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	<title>राज्य Archives - आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</title>
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		<title>​बिहार विधानसभा चुनाव दो चरण (6 और 11 नवम्बर) में, पटना मेट्रो के चमचमाता सीट पर सफ़ेद वस्त्र पर बैठकर यात्रा किये नीतीश कुमार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 06 Oct 2025 12:31:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[bihar]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली / पटना : इधर दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने घोषणा किया कि बिहार में 18 वां विधानसभा के गठन के लिए प्रदेश में दो चरणों में चुनाव आगामी 6 और 11 नवम्बर को होगा और मतों की गिनती 14 नवम्बर को सम्पन्न होगा। उधर पटना में प्रदेश के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 4.3 किलोमीटर लंबी [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली / पटना : इधर दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने घोषणा किया कि बिहार में 18 वां विधानसभा के गठन के लिए प्रदेश में दो चरणों में चुनाव आगामी 6 और 11 नवम्बर को होगा और मतों की गिनती 14 नवम्बर को सम्पन्न होगा। उधर पटना में प्रदेश के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 4.3 किलोमीटर लंबी मेट्रो मार्ग का उद्घाटन किया। </strong></p>
<blockquote><p>पटना मेट्रो रेल के चमचमाते डब्बे में जब प्रदेश के मुख्यमंत्री एक डब्बे में यात्रा प्रारम्भ किये, दिल्ली मेट्रो लोगों ने नवनिर्मित, नव चलित मेट्रो सीट पर &#8216;सफ़ेद वस्त्र&#8217; बिछाकर मुख्यमंत्री और उनके साथ चल रहे अन्य नेताओं को बैठाया। दिल्ली में जब पहली बार मेट्रो चली थी, उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहार वाजपेयी, और बाद में अन्य परियोजनाओं के उद्घाटन में वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके लोग &#8216;बिना सफ़ेद चादर&#8217; के मेट्रो डब्बे में बैठकर यात्रा किये थे। बिहार में नेताओं के प्रति गजब का &#8216;समर्पण&#8217; होता है।</p></blockquote>
<p><strong>बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार दिल्ली में घोषणा किये कि पूरी चुनाव प्रक्रिया 16 नवंबर तक समाप्त हो जाएगी। कुमार ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, &#8220;बिहार चुनाव 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में होंगे। मतों की गिनती 14 नवंबर को होगी।&#8221; उन्होंने कहा, &#8220;मतगणना के अंतिम दो दौर से पहले डाक मतपत्रों की गिनती पूरी करना अनिवार्य है।&#8221;</strong></p>
<p>243 सदस्यीय राज्य विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर को समाप्त हो रहा है। पिछली बार 2020 का विधानसभा चुनाव तीन चरणों में हुआ था, जिसमें 56.93 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। चुनाव आयोग के अनुसार पहले चरण के लिए गजट अधिसूचना जारी करने की तिथि 10.10.2025 जबकि दूसरे चरण के लिए 13.10.2025 निश्चित है। पहले चरण के लिए नामांकन करने की अंतिम तिथि 17.10.2025 जबकि दूसरे चरण के लिए 20.10.2025 है। नामांकन की जांच की तिथि 18.10.2025 (पहला चरण) और  21.10.2025 (दूसरा चरण), उम्मीदवारों की नाम वापसी की अंतिम तिथि &#8211; 20.10.2025 पहला चरण 23.10.2025 दूसरा चरण। मतदान की तिथि 06.11.2025 पहला  चरण 11.11.2025 दूसरा चरण मतगणना की तिथि 14.11.2025 और जिस तारीख से पहले चुनाव संपन्न हो जाएगा 16.11.2025</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/niti.jpeg"><img fetchpriority="high" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/niti.jpeg" alt="" width="1600" height="672" class="aligncenter size-full wp-image-7132" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/niti.jpeg 1600w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/niti-300x126.jpeg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/niti-1024x430.jpeg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/niti-768x323.jpeg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/niti-1536x645.jpeg 1536w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" /></a></p>
<p>चुनाव की घोषणा के साथ ही तेजस्वी यादव ने एक्स पर लिखा- मेरे प्रिय बिहारवासियों, 𝟏𝟒 नवंबर 𝟐𝟎𝟐𝟓! इस तारीख को हम सभी को याद कर लेना है। इतिहास के पन्नों को भविष्य में जब भी पलटा जाएगा तो ये तारीख बिहार के सुनहरे भविष्य, परिवर्तन, विकास और बुलंदी की शुरुआत बनकर हमेशा स्वर्ण अक्षरों में दिखेगी। परिवर्तन का बिगुल बज चुका है, जनता की जीत का शंखनाद हो चुका है। बस अब पूरे मनोयोग, समस्त ऊर्जा का संचय कर प्रत्येक बिहारवासी को जुट जाना है, महागठबंधन की सरकार बनाने के लिए।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/2.jpg"><img decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/2.jpg" alt="" width="789" height="800" class="aligncenter size-full wp-image-7136" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/2.jpg 789w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/2-296x300.jpg 296w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/2-768x779.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/2-24x24.jpg 24w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/2-48x48.jpg 48w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/2-96x96.jpg 96w" sizes="(max-width: 789px) 100vw, 789px" /></a></p>
<p>बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तारीखों की घोषणा पर केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने कहा, &#8220;भारत के चुनाव आयोग का बहुत आभार कि एक शांतिपूर्ण पारदर्शिता के साथ बिहार लोकतंत्र का पर्व मनाएं, इसके लिए विस्तृत योजना बनाई है। बिहार लोकतंत्र की जननी है&#8230;दो तारीखें तय की गई हैं&#8230;मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि चुनाव आयोग ने जो व्यवस्था बनाई है और 1990 से 2005 तक जो जंगल राज में बूथ लूट लिए जात थे, मतदाताओं को धमकाया जाता था, वो अब बिहार में नहीं हो पाएगा&#8230;&#8221; खैर। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/Screenshot-2025-10-06-at-4.52.59-PM.jpg"><img decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/Screenshot-2025-10-06-at-4.52.59-PM.jpg" alt="" width="1120" height="786" class="aligncenter size-full wp-image-7135" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/Screenshot-2025-10-06-at-4.52.59-PM.jpg 1120w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/Screenshot-2025-10-06-at-4.52.59-PM-300x211.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/Screenshot-2025-10-06-at-4.52.59-PM-1024x719.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/Screenshot-2025-10-06-at-4.52.59-PM-768x539.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/Screenshot-2025-10-06-at-4.52.59-PM-100x70.jpg 100w" sizes="(max-width: 1120px) 100vw, 1120px" /></a></p>
<p>प्रथम चरण में तीन मेट्रो स्टेशन आई॰एस॰बी॰टी॰, जीरोमाइल और भूतनाथ को जोड़ते हुए कुल 4.3 किमी लंबे रूट पर पटना मेट्रो का परिचालन प्रारम्भ हुआ। यह राज्य सरकार द्वारा आधुनिक, पर्यावरण के अनुकूल एवं सुगम यातायात व्यवस्था को विकसित करने की दिशा में किए जा रहे कार्यों में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे रोजगार और व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा। मेट्रो परियोजना के माध्यम से पटना के लोगों को आवागमन हेतु एक नया सुरक्षित और तेज विकल्प मिल जाएगा, जिससे उन्हें आवागमन में और अधिक सुविधा होगी। </p>
<p>केंद्र सरकार ने जून 2014 में हरी झंडी दिखाई और पांच चरणों का निर्माण प्लान मंजूर किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फरवरी 2019 में 13,365 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली पटना मेट्रो रेल परियोजना की आधारशिला रखी थी।दिल्ली मेट्रो (DMRC) को पटना मेट्रो के लिए सलाहकार बनाया गया है। पटना मेट्रो प्रोजेक्ट की लागत करीब 13,925 करोड़ रुपये है। बिहार सरकार के अलावा केंद्र औऱ जापन इंटरनेशनल कारपोरेशन एजेंसी (JICA) ने भी इसके लिए वित्तीय सहायता दी है। पटना मेट्रो के साथ भारत में कुल मेट्रो नेटवर्क बढ़कर 1017 किलोमीटर हो गया है। देश में पटना मेट्रो के पहले 23 शहर मेट्रो प्रोजेक्ट से जुड़े थे। 2014 में सिर्फ 5 शहरों में 248 किमी का ही मेट्रो नेटवर्क था, जबकि 2025 में 24 शहरों में अब तक 1017 किमी का नेटवर्क अब तैयार हो चुका है। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/Niti2.jpeg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/Niti2.jpeg" alt="" width="1600" height="1146" class="aligncenter size-full wp-image-7137" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/Niti2.jpeg 1600w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/Niti2-300x215.jpeg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/Niti2-1024x733.jpeg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/Niti2-768x550.jpeg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/10/Niti2-1536x1100.jpeg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1600px) 100vw, 1600px" /></a></p>
<p>नीतीश कुमार के कालखंड में पटना में मेट्रो चलना निश्चित रूप से ऐतिहासिक है, लेकिन मेट्रो सीट पर सफ़ेद चादर बिछाना कुछ अटपटा सा लगा। चादर बिछे सीट पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अलावे &#8216;विवादित&#8217; उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और अन्य नेतागण बैठे दिखे। जबकि दूसरे उप-मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा सेल्फी लेते दिखाई दिए। पहले चरण में ब्लू लाइन मेट्रो चार स्टेशनों के बीच चलेगी. ये पाटलिपुत्र ISBT से, जीरो माइल होते हुए भूतनाथ के बीच सुबह 8 बजे से रात 10 बजे तक चलेगी। पटना मेट्रो किराया 15 रुपये से शुरू होगा। </p>
<p>पटना देश का 24वां ऐसा शहर बन गया है, जो मेट्रो नेटवर्क से जुड़ा है। नीतीश कुमार ने पाटलिपुत्र बस डिपो से इसे हरी झंडी दिखाई। मेट्रो के कोच बिहार की लोकप्रिय कला मधुबनी पेटिंग पर आधारित हैं, जिसके पारंपरिक पैटर्न डिब्बों से लेकर मेट्रो स्टेशन पर दिखाई देगी। एक मेट्रो ट्रेन में अधिकतम 900 यात्री सवार हो सकेंगे। </p>
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		<title>हरियाणा के युवा का आह्वान : &#8220;हमें अपनी गलतियों को सुधार कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हाथ मजबूत करना होगा&#8221;</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/state/we-have-to-strengthen-the-hands-of-pm</link>
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		<dc:creator><![CDATA[रेणु जी]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 29 May 2025 12:55:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[bjp]]></category>
		<category><![CDATA[hands]]></category>
		<category><![CDATA[haryana]]></category>
		<category><![CDATA[narendra modi]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गोहना (हरियाणा) : हरियाणा के गोहाना विधानसभा क्षेत्र के युवा नेता पंडित परशुराम गौड़ अपने विधानसभा क्षेत्र के साथ-साथ सम्पूर्ण सोनीपत और हरियाणा के युवाओं को आह्वान किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने को साकार करने हेतु सभी क्षेत्रों के युवाओं को एक साथ मिलाकर आगे आना चाहिए। उनका कहाँ है कि युवा राष्ट्र [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>गोहना (हरियाणा) : हरियाणा के गोहाना विधानसभा क्षेत्र के युवा नेता पंडित परशुराम गौड़ अपने विधानसभा क्षेत्र के साथ-साथ सम्पूर्ण सोनीपत और हरियाणा के युवाओं को आह्वान किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने को साकार करने हेतु सभी क्षेत्रों के युवाओं को एक साथ मिलाकर आगे आना चाहिए। उनका कहाँ है कि युवा राष्ट्र के निर्माता है और आज प्रधानमंत्री युवाओं का अग्रणीं है, इसलिए उन्हें मजबूत बनाना हमारा नैतिक, सामाजिक और राजनीतिक धर्म है। </strong></p>
<p>इस संवादताता से बात करते गौड़ ने कहाँ कि हम इस बात से इंकार नहीं कर सकते हैं कि कुछ कमजोरी हम में भी रही है, लेकिन हमारी कोशिश होनी चाहिए कि हम स्वयं को आंककर, अपनी कमजोरी को दूर कर अपने क्षेत्र के साथ साथ प्रदेश के पार्टी नेतृत्व के साथ-साथ केंद्र के नेतृत्व को मजबूत बनायें। उन्होंने कहा कि हरियाणा में आज जहाँ भी गैर भाजपा क्षेत्र हैं, चाहे विधान सभा का हो अथवा लोक सभा का, स्थानीय लोगों को, खासकर युवाओं को, युवतियों को, पुरुषों को, महिलाओं को संकल्प लेना होगा ताकि कमल खिलता रहे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हाथ मजबूत होता रहे। गौड़ का कहना है कि युवाओं की एक जुटता के बिना हम कुछ भी नहीं कर सकते हैं। </p>
<p>गोहना विधानसभा क्षेत्र का राजनीतिक इतिहास कहता है कि 1967 में कांग्रेस के रामधारी गौड़ चुनाब जीते जो अगले दो चुनाब 1968 और 1972 चुनाब में भी अपनी जीत बरकरार रखे। साल 1977 के चुनाब में कांग्रेस के ही गंगाराम चुनाब जीते, जबकि 1982 चुनाब में लोकदल के किताब सिंह मलिक विजय हुए। अगले 1987 चुनाब में लोकदल के ही किशन सिंह सांगवान विजय हासिल किये जबकि 1991 में किताब सिंह मालिक निर्दलीय एक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल किये। साल 1996 के चुनाव में हरियाणा विकास पार्टी के जगबीर सिंह मलिक, 2000 में इंडियन नेशनल लोकदल के डॉ. रामकुमार सैनी विजय हुए थे। 2005 में कांग्रेस ने अपना खाता खोला और  धर्मपाल सिंह मलिक विजय हुए। 2008 से लगातार 2019 तक कांग्रेस के जगबीर सिंह मलिक चुनाव जीतते गए। परंतु 2024 में इस सीट पर डॉ. अरविंद शर्मा ने अपना नाम दर्ज किया।  </p>
<p>दर्जन से अधिक राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक संस्थाओं नेतृत्व कर रहे परशुराम गौड़ का परिवार अपने क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यवसाय, धर्म, संस्कृति आदि की स्थापना, प्रचार-प्रसार और विस्तार में बहुमूल्य योगदान। ज्ञातव्य हो कि  भगवान्भ रशुराम महाविद्यालय के निर्माण में 27 एकड़ भूमि दान में देकर कराया था। इसके अतिरिक्त 52 गावों की गौशाला (बाली ब्राह्मणान) के संरक्षक के साथ-साथ धर्मशाला और मंदिरों के निर्माण के महत्वपूर्ण भूमिका अदा किये। पंडित परशुराम गौड़ के दादा महात्मा हरफूल जी करीब 120-वर्ष पहले अपने खेतों में गौशालाओं की स्थापना कर आजीवन सचेतक रहे। साथ ही, इनके दादा पंडित रामधारी गौड़ 1967, 1968 और 1972 में गोहाना हलके से विधायक भी रहे और मंत्री पद भी संभाले। </p>
<figure id="attachment_6664" aria-describedby="caption-attachment-6664" style="width: 232px" class="wp-caption alignright"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/Screenshot-2025-05-29-at-5.45.06-PM.png"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/Screenshot-2025-05-29-at-5.45.06-PM.png" alt="" width="232" height="310" class="size-full wp-image-6664" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/Screenshot-2025-05-29-at-5.45.06-PM.png 232w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/Screenshot-2025-05-29-at-5.45.06-PM-225x300.png 225w" sizes="auto, (max-width: 232px) 100vw, 232px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6664" class="wp-caption-text">युवा नेता पंडित परशुराम गौड़</figcaption></figure>
<p><strong>पंडित परशुराम गौड़ का कहना है कि हम अपने क्षेत्र में शिक्षा के प्रचार, प्रसार में सबसे अधिक योगदान दे रहे हैं। यहाँ की शिक्षा का प्रतिशत राष्ट्रीय शिक्षा फीसदी (78 फीसदी) के बराबर है। हरियाणा 1966 में अस्तित्व में आया था, जिसके साथ ही गोहाना विधानसभा क्षेत्र भी अस्तित्व में आया। यहां पर 1967 से 2019 तक एक उप चुनाव समेत 14 बार विधानसभा चुनाव हुए। </strong></p>
<p>गोहाना  विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र हरियाणा राज्य के 90 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है। यह एक सामान्य श्रेणी की विधानसभा सीट है। यह सोनीपत जिले में स्थित है और सोनीपत संसदीय सीट के 9 विधानसभा क्षेत्रों में से एक है। यहाँ अनुसूचित जाति मतदाताओं की संख्या लगभग 33,739 है जो 2011 की जनगणना के अनुसार लगभग 19.6% है। यहाँ अनुसूचित जनजाति की संख्या नगण्य हैं। 2019 तक इस क्षेत्र में सामान्य, विदेशी, प्रॉक्सी, डाक को मिला कर मतदाताओं की कुल संख्या 1,18,506 थी। गोहाना की राजनीति ज्यादातर जाति की राजनीति के इर्द-गिर्द घूमती है। सैनीपुरा, गढ़ी उजाले खान, गढ़ी सराय खान और मुख्य बाजार जैसे अधिकांश गांवों में सैनी आबादी है.2011 की जनगणना के अनुसार गोहाना की जनसंख्या 3,00000 थी जिसमें पुरुष जनसंख्या का 53% और महिलाएं 47% थी। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/Parshuram-1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/Parshuram-1.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-6666" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/Parshuram-1.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/Parshuram-1-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/Parshuram-1-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/Parshuram-1-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/Parshuram-1-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p><strong>राष्ट्र हित मंच, देव चेरिटेबल ट्रस्ट, हरियाणा कबीरा मंच, युवा हरियाणा विकास मंच, ब्राह्मण महासभा आदि संस्थाओं के अध्यक्ष के साथ-साथ भगवान् परशुराम इंजीनियरिंग कॉलेज, सोनीपत के सदस्य और माँ मोक्षदायिनी गंगा धाम ट्रस्ट (ऋषिकेशं हरिद्वार) के व्यवस्थापक  परशुराम गौड़ का कहना है कि 2014 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा का गोहाना में प्रभाव जरूर बढ़ा था लेकिन जीत नसीब नहीं हुई थी। ऐसी ही स्थिति 2019 में भी रही। इन दोनों चुनावों में भाजपा तीसरे स्थान पर रही थी। गोहाना में भाजपा ने 2014 में पिछड़े वर्ग से रामचंद्र जांगड़ा और 2019 से जाट समुदाय से तीर्थ राणा को मौका दिया था। 2024 में भाजपा ने यहां पर ब्राह्मणों के मजबूत और बड़े चेहरे डॉ. अरविंद शर्मा को मैदान में उतारा गया। वे गोहाना से विधायक बने और भाजपा का कमल खिलाने में कामयाब रहे। उन्होंने कांग्रेस के जगबीर सिंह मलिक को हराया। डॉ. अरविंद शर्मा कहा जाता है कि वे ब्राह्मण समाज का बड़ा और मजबूत चेहरा तो थे ही, साथ ही, गैर जाट वर्ग ने एकजुट होकर उनका साथ दिया था और इसके पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच थी। </strong></p>
<figure id="attachment_6663" aria-describedby="caption-attachment-6663" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/Parshuram-3.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/Parshuram-3.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-6663" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/Parshuram-3.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/Parshuram-3-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/Parshuram-3-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/Parshuram-3-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/Parshuram-3-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6663" class="wp-caption-text">पूर्व सांसद श्रीमती सुनीता दुग्गल के साथ हरियाणा के युवा नेता और अन्य सामाजिक कार्यकर्ता</figcaption></figure>
<p>बहरहाल, कल 30 मई को रोहतक के पहरवार में मनाई जा रही भगवान  परशुराम जयंती मनाया जा रहा है। इस जयंती का निमंत्रण  <strong>पूर्व सांसद श्रीमती सुनीता दुग्गल</strong> भी स्वीकार की। पूर्व सांसद ने कहा कि भगवान ओर संत तो सभी के बराबर होते है सभी को एक दूसरे के सनातनी पंथों का आदर सत्कार करना चाहिए और भगवान परशुराम जी के जन्मोत्सव को भारी उत्साह के साथ मनाना चाहिए। श्रीमती सुनीता दुग्गल ने कहा कि भगवान परशुराम जयंती राज्य स्तरीय ना होकर राष्ट्रीय स्तर पर मनाई जा रही है इसलिए इस अवसर पर सभी 36 बिरादरी के लोग लाखों की संख्या में पहुंच रहे है।  इस अवसर पर पंडित परशुराम गौड़ ने पूर्व सांसद सुनीता जी को 30 मई भगवान परशुराम जयंती एवं 11 जून संत कबीर जयंती की अग्रिम  शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर जगदीश चहल, सरपंच राजेश बागड़ी, अनिल, श्यामसुंदर, मोनू गामड़ी, श्री भगवान लठवाल आदि गणमान्य लोग मौजूद थे। </p>
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		<title>​आदर्श मिथिला पार्टी बिहार में 129 सीटों पर चुनाव लड़ेगी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 30 Apr 2025 04:18:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रेस रिलीज़]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
		<category><![CDATA[aadarsh mithila party]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>​सहरसा: आगामी बिहार विधानसभा चुनाव 2025 ​में ​आदर्श मिथिला पार्टी प्रदेश के 243 विधानसभा क्षेत्रों में से 129 सीटों पर अपना उम्मीदवार खड़ी करेगी ताकि विजयी उम्मीदवार मिथिला क्षेत्र की त्रासदी को प्रदेश के विधानसभा में बता सकें। मिथिला के विकास के लिए सरकार पर यथोचित दबाव डाल सकें, साथ ही, अलग मिथिला राज्य की [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>​सहरसा: आगामी बिहार विधानसभा चुनाव 2025 ​में ​आदर्श मिथिला पार्टी प्रदेश के 243 विधानसभा क्षेत्रों में से 129 सीटों पर अपना उम्मीदवार खड़ी करेगी ताकि विजयी उम्मीदवार मिथिला क्षेत्र की त्रासदी को प्रदेश के विधानसभा में बता सकें। मिथिला के विकास के लिए सरकार पर यथोचित दबाव डाल सकें, साथ ही, अलग मिथिला राज्य की स्थापना के लिए चल रहे आंदोलन को और अधिक सबल बना सकें।</strong> </p>
<p>तिवारी टोला सहरसा वार्ड नंबर बीस स्थित आदर्श मिथिला पार्टी के क्षेत्रीय कार्यालय पर ई सुरेश्वर पोद्दार के अध्यक्षता में आदर्श मिथिला पार्टी के कोर कमेटी के सदस्यों की मंथन बैठक ​में निर्णय लिया गया​ कि आगामी चुनाव में मिथिला क्षेत्र में 129 सीटों पर अपने पार्टी के प्रत्याशी का चयन कर क्षेत्र भ्रमण और जन जागरण अभियान चलाया जाएगा। </p>
<p>​बैठक में इस बात पर भी बल दिया गया कि आगामी विधानसभा चुनाव में मिथिला से पलायन रोकने एवं बंद पड़े उद्योग धंधे को पुनः शुरुआत करने को मुख्य मुद्दा बनाया जाएगा। तथा इसके प्राप्ति के लिए मिथिला राज्य के निर्माण पर जन समर्थन तथा अन्य समान विचारधारा वाले पार्टी से तालमेल किया जाएगा।​ इन बातों को ​राष्ट्रीय मैथिली परिषद् के संस्थापक अध्यक्ष डॉ धनाकर ठाकुर ​को अवगत कराया गया। </p>
<p><strong>बैठक में पार्टी के मिथिला क्षेत्र के अध्यक्ष उमेशचन्द्र भारती ने पिछले चुनाव पर चर्चा एवं आगामी विधानसभा चुनाव पर कार्य योजना प्रस्तुत किया​। ​यह निर्णय लिया गया कि आगामी विधानसभा चुनाव में सभी कार्यों को संपादित करने के लिए ग्यारह सदस्यों का चुनाव प्रबंधन समिति का गठन किया जाएगा। आगामी बैठक समस्तीपुर में मई महीने के अंतिम सप्ताह में आयोजित किया जाएगा।​ </strong></p>
<p>ई सुरेश्वर पोद्दार को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष मनोनीत किया गया है तथा अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली परिषद से सम्बद्ध उधोग मिथिला का पुनर्गठन पंडित विजय मिश्रा, समस्तीपुर के अध्यक्षता में किया गया, जिसमें अश्विनी कुमार मिश्र,मोधेपुरा को महासचिव तथा राजीव कुमार कर्ण, दरभंगा को सचिव मनोनीत किया गया। इस बैठक में मिथिला शिक्षा मंच के प्रो. पी. के. झा &#8220;प्रेम&#8221;,ई सुरेश्वर पोद्दार, उमेश भारती, पंडित विजय मिश्रा, अश्विनी कुमार मिश्र, दिनेश प्रसाद दिनकर,पुररूषोतम कुमार,राम बरण प्रसाद,विभा देवी, कंचन देवी, शिवनन्दन पोद्दार आदि उपस्थित थे।</p>
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		<title>श्रीमती द्वितीया दाई का जाना मिथिला समाज के लिए दुखद है 😢 आपको नमन 🙏</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 20 Apr 2025 12:10:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[bihar]]></category>
		<category><![CDATA[darbhanga]]></category>
		<category><![CDATA[darbhanga raaj]]></category>
		<category><![CDATA[maharaja]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>पटना : महाराजाधिराज सर कामेश्वर सिंह की अपनी सगी बहन श्रीमती लक्ष्मी बौआसिन-श्री ओझा मुकुंद झा के एकमात्र पुत्र श्री कन्हैया जी-श्रीमती कृष्णलता बौआसिन की पुत्री श्रीमती द्वितीया दाई कल अंतिम सांस ले ली। वे विगत कुछ दिनों से बीमार थीं। चिकित्सकों के अनुसार, उनके शरीर के कई अंग कार्य करना बंद कर दिया था। [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>पटना : महाराजाधिराज सर कामेश्वर सिंह की अपनी सगी बहन श्रीमती लक्ष्मी बौआसिन-श्री ओझा मुकुंद झा के एकमात्र पुत्र श्री कन्हैया जी-श्रीमती कृष्णलता बौआसिन की पुत्री श्रीमती द्वितीया दाई कल अंतिम सांस ले ली। वे विगत कुछ दिनों से बीमार थीं। चिकित्सकों के अनुसार, उनके शरीर के कई अंग कार्य करना बंद कर दिया था। 78-वर्षीय श्रीमती द्वितीया दाई के पार्थिव शरीर का पटना के दीघा घाट पर गंगा की अविरल धाराओं को साक्षी मानकर अंतिम संस्कार किया गया। वे अपने पीछे अपने पति कृष्णानंद झा, दो पुत्र समीर झा और सुमित झा के अलावे भरा-पूरा परिवार छोड़कर गयीं। </strong></p>
<p>श्रीमती द्वितीया दाई का जाना पटना स्थित मिथिला समाज ही नहीं, बल्कि मिथिलांचल के शिक्षित, विद्वान-विदुषियों के परिवारों के लिए कष्टदायक है। श्रीमती द्वितीया दाई को मैं निजी तौर पर अपने जीवन के प्रारंभिक वर्षों से जानता हूँ। करीब चार वर्ष पहले श्रीमती द्वितीया दाई जब <strong>आर्यावर्तइण्डियननेशन(डॉट)कॉम</strong> वेबसाइट के बारे में सुनी, वेबसाइट पर प्रकाशित शब्दों को पढ़ीं थी, तो एक दिन अचानक फोन कर पूछीं कि क्या इस वेबसाइट का निर्माण आप किये हैं? इसे आप चला रहे हैं? कुछ पल मैं निशब्द रहा, फिर लम्बी सांस लेते कहा &#8216;जी&#8217;। </p>
<p><strong>मेरे मुख से &#8216;स्वीकारात्मक&#8217; शब्द सुनकर श्रीमती द्वितीया दाई कुछ पल के लिए शांत हो गयीं, फिर कहती हैं: &#8220;आपको महाराजाधिराज ही नहीं, दरभंगा राज के सभी सम्मानित आत्माओं का आशीर्वाद है। दरभंगा राज ही नहीं, बल्कि मिथिला भूमि पर शायद एकमात्र आप ही हुए जो इस गरिमा को पुनःजीवित किये। अपने पिता महाराजा रामेश्वर सिंह के सम्मानार्थ उनके पुत्र महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह जिन दो अख़बारों को इंडियन नेशन (1930) और आर्यावर्त (1940) स्थापित कर प्रदेश के लोगों की आवाज के साथ, रोजी-रोटी का भी बंदोबस्त किए, आप अख़बारों के नाम को जीवित कर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दिए हैं। मैं बीच-बीच में अस्वस्थ हो जाती हूँ और श्री कृष्णानंद जी (पति) भी अस्वस्थ रहते हैं, तथापि मैं जरूर चाहूंगी की आपके इस अदम्य साहस और कार्य में हम भागीदारी अर्पित कर सकें।&#8221; मैं उनकी बातों को अन्तःमन से सुन रहा था। </strong></p>
<p>श्रीमती द्वितीय दाई कहती हैं &#8216;वेबसाइट पर पिछले कुछ दिनों से दरभंगा राज से सम्बंधित एक श्रृंखला प्रकाशित हो रहा है। मैं उसे बहुत ही तन्मयता से पढ़ती हूँ। पढ़ने के क्रम में मैं यह महसूस की कि इसको लिखने वाला कोई दक्ष व्यक्ति ही होगा । जिस नाम से यह प्रकाशित होता है उस नाम को मैं नहीं जानती थी। मैं तो आपको आपके घर के नाम से जानती हूँ। लेकिन दरभंगा से ही जब एक व्यक्ति इस बात को स्पष्ट किये कि आप ही लेखक हैं, मेरी आँखों के सामने आपके पिताजी और आपकी माँ दोनों सामने दिखने लगे। उनका संस्कार दिखने लगा। सम्बन्ध में आप बड़े हैं, मैं आपको आशीर्वाद नहीं दे सकती, लेकिन उम्र में मैं बड़ी हूँ, अतः मेरा आशीष और शुभकामना है आपको। आप जब भी पटना आएं, घर जरूर आएं।&#8221; </p>
<p><strong>चार वर्ष बाद आज, मैं नहीं जानता था कि जिन अख़बारों के नाम पर यह वेबसाइट है, जिन अख़बारों की स्थापना, निर्माण, पालन-पोषण में श्रीमती द्वितीया दाई के परिवार और परिजनों ने अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिए थे, उन्हीं अख़बारों के नाम को पुनर्जीवित करने वाला इस वेबसाइट पर उनकी मृत्योपरांत मैं मृत्युलेख लिखूंगा।  भारत रत्न शहनाई उस्ताद बिस्मिल्लाह खान इनकी शादी में शहनाई से मंगल गान गाये थे, ये सभी शब्द आपको समर्पित है श्रीमती द्वितीया दाई जी। आपका मेरे जीवन के प्रारंभिक वर्षों में बहुत उपकार है। मैं शब्दों से आपको श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ। </strong></p>
<p>चार वर्ष पूर्व श्रीमती द्वितीय दाई  से उनके जीवन काल में उन लोगों की पारिवारिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक, भ्रमण-सम्मेलन के बारे में पूछा था । उसने यह भी पूछा था कि उन्होंने महाराजाधिराज के जीवन काल में मिथिला को, दरभंगा को, उनके राजपाट को बहुत करीब से देखी हैं, चश्मदीद गवाह हैं; फिर ऐसा क्या और क्यों हुआ कि आज दरभंगा राज का यह हश्र हुआ ? उनसे दरभंगा राज के तत्कालीन व्यवस्था के अधीन महिलाओं की शिक्षा-दीक्षा के बारे में भी पूछा था । यह भी पूछा था कि अगर महाराजा संतानहीन नहीं होते तो क्या दरभंगा राज की स्थिति जो आज है, वैसी ही होती? उनसे यह भी पूछा कि राजा बहादुर विश्वेश्वर सिंह के तीन-तीन बेटे हुए, सम्बन्ध में भाई-बहन थे आप सभी, फिर ऐसा क्या हुआ कि महाराजाधिराज की मृत्यु के बाद दरभंगा राज बहुत तेजी के साथ पतन की ओर अग्रसर हो गया ? कल तक मिथिला ही नहीं, बिहार ही नहीं, भारत ही नहीं बल्कि विश्व-पटल पर अपना नाम स्वर्णाक्षरों में लिखने वाले दरभंगा राज को आज की पीढ़ियां नहीं पहचान रहीं हैं? </p>
<figure id="attachment_6342" aria-describedby="caption-attachment-6342" style="width: 1367px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/DWITIYA-2.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/DWITIYA-2.jpg" alt="" width="1367" height="2047" class="size-full wp-image-6342" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/DWITIYA-2.jpg 1367w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/DWITIYA-2-200x300.jpg 200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/DWITIYA-2-684x1024.jpg 684w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/DWITIYA-2-768x1150.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/DWITIYA-2-1026x1536.jpg 1026w" sizes="auto, (max-width: 1367px) 100vw, 1367px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6342" class="wp-caption-text">आपको अन्तःमन से नमन श्रीमती द्वितीया दाई जी</figcaption></figure>
<p>मेरी बातों को श्रीमती द्वितीया दाई बहुत ही एकाग्रचित होकर साथ सुन रही थी। फिर लम्बी उच्छ्वास लेते अपनी अश्रुपूरित आँखों से दरभंगा के अंतिम राजा महाराजाधिराज सर कामेश्वर सिंह के प्रति अपना सम्मान प्रकट करते हुए कहती है: “अगर महाराज साहेब आज जीवित होते तो शायद दरभंगा राज की यह स्थिति नहीं होती ….. और फिर कुछ क्षण के लिए शांत हो गयीं।” उनके अनुसार अपने बाल्यकाल में, अपने भाइयों, सगे-सम्बन्धियों के साथ उन्होंने जो दरभंगा राज की गरिमा, प्रतिष्ठा को देखी थी। महाराजाधिराज का पारिवारिक और सामाजिक प्रतिबद्धता, समाज के लोगों के लिए बहुत कुछ करने की उत्कंठा ताकि सबों के चेहरों पर मुस्कान रहे, यह भी महसूस की थी। महाराज का अपने प्रदेश के लिए जो आर्थिक सुदृढ़ता वाली दृश्टिकोण थी, उनमें जो दानशीलता की भावना थी; आज के समय में लोग सोच नहीं सकते हैं। अपनी आँचल से अपनी आखों के निचले हिस्से को पोछती फिर कहती हैं : “आज हम यह नहीं कह सकते कि जो स्थिति आज से सत्तर-अस्सी साल पहले थी दरभंगा राज की, वह स्थिति आज भी होती अगर महाराजाधिराज जीवित भी होते। वजह यह है कि तत्कालीन समाज की, लोगों की, व्यवस्था की, व्यवस्था में लगे अधिकारियों की, विद्वानों की, विदुषियों की, यानी समाज के सभी तबके के लोगों की जो सोच थी; जो समर्पण महाराजा के प्रति था, वही आज भी रहता। ऐसा कभी नहीं हो सकता है। समय और वातावरण में परिवर्तन के साथ लोगों की सोच में, उनके व्यवहार में भी परिवर्तन आना स्वाभाविक है।</p>
<p><strong>श्रीमती द्वितीया दाई फिर कहीं : “मैं जन्म से लेकर महाराजाधिराज की मृत्यु तक उन्हें देखी हूँ। उनका स्नेह, उनका प्यार, उनका सम्मान हम सबों को मिला। महाराजा साहेब का अपने छोटे भाई, यानी राजा बहादुर साहेब के लिए, बहन के लिए प्रेम, स्नेह पराकाष्ठा पर था। जब भी दरभंगा में होते थे, खाली समय होता था, वे कभी भी अपने भाई को, अपनी बहन को अपनी आखों से ओझल नहीं होने देते थे। कई बार महाराज साहेब अपनी इकलौती बहन के सामने बहुत ही विनम्रता के साथ खड़े होकर, स्नेह के साथ अन्तःमन से कहते थे “अगर तुम बेटा होती तो दरभंगा की राजा (रानी) तुम्हीं होती……यह बोलते-बोलते उनका कंठ अवरुद्ध हो जाता था। उनकी आँखें नम हो जाती थी। फिर .. हे महादेव !! कहते चुप हो जाते थे।” बचपन में या युवती होने तक भी ‘राजा’ महाराजा’ शब्द से, इस शब्द का सामाजिक सम्मान और प्रतिष्ठा से बहुत परिचित नहीं थी, लेकिन आज जब महाराजा साहेब की बातें याद आती है तो वे ‘साक्षात्’ खड़े दीखते हैं। कभी अपने सम्पूर्ण राजशाही पोशाकों में तो कभी महज धोती और सिलाई वाला कुर्ता में, गोल गला, दूध से भी अधिक सफ़ेद। उन्हें अपनी माता से बहुत प्यार था।</strong></p>
<p>वे आगे कही थी कि “महाराजा साहेब की दानशीलता कौन नहीं जानता। कितनी किताबें लिखी जा चुकी है महाराजाधिराज पर। देश विदेश के लोग, विद्वान, लेखक उनपर शोध किये, पुस्तकें लिखे। महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह की मृत्यु के बाद मिथिला की भूमि पर विगत छः दशक अथवा उसके पूर्व दानवीर कर्ण जैसा मनुष्य कभी पैदा नहीं लिया। वर्तमान स्थिति को देखकर यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता है कि अगर महाराजाधिराज जीवित होते तो भी दरभंगा राज का पतन “ऐसे” नहीं हुआ होता। देश आज़ाद हो गया था। परिस्थिति और परिवेश बदल गयी थी । लोग और उनकी सोच बदल रहे थे। समय बदल रहा था। लेकिन दरभंगा राज की जो आज स्थिति है, आज उसकी गरिमा की जो स्थिति है, दरभंगा राज के प्रति लोगों की जो सोच बन गयी है; ऐसी स्थिति कदापि नहीं होती। हां, उतार-चढ़ाव जीवन और प्रकृति का नियम है और हम-आप कोई भी प्रकृति के नियमों के विरुद्ध नहीं जा सकते। लेकिन आज जो स्थिति देखती हूँ, मन भर जाता है। किसे दोषी कहा जाये, किसे निर्दोष करार किया जाय यह कहना अत्यंत कठिन है। जो देखी थी, आज सपना लग रहा है। आज भी तरह-तरह की तस्वीरें मानस-पटल पर विचरण करती हैं। कभी स्मरण कर अपने आप हंसी आ जाती है, कभी आखें भर आती है…….”</p>
<p>श्रीमती द्वितीया दाई जब सात-आठ साल की थी, तब तक अपने माता-पिता के साथ दरभंगा में ही रहती थी। उनके जैसा दरभंगा राज किला के अंदर अनेक बच्चे थे। महाराज साहेब की नजर में लगभग सभी बच्चे समान थे। कहा जाता है कि महाराजा साहेब से पहले भी, यानी महाराजा रामेश्वर सिंह और उनके बड़े भाई महाराजा लक्ष्मीश्वर सिंह का भारतीय समाजों में योगदान, उनकी दानशीलता, उनकी मानवीयता और शैक्षिक विकास के लिए किये गए उपाय “स्वर्णाक्षरों” में उल्लिखित है। लेकिन सबसे बड़ी बिडम्बना यह है कि चार-दीवारी के अंदर रहने वाली महिलाएं, बच्चियां शिक्षा के लिए तरस गई। इस बात को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है कि उन दिनों मिथिला में ‘पर्दा-प्रथा’, या फिर ‘महिलाओं में शिक्षा बोध या शिक्षा की आवश्यता को उतना तबज्जो नहीं दिया गया। परिणाम यह हुआ कि शिक्षा के अभाव में उनकी सोच विकसित नहीं हो पाई। शिक्षा के विषय पर श्रीमती द्वितीया बौआसीन की भी वही स्थिति दिखी, जो दरभंगा के लाल किले के अंदर रहने वाली महिलाओं, बच्चियों की उन दिनों स्थिति थी। “सभी सुख-सुविधाएँ थी, बस शिक्षा का माहौल नहीं था, महिलाओं के लिए…… आज सोच कर मन दुखी हो जाता है।”</p>
<p><strong>शिक्षा के क्षेत्र में दरभंगा राज का योगदान अतुलनीय है। दरभंगा नरेशों ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, कलकत्ता विश्वविद्यालय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, पटना विश्वविद्यालय, कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय, दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और कई संस्थानों को काफी दान दिया। महाराजा रामेश्वर सिंह बहादुर पंडित मदनमोहन मालवीय के बहुत बड़े समर्थक थे और उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय को 5,000,000 रुपये कोष के लिए दिए थे। महाराजा रामेश्वर सिंह ने पटना स्थित दरभंगा हाउस (नवलखा पैलेस) पटना विश्वविद्यालय को दे दिया था। सन् 1920 में उन्होंने पटना मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के लिए 500,000 रुपये देने वाले सबसे बड़े दानदाता थे। उन्होंने आनन्द बाग पैलेस और उससे लगे अन्य महल कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय को दे दिए। कलकत्ता विश्वविद्यालय के ग्रंथालय के लिए भी उन्होंने काफी धन दिया। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय को राज दरभंगा से 70,935 किताबें मिलीं।स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में काफी योगदान किया। परन्तु आज की पीढ़ी को इस बात की पीड़ा है कि महाराजाधिराज के साथ साथ, उनके भाई राजकुमार विशेश्वर सिंह भी, अपने जीवन-काल में कभी दरभंगा राज के चहारदीवारी के अंदर रहने वाले अपने सम्बन्धियों को, लोगों को, बच्चों को, महिलाओं को समाज की मुख्यधारा में जुड़ने, जीवन में व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करने, शिक्षित होने के अवसर से वंचित रहे।</strong></p>
<figure id="attachment_6343" aria-describedby="caption-attachment-6343" style="width: 1917px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/DWITIYA-1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/DWITIYA-1.jpg" alt="" width="1917" height="1358" class="size-full wp-image-6343" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/DWITIYA-1.jpg 1917w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/DWITIYA-1-300x213.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/DWITIYA-1-1024x725.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/DWITIYA-1-768x544.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/DWITIYA-1-1536x1088.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/DWITIYA-1-100x70.jpg 100w" sizes="auto, (max-width: 1917px) 100vw, 1917px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6343" class="wp-caption-text">कई दशक पहले &#8211; श्रीमती द्वितीया दाई और उनके पति श्री कृष्णानंद झा</figcaption></figure>
<p>श्रीमती द्वितीया दाई कही थीं कि “सं 1950 के दशक के उत्तरार्ध, महाराजाधिराज के कहने पर माँ-बाबूजी के साथ सभी इलाहाबाद आ गए। इलाहाबाद अपने आप में शिक्षा के लिए विख्यात उन दिनों भी था, आज भी है। लेकिन इलाहाबाद आने पर भी दरभंगा राज से जुड़ी महिलाओं के लिए शिक्षा के मामले में कोई बदलाब नहीं आया। तत्कालीन समाज के प्रचलित नियम समाज के सभी तबके के लोगों को जकड़े था। महिला शिक्षा देश के अन्य भागों अंकुरित और पुष्पित भी हो रहा था; परन्तु हम बच्चियों को शिक्षित होने, शिक्षित करने के बारे में कोई सोच नहीं रहा था। समय बीत रहा था और हम बच्चियां बड़ी हो रही थी – बिना शिक्षा के, महिलाएं अशिक्षित की अशिक्षित रह गयीं।“जब तक महाराजाधिराज जीवित थे, छुट्टी के दिनों में भाई-बहन अपने माता-पिता के साथ वहीँ जाते थे, जहाँ महाराज साहेब जाते थे, रहते थे । लेकिन उनकी मृत्यु के साथ ही जैसे सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड बिखर गया। समस्त आशाएं टूट गयी। ऐसा लगा जैसे संबंधों की कड़ी भी टूट गयी हो। हां, महाराजा साहेब की मृत्यु के बाद भी कई वर्षों तक बड़ी महारानी थीं। उनके साथ हम लोगों का सम्बन्ध जो महाराजा साहेब के समय था, वह महाराजा साहेब के जाने के बाद भी रहा। मझली महारानी बहुत अल्प आयु में ही मृत्यु को प्राप्त की और जो छोटी महारानी कामसुंदरी जी अभी जीवित हैं, उनसे हम लोगों का बहुत घनिष्ट लगाव न पहले था, और न महाराज की मृत्यु के बाद। महाराजा साहेब की मृत्यु के बाद जैसे दरभंगा राज की बुनियाद ही समाप्त हो गई।</p>
<p>महाराजा साहब को कोई संतान नहीं था। राजा बहादुर के तीन बेटे थे – राजकुमार जीवेश्वर सिंह, फिर थे राजकुमार यज्ञेश्वर सिंह और सबसे छोटे थे राजकुमार शुभेश्वर सिंह। महाराजाधिराज की मृत्यु के समय सिर्फ राजकुमार जीवेश्वर सिंह का ही विवाह हुआ था और उनकी पत्नी थी श्रीमती राजकिशोरी जी। शेष दो भाई – राजकुमार यज्ञेश्वर सिंह और राजकुमार शुभेश्वर सिंह नाबालिग थे। राजकुमार जीवेश्वर सिंह अपनी प्रथम पत्नी श्रीमती राजकिशोरी जी के रहते हुए भी, दूसरी शादी भी किए। कुमार जीवेश्वर सिंह के प्रथम पत्नी से दो बेटियां – कात्यायनी देवी और दिब्यायनी देवी हुई और दूसरी पत्नी से पांच बेटियां – नेत्रायणी देवी, चेतना, द्रौपदी, अनीता, सुनीता – हुई । राजकुमार यज्ञेश्वर सिंह, जो राजा बहादुर विशेश्वर सिंह के मझले बेटे थे, को तीन बेटे हुए – कुमार रत्नेश्वर सिंह, कुमार रश्मेश्वर सिंह और कुमार राजनेश्वर सिंह। इसमें कुमार रश्मेश्वर सिंह की अकाल मृत्यु हो गई थी। जबकि राजबहादुर के सबसे छोटे पुत्र राजकुमार शुभेश्वर सिंह के दो पुत्र हुए – राजेश्वर सिंह और कपिलेश्वर सिंह। कुमार शुभेश्वर सिंह और उनकी पत्नी दोनों वर्षों पहले मृत्यु को प्राप्त किये। आज राजकुमार यज्ञेश्वर सिंह और उनकी पत्नी दोनों जीवित हैं। ईश्वर उन्हें स्वस्थ और दीर्घायु रखें।</p>
<p><strong>श्रीमती द्वितीया दाई के अनुसार, &#8220;राजा बहादुर के तीनों बेटों में बड़े (राजकुमार जीवेश्वर सिंह) और मझले (राजकुमार यज्ञेश्वर सिंह) को सभी दृष्टिकोण से राज के क्रियाकलापों से कोई विशेष लगाव नहीं था, प्रारम्भ से ही। फिर बदलती परिस्थियाँ भी कुछ उत्तरदायी रहीं। जो सबसे छोटे थे वे “अधिक सक्रीय” रहे। आज भी उनके बच्चे अधिक सक्रिय हैं। प्रारंभिक दिनों में भी महाराजा साहेब के इर्द-गिर्द बाबा (दिवंगत ओझा मुकुंद झा) तो थे अवश्य लेकिन अधिक सक्रिय श्री गिरीन्द्र मोहन मिश्र और न्यायमूर्ति लक्ष्मी कांत झा रहे।” ज्ञातव्य हो कि महाराजा की मृत्यु के बाद ‘वसीयत’ (5 जुलाई, 1961) और फिर “प्रोबेट” के बाद न्यायमूर्ति लक्ष्मी कान्त झा ‘सोल एस्क्यूटर” (निर्णय: कलकत्ता उच्च न्यायालय दिनांक 26 सितम्बर, 1963) बने। उसी ‘वसीयत’ में महाराजा ने तीन ट्रस्टियों – पंडित लक्ष्मी कांत झा, गिरीन्द्र मोहन मिश्र और श्री ओझा मुकुंद झा – का नाम लिखा था जिन्हे दरभंगा राज रेसिडुअरी एस्टेट के देख-रेख का जबाबदेही सौंपा था।</strong> </p>
<p>महाराजा यह भी लिख कर गए थे कि “एस्क्यूटर” अपना कार्य निष्पादित करने के बाद ट्रस्ट का समस्त कार्य ट्रस्टियों को सुपुर्द कर देंगे। सं 1963 के बाद सं 1978 तक न्यायमूर्ति लक्ष्मीकांत झा के समय काल में क्या हुआ, क्या नहीं हुआ यह तो “दरभंगा राज की वर्तमान स्थिति ही गवाह” है। लक्ष्मी कांत झा की मृत्यु 3 मार्च, 1978 को हो गयी। फिर कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा दो अवकाश प्राप्त न्यायाधीशों – न्यायमूर्ति एस ए मसूद और न्यायमूर्ति शिशिर कुमार मुखर्जी – की नियुक्ति हुई दरभंडा राज के प्रशासक के रूप में। फिर ‘एसेट्स और लायबिलिटी’ का ‘इन्वेंटरी’ बना और फिर कागजात तत्कालीन ट्रस्टियों – श्री द्वारकानाथ झा, श्री मदन मोहन मिश्र और कामनाथ झा – को 26 मई, 1979 को सुपुर्द किया गया।</p>
<p><strong>आपको अन्तःमन से नमन श्रीमती द्वितीया दाई जी। हमारे तरफ से, मेरे माता-पिता के तरफ से, भाई-बहनों के तरफ से, परिजनों के तरफ से, आर्यावर्तइण्डियननेशन कॉम के तरफ से, उन सभी लोगों के तरफ से जो आपको जानते थे, पहचानते थे &#8211; नमन और श्रद्धांजलि स्वीकार करें। </strong></p>
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		<title>इस पार और उस पार की लड़ाई: भाजपा पूरी ताकत लगा देगी महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभाओं में कब्ज़ा करने के लिए</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 16 Oct 2024 11:38:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[bihar]]></category>
		<category><![CDATA[bjp]]></category>
		<category><![CDATA[election]]></category>
		<category><![CDATA[jharkhand]]></category>
		<category><![CDATA[jmm]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली : अन्य खाली लोक सभा और कुछ राज्यों की विधानसभा स्थानों में चुनाव के साथ दो महत्वपूर्ण राज्यों महाराष्ट्र और झारखंड विधान सभाओं के लिए चुनावों की घोषणा आज हो गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद यह सातवां और आठवां विधान सभाओं के लिए चुनाव होने जा जा [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली : अन्य खाली लोक सभा और कुछ राज्यों की विधानसभा स्थानों में चुनाव के साथ दो महत्वपूर्ण राज्यों महाराष्ट्र और झारखंड विधान सभाओं के लिए चुनावों की घोषणा आज हो गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद यह सातवां और आठवां विधान सभाओं के लिए चुनाव होने जा जा रहा है। दिल्ली तत्कालीन मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के नेता अरविन्द केजरीवाल चाहते थे कि महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभाओं के चुनाव के साथ ही दिल्ली विधान सभा के लिए चुनाव संपन्न कराया जाय, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसी को तो राजनीति कहते हैं।  </strong></p>
<p>चुनाव आयोग महाराष्ट्र और झारखंड में विधानसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा की। महाराष्ट्र में एक चरण में 20 नवंबर को मतदान होगा  वहीं, झारखंड में दो चरणों में चुनाव होगा। पहले चरण का मतदान 13 नवंबर को होगा और दूसरे चरण का मतदान 20 नवंबर को होगा।  23 नवंबर को मतगणना के बात नजीतों की घोषणा होगी।  चुनाव के ऐलान के साथ ही दोनों राज्यों में नयी सरकार बनाने के लिए राजनीतिक दलों के बीच मुकाबले का मंच तैयार हो चुका है। महाराष्ट्र में विधानसभा का कार्यकाल 26 नवंबर को खत्म होने जा रहा है जबकि झारखंड में विधानसभा का कार्यकाल अगले साल पांच जनवरी को समाप्त होने वाला है। </p>
<p>लोकसभा सीटों में केरल की वायनाड में 13 नवंबर और महाराष्ट्र के नांदेड़ में 20 नवंबर को मतदान होगा । वहीं, 47 विधानसभा सीटों पर 13 नवंबर को और उत्तराखंड की केदारनाथ विधानसभा सीट पर 20 नवंबर को मतदान होगा। सभी के नतीजे 23 नवंबर को आएंगे। चुनावों की तिथि की घोषणा के साथ आज से वहां आचार संहिता लग गयी है। </p>
<p>मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार ने बताया कि झारखंड में मतदाताओं की कुल संख्या 2.6 करोड़ है। इनमें 1.29 करोड़ महिलाएं और 1.31 करोड़ पुरुष मतदाता हैं। उन्होंने कहा कि पहली बार मतदान के पात्र युवाओं की कुल संख्या 11.84 लाख है। कुमार ने कहा कि राज्य में कुल 29,562 मतदान केंद्रों की स्थापना की जाएगी, इनमें से 5042 मतदान शहरी इलाकों में जबकि 24,520 केंद्र ग्रामीण इलाकों में होंगे। राज्य में विधानसभा की 81 सीट हैं। इनमें 44 सामान्य, 28 अनुसूचित जनजाति और नौ अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है।</p>
<p>झारखंड में साल 2019 के विधानसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो), कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के गठबंधन ने राज्य की 81 में से 47 सीट जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया था। इसके बाद हेमंत सोरेन दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री बने।इस चुनाव में भाजपा 25 सीट पर सिमट गई थी और तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास भी चुनाव हार गए थे। पिछले पांच सालों में झारखंड में महाराष्ट्र की तरह कोई बहुत बड़ा राजनीतिक उलटफेर तो नहीं हुआ लेकिन इस दौरान झामुमो में घटे कुछ राजनीतिक घटनाक्रमों ने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया। मुख्यमंत्री सोरेन को कथित जमीन घोटाले से जुड़े धन शोधन के एक मामले में जनवरी 2024 में गिरफ़्तार कर लिया गया। सोरेन ने गिरफ्तारी से पूर्व मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया और नए मुख्यमंत्री के रूप में झामुमो संस्थापक शिबू सोरेन के करीबी सिपहसालार चम्पई सोरेन की ताजपोशी हुई।</p>
<p>हालांकि, जून महीने में हेमंत सोरेन के जमानत पर रिहा होने के बाद चम्पई सोरेन को इस्तीफा देना पड़ा और एक बार फिर राज्य की कमान हेमंत सोरेन के हाथों में आई गई। इस घटनाक्रम के कुछ दिनों बाद चम्पई सोरेन ने झामुमो से इस्तीफा दे दिया और भाजपा में शामिल हो गए। झारखंड में भाजपा का ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) और जनता दल (यूनाईटेड) के साथ गठबंधन है। इस बार तीनों दल साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। इस गठबंधन का मुकाबला झामुमो, कांग्रेस और राजद गठबंधन से होगा। </p>
<p>मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया, &#8216;लोग पूछते हैं कि किसी देश में पेजर से ब्लॉस्ट कर देते हैं, तो EVM क्यों नहीं हैक हो सकती। पेजर कनेक्टेड होता है भाई, ईवीएम नहीं। 6 महीने पहले EVM की चेकिंग शुरू होती है। पोलिंग पर ले जाना, वोटिंग के बाद वापस लाना। हर एक स्टेज पर पॉलिटिकल पार्टी के एजेंट या कैंडिडेट मौजूद होते हैं। जिस दिन कमीशनिंग होती है, उस दिन बैट्री डाली जाती है।&#8217; </p>
<p>&#8216;वोटिंग से 5-6 दिन पहले कमिशनिंग होती है। इस दिन सिंबल डाले जाते हैं और बैट्री डाली जाती है। बैट्री पर भी एजेंट के दस्तखत डाले जाते हैं। स्ट्रॉग रूम में जाती है, यहां भी 3 लेवल की चेकिंग होती है। जिस दिन पोलिंग के लिए निकलेंगी, तब भी यही प्रोसेस होगी। वीडियोग्राफी होगी। नंबर भी शेयर होंगे, ये मशीन यहां बूथ पर जाएगी। फिर चेकिंग होगी, वोट डालकर देखे जाएंगे। पूरे दिन वोटिंग हुई। फिर मशीन लॉक। फिर दस्तखत और हिसाब-किताब होता है। 20 शिकायतें आई हैं। हम हर सवाल का फैक्चुअल जवाब देंगे। जल्दी देंगे। अगला भी कुछ आएगा, रुकेगा नहीं।&#8217;</p>
<p>2019 का विधानसभा चुनाव शिवसेना और भाजपा ने मिलकर लड़ा था. राज्य की 288 सदस्यीय विधानसभा सीटों में से भाजपा ने 165 पर अपने उम्मीदवार उतारे थे. और उसे 105 सीटों पर जीत मिली थी, भाजपा महाराष्ट्र में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. शिवसेना ने 126 सीट पर चुनाव लड़ा था और उसे 56 पर जीत मिली थी. दूसरी तरफ, कांग्रेस ने 147 सीट पर उम्मीदवार उतारे थे. उसे 44 सीटों पर जीत मिली थी. जबकि राकांपा को 121 में से 54 सीट पर जीत हासिल हुई थी. नतीजों के ऐलान के बाद भाजपा के नेतृत्व वाले राजग को बहुमत मिला लेकिन मुख्यमंत्री पद के मुद्दे पर दोनों दलों में बात नहीं बन सकी. जिसके चलते यह गठबंधन टूट गया. शिवसेना ने कांग्रेस और राकांपा से हाथ मिला लिया. राज्य में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में एमवीए की सरकार बनी.</p>
<p>तकरीबन ढाई साल तक यह सरकार चली और फिर शिवसेना के विधायक और राज्य सरकार में मंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में पार्टी के दर्जनों विधायकों ने उद्धव ठाकरे के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंक दिया. शिंदे ने असली शिवसेना होने का दावा करते हुए भाजपा के साथ सरकार बना ली और राज्य के मुख्यमंत्री बन गए. इसी दौरान, राकांपा में भी विद्रोह की स्थिति बन रही थी. पिछले साल जुलाई में अजीत पवार के नेतृत्व में राकांपा एक धड़ा अलग हो गया. इसके अधिकांश विधायक शिवसेना और भाजपा के एकनाथ शिंदे गुट के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ सरकार में शामिल हो गए. इस सरकार में अजीत पवार को उपमुख्यमंत्री बनाया गया.</p>
<p>उधर, झारखंड में साल 2019 के विधानसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो), कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के गठबंधन ने राज्य की 81 में से 47 सीट जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया था. इसके बाद हेमंत सोरेन दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री बने. इस चुनाव में भाजपा 25 सीट पर सिमट गई थी और तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास भी चुनाव हार गए थे. पिछले पांच सालों में झारखंड में महाराष्ट्र की तरह कोई बहुत बड़ा राजनीतिक उलटफेर तो नहीं हुआ लेकिन इस दौरान झामुमो में घटे कुछ राजनीतिक घटनाक्रमों ने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया. मुख्यमंत्री सोरेन को कथित जमीन घोटाले से जुड़े धन शोधन के एक मामले में जनवरी 2024 में गिरफ़्तार कर लिया गया. सोरेन ने गिरफ्तारी से पूर्व मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया और नए मुख्यमंत्री के रूप में झामुमो संस्थापक शिबू सोरेन के करीबी सिपहसालार चम्पई सोरेन की ताजपोशी हुई.</p>
<p>हालांकि, जून महीने में हेमंत सोरेन के जमानत पर रिहा होने के बाद चम्पई सोरेन को इस्तीफा देना पड़ा और एक बार फिर राज्य की कमान हेमंत सोरेन के हाथों में आई गई. इस घटनाक्रम के कुछ दिनों बाद चम्पई सोरेन ने झामुमो से इस्तीफा दे दिया और भाजपा में शामिल हो गए. झारखंड में भाजपा का ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) और जनता दल (यूनाईटेड) के साथ गठबंधन है. इस बार तीनों दल साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं. इस गठबंधन का मुकाबला झामुमो, कांग्रेस और राजद गठबंधन से होगा.</p>
<p>राजनितिक विशेषज्ञों का कहना है कि महाराष्ट्र में महायुति यानी शिवसेना, भाजपा और NCP अजित पवार गुट की सरकार है। एंटी इनकम्बेंसी और 6 बड़ी पार्टियों के बीच बंटने वाले वोट को साधना पार्टी के लिए बड़ी चुनौती होगी। 2024 लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र की 48 सीटों में INDIA गठबंधन को 30 और NDA को 17 सीटें मिलीं।। इनमें BJP को 9, शिवसेना को 7 और NCP को सिर्फ 1 सीट मिली। भाजपा को 23 सीटों का नुकसान हुआ। 2019 लोकसभा चुनाव से NDA को 41 सीटें मिली थीं। 2014 में यह आंकड़ा 42 था। यानी आधे से भी कम। 2024 लोकसभा चुनाव के हिसाब से भाजपा 60 सीटों के आसपास सिमट जाएगी। विपक्षी गठबंधन के एक सर्वे में राज्य की 288 सीटों पर MVA यानी महाविकास अघाड़ी को 160 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। भाजपा के लिए मराठा आंदोलन सबसे बड़ी चुनौती है। इसके अलावा शिवसेना और NCP में तोड़फोड़ के बाद उद्धव ठाकरे और शरद पवार के साथ लोगों की सिम्पैथी है। </p>
<p>2019 में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन था। बीजेपी ने 105 सीटें और शिवसेना ने 56 सीटें जीती। गठबंधन से एनसीपी को 54 और कांग्रेस को 44 सीटें मिलीं थी। भाजपा-शिवसेना आसानी से सत्ता में आ जाती, पर मनमुटाव के कारण गठबंधन टूट। 23 नवंबर 2019 को फड़नवीस ने मुख्यमंत्री और अजीत पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। ये सुबह-सुबह की शपथ थी। पर बहुमत परीक्षण से पहले 26 नवंबर 2019 को दोनों ने इस्तीफा दे दिया। 28 नवंबर 2019 को शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की महा विकास अघाड़ी सत्ता में आई। इसके बाद शिवसेना और एनसीपी में बगावत हुई और 4 दल बने। लोकसभा चुनाव में शरद और उद्धव को बढ़त मिली। इन्हीं सब पृष्ठभूमि में विधानसभा चुनाव होगा।</p>
<p>झारखंड में महागठबंधन यानी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के नेतृत्व वाली सरकार है। इसमें कांग्रेस, राजद और वाम दल शामिल हैं। भाजपा को झारखंड में सरकार बनाने के लिए संथाल परगना और कोल्हान प्रमंडल की 32 सीटों पर फोकस करना होगा। संथाल परगना की 18 विधानसभा सीटों में से सिर्फ तीन सीटें अभी भाजपा के पास हैं। पिछले चुनाव में कोल्हान प्रमंडल की 14 विधानसभा सीटों पर तो भाजपा का खाता भी नहीं खुल पाया। जमशेदपुर पूर्वी से तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास को भी हार का सामना करना पड़ा। जनवरी में भ्रष्टाचार के मामले में CM पद से इस्तीफा देकर हेमंत सोरेन को जेल जाना पड़ा। हालांकि जमानत मिलने के बाद वे बाहर आए और चंपाई सोरेन से 156 दिन में CM का पद वापस ले लिया। इसके बाद चंपाई भाजपा में शामिल हो गए। झारखंड आंदोलन में शिबू सोरेन के साथी रहे चंपाई को कोल्हान टाइगर भी कहा जाता है।</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/state/bjp-will-use-all-its-strength-to-capture-maharashtra-and-jharkhand-assemblies">इस पार और उस पार की लड़ाई: भाजपा पूरी ताकत लगा देगी महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभाओं में कब्ज़ा करने के लिए</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>प्रधानमंत्री झारखंड के हजारीबाग में 80,000​+करोड़ रुपये की लागत वाली विभिन्न परियोजनाओं का शिलान्यास​,​ उद्घाटन किया​, लेकिन परियोजनाओं को लागू करने वाले कोई नहीं दिखे</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/state/prime-minister-laid-the-foundation-stone-and-inaugurated-various-projects-costing-rs-80000-crore-in-hazaribagh</link>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 02 Oct 2024 13:16:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[central projects]]></category>
		<category><![CDATA[hemant soren]]></category>
		<category><![CDATA[jharkhand]]></category>
		<category><![CDATA[narendra]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>हज़ारीबाग़: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज झारखंड के हजारीबाग में 80,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। साथ ही, उन्होंने आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान और अनेकानेक परियोजनाओं का भी उद्घाटन और शिलान्यास किया। यह अभियान 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 549 जिलों और 2,740 ब्लॉकों में 5 करोड़ से अधिक आदिवासी लोगों को लाभान्वित करते हुए लगभग 63,000 गांवों को [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/state/prime-minister-laid-the-foundation-stone-and-inaugurated-various-projects-costing-rs-80000-crore-in-hazaribagh">प्रधानमंत्री झारखंड के हजारीबाग में 80,000​+करोड़ रुपये की लागत वाली विभिन्न परियोजनाओं का शिलान्यास​,​ उद्घाटन किया​, लेकिन परियोजनाओं को लागू करने वाले कोई नहीं दिखे</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>हज़ारीबाग़: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज झारखंड के हजारीबाग में 80,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। साथ ही, उन्होंने आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान और अनेकानेक परियोजनाओं का भी उद्घाटन और शिलान्यास किया। यह अभियान 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 549 जिलों और 2,740 ब्लॉकों में 5 करोड़ से अधिक आदिवासी लोगों को लाभान्वित करते हुए लगभग 63,000 गांवों को कवर करेगा। इसका उद्देश्य भारत सरकार के विभिन्न 17 मंत्रालयों और विभागों द्वारा कार्यान्वित 25 क्रियाकलापों के माध्यम से सामाजिक आधारभूत संरचना, स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका में महत्वपूर्ण अंतराल को पूरा करना है।</strong></p>
<p>इस अवसर पर झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार और जनजातीय कार्य मंत्री श्री जुएल ओराम सहित अन्य लोग उपस्थित थे। लेकिन झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन या स्थानीय सरकार के कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं थे। उपस्थित लोगों का  कहना था कि यह भारतीय जनता पार्टी का झारखंड के लोगों के लिए एक उपहार है, जिसका क्रियान्वयन कौन करेगा, या किसके माध्यम से परियोजनाएं पूरा होगा, यह स्पष्ट नहीं है। वैसे किसी भी केंद्रीय योजनाओं को प्रधानमंत्री स्वयं प्रदेशों में घूम-घूमकर क्रियान्वयन करने, देखरेख करने की परम्परा नहीं है।  साथ ही, प्रदेश के राज्यपाल अथवा केंद्रीय मंत्री में उन परियोजनाओं का देख-रेख नहीं करते।  वैसी स्थिति मेंयह समझ से परे हैं कि यह महज एक घोषणा है ताकि झारखण्ड के मतदाताओं को केंद्रीय सत्तारूढ़ पार्टी के तरफ लाया जा सके, अथवा इस घोषणा का कोई जमीनी महत्व भी है। झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा की अगुआई में सरकार है। </p>
<p>बहरहाल, उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने झारखंड की विकास यात्रा का हिस्सा बनने के लिए आभार व्यक्त किया। आदिवासी समुदायों के सशक्तिकरण और कल्याण से जुड़ी आज की 80,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह आदिवासी समुदायों के प्रति सरकार की प्राथमिकता का प्रमाण है।</p>
<p>महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि आदिवासी कल्याण के प्रति उनकी दृष्टि और विचार भारत की पूंजी हैं। महात्मा गांधी का मानना था कि भारत तभी प्रगति कर सकता है जब आदिवासी समाज तेज गति से प्रगति करे। श्री मोदी ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार आदिवासी उत्थान पर अधिकतम ध्यान दे रही है और आज धरती आबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान का शुभारंभ किया गया। इस अभियान के तहत, लगभग 80,000 करोड़ रुपये की लागत से लगभग 550 जिलों में 63,000 आदिवासी बहुल गांवों का विकास किया जाएगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने बताया कि इन आदिवासी बहुल गांवों में सामाजिक-आर्थिक जीवन को बेहतर बनाने के लिए काम किया जाएगा और इसका लाभ देश के 5 करोड़ से अधिक आदिवासी भाई-बहनों तक पहुंचेगा। उन्होंने कहा, &#8220;झारखंड के आदिवासी समाज को भी इससे बहुत लाभ होगा।&#8221;</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/H20241002167659.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/H20241002167659.jpg" alt="" width="2200" height="1147" class="aligncenter size-full wp-image-5796" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/H20241002167659.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/H20241002167659-300x156.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/H20241002167659-1024x534.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/H20241002167659-768x400.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/H20241002167659-1536x801.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/H20241002167659-2048x1068.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a></p>
<p>प्रधानमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि धरती आबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान की शुरुआत भगवान बिरसा मुंडा की धरती से की जा रही है। प्रधानमंत्री ने यह भी याद दिलाया कि भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर झारखंड से पीएम-जनमन योजना की शुरुआत की गई थी। उन्होंने घोषणा करते हुए कहा कि 15 नवंबर, 2024 को जनजातीय गौरव दिवस पर भारत पीएम-जनमन योजना की पहली वर्षगांठ मनाएगा। उन्होंने कहा कि पीएम-जनमन योजना के माध्यम से देश के उन आदिवासी क्षेत्रों तक विकास का लाभ पहुंच रहा है, जो पीछे रह गए थे। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि पीएम-जनमन योजना के तहत आज लगभग 1350 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की आधारशिला रखी गई। योजना के बारे में चर्चा करते हुए, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सबसे पिछड़े आदिवासी क्षेत्रों में बेहतर जीवन के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क जैसी सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा।</p>
<p>झारखंड में अपने पहले वर्ष में ही पीएम-जनमन योजना की कई उपलब्धियों के बारे में चर्चा करते हुए, श्री मोदी ने कहा कि 950 से अधिक अति पिछड़े गांवों में हर घर में पानी पहुंचाने का काम पूरा हो गया है। उन्होंने कहा कि राज्य में 35 वन धन विकास केंद्रों को भी मंजूरी दी गई है। प्रधानमंत्री ने सुदूर आदिवासी क्षेत्रों को मोबाइल कनेक्टिविटी से जोड़ने के लिए किए जा रहे कार्यों पर भी प्रकाश डाला, जो प्रगति के समान अवसर प्रदान करके आदिवासी समाज को बदलने में मदद करेगा।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) के तहत 1360 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इसमें 1380 किलोमीटर से अधिक सड़कें, 120 आंगनवाड़ी, 250  बहुउद्देश्यीय केंद्र और स्कूलों के 10 छात्रावास शामिल हैं। इसके अलावा, उन्होंने पीएम जनमन के तहत कई ऐतिहासिक उपलब्धियों का भी अनावरण किया, जिसमें लगभग 3,000 गांवों में 75,800 से अधिक विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के घरों का विद्युतीकरण, 275 मोबाइल चिकित्सा इकाइयों का संचालन, 500 आंगनवाड़ी केंद्रों का संचालन, 250 वन धन विकास केंद्रों की स्थापना और 5,550 से अधिक पीवीटीजी गांवों को ‘नल से जल’ से परिपूर्ण करना शामिल है।</p>
<figure id="attachment_5797" aria-describedby="caption-attachment-5797" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/H20241002167653.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/H20241002167653.jpg" alt="" width="2200" height="1277" class="size-full wp-image-5797" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/H20241002167653.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/H20241002167653-300x174.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/H20241002167653-1024x594.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/H20241002167653-768x446.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/H20241002167653-1536x892.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/10/H20241002167653-2048x1189.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5797" class="wp-caption-text">प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज झारखंड के हजारीबाग में 80,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन</figcaption></figure>
<p>प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि जब आदिवासी युवाओं को शिक्षा और अवसर मिलेंगे तो आदिवासी समाज आगे बढ़ेगा। इसके लिए, श्री मोदी ने कहा कि सरकार आदिवासी क्षेत्रों में एकलव्य आवासीय विद्यालय बनाने के अभियान में जुटी है। प्रधानमंत्री ने आज 40 एकलव्य आवासीय विद्यालयों के उद्घाटन और 25 नए विद्यालयों की आधारशिला रखने का जिक्र करते हुए कहा कि एकलव्य विद्यालयों को सभी आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाना चाहिए और उच्च स्तर की शिक्षा प्रदान की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए सरकार ने प्रत्येक विद्यालय का बजट भी लगभग दोगुना कर दिया है।उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सही प्रयास किए जाने पर सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि आदिवासी युवा आगे बढ़ेंगे और देश को उनकी क्षमताओं से लाभ मिलेगा। </p>
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		<title>बिहार और झारखंड में उत्तरी कोयल जलाशय परियोजना के शेष कार्यों को पूरा करने की संशोधित लागत को  केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/state/union-cabinet-approves-revised-cost-of-completing-remaining-works-of-north-koel-reservoir-project-in-bihar-and-jharkhand</link>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 04 Oct 2023 12:25:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[Bihar Jharkhand]]></category>
		<category><![CDATA[KoelKaro Water]]></category>
		<category><![CDATA[Project work bandh]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने उत्तरी कोयल जलाशय परियोजना के शेष कार्यों को संशोधित 2,430.76 करोड़ रुपये (केंद्रीय हिस्सा: 1,836.41 करोड़ रुपये) की लागत से पूरा करने के लिए जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग के एक प्रस्ताव को [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने उत्तरी कोयल जलाशय परियोजना के शेष कार्यों को संशोधित 2,430.76 करोड़ रुपये (केंद्रीय हिस्सा: 1,836.41 करोड़ रुपये) की लागत से पूरा करने के लिए जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग के एक प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी है, जबकि अगस्त, 2017 में शेष कार्य के लिए पहले स्वीकृत लागत 1,622.27 करोड़ रुपये (केंद्रीय हिस्सा: 1,378.60 करोड़ रुपये) की थी।</strong></p>
<p>शेष कार्य पूरा होने पर, यह परियोजना झारखंड और बिहार के चार सूखाग्रस्त जिलों में 42,301 हेक्टेयर क्षेत्र को अतिरिक्त वार्षिक सिंचाई प्रदान करेगी।</p>
<p>उत्तरी कोयल जलाशय परियोजना एक अंतर-राज्यीय प्रमुख सिंचाई परियोजना है जिसका कमान क्षेत्र दो राज्यों बिहार और झारखंड में है। इस परियोजना में कुटकू गांव (जिला लातेहार, झारखंड) के पास उत्तरी कोयल नदी पर एक बांध, बांध के नीचे 96 किमी एक बैराज (मोहम्मदगंज, जिला पलामू, झारखंड), दाहिनी मुख्य नहर (आरएमसी) और बैराज से बाईं मुख्य नहर (एलएमसी) शामिल हैं। बिहार सरकार द्वारा उसके अपने संसाधनों से वर्ष 1972 में बांध के निर्माण के साथ-साथ अन्य सहायक गतिविधियां शुरू की गईं। काम 1993 तक जारी रहा और उस वर्ष बिहार सरकार के वन विभाग द्वारा रोक दिया गया। बांध में जमा पानी से बेतला नेशनल पार्क और पलामू टाइगर रिजर्व को खतरा होने की आशंका के कारण बांध का काम रुका हुआ था। काम रुकने के बाद यह परियोजना 71,720 हेक्टेयर में वार्षिक सिंचाई प्रदान कर रही थी। </p>
<p>नवंबर 2000 में बिहार के विभाजन के बाद, बांध और बैराज का मुख्य कार्य झारखंड में हैं। इसके अलावा मोहम्मदगंज बैराज से पूरी 11.89 किमी बाईं मुख्य नहर (एलएमसी) झारखंड में है। हालांकि, दाहिनी मुख्य नहर (आरएमसी) के 110.44 किमी में से पहला 31.40 किमी झारखंड में है और शेष 79.04 किमी बिहार में है। वर्ष 2016 में, भारत सरकार ने परिकल्पित लाभों को प्राप्त करने के लिए परियोजना को संचालित करने के लिए उत्तरी कोयल जलाशय परियोजना के शेष कार्यों को पूरा करने के लिए सहायता प्रदान करने का निर्णय लिया। पलामू टाइगर रिजर्व के मुख्य क्षेत्र को बचाने के लिए जलाशय के स्तर को कम करने का निर्णय लिया गया। परियोजना के शेष कार्यों को 1622.27 करोड़ रुपये के अनुमानित व्यय पर पूरा करने के प्रस्ताव को अगस्त 2017 में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित किया गया था।</p>
<p>इसके बाद, दोनों राज्य सरकारों के अनुरोध पर, कुछ अन्य घटकों को परियोजना में शामिल करना आवश्यक पाया गया। परिकल्पित सिंचाई क्षमता प्राप्त करने के लिए तकनीकी दृष्टि से आरएमसी और एलएमसी की पूर्ण लाइनिंग को भी आवश्यक माना गया। इस प्रकार, गया वितरण प्रणाली के कार्य, आरएमसी और एलएमसी की लाइनिंग, रास्ते में संरचनाओं की रीमॉडलिंग, कुछ नई संरचनाओं का निर्माण और परियोजना से प्रभावित परिवारों (पीएएफ) के राहत एवं पुनर्वासन (आर एंड आर) के लिए एकबारगी विशेष पैकेज को अद्यतन लागत अनुमान में प्रदान किया जाना था। तदनुसार, परियोजना का संशोधित लागत अनुमान तैयार किया गया था। शेष कार्यों की लागत 2430.76 करोड़ रुपये में से केंद्र 1836.41 करोड़ रुपये उपलब्ध कराएगा।</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/state/union-cabinet-approves-revised-cost-of-completing-remaining-works-of-north-koel-reservoir-project-in-bihar-and-jharkhand">बिहार और झारखंड में उत्तरी कोयल जलाशय परियोजना के शेष कार्यों को पूरा करने की संशोधित लागत को  केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>संविधान की धारा तीन के अंतर्गत मिथिला राज्य का निर्माण किया जा सकता है: डाॅ धनाकर ठाकुर</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/state/mithila-state-can-be-created-under-section-3-of-the-constitution</link>
					<comments>http://www.aryavartaindiannation.com/state/mithila-state-can-be-created-under-section-3-of-the-constitution#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 21 Mar 2023 11:56:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[bihar]]></category>
		<category><![CDATA[darbhanga]]></category>
		<category><![CDATA[demand]]></category>
		<category><![CDATA[demonstration]]></category>
		<category><![CDATA[mithila]]></category>
		<category><![CDATA[Patna]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>दरभंगा: मिथिला क्षेत्र के विकास के लिए अलग मिथिला राज्य की मांग को लेकर मिथिला राज्य संघर्ष समिति के तत्वावधान में दरभंगा प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय के समक्ष विशाल धरना-प्रदर्शन किया गया। धरनास्थल पर एक सभा हुई जिसकी अध्यक्षता मिथिला राज्य संघर्ष समिति के कार्यकारी अध्यक्ष डाॅ राम मोहन झा ने किया। मंच संचालन प्रवक्ता प्रो [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>दरभंगा: मिथिला क्षेत्र के विकास के लिए अलग मिथिला राज्य की मांग को लेकर मिथिला राज्य संघर्ष समिति के तत्वावधान में दरभंगा प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय के समक्ष विशाल धरना-प्रदर्शन किया गया। धरनास्थल पर एक सभा हुई जिसकी अध्यक्षता मिथिला राज्य संघर्ष समिति के कार्यकारी अध्यक्ष डाॅ राम मोहन झा ने किया। मंच संचालन प्रवक्ता प्रो ज्योति रमण झा ने किया।</strong> </p>
<p>सभा को संबोधित करते हुए अध्यक्ष डाॅ राम मोहन झा ने कहा कि मिथिला क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए अलग मिथिला राज्य का निर्माण अतिआवश्यक है इसके लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है। आजादी के पश्चात यहाँ की सबसे बड़ी समस्या बाढ, सुखाड, बेरोजगारी, पलायन रहा है। डाॅ झा ने कहा कि जब भाषाई आधार पर राज्यों का गठन किया तब भी मैथिली भाषी क्षेत्र मिथिला की उपेक्षा की गई। वैदिक काल से लेकर अट्ठारहवीं शताब्दि के अन्त तक मिथिला राज्य का स्वतंत्र अस्तित्व रहा था। बिहार सरकार मिथिला वासियों के सपनों पर पानी फेर एक का काम करती आ रही है। अब समय आ गया है कि मिथिला राज्य के निर्माण के लिए आर-पार की लडाई लडनी होगी। </p>
<p>मिथिला राज्य संघर्ष समिति के संस्थापक डाॅ धनाकर ठाकुर ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि संविधान की धारा तीन के अंतर्गत  भारत में मिथिला राज्य का निर्माण किया जा सकता है। मिथिला विदेह का प्राचीन राज्य आज बिहार और आंशिक रूप से झारखंड एवं पश्चिम बंगाल में फैला हुआ है। हमारे मिथिला/तिरहुत क्षेत्र को 1774 में तत्कालीन दरभंगा के शासकों के विरोध के वाबजूद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के द्वारा पटना के अधीन कर दिया गया था जिसका विरोध सन 1800 में सम्राट शाह आलम द्वितीय  ने भी किया था। </p>
<p>मिथिला तिरहुत को बंगाल प्रेसीडेंसी और 1912 से बिहार और उड़ीसा के भीतर रखा गया जिसमें से उड़ीसा और झारखंड आज एक अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में हैं। लेकिन भारत की सबसे प्राचीन सांस्कृतिक रूप से समृद्ध मिथिला क्षेत्र को एक अलग राज्य के रूप में अधिसूचित नहीं किया गया। डाॅ ठाकुर ने महामहिम राष्ट्रपति महोदया से आग्रह किया कि भारत सरकार को निर्देश दें कि मिथिला राज्य के निर्माण के लिए संविधान की धारा तीन के अंतर्गत संसद में विधेयक लाये।</p>
<p>संस्थापक डाॅ धनाकर ठाकुर जी के द्वारा श्री इन्द्रभूषण झा &#8216;पप्पू&#8217; जी को मिथिला राज्य संघर्ष समिति का उपाध्यक्ष मनोनीत किया गया। सभा को संबोधित करने वाले अन्य प्रमुख लोगों में डाॅ सुरेश राम, भरत यादव,  विजय कांत चौधरी, इन्द्रभूषण झा &#8216;पप्पू&#8217;, प्रो ज्योति रमण झा, चन्द्र मोहन चौधरी, डाॅ कुशेश्वर सहनी, राजीव कुमार, नारायण यादव, मुचकुंद मल्लिक मुकुंद, रामकुमार राय, चन्द्र मोहन चौधरी, प्रो विश्वनाथ झा सहित अन्य कई लोग शामिल थे। धरना प्रदर्शन समाप्ति के पश्चात आयुक्त दरभंगा के द्वारा नियुक्त दण्डाधिकारी बहादुरपुर अंचलाधिकारी श्री अभय पद दास को राष्ट्रपति महोदया के नाम प्रेषित ज्ञापन सौंपा गया‌ ।</p>
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		<title>दरभंगा राज की मिट्टी फिर धंसी, शहर-रामबाग को जोड़ने वाली सड़क फिर टूटी &#8211; &#8216;सरकार निद्रा में&#8217;😪</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 23 Dec 2022 05:23:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>दरभंगा (रामबाग) : दरभंगा ही नहीं, प्रदेश सहित देश-विदेश को कल तक दरभंगा का लालकिला से जोड़ने वाला यह पथ, जो कभी राष्ट्र की राजनीतिक धाराओं को नियंत्रित करता था, आज उसी लालकिले के उत्तराधिकारियों की उपेक्षा के कारण धराशायी होना पड़ा।  वजह &#8211; &#8220;सरकार सोये हुए हैं और दरभंगा राज सहित मिथिला की संस्कृति [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>दरभंगा (रामबाग) : दरभंगा ही नहीं, प्रदेश सहित देश-विदेश को कल तक दरभंगा का लालकिला से जोड़ने वाला यह पथ, जो कभी राष्ट्र की राजनीतिक धाराओं को नियंत्रित करता था, आज उसी लालकिले के उत्तराधिकारियों की उपेक्षा के कारण धराशायी होना पड़ा।  वजह &#8211; &#8220;सरकार सोये हुए हैं और दरभंगा राज सहित मिथिला की संस्कृति बहाल हो रही है &#8211; सोये-सोये।&#8221;</strong></p>
<p>शहर के साथ साथ लालकिले के अंदर दरभंगा राज परिवार के लोगों को जानने-पहचानने वाले तो कुछ और कह रहे हैं। दुर्भाग्य यह है कि इस ऐतिहासिक मार्ग को देखने वाला कोई नहीं है। वैसे किले के अंदर रहने वाले और सम्पत्तियों के स्वामी यह कहते नहीं थकते कि &#8220;वे दरभंगा राज परिवार की, मिथिला की गरिमा और संस्कृति को पुनः स्थापित करने, बहाल करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।&#8221; लेकिन इस पुल के अस्तित्व को देखकर दरभंगा के लोग कुछ और सोच रहे हैं। </p>
<p>स्थानीय लोग, स्थानीय प्रशासन को दोषी करार करते हैं कि प्रशासन का इस दिशा में कोई पहल नहीं कर रही है। लेकिन दरभंगा के ही अन्य लोगों का कहना है कि &#8220;यह मार्ग निजी है और उसकी देखरेख, रखरखाव करने का एकमात्र दायित्व दरभंगा राज और ट्रस्ट के लोगों का है। चुकी इस परिसर के अंदर की जमीनों को ट्रस्ट-डीड के विरुद्ध जाकर निजी लाभ के लिए निजी लोगों के हाथों बेचा गया है, इस दृष्टि से विक्रेता का और भी महत्वपूर्ण दायित्व होता है कि वह क्रेताओं को बेहतर मार्ग प्रशस्त करे। बहरहाल, स्थानीय पुलिस इस मामले में एक ट्रेक्टर को पकड़ी है। बेचारा ट्रेक्टर !!!</p>
<p><strong>दरभंगा के आशीष कुमार (पत्रकार) का कहना है कि &#8220;आज पुल अंतिम सांसे गिन रहा है। जिन्हें खतरे का आभास है वो तो बच कर निकल जाते पर अनजान लोगों के लिए जान पर आफत है। आज भी एक दर्दनाक हादसा होते होते बचा है। एक बालू लदा ओवरलोडेड ट्रक पुल से जा रहा था, जानकारी के अभाव में ट्रक समेत टूटे पूल के कारण पोखर में समा गया, उसे तत्काल तत्परता दिखाते हुए अपने जान को जोखिम में डाल कर ट्रक को निकाल दिया गया।&#8221; </strong></p>
<p>दरभंगा के रामबाग पैलेस के मुख्य द्वार पर दरभंगा राज के पूर्व के 20 महाराजाओं की ‘ना’ ‘सही, महाराजा माधव सिंह के बाद से लेकर महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह तक के “सात राजाओं की आत्मा” अवश्य बिलखती होगी, सोचती होगी कि इस परिसर में कल तक तो ‘अनुशासन’ अपनी ‘पराकाष्ठा’ पर थी, रास्ता ‘खास’ था – आज ‘आम’ कैसे हो गया? छोड़िये पीपल के पेड़ को। रहने दें बरगद के बृक्षों को जो दरभंगा के रामबाग किले के चारो तरफ दीवारों में जहाँ-जहाँ छेद दिखा, अपनी जड़ें मजबूत करने में लग गया। यह बात सिर्फ पेड़-पौधों के साथ नहीं, बल्कि दरभंगा के अंतिम महाराजा सर कामेशर सिंह के शरीर को पार्थिव होने के बाद उस चारदीवारी के अंदर या फिर कुछ अपने, कुछ दूर-दराज के सम्बधी, सभी अपना-अपना ठिकाना उन्हीं बृक्षों की भांति रामबाग के छत्रछाया में करने लगे, कुछ जीवन-यात्रा सफल कर लिए, कुछ मसक्कत कर रहे हैं । महाराज की पत्नी महारानी राज्यलक्ष्मी की मृत्यु के बाद इस परिसर का स्वामित्व जिनके हाथों आया उनसे दरभंगा राज की, महाराज की, संस्कृति की, पुरातत्व की, घरोहर की सुरक्षा और संरक्षित रहने की बात सोचा नहीं जा सकता। </p>
<figure id="attachment_4691" aria-describedby="caption-attachment-4691" style="width: 1600px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/12/2.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/12/2.jpg" alt="" width="1600" height="1090" class="size-full wp-image-4691" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/12/2.jpg 1600w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/12/2-300x204.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/12/2-1024x698.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/12/2-768x523.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/12/2-1536x1046.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/12/2-218x150.jpg 218w" sizes="auto, (max-width: 1600px) 100vw, 1600px" /></a><figcaption id="caption-attachment-4691" class="wp-caption-text"><br />दरभंगा के ऐतिहासिक रामबाग परिसर को शहर, प्रदेश और देश से जोड़ने वाला पुल मिट्टी में धंसा &#8211; तस्वीर आशिष कुमार पत्रकार</figcaption></figure>
<p><strong>दिनांक 5 जुलाई, 1961 को “दि लास्ट विल एंड टेस्टामेंट” में दरभंगा के अंतिम राजा महाराजाधिराज सर कामेश्वर सिंह अपना वसीयत बनाते समय वसीयत के आठवें पैरा में लिखा है: “I, bequeath the property mentioned in Schedule “A” to my wife Maharani Rajyalakshmi for her life for her residence (and for no other purposes). She shall be entitled to reside in the said house and use the furniture and fittings only without let or hindrance by anybody. After her demise the said property shall vest in my youngest nephew Rajkumar Subheshawra Singh absolutely.“ और महारानी राज्यलक्ष्मी अपने पति और दरभंगा के अंतिम राजा महाराजाधिराज की मृत्यु के 16-वर्ष बाद अंतिम सांस ली। दस्तावेज के अनुसार उक्त संपत्ति महाराजाधिराज के छोटे भतीजे कुमार शुभेश्वर सिंह का हो गया “अब्सॉल्युटली” – आगे कुमार शुभेश्वर सिंह भी मृत्यु को प्राप्त किये। स्वाभाविक है यह संपत्ति उनके दो पुत्रों को हस्तगत हुआ होगा। </strong></p>
<p>लेकिन आज जब महाराजाधिराज के इस ऐतिहासिक परिसर के प्रवेश द्वार पर प्रवेश कर्ज का यह हाल देखा तो मन विह्वलित हो उठा। महाराजाधिराज की आत्मा विलखती होगी। क्योंकि महाराजधिराज वसीयत के 11वें पारा में ऐसा क्यों लिखा की उनकी दोनों पत्नियों की मृत्यु के बाद संपत्ति का एक-तिहाई हिस्सा उनके सबसे छोटे भतीजे, राजकुमार शुभेश्वर सिंह के “हिन्दू ब्राह्मण समुदाय” की पत्नी द्वारा उत्पन्न बच्चों का होगा। </p>
<p>महाराज की मृत्यु 1 अक्टूबर, 1962 को होती है। उनकी पत्नी महारानी राज्यलक्ष्मी सन 1978 में मृत्यु को प्राप्त कर अपने पति के पास पहुँचती हैं, और 1934  में दरभंगा के लालकिला, यानी रामबाग परिसर के प्रवेश के साथ बाहरी दीवार और किले के अंदर प्रवेश करने के द्वार के बीच बना ऐतिहासिक 86-वर्ष का वृद्ध पुल अपनी रख-रखाव, इस विशाल परिसर के स्वामित्व रखने वाले की उपेक्षा के कारण आंशिक रूप से मृत्यु को प्राप्त करता है, ध्वस्त हो जाता है। कहते हैं  कभी दरभंगा राज परिवार के लोग इसी पुल से एक किले से दूसरे किले जाते थे। यह भी एक धरोहर ही था। ध्वस्त हो भी क्यों नहीं? देखते ही देखते कभी “खास” रास्ता “आम” हो गया। कहते हैं यह पुल तब धंसा जब एक जरूरत-से-अधिक सामानों से लदा ट्रक इस रास्ते से गुजर रही थी। </p>
<p>इतना ही ”ओवरलोडेड”  मानसिक स्थिति होती तो आज महाराजाधिराज का नाम, उनकी संपत्ति इस तरह “ध्वस्त” नहीं ऐसी घटना पहले भी हो चुकी है। उस समय विश्वविद्यालय थाना में ट्रक के मालिक पर प्राथमिकी दर्ज किया गया था। जिला प्रशासन से कई बार ये मांग की थी कि पुल पर से भारी वाहनों को गुजरने से रोका जाय। लेकिन किसी ने रामबाग पैलेस के स्वामी की ओर ऊँगली नहीं उठाया। किसी ने यह नहीं पूछा, जो रास्ता कल तक “खास” था, आज “आम” कैसे हो गया ? कहा जाता है कि इस भव्य किले का निर्माण कोई 240 वर्ष पूर्व राजा प्रताप सिंह के काल में हुआ था। बाद में राजा माधव सिंह के काल-खंड में कुछ पुनर्निर्माण और विस्तार हुआ । </p>
<p>ज्ञातब्य हो कि महाराजाधिराज दिल्ली के लाल किले के तर्ज पर अपने 85 एकड़ की जमीन पर एक किला बनाना प्रारम्भ किये थे जिसका प्रारम्भ 1934 के ऐतिहासिक भूकंप के बाद प्रारम्भ हुआ था। इस किले के निर्माण के लिए ब्रिटिश फर्म के ठेकेदार बैग कैगटीम को जिम्मेदारी दी गई थी। किले के तीन तरफ लगभग 90 फ़ीट ऊंची यह दीवार तैयार की गयी। तीन तरफ तो दीवार बन गई, चौथी तरफ, यानी, पश्चिम इलाके में यह दीवार नहीं बन सका । कुछ लोग कहते हैं कि तीन तरफ दीवार बनते-बनते देश आज़ाद हो गया, जमींदारी प्रथा समाप्त हो गई, इसलिए पश्चिमी दीवार अछूता रह गया। जबकि कुछ लोगों का कहना है कि इस किले के पश्चिम इलाके में रहने वाले लोगों शिकायत की कि इस दीवार से उनके घरों में आने वाली रोशनी अवरुद्ध हो गयी है। सभी न्यायालय से न्याय मांगे और और फिर अदालत ने निर्माण कार्य पर रोक लगा दी। खैर।इस किले में लाल ईंटों का प्रयोग किया गया | इसका डिज़ाइन फतेहपुर, सिकरी के बुलंद दरवाज़ा से प्रेरित है | </p>
<figure id="attachment_4692" aria-describedby="caption-attachment-4692" style="width: 1600px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/12/3.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/12/3.jpg" alt="" width="1600" height="1201" class="size-full wp-image-4692" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/12/3.jpg 1600w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/12/3-300x225.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/12/3-1024x769.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/12/3-768x576.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/12/3-1536x1153.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1600px) 100vw, 1600px" /></a><figcaption id="caption-attachment-4692" class="wp-caption-text"><br />दरभंगा के ऐतिहासिक रामबाग परिसर को शहर, प्रदेश और देश से जोड़ने वाला पुल मिट्टी में धंसा &#8211; तस्वीर आशिष कुमार पत्रकार</figcaption></figure>
<p>इस किले के अंदर दो महल हैं। ऐसा माना जाता है कि राज परिवार की “कुल देवता” यहीं हैं । विगत कई भूकम्पों के दौरान महल नष्ट हो गया। लालकिला कई जगहों से दरक गया। लेकिन तब इसकी मरम्मत का कोई काम नहीं हुआ। फिर 2015 के तेज भूकंप में कई जगहों पर न सिर्फ छतिग्रस्त हुआ बल्कि किले के ऊपरी हिस्से का मलबा सड़को पर भी गिर था। किले की मरम्मत नहीं होने से किला लगातार जर्जर हाल होता जा रहा है। जगह-जगह.दीवाल पर बड़े-बड़े पेड़ निकल आए हैं। कई जगहों पर 10 से 20 फ़ीट तक ऊंची दीवारों में दरार साफ दिखाई दे रही है। दीवार के दक्षिण इलाके में 90 फ़ीट की दीवार घट कर 20-25 फ़ीट ही रह गई है। </p>
<p>महाराजाधिराज के इस ऐतिहासिक किले का क्षेत्रफल में उत्तरोत्तर कमी हो रही है। किले की दक्षिण दीवार की ऊंचाई में भी क्रमशः कम हो रही है। महाराजा कामेश्वर सिंह की जब मृत्यु हुई उसके बाद, उनके उत्तराधिकारियों ने कई महलों के भूखंड को  बेचना शुरू कर दिया था । उन प्लॉटों को खरीदने वाले लोगों ने कॉलोनियों और घरों का निर्माण किया। तो कही,होटल, रेस्तरां और दुकानों को खोला गया |  महाराजाधिराज के वसीयत के शिड्यूल ‘A’ और ‘B’ में उद्धृत सम्पत्तियाँ, यानी महारानी राजलक्ष्मी और महारानी कामसुंदरी को जीवन पर्यन्त रहने के लिए जिन भवनों को महाराज बहुत “स्नेह” और “प्रेम” से लिखा था, ताकि उन्हें महाराज के बिना भी, अपनी अंतिम सांस तक “तकलीफ” नहीं हो; महाराजा की मृत्यु के बाद विगत छः दशकों से उन महलों की दीवारें, महलों की ईंट, बरामदे, खम्भे, छत, परिसर सभी टकटकी निगाहों से सूर्य की रोशनी में प्रत्येक आवक-जावक जीव को देखता आ रहा है, सोचता आ रहा है – कोई उसका भी हाल पूछे !! बारिस में बादलों की गर्जन के साथ भवनों के एक-एक ईंटों के रूह काँप जाते हैं। सभी डर से थर-थर कांपते हैं। परन्तु कोई नहीं आता, कोई नहीं पूछता। चतुर्दिक ‘उपेक्षाओं के पेड़-पौधे, घास-फूस कुकुरमुत्तों जैसा फ़ैल गया है। </p>
<p>बहरहाल, कोई सात सात पहले, बिहार सरकार द्वारा बिहार के एन्सिएंट मोनुमेंट्स एंड आर्किओलॉजिकल साईट्स के अधीन दरभंगा के रामबाग पैलेस को एन्सिएंट मोन्यूमेंट की श्रेणी में रखने से पूर्व लोगों से उनका विचार, ऑब्जेक्शन मांगी थी। जैसे ही लोगों से आपत्ति मांगने से संबंधित सूचना के प्रकाशन के साथ ही दरभंगा राज फोर्ट में रहने वाले लोगों में खलबली मच गई। कोर्ट-मुकदमा हो गया। कला, संस्कृति और युवा विभाग, बिहार सरकार के सचिव, विभाग के उप-सचिव, पुरातत्व विभाग के निदेशक, अधीक्षक (पटना अंचल), दरभंगा के जिला मजिस्ट्रेट, सब-डिविजनल अधिकारी और अंचल अधिकारी प्रतिवादी बन गए।  महाराजाधिराज के भतीजे दिवंगत कुमार शुभेश्वर सिंह के दोनों पुत्र – राजेश्वर सिंह और कपिलेश्वर सिंह – पटना उच्च न्यायालय से अनुरोध करते हैं कि बिहार सरकार के डिप्टी सेक्रेटरी, आर्ट, कल्चर और यूथ डिपार्टमेंट द्वारा दिनांक 17 अगस्त, 2010 को जारी एक अधिसूचना, जिसमें उपरोक्त अधिकारी ने ‘आर्ट ट्रेजर्स एक्ट, 1976 के अधीन लोगों से ‘ऑब्जेक्शन’ मांगे थे की दरभंगा स्थित महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह के दरभंगा राज फोर्ट को क्यों नहीं “बिहार एन्सिएंट मोनुमेंट्स एंड आर्किओलॉजिकल साईट्स रिमेंस” के अधीन ले लिया जाय, निरस्त कर दिया जाय। </p>
<p>वादी का कहना था कि नियमानुसार उसी स्थान / भवनों को उक्त नियमों के तहत ‘एन्सिएंट मोनुमेंट्स’ के रूप में नहीं माना जा सकता है जो न्यूनतम 100-वर्ष पूरे नहीं किये हों। और नियमानुसार, दरभंगा राज फोर्ट 100 वर्ष की आयु के नहीं हैं, अतः नियमनुसार यह ‘एन्सिएंट मोनुमेंट्स’ के रूप में नहीं माना जा सकता। नियमों के अनुसार, कोई भी ऐसी चीज जो 100 साल या इससे अधिक पुरानी हो तो वह ‘पुरातात्विक’ है। इस ऐतिहासिक निर्णय का श्रेय भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के एंटीक्वटीज एंड आर्ट ट्रेजर्स एक्ट, 1972 को जाता है। यह कानून 1976 से लागू हुआ। इसका मकसद भारतीय सांस्कृतिक विरासत की बहुमूल्य वस्तुओं की लूट और उन्हें गैर-कानूनी माध्यमों से देश से बाहर भेजने पर रोक लगाना था। वैसे, इसके सिर्फ नकारात्मक और अनपेक्षित परिणामों का अतिरेक ही सामने आया। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि यह कानून इतने कड़े और अभावग्रस्त नियमों से भरा हुआ है कि बेईमान ‘कला के सौदागर’ सरकारी अधिकारियों और कस्टम अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर अपना रास्ता निकाल ही लेते है।  </p>
<p><strong>सवाल यह है कि रामबाग परिसर में पैसे के लिए जमीन बिकेगी, भवन निर्माण होगा तो जमीन के क्रेता/भवन निर्माण कर्ता तो भवन निर्माण सामग्री लाएंगे ही। दूकान ही खोल दिए। पिछले कुछ सालों में एक बड़ी आबादी बस गई है। आप कुछ कर सकते नहीं। बेचारे महाराजाधिराज की आत्मा भी रामबाग परिसर में कराहती होगी। दरभंगा के लोगों का मानना है कि दरभंगा राज की नींव क्रमशः कमजोर हो रही है। उनके पुरखों का उदाहरण देकर जिस दरभंगा राज की गरिमा की, यहाँ के राजा-महाराजाओं की वर्चस्व की चर्चाएं की जाती थी, आज समय के गर्त में धूमिल हो गई है। आज दरभंगा राज की गरिमा समाप्त हो गयी है। लेकिन वे स्वयं में इतना सामर्थ नहीं जुटा पा रहे हैं कि वे दरभंगा राज की गरिमा को पुनः स्थापित कर सकें। </strong></p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/state/darbhanga-raj-soil-sank-again-connectivity-broken">दरभंगा राज की मिट्टी फिर धंसी, शहर-रामबाग को जोड़ने वाली सड़क फिर टूटी &#8211; &#8216;सरकार निद्रा में&#8217;😪</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>मानिए या नहीं मानिए &#8220;राजेश्वरी&#8221; भाग्यशाली है, तेजस्वी उप-मुख्यमंत्री फिर बने वियाह के ठीक आठ महीने बाद और चचिया ससुर मगध सम्राट</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/state/tejaswis-wife-rajeshwari-is-lucky</link>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 10 Aug 2022 12:46:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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		<category><![CDATA[chiefminister]]></category>
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		<category><![CDATA[tejashwi yadav]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>पटना / नई दिल्ली : बिहार की चमत्कारिक राजनीतिक उठापटक में भले लोग बेवजह प्रशांत किशोर को तवज्जो दे रहे हों, उनकी राजनीतिक &#8216;विशेषज्ञता&#8217; का विश्लेषण कर रहे हों, या फिर वे &#8216;स्वयंभू विशेषण&#8217; करने पर आमादा हों, सच तो यह है कि आज ठीक आठ महीने के बाद बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री-द्वय लालू प्रसाद यादव-राबड़ी देवी [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/state/tejaswis-wife-rajeshwari-is-lucky">मानिए या नहीं मानिए &#8220;राजेश्वरी&#8221; भाग्यशाली है, तेजस्वी उप-मुख्यमंत्री फिर बने वियाह के ठीक आठ महीने बाद और चचिया ससुर मगध सम्राट</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>पटना / नई दिल्ली : बिहार की चमत्कारिक राजनीतिक उठापटक में भले लोग बेवजह प्रशांत किशोर को तवज्जो दे रहे हों, उनकी राजनीतिक &#8216;विशेषज्ञता&#8217; का विश्लेषण कर रहे हों, या फिर वे &#8216;स्वयंभू विशेषण&#8217; करने पर आमादा हों, सच तो यह है कि आज ठीक आठ महीने के बाद बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री-द्वय लालू प्रसाद यादव-राबड़ी देवी के कनिष्ठ पुत्र तेजस्वी यादव की नव-विवाहिता पत्नी रशेल आइरिस का भाग्य यादव परिवार के लिए &#8220;सौभाग्यवती&#8221; हो गया। </strong></p>
<p>सुश्री रशेल आइरिस और तेजस्वी यादव का विवाह आज के ही दिन आठ माह पहले 10 दिसंबर, 2021 को नई दिल्ली में हुई थी। सुश्री रशेल आइरिस का भाग्य आज इतना प्रखर हो गया कि अपने पति को प्रदेश का उप-मुख्यमंत्री दोबारा बना दी और अपने चचिया ससुर श्री नीतीश कुमार को आठवीं बार मगध का सम्राट, यानि मुख्यमंत्री ऑफ़ बिहार &#8211; नितीश कुमार। </p>
<figure id="attachment_4307" aria-describedby="caption-attachment-4307" style="width: 1080px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/1-2.jpeg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/1-2.jpeg" alt="" width="1080" height="1080" class="size-full wp-image-4307" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/1-2.jpeg 1080w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/1-2-300x300.jpeg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/1-2-1024x1024.jpeg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/1-2-150x150.jpeg 150w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/1-2-768x768.jpeg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/1-2-24x24.jpeg 24w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/1-2-48x48.jpeg 48w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/1-2-96x96.jpeg 96w" sizes="auto, (max-width: 1080px) 100vw, 1080px" /></a><figcaption id="caption-attachment-4307" class="wp-caption-text">मुख्यमंत्री नीतीश कुमार &#8211; सबके हैं</figcaption></figure>
<p>कहते हैं कि बिहार की राजनीति को &#8216;समझने&#8217; के लिए प्रशांत किशोर को अभी कई वर्ष लगेंगे, बशर्ते पूरा प्रदेश &#8220;लोभी&#8221; ना हो जाए। क्योंकि &#8220;लोभी गाँव में ठग भूखा नहीं मरता।&#8221; </p>
<p>नीतीश (71) कल राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के मुख्यमंत्री के तौर पर इस्तीफा दे दिया था और सात दलों के महागठबंधन के विधायकों के समर्थन से नयी सरकार बनाने का दावा भी किया। आज प्रदेश के राज्यपाल फागू चौहान ने उन्हें गोपनीयता की शपथ दिलाई है। राजद नेता तेजस्वी यादव ने भी उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। शपथ ग्रहण के बाद तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार के पैर भी छुए।</p>
<figure id="attachment_4308" aria-describedby="caption-attachment-4308" style="width: 1080px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/2-2.jpeg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/2-2.jpeg" alt="" width="1080" height="1080" class="size-full wp-image-4308" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/2-2.jpeg 1080w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/2-2-300x300.jpeg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/2-2-1024x1024.jpeg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/2-2-150x150.jpeg 150w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/2-2-768x768.jpeg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/2-2-24x24.jpeg 24w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/2-2-48x48.jpeg 48w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/2-2-96x96.jpeg 96w" sizes="auto, (max-width: 1080px) 100vw, 1080px" /></a><figcaption id="caption-attachment-4308" class="wp-caption-text">उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव &#8211; आपका आभार</figcaption></figure>
<p>वैसे सुश्री रशेल आइरिस वर्तमान राजनीतिक बदलाव पर श्री नीतीश कुमार के साथ-साथ प्रदेश के लोगों को अन्तःमन से धन्यवाद दी हैं, लेकिन आतंरिक सूत्रों का मानना है कि सास श्रीमती राबड़ी देवी और ससुर श्री लालू प्रसाद यादव अपनी नई दुल्हन को बहुत आशीर्वाद भी दिए हैं। सूत्रों का कहना है कि विगत कई वर्षों के बाद घर में हंसी-ख़ुशी वापस आयी है। यह भी कहा जा रहा है कि इस आगामी छठ पर्व में तेजस्वी यादव की पत्नी &#8220;राजेश्वरी&#8221; भी अपनी सास के साथ भगवान् सूर्य को अर्ध्य देंगी। ज्ञातव्य हो कि तेजस्वी यादव विवाह बंधन में बंधने के बाद पहली बार जब घर पहुंचे थे तो उनके पिता लालू प्रसाद यादव अपनी बहु को आशीष देते समय नया नाम भी दिया था &#8211;  राजेश्वरी। </p>
<figure id="attachment_4309" aria-describedby="caption-attachment-4309" style="width: 1080px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/3-1.jpeg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/3-1.jpeg" alt="" width="1080" height="1080" class="size-full wp-image-4309" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/3-1.jpeg 1080w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/3-1-300x300.jpeg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/3-1-1024x1024.jpeg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/3-1-150x150.jpeg 150w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/3-1-768x768.jpeg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/3-1-24x24.jpeg 24w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/3-1-48x48.jpeg 48w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/3-1-96x96.jpeg 96w" sizes="auto, (max-width: 1080px) 100vw, 1080px" /></a><figcaption id="caption-attachment-4309" class="wp-caption-text">आ घर लौट चलें &#8211; सब माफ़</figcaption></figure>
<p>बहरहाल, शपथ ग्रहण के बाद नीतीश कुमार 2024 के लिए विपक्ष से एकजुट रहने की अपील की और वे मीडिया से बात की। नाम लिए बिना उन्होंने भाजपा पर हमला बोला। नीतीश ने कहा, &#8216;2014 में आने वाले, 2024 में रहेंगे तब ना। हम रहें या न रहें, वे 2024 में नहीं रहेंगे। मैं विपक्ष को 2024 के लिए एकजुट होने की अपील करता हूं।&#8217; प्रधानमंत्री पद के सवाल पर उन्होंने कहा कि मैं इस पद का उम्मीदवार नहीं हूं।</p>
<p><strong>उधर, किशोर साहब अलगे कहते फिर रहे हैं कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ गठबंधन में असहज महसूस कर रहे थे और इसी वजह से उन्होंने दूसरे दलों के साथ गठबंधन करने का फैसला किया। हकीकत यह है कि सत्तर-वर्षीय खांटी बिहारी नेता, जो जयप्रकाश नारायण की सम्पूर्ण क्रांति रूपी राजनीतिक बीज से अंकुरित होकर प्रदेश का कमान आठवीं बार संभाले हैं; प्रशांत किशोर &#8220;पुनः चुंबकीय ध्रुव से चिपकना चाहते हैं, जबकि बख्तियारपुर वाले लगातार &#8216;विकर्षण&#8217; वाली ऊँगली आगे किये हुए हैं।</strong> </p>
<figure id="attachment_4310" aria-describedby="caption-attachment-4310" style="width: 1280px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/8.jpeg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/8.jpeg" alt="" width="1280" height="853" class="size-full wp-image-4310" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/8.jpeg 1280w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/8-300x200.jpeg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/8-1024x682.jpeg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/8-768x512.jpeg 768w" sizes="auto, (max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></a><figcaption id="caption-attachment-4310" class="wp-caption-text">आइए नीतीश बाबू, आपका स्वागत है।</figcaption></figure>
<p>इतना ही नहीं, टीवी पर यब भी बोलते सुना जा रहा है कि &#8220;बिहार की राजनीति अभी बिहार में ही रहेगी। सन 2012-13 के बाद से यह छठा प्रयोग है। इन सभी समय नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री बने। हालांकि, बिहार की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया। मैं उम्मीद करता हूं कि नयी सरकार कुछ अच्छा करेगी। यह देखना होगा कि नयी सरकार कुछ करती है या नहीं, क्योंकि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और जनता दल (यूनाइटेड) का भ्रष्टाचार सहित कई मुद्दों पर रुख एकदम अलग है।&#8221;</p>
<figure id="attachment_4311" aria-describedby="caption-attachment-4311" style="width: 1280px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/10.jpeg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/10.jpeg" alt="" width="1280" height="853" class="size-full wp-image-4311" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/10.jpeg 1280w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/10-300x200.jpeg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/10-1024x682.jpeg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/10-768x512.jpeg 768w" sizes="auto, (max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></a><figcaption id="caption-attachment-4311" class="wp-caption-text">बड़ा नीमन ननकिरबा है हमरा छोटका</figcaption></figure>
<p>उधर, उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव का कहना है कि सांप्रदायिक तनाव भाजपा द्वारा फैलाया जा रहा था, वे क्षेत्रीय दलों को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं।महागठबंधन इतना मजबूत है कि विधानसभा में विपक्ष में सिर्फ भाजपा बचेगी। नीतीश कुमार द्वारा लिया गया मुश्किल फैसला एक ऐसा फैसला है जिसकी जरूरत थी। बिहार ने वही किया जो देश को करने की जरूरत है। हमने उन्हें रास्ता दिखाया है। हमारी लड़ाई बेरोजगारी के खिलाफ रही है। हमारे मुख्यमंत्री ने गरीबों और युवाओं का दर्द महसूस किया। हम गरीबों और युवाओं को एक महीने के भीतर बंपर नौकरी देंगे, यह इतना भव्य होगा कि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। </p>
<figure id="attachment_4312" aria-describedby="caption-attachment-4312" style="width: 1280px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/15.jpeg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/15.jpeg" alt="" width="1280" height="853" class="size-full wp-image-4312" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/15.jpeg 1280w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/15-300x200.jpeg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/15-1024x682.jpeg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/15-768x512.jpeg 768w" sizes="auto, (max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></a><figcaption id="caption-attachment-4312" class="wp-caption-text">बड़े दिनों के बाद याद आया नीतीश जी</figcaption></figure>
<p>बिहार कांग्रेस के प्रभारी भक्त चरण दास ने बुधवार को चुटकी लेते हुए कहा कि हमें लगता है कि राज्य में भाजपा का पतन महाराष्ट्र में उसकी राजनीति और दलबदल इंजीनियरिंग का जवाब है। भगवा खेमे पर निशाना साधते हुए भक्त चरण दास ने कहा कि भाजपा मुक्त बिहार एक नया संदेश है जो लोगों को भेजा गया है। दास ने कहा कि जब देश की प्रगति, देश की आजादी और इसकी पहचान की बात आती है तो कांग्रेस हमेशा एक मजबूत स्तंभ रही है। भगवा पार्टी सभी छोटी पार्टियों का सफाया करना चाहती है। दास ने दावा किया कि वह भारत में सिर्फ एक पार्टी (भाजपा), एक रंग&#8230; और एक धर्म की स्थापना करना चाहता है। यह पूछे जाने पर कि क्या नई महागठबंधन की बिहार सरकार का अध्यक्ष कांग्रेस से होगा, जिसके पास विधानसभा में 19 विधायक हैं, दास ने कहा कि जो होगा अच्छे के लिए होगा।</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/state/tejaswis-wife-rajeshwari-is-lucky">मानिए या नहीं मानिए &#8220;राजेश्वरी&#8221; भाग्यशाली है, तेजस्वी उप-मुख्यमंत्री फिर बने वियाह के ठीक आठ महीने बाद और चचिया ससुर मगध सम्राट</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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