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	<title>madhyapradesh Archives - आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</title>
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	<description>आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</description>
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		<title>फूलन देवी: एक महिला की &#8216;त्रासदी&#8217; महिलाओं के &#8216;रक्षार्थ&#8217;, &#8216;सम्मानार्थ&#8217; &#8216;विचारधारा&#8217; बन गई, हम उस &#8216;विचारधारा&#8217; को मरने नहीं देंगे: सुभाष कश्यप</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 21 Oct 2024 08:17:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली : आप चाहे कुछ भी कहें, आपको अच्छा लगे या बुरा, आप इन शब्दों को हज़म कर सकें अथवा नहीं, लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि आज ही नहीं, आने वाले कई दशकों तक, जब महिला सशक्तिकरण की बात होगी, अपने बूते पर समाज की सभी मुश्किलों से [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली : आप चाहे कुछ भी कहें, आपको अच्छा लगे या बुरा, आप इन शब्दों को हज़म कर सकें अथवा नहीं, लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि आज ही नहीं, आने वाले कई दशकों तक, जब महिला सशक्तिकरण की बात होगी, अपने बूते पर समाज की सभी मुश्किलों से टकराकर, अपने अस्तित्व को कायम रखने की बात होगी, शोध होगा &#8211; तो फूलन देवी के नाम के बिना सम्पूर्ण बातें अधूरा रहेगा। फूलन महिला सशक्तिकरण की प्रतीक कल भी थी, आज भी है और कल भी रहेगी।</strong> </p>
<p>स्वतंत्र भारत के अविभाजित उत्तर प्रदेश के यमुना और चम्बल नदी की धाराओं के उस पार जालौन जिला के गोरहा का पुरवा गांव में एक गरीब मल्लाह के घर जन्म लेने वाली और नई दिल्ली स्थित संसद के पांच सौ कदम दूर अपने सरकारी आवास में अंतिम सांस लेने वाली फूलन ने भारत की महिलाओं सशक्त होने वाली एक दृष्टान्त बनी। यह अलग बात है कि आज़ादी के 78 साल बाद राजनीतिक और सत्ता के गलियारे में आज भी महिलाओं के पैरों के निशान उतने नहीं बन सकें, जितने बनने चाहिए था। आज भी महिलाओं कि त्रासदी की आवाज प्रदेश के विधान सभाओं से लेकर देश के संसद तक नहीं पहुँचती है। आज कहने के लिए महिलाओं के कल्याणार्थ सैकड़ों योजनाएं कागज पर लिखी तो दिखती है, लेकिन देश के 649481 गांवों में विभिन्न जाति, समुदाय के रखने वाली महिलाओं तक नहीं पहुंची है। आज भी महिलाओं को, समाज के दावे-कुचले लोगों को वह सम्मान नहीं मिल पाया है, जिसके वे हकदार थे, और हैं। </p>
<p><strong>फूलन आज शरीर से भले जीवित नहीं है, उसकी विचारधारा &#8211; महिलाओं की रक्षा, दबे-कुचले का सम्मान, निम्न जाति के लोगों को समाज की मुख्यधारा में जोड़ने का अधिकार &#8211; आदि जीवित है और हमारी कोशिश है, रहेगी कि हम उसकी विचारधारा को मजबूत बनाकर समाज के दबे-कुचलों को, खासकर महिलाओं को उस योग्य बनायें ताकि जो त्रासदी फूलन को झेलनी पड़ी, उस त्रासदी का शिकार कोई दूसरी महिला नहीं हो। यह बात अपने जीवन काल में फूलन द्वारा स्थापित एकलव्य सेना के कर्ताधर्ता श्री सुभाष कश्यप कहते हैं। </strong>  </p>
<p><a href="https://www.youtube.com/watch?v=gEVtKxHk9Qg&#038;t=1479s">​@अखबारवाला001(227)✍जब दुःखी फूलन कही😢क्या करूँ इसका (पति उमेद सिंह)? मेरे नाम पर धोखाधड़ी करता है 😢</a></p>
<p>जिस वर्ष देश 16 वां जश्ने आज़ादी मना रहा था, उसी वर्ष के अगस्त महीने के 10 तारीख (1963) को जन्म लेने वाली और जश्ने आज़ादी के 54 वें वर्ष में आज़ादी के महीने के पूर्व माह 25 जुलाई, 2001 को अंतिम सांस लेने वाली फूलन की सामाजिक कद को भारतीय राजनीतिक बाजार में सभी राजनेताओं ने भुनाया।  लेकिन दुर्भाग्य यह है कि फूलन की विचारधारा को किसी ने आज तक राष्ट्रीय राजधानी के कर्तव्यपथ पर एक निशान बनाने दिया। चम्बल और यमुना का पानी उन दिनों से आज तक निरंतर बहती आ रही है और बहती रहेगी, लेकिन राजनीति और सत्ता में अपना वर्चश्व स्थापित रखने वाले लोग ऐसा होने नहीं दिया।</p>
<figure id="attachment_5808" aria-describedby="caption-attachment-5808" style="width: 1500px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/PHOTO-2024-10-20-15-13-59.jpg"><img fetchpriority="high" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/PHOTO-2024-10-20-15-13-59.jpg" alt="" width="1500" height="1500" class="size-full wp-image-5808" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/PHOTO-2024-10-20-15-13-59.jpg 1500w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/PHOTO-2024-10-20-15-13-59-300x300.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/PHOTO-2024-10-20-15-13-59-1024x1024.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/PHOTO-2024-10-20-15-13-59-150x150.jpg 150w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/PHOTO-2024-10-20-15-13-59-768x768.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/PHOTO-2024-10-20-15-13-59-24x24.jpg 24w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/PHOTO-2024-10-20-15-13-59-48x48.jpg 48w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/PHOTO-2024-10-20-15-13-59-96x96.jpg 96w" sizes="(max-width: 1500px) 100vw, 1500px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5808" class="wp-caption-text">एकलव्य सेना (राष्ट्रीय एकलव्य पार्टी) के प्रमुख श्री सुभाष कश्यप</figcaption></figure>
<p><strong>आर्यावर्तइण्डियननेशन(डॉट)कॉम </strong>से बात करते &#8216;<strong>एकलव्य सेना&#8217; (अब राष्ट्रीय एकलव्य पार्टी) के कर्ताधर्ता श्री सुभाष कश्यप</strong> कहते हैं कि &#8220;सन 1994 में जब बहन जी तिहाड़ कारावास से आयी थी तो अपने बीते दिनों की त्रासदी को मद्दे नजर एक सेना का गठन की । उन्होंने ही नाम दिया था &#8220;एकलव्य सेना&#8221; और उसका मुख्य उद्येश्य था समाज के विभिन्न समुदायों में, विभिन्न जातियों में, विभिन्न तबके के लोगों को संघर्ष करने का सबक देना, एक जुट करना ताकि उन्हें उन सामाजिक त्रासदी से बाहर लाया जा सके। एकलव्य सेना का गठन करते समय फूलन हमारे घर में रोने लगी थी। रोने का वजह भी था और वह यह कि अपने जन्म अथवा अल्प आयु में उन्हें शारीरिक, मानसिक, आर्थिक, सामाजिक त्रासदी का सामना करना पड़ा था, अकेले और सपरिवार।&#8221; </p>
<p>कश्यप कहते हैं &#8220;आप सभी तो उस कालखंड को देखा है। फूलन को देखा है। ग्वालियर जेल से लेकर तिहाड़ जेल तक और फिर हमारे किंग्सवे कैम्प घर और सांसद आवास तक उसे देखा है। फूलन महज एक महिला नहीं थी, बल्कि स्वतंत्र भारत में महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों को, महिलाओं के प्रति दमनकारी नीतियों का भोक्ता भी थी। फूलन एक प्रगतिशील विचारधारा की लड़की थी जो किसी का अन्याय बर्दाश्त नहीं कर सकती थी, करती थी और जुल्म के खिलाफ हमेशा लड़ने के लिए सज्ज रहती थी। आप भी जानते हैं जब वह महज 11 वर्ष की थी तो उसका विवाह पुत्ती लाल से करवा दी गई। विवाह के समय फूलन और उसके पति की आयु में लगभग 30 वर्ष का फासला था। समयांतराल फूलन को गांव में ही उसका पति प्रताड़ित करने लगा अपने पति की प्रताड़ना से थक कर वह अपने मायके आ गई और वहीं रहने लगी।&#8221;</p>
<p>कश्यप आगे कहते हैं: &#8220;लेकिन वहां भी समाज उसका पीछा नहीं छोड़ा। उसे एक बदचलन महिला कहा जाने लगा। आज भारत के समाज में लाखों ही नहीं करोड़ों महिलाएं हैं जो विवाहोप्रान्त भी पति से अलग रहती हैं, अपने मायके में रहती है, लेकिन क्या आज समाज उन्हें उन शब्दों से अलंकृत करता है? नहीं। परन्तु फूलन को भरी पंचायत में जूतों से मारा गया, अपमानिक किया गया। दुर्भाग्य का उत्कर्ष तो यह रहा कि समाज के लोग मूक-दर्शक बने रहे।&#8221;</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot-2024-10-21-at-11.07.30-AM.png"><img decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot-2024-10-21-at-11.07.30-AM.png" alt="" width="1628" height="888" class="aligncenter size-full wp-image-5809" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot-2024-10-21-at-11.07.30-AM.png 1628w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot-2024-10-21-at-11.07.30-AM-300x164.png 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot-2024-10-21-at-11.07.30-AM-1024x559.png 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot-2024-10-21-at-11.07.30-AM-768x419.png 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot-2024-10-21-at-11.07.30-AM-1536x838.png 1536w" sizes="(max-width: 1628px) 100vw, 1628px" /></a></p>
<p><strong>कश्यप का कहना है कि &#8220;फूलन महज एक हार-मांस से बना शरीर का नाम नहीं था, बल्कि एक विचारधारा थी और आज भी है । उसकी विचारधारा लड़ाकू था उन सभी यातनाओं के विरुद्ध लड़ने की जो महिलाओं के प्रतिदिन झेलना होता है। यह कल भी होता था। यह आज भी होता है। अंतर सिर्फ यह है कि उन यातनाओं के विरुद्ध फूलन समाज से लड़ने के लिए, उन वर्गों को धूल चटाने के लिए सज्ज हो गयी, खड़ी हो गयी, स्वयं की रक्षा के लिए स्वयं को सज्ज कर ली। कोई डाकू नाम दिया, कोई दस्यु कहा, कोई बैंडिट क्वीन कहा तो कोई फूलन देवी नाम से अलंकृत किया।&#8221;</strong></p>
<p>कश्यप कहते हैं कि &#8220;अपवाद छोड़कर, भारत ही नहीं विश्व के किसी भी कोने में रहने वाले लोग जिन्होंने उन दिनों पत्र-पत्रिकाओं में फूलन के बारे में पढ़ा, जाना, सभी की सोच फूलन के प्रति सकारात्मक ही रहा। कोई साढ़े तीन &#8211; चार दशक पहले आप भी लिखे थे। आप भी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश के बीहड़ों में घूमे थे। महिलाओं के प्रति समाज का सोच बदलने का बीड़ा फूलन ने उठाया था। हम सभी पिछले पांच दशकों से उसके साथ रहे, साथ दिए। आज फूलन नहीं है, लेकिन उसका विचार हम सभी जीवित रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। क्योंकि आज भी समाज में महिलाओं का, दलितों का, दबे-कुचलों का वही हश्र है, जो उन दिनों था।&#8221;</p>
<p>आज से चार दशक पहले जब भारत ही नहीं विश्व के पत्र-पत्रिकाओं में फूलन की बात, उसकी विचारों की बाद लिखी जाने जगी, तो लोगों ने यह भी लिखा कि फूलन में वह शक्ति है जो भारत ही नहीं, विश्व के सिनेमा में काम करने वाले अदाकार और अदाकारों में नहीं है।यह भी लिखा गया था कि &#8216;वह माधुरी दीक्षित (उन दिनों बॉलीवुड के शीर्ष पर थी) से भी अच्छी पहचान वाली है, विश्व के लोग उसे महिला अदाकारों से अधिक जानते हैं; महिला अदाकारा श्रीदेवी से अधिक जन सैलाव एकत्रित करने की क्षमता रखती है, मनेका गाँधी से अधिक राजनीतिक पकड़ रखती है, मेधा पाटेकर से अधिक विश्व के पत्र-पत्रिकाओं में स्थान बनाने की क्षमता रखती है।&#8217; </p>
<p>कश्यप आगे कहते हैं : &#8220;लॉस एंजेलिस टाइम्स ने लिखा भी था कि दुनिया के किसी कोने में भी जब इतिहास लिखा जाएगा तो उसमें फूलन देवी का अपना एक पूरा अध्याय होगा।यह गलत नहीं है। फूलन का जीवन इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि भारतीय समाज में महिलाओं का संघर्ष निरंतर जारी है। कोई उस संघर्ष में पीसना अपने जीवन का प्रारब्ध समझ लेती है, कोई प्रारब्ध को बदल देती है। यही विचारधारा है और फूलन इस विचाधारा पर खड़ी उतरी अपने सांस के अंतिम क्षण तक। फूलन आज देश की सम्पूर्ण आवादी में महिलाओं का प्रतिनिधित्व करती है। वह समाज के दबे, कुचले लोगों के लिए, महिलाओं के लिए, बच्चियों के लिए, बच्चों के लिए एक मिसाल थी और हम सभी लोग उनके उस एकलव्य विचारधारा को जीवित रखने के लिए कटिबद्ध हैं। </p>
<figure id="attachment_5810" aria-describedby="caption-attachment-5810" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/Phoolan-13.jpg"><img decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/Phoolan-13.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-5810" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/Phoolan-13.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/Phoolan-13-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/Phoolan-13-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/Phoolan-13-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/Phoolan-13-1536x1026.jpg 1536w" sizes="(max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5810" class="wp-caption-text">फूलन देवी और उसके सहयोगी<br /></figcaption></figure>
<p><strong>कश्यप का कहना है कि फूलन बहुत ही निर्धन और समाज से उपेक्षित जाति से आती थी, अनपढ़ थी, अशिक्षित थी, देखने में सुन्दर भी नहीं थी &#8211; परन्तु महिलाओं की सुरक्षा के प्रति उसका विचार उतना ही सबल और प्रवल था कि वह उन महान हस्तियों से ऊपर थी। देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी यह चाहती थी कि उसे समाज की मुख्यधारा में लाया जाए। और यही कारण है कि सन 1982 में आत्मसमर्पण की। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक राजेंद्र चतुर्वेदी की भूमिका को नहीं भुलाया जा सकता है।</strong> </p>
<p>कहते हैं जमीनी विवाद के चलते फूलन ने अपने ही चचेरे भाई पर ईंट से वार कर दिया था। फूलन के इस स्वभाव के चलते उनकी शादी उनसे उम्र में 30 साल बड़े पुत्तीलाल मल्लाह से करा दी गई थी, जो पास के गांव में ही रहता था। मायके वालों ने फूलन को जल्द ही ससुराल भेज दिया था। ससुराल में फूलन को शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी। एक बच्ची के लिए ये सब कितना पीड़ादायक हो सकता है इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। ससुराल से प्रताड़ना झेलने के बाद फूलन मदद की उम्मीद से अपने मायके वापस लौटी लेकिन यहां उसे एक झूठे इल्जाम लगाकर जेल भेज दिया गया। जब वह बाहर आयी उसका उठना &#8211; बैठना डाकुओं की समूह के साथ होने लगा और देखते-ही-देखते फूलन गुर्जर सिंह की गैंग में शामिल हो गयी। </p>
<p>कश्यप कहते हैं &#8220;हम सभी इस बात का गवाह है कि फूलन अभी अपनी पिछली जिंदगी की कड़वी यादों से पूरी तरह बाहर भी नहीं आ पायीं थी कि एक घटना उसकी किस्मत पूरी तरह बदल कर रख दी। कहते हैं फूलन के तत्कालीन बागियों के साथ आने पर समूह के प्रमुख गुर्जर सिंह की की निगाह उसके प्रति गलत थी। कई बार गलत घटनाओं की कोशिश की गयी । समूह के विक्रम मल्लाह का फूलन के प्रति सकारात्मक दृष्टि था। परिणाम यह हुआ कि गुर्जर सिंह की हत्या हो गई और विक्रम सरदार बन गया। इसके बाद फूलन और विक्रम समूह के विस्तार कार्य में लग गए। </p>
<p>इस बीच गुर्जर सिंह की हत्या का बदला लेने के लिए दस्यु का दूसरा समूह राम और लाला राम ठाकुर विक्रम मल्लाह की हत्या कर दी और बदला लेने के लिए पुरुषों को ढूंढने लगे। फूलन को इसकी भनक लग गयी। वह यह भी जानती थी कि इस क्रम में उसकी भी जान जा सकती है क्योंकि वह विक्रम से बहुत नजदीक थी। ठाकुरों द्वारा पुरुषों को ढूंढने में एक पुरुष शिवनारायण (फूलन के भाई) भी था। लेकिन फूलन अपने भाई सहित अन्य पुरुषों, बच्चों को किसी तरह से बचाकर वहां से भगाने में सफल हो गयी। एक बहन का अपने भाई और समाज के अन्य छोटे-छोटे बच्चों की जान बचाने का यह प्रथम दृष्टान्त था। यह महिला सशक्तिकरण का बहुत बड़ा उदहारण था। पुरुष नहीं मिलने के कारण, ठाकुर लोगों ने फूलन को ही उठाकर बेहमई ले आया। बेहमई गाँव में अगले तीन हफ़्तों तक फूलन का सामूहिक बलात्कार किया गया। यही त्रासदी फूलन को फूलन देवी बना दिया। बेहमई गाँव से फूलन के साथी उसे जैसे तैसे बचाकर लाये। बेहमई गाँव की घटना के बाद फूलन ने खुद का गैंग बनाया और समयांतराल फूलन देवी को देश के पत्र-पत्रिकाओं ने &#8216;बैंडिट क्वीन&#8217; से अलंकृत कर दिया। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/Phoolan-16.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/Phoolan-16.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-5811" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/Phoolan-16.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/Phoolan-16-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/Phoolan-16-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/Phoolan-16-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/Phoolan-16-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p><strong>सन 1981 साल का 14 फरवरी।  पुलिस वर्दी में सज्ज फूलन अपने साथियों के साथ बेहमई गाँव पहुंची। फूलन की आँखों में बदले की ज्वाला जल रही थी। फूलन और उसके साथियों ने पूरे गाँव को चारों और से घेर लिया। उस दिन गाँव में शादी का आयोजन था। फूलन ने लालाराम ठाकुर के बारे में खूब पूछताछ की। कोई पुख्ता जानकारी ना मिलने पर फूलन ने उस गाँव के 22 लोगों को एक कतार में खड़ा किया और गोलियों से भून डाला। ये सभी लोग ठाकुर जाति से ताल्लुक रखते थे। ये घटना बेहमई नरसंहार के नाम से अगले दिन पूरे देश में फ़ैल गयी। बेहमई नरसंहार के बाद बाद फूलन का नाम दिल्ली की सड़कों पर सुनायी देने लगा। मामला इतना बढ़ गया की 2 राज्यों की पुलिस  को फूलन को ढूंढ़ने के लिए लगाया गया। फूलन का गैंग मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश में सक्रिय था। इस कारण दिल्ली से लगातार दोनों राज्यों पर दबाव बनाया जा रहा था।</strong> </p>
<p>श्री कश्यप का कहना है कि &#8220;तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी अब तक फूलन की क्षमता को आंक चुकी थी। लेकिन वह नहीं चाहती थी कि ऐसी घटना फिर से घटित हो। उन दिनों मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री थे अर्जुन सिंह। प्रधानमंत्री चाहती थी कि वे इस कार्य के लिए किसी ऐसे अधिकारी का चयन करें जिस पर फूलन का विश्वास अडिग हो जाय। और एशिया ही हुआ। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक राजेंद्र चतुर्वेदी के कंधे पर इस कार्य को सौंपा गया। चतुर्वेदी के प्रति चम्बल और बीहड़ों के तत्कालीन दस्युओं का विश्वास बन चूका था। चतुर्वेदी ने इसके पहले भी डाकू मलखान सिंह को आत्मसमर्पण के लिए मनाया थे। अनेकानेक प्रयत्न किये गए थे उन दिनों। </p>
<p><a href="https://www.youtube.com/watch?v=1-vRW7G66mk&#038;t=1048s">फूलन देवी एक विचारधारा है </a></p>
<p>फूलन उतनी सी उम्र में जितनी त्रासदी को झेली थी, कोई भी महिला किसी भी पुरुष पर विश्वास नहीं कर सकती थी, चाहे वह पुलिस ही क्यों न हो। फूलन का उत्तर प्रदेश पुलिस का विश्वास नहीं था और यही कारण है कि पहले जहाँ आत्मसमर्पण की बात सुनते ही वह चिल्लाने लगती थी, शांत होने पर सकारात्मक पहल करने लगी। जो उस कालखंड के गवाह है वे इस बात को जानते हैं कि आत्मसमर्पण की लाख कोशिशों के बाद भी जब फूलन को राजेंद्र चतुर्वेदी पर विश्वास नहीं हुआ तब चतुर्वेदी अपनी पत्नी और बच्चे समेत फूलन के ठिकाने पर पहुंच गए। फूलन को विश्वास दिलाने के लिए अपना बच्चा उनके गोद में रख दिए और कहे अगर आपको विश्वास ना हो तो मेरे बच्चे को आप गिरवी रख लीजिये।&#8221;</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/Phoolan-25.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/Phoolan-25.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-5812" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/Phoolan-25.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/Phoolan-25-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/Phoolan-25-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/Phoolan-25-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/Phoolan-25-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p>समय बीत रहा था। विश्वास के धागे और मजबूत हो रहे थे। उस दिन 12 फरवरी था और साल 1983 &#8211; चतुर्वेदी का प्रयास सफल होने वाला था। तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह की उपस्थिति में आत्मसमर्पण करने वाली थी। फूलन कुछ शर्तें रखी थी, जिसमें कुछ बातों को सुनकर, पढ़कर उस ज़माने के लोग भी हँसे थे, लेकिन एक बेजुवान के प्रति फूलन की वेदना और संवेदना देखकर कई संवेदनहीन व्यक्ति भी संवेदनशील हो गए थे। फूलन का कहाँ था कि उसके परिवार के लोगों, भाई बहनों के साथ-साथ बकरी और गाय को भी उसके गाँव से मध्यप्रदेश सुरक्षित लाया जाएगा। फूलन यह भी कही कि जब वह सभी आत्मसमर्पण करेंगे तो किसी को भी फांसी पर नहीं लटकाया जायेगा और अंत में उसके भाई शिवनारायण को सरकारी नौकरी मिलेगी। दिल्ली में इंदिरा गांधी बैठी थी और मध्यप्रदेश में अर्जुन सिंह के साथ चतुर्वेदी। सभी शर्तें मान ली गयी। स्वतंत्र भारत के इतिहास में शायद ऐसी घटना कभी नहीं हुई। मल्लाह जाति की एक महिला और उसके समूह के लोगों द्वारा समर्पण में कानून व्यवस्था को बनाये रखने के लिए दस हज़ार से भी अधिक पुलिस कर्मी उपस्थित थे। समर्पण के समय में भी उसने अपने से अधिक उन तमान लोगों के लिए, निरीह, बेजुवान बकरी-गाय के लिए और भाई शिवनारायण के लिए सोची &#8211; यह सशक्तिकरण का ही दृष्टान्त है।  </p>
<p>फूलन देवी ने महात्मा गांधी और माँ दुर्गा के समक्ष अपने हथियार रख दिए। फूलन पर हत्या के 22 मामले,  लूटपाट के 30 और अपहरण के 18 मुकदमें दर्ज थे। फूलन देवी के अगले 11 साल जेल की सलाखों के पीछे गुजरे। कुछ वर्ष मध्यप्रदेश में और बाद में तिहाड़ जेल में। उस कालखंड में, खासकर मध्यप्रदेश से तिहाड़ जेल लाने और उसकी रिहाई करने/करवाने में श्री कश्यप के पिता हरफूल सिंह और उनके परिवार का जो योगदान रहा, शब्दों में नहीं लिखा जा सकता है। करीब 11 साल की सजा काटने के बाद उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने फूलन पर लगे  सारे इल्जाम वापस ले लिए। साल 1994 में जेल से रिहा हुयी। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/Phoolan-26.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/Phoolan-26.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-5813" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/Phoolan-26.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/Phoolan-26-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/Phoolan-26-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/Phoolan-26-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/Phoolan-26-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p>उस दिन 19 फरबरी था सन 1994 साल का। दिल्ली के तिहाड़ जेल से फूलन देवी को हम सभी लाये थे। साथ थे फूलन देवी के चाचा हरफूल सिंह, उनके पुत्र सुभाष कश्यप और मल्लाह/निषाद समाज के सैकड़ों लोग। तिहाड़ से हम सभी सीधा किंग्सवे कैम्प के पास ओल्ड गुप्ता कॉलोनी स्थित श्री हरफूल सिंह के घर पहुंचे। फूलन देवी का यही ठिकाना था तिहाड़ के बाद दिल्ली सल्तनत में। उमेद सिंह उन दिनों &#8216;एकल&#8217; और वे भी साथ थे। गुप्ता कॉलोनी में हरफूल सिंह की पत्नी, उनका सभी बेटा, बहु सुश्री माया, सुश्री सुनीता जी (जो बाद में पहुंची) के अलावे फूलन देवी की बड़ी बहन रुक्मिणी, छोटी बहन मुन्नी और अन्य लोग उपस्थित थे। फूलन के जीवन में श्री हरफूल सिंह की भूमिका भले आज किसी भी किताबों के पन्नों में, टीवी पर, फूलन देवी पर बनी फिल्मों में नामोनिशान नहीं हो, सभी अपने-अपने नाम, शोहरत और पैसे कमाने के चक्कर में भले हरफूल सिंह और उनके परिवार को भूल गए हों,  उपेक्षित कर दिए हों, लेकिन हकीकत यही है कि अगर हरफूल सिंह नहीं होते तो शायद फूलन देवी ग्वालियर जेल से तिहाड़ जेल भी नहीं आती। जेल से बाहर कदम भी नहीं रख पाती। धन्यवाद के पात्र थे हरफूल सिंह साहब, उनका समस्त परिवार, उनके बेटे, उनकी पत्नी, बहुएं जो अपने जाति &#8211; संप्रदाय के लिए अपना सब कुछ उत्सर्ग कर दिए। </p>
<p><strong>(आगे: मल्लाह/निषाद समाज के साथ-साथ समाज के सभी बेजुवान दबे कुचलों को अपने अस्तित्व के लिए एकलव्यी बनना होगा )</strong></p>
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		<title>प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर कहीं &#8216;जल संरक्षण संग्रहालय&#8217; का उद्घाटन, तो कहीं कुनो नॅशनल पार्क में मोदीजी आठ जंगली चीतों को छोड़ा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 17 Sep 2022 13:08:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीव-जन्तु और पर्यावरण]]></category>
		<category><![CDATA[chitah]]></category>
		<category><![CDATA[madhyapradesh]]></category>
		<category><![CDATA[pmo]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली : आज देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 72 वां जन्मदिन है। आज़ाद भारत के वे पहले प्रधानमंत्री हैं जिनका जन्म स्वतंत्र भारत में हुआ है। आज देश में उनके जन्मदिन के सम्मानार्थ सुलभ इंटरनेशनल सोसल सर्विस ऑर्गेनाइजेशन द्वारा जलसंरक्षण के महत्व को प्रदर्शित करने वाले एक संग्रहालय का उद्घाटन किया गया जिससे [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली : आज देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 72 वां जन्मदिन है। आज़ाद भारत के वे पहले प्रधानमंत्री हैं जिनका जन्म स्वतंत्र भारत में हुआ है। आज देश में उनके जन्मदिन के सम्मानार्थ सुलभ इंटरनेशनल सोसल सर्विस ऑर्गेनाइजेशन द्वारा जलसंरक्षण के महत्व को प्रदर्शित करने वाले एक संग्रहालय का उद्घाटन किया गया जिससे आने वाले दिनों में जल संबंधी शिक्षण एवं अनुसंधान के विभिन्न पहलुओं को प्रमुखता से सामने रखना एवं लोगों के बीच जल संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा करना है। वहीँ भारतीय जनता पार्टी द्वारा एक &#8216;विकासात्मक&#8217; पहल के तहत &#8216;सेवा&#8217; गतिविधियां शुरू की गई। </strong></p>
<p>लेकिन इन सभी क्रियाकलापों से दूर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भारत से विलुप्त हो चुके जंगली चीतों को कुनो नेशनल पार्क में छोड़ा। नामीबिया से लाए गए इन चीतों को ‘प्रोजेक्ट चीता’, जो कि मांसाहारी बड़े जंगली जानवरों के अंतर-महाद्वीपीय स्थानांतरण की दुनिया की पहली परियोजना है, के तहत भारत में पेश किया जा रहा है। इन आठ चीतों में से पांच मादा और तीन नर हैं। प्रधानमंत्री ने कुनो नेशनल पार्क में दो रिलीज पॉइंट पर इन चीतों को छोड़ा। वे चीता मित्रों, चीता पुनर्वास प्रबंधन समूह और छात्रों के साथ बातचीत भी की। </p>
<p><strong>प्रधानमंत्री द्वारा कुनो नेशनल पार्क में जंगली चीतों को छोड़े जाने का कदम भारत के वन्य जीवन एवं प्राकृतिक वास को पुनर्जीवित करने व उनमें विविधता लाने के उनके प्रयासों का हिस्सा है। चीता को 1952 में भारत से विलुप्त घोषित कर दिया गया था। जिन चीतों को छोड़ा गया है, वे नामीबिया के हैं और उन्हें इस साल की शुरुआत में हस्ताक्षरित एक समझौता ज्ञापन के तहत भारत लाया गया है। भारत में चीता को ‘प्रोजेक्ट चीता’, जोकि मांसाहारी बड़े जंगली जानवरों के अंतर-महाद्वीपीय स्थानांतरण की दुनिया की पहली परियोजना है, के तहत लाया जा रहा है।</strong></p>
<figure id="attachment_4466" aria-describedby="caption-attachment-4466" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/H20220917117641.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/H20220917117641.jpg" alt="" width="2200" height="1007" class="size-full wp-image-4466" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/H20220917117641.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/H20220917117641-300x137.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/H20220917117641-1024x469.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/H20220917117641-768x352.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/H20220917117641-1536x703.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/H20220917117641-2048x937.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-4466" class="wp-caption-text">PM releases wild Cheetahs &#8211; which had become extinct from India, in Kuno National Park, in Madhya Pradesh on September 17, 2022. Photo: PIB</figcaption></figure>
<p>ये चीता भारत में खुले जंगल और चरागाहों के इकोसिस्टम को बहाल करने में मदद करेंगे। इससे जैव विविधता के संरक्षण में मदद मिलेगी और यह जल सुरक्षा, कार्बन पृथक्करण और मृदा की नमी के संरक्षण जैसी इकोसिस्टम से जुड़ी सेवाओं को बढ़ाने में मदद करेगा, जिससे बड़े पैमाने पर समाज को लाभ होगा। यह प्रयास पर्यावरण एवं वन्यजीव संरक्षण के प्रति प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता के अनुरूप है और यह पर्यावरण के अनुकूल विकास एवं इकोटूरिज्म की गतिविधियों के जरिए स्थानीय समुदाय की आजीविका के अवसरों में वृद्धि करेगा।</p>
<figure id="attachment_4467" aria-describedby="caption-attachment-4467" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/H20220917117645.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/H20220917117645.jpg" alt="" width="2200" height="1068" class="size-full wp-image-4467" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/H20220917117645.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/H20220917117645-300x146.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/H20220917117645-1024x497.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/H20220917117645-768x373.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/H20220917117645-1536x746.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/H20220917117645-2048x994.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-4467" class="wp-caption-text">PM releases wild Cheetahs &#8211; which had become extinct from India, in Kuno National Park, in Madhya Pradesh on September 17, 2022. Photo: PIB</figcaption></figure>
<p>भारत की धरती पर चीतों को फिर से लौटाने का यह ऐतिहासिक कदम पिछले आठ वर्षों में स्थिरता और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने के विभिन्न उपायों की एक लंबी श्रृंखला का हिस्सा है, जिसके परिणामस्वरूप पर्यावरण संरक्षण और स्थिरता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल हुई हैं। वर्ष 2014 में संरक्षित क्षेत्रों का जो कवरेज देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 4.90 प्रतिशत था, वह अब बढ़कर 5.03 प्रतिशत हो गया है। वर्ष 2014 में देश में जहां कुल 1,61,081.62 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के साथ 740 संरक्षित क्षेत्र थे, वहीं अब कुल 1,71,921 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के साथ 981 संरक्षित क्षेत्र हो गए हैं।</p>
<p>पिछले चार वर्षों में वन और वृक्षों के कवरेज में 16,000 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई है। भारत दुनिया के उन चंद देशों में शामिल है जहां वन क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है। कम्युनिटी रिजर्व की संख्या में भी वृद्धि हुई है। वर्ष 2014 में जहां सिर्फ 43 कम्युनिटी रिजर्व थे, 2019 में उनकी संख्या बढ़कर 100 से भी अधिक हो गई है।</p>
<figure id="attachment_4468" aria-describedby="caption-attachment-4468" style="width: 1558px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/H20220917117639.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/H20220917117639.jpg" alt="" width="1558" height="1557" class="size-full wp-image-4468" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/H20220917117639.jpg 1558w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/H20220917117639-300x300.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/H20220917117639-1024x1024.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/H20220917117639-150x150.jpg 150w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/H20220917117639-768x768.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/H20220917117639-1536x1536.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/H20220917117639-24x24.jpg 24w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/H20220917117639-48x48.jpg 48w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/H20220917117639-96x96.jpg 96w" sizes="auto, (max-width: 1558px) 100vw, 1558px" /></a><figcaption id="caption-attachment-4468" class="wp-caption-text">PM releases wild Cheetahs &#8211; which had become extinct from India, in Kuno National Park, in Madhya Pradesh on September 17, 2022. Photo: PIB</figcaption></figure>
<p><strong>भारत में 52 टाइगर रिजर्व हैं, जोकि 18 राज्यों के लगभग 75,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले हुए हैं। यहां दुनिया के लगभग 75 प्रतिशत जंगली बाघ बसते हैं। भारत ने लक्षित वर्ष 2022 से चार साल पहले 2018 में ही बाघों की संख्या को दोगुना करने का लक्ष्य हासिल कर लिया। भारत में बाघों की संख्या 2014 में 2,226 से बढ़कर 2018 में 2,967 हो गई है। बाघों के संरक्षण के लिए बजटीय आवंटन 2014 में 185 करोड़ रुपये से बढ़कर 2022 में 300 करोड़ रुपये हो गया है।एशियाई शेरों की संख्या में 28.87 प्रतिशत की वृद्धि दर (अब तक की सबसे अधिक वृद्धि दरों में से एक) के साथ निरंतर वृद्धि हुई है। एशियाई शेरों की संख्या 2015 में 523 से बढ़कर 674 हो गई है। भारत में अब (2020) तेन्दुओं की संख्या 12,852 है, जबकि 2014 के पिछले अनुमानों के अनुसार यह संख्या 7910 ही थी। तेन्दुओं की संख्या में 60 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।</strong></p>
<p>वहीँ एक कार्यक्रम में लोगों को सम्बोधित करते प्रधानमंत्री ने कहा: &#8220;मैं देश के लोगों को, मध्य प्रदेश के लोगों को इस ऐतिहासिक अवसर पर बहुत-बहुत बधाई देता हूं। लेकिन इससे भी ज्यादा मैं आप सबको, इस इलाके के नागरिकों को एक विशेष बधाई देता हूं। हिन्दुस्तान तो बहुत बड़ा है। जंगल भी बहुत है। वन्य पशु भी बहुत जगह पर हैं। लेकिन ये चीते आपके यहां आने का भारत सरकार ने निर्णय क्यों किया? क्या कभी आपने सोचा है? यही तो सबसे बड़ी बात है। ये चीता आपको सुपुर्द इसलिए किया है कि आप पर हमारा भरोसा है। आप मुसीबत झेलेंगे, लेकिन चीते पर मुसीबत नहीं आने देंगे, ये मेरा विश्वास है। इसी के कारण आज मैं आप सबको ये आठ चीतों की जिम्मेदारी सुपुर्द करने के लिए आया हूं, और मुझे पूरा विश्वास है इस देश के लोगों ने  कभी मेरे भरोसे को तोड़ा नहीं है। मध्य प्रदेश के लोगों ने कभी भी मेरे भरोसे पर आंच नहीं आने दी है और ये श्योपुर इलाके के लोगों को भी मुझे पूरा भरोसा है कि मेरे भरोसे पर आंच नहीं आने देंगे।&#8221;</p>
<p>इस अवसर पर मध्य प्रदेश के राज्यपाल  श्री मंगूभाई पटेल; मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान; केन्द्रीय मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर, श्री भूपेन्द्र यादव, श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया और श्री अश्विनी चौबे उपस्थित थे।    </p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b5-%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%81-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%a3/pm-releases-wild-cheetahs-in-kuno-national-park">प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर कहीं &#8216;जल संरक्षण संग्रहालय&#8217; का उद्घाटन, तो कहीं कुनो नॅशनल पार्क में मोदीजी आठ जंगली चीतों को छोड़ा</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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