर दें क्योंकि भाजपा को &#8220;तत्कालीन अध्यक्ष&#8221; मिल गया है और जगत प्रकाश नड्डा के समतुल्य अभ्यर्थी की खोज जारी है। </p>
<p><strong>आज भी याद है जब 1998 में प्रधानमंत्री कार्यालय से दिल्ली के अख़बारों के दफ्तर में फोन की घंटी टनटनाया और कहा गया कि &#8216;वाजपेयी जी अख़बार वालों से तुरंत मिलना चाहते हैं&#8217;, दिल्ली दरबार के पत्रकार अपने-अपने कार्यालयों से निकल कर गंतव्य तक पहुँचने में &#8216;क्या-क्या नहीं सोचे&#8217;, कहानियां भी गढ़े, इंट्रो भी बनाये। लेकिन किसी को भी पता नहीं वाजपेयी जी किस विषय पर बोलने वाले हैं। पोखरण-II परमाणु परीक्षण  में सोचना तो नामुमकिन था। </strong></p>
<figure id="attachment_6911" aria-describedby="caption-attachment-6911" style="width: 894px" class="wp-caption alignleft"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Screenshot-2025-07-08-at-9.08.01-AM.png"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Screenshot-2025-07-08-at-9.08.01-AM.png" alt="" width="894" height="588" class="size-full wp-image-6911" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Screenshot-2025-07-08-at-9.08.01-AM.png 894w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Screenshot-2025-07-08-at-9.08.01-AM-300x197.png 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Screenshot-2025-07-08-at-9.08.01-AM-768x505.png 768w" sizes="auto, (max-width: 894px) 100vw, 894px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6911" class="wp-caption-text">अटल बिहारी वाजपेयी</figcaption></figure>
<p>मई 1998 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में पोखरण-II परमाणु परीक्षण किए गए थे। आधिकारिक तौर पर ऑपरेशन शक्ति के रूप में जाने जाने वाले इन परीक्षणों में राजस्थान के पोखरण परीक्षण रेंज में पाँच परमाणु विस्फोट शामिल थे। पहले तीन परीक्षण 11 मई, 1998 को और शेष दो 13 मई, 1998 को किए गए थे। इन परीक्षणों को करने का निर्णय एक महत्वपूर्ण निर्णय था। तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस ने परीक्षणों का समर्थन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जब वाजपेयी जी सैकड़ों संवाददाताओं और छायाकारों के बीच पोखरण परीक्षण के बारे में बताये, अखबार वाले, टीवी वाले सभी एक-दूसरे का चेहरा देखने लगे। उधर दफ्तर में संपादक महोदय भाजपा और प्रधानमंत्री कार्यालय को कवर करने वालों को भृकुटि तान कर देख रहे थे। </p>
<p>उस घटना के 27-साल बाद विगत मई, 2025 को जब वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में &#8216;ऑपरेशन सिंदूर&#8217; किया गया, इस बात का गंध लोगों को, खासकर प्रधानमंत्री कार्यालय, रक्षा मंत्रालय या सत्ता के गलियारे में चहलकदमी करने वाले किसी भी पत्रकार बंधू-बांधवों को गंध&#8217; तक नहीं लगा। सत्ता के गलियारे में &#8216;गोपनीयता&#8217; अपने उत्कर्ष पर होता है। इस घटना के बाद लेखक, विश्लेषक, आलोचक जो भी लिखें। आजकल दिल्ली सल्तनत में भारतीय जनता पार्टी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन होगा चर्चाएं आम है। कोई पुरुष नेताओं को आगे बढ़ा रहे हैं तो कोई महिला नेताओं को। लेकिन दीनदयाल उपाध्याय मार्ग स्थित भाजपा के राष्ट्रीय कार्यालय से लेकर झंडेवालान स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यालय तक, सभी चुप हैं। </p>
<p>ज्ञातव्य हो कि 1980 में भाजपा के गठन के बाद <strong>अटल बिहारी वाजपेयी</strong> इसके पहले अध्यक्ष बने। उनके नेतृत्व में भाजपा ने खुद को एक मध्यमार्गी पार्टी के रूप में पेश किया जो भारतीय जनसंघ की कटु राजनीति से अलग हटकर थी। वाजपेयी, जिन्हें अक्सर भाजपा के उदारवादी चेहरे के रूप में देखा जाता था। बाद में वाजपेयी देश का प्रधानमंत्री भी बने और अपना कार्यकाल भी पूरा किया। </p>
<figure id="attachment_6912" aria-describedby="caption-attachment-6912" style="width: 966px" class="wp-caption alignright"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Screenshot-2025-07-08-at-7.59.01-AM.png"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Screenshot-2025-07-08-at-7.59.01-AM.png" alt="" width="966" height="580" class="size-full wp-image-6912" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Screenshot-2025-07-08-at-7.59.01-AM.png 966w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Screenshot-2025-07-08-at-7.59.01-AM-300x180.png 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Screenshot-2025-07-08-at-7.59.01-AM-768x461.png 768w" sizes="auto, (max-width: 966px) 100vw, 966px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6912" class="wp-caption-text">लाल कृष्ण आडवाणी</figcaption></figure>
<p>1986 में अटल बिहारी वाजपेयी के बाद <strong>लाल कृष्ण आडवाणी</strong> भाजपा के अध्यक्ष बने। कहते हैं यह घटना आमतौर पर भाजपा की विचारधारा में कट्टर हिंदुत्व की ओर बदलाव से जुड़ी है, जिसका उदाहरण 1990 में आडवाणी द्वारा हिंदू राष्ट्रवाद की अपील करके चुनावी समर्थन जुटाने के प्रयास के तहत निकाली गई राम रथ यात्रा है। उन्होंने 1973 में भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया था। भाजपा के विचारक मुरली मनोहर जोशी 1991 में भाजपा अध्यक्ष बने। वे कई दशक से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े थे। अपने पूर्ववर्ती लालकृष्ण आडवाणी की तरह, उन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन में बड़ी भूमिका निभाई। बाद में उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में कार्य किया। उनके कार्यकाल के दौरान, भाजपा पहली बार मुख्य विपक्षी दल बनी।</p>
<figure id="attachment_6918" aria-describedby="caption-attachment-6918" style="width: 1024px" class="wp-caption alignleft"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-6.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-6.jpg" alt="" width="1024" height="683" class="size-full wp-image-6918" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-6.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-6-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-6-768x512.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6918" class="wp-caption-text">मुरली मनोहर जोशी</figcaption></figure>
<p>आडवाणी के आक्रामक प्रचार अभियान ने 1996 के चुनावों के बाद भारतीय संसद के निचले सदन में भाजपा को सबसे बड़ी पार्टी बनने में मदद की। हालांकि वाजपेयी प्रधानमंत्री बने, लेकिन आडवाणी को पार्टी के भीतर ताकत के रूप में देखा गया और बाद में उन्होंने उप प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया। </p>
<figure id="attachment_6919" aria-describedby="caption-attachment-6919" style="width: 1024px" class="wp-caption alignright"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-3.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-3.jpg" alt="" width="1024" height="683" class="size-full wp-image-6919" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-3.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-3-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-3-768x512.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6919" class="wp-caption-text">कुषा भाऊ ठाकरे</figcaption></figure>
<p>कुषा भाऊ ठाकरे 1942 से ही आरएसएस से जुड़े हुए थे। 1998 में जब वे भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के सत्ता में आने के कुछ महीने बाद अध्यक्ष बने, तब वे भाजपा के बाहर ज़्यादा मशहूर नहीं थे। कहते हैं कि उनके कार्यकाल के दौरान भाजपा ने हिंदुत्व पर अपना ज़ोर कम कर दिया, जैसे कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 को हटाने की मांग, ताकि एक बड़े गठबंधन के विचारों को समायोजित किया जा सके।</p>
<figure id="attachment_6913" aria-describedby="caption-attachment-6913" style="width: 1024px" class="wp-caption alignleft"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-4.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-4.jpg" alt="" width="1024" height="683" class="size-full wp-image-6913" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-4.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-4-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-4-768x512.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6913" class="wp-caption-text">बंगारू लक्ष्मण</figcaption></figure>
<p>लंबे समय से आरएसएस के सदस्य रहे <strong>बंगारू लक्ष्मण</strong> 2000 में भाजपा के पहले दलित अध्यक्ष बने। एक साल बाद तहलका पत्रिका के स्टिंग ऑपरेशन में उन्हें रिश्वत लेते हुए दिखाया गया, जिसके बाद लक्ष्मण ने तुरंत इस्तीफा दे दिया। वे 2012 तक पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में रहे, जब उन्हें भ्रष्टाचार के लिए दोषी ठहराया गया और उन्होंने इस्तीफा दे दिया। लक्ष्मण के इस्तीफे के बाद <strong>जाना कृष्णमूर्ति</strong> कार्यवाहक अध्यक्ष बने और कुछ ही समय बाद राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने उन्हें अध्यक्ष के रूप में पुष्टि कर दी। एक साल बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया जब वे अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में कैबिनेट फेरबदल के तहत मंत्री बन गए।</p>
<figure id="attachment_6914" aria-describedby="caption-attachment-6914" style="width: 1024px" class="wp-caption alignright"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-5.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-5.jpg" alt="" width="1024" height="683" class="size-full wp-image-6914" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-5.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-5-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-5-768x512.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6914" class="wp-caption-text">जाना कृष्णमूर्ति</figcaption></figure>
<p>जाना कृष्णमूर्ति को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने के बाद <strong>वेंकैया नायडू</strong> भाजपा अध्यक्ष चुने गए। टिप्पणीकारों ने उनके चुनाव को लालकृष्ण आडवाणी और पार्टी के रूढ़िवादी हिंदू-राष्ट्रवादी विंग द्वारा फिर से नियंत्रण स्थापित करने के उदाहरण के रूप में देखा। हालांकि नायडू को पूर्ण कार्यकाल के लिए चुना गया, लेकिन एनडीए द्वारा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए से 2004 के भारतीय आम चुनाव हारने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया। उस समय लोकसभा में विपक्ष के नेता के रूप में कार्यरत आडवाणी, 2004 के भारतीय आम चुनाव के बाद वेंकैया नायडू के इस्तीफा देने के बाद तीसरी बार भाजपा अध्यक्ष बने। आडवाणी विपक्ष के नेता के रूप में अपने पद पर बने रहे। 2005 में आडवाणी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया, जब उन्होंने मोहम्मद अली जिन्ना को एक धर्मनिरपेक्ष नेता के रूप में वर्णित किया, जिससे विवाद पैदा हो गया।</p>
<figure id="attachment_6915" aria-describedby="caption-attachment-6915" style="width: 942px" class="wp-caption alignleft"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Screenshot-2025-07-08-at-9.12.54-AM.png"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Screenshot-2025-07-08-at-9.12.54-AM.png" alt="" width="942" height="602" class="size-full wp-image-6915" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Screenshot-2025-07-08-at-9.12.54-AM.png 942w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Screenshot-2025-07-08-at-9.12.54-AM-300x192.png 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Screenshot-2025-07-08-at-9.12.54-AM-768x491.png 768w" sizes="auto, (max-width: 942px) 100vw, 942px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6915" class="wp-caption-text">वेंकैया नायडू</figcaption></figure>
<p>दिसंबर 2005 में <strong>राजनाथ सिंह सिंह</strong> ने आडवाणी के कार्यकाल के शेष समय के लिए भाजपा अध्यक्ष का पद संभाला। उन्हें 2006 में पूर्ण कार्यकाल के लिए फिर से नियुक्त किया गया। सिंह ने आरएसएस और भाजपा के लिए कई पदों पर कार्य किया, जिसमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और भाजपा की युवा शाखा के अध्यक्ष के रूप में कार्य करना शामिल है। उन्होंने हिंदुत्व मंच पर वापसी की वकालत की। एनडीए के 2009 के भारतीय आम चुनाव हारने के बाद सिंह ने इस्तीफा दे दिया। साल 2009 में <strong>नितिन गडकरी</strong> भाजपा के सबसे युवा अध्यक्ष बने। लंबे समय से आरएसएस के सदस्य रहे गडकरी महाराष्ट्र में गठबंधन सरकार में मंत्री और भाजपा युवा शाखा के अध्यक्ष रह चुके हैं। उन्हें आरएसएस नेतृत्व का भरपूर समर्थन प्राप्त था। गडकरी ने मंत्री रहते हुए घोटाले और वित्तीय अनियमितताओं के अन्य आरोपों के बाद 2013 में इस्तीफा दे दिया था।</p>
<figure id="attachment_6916" aria-describedby="caption-attachment-6916" style="width: 1024px" class="wp-caption alignright"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-10.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-10.jpg" alt="" width="1024" height="683" class="size-full wp-image-6916" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-10.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-10-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-10-768x512.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6916" class="wp-caption-text">राजनाथ सिंह</figcaption></figure>
<p>2013 में गडकरी के पद छोड़ने के बाद राजनाथ सिंह को दूसरे कार्यकाल के लिए अध्यक्ष चुना गया। सिंह ने 2014 के भारतीय आम चुनाव के लिए भाजपा के अभियान में बड़ी भूमिका निभाई, जिसमें भाजपा के भीतर विरोध के बावजूद नरेंद्र मोदी को पार्टी का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करना भी शामिल था। पार्टी की शानदार जीत के बाद, सिंह ने गृह मंत्री का पद संभालने के लिए पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। वर्तमान प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी विश्वासपात्र <strong>अमित शाह</strong>, राजनाथ सिंह के पहले मोदी मंत्रिमंडल में शामिल होने के बाद उनके कार्यकाल के शेष समय के लिए भाजपा अध्यक्ष बने। टिप्पणीकारों ने शाह की नियुक्ति को भाजपा पर मोदी के नियंत्रण का प्रदर्शन बताया। शाह को 2016 में पूरे तीन साल के कार्यकाल के लिए फिर से चुना गया।</p>
<figure id="attachment_6917" aria-describedby="caption-attachment-6917" style="width: 1024px" class="wp-caption alignleft"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-7.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-7.jpg" alt="" width="1024" height="683" class="size-full wp-image-6917" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-7.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-7-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-7-768x512.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6917" class="wp-caption-text">नितिन गडकरी</figcaption></figure>
<p>इसके बाद,राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से लंबे समय से जुड़े जगत प्रकाश नड्डाको 2019 में भाजपा का &#8220;कार्यकारी अध्यक्ष&#8221; चुना गया और अध्यक्ष चुने जाने से पहले उन्होंने एक साल तक अमित शाह के साथ पार्टी चलाने की जिम्मेदारी साझा की और आज तक बने हैं । <br />
<strong>भाजपा के स्थापना काल से अब तक 11 अध्यक्ष बने हैं और बारहवें की खोज जारी है। लेकिन यह आश्चर्यजनक है, अगर चौंकाने वाला नहीं है, तो यह है कि मोदी और शाह पिछले एक साल में नड्डा का विकल्प नहीं ढूंढ पाए। ऐसा नहीं है कि मोदी-शाह ने कोशिश नहीं की, लेकिन ऐसा लगता है कि वे सफल नहीं हुए। नड्डा को पहले ही दो बार सेवा विस्तार मिल चुका है। नड्डा को मोदी का करीबी माना जाता है। नड्डा, जो केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हैं, 2020 से पार्टी अध्यक्ष पद पर हैं। उनका कार्यकाल 2023 में समाप्त हो रहा था, लेकिन भाजपा ने इसे 2024 तक बढ़ा दिया ताकि वह लोकसभा चुनावों में पार्टी का नेतृत्व कर सकें।</strong></p>
<p>अख़बारों में, टीवी के स्क्रीन पर आजकल मनोहर लाल खट्टर, भूपेंद्र यादव और धर्मेंद्र प्रधान के नाम कभी आते हैं, कभी गायब हो जाते हैं। ऐसी अटकलें भी लोग लगा रहे हैं कि भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए महिला चेहरे की तलाश कर रही है, क्योंकि पार्टी ने हाल के दिनों में महिला मतदाताओं को प्रभावित करने में सफलता देखी है। इसके अलावा, भाजपा ने 2023 में महिला आरक्षण विधेयक पर भी जोर दिया, जिसे संसद के दोनों सदनों ने मंजूरी दे दी। विधेयक में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की मांग की गई है। पार्टी के लिए एक महिला अध्यक्ष की नियुक्ति से यह स्पष्ट संदेश भी जाएगा कि भाजपा इस विधेयक के साथ है।</p>
<p><strong>लोगबाग यह भी लिख रहे हैं कि निर्मला सीतारमण को भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जा सकता हैं क्योंकि वह पार्टी की सबसे प्रभावशाली महिलाओं में से एक हैं। उल्लेखनीय है कि वह 2019 से वित्त मंत्री का पद संभाल रही हैं, जब भाजपा दूसरी बार सत्ता में आई थी। इसके अलावा, तमिलनाडु में उनकी जड़ें भी भाजपा के लिए एक फायदा हो सकती हैं, क्योंकि पार्टी दक्षिण में आगे बढ़ रही है। अगर सीतारमण को चुना जाता है, तो यह भाजपा के दक्षिणी क्षेत्र में पहुंच बनाने में मदद कर सकता है और परिसीमन के बाद लोकसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के साथ तालमेल का संकेत दे सकता है।</strong></p>
<p>इसी तरह, <strong>दग्गुबाती पुरंदेश्वरी</strong> के नाम पर भी लोग लिख रहे हैं  जो भाजपा की पूर्व आंध्र प्रदेश इकाई की प्रमुख थीं। वह सरकार के ऑपरेशन सिंदूर प्रतिनिधिमंडल का भी हिस्सा थीं, जिसने यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जर्मनी, यूरोपीय संघ, इटली और डेनमार्क में देश के आतंकवाद विरोधी रुख का प्रतिनिधित्व किया था। कई भाषाओं में पारंगत पुरंदेश्वरी ने मंत्री पद और संसदीय अनुभव के साथ एक बहुपक्षीय राजनीतिक करियर बनाया है। वनथी श्रीनिवासन  उछाल रहे हैं जो भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुकी हैं। 2021 में उन्होंने अभिनेता और मक्कल निधि मैयम (एमएनएम) के संस्थापक कमल हासन को हराकर तमिलनाडु की कोयंबटूर (दक्षिण) सीट जीती थी। वह 1993 से भाजपा से जुड़ी हैं और 2022 में भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति की सदस्य बनीं।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-7-1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-7-1.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-6920" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-7-1.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-7-1-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-7-1-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-7-1-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-7-1-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p>वैसे उम्मीद है कि आगामी दस दिनों में भारत को भाजपा का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल जायेगा। अपवाद छोड़कर, अधिकांश राज्यों में संगठनात्मक चुनाव पूरे हो चुके हैं और पदाधिकारियों का चुनाव हो चुका है, और शेष कुछ राज्यों में जल्द ही चुनाव पूरे हो जाएंगे। भाजपा की 36 संगठनात्मक इकाइयों में से 32 में राज्य इकाई के चुनाव महीनों पहले शुरू हो चुके थे, जिनमें राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं।</p>
<p><strong>वैसे आरएसएस ने साफ कर दिया है कि वह दूसरे दलों से आए नेताओं के बजाय घरेलू नेताओं को प्राथमिकता देता है। सांसदों को राज्य प्रमुख नियुक्त करने से हतोत्साहित किया गया। इसके बजाय, राज्य स्तर के विधायकों, एमएलसी और अनुभवी संगठनात्मक कार्यकर्ताओं पर ध्यान केंद्रित किया गया। जो लोग अपने राज्यों से अच्छी तरह वाकिफ हैं, जिन्होंने जमीनी स्तर पर काम किया है और संगठन के पुनर्निर्माण पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। दलबदलुओं की नियुक्ति अपवाद होगी, नियम नहीं। तरीके में यह बदलाव चुने गए नामों में स्पष्ट है। </strong></p>
<p>मध्य प्रदेश में विष्णु दत्त शर्मा की जगह गोपाल खंडेलवाल को चुना गया। पश्चिम बंगाल में भाजपा के राज्यसभा सांसद समिक भट्टाचार्य को पार्टी का नेतृत्व करने के लिए चुना गया। महाराष्ट्र में पुराने नेताओं में से एक भरोसेमंद नेता रवींद्र चव्हाण को नियुक्त किया गया। मिजोरम को डॉ. के. बेचुआ मिले, जो एक अनुभवी राजनेता हैं और 2023 में भाजपा में शामिल हो गए थे। आंध्र प्रदेश ने पी.वी.एन. माधव को लाया, जबकि तेलंगाना में एन. रामचंदर राव की वापसी हुई। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में क्रमशः राजीव बिंदल और महेंद्र भट्ट की फिर से नियुक्ति हुई &#8211; दोनों को ही आरएसएस से मजबूत जुड़ाव वाले स्थिर व्यक्तित्व के रूप में देखा गया। पुडुचेरी में वी.पी. रामलिंगम को चुना गया और अंडमान और निकोबार में अनिल तिवारी ने कार्यभार संभाला।</p>
<p>हालांकि, पार्टी के तीन सबसे महत्वपूर्ण गढ़ों- उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और गुजरात में भाजपा अभी तक नए राज्य प्रमुखों पर आम सहमति नहीं बना पाई है। ये देरी आकस्मिक नहीं है। तीनों राज्यों में आंतरिक गुटबाजी और रणनीतिक दांव अधिक हैं। संघ कथित तौर पर गहरी वैचारिक नींव वाले उम्मीदवारों पर जोर दे रहा है, जबकि राज्य के नेता राजनीतिक रूप से सुविधाजनक नामों की पैरवी कर रहे हैं। पुरानी प्रवृत्ति और नए अनुशासन के बीच संघर्ष के कारण इन राज्यों में अभी भी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। जाहिर है, भाजपा ने आरएसएस से विभिन्न राज्य इकाइयों में संगठन मंत्री (महासचिव-संगठन) के रूप में 14 पूर्णकालिक प्रचारकों को नियुक्त करने के लिए कहा है। संगठन मंत्रियों के लिए इस नए प्रयास को व्यापक संगठनात्मक कसावट के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-9.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-9.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-6921" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-9.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-9-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-9-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-9-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-9-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p><strong>आंतरिक सूत्रों का कहना है कि एकीकरण का यह चरण इस बात को रेखांकित करता है कि भाजपा अब संघ की प्राथमिकताओं के साथ कितनी निकटता से जुड़ी हुई है। भले ही मोदी और शाह का प्रभाव अभी भी बहुत ज्यादा है, लेकिन राज्य स्तर की नियुक्तियों में उनकी भूमिका स्पष्ट रूप से कम हो गई है। सूत्रों के अनुसार नया अध्यक्ष कोई स्थायी व्यक्ति नहीं हो सकता। मोदी पहले ही अपने तीसरे कार्यकाल में हैं और भाजपा अपने चरमोत्कर्ष के बाद के चरण में प्रवेश कर रही है, इसलिए अगला पार्टी प्रमुख वह व्यक्ति हो सकता है जिसे 2029 में संगठन का नेतृत्व करने का काम सौंपा गया हो।</strong></p>
<p>अटकलें यह भी बढ़ रही हैं कि यह संगठनात्मक फेरबदल केंद्र में कैबिनेट फेरबदल के साथ हो सकता है। इस विषय पर <strong>वरिष्ठ पत्रकार अभिनन्दन मिश्र</strong> लिखते हैं कि 15 जुलाई या उससे पहले भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति के साथ ही बिहार, पश्चिम बंगाल और असम में विधानसभा चुनावों के मद्देनजर पार्टी के केंद्रीय संगठन में बड़े पैमाने पर फेरबदल होने की संभावना है। </p>
<figure id="attachment_6922" aria-describedby="caption-attachment-6922" style="width: 783px" class="wp-caption alignleft"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/rsz_abhi.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/rsz_abhi.jpg" alt="" width="783" height="605" class="size-full wp-image-6922" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/rsz_abhi.jpg 783w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/rsz_abhi-300x232.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/rsz_abhi-768x593.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 783px) 100vw, 783px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6922" class="wp-caption-text">अभिनन्दन मिश्र</figcaption></figure>
<p>अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, पार्टी स्तर पर ये बदलाव दिखावटी नहीं बल्कि महत्वपूर्ण होने की संभावना है। छह राष्ट्रीय महासचिवों में से कम से कम दो को बदले जाने की संभावना है और ग्यारह राष्ट्रीय सचिवों में से कई को भी हटाया जा सकता है या फिर उनकी जगह नई जिम्मेदारी दी जा सकती है। यह व्यवस्था के भीतर गतिरोध को दूर करने, नए चेहरों के लिए जगह बनाने और उच्च-दांव वाले चुनावों से पहले दिशा-निर्देशों को सही करने के लिए किया जा रहा है। जिन लोगों पर इसका असर पड़ने की संभावना है, उनमें वे नेता भी शामिल हैं जो अपने-अपने राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में थे और जिनके नाम मीडिया में मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा के संभावित प्रतिस्थापन के रूप में सामने आ रहे थे।</p>
<p><strong>अभिनन्दन मिश्र</strong> का कहना है कि इसके साथ ही, मंत्रिस्तरीय प्रदर्शन के आंतरिक आकलन के आधार पर केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल की भी संभावना है। पिछले कई महीनों से शासन का मुख्य काम मुख्य रूप से प्रधानमंत्री मोदी, पीएमओ और कुछ प्रमुख मंत्रालयों के पास रहा है। कई अन्य कमज़ोर पड़ गए हैं &#8211; ख़ास तौर पर काम के निष्पादन के मामले में। सूत्रों ने बताया कि उनके पदों की समीक्षा की गई है और उन्हें कमज़ोर पाया गया है। हटाए गए कुछ मंत्रियों को संगठनात्मक भूमिकाओं में भेजा जाएगा, जबकि कुछ &#8211; ख़ास तौर पर बिहार से &#8211; को आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए कहा जा सकता है, जैसा कि मध्य प्रदेश में किया गया था। बिहार में, राजनीतिक संदर्भ इन बदलावों को और भी महत्वपूर्ण बनाता है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राजनीतिक करियर के अंत के करीब होने के साथ, भाजपा राज्य में प्रमुख ताकत के रूप में उभरने के लिए काम कर रही है।</p>
<p>हालांकि, पार्टी मुख्यमंत्री पद का चेहरा पेश किए बिना चुनाव में उतरेगी। इसके दो मुख्य कारण हैं। पहला, भाजपा के पास वर्तमान में राज्य में कोई ऐसा नेता नहीं है जिसकी पूरे बिहार में मौजूदगी हो या जिसे व्यापक स्वीकार्यता हो और जिसे मुख्यमंत्री के रूप में पेश किया जा सके। दूसरा, और उतना ही महत्वपूर्ण, नीतीश कुमार चुनाव परिणाम घोषित होने तक मुख्यमंत्री बने रहेंगे और भाजपा चुनाव से पहले इस नाजुक व्यवस्था को &#8211; थोड़ा भी &#8211; बदलने के लिए इच्छुक नहीं है। बिहार भाजपा के भीतर भी मंथन चल रहा है। पिछले कुछ सालों में दरकिनार किए गए कई वरिष्ठ नेता आगामी फेरबदल को एक संभावित अवसर के रूप में देख रहे हैं। उनके समर्थकों को उम्मीद है कि नए पार्टी अध्यक्ष के तहत, पहले हाशिए पर धकेले गए कुछ लोगों को फिर से प्रमुखता दी जा सकती है। हालांकि, केंद्रीय पार्टी पदाधिकारियों ने संकेत दिया है कि राज्य में वर्तमान में प्रमुख लोगों में से कुछ को हटाया भी जा सकता है। अगर ऐसा होता है, तो उन्हें हटाया जाना मौजूदा निर्णयों के पैटर्न के अनुरूप होगा।</p>
<figure id="attachment_6923" aria-describedby="caption-attachment-6923" style="width: 1024px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-2.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-2.jpg" alt="" width="1024" height="683" class="size-full wp-image-6923" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-2.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-2-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/BJP-2-768x512.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6923" class="wp-caption-text">भाजपा मुख्यालय</figcaption></figure>
<p><strong>केंद्रीय नेतृत्व ने हाल के महीनों में वरिष्ठता या दृश्यता के बजाय प्रदर्शन और राजनीतिक उपयोगिता को स्पष्ट प्राथमिकता दी है। संगठन/मंत्रिमंडल में महत्वपूर्ण पद की प्रबल उम्मीद रखने वालों में कुछ ऐसे चेहरे भी हैं, जिन्हें मोदी सरकार के पहले दो कार्यकाल में जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन बाद में उन्हें हटा दिया गया। समग्र राजनीतिक कैलेंडर समयसीमा को और भी तंग कर देता है। प्रधानमंत्री मोदी के 10 जुलाई तक अपने पांच दिवसीय विदेश दौरे से लौटने की उम्मीद है। संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई से 21 अगस्त तक निर्धारित है। अधिकांश अपेक्षित निर्णय &#8211; नए पार्टी अध्यक्ष की नियुक्ति, संगठनात्मक बदलाव और कैबिनेट फेरबदल &#8211; इस तीन सप्ताह की अवधि के भीतर होने की संभावना है। अगस्त के बाद बहुत कम समय बचा है। </strong></p>
<p>यदि बिहार चुनाव अक्टूबर में होते हैं, जैसा कि व्यापक रूप से अनुमान लगाया जा रहा है, तो पार्टी के पास इन बदलावों को लागू करने और उन्हें व्यवस्थित करने के लिए एक संकीर्ण समय होगा। यह उल्लेख करना उचित है कि एक अत्यधिक देरी के बाद, तेजी से आगे बढ़ते हुए, भाजपा ने दस दिनों में अपने संगठनात्मक अभियान के हिस्से के रूप में आठ नए राज्य/इकाई अध्यक्षों की नियुक्ति की है। इनमें महाराष्ट्र शामिल है, जहां मराठा नेता रवींद्र चव्हाण ने कार्यभार संभाला है; पश्चिम बंगाल, जहां अब समिक भट्टाचार्य शीर्ष पर हैं; आंध्र प्रदेश, जहां पी.वी.एन. माधव ने डी. पुरंदेश्वरी का स्थान लिया है; और तेलंगाना, जहां एन. रामचंदर राव ने जी. किशन रेड्डी का स्थान लिया है। मध्य प्रदेश में, वी.डी. शर्मा की जगह हेमंत खंडेलवाल को नया प्रमुख नियुक्त किया गया। पार्टी ने डॉ. के. बेचुआ को मिजोरम का अध्यक्ष और वी.पी. रामलिंगम को पुडुचेरी का अध्यक्ष नियुक्त किया। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में, अनिल तिवारी को नए पार्टी अध्यक्ष के रूप में प्रभार दिया गया। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि क्या भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम को अंतिम रूप देने से पहले उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, हरियाणा, ओडिशा और गुजरात में नए प्रमुखों की नियुक्ति करेगी।</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/politics/bjp-has-got-a-new-president-not-a-permanent-one-but-an-immediate-one">भाजपा को नया अध्यक्ष&#8217; मिल गया है, &#8216;स्थायी&#8217; नहीं, &#8216;तत्काल के लिए&#8217;, क्योंकि &#8216;जग घूमेया थारे जैसा ना कोई 👁 &#8216;नड्डा&#8217;</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>जब प्रधानमंत्री ने कहा कि &#8216;स्टार्टअप के क्षेत्र में भारत आगे कदम बढ़ा रहा है&#8217;, भागलपुर का &#8216;StepUpify Labs&#8217; याद आ गया (बिहार स्टार्टअप-2)</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/business/when-pm-said-india-is-moving-forward-in-the-field-of-startups-stepupify-labs-of-bhagalpur-came-to-mind</link>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 17 Jun 2025 05:41:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यापार]]></category>
		<category><![CDATA[bhagalpur]]></category>
		<category><![CDATA[bihar]]></category>
		<category><![CDATA[business]]></category>
		<category><![CDATA[development]]></category>
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		<category><![CDATA[startup]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>भागलपुर / नई दिल्ली : विगत दिनों जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश में स्टार्टअप की संस्कृति बहुत तेजी से बढ़ रही है, यह देश के शहरी इलाकों में सीमित नहीं रहकर अब ग्रामीण क्षत्रों में भी अपना सकारात्मक प्रदर्शन कर रहा है, हम कदम आगे बढ़ा रहे हैं; अचानक भागलपुर का &#8216;रोबोटिक्स [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/business/when-pm-said-india-is-moving-forward-in-the-field-of-startups-stepupify-labs-of-bhagalpur-came-to-mind">जब प्रधानमंत्री ने कहा कि &#8216;स्टार्टअप के क्षेत्र में भारत आगे कदम बढ़ा रहा है&#8217;, भागलपुर का &#8216;StepUpify Labs&#8217; याद आ गया (बिहार स्टार्टअप-2)</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>भागलपुर / नई दिल्ली : विगत दिनों जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश में स्टार्टअप की संस्कृति बहुत तेजी से बढ़ रही है, यह देश के शहरी इलाकों में सीमित नहीं रहकर अब ग्रामीण क्षत्रों में भी अपना सकारात्मक प्रदर्शन कर रहा है, हम कदम आगे बढ़ा रहे हैं; अचानक भागलपुर का &#8216;रोबोटिक्स और एआई आधारित एग्रीटेक स्टार्टअप  StepUpify Labs मानस पटल पर छा गया। मोदी के अनुसार, भारत के लोग, भारत के युवा, भारत के नए उद्यमी &#8216;स्टार्टअप&#8217; को देश के विकास में रीढ़ की हड्डी बना रहे हैं।  वे इस बात को स्वीकार करते हैं कि &#8216;स्टार्टअप इंडिया&#8217; की परिवर्तनकारी योजना ने अनगिनत युवाओं को सशक्त बनाया है, उनके अभिनव विचारों को सफल स्टार्टअप में बदला है। वे यह भी दावा करते हैं कि विगत एक दशक से सरकार ने स्टार्टअप संस्कृति को प्रोत्साहित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है और स्टार्टअप इंडिया की यह सफलता दर्शाती है कि आज का भारत गतिशील, विश्वास से भरा और भविष्य के लिए तैयार है। </strong></p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा था कि पिछले नौ वर्षों में स्टार्टअप जैसी परिवर्तनकारी योजना ने अनगिनत युवाओं को सशक्त बनाया है और उनके अभिनव विचारों को सफल स्टार्टअप में बदल दिया है। हम उद्यमशीलता पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता की पुन: पुष्टि करते हैं जो हर स्‍वप्‍न को पंख देकर आत्मनिर्भर भारत में योगदान दे रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा, &#8220;मैं स्टार्टअप जगत के हर युवा को बधाई देता हूं और अधिक से अधिक युवाओं को इसे अपनाने का आग्रह करता हूं। मैं आश्वस्त करता हूं कि आप निराश नहीं होंगे!&#8221; </p>
<p>जहां तक सरकार का सवाल है, प्रधानमंत्री का मानना है कि वे स्टार्टअप संस्कृति को प्रोत्साहित करने में कोई कसर नहीं छोड़े हैं। सर्कार की नीतियों ने कारोबारी सुगमता, संसाधनों की बेहतर पहुंच और सबसे महत्वपूर्ण कि हर अवसर पर स्‍टार्टअप उद्यमियों की सहायता पर ध्यान केंद्रित किया है। सरकार सक्रियता से नवाचार और उद्भवन केंद्रों को बढ़ावा दे रही है ताकि देश के युवा कार्य में जोखिम उठाने वाले बनें। अपने विचारों का व्याख्या करने के क्रम में प्रधानमंत्री ने देश के विभिन्न राज्यों में नयी-नयी सोच, नए-नए विचार, नए-नए उद्यमियों के उभरते स्वरुप को देखते उन्होंने कहा कि देश में ये सभी स्टार्टअप देश की आर्थिक स्थिति को न केवल मजबूत बनाएंगे, बल्कि वह सब कर दिखाएंगे जिसकी कल्पना भारत के लोग आज़ादी के बाद नहीं कर पाए थे। यह नई सोच की उपज है और हमें इस सोच का समर्थन करना चाहिए। </p>
<figure id="attachment_6772" aria-describedby="caption-attachment-6772" style="width: 2560px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Modi-2-scaled.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Modi-2-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1695" class="size-full wp-image-6772" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Modi-2-scaled.jpg 2560w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Modi-2-300x199.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Modi-2-1024x678.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Modi-2-768x509.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Modi-2-1536x1017.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Modi-2-2048x1356.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6772" class="wp-caption-text">विश्वास: लाल किले से</figcaption></figure>
<p><strong>स्टार्टअप इंडिया भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है जिसका उद्देश्य देश में स्टार्टअप्स और नये विचारों के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है जिससे देश का आर्थिक विकास हो एवं बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर उत्पन्न हों। इस पहल ने भारत को वैश्विक स्तर पर सबसे बड़े और सबसे जीवंत स्टार्टअप इकोसिस्टम में से एक बनने के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने कहा कि यह एक ऐतिहासिक पहल है जिसने नवाचार, उद्यमशीलता और विकास को फिर से परिभाषित किया है। उन्होंने इस कार्यक्रम को &#8220;मेरे दिल के बहुत करीब&#8221; बताया, क्योंकि यह युवा सशक्तिकरण को आगे बढ़ाने का एक शक्तिशाली तरीका बनकर उभरा है ।</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि एक दशक पहले तक लोग इस प्रणाली में भारत की सफलता की क्षमता पर संदेह करते थे। इस &#8220;परिवर्तनकारी&#8221; कार्यक्रम ने अनगिनत युवाओं को सशक्त बनाया है, उनके अभिनव विचारों को सफल स्टार्टअप में बदल दिया है। उन्होंने कहा कि तकनीक-संचालित समाधानों से लेकर ग्रामीण नवाचारों, स्वास्थ्य सेवा की प्रगति से लेकर बायोटेक सफलताओं, फिनटेक से एडटेक, स्वच्छ ऊर्जा से लेकर टिकाऊ तकनीक तक, भारतीय स्टार्टअप वैश्विक चुनौतियों का समाधान कर रहे हैं, साथ ही साथ देश की आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रयास को बढ़ावा दे रहे हैं। हर सपने को पूरा करने वाले और &#8216;आत्मनिर्भर भारत&#8217; में योगदान देने वाले उद्यमी पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के लिए अपनी सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने स्टार्टअप की संस्कृति को प्रोत्साहित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि उनकी सरकार की नीतियां &#8220;व्यापार करने में आसानी&#8221;, संसाधनों तक बेहतर पहुंच और सबसे महत्वपूर्ण बात, हर मोड़ पर उनका समर्थन करने पर केंद्रित रही हैं। उन्होंने कहा, &#8220;हम सक्रिय रूप से नवाचार और इनक्यूबेशन केंद्रों को बढ़ावा दे रहे हैं ताकि हमारे युवा जोखिम लेने वाले बनें। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्टार्टअप इंडिया की यह सफलता दर्शाती है कि आज का भारत गतिशील, आत्मविश्वासी और भविष्य के लिए तैयार है। मोदी ने कहा, &#8220;मैं स्टार्टअप जगत के हर युवा की सराहना करता हूं और अधिक से अधिक युवाओं से इसे अपनाने का आग्रह करता हूं। यह मेरा आश्वासन है कि आप निराश नहीं होंगे।&#8221;</p>
<p><strong>&#8216;स्टार्टअप इंडिया&#8217; ने भारत को विश्व स्तर पर सबसे बड़े और सर्वाधिक जीवंत स्टार्टअप इकोसिस्टम में से एक बना दिया है। 15 जनवरी, 2024 तक, उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) द्वारा 1.59 लाख से अधिक स्टार्टअप को मान्यता दी गई है, जिससे दुनिया भर में तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम के रूप में भारत की स्थिति मजबूत हुई है। साथ ही, 2016 से 31 अक्टूबर 2024 के बीच इन मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स ने कथित तौर पर 16.6 लाख से अधिक प्रत्यक्ष नौकरियां पैदा की हैं, जो रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण योगदान है।</strong></p>
<p>स्टार्टअप एक इकाई है, जो भारत में पांच साल से अधिक से पंजीकृत नहीं है और जिसका सालाना कारोबार किसी भी वित्तीय वर्ष में 25 करोड़ रुपये से अधिक नहीं है। यह एक इकाई है जो प्रौद्योगिकी या बौद्धिक सम्पदा से प्रेरित नये उत्पादों या सेवाओं के नवाचार, विकास, प्रविस्तारण या व्यवसायीकरण की दिशा में काम करती है। सरकार द्वारा इस संबंध में घोषित कार्य योजना स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के सभी पहलुओं को संबोधित करने और इस आंदोलन के प्रसार में तेजी लाने की उम्मीद करती है।</p>
<p>भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। उन्हें पूरा भरोसा है कि भारत की आजादी के 100वें वर्ष में देश को विकसित बनाने में यही स्टार्टअप महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। भारत में स्टार्टअप कल्चर तेजी से विकसित हुआ है. स्टार्टअप की यह तरक्की सिर्फ मेट्रो शहरों तक सीमित ही नहीं है। यह अब सोशल कल्चर का हिस्सा भी बन चुके है। युवा अपने इनोवेशन को छोटे शहरों से भी बाहर लेकर आ रहे हैं। डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटर्नल ट्रेड (DPIIT) के आंकड़ों के अनुसार देश में दिसंबर, 2023 तक लगभग 117,254 स्टार्टअप थे, इनमें से 110 यूनिकॉर्न है। इन्होंने लगभग 12 लाख से ज्यादा नौकरियां पैदा की हैं, साथ ही, लगभग 1 लाख पेटेंट दिए गए है। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/sssssss.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/sssssss.jpg" alt="" width="2045" height="1198" class="aligncenter size-full wp-image-6773" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/sssssss.jpg 2045w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/sssssss-300x176.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/sssssss-1024x600.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/sssssss-768x450.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/sssssss-1536x900.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2045px) 100vw, 2045px" /></a></p>
<blockquote><p>इसी क्रम में आइए चलते हैं StepUpify Labs &#8211; भागलपुर, बिहार में स्थित एक रोबोटिक्स और एआई आधारित एग्रीटेक स्टार्टअप है, जिसे आईआईटी-खड़गपुर के पूर्व छात्र अजीत कुमार ने 2021 में शुरू किया था। भारत में कृषि असीमित चुनौतियों से ग्रस्त है। उनमें से कुछ हैं कम श्रम उत्पादकता, श्रम की कमी, आवारा जानवरों के कारण फसल की चोरी और नुकसान, कृषि मशीनीकरण की वहनीयता न होना और मैनुअल खेती के तरीकों में थकान।</p></blockquote>
<p>इन समस्याओं का समाधान करने के लिए, StepUpify ने लागत प्रभावी, भारी शुल्क और शून्य रखरखाव वाली सौर और बैटरी से चलने वाली अनूठी हल्की वजन वाली कृषि मशीनें बनाई हैं, जो रोबोटिक्स और एआई जैसी नई तकनीकों के साथ एकीकृत हैं। इन टिकाऊ कृषि मशीनों के उपयोग से इनपुट लागत में 60-70% की कमी आ रही है और विभिन्न कृषि गतिविधियों जैसे छिड़काव, निराई, ड्रिलिंग, कटाई, कटाई/छँटाई, थ्रेसिंग, खेत की निगरानी आदि के लिए नगण्य थकान हो रही है।</p>
<p>आईआईटी-खड़गपुर 2013 बैच के मैकेनिकल इंजीनियरिंग स्नातक अजीत कुमार ने 2020 में कोविड अवधि के दौरान बिहार में अपने पैतृक स्थान पर इस उद्यम को शुरू करने के लिए मुंबई में अपनी अच्छी नौकरी छोड़ दी। उन्होंने अपनी उद्यमशीलता की यात्रा शुरू करने से पहले छह साल से अधिक समय तक टाटा मोटर्स, महिंद्रा और कुछ अन्य डीप टेक रोबोटिक्स स्टार्टअप्स जैसे बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए अनुसंधान और विकास प्रमुख भूमिकाओं में काम किया है। </p>
<p>वे कहते हैं, &#8220;कोविड काल के दौरान, हम बिहार में अपने पैतृक स्थान पर थे और हम अपने गृह राज्य के लिए कुछ प्रभावशाली करना चाहते थे। बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है और हम एक किसान परिवार से हैं, इसलिए हमारे लिए कृषि-क्षेत्र में उद्यम शुरू करना आसान और स्वाभाविक था। कोविड में लॉकडाउन के कारण, अन्य क्षेत्र बंद थे, लेकिन खेतों के पास गाँव में रहने के कारण हमारे लिए कृषि खुली थी। </p>
<p><strong>कृषि में एक लाभदायक मॉडल की तलाश में कुछ महीनों के क्षेत्र सर्वेक्षण के साथ, हमने अपने किसानों के सामने आने वाली चुनौतियों को समझने और अनुभव करने के लिए आधुनिक तरीकों से उच्च उपज और उच्च मूल्य प्राप्त करने वाली सब्जियों की खेती शुरू की। हमने एक एकड़ खेत में दूसरों की तुलना में पहले करेले की खेती की ताकि हमारे खेत में फल जल्दी लगें और हमारी कृषि उपज का बेहतर मूल्य मिले। </strong></p>
<p>खेती और रोपण प्रक्रिया में, हमें उच्च श्रम लागत और कृषि मशीनरी बाजार में प्रभावी छोटे कृषि उपकरणों की अनुपलब्धता की समस्याओं का सामना करना पड़ा। ये छिड़काव, निराई और गुड़ाई के लिए पारंपरिक खेती के तरीकों में इनपुट लागत और कठिन परिश्रम को बढ़ा रहे थे। हमारी फसल के लिए एलन (बांस की संरचना) निर्माण के लिए ड्रिलिंग। हमारे खेत पर सब्ज़ियों की पैदावार बहुत अच्छी थी और हम खुश थे कि इससे हमें अच्छा मुनाफ़ा होगा। जल्दी उत्पादन के कारण, हमारी सब्ज़ियों की बाज़ार में बहुत माँग थी और उन्हें बहुत अच्छे दाम मिल रहे थे। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Startup-5.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Startup-5.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-6774" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Startup-5.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Startup-5-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Startup-5-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Startup-5-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Startup-5-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p>लेकिन दुर्भाग्य से, खेतों की निगरानी न होने के कारण आस-पास के लोगों द्वारा हमारी सब्ज़ियाँ चोरी होने लगीं। हालाँकि हमने खेत की निगरानी के लिए एक गार्ड नियुक्त किया था, लेकिन एक सुबह हमने पाया कि हमारी लगभग 20% सब्ज़ियाँ चोरी हो गई थीं। आधुनिक तरीकों पर अपना समय और पैसा लगाने के बाद भी हमने अपनी पहली खेती के अनुभव में बहुत बड़ा नुकसान उठाया। इस प्रकार, हमने सीखा और महसूस किया कि खेती एक व्यवसाय के रूप में प्रकृति और मनुष्यों दोनों के कारण खतरों, जोखिमों और अनिश्चितताओं से भरी हुई है।</p>
<p><strong>हमारे पहले खेती के अनुभव के दौरान, आवारा जानवरों के कारण फसल की चोरी और फसल को नुकसान हमारे लिए एक बड़ी अपरिहार्य समस्या थी। शुरू में, हमने 24&#215;7 खेत की निगरानी करने के लिए एक विज़न आधारित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ड्रिवेन फार्म सर्विलांस कम एनिमल स्केयरर डिवाइस विकसित की। इसमें फसल की लगातार निगरानी करने के लिए एक दिन रात कैमरा है, नीलगाय, हाथी, जंगली सूअर आदि जैसे आवारा जानवरों को डराने के लिए एक स्मार्ट स्केयरिंग डिवाइस है, जो जानवरों के चुनिंदा ध्वनि और प्रकाश पैटर्न के साथ है, उपयोगकर्ताओं को वास्तविक समय में फोन कॉल अलर्ट करता है और यह किसानों के मोबाइल हैंडसेट पर घुसपैठ का स्नैपशॉट भेजता है। </strong></p>
<p>हमने अपने द्वारा विकसित इस तकनीक के लिए पेटेंट के लिए आवेदन किया। चूंकि इस डिवाइस में इंटरनेट कनेक्टिविटी के साथ वास्तविक समय एआई करने के लिए पहले से ही एक उन्नत कंप्यूटर है, इसलिए इसकी उपयोगिता बढ़ाने के लिए हम खेत स्तर पर फसल की निगरानी, स्वचालित सिंचाई और मौसम की निगरानी जैसी सुविधाओं को एकीकृत कर रहे हैं।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Startup-6.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Startup-6.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-6776" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Startup-6.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Startup-6-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Startup-6-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Startup-6-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Startup-6-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p>इसके बाद, हमने बैटरी से चलने वाली एक उच्च दाब वाली बहुउद्देशीय स्प्रे मशीन विकसित की, जो 12 वोल्ट की मानक कार बैटरी द्वारा संचालित होती है, जिसकी क्षैतिज स्प्रे रेंज 30-35 फीट और ऊर्ध्वाधर स्प्रे रेंज 25 फीट है और यह पूरे दिन चलती है। हमने मशीन पर इस्तेमाल की गई तकनीक के लिए पेटेंट के लिए आवेदन किया। बिहार में आम लीची बेल्ट में स्थित होने के कारण, यह आम किसानों के बीच बहुत लोकप्रिय हो गई क्योंकि इससे कीटनाशक की लागत 50% कम हो गई और श्रम लागत में भारी कमी आई क्योंकि इस मशीन को चलाने के लिए एक व्यक्ति ही काफी था, इसमें प्रेशर ऑटो कट फीचर था और इसे ट्रॉली पर लगाया जा सकता था।</p>
<p>फसल कटाई के मौसम में मजदूरों की कमी की समस्या को दूर करने के लिए, हमने किसानों को गेहूं, धान, जौ, हरा चारा काटने और खेत में खरपतवार काटने में मदद करने के लिए बैटरी से चलने वाला ब्रश कटर विकसित किया। इस उपकरण पर इस्तेमाल की गई तकनीक के कारण, यह बाजार में उपलब्ध अन्य बैटरी चालित समाधानों की तुलना में कम ऊर्जा की खपत करता है और अपनी दक्षता के लिए अधिक टॉर्क प्रदान करता है। हमने इस मशीन के लिए हमारे द्वारा विकसित तकनीक के पेटेंट के लिए आवेदन किया। खेत पर इसकी उपयोगिता को देखते हुए यह समाधान पूरे भारत में किसानों के बीच काफी लोकप्रिय भी हुआ। फसल सीजन में केवल 10-15 दिनों की अवधि में किसानों को हमारे उपकरणों पर किए गए निवेश का रिटर्न मिल रहा था और उसके बाद वे इसे अन्य किसानों को किराए पर देकर इससे मुनाफा कमा रहे थे।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Startup-4.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Startup-4.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-6775" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Startup-4.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Startup-4-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Startup-4-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Startup-4-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Startup-4-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p><strong>धीरे-धीरे, हमने पोल्ट्री फार्म के लिए छिड़काव, निराई, ड्रिलिंग, कटाई, कटाई, छंटाई, सिंचाई, थ्रेसिंग और रेकिंग जैसी विभिन्न कृषि गतिविधियों को करने के लिए एक सामान्य बैटरी द्वारा संचालित हरित कृषि उपकरणों का सेट विकसित किया, जिससे इन गतिविधियों को मैन्युअल रूप से करने में इनपुट लागत और थकान कम हो गई। एक बार जब कोई किसान हमारी कोई भी बैटरी चालित कृषि मशीन खरीद लेता है, तो अगली बार उसे बैटरी और चार्जर खरीदने की ज़रूरत नहीं होती क्योंकि यह स्टेपअपिफाई द्वारा मशीनों के बीच आम और आसानी से साझा की जाती है। इसलिए, यह उनके लिए बहुत ही लागत प्रभावी हो जाता है, जिससे उगाई गई फसलों से उनकी लाभप्रदता बढ़ जाती है।</strong></p>
<p>आज की स्थिति में, हमारे पास कहलगांव में एक विनिर्माण इकाई है, जिसकी मासिक उत्पादन क्षमता 250-300 उपकरण है। हमारी बैटरी चालित कृषि मशीनें &#8211; ब्रश कटर, बैटरी चालित पावर वीडर और बैटरी चालित पावर स्प्रेयर को भारत सरकार के अधिकृत कृषि मशीनरी परीक्षण केंद्र द्वारा इसकी प्रभावशीलता, स्थायित्व और दक्षता के लिए परीक्षण और प्रमाणित किया गया है।</p>
<p>हमने अपने स्वच्छ ऊर्जा कृषि उपकरणों को भारत के लगभग सभी राज्यों में भेजा है और वहां के किसानों के लाभ के लिए नेपाल, भूटान और मॉरीशस को भी निर्यात किया है। अगले कुछ महीनों में, हम नए भौगोलिक क्षेत्रों के किसानों तक पहुँचने और एक स्थायी दृष्टिकोण के साथ कृषक समुदाय पर सकारात्मक और पर्याप्त प्रभाव डालने के लिए अपनी उत्पादन क्षमता, वितरण और सेवा नेटवर्क का विस्तार करने की योजना बना रहे हैं।”</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/business/when-pm-said-india-is-moving-forward-in-the-field-of-startups-stepupify-labs-of-bhagalpur-came-to-mind">जब प्रधानमंत्री ने कहा कि &#8216;स्टार्टअप के क्षेत्र में भारत आगे कदम बढ़ा रहा है&#8217;, भागलपुर का &#8216;StepUpify Labs&#8217; याद आ गया (बिहार स्टार्टअप-2)</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>तिहाड़ जेल-5 ✍ उस रास्ते का अंत &#8216;शौचालय&#8217; में था 👣 तभी चार्ल्स शोभराज दिल्ली पुलिस के गिरफ्त में आ गया 👁 फिर जेल से भागने के लिए</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 30 Mar 2025 07:11:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
		<category><![CDATA[arrest]]></category>
		<category><![CDATA[charles shobhraaj]]></category>
		<category><![CDATA[jail officers]]></category>
		<category><![CDATA[journalism]]></category>
		<category><![CDATA[judiciari]]></category>
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		<category><![CDATA[tihar jail]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>जेलरोड (तिहाड़ जेल), नई दिल्ली : भारत को आज़ाद होने से कोई तीन वर्ष पहले 6 अप्रैल, 1944 को एक भारतीय पिता और एक वियतनामी माँ के यहाँ साइगॉन (बियतनाम) में जन्मे हतचंद भाओनानी गुरुमुख शोभराज यानी 81-वर्षीय चार्ल्स शोभराज अपने जीवन का चालीस से अधिक बहुमूल्य वर्ष, विश्व के अन्य कारावासों की बात न भी [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/the-end-of-that-road-was-in-the-toilet-when-charles-sobhraj-was-caught">तिहाड़ जेल-5 ✍ उस रास्ते का अंत &#8216;शौचालय&#8217; में था 👣 तभी चार्ल्स शोभराज दिल्ली पुलिस के गिरफ्त में आ गया 👁 फिर जेल से भागने के लिए</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>जेलरोड (तिहाड़ जेल), नई दिल्ली : भारत को आज़ाद होने से कोई तीन वर्ष पहले 6 अप्रैल, 1944 को एक भारतीय पिता और एक वियतनामी माँ के यहाँ साइगॉन (बियतनाम) में जन्मे हतचंद भाओनानी गुरुमुख शोभराज यानी 81-वर्षीय चार्ल्स शोभराज अपने जीवन का चालीस से अधिक बहुमूल्य वर्ष, विश्व के अन्य कारावासों की बात न भी करें तो भारत और नेपाल के कारावासों में गुजारे है। &#8220;लोहों को चकित करने की आदत से ओत-प्रोत जीवन शैली वाला चार्ल्स शोभराज अंततः नेपाल से रिहाई के बाद आजकल फ़्रांस में दिखाई दे रहे हैं। तत्कालीन दस्यु महारानी फूलन देवी की रिहाई (1994) के तीन साल बाद फरवरी 1997 में अपनी 20-वर्षीय कारावास की सजा पूरी करने के बाद वैसे शोभराज को फ्रांसीसी अधिकारियों को सौंप दिया गया था, लेकिन कुछ ही वर्ष बाद नेपाल में उनकी गिरफ्तारी हुई थी।</strong> </p>
<p><a href="https://www.youtube.com/watch?v=tRFQW6NNUNA&#038;t=120s">@अखबारवाला001 (233) ✍ दिल्ली के तिहाड़ कारावास में वह सब कुछ होता है जो कारावास में नहीं होनी चाहिए 😢</a></p>
<p>नब्बे के दशक में दिल्ली से प्रकाशित अख़बारों, पत्रिकाओं में दो लोगों &#8211; एक महिला और एक पुरुष &#8211; का नाम बहुत अधिक प्रमुखता के साथ प्रकाशित होता था। एक थीं बागी फूलन देवी, जिन्हें ग्वालियर जेल से तिहाड़ जेल हस्तानांतरित किया गया था और दूसरे थे &#8211; चार्ल्स शोभराज। ग्वालियर जेल से तिहाड़ हस्तानांतरण के बाद फूलन देवी के परिवार के लोग, खासकर उनके चाचा हरफूल सिंह और उनका परिवार अत्यधिक सचेष्ठ था ताकि वे शीघ्र ही जेल से रिहाई हो। फूलन देवी की रिहाई में और रिहाई के बाद राजनीति में प्रवेश के लिए दो समाजवादी नेताओं को सर्वाधिक श्रेय दिया जा सकता है। एक: मुलायम सिंह यादव और दूसरे: अमर सिंह। तिहाड़ कारावास से रिहाई के बाद फूलन देवी वर्षों भारत के संसद में विराजमान रहीं। वहीँ चार्ल्स शोभराज तिहाड़ से रिहाई के बाद सैद्धांतिक रूप से भले फ़्रांस के अधिकारियों को सौंपे गए हों, कुछ ही साल बाद नेपाल पुलिस के गिरफ्त में आ गए और लगभग 19 वर्ष तक नेपाल के कारावास में बंद रहे। </p>
<blockquote><p>कहते हैं 60 के दशक की शुरुआत में भारत आने से पहले, चार्ल्स एक किशोर अपराधी थे। छोटे-मोटे अपराधों के ज़रिए छोटी-छोटी रकम कमाना और भारत पहुंचना उनका मकसद था। विज्ञान में स्नातक करने के बाद, चार्ल्स शोभराज 1967 के आसपास पहले 1967 के आसपास भारत आये और फिर नवंबर 1971 में।  कहते हैं उस कालखंड में उपासपोर्ट नहीं होने के कारण वे दिल्ली पुलिस के गिरफ्त में आये। वह बहुत छोटी बात थी। जेल आना-जाना उसकी रोजमर्रे की आदत जैसी हो गई थी। शोभराज खुद को एक आकर्षक व्यक्ति के रूप में पेश करता था। वह विदेशियों से दोस्ती करता था, उन्हें नशीला पदार्थ खिलाता था और लूटता था। यह उसका काम करने का तरीका था।</p></blockquote>
<figure id="attachment_6254" aria-describedby="caption-attachment-6254" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-SUNDAY.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-SUNDAY.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-6254" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-SUNDAY.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-SUNDAY-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-SUNDAY-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-SUNDAY-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-SUNDAY-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6254" class="wp-caption-text">संडे पत्रिका (आनंद बाजार पत्रिका समूह) की विशेष कहानी</figcaption></figure>
<p>भारत से रिहाई के बाद शोभराज 2003 में नेपाल गए जहाँ उसे गिरफ्तार किया गया और मुकदमा चलाया गया।  मुकदमें में उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। 21 दिसंबर 2022 को नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने उसे उसकी बढ़ती उम्र के कारण जेल से रिहा करने का आदेश दिया, जबकि वह अपनी जेल की सज़ा के 19 साल काट चुका था। काठमांडू में, शोभराज 29 वर्षीय अमेरिकी रेडियोलॉजी छात्र कोनी जो ब्रोंज़िच और 26 वर्षीय कनाडाई बैकपैकर और मौसमी खनिक लॉरेंट कैरियर की हत्या के लिए 20 साल की आजीवन कारावास की सजा काट रहा था। कहते हैं वह हर व्यक्ति के मनोविज्ञान को पढ़ सकता था और ठीक से समझ जाता था कि वे क्या चाहते हैं। शोभराज ने अपराध के अंतर्राष्ट्रीय जीवन की शुरुआत की और 1975 में थाईलैंड में पहुँच गए। शिष्ट और परिष्कृत, वह एक युवा अमेरिकी महिला की हत्या में शामिल था, जिसका शव बिकनी पहने हुए समुद्र तट पर पाया गया था। &#8220;बिकनी किलर&#8221; के नाम से प्रसिद्ध शोभराज पर दर्जनों हत्याओं का आरोप लगाया गया।</p>
<figure id="attachment_6261" aria-describedby="caption-attachment-6261" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-Nepal1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-Nepal1.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-6261" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-Nepal1.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-Nepal1-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-Nepal1-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-Nepal1-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-Nepal1-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6261" class="wp-caption-text">चार्ल्स शोभराज नेपाल में</figcaption></figure>
<p><strong>आइये चलते हैं तिहाड़ जेल के पूर्व जेलर सुनील कुमार गुप्ता के पास जिन्होंने तिहाड़ के एक-एक कैदियों को हजी नहीं, तिहाड़ की भौगोलिक स्थिति को ही नहीं, वहां की गिरती-लुढ़कती प्रशासनिक व्यवस्था और उस व्यवस्था में गोंते लगाते कई एक भ्रष्ट अधिकारीयों, कर्मचारियों को अपने 35-वर्ष के सेवा काल में देखे थे। वैसे तिहाड़ जेल के अंदर चार्ल्स शोभराज की कहानियां ऐतिहासिक हो सकती है, लेकिन उसके जेल से भागने की तुलना में वे नगण्य हैं।</strong> </p>
<p>शोभराज के जेल से भागने की घटना 6 जुलाई, 1976 को हुई थी। यद्यपि वह भारत सहित दुनिया के अनेक देशों में कई हत्याओं के सिलसिले में खोजा जा रहा था, उसके ऊपर 60 फ़्रांसिसी पर्यटकों को नशा देने के प्रयास में प्रत्यावर्तन का भी मुकदमा चल रहा था। लेकिन जिस आदमी ने दुनिया भर के लोगों को मुर्ख बनाया था, अंततः वह दिल्ली में पकड़ा गया था। दिल्ली के विक्रम होटल में 60 पर्यटकों को नशा खिलाकर लूटने की उसकी कोशिश विफल हो गयी थी। उसने सैलानियों को नशे की जो खुराक दी थी, वह थोड़ी काम थी और उसके शिकारों को डायरिया हो गया था। शोभराज के ऊपर संदेह करते हुए उन्होंने होटलवालों पर पुलिस बुलाने और उससे पूछताछ करने गिरफ्तार करने का दबाव डाला। अतः इस मामले में शोभराज की योजना शौचालय में पहुंचकर उलटी पर गयी। यानी चार्ल्स शोभराज की पहली पकड़ शौचालय में हुई। </p>
<figure id="attachment_6255" aria-describedby="caption-attachment-6255" style="width: 2560px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/DSC_3582-scaled-3.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/DSC_3582-scaled-3.jpg" alt="" width="2560" height="1709" class="size-full wp-image-6255" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/DSC_3582-scaled-3.jpg 2560w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/DSC_3582-scaled-3-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/DSC_3582-scaled-3-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/DSC_3582-scaled-3-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/DSC_3582-scaled-3-1536x1025.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/DSC_3582-scaled-3-2048x1367.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6255" class="wp-caption-text">तिहाड़ जेल के पूर्व जेलर सुनील कुमार गुप्ता</figcaption></figure>
<p><strong>सुनील गुप्ता के अनुसार, &#8220;वास्तव वह अकेला मामला नहीं था, जिसमें वह सजा काट रहा था। उसके ऊपर 3 जनवरी, 1976 को वाराणसी में एक इजरायली नागरिक एलन एरन जैकब्स की हत्या का भी आरोप था। उसने उसके मामले में भी नशीली दबाव का प्रयोग किया था। शोभराज और एक अन्य विदेशी, एक महिला, ने वाराणसी के नटराज होटल में जैकब्स और मोहन लाल नमक एक भारतीय के साथ प्रवेश किया। एक और जहाँ मोहन लाल और जैकब्स एक ही कमरे में एक साथ ठहरे, वहीँ दूसरी ओर शोभराज और वह महिला ने फ़्रांसिसी दंपत्ति होने का बहाना बनाकर मिस्टर नैपियर पोनेंट और मिसेज निकोल पोनेंट के छद्म नाम से होटल में प्रवेश किया। अगले दिन वे दोनों उस होटल से यह बहाना बनाकर निकल आये कि उन्हें उसके बजाय क्लर्क होटल में ठहरना पसंद है। वे दोनों उस होटल में इस बार श्रीमती एवं श्री एलन जैकब्स के नकली नाम से क्लर्क होटल में ठहरे और उन्होंने भुगतान करने के लिए जैकब्स के फॉरेक्स ट्रैवेलर्स चेक का प्रयोग किया।</strong> </p>
<p>5 जनवरी को वे दोनों होटल नटराज में वापस गए और वहां जैकब्स और मोहन लाल के बारे में पूछताछ की। होटल के कर्मचारी ने उन्हें बताया कि पिछली रात जब एक परिचारक उसके कमरे में पानी देने गया था तो वह जीवित था और उसने शोभराज को मोहन लाल को कोई गोली देते हुए देखा था। कुछ घंटे बाद वह दंपत्ति और मोहन लाल वहां से चले गए थे, लेकिन जैकब्स जिनक फॉस्फेट के जहर से मरा पड़ा पाया गया था। </p>
<p>16 मार्च, 1986 को रविवार था और उस दिन गुप्ता जी की छुट्टी थी। बाद में वह कहानी कई बार सुने तो उन्होंने महसूस किया कि काश !! उस दिन वे वहां होते !! सबसे पहले चेतावनी देना वाला व्यक्ति सिपाही आनंद प्रकाश था। वह एक मोटे कपडे से अपना चेहरा ढंके हुए जेल के क्वार्टर तक आया। उसके चेहरा छिपाने का कारण बाद में पता चला। जब उसने जेल के डिप्टी सुपरिन्टेन्डेन्ट के कार्यालय की घंटी बजे, उस समय वह कुछ बोल नहीं पा रहा था। बड़ी मुश्किल से वह जेल नंबर 3 के प्रभारी से इतना ही कह पाया, &#8220;भागो, जल्दी करो !&#8217; बाद में जेल नंबर 3 के सहायक अध्यक्ष वीडी पुष्करणा ने कहा कि उसने जो कुछ देखा, वह उसकी कल्पना से पड़े था। वह एक निकृष्ट दुखद कथा से होकर गुजरा था। जेल के सभी दरवाजे खुले पड़े थे। जेल स्टाफ, जिसमें द्वारपाल, सुरक्षा दस्ता और यहाँ तक कि ड्यूटी ऑफिसर शिवराज यादव तक या तो सोये हुए थे या हक्का-बक्का नजर आ रहे थे। </p>
<figure id="attachment_6256" aria-describedby="caption-attachment-6256" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-DElhi-Police.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-DElhi-Police.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-6256" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-DElhi-Police.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-DElhi-Police-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-DElhi-Police-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-DElhi-Police-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-DElhi-Police-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6256" class="wp-caption-text">चार्ल्स शोभराज और दिल्ली पुलिस</figcaption></figure>
<p>पुष्करणा ने देखा की गेट की छवियां अपने बास्तविक स्थान पर नहीं थी। वहां योग्य तमिलनाडु पुलिस के संतरियों को तिहाड़ की पहरेदारी के किये इसलिए चुना गया था, क्योंकि भौगोलिक रूप से भिन्न भाषा उन्हें उत्तर भारतीय अपराधियों से मेल जोल बढ़ने से रोकती थी। उस दिन वे गिरे पड़े थे। आम तौर पर जेल के चारो ओर बने ऊँचे निगरानी टावरों से उन्हें एक संतरी काफी दूर सड़क पर अपनी थ्री नॉट थ्री राइफल के साथ लेटा दिखाई पड़ा था। सिपाही आनंद प्रकाश ने अपना चेहरा शर्मा के कारण नहीं छिपाया था, बल्कि इसलिए छिपाया था कि उसे भी नशा दिया गया था। जब वह नींद से जाएगा तो खुद को औंधे मुंह गिरा पाया और उसके चेरे पर जलन हो रही थी। </p>
<p>पुष्करणा जानता था की तिहाड़ में अवश्य ही कुछ बहयनक, भयानक रूप से कोई गलत घटना हुयी है। इसलिए बहुत लम्बे अंतराल के बाद पहली बार वैधानिक कारणों से बजर &#8211; खतरे की घंटी &#8211; बजाया गया था। वह इस कारण से नहीं बजाय गया था की कोई नम्बरदार किसी खूंखार नए कैदी से प्रतिशोध लेना चाहता था, या की वे जेल के अंदर कोई लड़ाई शुरू करना चाहते थे।  इस बार जब उसे बजाय गया तो वास्तव में आपात स्थिति थी। और ऐसा महसूस हुआ जैसे जेल संख्या &#8211; 3 की समुच जनसंख्या वहां से पलायन कर गयी थी। नियमानुसार, खतरे की घंटी बजने के साथ ही कैदियों की गिनती शुरू हो जाती है। जब गिनती समाप्त हुयी तो 900 में से केवल 12 कैदी, जो खास तौर से उसी जेल में थे, फरार हुए थे। लेकिन भागने वालों में तिहाड़ का अति प्रसिद्द चार्ल्स गुरुमुख शोभराज भी शामिल था। </p>
<blockquote><p>सुनील गुप्ता कहते हैं: &#8220;मुझे अच्छी तरह याद है कि जब मैं अपरान्ह 3 बजे खबर सुनी तो मैं अपने घर में बैठा टीवी देख रहा था। तभी दूरदर्शन ने अपने नियमित कार्यक्रमों को अचानक रोक कर कारा टूट की घोषणा की और यह भी बताया कि चार्ल्स शोभराज जेल से फरार हो गया है। मैं तत्काल अपनी ड्यूटी पर पहुँच गया। ऑफिस पहुँचने के बाद हमने घटनाओं को क्रमशः जोड़ना प्रारम्भ कर दिया। एक महत्वपूर्ण सुराग यह था कि प्रत्येक मूर्छित प्रहरी अपने हाथ में पचास रुपये का नोट पकडे हुआ था। इस प्रकार, पुष्करणा ने अनुमान लगाया कि पहले उन्हें पैसे का लालच दिया गया और उसके बाद उन्हें चार्ल्स शोभराज द्वारा उसके तथाकथित जन्मदिन के बहाने नशीली मिठाइयां खिला दी गई।</p></blockquote>
<p>दिल्ली के पुलिस तत्कालीन उपायुक्त अजय अग्रवाल ने संवाददाताओं को बताया था की  वार्डर के पास आकर दो लोगों ने किसी कैदी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में फल और मिठाइयां बांटने की इजाजत मांगी थी। वार्डर शिवराज यादव ने उन्हें वैसे करने की अनुमति दे दी थी, जिसके बाद आगंतुकों ने उसे और अन्य पांच प्रहरियों को मिठाइयां दी थी। मिठाइयां खाने के तत्काल बाद ड्यूटी पर तैनात जेलकर्मी मूर्छित हो गए और उन्हें घंटों बाद होश आया। </p>
<figure id="attachment_6257" aria-describedby="caption-attachment-6257" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-Aljajira.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-Aljajira.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-6257" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-Aljajira.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-Aljajira-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-Aljajira-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-Aljajira-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-Aljajira-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6257" class="wp-caption-text">चार्ल्स शोभराज (तस्वीर अलजज़ीरा के सौजन्य से)</figcaption></figure>
<p>सुनील गुप्ता कहते हैं: &#8220;जांच करने के बाद हमने पाया कि डेविड हॉल नमक एक पूर्व कैसी उस दिन चार्ल्स शोभराज से मिलने आया था और उसी ने उसके भागने में मुख्य भूमिका अदा की थी। ब्रितानी नागरिक हॉल ने नशीली पदार्थों के तस्करी के आरोप में तिहाड़ जेल में सजा काटी थी, बाद में रिहा हुआ था। मैंने तो उसे अच्छी तरह नहीं जानता था, परन्तु शोभराज को उसके बारे में पूरी जानकारी थी। विदेशी नागरिक होने के कारण दोनों में भाईचारा उत्पन्न हो गया था और जब शोभराज ने उसकी जमानत की अर्जी लिखने में सहायता की तो उसकी मित्रता और अधिक प्रगाढ़ हो गई। आगे जांच करने से पता चला कि जिस दिन हॉल शोभराज से मिलने आया था, उस दिन उसे कुछ सामान दिया था &#8211; संभवतः वह वही सामग्री थी, जिसका प्रयोग शोभराज ने जेलकर्मियों को बेहद करने हेतु किया था।&#8221;</p>
<p>शोभराज को अपनी कोठरी में अपना खाना स्वयं पकाने की सुविधा प्राप्त थी, जिसका उसने अनुचित लाभ उठाया। इस घोषणा के बाद उस दिन उसका जन्मदिन था। उसने जेल में मिठाइयां बनाई और उसमें एक विशेष सामग्री -लारपोज नामक नींद की गोली मिला दी। कहते हैं उसने 820 गोलियों का इस्तेमाल किया था। उसने अपनी 12 अन्य कैदियों को शामिल किया था। ये कैदी वे थे, जो अपने आप जेल से भागने की हिम्मत नहीं कर सकते थे। उसमें से दो कैदी वे थे, जो ड्योढ़ी पर रहकर जेल प्रशासन का काम किया करते थे। वे छोटे मोटे अपराधी थे और उन्होंने बाद में दावा किया था कि उन दोनों को भी शोभराज ने नशीली मिठाइयां खिला दी थी। जब अख़बारों में उसका नाम अख़बारों में प्रकाशित हो गया तो वे इस बात से डर गए कि अब उनकी तलाश की जाएगी। अधिक बिलम्ब होने से पूर्व ही उन दोनों ने जनकपुरी ठाणे में आत्मसमर्पण कर दिया और तिहाड़ में वापस लौट गए। </p>
<p><strong>सुनील गुप्ता के अनुसार: &#8220;लेकिन वास्तविकता यह है कि पुलिस उस घटना को उसके आत्मसमर्पण के रूप में नहीं दिखाना चाहती थी। अपनी प्रतिष्ठा को बनाये रखने की कोशिश में पुलिस ने घोषणा की कि उसने दो लोगों को गिरफ्तार का लिया है। परन्तु वह केवल अपनी छवि बचने की कोशिश के अलावा और कुछ नहीं थी। जैसे ही अन्तर्रष्ट्रीय समाचार जगत में एक अन्य चार्ल्स शोभराज गिरोह के करतब की खबर प्रकाशित की वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ साथ दिल्ली पुलिस के उच्च पदस्थ अधिकारी तिहाड़ की ओर दौड़ पड़े। उपराज्यपाल एच.के.एल. कपूर एवं पुलिस आयुक्त वेद मारवाह ने तिहाड़ का दौड़ा किया और आदेश दिया की वीडी पुष्करणा एवं अन्य कर्मियों को गिरफ्तार करने उनसे पूछताछ की जाय। अखबारों में ऐसी कहानियों की बाढ़ आ गई कि किस प्रकार शोभराज अपने हाथों से  जेल अधिकारियों को खाना खिलाता था, अथवा कि कैसे वह जेल कर्मचारियों की अर्जियां लिखता था और कैसे उसे रिश्वत के शक्ल में मोटी रकम दिया जाता था। </strong></p>
<figure id="attachment_6258" aria-describedby="caption-attachment-6258" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-Tihar.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-Tihar.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-6258" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-Tihar.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-Tihar-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-Tihar-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-Tihar-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-Tihar-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6258" class="wp-caption-text">तिहाड़ जेल के बाहर</figcaption></figure>
<p>विडंबना यह थी कि वास्तविक कहानी कभी बाहर नहीं आई। इसलिए एक और जहाँ पुष्करणा को दण्डित किया गया था, डिप्टी सुपरिन्टेन्डेन्ट आर.टी.एल. डिसूजा को कोई फटकार भी नहीं लगाई गई। उस समय उसके बारे में यह कहानी चल रही थी कि डिसूजा एक वरिष्ठ रक्षा अधिकारी का रिश्तेदार था, जिसने उपराज्यपाल से उसके बचाव के लिए संपर्क किया, क्योंकि उपराज्यपाल स्वयं भी रक्षा सेवा से आये थे। यह भी निर्विवाद सत्य है कि भागने ऐसे पहले चार्ल्स शोभराज का जेल संख्या 1 से जेल संख्या 3 में रहस्यमय तरीके से स्थानांतरित किया गया था। उसे जेल संख्या -1 से क्यों हटाया गया? क्या उसका स्थानांतरण उसके भागने के योजना का एक अंग था? जेल संख्या &#8211; 3 एक नई जेल थी इसलिए उसके कर्मचारी जेल संख्या &#8211; 1 के कर्मचारियों से भांति सुप्रशिक्षित नहीं थे। एक अन्य संयोग यह था कि लगभग उसी समय नशे के कारोबारी डेविड हॉल को मात्र 12000 रुपये की जमानत पर छोड़ दिया गया था। </p>
<p>वरिष्ठ स्तर पर कोई भी जेल अधिकारी नहीं चाहता था कि शोभराज के भागने के मामले में गंभीरता से जांच हो, क्योंकि उन्हें अपनी अकर्मण्यता एवं अयोग्यता उजागर होने का भय था। बहरहाल, सार्वजनिक चीख पुकार को देखते हुए एक अवकाश प्राप्त फ्रंटियर सर्विस ऑफिसर के नेतृत्व में आतंरिक जांच करने का आदेश देना पड़ा। रिपोर्ट में शिवराज यादव, पुष्करणा एवं पांच ने लोगों का नाम शामिल किया गया था और बताया गया कि इन्हीं लोगों ने चार्ल्स शोभराज को लारपोज जैसी  नशीली दवाइयाँ और मिठाइयां लाने की अनुमति दी थी। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि इन्ही लोगों की लापरवाही से जेल कर्मचारियों को शोभराज के षड़यंत्र का शिकार होना पड़ा। सभी पांच आरोपियों को सलाखों के पीछे डाल दिया गया, जो बाद में रिहा हो गए। </p>
<p>भारत में उसे पहली बार 1973 में नई दिल्ली के अशोका होटल स्थित एक जेवरात की दूकान को लूटने के असफल प्रयास के लिए जेल में डाला गया था। इस दौरान वह झूठी बिमारी के बहाने अस्पताल में भर्ती हुआ और वहां से भाग खड़ा हुआ था। दरअसल, लोगों को जहर देकर भागने का शोभराज का तरीका बहुत पुराना था। साल 1971-1972 के दौरान उसे काबुल में होटल कांटिनेंटल का बिल चुकाए बिना भागने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। वहां भी वह बीमार होने के बहाने अस्पताल में दाखिल हुआ और वहां से पहरेदारों को नशा खिलाकर भाग निकला। </p>
<blockquote><p>लेकिन तिहाड़ में उस सारे तमाशे के 23 दिनों बाद चार्ल्स शोभराज तिहाड़ जेल में वापस आ गया। उसे गोआ में गिरफ्तार किया गया था। जेल से फरार होने के बाद वह अपने दोस्त डेविड हॉल के साथ गोआ चला गया था। उसी दौरान अजय सिंह तोमर नामक व्यक्ति को अपने बैग में एक जिन्दा बम और कुछ कारतूस के साथ एक रेलगाड़ी पर सवार होते समय बम्बई मुंबई में गिरफ्तार किया गया। उसके बाद पुलिस उसे लेकर उस होटल में गयी जहाँ एक अन्य भगोड़ा अपराधी देवकुमार ब्रह्मदत्त त्यागी छिपा हुआ था। पूछताछ करने पर दोनों ने पुलिस को बताया की शोभराज और हॉल उससे अलग होकर गोआ चले गए थे। पुलिस शोभराज के पास से एक रिवॉल्वर और हॉल से 12000 अमेरिकन डालर नकद बरामद किए थे। </p></blockquote>
<p>बहरहाल, शोभराज की गिरफ्तारी तिहाड़ जेल के कुछ अधिकारियों के लिए अत्यंत तनावपूर्ण थी। पुलिस ने जब जेल तोड़ षड्यंत्र की तह तक जाने के लिए पूछताछ की तो सभी के साँसे थम गयी थी। क्या शोभराज उन्हें बर्वाद कर देगा? क्या वह पुलिस को उन लोगों का नाम बता देगा जो उसके पे रोल पर थे? वह हर समय अपने घुटनों बांधकर एक गुप्त ध्वनि रिकार्डर (छिपाए रखता था, ताकि वह सुपरिन्टेन्डेन्ट और डिप्टी सुपरिन्टेन्डेन्ट की रिष्वस्त मांगने वाली आवाज को रिकार्ड कर सके। उसे भगाने के बारे में हुई इतनी सारी पूछताछ के बाद क्या वह खुला रहस्य सामने आ पाया? लेकिन उनके लिए चिंता करने की जरुरत नहीं थी, क्योंकि बड़े से बड़े रहस्योद्घाटन के बाद भी वहां कुछ बदलता नहीं था। </p>
<figure id="attachment_6259" aria-describedby="caption-attachment-6259" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-DP.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-DP.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-6259" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-DP.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-DP-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-DP-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-DP-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-DP-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6259" class="wp-caption-text">चार्ल्स शोभराज पुलिस के गिरफ्त में</figcaption></figure>
<p>सुनील गुप्ता कहते हैं: &#8220;अप्रैल 1986 में उसके तिहाड़ लौटने के बाद जब मैं उससे मिला और पूछा की वह क्यों भागा था? उसने बड़े आराम से मुस्कुराते हुए कहा: &#8220;मुझे सनसनी पैदा करना पसंद है।&#8221; ऐसा उसने इसलिए किया कि भारत में उसकी सजा लगभग ख़त्म होने वाली थी और उसके बाद उसे थाईलैंड में प्रत्यर्पित किया जाने वाला था और अनेक लोगों की हत्या करने के अपराध में उसे गोली मारी जाने वाली थी। जेल तोड़ की घटना ने भारतीय प्राधिकारियों को उसे लम्बी अवधि तक जेल में रखने का एक और अवसर प्रदान कर दिता था।&#8221; </p>
<p>इसके विपरीत, पुलिस का मत अलग था। उन्होंने एक अन्य कुख्यात कैदी और शोभराज के सहनिवासी एवं दिल्ली के प्रमुख कारोबारी राजेंद्र सेठिया पर आरोप मढ़ दिया। उस समय अभियोजकों ने आरोप लगाया था कि सेठिया ने शोभराज को भाड़े पर लिया था, ताकि वह बैंक घोटाले के मुख्य गवाह से अपना हिसाब चुकता कर सके, जिसमें वह स्वयं एक अभियुक्त था। वह गवाह कोई स्वामी सत्संगी नामक व्यक्ति था और उसकी हत्या करने के लिए सेठिया शोभराज से सहायता मांगी थी। इसके बदले सेठिया की पत्नी ने साफ़ तौर पर ब्रिटेन के खाते में 99000 अमेरिकी डालर जमा करवाए थे, और पुलिस का दावा था कि शोभराज के जेल से भागने से ठीक पहले वह राशि निकाल ली गयी थी। पुलिस की कहानी को पूर्णतया नकार दिया गया और सेठिया उसे निरस्त कराने के लिए न्यायालय चला गया। </p>
<p><strong>अपने प्रभावशाली मित्रों और पटे पटाये जेल कर्मियों के बावजूद शोभराज उस कठोर सच्चाई से बच नहीं सका जो उसे तिहाड़ में वापस लाये जाने के बाद उसकी प्रतीक्षा कर रही थी। कहीं भी स्वतंत्रतता पूर्वक घूमने के स्थान पर अब उसे जंजीरों में जकड़कर अलग थलग वार्ड में बंद कर दिया गया था। उसे खूंखार आतंकवादियों के लिए बने उच्च सुरक्षा वार्ड में रखा गया था और उसकी सभी गतिविधियों पर चौबीसों घंटे सतर्क निगाह रखे जाने लागिओ थी। किसी सुरक्षा गार्ड को साथ लिए बिना उसे कहीं भी जाने की अनुमति नहीं थी। सभी चतुर कैदियों की तरह चार्ल्स शोभराज ने भी जेल की तपिश, ऊब और एकाकीपन से निजात पाने के लिए एक गुप्त मार्ग खोज लिया। होशियार कैदी बार बार कोर्ट जाते हैं।  कोर्ट में आप बाहरी, अपने परिवार के लोगों से मिल सकते हैं और आपको यहाँ अच्छा खाना मिल सकता है।</strong> </p>
<p>सुनील गुप्ता मुस्कुराते कहते हैं: &#8220;मुझे उसकी बेड़ियों में जकड़े जाने की विचित्र चाल के पीछे की कहानी याद है। हम उसे जंजीरों में जकड कर रखना चाहते थे, परन्तु भारतीय न्याय प्रणाली इस मामले में स्पष्ट इंगित करती है कि ऐसा करने के लिए केवल जेल सुपरिन्टेन्डेन्ट की इच्छा ही पर्याप्त नहीं थी। इसके लिए न्यायालय का वैधानिक निर्देश भी होना चाहिए। यह भी उसकी चाल थी। क्योंकि शारीरिक रूप से घिसटते हुए कैदी को देखना मानवाधिकारों के निकृष्टम उल्लंघनों में से एक माना जाता था। कोई भी जिला जज अपने नाम से ऐसा आदेश पारित करने का इच्छुक नहीं था। तीन महीने गुजर गए तब पी.के. बाहरी एक नए जज जिला एवं सत्र न्यायधीश आये। उन्होंने न केवल उसे जंजीरों में जकड़ने की अनुमति दी।  लेकिन उनका आदेश न केवल दोषपूर्ण था बल्कि उसका यह भी अर्थ था कि शोभराज को अनिश्चित काल तक बेड़ियों में रखा जा सकता है। एक विधि अधिकारी के रूप में मैं यह जानता था कि किसी कैदी को धिकतम तीन महीने तक ही जंजिदों में जकड़कर रखा जा सकता है।&#8221; खैर। </p>
<figure id="attachment_6260" aria-describedby="caption-attachment-6260" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-Nepaal.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-Nepaal.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-6260" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-Nepaal.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-Nepaal-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-Nepaal-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-Nepaal-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Charles-Nepaal-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6260" class="wp-caption-text">चार्ल्स शोभराज नेपाल में</figcaption></figure>
<p>उसे कभी भी किसी को चकित करने की आदत नहीं गयी थी। जब वह तन्हाई वार्ड में था, उसका डबल रोटी के बीच से थोड़ी मात्रा में हशीश पाई गयी थी और वह हमारे अनुमान से बाहर था कि कैसे कोई व्यक्ति इतनी उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र में नशे का सामानंदर पहुँचाने में सफल हो गया था। दो सिपाहियो को निलंबित कर दिया गया और बाद में उन्हें शोभराज को नशे की आपूर्ति करने के आरोप में बर्खास्त कर दिया गया था। आप उस वयक्ति को दण्डित कैसे कर सकते हैं जो पहले से ही जंजीरों और बेड़ियों में जकड़ा हुआ हो ?</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Kiran-bedi.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Kiran-bedi.jpg" alt="" width="2047" height="869" class="aligncenter size-full wp-image-6252" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Kiran-bedi.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Kiran-bedi-300x127.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Kiran-bedi-1024x435.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Kiran-bedi-768x326.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/03/Kiran-bedi-1536x652.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p><strong>अंततोगत्वा, साल 1997 में रिहा होकर भारत से फ़्रांस जाने से पूर्व वह किरण बेदी के तबादले का कारण भी बना। जिस समय (साल 1993) में किरण बेदी को महानिरीक्षा के रूप में तिहाड़ के 8000 से अधिक कैदियों की देखभाल के लिए नियुक्त किया गया था, उस समय जेल तोड़ की घटना को कई वर्ष बीत चुके थे और हथकड़ी-बेड़िया गुजरे ज़माने की बात होकर रह गयी थी। सभी कैदियों के लिए अब कोई न कोई काम करना जरुरी था और इसलिए किरण बेदी ने शोभराज को क़ानूनी सहायता प्रकोष्ठ में भेज दिया, जहाँ उसे एक टाइपराइटर दिया गया था।</strong> </p>
<p>कारागार नियमों के अनुसार, यह जेल प्रभारी को निर्णय करना होता था की किसे टाइपराइटर उपलब्ध कराया जाय। उनके निर्णय में कुछ भी गैर-क़ानूनी नहीं था, परन्तु उस समय दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना किरण बेदी को दण्डित करने के लिए कोई बहाना खोज रहे थे और वह बहाना उन्हें शोभराज के रूप में मिल गया और उन्हें जेल से हटा दिया गया । बहरहाल, 17 फरवरी, 1997 को अपनी 20 वर्षीय जेल की सजा पूरी करने के बाद 53-वर्षीय शोभराज को फ़्रांसिसी अधिकारियों  को सौंप दिया गया। यद्यपि उस समय भी उसके खिलाफ कुछ मामले लंबित थे, परन्तु सरकार ने उसे रिहा करना उचित समझा। लेकिन साल 2003 में नेपाल में पुनः गिरफ्तार किया गया। </p>
<p>क्रमशः &#8230;. </p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/the-end-of-that-road-was-in-the-toilet-when-charles-sobhraj-was-caught">तिहाड़ जेल-5 ✍ उस रास्ते का अंत &#8216;शौचालय&#8217; में था 👣 तभी चार्ल्स शोभराज दिल्ली पुलिस के गिरफ्त में आ गया 👁 फिर जेल से भागने के लिए</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>&#8216;​नरिश&#8217; और &#8216;बैल कोल्हू&#8217; प्लेट फॉर्म के बीच नई दिल्ली स्टेशन पर 18 यात्री कुचल कर अंतिम सांस लिए, दर्जनों घायल, मंत्रालय 10 लाख मुआवजा देगी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 16 Feb 2025 06:47:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[accident]]></category>
		<category><![CDATA[mahakumbh]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>अजमेरी गेट (नई दिल्ली) दो साल पूर्व बीएल एग्रो के प्रबंध निदेशक आशीष खंडेलवाल ने कहा​ था कि उन्होंने नई दिल्ली के अजमेरी गेट के तरफ खुलने वाली प्लेटफार्म 14, 15​ को &#8216;नरिश प्लेटफॉर्म&#8217; और 16 को ​&#8217;बैल कोल्हू प्लेटफॉर्म&#8217; के रूप में &#8220;ब्रांड&#8221; किया है। कल रात 9:26 बजे भगदड़ से इन्हीं प्लेटफॉर्मों के [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>अजमेरी गेट (नई दिल्ली) दो साल पूर्व बीएल एग्रो के प्रबंध निदेशक आशीष खंडेलवाल ने कहा​ था कि उन्होंने नई दिल्ली के अजमेरी गेट के तरफ खुलने वाली प्लेटफार्म 14, 15​  को &#8216;नरिश प्लेटफॉर्म&#8217; और 16 को ​&#8217;बैल कोल्हू प्लेटफॉर्म&#8217; के रूप में &#8220;ब्रांड&#8221; किया है। कल रात  9:26 बजे भगदड़ से इन्हीं प्लेटफॉर्मों के बीच 17 यात्री मृत्यु को प्राप्त किये, इनमें 14 महिलाएं और 3 बच्चे हैं। 25 से ज्यादा लोग घायल हैं। </strong></p>
<blockquote><p>&#8216;नरिश&#8217; और &#8216;बैल कोल्हू&#8217; के बीच अंतिम साँस लेने वाले यात्रियों के परिवारों के प्रति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी वेदना और संवेदना व्यक्त किये। उनकी वेदना और संवेदना व्यक्त करने के साथ मृतकों के प्रति सभी समर्पित हो गए। इतना ही नहीं, मोदी मंत्रिमंडल के रेल मंत्रालय के अभियंता से राजनेता और मंत्री बने अश्विनी वैष्णव दस-दस लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा किये।</p></blockquote>
<p>घायलों में से 9 की हालत गंभीर बताई जा रही है। घायलों को लोक नायक जय प्रकाश नारायण अस्पताल सहित अन्य अस्पतालों में भर्ती किया गया हहै। अस्पताल ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है। हेल्पलाइन नंबर पर फोन कर लोग हादसे में घायल हुए अपने परिजनों की जानकारी ले सकेंगे &#8211; 9873617028 और 011 23501207.</p>
<p>दो वर्ष पूर्व आशीष खंडेलवाल ने कहा था कि वे 14-15  प्लेटफॉर्म को &#8216;नरिश&#8217; और 16 प्लेटफॉर्म को &#8216;बैल कोल्हू&#8217; इसलिए ब्रांड किया क्योंकि यहाँ से रवाना होने वाली ज्यादातर ट्रेनें बिहार और उत्तर प्रदेश के लिए हैं। ये वो दो राज्य हैं जहाँ उनके लक्षित दर्शकों का बड़ा हिस्सा रहता है। उनका कहना था कि यह विचारों का मिलन है। औसतन, प्रत्येक प्लेटफ़ॉर्म प्रतिदिन 13 से 23 ट्रेनों को संभालता है और पूरे स्टेशन पर यात्रियों की संख्या 2 लाख से ज़्यादा है। त्योहारों के मौसम में, यहाँ प्रतिदिन 6 लाख लोग आते हैं। यह हमारे लिए एक असामान्य खिड़की खोलता है जिससे हम अपने लक्षित बाजार में अनदेखे तरीके से गहराई तक पहुंच सकते हैं। कल रात इसी प्लेटफॉर्म से करीब 17 यात्री, जो पूरब किस दिशा की और अग्रसर थे, ईश्वर के पास पहुँच गए। </p>
<p>​साल 2010 में नई दिल्ली के प्लेटफॉर्म नंबर 14 से 16 का निर्माण हुआ था। आधिकारिक रूप से साल 1980 तक यहाँ सात प्लेटफॉर्म थे, जिसकी संख्या 1995 में 10 हुई और फिर आज 16 जहाँ तक़रीबन पांच लाख यात्री नित्य सफर करते हैं। </p>
<p>कल रात का हादसा प्लेटफॉर्म नंबर 13, 14 और 16 के बीच हुआ। महाकुंभ जाने के लिए स्टेशन पर शाम 4 बजे से भीड़ जुटने लगी थी। रात को करीब 8:30 बजे प्रयागराज जाने वाली 3 ट्रेनें लेट हो गईं, जिससे भीड़ बढ़ी और भगदड़ मच गई।​शुरुआत में नॉर्दर्न रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी ने भगदड़ की बात से इनकार किया। उन्होंने कहा कि कोई यह सिर्फ अफवाह है।​ </p>
<p>राष्ट्रपति <strong>द्रौपदी मुर्मू</strong> ने नयी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ की घटना में लोगों की मौत होने पर रविवार को शोक व्यक्त किया और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। मुर्मू ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘नयी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ में लोगों की मौत होने के बारे में जानकर गहरा दुख हुआ। मैं शोक संतप्त परिवारों के प्रति हार्दिक संवेदना व्यक्त करती हूं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करती हूं।’’</p>
<figure id="attachment_6174" aria-describedby="caption-attachment-6174" style="width: 1200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/4.jpeg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/4.jpeg" alt="" width="1200" height="675" class="size-full wp-image-6174" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/4.jpeg 1200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/4-300x169.jpeg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/4-1024x576.jpeg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/4-768x432.jpeg 768w" sizes="auto, (max-width: 1200px) 100vw, 1200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6174" class="wp-caption-text">लोकनायक अस्पताल में घायल और उनके परिजन</figcaption></figure>
<p>कहते हैं कि प्रयागराज स्पेशल ट्रेन, भुवनेश्वर राजधानी और स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस तीनों ही प्रयागराज जाने वाले थीं। दो ट्रेनें भुवनेश्वर राजधानी और स्वतंत्रता सेनानी लेट थीं। इन तीनों ट्रेनों की भीड़ प्लेटफॉर्म-14 पर थी। जब प्रयागराज स्पेशल ट्रेन यहां पहुंची, तभी घोषणा  हुआ कि भुवनेश्वर राजधानी प्लेटफॉर्म नं. 16 पर आ रही है। सुनते ही 14 पर मौजूद भीड़ 16 की तरफ भागी।​ कई लोग टिकट काउंटर पर थे। इनमें 90% प्रयागराज जाने वाले थे। इससे भगदड़ मची।​ वैसे पिछले तो-तीन सप्ताहों से अधिक समय से कुंभ जाने वालों की भीड़ हो रही थी, पर स्टेशन प्रशासन ने कोई नियंत्रण कक्ष नहीं बनाया। </p>
<p>वैसे प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार स्टेशन पर इतनी भीड़ थी कि पैर रखने की जगह नहीं थी। ट्रेन में लोग ठूंसे हुए थे। चुनिंदा पुलिस वाले दिख रहे थे। पुलिस वाले लोगों से बोल रहे थे कि जान बचानी है तो लौट जाइए। </p>
<p>उधर प्रधानमंत्री श्री <strong>नरेन्द्र मोदी</strong> ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ के कारण हुई लोगों की मौत पर शोक व्यक्त किया है। श्री मोदी ने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना भी की।​ एक्स पर एक पोस्ट में, प्रधानमंत्री ने कहा:​ “नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुई भगदड़ से व्यथित हूं। मेरी संवेदनाएं उन सभी लोगों के साथ हैं जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है। मैं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं। अधिकारीगण इस भगदड़ से प्रभावित हुए सभी लोगों की सहायता कर रहे हैं।”​ </p>
<p>दिल्ली के ​उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने रात 11:55 बजे ट्वीट किया​ जहाँ उन्होंने लिखे कि: &#8220;नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ के कारण कई लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए। इस घटना पर मृतकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना है।’​ फिर 12:24 बजे अपने ट्वीट को एडिट करते हुए लिखा- ‘नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी है। इस स्थिति को संभालने के लिए मुख्य सचिव और पुलिस आयुक्त से बात की गई है।’​  एलजी वीके सक्सेना ने मौतों और संवेदना जताने वाली बात हटा दी गई है। हालांकि, पीएम नरेंद्र मोदी ने 12:56 बजे ट्वीट किया- ‘नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुई भगदड़ से दुखी। मेरी संवेदनाएं उन सभी के साथ हैं, जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया है। मैं प्रार्थना करता हूं कि घायल जल्दी ठीक हों।​&#8221; </p>
<p>उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) हिमांशु उपाध्याय ने बताया कि घटना के समय पटना जाने वाली मगध एक्सप्रेस प्लेटफॉर्म नंबर 14 पर खड़ी थी और नई दिल्ली-जम्मू उत्तर संपर्क क्रांति एक्सप्रेस प्लेटफॉर्म नंबर 15 पर खड़ी थी। भगदड़ की वजह बताते हुए उन्होंने कहा, &#8220;कुछ लोग सीढ़ियों से प्लेटफॉर्म नंबर 14 और 15 की ओर फुटओवर ब्रिज से उतर रहे थे, वे फिसल गए और दूसरों पर गिर गए।&#8221; </p>
<p>इस बीच, रेलवे के डीसीपी केपीएस मल्होत्रा ​​ने विस्तार से बताया, &#8220;जब प्रयागराज एक्सप्रेस प्लेटफॉर्म नंबर 14 पर थी, तो वहां काफी लोग मौजूद थे&#8230; स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस और भुवनेश्वर राजधानी लेट थीं और इन ट्रेनों के यात्री भी प्लेटफॉर्म 12, 13 और 14 पर मौजूद थे। हमारी जानकारी के अनुसार, 1,500 जनरल टिकट बेचे गए थे, जिसकी वजह से भीड़ बेकाबू हो गई। प्लेटफॉर्म नंबर 14 और प्लेटफॉर्म नंबर 1 के पास एस्केलेटर के पास भगदड़ जैसी स्थिति थी।&#8221; अग्निशमन अधिकारियों के अनुसार, विभाग को रात करीब 9.55 बजे प्लेटफार्म 14 और 15 पर भगदड़ मचने की सूचना मिली, जिसके बाद चार दमकल गाड़ियों को मौके पर भेजा गया।</p>
<p>ज्ञातव्य हो कि 29 जनवरी को प्रयागराज के महाकुंभ में 30 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं, 10 फरवरी 2013 को कुंभ के दौरान प्रयागराज स्टेशन पर भगदड़ मची थी। हादसे में 36 लोग मारे गए थे।​ बहरहाल, वैष्णव अपने ट्वीट पर लिखते हैं कि &#8220;“The entire team is working to assist all those who have been affected by this tragic incident.​ &#8230;.  Situation under control at New Delhi railway station (NDLS) Delhi Police and RPF reached. Injured taken to hospital. Special trains being run to evacuate sudden rush.​ &#8230;  special trains were used to evacuate this unprecedented sudden rush at New Delhi station. The rush has now reduced.​&#8221;</p>
<p>उधर, हादसे से प्रभावित लोगों के लिए मुआवज़े का एलान हो गया ​है। भारतीय रेलवे की ओर से मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपये, गंभीर रूप से घायलों को ढाई लाख रुपये और मामूली रूप से घायल लोगों को एक लाख रुपये के मुआवज़े का एलान हुआ ​है। </p>
<p>सवाल यह उठता है कि रेलवे और रेलवे पुलिस को यह जानकारी कैसे नहीं हो सकी कि रेलवे स्टेशन पर अत्यधिक भीड़ हो चुकी है। लापरवाही का आलम यह भी रहा कि जो लोग इस घटना में घायल हुए थे, उनको अस्पताल पहुंचने में भी काफी देरी हुई, क्योंकि रेलवे स्टेशन पर केवल एक ही एंबुलेंस उपलब्ध थी जबकि इस माहौल में वहां पर एंबुलेंस की संख्या नहीं बढ़ाई गई।</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/nation/18-killed-new-delhi-stampede">&#8216;​नरिश&#8217; और &#8216;बैल कोल्हू&#8217; प्लेट फॉर्म के बीच नई दिल्ली स्टेशन पर 18 यात्री कुचल कर अंतिम सांस लिए, दर्जनों घायल, मंत्रालय 10 लाख मुआवजा देगी</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>मिथिला के लोग &#8216;पिछलग्गू&#8217; भी रहते हैं और &#8216;अलग राज्य भी मांगते&#8217; हैं, काश !! दिनकर वाला &#8216;हुंकार&#8217; गंगा-कोसी-बागमती-कमला-बलान-बूढ़ी गंडक-महानंदा पार से उठता</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/the-people-of-mithila-remain-followers-and-demand-a-separate-state</link>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 22 Dec 2024 13:30:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
		<category><![CDATA[amit shah]]></category>
		<category><![CDATA[begusarai]]></category>
		<category><![CDATA[chattisganh]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सिमरिया (बेगूसराय) : अस्सी के दशक में बेगूसराय के लोगों का ‘अपना’, बुजुर्ग और विधवाओं का ‘बेटा’, ‘शोषितों का &#8216;न्यायकर्ता’ कामदेव सिंह का शरीर पार्थिव हो गया था। छल्ली-छल्ली हो गया था जीवित शरीर पार्थिव होने और गंगा में समाहित होने से पहले। कहते हैं होशियारपुर के सांसद, तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की चहेते [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>सिमरिया (बेगूसराय) : अस्सी के दशक में बेगूसराय के लोगों का ‘अपना’, बुजुर्ग और विधवाओं का ‘बेटा’, ‘शोषितों का &#8216;न्यायकर्ता’ कामदेव सिंह का शरीर पार्थिव हो गया था। छल्ली-छल्ली हो गया था जीवित शरीर पार्थिव होने और गंगा में समाहित होने से पहले। कहते हैं होशियारपुर के सांसद, तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की चहेते और भारत के तत्कालीन गृहमंत्री बूटा सिंह के तथाकथित &#8216;निर्देश&#8217; पर पटना सचिवालय में हलचल मचा था। सातवें और आठवें विधान सभा का कालखंड था और मुख़्यमंत्रीद्वय रामसुंदर दास &#8211; जगन्नाथ मिश्र &#8211; दिल्ली के आलाकमान द्वारा एक चक्रव्यूह रचा गया था जिसके केंद्र में कामदेव सिंह थे और चतुर्दिक केंद्रीय रिज़र्व पुलिस और बेगुसराय पुलिस की गोली। </strong></p>
<p>जिस दिन यह ह्रदय विदारक घटना हुई थी बेगूसराय के सिमरिया के श्री ननुआ काका यानी राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर बहुत याद आये थे। गंगा तट के लोग चाहे वे किसी भी जाति थे, किसी भी वर्ग के थे, किसी भी संप्रदाय के थे, किसी भी राजनीतिक पार्टी &#8211; कांग्रेस, सोसलिस्ट, कम्युनिस्ट, शोषित, जनता, जनक्रांति, भूमिगत &#8211; से अपना संबंध रखते थे, श्री ननुआ काका को बहुत याद कर रहे थे। सत्ता और सत्ता वाला अधिकार, चाहे वह बन्दुक की नली से ही क्यों न निकलती हो, आवाम को लहू-लहुआन क्यों न करती हो, झूठी आशा और विश्वास का बाँध क्यों न बांधती हो &#8211; श्री ननुआ काका उन खेलों और खिलाड़ियों को भलीभांति जानते थे, पहचानते थे। कामदेव सिंह भले तत्कालीन शासन, प्रशासन, नेता, राजनीतिक अभिनेता के लिए &#8216;कानून-व्यवस्था&#8217; का &#8216;विषय&#8217; बन गए हों और उन्हें &#8216;राजनीति की वेदी&#8217; पर &#8216;वली&#8217; चढ़ना पड़ा हो, हकीकत तो यही था कि वे अपने क्षेत्र के लोगों के लिए &#8216;मसीहा&#8217; थे, &#8216;दुःखहर्ता&#8217; थे, जैसे श्री ननुआ काका शब्दों के कुरुक्षेत्र के नायक थे। </p>
<p>अस्सी के दशक के कुछ वर्ष पूर्व मटिहानी गाँव में एक नरसंहार हुआ था। करीब 17 अल्प आयु के पुरुषों को मौत के घाट उतारा दिया गया था। यह अलग बात थी कि मटिहानी हत्याकांड में कामदेव सिंह को मुख्य अभियुक्त करार किया गया था, लेकिन उस कालखंड में जब गंगा नदी के तराई क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति को याद करता हूँ तो बेगूसराय से निकलता राष्ट्रीय राजमार्ग 31 किसी महिला के मांग जैसा लगता था। मार्ग के दोनों तरफ जितनी दूर तक नजर जा पाती थी, अरहर दाल के हरे-हरे पौधे या फिर हरी-हरी, लाल-लाल मिर्ची की खेती दिखती थी। लगता था गंगा क्षेत्र के श्रमिकों, किसानों ने अपने लिए लाल और हरे रंग का गलीचा बिछा रहा है &#8211; अपने श्रम के सम्मान में। </p>
<p>भारत ही नहीं, विश्व के बाजार में बेगूसराय का अरहर दाल और मिर्ची विख्यात ही नहीं, कुख्यात भी थी। अरहर दाल जितनी जल्दी पकती थी, मिर्च का तीखापन उतना ही जानलेवा होता था। स्थानीय किसानों का, भू-स्वामियों का एक बहुत बड़ा जरिया था आर्थिक रूप से मजबूत होने का वह अरहर दाल और लाल-हरी मिर्ची। उधर, उन्हीं मिट्टी के एक किनारे बसा सिमरिया से दिनकर की कविताओं का तेज भी हुंकार मारता था। वैसे उस कालखंड तक दिनकर का सूर्यास्त हो गया था, लेकिन नए युग के नए कवि गंगा तट पर शब्दों का नाव चलाना शुरू कर दिए थे। दिनकर का शरीर हृदयगति अवरुद्ध होने के कारण पार्थिव हुए महज छः वर्ष बीते थे, जबकि बेगूसराय का मसीहा कामदेव सिंह पुलिस की गोली से ढ़ेर हुआ था। दिनकर अपने गाँव से हज़ारों मिल दूर दक्षिण भारत में प्राण त्यागे थे, जबकि कामदेव सिंह अपनी भूमि की मिट्टी और पानी में अंतिम सांस लिए थे। </p>
<p>कहते हैं बेगूसराय जिले में स्थित सिमरिया गांव में 23 सितंबर 1908 को बाबू रवि सिंह और श्रीमती मनरूप देवी के घर में जन्म लिया श्री ननुआ काका जो बाद में भारत के साहित्यिक ब्रह्माण्ड पर रामधारी सिंह &#8216;दिनकर&#8217; के नाम से विख्यात हुए, भारतीय राजनीतिक गलियारे में स्वहित में लोगों ने उनकी लेखनी और कविताओं का भरपूर विपरण किया, लेकिन उनके शरीर को पार्थिव होने के पांच दशक बाद भी वह कुछ नहीं हो पाया जिसके लिए उन्होंने लिखा था: </p>
<p>सदियों की ठण्डी-बुझी राख सुगबुगा उठी, मिट्टी सोने का ताज पहन इठलाती है;<br />
दो राह, समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो, सिंहासन खाली करो कि जनता आती है ।</p>
<p>आज़ादी के महज़ तीन वर्ष बाद सन 1950 में &#8216;सिंहासन खाली करो की जनता आती है,&#8217; ​जिस वर्ष इस कविता की रचना किये थे दिनकर जी मैं नौ वर्ष बाद सन 1959 में जन्म लिया था। प्रारब्ध देखिये जब सात-आठ वर्ष का हुआ, मेरा शरीर पटना के मछुआटोली स्थित दिनकर भवन के छांव में आ गया। जिस गली के नुक्कड़ पर दिनकर भवन आज भी स्थित है, उसी गली के की अगली छोड़ से पूर्व दाहिने हाथ अपने जीवन का बुनियादी समय के साथ-साथ पत्रकारिता-जीवन की शुरुआत और पटना से प्रवास तक बिताया। वह गली आज भी मानस पटल पर उद्धृत है। खैर। </p>
<p>​पचास के दशक में देश में सामंतवादी मानसिकता भारत के समाज को जकड़े हुए था। शायद दिनकर इस कविता के शब्दों का चयन करते समय, शब्दों का वाक्य में विन्यास करते समय यह सोचे होंगे कि आज़ादी के बाद देश के ​जनता को न केवल सत्ता में भागीदारी मिलेगा, बल्कि उनकी दरिद्री भी ख़त्म हो जाएगी, उन्हें देश के आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक, बौद्धिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक विकास में भागीदारी भी मिलेगा । लेकिन &#8216;जनता&#8217; तो उस दिन भी मिट्टी की मूरत थी, आज तो है ही। तभी तो उन्होंने लिखा उस कविता में :  </p>
<p><strong>जनता ? हाँ, मिट्टी की अबोध मूरतें वही, जाड़े-पाले की कसक सदा सहने वाली,<br />
जब अँग-अँग में लगे साँप हो चूस रहे, तब भी न कभी मुँह खोल दर्द कहने वाली । </strong></p>
<p>गलत नहीं थे दिनकर। कुरुक्षेत्र, रश्मिरथी, उर्वशी, हुंकार, संस्कृति के चार अध्याय, परशुराम की प्रतीक्षा, हाहाकार रचनाएं दिनकर के नाम के साथ युग-युगांतर तक जीवित रहेगा। कहते हैं कि कोई 22-वर्ष की आयु में जब देश में महात्मा गांधी की अगुआई में सविनय अवज्ञा आंदोलन प्रारम्भ हुआ था, बेगूसराय का ​श्री नेनुआ​ काका कलम के साथ आंदोलन में कूद ​पड़े और देखते-ही देखते अंग्रेजी शासन के ​विरुद्ध विद्रोह और ओजस्वी शब्दों तथा स्वरों के साथ कविताओं की रचना करने लगे। हिंदी साहित्य के ब्रह्माण्ड पर बेगूसराय का श्री ननुआ काका यानी रामधारी सिंह &#8216;दिनकर बनकर उदयमान होने ​लगे। इसे प्रारब्ध ही कहेंगे कि पटना के दिनकर भवन के सामने गली की नुक्कड़ पर &#8216;उदयलाचल&#8217; छापाखाना भी था, फिर श्री छविनाथ पण्डे का घर। उधर दिनकर भवन के आगे पटना विश्वविद्यालय के तत्कालीन हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. रामखेलावन राय का आवास और उनके सामने श्री तारा नन्द झा का मकान, जहाँ मैं सांस लेता था। </p>
<p>आज़ाद भारत में पहली बार आम चुनाव होने जा रहा था और दिनकर की कवितायेँ भारत के आम लोगों को ​ढूंढ रहा था।​ तबकी बात कुछ और थी, आज तो &#8216;आम आदमी&#8217; का दल बन गया है दिल्ली में, भले दिल्ली सल्तनत में आम आदमी आज भी राजनेताओं, अधिकारियों के तलवे तले रौंदे जाएँ। दिनकर ने लिखा भी:</p>
<p><strong>जनता? हाँ, लम्बी-बडी जीभ की वही कसम,&#8221;जनता,सचमुच ही,बडी वेदना सहती है।&#8221;<br />
&#8220;सो ठीक, मगर, आखिर, इस पर जनमत क्या है ?&#8221; &#8216;है प्रश्न गूढ़ जनता इस पर क्या कहती है ?&#8221;</strong></p>
<p>​बहरहाल, पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को दिनकर की रचनाएँ काफी पसंद थी। दिनकर की रचनाओं में, शब्दों में &#8216;हुंकार&#8217; तो था ही, &#8216;आकर्षण&#8217; भी था तभी तो दिनकर और नेहरू दोनों एक दूसरे के पास आये। नेहरू उन्हें राजनीति में ले आये और सन 1952 में रामधारी सिंह दिनकर को राज्यसभा सांसद के रूप में विराजमान हुए। दिनकर और दरभंगा के महाराजाधिराज डॉ. कामेश्वर सिंह दोनों एक ही कालखंड में राज्यसभा के सदस्य बने। आज की राजनीतिक व्यवस्था में चाहे नेहरू की कितनी भी आलोचना की जाय, दिनकर की रचनाओं और शब्दों के प्रति नेहरू की सहनशीलता उत्कर्ष पर थी। तभी तो दिनकर सत्ता में रहने के बाद भी अपने लाखों-लाख शब्दों का इस कदर विन्यास किये जो प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से नेहरू की सत्ता का छिलका निकलता था। </p>
<p><strong>मानो,जनता ही फूल जिसे अहसास नहीं, जब चाहो तभी उतार सजा लो दोनों में;<br />
अथवा कोई दूधमुँही जिसे बहलाने के, जन्तर-मन्तर सीमित हों चार खिलौनों में ।</strong></p>
<p>यह भी कहा जाता है कि एक बार दिल्ली में हो रहे एक कवि सम्मेलन में पंडित नेहरू भी आए और कार्यक्रम की ओर पढ़ रहे थे तभी उनके पैर लड़खड़ा गए। दिनकर उनके साथ चल रहे थे। अपने मित्रवत प्रधानमंत्री को लड़खड़ाते देखे उन्होंने उन्हें संभाले। दिनकर को जैसे ही नेहरू ने धन्यवाद दिए, दिनकर का जवाब हाज़िर था: &#8220;जब जब सत्ता लड़खड़ाती है तो साहित्य ही उसे संभालता है।&#8221; </p>
<p>भारतीय इतिहास और संस्कृति पर दिनकर द्वारा रचित पुस्तक &#8220;संस्कृति के चार अध्याय की प्रस्तावना खुद पंडित नेहरू ने लिखी थी। जिसमें उन्होंने लिखा था: &#8220;मेरे मित्र और साथी दिनकर ने जो विषय चुना है, वह बहुत ही मोहक और दिलचस्प है। यह ऐसा विषय है जिससे अक्सर मेरा मन भी ओत-प्रोत रहा है और मैंने जो कुछ भी लिखा है, उस पर इस विषय की छाप अपने आप पड़ गई है। साहित्य की लगभग सभी विधाओं में उनकी लेखनी खूब चली। उनकी कविताओं में ओज, आक्रोश, विद्रोह, क्रान्ति ही नहीं, कोमल शृंगारिक भावनाओं का भी खूबसूरत संयोजन दिखता है।&#8221; उर्वशी रचना में दिनकर का यह रूप दिखता है। वैसे नेहरू की पुत्री इंदिरा गांधी भी दिनकर की कलम की शिकार बनी। लेकिन इसी कालखंड में दिनकर की सांसे भी रुक गयी। </p>
<figure id="attachment_5964" aria-describedby="caption-attachment-5964" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/JOP-Raghu-Rai.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/JOP-Raghu-Rai.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-5964" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/JOP-Raghu-Rai.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/JOP-Raghu-Rai-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/JOP-Raghu-Rai-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/JOP-Raghu-Rai-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/JOP-Raghu-Rai-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5964" class="wp-caption-text">जय प्रकाश नारायण</figcaption></figure>
<p><strong>समय बीत रहा था। दिनकर जी का जीवित शरीर भी पार्थिव हो गया था। 24 अप्रैल, 1974 को सिमरिया में उदय हुए दिनकर का तत्कालिक मद्रास में सूर्यास्त हो गया था। उधर देश में तथाकथित रूप से आज़ादी की दूसरी लड़ाई का शंखनाद हो रहा था। दिल्ली के रामलीला मैदान में लाखों की संख्या में उपस्थित नागरिकों और मंच पर बैठे मदन लाल खुराना तथा प्रकाश सिंह बादल और अन्य नेताओं के सामने जयप्रकाश नारायण सम्पूर्ण क्रांति का बिगुल फूंकते दिनकर की कविता का पाठ भी किया &#8220;सिंहासन खली करो की जनता आ रही है,&#8221; लेकिन कविता के उन सभी शब्दों को समयाभाव के कारण नहीं पढ़ा गया जो जनता का वास्तविक चित्रण करता था। दिनकर की कविता और उनके शब्दों का बाज़ारीकरण राजनीतिक बाजार में शुरू हो गया। और उधर तत्कालीन राजनेताओं के साथ साथ जनता और भारत के &#8216;तेज-तर्राक&#8217; मतदाता भी नई सरकार, नए मंत्री, नए अधिकारी, नए काम-धंधे, नए ठेकेदारी और पैसा कमाने के वे सभी रास्तों का सृजन करने लगे तो उनके लिए तो थे, दिनकर की जनता के लिए नहीं था &#8211; क्योंकि उसे तो वेदना सहने की आदत थी, और है।</strong> </p>
<p>जय प्रकाश नारायण &#8216;लोक नायक&#8217; नहीं बने थे उन दिनों तक। जयप्रकाश की निगाह में इंदिरा गांधी की सरकार भ्रष्ट होती जा रही थी। सन 1975 में निचली अदालत में इंदिरा गांधी पर चुनाव में भ्रष्टाचार का आरोप साबित हो गया। जेपी का कहना था इंदिरा सरकार को गिरना ही होगा। जिस कदर दरभंगा के महाराजा डॉ. कामेश्वर सिंह के पार्थिव शरीर को उनके परिवार वालों ने आनन्-फानन में अग्नि को सुपुर्द किया था, तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने आनन-फानन में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर दी। लड़ाई जारी रही। कुकुरमुत्तों की तरह नए-नए नेता जन्म लिए। जैसे-जैसे नेताओं की संख्या सरकारी कार्यालयों में, विधान सभाओं में, लोक सभा, राज्य सभा में बढ़ती गयी, दिनकर की जनता सड़क पर आती गयी। खैर। </p>
<p>विगत 50 वर्षों में देश का क्या हश्र हुआ, भ्रष्टाचार कितना कम हुआ, देश की जनता और आम मतदाता सत्ता के कितने करीब आया, सत्ता में उसकी कितनी भागीदारी मिली, सम्पूर्ण क्रांति से लेकर वर्तमान क्रांति तक कितना बेहतर राजनीतिक व्यवस्था का निर्माण हो पाया,  राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, बौद्धिक, शैक्षणिक और अध्यात्मिक क्रांति कितनी आ पायी, महिलाओं को अपना अधिकार कितना मिल पाया, यह तो आज नहीं पचास साल बाद मेरे जैसा कोई मुर्ख पत्रकार फिर लिखेगा &#8211; लेकिन वास्तविक हकीकत यह है कि भारत के करीब साढ़े छः लाख गाँव से लेकर, 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के विधान सभाओं और दिल्ली के संसद तक &#8211; किस कदर के जनता के प्रतिनिधि विराजमान हुए, यह तो देश की जनता भी जानती है, जनता ही जानती है। लेकिन सिंहासन पर बैठे लोग यह नहीं जानते कि दिनकर ने आगे भी लिखा था:</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Indira-1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Indira-1.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-5965" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Indira-1.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Indira-1-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Indira-1-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Indira-1-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Indira-1-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p><strong>लेकिन होता भूडोल, बवण्डर उठते हैं, जनता जब कोपाकुल हो भृकुटि चढाती है;<br />
दो राह, समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो, सिंहासन खाली करो कि जनता आती है ।</strong></p>
<p>दिनकर की बात इसलिए यहाँ कर रहा हूँ क्योंकि दिनकर का सिमरिया &#8211; बेगूसराय जिला &#8211; भी प्रस्तावित मिथिला राज्य के 24 जिलों में से एक हैं। इधर दिल्ली के रायसीना हिल के अंतिम छोड़ पर इस बात की चर्चा सुनी जा रही है कि &#8220;अगर मिथिला राज्य के निर्माण के लिए बिहार को दो टुकड़े में किया जाता है तो प्रदेश की राजधानी दरभंगा-मधुबनी न बनाकर दिनकर की नगरी बेगूसराय को प्राथमिकता में रखा जाए। मिथिला क्षेत्र को गंगा नदी द्वारा उत्तर और दक्षिण मिथिला में विभाजित किया गया है और मैथिली भाषा भाषी जिले गंगा नदी के दक्षिण और उत्तर दोनों तरफ पड़ते हैं। अंतरराष्ट्रीय मैथिली परिषद् के अध्यक्ष डॉ. धनाकर ठाकुर कहते भी हैं कि &#8220;अब समय आ गया है कि बिहार को नई राजधानी नहीं, बल्कि इसका विभाजन कर छोटे-छोटे राज्यों में &#8211; मिथिला, मगह, भोजपुर &#8211; बांटा जाय।&#8221; </p>
<p><strong>डॉ. ठाकुर का कहना है कि: &#8220;हमरा बिहार स किछु लेबाक नहि। मिथिला राज्य यदि मांगल नक्शा अनुसार भेटल त भागलपुर मुजफ्फरपुर या ओकर बीच राजधानी बरौनी आसपास। यावतसर राजधानी के विकास नहि होइत अति पटना में हेदराबाद, चंडीगढ़ जकां राजधानी रहय।हमर पाई पर पटना , पीएमसीएच बनल अछि, आधा गांधी मैदान, राजेंद्र नगर टर्मिनल हमर। हमरा मिथिला लेल अलग बजटस मतलब अछि जे विकास हो, राजधानी पटना हो या देवघर मतलब नहि। मिथिलाके उपराजधानी के जरुरत नहि हेतैक। सबस बेशी मोकदमा राज्य बनक पांच साल पहिले जतस हाइकोर्ट गेल होयत ओत मिथिला हाइकोर्ट (ओना मांग पूर्णिया, दरभंगासं छैक)! ई हमर व्यक्तिगत मत अछि।&#8221;</strong></p>
<p>डॉ. ठाकुर आगे कहते हैं: &#8220;भावनात्मक मुद्दा तात्कालिक लाभ लेल, यथार्थ एकहि जे बिहार टूटत यूपी संग,कोनहूं हालमे 20स कम संसदीय क्षेत्र पर नहि मानब भनहि ओ मालदा जोडि मेंटर, तखन पूर्णियाक राजधानी दावा बनत। दोसर राज्य पुनर्गठन आयोग बैसक चाही। सब राज्य मे हेर-फेर के जरूरत। जेना जम्मू-कश्मीर हिमाचल प्रदेश उत्तराखंड के मिला एक राज्य। कोनहूं राज्य मे हिंदू मुस्लिम एकता लेल आबादी 4:1स कम नहि। हमरा सन लोक लेल भारत प्रमुख अछि,कोनहूं राज्य एकरहि सुरक्षा लेल। मिथिला हम ओहि दृष्टिकोणसं देखैत छी जतय संस्कृत आओर मैथिली दूनू पल्लवित पुष्पित होयत। ई एकमात्र आंदोलन जे राजनीतिक नहि सांस्कृतिक अछि,जे नेता नहि कार्यकर्ता चला रहल अछि। जाहि प्रमंडल के जनकक मिथिलामे जायसं विरोध ओ जरासंधक मगधमे रहथि, मिथिला त बनबे करत कारण ई चीनसं सुरक्षा लेल सेहो आवश्यक।&#8221;</p>
<figure id="attachment_5932" aria-describedby="caption-attachment-5932" style="width: 954px" class="wp-caption alignleft"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/Dhanakar.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/Dhanakar.jpg" alt="" width="954" height="1065" class="size-full wp-image-5932" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/Dhanakar.jpg 954w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/Dhanakar-269x300.jpg 269w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/Dhanakar-917x1024.jpg 917w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/Dhanakar-768x857.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 954px) 100vw, 954px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5932" class="wp-caption-text">डॉ. धनाकर ठाकुर</figcaption></figure>
<p>वैसे यदि देखा जाय तो मिथिला क्षेत्र का शोषण और दोहन श्रीकृष्ण सिन्हा के कालखंड से ही प्रारम्भ हुआ था। करीब 17 वर्ष 51 दिन मुख्यमंत्री कार्यालय में बैठने वाले श्रीकृष्ण सिन्हा कभी भी मिथिला के विकास की ओर ध्यान नहीं दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि “उस ज़माने से ही राजनेता, खासकर कांग्रेस पार्टी के लोग, दिल्ली को हमेशा यह कहते रहे कि आप चाहे मिथिला क्षेत्र को कुछ दें अथवा नहीं, वे कांग्रेस के पीछे-पीछे ही रहेंगे। यानि चुनाव के समय उनका मत कांग्रेस पार्टी के पक्ष में भी रहेगा। ऐसा हुआ भी। फरक्का बराज का उदहारण देते वे कहते हैं कि इस बराज का निर्माण बिहार में होना था, लेकिन इसे बंगाल भेज दिया गया। प्रथम आम चुनाव से लेकर आज तक मिथिला क्षेत्र में विकास का दर शून्य रहा। आज भले बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ का नारा देश में गन रहा हो राजनीतिक लाभ के लिए, आज हालात यह है कि मिथिला में कोई माता-पिता (अपवाद छोड़कर) अपनी बेटी का नाम “सीता” नहीं रहते। जिस देवी के नाम से मिथिला है, जिसकी पूजा-अर्चना होती है, उसी मिथिला में आज लोग अपनी बेटी का नाम ‘सीता’ नहीं रखते। सीता को बहुत दर्द सहना पड़ा था। </p>
<p><strong>बिहार में वर्तमान में चौबीस मैथिली भाषी जिले हैं। वे हैं: अररिया, बांका, बेगुसराय, भागलपुर, दरभंगा, पूर्वी चंपारण, जमुई, कठिहार, खगड़िया, किशनगंज, लखीसराय, मधेपुरा, मधुबनी, मोंगहियर, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया, सहारासा, समस्तीपुर, शेखपुरा, शिवहर, सीतामढी, सुपौल, वैशाली, पश्चिमी चंपारण। वर्तमान में झारखंड में प्रस्तावित मिथिला राज्य के छह मैथिली भाषी जिले हैं। वे हैं: देवघर, दुमका, गोड्डा, जामताड़ा, पकौर और साहेबगंज। झारखंड में शामिल मिथिला जिले शेष झारखंड से कोई सांस्कृतिक समानता नहीं रखते हैं। हालाँकि, बिहार के जिले मिथिला जिलों से अधिक प्रभावित हैं। प्रस्तावित मिथिला राज्य के तीस जिलों के लोग मैथिली बोलते हैं, जो मौखिक और लिखित दोनों परंपराओं में समृद्ध भाषा है। 1950 के दशक में प्रथम राज्य पुनर्गठन समिति के समय, मैथिली को भारत सरकार की मान्यता प्राप्त भाषाओं की अनुसूची में नहीं रखा गया था। तब से, इसे अनुसूची में पुनः शामिल करने के लिए जोरदार प्रयास किया गया है। 2003 में यह प्रयास सफल रहा और मैथिली को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में मान्यता दी गई और एक बार फिर इसे एक प्रमुख भारतीय भाषा के रूप में उचित दर्जा दिया गया।”</strong></p>
<p>2001 की भारतीय जनगणना में मिथिला की आबादी का केवल एक हिस्सा ही गिना गया था, 12,179,122 मैथिली भाषी लोगों की पहचान की गई, जिससे मैथिली भारत में तेरहवीं सबसे लोकप्रिय बोली जाने वाली भाषा बन गई । भारतीय संघ के 28 राज्यों में से 25 की स्थापना भाषा के आधार पर की गई थी। तीन नए राज्यों की स्थापना आर्थिक पिछड़ेपन और संस्कृति के आधार पर की गई थी। भाषा, संस्कृति और आर्थिक आवश्यकता तीनों मानदंडों के आधार पर मिथिला राज्य के लिए एक मजबूत तर्क दिया जा सकता है। एक मिथिला राज्य एक क्षेत्र को गहरे भाषाई और सांस्कृतिक संबंधों के साथ एक साथ बांधेगा, और साथ ही उन लोगों में गर्व वापस लाएगा जो वर्तमान सरकारों के तहत कई वर्षों से वंचित हैं। मिथिला के अतीत के प्रतीक जैसे अशोक स्तंभ जिससे हमारा राष्ट्रीय प्रतीक बना है और यह तथ्य कि यह क्षेत्र माता सीता का घर था, एक बार फिर नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनेंगे। जनसंख्या और क्षेत्र 2001 की भारतीय जनगणना के अनुसार पहचाने गए मिथिला क्षेत्र की जनसंख्या 5,68,12,422 है, जिसमें से 5,12,20,017 मैथिल बिहार में रहते हैं और 55,92,405 मैथिल वर्तमान में झारखंड में रहते हैं। प्रस्तावित मिथिला क्षेत्र का कुल क्षेत्रफल 66,049 वर्ग किमी है, जिसमें से 54,232 वर्ग किमी बिहार में और 11,817 वर्ग किमी झारखंड में स्थित है।</p>
<figure id="attachment_5966" aria-describedby="caption-attachment-5966" style="width: 2560px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/DSC_2486-fotor-20241222185338-scaled.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/DSC_2486-fotor-20241222185338-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1709" class="size-full wp-image-5966" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/DSC_2486-fotor-20241222185338-scaled.jpg 2560w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/DSC_2486-fotor-20241222185338-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/DSC_2486-fotor-20241222185338-1024x683.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/DSC_2486-fotor-20241222185338-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/DSC_2486-fotor-20241222185338-1536x1025.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/DSC_2486-fotor-20241222185338-2048x1367.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5966" class="wp-caption-text">रायसीना हिल</figcaption></figure>
<p>चलिए रायसीना हिल चलते हैं भारत के राष्ट्राध्यक्ष के भवन में। रायसीना हिल पर इस बात की भी चर्चा है कि यदि मिथिला राज्य का निर्माण होता है तो वर्तमान में जनता दल (यूनाइटेड) और लोक जनतांत्रिक पार्टी राष्ट्रीय राजनीतिक दल बन सकती है। वजह का उल्लेख करते रायसीना हिल के जानकारों का कहना है कि राष्ट्रीय राजनीतिक दल होने के लिए  किसी दल को 4 राज्यों में क्षेत्रीय दल का दर्जा मिलना आवश्यक है। एक राजनीतिक पार्टी अगर तीन अलग-अलग राज्यों को मिलाकर लोकसभा की 2 फीसदी सीटें जीतती है या कम से कम 11 सीटें जीते। यहां यह जरूरी होता है कि ये 11 सीटें किसी एक राज्य से न होकर 3 अलग-अलग राज्यों से होनी चाहिए। ऐसी स्थिति में राष्ट्रीय दल का दर्जा मिल सकता है।यदि कोई पार्टी चार लोकसभा सीटों के अलावा लोकसभा या विधानसभा चुनाव में चार राज्यों में 6 प्रतिशत वोट हासिल करती है तो उसे राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिल सकता है। इस दृष्टि से जनता दल या लोक जनतांत्रिक पार्टी राष्ट्रीय दाल होने वाला सभी शर्ते पूरा करता हैं। </p>
<p>बहरहाल, पिछले पांच दिसंबर को अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली परिषद्, आदर्श मिथिला पार्टी द्वारा दूसरी महिला राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू को एक पत्र लिखा गया है जिसमें मिथिला राज्य के निर्माण के साथ-साथ 37 अन्य विषयों पर मांग की गयी है।पत्र में लिखा गया है कि मिथिला, विदेह का एक प्राचीन राज्य है, जो मुख्यतः बिहार में है और आंशिक रूप से फैला हुआ है झारखंड और पश्चिम बंगाल राज्य। हमारा मिथिला/तिरहुत 1774 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया द्वारा पटना के अधीन कर लिया गया था उस समय के भारतीय शासकों के विरोध के बावजूद कंपनी। ये था 1800 ई. में बादशाह शाह आलम द्वितीय द्वारा विरोध किया गया। हमारा मिथिला/तिरहुत था पुनः बंगाल प्रेसीडेंसी के अधीन कर लिया गया और बिहार के अधीन रखा गया 1912 से उड़ीसा जिससे उड़ीसा और झारखण्ड अब अलग राज्य हैं लेकिन मिथिला को अलग राज्य नहीं बनाया गया। </p>
<p><strong>लोग बाग़ यह कह रहे हैं कि &#8220;मिथिला एक विरासत राज्य के रूप में अपनी पहचान खो रहा है। हालांकि मिथिला राज्य एक विरासत के रूप में अपना गौरव फिर से हासिल करने की क्षमता रखता है। मिथिला राज्य में सांस्कृतिक राजधानी के रूप में अपना गौरव पुनः प्राप्त करने की क्षमता होगी, पत्र में यह कहा गया है कि &#8220;मिथिला राज्य बनाने के लिए भारत के संसद में कानून लाया जाए। उक्त कानून के तहत वर्तमान बिहार से तिरहुत, दरभंगा, कोशी, पूर्णिया, भागलपुर और मुंगेर कमीश्नरियों को मिथिला राज्य में रखा जाए । इसके अलावे झारखण्ड से संथाल परगना का कमिश्नरी जो भागलपुर कमिश्नरी का हिस्सा था, साथ ही, सर जॉर्ज ग्रियर्सन के भाषाई सर्वे के अनुसार अनुसार (1902-28) मैथिली भाषी क्षेत्र, पूर्णिया जिला का वह हिस्सा जो 1950 में छीनकर पश्चिम बंगाल का उत्तरी क्षेत्र प्रस्तावित मिथिला राज्य को वापस दिया जाए। इतना ही नहीं, नेपाली भाषा और मैथिली भाषा के बीच घनिष्ठ और मधुर सम्बन्ध मुद्दत से रहा है, अतः तत्कालीन अंग्रेजी हुकूमत के द्वारा गलती से नेपाल को दिए गए नौ जिलों को मिथिला राज्य में रखा जाए  इससे गोरखालैंड की समस्या भी शांत हो जायेगा।&#8221;</strong> </p>
<p>मिथिला राज्य आज भले ही विशाल होने के कारण एक गरीब राज्य लगता है, लेकिन जल संसाधन और मानव संसाधन होने के कारण यह बहुत जल्द विकसित और आत्मनिर्भर हो सकता है । मिथिला राज्य भारत का शैक्षणिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक नगर हो सकता है । पत्र में यह भी लिखा गया है कि मिथिला राज्य से घुसपैठ को कम करने में भी मदद मिलेगी। बांग्लादेश और चीन के खिलाफ एक मजबूत बफर राज्य भी होगा। वर्तमान और पिछली सरकार इस दिशा में पूर्णतः विफल रही है। चूँकि हम मैथिल राष्ट्रीय और अतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपने विकासशील मानव संसाधन के कारण (लगभग सात करोड़ की आवादी है) अपने देश के लिए योगदान दे रहे हैं, अतः 24-राज्यों को मिलकर मिथिला राज्य का निर्माण किया जा सकता है। मिथिला को एक राज्य बनाने से बिहार के शेष हिस्सों को भी मदद मिलेगी क्योंकि मौजूदा स्थिति से कम जिलों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलेगी संसाधनों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा और विकास तेज होगा। अब हम आपसे अनुरोध करते हैं कि आप तुरंत सात करोड़ मैथिल लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए कदम उठायें सुधार किया जा सकता है।&#8221;</p>
<p>मिथिला के बारे में महामहिमोपाध्यायों ने लिखा है कि 1326 में जब फिरोजशाह तुगलक ने मिथिला पर भीषण आक्रमण किया तो राज्य पंडित कामेश्वर ठाकुर को सौंपकर महाराजा हरिसिंह देव पंडित चंदेश्वर ठाकुर के साथ नेपाल भाग गए, जहां उनके वंशजों ने कई शताब्दियों तक शासन किया। इतिहासकार डॉ. उपेंद्र ठाकुर के अनुसार हरिसिंह देव के भागने के बाद 27 वर्षों तक मिथिला में अराजकता का माहौल रहा। बाद में 1353 में फिरोज शाह तुगलक ने खुद पंडित कामेश्वर ठाकुर को राजा नियुक्त किया। जब कामेश्वर ठाकुर फिरोज शाह को कर वसूलने और चुकाने में असमर्थ हो गए तो उन्हें मजबूरन उन्हें गद्दी से उतारना पड़ा और अपने वीर पुत्र भोगीश्वर ठाकुर को मित्र बनाकर उन्हें राज्य दे दिया। वे ओइनी गांव (मुजफ्फरपुर) के थे, इसलिए उन्हें ओइनवार राजा कहा जाता था और इस तरह 1326/1353 से ब्राह्मणों ने मिथिला पर शासन करना शुरू कर दिया।</p>
<figure id="attachment_5862" aria-describedby="caption-attachment-5862" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/3.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/3.jpg" alt="" width="2200" height="1144" class="size-full wp-image-5862" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/3.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/3-300x156.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/3-1024x532.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/3-768x399.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/3-1536x799.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/3-2048x1065.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5862" class="wp-caption-text">दरभंगा में प्रधानमंत्री को देखने आते लोग</figcaption></figure>
<p>कुछ समय बाद भोगीश्वर ठाकुर के छोटे भाई भवेश ठाकुर षड्यंत्र में फंस गए और उन्होंने राज्य में अपना हिस्सा मांगने के लिए विद्रोह शुरू कर दिया। पंडितों ने मध्यस्थता की और भवेश ठाकुर (भावसिंह) सुगौना (राजनगर) राज्य के स्वामी बन गए लेकिन वे इससे संतुष्ट नहीं हुए और षड्यंत्र जारी रखा। भोगीश्वर ठाकुर की मृत्यु के बाद उनके पुत्र गणेश्वर सिंह राजा बने लेकिन एक मुस्लिम सामंत असलान ने षडयंत्रपूर्वक 1361 ई. में उन्हें खंजर से मार डाला। वह उनके दो पुत्रों वीर सिंह और कीर्ति सिंह को भी मारना चाहता था लेकिन वे सुरक्षित रूप से कहीं छिपे हुए थे। कुछ समय बाद दोनों राजकुमार गुप्त रूप से जौनपुर चले गए और बादशाह तुगलक से गुहार लगाई, जिसने उनके साथ सेना की एक टुकड़ी भेजी, उनकी मदद से दोनों राजकुमारों ने असलान के साथ युद्ध किया। असलान और वीर सिंह दोनों युद्ध में मारे गए। कीर्ति सिंह राजा बने। वे अधिक समय तक शासन नहीं कर सके। तीनों भाई निःसंतान थे, इसलिए कीर्ति सिंह की मृत्यु के बाद दादा भाव सिंह के भाई संयुक्त मिथिला के राजा बने और भोगीश्वर वंश का अंत हो गया। भावसिंह के बाद उनके सबसे बड़े पुत्र देवसिंह राजा बने जिन्होंने अपनी नई राजधानी देवकुली (देकुली धाम) बनाई और उनके कार्यकाल में कई मंदिर और तालाब बनाए गए।</p>
<p>उनकी मृत्यु के बाद उनके सबसे बड़े बेटे शिव सिंह राजा बने, जिनके मित्र महाकवि विद्यापति थे, जिन्हें खेलन कवि कहा जाता था। शिव सिंह ने गजरथगढ़ को अपनी नई राजधानी बनाया। वह इतने प्रभावशाली राजा थे कि स्वतंत्र राज्य घोषित करने के बाद उन्होंने सम्राट को कर देना बंद कर दिया। 1412 ई. में उन्होंने विद्यापति को बिस्फी दानपत्र के रूप में दे दिया और उन्हें जमींदार का सम्मान दिया। यह सब जानकर बादशाह इब्राहीम शाह तुगलक क्रोधित हो गया और 1416 में उसने एक शक्तिशाली सेना के साथ मिथिला पर हमला कर दिया। मिथिला के लोगों ने वीरतापूर्वक युद्ध लड़ा। भयंकर युद्ध हुआ- दोनों पक्षों को बहुत नुकसान हुआ। </p>
<p>मिथिला के लिए यह दुर्भाग्यपूर्ण था कि महाराजा शिव सिंह मारे गए और उनके शव को भी दुश्मनों ने कहीं छिपा दिया। लोगों ने सोचा कि महाराजा शिव सिंह हिमालय में कहीं भाग गए हैं और इसलिए लखिमा रानी ने द्रोणवार राजा पुरादित्य (गढ़ बनैली) के यहाँ 12 साल तक रहकर प्रतीक्षा की और सम्राट को कर का भुगतान किया जाता रहा। समय पूरा होने पर वह महाराजा की जलती हुई चिता पर सती हो गई। महाराजा शिव सिंह निःसंतान थे और इसलिए उनकी मृत्यु के बाद उनके छोटे भाई पद्म सिंह 1428 में करदाता राजा (करद राजा) बने लेकिन वे भी ज़्यादा दिन जीवित नहीं रह सके। 1431 में उनकी मृत्यु के बाद उनकी रानी बिश्वास देवी ने राजगद्दी संभाली। वह रानी भी निःसंतान थी और इसलिए उनकी मृत्यु के बाद शिव सिंह के छोटे भाई (शिव सिंह के दादा के भाई) हरि सिंह गद्दी पर बैठे और उनकी मृत्यु के बाद हरि सिंह राजा बने और उनकी मृत्यु के बाद नर सिंह राजा बने जिनकी मृत्यु 1461 में हुई।</p>
<p>महाकवि विद्यापति ने अपने लंबे जीवन (1350-1450) में मिथिला के दस राजा और रानियों (भोगीश्वर ठक्कुर से हरि सिंह तक) को देखा। राजा नरसिंह की मृत्यु से एक वर्ष पूर्व सन् 1460 में उनके पुत्र धीर सिंह ने राज्य की बागडोर संभाली थी। धीर सिंह की मृत्यु के पश्चात उनके छोटे भाई भैरव सिंह राजा बने। वे प्रजा के बीच बहुत लोकप्रिय राजा थे। उनके कार्यकाल में साहित्य के विकास के साथ-साथ मिथिला का समग्र विकास हुआ, जिसमें अनेक तालाब, कुएँ, मंदिर, सड़कें आदि बनवाई गईं। लगभग 35 वर्षों तक शासन करने के पश्चात सन् 1515 में उनकी मृत्यु हो गई। फिर उनके बेटे रामभद्र सिंह देव राजा बने। अपने आकर्षक व्यक्तित्व के कारण उन्हें महाराजा शिव सिंह के नाम से रूपनारायण कहा जाता था। उनके समय में मिथिला बंगाल की सीमा से लेकर उत्तर प्रदेश तक फैला हुआ था। दुर्भाग्य से उनके बेटे लक्ष्मीनाथ सिंह देव उनके जैसे वीर नहीं थे, जो उनकी मृत्यु के बाद राजा बने और ओइनवार वंश के अंतिम राजा थे।</p>
<p>1526 ई. के बाद &#8211; कबीले के आपसी ईर्ष्या और सिकंदर लोधी के मिथिला पर आक्रमण के कारण 1526 में लक्ष्मीनाथ की हत्या कर दी गई। विजय के बाद सिकंदर लोधी ने अपने दामाद अलाउद्दीन को इस क्षेत्र का शासक बना दिया। उस समय तक दिल्ली में मुगल साम्राज्य भी स्थापित हो चुका था। अब 50 वर्षों तक मिथिला में मुस्लिम शासन और शोषण चलता रहा जिसके कारण वहाँ अराजकता और जंगल राज कायम हो गया। उस समय बड़ी संख्या में मैथिलों को मुसलमान बना दिया गया। कई महत्वपूर्ण पुस्तकें जला दी गईं। विद्यापति के दीह बिस्फी को हिंदूविहीन कर दिया गया और उनके वंशज सौराठ चले गए। डर के कारण मिथिला के कई विद्वान और साहित्यकार पुस्तकों के साथ नेपाल, बंगाल, यूपी, एमपी, राजस्थान, गुजरात और असम भाग गए या काशीवास के लिए चले गए। </p>
<figure id="attachment_5672" aria-describedby="caption-attachment-5672" style="width: 2048px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/292766564_10224736816980863_3364127479289744199_n.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/292766564_10224736816980863_3364127479289744199_n.jpg" alt="" width="2048" height="1536" class="size-full wp-image-5672" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/292766564_10224736816980863_3364127479289744199_n.jpg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/292766564_10224736816980863_3364127479289744199_n-300x225.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/292766564_10224736816980863_3364127479289744199_n-1024x768.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/292766564_10224736816980863_3364127479289744199_n-768x576.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/292766564_10224736816980863_3364127479289744199_n-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2048px) 100vw, 2048px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5672" class="wp-caption-text">बिहार का एक बाढ़ प्रभावित गाँव। तस्वीर अजय कुमार कोशी बिहार</figcaption></figure>
<p>जब अकबर 50 साल बाद दिल्ली की गद्दी पर बैठा तो उसने मिथिला में शांति स्थापित करने की कोशिश की। वह इस नतीजे पर पहुंचा कि मैथिल ब्राह्मण को राजा बनाने से ही मिथिला में शांति स्थापित हो सकती है और लगान वसूला जा सकता है। इसलिए उसने गढ़ मंगला (मध्य प्रदेश) से राजपंडित चंद्रपति ठाकुर (श्रौतिया) को दिल्ली बुलाया और उनसे एक पुत्र मांगा। चंद्रपति ठाकुर ने अपने मझले बेटे पंडित महेश ठाकुर को मिथिला का शासक बनाने के लिए कहा। बादशाह अकबर ने पंडित महेश ठाकुर को मिथिला का शासक घोषित कर दिया। </p>
<p>सन् 1499 ई. में रामनवमी के दिन अर्थात् 1577 ई. में पं. महेश ठक्कुर मिथिला के राजा बने। लेकिन कई वर्षों तक मिथिला में व्याप्त अराजकता के कारण वे लगान वसूलने और दिल्ली भेजने में असमर्थ रहे, जिससे क्रोधित होकर अकबर ने उनका राज्य छीन लिया। तब पंडित महेश ठाकुर के प्रिय शिष्य और प्रतिभाशाली विद्वान पंडित रघुनंदन दिल्ली गए और सम्राट को संतुष्ट कर उन्हें पुनः राज्य लौटा दिया। पं. महेश ठाकुर मूलतः खरौरे भौर वंश के थे, इसलिए उस वंश को &#8216;खंडवाला कुल&#8217; कहा गया तथा राजधानी सरिसब-पाही और राजग्राम के उत्तर-पश्चिम में बनाई गई। महेश ठाकुर की मृत्यु के बाद उनके सबसे बड़े बेटे गोपाल ठाकुर राजा बने। वे अल्पायु थे, इसलिए उनके छोटे भाई परमानंद ठाकुर राजा बने। जब उनकी भी मृत्यु हो गई, तो महेश ठाकुर के पांचवें बेटे शुभंकर ठाकुर राजा बने, जिनकी मृत्यु 1617 ई. में हुई। फिर उनके बेटे पुरुषोत्तम ठाकुर राजा बने, लेकिन 1623 में उन्हें एक साजिश में मार दिया गया। फिर उनके सौतेले भाई नारायण ठाकुर राजा बने, जिनकी मृत्यु 1645 में हुई और फिर उनके बेटे सुंदर ठाकुर राजा बने। उनकी मृत्यु के बाद महिनाथ ठाकुर राजा बने, तब तक औरंगजेब बादशाह बन चुका था।</p>
<p>महिनाथ ठाकुर के बाद उनके बेटे नरपति ठाकुर राजा बने जिन्होंने अपनी राजधानी राजग्राम से दरभंगा स्थानांतरित की और वहां एक किला बनवाया, जिसे आज भी रामबाग पैलेस कहा जाता है। जब नरपति बूढ़े हो गए तो वे काशी चले गए और राज्य अपने जैसे वीर पुत्र राघव सिंह को सौंप दिया। राघव सिंह एक महान योद्धा और कुशल प्रशासक थे। उन्होंने कई युद्ध जीतकर मिथिला के गौरव में चार चांद लगा दिए। 1739 में उनकी मृत्यु के बाद उनके सबसे बड़े बेटे विष्णु सिंह राजा बने जो केवल चार साल ही शासन कर पाए क्योंकि मकवानपुर (नेपाल) के जमींदार ने उन्हें जनकपुरधाम बुलाकर धोखे से मार डाला था। ऐसे में उनके छोटे भाई नरेंद्र सिंह को दरभंगा का राजा बनाया गया। नरेंद्र सिंह को योद्धा युवराज भी कहा जाता था और उन्होंने जल्द ही अपने बड़े भाई की हत्या का बदला ले लिया। 1760 में उनकी मृत्यु के बाद उनके चचेरे भाई प्रताप सिंह को राजा बनाया गया, जिनकी मृत्यु के बाद माधव सिंह राजा बने, तब तक अंग्रेजों ने भारत में अपने पैर जमा लिए थे।</p>
<p>अंग्रेजों को मिथिला में कोई भी शक्तिशाली शासक पसंद नहीं था, इसलिए उन्होंने कई जगहों पर कई विद्वान/छोटे राजा बनाए। मिथिला के लोग इतने भोले थे कि वे उस षड्यंत्र को समझ नहीं पाए। पूर्वी मिथिला को अलग प्रशासन दिया गया। दरभंगा के महाराज माधव सिंह की मृत्यु 1807 में हुई। उसके बाद उनके पुत्र छत्र सिंह राजा बने, जिनकी मृत्यु के बाद रुद्र सिंह राजा बने और उनकी मृत्यु के बाद महेश्वर सिंह गद्दी पर बैठे। महेश्वर सिंह की मृत्यु 1860 ई. में हो गई। उस समय तक उनके पुत्र लक्ष्मीश्वर सिंह नाबालिग थे, इसलिए ब्रिटिश सरकार ने दरभंगा राज को &#8216;कोर्ट ऑफ वार्ड्स&#8217; के अधीन कर दिया। ब्रिटिश षडयंत्र का शिकार होकर पश्चिमी मिथिला ने मातृभाषा मैथिली के स्थान पर उर्दू-फारसी और अंग्रेजी को अपनी अदालती और प्रशासनिक भाषा के रूप में अपना लिया। जब लक्ष्मीश्वर सिंह 21 वर्ष के हुए तो लिखित दावे के आधार पर उनकी संपत्ति उन्हें वापस कर दी गई, लेकिन 1912 में बंगाल के विभाजन के बाद मिथिला एक राज्य नहीं बन सका और बिहार के अधीन रह गया &#8211; यहीं से मिथिला का दुर्भाग्य शुरू होता है। महाराजा लक्ष्मीश्वर सिंह की मृत्यु के बाद रामेश्वर सिंह महाराजा बने और उनकी मृत्यु के बाद कामेश्वर सिंह अंतिम महाराजा बने। 1947 में भारत की स्वतंत्रता के साथ ही उनका शासन भी समाप्त हो गया।</p>
<p><strong>अब सवाल यह है कि मिथिला से अधिक सांस्कृतिक विरासत तो देश के किसी भी राज्य में नहीं है, फिर ऐसी कौन सी बात है जो मिथिला को अलग राज्य होने से रोक रहा है ? वैसे यह निर्विवाद सत्य है कि मिथिला में मैथिल भाषा भाषी स्वयं एक-दूसरे का दुश्मन हैं। एक-दूसरे का टांग खींचने में तनिक भी कोताही नहीं करते। नेताओं का पिछलग्गू बनना आधी श्रेयस्कर समझते हैं, भले नेता अनपढ़ हो, लालची हो, अपराधी हो, जनता का भक्षक हो। अलग राज्य बनाने में, चाहे झारखण्ड हो या तेलंगाना, छत्तीसगढ़ हो या उत्तराखंड, वहां के लोगों ने एक बद्ध, एक सूत्र होकर जिस कदर पिछले दशकों में अपने विरासत और अस्तित्व की रक्षा के लिए लड़ाई लड़े &#8211; मिथिला के लोग कोसों दूर हैं। सोच से परे हैं तभी तो दिनकर भी लिख चुके हैं</strong> </p>
<blockquote><p>&#8220;समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याध,<br />
जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनका भी अपराध।&#8221;</p></blockquote>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/the-people-of-mithila-remain-followers-and-demand-a-separate-state">मिथिला के लोग &#8216;पिछलग्गू&#8217; भी रहते हैं और &#8216;अलग राज्य भी मांगते&#8217; हैं, काश !! दिनकर वाला &#8216;हुंकार&#8217; गंगा-कोसी-बागमती-कमला-बलान-बूढ़ी गंडक-महानंदा पार से उठता</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>​&#8217;एक देश-एक चुनाव&#8217; प्रक्रिया &#8216;बिहार&#8217; से &#8216;टूटा&#8217; था, 60 वर्ष आते-आते बिहार से ही फिर &#8216;प्रारम्भ&#8217; होगा, लेकिन प्रदेश और देश का नेतृत्व बदल जायेगा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 14 Dec 2024 12:17:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
		<category><![CDATA[bihar]]></category>
		<category><![CDATA[Election Commission]]></category>
		<category><![CDATA[new delhi]]></category>
		<category><![CDATA[one nation - one election]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>रायसीना हिल (नई दिल्ली) : एक देश-एक चुनाव सम्बन्धी विधेयक को 240 कुर्सियों की अगुवाई वाली भारतीय जनता पार्टी की नरेंद्र मोदी सरकार मंत्रिमंडल विगत दिनों अपनी स्वीकृति दे दी। इस स्वीकृति के साथ नए और पुराने संसद भवनों के गलियारे में नेताओं का एकत्रीकरण प्रारम्भ हो गया है। अलग-अलग पार्टी के अलग-अलग नेता इस [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>रायसीना हिल (नई दिल्ली) : एक देश-एक चुनाव सम्बन्धी विधेयक को 240 कुर्सियों की अगुवाई वाली भारतीय जनता पार्टी की नरेंद्र मोदी सरकार मंत्रिमंडल विगत दिनों अपनी स्वीकृति दे दी। इस स्वीकृति के साथ नए और पुराने संसद भवनों के गलियारे में नेताओं का एकत्रीकरण प्रारम्भ हो गया है। अलग-अलग पार्टी के अलग-अलग नेता इस संवेदनशील मुद्दे पर अलग-अलग खम्भे का सहारा लेकर चर्चाएं कर रहे हैं, कह रहे हैं प्रक्रिया प्रारम्भ होने के पूर्व सम्मानित मोदी जी अपने स्थान पर अन्य भरोसे वाले नेता को बैठाएंगे और उधर नीतीश कुमार का भी विदाई समारोह ​आयोजन हो गया रहेगा।​।​</strong></p>
<p>राजनीतिक विशेषज्ञ इस बात की भी पुष्टि कर रहे हैं कि इस मामले पर संयुक्त संसदीय समिति का गठन किया जा सकता है, जिससे देश के विभिन्न राजनीतिक दलों का विचार लिया जा सके। इस बीच नए संसद भवन के एक कोने में खड़े बिहार के एक पुराने सांसद मुस्कुराकर कहते हैं कि &#8220;एक राष्ट्र-एक चुनाव&#8217; की पद्धति बिहार और दिल्ली के कारण 55 वर्ष पूर्व टूटा था और 60 वर्ष होते-होते पुनः अपने पुराने स्वरुप में वापस आ ​जायेगा। लेकिन उस समय बिहार में ​नीतीश कुमार मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे और दिल्ली में तो ​नए प्रधानमंत्री होंगे ही।&#8221;​ </p>
<p><strong>​अख़बारों के पन्नों पर बिना अपना नाम ​उद्धृत कराये बिहार के सांसद ने आर्यावर्तइण्डियननेशन।कॉम को कहते हैं: &#8220;आपका यह दोनों अखबार उस दिन प्रथम पृष्ठ पर आठ कॉलम में समाचार प्रकाशित किया था जब चौथे विधानसभा काल खंड में बिहार में 482 दिनों की सरकार में चार मुख्यमंत्री आये और गए। ​इसी कालखंड में &#8216;आया राम-गया राम&#8217; वाला राजनीतिक लोकोक्ति गांधीमैदान में चर्चाएं आम हुआ था। इस कालखंड में सबसे पहले महामाया प्रसाद सिन्हा मुख्यमंत्री बने। सिन्हा साहेब जन क्रांति पार्टी के नेता थे और वे 329 दिन मुख्यमंत्री कार्यालय में रहे। इसके बाद शोषित दल के श्री सतीश प्रसाद सिंह चार दिन के लिए मुख्यमंत्री बने। पांचवे दिन आ गए शोषित दल के ही श्री बीपी मंडल​, जो पचास दिनों तक मुख्यमंत्री कार्यालय में विराजमान रहे।​&#8221;</strong></p>
<p>​सांसद महोदय आगे कहते हैं: &#8220;प्रदेश में राजनीतिक उठापटक सुबह-दोपहर-शाम हो रहा था। इसी उठापटक में लोकतान्त्रिक कांग्रेस के श्री भोला पासवान शास्त्री मुख्यमंत्री कार्यालय में चौथे विधानसभा कालखंड के चौथे मुख्यमंत्री के रूप में विराजमान हुए। ​भोला पासवान शास्त्री शतक नहीं लगा सके और 99 वे दिन दरवाजे की ओर उन्मुख हो गए उनकी सरकार को अल्पमत में आने के कारण। भोला पासवान शास्त्री के बाद बिहार में राष्ट्रपति शासन 29 जून, 1968 से 26 फरबरी, 1969 तक 242 दिनों तक रहा और फिर विधानसभा को भंग कर दिया गया। वहीं दिल्ली में इंदिरा गांधी 11 महीने पहले संसद ​भंग कर लोकसभा चुनाव की घोषणा कर दी। परिणाम यह हुआ कि 1970 के बाद एक देश-एक चुनाव का तार टूट गया। आगामी 2029 में होने वाले लोक सभा चुनाव के कोई आठ महीने बाद 2030 में बिहार विधानसभा का चुनाव होगा। लेकिन उस दिन इंदिराजी 11 महीने पहले आम चुनाव की घोषणा की थी, आने वाले दिनों में 11 महीने पहले बिहार विधानसभा भंग होगा और विधान सभा के साथ-साथ लोकसभा का चुनाव एक साथ संपन्न होगा।​ लेकिन उस समय सम्मानित मोदी जी अपने स्थान पर अन्य भरोसे वाले नेता को बैठाएंगे और उधर नीतीश कुमार का भी विदाई समारोह आयोजित जो गया रहेगा।&#8221;​ </p>
<figure id="attachment_5952" aria-describedby="caption-attachment-5952" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/H20230330129310.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/H20230330129310.jpg" alt="" width="2200" height="1263" class="size-full wp-image-5952" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/H20230330129310.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/H20230330129310-300x172.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/H20230330129310-1024x588.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/H20230330129310-768x441.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/H20230330129310-1536x882.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/H20230330129310-2048x1176.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5952" class="wp-caption-text">​नए संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी</figcaption></figure>
<p>वर्ष 1951-52 से वर्ष 1967 तक लोक सभा और राज्य विधान सभाओं के निर्वाचन अधिकांशतः साथ-साथ कराए गए थे और इसके पश्चात् यह चक्र टूट गया और अब, निर्वाचन लगभग प्रत्येक वर्ष और एक वर्ष के भीतर विभिन्न समय पर भी आयोजित किए जाते हैं, जिसका परिणाम सरकार और अन्य हितधारकों द्वारा बहुत अधिक व्यय, ऐसे निर्वाचनों में लगाए गए सुरक्षा बलों और अन्य निर्वाचन अधिकारियों की उनकी महत्वपूर्ण रूप से लंबी कालावधि के लिए अपने मूल कर्तव्यों से भिन्न अन्यत्र तैनाती, आदर्श आचार संहिता, आदि के लंबी अवधि तक लागू रहने के कारण, विकास कार्य में दीर्घ अवधियों के लिए व्यवधान के रूप में होता ​है। भारत के विधि आयोग ने निर्वाचन विधियों में सुधार पर अपनी 170 वीं रिपोर्ट में यह संप्रेक्षण किया है कि : &#8220;प्रत्येक वर्ष और बिना उपयुक्त समय के निर्वाचनों के चक्र का अंत किया जाना चाहिए। हमें उस पूर्व स्थिति का फिर से अवलोकन करना चाहिए जहां लोक सभा और सभी विधान सभाओं के लिए निर्वाचन साथ-साथ किए जाते हैं। </p>
<p>यह सत्य है कि हम सभी स्थितियों या संभाव्यताओं के विषय में कल्पना नहीं कर सकते हैं या उनके लिए उपबंध नहीं कर सकते हैं, चाहे अनुच्छेद 356 के प्रयोग के कारण (जो उच्चतम न्यायालय के एस. आर. बोम्मई बनाम भारत संघ के विनिश्चय के पश्चात् सारवान् रूप से कम हुआ है) या किसी अन्य कारण से उत्पन्न हो सकेंगी, किसी विधान सभा के लिए पृथक निर्वाचन आयोजित करना एक अपवाद होना चाहिए न कि नियम नियम यह होना चाहिए कि &#8216;लोक सभा और सभी विधान सभाओं के लिए पांच वर्ष में एक बार में एक निर्वाचन&#8217; ।​ कार्मिक, लोक शिकायत, विधि और न्याय विभाग से संबंधित संसदीय स्थायी समिति ने &#8216;लोक सभा और राज्य विधान सभाओं के लिए साथ-साथ निर्वाचन आयोजित करने की साध्यता पर दिसम्बर 2015 में प्रस्तुत अपनी 79वीं रिपोर्ट में भी इस मामले की जांच की है और दो चरणों में साथ-साथ निर्वाचन आयोजित करने की एक वैकल्पिक और व्यवहार्य विधि की सिफारिश की ​है।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/1.jpg" alt="" width="625" height="416" class="alignleft size-full wp-image-5953" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/1.jpg 625w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/1-300x200.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 625px) 100vw, 625px" /></a></p>
<p><strong>​यदि एक देश-एक चुनाव विधेयक कानून बन जाता है तो देश की 543 लोकसभा सीट और सभी राज्यों की कुल 4130 विधानसभा सीटों पर एक साथ चुनाव कराने की राह खुल ​जाएगी ।  पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में गठित कमेटी की रिपोर्ट के बाद प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दी है। वर्तमान में, राज्य विधानसभाओं और लोकसभा के चुनाव अलग-अलग आयोजित किए जाते हैं। इससे उत्पन्न होने वाली समस्याओं के कारण, चुनाव आयोग ने एक प्रणाली के गठन का सुझाव दिया ताकि राज्य विधानसभा और लोकसभा के चुनाव एक साथ हो सकें।​ एक साथ चुनाव कराने का विचार 2016 में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा फिर से पेश किया गया था। तब से सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने एक साथ चुनाव कराने के लिए एक मजबूत तर्क दिया है। 2017 में नीति आयोग द्वारा एक साथ चुनाव पर वर्किंग पेपर तैयार किया गया था। यहां तक कि कानून आयोग भी 2018 में एक वर्किंग पेपर लेकर आया था और कहा था कि एक साथ चुनाव कराने की संभावना के लिए कम से कम पांच संवैधानिक बदलावों की आवश्यकता होगी। यह कहा जाता है कि एक साथ चुनाव सम्पन्न कराने पर चुनाव माध में खर्च होने वाली राशि में न्यूनतम 30 फीसदी की कमी होगी।</strong></p>
<p>​वैसे राष्ट्रीय राजधानी में भ्रमण-सम्मेलन करने वाले लोगों का मानना है कि नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भाजपा 2014 के चुनाव में 282 अंक प्राप्त करती है। उस कालखंड में चुनावी मैदान में न तो अटल बिहारी वाजपेयी थे, न लालकृष्ण आडवाणी थे और न अन्य भाजपा के अधिष्ठाता। उस चुनाव में जो भी अंक आये थे वह नरेंद्र मोदी के नाम पर आया था। 2019 के चुनाव में वह अंक 303 तक चढ़ा। लोगों का मानना है कि जिस कदर 282 से अंक 303 चढ़े, भाजपा के नेताओं के तेवर भी चढ़ने लगे, जो अप्रत्यक्ष रूप से मतदाताओं के हितों के विपरीत था। परिणाम यह हुआ कि 2024 के चुनाव में भाजपा सांसदों की संख्या 240 पर लुढ़क गयी। भाजपा की संख्या का कम होना और विपक्ष की संख्या का बढ़ना, राजनीतिक दृष्टिकोण से सत्तारूढ़ पार्टी, खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और कार्य शैली पर ​प्रश्नचिन्ह लगा दिया। सत्ता के गलियारे में इस बात की चर्चाएं हैं कि प्रधानमंत्री इस ‘धब्बा’ को मिटाना चाहते हैं और अब तक के लोकसभा के चुनाव में 404 की संख्या से ऊपर चढ़ा जाय। </p>
<p>​संसद के गलियारे में राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि इससे पूर्व संविधान में संसोधन करना होगा और इसके लिए दो &#8211; तिहाई बहुमत होना आवश्यक है। राष्ट्रीय राजधानी में भ्रमणकारी मतदाताओं का मानना है कि अगले वर्ष, यानी 2025 में सिर्फ दिल्ली और बिहार में विधानसभा का चुनाव होना है। जबकि 2026 में चार राज्यों – असम, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और केरल में विधानसभा का चुनाव निश्चित है। उसके अगले साल, यानी 2027 में भारत के राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति के अलावे सात राज्यों – गोवा, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और गुजरात में विधानसभा चुनाव होना निश्चित है। वैसी स्थिति में इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अधिक दिनों तक ‘अन्य राजनीतिक पार्टियों की सहयोग से केंद्र में सरकार नहीं चलना पसंद करेंगे। उनकी नज़रों में संख्या का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है, खासकर जब अपने दूसरे कालखंड में ही उन्होंने अपने बलबूते पर ऐतिहासिक संख्या को प्राप्त किया था। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/2.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/2.jpg" alt="" width="625" height="416" class="alignright size-full wp-image-5954" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/2.jpg 625w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/2-300x200.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 625px) 100vw, 625px" /></a></p>
<p><strong>​ज्ञातव्य है कई 14 मार्च 2024 को भारत के पूर्व राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में गठित एक साथ चुनाव संबंधी उच्च स्तरीय समिति ने भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की और अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। 18,626 पृष्ठों वाली यह रिपोर्ट हितधारकों, विशेषज्ञों के साथ व्यापक विचार-विमर्श और 2 सितंबर, 2023 को इसके गठन के बाद से 191 दिनों के शोध कार्य का परिणाम है।​ समिति के अन्य सदस्य थे श्री अमित शाह, केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री, श्री गुलाम नबी आज़ाद, राज्यसभा में विपक्ष के पूर्व नेता, श्री एन.के. सिंह, 15वें वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष, डॉ. सुभाष सी. कश्यप, पूर्व महासचिव, लोकसभा, श्री हरीश साल्वे, वरिष्ठ अधिवक्ता, और श्री संजय कोठारी, पूर्व मुख्य सतर्कता आयुक्त। श्री अर्जुन राम मेघवाल, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कानून और न्याय मंत्रालय विशेष आमंत्रित सदस्य थे और डॉ. नितेन चंद्र एच.एल.सी. के सचिव थे।​ समिति ने विभिन्न हितधारकों के विचारों को समझने के लिए व्यापक विचार-विमर्श किया। 47 राजनीतिक दलों ने अपने विचार और सुझाव प्रस्तुत किए, जिनमें से 32 ने एक साथ चुनाव कराने का समर्थन किया। कई राजनीतिक दलों ने इस मामले पर एचएलसी के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया।</strong> </p>
<p>सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के समाचार पत्रों में प्रकाशित एक सार्वजनिक नोटिस के जवाब में, पूरे भारत के नागरिकों से 21,558 प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुईं। 80 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने एक साथ चुनाव कराने का समर्थन किया। भारत के चार पूर्व मुख्य न्यायाधीश और प्रमुख उच्च न्यायालयों के बारह पूर्व मुख्य न्यायाधीश, भारत के चार पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त, आठ राज्य चुनाव आयुक्त और भारतीय विधि आयोग के अध्यक्ष जैसे कानून के विशेषज्ञों को समिति द्वारा व्यक्तिगत रूप से बातचीत के लिए आमंत्रित किया गया था। भारत के चुनाव आयोग के विचार भी मांगे गए।</p>
<p>बहरहाल, सभी सुझावों और दृष्टिकोणों पर सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद, समिति एक साथ चुनाव कराने के लिए दो-चरणीय दृष्टिकोण की सिफारिश करती है। पहले चरण के रूप में, लोक सभा और राज्य विधानसभाओं के लिए एक साथ चुनाव कराए जाएंगे। दूसरे चरण में, नगर पालिकाओं और पंचायतों के चुनाव लोक सभा और राज्य विधानसभाओं के साथ इस तरह से समन्वयित किए जाएंगे कि नगर पालिकाओं और पंचायतों के चुनाव लोक सभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव के सौ दिनों के भीतर हो जाएं।​ समिति ने यह भी सिफारिश की है कि सरकार के तीनों स्तरों के चुनावों में उपयोग के लिए एक ही मतदाता सूची और मतदाता फोटो पहचान पत्र (ईपीआईसी) होना चाहिए।​ एक साथ चुनाव कराने के लिए मिलने वाला भारी समर्थन विकास प्रक्रिया और सामाजिक सामंजस्य को बढ़ावा देगा, हमारे लोकतांत्रिक ढांचे की नींव को मजबूत करेगा और भारत की आकांक्षाओं को साकार करेगा।</p>
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		<title>IAS के नाम पर लूट और शिक्षा माफियाओं पर अंकुश शीघ्र ✍ UPSC परीक्षा के लिए आवेदन के समय अभ्यर्थियों कहीं बताना न पड़े कि क्या वे किसी निजी कोचिंग से तैयारी किए हैं?</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/education-mafia-will-be-curbed-soon</link>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 15 Aug 2024 11:43:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
		<category><![CDATA[Centres]]></category>
		<category><![CDATA[Coaching]]></category>
		<category><![CDATA[Delhi]]></category>
		<category><![CDATA[Drishti]]></category>
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		<category><![CDATA[Exploitation]]></category>
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		<category><![CDATA[RAU IAS]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>पहाड़गंज मेट्रो स्टेश दारू दूकान के पास से: दिल्ली के लोग ही नहीं, नेता, अभिनेता, मंत्री, संत्री, अधिकारी, पदाधिकारी दक्षिण दिल्ली के &#8216;उपहार सिनेमा अगली कांड&#8217; को शायद भूल गए होंगे, एक छोटी सी असावधानी के कारण कैसे 59 हँसता-खेलता जीवित लोगों, बच्चों, महिलाओं का शरीर आग में झुलसकर पार्थिव हो गया था। सैकड़ों लोग [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>पहाड़गंज मेट्रो स्टेश दारू दूकान के पास से: दिल्ली के लोग ही नहीं, नेता, अभिनेता, मंत्री, संत्री, अधिकारी, पदाधिकारी दक्षिण दिल्ली के &#8216;उपहार सिनेमा अगली कांड&#8217; को शायद भूल गए होंगे, एक छोटी सी असावधानी के कारण कैसे 59 हँसता-खेलता जीवित लोगों, बच्चों, महिलाओं का शरीर आग में झुलसकर पार्थिव हो गया था। सैकड़ों लोग घायल हुए थे। भारत के न्यायिक व्यवस्था में लगभग 21 वर्ष लगे न्याय तक पहुँचने में। कोई दो दशक से अधिक समय तक भारत के न्यायालय में &#8216;आम आदमी (दर्शकों के परिवार) और सिनेमाघरों के मालिकों के बीच न्यायिक युद्ध चलता रहा। लोगों का विश्वास भारत के न्यायिक व्यवस्था पर था, वह कायम रहा। भारत का सर्वोच्च न्यायालय मृतकों के परिवारों को न्याय दिया &#8211; देर से ही सही। उसी बहती आंसुओं की धाराओं में सिनेमा बनाने वाले सिनेमा बनाकर पैसों के बिस्तर पर सोते-सोते संसद भी पहुंच गए।</strong> </p>
<p><a href="https://www.youtube.com/watch?v=U7GZUMpNmDw" rel="noopener" target="_blank">@अखबारवाला001(210)✍ IAS बनाने वाली फैक्ट्रियों का नेताओं-अधिकारियों के साथ #३६नहीं#६३ का नाता है(1)</a></p>
<p>विगत 25 जुलाई, 2024 <strong>विश्व डूबने से बचाव दिवस</strong> (World Drowning Prevention Day) के नाम से अलंकृत हैं। यह प्रश्न संघ लोक सेवा आयोग अथवा किसी भी राज्य और अखिल भारतीय स्तर की परीक्षाओं में पूछे जाने वाले प्रश्नों में अव्वल होता है। संघ लोक सेवा आयोग अथवा प्रदेश के लोक सेवा आयोग की प्रशासनिक सेवा परीक्षाओं में अनेकों बार यह प्रश्न पूछे भी गए हैं। विश्व डूबने से बचाव दिवस के  कोई 72 घंटे बाद दिल्ली के पूसा रोड के बाएं हाथ पहाड़गंज मेट्रो स्टेशन के नीचे दिल्ली सरकार द्वारा संचालित दारू की दूकान से दो सौ कदम आगे बाएं हाथ राजेंद्र नगर इलाके में तेज बारिश और जल जमाव के चपेट में आकर भारतीय प्रशासनिक सेवा के तीन होनहार अभ्यर्थियों की RAU IAS कोचिंग सेंटर के तहखाने वाले तल्ले में डूबने से मौत हो गई। एक गलती के कारण। </p>
<figure id="attachment_5691" aria-describedby="caption-attachment-5691" style="width: 2560px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/DSC_0751-1-scaled.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/DSC_0751-1-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1710" class="size-full wp-image-5691" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/DSC_0751-1-scaled.jpg 2560w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/DSC_0751-1-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/DSC_0751-1-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/DSC_0751-1-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/DSC_0751-1-1536x1026.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/DSC_0751-1-2048x1368.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5691" class="wp-caption-text">RAU IAS इसी कोचिंग केंद्र में तीन छात्र-छात्राएं मृत्यु को प्राप्त किये डूबकर</figcaption></figure>
<p>13 जून 1997 में सन्नी देओल अभिनीत <strong>&#8220;बॉर्डर&#8221;</strong> फिल्म के प्रदर्शन के दौरान ​&#8217;उपहार&#8217; छविगृह में वह घटना ​घाटी थी। यह कहना मुश्किल है कि &#8216;बॉर्डर&#8217; फिल्म के निदेशक, अदाकारा, अदाकार, निवेशक कोई उस अग्निकांड के पीड़ितों के परिवारों से मिले अथवा नहीं, उनसे मिलकर उनकी पारिवारिक क्षति को लेकर अपनी संवेदना व्यक्त किये अथवा नहीं; यह तो वही बताएँगे &#8211; लेकिन बॉक्स ऑफिस इंडिया के आंकड़े के अनुसार 176 मिनट का बॉर्डर फिल्म जिसका बजट <strong>10,00,00,000/- रुपए</strong> था, पूरे विश्व में कोई <strong>65,57,00,000/- रुपये</strong> की कमाई की।​ बाद में, 7-श्रृंखला वाली नेटफ्लिक्स पर प्रदर्शित मैगज़ीन कार्यक्रम <strong>&#8216;Trial by Fire&#8217;</strong> कमाया। Trial by Fire और &#8216;बॉर्डर&#8217; में एक समानता थी &#8211; दोनों में &#8216;देओल&#8217; ही ​थे । क्या पता सिनेमा बनाने वाले लोग कल RAU IAS बनाने के कारखाने, जहां विगत दिनों भारत के तीन माताओं का कोख़ उजरा, उस पर भी सिनेमा बनाकर पैसे कमा लें। क्योंकि व्यापार है और व्यापार में मानवता, मानवीयता का भट्ठी जलता हैं। </p>
<figure id="attachment_5692" aria-describedby="caption-attachment-5692" style="width: 2048px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/bor.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/bor.jpg" alt="" width="2048" height="1367" class="size-full wp-image-5692" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/bor.jpg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/bor-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/bor-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/bor-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/bor-1536x1025.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2048px) 100vw, 2048px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5692" class="wp-caption-text">उपहार सिनेमा का आज का दृश्य</figcaption></figure>
<p><strong>RAU IAS कोचिंग केंद्र की घटना  जुलाई 27 जुलाई की देर शाम में घटी। इस घटना के चार दिन बाद संघ लोक सेवा आयोग अपने द्वारा संचालित अखिल भारतीय स्तर की परीक्षा 2021 बैच में 841 वां स्थान पाने वाली और प्रशिक्षण के बाद पुणे की समाहर्ता बनने वाली पूजा केडकर की भारतीत को अयोग्य करार कर उन्हें घर वापास कर दिया । स्वतंत्र भारत के 77वें झंडोत्तोलन दिवस के एक पखवाड़ा पूर्व दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार, देश की विधि व्यवस्था और संघ लोक सेवा के इतिहास में ऐसा कलंक कभी नहीं लगा था। 27 जुलाई को दिल्ली के राजेंद्र नगर स्थित राव IAS अकादमी के बेसमेंट में शनिवार को हुई भारी बारिश के बाद पानी भरने की वजह से तीन छात्रों की मौत हो गई। इस हादसे के बाद बीजेपी और आप दोनों एक-दूसरे पर आरोप का कबड्डी खेल रहे हैं। कहते हैं RAU IAS कोचिंग केंद्र के बेसमेंट में बायोमैट्रिक लगा हुआ था। बिना अंगूठा लगाए, आप बाहर नहीं आ सकते थे। तीन निकल नहीं पाए और मृत्यु उन्हें वरन कर ली।</strong> </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/2.png"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/2.png" alt="" width="1241" height="698" class="aligncenter size-full wp-image-5695" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/2.png 1241w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/2-300x169.png 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/2-1024x576.png 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/2-768x432.png 768w" sizes="auto, (max-width: 1241px) 100vw, 1241px" /></a></p>
<p>ज्ञातव्य है कि उक्त दिन डीसीपी सेंट्रल एम हर्षवर्धन को शाम सात बजे इस घटना की सूचना प्राप्त हुई थी एक कोचिंग संस्थान के बेसमेंट में पानी भर गई है। सूचना करने वाले ने बताया कि वहां कुछ लोगों के फंसे होने की आशंका है। अचानक पूरा बेसमेंट कैसे भर गया यह जांच का विषय बना । आपराधिक मामला दर्ज किया गया। फोरेंसिक साक्ष्य एकत्र करने की प्रक्रिया उसी दिन से प्रारम्भ हो गई। संस्था के मालिक सहित कई लोगों को हिरासत में लिया गया। पूसा रोड का यह इलाका निचले सतही स्तर का इलाका है, आज नहीं, मुद्दत से। बरसात में पानी का जमाव यहाँ आम बात रही है। कभी-कभी कमर तक पानी भर जाता है। स्वाभाविक है पानी के निकास के लिए जो व्यवस्था होनी चाहिए, वह नहीं है। साथ ही, मकानों / बेसमेंट के निर्माण और इस्तेमाल के लिए जो कड़ी व्यवस्था होनी चाहिए वह भी नहीं है। देश का आर्थिक इतिहास गवाह है कि इसी स्थितियों में कानून का धज्जी कानून के निर्माताओं, कानून का पालन करवाने वालों, दलालों, बिचौलियों, के बिना संभव नहीं है। समाज में ऐसी प्रजाति के लोग सफेदपोश संभ्रांत कहलाते हैं। खैर। </p>
<p>उधर, संघ लोक सेवा की गरिमा को एक तमाचा तब लगा जब उसे अपने द्वारा संचालित अखिल भारतीय स्तर की परीक्षा में तथाकथित रूप से अव्वल आईओ अभ्यर्थी पूजा खेडकर की परीक्षा और चयन सभी को रद्द करते उन्हें घर वापस भेज दिया।पूजा ने पुणे के श्रीमती काशीबाई नवले मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की डिग्री हासिल थी। बाद में 2021 में यूपीएससी सीएसई परीक्षा 841 वीं रैंक के साथ उत्तीर्ण की। प्रशिक्षण के बाद वर्ष जून 2024 में उन्हें पुणे कलेक्टर आफिस में पहली नियुक्ति मिली। हालांकि पहली ही नियुक्ति में ट्रेनिंग के दौरान उन पर जांच बैठ गई और इसी बीच उनका ट्रांसफर कर दिया गया। नौकरशाहों और राजनेताओं के परिवार से ताल्लुक रखने वाली पूजा पर आरोप था कि वे प्रशिक्षण अवधि के दौरान उन्होंने सरकारी आवास, स्टाफ, गाड़ी और दफ्तर में अलग केबिन की मांग की। अपनी निजी ऑडी कार पर लाल-नीली बत्ती और महाराष्ट्र सरकार का लोगो लगाया। उन्होंने चोरी के आरोप में गिरफ्तार एक ट्रांसपोर्टर को छोड़ने के लिए डीसीपी रैंक के अधिकारी पर दबाव बनाया। उन्होंने आईएएस बनने के लिए झूठे दस्तावेज का इस्तेमाल करते हुए यूपीएससी के फार्म में खुद को ओबीसी नाॅन क्रीमी लेयर बताया। वह खुद लगभग 17 करोड़ की संपत्ति की मालकिन हैं। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/3.png"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/3.png" alt="" width="1242" height="701" class="aligncenter size-full wp-image-5696" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/3.png 1242w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/3-300x169.png 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/3-1024x578.png 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/3-768x433.png 768w" sizes="auto, (max-width: 1242px) 100vw, 1242px" /></a></p>
<p>आरोप और सत्यापन के अनुसार, वे विकलांगता श्रेणी के तहत यूपीएससी का आवेदन पत्र भरा था और दावा किया गया कि वह 40 फीसदी दृष्टिबाधित हैं और किसी मानसिक बीमारी से जूझ रही हैं। एमबीबीएस कॉलेज में दाखिले के समय भी दस्तावेजों की हेर-फेर के आरोप पूजा पर हैं।संघ लोक सेवा आयोग की शिकायत पर दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने पूजा खेडकर के खिलाफ जालसाजी, धोखाधड़ी, आईटी एक्ट और विकलांगता एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। आयोग खेडकर की सिविल सेवा परीक्षा 2022 की उम्मीदवारी रद्द करने/भविष्य की परीक्षाओं/चयन से रोक लगाने के लिए उन्हें कारण बताओ नोटिस भी जारी किया ।</p>
<p>इस बीच भारत का सर्वोच्च न्यायालय ने 27 जुलाई को दिल्ली के पुराने राजेंद्र नगर में राव के आईएएस कोचिंग संस्था के बेसमेंट में बाढ़ के कारण सिविल सेवा के इच्छुक तीन उम्मीदवारों की मौत पर सोमवार को स्वत: संज्ञान लिया। शीर्ष अदालत ने कोचिंग सेंटर फेडरेशन की याचिका खारिज कर दी। आग और सार्वजनिक सुरक्षा मानदंडों के अनुपालन पर न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा: “आप युवा उम्मीदवारों के जीवन को दयनीय बना रहे हैं। उनके अपने सपने हैं, कड़ी मेहनत करते हैं और इसी तरह आप उनसे निपटते हैं।” न्यायमूर्ति कांत ने यह भी कहा कि &#8220;ये कोचिंग स्थान मृत्यु कक्ष बन गए हैं&#8221;।न्यायमूर्ति कांत और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ कोचिंग सेंटर फेडरेशन की अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें मुखर्जी नगर में कोचिंग संस्थानों और वाणिज्यिक गतिविधियों के प्रसार और आग और सार्वजनिक नियमों का पालन करने में उनकी विफलता के संबंध में दिल्ली उच्च न्यायालय के 14 दिसंबर, 2023 के आदेश को चुनौती दी गई थी। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/4.png"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/4.png" alt="" width="1257" height="702" class="aligncenter size-full wp-image-5697" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/4.png 1257w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/4-300x168.png 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/4-1024x572.png 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/4-768x429.png 768w" sizes="auto, (max-width: 1257px) 100vw, 1257px" /></a></p>
<p>न्यायालय में कहा कि हमें यकीन नहीं है कि इस संबंध में दिल्ली के एनसीटी या आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा अब तक क्या प्रभावी कदम उठाए गए हैं। सूचना जारी करते हुए अदालत ने उनसे यह बताने को कहा कि क्या सुरक्षा मानदंड निर्धारित किए गए हैं और ऐसे मानदंडों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।यह देखते हुए कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश और हरियाणा राज्यों के अंतर्गत आता है, अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि &#8220;ये दोनों राज्य &#8211; अपने संबंधित प्रधान सचिव, शहरी विकास विभाग के माध्यम से (मामले में उन्हें भी पक्षकार बनाया जाए) और उनके स्थायी वकील के माध्यम से उन्हें नोटिस जारी किया जाए। अदालत ने अपीलकर्ता से आगे पूछा, &#8220;आप चाहते हैं कि हम एक साधारण आदेश में हस्तक्षेप करें, आप अग्नि अनुपालन मानदंडों का भी पालन नहीं करना चाहते हैं?&#8221;</p>
<p><strong>बहरहाल, दिल्ली शहर की वर्तमान दशा के मद्दे नजर यह कदापि नहीं कहा जा सकता है कि स्थानीय विधायक, संसद, प्रदेश और केंद्र के अधिकारियों ने कभी भी गिरती, लुढ़कती व्यवस्था को या तो गंभीरता से नहीं लिया या फिर उसमें उनकी मिली भगत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता हैं। इन इलाकों में लगभग 90% पुस्तकालय पार्किंग या भंडारण के लिए बने तहखानों में अवैध रूप से चल रहे हैं। ये स्थान मंद, तंग और खराब हवादार हैं। इन पुस्तकालयों में अक्सर उचित बैठने की व्यवस्था, प्रकाश व्यवस्था और स्वच्छता सुविधाओं का अभाव है । उल्लंघन आज से नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रहा था। मजबूर माता-पिता और अभ्यर्थियों को इस असुविधाजनक और अस्वास्थ्यकर परिस्थितियों के लिए भी अधिकाधिक राशि का भुगतान करना पड़ता हैं। इसके अलावे एक महत्वपूर्ण पहलू और यह &#8211; वह है खुलेआम उलझी बिजली की तारों की का होना, जो चिंता का विषय रहा है। लेकिन स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ बिजली विभाग भी कुम्भकरण की नींद सोती रही है। इन तंग जगहों में बिजली की उच्च मांग के कारण अक्सर सर्किट ओवरलोड हो जाते हैं।</strong></p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/5.png"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/5.png" alt="" width="1245" height="699" class="aligncenter size-full wp-image-5698" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/5.png 1245w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/5-300x168.png 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/5-1024x575.png 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/5-768x431.png 768w" sizes="auto, (max-width: 1245px) 100vw, 1245px" /></a></p>
<p>पहाड़गंज-मुखर्जी नगर- राजेंद्र नगर इलाके में कई लाख छात्र-छात्राएं किराये के मकान में, पेयिंग गेस्ट बनकर, कमरों को आपसे में बांटकर रहते हैं। वातावरण के साथ-साथ स्थानीय दलालों के कारण महिलाओं की स्थिति भी बहुत बेहतर नहीं है।सैकड़े साठ से अधिक फीसदी छात्र-छात्राएं, जो भारत के विभिन्न शहरों और ग्रामीण इलाकों से पढ़ने के उद्देश्य से इन कोचीन संथाओं में नामांकन लेते हैं, बेहद मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। स्थानीय लोग तो यह भी कहते हैं कि कमरों का वातावरण और अँधेरापन के कारण राजेंद्र नगर या पहाड़ गंज क्षेत्र का पार्क तथाकथित रूप से पढ़ने का अड्डा बन गया है। छात्र-छात्रों का कहना है कि इस इलाके के लोगों ने अपना एक-एक इंच जगह के लिए किराया वसूलते हैं। आर्थिक रूप से औसतन एक छात्र/छात्रा को विषयों के लिए कोचिंग शुल्क (जो लाखों में होता है) के अलावे एकल बिस्तर वाला एक कमरा के लिए 15000 रुपये प्रतिमाह देनी होती हैं। खाना-पीना के अलावे स्थानीय क्षेत्र के दलाल भी नियमित रूप से अनियमित पैसे वसूलते हैं। नहीं देने पर कमरा खली करने की धमकी भी देते हैं। </p>
<p>यदि देखा जाए तो भारत के लाखों-लाख छात्र-छात्राएं दिल्ली सल्तनत में एक शैक्षिक आतंकी वातावरण में सांस ले रहे हैं।उनकी गलती सिर्फ यह है कि वे पढ़-लिखकर अपना, अपने परिवार का जीवन बेहतर बनाना चाहते हैं। दिल्ली शहर में हज़ारों कोचिंग केंद्र हैं और औसतन एक केंद्र के लिए कई दर्जन दलाल और बिचौलिए काम करते हैं। सभी संस्थाओं का अपना अलग-अलग शुल्क प्रणाली है। पूसा रोड पर पैदल चलने से आज़ादपुर सब्जी मंडी का एहसास होता है। और यह कार्य बिना राजनेताओं और सरकारी अधिकारियों, पदाधिकारियों की मिली भगत से संभव नहीं है। कोचिंग संस्थानों ने पढ़ाई के नाम पर खुली लूट मचा रखी है। ना सरकार ने इनके लिए कोई नियम बनाए हैं और ना ही इनके खुद के नियम है। इन संस्थाओं का जो मन करता है, वह करते हैं। प्रवेश के समय न तो कोई परीक्षा का नियम है। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/6.png"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/6.png" alt="" width="1255" height="704" class="aligncenter size-full wp-image-5699" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/6.png 1255w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/6-300x168.png 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/6-1024x574.png 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/6-768x431.png 768w" sizes="auto, (max-width: 1255px) 100vw, 1255px" /></a></p>
<p>सड़कों पर संस्थानों के शिक्षकों की तस्वीरों के साथ आलू-बैगन-टमाटर जैसा विज्ञापन का बड़ा-बड़ा बोर्ड लगा है। यह भी कहा जा रहा है कि पिछले कुछ वर्षों में कई कोचिंग संस्थाएं पेपर लीक जैसे मामले में भी शामिल पाई गई है। इन संस्थाओं को स्थानीय नेताओं और सरकार का भी साथ मिला होता है। तभी ये संस्थाएं सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले बच्चों का जी भर के शोषण करती हैं। अब वक्त आ चुका है कि इन संस्थानों पर सरकार को कठोर कानून बनाकर लगाम लगानी चाहिए। अगर ये संस्थाएं आवारा बैल की तरह बेलगाम होंगी तो पता नहीं कितने और मासूम को निगल जाएगी। </p>
<p><strong>RAU आईएएस की शुरुआत दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित ओडियन सिनेमा गृह के पीछे से से हुई थी। बाद में यहाँ से बाराखम्बा रोड स्थित डीसीएम भवन में आया और फिर पुराने राजेंद्र नगर में विशालकाय शीशे वाले मकान में &#8211; जिसकी रचना नियमों को ताक पर रखकर किया गया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार यह इलाका रिहायसी इलाका है। मुख्य मार्ग पर छोटे-छोटे व्यवसाय के लिए अनुमति रही है, लेकिन आटा-चावल-कपड़ा बेचते-बेचते कब शिक्षा को बेचने लगे, किसी को नहीं मालूम। व्यावसायिक या रिहायसी इलाके को शैक्षणिक इलाके में बदलना बिना मंत्रालय और अधिकारियों की मिली भगत से संभव नहीं है। RAU IAS आईएएस कोचिंग सेंटर का दावा है कि अपने स्थापना काल (1953) से अब तक विगत 70 वर्षों में देश में उत्पादित नौकरशाहों में उनके एक-तिहाई बच्चे हैं। स्वाभाविक है हज़ारों-हजार नौकरशाह अब तक अवकाश भी प्राप्त कर लिए होंगे और हज़ारों आज भी कुर्सी पर विराजमान होंगे। बहुत तरह के प्रश्न हैं। </strong></p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/7.png"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/7.png" alt="" width="1244" height="699" class="aligncenter size-full wp-image-5700" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/7.png 1244w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/7-300x169.png 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/7-1024x575.png 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/7-768x432.png 768w" sizes="auto, (max-width: 1244px) 100vw, 1244px" /></a></p>
<p>ज्ञातव्य हो कि एक सरकारी सेवक पुलिस केस के नाम से अत्यधिक भयभीत रहता है। ऐसा माना जाता है कि कोई भी पुलिस केस होने पर किसी सरकारी सेवक को उसकी सेवा से हटा दिया जाता है या फिर सरकारी सेवा की तैयारी करने वाले व्यक्ति को पुलिस सत्यापन में किसी भी प्रकार का कोई पुलिस केस मिलने पर सरकारी नौकरी नहीं दी जाती है। भारत में इससे संबंधित मामले में उच्चतम न्यायालय के समक्ष निरंतर आते रहे हैं। एक सरकारी सेवा के मामले में पुलिस मुकदमा की क्या भूमिका होती है यह सर्वविदित है। हालांकि इससे जुड़ा भारत में कोई एक संहिताबद्ध कानून तो नहीं है, लेकिन अलग-अलग राज्यों के सेवा नियमों में बहुत सारी बातों को समावेश किया गया है। अगर न्यायालय में किसी मामले में किसी सरकारी सेवक पर ₹100 का जुर्माना कर दिया है और व्यक्ति ने उस जुर्माने को स्वीकार कर लिया, तब भी ऐसा व्यक्ति सरकारी सेवा में नहीं रह सकता है। </p>
<p>इसी तथ्य के मद्दे नजर एक सूचना के अनुसार जैसे भारत सरकार द्वारा निर्धारित नियमों और विनियमों के अनुसार, आपराधिक रिकॉर्ड वाले व्यक्ति को आईएएस (भारतीय प्रशासनिक सेवा), आईपीएस (भारतीय पुलिस सेवा), आईईएस (भारतीय इंजीनियरिंग सेवा), और आईएफएस (भारतीय विदेश सेवा) सहित सिविल सेवाओं में भर्ती के लिए अयोग्य माना जाता है, संभव है कि देश में शिक्षा माफिआओं को तोड़ने और निजी कोचिंग कक्षाओं को समाप्त करने के लिए केंद्र सरकार और संघ लोक सेवा आयोग के तरफ से कोई ठोस कदम उठाया जाय। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/8.png"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/8.png" alt="" width="1237" height="678" class="aligncenter size-full wp-image-5701" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/8.png 1237w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/8-300x164.png 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/8-1024x561.png 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/8-768x421.png 768w" sizes="auto, (max-width: 1237px) 100vw, 1237px" /></a></p>
<p>इसी सन्दर्भ में भारत के राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू और देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को प्रेषित एक ईमेल प्रार्थना में प्रार्थना किया गया है कि &#8220;विगत दिनों दिल्ली में तीन छात्र मृत्यु को प्राप्त किये। सभी भारतीय प्रशासनिक सेवा में आना चाहते थे। दिल्ली में कुकुरमुत्तों की तरह जन्म ले रहे निजी संस्थान की दुकानदारी में फंस गए। ये सभी भारत के अनभिज्ञ, लाचार छात्र-छात्राओं को लोभ में फंसाते हैं । सभी विश्वास दिलाते हैं कि आईएएस बना देंगे यह जानते हुए कि देश में आईएएस के 175 स्थान ही होती है प्रतिवर्ष है। संघ लोक सेवा जिस परीक्षा को विभिन्न चरणों में लेती है, किसी भी चरण में यह नहीं कहती की वे आईएसएस की परीक्षा ले रही है। वह परीक्षा उक्त वर्ष के सभी कैडरों के लिए ली जाती है और अंकानुसार अभ्यर्थियों को श्रेणी दिया जाता है।&#8221; </p>
<p>याचना में आगे लिखा है कि &#8220;ये निजी दूकानदार कहीं भी यह नहीं लिखते, कहते कि वे आईपीएस, आईआरएस के लिए, वन सेवा के लिए, केंद्रीय सेवा ग्रुप-ए और ग्रुप -बी की भी तैयारी करते हैं। मारे देश में गरीबी, अशिक्षा का आलम इतना भयानक है कि सैकड़े 99.9 से अधिक फीसदी अभ्यर्थी और उनके माता-पिता, अभिभावक इन दुकानदारों के चंगुल में फंस जाते हैं। असहाय माता-पिता अपने संतान के आगे निःसहाय हो जाते हैं।  घर, द्वार, खेत-खलिहान बेचकर, कभी-कभी ऋण लेकर अपने संतानों को पढ़ने हेतु आर्थिक मदद करते। लेकिन अशिक्षा के कारण यह समझ नहीं पाते कि इसका परिणाम क्या होगा। वे यह भी नहीं जानते कि उनके संतानों की काबिलियत है अथवा नहीं। जिस RAU संस्था में उक्त घटना हुई उसके वेबसाइट पर यह उद्धृत है की वह पिछले 1953 से इस पेशा में है। वह यह भी दवा करती है कि आज भारत में जितने नौकरशाह हैं / हुए, उसमें एक-तिहाई नौकरशाह उन्हीं के हैं।&#8221;</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/9.png"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/9.png" alt="" width="1238" height="696" class="aligncenter size-full wp-image-5702" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/9.png 1238w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/9-300x169.png 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/9-1024x576.png 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/9-768x432.png 768w" sizes="auto, (max-width: 1238px) 100vw, 1238px" /></a></p>
<p>&#8220;अब सवाल यह है कि अगर भारत राष्ट्र को बेहतर नौकरशाह चाहिए तो लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी, जिसका उद्देश्य उच्चतर सिविल सेवाओं के अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए समर्पित है, के तर्ज पर भारत सरकार स्वयं एक ऐसी संस्था का गठन क्यों नहीं करती जहाँ देश के नामी-गरामी नौकरशाह (सेवारत और सेवामुक्त) अखिल भारतीय स्तर पर संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित होने वाली परीक्षा की तैयारी कराये। भारत के माता-पिता, अभिभावक लाचार हैं हुकुम और भारतीय शैक्षिक बाज़ार की व्यवस्था लचर गई है। एक बहुत बड़ी इक्षा शक्ति की किल्लत है इन दुकानदारी को समाप्त करने के लिए। मैं एक बहुत छोटा पत्रकार हूँ। लेकिन एक निरीह माता-पिता के चेहरे का दृश्य जब आँखों के सामने लेता हूँ, आँखें भर आती है। इन दुकानदारी के कारण देश में शिक्षा के साथ साथ मानसिकता भी लचर गया है।&#8221;</p>
<p><strong>ईमेल में लिखा गया है कि : &#8220;आप दोनों सम्मानित मोहतरमा और मोहतरम से निवेदन करता हैं कि इस वर्ष से संघ लोक सेवा आयोग द्वारा संचालित परीक्षा के लिए आवेदन भरते समय ही आवेदन पत्र में इस बात का प्रावधान किया जाए और अभ्यर्थी से पूछा जाए कि &#8216;क्या वे किसी निजी कोचिंग केंद्रों से इस परीक्षा हेतु पढ़ाई किये है? अभ्यर्थी &#8216;हां&#8217; और &#8216;ना&#8217; में जवाब दें। &#8216;हाँ&#8217; की स्थिति में उनकी &#8216;उम्मीदवारी&#8217; वहीँ &#8216;निरस्त &#8216;हो जाए उसी तरह जिस तरह हम पुलिस सत्यापन की बात करते हैं। परीक्षा में सम्मिलित होने वाले किसी भी अभ्यर्थी के विरुद्ध किसी भी प्रकार का पुलिस से सम्बंधित कोई भी मामला होता है तो अभ्यर्थी के मन में एक दर अवश्य रहता है कि कहीं उसकी उम्मीदवारी रद्द न हो जाय।&#8221; </strong></p>
<p>&#8220;ऐसी व्यवस्था होने पर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली ही नहीं, भारत के 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुकुमुत्तों की तरह पनप पाहे आईएएस बनाने की दुकानदारी जहाँ अभ्यर्थी सहित उनके माता-पिता जीवित रहते हुए भी मृत रहते हैं &#8211; पर लगाम लग जायेगा। लोग कहते हैं &#8216;मोदी है तो मुमकिन है&#8217; &#8211; अगर यह नारा सच में कोई अहमियत रखता है तो भारत के माता-पिताओं की, अभ्यर्थियों की रक्षा करें। आज करोल बाग, न्यू राजेंद्र नगर, मुखर्जी नगर में लाखों छात्र-छात्राएं इनके चपेट हैं हैं।&#8221; </p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/education-mafia-will-be-curbed-soon">IAS के नाम पर लूट और शिक्षा माफियाओं पर अंकुश शीघ्र ✍ UPSC परीक्षा के लिए आवेदन के समय अभ्यर्थियों कहीं बताना न पड़े कि क्या वे किसी निजी कोचिंग से तैयारी किए हैं?</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>नाम बदलने की प्रक्रिया &#8216;कर्तव्य पथ&#8217; के रास्ते रायसीना पहाड़ी के &#8216;दरबार हॉल&#8217;, &#8216;अशोक हॉल&#8217; तक पहुंचा, अब क्रमशः &#8216;गणतंत्र मंडप&#8217; और &#8216;अशोक मंडप&#8217; के नाम से जाना जायेगा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Jul 2024 12:59:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
		<category><![CDATA[ashok hall]]></category>
		<category><![CDATA[darbar hall]]></category>
		<category><![CDATA[new delhi]]></category>
		<category><![CDATA[president house]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>रायसीना पहाड़ से (नई दिल्ली) : नाम बदलने की प्रक्रिया &#8216;कर्तव्य पथ&#8217; के रास्ते रायसीना पहाड़ी के दरबार हॉल, अशोक हॉल तक पहुंचा। स्वतंत्र भारत के 15 वें राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति कार्यालय में अपने दो साल पुरे होने के अवसर पर दो ऐतिहासिक फैसले लीं &#8211;  ‘दरबार हॉल’ और ‘अशोक हॉल’ का नाम बदलकर क्रमशः ‘गणतंत्र [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/president-murmu-renames-durbar-hall-and-ashok-hall-in-rashtrapati-bhavan">नाम बदलने की प्रक्रिया &#8216;कर्तव्य पथ&#8217; के रास्ते रायसीना पहाड़ी के &#8216;दरबार हॉल&#8217;, &#8216;अशोक हॉल&#8217; तक पहुंचा, अब क्रमशः &#8216;गणतंत्र मंडप&#8217; और &#8216;अशोक मंडप&#8217; के नाम से जाना जायेगा</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>रायसीना पहाड़ से (नई दिल्ली) : नाम बदलने की प्रक्रिया &#8216;कर्तव्य पथ&#8217; के रास्ते रायसीना पहाड़ी के दरबार हॉल, अशोक हॉल तक पहुंचा। स्वतंत्र भारत के 15 वें राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति कार्यालय में अपने दो साल पुरे होने के अवसर पर दो ऐतिहासिक फैसले लीं &#8211;  ‘दरबार हॉल’ और ‘अशोक हॉल’ का नाम बदलकर क्रमशः ‘गणतंत्र मंडप’ और ‘अशोक मंडप’ कर दीं । राष्ट्रपति भवन, भारत के राष्ट्रपति का कार्यालय एवं निवास है, राष्ट्र का प्रतीक और लोगों की एक अमूल्य विरासत है। कहते हैं कि इसे लोगों के लिए और अधिक सुलभ बनाने हेतु लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। राष्ट्रपति भवन के वातावरण को भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों एवं लोकाचार के अनुरूप बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए गए हैं।</strong></p>
<p>सत्ता के गलियारों के लोगों का कहना है कि वैसे ‘दरबार हॉल’ राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान करने जैसे महत्वपूर्ण समारोहों एवं उत्सवों का स्थल है, परन्तु, ‘दरबार’ शब्द का आशय भारतीय शासकों व अंग्रेजों के दरबार एवं सभाओं से लगता था । जबकि भारत के गणतंत्र बनने के बाद इसकी प्रासंगिकता समाप्त हो गई। ‘गणतंत्र’ की अवधारणा प्राचीन काल से भारतीय समाज में गहराई से निहित है, इसलिए इस आयोजन स्थल के लिए ‘गणतंत्र मंडप’ एक उपयुक्त नाम है। जबकि ‘अशोक हॉल’ मूलतः एक बॉलरूम था। ‘अशोक’ शब्द का आशय एक ऐसे व्यक्ति से है जो “सभी कष्टों से मुक्त” या “किसी भी दुःख से रहित” हो। इसके अलावा, ‘अशोक’ का आशय एकता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के प्रतीक सम्राट अशोक से है। भारत गणराज्य का राष्ट्रीय प्रतीक सारनाथ के अशोक का सिंह शिखर है। यह शब्द अशोक वृक्ष को भी संदर्भित करता है जिसका भारतीय धार्मिक परंपराओं के साथ-साथ कला और संस्कृति में भी गहरा महत्व है। ‘अशोक हॉल’ का नाम बदलकर &#8216;अशोक मंडप&#8217; करने से भाषा में एकरूपता आती है और &#8216;अशोक&#8217; शब्द से जुड़े प्रमुख मूल्यों को बरकरार रखते हुए अंग्रेजीकरण के निशान मिट जाते हैं। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-15.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-15.jpg" alt="" width="2048" height="1536" class="aligncenter size-full wp-image-5598" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-15.jpg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-15-300x225.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-15-1024x768.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-15-768x576.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-15-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2048px) 100vw, 2048px" /></a></p>
<p>ज्ञातव्य हो कि 12 दिसंबर को 1911 का दिल्ली दरबार किंग जॉर्ज पंचम के राज्याभिषेक के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। दरबार में सबसे महत्त्वपूर्ण घोषणा जिसे लगभग एक लाख लोगों ने सुना, ब्रिटिश भारत की राजधानी कलकत्ता से बदलकर दिल्ली करना था। कलकत्ता को वाणिज्य केंद्र के रूप में जाना जाता था जबकि दूसरी ओर, दिल्ली शक्ति और शान का प्रतीक थी। घोषणा के पश्चात, शाही आवास की खोज अत्यावश्यक हो गई थी। उत्तर का किंग्जवे कैंप पहली पसंद थी। एक ब्रिटिश वास्तुकार सर एडविन लुट्येन्स को भारत की नई राजधानी की योजना बनाने के लिए चुना गया और वह दिल्ली नगर योजना समिति का भाग थे जिसका कार्य स्थल और उसके नक्शे का निर्माण करना था। सर लुट्येंस और उनके सहयोगी, जो स्वच्छता विशेषज्ञ थे, को उत्तरी क्षेत्र यमुना नदी के समीप होने के कारण बाढ़ के प्रति अधिक संवेदनशील लगा। इस प्रकार, दक्षिणी ओर की रायसीना पहाड़ी, जहां खुलादार और ऊंचा स्थान और बेहतर जल निकासी थी, वायसराय हाऊस के लिए उपयुक्त स्थान प्रतीत हुआ।</p>
<p><strong>भारत के पूर्व राष्ट्रपति आर. वेंकटरमन ने सही कहा है, ‘‘इस पहाड़ी पर प्रासाद दृश्यावली का मुकुट लगती है। मीलों दूर से दिखने वाला यह प्रासाद क्षितिज पर एक ऐसे स्मारक की भांति स्थित है जो बिलकुल अलग प्रतीत होता है। यह इमारतों में एक कंचनजंघा है जिसे दिल्ली की गर्मी की धूल भरी धुंधलाहट तथा इसकी सर्दियों का कोहरा ढक देता है, अनावृत्त कर देता है और पुनः ढक देता है। एक आकर्षक ढांचा जो निकट भी और दूर भी लगता है, यह एकदम नजदीक प्रतीत होता है परंतु आवरण के पीछे छिप जाता है।’’</strong></p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-1.jpg" alt="" width="2048" height="1536" class="aligncenter size-full wp-image-5599" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-1.jpg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-1-300x225.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-1-1024x768.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-1-768x576.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-1-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2048px) 100vw, 2048px" /></a></p>
<p>अन्य भवनों के अलावे इस ऐतिहासिक राष्ट्रपति भवन का वास्तुकार सर एडविन लुटियंस थे जो 1912-29 में बनाया गया था। महलनुमा घर में चार पंख और एक केंद्रीय खंड है जो 180 फीट (55 मीटर) ऊंचे तांबे के गुंबद से ढका है। इकतीस चौड़ी सीढ़ियां पोर्टिको और दरबार हॉल के मुख्य प्रवेश द्वार की ओर जाती हैं। हॉल एक गोलाकार संगमरमर का प्रांगण है, जो लगभग 75 फीट (23 मीटर) चौड़ा है। इस भवन में 300 से अधिक कमरे, कार्यालय, रसोई, एक डाकघर और आंगन हैं। घर 600 फीट (183 मीटर) से अधिक लंबा है और 4.5 एकड़ (1.8 हेक्टेयर) क्षेत्र में फैला है।</p>
<p>इतिहासकार कहते हैं कि इसके निर्माण के समय चुने गए स्थान की चट्टानी पहाडि़यों को विस्फोट से तोड़ा गया तथा वायसराय के आवास और अन्य कार्यालयी भवनों के निर्माण के लिए भूमि समतल की गई। इस स्थान पर शिलाओं ने मजबूत नींव के रूप में अतिरिक्त फायदा पहुंचाया। निर्माण सामग्री के लाने ले जाने के लिए इमारतों के चारों ओर विशेष तौर पर एक रेलवे लाइन बिछाई गई। चूंकि नगर की योजना नदी से दूर बनाई गई थी और दक्षिण में कोई नदी नहीं बहती थी इसलिए पानी की सभी जरूरतों के लिए जमीन के भीतर से पम्प द्वारा पानी निकाला गया। इस क्षेत्र की अधिकतर भूमि जयपुर के महाराजा की थी। राष्ट्रपति भवन के अग्रप्रांगण में खड़ा जयपुर स्तंभ दिल्ली को नई राजधानी बनाने की स्मृति में जयपुर के महाराजा, सवाई माधो सिंह ने उपहार में दिया था। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-2.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-2.jpg" alt="" width="2048" height="1536" class="aligncenter size-full wp-image-5600" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-2.jpg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-2-300x225.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-2-1024x768.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-2-768x576.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-2-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2048px) 100vw, 2048px" /></a></p>
<p><strong>राष्ट्रपति भवन के निर्माण में सत्रह वर्ष से अधिक समय लगा। लॉर्ड हॉर्डिंग, तत्कालीन गवर्नर जनरल तथा वायसराय जिनके शासन काल में निर्माण कार्य आरंभ हुआ था, चाहते थे कि इमारत चार वर्ष में पूरी हो जाए। परंतु 1928 के शुरू में भी इमारत को अंतिम रूप देना असंभव था। तब तक प्रमुख बाहरी गुंबद बनना शुरू भी नहीं हुआ था। यह विलंब मुख्य रूप से प्रथम विश्व युद्ध के कारण हुआ था। अंतिम शिलान्यास भारत के वायसराय और गवर्नर जनरल लॉर्ड इरविन ने किया और वह 6 अप्रैल, 1929 को नवनिर्मित वायसराय हाउस के प्रथम आवासी बने। मुख्य भवन का निर्माण हारून-अल-रशीद ने किया जबकि अग्रप्रांगण को सुजान सिंह और उनके पुत्र शोभा सिंह ने बनाया। ऐसा अनुमान है कि इस महलनुमा इमारत के निर्माण में सात सौ मिलियन ईंटें और तीन मिलियन क्यूबिक फुट पत्थर लगा और तकरीबन तेईस हजार श्रमिकों ने काम किया। वायसराय हाऊस के निर्माण की अनुमानित लागत 14 मिलियन रुपए आई।</strong></p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-3.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-3.jpg" alt="" width="2048" height="1536" class="aligncenter size-full wp-image-5602" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-3.jpg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-3-300x225.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-3-1024x768.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-3-768x576.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-3-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2048px) 100vw, 2048px" /></a></p>
<p>आखिरी पत्थर भारत के वाइसराय और गवर्नर-जनरल लॉर्ड इरविन, और 6 अप्रैल, 1 9 2 9 को नवनिर्मित वाइसराय हाउस के पहले अधिवासर द्वारा रखे गए थे। मुख्य भवन हरान-अल-रशीद ने बनाया था, जबकि फोरकोर्ट द्वारा किया गया था सुजन सिंह और उनके पुत्र सोभा सिंह यह अनुमान लगाया गया है कि सात सौ मिलियन ईंट और तीन लाख क्यूबिक फीट पत्थर इस विशाल संरचना के निर्माण के लिए चले गए थे जिसमें करीब 21 हजार मजदूर काम कर रहे थे। वाइसराय हाउस के निर्माण की अनुमानित लागत रू। 14 मिलियन लगा। सर एडविन लुट्येंस का मानना था, ‘‘वास्तुशिल्प अन्य किसी कला से कहीं अधिक प्राधिकारी की बौद्धिक प्रगति को प्रस्तुत करता है।’’ लुट्येंस इस भवन के वास्तुशिल्प और अभिकल्पना के बारे में बहुत संजीदा थे तथा प्राचीन यूरोपीय शैली को पसंद करते थे। एच आकार का भवन एक भव्य शैली में विस्तृत भौगोलिक भिन्नताओं को दर्शाता है।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-4.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-4.jpg" alt="" width="2048" height="1536" class="aligncenter size-full wp-image-5603" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-4.jpg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-4-300x225.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-4-1024x768.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-4-768x576.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-4-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2048px) 100vw, 2048px" /></a></p>
<p>इसके बावजूद, इस वास्तुशिल्पीय डिजायन में भारतीय वास्तुशिल्प की अनेक विशेषताएं समाहित की गई हैं। उदाहरण के रूप में, गुंबद सांची के स्तूप से प्रेरित था; छज्जे, छतरी और जाली तथा हाथी, कोबरा, मंदिर के घण्टे आदि जैसे नमूनों पर भारतीय छाप है। इस परियोजना में उनके सहयोगी हरबर्ट बेकर थे जिन्होंने नॉर्थ ब्लॉक और साऊथ ब्लॉक का निर्माण किया था। लुट्येंस और बेकर ने दिल्ली के बहुत सारे डिजायन बनाए जिनमें से अधिकांश को राष्ट्रपति भवन संग्रहालय में संरक्षित और प्रदर्शित किया गया है।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-5.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-5.jpg" alt="" width="2048" height="1536" class="aligncenter size-full wp-image-5604" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-5.jpg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-5-300x225.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-5-1024x768.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-5-768x576.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-5-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2048px) 100vw, 2048px" /></a></p>
<p>स्वतंत्र भारत के इतिहास से भी इन दोनों कक्षों का गहरा नाता है। दरबार हॉल में जहां 15 अगस्त 1947 को जवाहरलाल नेहरू ने स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली थी, तो अशोक हॉल में बाद के ज्यादातर प्रधानमंत्रियों ने।मौजूदा दौर में दरबार हॉल का इस्तेमाल राजकीय, नागरिक और सैन्य अलंकरणों को प्रदान करने के लिए मोटे तौर पर होता है, तो अशोक हॉल में विदेशी मिशनों के प्रमुख अपना पहचान पत्र पेश करते हैं।  दरबार हॉल आज से गणतंत्र मंडप के तौर पर जाना जाएगा तो अशोका हॉल को अब अशोक मंडप के तौर पर पुकारा जायेगा। जिस कक्ष में स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री ने शपथ ली हो, वो आजादी के सात दशक बाद तक दरबार हॉल के तौर पर ही क्यों पुकारा जाता रहा, ये बड़ा सवाल है। ब्रिटिश सम्राट के प्रतिनिधि के तौर पर यहां वायसराय अपना दरबार लगा सकता था, इसलिए इसे दरबार हॉल कहा गया था।  </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-6.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-6.jpg" alt="" width="2048" height="1536" class="aligncenter size-full wp-image-5605" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-6.jpg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-6-300x225.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-6-1024x768.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-6-768x576.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-6-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2048px) 100vw, 2048px" /></a></p>
<p>स्वतंत्र भारत में, जब 26 जनवरी 1950 से भारत औपचारिक तौर पर गणतंत्र बन गया हो, तब भी ये दरबार हॉल ही कहा जाता रहा, किसी का इस तरफ ध्यान नहीं गया। ये सिर्फ लापरवाही की वजह से हुआ या फिर ये हमारी उस मानसिकता का प्रतीक रहा, जिसमें सर्वश्रेष्ठ हमेशा अंग्रेज या उनके दिये हुए नामों को माना जाता रहा, कहना मुश्किल है। अच्छी बात ये है कि द्रौपदी मुर्मू के राष्ट्रपति के तौर पर दो साल पूरे करने का अवसर इस जरूरी बदलाव का विचार आया।  </p>
<p><strong>राष्ट्रपति दौपदी मुर्मू को आज दो साल हो गये। इस अवसर पर उन्होंने राष्ट्रति भवन के दो महत्वपूर्ण कक्षों के नाम बदल दिए।  आम तौर पर राष्ट्रपति भवन की जब चर्चा होती है, तो दरबार हॉल और अशोक हॉल की ही चर्चा सबसे अधिक होती है। आखिर ये दोनों हॉल ही इसके दो सबसे खूबसूरत, भव्य कक्ष हैं। अशोक हॉल को तो अपनी भव्यता के कारण ही लार्ज जुइल बॉक्स के तौर पर भी जाना जाता है मुर्मू ने अपने समय में राष्ट्रपति भवन की लाइब्रेरी पर भी खास ध्यान दिया है, जिस लाइब्रेरी को अब सरस्वती के नाम से जाना जाता है। इस लाइब्रेरी में भारतीय मूल्यों और संकेतों की झलक रही है, डिजाइन के वक्त इसकी फर्श पर जहां स्वास्तिक संगमरमर से बनाया गया, तो उस दीवाल पर विघ्नहर्ता गणेश विराजमान किये गये, जिसके नीचे लगी टेबल- कुर्सी का इस्तेमाल तमाम राष्ट्रपति लाइब्रेरी में आने पर करते रहे हैं। </strong></p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-7.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-7.jpg" alt="" width="2048" height="1536" class="aligncenter size-full wp-image-5606" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-7.jpg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-7-300x225.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-7-1024x768.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-7-768x576.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-7-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2048px) 100vw, 2048px" /></a></p>
<p>आजादी पूर्व अंग्रेजी शासन के दौरान वायसराय हाउस को ब्रिटिश अधिनायकवाद और सार्वभौमिक सत्ता के सबसे बड़े प्रतीक के तौर पर बनाया गया था, जिसमें सम्राट के प्रतिनिधि के तौर पर वायसराय का निवास था। इसलिए इसे वायसराय हाउस कहा जाता था। 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता हासिल होने के बाद इसे गवर्नमेंट हाउस कहा जाने लगा, जिसमें पहले भारतीय गवर्नर जनरल के तौर पर 21 जून 1948 को चक्रवर्ती राजगोपालाचारी यानी राजा जी का प्रवेश हुआ।भारतीय संविधान के लागू होने के बाद 26 जनवरी 1950 से ये राष्ट्रपति भवन के तौर पर जाना गया, राजेंद्र प्रसाद पहले राष्ट्रपति के तौर पर इसमें करीब सवा बारह वर्षों तक रहे। राजेंद्र बाबू के बाद एक के बाद एक तमाम राष्ट्रपतियों का निवास स्थल रहा। राजाजी के समय से ही देश के सर्वोच्च संवैधानिक आसन पर बैठने वाले सभी सोलह लोगों ने वायसराय के इस्तेमाल के लिए बने कमरों का कभी इस्तेमाल नहीं किया, बल्कि उसे गेस्ट हाउस में तब्दील कर अपेक्षाकृत छोटे कमरों में निवास किया। द्रौपदी मुर्मू भी उसी परंपरा का पालन कर रही हैं। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-9.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-9.jpg" alt="" width="2048" height="1536" class="aligncenter size-full wp-image-5608" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-9.jpg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-9-300x225.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-9-1024x768.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-9-768x576.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-9-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2048px) 100vw, 2048px" /></a></p>
<p>राष्ट्रपति के पद पर रामनाथ कोविंद के रहते हुए ही ये शुरू हो गया था, जो मोदी शासनकाल में बने पहले राष्ट्रपति थे। खुद प्रधानमंत्री मोदी ने शासन के सभी अंगों में भारतीय मूल्यों को बढ़ाने पर जोर दिया है, उसकी झलक अब राष्ट्रपति भवन में भी दिखाई दे रही है।  आजादी के बाद अगले सात दशकों तक राष्ट्रपति भवन के बाकी कक्षों और हिस्सों के नाम ज्यों के त्यों रहने दिये गये थे, जो ब्रिटिश काल में वायसराय की जरूरतों के हिसाब से थे, ब्रिटिश मूल्यों के हिसाब से थे। लेकिन मोदी काल में इसके भारतीयकरण की रफ्तार ने जोर पकड़ी. राष्ट्रपति के तौर पर रामनाथ कोविंद के रहते हुए कई नाम बदले गये, जो सिलसिला मौजूदा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौर में भी जारी हैं. दरबार हॉल का गणतंत्र मंडप होना और अशोक हॉल का अशोक मंडप होना इन्हीं निरंतर प्रयासों का नतीजा है।  </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-10.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-10.jpg" alt="" width="2048" height="1536" class="aligncenter size-full wp-image-5609" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-10.jpg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-10-300x225.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-10-1024x768.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-10-768x576.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-10-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2048px) 100vw, 2048px" /></a></p>
<p>इन्हीं प्रयासों की वजह से राजकीय भोज के लिए उपयुक्त होने वाला बैंक्वेट हॉल अब ब्रह्मपुत्र के तौर पर जाना जाता है।विदेशी मेहमानों के सम्मान में यहां राष्ट्रपति की तरफ से भोज दिया जाता है। भोजन भी अब शाकाहारी ही होती है, शराब परोसना भी बंद कर दिया गया।  राष्ट्रपति मुर्मू जिस कक्ष में आगंतुकों से मिलती हैं, वो कक्ष अब साबरमती के तौर पर जाना जाता है। भारत की प्रमुख नदियों के नाम पर ही राष्ट्रपति भवन के ज्यादातर कक्षों को नया नाम दिया गया है। मसलन जिस लांग ड्राइंग रूम में राष्ट्रपति की तरफ से हर साल राज्यपालों और उपराज्यपालों के सम्मेलन की मेजबानी की जाती है, वो जगह अब तुंगभद्रा के तौर पर जानी जाती है। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-13.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-13.jpg" alt="" width="2048" height="1536" class="aligncenter size-full wp-image-5610" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-13.jpg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-13-300x225.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-13-1024x768.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-13-768x576.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/07/Rashtrapati-13-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2048px) 100vw, 2048px" /></a></p>
<p>दरबार हॉल के बगल में मौजूद जिस नॉर्थ ड्राइंग रूम में मेहमान राष्ट्राध्यक्षों से राष्ट्रपति की मुलाकात होती है, उस कक्ष का नया नाम सरयू कर दिया गया है। सरयू के किनारे ही बसी है भगवान राम की अयोध्या, भारत की पवित्रतम नदियों में से एक के तौर पर सरयू की गिनती होती है। जिस मॉर्निग रूम में अमूमन राष्ट्रपति की रूटीन बैठकें होती हैं, उसे अब दक्षिण की मशहूर नदी कावेरी का नाम दिया गया है. यमुना, गोदावरी, महानदी और नर्मदा जैसी पवित्र नदियों पर भी कई महत्वपूर्ण कक्षों के नाम रखे गये हैं। कमेटी रूम का नया नाम यमुना है तो ग्रे डाइनिंग रूम का नया नाम है नर्मदा। इन सबका ही अलग-अलग प्रयोजनों पर इस्तेमाल करती है। </p>
<p>राष्ट्रपति मुर्मू ने आज के दिन उस प्रणब मुखर्जी लाइब्रेरी को भी आम जनता के लिए खोल दिया, जिसका इस्तेमाल पहले सिर्फ राष्ट्रपति भवन से जुड़े हुए कर्मचारी और प्रेसिडेंट एस्टेट के अंदर रहने वाले लोग कर सकते थे। अब राष्ट्रपति भवन संग्रहालय को देखने के लिए आने वाला कोई भी व्यक्ति इस लाइब्रेरी में आकर राष्ट्रपति भवन से लेकर भारतीय संविधान की यात्रा और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बारे में भी जानकारी हासिल कर सकता है। <br />
<strong>(सभी तस्वीरें राष्ट्रपति भवन पुरालेख से)</strong></p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/president-murmu-renames-durbar-hall-and-ashok-hall-in-rashtrapati-bhavan">नाम बदलने की प्रक्रिया &#8216;कर्तव्य पथ&#8217; के रास्ते रायसीना पहाड़ी के &#8216;दरबार हॉल&#8217;, &#8216;अशोक हॉल&#8217; तक पहुंचा, अब क्रमशः &#8216;गणतंत्र मंडप&#8217; और &#8216;अशोक मंडप&#8217; के नाम से जाना जायेगा</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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			</item>
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		<title>असंवैधानिक चुनावी बॉन्ड प्रकरण के बीच भारत का चुनाव आयोग 18 वीं लोकसभा के लिए चुनाव 19 अप्रैल से एक जून के बीच सात चरणों में होने का ऐलान किया</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/politics/lok-sabha-elections-in-seven-phase-from-april-19</link>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 16 Mar 2024 12:32:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[election]]></category>
		<category><![CDATA[lok sabha]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>विज्ञान भवन (नई दिल्ली) : बहरहाल, सर्वोच्च न्यायालय में चल रहे &#8216;असंवैधानिक चुनावी बॉन्ड&#8217; प्रकरण के मध्य &#8216;वोटरों को लुभाने के लिए पैसों का इस्तेमाल न हो,&#8217; अपनी प्रतिबद्धता के साथ भारत का चुनाव आयोग 18 वीं लोक सभा के लिए सात चरणों में आम चुनाव की घोषणा कर दिया है। चुनाव का पहला चरण 19 [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>विज्ञान भवन (नई दिल्ली) : बहरहाल, सर्वोच्च न्यायालय में चल रहे &#8216;असंवैधानिक चुनावी बॉन्ड&#8217; प्रकरण के मध्य &#8216;वोटरों को लुभाने के लिए पैसों का इस्तेमाल न हो,&#8217; अपनी प्रतिबद्धता के साथ भारत का चुनाव आयोग 18 वीं लोक सभा के लिए सात चरणों में आम चुनाव की घोषणा कर दिया है। चुनाव का पहला चरण 19 अप्रैल से शुरू होगा। &#8216;चुनावी बॉन्ड&#8217; प्रकरण में &#8216;भारत का चुनाव आयोग&#8217; के साथ-साथ वे सभी राजनीतिक पार्टियां जो आगामी चुनाव में अपनी-अपनी टोपी उछालने जा रहे हैं, सम्मिलित हैं। वैसे &#8216;चुनावी बॉन्ड&#8217; को सर्वोच्च न्यायालय &#8216;असंवैधानिक&#8217; घोषित कर दिया है। </strong></p>
<p>विज्ञान भवन में खचाखच भरे प्रेस कांफ्रेंस में मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार ने यहां संवाददाता सम्मेलन में बताया कि इस बार चुनाव 19 अप्रैल से एक जून के बीच सात चरणों में होंगे और मतगणना चार जून को होगी और 18वीं लोकसभा के गठन के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के साथ ही देश में आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। इसके साथ ही सरकार ऐसा कोई नीतिगत फैसला नहीं कर सकेगी, जो मतदाताओं के फैसले को प्रभावित कर सके।</p>
<p>कुमार ने बताया कि लोकसभा चुनाव 2024 में कुल 97 करोड़ पंजीकृत मतदाता हैं। इनमें से 49.7 करोड़ पुरुष, 47.1 करोड़ महिलाएं और 48 हजार ट्रांसजेंडर शामिल हैं। साल 2019 के चुनाव में मतदाताओं की कुल संख्या 90 करोड़ थी। ऐसे मतदाताओं की संख्या 1.8 करोड़ है, जो पहली बार मतदान करेंगे और मतदाता सूची में 85 साल से अधिक उम्र के 82 लाख और सौ साल से अधिक उम्र के 2.18 लाख मतदाता शामिल हैं।</p>
<figure id="attachment_5409" aria-describedby="caption-attachment-5409" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/03/H20240314156877.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/03/H20240314156877.jpg" alt="" width="2200" height="1015" class="size-full wp-image-5409" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/03/H20240314156877.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/03/H20240314156877-300x138.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/03/H20240314156877-1024x472.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/03/H20240314156877-768x354.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/03/H20240314156877-1536x709.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/03/H20240314156877-2048x945.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5409" class="wp-caption-text">चुनाव का समय आ गया है</figcaption></figure>
<p>देशभर में मतदाता लिंगानुपात 948 है और 12 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में पुरुष मतदाताओं की तुलना में महिला मतदाताओं की संख्या अधिक है। उन्होंने कहा कि देश में 10.5 लाख से अधिक मतदान केंद्र होंगे और 55 लाख इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) का इस्तेमाल होगा। कुमार ने कहा कि आयोग ने 17 लोकसभा, 16 राष्ट्रपति चुनाव और 400 से अधिक विधानसभा चुनाव कराए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 11 राज्यों के चुनाव शांतिपूर्ण और हिंसा मुक्त रहे और लगभग एक भी सीट पर दोबारा चुनाव नहीं हुआ। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में भी सात चरणों में मतदान हुआ था।</p>
<p>आयोग हिंसा मुक्त चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध है। लोकसभा चुनाव की घोषणा के लिए आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कुमार ने कहा कि चुनाव अधिकारी देशभर में 10.5 लाख मतदान केंद्र स्थापित करने की तैयारी कर रहे हैं। दो नये निर्वाचन आयुक्तों ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधू के साथ मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार ने कहा, ”हम पूरी तरह तैयार हैं और मैं मतदाताओं से अनुरोध करता हूं कि वे स्याही (मतदान वाली) लगवाएं।’’ </p>
<p>उन्होंने कहा, ‘‘यह हम सभी के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है।’’ उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग राष्ट्रीय चुनाव इस तरह से कराने का वादा करता है कि वैश्विक मंच पर भारत का गौरव बढ़े। कुमार ने कहा, ”सभी राज्यों में आकलन के बाद हम एक यादगार, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने को लेकर आश्वस्त हैं।’’</p>
<figure id="attachment_5410" aria-describedby="caption-attachment-5410" style="width: 1564px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/03/H20240316156970.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/03/H20240316156970.jpg" alt="" width="1564" height="1043" class="size-full wp-image-5410" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/03/H20240316156970.jpg 1564w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/03/H20240316156970-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/03/H20240316156970-1024x683.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/03/H20240316156970-768x512.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/03/H20240316156970-1536x1024.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1564px) 100vw, 1564px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5410" class="wp-caption-text">भारत के चुनाव आयोग के अधिकारी</figcaption></figure>
<p><strong>* पहला चरण (21 राज्यों की 102 सीटों के लिए चुनाव होगा)<br />
20 मार्च को गज़ेट नोटिफिकेशन जारी होगा। 19 अप्रैल को मतदान होगा। </p>
<p>* दूसरा चरण (13 राज्यों की 89 सीटों के लिए चुनाव होगा) <br />
28 मार्च को गज़ेट नोटिफिकेशन जारी होगा। 26 अप्रैल को मतदान होगा। </p>
<p>* तीसरा चरण (12 राज्यों की 94 सीटों के लिए चुनाव होगा) <br />
12 अप्रैल को गज़ेट नोटिफिकेशन जारी होगा।  07 मई को मतदान होगा। </p>
<p>* चौथा चरण (10 राज्यों की 96 सीटों के लिए चुनाव होगा) <br />
18 अप्रैल को गज़ेट नोटिफिकेशन जारी होगा। 13 मई को मतदान होगा। </p>
<p>* पांचवा चरण (8 राज्यों की 49 सीटों के लिए चुनाव होगा) <br />
26 अप्रैल को गज़ेट नोटिफिकेशन जारी होगा। 20 मई को मतदान होगा। </p>
<p>* छठा चरण (7 राज्यों की 57 सीटों के लिए चुनाव होगा) <br />
29 अप्रैल गज़ेट नोटिफिकेशन जारी होगा। 25 मई को मतदान होगा। </p>
<p>* सातवां चरण (13 राज्यों की 57 सीटों के लिए चुनाव होगा) <br />
07 मई को गज़ेट नोटिफिकेशन जारी होगा और 01 जून को मतदान होगा। </strong></p>
<p>देशभर में मतदाता लिंगानुपात 948 है और 12 राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों में पुरुष मतदाताओं की तुलना में महिला मतदाताओं की संख्या अधिक है। देश में 10.5 लाख से अधिक मतदान केंद्र होंगे और 55 लाख इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) का इस्तेमाल होगा। कुमार ने कहा कि चुनाव अधिकारी देशभर में 10.5 लाख मतदान केंद्र स्थापित करने की तैयारी कर रहे हैं। दो नये निर्वाचन आयुक्तों ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधू के साथ मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार ने कहा, ”हम पूरी तरह तैयार हैं और मैं मतदाताओं से अनुरोध करता हूं कि वे स्याही (मतदान वाली) लगवाएं।’’</p>
<figure id="attachment_5411" aria-describedby="caption-attachment-5411" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/03/H20240314156896.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/03/H20240314156896.jpg" alt="" width="2200" height="1407" class="size-full wp-image-5411" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/03/H20240314156896.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/03/H20240314156896-300x192.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/03/H20240314156896-1024x655.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/03/H20240314156896-768x491.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/03/H20240314156896-1536x982.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/03/H20240314156896-2048x1310.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5411" class="wp-caption-text">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आचार संहिता लगने के पूर्व दिल्ली के एक कार्यक्रम में</figcaption></figure>
<p>उन्होंने कहा कि पिछले 11 राज्यों के चुनाव शांतिपूर्ण और हिंसामुक्त रहे और लगभग एक भी सीट पर दोबारा चुनाव नहीं हुआ। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में भी सात चरणों में मतदान हुआ था। उस चुनाव में कुल 91.2 करोड़ योग्य मतदाता थे, जिनमें लगभग 43.8 करोड़ महिला मतदाता और लगभग 47.3 करोड़ पुरुष मतदाता थे।कुल लगभग 61.5 करोड़ वोट डाले गए थे और 67.4 प्रतिशत मतदान हुआ था।</p>
<p>* कुल 96.8 करोड़ पंजीकृत वोटर -इनमें 47.1 करोड़ महिलाएं और 49.7 करोड़ पुरुष वोटर हैं<br />
* इनमें 1.89 करोड़ पहली बार वोटर्स हैं और 19.74 करोड़ युवा वोटर्स, जिनकी उम्र 20 से 29 साल की है<br />
* इसके अलावा 01 जनवरी 2024 को जिनकी उम्र 18 साल नहीं हुई थी, उनका भी नाम जोड़ा गया है<br />
* इसमें 13.4 लाख ऐसे आवेदन है, जो 1 अप्रैल 2024 तक 18 साल के हो जाएंगे और वोट दे सकेंगे<br />
* इसमें 88.4 लाख दिव्यांग, 82 लाख 85 साल से अधिक की उम्र के और 48 हज़ार ट्रांसजेंटर शामिल हैं<br />
* 85 साल से अधिक की उम्र के लोगों के लिए घर से वोट करने की सुविधा की गई है, इसके लिए मतदान कर्मी उनके घर पर जाकर उनका वोट रिकॉर्ड करेंगे। </p>
<p>ज्ञातव्य हो कि साल 2019 के चुनाव नतीजों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 303, कांग्रेस ने 52, तृणमूल कांग्रेस ने 22, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने 10, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने पांच, माकपा ने तीन और भाकपा ने दो सीटें जीती थीं।</p>
<p><strong>बहरहाल, सर्वोच्च न्यायालय में चल रहे मुकदमे में प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार &#8216;असंवैधानिक चुनाव बॉन्ड&#8217; प्रकरण के तहत पार्टी चुनावी चंदा के रूप में बीजेपी को 6060.50 करोड़ रुपये, टीएमसी को 1609.50 करोड़ रुपये, कांग्रेस को 1421.90 करोड़ रुपये, भारत राष्ट्र समिति को 1214.70 करोड़ रुपये, बीजू जनता दल को 775.50 करोड़ रुपये, डीएमके को 639 करोड़ रुपये, वाईएसआर कांग्रेस को 337 करोड़ रुपये, टीडीपी को 218.90 करोड़ रुपये, शिवसेना को 159.40 करोड़ रुपये, आरजेडी को 72.50 करोड़ रुपये, आम आदमी पार्टी को 65.50 करोड़ रुपये, जनता दल सेक्युलर को 43.50 करोड़ रुपये, सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा को 36.50 करोड़ रुपये, नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी को 30.50 करोड़ रुपये, जनसेना पार्टी को 21करोड़ रुपये, समाजवादी पार्टी को 14.10 करोड़ रुपये, जेडीयू को 14 करोड़ रुपये, जेएमएम को 13.50 करोड़ रुपये, शिरोमणि अकाली दल को 7.30 करोड़ रुपये, एआईएडीएमके को 6.10 करोड़ रुपये, सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट को 5.50 करोड़ रुपये, राष्ट्रीय जनता दल को 10.01करोड़ रुपये, महाराष्ट्र गोमंतक पार्टी को 0.60 करोड़ रुपये, जेके नेशनल कॉन्फ्रेंस को 0.50 करोड़ रुपये और नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी महाराष्ट्र प्रदेश को 0.50 करोड़ रुपये मिले। और चुनाव आयोग कहता है &#8216;वोटरों को लुभाने के लिए पैसे का इस्तेमाल न हो।&#8217;</strong></p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/politics/lok-sabha-elections-in-seven-phase-from-april-19">असंवैधानिक चुनावी बॉन्ड प्रकरण के बीच भारत का चुनाव आयोग 18 वीं लोकसभा के लिए चुनाव 19 अप्रैल से एक जून के बीच सात चरणों में होने का ऐलान किया</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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