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	<title>tourism Archives - आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</title>
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	<description>आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</description>
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		<title>&#8216;एयर इंडिया&#8217; समूह के अलावे &#8216;इंडिगो&#8217; और &#8216;आकाशा&#8217; के बेड़े में अगले आठ वर्षों में 1976 विमान शामिल होंगे</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 07 Aug 2024 11:00:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
		<category><![CDATA[air india]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली: एक ओर जहाँ एक विशेष रूप से सक्षम बच्चे और उसके माता-पिता को विमान में चढ़ने से रोकने की एक घटना को लेकर तथ्य-खोज समिति ने एयर लाइन पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया था, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई में &#8216;उड़े देश का आम नागरिक&#8217; विमान-परिवहन के क्षेत्र में अपना कीर्तिमान स्थापित करने जा रहा है और आगामी 2032 तक लगभग 1976 नए विमान &#8216;एयर इंडिया&#8217; समूह के [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली: एक ओर जहाँ एक विशेष रूप से सक्षम बच्चे और उसके माता-पिता को विमान में चढ़ने से रोकने की एक घटना को लेकर तथ्य-खोज समिति ने एयर लाइन पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया था, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई में &#8216;उड़े देश का आम नागरिक&#8217; विमान-परिवहन के क्षेत्र में अपना कीर्तिमान स्थापित करने जा रहा है और आगामी 2032 तक लगभग 1976 नए विमान &#8216;एयर इंडिया&#8217; समूह के अलावे &#8216;इंडिगो&#8217; और &#8216;आकाशा एयर&#8217; के बेड़े में शामिल होने की सम्भावना है। </strong></p>
<p>नागरिक उड्डयन मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री मुरलीधर मोहोल ने कहा कि एयर इंडिया समूह द्वारा विभिन्न प्रकार के विमानों का आदेश दिया गया है जिसमें ए320/ए321 (210), ए350 (40), बी 787 (20), बी 777 (10), बी७३७-8 (190 ) शामिल हैं। इन आदेशित विमानों में अब तक 51 विमान का आयात किया जा चुका है जिसमें ए320/ए321 के 23 विमान और बी737 &#8211; 8  के 22 विम्मान प्रमुख हैं। इसके अलावे ए 350 के 6 विमान भी आयत हुए हैं। इन विमानों को 2023 और 2032 के बीच बडे में शामिल होने की सम्भावना है।</p>
<p><strong>इसी तरह इंटरग्लोब एविएशन लिमिटेड (इंडिगो) द्वारा ए 320 समूह के 2015 में 400, 2019 में 300 और 2023 में 500 विमानों का आदेश दिया गया है। इसी वर्ष ए 350 के लिए 30 और एटीआर212 ए (600 संस्करण) के लिए 2017 में 50 विमानों का आदेश दिया गया है। आकाशा एयर भी 13737-8  के लिए 76 और बी 737-8 के लिए 150 विमानों का आदेश दिया है। ये सभी विमान 2027-2028 से 2032 तक बेडे में शामिल किये जायेंगे। </strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि  एयरलाइन ऑपरेटरों द्वारा विमानों को शामिल करने के साथ-साथ लीज़ अवधि की समाप्ति के अनुरूप उनके मौजूदा विमानों की पुनः डिलीवरी/निर्यात भी किया जाएगा। इसलिए विमानों को शामिल करने से एयरलाइन बेड़े में वृद्धि के साथ-साथ समय के साथ मौजूदा बेड़े के प्रतिस्थापन की भी पूर्ति होगी।घरेलू एमआरओ उद्योग और विमानन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने घोषणा की है कि विमानों के पुर्जों, कंपोनेंट, जांच उपकरणों, औजारों और टूल-किट के आयात पर, चाहे उनका एचएसएन वर्गीकरण कुछ भी हो, 5 प्रतिशत की एक समान दर से आईजीएसटी लागू होगा, बशर्ते कि यह निर्दिष्ट शर्तों के अधीन हो। यह नीतिगत बदलाव भारतीय एमआरओ क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने, नवोन्मेषण और दक्षता को बढ़ावा देने तथा एक मजबूत एवं कुशल विमानन क्षेत्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।</p>
<p>वाणिज्यिक पायलट लाइसेंस के मामले में मुरलीधर मोहोल ने कहा कि  पिछले पांच वर्ष के दौरान 5710 वाणिज्यिक पायलट लाइसेंस (सीपीएल) निर्गत किये गए हैं।नागरिक उड्डयन मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री मुरलीधर मोहोल के अनुसार  इन पांच वर्षों में सबसे अधिक संख्या 1622 साल 2023 में निर्गत किया गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष 17 जुलाई तक 739 वाणिज्यिक पायलट लाइसेंस निर्गत किये गए हैं। यह संख्या 2019 में 744, 2020 में 578, 2021 में 862 और 2022 में 1165 थी। सूत्रों के अनुसार सरकार भारतीय विमानन क्षेत्र के समग्र विकास हेतु अनुकूल परितंत्र प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय नागरिक विमानन नीति, 2016 तैयार की है। इसमें ग्रीनफील्ड परियोजनाओं के साथ-साथ उड़ान योजना के तहत हवाई अड्डों के बुनियादी ढांचे का विकास शामिल है।</p>
<p>श्री मोहोलो के अनुसार भारतीय विमानन क्षेत्र में पायलटों/चालकों की कोई कमी नहीं है। हालांकि, कुछ विमानों पर कमांडरों की कमी है और विदेशी एयर क्रू अस्थायी प्राधिकरण (एफएटीए) जारी करके विदेशी पायलटों का इस्तेमाल करते हुए इसका प्रबंधन किया जा रहा है। देश में प्रशिक्षित पायलटों की संख्या बढ़ाने के लिए, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) ने एक उदार उड़ान प्रशिक्षण संगठन (एफटीओ) नीति लाई है। इसके तहत हवाई अड्डा रॉयल्टी (एफटीओ की ओर से एएआई को राजस्व हिस्सेदारी का भुगतान) की अवधारणा को समाप्त कर दिया गया है और भूमि किराये को काफी हद तक युक्तिसंगत बनाया गया है।</p>
<p>उधर, डीजीसीए ने विनियमन अनुमोदित बुनियादी रखरखाव प्रशिक्षण संगठन सीएआर-147 (बेसिक) जारी किया है। यह विनियमन आईसीएओ यानी ईएएसए विनियमन के अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हैं। सीएआर-147 (बेसिक) अनुमोदित संस्थान के तहत प्रशिक्षण पूरा करने और अपेक्षित डीजीसीए परीक्षा उत्तीर्ण करने पर छात्र विमान रखरखाव इंजीनियर (एएमई) लाइसेंस हासिल करने के पात्र हो जाते हैं।वर्तमान में, डीजीसीए ने सीएआर-147 (बेसिक) के तहत 57 एएमई प्रशिक्षण संस्थानों को मंजूरी दी है। सीएआर 147 (बेसिक) के तहत अनुमोदित एएमई प्रशिक्षण संस्थान से अनुमानित आपूर्ति लगभग 3500 प्रति वर्ष है, जो भारतीय नागरिक विमानन उद्योग की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।</p>
<p>नागरिक उड्डयन मंत्रालय का कहना है कि 2021 में, एक प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के बाद, एएआई ने बेलगावी (कर्नाटक), जलगांव (महाराष्ट्र), कलबुर्गी (कर्नाटक), खजुराहो (मध्य प्रदेश) और लीलाबारी (असम) में पांच हवाई अड्डों पर नौ एफटीओ स्लॉट दिए। जून 2022 में, बोली के दूसरे दौर के तहत, एएआई ने पांच हवाई अड्डों पर छह एफटीओ स्लॉट भावनगर (गुजरात) में दो स्लॉट, और हुबली (कर्नाटक), कडप्पा (आंध्र प्रदेश), किशनगढ़ (राजस्थान) और सलेम (तमिलनाडु) में एक-एक स्लॉट दिए। डीजीसीए ने नवंबर 2021 से विमान रखरखाव इंजीनियरों (एएमई) और फ्लाइंग क्रू (एफसी) उम्मीदवारों के लिए ऑनलाइन-ऑन डिमांड परीक्षा (ओएलओडीई) शुरू की है। यह सुविधा उम्मीदवारों को उपलब्ध परीक्षा स्लॉट में से तिथि और समय चुनने की अनुमति देती है। डीजीसीए ने फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर को एफटीओ में उड़ान संचालन को अधिकृत करने का अधिकार देने के लिए अपने नियमों में संशोधन किया है। यह अब तक केवल मुख्य उड़ान प्रशिक्षक (सीएफआई) या डिप्टी सीएफआई तक ही सीमित था।</p>
<figure id="attachment_5636" aria-describedby="caption-attachment-5636" style="width: 1200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/moho.jpg"><img fetchpriority="high" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/moho.jpg" alt="" width="1200" height="763" class="size-full wp-image-5636" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/moho.jpg 1200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/moho-300x191.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/moho-1024x651.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/08/moho-768x488.jpg 768w" sizes="(max-width: 1200px) 100vw, 1200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5636" class="wp-caption-text">नागरिक उड्डयन मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री मुरलीधर मोहोल​और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनिस</figcaption></figure>
<p><strong>श्री मोहोलो के अनुसार केंद्रीय बजट 2024-25 में की गई घोषणाओं के तहत, मरम्मत के लिए आयात की गई वस्तुओं के निर्यात की अवधि छह महीने से बढ़ाकर एक वर्ष कर दी गई है। साथ ही, वारंटी के तहत मरम्मत के लिए वस्तुओं के पुनः आयात की समय-सीमा तीन से बढ़ाकर पांच वर्ष कर दी गई है। 1 सितंबर, 2021 को घोषित नए एमआरओ दिशानिर्देशों में रॉयल्टी को समाप्त करने और एएआई हवाई अड्डों में एमआरओ के लिए भूमि आवंटन में पारदर्शिता और निश्चितता लाने की बात की गई है।<br />
श्री मोहोलो के अनुसार  1 अप्रैल, 2020 से एमआरओ पर जीएसटी को पूर्ण इनपुट टैक्स क्रेडिट के साथ 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है। विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं (ओईएम)/एमआरओ द्वारा घरेलू एमआरओ को उप-अनुबंधित किए गए लेन-देन को 1 अप्रैल, 2020 से शून्य-रेट किए गए जीएसटी के साथ &#8216;निर्यात&#8217; माना जा रहा है। औजारों और टूल किटों पर सीमा शुल्क में छूट, पार्ट्स की सरलीकृत क्लियरेंस प्रोसेसिंग और एमआरओ के लिए ऑटोमैटिक रूट के माध्यम से 100 प्रतिशत विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की अनुमति भी प्रदान की गई है।</strong>  </p>
<p>आपको याद होगा कि श्री टी.जी. वेंकटेश की अध्यक्षता वाली परिवहन, पर्यटन और संस्कृति संबंधी स्थायी समिति ने 31 मार्च, 2022 को &#8216;नागरिक उड्डयन क्षेत्र में सुरक्षा से संबंधित मुद्दों&#8217; पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। उसी वर्ष नागर विमानन मंत्रालय के प्रमुख कार्यक्रम क्षेत्रीय संपर्क योजना उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) ने अपनी सफलता के 5 वर्ष पूरे कर लिये हैं। 27 अप्रैल, 2017 को प्रधानमंत्री ने इसकी पहली उड़ान शुरू की थी। इस कार्यक्रम का मूल उद्देश्य था क्षेत्रीय विमानन बाज़ार का विकास करना। छोटे शहरों में भी आम आदमी को क्षेत्रीय मार्गों पर किफायती, आर्थिक रूप से व्यवहार्य और लाभदायक हवाई यात्रा की सुविधा प्रदान करना। </p>
<p>श्री मोहोलो का कहना है कि वर्ष 2014 में 74 परिचालन हवाईअड्डे थे जो अब तक बढ़कर 141 हो गए हैं। उड़ान योजना के तहत 58 हवाईअड्डे, 8 हेलीपोर्ट और 2 वाटर एयरोड्रोम सहित 68 अंडरसर्व्ड/असेवित गंतव्यों को जोड़ा गया है। उड़ान ने 425 नए मार्गों की शुरुआत के साथ देश भर में 29 से अधिक राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों को हवाई संपर्क प्रदान किया है। 4 अगस्त, 2022 तक एक करोड़ से अधिक यात्रियों ने इस योजना का लाभ उठाया है। और उड़ान के तहत 220 गंतव्यों (हवाई अड्डे/हेलीपोर्ट/वाटर एयरोड्रोम) को वर्ष 2026 तक 1000 मार्गों के साथ पूरा करने का लक्ष्य है ताकि देश में असंबद्ध गंतव्यों के लिये हवाई संपर्क प्रदान किया जा सके। उड़ान के तहत, 156 हवाई अड्डों को जोड़ने के लिये 954 मार्ग पहले ही आवंटित किये जा चुके हैं।</p>
<p><strong>अपनी ख़ुशी जाहिर करते श्री मोहोलो ने कहाँ कि यदि देखा जाए तो संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के बाद भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाज़ार बनकर उभरा है। विमानन उद्योग ने एक उल्लेखनीय प्रगति करते हुए अपनी पूर्व सीमाओं को पार कर लिया है तथा यह एक जीवंत और प्रतिस्पर्द्धी क्षेत्र के रूप में विकसित हो रहा है। भारत के हवाई नेटवर्क में एक उल्लेखनीय परिवर्तन देखा गया है, इसके परिचालन हवाई अड्डों की संख्या वर्ष 2014 में 74 की तुलना में दोगुनी होकर अप्रैल 2023 में 148 हो गई है, जिससे लोगों की हवाई यात्रा तक पहुँच में वृद्धि हुई है।</strong></p>
<p>इतना ही नहीं, यह भी सत्य है कि हाल ही में फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA), अमेरिका के विमानन सुरक्षा नियामक ने विमानन सुरक्षा का मूल्यांकन किया और भारत के विमानन सुरक्षा निरीक्षण के &#8220;श्रेणी 1&#8221; दर्जे को बरकरार रखा है। FAA ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय को सूचित किया है कि भारत शिकागो अभिसमय और उसके अनुलग्नकों (Annexes ) के विमानन सुरक्षा निरीक्षण के लिये अंतर्राष्ट्रीय मानकों को पूरा करता है और FAA ने IASA श्रेणी 1 का दर्जा बनाए रखा है जिसका अंतिम मूल्यांकन जुलाई 2018 में किया गया था। </p>
<p>ज्ञातव्य है कि ICAO संयुक्त राष्ट्र की एक विशिष्ट एजेंसी है, जिसे वर्ष 1944 में स्थापित किया गया था, जिसने शांतिपूर्ण वैश्विक हवाई नेविगेशन के लिये मानकों और प्रक्रियाओं की नींव रखी।अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संबंधी अभिसमय/कन्वेंशन पर 7 दिसंबर, 1944 को शिकागो में हस्ताक्षर किये गए। इसलिये इसे शिकागो अभिसमय भी कहते हैं। ICAO का उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय हवाई परिवहन योजना के विकास को बढ़ावा देना है, ताकि विश्व भर में अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन के सुरक्षित और व्यवस्थित विकास को सुनिश्चित किया जा सके। इसके 193 सदस्यों में भारत भी शामिल है। </p>
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		<title>बुद्ध का विपरण और  बोधगया की सड़कों पर पेट-पीठ एक हुए रोता, बिलखता भिखारी😢</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 18 Jan 2024 10:45:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[संस्कृति]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली: विगत दिनों जब उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा है कि महात्‍मा बुद्ध की शिक्षाएं अतीत के स्‍मृति चिन्‍ह नहीं हैं, बल्कि वे हमारे भविष्य के लिए कम्‍पास की भांति दिशा-निर्देशक हैं। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि गौतम बुद्ध का शांति, सद्भाव और सह-अस्तित्व का संदेश नफरत और आतंक की ताकतों के खिलाफ खड़ा [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली: विगत दिनों जब उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा है कि महात्‍मा बुद्ध की शिक्षाएं अतीत के स्‍मृति चिन्‍ह नहीं हैं, बल्कि वे हमारे भविष्य के लिए कम्‍पास की भांति दिशा-निर्देशक हैं। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि गौतम बुद्ध का शांति, सद्भाव और सह-अस्तित्व का संदेश नफरत और आतंक की ताकतों के खिलाफ खड़ा है जिनसे विश्व को खतरा हैं। </strong></p>
<p>इसके आगे जब वे भारत को भगवान बुद्ध के सिद्धांतों द्वारा निर्देशित राष्ट्र बताया और फिर प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के उस वक्‍तव्‍य को दोहराया जहां उन्होंने कहा था, &#8220;हमें उस राष्ट्र से संबंधित होने पर गर्व है जिसने दुनिया को &#8216;बुद्ध&#8217; दिया है, न कि &#8216;युद्ध&#8217;- दस वर्ष पूर्व शिक्षक दिवस के अवसर पर बिहार के बोधगया में (5 सितम्बर, 2015) प्रधानमंत्री का वक्तव्य याद आ गया। </p>
<p>5 सितम्बर, 2015 को भारत के नवनिर्वाचित प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी बौद्ध की अनेकानेक गरिमाओं को उद्धृत किये थे। प्रधानमंत्री बनने के बाद श्री मोदी का पहला बिहार दौरा था। बिहार ही नहीं, बोधगया ही नहीं, सम्पूर्ण राष्ट्र के के लोगों में ख़ुशी की एक लहर जागृत हुयी थी कि प्रधानमंत्री की अगुआई में शायद इस प्रदेश का, बुद्ध के इस स्थल का कल्याण हो जाय। आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, बौद्धिक और अन्य संस्थागत विरासतों के उपस्थिति के बाबजूद बिहार का बोधगया के पिछड़ापन पर ध्यान जाय। </p>
<figure id="attachment_5216" aria-describedby="caption-attachment-5216" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/pm6.jpg"><img decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/pm6.jpg" alt="" width="2200" height="1439" class="size-full wp-image-5216" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/pm6.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/pm6-300x196.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/pm6-1024x670.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/pm6-768x502.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/pm6-1536x1005.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/pm6-2048x1340.jpg 2048w" sizes="(max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5216" class="wp-caption-text">5 सितम्बर, 2015 को भारत के नवनिर्वाचित प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी बुद्ध की नगरी बोधगया में</figcaption></figure>
<p><strong>उस दिन मंच पर बिहार के तत्कालीन राज्यपाल श्रो रामनाथ कोविंद भी उपस्थित थे। केंद्रीय मंत्री श्री किरण रिजिजू भी बैठे थे। उस उपस्थिति के बाद श्री कोविंद साहब की मुलाकात राष्ट्रपति भवन में ही हुई। एक पिछड़े प्रदेश के राज्यपाल से भारत के राष्ट्रपति के रूप में प्रोनत्ति बुद्ध से जुड़े सभी लोगों के मन में, खासकर बोधगया के दबे-कुचले, पिछड़े लोगों के मन में विश्वास की एक किरण जगी &#8211; शायद मेरा भी कल्याण होगा । समय गुजरता गया। </strong></p>
<figure id="attachment_5217" aria-describedby="caption-attachment-5217" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/pm4.jpg"><img decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/pm4.jpg" alt="" width="2200" height="1245" class="size-full wp-image-5217" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/pm4.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/pm4-300x170.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/pm4-1024x579.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/pm4-768x435.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/pm4-1536x869.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/pm4-2048x1159.jpg 2048w" sizes="(max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5217" class="wp-caption-text">5 सितम्बर, 2015 को भारत के नवनिर्वाचित प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी बुद्ध की नगरी बोधगया में</figcaption></figure>
<p>प्रधानमंत्री अपने दूसरे कालखंड में भी प्रवेश लिए। श्री कोविंद साहेब राष्ट्रपति के कार्यालय से अवकाश प्राप्त पर &#8216;पूर्व राष्ट्रपति&#8217; हो गए। जिस भवन में अवकाश के बाद (12 जनपथ), उस आवास के पूर्व मालिक (दिवंगत राम विलास पासवान) ने अपने जीवन काल में बुद्ध को राजनीतिक गलियारे में स्वहित में खूब घुमाये, खूब बेचे। परन्तु गौतम बुद्ध को, उनके शहर बोधगया को अपने ही जगह  वह स्थान नहीं मिला सका (अब तक भी) जिसका वह हकदार था, आज भी है। इसे कहते हैं &#8216;लाभ के लिए राजनीति&#8217;, लेकिन आज प्रदेश के लोगों की निगाहें प्रधानमंत्री पर टिकी है, एक विश्वास के साथ &#8211; बुद्ध का कल्याण होगा । </p>
<p><a href="https://www.youtube.com/watch?app=desktop&#038;v=9ka2ukd8NJM"></p>
<p>वैसी स्थिति में जब नई दिल्ली में शांति के लिए एशियाई बौद्ध सम्मेलन की 12वीं आम सभा में सभा को संबोधित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने टिप्पणी की कि नैतिक अनिश्चितता के युग में, बुद्ध की शिक्षाएं सभी के लिए स्थिरता, सादगी, संयम और श्रद्धा का मार्ग प्रशस्‍त करती हैं, देश के राष्ट्रनेताओं, राष्ट्राध्यक्षों के प्रति विश्वास की लकीरें ओझिल और बोझिल दोनो होंने लगी।उपराष्ट्रपति ने कहा कि महात्मा बुद्ध के उनके चार आर्य सत्य और अष्टांगिक मार्ग हमें आंतरिक शांति, करुणा और अहिंसा के मार्ग की ओर ले जाते हैं &#8211; जो आज के संघर्षों का सामना कर रहे व्यक्तियों और राष्ट्रों के लिए एक परिवर्तनकारी रोडमैप है। <strong>लेकिन इस बात को क्या बिहार के नेतागण समझ पाएंगे?</strong></p>
<figure id="attachment_5218" aria-describedby="caption-attachment-5218" style="width: 623px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/pm2.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/pm2.jpg" alt="" width="623" height="800" class="size-full wp-image-5218" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/pm2.jpg 623w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/pm2-234x300.jpg 234w" sizes="auto, (max-width: 623px) 100vw, 623px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5218" class="wp-caption-text">5 सितम्बर, 2015 को भारत के नवनिर्वाचित प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी बुद्ध की नगरी बोधगया में</figcaption></figure>
<p>यूनाइटेड नेशन्स एजुकेशनल, साइंटिफिक एंड कल्चरल आग्रेनाइजेशन (यूनेस्को) ने विश्व धरोहरों की संभावित सूची में जिन ऐतिहासिक विरासतों को शामिल किया है, उनमें बिहार की दो महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरें भी हैं। एक है &#8211; विश्व प्रसिद्ध नालंदा विश्वविद्यालय के भग्नावशेष और दूसरा है &#8211; शेरशाह सूरी का सासाराम स्थित मकबरा। इसके पहले, यूनेस्को की धरोहर-सूची में बिहार से एकमात्र बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर ही शामिल था।</p>
<p><strong>इन स्मारकों का बिहार और देश के लिए जो खास महत्त्व है, वह है बिहार के गौरवपूर्ण अतीत के साक्ष्य के तौर पर इनकी उपस्थिति। इतिहास में बिहार जिन कारणों से अहमियत रखता है, उनमें से एक है-महात्मा बुद्ध की तपोस्थली के रूप में इसकी पहचान। मौर्य और गुप्त साम्राज्य के साथ-साथ विश्व के संभवत: पहले गणराज्य के रूप में वैशाली का इतिहास बिहार की वह अहम पहचान है, जिसके आगे हर आख्यान, हर मिथक, हर किंवदती कम पड़ जाती है। </strong></p>
<figure id="attachment_5222" aria-describedby="caption-attachment-5222" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/pm1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/pm1.jpg" alt="" width="2200" height="2063" class="size-full wp-image-5222" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/pm1.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/pm1-300x281.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/pm1-1024x960.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/pm1-768x720.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/pm1-1536x1440.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/pm1-2048x1920.jpg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/pm1-24x24.jpg 24w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5222" class="wp-caption-text">The Prime Minister, Shri Narendra Modi being presented a memento, at the Mahabodhi Temple, in Bodh Gaya, Bihar on September 05, 2015.</figcaption></figure>
<p>बाद के वर्षो में अगर 1857 में कुंअर सिंह और पीर अली की भूमि के रूप में इसकी ख्याति रही तो आजादी के आंदोलन में चंपारण का विशेष महत्व रहा जिसने बैरिस्टर मोहनदास करमचंद गांधी को महात्मा गांधी बनने की राह पर ला खड़ा किया। आजादी के बाद एक बार फिर इस राज्य ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध जयप्रकाश आंदोलन के रूप में संपूर्ण क्रांति का आह्वान किया, जिसकी गूंज पूरे देश में सुनाई दी। लेकिन गौरवपूर्ण अतीत की परिणति कुछ दशक पहले इस रूप में हुई कि बिहार दीनता और आत्महीनता का प्रतीक बन गया। </p>
<p>बिहार में पौराणिक, धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों की प्रचुर सूचि है। हिन्दू, जैन, बौद्ध एवं सिख धर्म से जुड़े उपासना स्थलों के साथ-साथ इस्लाम की सूफी परंपरा से जुड़े अनेक स्थल यहां मौजूद हैं। राज्य पर्यटन निगम ने इस आधार पर वर्गीकरण भी किया है &#8211; बुद्ध संभाग, जैन संभाग, रामायण संभाग, सूफी संभाग, गांधी संभाग और इको संभाग। ढाई सौ से ज्यादा ऐसे पर्यटन स्थलों की समृद्ध सूची से उत्तर प्रदेश छोड़कर शायद ही कोई अन्य राज्य बिहार से बराबरी कर सकता है।  </p>
<figure id="attachment_5221" aria-describedby="caption-attachment-5221" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/pm.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/pm.jpg" alt="" width="2200" height="2039" class="size-full wp-image-5221" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/pm.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/pm-300x278.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/pm-1024x949.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/pm-768x712.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/pm-1536x1424.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/pm-2048x1898.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5221" class="wp-caption-text">The Prime Minister, Shri Narendra Modi writing on visitors&#8217; book at the Mahabodhi Temple, in Bodh Gaya, Bihar on September 05, 2015.</figcaption></figure>
<p><strong>पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए पहली जरूरत होती है पर्यटन स्थलों को उनके धार्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पर्यावरणीय महत्त्वों के आधार पर चिह्नित करना। उनकी महत्ताओं के बारे में अनेक माध्यमों से बार-बार बखान करना। इसमें राज्य के पर्यटन महकमे और सूचना प्रसार माध्यम की समन्वित भूमिका परिणामदायक होती है। इस मोर्चे पर आपराधिक उपेक्षा देखी जा रही है। </strong></p>
<p>इस सूचना क्रांति के युग में जब हाथ पुस्तक पलटने से ज्यादा माऊस पर जाते हैं; राज्य के सूचना विभाग, पर्यटन मंत्रालय एवं संस्कृति मंत्रालय की वेबसाइट जानकारियों के लिहाज से निराश करती हैं। वहां आठवीं कक्षा के इतिहास की पुस्तक जितनी भी जानकारी नहीं है। सरकारी साइटों से ज्यादा जानकारी विकिपीडिया या बिहार खोज खबर डॉट कॉम पर मिलती है। पर्यटन विकास निगम की वेबसाइट पर सरसरी नजर डालते समझ में आ जाता है कि विभाग की मंशा पर्यटकों को आकर्षित करने की तो नहीं ही है।</p>
<p>माना जाता है कि अगर आप मौलिक कुछ करने में सक्षम नहीं हों तो कोई बात नहीं, कम से कम अनुसरण की क्षमता तो होनी ही चाहिए। सरकारी साइटों पर जो जानकारी है, वह आधी-अधूरी है। पर्यटन निगम ने अपनी वेबसाइट पर जो जानकारी दी है, उसमें बौद्ध स्थल वैशाली, बोधगया, राजगीर,पावापुरी और नालंदा के साथ कुशीनगर का भी जिक्र है। कहना नहीं होगा कि कुशीनगर उत्तर प्रदेश में है। पहले यह गोरखपुर मंडल का हिस्सा हुआ करता था, अब स्वतंत्र जिला है। इसका बिहार से कोई मतलब नहीं है। </p>
<p>अब अगर इसे बुद्ध के निर्वाण स्थल के रूप में बुद्ध संभाग से जोड़ा गया है तो फिर सारनाथ, श्रावस्ती के साथ-साथ कपिलवस्तु (नेपाल) एवं लुंबिनी (नेपाल) ने क्या गलती की, जिसके कारण वे वेबसाइट पर स्थान नहीं पा सके? होना चाहिए था कि बुद्ध से जुड़े स्थलों को एक पैकेज के रूप में दिखाया जाता। इससे दुविधा नहीं होती।</p>
<figure id="attachment_5219" aria-describedby="caption-attachment-5219" style="width: 1085px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/2-1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/2-1.jpg" alt="" width="1085" height="720" class="size-full wp-image-5219" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/2-1.jpg 1085w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/2-1-300x199.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/2-1-1024x680.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/2-1-768x510.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1085px) 100vw, 1085px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5219" class="wp-caption-text">The Vice President and Chairman, Rajya Sabha, Shri Jagdeep Dhankhar interacting with visiting delegates at the 12th General Assembly of the Asian Buddhist Conference for Peace (ABCP), in New Delhi on January 17, 2024.</figcaption></figure>
<p>बहरहाल, श्री धनखड़ ने सेवा-संचालित शासन के भारत के दृष्टिकोण पर बुद्ध की शिक्षाओं के गहरे प्रभाव के बारे में जानकारी दी। उन्होंने रेखांकित किया कि कैसे ये सिद्धांत नागरिक कल्याण, समावेशिता और पर्यावरणीय स्थिरता को प्राथमिकता देने की देश की प्रतिबद्धता में एक मार्गदर्शक शक्ति के रूप में कार्य करते हैं। बुद्ध के कालातीत ज्ञान पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यह न केवल मनुष्यों के लिए बल्कि प्राणियों के लिए भी शांति का एक शक्तिशाली, सामंजस्यपूर्ण, संपूर्ण, निर्बाध मार्ग प्रदान करता है। आंतरिक शांति और अहिंसा को बढ़ावा देने में बुद्ध के चार आर्य सत्य और अष्टांगिक पथ की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए वे व्यक्तियों और राष्ट्रों को आंतरिक शांति, करुणा और अहिंसा की दिशा में मार्गदर्शन करने की उनकी क्षमता पर प्रकाश डाला।</p>
<p>12वीं महासभा की विषय-वस्तु &#8211; &#8220;शांति के लिए एशियाई बौद्ध सम्मेलन-ग्लोबल साउथ का बौद्ध स्‍वर&#8221; का उल्लेख करते हुए, श्री धनखड़ ने कहा कि यह विषय भारत की बढ़ती नेतृत्व भूमिका के अनुरूप है, जो ग्लोबल साउथ की समस्‍याओं को विश्‍व मंचों पर उठा रहा है। उन्होंने कहा कि जी-20 में भारत की अध्यक्षता से पता चलता है, भारत दुनिया की तीन-चौथाई आबादी वाले देशों की चिंताओं का प्रतिनिधित्व करने के लिए प्रतिबद्ध है।”</p>
<figure id="attachment_5220" aria-describedby="caption-attachment-5220" style="width: 2046px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/pm5.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/pm5.jpg" alt="" width="2046" height="1350" class="size-full wp-image-5220" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/pm5.jpg 2046w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/pm5-300x198.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/pm5-1024x676.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/pm5-768x507.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/pm5-1536x1013.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2046px) 100vw, 2046px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5220" class="wp-caption-text">The Prime Minister, Shri Narendra Modi Some glimpses from Mahabodhi Temple Feeling very blessed, in Bodhgaya, Patna on September 05, 2015.</figcaption></figure>
<p>श्री धनखड़ ने कहा कि भारत इसके लिए प्रतिबद्ध है कि विश्‍व की युवा पीढ़ी भगवान बुद्ध के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्‍त करे। उन्‍होंने बौद्ध सर्किट और भारत अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध संस्कृति केंद्र के विकास में भारत की सक्रिय भूमिका का उल्लेख करते हुए बताया कि इससे अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए बौद्ध विरासत स्थलों तक सुगम पहुंच को बढ़ावा दिया जा रहा है। सम्‍मेलन में केंद्रीय मंत्री श्री किरण रिजिजू, ,शांति के लिए एशियाई बौद्ध के अध्यक्ष डी चोइजामत्सडेम्बरेल, कंबोडिया के उप मंत्री डॉ. ख्यसोवनरत्न और विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/culture/marketing-of-gautam-buddha-and-neglected-bodhgaya">बुद्ध का विपरण और  बोधगया की सड़कों पर पेट-पीठ एक हुए रोता, बिलखता भिखारी😢</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>प्रधानमंत्री ने अजमेर और दिल्ली कैंट के बीच राजस्थान की पहली वंदे भारत एक्सप्रेस को झंडी दिखाकर रवाना किया</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/nation/pm-flags-off-rajasthans-first-vande-bharat-express-between-ajmer-and-delhi-cantt</link>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 12 Apr 2023 11:31:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[India]]></category>
		<category><![CDATA[narendramodi]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राजस्थान की पहली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को झंडी दिखाकर रवाना किया। सभा को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने वीर भूमि राजस्थान को अपनी पहली वंदे भारत ट्रेन मिलने पर बधाई दी, जो न केवल जयपुर-दिल्ली के बीच यात्रा को आसान बनाएगी, बल्कि [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राजस्थान की पहली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को झंडी दिखाकर रवाना किया। सभा को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने वीर भूमि राजस्थान को अपनी पहली वंदे भारत ट्रेन मिलने पर बधाई दी, जो न केवल जयपुर-दिल्ली के बीच यात्रा को आसान बनाएगी, बल्कि राजस्थान के पर्यटन उद्योग को भी बढ़ावा देगी, क्योंकि यह तीर्थराज पुष्कर और अजमेर शरीफ जैसी आस्था के स्थलों तक पहुंचने में मदद करेगी।</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री ने याद करते हुए कहा कि, पिछले दो महीनों में दिल्ली-जयपुर वंदे भारत एक्सप्रेस सहित देश में छह वंदे भारत ट्रेनों को झंडी दिखाने का अवसर मिला है। उन्होंने मुंबई-सोलापुर वंदे भारत एक्सप्रेस, मुंबई-शिर्डी वंदे भारत एक्सप्रेस, रानी कमलापति-हजरत निजामुद्दीन वंदे भारत एक्सप्रेस, सिकंदराबाद-तिरुपति वंदे भारत एक्सप्रेस और चेन्नई कोयम्बटूर वंदे भारत एक्सप्रेस का उदाहरण दिया। प्रधानमंत्री ने इस बात को रेखांकित किया कि वंदे भारत एक्सप्रेस की शुरुआत के बाद से लगभग 60 लाख नागरिकों ने इससे यात्रा की है। </p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा, &#8220;वंदे भारत की गति इसकी मुख्य विशेषता है और यह लोगों के समय की बचत कर रही है।“ प्रधानमंत्री ने कहा कि एक अध्ययन के अनुसार, जो लोग वंदे भारत एक्सप्रेस से यात्रा करते हैं, वे प्रत्येक यात्रा पर 2500 घंटे बचाते हैं। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि वंदे भारत एक्सप्रेस को विनिर्माण कौशल, सुरक्षा, तेज गति और सुंदर डिजाइन को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है। यह दोहराते हुए कि नागरिकों ने वंदे भारत एक्सप्रेस की बहुत सराहना की है, प्रधानमंत्री ने कहा कि एक्सप्रेस ट्रेन भारत में विकसित की जाने वाली पहली अर्ध-स्वचालित ट्रेन है और दुनिया की पहली सुगठित और कुशल ट्रेनों में से एक है। </p>
<p>श्री मोदी ने कहा, &#8220;वंदे भारत पहली ट्रेन है, जो स्वदेशी सुरक्षा प्रणाली, कवच के अनुकूल है।“ उन्होंने बताया कि यह पहली ट्रेन है, जो बिना किसी अतिरिक्त इंजन की आवश्यकता के सह्याद्री घाटों की ऊंचाइयों को पार कर सकती है। उन्होंने कहा, &#8220;वंदे भारत एक्सप्रेस &#8216;भारत प्रथम, हमेशा प्रथम&#8217; की भावना को साकार करती है।&#8221; प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि वंदे भारत एक्सप्रेस विकास, आधुनिकता, स्थिरता और &#8216;आत्मनिर्भरता&#8217; का पर्याय बन गई है।   </p>
<p>प्रधानमंत्री ने इस बात पर खेद व्यक्त किया कि रेलवे जैसी नागरिकों की एक महत्वपूर्ण और मूलभूत आवश्यकता को राजनीति का अखाड़ा बना दिया गया। उन्होंने कहा कि आजादी के समय भारत को काफी बड़ा रेलवे नेटवर्क विरासत में मिला था, लेकिन आजादी के बाद के वर्षों में आधुनिकीकरण की आवश्यकता पर राजनीतिक हित हावी रहे। रेल मंत्री के चयन, ट्रेनों की घोषणा और यहां तक कि भर्तियों में भी राजनीति साफ नजर आई। रेलवे की नौकरियों के झूठे बहाने देकर भूमि का अधिग्रहण किया गया और कई मानवरहित क्रॉसिंग बहुत लंबे समय तक चलते रहे तथा साफ़-सफाई एवं सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया गया। 2014 के बाद स्थिति बेहतर हुई, जब लोगों ने पूर्ण बहुमत के साथ एक स्थिर सरकार चुनी। उन्होंने कहा, &#8220;जब राजनीतिक लेन-देन का दबाव कम हुआ, तो रेलवे ने राहत की सांस ली और यह नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया।“</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र की सरकार राजस्थान को नए अवसरों की भूमि बना रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने कनेक्टिविटी के लिए अभूतपूर्व काम किया है, जो राजस्थान जैसे राज्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, जिसकी अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा पर्यटन है। श्री मोदी ने फरवरी में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के दिल्ली-दौसा-लालसोट खंड के लोकार्पण का उल्लेख किया। इस खंड से दौसा, अलवर, भरतपुर, सवाई माधोपुर, टोंक, बूंदी और कोटा जिलों को लाभ होगा। प्रधानमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार राजस्थान में सीमावर्ती क्षेत्रों में लगभग 1400 किलोमीटर लंबाई की सड़कों पर काम कर रही है और राज्य के लिए 1000 किलोमीटर से अधिक लंबाई की सड़कें प्रस्तावित हैं।</p>
<figure id="attachment_4853" aria-describedby="caption-attachment-4853" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/04/H20230412130100.jpeg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/04/H20230412130100.jpeg" alt="" width="2200" height="1251" class="size-full wp-image-4853" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/04/H20230412130100.jpeg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/04/H20230412130100-300x171.jpeg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/04/H20230412130100-1024x582.jpeg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/04/H20230412130100-768x437.jpeg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/04/H20230412130100-1536x873.jpeg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/04/H20230412130100-2048x1165.jpeg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-4853" class="wp-caption-text">जब रेलवे जैसी परिवहन-संपर्क की अवसंरचना मजबूत होती है, तो देश मजबूत होता है, इससे देश के आम नागरिक को लाभ होता है, देश के गरीब और मध्यम वर्ग को लाभ होता है: प्रधानमंत्री</figcaption></figure>
<p>राजस्थान में कनेक्टिविटी को दी जा रही प्राथमिकता को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने तरंगा हिल से अंबाजी तक रेलवे लाइन पर काम शुरू करने का उल्लेख किया। यह लाइन एक सदी पुरानी लंबित मांग थी, जिसे अब पूरा किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि उदयपुर-अहमदाबाद लाइन बड़ी लाइन बनाने का काम पूरा हो चुका है और 75 प्रतिशत से अधिक रेलवे नेटवर्क का विद्युतीकरण किया जा चुका है। श्री मोदी ने टिप्पणी की कि राजस्थान के लिए रेल बजट 2014 की तुलना में 14 गुना बढ़ा दिया गया है, जो 2014 के 700 करोड़ रुपये से बढ्कर इस वर्ष 9500 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। रेलवे लाइनों के दोहरीकरण की गति भी दोगुनी हो गयी है। रेल लाइन के आमान परिवर्तन और दोहरीकरण से डूंगरपुर, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, पाली और सिरोही जैसे आदिवासी क्षेत्रों को मदद मिली है। उन्होंने कहा कि अमृत भारत रेल योजना के तहत दर्जनों स्टेशनों का उन्नयन किया जा रहा है।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने बताया कि पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए, सरकार विभिन्न प्रकार की सर्किट ट्रेनों का भी परिचालन कर रही है और भारत गौरव सर्किट ट्रेनों का उदाहरण दिया। इन ट्रेनों ने अब तक 70 से अधिक यात्राएं की हैं और 15 हजार से अधिक यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचा चुकी है। प्रधानमंत्री ने कहा, “अयोध्या-काशी हो, दक्षिण दर्शन हो, द्वारका दर्शन हो, सिख तीर्थस्थल हों, ऐसे कई स्थानों के लिए भारत गौरव सर्किट ट्रेनें चलाई गई हैं।” प्रधानमंत्री ने कहा कि यात्रियों के सोशल मीडिया पर सकारात्मक प्रतिक्रिया को ध्यान में रखते हुए, यह कहा जा सकता है कि ये ट्रेनें ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना को लगातार मजबूत कर रही हैं।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने ‘एक स्टेशन, एक उत्पाद’ अभियान पर प्रकाश डाला और कहा कि भारतीय रेलवे ने पिछले वर्षों में राजस्थान के स्थानीय उत्पादों को पूरे देश में पहुंचाने का एक और प्रयास किया है। उन्होंने बताया कि भारतीय रेलवे ने लगभग 70 ‘एक स्टेशन, एक उत्पाद’ के स्टॉल लगाए हैं, जिनमें राजस्थान की जयपुरी रजाई, सांगानेरी ब्लॉक प्रिंट वाली चादरें, गुलाब के उत्पाद और अन्य हस्तशिल्प बेचे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान के छोटे किसानों, कारीगरों और हस्तशिल्पियों को बाजार तक पहुंचने का यह नया माध्यम मिला है। संबोधन का समापन करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह विकास में सबकी भागीदारी का उदाहरण है। प्रधानमंत्री ने निष्कर्ष के तौर पर कहा, “जब रेल जैसी परिवहन-संपर्क की अवसंरचना मजबूत होती है, तो देश मजबूत होता है। इससे देश के आम नागरिक को लाभ होता है, देश के गरीब और मध्यम वर्ग को लाभ होता है।“ उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि आधुनिक वंदे भारत ट्रेन राजस्थान के विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।</p>
<p>राजस्थान के लिए वंदे भारत एक्सप्रेस की पहली ट्रेन जयपुर से दिल्ली कैंट रेलवे स्टेशन के बीच चलेगी। इस ट्रेन की नियमित सेवा 13 अप्रैल, 2023 से शुरू होगी तथा जयपुर, अलवर और गुड़गांव में ठहराव-स्टेशनों के साथ अजमेर और दिल्ली कैंट के बीच चलेगी। नई वंदे भारत एक्सप्रेस दिल्ली कैंट और अजमेर के बीच की दूरी 5 घंटे 15 मिनट में तय करेगी। इस मार्ग की मौजूदा सबसे तेज ट्रेन शताब्दी एक्सप्रेस दिल्ली कैंट से अजमेर तक के लिए 6 घंटे 15 मिनट का समय लेती है। इस तरह नई वंदे भारत एक्सप्रेस, इस मार्ग पर चलने वाली मौजूदा सबसे तेज ट्रेन की तुलना में 60 मिनट कम समय लेगी।</p>
<p>अजमेर-दिल्ली कैंट वंदे भारत एक्सप्रेस हाई राइज ओवरहेड इलेक्ट्रिक (ओएचई) टेरीटरी पर दुनिया की पहली अर्ध-उच्च गति यात्री ट्रेन होगी। यह ट्रेन पुष्कर, अजमेर शरीफ दरगाह सहित राजस्थान के प्रमुख पर्यटन स्थलों के रेल-संपर्क में सुधार करेगी। बढ़े हुए रेल-संपर्क से क्षेत्र में सामाजिक-आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/nation/pm-flags-off-rajasthans-first-vande-bharat-express-between-ajmer-and-delhi-cantt">प्रधानमंत्री ने अजमेर और दिल्ली कैंट के बीच राजस्थान की पहली वंदे भारत एक्सप्रेस को झंडी दिखाकर रवाना किया</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>इंडिगो की दिल्ली-धर्मशाला-दिल्ली की पहली उड़ान को झंडी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 26 Mar 2023 11:23:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>* श्री अनुराग ठाकुर ने कहा &#8211; इंडिगो की इस उड़ान से राज्य की आधी आबादी को लाभ होगा; उन्होंने पूरे देश के साथ सीधे संपर्क की सुविधा प्रदान करने का अनुरोध किया * अगले 3 से 4 वर्षों में 200 हवाई अड्डों, वाटरड्रोम एवं हेलीपोर्ट के निर्माण का लक्ष्य, धर्मशाला हवाई अड्डे के विस्तार [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>* श्री अनुराग ठाकुर ने कहा &#8211; इंडिगो की इस उड़ान से राज्य की आधी आबादी को लाभ होगा; उन्होंने पूरे देश के साथ सीधे संपर्क की सुविधा प्रदान करने का अनुरोध किया</p>
<p>* अगले 3 से 4 वर्षों में 200 हवाई अड्डों, वाटरड्रोम एवं हेलीपोर्ट के निर्माण का लक्ष्य, धर्मशाला हवाई अड्डे के विस्तार से संबंधित दो-चरणों वाली योजना चल रही है, इस हवाई अड्डे पर अंतत: एयरबस ए320 को उतारने का लक्ष्य: श्री सिंधिया</p>
<p>नई दिल्ली : केन्द्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री श्री अनुराग ठाकुर, केन्द्रीय नागर विमानन मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और केन्द्रीय नागर विमानन राज्यमंत्री जनरल वी.के. सिंह ने आज इंडिगो एयरलाइन की दिल्ली-धर्मशाला-दिल्ली की पहली उड़ान को झंडी दिखाई।</p>
<p>इस अवसर पर बोलते हुए केन्द्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री श्री अनुराग ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश में इंडिगो की कनेक्टिविटी की सुविधा प्रदान करने के लिए नागर विमानन मंत्रालय के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि इंडिगो इस पहाड़ी राज्य में उड़ान भरे बिना सही मायने में राष्ट्रीय एयरलाइन नहीं बन सकती थी। श्री ठाकुर ने एक बड़े हवाई अड्डे की जरूरत को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में देशभर से हिमाचल आने वाले यात्रियों को दिल्ली जाना पड़ता है और फिर वहां से संबंधित राज्य के लिए कनेक्टिंग फ्लाइट पकड़नी पड़ती है। एक बड़ा हवाई अड्डा यात्रियों को सीधी निर्बाध कनेक्टिविटी की सुविधा प्रदान करेगा।</p>
<p>श्री ठाकुर ने देश में हवाई अड्डों से संबंधित बुनियादी ढांचे के तेजी से विस्तार का श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दिया। उन्होंने कहा कि बहुत ही कम समय में हवाई अड्डों की संख्या 74 से बढ़कर 140 से अधिक हो गई है। उन्होंने कहा कि उड़ान योजना के कारण हवाई चप्पल पहनने वाले लोग हवाई जहाज में यात्रा कर पा रहे हैं।</p>
<p>इस हवाई अड्डे द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं के महत्व के बारे में बोलते हुए, श्री ठाकुर ने कहा कि धर्मशाला हवाई अड्डा कनेक्टिविटी को आसान बनाते हुए पांच जिलों को जोड़ता है और इससे राज्य की आधी आबादी सीधे लाभान्वित होती है। इंडिगो की यह उड़ान इस राज्य के आधे हिस्से और पंजाब के कुछ स्थानों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने में एक अहम भूमिका निभाएगी।</p>
<p>केन्द्रीय राज्यमंत्री जनरल वी. के. सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि धर्मशाला हवाई अड्डा 1990 में अपनी पहली उड़ान का साक्षी बना था। आगे चलकर इसके कामकाज का विस्तार हुआ और अब इसके पास 1376 मीटर लम्बा रनवे है। केन्द्रीय राज्यमंत्री ने कहा कि जगह की सुविधा उपलब्ध होने पर इस रनवे की लंबाई को और बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि दलाई लामा की उपस्थिति के कारण इस हवाई अड्डे पर बहुत अधिक यातायात देखा जाता है और यह हवाई अड्डा पूरे उत्तर-पश्चिमी हिमाचल प्रदेश को हवाई संपर्क प्रदान करता है। इंडिगो की यह उड़ान और अधिक संख्या में पर्यटकों को हिमाचल लेकर आएगी जिससे राज्य के लोगों को बहुत लाभ होगा।</p>
<figure id="attachment_4828" aria-describedby="caption-attachment-4828" style="width: 971px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/03/21.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/03/21.jpg" alt="" width="971" height="728" class="size-full wp-image-4828" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/03/21.jpg 971w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/03/21-300x225.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/03/21-768x576.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 971px) 100vw, 971px" /></a><figcaption id="caption-attachment-4828" class="wp-caption-text">केन्द्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री श्री अनुराग ठाकुर, केन्द्रीय नागर विमानन मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और केन्द्रीय नागर विमानन राज्यमंत्री जनरल वी.के. सिंह ने आज इंडिगो एयरलाइन की दिल्ली-धर्मशाला-दिल्ली की पहली उड़ान को झंडी दिखाई।</figcaption></figure>
<p>सभा को संबोधित करते हुए, केन्द्रीय नागर विमानन मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि नागर विमानन के क्षेत्र में पिछले 65 वर्षों में जितनी सुविधा हासिल नहीं हुई, उतनी सुविधा पिछले नौ वर्षों के दौरान 148 हवाई अड्डों, वाटरड्रोम एवं हेलीपोर्ट के निर्माण के जरिए हासिल की गई है। उन्होंने कहा कि नागर विमानन मंत्रालय अगले तीन से चार वर्षों के भीतर इस संख्या को बढ़ाकर 200 से अधिक करने के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में काम कर रहा है। यह प्रयास बड़े मेट्रो हवाई अड्डों के साथ-साथ देश के अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी प्रदान करने वाले दूरदराज के हवाई अड्डों को समान महत्व प्रदान करेगा।</p>
<p>श्री सिंधिया ने राज्य में खेल अवसंरचना के निर्माण के लिए श्री अनुराग ठाकुर के प्रयासों की सराहना की और कहा कि उनके अथक प्रयासों के कारण ही धर्मशाला आज न केवल क्षेत्रीय या राष्ट्रीय क्रिकेट, बल्कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का केंद्र बन गया है। उन्होंने धर्मशाला के शानदार स्टेडियम की तुलना दुनिया के सर्वश्रेष्ठ स्टेडियम से की। उन्होंने कहा कि क्रिकेट से राज्य की आर्थिक गतिविधियों में तेजी आयी है और इसका श्रेय भी श्री अनुराग ठाकुर को जाता है।</p>
<p>मंत्री ने श्री अनुराग ठाकुर द्वारा धर्मशाला हवाई अड्डे के विस्तार के अनुरोध को स्वीकार किया और कहा कि इसके लिए उनका मंत्रालय पहले से ही दो चरण की योजना पर काम कर रहा है। पहले चरण में वर्तमान रनवे को 1900 मीटर तक लंबा करना शामिल है ताकि टर्बोप्रॉप विमान जो अभी लोड पेनल्टी के साथ उतरते हैं, उन्हें बिना लोड पेनल्टी के उतरने के लिए सक्षम बनाया जा सके। दूसरे चरण में रनवे को 3110 मीटर तक और लंबा करना शामिल होगा, ताकि हवाईअड्डे पर बोइंग 737 और एयरबस ए320 को उतारने के विजन को साकार किया जा सके।</p>
<p>राज्य में अपने मंत्रालय की अन्य उपलब्धियों के बारे में श्री सिंधिया ने कहा कि शिमला हवाई अड्डे पर रनवे की मरम्मत का काम पूरा हो गया है और मंडी में ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे के लिए स्थल-स्वीकृति प्रदान की गयी है। उन्‍होंने दोहराया कि उनका मंत्रालय राज्य में नागरिक उड्डयन अवसंरचना के विकास के लिए प्रतिबद्ध है।</p>
<p>मंत्री ने कहा, &#8220;नागरिक उड्डयन क्षेत्र का पूर्ण लोकतंत्रीकरण हुआ है और जो लोग हवाई जहाजों को केवल उड़ते हुए देख सकते थे, वे आज इनमें उड़ रहे हैं।“ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की उड़ान योजना के विजन के फलस्वरूप भारत के हवाई यात्रियों की संख्या में 1 करोड़ 15 लाख लोग जुड़ गए हैं।</p>
<p>उड़ान के तहत हिमाचल राज्य को 44 रूट दिए गए हैं, जिनमें से 22 पहले से ही संचालन में हैं। राज्य में मंत्रालय की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए, मंत्री ने कहा कि कनेक्टिविटी 2013-14 के प्रति सप्ताह 40 एयरक्राफ्ट से बढ़कर 110 एयरक्राफ्ट हो गई है और इस प्रकार 9 वर्षों में 175% की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से धर्मशाला में, पिछले नौ वर्षों में हवाई यातायात की संख्या में 110% की वृद्धि हुई है, जो 2013-14 के 28 प्रति सप्ताह से बढ़कर आज 50 हो गई है।</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/nation/indigos-first-delhi-dharamshala-delhi-flight-flagged-off">इंडिगो की दिल्ली-धर्मशाला-दिल्ली की पहली उड़ान को झंडी</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>प्रधानमंत्री कल वाराणसी में दुनिया के सबसे लंबे रिवर क्रूज-एमवी गंगा विलास को हरी झंडी दिखाएंगे, टेंट सिटी का उद्घाटन करेंगे</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 12 Jan 2023 05:01:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[Banaras]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>बनारस : प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी कल 13 जनवरी को सुबह 10.30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से दुनिया के सबसे लंबे रिवर क्रूज-एमवी गंगा विलास को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे और वाराणसी में टेंट सिटी का उद्घाटन करेंगे। प्रधानमंत्री इस कार्यक्रम के दौरान 1000 करोड़ रुपये से अधिक की कई अन्य अंतर्देशीय जलमार्ग [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>बनारस : प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी कल 13 जनवरी को सुबह 10.30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से दुनिया के सबसे लंबे रिवर क्रूज-एमवी गंगा विलास को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे और वाराणसी में टेंट सिटी का उद्घाटन करेंगे। प्रधानमंत्री इस कार्यक्रम के दौरान 1000 करोड़ रुपये से अधिक की कई अन्य अंतर्देशीय जलमार्ग परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी करेंगे।</strong></p>
<p>एमवी गंगा विलास उत्तर प्रदेश के वाराणसी से अपनी यात्रा शुरू करेगा और 51 दिनों में लगभग 3,200 किलोमीटर की यात्रा करके भारत और बांग्लादेश में 27 नदी प्रणालियों को पार करते हुए बांग्लादेश के रास्ते असम के डिब्रूगढ़ तक पहुंचेगा। एमवी गंगा विलास में सभी लक्जरी सुविधाओं के साथ तीन डेक, 36 पर्यटकों की क्षमता वाले 18 सुइट हैं। पहली यात्रा में स्विट्जरलैंड के 32 पर्यटक पूरी यात्रा के लिए जा रहे हैं।</p>
<figure id="attachment_4730" aria-describedby="caption-attachment-4730" style="width: 2240px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/01/DSC_2052.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/01/DSC_2052.jpg" alt="" width="2240" height="1488" class="size-full wp-image-4730" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/01/DSC_2052.jpg 2240w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/01/DSC_2052-300x199.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/01/DSC_2052-1024x680.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/01/DSC_2052-768x510.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/01/DSC_2052-1536x1020.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/01/DSC_2052-2048x1360.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2240px) 100vw, 2240px" /></a><figcaption id="caption-attachment-4730" class="wp-caption-text">गंगा और बनारस</figcaption></figure>
<p>एमवी गंगा विलास क्रूज को दुनिया के सामने देश का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए डिज़ाइन किया गया है। विश्व धरोहर स्थलों, राष्ट्रीय उद्यानों, नदी घाटों और बिहार में पटना, झारखंड में साहिबगंज, पश्चिम बंगाल में कोलकाता, बांग्लादेश में ढाका और असम में गुवाहाटी जैसे प्रमुख शहरों सहित 50 पर्यटन स्थलों की क्रूज की 51 दिनों की यात्रा की योजना बनाई गई है। यह यात्रा पर्यटकों को एक शानदार अनुभव देगी और भारत और बांग्लादेश की कला, संस्कृति, इतिहास और आध्यात्मिकता में शामिल होने का अवसर देगी।</p>
<p>रिवर क्रूज टूरिज्म को बढ़ावा देने के प्रधानमंत्री के प्रयास के अनुरूप, इस सेवा के लॉन्च के साथ रिवर क्रूज की विशाल अप्रयुक्त क्षमता का लाभ प्राप्त करना संभव हो जाएगा और यह भारत के लिए रिवर क्रूज टूरिज्म के एक नए युग का सूत्रपात करेगी।</p>
<figure id="attachment_4731" aria-describedby="caption-attachment-4731" style="width: 2240px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/01/DSC_1984.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/01/DSC_1984.jpg" alt="" width="2240" height="1488" class="size-full wp-image-4731" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/01/DSC_1984.jpg 2240w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/01/DSC_1984-300x199.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/01/DSC_1984-1024x680.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/01/DSC_1984-768x510.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/01/DSC_1984-1536x1020.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/01/DSC_1984-2048x1360.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2240px) 100vw, 2240px" /></a><figcaption id="caption-attachment-4731" class="wp-caption-text">गंगा और बनारस</figcaption></figure>
<p>क्षेत्र में पर्यटन की संभावनाओं का दोहन करने के लिए गंगा नदी के तट पर टेंट सिटी की परिकल्पना की गई है। यह परियोजना शहर के घाटों के सामने विकसित की गई है जो विशेष रूप से काशी विश्वनाथ धाम के उद्घाटन के बाद से वाराणसी में रहने की सुविधा प्रदान करेगी और पर्यटकों की बढ़ती संख्या को पूरा करेगी। इसे सार्वजनिक निजी भागीदारी के प्रारूप में वाराणसी विकास प्राधिकरण द्वारा विकसित किया गया है। पर्यटक आसपास के विभिन्न घाटों से नावों द्वारा टेंट सिटी पहुंचेंगे। टेंट सिटी हर साल अक्टूबर से जून तक जारी रहेगी और बारिश के मौसम में नदी के जल स्तर में वृद्धि के कारण तीन महीने के लिए हटा दी जाएगी।</p>
<p>प्रधानमंत्री पश्चिम बंगाल में हल्दिया मल्टी मॉडल टर्मिनल का उद्घाटन करेंगे। जल मार्ग विकास परियोजना के तहत विकसित, हल्दिया मल्टी मॉडल टर्मिनल की कार्गो हैंडलिंग क्षमता लगभग 3 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (एमएमटीपीए) है और बर्थ को लगभग 3000 डेडवेट टनेज (डीडब्ल्यूटी) तक के जहाजों को संभालने के लिए डिजाइन किया गया है।</p>
<figure id="attachment_4732" aria-describedby="caption-attachment-4732" style="width: 1488px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/01/DSC_1946.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/01/DSC_1946.jpg" alt="" width="1488" height="2240" class="size-full wp-image-4732" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/01/DSC_1946.jpg 1488w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/01/DSC_1946-199x300.jpg 199w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/01/DSC_1946-680x1024.jpg 680w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/01/DSC_1946-768x1156.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/01/DSC_1946-1020x1536.jpg 1020w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/01/DSC_1946-1360x2048.jpg 1360w" sizes="auto, (max-width: 1488px) 100vw, 1488px" /></a><figcaption id="caption-attachment-4732" class="wp-caption-text">गंगा और बनारस</figcaption></figure>
<p>प्रधानमंत्री उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के सैदपुर, चोचकपुर, जमानिया और बलिया जिले के कंसपुर में चार फ्लोटिंग कम्युनिटी जेटी का भी उद्घाटन करेंगे। इसके अलावा, प्रधानमंत्री द्वारा बिहार में पटना जिले के दीघा, नकटा दियारा, बाढ़, पानापुर और बिहार के समस्तीपुर जिले के हसनपुर में पांच सामुदायिक घाटों की आधारशिला रखी जाएगी। आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और क्षेत्र में स्थानीय समुदायों की आजीविका में सुधार के लिए उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल राज्यों में गंगा नदी के किनारे 60 से अधिक सामुदायिक घाटों का निर्माण किया जा रहा है। छोटे किसानों, मत्स्य इकाइयों, असंगठित कृषि उत्पादक इकाइयों, बागवानों, फूलों की खेती करने वालों और गंगा नदी के भीतरी इलाकों में आर्थिक गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करने वाले कारीगरों के लिए सरल लॉजिस्टिक समाधान प्रदान करके सामुदायिक जेटी लोगों की आजीविका में सुधार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।</p>
<p>प्रधानमंत्री गुवाहाटी में पूर्वोत्तर के लिए समुद्री कौशल विकास केंद्र का भी उद्घाटन करेंगे। यह उत्तर पूर्वी क्षेत्र में समृद्ध प्रतिभा पूल को तराशने में मदद करेगा और तेजी से बढ़ते लॉजिस्टिक उद्योग में रोजगार के बेहतर अवसर प्रदान करेगा।<br />
इनके अलावा, प्रधानमंत्री गुवाहाटी में पांडु टर्मिनल में एक जहाज मरम्मत सुविधा और एक एलिवेटेड रोड की आधारशिला भी रखेंगे। पांडु टर्मिनल पर शिप रिपेयर सुविधा से कीमती समय की बचत होगी क्योंकि एक जहाज को कोलकाता रिपेयर फैसिलिटी तक ले जाने और वापस लाने में एक महीने से अधिक का समय लगता है। इसके अलावा, इससे धन की भारी बचत भी होगी क्योंकि जहाज की परिवहन लागत भी बचेगी। पांडु टर्मिनल को राष्ट्रीय राजमार्ग 27 से जोड़ने वाली समर्पित सड़क 24 घंटे की कनेक्टिविटी को सक्षम करेगी।</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/culture/pm-to-flag-off-worlds-longest-river-cruise-mv-ganga-vilas-in-varanasi-tomorrow">प्रधानमंत्री कल वाराणसी में दुनिया के सबसे लंबे रिवर क्रूज-एमवी गंगा विलास को हरी झंडी दिखाएंगे, टेंट सिटी का उद्घाटन करेंगे</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>नीतीश बाबू ! एक बार &#8216;गोलघर&#8217; को पृष्ठभूमि में रखकर अपनी तस्वीर &#8216;ट्वीट&#8217; करें, पर्यटक बिहार की ओर दौड़ जायेंगे</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 01 Mar 2022 03:43:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चुटकुलानन्द की चिठ्ठी]]></category>
		<category><![CDATA[bihar]]></category>
		<category><![CDATA[golghar]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली  : नीतीश बाबू !! दिल्ली मेट्रो डब्बा को प्रदेश के पुरातत्वों की तस्वीरों से लपेटने से बेहतर है गोलघर को पृष्ठभूमि में रखकर खुद सेल्फी ट्वीट करें।  यकीन मानिये लन्दन, अमेरिका, जर्मनी, जापान, ऑस्ट्रेलिआ, ब्राज़ील, कनाडा, फिजी, फ़्रांस, मलेसिया, मौरीसस, न्यूजीलैंड, पोलैंड, सिंगापूर, सऊदी अरब के राष्ट्राध्यक्षों की तरह, राजनेताओं की तरह &#8211; आप और [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली  : नीतीश बाबू !! दिल्ली मेट्रो डब्बा को प्रदेश के पुरातत्वों की तस्वीरों से लपेटने से बेहतर है गोलघर को पृष्ठभूमि में रखकर खुद सेल्फी ट्वीट करें।  यकीन मानिये लन्दन, अमेरिका, जर्मनी, जापान, ऑस्ट्रेलिआ, ब्राज़ील, कनाडा, फिजी, फ़्रांस, मलेसिया, मौरीसस, न्यूजीलैंड, पोलैंड, सिंगापूर, सऊदी अरब के राष्ट्राध्यक्षों की तरह, राजनेताओं की तरह &#8211; आप और बिहार का पर्यटन आसमान पर चढ़ जायेगा। अन्यथा दिल्ली मेट्रो पच्चीस लाख+ रुपये प्रतिमाह, प्रति ट्रेन वसूल कर प्रदेश के खजाने को दीन से दरिद्र बना देगा। क्योंकि आपके प्रदेश के 12 करोड़ लोगों में 95 से अधिक फीसदी लोग पटना का गोलघर भी नहीं देखा है । आप तो बिहार के अनेक शहरों को &#8220;स्मार्ट&#8221; शहरों की श्रेणी में डाल दिए हैं, लेकिन &#8230;. ।</strong> </p>
<p>विगत दिनों दिल्ली मेट्रो का डब्बा बिहार पर्यटन के आवरण से ढंका दिखा। कैमूर पहाड़ से लेकर महाबोधि मंदिर की तस्वीरें दिखीं। आम तौर पर दिल्ली का कोई भी कोना ऐसा नहीं होगा जहाँ बिहार के लोग नहीं रहते हों। उनका दिल्ली में रहना शौकिया भी हो सकता है और मज़बूरी भी। औसतन सैकड़े 100 व्यक्तियों में 80 फीसदी लोग दिल्ली में मज़बूरी में रहते हैं। उनका मानना है कि अगर उनके प्रदेश में रोजी, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ, खेती-बारी, बाजार-विपरण का उचित व्यवस्था होता, तो कभी वे बक्सर से आगे नहीं निकलते। कभी गंगा पार नहीं करते। गंगा पार करना ही होता तो मुजफ्फरपुर जाकर लीची खाते। लेकिन परदादा से लेकर बाबूजी तक सभी यही कहते रहे &#8211; सब ठीक हो जायेगा। काश सच में ऐसा होता। </p>
<p>बिहार के पहली विधान सभा से लेकर नीतीश बाबू वाले विधान सभा तक, यानी श्री कृष्णा सिन्हा, दीप नारायण सिंह, बिनोदानंद झा, कृष्ण बल्लभ सहाय, महामाया प्रसाद सिन्हा , सतीश प्रसाद सिंह, बी पी मंडल, भोला पासवान शास्त्री, हरिहर सिंह, दारोगा प्रसाद राय, कर्पूरी ठाकुर, केदार पांडेय, अब्दुल गफूर, जगन्नाथ मिश्र, राम सुन्दर दास, चंद्र शेखर सिंह, बिंदेश्वरी दुबे, भागवत झा आज़ाद, सत्येंद्र नारायण सिन्हा, लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, जीतन राम मांझी और नीतीश कुमार &#8211; सभी महानुभाव भी तो बिहार के ऐतिहासिक &#8216;मानव पुरात्तव&#8217; की ही गिनती में रहे &#8211; कुछ हैं तो कुछ कूच कर गए। अगर ये सभी बिहार के महामानव &#8216;ऐतिहासिक पुरात्तव&#8217; नहीं होते, प्रदेश में अपना स्थान, नाम, गरिमा अलग नहीं रखते, तो सन 1950 में बिहार के करीब  29,085,017 आवाम से लेकर आज के करीब 128,458,570 लोग, इन्हें पटना के डाकबंगला चौराहा से उठाकर प्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर क्यों चिपकाते? बहुत उम्मीद थी प्रदेश के मतदाताओं को इन ऐतिहासिक मानव पुरातत्वों से । वे इस उम्मीद से इन महानुभावों को प्रदेश का राजनीतिक और प्रशासनिक नेतृत्व हस्तगत कराये की उनके जीते जी प्रदेश का बेहतरीन विकास होगा। </p>
<figure id="attachment_3863" aria-describedby="caption-attachment-3863" style="width: 811px" class="wp-caption alignleft"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/03/Screenshot-2022-02-26-at-8.51.48-AM.png"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/03/Screenshot-2022-02-26-at-8.51.48-AM.png" alt="" width="811" height="454" class="size-full wp-image-3863" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/03/Screenshot-2022-02-26-at-8.51.48-AM.png 811w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/03/Screenshot-2022-02-26-at-8.51.48-AM-300x168.png 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/03/Screenshot-2022-02-26-at-8.51.48-AM-768x430.png 768w" sizes="auto, (max-width: 811px) 100vw, 811px" /></a><figcaption id="caption-attachment-3863" class="wp-caption-text">दिल्ली मेट्रो ट्रेन के डब्बों पर बिहार पर्यटन का विज्ञापन </figcaption></figure>
<p>राजा जनक की नगरी से लेकर शेरशाह सूरी के मकबरा तक, गौतम बुद्ध की नगरी बोध गया से लेकर नालंदा  की ऐतिहासिक विश्वविद्यालय तक, पटना के गोलघर से लेकर मधुबनी के राजनगर तक, पावापुरी के जैन मंदिर से पार्श्वनाथ के महावीर मंदिर तक, खेत से खलिहान तक, कोर्ट-कचहरी से विद्यालय-महाविद्यालय-विश्वविद्यालय तक &#8211; चतुर्दिक विकास होगा। बिहार में राम राज्य स्थापित होगा। &#8216;सकारात्मक&#8217; रूप में बिहार का दृष्टान्त विश्व के पटल पर दिया जायेगा। लोग बाग़ बिहार का नाम सुनते ही चुम्बक के उत्तरी-दक्षिणी ध्रुवों की तरह आकर्षित होंगे मगध की राजधानी सहित बिहार की भूमि को देखने के लिए । लेकिन श्री कृष्णा सिंह से लेकर कर्पूरी ठाकुर के रास्ते, लालू प्रसाद-राबड़ी देवी को याद करते सम्मानित नीतीश कुमार के वर्तमान कार्यकाल तक विकास की रेखाएं उसी तरह धूमिल होती दिखती हैं, जिस तरह नालंदा विश्वविद्यालय के अवशेषों पर मुद्दत से जमी काई । हाँ, उपरोक्त ऐतिहासिक महामानवों में कुछेक को अपवाद स्वरुप छोड़कर, शेष &#8216;मानवीय पुरातत्वों&#8217; की तुलना भारत के धनाढ्यों के धनाढ्य से ही किया जा सकता है। दुर्भाग्यवश प्रदेश के मतदाताओं ने विगत 72 सालों से अपनी उंगलियों में रोशनाई लगाकर चुनाव में उन्हें चुनते आये, नेता बनाते आये, मुख्यमंत्री बनाते आये &#8211; लेकिन विकास की रेखाएं बिहार के मतदाताओं के घरों तक नहीं पहुंचा। चाहे दिल्ली के रेसकोर्स रोड का नाम कल्याण मार्ग रख दिया जाय या फिर पटना के मजहरुल हक़ रोड को फ़्रेज़र रोड कहें या फिर बेली रोड को जवाहरलाल नेहरू मार्ग या फिर बैंक रोड को बी पी कोइराला मार्ग।  </p>
<p>आंकड़ों के अनुसार देश में तकरीबन 3645 ऐतिहासिक पुरातत्व और धरोहर हैं। अगर औसतन भारतीयों से पूछा जाय की वे अपने ही राज्य में स्थित न्यूनतम 10 ऐतिहासिक पुरातत्व और धरोहरों का नाम बताएं, तो उम्मीद है वे पांच अथवा छठे नाम बताते-बताते दम तोड़ देंगे। वजह यह है कि उन्हें उन ऐतिहासिक पुरातत्व और धरोहरों में कोई दिलचस्पी नहीं है (अपवाद छोडकर्) यदि इन आंकड़ों का विश्लेषण करें तो देश के सम्पूर्ण क्षेत्रफल में औसतन प्रत्येक 892 किलोमीटर पर एक न एक ऐतिहासिक पुरातत्व और धरोहर है। इनमें सबसे अधिक 743 ऐतिहासिक पुरातत्व और धरोहर उत्तर प्रदेश में हैं, यानी उत्तर प्रदेश के 324 प्रति किलोमीटर क्षेत्रफल पर एक न एक ऐतिहासिक पुरातत्व और धरोहर है। </p>
<figure id="attachment_3863" aria-describedby="caption-attachment-3863" style="width: 811px" class="wp-caption alignleft"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/03/Screenshot-2022-02-26-at-8.51.48-AM.png"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/03/Screenshot-2022-02-26-at-8.51.48-AM.png" alt="" width="811" height="454" class="size-full wp-image-3863" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/03/Screenshot-2022-02-26-at-8.51.48-AM.png 811w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/03/Screenshot-2022-02-26-at-8.51.48-AM-300x168.png 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/03/Screenshot-2022-02-26-at-8.51.48-AM-768x430.png 768w" sizes="auto, (max-width: 811px) 100vw, 811px" /></a><figcaption id="caption-attachment-3863" class="wp-caption-text">दिल्ली मेट्रो ट्रेन के डब्बों पर बिहार पर्यटन का विज्ञापन </figcaption></figure>
<p>उत्तर प्रदेश के बाद दूसरा स्थान कर्नाटक का है जहाँ 506 ऐतिहासिक पुरातत्व और धरोहर हैं। तीसरा स्थान तमिलनाडु का है जहाँ 413 ऐतिहासिक पुरातत्व और धरोहर हैं। पांचवा स्थान गुजरात (293 ऐतिहासिक पुरातत्व और धरोहर); छठा स्थान मध्य प्रदेश (292 ऐतिहासिक पुरातत्व और धरोहर); सातवां स्थान महाराष्ट्र (285 ऐतिहासिक पुरातत्व और धरोहर), आठवां स्थान राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली जहाँ 174 ऐतिहासिक पुरातत्व और धरोहर हैं। भौगोलिक क्षेत्रफल के दृष्टि से राजस्थान बहुत बड़ा भूभाग है, लेकिन यहाँ 162 ऐतिहासिक पुरातत्व और धरोहर हैं। पश्चिम बंगाल में 136 ऐतिहासिक पुरातत्व और धरोहर; आंध्र प्रदेश में 129 ऐतिहासिक पुरातत्व और धरोहर; हरियाणा में 91 ऐतिहासिक पुरातत्व और धरोहर; ओडिशा में 79 ऐतिहासिक पुरातत्व और धरोहर; <strong>बिहार में 70 ऐतिहासिक पुरातत्व और धरोहर</strong>; जम्मू-कश्मीर में 56 ऐतिहासिक पुरातत्व और धरोहर; असम में 55 ऐतिहासिक पुरातत्व और धरोहर; छत्तीसगढ़ में 47 ऐतिहासिक पुरातत्व और धरोहर; उत्तराखंड में 42 ऐतिहासिक पुरातत्व और धरोहर; हिमाचल प्रदेश में 40 ऐतिहासिक पुरातत्व और धरोहर; पंजाब में 33 ऐतिहासिक पुरातत्व और धरोहर; केरल में 27 ऐतिहासिक पुरातत्व और धरोहर; गोवा में 21 ऐतिहासिक पुरातत्व और धरोहर; झारखण्ड में 13 ऐतिहासिक पुरातत्व और धरोहर हैं और अंत में दमन-दीव में 12 ऐतिहासिक पुरातत्व और धरोहर स्थित हैं। औसतन वैसे ऐतिहासिक पुरातत्वों को छोड़कर, जो “दुधारू गाय” है, देश के हज़ारों-हज़ार पुरातत्वों की स्थिति, “सोचनीय” ही नहीं, “निंदनीय” भी है। </p>
<p>लेकिन आजकल राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में रहने वाले बिहारी भाई लोग बहुत खुश हैं। उनकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं है। कहते थकते नहीं कि दिल्ली मेट्रो बिहार स्थित ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों का प्रचार-प्रसार कर रही है। ताकि उन पर्यटन स्थानों से रूबरू होने के लिए लोग बाग़ बिहार की ओर उन्मुख हों। आजकल दिल्ली में रहने वाले बिहारी भाई लोग बहुत खुश हैं। उनकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं है। कहते थकते नहीं कि दिल्ली मेट्रो बिहार स्थित ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों का प्रचार-प्रसार कर रही है। ताकि उन पर्यटन स्थानों से रूबरू होने के लिए लोग बाग़ बिहार की ओर उन्मुख हों। आंकड़े बताते हैं कि बिहार में शिक्षा और रोजगार की बदतर  स्थिति के कारण लगभग 20,000 लोग नित्य बक्सर और गोरखपुर पार कर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में अवतरित होते हैं। यानी दिल्ली की आवादी नित्य 20000 बढ़ती है। ऐसा माना जाता है कि इन सांजख्य में श्रमिकों की संख्या सर्वाधिक है। अब नीतीश कुमार क्या, आने वाले समय में दर्जनों, सैकड़ों सम्मानित मुख्यमंत्रीगण दिल्ली मेट्रो क्या अमेरिकन, फ़्रांस, जर्मनी, जापान के मित्रों ट्रेनों में, मुंबई में, कलकत्ता में, लखनऊ में चलने वाली मेट्रो ट्रेनों में गोलघर, बोधा गया, राजगीर की तस्वीरों की, लिट्टी-चोखा की, मालपुआ की तस्वीरों का आवरण क्यों न बना दें, इससे प्रदेश में पर्यटन सेवा अधिक नहीं हो सकती हैं। </p>
<figure id="attachment_3865" aria-describedby="caption-attachment-3865" style="width: 2000px" class="wp-caption alignleft"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/03/Gaya-1.jpeg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/03/Gaya-1.jpeg" alt="" width="2000" height="1500" class="size-full wp-image-3865" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/03/Gaya-1.jpeg 2000w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/03/Gaya-1-300x225.jpeg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/03/Gaya-1-1024x768.jpeg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/03/Gaya-1-768x576.jpeg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/03/Gaya-1-1536x1152.jpeg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2000px) 100vw, 2000px" /></a><figcaption id="caption-attachment-3865" class="wp-caption-text">बोधगया में नया बुद्ध</figcaption></figure>
<p><strong>सांख्यिकी के अनुसार दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डी एम आर सी) अपनी कुल ट्रेनों की संख्या में सिर्फ दस प्रतिशत ट्रेनों को लाल-पीला-हरा-काला-ब्लू रंगों की रंगबिरंगी तस्वीरों के साथ ढँक सकती है। कोरोना से पूर्व तक डी एम आर सी और इसके विज्ञापन एजेंसी विज्ञापन दाताओं से एक ट्रेन (चाहे उसमें छः कोच हो या आठ) के सभी कोचों को विज्ञापनों से ढंकने के लिए 25,00,000 रुपये एक माह के लिए लेती है। अब अगर चार ट्रेनों के कोचों को विज्ञापनों से ढंकती हैं बिहार सरकार, तो इसका अर्थ यह हुआ कि बिहार सरकार के खजाने से प्रतिमाह एक करोड़ रुपये निकलकर डी एम आर सी के खजाने में जमा होती है। अर्थात बिहारी मुद्राएं दिल्ली की ओर पर्यटन करती है।</strong> </p>
<p>बहरहाल, विगत दिनों फेसबुक पर एक पोस्ट किया था और लोगों से कहा था कि वे &#8220;किरया&#8221; (कसम) खा कर कहेंगे की &#8216;आप में से कोई इंटरनेट पर, सोशल मीडिया पर किसी भी व्यक्ति को, परिवार को, महिला को, पुरुष को, बच्चा को, बच्ची को, मंत्री को, संत्री को, अधिकारी को, चपरासी को, डाक्टर को, मरीज को, रिक्शावाला को, ऑटोवाला को, टमटम वाला को, साईकिल वाला को, लाखों-करोड़ों रुपये वाला चार-पहिया वाहन के स्वामी को, स्वामिनी को, पैदल चलने वालों को पटना के गोलघर को पृष्ठभूमि में रखकर सेल्फी लेते देखे हैं? आप लिए हैं?&#8221; फेसबुक पर राजीव रंजन कुशवाहा को छोड़कर जबाब नगण्य था। </p>
<figure id="attachment_3868" aria-describedby="caption-attachment-3868" style="width: 1101px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/03/Vaishali.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/03/Vaishali.jpg" alt="" width="1101" height="1600" class="size-full wp-image-3868" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/03/Vaishali.jpg 1101w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/03/Vaishali-206x300.jpg 206w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/03/Vaishali-705x1024.jpg 705w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/03/Vaishali-768x1116.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/03/Vaishali-1057x1536.jpg 1057w" sizes="auto, (max-width: 1101px) 100vw, 1101px" /></a><figcaption id="caption-attachment-3868" class="wp-caption-text">वैशाली में अशोक स्तम्भ</figcaption></figure>
<p>लेकिन <strong>अरविन्द कुमार झा</strong> लिखे कि &#8220;बिहारी जब बिहार में सफर करता है, बस, ट्रेन, हवाई जहाज, रिक्शा, टमटम या अपनी गाड़ी में चार पहिया वाहन, बाइक, साइकिल पर वह सड़क, परिचालन और सफ़र के सामान्य नियमों की ऐसी तैसी करते चलता है। वह बिहारी कोई नेता, अफसर, ग्रामीण, शहरी, पढ़ा लिखा या अनपढ़, गरीब या अमीर हो सामान्य कायदे कानून को मानना अपनी तौहीन समझता है। वही बिहारी चाहे वह किसी तबका या हैसियत का हो, अनपढ़, गरीब या अमीर, पढ़ा लिखा हो, नेता, अफसर या व्यापारी हो जब बिहार के बाहर जाता है तो सड़क और सफ़र के छोटे से छोटे कायदे कानून का पालन करता है। साफ है कि बिहार में बिहारी उज्जढ , गंवार और बेहूदगी का प्रतिमान है और बाहर वही बिहारी दब्बू और इंफिरियरिटी कोम्प्लेक्स से ग्रस्त। यहां की हर कीमती से कीमती वस्तु उसे दोयम दर्जे की लगती है और बाहर की दोयम दर्जे की वस्तु भी उसे अलभ्य और बेशकीमती लगती है। यही बिहारी मानसिकता है।&#8221; </p>
<p><strong>बिहार के पर्यटन पर सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र कुमार</strong> अपने ब्लॉग पर लिखते हैं कि भारत में पर्यटन के लिए बहुत सारे प्रसिद्ध स्थान हैं। देश का हर एक क्षेत्र सांस्कृतिक और प्राकृतिक विविधताओं से भरपूर है। इनमें बिहार एक ऐसा राज्य है, जिसका पर्यटन के लिहाज से अंतरराष्ट्रीय महत्व बहुत ज्यादा है। अभी कुछ समय पहले ही बिहार की राजधानी पटना में एक विशाल राज्य संग्रहालय का उद्घाटन किया गया है। जिसके माध्यम से बिहार के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को और भी व्यापक तरीके से समझने में मदद मिल सकती है। पर्यटन उद्योग का देश के आर्थिक विकास में बहुत बड़ा योगदान रहा है। साथ ही पर्यटन उद्योग का रोजगार सृजन में भी बहुत बड़ा योगदान रहा है। बीते दो वर्षों में महामारी के कारण पर्यटन स्थलों को बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। देश भर में फैली कोरोना महामारी का सबसे ज्यादा असर पर्यटन उद्योग को ही हुआ है।  एक अनुमान के अनुसार महामारी के कारण बिहार में पर्यटन उद्योग को 10 हजार करोड़ का नुकसान हुआ है।  </p>
<figure id="attachment_3866" aria-describedby="caption-attachment-3866" style="width: 2000px" class="wp-caption alignleft"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/03/nalanda.jpeg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/03/nalanda.jpeg" alt="" width="2000" height="1333" class="size-full wp-image-3866" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/03/nalanda.jpeg 2000w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/03/nalanda-300x200.jpeg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/03/nalanda-1024x682.jpeg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/03/nalanda-768x512.jpeg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/03/nalanda-1536x1024.jpeg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2000px) 100vw, 2000px" /></a><figcaption id="caption-attachment-3866" class="wp-caption-text">नालंदा का अवशेष</figcaption></figure>
<p>भारत का राज्य बिहार अपनी प्राचीन धरोहर के लिए भी जाना जाता है। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से बिहार उन महत्वपूर्ण जगहों में से एक है जहां आज भी काफी पुराने अतीत से जुड़े कई प्राचीन अवशेषों को देखा जा सकता है। बिहार का नालंदा विश्वविद्यालय दुनिया का पहला और सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय है। बिहार ही वह ऐतिहासिक जगह है जहां भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था। दुनियाभर में फैले बौद्ध धर्म की जड़े बिहार से ही शुरू हुई हैं। केवल यही नहीं ऐसी बहुत सी ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल है बिहार में जो बिहार के गौरवपूर्ण इतिहास की गवाही देते हैं जरुरत है तो बस इनके वास्तविक मूल्यों को पहचानने की।  बिहार में पर्यटन का विकास करके बिहार के गौरवपूर्ण और प्राचीन इतिहास को फिर से जीवित किया जा सकता है। सरकार को इन प्राचीन धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों का संरक्षण करके यहाँ पर्यटन को बढ़ावा देना चाहिए। बिहार सरकार को इसके लिए प्रमोट करना चाहिए जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों को बिहार के प्राचीन इतिहास और यहां की धरोहरों के बारे में जानकारी मिले। पर्यटन को बढ़ावा देकर बिहार में विकास की दर भी बढ़ेगी।  </p>
<p>उत्तर बिहार को विकसित करके यहां पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकता है। उत्तर बिहार के जिला सीतामढ़ी माता सीता की जन्मभूमि है यहां पर स्थित हलेश्वर स्थान और माँ जानकी मंदिर अपनी प्राचीन इतिहास के लिए प्रसिद्ध है। हजारों श्रद्धालु यहां माता के दर्शन के लिए आते हैं।  इसके अलावा गया जिला बिहार के महत्वपूर्ण तीर्थस्थानों में से एक है। पितृपक्ष के अवसर पर यहाँ हर साल देशभर से लाखों श्रद्धालु पिंडदान के लिये आते हैं। सरकार को इन धार्मिक स्थलों को संरक्षित करना चाहिए जिससे साल दर साल यहां पर्यटकों की संख्या बढ़ती रहे।  बिहार में कई प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरें हैं जैसे की नालंदा, राजनगर का नौलखा महल, शेरशाह का मकबरा आदि। प्राचीन स्थल विश्व विरासत स्थलों की क्षमता रखते है। इन धरोहर की संरचना को बनाये रखते हुए ऐतिहासिक इमारतों को परिवर्तित इमारतों के साथ स्पेशल हेरिटेज जोन के रूप में विकसित किया जा सकता है। बिहार के हथकरघा और हस्तशिल्प के विकास के लिए शिल्पग्राम और हस्तशिल्प बाजार viksit किया जाना चाहिए जिससे यहां पर्यटकों की पहुंच हो सके।  </p>
<figure id="attachment_3867" aria-describedby="caption-attachment-3867" style="width: 1200px" class="wp-caption alignleft"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/03/Nitish-rajgir.jpeg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/03/Nitish-rajgir.jpeg" alt="" width="1200" height="801" class="size-full wp-image-3867" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/03/Nitish-rajgir.jpeg 1200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/03/Nitish-rajgir-300x200.jpeg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/03/Nitish-rajgir-1024x684.jpeg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/03/Nitish-rajgir-768x513.jpeg 768w" sizes="auto, (max-width: 1200px) 100vw, 1200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-3867" class="wp-caption-text">राजगीर में नीतीश</figcaption></figure>
<p>बिहार में सालाना दो करोड़ देसी पर्यटक तथा दस लाख विदेशी पर्यटक आते हैं। बोधगया के लिए जो विदेशी पर्यटक आते हैं, पर्यटन विभाग को उन्हें बिहार के दूसरे धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहर के प्रति आकर्षित करना चाहिए। उनके लिए बेहतर परिवहन, होटल एवं लोकल गाइड, टूर गाइड की सुविधा मुहैया करानी चाहिए। पर्यटकों की सुविधा के लिए लोकल गाइड को बेहतर से बेहतर जानकारी के लिए ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। बोधगया में हर साल तीन से चार लाख विदेशी पर्यटक आते हैं।  पर्यटकों के लिए बिहार में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उनके लिए यातायात को सुविधाजनक बनाने के लिए सड़के तथा परिवहनों का विशेषकर ध्यान रखा जाना चाहिए। साथ ही बैंक और एटीएम की सुविधा हर गाँव में होनी चाहिए।  </p>
<p>इसी तरह बिहार में फ़ूड प्रोसेसिंग बिज़नेस शुरू करके अच्छी कमाई की जा सकती है। बिहार में आने वाले टूरिस्ट यहाँ के बने नेचुरल फ़ूड आइटम्स को खाना और खरीदना पसंद करेंगे। ये तो हम सभी जानते हैं की बिहार का मुजफ्फरपुर अपनी शाही लीची के लिए मशहूर है साथ ही कई जिले अपने आम उत्पादन मखाना उत्पादन के लिए भी मशहूर हैं। ऐसे में जो भी पर्यटक बिहार घूमने आयंगे वे यहां की विश्वप्रसिद्ध शाही लीची का स्वाद लेना जरूर चाहेंगे। इसके अलावा लीची या मखाना फ़ूड प्रोसेसिंग बिज़नेस शुरू करके भी राज्य को बहुत फ़ायदा होगा। यहां आने वाले पर्यटक बिहार में उत्पादन होने वाले खाद्य पदार्थ तथा यहां बनने वाली चीज़े जैसे की रेशम की साड़ी और मुजफ्फरपुर में बनने वाले लहठी को जरूर खरीदना चाहेंगे इससे ना सिर्फ कारोबारियों का फ़ायदा होगा बल्कि स्टेट जीडीपी बहुत फ़ायदा होगा।  सोनपुर का मेला विश्वभर में प्रसिद्ध है साथ ही यहां की छठ पर्व, सौराठ सभा, राजगीर महोत्सव केवल भारत ही नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पर्यटकों को आकर्षित करने की क्षमता रखते हैं।  </p>
<p>इसी तरह बिहार के व्यंजन और खाद्य पदार्थ विश्वभर में निर्यात किये जाते हैं। यहाँ के पारंपरिक व्यंजन को बढ़ावा देकर विश्व स्तर पर इन्हे पहचान दिलाई जा सकती है। सरकार को यहाँ फ़ूड फेस्टिवल जैसे आयोजन शुरू करने चाहिए। फूड फेस्टिवल के माध्यम से राज्य के व्यंजन जैसे- खाजा, लाई, बेलग्रामी, तिलकुट, लिट्टी-चोखा, सत्तु और मखाना के उत्पाद आर्थिक अवसर उत्पन्न कर सकते हैं। </p>
<p><strong>बिहारवॉव(डॉट)कॉम</strong> के एक रिपोर्ट के अनुसार रिपोर्ट के मुताबिक विदेशी सैलानियों को भाने वाले 10 राज्यों की सूची में बिहार शुमार हो गया है। महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा विदेशी पर्यटक रुख कर रहे हैं। टोटल विदेशी पर्यटकों में 17.6 फ़ीसदी संख्या अकेले महाराष्ट्र में आने वालों की है। दूसरे नंबर पर तमिलनाडु है, जहां 17.1 फीसदी विदेशी पर्यटक आ रहे हैं। सूची में तीसरा नाम उत्तर प्रदेश का है, जहां 12.4 फ़ीसदी विदेशी सैलानी आ रहे हैं। बिहार में विदेशी पर्यटकों के आने वाली संख्या 4.3 फीसद है। टॉप-10 में बिहार नौवें नंबर पर है। दसवें नंबर पर गोवा है जहां पर्यटकों की संख्या महज 4.2 फीसद है।</p>
<p>फेसबुक पर बिभूतिनाथ झा लिखते हैं: जब गोलघर का क्रेज था, तो सेल्फी का यंत्र ही नहीं था। जबकि आनंद कुमार जी के अनुसार &#8220;ना ही लिए हैं और ना ही किसी को भी देखे हैं, ईमानदारी पूर्वक बता रहे हैं और पटना जाने का मौका मिला तो अबकी बार 101% सेल्फी लुंगा ही।&#8221;</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/chutkulanands-letter/bihar-tourism-and-delhi-metro">नीतीश बाबू ! एक बार &#8216;गोलघर&#8217; को पृष्ठभूमि में रखकर अपनी तस्वीर &#8216;ट्वीट&#8217; करें, पर्यटक बिहार की ओर दौड़ जायेंगे</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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