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	<title>AIR Archives - आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</title>
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		<title>ये आकाशवाणी है &#8230;..यह नए भारत की विकास गाथा को देश के कोने-कोने तक ले जाएगा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 28 Apr 2023 13:30:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली :प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज 91 स्थानों पर 100 वाट की क्षमता के लो पॉवर एफएम ट्रांसमीटरों को कमीशन किया। ये ट्रांसमीटर 20 राज्यों के 84 जिलों में संस्थापित किए गए हैं। इससे आकाशावाणी के ट्रांसमीटरों के नेटवर्क की संख्या 524 से बढ़कर 615 हो गई है। इनके जुड़ने से आकाशवाणी का कवरेज [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली :प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज 91 स्थानों पर 100 वाट की क्षमता के लो पॉवर एफएम ट्रांसमीटरों को कमीशन किया। ये ट्रांसमीटर 20 राज्यों के 84 जिलों में संस्थापित किए गए हैं। इससे आकाशावाणी के ट्रांसमीटरों के नेटवर्क की संख्या 524 से बढ़कर 615 हो गई है। इनके जुड़ने से आकाशवाणी का कवरेज देश की आबादी के 73.5 प्रतिशत तक बढ़ जाएगा। ट्रांसमीटरों के संस्थापन के लिए वाम उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों, आकांक्षी जिलों तथा देश के सीमावर्ती क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है।</strong></p>
<p>मोबाइल फोनों से सुसज्जित एफएम रिसीवर की सुनने की स्पष्ट गुणवत्ता और सरल उपलब्धता ने देश में एमएफ रेडियो सेवा की मांग को बढ़ा दिया है। इस मांग को पूरा करने और संगठन के क्षमता निर्माण की दिशा में एक प्रमुख कदम के रूप में, सरकार ने देश में 63 और एफएम ट्रांसमीटरों की संस्थापना को मंजूरी दे दी है।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने इस ऐतिहासिक अवसर पर आकाशवाणी को बधाई दी। इस जुड़ाव के महत्व की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का दिन अखिल भारतीय एफएम बनने की दिशा में आकाशवाणी द्वारा एफएम सेवाओं के विस्तार में एक उल्लेखनीय कदम है। उन्होंने रेखांकित किया कि आकाशवाणी द्वारा 91 एफएम ट्रांसमीटरों की शुरुआत देश के 84 जिलों और 2 करोड़ लोगों के लिए एक उपहार है।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार प्रौद्योगिकी के लोकतंत्रीकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘अगर भारत को अपनी पूरी क्षमता तक विकास करना है तो यह महत्वपूर्ण है कि किसी भी भारतीय को अवसर की कमी महसूस न हो। ’ आधुनिक प्रौद्योगिकी को सुगम्य और किफायती बनाना इसकी कुंजी है। उन्होंने सभी गांवों के लिए ऑप्टिकल फाइबर तथा सबसे सस्ती डेटा लागत, जिसमें सूचना तक पहुंच को सरल बना दिया है, का उल्लेख करते हुए इसकी व्याख्या की। उन्होंने कहा कि इसने गांवों में डिजिटल उद्यमशीलता को नया प्रोत्साहन दिया है। इसी प्रकार, यूपीआई ने छोटे व्यवसायियों और स्ट्रीट वेंडरों को बैंकिंग सेवाओं की सुविधा प्राप्त करने में सहायता प्रदान की है।</p>
<figure id="attachment_4886" aria-describedby="caption-attachment-4886" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/04/H20230428131042.jpg"><img fetchpriority="high" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/04/H20230428131042.jpg" alt="" width="2200" height="1410" class="size-full wp-image-4886" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/04/H20230428131042.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/04/H20230428131042-300x192.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/04/H20230428131042-1024x656.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/04/H20230428131042-768x492.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/04/H20230428131042-1536x984.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/04/H20230428131042-2048x1313.jpg 2048w" sizes="(max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-4886" class="wp-caption-text">केंद्रीय मंत्री श्री अनुराग ठाकुर ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जनसमूह को संबोधित किया।</figcaption></figure>
<p>प्रधानमंत्री ने रेडियो के साथ उनकी पीढ़ी के भावनात्मक जुड़ाव को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री ने मन की बात के आगामी 100वें एपिसोड का उल्लेख करते हुए कहा, ‘मेरे लिए, यह एक अतिरिक्त प्रसन्नता की बात है कि मेरा एक मेजबान के रूप में रेडियो के साथ संबंध है।’ उन्होंने कहा, ‘देशवासियों के साथ इस प्रकार का भावनात्मक जुड़ाव केवल रेडियो के माध्यम से ही संभव था। इसके जरिए, मैं देश की शक्ति और देशवासियों के बीच कर्तव्य की सामूहिक ताकत के साथ जुड़ा रहा।’  उन्होंने स्वच्छ भारत, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और हर घर तिरंगा, जो मन की बात के माध्यम से एक जन आंदोलन बन गया, जैसी पहलों में कार्यक्रम की भूमिका के उदाहरण देते हुए इस बिंदु का विस्तार के साथ उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा ‘इसलिए, एक प्रकार से मैं आपकी आकाशवाणी टीम का हिस्सा हूं।’</p>
<p>प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि 91 एफएम ट्रांसमीटरों का उद्घाटन सरकार की नीतियों को आगे बढ़ाता है, जो उन वंचितों को वरीयता देता है जो अभी तक इस सुविधा से अछूते रहे थे। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘जिन्हें अभी तक दूर समझा जाता रहा है, उन्हें अब एक बड़े स्तर पर जुड़ने का अवसर प्राप्त होगा।’ एफएम ट्रांसमीटरों के लाभ को सूचीबद्ध करते हुए प्रधानमंत्री ने समय पर महत्वपूर्ण सूचना प्रदान करने, समुदाय निर्माण प्रयासों, कृषि से जुड़े मौसम अपडेट, किसानों के लिए खाद्य और सब्जी के बारे में जानकारी, कृषि में रसायनों के उपयोग के द्वारा हुए नुकसान के बारे में चर्चा, कृषि के लिए उन्नत मशीनरी का संयोजन, महिला स्वसहायता समूहों को नई बाजार प्रथाओं के बारे में सूचित करना और प्राकृतिक आपदा के दौरान समस्त समुदाय की सहायता करने का उल्लेख किया। उन्होंने एफएम के इंफोटेनमेंट मूल्य का भी उल्लेख किया।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने भाषा संबंधी विविधता के आयाम की चर्चा की और सूचित किया कि एफएम प्रसारण सभी भाषाओं और विशेष रूप से 27 बोलियों वाले क्षेत्रों में किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने वास्तविक कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के साथ-साथ सामाजिक जुड़ाव पर जोर देते हुए कहा, ‘यह कनेक्टविटी न केवल कम्युनिकेशन के टूल्स को लिंक करती है, बल्कि यह लोगों को जोड़ता भी है। यह इस सरकार की कार्य संस्कृति का प्रतिबिम्ब है।’</p>
<p>अपने संबोधन का समापन करते हुए प्रधानमंत्री ने आकाशवाणी जैसे सभी संचार चैनलों के विजन और मिशन को रेखांकित किया और कहा कि कनेक्टिविटी चाहे किसी भी रूप में हो, इसका उद्देश्य देश और इसके 140 करोड़ नागरिकों के साथ जुड़ना है। उन्होंने विश्वास जताया कि सभी हितधारक इस विजन के साथ लगातार आगे बढ़ते रहेंगे जिसका परिणाम निरंतर संवाद के माध्यम से देश के सुदृढ़ीकरण के रूप में आएगा।</p>
<figure id="attachment_4887" aria-describedby="caption-attachment-4887" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/04/H20230428131038.jpg"><img decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/04/H20230428131038.jpg" alt="" width="2200" height="1616" class="size-full wp-image-4887" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/04/H20230428131038.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/04/H20230428131038-300x220.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/04/H20230428131038-1024x752.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/04/H20230428131038-768x564.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/04/H20230428131038-1536x1128.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/04/H20230428131038-2048x1504.jpg 2048w" sizes="(max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-4887" class="wp-caption-text">श्री ठाकुर ने रेखांकित किया कि आज आकाशवाणी भारत में सबसे बड़ा नेटवर्क है और यह नेटवर्क नए भारत की विकास गाथा को देश के कोने-कोने तक ले जाएगा।</figcaption></figure>
<p>केंद्रीय मंत्री श्री अनुराग ठाकुर ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जनसमूह को संबोधित किया। उपलब्धि की चर्चा करते हुए श्री ठाकुर ने कहा कि ये ट्रांसमीटर सरकार के कार्यक्रमों और नीतियों के बारे में सूचना तथा देश के कोने-कोने तक मनोरंजन संबंधी कंटेंट प्रदान करने के लिए वाहक के रूप में कार्य करेंगे।</p>
<p>श्री ठाकुर ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी को भारत में रेडियो कनेक्टिविटी के विस्तार को प्रोत्साहन देने का श्रेय दिया और रेडियो के महत्व को साबित करने में उनके मन की बात कार्यक्रम के योगदान को स्वीकार किया, जिसे हाल ही में आईआईएम रोहतक द्वारा किए गए एक सर्वे में सटीक तरीके से बताया गया है। आज आकाशवाणी भारत में सबसे बड़ा नेटवर्क है और यह नेटवर्क नए भारत की विकास गाथा को देश के कोने-कोने तक ले जाएगा।</p>
<p>बहरहाल, देश में एफएम कनेक्टिविटी बढ़ाने की सरकार की प्रतिबद्धता के हिस्से के रूप में 18 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों के 84 जिलों में 91 नए 100 वाट एफएम ट्रांसमीटर लगाए गए हैं। इस विस्तार का विशेष फोकस आकांक्षी जिलों और सीमावर्ती क्षेत्रों में कवरेज बढ़ाने पर रहा है। जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया है उनमें बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, नगालैंड, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश, केरल, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, लद्दाख और अंडमान तथा निकोबार द्वीप समूह शामिल हैं। आकाशवाणी की एफएम सेवा के इस विस्तार के साथ अब 2 करोड़ अतिरिक्त लोगों को कवर किया जाएगा, जिनकी इस माध्यम तक पहुंच नहीं थी। इसके परिणामस्वरूप लगभग 35,000 वर्ग किमी क्षेत्र में कवरेज का विस्तार होगा।</p>
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		<title>देश की 80 प्रतिशत से अधिक आबादी तक पहुंचने के लिए आकाशवाणी के एफएम कवरेज को बढ़ाया जाएगा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 04 Jan 2023 12:44:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 4 जनवरी: आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने प्रसार भारती यानी ऑल इंडिया रेडियो (एआईआर) और दूरदर्शन (डीडी) के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 2,539.61 करोड़ रुपये की लागत वाली केंद्रीय क्षेत्र की योजना &#8220;द ब्रॉडकास्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर एंड नेटवर्क डेवलपमेंट&#8221; (बीआईएनडी) के संबंध में सूचना और प्रसारण मंत्रालय के प्रस्ताव को स्वीकृति [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली, 4 जनवरी: आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने प्रसार भारती यानी ऑल इंडिया रेडियो (एआईआर) और दूरदर्शन (डीडी) के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 2,539.61 करोड़ रुपये की लागत वाली केंद्रीय क्षेत्र की योजना &#8220;द ब्रॉडकास्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर एंड नेटवर्क डेवलपमेंट&#8221; (बीआईएनडी) के संबंध में सूचना और प्रसारण मंत्रालय के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है।  मंत्रालय की &#8220;द ब्रॉडकास्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर एंड नेटवर्क डेवलपमेंट&#8221; योजना प्रसार भारती को संगठन के बुनियादी ढांचे, कंटेंट के सृजन और सिविल वर्कर में प्रसारण के विस्तार और उन्नयन से संबंधित व्यय हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए है।</strong></p>
<p>प्रसार भारती, देश के सार्वजनिक प्रसारक के रूप में, दूरदर्शन और आकाशवाणी के माध्यम से देश के दूर-दराज क्षेत्रों में लोगों के लिए सूचना, शिक्षा, मनोरंजन और सहभागिता का सबसे महत्वपूर्ण साधन है। प्रसार भारती ने कोविड महामारी के दौरान सार्वजनिक स्वास्थ्य संदेशों के प्रसारण और जनता को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।</p>
<p>बीआईएनडी योजना सार्वजनिक प्रसारक को बेहतर बुनियादी ढांचे के साथ अपनी सुविधाओं को व्यापक रूप से उन्नयन करने में सक्षम बनाएगी, जिससे वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों, सीमा एवं रणनीतिक क्षेत्रों सहित इनकी पहुंच को व्यापक रूप से बढ़ाते हुए श्रोताओं और दर्शकों को उच्च गुणवत्ता युक्त कंटेंट प्रदान किया जाएगा। इस योजना का एक अन्य प्रमुख प्राथमिकता वाला क्षेत्र घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों तरह के दर्शकों के लिए उच्च गुणवत्ता युक्त कंटेंट का विकास और अधिक चैनलों को समायोजित करने के लिए डीटीएच प्लेटफॉर्म की क्षमता उन्नयन द्वारा दर्शकों के लिए विविध कंटेंट की उपलब्धता को भी सुनिश्चित करना है। ओबी वैन की खरीद और डीडी एवं आकाशवाणी स्टूडियो को एचडी स्तर पर तैयार करने के लिए डिजिटल उन्नयन को भी परियोजना के हिस्से में शामिल किया जाएगा।</p>
<p>वर्तमान में, दूरदर्शन 28 क्षेत्रीय चैनलों सहित 36 टीवी चैनलों का संचालन करता है और ऑल इंडिया रेडियो 500 से अधिक प्रसारण केंद्रों का संचालन करता है। यह योजना देश में एआईआर एफएम ट्रांसमीटरों के कवरेज को भौगोलिक क्षेत्र के अनुसार 59 प्रतिशत से बढ़ाकर 66 प्रतिशत और और आबादी के हिसाब से 68 प्रतिशत से बढ़ाकर 80 प्रतिशत कर देगी। इस योजना में दूरस्थ, जनजातीय, वामपंथी उग्रवाद प्रभावित और सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को 8 लाख से अधिक डीडी फ्री डिश एसटीबी के निःशुल्क वितरण की भी परिकल्पना की गई है।</p>
<p>सार्वजनिक प्रसारण के दायरे को बढ़ाने के अलावा, ब्रॉडकास्टिंग उपकरणों की आपूर्ति और स्थापना से संबंधित निर्माण और सेवाओं के माध्यम से अप्रत्यक्ष रोजगार उत्पन्न करने की भी संभावना है। टीवी/रेडियो प्रोडक्शन, ट्रांसमिशन और संबद्ध मीडिया से जुड़ी सेवाओं समेत विभिन्न कंटेंट निर्माण के क्षेत्र में अनुभवी व्यक्तियों के लिए एआईआर और डीडी के कंटेंट निर्माण व रचनात्मक कंटेंट के क्षेत्र में अप्रत्यक्ष रोजगार की पर्याप्त संभावनाएं हैं। इसके अलावा, डीडी फ्री डिश की पहुंच के विस्तार की परियोजना से डीडी फ्री डिश डीटीएच बॉक्स के निर्माण में रोजगार के अवसरों का सृजन होने की भी उम्मीद है। भारत सरकार दूरदर्शन और आकाशवाणी (प्रसार भारती) के बुनियादी ढांचे और सेवाओं के विकास, आधुनिकीकरण और मजबूती के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराती है, और यह एक सतत प्रक्रिया है।</p>
<p>ज्ञातव्य हो कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 2614.51 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से एसजेवीएन लिमिटेड द्वारा हिमाचल प्रदेश में 382 मेगावाट सुन्नी बांध जल विद्युत परियोजना को स्वीकृति दे दी है। इसमें बुनियादी ढांचे को सक्षम बनाने के लिए भारत सरकार की बजटीय सहायता के रूप में 13.80 करोड़ रुपये के निवेश को भी स्वीकृति दी गई है। जनवरी, 2022 तक कुल 246 करोड़ रुपये के संचयी व्यय के लिए कार्योत्तर स्वीकृति भी दी गई है।</p>
<p>2,614 करोड़ रुपये की इस परियोजना लागत में 2246.40 करोड़ रुपये की वास्तविक लागत, निर्माण के दौरान ब्याज (आईडीसी) के तौर पर 358.96 करोड़ रुपये और वित्तपोषण शुल्क (एफसी) के रूप में 9.15 करोड़ रुपये शामिल हैं। मात्रा परिवर्तन (जोड़ने/बदलाव/अतिरिक्त मदों सहित) के कारण लागत भिन्नताओं के लिए संशोधित लागत स्वीकृतियां और निर्माणकर्ता के लिए देय समय सीमा स्वीकृत लागत के 10 प्रतिशत तक सीमित होगी।</p>
<p>आत्मनिर्भर भारत अभियान के लक्ष्यों और उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए, एसजेवीएन द्वारा 382 मेगावाट सुन्नी बांध एचईपी की स्थापना के लिए वर्तमान प्रस्ताव स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं/स्थानीय उद्यमों/एमएसएमई को विभिन्न लाभ प्रदान करेगा और रोजगार को बढ़ावा देने के अलावा देश के भीतर उद्यमशीलता के अवसरों को प्रोत्साहित करते हुए क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास को सुनिश्चित करेगा। इस परियोजना के कार्यान्वयन से इसके निर्माण की चरम अवस्था के दौरान लगभग 4000 लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार का सृजन होगा।</p>
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		<title>मिथिला में ब्राह्मण का बेटा &#8216;बटुक&#8217; ही कहलाता है एक खास उम्र तक, लेकिन आप तो जीवन-पर्यन्त &#8216;बटुक भाई&#8217; रह गए सबों के लिए</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/batuk-bhai-is-no-more</link>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 17 Sep 2022 04:27:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
		<category><![CDATA[aal india radio]]></category>
		<category><![CDATA[AIR]]></category>
		<category><![CDATA[Batuk bhai]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>पटना: आर्यावर्तइण्डियननेशन(डॉट)कॉम कहानी श्रृंखला के क्रम में कुछ माह पूर्व पटना की जमीन से जुड़े एक महानुभाव को, जिन्होंने पटना को साठ के दशक के प्रारंभिक वर्षों से अपने क़दमों से नापा था, उनके मोबाईल पर घंटी टनटनाया। दूसरे छोड़ से फोन प्राप्त कर्ता का हेल्लो !!! शब्द अभी समाप्त भी नहीं हुआ था कि [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/batuk-bhai-is-no-more">मिथिला में ब्राह्मण का बेटा &#8216;बटुक&#8217; ही कहलाता है एक खास उम्र तक, लेकिन आप तो जीवन-पर्यन्त &#8216;बटुक भाई&#8217; रह गए सबों के लिए</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>पटना: आर्यावर्तइण्डियननेशन(डॉट)कॉम कहानी श्रृंखला के क्रम में कुछ माह पूर्व पटना की जमीन से जुड़े एक महानुभाव को, जिन्होंने पटना को साठ के दशक के प्रारंभिक वर्षों से अपने क़दमों से नापा था, उनके मोबाईल पर घंटी टनटनाया। दूसरे छोड़ से फोन प्राप्त कर्ता का हेल्लो !!! शब्द अभी समाप्त भी नहीं हुआ था कि मेरी आवाज उनके कानों में पहुंची। &#8220;हम शिवनाथ छी दिल्ली से &#8230;.. शायद अपने कें मोन &#8230;. &#8221; </strong></p>
<p>मेरे शब्द अभी समाप्त भी नहीं हुए थे कि वे तुरंत कहते हैं: &#8220;इण्डियन नेशन वाला शिवनाथ &#8230;.. गोपाल बाबुक बेटा शिवनाथ &#8230;..अहाँ दिल्ली में छी। बहुत निक कार्य क रहल छी&#8221; उनकी आवाज में वही खनक था । भारत के पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी की जिस दिन हत्या हुई थी, उसी सप्ताह के आस-पास इण्डियन नेशन अखबार के दफ्तर में उनसे अंतिम मुलाकात हुई थी। वे न केवल मुझे, अपितु मेरे माता-पिता, भाई-बहन सभी को अन्तःमन से जानते थे। </p>
<p>इससे पहले कि मैं फोन करने का अपना उद्देश्य बताता, वे तक्षण कहते हैं: &#8220;अहाँ आर्यावर्तइण्डियननेशन(डॉट)कॉम वेबसाइट बनाके एहि अखबारक संस्थापक महाराजा कें, एहि अखबार में कार्य केनिहार समस्त परिवार जीवित अथवा दिवंगत आत्मा के संवेदना, भावना के पुनः स्थापित केलौं। महादेव से प्रार्थना करब अहाँ अपन उद्देश्य में सफल होइ आ माँ-बाबूक नाम रोशन करि।&#8221; </p>
<p>उनकी बातों को सुनकर मैं अश्रुपूरित हो रहा था, गला अवरुद्ध हो रहा था। सोच रहा था जिस व्यक्ति को चार दशक बाद फोन किया, उनके ह्रदय में आज भी हम सबों का नाम, माँ-बाबूजी के प्रति सम्मान आज भी विराजमान है। मिथिला में, खासकर दरभंगा-मधुबनी क्षेत्र में रहने वाले लोगों के ह्रदय में ऐसी &#8216;मानवीय भावना&#8217; का किल्लत ही नहीं, सुखाड़ भी है। वे जमीन से जुड़े एक ऐसे मानव थे जिन्हें मेरी जानकारी में कभी किसी से &#8216;वैर&#8217; नहीं हुआ जीवन पर्यन्त। हाँ, मनुष्य योनि में जन्म लेने से कुछ &#8216;विकार&#8217; भी हो सकते हैं, लेकिन उन विकारों को कभी &#8216;साकार&#8217; होते मैंने नहीं देखा। </p>
<p>उनका नाम था श्री छत्रानन्द सिंह झा। वैसे मिथिला में प्रत्येक ब्राह्मण का संतान &#8216;बटुक&#8217; ही होता है एक खास उम्र तक, लेकिन आधिकारिक नाम वाले श्री छत्रानन्द सिंह झा &#8216;बटुक&#8217; से कब &#8216;बटुक भाई&#8217; हो गए और जीवन पर्यन्त &#8216;बटुक भाई&#8217; रह गए, यह सिर्फ और सिर्फ एक ही व्यक्ति जानते थे और वे थे श्री (अब दिवंगत) गौरी कांत चौधरी &#8216;कान्त&#8217; यानी पटना आकाशवाणी के चौपाल के श्री मुखिया जी, जिन्होंने &#8216;नामकरण&#8217; किया था ।  </p>
<figure id="attachment_4461" aria-describedby="caption-attachment-4461" style="width: 1280px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/e6d5ab84-1e7a-4ef1-be71-fd919a42b44f.jpg"><img decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/e6d5ab84-1e7a-4ef1-be71-fd919a42b44f.jpg" alt="" width="1280" height="1261" class="size-full wp-image-4461" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/e6d5ab84-1e7a-4ef1-be71-fd919a42b44f.jpg 1280w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/e6d5ab84-1e7a-4ef1-be71-fd919a42b44f-300x296.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/e6d5ab84-1e7a-4ef1-be71-fd919a42b44f-1024x1009.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/e6d5ab84-1e7a-4ef1-be71-fd919a42b44f-768x757.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/e6d5ab84-1e7a-4ef1-be71-fd919a42b44f-24x24.jpg 24w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/e6d5ab84-1e7a-4ef1-be71-fd919a42b44f-48x48.jpg 48w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/e6d5ab84-1e7a-4ef1-be71-fd919a42b44f-96x96.jpg 96w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></a><figcaption id="caption-attachment-4461" class="wp-caption-text">मुखिया जी (दाहिने) और बटुक भाई (बाएं)</figcaption></figure>
<p>पटना आकाशवाणी से प्रसारित होने वाला सर्वाधिक लोकप्रिय कार्यक्रम है चौपाल और समय 6 बजकर 30 मिनट पर बिहार के रेडियो पर शाम के साढ़े छह बजे रेडियो पर जैसे ही &#8216;चौपाल&#8217; का ट्यून बजना शुरू होता, गांव-शहर-कस्बों में लोग अपना काम-काज छोड़ रेडियो को घेर कर बैठ जाते थे। ट्यून बजना बंद होते ही बटुक भाई की आवाज गूंजती- नमस्कार यौ मुखिया जी !<br />
-खुश रहो बटुक भाई !<br />
फिर, बुधन भाई की आवाज गूंजती- जेबा से दंडवत मुखिया जी !<br />
-राम-राम बुधन भाई !<br />
और, आखिरी में गूंजती रूपा बहन की आवाज- जय हिंद मुखिया जी !<br />
-जय हिंद रूपा बहन !</p>
<p><strong>गौरी कांत चौधरी &#8216;कान्त&#8217; यानी चौपाल के मुखिया जी के पुत्र श्री लक्ष्मीकांत सजल</strong> कहते हैं : &#8220;टिपिकल मैथिली में अपने चुटीले संवाद और उसके कहने के अंदाज से बटुक भाई देखते ही देखते &#8216;चौपाल&#8217; खासकर उसके करोडों मैथिली भाषी श्रोताओं के दिलों पर राज करने लगे। वे बटुक भाई के अपने किरदार में इस तरह रमते चले गये कि वास्तविक जीवन में भी लोग उन्हें उसी नाम से संबोधित करने लगे। रेडियो पर प्रसारित होने वाले मैथिली नाटकों पर अपने अभिनय से वे अमिट छाप छोडते रहे। उनके द्वारा अभिनीत दर्जनों रेडियो नाटक उस वक्त के श्रोता आज भी नहीं भूल पा रहे हैं।&#8221; बटुक भाई आकाशवाणी की सेवा में 1968 में आये। वह रेडियो का जमाना था। और, &#8216;चौपाल&#8217; की लोकप्रियता बुलंदी पर थी।</p>
<p>सजल जी के अनुसार, &#8220;रेडियो पर &#8216;चौपाल&#8217; के बटुक के साथ ही उन्होंने एक और लोकप्रिय किरदार को जिया। वह किरदार था &#8216;घरौंदा&#8217; के भईया का। &#8216;घरौंदा&#8217; बच्चों का कार्यक्रम है। हर शुक्रवार को प्रसारित होने वाला पच्चीस मिनट का यह कार्यक्रम &#8216;चौपाल&#8217; का ही हिस्सा है। पहले इस कार्यक्रम का संचालन &#8216;काका&#8217; की भूमिका में बुधन भाई (गोपाल कृष्ण शर्मा) करते थे। उनकी अनुपस्थिति में बटुक भाई बच्चों के &#8216;भईया&#8217; बन &#8216;घरौंदा&#8217; में उनके बीच होते। लेकिन, बुधन भाई के असामयिक निधन के बाद &#8216;घरौंदा&#8217; में &#8216;काका&#8217; की जगह पूरी तरह से &#8216;भईया&#8217; ने ले ली। वे बच्चों के बीच &#8216;भईया&#8217; के रूप में काफी लोकप्रिय रहे। &#8216;घरौंदा&#8217; के बाहर भी जब बच्चे उन्हें देखते, तो &#8216;भईया&#8217; ही कहते।&#8221;</p>
<p>रेडियो पर बटुक भाई की एक पहचान और थी। वह पहचान थी रेडियो पर प्रसारित होने वाले मैथिली कार्यक्रम &#8216;भारती&#8217; के संचालक-उदघोषक की। संचालक के रूप में अपनी उदघोषना से उन्होंने &#8216;भारती&#8217; की अलग पहचान बनायी। पटना की सड़कों पर शायद ही कोई व्यक्ति जब इनसे रूबरू होता था, उन्हें उनके आधिकारिक नाम से सम्बोधित करता था। यहाँ तक कि पटना में होने वाले किसी भी कार्यक्रमों में, जिसमें इनकी भूमिका होती थी, चाहे विद्यापति पर्व समारोह हो या चेतना समिति का कोई अन्य कार्यक्रम, अख़बारों में भी जो समाचार प्रकाशित होता था, उनका आधिकारिक नाम लिखा जाता था। बटुक भाई की मैथिली में तकरीबन दर्जन भर किताबें हैं। लेकिन, मैथिली साहित्य में उनकी पहचान एक व्यंग्यकार के रूप है। </p>
<p><strong>श्री सती रमन झा</strong> कहते हैं की बटुक भाई की अनेकानेक साहित्यिक कीर्तियाँ प्रकाशित हुई हैं। मसलन: &#8216;काॅट कूश&#8217;, &#8216;डोकहरक ऑखि&#8217;, &#8216;एक गुलाबक लेल&#8217;, &#8216;सीताहरण&#8217;, &#8216;मैथिली रेडियो नाटक&#8217;, &#8216;सुनू जानकी&#8217;, &#8216;गौरीकान्त चौधरी &#8216;कान्त&#8217; मुखियाजी इत्यादि । उन्होंने कुछ अनुवाद भी किया था जैसे: &#8216;अन्तिम प्रश्न&#8217;, &#8216;गाछा&#8217;, &#8216;रामलीला&#8217;, &#8216;नट् सम्राट&#8217;, &#8216;कबीर&#8217; आदि । बटुक भाई का &#8216;सुनू जानकी&#8217; अत्यधिक चर्चित नाटक है। </p>
<p>सती रमन झा आगे कहते हैं: बटुक भाई को 2014 मे ज्योतिरीश्वर सम्मान, मैलोरंग रेपर्टरी के द्वारा &#8216;मिथिला विभूति&#8217;, विद्यापति सेवा संस्थान दरभंगा द्वारा &#8216;ज्योतिरीश्वर राष्ट्रीय शिखर सम्मान&#8217;, भारतीय साहित्यकार संसद्, समस्तीपुर,  किरण मैथिली साहित्य शोध संस्थान, उजान और चेतना समिति पटना द्वारा अनेकानेक सम्मानों से अलंकृत किया गया था। कहते हैं बटुक भाई &#8216;राजनीतिक व्यङ्ग्य&#8217; लिखने में महारथ थे। उन दिनों उनका अनेकानेक लेख तत्कालीन मिथिला मिहिर में प्रकाशित होता था। उन्होंने भारत संचार निगम लिमिटेड, गोरखपुर में भी काम किया। वे एक शिक्षक भी थे। वे मिथिला, मैथिलि और साहित्य के प्रति समर्पित थे। वे अपने लिए कभी नहीं जिए। विद्यापति समारोह को गांव-गांव तक पहुंचाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। वे पंडित रामचतुर मल्लिक के शिष्य भी थे। </p>
<figure id="attachment_4462" aria-describedby="caption-attachment-4462" style="width: 1172px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/BatukBhai.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/BatukBhai.jpg" alt="" width="1172" height="1570" class="size-full wp-image-4462" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/BatukBhai.jpg 1172w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/BatukBhai-224x300.jpg 224w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/BatukBhai-764x1024.jpg 764w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/BatukBhai-768x1029.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/BatukBhai-1147x1536.jpg 1147w" sizes="auto, (max-width: 1172px) 100vw, 1172px" /></a><figcaption id="caption-attachment-4462" class="wp-caption-text">पेन्सिल चित्र से बटुक भाई को श्रद्धांजलि</figcaption></figure>
<p><strong>इण्डियन नेशन अख़बार के पूर्व संपादक (दिवंगत) श्री दीनानाथ झा के पुत्र श्री अशोक झा</strong>, जो पटना उच्च न्यायालय में अधिवक्ता भी हैं कहते है कि &#8220;मैं अपने जीवन में बटुक भाई जैसा सरल और सहज व्यक्ति नहीं देखा है। मिथिला में ऐसे विभूतियों की किल्लत है। वे जितना मानवीय थे, उतना ही मानसिक रूप से समाज, साहित्य, संस्कृति के प्रति वचनबद्ध भी। &#8221; </p>
<p>बटुक भाई मूल रूप से बिहार के दरभंगा जिले के चनौर गांव के थे। यह गांव मनीगाछी प्रखंड में है। बटुक भाई का जन्म पांच अप्रैल, 1946 को श्रोत्रिय ब्राह्मण परिवार हुआ। वे मगध विश्वविद्यालय से मैथिली में स्नातकोत्तर थे। आकाशवाणी की सेवा में आने के पहले उन्होंने रेलवे की नौकरी की। आकाशवाणी की सेवा में रहते हुए उन्होंने अपने अभिनय से मैथिली रंगमंच को एक नया अध्याय दिया। वे मैथिली नाट्य संस्था &#8216;भंगिमा&#8217; के संस्थापकों में थे। उनके द्वारा लिखित नाटक &#8216;सुनु जानकी&#8217; के मंचन से मैथिली रंगमंच को नयी दिशा मिली है।</p>
<p><strong>पटना आकाशवाणी के अवकाश प्राप्त पत्रकार श्री बद्री प्रसाद यादव</strong>, जिन्होंने बिहार के खेल-कूद को अपने शब्दों से और लेखनी से एक नई दिशा दिया, कहते हैं &#8220;बटुक भाई हमसे कोई आठ साल सीनियर थे आकाशवाणी में। आमतौर पर हमलोगों की मुलाकात नित्य परिसर अथवा भवन के बरामदों पर होती ही थी। वे आकाशवाणी के लगभग सभी कर्मचारियों को नाम से जानते थे। शायद यह गन बहुत कम मनुष्यों में होता है, खासकर जो सीढ़ियों से ऊपर चढ़ने लगते हैं, ख्याति पाने लगते हैं, विख्यात होने लगते हैं, उनमें तो यह गुण होता ही नहीं है। <strong>बटुक भाई कहने के लिए &#8216;ब्राह्मण (श्रोत्रिय) थे, लेकिन वे एक मनुष्य और एक इंसान पहले थे।</strong>&#8221;</p>
<p>उन्होंने अप्रैल, 2006 तक रेडियो के श्रोताओं के दिलों पर राज किया। तकरीबन अड़तीस वर्षों की सेवा के बाद जब आकाशवाणी से सेवानिवृत्त हुए, तो अपना जीवन लेखन और रंगकर्म को सौंप दिया। इस बीच अप्रैल, 2016 में पत्नी गीता झा उनका साथ छोड़ इस दुनिया से विदा हो गईं। इस सदमे को अपनी मुस्कुराहट से वे झेल भी नहीं पाए थे कि 2017 में छोटा बेटा सुनील सिंह झा ने सदा के लिए अपनी आंखें मूंद लीं। उनके लिए बड़े बेटे अनिल सिंह झा श्रवण कुमार की भूमिका में थे। बावजूद, वे साल भर से बीमार चल रहे थे। और, 16 सितंबर, 2022 को आवाज की दुनियां का यह नायक अलविदा कह गया।</p>
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