शायद पहली बार बिहार में ‘कॉम्पेन्सेनेट ग्रॉउंड’ पर नितीश कुमार मुख्य मंत्री बनेंगे, उनका अंक ‘लालटेन’ में दीखता नहीं 

नरेंद्र मोदी और नितीश कुमार 
नरेंद्र मोदी और नितीश कुमार 

अगर चुनाव-पूर्व शर्त के मुताबिक नितीश कुमार पुनः मुख्य मंत्री पद पर आसीन होते हैं तो यह बात पटना के डाक बांग्ला चौराहे पर ढोल-तासा-बाजा-लाउडस्पीकर पर चिल्ला-चिल्लाकर कहा जा सकता है कि “नरेन्द्र मोदी नितीश बाबू का सम्मान करते हुए ‘कॉम्पेन्सेनेट ग्रॉउंड’ पर उन्हें पुनः मुख्य मंत्री की कुर्सी और मुख्य मंत्री के कार्यालय में बैठने दिए हैं अन्यथा भारत के किसी भी राजनीतिक  विश्वविद्यालय में कट-ऑफ अंक 43 तो हो ही नहीं सकता। और इस दृष्टि से, अभियन्ता मुख्य मंत्री का राजनीतिक क्षमता (इस चुनाव में)  नवमी-कक्षा अनुत्तीर्ण लालटेन-धारक के सामने बौना है।  यह बात नितीश कुमार की अन्तरात्मा भी जानता होगा, भले वे ‘गोलिया-गोलिया कर बतियाते हों।’

भारतीय जनता पार्टी को अपने पिछले चुनाव के 53 अंक को 74 अंक तक खींचने में पार्टी के दो आला-कमान प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की भूमिका तो अक्षुण है ही, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, पटना विश्व विद्यालय के पूर्ववर्ती छात्र जगत प्रकाश नड्डा की भूमिका को तनिक भी “छोटका स्केल” से नहीं नापा जा सकता है। इसके अतिरिक्त, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य मंत्री, प्रधान मंत्री के एकदम “खासम-खास” देवेंद्र फडणवीस, जो बिहार भाजपा के चुनाव प्रभारी भी थी, की भूमिका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। 

वैसे, नितीश कुमार को अपनी राजनीतिक, व्यक्तिगत गरिमा को देखते हुए, प्रदेश के लोगों का उनके प्रति सम्मान को देखते हुए, मुख्य मंत्री पद स्वीकार नहीं करना चाहिए। उन्हें अपनी पार्टी का समर्थन देना चाहिए भाजपा को। साथ ही, उन्हें प्रधान मंत्री और गृह मंत्री को भी “ससम्मान यह प्रस्ताव देना चाहिए कि जनता दाल यूनाइटेड भाजपा को सम्पूर्ण समर्थन देगी, यदि भाजपा से मुख्य मंत्री का नाम प्रस्तावित होता है।”

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दिल्ली के दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर इस बात की भी चर्चा है कि कहीं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा को बिहार का नेतृत्व सँभालने को न कहा जाय ।
 

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा

वैसे, बिहार में सत्ता विरोधी लहर और विपक्ष की कड़ी चुनौती को पार करते हुए नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने 243 सीटों में से 125 सीटों पर जीत प्राप्त कर बहुमत का जादुई आंकड़ा हासिल कर लिया। भले ही राजग ने बहुमत हासिल किया है, लेकिन इस चुनाव में विपक्षी ‘महागठबंधन’ का नेतृत्व कर रहा राष्ट्रीय जनता दल (राजद) 75 सीटें अपने नाम करके सबसे बड़ी एकल पार्टी के रूप में उभरा है। मतगणना के शुरुआती घंटों में बढ़त बनाती नजर आ रही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को 16 घंटे चली मतों की गिनती के बाद 74 सीटों के साथ दूसरा स्थान मिला। विपक्षी महागठबंधन ने कुल 110 सीटें जीतीं। पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद के बेटे तेजस्वी यादव के नेतृत्व में राजद के सर्वाधिक सीटें हासिल करने के बावजूद महागठबंधन बहुमत हासिल नहीं कर पाया।

राजग के बहुमत हासिल करने के साथ ही नीतीश् कुमार के लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनने की राह साफ हो गई है। हालांकि इस बार उनकी पार्टी जद(यू) को 2015 जैसी सफलता नहीं मिली है। जद(यू) को 2015 में मिली 71 सीटों की तुलना में इस बार 43 सीटें ही मिली हैं। उस समय कुमार ने लालू प्रसाद की राजद और कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव जीता था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा प्रमुख जे पी नड्डा समेत राजग पहले ही कुमार को मुख्यमंत्री पद का अपना उम्मीदवार घोषित कर चुका हैं। इसलिए भले ही कुमार की पार्टी का प्रदर्शन गिरा है, कुमार चौथी बार सरकार का नेतृत्व करेंगे।

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जद(यू) को चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के कारण काफी नुकसान झेलना पड़ा है। लोजपा को एक सीट पर जीत मिली, लेकिन उसने कम से कम 30 सीटों पर जदयू को नुकसान पहुंचाया। जद(यू) के प्रवक्ता के सी त्यागी ने नयी दिल्ली में ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि एक ‘‘साजिश’’ के तहत नीतीश कुमार के खिलाफ ‘‘अपमानजनक अभियान’’ चलाया गया। उन्होंने बगैर किसी का नाम लिए कहा, इसमें ‘‘अपने भी शामिल थे और बेगाने भी।’’

उन्होंने हालांकि उम्मीद जताई कि नीतीश कुमार फिर से बिहार के मुख्यमंत्री बनेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि नीतीश कुमार ही राजग सरकार का नेतृत्व करेंगे। भाजपा की बिहार इकाई के अध्यक्ष संजय जायसवाल ने गठबंधन की जीत का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को दिया। ‘राजग ने अपनी गरीब हितैषी नीतियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कारण जीत दर्ज की। जनता ने मोदी के नेतृत्व पर एक बार फिर विश्वास जताया है।’

यह पूछे जाने पर कि क्या मुख्यमंत्री को लेकर कोई बदलाव किया जाएगा, क्योंकि भाजपा को अपने गठबंधन सहयोगी जद(यू) से अधिक सीटों पर विजय मिली है तो जायसवाल ने कहा कि दोनों दल एक साथ लड़े और चुनाव से पहले ही नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया गया था।

भाजपा की 74 और जदयू की 43 सीटों के अलावा सत्तारूढ़ गठबंधन साझीदारों में हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा को चार और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) को चार सीटें मिलीं। विपक्षी महागठबंधन में राजद को 75, कांग्रेस को 19, भाकपा माले को 12 और भाकपा एवं माकपा को दो-दो सीटों पर जीत मिली। इस चुनाव में एआईएमआईएम ने पांच सीटें और लोजपा एवं बसपा ने एक-एक सीट जीती है। एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार जीतने में सफल रहा है। हालांकि जद(यू) की घटी हुई ताकत के बाद भाजपा मंत्रिपदों के बंटवारे में अधिक हिस्सा दिए जाने का दबाव बना सकती है।

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महागठबंधन को मुस्लिम वोट बंटने का भी नुकसान हुआ। मुस्लिम वोट एआईएमआईएम, बसपा और आरएसएलपी समेत पार्टियों के बीच बंटने का लाभ राजग को मिला। 

असदुद्दीन आवैसी की एआईएमआईएम ने चुनाव में हैरान करते हुए पांच सीटों पर कब्जा किया और उसकी सहयोगी बसपा ने भी एक सीट पर जीत हासिल की। तेजस्वी यादव पिछले साल लोकसभा चुनाव में राजद के खाता भी न खोल पाने के बाद इस बार पार्टी को सर्वाधिक सीटें जीतने वाली पार्टी बनाने में कामयाब रहे।तेजस्वी यादव और तेज प्रताप ने राघोपुर एवं हसनपुर सीटों पर क्रमश: 38,174 और 21,139 मतों के अंतर से शानदार जीत हासिल की।  

मुख्य रूप से दो गठबंधनों के बीच हुए इस मुकाबले में वाम दलों ने भी अच्छा प्रदर्शन किया। भाकपा माले को 12 और उसके बाद भाकपा एवं माकपा को दो-दो सीटें मिली। निवर्तमान विधानसभा में भाकपा माले की तीन सीटों के अलावा सदन में वाम दलों की कोई मौजूदगी नहीं थी। 

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