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	<title>व्यापार Archives - आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</title>
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		<title>अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस के पूर्व &#8216;बिस्कोमान&#8217; पर &#8216;लालू यादव&#8217; के &#8216;आरजेडी&#8217; का प्रभुत्व &#8216;समाप्त&#8217;, अमित शाह के &#8216;भाजपा&#8217; का &#8216;कब्ज़ा&#8217;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 05 Jul 2025 04:22:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यापार]]></category>
		<category><![CDATA[biscomaun]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गांधी मैदान का बायां नुक्कड़ (पटना): आज पांच जुलाई है। आज शनिवार भी है। संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा घोषित जुलाई के महीने का पहला शनिवार अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस के नाम से अंकित है। कोई 102 वर्ष पहले पहली बार सामाजिक सरोकार रखने वाले विश्व के सहकारिता के क्षेत्र से जुड़े लोग सहकारिता दिवस मनाये थे। [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/business/rjds-dominance-over-biscoman-is-over-bjp-takes-over">अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस के पूर्व &#8216;बिस्कोमान&#8217; पर &#8216;लालू यादव&#8217; के &#8216;आरजेडी&#8217; का प्रभुत्व &#8216;समाप्त&#8217;, अमित शाह के &#8216;भाजपा&#8217; का &#8216;कब्ज़ा&#8217;</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>गांधी मैदान का बायां नुक्कड़ (पटना): आज पांच जुलाई है। आज शनिवार भी है। संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा घोषित जुलाई के महीने का पहला शनिवार अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस के नाम से अंकित है। कोई 102 वर्ष पहले पहली बार सामाजिक सरोकार रखने वाले विश्व के सहकारिता के क्षेत्र से जुड़े लोग सहकारिता दिवस मनाये थे। बाद में, कोई 30-वर्ष पहले संयुक्त राष्ट्र संघ जुलाई माह के पहले शनिवार को विश्व सहकारिता दिवस के नाम से अंकित कर दिया। लेकिन आज से कुछ घंटे पहले इस नुक्कड़ पर कोई 55-वर्ष पहले साल 1971 में बिहार स्टेट कोऑपरेटिव मार्केटिंग यूनियन लिमिटेड के नाम से जिस भवन का निर्माण हुआ, उस भवन में किसी की सत्ता दो दशक बाद चली गई। </strong></p>
<p>अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस के कुछ घंटे पहले पटना में ऐतिहासिक बिहार स्टेट कोआपरेटिव मार्केटिंग यूनियन (बिस्कोमान) के प्रशासन से लालू प्रसाद यादव और उनकी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल समर्थित दो-दशक पुरानी कुर्सी हिल गयी और 21-वर्षों से अध्यक्ष की कार्यालय में बैठे सुनील कुमार सिंह का सिंहासन हिल गया है। उनकी पत्नी श्रीमती बन्दना सिंह हार गई। अब अध्यक्ष की कुर्सी पर बिस्कोमान के संस्थापकों में एक तपेश्वर सिंह के पोते विशाल सिंह, जो सहकारिता के दिग्गज नेता अजित सिंह के पुत्र हैं, बैठे। </p>
<p><strong>जिस वर्ष बिस्कोमान भवन का निर्माण हुआ था, उसके तीन साल बाद पटना के कदमकुआं इलाके में रहने वाले जयप्रकाश नारायण साल 1974 में संपूर्ण क्रांति का नारा दिए थे। इस भवन से कोई दो-सौ कदम पर तत्कालीन नेताओं ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह &#8216;दिनकर&#8217; की कविता &#8216;सिंहासन खाली करो की जनता आ रही है&#8217;, का पाठ किये थे। उस मंच पर सुनील कुमार सिंह को समर्थन देने वाले लालू प्रसाद यादव भी थे। आज जब न्यायालय के आदेश के बाद सुनील कुमार सिंह का प्रभुत्व बिस्कोमान भवन परिसर से बाहर निकला, प्रवेश द्वार पर खड़े भारतीय जनता पार्टी के कुछ कार्यकर्ता रामधारी सिंह &#8216;दिनकर&#8217; की उसी कविता का पाठ करते दिखाई दे रहे हैं। </strong></p>
<figure id="attachment_6906" aria-describedby="caption-attachment-6906" style="width: 2046px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Biscomaun.jpg"><img fetchpriority="high" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Biscomaun.jpg" alt="" width="2046" height="1211" class="size-full wp-image-6906" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Biscomaun.jpg 2046w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Biscomaun-300x178.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Biscomaun-1024x606.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Biscomaun-768x455.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Biscomaun-1536x909.jpg 1536w" sizes="(max-width: 2046px) 100vw, 2046px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6906" class="wp-caption-text">सुनील कुमार सिंह को आशीष देते लालू प्रसाद यादव</figcaption></figure>
<blockquote><p>सुनील कुमार सिंह बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के मुंहबोले भाई भी हैं। सुनील सिंह 2004 से बिस्कोमान के अध्यक्ष थे और 21 सालों तक इस पद पर बने रहे। वे वर्तमान में विधान पार्षद भी हैं और राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बेहद करीबी माने जाते हैं। हाल ही में विधान परिषद की सदस्यता समाप्त होने के बाद उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी, जहाँ से &#8216;विजयश्री&#8217; का खिताब लेकर बिहार विधान परिषद्औ में पुनः आये। </p></blockquote>
<p>बिहार और झारखंड की सबसे बड़ी सहकारी संस्था बिस्कोमान में लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई का फैसला आने के बाद केंद्र सरकार के सहकारिता विभाग ने बिस्कोमान भवन के नए अध्यक्ष की आधिकारिक घोषणा करते हुए विशाल सिंह को अध्यक्ष और महेश राय को वाइस चेयरमैन घोषित कर दिया। यह फैसला झारखंड उच्च न्यायालय के आदेश के बाद आया है, जिसने चुनाव प्रक्रिया पर से रोक हटाने का निर्णय दिया था। झारखंड के रांची हाईकोर्ट के जस्टिस आर. मुखोपाध्याय और जस्टिस अंबुज नाथ के फैसले ने ये स्पष्ट किया था कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट ही सुन सकता है क्योंकि इसमें दो राज्यों (बिहार और झारखंड) के अधिकार क्षेत्र का मुद्दा शामिल है। न्यायालय ने इसी आधार पर रोक हटाई और चुनाव को आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी, जिसके बाद चुनाव की प्रक्रिया से विशाल सिंह को नया चेयरमैन चुना गया।</p>
<figure id="attachment_6904" aria-describedby="caption-attachment-6904" style="width: 2045px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Biscomaun-4-1.jpg"><img decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Biscomaun-4-1.jpg" alt="" width="2045" height="998" class="size-full wp-image-6904" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Biscomaun-4-1.jpg 2045w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Biscomaun-4-1-300x146.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Biscomaun-4-1-1024x500.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Biscomaun-4-1-768x375.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Biscomaun-4-1-1536x750.jpg 1536w" sizes="(max-width: 2045px) 100vw, 2045px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6904" class="wp-caption-text">विशाल सिंह, बिस्कोमान के नए अध्यक्ष</figcaption></figure>
<p><strong>बहरहाल, नए अध्यक्ष विशाल सिंह के दादा तपेश्वर सिंह बिस्कोमान के संस्थापकों में थे और लंबे समय तक इसके अध्यक्ष रहे। तपेश्वर सिंह बिक्रमगंज से 1980 और 1984 में कांग्रेस से लोकसभा चुनाव भी जीते। तपेश्वर सिंह के बाद विशाल सिंह के पिता अजीत सिंह का बिस्कोमान अध्यक्ष की कुर्सी पर कब्जा रहा। अजित सिंह भी 2004 में बिक्रमगंज से जेडीयू के लोकसभा सांसद बने। 2007 में एक सड़क दुर्घटना में उनके निधन के बाद पत्नी मीना सिंह ने उपचुनाव जीता और फिर परिसीमन के बाद 2009 में आरा से लोकसभा चुनाव जीतीं। 2023 में मीना बेटे विशाल के साथ जनता दल &#8216;यूनाइटेड&#8217; को नमस्कार कर भारतीय जनता पार्टी के शरण में पहुँच गए । विशाल सिंह भाजपा के नेता बृजभूषण शरण सिंह के दामाद भी हैं। विशाल सिंह अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी हैं, जो सहकारिता राजनीति में सक्रिय हुए हैं। दो साल पहले ही वो एनसीसीएफ के निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए थे।</strong></p>
<p>संयुक्त राष्ट्र ने 2025 को अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष घोषित किया है। आज (शनिवार, 5 जुलाई) को पूरा विश्व  अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस मन रहा है। सांख्यिकी के अनुसार, दुनिया भर में 30 लाख सहकारी समितियाँ हैं, जिनमें से 300 सबसे बड़ी सहकारी समितियां 2,409.41 बिलियन अमरीकी डॉलर का कारोबार करती हैं। इस साल के अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस और वर्ष की थीम है सहकारिता: बेहतर दुनिया के लिए समावेशी और सतत समाधान लाना। इसमें इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि कैसे सहकारिताएं सतत विकास को आगे बढ़ाती हैं, लचीले समुदायों का निर्माण करती हैं और विकास को अंतिम छोर तक ले जाती हैं। आज का यह दिन व्यावहारिक समाधान और वास्तविक प्रभाव पर केंद्रित है। </p>
<blockquote><p>“सहकारिता एक बेहतर दुनिया का निर्माण करती हैं” थीम आज की वैश्विक चुनौतियों से निपटने और 2030 तक संयुक्त राष्ट्र एसडीजी (सतत विकास लक्ष्य) को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका पर प्रकाश डालती है। सहकारिता अब दुनिया भर में 3 मिलियन सहकारी समितियों के माध्यम से 12% से अधिक मानवता को जोड़ती है, साथ ही, 280 मिलियन लोगों को गुणवत्तापूर्ण नौकरियाँ और काम के अवसर प्रदान करके सतत आर्थिक विकास को भी बढ़ावा देते हैं, जो दुनिया की नियोजित आबादी का 10% है। </p></blockquote>
<figure id="attachment_6905" aria-describedby="caption-attachment-6905" style="width: 2046px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Biscomaun-2.jpg"><img decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Biscomaun-2.jpg" alt="" width="2046" height="1211" class="size-full wp-image-6905" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Biscomaun-2.jpg 2046w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Biscomaun-2-300x178.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Biscomaun-2-1024x606.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Biscomaun-2-768x455.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Biscomaun-2-1536x909.jpg 1536w" sizes="(max-width: 2046px) 100vw, 2046px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6905" class="wp-caption-text">केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह</figcaption></figure>
<p>भारत एक ऐसा देश है जहाँ विकास की गूंज खेतों, गाँवों और शहरों में सुनाई देती है, यहाँ सहकारी समितियों में एक खामोश लेकिन शक्तिशाली शक्ति है। किसानों को उचित मूल्य दिलाने से लेकर महिलाओं और छोटे उद्यमियों को सशक्त बनाने तक, सहकारी समितियों ने समावेशी विकास का ताना-बाना बुनने और “सहकार से समृद्धि” की भावना का जश्न मनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। स्वतंत्रता-पूर्व युग में एक छोटी सी यात्रा के रूप में शुरू हुई यह संस्था आज पूरे भारत में 8.42 लाख सहकारी समितियों के नेटवर्क में विकसित हो गई है। अमूल जैसे प्रसिद्ध नामों से लेकर नाबार्ड, कृभको और इफको जैसे प्रमुख खिलाड़ियों और ज़मीन पर चुपचाप काम करने वाली अनगिनत छोटी संस्थाओं तक, सहकारी समितियाँ पूरे देश में लोगों को सशक्त बना रही हैं। </p>
<p>सहकारी दिवस या अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस पहली बार 1923 में मनाया गया था और 1995 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा आधिकारिक तौर पर मान्यता दी गई थी। यह इस बात पर प्रकाश डालता है कि कैसे सहकारी समितियां लोगों को एक साथ काम करने, मजबूत और आत्मनिर्भर समुदायों का निर्माण करने और लोकतंत्र, एकजुटता और स्थिरता के मूल्यों को बढ़ावा देने में मदद करती हैं। भारत में सहकारी समितियाँ कृषि, ऋण और बैंकिंग, आवास और महिला कल्याण जैसे विभिन्न क्षेत्रों में काम करती हैं। वे किसानों और छोटे उद्यमियों को ऋण प्रदान करके वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में सहायक हैं, जिन्हें पारंपरिक बैंकिंग सेवाओं तक पहुँचने में कठिनाई हो सकती है। ये समितियाँ ग्रामीण विकास, स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने और सामाजिक-आर्थिक असमानताओं को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।</p>
<p><strong>सहकारिताएं केवल संस्थाएं नहीं हैं; वे जमीनी स्तर से भारत के भविष्य को आकार देने वाला जन आंदोलन हैं। किसानों, महिलाओं और छोटे उद्यमियों को सशक्त बनाकर, वे समावेशी विकास और लचीले समुदायों को बढ़ावा देते हैं। जैसा कि भारत अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस 2025 मनाता है, यह “सहकार से समृद्धि” के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि सहकारी समितियां सतत विकास को आगे बढ़ाती रहें और देश के हर कोने में समृद्धि लेकर जाएं।</strong></p>
<p>ज्ञातव्य हो कि विगत वर्ष सितम्बर में भारत सरकार का सहकारिता मंत्रालय श्वेत क्रांति 2.0 का शुभारंभ किया , जिसके तहत पशुपालन एवं डेयरी विभाग (डीएएचडी) देशी नस्लों के विकास एवं संरक्षण तथा गोजातीय आबादी के आनुवंशिक उन्नयन के लिए राष्ट्रीय गोकुल मिशन को क्रियान्वित कर रहा है, ताकि गोजातीय पशुओं का दूध उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाई जा सके। इसके अतिरिक्त डीएएचडी खरीद और दूध प्रसंस्करण अवसंरचना के निर्माण/सुदृढ़ीकरण के प्रयासों को पूरक बनाने और पूरक बनाने के लिए देश में डेयरी विकास योजनाओं को भी क्रियान्वित कर रहा है। कहते हैं कि 2028-29 तक सहकारी क्षेत्र की दूध खरीद को 1,007 लाख किलोग्राम/दिन तक बढ़ाने के उद्देश्य को भी प्राप्त करना है। आज देश भर में 2.35 लाख डेयरी सहकारी समितियाँ स्थापित/सुदृढ़ीकृत की जा चुकी हैं। वर्ष 2023-24 में दूध का उत्पादन 239.30 मिलियन मीट्रिक टन होगा, जो पिछले 10 वर्षों की तुलना में 63.56% रहा है ।</p>
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		<title>जब &#8216;खाने की वस्तु&#8217; को &#8216;पहनाने लगे&#8217; लोग, तो समझ लीजिये &#8216;राजनीति&#8217; हो रही है, मिथिला का &#8216;मखान&#8217; भी अछूता नहीं है, &#8216;पाग&#8217; के बारे में तो पूछिए नहीं (बिहार स्टार्टअप-5)</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/business/politics-of-makahana-and-paag-in-mithila</link>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 24 Jun 2025 06:32:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यापार]]></category>
		<category><![CDATA[bihar]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>मधुबनी / दरभंगा / पटना / नई दिल्ली: ​आप माने या नहीं, आपकी मर्जी। लेकिन जब किसी भोज्य पदार्थ का इस्तेमाल पहनाने में होने लगे, स्वयं से अशिक्षित लोगों के सर पर &#8216;पाग&#8217; पहनाया जाने लगे, तो समझ लें उस बहुमूल्य वस्तु का राजनीतिक लाभार्थ इस्तेमाल होने लगा है &#8211; मिथिला का मखान या मिथिला [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/business/politics-of-makahana-and-paag-in-mithila">जब &#8216;खाने की वस्तु&#8217; को &#8216;पहनाने लगे&#8217; लोग, तो समझ लीजिये &#8216;राजनीति&#8217; हो रही है, मिथिला का &#8216;मखान&#8217; भी अछूता नहीं है, &#8216;पाग&#8217; के बारे में तो पूछिए नहीं (बिहार स्टार्टअप-5)</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मधुबनी / दरभंगा / पटना / नई दिल्ली: ​आप माने या नहीं, आपकी मर्जी। लेकिन जब किसी भोज्य पदार्थ का इस्तेमाल पहनाने में होने लगे, स्वयं से अशिक्षित लोगों के सर पर &#8216;पाग&#8217; पहनाया जाने लगे, तो समझ लें उस बहुमूल्य वस्तु का राजनीतिक लाभार्थ इस्तेमाल होने लगा है &#8211; मिथिला का मखान या मिथिला का पाग भी ग्रसित हो गया है। वजह भी है मिथिला का शैक्षिक दर। मिथिला में ही नहीं, देश, दुनिया में मिथिला के लोग जहाँ-जहाँ हैं, आजकल &#8216;खुलेआम&#8217;, &#8216;यत्र-तत्र-सवर्त्र&#8217; लोगों को, जहाँ &#8216;लाभ की आशा दिखती है,&#8217; मिथिला का &#8216;पाग&#8217; और मिथिला के &#8216;मखान&#8217; का माला पहनाने में तनिक भी देरी नहीं करते नहीं करते हैं। पता नहीं, पसीने से लत पत वस्त्र में भींगा उस मखान भी लोग खाते भी हों। </strong></p>
<p>मैथिली और मिथिला के ‘विकास’ से सम्बंधित कई वर्ष पहले गठित एक संगठन ने मिथिला के लोगों से निवेदन किया गया है कि पाग के निर्माणकर्ता पाग बनाते समय उसका आकार बढ़ाकर बनायें ताकि पहनने और पहनाने में असुविधा नहीं हो। यह बात दिनों संगठन द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में ​भी कहा गया। जबकि आज़ादी के 78 वर्ष बाद आज भी मिथिला का शैक्षिक दर 55 फीसदी से आगे बढ़ने पर कुथ रहा है।​ हालांकि, मिथिला क्षेत्र में दर्जनों शैक्षणिक संस्थाएं प्रदेश के राजनेताओं के नाम से गोदना गुदवाए हुए हैं, हज़ारों स्थानीय शैक्षिक माफियाओं द्वारा संचालित है। देशी, विदेशी नाम पर अंकित विद्यालयों और महाविद्यालयों की तो किल्लत है ही नहीं। </p>
<blockquote><p>कल भारत के संसद के बाहर, विजय चौक के रास्ते रायसीना हिल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय के आस-पास मिथिला क्षेत्र के कर्मचारियों का कहना था कि “उक्त संगठन द्वारा पाग के मामले में जारी प्रेस विज्ञप्ति का प्रत्येक शब्द एक गहन शोध का विषय है। उनका कहना है कि “पाग का आकार बढ़ाने पर बल देने का सीधा अर्थ यही माना जायेगा कि “मिथिला में पाग पहनने वालों का माथा (शरीर का सबसे ऊपरी हिस्सा) का आकार या तो बढ़ गया है या फिर पाग के निर्माण कर्ता पाग के महत्व को इतना महत्वहीन बना दिए हैं कि उन्हें औसतन मानव माथे का आकर का ज्ञान नहीं रहा और पाग का आकार छोटा होता गया।”​ </p></blockquote>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-3.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-3.jpg" alt="" width="2045" height="1210" class="aligncenter size-full wp-image-6805" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-3.jpg 2045w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-3-300x178.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-3-1024x606.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-3-768x454.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-3-1536x909.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2045px) 100vw, 2045px" /></a></p>
<p>गृहमंत्रालय के सामने ​चबूतरे पर खड़े एक अधिकारी कहते हैं: “यौ झाजी !!! एहि बात से इंकार नै कयल जा सकैत अछि कि मिथिला के बाल-बच्चा शैक्षिक दुनिया में अव्वल अछि आ आवि रहल अछि। लेकिन इ सब बच्चा, चाहे बेटी होय अथवा बेटा, वैह अव्वल आवि रहल अछि जेकर माता-पिता अपन-अपन जीवनक निर्माण हेतु, बच्चाक जीवनक निर्माण हेतु गामक सीमा पार केलैथ।​&#8221; वे आगे कहते हैं कि &#8220;अगर चेन्नई, बंगलुरु, मुंबई, अहमदाबाद, कानपुर, नागपुर, दिल्ली, भोपाल आदि शहरों में मुद्दत से रहने वाले, पढ़ाने-लिखाने वाले किसी महानुभाव की बेटी विश्व के पटल पर अपना हस्ताक्षर करती है तो दरभंगा और लहेरियासराय के जिलाधिकारी उसकी शैक्षिक योग्यता को या उसकी उपलब्धि को अपनी सांख्यिकी में नहीं जोड़ सकता है न? पाग के साथ भी वही हश्र है, जो दुखद है। मिथिला में रहने वाले, पाग पहनने वाले, पाग पहनाने वाले औसतन 90 से अधिक फीसदी लोग (अपवाद छोड़कर) पाग के रंग का महत्व, कौन किसे पहनायेगा, किस अवसर पर किस रंग का पाग पहनाया जायेगा नहीं जानते।”​ </p>
<figure id="attachment_6815" aria-describedby="caption-attachment-6815" style="width: 2045px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/12345.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/12345.jpg" alt="" width="2045" height="1210" class="size-full wp-image-6815" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/12345.jpg 2045w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/12345-300x178.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/12345-1024x606.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/12345-768x454.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/12345-1536x909.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2045px) 100vw, 2045px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6815" class="wp-caption-text">आप​ स्वयं निर्णय करें</figcaption></figure>
<p><strong>इसका ज्वलंत दृष्टान्त राष्ट्रीय जनता दल के नेता और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और ऐतिहासिक चारा घोटाला कांड के अभियुक्त लालू प्रसाद यादव के नवमीं कक्षा पास पुत्र और उनकी ​पत्नी जी के सर पर पाग है। अगर मिथिला के लोग इन व्यक्तियों को पाग पहनाते हैं, तो इसका अर्थ सिर्फ और सिर्फ राजनीतिक दुकानदारी ही माना जायेगा। क्या ये पाग पहनने के लायक है? तेजस्वी यादव और उनकी पत्नी को वैवाहिक जीवन पर बधाई देने का अनेकानेक तरीका हो सकता था परन्तु पाग पहनाकर पाग का अपमान भी किये।​</strong> </p>
<p>अगर उक्त संगठन के उक्त ‘प्रेस विज्ञप्ति’ के मद्दे नजर मिथिला की शैक्षिक दर को देखें – जो माथे के विस्तार का सूचक हो सकता है और बड़े आकार के पाग की जरुरत हो सकती है – तो बिहार का औसत शैक्षिक दर 63.82 फीसदी है जिसमें मिथिला क्षेत्र में शैक्षिक दर 55.18 से अधिक नहीं हैं। प्रदेश में सबसे अधिक शैक्षिक दर भोजपुरी क्षेत्र में है जहाँ औसतन शैक्षिक दर 66.19 फीसदी है। भोजपुरी क्षेत्र में रोहतास क्षेत्र में शैक्षिक दर 73.37 फीसदी है। इतना ही नहीं, मगध क्षेत्र में शैक्षिक दर मिथिला की तुलना में 9 फीसदी अधिक है, यानी 64.92 फीसदी है।​ </p>
<figure id="attachment_6806" aria-describedby="caption-attachment-6806" style="width: 2045px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-4.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-4.jpg" alt="" width="2045" height="1210" class="size-full wp-image-6806" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-4.jpg 2045w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-4-300x178.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-4-1024x606.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-4-768x454.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-4-1536x909.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2045px) 100vw, 2045px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6806" class="wp-caption-text">दरभंगा के सांसद महोदय खुद बिना पाग पहने दूसरों को पाग पहनाते हैं &#8211; यह शोध का विषय है</figcaption></figure>
<p>यही कारण है कि दिल्ली के राजनीतिक गलियारे में अपना हस्ताक्षर रखने वाले एक नौकरशाह कहते हैं: “पाग मिथिला का एक सम्मान है। मिथिला के प्रत्येक लोगों की इज्जत है। मिथिला का एक-एक बच्चा पाग के सांस्कृतिक गरिमा को पहले समझता था। पाग के रंगों की महत्ता को समझता था। वह यह भी समझता था कि किस रंग का पाग किस अवसर पर कौन पहनता है। पाग किसे पहनाया जाए । पाग पहनाने का शाब्दिक अर्थ और वास्तविक अर्थ क्या है। परन्तु, तकलीफ इस बात कि है कि मिथिला में अब राजनीति होती है और उस राजनीति में मिथिला का पाग धरल्ले से इस्तेमाल होता है। अन्यथा आज मिथिला पाग की यह स्थिति नहीं होती। मिथिला की संस्कृति की यह स्थिति नहीं होती।”​ </p>
<p><strong>अगर मिथिलांचल के लोग, विशेषकर जो “पाग की अहमियत” समझते हैं, अपने ही घरों में, अपने ही समाज में, टोले-मुहल्लों में एक सर्वे करें की किनके – किनके घरों में “वास्तविक पाग (सफ़ेद रंग का अथवा भटमैला रंग का) है ? हाल, पीला, हरा, ब्लू, रंग बिरंगा, सतरंगी, लोक चित्रकला वाला नहीं; तो औसतन सैकड़े घरों की बात नहीं करें, हज़ार घरों में शायद दस अथवा बीस घरों में पाग की उपस्थिति दर्ज होगी। विश्वास नहीं तो हो आजमा कर देखिए। अब स्थिति यह है कि हम अपने घरों में, मिथिला के समाजों में पाग के महत्व को नहीं बता सके, वर्तमान पीढ़ी को नहीं बता सके, लेकिन देश के मुंबई, दिल्ली, कलकत्ता, चेन्नई, बंगलुरु, मंगलुरु, कानपूर, नागपुर, बराकर के अतिरिक्त देश के 718 जिलों में “पाग से अर्थ कमाने के लिए पाग का विपरण करने में जुटे हैं।”</strong></p>
<p>​इतना ही नहीं, अधिकारी आगे कहते हैं: “मिथिला में तो करवा चौथ नहीं होता है। वहां की महिलाएं अपने पति के लिए मधुश्रावणी पूजा करती हैं। लेकिन अब देखादेखी में मिथिला में ही नहीं प्रस्तावित मिथिला राज्य निर्माण के लिए सभी 24 जिलों, मसलन अररिया, बेगूसराय, दरभंगा, कटिहार, खगड़िया, किशनगंज, मधेपुरा, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया, सहरसा, समस्तीपुर, शिवहर, सीतामढ़ी, सुपौल, पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, वैशाली, लखीसराय, मुंगेर, शेखपुरा, जमुई, भागलपुर और बांका के अलावे पटना के कंकरबाग, शिवपुरी, लोहानीपुर, कदमकुआं और अन्य इलाकों सहित राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के अनेकानेक क्षत्रों में, मुंबई, कलकत्ता, चेन्नई और अन्य प्रांतों में मिथिला की महिलाएं अब करवा चौथ करती हैं। और मैथिली भाषा के स्थान पर स्थानीय भाषाओँ का प्रयोग कर ‘मैथिली भाषा” की दुकानदारी करने में तनिक भी लज्जा नहीं करते। विश्वास नहीं हो तो दिल्ली के करोलबाग स्थित दिल्ली सरकार की दारू की खरीद-बिक्री वाले कार्यालय (भवन) के निचले तल्ले में मैथिली – भोजपुरी अकादमी को ठिठुरते देख लीजिये।</p>
<figure id="attachment_6807" aria-describedby="caption-attachment-6807" style="width: 2045px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-5.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-5.jpg" alt="" width="2045" height="1210" class="size-full wp-image-6807" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-5.jpg 2045w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-5-300x178.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-5-1024x606.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-5-768x454.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-5-1536x909.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2045px) 100vw, 2045px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6807" class="wp-caption-text">यह मिथिला की मछली नहीं नहीं, बल्कि कलकत्ता और दक्षिण भारत की है, मिथिला माँछ के नाम से बिकती है, गहन शोध का विषय है</figcaption></figure>
<p>आज़ादी के बाद, या यूँ कहें कि महाराजा कामेश्वर सिंह की मृत्यु तक मिथिला की संस्कृति जितनी मजबूत और सुरक्षित थी, आज नहीं है। यानि​, अक्टूबर 1962 के बाद मिथिलांचल में मिथिला की संस्कृति को संरक्षित रखने वाला नहीं रहा। आज भले हम मिथिला लोक-चित्रकला को विश्व में प्रचार-प्रसार के माध्यम से फैलाएं, लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि मिथिला लोक चित्रकला के कलाकार आज मृत प्राय हो गया है। समाज, सरकार अथवा मिथिलांचल के जिला प्रमुखों से इस ऐतिहासिक लोक चित्रकला को उतना संरक्षण नहीं मिलता है जितने का वह हकदार हैं। आज स्थिति ऐसी हो गयी है की मिथिलाञ्चल के लोग, विशेषकर पुरुष समुदाय, न केवल “पाग के वास्तविक महत्व” से अपरिचित हैं, बल्कि उसका सम्मान भी नहीं कर पाते हैं। अगर ऐसा नहीं होता तो इस पाग को “सब धन बाईस पसेरी” जैसा सबों के माथे पर सजाकर फोटो-सेशन नहीं करते, सोसल मीडिया पर या भारत की सड़कों पर “पाग का राजनीतिकरण नहीं होने देते, नहीं करते।”</p>
<p><strong>देवशंकर नवीन का कहना है​ कि &#8220;क्या सर्वजन मैथिलों ने आम सहमति से अपने पारंपरिक प्रतीक ‘पाग’ के स्वरूप में यह फेरबदल स्वीकार कर लिया? अब तक पाग पर किसी तरह की चित्रकारी की मान्यता नहीं थी। कहीं ऐसा तो नहीं कि बाजार की चमक-दमक ने मैथिलों के सांस्कृतिक संकेत पर अपना कब्जा बना लिया! दूसरा सवाल पाग की पारंपरिक मान्यता को लेकर है। बचपन से देखता आ रहा हूं कि अनेक शहरों में मैथिल जनता अपनी उपस्थिति दर्ज करने के लिए महाकवि विद्यापति की बरसी मनाती है। उन आयोजनों में आमंत्रित विशिष्ट जनों का पाग-डोपटा से सम्मान करते और अपने सांस्कृतिक उत्कर्ष का दावा करते हुए मैथिल आत्ममुग्ध होते हैं। गीत, कविता, चुटकुला, नाच-नौटंकी सब आयोजित करते हैं। आयोजन का नाम रहता है ‘विद्यापति स्मृति पर्व’, पर विद्यापति वहां सिरे से गायब रहते हैं। आयोजन का लक्ष्य शायद ही कहीं साहित्य और संस्कृति का उत्थान या अनुरक्षण रहता हो!​&#8221; </strong></p>
<p>आजकल दरभंगा के टावर चौक से दिल्ली के जंतर मंतर तक, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यालय से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू के कार्यालय तक बिहार को काट-छांट कर अलग मिथिला ​राज्य बनाने की चर्चाएं आम हैं। मिथिला क्षेत्र के राजनीति में सक्रिय रहने वाले लोग न केवल प्रस्तावित अलग राज्य के निर्माण में किन-किन जिलों को बिहार से अलग कर मिथिला राज्य में​ अंकित कर देना चाहिए की सूची बनाकर मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को पेश कर रहे हैं, बल्कि राज्य बनने के बाद कौन-​कौन महापुरुष और महिला नए राज्य के मंत्रिमंडल में शामिल होंगे, ​कौन मुख्यमंत्री बनेंगे, कौन वित्त मंत्रीं बनेंगे, कौन शिक्षा मंत्री बनेंगे की ​मन-ही-मन सूची बनाने में भी कोताही नहीं कर रहे हैं। ​</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-6.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-6.jpg" alt="" width="2045" height="1210" class="aligncenter size-full wp-image-6808" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-6.jpg 2045w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-6-300x178.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-6-1024x606.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-6-768x454.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-6-1536x909.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2045px) 100vw, 2045px" /></a></p>
<p>यह अलग बात है कि उत्तर बिहार इस गंगा तराई क्षेत्र के इन जिलों में राज्य के 11 नदियों की पानी के अलावे कुछ नहीं है और शैक्षिक दर का फीसदी भी महिला-पुरुष मिलकर 60 फीसदी से अधिक नहीं पहुंच पाया है।मिथिला के महात्मनों का कहना है कि अब तक 24 जिलों को प्रस्तावित राज्य में शामिल करने का प्रस्ताव है। इन जिलों में अररिया, बेगूसराय, दरभंगा, कटिहार, खगड़िया, किशनगंज, मधेपुरा, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया, सहरसा, समस्तीपुर, शिवहर, सीतामढ़ी, सुपौल, पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, वैशाली, लखीसराय, मुंगेर, शेखपुरा, जमुई, भागलपुर और बांका शामिल हैं। ​जबकि ‘प्रस्तावित मंत्रिमंडल की सूची’ को ‘सार्वजनिक’ नहीं कर रहे हैं। यह अलग बात है कि दिल्ली सल्तनत में ‘मैथिली’ भाषा के ‘तथाकथित विकास और विस्तार के लिए’ राजनीतिक उद्देश्य की पूर्ति हेतु बना “मैथिली – भोजपुरी अकादमी” दिल्ली सरकार के “दारू का बोतल गिनने वाले भवन में स्थित है। हालात यह है कि यहाँ मैथिली अथवा भोजपुरी के अलावे सभी भाषाओं में वार्तालाप होती है और दिल्ली में रहने वाले मैथिली भाषा भाषी मुद्दत से मूक-बधिर बने हैं। यह राजनीति हैं।</p>
<p>बिहार सं 22 मार्च, 1912 को बंगाल से काटकर अपने अस्तित्व में आया था। लगभग 24 वर्ष बाद, 1 अप्रैल, 1936 को बिहार का पहला खंडन हुआ और उस खंडन से ओड़िसा राज्य का अस्तित्व बना। ओड़िसा राज्य बनने के कोई 64 वर्ष बाद बिहार का फिर दो फांक हुआ झारखण्ड राज्य ​बनाने के लिए। सन 2000 से पहले, तत्कालीन दक्षिण बिहार के स्थानीय लोगों की दशकों से चल रही क्रांति, जिसमें कई सौ लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दिए, 15 नवम्बर, 2000 को झारखण्ड राज्य अपने अस्तित्व में आया। अब उत्तर बिहार के गंगा तराई क्षेत्र में स्थित जिलों को काटकर मिथिला राज्य बनाने की राजनीति चल रही है। ​खैर।</p>
<p><strong>विष्णुपुराण के मिथिला-माहात्म्य </strong></p>
<p>इंटरनेट पर जब लिखा देखा कि विष्णुपुराण के मिथिला-माहात्म्य में मिथिला एवं तीर भुक्ति दोनों नाम कहे गये हैं, मन खुश हो गया। शायद मिथिला क्षेत्र से आने वाले किसी भी राजनीतिक पार्टी के नेतागण, चाहे जिला परिषद् में बैठते हों या प्रदेश के विधानसभा और विधान परिषद् में या फिर भारत के ऊपरी और निचली संसद में कुर्सियां तोड़ते हों ‘नहीं जानते होंगे, नहीं पढ़े होंगे।’ वजह भी है। मिथिला क्षेत्र में शैक्षिक दर 55 फीसदी से अधिक नहीं होने दिए ‘महात्मनों’ ने। क्योंकि अगर मतदाता पढ़ेगा तो सोचने की शक्ति बढ़ेगी, वाद-विवाद करने में सामर्थ्यवान होगा और मतदान करने से पहले नेता को परखेगा – जो महात्मन नहीं चाहते रहे हैं, नहीं चाहेंगे।</p>
<p>‘मिथि’ के नाम से मिथिला तथा अनेक नदियों के ”तीर’ पर स्थित होने से तीरों से पोषित होने से तीरभुक्ति नाम माने गये हैं।इस ग्रंथ में गंगा से लेकर हिमालय के बीच स्थित मिथिला में मुख्य 15 नदियों की स्थिति मानी गयी है तथा उनके नाम भी गिनाये गये हैं। यह तीरभुक्ति मिथिला सीता का निमिकानन कहा गया है। आज स्थिति ऐसी है कि मिथिला के माता-पिता अपनी बेटियों का नाम “सीता” नहीं रख रहे हैं। उस पुराण में मिथिला को ‘ज्ञान का क्षेत्र’ है और ‘कृपा का पीठ’ कहा गया है। आज मिथिला में पुरुष-महिला का शैक्षिक दर 55 फीसदी है। आज मिथिला मैथिली भाषा भाषी भी अपनी भाषा में बात नहीं करते। खैर। जानकी कि यह जन्मभूमि मिथिला निष्पापा और निरपेक्षा है।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-7.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-7.jpg" alt="" width="2045" height="1210" class="aligncenter size-full wp-image-6809" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-7.jpg 2045w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-7-300x178.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-7-1024x606.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-7-768x454.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-7-1536x909.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2045px) 100vw, 2045px" /></a></p>
<p>सैद्धांतिक रूप से जैसे साकेत नगरी संसार के कारण स्वरूप है वैसे ही यह मिथिला समस्त आनंद का कारण स्वरूप है। इसलिए महर्षिगण समस्त परिग्रहों को छोड़कर राम की आराधना के लिए प्रयत्न पूर्वक यहीं निवास करते हैं। श्रीसावित्री तथा श्रीगौरी जैसी देव-शक्तियों ने यही जन्म ग्रहण किया। स्वयं सर्वेश्वरेश्वरी श्रीसीता जी की जन्मभूमि यह मिथिला यत्नपूर्वक वास करने से समस्त सिद्धियों को देने वाली है। मिथिला की सीमा (चौहद्दी) का स्पष्ट उल्लेख करते हुए कहा गया है कि​ </p>
<p><em>शिकीन्तु समारभ्य गण्डकीमधिगम्यवै।योजनानि चतुर्विंश व्यायामः परिकीर्त्तितः॥<br />
गङ्गा प्रवाहमारभ्य यावद्धैमवतम्वनम् ।विस्तारः षोडशप्रोक्तो देशस्य कुलनन्दन॥</em></p>
<p>अर्थात् पूर्व में कोसी से आरंभ होकर पश्चिम में गंडकी तक 24 योजन तथा दक्षिण में गंगा नदी से आरंभ होकर उत्तर में हिमालय वन (तराई प्रदेश) तक 16 योजन मिथिला का विस्तार है। महाकवि चन्दा झा ने उपर्युक्त श्लोक का ही मैथिली रूपांतरण करते हुए मिथिला की सीमा बताते हुए लिखा है कि</p>
<p><em>गंगा बहथि जनिक दक्षिण दिशि पूब कौशिकी धारा।पश्चिम बहथि गंडकी उत्तर हिमवत वन विस्तारा॥</em></p>
<p>इस प्रकार उल्लिखित सीमा के अंतर्गत वर्तमान में नेपाल के तराई प्रदेश के साथ बिहार राज्य के पश्चिम और पूर्वी चम्पारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, दरभंगा, मधुबनी, सुपौल, मधेपुरा, सहरसा, खगड़िया जिले का प्रायः पूरा भूभाग तथा भागलपुर और पूर्णिया जिले का आंशिक भूभाग आता है।</p>
<p><strong>‘पग-पग पोखर, माँछ, मखान, मधुर बोल मुस्की मुख पान</strong></p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-8.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-8.jpg" alt="" width="2045" height="1210" class="aligncenter size-full wp-image-6810" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-8.jpg 2045w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-8-300x178.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-8-1024x606.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-8-768x454.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-8-1536x909.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2045px) 100vw, 2045px" /></a></p>
<p>जिस महामहोपाध्याय ने मिथिला का चित्रण ‘पग-पग पोखर, माँछ, मखान, मधुर बोल मुस्की मुख पान । विद्या, वैभव, शांति प्रतीक, सरस नगर मिथिला थींक’ इन शब्दों में किये थे, वे बहुत दूरदर्शी थे। लगता है वे सरस्वती के वरद पुत्र थे और उन्हें ज्ञात था कि आने वाले समय में मिथिला के लोग उनकी कविता को मिथिला के चौराहों पर ‘पाठ’ करके, मिथिला का गुणगान करके अपने-अपने हिस्से की मिथिला अपने नाम लिखाएँगे। प्रदेश के लेखाकार में ‘एक खास किस्म के लोग’ दरभंगा राज का ‘मुहर’ लेकर तैयार भी रहेंगे जो आतंरिक-बाहरी माफिआओं के साथ मिलकर मिथिला (दरभंगा राज और उसकी गरिमा) को बेचकर, उसे मिट्टी पलीद करेंगे और स्वयं ‘संभ्रांत’ और ‘धनाढ्यों’ की श्रेणी में सूचीबद्ध हो जायेंगे, नेता, अभिनेता भी हो सकते हैं।</p>
<p>मिथिला के किसी भी स्थान पर खड़े होकर मिथिला के बाबू, बबुआइन और बौआसिन लोग अगर “पग पग पोखर माछ मखान, मधुर बोल मुस्की मुख पान । विद्या वैभव शांति प्रतीक, सरस नगर मिथिला थींक” कविता पाठ करते मिल जायँ, तो समझ लीजिये वे ‘सरेआम झूठ’ बोल रहे हैं। अपने-अपने हितों के रक्षार्थ वे स्थानीय लोगों को बरगला रहे हैं। इस बात से भी इंकार नहीं कर सकते हैं कि वे राजनीति में प्रवेश करने के लिए मिथिला की कविता पाठ करना प्रारम्भ कर दिए हों जो उनके अनेकानेक प्रयासों में, एक यह भी प्रयास हो। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि जिस समय इस कविता की रचना हुई होगी, उस कवि के नजर में मिथिला और उसकी गरिमा अपने उत्कर्ष पर रहा होगा। मिथिला के सभी क्षेत्रों में, प्रत्येक कदम पर, प्रत्येक घरों के सामने-पीछे छोटा-बड़ा पोखर रहा होगा। तत्कालीन राजा-महाराजा-महाराजाधिराज स्थानीय लोगों के सम्मानार्थ, तत्कालीन पानी की समस्याओं के निदानार्थ अपने खर्च पर पोखर, तालाब बनबाये होंगे। यह सच भी है।</p>
<p><strong>अब जब मिथिला में असंख्य पोखर / तालाब रहा होगा तो उसके महार (इम्बैंकमेंट) पर पान की खेती, मखान की खेती होती होगी, जिसका उपयोग अपने-अपने घरों में, आगंतुकों के लिए, सगे-सम्बन्धियों के लिए किया जाता होगा। कोई सौ वर्ष पहले तक मिथिला में ‘शिक्षा’ चाहे ‘प्राथमिक’ हो, ‘माध्यमिक’ हो या ‘उच्च शिक्षा हो – पढ़ने वालों के साथ-साथ पढ़ाने वालों की किल्लत नहीं थी। अपने-अपने क्षेत्र के अनेकानेक आचार्य, प्राचार्य, महामहोपाध्याय समाज में उपलब्ध थे। शिक्षा के मामले में बनारस और इलाहाबाद की दूरियां मिथिला से अधिक नहीं थी। पाटलिपुत्र में भी मिथिला के लोग आकर शिक्षित होते थे। लेकिन, दुर्भाग्य यह रहा कि शिक्षा प्राप्ति के बाद उन्हें समाज को जो वापस करना था, वह नहीं कर सके। मिथिला के ग्रामीण इलाकों से खेतिहर-परिवारों से लेकर विद्वानों के परिवारों तक, जो भी शिक्षा के लिए शहर की ओर उन्मुख हुए, कभी वापस नहीं आये। और वापस भी आये तो वृद्धावस्था में। परिणाम यह हुआ कि मिथिला की जो अपनी पारम्परिक शिक्षा और शिक्षा पद्धति थी, उसका सर्वनाश हो गया।</strong></p>
<p>समय बदल रहा था। समाज बदल रहा था। सोच बदल रहे थे। स्वाभाविक है शिक्षा का स्वरूप भी में बदलेगा ही। लेकिन तकलीफ इस बात की है कि आज भी हम उसी कविता पाठ को दोहरा रहे हैं और कहते थक भी नहीं रहे है कि “पग पग पोखर माछ मखान, मधुर बोल मुस्की मुख पान । विद्या वैभव शांति प्रतीक, सरस नगर मिथिला थींक” – खासकर तब जब बिहार के ग्रामीण इलाकों में शैक्षिक दर पुरुषों में 57 फीसदी और महिलाओं में 29 फीसदी है। मिथिला भी इसी आकंड़े के अधीन है। पूरे प्रदेश में औसतन शैक्षिक दर 69 फीसदी है। इसमें पुरुषों के हिस्से 70 फीसदी और महिलाओं के हिस्से 53 फीसदी है। यानी दोनों के बीच आज भी 17 फीसदी का फासला है और यही 17 फीसदी का फासला, चाहे मिथिला में पंचायत का चुनाव हो, दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय, भागलपुर, मुंगेर, आदि शहरों में जिला परिषद् का चुनाव हो या बिहार के विधान सभा और विधान परिषद का चुनाव हो – निर्णायक होता है। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-9.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-9.jpg" alt="" width="2045" height="1210" class="aligncenter size-full wp-image-6811" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-9.jpg 2045w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-9-300x178.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-9-1024x606.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-9-768x454.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-9-1536x909.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2045px) 100vw, 2045px" /></a></p>
<p>सबसे महत्वपूर्ब बात तो माँछ (मछली) से सम्बंधित है। माँछ की कथा-व्यथा बनारसी पान जैसी है। बनारस में पान की खेती नहीं होती, लेकिन हज़ारों-हज़ार पान की दुकानें हैं। प्रत्येक चार दुकान या चार मकान के बाद पान की दुकानें मिलेंगी। लगभग सभी किस्मों के पान यहाँ, जगन्नाथ जी, गया और कलकत्ता आदि स्थानों से आते हैं। पान का जितना बड़ा व्यावसायिक केन्द्र बनारस है, शायद उतना बड़ा केन्द्र विश्व का कोई नगर नहीं है। काशी में इसी व्यवसाय के नाम पर दो मुहल्ले बसे हुए हैं। केवल शहर के पान विक्रेता ही नहीं, बल्कि दूसरे शहरों के विक्रेता भी इस समय इस जगह पान खरीदने आते हैं।</p>
<p>बस इतना ही समझ लें कि आज मिथिला में माँछ का उपलब्धता जितना है वह मिथिला के दो फीसदी लोगों की आवश्यकता पूरी नहीं कर सकता। मिथिला के बाज़ारों में जो माँछ आप देख रहे हैं वह सन 1911 से पहले देश की राजधानी जिस प्रदेश में थी, वहां से और आंध्र प्रदेश से आती है। मिथिला में महज ‘ठप्पा’ लगता है। अब सोचिये खाते हैं बंगाल की – आंध्र की मछली और आज भी कविता पाठ किये हैं “पग-पग पोखर माँछ ,,,,” जब इस कविता की रचना की गयी थी माछ, पान और मखान मिथिला की शान, पहचान अवश्य थी। लेकिन समय के साथ मिथिला अपनी इस पहचान को न सिर्फ खो दिया है, बल्कि इन सभी चीजों पर अब दूसरे प्रदेशों द्वारा कब्जा भी हो गया है। इस दृष्टि से मिथिला की पहचान खतरे में है और लोग बाग़ है कि इस खतरे में भी खतरा उठाना चाहते हैं ‘मिथिला को अलग राज्य का दर्जा दो” – गजब है।</p>
<p><strong>पूरे मिथिला में स्थित पोखरों की संख्या को अगर तनिक बाद में अध्ययन करें तो सिर्फ दरभंगा के महाराजा के साम्राज्य में तक़रीबन 9113 पोखर और तालाब थे। इसमें दरभंगा शहर में ही 350 के आस-पास थे। आज अगर अवकाश है (वैसे मिथिला के लोग वेवजह व्यस्त होते हैं। मोबाईल पर घंटी आज बजायेंगे तो तीसरे दिन हेल्लो ट्यून सुनाई देदा) तो शहर में धूम लें और पोखरों, तालाबों की संख्या, उसकी स्थिति, उसमें दौड़ती मछलियों से, खिलते माखन से, महारों पर लगे पानों की खेती की स्थिति से अवगत हो लें। यकीन मानिए ‘भोकार’ नहीं, ‘चीत्कार’ मारकर रोने लगेंगे, अगर आखों में पानी होगा तो।</strong></p>
<p>इन कविता वाचकों को शायद यह मालूम भी नहीं होगा कि पान की खेती करने के लिए दो-रस मिट्टी की जरूरत होती है। न ज्यादा पानी और न ज्यादा धूप की जरूरत होती। पानी इतना हमेशा चाहिए, ताकि मिट्टी में नमी बनी रहे। यहां तो लोगों की आखों में नमी नहीं है, बेचारी मिट्टी क्या करे। यही कारण है कि कलकत्तिया पान दरभंगिया बनाकर मिथिला के बाज़ार पर अधिपत्य जमा लिया है, कब्ज़ा कर लिया है यानी ‘सुतल छी आ वियाह होईत अछि’ वाली कहावत सिद्ध हो रही है और कविता वाचक पाठ करते नहीं थक रहे हैं “पग पग पोखर माछ मखान, मधुर बोल मुस्की मुख पान । विद्या वैभव शांति प्रतीक, सरस नगर मिथिला थींक” – पूरी मिथिला की सांख्यिकी आप निकालें, यहाँ दरभंगा जिले में रोज तकरीबन 8 टन मछली की खपत है, लेकिन दरभंगा ज़िले से मात्र 500 किलो तक भी मछली बाजार में नहीं पहुंच पाती है।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-10.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-10.jpg" alt="" width="2045" height="1210" class="aligncenter size-full wp-image-6812" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-10.jpg 2045w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-10-300x178.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-10-1024x606.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-10-768x454.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-10-1536x909.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2045px) 100vw, 2045px" /></a></p>
<p>एक बात गर्दन से नीचे नहीं उतरता वह यह कि जब पोखर और तालाबों की संख्या उत्तरोत्तर शून्य की ओर अग्रसर है, फिर पानी में पैदा होने वाला मखान कहाँ से आ रहा है? मखान को सुपर फूड का दर्जा मिला है। ‘जी-टैग’ भी मिला है। कई तरह के कंपनियां अपने अपने नाम की ब्रांडिंग भी कर लिए हैं। </p>
<p>कहा जाता है कि मल्लाह जाति के लोग ही मखाना की खेती करते थे/हैं। आंकड़ों के अनुसार, बिहार में निषाद समाज की करीब 21 उपजातियां हैं। करीब चार दर्जन ‘सरनेम’ लगाए बैठे हैं। प्रदेश की सम्पूर्ण आबादी में करीब एक करोड़ 70 लाख लोग निषाद जाति के हैं। लेकिन सवाल यह है कि जो समाज के लोग, उनका परिवार, बाल-बच्चा बिहार के, तालाबों-पोखरों में पहले गर्दन भर पानी में डूब कर मखान की खेती करने में अपना सौभाग्य समझते थे, आज ठेंघुने और घुटने पर पानी नहीं है उन तालाबों और पोखरों में। इन कहावतों को व्यापारीकरण कर रहे हैं। इतना ही नहीं, अब तो मिथिला के पाग पर भी धावा बोल दिया गया है। ‘पाग’ तो अब रंगबिरंगा हो गया। सफ़ेद पाग कहीं दीखता नहीं। लाल-पाग और हल्दी-रंग नुमा पाग महज अवसर पर ही लोग माथे पर रखते हैं। अब तो ‘पान’, मखान, माँछ, मुस्की, आम, लताम (अमरुद), लीची सभी मिथिला के पाग पर दिखेंगे और राष्ट्रीय ही नहीं, अंतराष्ट्रीय बाजार में मिथिला पेंटिंग के नाम पर बेचे जा रहे हैं, जाएंगे और फिर कहते भी नहीं थकेंगे “पग पग पोखर माछ मखान, मधुर बोल मुस्की मुख पान…..” ।​ </p>
<p><strong>बिहार में मखाना बोर्ड की स्थापना</strong></p>
<p>केन्‍द्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी, 2025 को संसद में केन्‍द्रीय बजट 2025-26 पेश करते हुए भारत की विकास यात्रा के लिए ‘कृषि को प्रथम इंजन’ की संज्ञा देते हुए अन्नदाताओं के लाभ के लिए कृषि क्षेत्र के विकास और उत्पादकता में वृद्धि के लिए कई उपायों की घोषणा की।​ बिहार में मखाना बोर्ड की स्थापना के सरकार के निर्णय की घोषणा करते हुए श्रीमती निर्मला सीतारमण ने कहा कि मखानों का उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन में सुधार लाने के लिए बिहार में मखाना बोर्ड स्थापित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन कार्यकलापों में लगे लोगों को एफपीओ में संगठित किया जाएगा। यह बोर्ड मखाना किसानों को पथ-प्रदर्शन और प्रशिक्षण सहायता उपलब्ध कराएगा और यह सुनिश्चित करने के लिए भी कार्य करेगा कि उन्हें सभी संगत सरकारी योजनाओं के लाभ मिले।<br />
​</p>
<blockquote><p>​बिहार में मखाना बोर्ड स्थापित करने के सरकार के फैसले की घोषणा करते हुए श्रीमती सीतारमण ने कहा कि इससे मखाना के उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन में सुधार होगा और साथ ही इन गतिविधियों में लगे लोगों को किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) में संगठित करने में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि बोर्ड मखाना किसानों को सहायता और प्रशिक्षण सहायता प्रदान करेगा और यह सुनिश्चित करने के लिए भी काम करेगा कि उन्हें सभी प्रासंगिक सरकारी योजनाओं का लाभ मिले।​</p></blockquote>
<p>केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने बजट-2025 को विकसित और हर क्षेत्र में श्रेष्ठ भारत के निर्माण की दिशा में मोदी सरकार की दूरदर्शिता का ब्लूप्रिंट बताया। केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने सर्वसमावेशी और दूरदर्शी बजट के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी और वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जी को बधाई दी।</p>
<p>​लेकिन <strong>बीबीसी के संवाददाता सीटू तिवारी</strong>​ बजट प्रस्तुत होने, मखाना बोर्ड बनने की घोषणा होने के दो माड़ बाद लिखती हैं कि बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार के भागलपुर में एक कार्यक्रम में 300 दिन मखाना खाने की बात कही ​थी।जानकारी के मुताबिक़, &#8220;बोर्ड का गठन मखाने के उत्पादन, प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन और मार्केटिंग को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा. ये बोर्ड मखाना किसानों को प्रशिक्षण सहायता देगा और मखाना उत्पादन से जुड़े लोगों को एफ़पीओ में संगठित ​करेगा।&#8221;​ </p>
<p>वे लिखती हैं कि मखाना किसानों के लिए पहले भी मोटे तौर पर इन्हीं उद्देश्यों के साथ बिहार में राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र खोला गया था, लेकिन ये मखाना केंद्र खुद ही बदहाल​ है। ​&#8221;स्थिति ये है कि इस केंद्र में एक अदद फुल टाइम निदेशक नहीं है और सिर्फ़ 10 स्टाफ़ के सहारे पूरा संस्थान चल रहा है.​ अपने 23 साल के सफ़र में मखाना केंद्र के पास 18 साल तक &#8216;राष्ट्रीय&#8217; का दर्जा भी नहीं ​रहा।&#8221; साल 2002 में राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र के तौर पर खुले मखाना केंद्र से &#8216;राष्ट्रीय&#8217; होने का दर्जा साल 2005 में छिन गया था, जो साल 2023 में जाकर वापस ​मिला। दरभंगा में मखाने के एक राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र खोलने की योजना नौवीं पंचवर्षीय योजना (1997-2002) में बनी थी. जिसके बाद साल 2002 में मखाना अनुसंधान केंद्र का कैम्प ऑफिस पटना स्थित आलू अनुसंधान केंद्र में ​खुला। बाद में ये केंद्र दरभंगा शिफ्ट हो ​गया। इस केंद्र का उद्देश्य मखाना उत्पादन से जुड़े मुश्किल काम को आसान करने के लिए तकनीक विकसित करना, उत्पादकता, रोज़गार, वैल्यु एडिशन, मार्केटिंग आदि करना ​था। लेकिन मखाना केंद्र की ये उपलब्धियां उसके 23 साल के सफ़र और मखाना उत्पादन से जुड़े लोगों की मुश्किलों के सामने बहुत &#8216;बौनी&#8217; नज़र आती ​है। दरअसल, मखाना केंद्र खुद ही अपनी समस्याओं से जूझता ​रहा। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-11.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-11.jpg" alt="" width="2045" height="1210" class="aligncenter size-full wp-image-6813" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-11.jpg 2045w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-11-300x178.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-11-1024x606.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-11-768x454.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-11-1536x909.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2045px) 100vw, 2045px" /></a></p>
<p>लोकसभा में फरवरी 2025 में कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी के दिए गए जवाब के मुताबिक़, मखाना अनुसंधान केंद्र ने वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच महज 3.4 करोड़ रुपये खर्च किए ​हैं। साल 2024-25 में मखाना केंद्र ने जनवरी माह तक महज 1.27 करोड़ रुपये खर्च ​किये गए। दरअसल, इतनी कम राशि खर्च करने की वजह मखाना अनुसंधान केंद्र का दर्जा ​है। साल 2005 में इस केंद्र से &#8216;राष्ट्रीय&#8217; का दर्जा वापस लेकर इसे आईसीएआर (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) पूर्वी क्षेत्र के प्रशासनिक नियंत्रण में लाया ​गया। बाद में साल 2023 में फिर से मखाना अनुसंधान केंद्र को राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र का दर्जा वापस ​मिला। </p>
<p><strong>​बहरहाल, बिहार में फिलहाल लगभग 35 हजार हेक्टेयर में मखाने की खेती होती ​है। कारण 25000 किसान इससे जुड़े हुए ​हैं। देश में सबसे अधिक मखाना उत्पादन करने वाला राज्य बिहार ​है। अब तो प्रचार-प्रसार के लिए समझें या मिथिला क्षेत्र की मखाना की राजनीति, मखाना महोत्सव भी मनाया जाने लगा है। प्रदेश के मुख्यमंत्री सहित अन्य नेतागण भी ताल थोक रहे हैं कि मखाना का उत्पादन बढ़ाने को लेकर प्रयास किए जा रहे ​हैं। लक्ष्य है कि अगले दो-तीन साल में 50-60 हजार हेक्टेयर में इसकी खेती हो और 50 हजार किसान मखाने की खेती से ​जुड़े। </strong></p>
<p>मखाने की खेती उत्तरी और पूर्वी बिहार में मखाना की खेती की जाती ​है। इसमें मधुबनी, दरभंगा, पूर्णिया, कटिहार, सहरसा, मधेपुरा, सुपौल, अररिया, सीतामढ़ी और किशनगंज जिले में मखाना की खेती होती ​है। मखाना अपने गुणों के कारण सुपर फूड माना जाता है। इसमें प्रोटीन, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन और मिनरल्स भरपूर मात्रा में होते हैं। यह पानी में उपजने वाला पौधा है और  जलवायु लचीलापन फसल ​है। ​चुकि मखाना की जड़ें पानी के अंदर होती हैं, इसलिए जमीन की सतह पर होने वाली फसलों की तुलना में इस पर तेज गर्मी का असर कम होता है। लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि जलवायु परिवर्तन का असर मखाना की खेती पर भी पड़ने लगा है।​ लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि मखाने की खेती के लिए जलवायु परिवर्तन एक बड़ी चुनौती है। 40 डिग्री से अधिक तापमान इसके लिए बिल्कुल अच्छा नहीं है। हर तीन-चार साल में एक बार मखाना की फसल पर ड्राई स्पेल (सूखे का दौर) आ जाता है, जिससे किसानों को नुकसान होता है। </p>
<p><strong>मखाना का उत्पादव और बिहार </strong></p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-12.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-12.jpg" alt="" width="2045" height="1210" class="aligncenter size-full wp-image-6814" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-12.jpg 2045w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-12-300x178.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-12-1024x606.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-12-768x454.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-12-1536x909.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2045px) 100vw, 2045px" /></a></p>
<p>भारत दुनिया का लगभग 90 प्रतिशत मखाना उत्पादित करता है और इस उत्पादन ​ में बिहार का योगदान करीब 85 फीसदी से भी अधिक है। बिहार के 38 जिलों में से छह जिले &#8220;एक जिला, एक उत्पाद&#8221; (ओडीओपी) योजना के तहत मखाना की खेती के लिए चिह्नित किए गए हैं। ये जिले हैं &#8211; दरभंगा, मधुबनी, सहरसा, सुपौल, अररिया और कटिहार। ओडीओपी योजना के तहत इन जिलों के किसानों को इनपुट खरीद, सामान्य सेवाओं का लाभ लेने और उत्पादों के विपणन के लिए ज्यादा सुविधाएं मिलती हैं। हालांकि, मिथिलांचल और कोसी-सीमांचल के 10 जिलों में मखाना की खेती होती है और उन जिलों के किसान बिहार सरकार द्वारा संचालित मखाना विकास योजना का लाभ लेने के पात्र हैं। ये 10 जिले हैं &#8211; कटिहार, पूर्णिया, मधुबनी, किशनगंज, सुपौल, अररिया, मधेपुरा, सहरसा, दरभंगा और खगड़िया। वर्ष 2022 में मिथिला मखाना को​ जीआई टैग भी मिला है। </p>
<p>बिहार में मखाना की खेती तेजी से बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2012-13 में मखाना का रकबा 13,000 हेक्टेयर था, जो वर्ष 2021-22 में बढ़कर 35,224 हेक्टेयर हो गया। यह 171 प्रतिशत की वृद्धि है। इस दौरान मखाना के उत्पादन में भी 152 प्रतिशत की वृद्धि हुई। 2012-13 में 9,360 टन मखाना का उत्पादन हुआ था, जो 2021-22 में बढ़कर 23,656 टन हो गया। इसी दौरान मखाना के बीज का उत्पादन भी 56,389 टन हो गया।​ इसके उत्पादन में 70 फीसदी हिस्सा सिर्फ मिथिलांचल का है। ​आज बिहार के अलावा बंगाल, असम, उड़ीसा, जम्मू कश्मीर, मणिपुर और मध्य प्रदेश में भी इसकी खेती की ​जा रही है। मखाना की खपत देश के साथ ही अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में भी है। भारत के अलावा चीन, जापान, कोरिया और रूस में मखाना की खेती की जाती है। मखाना के निर्यात से देश को हर साल 25 से 30 करोड़ की विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है। </p>
<p><strong>​मनीष आनंद और मिथिला नेचुरल्स </strong></p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-13.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-13.jpg" alt="" width="2045" height="1210" class="aligncenter size-full wp-image-6803" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-13.jpg 2045w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-13-300x178.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-13-1024x606.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-13-768x454.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Makhana-13-1536x909.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2045px) 100vw, 2045px" /></a></p>
<p>​बहरहाल, <strong>मनीष आनंद ​(मिथिला नेचुरल्स​)</strong> मधुबनी जिले के अरेर गांव में 70,000+ वर्ग फुट का दुनिया का सबसे बड़ा एकीकृत माखन प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किया।​ मनीष आनंद एक अनुभवी पेशेवर हैं, जिन्होंने अपने अनुभव और व्यावसायिकता का उपयोग अपने गांव जराइल-अरेर, क्षेत्र मिथिला और राज्य बिहार में गांव के पारिस्थितिकी तंत्र को बेहतर बनाने के लिए करने के लिए शानदार एमएनसी जीवन को छोड़ दिया।​ उन्होंने 24 से अधिक देशों के बाज़ार में काम किया और कंट्री मैनेजर के रूप में दक्षिण एशिया को संभाला। उन्हें अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार का गहन ज्ञान और अनुभव है।​ उन्होंने आकर्षक लेकिन नीरस नियमित कॉर्पोरेट जीवन को छोड़ दिया और बिहार के मधुबनी जिले के बेनीपट्टी ब्लॉक में अपने गांव जराइल में &#8216;वापस जड़&#8217; पर जाने का फैसला किया।</p>
<p>वे एक दूरदर्शी और बिहार के सबसे तेजी से बढ़ते ब्रांड, मिथिला नेचुरल्स के संस्थापक हैं। उन्होंने 2012 में मिथिला के साथ अपनी यात्रा शुरू की। मिथिला/बिहार और इसकी ताकत और कमजोरियों का अध्ययन करने के बाद, उन्होंने कृषि आधारित कृषि उपज में अपनी अगली पेशेवर यात्रा शुरू करने का फैसला किया, जो मिथिला/बिहार की ताकत है। उन्होंने अपने गाँव के तालाब में मखाना की खेती देखी और मखाना में उतरने का फैसला किया। अगले 3 वर्षों में, उन्होंने जमीनी स्तर पर काम किया, बाजार का अध्ययन किया, संभावित विकास का अनुमान लगाया, मूल्य वर्धित मखाना के दायरे पर शोध किया, किसानों, फोरिस, मनी लेंडर्स, व्यापारियों, स्टॉकिस्ट, जमाखोरों जैसे हितधारकों से मुलाकात की और 2015 में दिल्ली हाट, आईएनए में पहला प्रोटोटाइप उत्पाद लॉन्च किया। तब 4 उत्पाद लॉन्च किए गए थे; फूल मखाना, भुना हुआ फ्लेवर्ड मखाना, मखाना पाउडर और मखाना पाक। </p>
<p>2018 में उन्होंने मिथिला से पहला एकीकृत खाद्य ब्रांड &#8216;मिथिला नेचुरल्स&#8217; और पहला प्रीमियम फूल मखाना ब्रांड &#8216;मिथिला मखान&#8217; लॉन्च करने का फैसला किया। यह सफल रहा और अब उनके उत्पाद बास्केट में 100 से अधिक SKU हैं जो दुनिया भर में अब तक 10 मिलियन से अधिक पैकेट बेचे जाने के साथ बढ़ रहे हैं। हाल ही में उन्होंने अमेरिकी उपभोक्ता बाजार का पता लगाने के लिए अपनी कंपनी मिथिला नेचुरल्स यूएसए कॉर्प को पंजीकृत किया, जो दुनिया में सबसे बड़ा है। और अंदाज़ा लगाइए, उनके सभी एंड टू एंड उत्पाद मूल्य श्रृंखला उत्पादन उनके दूरदराज के गाँव से आते हैं जहाँ समाज के कमज़ोर वर्ग की ज़्यादातर अकुशल महिला कर्मचारी काम करती हैं। यू.के. एम.एन.सी. के लिए काम करते समय अपनी शुरुआती प्रवृत्ति में, उन्होंने 6 व्यावसायिक लाइनें (ऑप्थैल्मिक ग्लास, ऑप्टिकल ग्लास, एक्सरे ग्लास, ग्लास मास्टर, न्यूक्लियर ग्लास, बिल्डिंग ग्लास) स्थापित कीं और भारत और पड़ोसी देशों में एंटीस्लिप उत्पादों का व्यवसाय बनाया। </p>
<p>उन्होंने अपने व्यवसाय को तकनीकी उत्पादों से बिल्डिंग उत्पादों में बदल दिया और अंततः &#8216;आटा-डेटा&#8217; सिद्धांत में विश्वास करते हुए कृषि और खाद्य क्षेत्र में बदल दिया। हमारा लक्ष्य 10 साल में 10 हजार करोड़ का ब्रांड बनना है। हमारा लक्ष्य पूर्वी भारत का अग्रणी घरेलू खाद्य ब्रांड बनना है। हमने मखाना से शुरुआत की है, लेकिन हम स्टेपल में भी प्रवेश कर रहे हैं और घरों में रोजाना खाए जाने वाले सभी खाद्य उत्पाद जैसे चावल, दाल, बेसन, सत्तू, आटा, सूखे मेवे, खाद्य तेल, मसाले, बेकरी, डेयरी, पानी आदि बनाएंगे। हम कैसे बेचेंगे? हम B2B आपूर्ति के साथ-साथ पारंपरिक, आधुनिक, ईकॉम और डार्क स्टोर मॉडल पर काम कर रहे हैं। हम D2C से आगे बढ़कर D2V मॉडल की ओर बढ़ रहे हैं।</p>
<p><strong>मखान-पोखर वाली सभी तस्वीरें अजय कुमार कोशी बिहार के सौजन्य से</strong> </p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/business/politics-of-makahana-and-paag-in-mithila">जब &#8216;खाने की वस्तु&#8217; को &#8216;पहनाने लगे&#8217; लोग, तो समझ लीजिये &#8216;राजनीति&#8217; हो रही है, मिथिला का &#8216;मखान&#8217; भी अछूता नहीं है, &#8216;पाग&#8217; के बारे में तो पूछिए नहीं (बिहार स्टार्टअप-5)</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>अमित शाह कहते हैं कि &#8216;अंग्रेजी बोलने वालों को शर्म आएगी&#8217; और नीतीश कुमार के बिहार में अंग्रेजी सिखाने के लिए EnglishYaari स्टार्टअप के रूप में झंडा उठा लिया है (बिहार स्टार्टअप-4)</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/business/englishyaari-has-taken-the-flag-as-a-startup-to-teach-english-in-nitish-kumars-bihar</link>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 21 Jun 2025 05:44:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यापार]]></category>
		<category><![CDATA[bihar]]></category>
		<category><![CDATA[businesas]]></category>
		<category><![CDATA[education]]></category>
		<category><![CDATA[english]]></category>
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		<category><![CDATA[startup]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>पटना / नई दिल्ली : खगोल शास्त्र में &#8216;बृहस्पति&#8217; यानी &#8216;जुपिटर&#8217; को सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में &#8216;बृहस्पति&#8217; को &#8216;देवगुरु&#8217; मानते हैं, जो ज्ञान, धर्म और समृद्धि का कारक भी हैं। लेकिन &#8216;बृहस्पति&#8217; के &#8216;वास्तविक महत्व को दरकिनार करते&#8217; विगत बृहस्पतिवार को केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री ने जब यह [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/business/englishyaari-has-taken-the-flag-as-a-startup-to-teach-english-in-nitish-kumars-bihar">अमित शाह कहते हैं कि &#8216;अंग्रेजी बोलने वालों को शर्म आएगी&#8217; और नीतीश कुमार के बिहार में अंग्रेजी सिखाने के लिए EnglishYaari स्टार्टअप के रूप में झंडा उठा लिया है (बिहार स्टार्टअप-4)</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>पटना / नई दिल्ली : खगोल शास्त्र में &#8216;बृहस्पति&#8217; यानी &#8216;जुपिटर&#8217; को सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में &#8216;बृहस्पति&#8217; को &#8216;देवगुरु&#8217; मानते हैं, जो ज्ञान, धर्म और समृद्धि का कारक भी हैं। लेकिन &#8216;बृहस्पति&#8217; के &#8216;वास्तविक महत्व को दरकिनार करते&#8217; विगत बृहस्पतिवार को केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री ने जब यह कहा कि भारत में अंग्रेजी बोलने वालों को &#8216;जल्द ही शर्म आएगी और ऐसे समाज का निर्माण दूर नहीं है,&#8217; अचानक भारतवर्ष के सैकड़ों नहीं, हज़ारों, लाखों शैक्षिणक संस्थानों की, शिक्षाविदों की याद आ गयी जो आज़ादी के 78 साल बाद अपने देश के युवापीढ़ियों को वैश्विक स्तर पर विश्व के युवाओं और अवसरों को चुनौती देकर अपने राष्ट्र का, अपने ज्ञान का पंचम लहराने का प्रयास कर रहे हैं अंग्रेजी सिखाकर। </strong> </p>
<p>भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी आशुतोष अग्निहोत्री द्वारा लिखित पुस्तक &#8216;मैं बूंद स्वयं, खुद सागर हूं&#8217; के विमोचन के अवसर पर अमित शाह ने कहा कि &#8220;जो लोग भारतीय भाषाएं नहीं बोलते हैं, वे पूरी तरह से भारतीय नहीं रह जाते हैं और भारत को विदेशी भाषाओं के माध्यम से नहीं समझा जा सकता है। हम सब के जीवन में, इस देश में, अंग्रेजी बोलने वालों को शर्म आएगी, ऐसे समाज का निर्माण अब दूर नहीं&#8230; और मैं मानता हूं, हमारे देश की भाषाएं हमारी संस्कृति का गहना हैं। हमारे देश की भाषाओं के बारे में हम भारतीय ही नहीं रहते। हमारा देश, इसका इतिहास, इसकी संस्कृति, हमारा धर्म, इसको समझना है तो कोई विदेशी भाषा में नहीं समझ सकता। केवल भारतीयता ही इसमें हमारी मदद कर सकती है, केवल भारतीय भाषाएं ही ऐसा कर सकती हैं। मैं जानता हूं कि यह लड़ाई कठिन है, लेकिन मेरा दृढ़ विश्वास है कि भारतीय समाज इस लड़ाई को जीतेगा।&#8221; खैर। </p>
<p><strong>भारत में शैक्षिक दर, अगर आंकड़े पर विश्वास करें तो, 2025 में 77.7 फीसदी माना जा रहा है। जिसमें पुरुषों की भागीदारी 84 % और महिलाओं की 70.3%, यानी पुरुषों की तुलना में महिलाएं 14 % पीछे हैं आज़ादी के 78 साल बाद भी। बिहार की स्थिति भी बेहतर नहीं है, भले सचिवालय में बैठे आला अधिकारी से लेकर मंत्रालय में बैठे विधायक और मंत्री जी जो भी दावा करें। बिहार में पुरुषों की साक्षरता 84.9 % और महिलाओं की 79. 7 % माना जा रहा है। औसतन 79.7 % आँका जा रहा है। अंग्रेजी के मामले में आज भी बिहार के औसतन लोगों का हाथ और मुंह दोनों तंग है। जो बिहार से बाहर निकल गए (अपवाद छोड़कर) और अपनी देशी-विदेशी भाषाओँ पर आधिपत्य जमाकर प्रतिस्पर्धा के बाज़ार में छलांग लगा दिए, आगे निकलते हैं। बहुत सारी बातें हैं जो शोध का भी विषय है और व्याखायें का भी।</strong> </p>
<p>इसी परिप्रेक्ष्य में, या यूँ कहें कि प्रदेश के युवाओं में अंग्रेजी की वर्तमान स्थिति को देखते हुए अंग्रेजी सिखने, सिखाने के लिए अब स्टार्टअप की भी शुरुआत हो गयी है जिसे मित्रवत नाम भी दिया गया है EnglishYaari ताकि युवा को विश्वास हो कि अंग्रेजी को मित्र बनाने से वर्षों पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर (अब भारतरत्न कर्पूरी ठाकुर) द्वारा राजनीतिक कारणों से जिस कदर अंग्रेजी को दूर कर &#8216;अंग्रेजी के बिना भी माध्यमिक परीक्षा उत्तीर्ण किया जाता था (उस कालखंड के बच्चे आज भी भटक रहे हैं) वाली त्रासदी का सामना फिर नहीं करना पड़े। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/A-1-2.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/A-1-2.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-6789" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/A-1-2.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/A-1-2-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/A-1-2-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/A-1-2-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/A-1-2-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p><strong>आइये पटना सचिवालय </strong></p>
<p>आइये पहले शैक्षणिक स्थिति, अंग्रेजी, हिंदी और अन्य भाषाओँ की लड़ाई से हटकर पटना सचिवालय चलते हैं। कोई 243 सदस्यों की संख्या वाले विधानसभा में अगर किसी दिन यह प्रश्न मंत्री और सम्मानित सदस्यों के &#8216;अंग्रेजी में नहीं, बल्कि हिंदी में ही&#8217; पूछा जाय की विधान सभा भवन की जमीन किसकी थी? या पटना उच्च न्यायालय की जमीन किसकी थी? तो प्रश्न सुनते ही अधिकांश माननीय सदस्यगण को &#8216;गश&#8217; में आ जायेंगे या फिर चारो-खाने चित्त हो जायेंगे और चिचियाने लगेंगे &#8216;पढ़ल-लिखल के बुलाब हो….. पढ़ल-लिखल के, जानकार के बुलाब&#8217; कहने लगेंगे। क्योंकि आज जितने महाशय बैठे हैं वे जयप्रकाश नारायण की सम्पूर्ण क्रांति के पैदाइश हैं और उस क्रांति में भले देश की राजनीतिक व्यवस्था में परिवर्तन हुआ हो, &#8216;सिंहासन खाली करो कि जनता आ रही है,&#8217; का नारा देने वाले &#8216;सिंहासन पर विराजमान&#8217; हो गए हों; हकीकत यह है कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था का जितना मिट्टी पलीद हुआ, अन्य किसी का नहीं। </p>
<p>इसका ज्वलंत दृष्टान्त यह है कि आज़ादी के 78 साल बाद आज तक कोई भी पुस्तकालय, वाचनालय का निर्माण नहीं हुआ। प्रदेश के नेताओं, मंत्रियों के लिए पुस्तकालय महत्वहीन है। इतना ही नहीं, प्रदेश के लोगों का, विद्वानों का, विदुषियों का, छात्रों का, छात्राओं का – वे सभी इस राजनीतिक दौर में मानसिक रूप से स्थिर (अपवाद छोड़कर) हो गए हैं। “आजाद भारत में जब हम दस या बीस रुपये में प्रकृति-प्रदत्त पानी की एक बोतल भी खरीद कर पीते हैं और शौचालय जाने हेतु कम-से-कम दो या पांच रुपए की राशि अदा करते हैं तो यह भी हमारी सरकार के गाल पर मारा हुआ एक झन्नाटेदार तमाचा है परन्तु यह भी हमारी सरकार पर अपना कोई असर नहीं छोड़ पाता क्योंकि यह सरकार तो अन्धी ही नहीं बल्कि बहरी भी होती है और इतना ही नहीं हमारी सरकार संवेदनहीन भी अव्वल दर्जे की होती है। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/A-2-2.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/A-2-2.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-6790" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/A-2-2.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/A-2-2-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/A-2-2-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/A-2-2-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/A-2-2-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p><strong>खुदाबक़्श पुस्तकालय की चर्चा किये बिना अधूरा</strong> </p>
<p>पढ़ने-पढ़ाने, सीखने-सीखाने की बात के लिए खुदाबक़्श पुस्तकालय की चर्चा करना नितांत आवश्यक है। इस पुस्तकालय की शुरुआत मौलवी मुहम्मद बक़्श, जो छपरा के थे, उनके निजी पुस्तकों के संग्रह से हुई थी। वे स्वयं कानून और इतिहास के विद्वान थे और पुस्तकों से उन्हें खास लगाव था। उनके निजी पुस्तकालय में लगभग चौदह सौ पांडुलिपियाँ और कुछ दुर्लभ पुस्तकें शामिल थीं। 1876 में जब वे अपनी मृत्यु-शय्या पर थे उन्होंने अपनी पुस्तकों की जायदाद अपने बेटे को सौंपते हुए एक पुस्तकालय खोलने की इच्छा प्रकट की। इस तरह मौलवी खुदाबक्श खान को यह संपत्ति अपने पिता से विरासत में प्राप्त हुई जिसे उन्होंने लोगों को समर्पित किया। खुदाबक़्श ने अपने पिता द्वारा सौंपी गयी पुस्तकों के अलावा और भी पुस्तकों का संग्रह किया तथा 1888 में लगभग अस्सी हजार रुपये की लागत से एक दो मंज़िले भवन में इस पुस्तकालय की शुरुआत की और 1891 में 29 अक्टूबर को जनता की सेवा में खुदाबक्श ओरिएंटल पब्लिक लाइब्रेरी के रूप में समर्पित किया। उस समय पुस्तकालय के पास अरबी, फ़ारसी और अंग्रेजी की चार हजार दुर्लभ पांडुलिपियां थीं। </p>
<p>विगत 78-वर्षों का बिहार का इतिहास देख लें और आंक लें कि कितने धनाढय (अपवाद छोड़कर) या कितने राजनेताओं के पास उनका निजी पुस्तकालय है &#8211; दुर्भाग्यवश किन्ही का नहीं। क्योंकि शिक्षा का महत्व उनके लिए नहीं है। बहरहाल, सन 1969 में भारत सरकार ने संसद में पारित एक विधेयक के जरिये खुदा बख्श लाइब्रेरी को राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के तौर पर मान्यता दी। लाइब्रेरी में फ़िलहाल अरबी, फारसी, संस्कृति और हिंदी की लगभग 21,000 से अधिक पांडुलिपियां और 2.5 लाख से अधिक किताबें हैं &#8211; उनमें से कुछ बहुत ही दुर्लभ हैं। इतिहास में दर्ज़ है कि 1891 में जब इसे खोला गया था तब खुदा बख्श ओरिएंटल पब्लिक लाइब्रेरी अपनी तरह की ऐसी पहली लाइब्रेरी थी जिसमें आम लोग जा सकते थे। करीब 12 साल बाद भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड कर्जन पटना में गंगा किनारे स्थित इस लाइब्रेरी का दौरा करने पहुंचे तो इसमें संग्रहित पांडुलिपियों को देखकर इतना प्रभावित हुए कि उन्होंने इसके विकास के लिए धन उपलब्ध कराया। आभार जताने के लिए लाइब्रेरी की तरफ से 1905 में कर्जन रीडिंग हॉल की स्थापना की गई। उसके पश्चात यह रीडिंग हॉल पढ़ने की मुख्य जगह बन गई।</p>
<p><strong>व्हीलर सीनेट हॉल, पटना विश्वविद्यालय </strong></p>
<p>खुदाबक्श पुस्तकालय से पचास कदम आगे बढ़कर पटना विश्वविद्यालय परिसर पहुँचते हैं। बिहार ही नहीं, अविभाजित भारत में शिक्षा के विकास के मामले में दरभंगा के महाराजाधिराज डॉ. सर कामेश्वर सिंह का योगदान ‘अक्षुण’ है, इसमें कोई शक नहीं है। लेकिन पटना विश्वविद्यालय के मामले में मुंगेर के जमींदार देवकी नंदन प्रसाद सिंह के योगदान को भी भुलाया नहीं जा सकता है। दुर्भाग्य से, प्रदेश के लोगों ने प्रदेश की आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक विकास के मामले में अपने प्रदेश के राजाओं और जमींदारों की भूमिका को ‘भुला’ ही नहीं, अपितु मानसिक तौर पर ‘दफना’ भी कर दिया। अपने ही प्रदेश में उन लोगों को वह सम्मान नहीं मिल सका जिसके वे हकदार थे। यह अलग बात है कि प्रदेश की गलियों, चौराहों पर राजनेताओं की मूर्तियां चतुर्दिक लगे हैं। लेकिन ‘शिक्षा’ के मामले में शैक्षणिक संस्थानों में उन लोगों के नामों को नेस्तनाबूद कर दिया गया। अगर ऐसा नहीं होता तो पटना विश्वविद्यालय के ‘सीनेट’ और ‘सिंडिकेट’ में उन राजाओं और जमींदारों का स्थान आज भी ‘सुरक्षित’ रहता। परन्तु जब प्रदेश का उप-नेतृत्व ‘नवमीं कक्षा’ उत्तीर्ण नेता करे, ‘सीनेट’ और ‘सिंडिकेट’ का अर्थ और भावार्थ समझना नामुमकिन है।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/wheeler-fotor.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/wheeler-fotor.jpg" alt="" width="1834" height="1207" class="aligncenter size-full wp-image-6791" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/wheeler-fotor.jpg 1834w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/wheeler-fotor-300x197.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/wheeler-fotor-1024x674.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/wheeler-fotor-768x505.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/wheeler-fotor-1536x1011.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1834px) 100vw, 1834px" /></a></p>
<p><strong>राजा देवकी नंदन प्रसाद सिंह के आज के वंशज श्री शरद सिंह से बात करने पर उन्होंने कहा: “पटना विश्वविद्यालय हमारे पूर्वजों के ऐतिहासिक योगदान के निमित्त तत्कालीन व्यवस्था द्वारा चिकित्सा महाविद्यालय और साइंस कॉलेज में दो-दो सीट दिया गया था। पहले यह स्थान पटना विश्वविद्यालय सीनेट के लिए निमित्त हुआ, परन्तु तत्कालीन व्यवस्था से अनुरोध करने पर दो-दो स्थान दो कॉलेजों में सुरक्षित रखा गया। पिछले कई वर्षों से हम सभी प्रदेश के राज्यपालों की लिखते आये हैं, लेकिन कोई निर्णय नहीं हो पाया। कोई दो दशक पहले सरकार के द्वारा आरक्षण को समाप्त कर दिया गया। स्वाभाविक है सरकारी निर्णय के बाद हम सभी हताश हो गए।”</strong></p>
<p>दरभंगा के महाराजाधिराज डॉ. सर कामेश्वर सिंह पटना के गंगा-तट पर करीब 15 एकड़ और अधिक भूमि पर बने ऐतिहासिक ‘दरभंगा हॉउस’ का सम्पूर्ण परिसर के साथ-साथ भविष्य में प्रदेश में शिक्षा और विज्ञान को अधिकाधिक मजबूत बनाने के लिए करीब सात लाख रूपये का दान स्वाधीनता मिलने के करीब आठ साल बाद सन 1955 में किये। लेकिन मुंगेर के जमींदार देवकी नंदन प्रसाद सिंह दरभंगा के महाराजाधिराज से कोई 29-वर्ष पूर्व पटना विश्वविद्यालय के छात्र-छात्रों, शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के कार्यों में कोई बाधा न हो, ऐतिहासिक ‘सीनेट हॉउस’ बनाने में ‘अकेला योगदान’ किये।</p>
<p>पटना विश्वविद्यालय के एक अवकाश प्राप्त प्राध्यापक का कहना है कि “जब प्रदेश में शिक्षा को अपाहिज कर गंगा में डुबकी लगाने के लिए छोड़ दिया गया, आप सीनेट और सिंडिकेट की बात करते हैं। आज ‘सीनेट’ और ‘सिंडिकेट’ का अर्थ और भावार्थ बताने वालों की भी किल्लत है शैक्षणिक संस्थानों में। हम किस संस्कार और गरिमा की बात करते हैं? पटना विश्वविद्यालय का सीनेट हॉल अपने ही प्रदेश के एक नागरिक का देन है जिन्होंने आज से सौ वर्ष पहले शिक्षा के महत्व को समझा। शिक्षाओं की बैठकी का महत्व समझा। दीक्षांत समारोह का महत्व समझा। आज अगर विश्वविद्यालय अथवा प्रदेश की सरकार उस स्थान पर मॉल या वातानुकूलित बाजार खोलने की बात कर दे तो यकीन कीजिये प्रदेश के लाखों लोग पैसे फूंकने को तैयार हो जाएंगे । आज शिक्षा का कोई मोल नहीं है। शिक्षा को व्यापार बना दिया गया है। प्रदेश में जो भी पढ़ने पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं हैं वे अपने जीवन निर्माण के लिए, पढ़ने के लिए प्रदेश से पहले ही बाहर निकल जाते हैं।”</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/AmitEnglis4.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/AmitEnglis4.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-6795" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/AmitEnglis4.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/AmitEnglis4-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/AmitEnglis4-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/AmitEnglis4-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/AmitEnglis4-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p>चलिए, जब शिक्षा और जानकारी की बात चल ही रही है तो यह भी जान लें कि पटना विश्वविद्यालय के आज के छात्र- छात्राएं, शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारी इस बात से अनभिज्ञ होंगे कि आज से सौ साल पहले, यानी सन 1917-1922 के कालखंड में पटना विश्वविद्यालय का ‘अस्थायी कार्यालय’ पटना उच्च न्यायालय का परिसर था। पटना उच्च न्यायालय भवन से ही पटना विश्वविद्यालय का प्रशासनिक कार्य चलता था। सुनकर, पढ़कर अजीब तो लगेगा, लेकिन सच यही है। इतना ही नहीं, स्थान के अभाव में संकायों (फैकल्टी) की बैठक न्यू कॉलेज (पटना कॉलेज) के विशाल कक्ष में हुआ करता था। साथ ही, पटना विश्वविद्यालय सीनेट की बैठक पटना सचिवालय के सम्मेलन कक्ष में होता था । लाट साहब (राज्यपाल) का ‘दरबार कक्ष’ का इस्तेमाल पटना विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के लिए किया जाता था। </p>
<p><strong>मुंगेर के जमींदार राजा देवीकी नंदन प्रसाद सिंह पटना विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल का निर्माण कार्य का सम्पूर्ण खर्च वहां किये। उस कालखंड में इसके निर्माण पर कुल 125000/- रुपये खर्च हुए थे। करीब एक हज़ार लोगों की बैठने की क्षमता वाले इस सीनेट हॉल का निर्माण कार्य सन 1926 में पूरा हो गया। इस विशाल हॉल का नाम ‘सर हैनरी व्हीलर’ के नाम पर रखा गया जो उस समय अविभाजित बिहार-उड़ीसा प्रान्त के राज्यपाल थे। सर हैनरी सन 1926 में ‘व्हीलर सीनेट हॉल’ का लोकार्पण किया। इस ऐतिहासिक भवन का निर्माण उस समय हुआ था जब मातृभूमि की आज़ादी के लिए देश के नौजवान संगठित हो रहे थे। इसी समय भगत सिंह किसानों और श्रमिकों को रैली के माध्यम से अपने हक़ के लिए ब्रिटिश शासन के खिलाफ आवाज बुलंद किये थे। यह अलग बात है कि आज 92-साल बाद भी भगत सिंह और अन्य क्रांतिकारी, जिन्होंने मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए फांसी के फंदों को चूमा, ‘शहीद’ का दर्जा नहीं मिला। </strong></p>
<p>ज्ञातव्य है कि व्हीलर सीनेट हॉल अपने अस्तित्व काल में लार्ड माउंटबेटन, सरदार वल्लभभाई पटेल, सरोजनी नायडू, सी. डी. देशमुख, विजया लक्ष्मी पंडित, जयप्रकाश नारायण, जगदीश चंद्र बॉम सी.वी. रमन, सत्येन्द्रनाथ बोस जैसे महान हस्तियों को अपने छत के नीचे छात्रों को, शिक्षकों को सम्बोधित करते देखा है। अपने निर्माण के एक दशक बाद 17 मार्च, 1936 को इसी सीनेट हॉल में रवीन्द्रनाथ टैगोर का अभिनन्दन समारोह का भी आयोजन हुआ था। आज़ादी के पूर्व वर्ष में जवाहरलाल नेहरू को भी इसी हॉल में तत्कालीन सांप्रदायिक दंगों के कारण शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा था। पटना विश्वविद्यालय की स्थापना अक्टूबर, 1917 में बिहार और उड़ीसा के अलग प्रांत के निर्माण के बाद की गई थी। बिहार में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक सकारात्मक कदम उठाया गया है। जुलाई 1919 में पटना कॉलेज में विभिन्न कला विषयों में स्नातकोत्तर कक्षाएं शुरू की गईं। उच्च वैज्ञानिक शिक्षण को बढ़ावा देने के लिए 1927 में साइंस कॉलेज एक अलग इकाई बन गया। खैर। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/AmitEnglis3.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/AmitEnglis3.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-6792" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/AmitEnglis3.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/AmitEnglis3-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/AmitEnglis3-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/AmitEnglis3-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/AmitEnglis3-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p><strong>आइये फिर दिवसों पर चर्चा करते हैं।</strong> </p>
<p>पहली जनवरी को अंतर्राष्ट्रीय वैश्विक दिवस से लेकर 26 दिसंबर को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल स्थापना दिवस तक साल के 365 दिनों में करीब 191 + दिनों का अलंकरण महत्वपूर्ण दिवसों के रूप में अंकित है। इन 365  दिनों में 351 और 358 ‘हिन्दी’ किसी दीवार से सटकर चुपचाप सहमी पड़ी होती है। अकस्मात् सात दिन (हिन्दी सप्ताह) और चौदह दिन (हिन्दी पखवाड़ा) के लिए ‘फूल-माला पहनाकर, सुसज्जित कर लोगबाग, अधिकारी, पदाधिकारी, मंत्री, संत्री उसे सामने की मेज पर बैठा देते हैं ‘दर्शनार्थ’ और फिर कहते भी नहीं थकते है ‘हिंदी हैं हम वतन है हिन्दोस्तां हमारा।’  उसकी स्थिति कुछ वैसी ही होती है जैसे गणतंत्र दिवस पर मातृभूमि के लिए अपने प्राणों को अर्पित करने वाले गीतों का गाना-बजाना। भारत के लोग, शिक्षित, अशिक्षित सभी लोग बजाते हैं। मिथिला सहित, बिहार सहित, देश के सभी 787 जिलों, 649481 गाँवों, 2 .68 ग्राम पंचायतों में तो बजता ही है। बेचारी हिंदी। वैसे चाहे महिला (स्त्रीलिंग) सशक्तिकरण के बारे में लोगबाग, समाज, सरकार और व्यवस्था कितना भी ढ़ोल पिट लें, महिला जानती है समाज के संभ्रांत लोग, राजनेता, दबंग कितना सशक्त होने दिए हैं, शोध का विषय है। </p>
<p><strong>भारत में आज बच्चे कबीरदास, तुलसीदास, सूरदास, संत विदास, मीराबाई, रहीम, रसखान, भूषण, भारतेन्दु हरिश्चन्द्र, बिहारी, भीष्म साहनी, महाबीर प्रसाद द्विवेदी, मैथिलि शरण गुप्त, अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’, सियाराम शरण गुप्त, सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’, सच्चिदानंद हीरानंद वात्सायन ‘अज्ञेय’, मुंशी प्रेमचंद, सुभद्रा कुमारी चौहान, जैनेन्द्र कुमार, यशपाल, रामधारी सिंह ‘दिनकर’, माखनलाल चतुर्वेदी, शिवमंगल सिंह ‘सुमन’, गया प्रसाद शुक्ल, महादेवी वर्मा, शरतचंद चट्टोपाध्याय, कमलेश्वर, फणीश्वरनाथ ‘रेणु’, गोपाल सिंह ‘नेपाली’, हरिवंश राय ‘बच्चन’, सोहन लाल द्विवेदी, नागार्जुन, सुमित्रानंदन पन्त, दुष्यंत कुमार, त्रिलोचन, भवानी प्रसाद मिश्र का नाम भी नहीं जानते होंगे, क्योंकि आज अधिकांश हिन्दी की किताबों में इनका नाम दीखता ही नहीं, या फिर बड़े-बुजुर्ग इन हिन्दी के हस्ताक्षरों के बारे में अपने बच्चों को बताने की जबाबदेही अपने कंधे से झटक दिए हैं। इतना ही नहीं, हिन्दी को, जिसे भारतीय संविधान के तहत राजभाषा का दर्जा प्राप्त है । राष्ट्रभाषा राष्ट्र की आत्मा होती है। जिसमें पूरा देश संवाद करता है। जिससे राष्ट्र की पहचान होती है । यह तभी संभव है जब हम सभी दोहरी मानसिकता को छोड़कर राष्ट्रभाषा हिन्दी को अपने जीवन में अपनाने की शपथ मन से लें। तभी सही मायने में हिन्दी का राष्ट्रीय स्वरूप उजागर हो सकेगा। </strong></p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/English-Cover2.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/English-Cover2.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-6793" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/English-Cover2.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/English-Cover2-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/English-Cover2-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/English-Cover2-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/English-Cover2-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p><strong>बिहार का नया स्टार्टअप EnglishYaari </strong></p>
<p>आइये अब बिहार में खुले नए स्टार्टअप <strong>EnglishYaari</strong> को देखते हैं क्योंकि जब लखनऊ के हजरतगंज स्थित पुलिस ठाणे से दस कदम आगे बाएं हाथ भवन के ऊपर एक पट्ट पर &#8220;मास्टर माइंड स्टडी सर्किल का विज्ञापन लिखा देखा &#8216;फेल छात्र पास करें इसी वर्ष&#8217; तो उत्तर प्रदेश की राजधानी में भी शिक्षा के महत्व का ज्ञान हो गया था। <strong>English Yaari</strong> बिहार से निकला एक स्टार्टअप है, जिसकी स्थापना विकास, संदीप और पीयूष ने की है, जो MIT मुजफ्फरपुर में इंजीनियरिंग के दिनों में मिले थे। हमने किसी भी संदर्भ में धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलने के महत्व को महसूस किया। हालांकि, बिहार से होने के कारण, हमारे पास अपने अंग्रेजी कौशल का अभ्यास करने और उसे बेहतर बनाने के लिए माहौल की कमी थी। यह संघर्ष कॉलेज के दिनों में स्पष्ट हो गया, खासकर जब हमें एहसास हुआ कि नौकरी के साक्षात्कार से लेकर दैनिक बैठकों तक, हमारे मजबूत तकनीकी कौशल के बावजूद, अंग्रेजी एक ज़रूरत थी।</p>
<p><strong>उनका कहना है कि &#8220;हमने पाया कि मौजूदा एप्लिकेशन और बाज़ार समाधान प्रभावी नहीं थे। ऑफ़लाइन केंद्रों में 20-30 छात्रों के बड़े बैच थे, जिससे हमारे जैसे अंतर्मुखी लोगों के लिए अभ्यास करना या बोलने का साहस हासिल करना मुश्किल हो गया। इंजीनियरों के रूप में, हमारा ध्यान समस्याओं को हल करने पर था। बाजार की क्षमता और बढ़ने के अवसर को पहचानते हुए, हमने 2021 में <strong>EnglishYaari</strong> की स्थापना की। नाम अपने आप में बोलता है। हर कोई चाहता है कि जब वह गलती करे तो उसे सुधारा जाए, लेकिन दूसरों के सामने ऐसा करना शर्मनाक हो सकता है, जिससे बोलने में झिझक हो सकती है। इन बाधाओं को तोड़ने के लिए, हमने लाइव वन-ऑन-वन सेशन की पेशकश शुरू की, जहाँ शिक्षार्थी बिना किसी झिझक के बोल सकते हैं और सुधार प्राप्त कर सकते हैं।&#8221;</strong></p>
<p>जैसा कि कहा जाता है, अभ्यास से सिद्धि मिलती है। <strong>EnglishYaari</strong> उसी सिद्धांत पर काम करता है। यदि आप अपने कौशल में सुधार करना चाहते हैं, तो आपको कार्रवाई करने की आवश्यकता है। शुरुआत में, शीर्ष ट्यूटर्स को लाना और लोगों तक पहुँचना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन हमें यह महसूस हुआ कि हम बदलाव ला सकते हैं। ऐसे दिन भी आए जब हम अटके हुए महसूस करते थे, शिक्षार्थियों को पाने या परेशानी मुक्त सेवा प्रदान करने के लिए संघर्ष करते थे। हालाँकि, हमें सपनों की शक्ति पर विश्वास था, और आज तक, हमने 10,000 से अधिक शिक्षार्थियों को सेवा प्रदान की है। इस उद्यमशीलता की यात्रा ने हमें अधिक समझदार और जोखिम लेने वाले व्यक्तियों के रूप में आकार दिया है। हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि दूसरों को अंग्रेजी सीखने में उन्हीं संघर्षों का सामना न करना पड़े जो हमें करना पड़ा। अब कोई बदमाशी, घबराहट या नकारात्मक भावनाएँ नहीं हैं &#8211; हमने अंग्रेजी सीखने का मार्ग सरल बना दिया है। </p>
<p><strong>EnglishYaari स्टार्टअप का &#8216;ब्रांड स्टोरी&#8217; </strong></p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/English-Cover1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/English-Cover1.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-6794" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/English-Cover1.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/English-Cover1-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/English-Cover1-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/English-Cover1-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/English-Cover1-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p><strong>EnglishYaari</strong> की शुरुआत एक किफायती कीमत पर सभी के लिए बोली जाने वाली अंग्रेजी को आसान और सुलभ बनाने के उद्देश्य से की गई थी। यह जीवन के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों के लिए वन-स्टॉप समाधान के रूप में कार्य करता है। चाहे वे कामकाजी पेशेवर हों जिन्हें ऑफिस मीटिंग, प्रेजेंटेशन या नौकरी में पदोन्नति में मदद की ज़रूरत हो, इंटरव्यू की तैयारी कर रहे छात्र हों या विदेश में पढ़ाई कर रहे हों, या बोलने में आत्मविश्वास की तलाश कर रही गृहणियाँ हों, EnglishYaari उन सभी की ज़रूरतों को पूरा करता है। इसे संचालित करने वाले लोगों का कहना है कि &#8216;हमारे शिक्षक हमारी सबसे बड़ी संपत्ति हैं। हमारे सभी शिक्षक IELTS, TOEFL, CELTA, DELTA, TLP, PTE और कई अन्य योग्यताओं में अनुभवी और प्रमाणित हैं। सुधार के लिए सही मार्गदर्शन और वातावरण महत्वपूर्ण हैं, और EnglishYaari दोनों प्रदान करने में उत्कृष्ट है। हमारे शिक्षक न केवल शिक्षार्थियों की ज़रूरतों को समझते हैं बल्कि उनकी कमज़ोरियों को भी ताकत में बदल देते हैं।&#8217;</p>
<p>वे यह भी मानते हैं कि &#8216;अंग्रेजी बोलना सिर्फ़ भारतीयों के लिए ही समस्या नहीं है; यह दुनिया भर के कई गैर-देशी वक्ताओं के लिए एक चुनौती है। हम गर्व से न केवल भारत से बल्कि दुबई, कतर, यूएई, मध्य पूर्व, ओमान और कई अन्य खाड़ी देशों से भी शिक्षार्थियों की सेवा करते हैं। यह बाजार लगातार बढ़ रहा है, और <strong>EnglishYaari </strong>भी। केवल एक वर्ष में, हमने अपने मासिक राजस्व को 1 लाख से 15 लाख तक बढ़ाया है, यह वास्तव में अप्रयुक्त बाजार के प्रति हमारे दृष्टिकोण का समर्थन करता है जिसे अभी तक हासिल नहीं किया गया है।&#8217;</p>
<figure id="attachment_6796" aria-describedby="caption-attachment-6796" style="width: 2038px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/AmitEnglis7.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/AmitEnglis7.jpg" alt="" width="2038" height="1094" class="size-full wp-image-6796" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/AmitEnglis7.jpg 2038w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/AmitEnglis7-300x161.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/AmitEnglis7-1024x550.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/AmitEnglis7-768x412.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/AmitEnglis7-1536x825.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2038px) 100vw, 2038px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6796" class="wp-caption-text">पटना कॉलेज का ऐतिहासिक कॉरिडोर जो अंग्रेजी विभाग और प्रशासनिक विभाग को जोड़ता है और इस कॉर्डियर पर आज भी लाखों छात्र-छात्राओं के पैरों के निशान हैं जो यहाँ अंग्रेजी पढ़कर इंसान भी बने, अधिकारी भी बने और भारत की भाषा और संस्कृति को मजबूत बनाया। अब EnglishYaari की बारी है</figcaption></figure>
<p>इतना ही नहीं उन्हें विश्वास है कि &#8216;वर्ष 2031 तक, अंग्रेजी भाषा सीखने का बाजार 11.1% की CAGR से बढ़ते हुए $88.1 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है, जो विकास और प्रभाव के अवसर को दर्शाता है। हमारा लक्ष्य 2029 तक 1 मिलियन शिक्षार्थियों और 100 करोड़ राजस्व तक पहुंचना है। “EnglishYaari किसी भाषा को सिखाने के बारे में नहीं है, यह व्यक्तियों को सशक्त बनाने, उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने और नए करियर के अवसर पैदा करने के बारे में है।” संस्थापकों का कहना है कि &#8220;हमारा लक्ष्य सभी स्तरों पर शिक्षार्थियों तक पहुँचना और उन्हें नए करियर के अवसरों का लाभ उठाते हुए एक सहायक वातावरण में अपने अंग्रेजी कौशल को बेहतर बनाने में मदद करना है। इसलिए &#8216;अपना ट्यूटर चुनें&#8217;, &#8216;अपने शेड्यूल के अनुसार अपना सत्र बुक करें&#8217;, &#8216;किसी भी समय अपना सत्र लें&#8217; और अंततः &#8216;बाकी सब ट्यूटर संभाल लेंगे।</p>
<p><strong>क्रमशः &#8230;&#8230; </strong></p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/business/englishyaari-has-taken-the-flag-as-a-startup-to-teach-english-in-nitish-kumars-bihar">अमित शाह कहते हैं कि &#8216;अंग्रेजी बोलने वालों को शर्म आएगी&#8217; और नीतीश कुमार के बिहार में अंग्रेजी सिखाने के लिए EnglishYaari स्टार्टअप के रूप में झंडा उठा लिया है (बिहार स्टार्टअप-4)</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>कल पटना के जिलाधिकारी-दंपत्ति अठन्नी भाड़ा देकर रिक्शा से कॉफी&#8217; पीने आते थे​, आज &#8216;कॉफी और भोज्य पदार्थ ​आपके दरवाजे पर चलकर&#8217; आता है ​(बिहार स्टार्टअप-3)</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 19 Jun 2025 05:55:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यापार]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>पटना / नई दिल्ली : उन दिनों पटना के अनुग्रह नारायण सिन्हा इंस्टीट्यूट के सामने सफ़ेद रंग और लाल पट्टी वाले जिलाधिकारी के आवास के बाहर प्रवेश द्वार के दाहिने हाथ &#8216;विजय शंकर दुबे, जिलाधिकारी, पटना&#8217; लिखा देखकर शहर के लोगों के मन में एक तरफ जहां व्यवस्था और प्रशासन पर विश्वास मजबूत बनता था, वहीं [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/business/yesterday-patna-dm-used-to-come-to-drink-coffee-in-a-rickshaw-today-coffee-and-food-items-come-to-your-doorstep">कल पटना के जिलाधिकारी-दंपत्ति अठन्नी भाड़ा देकर रिक्शा से कॉफी&#8217; पीने आते थे​, आज &#8216;कॉफी और भोज्य पदार्थ ​आपके दरवाजे पर चलकर&#8217; आता है ​(बिहार स्टार्टअप-3)</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>पटना / नई दिल्ली : उन दिनों पटना के अनुग्रह नारायण सिन्हा इंस्टीट्यूट के सामने सफ़ेद रंग और लाल पट्टी वाले जिलाधिकारी के आवास के बाहर प्रवेश द्वार के दाहिने हाथ &#8216;विजय शंकर दुबे, जिलाधिकारी, पटना&#8217; लिखा देखकर शहर के लोगों के मन में एक तरफ जहां व्यवस्था और प्रशासन पर विश्वास मजबूत बनता था, वहीं पटना के युवापीढ़ी, जो राजनितिक गतिविधियों से दूर रहते थे, स्वयं को उन्ही के तरह &#8216;कर्मठ अधिकारी&#8217; बनने की कल्पना करते थे। बात जनवरी 1974 की है और मैं उन दिनों पटना की सड़कों पर पटना से प्रकाशित &#8216;आर्यावर्त&#8217;, &#8216;इंडियन नेशन&#8217;, &#8216;सर्चलाइट&#8217; और &#8216;प्रदीप&#8217; अख़बारों को बेचकर पढ़ने और आगे बढ़ने की तम्मना लिए नित्य उस नाम पट्टिका को देखते आया-जाया करता था। </strong></p>
<p>पटना विश्वविद्यालय की ओर से आने वाली सड़क अशोकराज पथ गांघी मैदान के दाहिने छोड़ को स्पर्श करती, बस अड्डे को लांघती, निर्माणाधीन श्रीकृष्ण मेमोरियल को फांदती, रेड क्रॉस सोसाइटी भवन, पुलिस अधीक्षक का आवास के रास्ते जिलाधिकारी के आवास होते आगे गोलघर की ओर निकल जाती थी। श्रीकृष्ण मेमोरियल अपने निर्माण के अंतिम चरण में था जो 1976 में पूरा हुआ था। </p>
<p>दुबे जी के जिलाधिकारी बनने के 14 महीने बाद, जिन अख़बारों को मैं अपने कंधे और अपनी साईकिल पर लेकर पटना की सडकों को नापा करता था, उन्हीं अख़बारों में से &#8216;आर्यावर्त-इंडियन नेशन&#8217; पत्र समूह में पत्रकारिता की सबसे निचली सीढ़ी पर 18 मार्च 1975 को महज माध्यमिक परीक्षा उत्तीर्ण का प्रमाण पत्र लिए नौकरी की शुरुआत किया था। दुबे जी के कार्यकाल में &#8216;एक टेनिया&#8217; के रूप में अपने वरिष्ठ पत्रकारों के साथ अनेकों बार पटना के जिलाधिकारी से मिला था, विशेषकर आपातकाल के दौरान। फुल-पैंट, चप्पल और हाफ बुशर्ट के शौक़ीन, मृदुभाषी दुबेजी उन दिनों पटना शहर, खासकर पटना विश्वविद्यालय के मेधावी छात्र-छात्राओं के लिए &#8216;एक मिशाल&#8217; थे। उनकी छवि में वे सभी स्वयं को देखते थे। आज भी कई ऐसे छात्र-छात्राएं होंगे जो उस सोच को फलीभूत कर भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी बने होंगे। </p>
<p><strong>आज कोई पांच दशक बाद विजय शंकर दुबे, जिनके नाम से शहर में खौफ था, के मोबाईल पर घंटी टनटनाया। दुबे जी की सबसे बड़ी विशेषता जो उन दिनों भी थी और आज भी दिखी, वे फोन स्वयं उठाते हैं। उन दिनों लैंडलाइन का जमाना था, इसलिए दूसरी छोड़ से &#8216;हैल्लो&#8217; की आवाज उन्हीं की आती थी; आज पचास साल बाद भी, मोबाइल पर दूसरी छोड़ से &#8216;हैल्लो&#8217; की आवाज उन्हीं की आयी। आज की युवा पीढ़ी शायद उस नाम से बहुत परिचित नहीं होंगे पटना में, लेकिन आज भी जो उन्हें जानते हैं उनका नाम बाहर अदब से, शिष्टाचार से लेते हैं (अपवाद छोड़कर)। जिस कालखंड में वे पटना के जिलाधिकारी बने थे, पटना के गाँधी मैदान में कांग्रेस हटाओ के खिलाफ तलवे कद से लेकर घुटने और आदम कद के नेता अपनी-अपनी नेतागिरी को गोल बंद कर रहे थे। नब्बे के दशक के पूर्वार्ध से आज तक बिहार में जितने भी मुख्यमंत्री, मंत्री बने; सभी उसी कालखंड के पैदावार थे, हैं भी। </strong></p>
<p>दुबे जी के फोन पर घंटी बजने का एक उद्देश्य था और वह था पटना के ऐतिहासिक डाक बंगला चौराहे के बाएं नुक्कड़ पर लखनऊ स्वीट हॉउस के बाएं हाथ भारत काफी हॉउस के बारे में उनका अनुभव जानना। दुबे जी पटना के जिलाधिकारी के रूप में उस समय आये जब एक ओर शहर में कालाबाज़ारी अपने चेहरे को निर्लज्जता के साथ काले रंग में रंग लिया था, वहीँ दूसरी और पूरा कालखंड खाद्यान्न की किलत के दौर से गुजर रहा था। पटना से प्रकाशित अख़बारों का शायद ही कोई पन्ना ऐसा होता था जहाँ इन मामलों को लेकर खबरें चीत्कार मारते फैली नहीं होती थी। एक ओर जहाँ समाज में काला बाजारों का &#8216;संरक्षित&#8217; और &#8216;सुरक्षित&#8217; माफियागिरी सर उठाकर बोल रहा था, वहीँ तत्कालीन पटना के लोग हताश मन से प्रशासन के आला अधिकारियों के कार्यालयों में टटकी निगाहों से देख रहे थे। चोर-चोर मौसेरे भाई का नारा बुलंद हो रहा था। </p>
<figure id="attachment_6781" aria-describedby="caption-attachment-6781" style="width: 1356px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Coffe-1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Coffe-1.jpg" alt="" width="1356" height="1666" class="size-full wp-image-6781" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Coffe-1.jpg 1356w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Coffe-1-244x300.jpg 244w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Coffe-1-833x1024.jpg 833w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Coffe-1-768x944.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Coffe-1-1250x1536.jpg 1250w" sizes="auto, (max-width: 1356px) 100vw, 1356px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6781" class="wp-caption-text">​विजय शंकर दुबे, वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी (अवकाश प्राप्त) तस्वीर: विकिपीडिया के सौजन्य से</figcaption></figure>
<p>उसी कालखंड में विजय शंकर दुबे का आगमन पटना के जिलाधिकारी के रूप में होता है। वे साल 1974 के जनवरी के महीने में कार्यालय में आये और लगातार साढ़े तीन साल तक, यानी जुलाई 1977 तक विराजमान रहे। वही दौर देश में देश में जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में सम्पूर्ण क्रांति का दौर था, आपातकाल लगने जून 25, 1975 और समाप्त होने मार्च 21, 1977 का दौर था।  शहर ही नहीं, पूरे प्रदेश में सत्ता के लिए लालायित नेता चतुर्दिक उभर रहे थे। आज भी सत्ता के सिंहासन पर जो बैठे हैं, उस दिन दिनकर की कविता &#8216;सिंहासन खली करो कि जनता आ रही है का नारा बुलंद कर रहे थे।  लम्बी बातचीत हुई और उस ज़माने के सभी पत्रकारों को नाम से याद भी किये। खैर। </p>
<blockquote><p>बातचीत के क्रम में जब उनसे कहा कि कल के भारत कॉफी हॉउस की संस्कृति को बीच में रखकर आज की संस्कृति यानी पटना शहर में कॉफी और अन्य भोज्य पदार्थों को आधुनिक तरीके से परोसने से सम्बंधित स्टार्टअप के बारे में बताया और उनका विचार जानना चाहा तो दुबे जी कहते हैं: &#8220;वाह !! यह नयी पीढ़ी की नयी सोच है, बेहतर तो होगा ही।&#8221; दुबे जी कहते हैं: &#8220;वैसे उन दिनों भी मैं भारत काफी हॉउस भ्रमण-सम्मेलन करने वाले नित्य के लोगों में नहीं था, विवाह हुए बहुत अधिक समय भी नहीं हुआ था, इसलिए महीने-दो महीने में आवास से निकलता था, पचास पैसे में रिक्शावाला घर से डाक बंगला चौराहे पर स्थित भारत कॉफी हॉउस पहुँच देता था। वहां चालीस-पचास पैसे में डोसा मिलता था, 15-20 पैसे में काफी, खा-पीकर हँसते-मुस्कुराते रिक्शा से वापस होते थे।&#8221;</p></blockquote>
<p>दुबे जी उन दिनों भी सरकारी वाहनों का निजी अथवा पारिवारिक उपयोग के लिए इस्तेमाल नहीं करते थे। इस बात का जिक्र तत्कालीन अख़बारों में प्रकाशित होते थे। आज की तो बात ही नहीं है। वे कभी सूचित भी नहीं होने देते थे कि वे डोसा खाने या काफी पीने आ रहे हैं सपरिवार। फुलपैंट, चप्पल और हाफ बुशर्ट पहने वाले दुबे जी कहते हैं कि &#8220;पटना ही नहीं, भारत में जहाँ-जहाँ काफी हॉउस था, या आज भी है, वह सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक, कला, संस्कृति आदि से सरोकार रखने वालों का एक जबरदस्त जमावबाड़ा था। शहर के पत्रकार, संभ्रांत, शिक्षक, अध्यापक सभी संध्याकाळ में एकत्रित होते थे। विभिन्न विषयों पर चर्चाएं करते थे तो तत्कालीन समाज के लिए उपयोगी होता था।  गजब का समय था, गजब के लोग थे। आज तो शहर में है ही नहीं। तत्कालीन स्थितियों के बारे में दुबे जी पर विस्तृत कहानी अगले अंक में, बहरहाल, कॉफी की कहानी को लेकर आगे बढ़ते हैं। </p>
<p><strong>बहरहाल, &#8216;चाय पे चर्चा&#8217;, &#8216;कॉफी पे चर्चा&#8217;, कॉफी विथ एक्स&#8217;, कॉफी विथ वाई&#8217; शब्दों की दुकानदार आज भले राजनीतिक, सामाजिक, फ़िल्मी दुनिया के बाज़ारों में हो रही हो; लेकिन भारत में &#8216;कॉफी हॉउस&#8217; सबसे बड़ा &#8216;अड्डा&#8217; तत्कालीन समाज के संभ्रांतों से लेकर कलाकारों, क्रांतिकारियों, लेखकों, साहित्यकारों, समाज के सुधारकों के लिए रहा है। बिहार के लोगों को, खासकर पटना के लोगों को शायद यह ज्ञात नहीं होगा कि बेली रोड-न्यू डालबंगला रोड-मोइनुलहक पथ के मिलन स्थान पर कभी ऐतिहासिक डाक बंगला हुआ करता था और उसके सामने भारत कॉफी हॉउस जो साठ के दशक से लेकर अपने जीवन की अंतिम सांस तक प्रदेश की इतिहास को पन्नों-दर-पन्नों समेटकर अलविदा कह दिया। लोग कहते हैं प्रदेश में, शहर में &#8216;विकास का मार्ग प्रशस्त&#8217; हो रहा है, लेकिन डाक बंगला चौराहे (आज का रविंद्र चौक) का एक-एक जीव और निर्जीव उन दस्तानों को अपने ह्रदय में समेटे है, आज भी। </strong></p>
<figure id="attachment_6782" aria-describedby="caption-attachment-6782" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Cofee-3.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Cofee-3.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-6782" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Cofee-3.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Cofee-3-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Cofee-3-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Cofee-3-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Cofee-3-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6782" class="wp-caption-text">​तस्वीर: इंटरनेट के सौजन्य से</figcaption></figure>
<p>आइये, पटना के डाकबंगला चौराहे पर आते हैं भारत कॉफी हाउस। यह स्थान अपने स्थापना काल से लेकर अंतिम सांस तक कॉफी &#8211; डोसा -उत्थप्पम के बहाने समसामयिक विषयों पर कुछ गंभीर चर्चा करने का एक बेहतरीन स्थान था। ये लेखकों, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, राजनेताओं, कॉलेज और विश्वविद्यालय के शिक्षकों और थिएटर कलाकारों सहित बुद्धिजीवियों, साहित्यकारों और राजनेताओं के लिए जीवन का एक अंग बन गया था। रामधारी सिंह दिनकर, उपन्यासकार फणीश्वरनाथ रेणु, रामवृक्ष बेनीपुरी, नागार्जुन, नलिन विचलन शर्मा, राजकमल चौधरी, जानकी वल्लभ शास्त्री, बिस्मिल अजीमाबादी, मजहर इमाम, सुरेंद्र झा सुमन, परमानन्द झा शास्त्री के अलावे शहर के प्रख्यात पत्रकारों, शिक्षकों, श्रमिक नेताओं आदि का एक चुनिंदा स्थान था। इस बात से इंकार नहीं कर सकते हैं कि सन 1974 की सम्पूर्ण क्रांति की बुनियाद अगर जयप्रकाश नारायण के घर पर हुई, तो उसके क्रियान्वयन की व्यूहरचना भारत कॉफी हाउस में हुआ था। </p>
<p>समय बदला। लोग बदले। सोच बदले । व्यवसाय बदला। तभी तो कल तक पटना के लोग दूर-दूर से काफी, डोसा और अन्य भोज्य पदार्थों का लुफ्त उठाने, यहाँ तक कि पटना के जिलाधिकारी भी, रिक्शे पर बैठकर सपरिवार भारत कॉफी हाउस आते थे; आज उसी शहर में नयी सोच के अधीन &#8216;काफी और अन्य स्वादिष्ट भोज्य पदार्थ स्वयं चलकर दूर-दरसत लोगों के दरवाजे पर पहुँच रहा है। इसे ही कहते हैं स्टार्टअप और इस स्टार्टअप में पटना शहर का &#8216;CAFE HIDEOUT एक अनोखी रेस्ट्रो-कैफ़े भोजन और पेय पदार्थों की असाधारण गुणवत्ता के साथ पुरे शहर में फ़ैल रहा है। CAFE HIDEOUT का माहौल अलग ही आत्मीयता, सम्मान और उत्साह से भरपूर है। यह मेहमानों को अपने लिए समय बिताने का बेहतरीन अनुभव प्रदान करने पर केंद्रित है।</p>
<p>अंजेश शांडिल्य ने <strong>CAFE HIDEOUT</strong> को एक रेट्रो-कैफ़े श्रृंखला के रूप में शुरू किया, जो बेहतरीन कॉफी के साथ बेहतरीन भोजन प्रदान करती है। उन्हें भारतीय एफएंडबी बाजार की संभावनाओं पर पूरा भरोसा है और उन्हें लगता है कि दुनिया की शीर्ष पांच कॉफी चेन में एक प्रमुख घरेलू कॉफी ब्रांड होना चाहिए। यहाँ मेनू इस तरह से डिजाइन किया गया है कि मेहमान अक्सर खुद को ट्रीट कर सकें। बेहतरीन पेय पदार्थों और बेहतरीन कॉफी के साथ विभिन्न श्रेणियों में विभिन्न प्रकार के भोजन का चयन कुछ ऐसा है जो हमें अद्वितीय और अलग बनाता है। इस कैफे में, स्टार्टअप के रूप में, अपने अवयवों को ताज़े खेतों या सर्वश्रेष्ठ ब्रांडों से प्राप्त करते हैं जो उपभोक्ताओं के खाने वाली मेज तक आते-आते हर चीज़ का पहले विशेषज्ञों द्वारा अच्छी तरह से परीक्षण किया जाता है।</p>
<figure id="attachment_6783" aria-describedby="caption-attachment-6783" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Cofee-2.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Cofee-2.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-6783" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Cofee-2.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Cofee-2-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Cofee-2-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Cofee-2-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Cofee-2-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6783" class="wp-caption-text">​तस्वीर:  CAFE HIDEOUT के वेबसाइट से</figcaption></figure>
<p>शांडिल्य <strong> CAFE HIDEOUT</strong> को तेजी से बढ़ते ब्रांड के रूप में विकसित कर रहे हैं। कॉफी के साथ उनके प्रयोग ने जुनून और निरंतर प्रयासों से प्रेरित एक अद्भुत उद्यम बनाया है। अंजेश शांडिल्य पेशे से आईटी स्नातक हैं और जुनून से भोजन और यात्रा के शौकीन हैं। उनका मानना है कि इसके संचालन के लगभग सभी क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी के अधिकतम उपयोग के साथ हमारा लक्ष्य आने वाले समय में नई ऊंचाइयों को छूना है। भोजन कला और जुनून का विषय है। उनका दृढ़ विश्वास है कि बड़े पैमाने पर पहुंचने के लिए उनकी टीम को बारीक से बारीक काम करना होगा। उनका कहना है कि &#8216;अगर आपको खाने के जादू पर विश्वास है और बढ़िया कॉफी के साथ बढ़िया खाने के हमारे प्रयोग पर भरोसा है, तो इस शानदारता को इस देश के हर इलाके में ले जाने की हमारी यात्रा में हमारे साथ जुड़ें।&#8217; वे यह भी मानते हैं कि &#8216;पैसे से ज़्यादा, उन्हें जुनून, प्रयासों में निरंतरता और रवैये में बारीकियों पर ध्यान देने की ज़रूरत है।&#8217;</p>
<p>कहते हैं, बिहार अब वह बिहार नहीं रहा। यहाँ नौकरी-पेशा के लिए शहर से दूर कभी जाने वाले युवा पीढ़ी वापस अपने शहर में, गाँव में आ रहे हैं, नई सोच के साथ, नए व्यवसाय को अनुवादित करने। आज हालात यह है कि अब बहुत ही कम पैसे में अपना कारोबार शुरू किया जा सकता है। आज यहाँ के युवा पीढ़ी उन क्षेत्रों में भी हाथ आजमा रहे हैं जिनमें वह पहले कभी व्यापार करने के बारे में सोचता भी नहीं थे। यहां के युवा न सिर्फ नई नई टेक्नोलॉजी विकसित कर रहे हैं बल्कि नए नए उद्योगों में भी अपना हाथ आजमा रहे हैं। इन सभी बातों को मद्देनजर रखते हुए अब तो सरकार भी यहां पर व्यापार/व्यवसाय के लिए तरह-तरह के लोन भी प्रदान करती है। और इसी क्रम में कॉफी का व्यवसाय भी अब बिहार में फल-फूल रहा है। </p>
<p><strong>कॉफी के बहाने चलिए बिहार के  किशनगंज जिले में जहाँ सैकड़ों एकड़ में चाय की खेती होती है। सबसे पहले वहां के व्यवसायी राजकरण दफ्तरी ने चाय की खेती शुरू की थी। अब बाकी किसान भी चाय की खेती करते हैं। इसी तर्ज पर अब कटिहार में एक किसान ने कॉफी की खेती शुरू की है। कटिहार जिले के कोढ़ा प्रखंड के किसान ने खेती की अच्छी खासी फसल उगाई है। प्रशांत चौधरी नाम है किसान का। उन्होंने प्रयोग के तौर पर कॉफी की खेती को आगे बढ़ाने का विचार किया। परिणाम काफी बेहतर निकला। प्रखंड के अन्य किसान चर्चा सुनकर अब कॉफी की खेती देखने पहुंच रहे हैं। </strong></p>
<figure id="attachment_6784" aria-describedby="caption-attachment-6784" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Cofee-3-1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Cofee-3-1.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-6784" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Cofee-3-1.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Cofee-3-1-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Cofee-3-1-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Cofee-3-1-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Cofee-3-1-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6784" class="wp-caption-text">​तस्वीर:  ​इंटरनेट के सौजन्य से</figcaption></figure>
<p>ज्ञातव्य हो कि भारत सरकार ने पारंपरिक क्षेत्रों में कॉफी उगाने के लिए किसानों को प्रति हेक्टेयर 2,500-3,500 अमेरिकी डॉलर की सब्सिडी देने की पहल की है। योजनाओं के तहत जल संवर्धन, उपकरण, विपणन और संवर्धन के लिए अतिरिक्त सहायता भी प्रदान की जाती है। सरकार कॉफी विकास कार्यक्रम (सीडीपी) के तहत गैर-पारंपरिक कॉफी उगाने वाले क्षेत्रों का भी समर्थन करती है। इसके अतिरिक्त, आदिवासी विकास की राष्ट्रीय नीति के तहत, आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, महाराष्ट्र, पूर्वोत्तर राज्यों और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह जैसे गैर-पारंपरिक क्षेत्रों में कॉफी की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। </p>
<p>भारत दुनिया भर के 50 से ज्यादा देशों को कॉफी निर्यात करता है। इटली, जर्मनी, रूसी संघ और बेल्जियम भारत से कॉफी के सबसे बड़े आयातक हैं, जिनकी औसत कुल हिस्सेदारी लगभग 45% है। अन्य कॉफ़ी आयातक देश लीबिया, पोलैंड, जॉर्डन, मलेशिया, अमेरिका, स्लोवेनिया और ऑस्ट्रेलिया हैं। भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार इटली, बीन कॉफी निर्यात का 20% हिस्सा है। यूरोप, जहाँ लोग रोबस्टा मिश्रण के तुलनात्मक रूप से अधिक कड़वे और मजबूत स्वाद पसंद करते हैं, भारत के निर्यात का 70% हिस्सा बनाता है। अरेबिका कॉफ़ी मिश्रण की मध्य पूर्व क्षेत्र से उच्च मांग है, जिसका पता अरब क्षेत्र से लगाया जा सकता है। साथ ही, मणिपुर राज्य में उत्पादित सभी कॉफी को खरीदने के जापान सरकार के आश्वासन से चंदेल, लिटन और नोंगमाईचिंग हिल्स जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर कॉफी उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, जिन्हें कभी कॉफी उत्पादन के लिए अनुपयुक्त माना जाता था।</p>
<p><strong>वित्त वर्ष 2024 के दौरान भारत दुनिया का सातवाँ सबसे बड़ा कॉफी उत्पादक बन गया। भारतीय कॉफी अपनी उच्च गुणवत्ता के कारण दुनिया की सर्वश्रेष्ठ कॉफी में से एक है और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में प्रीमियम मानी जाती है। भारत दो प्रकार की कॉफी का उत्पादन करता है: अरेबिका और रोबस्टा। अपने हल्के सुगंधित स्वाद के कारण अरेबिका का बाजार मूल्य रोबस्टा कॉफ़ी से अधिक है। रोबस्टा कॉफी का उपयोग इसके तीखे स्वाद के कारण विभिन्न मिश्रण बनाने में किया जाता है। रोबस्टा एक प्रमुख रूप से निर्मित कॉफ़ी है, जिसकी भारतीय कॉफी के कुल उत्पादन में 72% हिस्सेदारी है। यह उद्योग भारत में दो मिलियन से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार प्रदान करता है। </strong></p>
<figure id="attachment_6785" aria-describedby="caption-attachment-6785" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Cofee-4.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Cofee-4.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-6785" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Cofee-4.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Cofee-4-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Cofee-4-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Cofee-4-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Cofee-4-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6785" class="wp-caption-text">​तस्वीर:  ​इंटरनेट के सौजन्य से</figcaption></figure>
<p>सूत्रों के मुताबिक, भारतीय कॉफी बाजार के 2028 तक 8.9% चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ने की उम्मीद है। इसके अतिरिक्त, भारत के आउट-ऑफ-होम कॉफी बाजार के 2028 तक 15-20% चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर से बढ़कर 2.6 &#8211; 3.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने की उम्मीद है। भारतीय कॉफ़ी बोर्ड ने वित्त वर्ष 2025 में कॉफ़ी उत्पादन में मामूली वृद्धि का अनुमान लगाया है, जो वित्त वर्ष 2024 में 3.605 लाख टन की तुलना में 3.633 लाख टन है। बोर्ड का लक्ष्य 2047 तक उत्पादन को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाकर 9 लाख टन करना भी है। बोर्ड ने मौजूदा सीज़न में 1 लाख टन से बढ़कर 1.13 लाख टन अरेबिका का उत्पादन होने का अनुमान लगाया है, जबकि रोबस्टा का उत्पादन 2.52 लाख टन से बढ़कर 2.61 लाख टन होने का अनुमान है।</p>
<p>वैसे, कॉफी का उत्पादन भारत के दक्षिणी भाग में होता है। कर्नाटक सबसे बड़ा उत्पादक है, जो भारत में कुल कॉफी उत्पादन का लगभग 71% हिस्सा पैदा करता है। केरल कॉफ़ी का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है, लेकिन कुल उत्पादन का केवल 20% ही पैदा करता है। तमिलनाडु भारत के कुल कॉफी उत्पादन का 5% हिस्सा लेकर तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। तमिलनाडु की आधी कॉफ़ी नीलगिरि जिले में बनती है, जो एक प्रमुख अरेबिका उत्पादक क्षेत्र है। उड़ीसा और उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में उत्पादन का अनुपात कम है। कहते हैं कि 30 अगस्त 2024 तक, भारतीय कॉफी का निर्यात 1.19 बिलियन अमेरिकी डॉलर (जनवरी-अगस्त) था, जो 2023 में इसी अवधि की तुलना में 45% की वार्षिक वृद्धि के साथ था।</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/business/yesterday-patna-dm-used-to-come-to-drink-coffee-in-a-rickshaw-today-coffee-and-food-items-come-to-your-doorstep">कल पटना के जिलाधिकारी-दंपत्ति अठन्नी भाड़ा देकर रिक्शा से कॉफी&#8217; पीने आते थे​, आज &#8216;कॉफी और भोज्य पदार्थ ​आपके दरवाजे पर चलकर&#8217; आता है ​(बिहार स्टार्टअप-3)</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<item>
		<title>जब प्रधानमंत्री ने कहा कि &#8216;स्टार्टअप के क्षेत्र में भारत आगे कदम बढ़ा रहा है&#8217;, भागलपुर का &#8216;StepUpify Labs&#8217; याद आ गया (बिहार स्टार्टअप-2)</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/business/when-pm-said-india-is-moving-forward-in-the-field-of-startups-stepupify-labs-of-bhagalpur-came-to-mind</link>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 17 Jun 2025 05:41:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यापार]]></category>
		<category><![CDATA[bhagalpur]]></category>
		<category><![CDATA[bihar]]></category>
		<category><![CDATA[business]]></category>
		<category><![CDATA[development]]></category>
		<category><![CDATA[employment]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>भागलपुर / नई दिल्ली : विगत दिनों जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश में स्टार्टअप की संस्कृति बहुत तेजी से बढ़ रही है, यह देश के शहरी इलाकों में सीमित नहीं रहकर अब ग्रामीण क्षत्रों में भी अपना सकारात्मक प्रदर्शन कर रहा है, हम कदम आगे बढ़ा रहे हैं; अचानक भागलपुर का &#8216;रोबोटिक्स [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/business/when-pm-said-india-is-moving-forward-in-the-field-of-startups-stepupify-labs-of-bhagalpur-came-to-mind">जब प्रधानमंत्री ने कहा कि &#8216;स्टार्टअप के क्षेत्र में भारत आगे कदम बढ़ा रहा है&#8217;, भागलपुर का &#8216;StepUpify Labs&#8217; याद आ गया (बिहार स्टार्टअप-2)</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>भागलपुर / नई दिल्ली : विगत दिनों जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश में स्टार्टअप की संस्कृति बहुत तेजी से बढ़ रही है, यह देश के शहरी इलाकों में सीमित नहीं रहकर अब ग्रामीण क्षत्रों में भी अपना सकारात्मक प्रदर्शन कर रहा है, हम कदम आगे बढ़ा रहे हैं; अचानक भागलपुर का &#8216;रोबोटिक्स और एआई आधारित एग्रीटेक स्टार्टअप  StepUpify Labs मानस पटल पर छा गया। मोदी के अनुसार, भारत के लोग, भारत के युवा, भारत के नए उद्यमी &#8216;स्टार्टअप&#8217; को देश के विकास में रीढ़ की हड्डी बना रहे हैं।  वे इस बात को स्वीकार करते हैं कि &#8216;स्टार्टअप इंडिया&#8217; की परिवर्तनकारी योजना ने अनगिनत युवाओं को सशक्त बनाया है, उनके अभिनव विचारों को सफल स्टार्टअप में बदला है। वे यह भी दावा करते हैं कि विगत एक दशक से सरकार ने स्टार्टअप संस्कृति को प्रोत्साहित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है और स्टार्टअप इंडिया की यह सफलता दर्शाती है कि आज का भारत गतिशील, विश्वास से भरा और भविष्य के लिए तैयार है। </strong></p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा था कि पिछले नौ वर्षों में स्टार्टअप जैसी परिवर्तनकारी योजना ने अनगिनत युवाओं को सशक्त बनाया है और उनके अभिनव विचारों को सफल स्टार्टअप में बदल दिया है। हम उद्यमशीलता पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता की पुन: पुष्टि करते हैं जो हर स्‍वप्‍न को पंख देकर आत्मनिर्भर भारत में योगदान दे रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा, &#8220;मैं स्टार्टअप जगत के हर युवा को बधाई देता हूं और अधिक से अधिक युवाओं को इसे अपनाने का आग्रह करता हूं। मैं आश्वस्त करता हूं कि आप निराश नहीं होंगे!&#8221; </p>
<p>जहां तक सरकार का सवाल है, प्रधानमंत्री का मानना है कि वे स्टार्टअप संस्कृति को प्रोत्साहित करने में कोई कसर नहीं छोड़े हैं। सर्कार की नीतियों ने कारोबारी सुगमता, संसाधनों की बेहतर पहुंच और सबसे महत्वपूर्ण कि हर अवसर पर स्‍टार्टअप उद्यमियों की सहायता पर ध्यान केंद्रित किया है। सरकार सक्रियता से नवाचार और उद्भवन केंद्रों को बढ़ावा दे रही है ताकि देश के युवा कार्य में जोखिम उठाने वाले बनें। अपने विचारों का व्याख्या करने के क्रम में प्रधानमंत्री ने देश के विभिन्न राज्यों में नयी-नयी सोच, नए-नए विचार, नए-नए उद्यमियों के उभरते स्वरुप को देखते उन्होंने कहा कि देश में ये सभी स्टार्टअप देश की आर्थिक स्थिति को न केवल मजबूत बनाएंगे, बल्कि वह सब कर दिखाएंगे जिसकी कल्पना भारत के लोग आज़ादी के बाद नहीं कर पाए थे। यह नई सोच की उपज है और हमें इस सोच का समर्थन करना चाहिए। </p>
<figure id="attachment_6772" aria-describedby="caption-attachment-6772" style="width: 2560px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Modi-2-scaled.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Modi-2-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1695" class="size-full wp-image-6772" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Modi-2-scaled.jpg 2560w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Modi-2-300x199.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Modi-2-1024x678.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Modi-2-768x509.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Modi-2-1536x1017.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Modi-2-2048x1356.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6772" class="wp-caption-text">विश्वास: लाल किले से</figcaption></figure>
<p><strong>स्टार्टअप इंडिया भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है जिसका उद्देश्य देश में स्टार्टअप्स और नये विचारों के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है जिससे देश का आर्थिक विकास हो एवं बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर उत्पन्न हों। इस पहल ने भारत को वैश्विक स्तर पर सबसे बड़े और सबसे जीवंत स्टार्टअप इकोसिस्टम में से एक बनने के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने कहा कि यह एक ऐतिहासिक पहल है जिसने नवाचार, उद्यमशीलता और विकास को फिर से परिभाषित किया है। उन्होंने इस कार्यक्रम को &#8220;मेरे दिल के बहुत करीब&#8221; बताया, क्योंकि यह युवा सशक्तिकरण को आगे बढ़ाने का एक शक्तिशाली तरीका बनकर उभरा है ।</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि एक दशक पहले तक लोग इस प्रणाली में भारत की सफलता की क्षमता पर संदेह करते थे। इस &#8220;परिवर्तनकारी&#8221; कार्यक्रम ने अनगिनत युवाओं को सशक्त बनाया है, उनके अभिनव विचारों को सफल स्टार्टअप में बदल दिया है। उन्होंने कहा कि तकनीक-संचालित समाधानों से लेकर ग्रामीण नवाचारों, स्वास्थ्य सेवा की प्रगति से लेकर बायोटेक सफलताओं, फिनटेक से एडटेक, स्वच्छ ऊर्जा से लेकर टिकाऊ तकनीक तक, भारतीय स्टार्टअप वैश्विक चुनौतियों का समाधान कर रहे हैं, साथ ही साथ देश की आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रयास को बढ़ावा दे रहे हैं। हर सपने को पूरा करने वाले और &#8216;आत्मनिर्भर भारत&#8217; में योगदान देने वाले उद्यमी पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के लिए अपनी सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने स्टार्टअप की संस्कृति को प्रोत्साहित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि उनकी सरकार की नीतियां &#8220;व्यापार करने में आसानी&#8221;, संसाधनों तक बेहतर पहुंच और सबसे महत्वपूर्ण बात, हर मोड़ पर उनका समर्थन करने पर केंद्रित रही हैं। उन्होंने कहा, &#8220;हम सक्रिय रूप से नवाचार और इनक्यूबेशन केंद्रों को बढ़ावा दे रहे हैं ताकि हमारे युवा जोखिम लेने वाले बनें। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्टार्टअप इंडिया की यह सफलता दर्शाती है कि आज का भारत गतिशील, आत्मविश्वासी और भविष्य के लिए तैयार है। मोदी ने कहा, &#8220;मैं स्टार्टअप जगत के हर युवा की सराहना करता हूं और अधिक से अधिक युवाओं से इसे अपनाने का आग्रह करता हूं। यह मेरा आश्वासन है कि आप निराश नहीं होंगे।&#8221;</p>
<p><strong>&#8216;स्टार्टअप इंडिया&#8217; ने भारत को विश्व स्तर पर सबसे बड़े और सर्वाधिक जीवंत स्टार्टअप इकोसिस्टम में से एक बना दिया है। 15 जनवरी, 2024 तक, उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) द्वारा 1.59 लाख से अधिक स्टार्टअप को मान्यता दी गई है, जिससे दुनिया भर में तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम के रूप में भारत की स्थिति मजबूत हुई है। साथ ही, 2016 से 31 अक्टूबर 2024 के बीच इन मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स ने कथित तौर पर 16.6 लाख से अधिक प्रत्यक्ष नौकरियां पैदा की हैं, जो रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण योगदान है।</strong></p>
<p>स्टार्टअप एक इकाई है, जो भारत में पांच साल से अधिक से पंजीकृत नहीं है और जिसका सालाना कारोबार किसी भी वित्तीय वर्ष में 25 करोड़ रुपये से अधिक नहीं है। यह एक इकाई है जो प्रौद्योगिकी या बौद्धिक सम्पदा से प्रेरित नये उत्पादों या सेवाओं के नवाचार, विकास, प्रविस्तारण या व्यवसायीकरण की दिशा में काम करती है। सरकार द्वारा इस संबंध में घोषित कार्य योजना स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के सभी पहलुओं को संबोधित करने और इस आंदोलन के प्रसार में तेजी लाने की उम्मीद करती है।</p>
<p>भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। उन्हें पूरा भरोसा है कि भारत की आजादी के 100वें वर्ष में देश को विकसित बनाने में यही स्टार्टअप महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। भारत में स्टार्टअप कल्चर तेजी से विकसित हुआ है. स्टार्टअप की यह तरक्की सिर्फ मेट्रो शहरों तक सीमित ही नहीं है। यह अब सोशल कल्चर का हिस्सा भी बन चुके है। युवा अपने इनोवेशन को छोटे शहरों से भी बाहर लेकर आ रहे हैं। डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटर्नल ट्रेड (DPIIT) के आंकड़ों के अनुसार देश में दिसंबर, 2023 तक लगभग 117,254 स्टार्टअप थे, इनमें से 110 यूनिकॉर्न है। इन्होंने लगभग 12 लाख से ज्यादा नौकरियां पैदा की हैं, साथ ही, लगभग 1 लाख पेटेंट दिए गए है। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/sssssss.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/sssssss.jpg" alt="" width="2045" height="1198" class="aligncenter size-full wp-image-6773" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/sssssss.jpg 2045w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/sssssss-300x176.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/sssssss-1024x600.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/sssssss-768x450.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/sssssss-1536x900.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2045px) 100vw, 2045px" /></a></p>
<blockquote><p>इसी क्रम में आइए चलते हैं StepUpify Labs &#8211; भागलपुर, बिहार में स्थित एक रोबोटिक्स और एआई आधारित एग्रीटेक स्टार्टअप है, जिसे आईआईटी-खड़गपुर के पूर्व छात्र अजीत कुमार ने 2021 में शुरू किया था। भारत में कृषि असीमित चुनौतियों से ग्रस्त है। उनमें से कुछ हैं कम श्रम उत्पादकता, श्रम की कमी, आवारा जानवरों के कारण फसल की चोरी और नुकसान, कृषि मशीनीकरण की वहनीयता न होना और मैनुअल खेती के तरीकों में थकान।</p></blockquote>
<p>इन समस्याओं का समाधान करने के लिए, StepUpify ने लागत प्रभावी, भारी शुल्क और शून्य रखरखाव वाली सौर और बैटरी से चलने वाली अनूठी हल्की वजन वाली कृषि मशीनें बनाई हैं, जो रोबोटिक्स और एआई जैसी नई तकनीकों के साथ एकीकृत हैं। इन टिकाऊ कृषि मशीनों के उपयोग से इनपुट लागत में 60-70% की कमी आ रही है और विभिन्न कृषि गतिविधियों जैसे छिड़काव, निराई, ड्रिलिंग, कटाई, कटाई/छँटाई, थ्रेसिंग, खेत की निगरानी आदि के लिए नगण्य थकान हो रही है।</p>
<p>आईआईटी-खड़गपुर 2013 बैच के मैकेनिकल इंजीनियरिंग स्नातक अजीत कुमार ने 2020 में कोविड अवधि के दौरान बिहार में अपने पैतृक स्थान पर इस उद्यम को शुरू करने के लिए मुंबई में अपनी अच्छी नौकरी छोड़ दी। उन्होंने अपनी उद्यमशीलता की यात्रा शुरू करने से पहले छह साल से अधिक समय तक टाटा मोटर्स, महिंद्रा और कुछ अन्य डीप टेक रोबोटिक्स स्टार्टअप्स जैसे बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए अनुसंधान और विकास प्रमुख भूमिकाओं में काम किया है। </p>
<p>वे कहते हैं, &#8220;कोविड काल के दौरान, हम बिहार में अपने पैतृक स्थान पर थे और हम अपने गृह राज्य के लिए कुछ प्रभावशाली करना चाहते थे। बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है और हम एक किसान परिवार से हैं, इसलिए हमारे लिए कृषि-क्षेत्र में उद्यम शुरू करना आसान और स्वाभाविक था। कोविड में लॉकडाउन के कारण, अन्य क्षेत्र बंद थे, लेकिन खेतों के पास गाँव में रहने के कारण हमारे लिए कृषि खुली थी। </p>
<p><strong>कृषि में एक लाभदायक मॉडल की तलाश में कुछ महीनों के क्षेत्र सर्वेक्षण के साथ, हमने अपने किसानों के सामने आने वाली चुनौतियों को समझने और अनुभव करने के लिए आधुनिक तरीकों से उच्च उपज और उच्च मूल्य प्राप्त करने वाली सब्जियों की खेती शुरू की। हमने एक एकड़ खेत में दूसरों की तुलना में पहले करेले की खेती की ताकि हमारे खेत में फल जल्दी लगें और हमारी कृषि उपज का बेहतर मूल्य मिले। </strong></p>
<p>खेती और रोपण प्रक्रिया में, हमें उच्च श्रम लागत और कृषि मशीनरी बाजार में प्रभावी छोटे कृषि उपकरणों की अनुपलब्धता की समस्याओं का सामना करना पड़ा। ये छिड़काव, निराई और गुड़ाई के लिए पारंपरिक खेती के तरीकों में इनपुट लागत और कठिन परिश्रम को बढ़ा रहे थे। हमारी फसल के लिए एलन (बांस की संरचना) निर्माण के लिए ड्रिलिंग। हमारे खेत पर सब्ज़ियों की पैदावार बहुत अच्छी थी और हम खुश थे कि इससे हमें अच्छा मुनाफ़ा होगा। जल्दी उत्पादन के कारण, हमारी सब्ज़ियों की बाज़ार में बहुत माँग थी और उन्हें बहुत अच्छे दाम मिल रहे थे। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Startup-5.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Startup-5.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-6774" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Startup-5.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Startup-5-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Startup-5-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Startup-5-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Startup-5-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p>लेकिन दुर्भाग्य से, खेतों की निगरानी न होने के कारण आस-पास के लोगों द्वारा हमारी सब्ज़ियाँ चोरी होने लगीं। हालाँकि हमने खेत की निगरानी के लिए एक गार्ड नियुक्त किया था, लेकिन एक सुबह हमने पाया कि हमारी लगभग 20% सब्ज़ियाँ चोरी हो गई थीं। आधुनिक तरीकों पर अपना समय और पैसा लगाने के बाद भी हमने अपनी पहली खेती के अनुभव में बहुत बड़ा नुकसान उठाया। इस प्रकार, हमने सीखा और महसूस किया कि खेती एक व्यवसाय के रूप में प्रकृति और मनुष्यों दोनों के कारण खतरों, जोखिमों और अनिश्चितताओं से भरी हुई है।</p>
<p><strong>हमारे पहले खेती के अनुभव के दौरान, आवारा जानवरों के कारण फसल की चोरी और फसल को नुकसान हमारे लिए एक बड़ी अपरिहार्य समस्या थी। शुरू में, हमने 24&#215;7 खेत की निगरानी करने के लिए एक विज़न आधारित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ड्रिवेन फार्म सर्विलांस कम एनिमल स्केयरर डिवाइस विकसित की। इसमें फसल की लगातार निगरानी करने के लिए एक दिन रात कैमरा है, नीलगाय, हाथी, जंगली सूअर आदि जैसे आवारा जानवरों को डराने के लिए एक स्मार्ट स्केयरिंग डिवाइस है, जो जानवरों के चुनिंदा ध्वनि और प्रकाश पैटर्न के साथ है, उपयोगकर्ताओं को वास्तविक समय में फोन कॉल अलर्ट करता है और यह किसानों के मोबाइल हैंडसेट पर घुसपैठ का स्नैपशॉट भेजता है। </strong></p>
<p>हमने अपने द्वारा विकसित इस तकनीक के लिए पेटेंट के लिए आवेदन किया। चूंकि इस डिवाइस में इंटरनेट कनेक्टिविटी के साथ वास्तविक समय एआई करने के लिए पहले से ही एक उन्नत कंप्यूटर है, इसलिए इसकी उपयोगिता बढ़ाने के लिए हम खेत स्तर पर फसल की निगरानी, स्वचालित सिंचाई और मौसम की निगरानी जैसी सुविधाओं को एकीकृत कर रहे हैं।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Startup-6.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Startup-6.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-6776" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Startup-6.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Startup-6-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Startup-6-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Startup-6-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Startup-6-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p>इसके बाद, हमने बैटरी से चलने वाली एक उच्च दाब वाली बहुउद्देशीय स्प्रे मशीन विकसित की, जो 12 वोल्ट की मानक कार बैटरी द्वारा संचालित होती है, जिसकी क्षैतिज स्प्रे रेंज 30-35 फीट और ऊर्ध्वाधर स्प्रे रेंज 25 फीट है और यह पूरे दिन चलती है। हमने मशीन पर इस्तेमाल की गई तकनीक के लिए पेटेंट के लिए आवेदन किया। बिहार में आम लीची बेल्ट में स्थित होने के कारण, यह आम किसानों के बीच बहुत लोकप्रिय हो गई क्योंकि इससे कीटनाशक की लागत 50% कम हो गई और श्रम लागत में भारी कमी आई क्योंकि इस मशीन को चलाने के लिए एक व्यक्ति ही काफी था, इसमें प्रेशर ऑटो कट फीचर था और इसे ट्रॉली पर लगाया जा सकता था।</p>
<p>फसल कटाई के मौसम में मजदूरों की कमी की समस्या को दूर करने के लिए, हमने किसानों को गेहूं, धान, जौ, हरा चारा काटने और खेत में खरपतवार काटने में मदद करने के लिए बैटरी से चलने वाला ब्रश कटर विकसित किया। इस उपकरण पर इस्तेमाल की गई तकनीक के कारण, यह बाजार में उपलब्ध अन्य बैटरी चालित समाधानों की तुलना में कम ऊर्जा की खपत करता है और अपनी दक्षता के लिए अधिक टॉर्क प्रदान करता है। हमने इस मशीन के लिए हमारे द्वारा विकसित तकनीक के पेटेंट के लिए आवेदन किया। खेत पर इसकी उपयोगिता को देखते हुए यह समाधान पूरे भारत में किसानों के बीच काफी लोकप्रिय भी हुआ। फसल सीजन में केवल 10-15 दिनों की अवधि में किसानों को हमारे उपकरणों पर किए गए निवेश का रिटर्न मिल रहा था और उसके बाद वे इसे अन्य किसानों को किराए पर देकर इससे मुनाफा कमा रहे थे।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Startup-4.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Startup-4.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-6775" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Startup-4.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Startup-4-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Startup-4-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Startup-4-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Startup-4-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p><strong>धीरे-धीरे, हमने पोल्ट्री फार्म के लिए छिड़काव, निराई, ड्रिलिंग, कटाई, कटाई, छंटाई, सिंचाई, थ्रेसिंग और रेकिंग जैसी विभिन्न कृषि गतिविधियों को करने के लिए एक सामान्य बैटरी द्वारा संचालित हरित कृषि उपकरणों का सेट विकसित किया, जिससे इन गतिविधियों को मैन्युअल रूप से करने में इनपुट लागत और थकान कम हो गई। एक बार जब कोई किसान हमारी कोई भी बैटरी चालित कृषि मशीन खरीद लेता है, तो अगली बार उसे बैटरी और चार्जर खरीदने की ज़रूरत नहीं होती क्योंकि यह स्टेपअपिफाई द्वारा मशीनों के बीच आम और आसानी से साझा की जाती है। इसलिए, यह उनके लिए बहुत ही लागत प्रभावी हो जाता है, जिससे उगाई गई फसलों से उनकी लाभप्रदता बढ़ जाती है।</strong></p>
<p>आज की स्थिति में, हमारे पास कहलगांव में एक विनिर्माण इकाई है, जिसकी मासिक उत्पादन क्षमता 250-300 उपकरण है। हमारी बैटरी चालित कृषि मशीनें &#8211; ब्रश कटर, बैटरी चालित पावर वीडर और बैटरी चालित पावर स्प्रेयर को भारत सरकार के अधिकृत कृषि मशीनरी परीक्षण केंद्र द्वारा इसकी प्रभावशीलता, स्थायित्व और दक्षता के लिए परीक्षण और प्रमाणित किया गया है।</p>
<p>हमने अपने स्वच्छ ऊर्जा कृषि उपकरणों को भारत के लगभग सभी राज्यों में भेजा है और वहां के किसानों के लाभ के लिए नेपाल, भूटान और मॉरीशस को भी निर्यात किया है। अगले कुछ महीनों में, हम नए भौगोलिक क्षेत्रों के किसानों तक पहुँचने और एक स्थायी दृष्टिकोण के साथ कृषक समुदाय पर सकारात्मक और पर्याप्त प्रभाव डालने के लिए अपनी उत्पादन क्षमता, वितरण और सेवा नेटवर्क का विस्तार करने की योजना बना रहे हैं।”</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/business/when-pm-said-india-is-moving-forward-in-the-field-of-startups-stepupify-labs-of-bhagalpur-came-to-mind">जब प्रधानमंत्री ने कहा कि &#8216;स्टार्टअप के क्षेत्र में भारत आगे कदम बढ़ा रहा है&#8217;, भागलपुर का &#8216;StepUpify Labs&#8217; याद आ गया (बिहार स्टार्टअप-2)</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>बिहार में आने वाले &#8216;स्टार्टअप&#8217; के &#8216;उद्यमियों&#8217; की बातों को लिखने, गाँव-गाँव तक पहुँचाने के लिए &#8216;आर्यावर्तइण्डियननेशन.कॉम&#8217; से बेहतर कौन हो सकता है (स्टार्टअप-1)</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 16 Jun 2025 05:43:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यापार]]></category>
		<category><![CDATA[bihar]]></category>
		<category><![CDATA[changes]]></category>
		<category><![CDATA[economi]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>पटना / नई दिल्ली: बिहार की संस्कृति की शहर मधुबनी के एक सज्जन, जो वर्तमान में न्यूयॉर्क में सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में कार्य करते हैं, कल अचानक मोबाइल पर घंटी बजाये। महाशय लिंक्डइन से लेकर सोशल मीडिया के कई प्लेटफार्म सहित, आर्यावर्तइण्डियननेशन(डॉट)कॉम की गतिविधियों पर पैनी निगाह रखते हैं। न्यूयॉर्क से फोन की घंटी बजना एक [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/business/startups-change-bihar-economy">बिहार में आने वाले &#8216;स्टार्टअप&#8217; के &#8216;उद्यमियों&#8217; की बातों को लिखने, गाँव-गाँव तक पहुँचाने के लिए &#8216;आर्यावर्तइण्डियननेशन.कॉम&#8217; से बेहतर कौन हो सकता है (स्टार्टअप-1)</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>पटना / नई दिल्ली: बिहार की संस्कृति की शहर मधुबनी के एक सज्जन, जो वर्तमान में न्यूयॉर्क में सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में कार्य करते हैं, कल अचानक मोबाइल पर घंटी बजाये। महाशय लिंक्डइन से लेकर सोशल मीडिया के कई प्लेटफार्म सहित, आर्यावर्तइण्डियननेशन(डॉट)कॉम की गतिविधियों पर पैनी निगाह रखते हैं। न्यूयॉर्क से फोन की घंटी बजना एक सुखद आश्चर्य था। बहुत तरह की बातें हुई और अंत में निचोड़ यह था कि आज बिहार में जन्म लिए और देश-विदेश में रहने वाले शिक्षित युवक-युवती अपने प्रदेश के विकास के लिए अनेकानेक क्षेत्रों में स्टार्टअप खोल रहे हैं, ताकि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को पुनः परिभाषित किया जा सके; इंटरनेट मीडिया में पारम्परिक मीडिया से अलग हटकर आर्यावर्तइण्डियननेशन(डॉट)कॉम को स्टार्टअप का स्वरुप क्यों नहीं दिया जा सकता है?</strong></p>
<p>उनका कहना था कि &#8220;आप लिखते बहुत बेबाक है और यही बेबाकीपन कल भी इन अख़बारों की ताकत थी, और आज आप उसकी गुणवत्ता को जीवित रखने का अथक प्रयास कर रहे हैं।&#8221; उन्होंने यह भी कहा कि &#8216;आज अपने प्रदेश में एक तो अपना मीडिया नहीं है, जो हैं सभी आयातित हैं और पैसे कमाने के लिए ही बिहार को बाजार बनाये हैं। खुल कर भले लोग स्वीकार नहीं करें, लेकिन आज भी &#8216;आर्यावर्त&#8217; और &#8216;इण्डियन नेशन&#8217; अख़बार-द्वय बिहार के लोगों के डीएनए में है।&#8217; इण्डियन नेशन (1930) और आर्यावर्त (1940) में स्थापित हुआ बिहार के लोगों की आवाज के रूप में। </p>
<p><strong>उनका कहना था कि &#8220;इस बात से भी कोई इंकार नहीं कर सकता है कि अपने जीवनकाल में यह दोनों समाचार पत्र प्रदेश की राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, औद्योगिक, कृषि कोई भी क्षेत्र ऐसा नहीं था, जहाँ शब्दों से यह नहीं पहुंचा था। आज प्रदेश की सत्ता के गलियारे में जो भी महात्मन बैठे हैं, उन्हें इन अख़बारों ने सड़क से विधानसभा और संसद तक पहुँचाया है। आज प्रदेश में जितने भी युवक, युवतियां स्टार्टअप के क्षेत्र में आ रहे हैं, उनकी सोच को सकारात्मक स्वरूप देने के लिए एक ऐसी इंटरनेट मीडिया की जरूरत है जो उनकी बातों को सुनें, समझें, उनके बारे में लिखें और मोबाइल के सहारे प्रदेश के प्रत्येक लोगों तक पहुंचे। इसका कारण यह है कि प्रदेश में भले देश-विदेश से लोगों का आवागमन हो रहा हो स्टार्टअप के क्षेत्र में, लेकिन उनकी बातों को सुनकर, उनके बारे में सकारात्मक लिखने वालों की किल्लत है।&#8221;</strong></p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-1.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-6761" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-1.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-1-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-1-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-1-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-1-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p>कई विदेशी राष्ट्रों का दृष्टान्त देते कहते हैं कि &#8220;हम इसे टीवी की तरह, या यूट्यूब के सहारे, प्रदेश के एक-एक नए स्टार्टअप करने वाले व्यक्तियों की सोच और उनके कार्यों को 130,725,310 लोगों तक प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से पहुंचा सकते हैं। बिहार ही नहीं, वैश्विक स्तर पर भी आज स्थिति यह है कि लोग अख़बार पढ़ें अथवा नहीं, टीवी देखें अथवा नहीं, व्हाट्सएप पर आये ख़बरों को जरूर खोलते हैं। चलते-फिरते विभिन्न प्रकार के स्टार्टअप समाचार को देखते, पढ़े जरूर है। आज सांख्यिकी चाहे जो भी कह ले, प्रदेश की आबादी का बहुत बड़ा हिस्सा प्रदेश के ग्रामीण और श्री क्षेत्रों में रहता है जो अच्छे ख़बरों के लिए लालायित है।&#8221; उनकी बातों में दम तो था।   <br />
 <br />
वैसे पिछले वर्ष बिहार की निवेश संभावनाओं को प्रदर्शित करने वाले वैश्विक निवेशक शिखर सम्मेलन के दूसरे संस्करण से पहले यह कहा गया था कि बिहार में पिछले पांच वर्षों में डेटा खपत में 15 गुना वृद्धि देखी गई है। बिहार के मुख्य सचिव अमृत लाल मीणा ने कहा था कि 2019 में दूरसंचार क्षेत्र में लगभग छह करोड़ मोबाइल उपयोगकर्ता थे, आज 7.25 करोड़ हैं। 2019 में, हमारे पास प्रति माह औसत डेटा उपयोग 1.67 गीगाबाइट था, लेकिन अब यह 27 गीगाबाइट हो गया है। बिहार में 45,000 से अधिक मोबाइल टावर स्थापित किए हैं। राज्य की सभी पंचायतें अब ऑप्टिकल फाइबर केबल से जुड़ गई हैं। सभी गाँव नेटवर्क से जुड़ गए हैं। बिहार में पिछले पांच वर्षों में डेटा की खपत में 15 गुना उछाल आया है।</p>
<p>इतना ही नहीं, बिहार ने बुनियादी ढांचे के विकास में अभूतपूर्व वृद्धि देखी है, इसकी सड़क घनत्व देश में तीसरा सबसे बड़ा है जो व्यापार और परिवहन को सुविधाजनक बनाता है। इसका बिजली उत्पादन 700 मेगावाट से बढ़कर 7,000 मेगावाट हो गया है। पिछले दो दशकों में बुनियादी ढांचे के निर्माण में भारी निवेश होने के कारण बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। पिछले दशक के दौरान, राष्ट्रीय और राज्य दोनों राजमार्ग नेटवर्क ने बिहार में जबरदस्त वृद्धि देखी है। आज हमारे पास 1.2 लाख किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का नेटवर्क है।&#8221; पिछले साल के बजट में राज्य सरकार ने राज्य में चार एक्सप्रेस हाईवे बनाने की घोषणा की थी। </p>
<p><strong>अभियंता साहब आगे कहते हैं कि इस वेबसाइट की सबसे बड़ी ताकत यह है कि &#8216;इसे अपनी पहचान की किल्लत नहीं है।&#8217; आज भले इन अख़बारों को स्थापित करने वाले दरभंगा के महाराजा डॉ. सर कामेश्वर सिंह के परिवार और परिजनों को इस अख़बारों के प्रति, इसके नामों के प्रति संवेदना नहीं हो (अगर होता तो पारम्परिक अख़बारों का यह हश्र नहीं होता), लेकिन बिहार के लोग, यहाँ तक कि युवापीढ़ी, उद्योग के क्षेत्र से, शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े लोग, नेता सभी ऋणी हैं। यह अख़बार कल भी सच लिखता था, लोगों के घरों में सुख-दुःख में साथ था, आज भी हो सकता है। हम कुछ लोग इस पर विचार कर रहे हैं ताकि इस वेबसाइट को बिहार का नंबर-1 विश्वसनीय प्लेटफॉर्म बनाया जाय और प्रदेश में आने वाले सभी नए स्टार्टअप शुरू करने वाले लोगों के लिए अपना दोस्त बन सके। </strong></p>
<figure id="attachment_6762" aria-describedby="caption-attachment-6762" style="width: 2043px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Nitish-Mishra.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Nitish-Mishra.jpg" alt="" width="2043" height="1270" class="size-full wp-image-6762" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Nitish-Mishra.jpg 2043w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Nitish-Mishra-300x186.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Nitish-Mishra-1024x637.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Nitish-Mishra-768x477.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Nitish-Mishra-1536x955.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Nitish-Mishra-356x220.jpg 356w" sizes="auto, (max-width: 2043px) 100vw, 2043px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6762" class="wp-caption-text">उद्योग मंत्री नीतीश मिश्रा</figcaption></figure>
<p><strong>बहरहाल, उद्योग मंत्री नीतीश मिश्रा के अनुसार, सरकार युवाओं के नवाचार को समर्थन देने के लिए हर संभव कदम उठा रही है। स्टार्टअप प्रस्तावों का गहन विश्लेषण कर उन्हें आर्थिक और तकनीकी सहायता दी जाती है। इससे राज्य में आत्मनिर्भरता और आर्थिक समृद्धि की नई इबारत लिखी जा रही है। बिहार सरकार की स्टार्टअप योजना सभी वर्ग और समुदाय के लोगों को स्वरोजगार प्रदान कर इन्हें स्वावलंबी बनाने में बेहद सहायक साबित हो रही है। इसके प्रति तेजी से आकर्षण बढ़ता जा रहा है। </strong></p>
<p>उद्योग विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं कि <strong>कल्पना और उमा झा</strong> ने एक जीवंत व्यवसाय शुरू किया है जो अपने घर के बने अचार के माध्यम से मिथिला के प्रामाणिक स्वादों को दुनिया तक पहुंचाता है। तीस से अधिक वर्षों से, वे अपने स्वादिष्ट उत्पादों को नई दिल्ली से न्यूयॉर्क तक भेजकर मित्रों और परिवार को प्रसन्न करते रहे हैं। <strong>&#8220;जस नौकरी&#8221;</strong> एक गतिशील भर्ती मंच है जो भारत और विदेशों में कॉर्पोरेट्स, प्लेसमेंट एजेंसियों और नौकरी चाहने वालों को जोड़ता है। यह सभी हितधारकों के लिए भर्ती प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए एक व्यापक रिज्यूमे डेटाबेस, जॉब लिस्टिंग और उन्नत प्रतिक्रिया प्रबंधन टूल तक पहुंच सहित कई प्रकार की सेवाएं प्रदान करता है। </p>
<p><strong>&#8220;लिटिगेटर&#8221;</strong> कानूनी पेशेवरों के लिए नेटवर्क बनाने और उद्योग समाचारों पर अपडेट रहने के लिए अंतिम मंच के रूप में कार्य करता है। यह सुरक्षित स्थान अधिवक्ताओं को जुड़ने, सहयोग करने और मामलों पर चर्चा करने में सक्षम बनाता है, जिससे उनकी कानूनी विशेषज्ञों को आगे बढ़ाने और पेशेवर संबंधों को बढ़ाने के लिए समर्पित एक सहायक समुदाय को बढ़ावा मिलता है।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-4.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-4.jpg" alt="" width="2043" height="1270" class="aligncenter size-full wp-image-6763" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-4.jpg 2043w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-4-300x186.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-4-1024x637.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-4-768x477.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-4-1536x955.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-4-356x220.jpg 356w" sizes="auto, (max-width: 2043px) 100vw, 2043px" /></a></p>
<p>इसी तरह, <strong>&#8220;नेटिवक्लैप&#8221;</strong> एक ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म है जो आपके राज्य में चुने हुए विक्रेताओं, निर्माताओं और ब्रांडों से प्रामाणिक, पारंपरिक और अनन्य उत्पाद प्रदान करता है। ऑनलाइन खरीदारी करते समय अनूठे उत्पादों की खोज करें और स्थानीय कारीगरों का समर्थन करें। &#8220;श्री&#8221; खुले में शौच को खत्म करने के लिए समुदायों के साथ भागीदारी करता है, जो स्वास्थ्य समानता की लड़ाई में एक आवश्यक कदम है। साथ मिलकर, वे सभी के लिए एक स्वस्थ वातावरण बनाने के लिए काम करते हैं। </p>
<p>बिहार के मुजफ्फरपुर में एक भारतीय ऑप्टिकल रिटेल चेन, <strong>&#8220;जस-लेंस&#8221;</strong>, रोबोटिक तकनीक के साथ सटीक प्रिस्क्रिप्शन आईवियर प्रदान करती है। उनकी विनिर्माण सुविधा 3 दशमलव स्थानों तक सटीकता सुनिश्चित करती है। स्पष्ट दृष्टि और गुणवत्ता वाले उत्पाद प्रदान करते हुए, जस-लेंस आईवियर उद्योग में क्रांति ला रहा है।</p>
<p><strong>&#8220;शादी करें&#8221;</strong> एक आधुनिक वैवाहिक सेवा वेबसाइट है जहाँ उपयोगकर्ता अपने जीवन साथी को खोजने के लिए पंजीकरण कर सकते हैं। दुनिया के सबसे किफ़ायती पैकेज पेश करते हुए, कंपनी का उद्देश्य ज़रूरतमंद लोगों की मदद करना है। &#8220;इंग्लिशयारी&#8221; एक अभिनव भाषा सीखने का प्लेटफ़ॉर्म है जो शिक्षार्थियों को व्यक्तिगत एक-पर-एक सत्रों के लिए प्रमाणित ट्यूटर्स से जोड़ता है। किफ़ायती मूल्य निर्धारण, लचीले शेड्यूलिंग और अनुकूलित पाठ योजनाओं के साथ, यह व्यक्तियों को बोली जाने वाली अंग्रेजी में उत्कृष्टता प्राप्त करने, भाषा सीखने को सुलभ और व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने में मदद करने के लिए समर्पित है। </p>
<p><strong>&#8220;जस जॉलीज&#8221;</strong> एक गतिशील मनोरंजन, सामग्री निर्माण और विज्ञापन मीडिया कंपनी है। पूर्णकालिक सेवाओं में विशेषज्ञता रखने वाली यह कंपनी ग्राहकों के लिए आकर्षक और उच्च गुणवत्ता वाले मनोरंजन विकल्प प्रदान करती है। &#8220;न्यू एज न्यूज़ पोर्टल&#8221; उपयोगकर्ताओं को राजनीति, खेल, ज्योतिष, शिक्षा, नौकरी, वैश्विक मामले, व्यापार, भारत और प्रौद्योगिकी सहित विभिन्न क्षेत्रों में नवीनतम समाचार और अवसर प्रदान करता है। यह प्लेटफ़ॉर्म उपयोगकर्ताओं को उनके लिए महत्वपूर्ण विविध विषयों से अवगत और संलग्न रखता है। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-3.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-3.jpg" alt="" width="2043" height="1270" class="aligncenter size-full wp-image-6764" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-3.jpg 2043w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-3-300x186.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-3-1024x637.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-3-768x477.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-3-1536x955.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-3-356x220.jpg 356w" sizes="auto, (max-width: 2043px) 100vw, 2043px" /></a></p>
<p><strong>&#8220;देहात&#8221;</strong> एक आईसीटी आधारित प्लेटफ़ॉर्म और किसानों का बाज़ार है जो छोटे किसानों के लिए सभी कृषि पेशकशों को एक छत के नीचे लाता है। यह छोटे किसानों को उनकी विभिन्न ज़रूरतों &#8211; बीज, उर्वरक, उपकरण, फसल सलाह और बाज़ार से जोड़ता है। देहात का उपयोग अंतिम मील कृषि सेवा प्रदाताओं जैसे सूक्ष्म उद्यमियों, छोटे इनपुट खुदरा विक्रेताओं, कृषि व्यवसाय क्लीनिकों और किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) द्वारा किया जाता है। पेंट और कोटिंग उद्योग में एक अग्रणी नाम &#8220;मैक्स पेंट्स&#8221; ने खुद को उच्च गुणवत्ता वाले दीवार उत्पादों के शीर्ष निर्माता के रूप में स्थापित किया है। बिहार सरकार की स्टार्टअप योजना राज्य में आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो रही है। यह योजना सभी वर्गों को स्वरोजगार के अवसर प्रदान कर रही है। </p>
<p><strong>बहरहाल, प्रदेश में तेजी से स्टार्टअप की संख्या बढ़ने की वजह से बिहार की कृषि प्रधान राज्य की छवि से हटकर नवाचार और उद्यमिता के नए कलेवर वाली छवि भी बनती जा रही है। ग्रामीण इलाकों में भी स्टार्ट अप की संख्या तेजी से बढ़ रही है। उद्योग विभाग की इस योजना की वजह से युवाओं में उद्यमशीलता की भावना को प्रोत्साहन मिला है। विभाग के स्तर से स्टार्टअप बिहार के तहत एक समग्र तंत्र का निर्माण किया गया है, जो स्टार्ट-अप को उनकी शुरुआत से लेकर इसकी स्थापना और व्यवसाय के विस्तार तक सभी चरणों में सहयोग प्रदान करता है। खासकर युवाओं, महिलाओं और पारंपरिक रूप से उपेक्षित कुछ समुदायों की भागीदारी में भी इसमें बढ़ोतरी हुई है। यह राज्य के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य में परिवर्तन का संकेतक भी है। </strong></p>
<p>बिहार सरकार ने 2016 में बिहार स्टार्टअप नीति को तैयार कर इसकी अधिसूचना जारी की थी। इस पॉलिसी का मूल उद्देश्य राज्य के स्टार्टअप्स को फलने-फूलने का एक मौका देना है। 2017 में बिहार स्टार्टअप नीति में संशोधन किया गया।इस योजना के लिए सरकार ने 500 करोड़ का शुरुआती बजट रखा है। इसके जरिए बिहार सरकार युवाओं को खुद का स्टार्टअप शुरू कर आगे बढ़ने का मौका दे रही है। इस योजना के जरिए न सिर्फ स्टार्टअप्स को फायदा पहुंचेगा बल्कि बिहार राज्य में नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। इस नीति का मुख्य उद्देश्य राज्य के युवाओं की प्रतिभा का उपयोग करते हुए स्टार्टअप के लिए एक अनुकूल माहौल बनाना है। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-6.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-6.jpg" alt="" width="2043" height="1270" class="aligncenter size-full wp-image-6765" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-6.jpg 2043w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-6-300x186.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-6-1024x637.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-6-768x477.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-6-1536x955.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-6-356x220.jpg 356w" sizes="auto, (max-width: 2043px) 100vw, 2043px" /></a></p>
<p>बिहार को स्टार्टअप, निवेशकों और अन्य हितधारकों की पहली पसंद बनाना है। ताकि राज्य के समग्र विकास को गति मिल सके। उद्योग विभाग इससे संबंधित विभिन्न कार्यक्रमों, पुरस्कारों और अभियानों को आयोजित करके नवाचार की संस्कृति को सशक्त बना रही है।बदलते उद्घमी परिदृश्य और स्थानीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इसमें बदलाव किया और बिहार स्टार्टअप नीति 2022 लागू की। नई नीति अधिक समावेशी, प्रभावी और तेज क्रियान्वयन करने वाली है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य राज्य के युवाओं की प्रतिभा का उपयोग करते हुए स्टार्टअप के लिए एक अनुकूल माहौल बनाना है। </p>
<p><strong>उद्योग मंत्री नीतीश मिश्रा का कहना है कि स्टार्ट-अप को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न स्तर पर प्रोत्साहन से लेकर सभी तरह के सहयोगात्मक कार्य किए जा रहे हैं। युवाओं के नवाचार को बढ़ावा देने से लेकर इसके तहत आने वाले सभी प्रस्तावों पर मंथन करने के बाद इसके क्रियान्वयन के लिए हर तरह से सहायता प्रदान की जाती है। इससे स्वरोजगार को बढ़ावा मिल रहा है। युवाओं को अपने सार्थक कल्पना को आकार प्रदान करने में मदद मिल रही है। </strong></p>
<blockquote><p>बिहार में अब तक 1522 स्टार्टअप पंजीकृत हो चुके हैं। इसके तहत 62 करोड़ 50 लाख रुपये की राशि वितरित की जा चुकी है। इसमें महिला उद्यमियों के अलावा अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के उद्यमियों की संख्या भी काफी है। कुछ स्टार्टअप को अतिरिक्त सहायता भी दी गयी है। बिहार सरकार राज्य की अर्थव्यवस्था को बढ़ाने के लिए लगातार और केंद्रित प्रयास कर रही है। इस पहल के तहत, बिहार सरकार ने बिहार स्टार्टअप नीति 2022 पेश की है। यह नई नीति विशेष रूप से राज्य भर में उद्यमिता को प्रोत्साहित करने और बढ़ावा देने के लिए बनाई गई है। </p></blockquote>
<p>बिहार स्टार्टअप नीति का मुख्य लक्ष्य बिहार के भीतर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र के विकास और विस्तार में उल्लेखनीय रूप से तेज़ी लाना है, जिससे एक अधिक स्वस्थ और गतिशील आर्थिक वातावरण को बढ़ावा मिले। वैसे तो स्टार्टअप की सफलता या असफलता के लिए कई कारक जिम्मेदार होते हैं, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण कारक फंडिंग है। स्टार्टअप की सफलता या असफलता में वित्त एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बिहार स्टार्टअप नीति 2022 में राज्य सरकार द्वारा स्टार्टअप संस्थापकों को वित्तीय सहायता प्रदान करने का प्रावधान है। </p>
<p>बिहार स्टार्टअप नीति 2022 के अनुसार, सीड फंडिंग के लिए बिहार में उभरते उद्यमियों को 10 साल की अवधि के लिए 10 लाख रुपये का ब्याज मुक्त ऋण मिलेगा। महिला उद्यमियों को 10.50 लाख रुपये मिलेंगे, जबकि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और शारीरिक रूप से विकलांग व्यक्तियों को 11.50 लाख रुपये दिए जाएंगे। महिला उद्यमियों को 5% प्रोत्साहन का लाभ मिलेगा, तथा उत्पाद संवर्धन और वित्तीय प्रशिक्षण में संलग्न व्यवसायों को 3 लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा। इतना ही नहीं, सरकार इनक्यूबेटरों द्वारा जुटाए गए निवेश के लिए भारत सरकार और बहुपक्षीय दाता एजेंसियों से 1:1 के आधार पर मिलान निधि उपलब्ध कराएगी। नीति में साझा कार्यालय स्थान और अतिरिक्त सुविधाओं के साथ-साथ सह-कार्य स्थानों के विकास के प्रावधान शामिल हैं। सरकार का मानना है कि ह नीति देश भर में स्टार्टअप्स और एन्जेल निवेशकों के बीच संपर्क को सुगम बनाएगी। यह नीति स्टार्टअप्स को त्वरण कार्यक्रमों में नामांकन और भागीदारी करने में सहायता करेगी। इतना ही नहीं, स्टार्टअप्स को निःशुल्क मूल्यांकन सेवाएं प्रदान की जाएंगी।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-5.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-5.jpg" alt="" width="2043" height="1270" class="aligncenter size-full wp-image-6766" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-5.jpg 2043w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-5-300x186.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-5-1024x637.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-5-768x477.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-5-1536x955.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-5-356x220.jpg 356w" sizes="auto, (max-width: 2043px) 100vw, 2043px" /></a></p>
<p><strong>उद्योग विभाग ने इस नीति के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए एक स्टार्ट-अप सहायता इकाई (SSU) की भी स्थापना की है। SSU को राज्य के स्टार्ट-अप पारिस्थितिकी तंत्र के निरंतर विकास को बढ़ावा देने के लिए एक सहायक नीति वातावरण को बढ़ावा देने का काम सौंपा गया है। यह पारिस्थितिकी तंत्र के हितधारकों, जिसमें मेंटर, इनक्यूबेटर, एंजेल निवेशक और उद्यम पूंजीपति शामिल हैं, के साथ जुड़ने के लिए प्राथमिक संपर्क बिंदु है। SSU के संचालन की देखरेख के लिए, उद्योग विभाग विभाग के भीतर से कर्मियों को नियुक्त कर सकता है या किसी परियोजना प्रबंधन एजेंसी (PMA) के साथ सहयोग कर सकता है। </strong></p>
<p>ज्ञातव्य हो कि बिहार के तीन स्टार्ट-अप को केंद्र सरकार द्वारा नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित स्टार्टअप महाकुंभ कार्यक्रम में प्रतिष्ठित महारथी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था और EY डेल्टा, लेडीफेयर और भोजपट्टा को प्रत्येक को एक-एक लाख रुपये नकद पुरस्कार दिया गया था।  लेडी केयर ब्यूटी कॉन्सेप्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को उसके अद्वितीय सौंदर्य-आधारित व्यवसाय मॉडल के लिए सम्मानित किया गया था। डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) स्टार्ट-अप का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को उनके घर के दरवाजे पर सैलून सर्विस देना और साथ ही आजीविका के अवसर पैदा करना है। कहते हैं कि इस पहल के तहत अब तक 150 से अधिक महिलाओं को ब्यूटीशियन की ट्रेनिंग दी गई है, जो 12 से अधिक शहरों में सेवाएं दे रही है। ये महिलाएं सामूहिक रूप से सालाना 1.5 करोड़ रुपये से अधिक पैसे कमा पा रही है। </p>
<p>भोजपत्ता एक कृषि आधारित स्टार्टअप है, जिसे भोजपत्ता एग्रीप्रेन्योर प्राइवेट लिमिटेड द्वारा चलाया जाता है। इसे महज़ 4 लाख रुपये के शुरुआती निवेश के साथ लॉन्च किया गया था। 2021 में स्थापित, भोजपत्ता एक नया स्टार्टअप है जो ज़ीरो-कार्बन उत्सर्जन वाले सौर ड्रायर का उपयोग करके फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करता है। भोजपत्ता ग्रामीण सशक्तिकरण, हरित नवाचार और टिकाऊ जीवन को बढ़ावा देते हुए प्रकृति और संस्कृति को एकीकृत करता है। बिहार स्थित प्रौद्योगिकी स्टार्ट-अप ईवाई डेल्टा को उसके उत्कृष्ट योगदान के लिए रक्षा और अंतरिक्ष श्रेणी में महारथी पुरस्कार मिला था। </p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/business/startups-change-bihar-economy">बिहार में आने वाले &#8216;स्टार्टअप&#8217; के &#8216;उद्यमियों&#8217; की बातों को लिखने, गाँव-गाँव तक पहुँचाने के लिए &#8216;आर्यावर्तइण्डियननेशन.कॉम&#8217; से बेहतर कौन हो सकता है (स्टार्टअप-1)</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>समुद्र में भारतीय तटरक्षक बल ​की भूमिका &#8216;अग्रणी​&#8217;, मुंबई में मंत्री जी ने कहा 2027 तक 47 नए राष्ट्रीय जलमार्ग शुरू हो जाएंगे​</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 27 May 2025 05:19:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यापार]]></category>
		<category><![CDATA[guard]]></category>
		<category><![CDATA[India]]></category>
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		<category><![CDATA[water]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>​केरल समुद्र तट / मुंबई : भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) ने लाइबेरियाई कंटेनर पोत एमवी एमएससी ईएलएसए 3 के डूबने के बाद प्रदूषण प्रतिक्रिया अभियान शुरू किया। यह पोत 25 मई, 2025 को अलपुझा, केरल से लगभग 15 समुद्री मील दक्षिण-पश्चिम में डूब गया था। पोत के डूबने के कुछ ही घंटों के भीतर, आईसीजी [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>​केरल समुद्र तट / मुंबई : भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) ने लाइबेरियाई कंटेनर पोत एमवी एमएससी ईएलएसए 3 के डूबने के बाद प्रदूषण प्रतिक्रिया अभियान शुरू किया। यह पोत 25 मई, 2025 को अलपुझा, केरल से लगभग 15 समुद्री मील दक्षिण-पश्चिम में डूब गया था। पोत के डूबने के कुछ ही घंटों के भीतर, आईसीजी निगरानी विमान ने क्षेत्र में तेल का रिसाव देखा। ​उधर, केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल ने मुंबई ​में कहा कि 47 नए राष्ट्रीय जलमार्ग 2027 तक शुरू हो जाएंगे​ और अगले वर्ष तक कार्गो वॉल्यूम बढ़कर 156 मिलियन टन प्रति वर्ष तक हो ​जायेगा। </strong></p>
<p>सूत्रों के अनुसार प्रदूषण प्रतिक्रिया प्रणाली में पहले से ही तैनात आईसीजी जहाज सक्षम को तुरंत तैनात किया गया। एक आईसीजी डोर्नियर विमान ने हवाई आकलन किया और प्रभावित क्षेत्र में तेल रिसाव फैलाने वाले पदार्थ (ओएसडी) को हटाया।​25 मई की सुबह देर तक, तेल की परत 1.5 से 2 नॉट की गति से घटनास्थल से पूर्व-दक्षिण-पूर्व की ओर बहती हुई देखी गई। समुद्र की खराब स्थिति और तेज़ हवाओं ने इन प्रयासों को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया। क्षेत्र में 100 से अधिक कार्गो कंटेनर तैर रहे थे, जिनमें से कुछ टूट गए और उनमें से सामान बाहर निकल गया था और इस खतरनाक स्थिति के बावजूद आईसीजी ने ऑपरेशन जारी रखा। सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वहां से सभी गुजरने वाले जहाजों का मार्ग बदल दिया गया है, और नाविकों को तैरते हुए मलबे और संभावित नेविगेशन खतरों के कारण सावधानी से गुजरने की चेतावनी दी गई है।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/P-3.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/P-3.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-6646" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/P-3.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/P-3-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/P-3-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/P-3-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/P-3-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p>आईसीजी ने हवाई उड़ानों और विशेष फैलाव उपकरणों का उपयोग करके रिसाव को कम करने के प्रयासों को तेज कर दिया है। दो अपतटीय गश्ती पोत (ओपीवी) चौबीसों घंटे निगरानी के लिए घटनास्थल पर मौजूद हैं, जबकि प्रदूषण प्रतिक्रिया पोत समुद्र प्रहरी और अतिरिक्त ओपीवी को ओएसडी के साथ तैनात किया गया है।​ कोच्चि के मर्केंटाइल मरीन डिपार्टमेंट ने मर्चेंट शिपिंग एक्ट, 1958 के तहत जहाज मालिकों मेसर्स एमएससी को प्रदूषण दायित्व चेतावनी जारी की। एमएससी ने कंटेनर रिकवरी, तेल हटाने और पर्यावरण सफाई के लिए टीएंडटी साल्वेज को नियुक्त किया। आईसीजी ने केरल राज्य प्रशासन को तटरेखा सफाई के लिए तैयार रहने और स्थानीय समुदायों को सचेत करने की सलाह दी कि वे तट पर आने वाले किसी भी कार्गो या मलबे को नहीं छुए या हासिल करने का प्रयास नहीं करे क्योंकि इसमें हानिकारक सामग्री हो सकती हैं।</p>
<figure id="attachment_6643" aria-describedby="caption-attachment-6643" style="width: 2047px" class="wp-caption alignright"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/P-1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/P-1.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-6643" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/P-1.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/P-1-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/P-1-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/P-1-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/P-1-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6643" class="wp-caption-text">केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल</figcaption></figure>
<p><strong>​उधर मुंबई में अंतर्देशीय जलमार्ग परिवहन पर परामर्शदात्री समिति की बैठक की अध्यक्षता​ करते केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल ने ​कहा कि 2027 तक 76 जलमार्गों को चालू करने का लक्ष्य रखा गया है, और वित्तीय वर्ष 2026 के अंत तक कार्गो मात्रा 156 मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) तक बढ़ने की उम्मीद है। मंत्रालय के तहत नोडल एजेंसी, भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) ने प्रमुख परियोजनाओं, भविष्य के अनुमानों और आगे के रोडमैप की व्यापक रूपरेखा प्रस्तुत की। </strong></p>
<p>​उन्होंने कहा कि अंतर्देशीय जल परिवहन का दायरा वित्तीय वर्ष 2024 में 11 राज्यों से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2027 तक 23 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों तक विस्तारित होने की उम्मीद है। इस बढ़ोतरी को समर्थन देने के लिए, 10 जनवरी 2025 को आयोजित अंतर्देशीय जलमार्ग विकास परिषद (आईडब्ल्यूडीसी) की बैठक के दौरान ₹1,400 करोड़ की परियोजनाओं की शुरुआत या घोषणा की गई। इसके अतिरिक्त, आईडब्ल्यूएआई हर महीने 10,000 किमी की देशांतरीय सर्वेक्षण कर रहा है ताकि नौवहन क्षमता में सुधार के लिए न्यूनतम उपलब्ध गहराई (एलएडी) का आकलन किया जा सके। कार्गो वॉल्यूम में मार्च 2026 तक 156 एमटीपीए तक की बढ़ोतरी होने की संभावना है, जो मैरीटाइम इंडिया विज़न 2030 के 200 एमटीपीए के लक्ष्य के करीब है।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/2-2.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/2-2.jpg" alt="" width="530" height="353" class="alignleft size-full wp-image-6644" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/2-2.jpg 530w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/2-2-300x200.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 530px) 100vw, 530px" /></a></p>
<p>सोनोवाल ने कहा, “अंतर्देशीय जलमार्ग भारत के लॉजिस्टिक्स और परिवहन पारिस्थितिकी तंत्र में एक निर्णायक क्षण के रूप में उभर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में, हम राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम 2016, अंतर्देशीय पोत अधिनियम 2021 और जल मार्ग विकास परियोजना, अर्थ गंगा, जलवाहक योजना, जल समृद्धि योजना, जलयान और नाविक जैसे कई कार्यक्रमों के साथ एक परिवर्तनकारी बदलाव देख रहे हैं। समुद्री भारत दृष्टिकोण 2030 और समुद्री अमृत काल दृष्टिकोण 2047 के माध्यम से, ये रोडमैप केवल नीतिगत दस्तावेज नहीं हैं बल्कि ये भारत को वैश्विक समुद्री महाशक्ति बनाने की दिशा में उत्प्रेरक हैं। आज सम्मानित संसद सदस्यों के साथ बैठक बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने और हमारी नदियों और तटों की अपार आर्थिक क्षमता को उजागर करने की एकीकृत प्रतिबद्धता को दर्शाती है कि बुनियादी ढांचे को बढ़ावा दिया जाए और हमारी नदियों और तटों की अपार आर्थिक संभावनाओं को अनलॉक किया जाए। बढ़े हुए बजटीय समर्थन और सहकारी संघवाद के साथ, हम देश भर में हरित, अधिक कुशल और भविष्य के लिए तैयार जलमार्ग नेटवर्क का निर्माण कर रहे हैं।”</p>
<p><strong>क्षेत्रीय जलमार्ग ग्रिड का उद्देश्य वाराणसी से डिब्रूगढ़, करीमगंज और बदरपुर तक आईबीपी मार्ग के माध्यम से निर्बाध पोत आवागमन सुनिश्चित करके आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है, जिससे 4,067 किमी का आर्थिक गलियारा बनेगा। जंगीपुर नेविगेशन लॉक के नवीकरण के लिए एक ट्रैफिक अध्ययन और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) प्रक्रिया में है। इस परियोजना की कार्गो क्षमता 2033 तक 32.2 एमटीपीए होने का अनुमान है।</strong></p>
<p>राष्ट्रीय जलमार्ग 1 (गंगा) पर, 1,390 किमी का एक समर्पित जलमार्ग गलियारा विकसित किया जा रहा है ताकि पोतों की निर्बाध आवाजाही सक्षम हो, जिससे अंतर्देशीय परिवहन की दक्षता बढ़े। इस पहल के हिस्से के रूप में, राष्ट्रीय जलमार्ग -1 की क्षमता वृद्धि की जा रही है ताकि 1,500–2,000 डीडब्ल्यूटी पोतों की नौवहन को समर्थन दिया जा सके, साथ ही वाराणसी (एमएमटी), कलुघाट (आईएमटी), साहिबगंज (एमएमटी) और हल्दिया (एमएमटी) में प्रमुख कार्गो हैंडलिंग सुविधाओं का निर्माण किया जा रहा है।</p>
<p>पूर्वोत्तर में अंतर्देशीय जलमार्ग की प्रमुख परियोजनाएं हैं। अगले पांच वर्षों में ₹5,000 करोड़ का रोडमैप नियोजित है। राष्ट्रीय जलमार्ग-2 (ब्रह्मपुत्र) पर, चार स्थायी टर्मिनल—धुबरी, जोगीघोपा, पांडु और बोगीबी—और 13 अस्थायी टर्मिनल नौवहन और फेयरवे अपग्रेड द्वारा समर्थित हैं। पांडु में ₹208 करोड़ की जहाज मरम्मत सुविधा और ₹180 करोड़ की वैकल्पिक सड़क क्रमशः 2026 और 2025 तक पूरी होने वाली हैं। राष्ट्रीय जलमार्ग-16 (बराक) पर, करीमगंज और बदरपुर में टर्मिनल सक्रिय हैं, जबकि राष्ट्रीय जलमार्ग-31 (धनसिरी) का विकास NRL के विस्तार को समर्थन देने के लिए विकसित किया जा रहा है।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/3-1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/3-1.jpg" alt="" width="530" height="353" class="alignright size-full wp-image-6645" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/3-1.jpg 530w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/05/3-1-300x200.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 530px) 100vw, 530px" /></a></p>
<p><strong>सोनोवाल ने आगे कहा, “हरित नौका दिशानिर्देशों के अनुरूप, भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण हरित और टिकाऊ परिवहन समाधानों के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें इलेक्ट्रिक कैटामरैन और हाइड्रोजन ईंधन सेल-संचालित पोतों की खरीद शामिल है। वाटर मेट्रो परियोजनाओं के माध्यम से शहरी जल परिवहन को मजबूत करके और पर्यावरण-अनुकूल क्रूज पर्यटन को बढ़ावा देकर, हम अंतर्देशीय जलमार्ग परिवहन में एक स्वच्छ, हरित भविष्य की दिशा में मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। क्षेत्रीय जलमार्ग ग्रिड का लक्ष्य असम और पूर्वोत्तर को अंतर्देशीय जलमार्गों के एकीकृत नेटवर्क के माध्यम से भारत के बाकी हिस्सों से निर्बाध रूप से जोड़ना है। यह क्षेत्रीय व्यापार, पर्यटन और कनेक्टिविटी को बढ़ावा देगा, साथ ही ब्रह्मपुत्र और बराक नदी प्रणालियों में आर्थिक संभावनाओं को खोलेगा। सरकार अगले पांच वर्षों में पूर्वोत्तर में अंतर्देशीय जलमार्ग विकास के लिए ₹5,000 करोड़ के रोडमैप पर भी काम कर रही है।”</strong></p>
<p>भारत में नदी क्रूज़ पर्यटन तेज़ी से फल-फूल रहा है। वर्तमान में 13 राष्ट्रीय जलमार्गों पर फैले 9 राज्यों में 15 रिवर क्रूज़ सर्किट सक्रिय हैं। 2013-14 में जहां केवल 3 राष्ट्रीय जलमार्गों पर क्रूज़ सेवाएं थीं, वहीं 2024-25 में इनकी संख्या बढ़कर 13 हो गई है। इसी अवधि में लक्ज़री रिवर क्रूज़ जहाजों की संख्या भी 3 से बढ़कर 25 हो चुकी है। अंतर्देशीय जल-आधारित पर्यटन को और बढ़ावा देने के लिए 2027 तक 47 राष्ट्रीय जलमार्गों पर 51 अतिरिक्त क्रूज़ सर्किट विकसित किए जाएंगे। इसके साथ ही तीन विश्व स्तरीय रिवर क्रूज़ टर्मिनल भी बनाए जा रहे हैं—कोलकाता में निर्माण कार्य जारी है, जबकि वाराणसी और गुवाहाटी में टर्मिनलों की व्यवहार्यता रिपोर्ट (Feasibility Studies) आईआईटी मद्रास द्वारा तैयार की जा रही है। इसके अलावा, सिलघाट, बिश्वनाथ घाट, नेमती और गुजान में भी 2027 तक चार और टर्मिनलों का विकास प्रस्तावित है।</p>
<p>इस अवसर पर पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग राज्यमंत्री श्री शंतनु ठाकुर ने कहा: &#8220;भारत में रिवर क्रूज़ पर्यटन को आगे बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं, जिसमें आधुनिक क्रूज़ टर्मिनल और संबंधित बुनियादी ढांचे का विकास शामिल है। निजी उद्यमों के साथ रणनीतिक साझेदारियों और समझौतों (MoUs) के माध्यम से हम गंगा और ब्रह्मपुत्र पर लक्ज़री रिवर क्रूज़ को प्रोत्साहित कर रहे हैं, साथ ही यमुना, नर्मदा और जम्मू-कश्मीर की प्रमुख नदियों पर भी क्रूज़ पर्यटन का विस्तार किया जा रहा है। ये पहल न केवल पर्यटन को बढ़ावा देती हैं, बल्कि हमारे कार्यक्षेत्र वाले क्षेत्रों में टिकाऊ आर्थिक विकास में भी योगदान करती हैं।&#8221;</p>
<p>परामर्शदात्री समिति की बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल ने की, जबकि पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग राज्य मंत्री श्री शांतनु ठाकुर भी मौजूद थे. बैठक में शत्रुघ्न प्रसाद सिन्हा, लोकसभा सांसद (आसनसोल, पश्चिम बंगाल), बिभु प्रसाद तराई, लोकसभा सांसद (जगदीशपुर, ओडिशा), हिबी ईडन, लोकसभा सांसद (एर्नाकुलम, केरल), एम.के. राघवन, लोकसभा सांसद (कोझिकोड, केरल), नबा चरण माझी, लोकसभा सांसद (मयूरभंज, ओडिशा), अभिमन्यु सेठी, लोकसभा सांसद (ओडिशा) और सीमा द्विवेदी (राज्यसभा सांसद, उत्तर प्रदेश) ने भी हिस्सा लिया।</p>
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		<title>​अंडा क्या जाने मुर्गी का क्या होगा? 😢 क्योंकि एक मुर्गी/मुर्गा 160/180 ग्राम प्रोटीन का मालिक होता है और भारत में तक़रीबन 73 फीसदी लोगों में प्रोटीन की कमी नहीं, किल्लत है 😢</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/business/about-73-of-people-in-india-have-protein-deficiency</link>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 22 Apr 2025 04:27:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यापार]]></category>
		<category><![CDATA[chicken]]></category>
		<category><![CDATA[deficieny]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>मुर्गा मंडी &#8211; गाजीपुर (पूर्वी दिल्ली का अंतिम छोड़) : राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के पूर्वी छोड़ पर स्थित मुर्गा मंडी में देश की राजनीति अथवा बॉलीवुड के अदाकार और अदाकारा की बात नहीं होती। आर्थिक, समाजिक, राजनीतिक उठा-पटकों के बारे में कोई चर्चा नहीं करता। भारत के संसद से करीब 13 किलोमीटर और दिल्ली सचिवालय [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मुर्गा मंडी &#8211; गाजीपुर (पूर्वी दिल्ली का अंतिम छोड़) : राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के पूर्वी छोड़ पर स्थित मुर्गा मंडी में देश की राजनीति अथवा बॉलीवुड के अदाकार और अदाकारा की बात नहीं होती। आर्थिक, समाजिक, राजनीतिक उठा-पटकों के बारे में कोई चर्चा नहीं करता। भारत के संसद से करीब 13 किलोमीटर और दिल्ली सचिवालय से करीब 11 किलोमीटर दूर स्थित मुर्गा मंडी के इस बदबूदार इलाके में, जहाँ एक आम आदमी अपनी नाकों के ऊपर से रुमाल हटाकर सांस भी नहीं ले सकता, यहाँ के व्यापारी आम लोगों के, उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के बारे में चर्चा अवश्य करता हैं। एक मनुष्य को नित्य कितना प्रोटीन लेना चाहिए, इसके बारे में जिक्र अवश्य करता है। हरी सब्जियां पर व्यापारी और सब्जी मंडी के माफियाओं का वर्चस्व और बढ़ती कीमतों के कारण गले से उतरना आम लोगों की सोच से परे हो; लेकिन जिस पक्षी के नाम से यह मंडी अंकित है, यहाँ के अनपढ़, अशिक्षित व्यापारियों की भरसक कोशिश होती है कि देश के गरीब-गुरबों के बच्चों को &#8216;मुर्गा&#8217; या उसके अंग उपलब्ध अवश्य हों &#8211; क्योंकि कम कीमत पर इससे अधिक प्रोटीन अन्यत्र उपलब्ध नहीं हो सकता है, चाहे मुर्गों का पंख ही क्यों न हो । </strong></p>
<p>आपको जानकर आश्चर्य होगा कि भारत में औसतन प्रति व्यक्ति चिकन मीट की खपत लगभग 5 से 6 किलोग्राम प्रति वर्ष है, लेकिन आज भी ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की तुलना में शहरी लोग चिकन का मांस अधिक खाते हैं। इतना ही नहीं, इंटरनेट के विकास के साथ, ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी अब &#8216;प्रोटीन&#8217; शब्द के जानकार हो गए हैं। वे यह जानते हैं कि चिकन का टंगरी भले न मिले, छाती, पैर का निचला हिस्सा, पंख को सिर्फ नमक और हल्दी के साथ उबालकर खाने या उस तरल को पीने से शरीर को प्रचुर मात्रा में प्रोटीन मिलता है, जो अनेकानेक बीमारियों का शर्तिया इलाज है। एक त्वचा रहित पका हुआ चिकन जांघ (111 ग्राम) में 27 ग्राम प्रोटीन होता है। यह प्रति 100 ग्राम 25 ग्राम प्रोटीन के बराबर है। चिकन जांघों में भी प्रति जांघ 195 कैलोरी होती है, या प्रति 100 ग्राम 176 कैलोरी। </p>
<p>दिलचस्प बात यह है कि चिकन के जांघों का रंग छाती से थोड़ा गहरा होता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि उसके पैर अधिक सक्रिय होते हैं और उनमें अधिक मायोग्लोबिन होता है। यह अणु सक्रिय मांसपेशियों को ऑक्सीजन प्रदान करने में मदद करता है और उन्हें लाल भी बनाता है। चिकन को भले कई तरह से काटा जाय, लेकिन प्रति 100 ग्राम चिकन मांस में 24 से 32 ग्राम प्रोटीन प्रदान करता है। स्तन में सबसे अधिक प्रोटीन होता है। यह फिटनेस के प्रति उत्साही लोगों के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय है क्योंकि यह प्रोटीन का एक बड़ा स्रोत है। कहते हैं कि साल 2023 की तुलना में भले पोल्ट्री मीट की खपत में तनिक कमी हुई हो, भारत आज भी दुनिया में पोल्ट्री मीट के अग्रणी उत्पादकों में से एक है। यहाँ औसत आय और शहरी आबादी में वृद्धि के कारण पोल्ट्री की मांग में जबरदस्त वृद्धि हुई है और पिछले कुछ वर्षों में खपत में लगातार वृद्धि हुई है। विगत वर्ष, यानी 2024 में, भारत में पोल्ट्री मीट की खपत चार मिलियन मीट्रिक टन से अधिक पाई गई।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/Screenshot-2025-04-22-at-9.41.54-AM.png"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/Screenshot-2025-04-22-at-9.41.54-AM.png" alt="" width="1731" height="973" class="aligncenter size-full wp-image-6349" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/Screenshot-2025-04-22-at-9.41.54-AM.png 1731w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/Screenshot-2025-04-22-at-9.41.54-AM-300x169.png 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/Screenshot-2025-04-22-at-9.41.54-AM-1024x576.png 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/Screenshot-2025-04-22-at-9.41.54-AM-768x432.png 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/Screenshot-2025-04-22-at-9.41.54-AM-1536x863.png 1536w" sizes="auto, (max-width: 1731px) 100vw, 1731px" /></a></p>
<p>पोल्ट्री विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में पोल्ट्री की आबादी तेजी से बढ़ी है। 2003 में, भारत में पोल्ट्री और पशुधन की आबादी लगभग समान थी, लेकिन तब से पोल्ट्री क्षेत्र में तुलनात्मक रूप से बहुत अधिक वृद्धि हुई है। 2019 में, भारत में पोल्ट्री की आबादी 800 मिलियन से अधिक थी। यह पिछले पांच वर्षों में 16 प्रतिशत की वृद्धि थी। 2019 में, भारतीय राज्य तमिलनाडु में भारत में पोल्ट्री की सबसे बड़ी आबादी थी, जो 100 मिलियन से अधिक थी। सूत्रों के अनुसार, भारत ने अन्य देशों को 7,000 मीट्रिक टन से अधिक पोल्ट्री मांस का निर्यात किया।आज भी मान वृद्धि की ओर उन्मुख है। </p>
<blockquote><p>दिल्ली में प्रतिदिन लगभग 4 लाख मुर्गियों की खपत होने का अनुमान है। प्रमुख पोल्ट्री बाज़ार गाजीपुर मंडी प्रतिदिन लगभग 5 लाख ब्रॉयलर चिकन की आपूर्ति करता है।  यह मांग उत्तरोत्तर बढ़ रही है . इसका मुख्य कारण है स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होना। सूत्रों के अनुसार दिल्ली में प्रतिदिन लगभग 4 लाख मुर्गियों के साथ-साथ 10,000 बकरियाँ, 1,000 भैंसें और 500 सूअरों की आवश्यकता होती है। दिल्ली की ब्रॉयलर आवश्यकताओं की पूर्ति हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तरांचल से आपूर्ति द्वारा की जाती है।</p></blockquote>
<p>सूत्रों के अनुसार, महाराष्ट्र 2020 में चिकन मीट (632.32 सौ मीट्रिक टन) का अग्रणी उत्पादक था, जिसका प्रतिशत हिस्सा (15.57 प्रतिशत) था, उसके बाद हरियाणा (478.63 सौ मीट्रिक टन) का स्थान था, जिसका प्रतिशत हिस्सा (11.78 प्रतिशत) था। पश्चिम बंगाल (475.42 सौ मीट्रिक टन) और तमिलनाडु (467.51 सौ मीट्रिक टन) क्रमशः 11.70 प्रतिशत और 11.61 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ तीसरे और चौथे स्थान पर हैं। भारत में वर्ष 2021 में कुल पोल्ट्री मांस की खपत (4,107.00 हजार मीट्रिक टन) थी। पिछले वर्षों की तुलना में, 2013 से 2021 तक हर साल पोल्ट्री मांस की कुल खपत में वृद्धि हुई है। भारत सरकार के अनुसार, भारत अंडा उत्पादन के लिए दुनिया में तीसरे और चिकन मांस के लिए दुनिया में 5वें स्थान पर है। प्रति व्यक्ति अंडे की वार्षिक खपत 101 (डीएडीएफ) और चिकन मांस 4.8/5 किलोग्राम। </p>
<p><strong>मुर्गा मंडी में इस बात की चर्चा अधिक है कि चिकन मांस का सेवन निम्न आय वर्ग के लोगों में अधिक आम है। भारत की सबसे गरीब 20% आबादी के दस में से लगभग नौ लोग मांस खाते हैं, जबकि सबसे अमीर 20% लोगों में से दस में से लगभग सात लोग मांस खाते हैं। महिलाओं के बीच यह अंतर और भी ज़्यादा है, ख़ास तौर पर ग्रामीण इलाकों में। ग्रामीण भारत में सबसे अमीर समूह की महिलाओं में से सिर्फ आधे से ज़्यादा महिलाएं मांस खाती हैं, जबकि तीन-चौथाई पुरुष मांस खाते हैं। केवल चार राज्यों में शाकाहारी लोगों की बहुलता है &#8211; पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात। तटीय राज्यों में बहुत कम शाकाहारी हैं। हाल के दशकों में भारत की आर्थिक वृद्धि और सामाजिक सुधार कुपोषण के लगातार दोहरे बोझ के साथ-साथ मौजूद रहे हैं। पोषक तत्वों की कमी और कुपोषण देश में बौनेपन, मृत्यु और एनीमिया के लिए शीर्ष जोखिम कारकों में से रहे हैं आबादी के आहार की गुणवत्ता और पोषण संबंधी परिणामों को बेहतर बनाने के लिए आहार में पशु स्रोत खाद्य पदार्थों के उचित स्तरों को शामिल करना, विशेष रूप से कम संसाधन वाले देशों में बच्चों के लिए, कई अध्ययनों में उजागर किया गया है।</strong></p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/Screenshot-2025-04-22-at-9.41.36-AM.png"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/Screenshot-2025-04-22-at-9.41.36-AM.png" alt="" width="1444" height="757" class="aligncenter size-full wp-image-6350" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/Screenshot-2025-04-22-at-9.41.36-AM.png 1444w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/Screenshot-2025-04-22-at-9.41.36-AM-300x157.png 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/Screenshot-2025-04-22-at-9.41.36-AM-1024x537.png 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/Screenshot-2025-04-22-at-9.41.36-AM-768x403.png 768w" sizes="auto, (max-width: 1444px) 100vw, 1444px" /></a></p>
<p>औसतन,  एक व्यक्ति मांस की वस्तुओं पर प्रति माह 216 रुपये खर्च करता है, जो कुल खाद्य व्यय का 10% है।  ग्रामीण क्षेत्रों में, औसत खर्च प्रति माह 200 रुपये से थोड़ा अधिक है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 250 रुपये प्रति माह के करीब है।भारत में मांस, मुर्गी, समुद्री भोजन और अंडे का व्यापक रूप से सेवन किया जाता है। 15-49 वर्ष की आयु के दस में से आठ लोग किसी न किसी रूप में पशु स्रोत प्रोटीन (डेयरी को छोड़कर) खाते हैं। मांस खाने वाले लोगों की की हिस्सेदारी पुरुषों में 87% है, जबकि महिलाओं में यह 75% है। पिछले कुछ वर्षों में, मांस खाने वाले भारतीय वयस्कों की हिस्सेदारी थोड़ी बढ़ी है, जो 2006 में 74% से बढ़कर 2021 में 80% हो गई है।</p>
<p>भारतीय आहार दिशानिर्देशों में आहार में अंडे और चिकन मांस को शामिल करने की सिफारिश की गई है। हालांकि, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय  के हालिया अनुमानों से पता चलता है कि भारत में प्रति व्यक्ति खपत प्रति वर्ष केवल 69 अंडे और 3.35 किलोग्राम चिकन है। भारत दक्षिण एशिया के अन्य देशों की तुलना में 24 महीने से कम उम्र के बच्चों में अंडे की खपत के सबसे कम प्रचलन वाले देशों में से एक है। यह माना जा रहा है कि ग्रामीण परिवार, विशेष रूप से गरीब परिवार प्रोटीन कुपोषण से पीड़ित थे, जिसकी विशेषता आमतौर पर बच्चों में विकास में कमी थी। मुर्गी पालन जीवन निर्वाह गतिविधि बन रही है। इतना ही नहीं, मुर्गी पालन ने मक्का और सोया किसानों को बेहतर मूल्य भी निर्धारित कर रहा है। </p>
<div style="width: 696px;" class="wp-video"><video class="wp-video-shortcode" id="video-6347-1" width="696" height="392" preload="metadata" controls="controls"><source type="video/mp4" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/Murga.mp4?_=1" /><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/Murga.mp4">http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/Murga.mp4</a></video></div>
<p>मंडी में लोगों का मानना है कि वैसे देश में आज भी 60 प्रतिशत से अधिक आबादी का प्रमुख व्यवसाय है। पशुधन क्षेत्र ग्रामीण परिवारों के सामाजिक-आर्थिक विकास और पोषण सुरक्षा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लेकिन, मुर्गी पालन पशुधन के महत्वपूर्ण घटकों में से एक बन गया है जो बड़े पैमाने पर रोजगार प्रदान कर रहा है। आंकड़ों के अनुसार, 2019 (20वीं पशुधन जनगणना) में मुर्गी पालन की कुल संख्या में 16.81% की वृद्धि हुई है और देश में कुल मुर्गी पालन की उपलब्धता 851.81 मिलियन है। 2020 में भारत में पोल्ट्री मांस की खपत 3.9 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक थी आज उत्कर्ष पर है। स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता के कारण प्रोटीन युक्त भोजन की मांग और बेहतर उपभोक्ता क्रय शक्ति ने पोल्ट्री मांस की खपत में वृद्धि की है। पोल्ट्री मांस का उत्पादन और खपत भारत दुनिया में ब्रॉयलर मांस का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। भारत में प्रति व्यक्ति चिकन मांस की खपत लगभग 3.1 किलोग्राम प्रति वर्ष होने का अनुमान है, जो कि विश्व औसत लगभग 17 किलोग्राम प्रति वर्ष की तुलना में कम है। </p>
<p><strong>वैसे जी एन घोष, जो पॉल्ट्री रिव्यू के संपादक हैं, का मानना है कि वर्तमान प्रशासन पोल्ट्री उद्योग के प्रति अपने दृष्टिकोण में एक तरह की ढुलमुल नीति प्रदर्शित करता है। भारत में पोल्ट्री फार्मिंग देश में लाखों लोगों की प्रोटीन संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए अंडे और चिकन मीट जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थों के उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि, इस उद्योग को संघ और राज्य दोनों स्तरों पर असंगत सरकारी नीतियों से चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जो अक्सर एक अस्पष्ट और जटिल विनियामक वातावरण बनाते हैं।&#8217; उनके अनुसार, &#8216;हाल के घटनाक्रमों ने अधिकारियों द्वारा प्रदूषण को नियंत्रित करने और पशुओं के प्रति क्रूरता को रोकने के प्रयासों को उजागर किया है, जो अक्सर पोल्ट्री क्षेत्र को लक्षित करते हैं। पिछले कुछ वर्षों में, पोल्ट्री किसानों को प्रदूषण को नियंत्रित करने या पशु कल्याण सुनिश्चित करने के लिए नियामक निकायों से विभिन्न दंड और निष्कासन आदेशों का सामना करना पड़ा है। इसने पोल्ट्री फार्मिंग में शामिल लोगों के लिए महत्वपूर्ण बाधाएँ पैदा की हैं। एक विरोधाभासी कदम में, केंद्र और कई राज्य सरकारों ने हाल ही में ग्रामीण जिलों में छोटे पैमाने के पोल्ट्री फार्मों के लिए पर्याप्त समर्थन और सब्सिडी शुरू की है। इन पहलों का उद्देश्य व्यक्तियों को घरेलू पोल्ट्री फार्मिंग में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना है, जो देश के बढ़ते पोल्ट्री उद्योग में योगदान दे।&#8217;</strong></p>
<p>वे मानते हैं कि &#8216;हालांकि, इन उद्यमों को कड़े सरकारी नियमों का पालन करना होगा, भले ही कई किसानों के पास पर्यावरणीय प्रभावों के प्रबंधन में सीमित अनुभव हो। प्रदूषण नियंत्रण इन उद्यमियों के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। राज्यों में एक समान नीति की कमी भ्रम को बढ़ाती है, क्योंकि प्रदूषण नियंत्रण नियम एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में काफी भिन्न होते हैं। यह असंगतता अक्सर नियमों की प्रभावशीलता और निष्पक्षता के बारे में सवाल उठाती है, जिससे प्रशासन का कम अनुकूल पक्ष सामने आता है। जटिल और कभी-कभी विरोधाभासी नीतियाँ पोल्ट्री किसानों के लिए बाधाएँ पैदा करती हैं, जो अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग आवश्यकताओं को पूरा करने और अनुपालन बनाए रखने के लिए संघर्ष करते हैं।&#8217;</p>
<p>बहरहाल, वित्त वर्ष 2023 में, भारत भर में पशुधन क्षेत्र में पोल्ट्री मांस से जोड़ा गया सकल मूल्य 1.8 ट्रिलियन भारतीय रुपये से अधिक था। पिछले वित्तीय वर्षों की तुलना में यह उल्लेखनीय वृद्धि थी। उसी वर्ष मांस उत्पादों का कुल GVA लगभग चार ट्रिलियन भारतीय रुपये था। सूत्रों के अनुसार, सामाजिक और धार्मिक समूहों के अनुसार उपभोग के पैटर्न भी अलग-अलग होते हैं। खान-पान की आदतों में धर्म की भी भूमिका होती है। लगभग सभी मुस्लिम (99%), ईसाई (99%) और बौद्ध/नव-बौद्ध (97%) आबादी मांस खाती है। हिंदुओं में, तीन-चौथाई से थोड़ा ज्यादा लोग मांस खाते हैं, जबकि जैन और सिखों में शाकाहारियों की संख्या सबसे ज़्यादा है। अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों में, क्रमशः 87% और 88% लोग मांस खाते हैं, जबकि अन्य समूहों में यह आंकड़ा 72% है।</p>
<p><strong>ग्रामीण परिवारों में, मांस पर खाद्य व्यय का हिस्सा आय के साथ बढ़ता है। कुछ राज्यों में औसत खाद्य व्यय का एक बड़ा हिस्सा मांस पर खर्च होता है। उदाहरण के लिए, पूर्वोत्तर राज्य अपने खाद्य बजट का लगभग 20-25% हिस्सा अंडे, मछली और मांस पर खर्च करते हैं &#8211; जो देश में सबसे ज्यादा है। पश्चिम बंगाल और केरल में खाद्य बजट का 20% से ज़्यादा हिस्सा मांस पर खर्च होता है। दरअसल, केरल, गोवा और नागालैंड में मांस पर खर्च सब्जियों पर खर्च से दोगुना है। हालाँकि, शहरी क्षेत्रों में, यह प्रवृत्ति उलट है, जहाँ सबसे धनी समूह मांस की वस्तुओं पर शुद्ध खाद्य व्यय का एक छोटा हिस्सा खर्च करते हैं। कुछ राज्यों में औसत खाद्य व्यय का एक बड़ा हिस्सा मांस पर खर्च होता है। उदाहरण के लिए, पूर्वोत्तर राज्य अपने खाद्य बजट का लगभग 20-25% हिस्सा अंडे, मछली और मांस पर खर्च करते हैं &#8211; जो देश में सबसे ज़्यादा है। पश्चिम बंगाल और केरल में खाद्य बजट का 20% से ज़्यादा हिस्सा मांस पर खर्च होता है। दरअसल, केरल, गोवा और नागालैंड में मांस पर खर्च सब्जियों पर खर्च से दोगुना है।</strong></p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/business/about-73-of-people-in-india-have-protein-deficiency">​अंडा क्या जाने मुर्गी का क्या होगा? 😢 क्योंकि एक मुर्गी/मुर्गा 160/180 ग्राम प्रोटीन का मालिक होता है और भारत में तक़रीबन 73 फीसदी लोगों में प्रोटीन की कमी नहीं, किल्लत है 😢</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>मोहब्बत के कई किस्से, अफ़साने लिखने वाला भारत के लोगों का घरों का छत अब सोलर पैनेल लगने/लगाने के लिए सज्ज हो रहे हैं</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 23 Jan 2024 05:11:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यापार]]></category>
		<category><![CDATA[electicity]]></category>
		<category><![CDATA[generation]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली: यह अलग बात है कि आज़ादी के 76 वर्ष बाद आज भी तक़रीबन 1.77 मिलियन भारतीयों (मतदाता सहित) को अपना सर छुपाने के लिए &#8216;छत&#8217; नहीं है। लेकिन इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि &#8216;छत&#8217;, चाहे &#8216;कनस्तर से ढंका वाला हो या संगमरमर पत्थर से निर्मित चकचकाता, चमचमाता [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली: यह अलग बात है कि आज़ादी के 76 वर्ष बाद आज भी तक़रीबन 1.77 मिलियन भारतीयों (मतदाता सहित) को अपना सर छुपाने के लिए &#8216;छत&#8217; नहीं है। लेकिन इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि &#8216;छत&#8217;, चाहे &#8216;कनस्तर से ढंका वाला हो या संगमरमर पत्थर से निर्मित चकचकाता, चमचमाता हो; &#8216;मोहब्बत करने वालों को काफी मदद करते आया है मुद्दत से। मोहब्बत के कई किस्से और अफ़साने छत पर ही लिखे गए हैं। आज छत फिर से अपनी भूमिका निभाने के लिए सज्ज हो रहा है।</strong>   </p>
<p>नौ साल पहले जश्ने आज़ादी मनाने के तीसरे दिन जब कोचीन अंतराज्यीय हवाई अड्डा विश्व के लगभग 44000+ हवाई अड्डों में अपना नाम सबसे ऊपर लिखा, तो यह देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के साथ-साथ प्रधान मंत्री कार्यालय से जुड़े बड़े-बड़े वैज्ञानिकों के लिए कोचीन हवाई अड्डा का यह प्रयास एक &#8216;शोध&#8217; के विषय के साथ-साथ &#8216;क्रियान्वयन&#8217; का विषय भी हो गया।  </p>
<p>विगत 18 अगस्त, 2015 को कोचीन अंतराज्यीय हवाई अड्डा दुनिया का पहला सौर ऊर्जा संचालित हवाई अड्डा बना था। भारत ही नहीं, विश्व के कोने-कोने से प्रकाशित अख़बारों में, पत्रिकारों में यह प्रकाशित हुआ। टीवी चैनलों पर दिखाया गया। वैसे बिजली के मामले में, रौशनी के मामले में भारत का अपना एक अलग इतिहास है, लेकिन प्रधानमंत्री अयोध्या में श्रीराम की प्रतिमा स्थापित करने के बाद कल भारत के लोगों से आग्रह किया कि वे स्वहित में, राष्ट्र के सम्मानार्थ, बिजली उत्पादन के मामले में &#8216;स्वावलंबी&#8217; बनें। आह्वान &#8216;राजनीतिक&#8217; भी हो सकता है, लेकिन &#8216;राष्ट्रहित&#8217; में बेहतर लगता है। </p>
<figure id="attachment_5269" aria-describedby="caption-attachment-5269" style="width: 2039px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/2-4.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/2-4.jpg" alt="" width="2039" height="1387" class="size-full wp-image-5269" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/2-4.jpg 2039w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/2-4-300x204.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/2-4-1024x697.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/2-4-768x522.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/2-4-1536x1045.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2039px) 100vw, 2039px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5269" class="wp-caption-text">प्रधानमंत्री ने 22 जनवरी, 2024 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री सूर्योदय योजना लॉन्च करने के लिए एक बैठक की अध्यक्षता की।</figcaption></figure>
<p>एक और जहाँ देश में कोयला आधारित बिजली उत्पादन में पिछले कुछ वर्षों में तक़रीबन आठ से दस फीसदी की वृद्धि का दावा किया जा रहा, और यह भी दवा किया जा रहा है कि आज भी बिजली निर्माण का प्रमुख स्रोत कोयला ही है, जो कुल बिजली उत्पादन का 70 फीसदी से अधिक है; प्रधानमंत्री भगवान् राम की ऐतिहासिक मूर्ति को उनके जन्मभूमि अयोध्या में स्थापित करने के बाद भारत के लोगों से निवेदन किया है कि बिजली की बढ़ती खपत के मद्दे नजर अपने-अपने छतों पर सोलर पैनल लगाएं, बिजली का उत्पादन करें और बिजली के मालमे में स्वावलबी हो जाएँ। </p>
<p>अगर आंकड़े पर नजर दिया जाय तो भारत में कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता उपयोगिता क्षमता, कैप्टिव बिजली क्षमता और अन्य गैर-उपयोगिताओं का योग 31 मार्च 2022 तक 482.232 गीगावॉट था, जो स्वाभाविक रूप से बढ़ा ही होगा। खर्च के दृष्टिकोण से भारत में बिजली का खर्च विश्व के किसी भी देश से कम नहीं है। आंकड़ों के अनुसार, चीन दुनिया के किसी भी देश की तुलना में अब तक सबसे अधिक बिजली की खपत करता है। </p>
<p>बिजली के मामले में भारत के प्रत्येक घरों में रहने वाले लोगों को स्वावलंबी बनाने सम्बन्धी एक प्रयास &#8211; &#8216;प्रधानमंत्री सूर्योदय योजना&#8221; &#8211; वाली बैठक की अध्यक्षता करते प्रधानमंत्री ने सोलर बिजली उत्पादन पर अधिक बल दिया। अपने आवास पर 1 करोड़ घरों पर रूफटॉप सौर ऊर्जा स्थापित करने के लक्ष्य के साथ &#8220;प्रधानमंत्री सूर्योदय योजना&#8221; शुरू करने के लिए एक बैठक की अध्यक्षता की।</p>
<figure id="attachment_5270" aria-describedby="caption-attachment-5270" style="width: 1945px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122151057-scaled.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122151057-scaled.jpg" alt="" width="1945" height="2560" class="size-full wp-image-5270" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122151057-scaled.jpg 1945w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122151057-228x300.jpg 228w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122151057-778x1024.jpg 778w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122151057-768x1011.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122151057-1167x1536.jpg 1167w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122151057-1556x2048.jpg 1556w" sizes="auto, (max-width: 1945px) 100vw, 1945px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5270" class="wp-caption-text">प्रधानमंत्री ने 22 जनवरी, 2024 को अयोध्या में राम लला की &#8216;प्राण प्रतिष्ठा&#8217; के अवसर पर दिल्ली में अपने आवास पर &#8216;राम ज्योति&#8217; जलाई।</figcaption></figure>
<p><strong>प्रधानमंत्री ने बैठक के दौरान कहा कि सूर्य की ऊर्जा का उपयोग छत वाले प्रत्येक घर द्वारा अपने बिजली के बिल को कम करने और उन्हें अपनी बिजली की जरूरतों के लिए वास्तव में आत्मनिर्भर बनाने के लिए किया जा सकता है। प्रधानमंत्री सूर्योदय योजना का लक्ष्य निम्न और मध्यम आय वाले व्यक्तियों को रूफटॉप सौर ऊर्जा की स्थापना के माध्यम से बिजली उपलब्ध करना है, साथ ही अतिरिक्त बिजली उत्पादन के लिए अतिरिक्त आय का अवसर उपलब्ध करना है।</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि आवासीय क्षेत्र के उपभोक्ताओं को बड़ी संख्या में रूफटॉप सौर ऊर्जा अपनाने को लेकर प्रेरित करने के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय अभियान शुरू किया जाना चाहिए। वजह यह है कि देशभर में बिजली की खपत लगातार बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2022 में भारत में कुल सालाना बिजली खपत 1300 बिलियन किलोवाट घंटा (kWh) को पार कर गया। ये वित्त वर्ष 2012 के मुकाबले करीब 70 फीसदी ज्यादा है। एक स्टडी के अनुसार तेजी से बढ़ी बिजली खपत की वजह औद्योगिक और घरेलू क्षेत्र हैं। देशभर के घरों में बिजली का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।</p>
<p>बिजली मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार देशभर में सबसे ज्यादा बिजली खपत महाराष्ट्र में है। गुजरात दूसरे नंबर पर है। इसके बाद यूपी, तमिलनाडु और ओडिशा देश में सबसे ज्यादा बिजली खपत करने वाले राज्यों में आते हैं। बिजली मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि साल 2022 में भारत की सालाना बिजली खपत 2012 के मुकाबले 530 बिलियन यूनिट (BU) से ज्यादा बढ़ गया है। खपत के मामले में बिहार में सबसे तेजी देखी गई, यहां बिजली खपत 2012 में 6 बीयू से 27 बीयू हो गई। ये 10 साल में 350% बढ़ गई। </p>
<p>2022 में बिहार में मासिक बिजली खपत के मामले में 2012 की तुलना में 6 गुना बिजली की खपत की। इसके अलावा मध्य प्रदेश और ओडिशा में भी बिजली खपत दोगुनी हो गई है। जबकि केंद्र शासित राज्यों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 2012 और 2022 के बीच 200% की वृद्धि हुई है। गोवा में हर महीने एक परिवार करीब 267.3 kWh बिजली की खपत करता है, ये असम (48.5 kWh) की तुलना में पांच गुना ज्यादा है। भले ही पूर्वोत्तर राज्यों में 2012-2022 के दौरान अपनी घरेलू बिजली खपत को दोगुना से ज्यादा कर दिया। </p>
<p>साल 2012 से 2022 तक सालाना 7.1% की उच्चतम दर से बिजली की खपत में इजाफा हुआ है, इसमें उद्योगों का सबसे बड़ा योगदान है। बिजली खपत में औद्योगिक क्षेत्र की 39% हिस्सेदारी थी, घरेलू उपयोगकर्ताओं की हिस्सेदारी 32% थी और कृषि में बिजली की मांग का हिस्सा 16 फीसदी था। औद्योगिक बिजली खपत में गुजरात, ओडिशा, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और छत्तीसगढ़ सबसे ऊपर है। इन राज्यों में 2022 में इस क्षेत्र में की गई कुल खपत का 50% से ज्यादा हिस्सा लिया। भारत का कुल घरेलू बिजली खपत 2012-2022 के दौरान 171 BU से 340 BU में बढ़ गया।  कृषि के लिए, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना, महाराष्ट्र और यूपी ने उसी अवधि में लगभग 90 BU की ऊर्जा मांग की कुल वृद्धि का 75% का हिस्सा लिया।</p>
<p>बहरहाल, कलकत्ता में बिजली की रौशनी का पहला प्रदर्शन 24 जुलाई 1879 को पीडब्लू फ्लेरी एंड कंपनी द्वारा आयोजित किया गया था। 7 जनवरी 1897 को, किलबर्न एंड कंपनी ने इंडियन इलेक्ट्रिक कंपनी के एजेंट के रूप में कलकत्ता इलेक्ट्रिक लाइटिंग लाइसेंस हासिल किया, जो पंजीकृत था।कलकत्ता में बिजली की शुरूआत सफल रही और इसके बाद बंबई में बिजली की शुरुआत की गई। मुंबई में पहला विद्युत प्रकाश प्रदर्शन 1882 में क्राफर्ड मार्किट में हुआ था और बॉम्बे इलेक्ट्रिक सप्लाई और ट्रामवेज़ कंपनी ने 1905 में ट्रामवे के लिए बिजली प्रदान करने के लिए एक उत्पादन स्टेशन स्थापित किया था।</p>
<p>भारत में पहली जलविद्युत स्थापना 1897 में दार्जिलिंग नगर पालिका के लिए एक चाय बागान में स्थापित की गई थी। एशिया में पहली बिजली स्ट्रीट लाइट 5 अगस्त 1905 को बैंगलोर में जारी थी। देश में पहली इलेक्ट्रिक ट्रेन 3 फरवरी 1925 को बॉम्बे के विक्टोरिया टर्मिनस और कुर्ला के बीच हार्बर लाइन पर चली थी।  देश में  भारत की पहली हाई-वोल्टेज प्रयोगशाला सरकारी इंजीनियरिंग में स्थापित की गई थी 1947 में। 18 अगस्त 2015 को, कोचीन अंतराज्यीय हवाई अड्डा दुनिया का पहला सौर ऊर्जा संचालि हवाई अड्डा बन गया। </p>
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		<title>MV Ganga Vilas makes history in India’s River Cruise sector; completes maiden trip at Dibrugarh</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 01 Mar 2023 11:21:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यापार]]></category>
		<category><![CDATA[Banaras]]></category>
		<category><![CDATA[dibrugarh]]></category>
		<category><![CDATA[ganga]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>DIBRUGARH: The Prime Minister, Shri Narendra Modi has expressed happiness after Ganga Vilas cruise completes its maiden journey at Dibrugarh. In response to a tweet by the Cabinet Minister of Ports, Shipping and Waterways, the Prime Minister said; &#8220;A special journey completes! I hope more tourists from India and overseas take part in the Ganga [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>DIBRUGARH: The Prime Minister, Shri Narendra Modi has expressed happiness after Ganga Vilas cruise completes its maiden journey at Dibrugarh. In response to a tweet by the Cabinet Minister of Ports, Shipping and Waterways, the Prime Minister said; &#8220;A special journey completes! I hope more tourists from India and overseas take part in the Ganga Vilas cruise.&#8221;</p>
<p>Earlier, welcoming ‘MV Ganga Vilas’, the world’s longest river cruise at its culminating destination in Dibrugarh, Shri Sarbananda Sonowal,  Minister of Ports, Shipping and Waterways (MoPSW) hailed it as a historic and path-breaking event to be witnessed in the Inland Waterways sector since India’s Independence 75 years ago.</strong></p>
<p>MV Ganga Vilas arrived at Bogibeel at 02:30 PM on February 28; as the dignitaries led by the Union Minister Sarbananda Sonowal accorded a warm welcome to all the 28 foreign tourists travelling onboard. With the successful end of its maiden journey covering a distance of over 3200 kms, the MV Ganga Vilas opens up a new vista of opportunity in the river tourism potential in the entire South Asia region.</p>
<p>Earlier, the Prime Minister, Shri Narendra Modi flagged off MV Ganga Vilas &#8211; the first indigenously made cruise vessel in India &#8211; from Varanasi on January 13, 2023. Built with a unique design and a futuristic vision, the cruise has three decks and 18 suites on board with a capacity of 36 tourists. It is already booked for to and fro journey for the next two years. During this epoch making journey, the tourists travelling onboard had an opportunity to travel via iconic places like Patna Sahib, Bodh Gaya, Vikramshila, Dhaka, the Sunderbans and the Kaziranga before reaching Dibrugarh in Assam today.</p>
<p>Speaking on this historic moment, Shri Sonowal said, “The successful completion of world longest river cruise, MV Ganga Vilas, has exemplified how India under the leadership of PM Shri Narendra Modi ji is ready to explore newer horizons to unlock value for the country. The robustness of the ship during the course of this journey shows how our tremendous strength in ship building capacity is a world class enterprise. The successful cruise movement as well as cargo movement on inland waterways is a testament to the vision of PM Modi ji to bring about transformation through transportation. We continue to work under the dynamic leadership of PM Modi ji towards achieving Maritime India Vision, 2030; Sagarmal by 2035 along with PM Gati Shakti National Master Plan and National Logistics Policy. Today, we have realised another milestone to unlock tremendous potential in blue economy of India.”</p>
<figure id="attachment_4785" aria-describedby="caption-attachment-4785" style="width: 1024px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/03/2.jpeg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/03/2.jpeg" alt="" width="1024" height="682" class="size-full wp-image-4785" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/03/2.jpeg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/03/2-300x200.jpeg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/03/2-768x512.jpeg 768w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></a><figcaption id="caption-attachment-4785" class="wp-caption-text">Sarbananda Sonowal,  Minister of Ports, Shipping and Waterways (MoPSW) welcoming MV Ganga Vilas after its arrival</figcaption></figure>
<p>Speaking on the huge boost to the river economy in the Northeast region, Shri Sonowal said, “Our glorious history of riverine trade is set to be reclaimed with the successful completion of world longest river cruise here today. With the visionary leadership of PM Narendra Modi ji, we have reclaimed our access from Brahmaputra to international marine trade routes via Indo Bangladesh Protocol Route (IBPR) &#038; coastal ecosystem. The entire riverine economy through Arth Ganga has received a magnificent boost through the success of this River Cruise.The dream of Hon’ble Prime Minister for an alternate transport which is economical, safe &#038; environmentally sustainable has been truly realised with this success today. I firmly believe that by investing more in river transportation, we can make Modi ji’s noble initiative of Net Zero &#8211; with considerable reduction in pollution, economical option. As the Northeast India gets ready to power the engine of growth of India with its rich riverine system, I am sure the historic city of Dibrugarh &#038; the whole region remains excited about the trade &#038; commercial potential it carries forth in the ensuing days.”</p>
<p>MV Ganga Vilas’ has put India and Bangladesh on the river cruise map of the world. It has opened a new vista and vertical for tourism and freight carriage in Indian sub-continent. Tourists, both domestic and global who would like to experience spirituality now have the opportunity to visit destinations like Kashi, Bodh Gaya, Vikramshila, Patna Sahib and those who want to explore the natural diversity will cover destinations like Sundarbans and Kaziranga. Through this route tourists have an immersive expedition while exploring the art, culture, history, and spirituality of both India and Bangladesh.</p>
<p>Shri Sarbanda Sonowal congratulated everyone who has contributed in the success of the world’s longest river cruise journey by MV Ganga Vilas’s and encouraged all other private sector operators to identify the river cruise circuits of their choice on various waterways and to enter this nascent sector and be a part of river cruise tourism ecosystem in the country for the wider prosperity of the country specially North Eastern Region. He appeal to all entrepreneurs and trade leaders to work together for reaping benefit from waterways.</p>
<p>The seamless movement of MV Ganga Vilas has established the viability of seamless movement of vessels between Ganga Valley and Brahmaputra Valley; i.e., from Varanasi to Dibrugarh via Kolkata using the IBPR. For the Northeast India, the major highlight of MV Ganga Vilas’s successful voyage is the opportunity to use the inland waterways to reach the sea ports and access to the world of international trade routes.</p>
<p>Speaking on the occasion, the Union Minister of State for Ports, Shipping &#038; Waterways and Tourism Shripad Yesso Naik, said, “The success of MV Ganga Vilas in completing world longest river cruise establish the commitment of the Modi government to renew possibilities for holistic development of the country. The potential of river cruise tourism has been proven huge with the success of Ganga Vilas. The encouraging response from foreign tourists to explore India via river ways is a wonderful avenue for the tourism sector of the country while the peripheral riverine economy of the country is also likely to get a boost.”</p>
<figure id="attachment_4786" aria-describedby="caption-attachment-4786" style="width: 1024px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/03/1.jpeg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/03/1.jpeg" alt="" width="1024" height="682" class="size-full wp-image-4786" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/03/1.jpeg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/03/1-300x200.jpeg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/03/1-768x512.jpeg 768w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></a><figcaption id="caption-attachment-4786" class="wp-caption-text">Sarbananda Sonowal,  Minister of Ports, Shipping and Waterways (MoPSW) welcoming MV Ganga Vilas after its arrival</figcaption></figure>
<p>Under the Jal Marg Vikas Project of the Ministry of Ports, Shipping &#038; Waterways (MoPSW), the Narendra Modi government is investing more than ₹6,000 crores to revamp the inland waterways through Arth Ganga and Mahabahu Brahmaputra projects. This is pivotal to the all round development of the Northeast India.</p>
<p>Speaking on the occasion, the Union Minister of State for Ports, Shipping &#038; Waterways, Shri Shantanu Thakur said, “The focus on the development of east India, particularly the Northeast, has been a major initiative by the Honourable Prime Minister Shri Narendra Modi ji. With the success of Ganga Vilas voyage, the entire region &#8211; from Varanasi to Kolkata and upto Dibrugarh &#8211; is likely to receive a boost in terms of riverine potential. The success of cargo and passenger voyage has opened up a new door of opportunity for the trading community of the region. The affordable, efficient and environment friendly inland water transportation is going to play a crucial role in ensuring a sustainable growth in the region.”</p>
<p>The event was also graced by His Excellency, Honourable Minister of State, Ministry of Shipping (I/C), Government of Bangladesh, Mr Khalid Mahmud Chowdhury; the Union Minister of State for Ports, Shipping &#038; Waterways and Tourism, Shripad Yesso Naik; the Union Minister of State for Labour &#038; Employment and Petroleum &#038; Natural Gas; the Union Minister of State for Education and External Affairs, Dr Rajkumar Ranjan; the Union Minister of State for ports, Shipping &#038; Waterways, Shantanu Thakur; the Minister of Tourism, Public Health Engineering (PHE), Skill Development, Employment &#038; Entrepreneurship, Government of Assam, Jayanta Malla Baruah; the MP (Lok Sabha), Arunachal East, Tapir Gao; the MP (Lok Sabha), Lakhimpur, Pradan Baruah among many MLAs and other dignitaries including Sudhansh Pant, Secretary, Ministry of Ports, Shipping &#038; Waterways; Sanjay Bandopadhyay, Chairman, Inland Waterways Authority of India (IWAI) participated in this historic event today.</p>
<p>Freight movement through ship is cheaper than other means of transport. A goods train can carry 2000 metric tons (MT) in a single run, while a ship can carry 60,000 to 80,000 MT and as such the volume of transportation through ship makes the whole freight cost effective. Carrying such huge volume of coal through ship is helping in feeding many power stations at a time and keep them functional without break and hence it is always cheaper through ship than any other means. The pricing of freight per MT through roadways is Rs. 1.5 and through railways is Rs. 1.25 while through shipping is Rs. 0.6. From 2004 to 2014, the coastal cargo growth was 25% while in the last years the registered growth has been 77% that too in just eight years, and this could become possible because of our PM’s vision and proper implementation of the policies which was then supported by the concerned ministries by putting their best possible efforts.</p>
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