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	<title>theheadmaster Archives - आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</title>
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	<description>आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</description>
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		<title>अम्बिकानाथ मिश्र: &#8220;दी हेडमास्टर&#8221; :  क्योंकि हर कोई &#8216;शिक्षक&#8217; नहीं हो सकता, हर शिक्षक &#8216;चारित्रिक निर्माता&#8217; भी नहीं हो सकता </title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 13 Feb 2022 13:25:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[किताब]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लालगंज (दरभंगा) : हर कोई शिक्षक नहीं हो सकता। हर शिक्षक शिक्षा के प्रति &#8216;समर्पित&#8217; भी नहीं हो सकता। हर समपर्ण &#8216;सामाजिक सरोकार&#8217; के लिए भी नहीं हो सकता। हर शिक्षक अपने छात्रों का चारित्रिक निर्माता नहीं हो सकता। हर शिक्षक अम्बिकनाथ मिश्र नहीं हो सकता और अम्बिकनाथ मिश्र नाम वाले लोग भी &#8220;दी हेडमास्टर&#8221; नहीं [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>लालगंज (दरभंगा) : हर कोई शिक्षक नहीं हो सकता। हर शिक्षक शिक्षा के प्रति &#8216;समर्पित&#8217; भी नहीं हो सकता। हर समपर्ण &#8216;सामाजिक सरोकार&#8217; के लिए भी नहीं हो सकता। हर शिक्षक अपने छात्रों का चारित्रिक निर्माता नहीं हो सकता। हर शिक्षक अम्बिकनाथ मिश्र नहीं हो सकता और अम्बिकनाथ मिश्र नाम वाले लोग भी &#8220;दी हेडमास्टर&#8221; नहीं हो सकता। एक शिक्षक के प्रति समाज के लोगों का यह सोच ही उस शिक्षक के सामाजिक, मानसिक, बौद्धिक, व्यावहारिक, ज्ञान-विज्ञान के गणित और ज्यामिति को दर्शाता है &#8211; एक समर्पण स्वरूप । </strong> </p>
<p>अम्बिकानाथ मिश्र ने अपने जीवन को शिक्षा के क्षेत्र में समर्पित कर दिया था । एक लब्धप्रतिष्ठ शिक्षक एवं शैक्षणिक प्रशासक के रूप में इन्होंने अपने को स्थापित किया एवं यशस्वी हुए। ये अंग्रेजी, गणित और अर्थशास्त्र विषय के विद्वान होने के साथ-साथ विभिन्न भारतीय भाषाओं यथा संस्कृत, बांग्ला, मैथिली आदि के ज्ञाता एवं मर्मज्ञ थे। अम्बिकनाथ मिश्र सरिसब स्थित लक्ष्मीश्वर एकेडमी में 34 वर्षों तक शिक्षण कार्य किया और इस दौरान इन्होने असंख्य छात्रों का शैक्षणिक और चारित्रिक जीवन का निर्माण किया। इनकी इस उपलब्धि के उदाहरण शिक्षा, साहित्य, प्रशासन, विज्ञान, गणित, चिकित्सा शास्त्र आदि विषयों में सफल हुए कई छात्र &#8211; छात्राएँ समाज के गौरव रहे हैं।</p>
<p>आज 13 फरवरी 2022 को यदुनाथ सार्वजनिक पुस्तकालय, पैटघाट (लालगंज), मधुबनी, बिहार के परिसर में मिथिला विश्वविद्यालय में अंग्रेजी के प्रख्यात विद्वान् तथा लक्ष्मीश्वर एकेडमी के पूर्व छात्र प्रो. वसन्त झा की अध्यक्षता में अम्बिकानाथ मिश्र स्मृति ग्रन्थ &#8220;द हेडमास्टर&#8221; का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर अम्बिकानाथ मिश्र जन्म शताब्दी वर्ष में लक्ष्मीश्वर एकेडमी की 12वीं कक्षा में गणित विषय में 95 प्रतिशत से अधिक अंक लाने वाले छात्र-छात्राओं के लिए ‘रामानुज स्कॉलरशिप’ की घोषणा की गयी इसके तहत 10,000 रुपया प्रति छात्र छात्रवृत्ति दी जायेगी।</p>
<p>इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में मैथिली के प्रख्यात अध्यापक डा. जगदीश मिश्र उपस्थित थे। इस स्मृति-ग्रन्थ के संपादक-मण्डल में प्रो. गंगानाथ झा, डा. मित्रनाथ झा, डा. अरविन्द कुमार सिंह झा, पं. भवनाथ  झा तथा डा. अजीत मिश्र ने भी इस पुस्तक के सम्बन्ध में अपने विचार रखे। अपने आप में यह किताब बहुत अलग और खास है। यह किताब अपने &#8220;हेडमास्टर&#8221; के प्रति उसके छात्र- छात्राओं की श्रद्धांजलि है। उनके जन्मशती वर्ष में इस पुस्तक का लोकार्पण उनके सभी छात्र-छात्राओं, समाज के सभी वर्गों एवं यदुनाथ सार्वजनिक पुस्तकालय के लिए असीम गौरव का विषय है।</p>
<figure id="attachment_3794" aria-describedby="caption-attachment-3794" style="width: 1040px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/79c9d146-0844-4ec1-a7ce-91012db3a031.jpg"><img fetchpriority="high" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/79c9d146-0844-4ec1-a7ce-91012db3a031.jpg" alt="" width="1040" height="780" class="size-full wp-image-3794" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/79c9d146-0844-4ec1-a7ce-91012db3a031.jpg 1040w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/79c9d146-0844-4ec1-a7ce-91012db3a031-300x225.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/79c9d146-0844-4ec1-a7ce-91012db3a031-1024x768.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/79c9d146-0844-4ec1-a7ce-91012db3a031-768x576.jpg 768w" sizes="(max-width: 1040px) 100vw, 1040px" /></a><figcaption id="caption-attachment-3794" class="wp-caption-text">जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के विख्यात और अवकाश प्राप्त प्रोफेसर गंगानाथ झा और अन्य गणमान्य व्यक्ति</figcaption></figure>
<p>इस पुस्तक का प्रकाशन इसमाद, दरभंगा ने किया है। मिथिला के इतिहास तथा अन्य विषयों पर इसमाद के दर्जनों पुस्तक प्रकाशित हैं। 640 पन्ने की इस किताब में अंबिकानाथ मिश्र के 115 से अधिक छात्र- छात्राओं एवं विद्वानों का 117 से अधिक विषयों पर गंभीर शोधपरक आलेख एवं स्मृतियाँ हैं। अम्बिकानाथ मिश्र के हज़ारों छात्र- छात्राओं में कोई आइएएस रहा है तो कोई डॉक्टर, कोई प्राध्यापक है तो कोई बैंकर, कोई शिक्षक है तो कोई साहित्यकार, कोई उद्योगपति तो कोई प्रशासक, कोई स्वरोजगार में है तो कोई राजनीति में, कोई कलाकार है तो कोई खिलाड़ी। ऐसा कोई क्षेत्र नही है जिसमे इनका छात्र गौरव नहीं बढ़ाते हों। इस पुस्तक में 1948 &#8211; 1979 के बीच स्कूल में रहे अम्बिकानाथ मिश्र के छात्र &#8211; छात्राओं ने लिखा है।</p>
<p><strong>जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के विख्यात और अवकाश प्राप्त प्रोफेसर गंगानाथ झा ने कहा कि यह पुस्तक शिक्षा के लिए समर्पित अम्बिकानाथ मिश्र के अवदानों का एक दर्पण है जो वर्तमान समाज में शिक्षा के प्रति शिक्षकों के समर्पण के लिए पढ़ने योग्य है। अम्बिकानाथ मिश्र ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने शिक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। डा. मित्रनाथ झा ने पुस्तक का विवरण देते हुए इसके तीनों खण्डों पर विस्तृत विवेचन किया। इस पुस्तक के तीन खण्ड हैं, जिनमें प्रथम खण्ड में अम्बिकानाथ मिश्र के प्रति संस्मरण एवं श्रद्धांजलि दी गयी है तथा दूसरे खण्ड में उनके जन्मस्थान लालगंज गाँव तथा उस परिसर की सांस्कृतिक विरासत को समेटा गया है। तीसरे ख्ण्ड में भारतीय परिप्रेक्ष्य के शोध आलेख हैं। कुल मिलाकर 640 पृष्ठों की इस पुस्तक में 117 से अधिक आलेख हैं। भवनाथ झा ने अपना उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि इस पुस्तक अम्बिकानाथ मिश्र, उनका परिसर तथा परिवेश के अमूर्त इतिहास की धारा को व्याख्यायित करता है, जो वर्तमान पीढ़ी के युवाओं के लिए प्रेरक सिद्ध होगा।</strong></p>
<figure id="attachment_3796" aria-describedby="caption-attachment-3796" style="width: 696px" class="wp-caption alignleft"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/74b0cd8d-6057-4572-b3ed-f056cd56be87.jpg"><img decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/74b0cd8d-6057-4572-b3ed-f056cd56be87-880x1024.jpg" alt="" width="696" height="810" class="size-large wp-image-3796" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/74b0cd8d-6057-4572-b3ed-f056cd56be87-880x1024.jpg 880w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/74b0cd8d-6057-4572-b3ed-f056cd56be87-258x300.jpg 258w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/74b0cd8d-6057-4572-b3ed-f056cd56be87-768x894.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/74b0cd8d-6057-4572-b3ed-f056cd56be87.jpg 1100w" sizes="(max-width: 696px) 100vw, 696px" /></a><figcaption id="caption-attachment-3796" class="wp-caption-text">अमल झा किताब के साथ </figcaption></figure>
<p>इस अवसर पर अम्बिकानाथ मिश्र के पिता पं. यदुनाथ मिश्र के तैलचित्र का भी लोकार्पण किया गया। केदारनाथ झा, प्रबोध झा, यशोदानाथ झा, शिवशंकर श्रीनिवास, अजय मिश्र, शैलेन्द्र आनन्द, पुस्तकालय प्रभारी असर्फी कामति आदि अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने अपना उद्गार व्यक्त किया। अम्बिकानाथ मिश्र मिथिला के प्रख्यात विभूति अयाची मिश्र एवं शंकर मिश्र के वंशज हैं। इनके पिता यदुनाथ मिश्र न्यायशास्त्र के अप्रतिम विद्वान थे। न्याय पर लिखी गई इनकी 4 मूल पुस्तक अपने विषय में अमूल्य धरोहर हैं।</p>
<p>अम्बिकानाथ मिश्र ने अपने जीवन को शिक्षा के क्षेत्र में समर्पित कर दिया। एक लब्धप्रतिष्ठ शिक्षक एवं शैक्षिक प्रशासक के रूप में इन्होंने अपने को स्थापित किया एवं यशस्वी हुए। ये अंग्रेजी, गणित और अर्थशास्त्र विषय के विद्वान होने के साथ-साथ विभिन्न भारतीय भाषाओं यथा संस्कृत, बांग्ला, मैथिली आदि के ज्ञाता एवं मर्मज्ञ थे। लक्ष्मीश्वर एकेडमी, सरिसब, मधुबनी में इन्होंने 34 वर्षों तक शिक्षण कार्य किया। इस दौरान श्री मिश्र ने अनगिनत छात्रों का शैक्षणिक जीवन एवं चरित्र का निर्माण किया। इनकी इस उपलब्धि के उदाहरण शिक्षा, साहित्य, प्रशासन, विज्ञान, गणित, चिकित्सा शास्त्र आदि विषयों में सफल हुए कई छात्र &#8211; छात्राएँ समाज के गौरव रहे हैं। </p>
<p>अम्बिकानाथ मिश्र का जन्म 13 फरवरी, 1921 ई. को मधुबनी जिले के झंझारपुर प्रखंड के लालगंज ग्राम में हुआ। इनकी प्रारंभिक शिक्षा दरभंगा के राज हाई स्कूल में हुई। इन्होंने मैट्रिक की परीक्षा 1937 ई. में तत्कालीन पटना विश्वविद्यालय से प्रथम श्रेणी (स्कॉलरशिप सहित) में पास की। पटना विश्वविद्यालय से इन्होंने बी.ए. (अर्थशात्र आनर्स) की परीक्षा 1941 ई. में पास की। पारिवारिक कारणों से श्री मिश्र उच्चतर शिक्षा (एम. ए., अर्थशास्त्र) को पूरा नहीं कर सके। 1947 में इन्होंने पटना ट्रेनिंग कॉलेज से &#8216;डिप्लोमा इन एजुकेशन&#8217; की डिग्री हासिल की। श्री मिश्र 1947 से 1979 ई. तक लक्ष्मीश्वर एकेडमी, सरिसब के शिक्षक एवं प्रधानाध्यापक के पद पर रहे। 5 जून, 1993 को इनका निधन हुआ।<br />
 <br />
श्री मिश्र ने अर्थशास्त्र पर एक  पुस्तक &#8216;अर्थशास्त्र प्रवेश&#8217; लिखने के अतिरिक्त अपने जीवन काल के अंतिम चरण में सुभाष चन्द्र बोस की आत्मकथा का मैथिली में &#8216;एक भारतीय यात्री&#8217; शीर्षक से अनुवाद किया, जो 2011 में प्रकाशित हुआ। 1944-45 में इन्होंने &#8216;सर्चलाईट&#8217; दैनिक अखबार में पत्रकारिता भी की। निपुण अभिभावक तथा समर्पित समाजसेवी के साथ अम्बिकानाथ मिश्र &#8216;हेडमास्टर&#8217; के रूप में प्रख्यात थे।</p>
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