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	<title>supreme Archives - आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</title>
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	<description>आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</description>
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		<title>आखिर भारतीय स्टेट बैंक किसके संरक्षण में &#8216;मनमानी&#8217; कर रहा है? कुछ तो है? कोई तो है ?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 18 Mar 2024 13:36:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
		<category><![CDATA[bond]]></category>
		<category><![CDATA[electoral]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली: देश में जब सड़कों और संस्थानों का नाम बदलने की परंपरा चली आ रही है, वैसी स्थिति में समय आ गया है जब भारतीत स्टेट बैंक का नाम भी किसी राजनेता अथवा राजनीतिक पार्टी के साथ जोड़ देना चाहिए। पहली जुलाई, 1955 को स्थापित भारतीय स्टेट बैंक शायद अपने स्थापना काल के बाद [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली: देश में जब सड़कों और संस्थानों का नाम बदलने की परंपरा चली आ रही है, वैसी स्थिति में समय आ गया है जब भारतीत स्टेट बैंक का नाम भी किसी राजनेता अथवा राजनीतिक पार्टी के साथ जोड़ देना चाहिए। पहली जुलाई, 1955 को स्थापित भारतीय स्टेट बैंक शायद अपने स्थापना काल के बाद आज तक पहली बार भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने उसके आदेशों का पालन नहीं करने के कारण फटकार लगाया है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का उलंघन करने और अपनी मनमानी करने के पीछे कोई तो ऐसी बात है जो सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सहित अन्य न्यायमूर्तिगण नहीं समझ पा रहे हैं। यह अलग बात है कि सर्वोच्च न्यायालय जिस बात को सार्वजनिक करने के लिए बारम्बार का रही है, उसमें भारत के सैकड़ों आला राजनेता, उनकी राजनीतिक पार्टियां &#8216;तथाकथित रूप से लिप्त&#8217; हैं। </strong></p>
<p>उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को तीसरी बार भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को फटकार लगाते हुए उसे मनमाना रवैया न अपनाने और 21 मार्च तक चुनावी बॉण्ड योजना से संबंधित सभी जानकारियों का ‘‘पूरी तरह खुलासा’’ करने को कहा। न्यायालय ने चुनावी बॉण्ड से संबंधित सभी जानकारियों का खुलासा करने को कहा जिसमें विशिष्ट बॉण्ड संख्याएं भी शामिल हैं जिससे खरीददार और प्राप्तकर्ता राजनीतिक दल के बीच राजनीतिक संबंध का खुलासा होगा। </p>
<p>भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) डी वाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय पीठ ने कहा कि इसमें ‘‘कोई संदेह नहीं’’ है कि एसबीआई को बॉण्ड की सभी जानकारियों का पूरी तरह खुलासा करना होगा। पीठ में न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति बी आर गवई, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल हैं। पीठ ने कहा कि निर्वाचन आयोग एसबीआई से जानकारियां मिलने के बाद अपनी वेबसाइट पर तुरंत इन्हें अपलोड करे।</p>
<p>पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने 15 फरवरी को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए केंद्र की चुनावी बॉण्ड योजना को रद्द कर दिया था और इसे ‘‘असंवैधानिक’’ करार देते हुए निर्वाचन आयोग को चंदा देने वालों, चंदे के रूप में दी गई राशि और प्राप्तकर्ताओं का 13 मार्च तक खुलासा करने का आदेश दिया था।</p>
<p>उच्चतम न्यायालय ने 11 मार्च को एसबीआई को बड़ा झटका देते हुए चुनावी बॉण्ड संबंधी जानकारी का खुलासा करने के लिए समयसीमा बढ़ाने का अनुरोध करने वाली उसकी याचिका खारिज कर दी थी और उससे पूछा था कि उसने अदालत के निर्देश के अनुपालन के लिए क्या कदम उठाए हैं।</p>
<p>बीते शुक्रवार को न्यायालय ने देश के सबसे बड़े बैंक को अपने निर्देशों के अनुपालन में विशिष्ट अक्षरांकीय संख्या (यूनीक अल्फा-न्यूमेरिक नंबर) का खुलासा न करने के लिए ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी किया था और कहा था कि एसबीआई उन संख्याओं के खुलासे के लिए &#8220;कर्तव्यबद्ध&#8221; था। पीठ ने सोमवार को एसबीआई की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे की दलीलों पर गौर किया कि बैंक को उसके पास उपलब्ध चुनावी बॉण्ड की सभी जानकारियों का खुलासा करने में कोई आपत्ति नहीं है।</p>
<p>उसने कहा, ‘‘आदेश को पूरी तरह से प्रभावी बनाने और भविष्य में किसी भी विवाद से बचने के लिए, एसबीआई के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक बृहस्पतिवार (21 मार्च) को शाम पांच बजे से पहले एक हलफनामा दाखिल कर यह बताए कि एसबीआई ने चुनावी बॉण्ड की उसके पास उपलब्ध सभी जानकारियों का खुलासा कर दिया है और कोई भी जानकारी छिपायी नहीं है।’’ सुनवाई के दौरान न्यायालय ने एसबीआई से बॉण्ड संख्याओं समेत चुनाव बॉण्ड से संबंधित सभी संभावित सूचनाओं का खुलासा करने को कहा।</p>
<p>पीठ ने सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से कहा, ‘‘हमने एसबीआई से सभी जानकारियों का खुलासा करने के लिए कहा था जिसमें चुनावी बॉण्ड संख्याएं भी शामिल हैं। एसबीआई विवरण का खुलासा करने में मनमाना रुख न अपनाए।’’ उसने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने चुनावी बॉण्ड मामले में अपने फैसले में बैंक से बॉण्ड के सभी विवरण का खुलासा करने को कहा था तथा उसे इस संबंध में और आदेश का इंतजार नहीं करना चाहिए।</p>
<p>उच्चतम न्यायालय ने साथ ही चुनावी बॉण्ड मामले में औद्योगिक निकायों, उद्योग मंडल एसोचैम और भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की गैर-सूचीबद्ध याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। औद्योगिक निकायों ने बॉण्ड विवरण का खुलासा करने के खिलाफ वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी के जरिए दायर की अपनी अंतरिम याचिका पर तत्काल सुनवाई करने का अनुरोध किया था।</p>
<p>साल्वे ने पीठ से कहा कि ऐसा नहीं लगना चाहिए कि बैंक अदालत के साथ ‘‘खिलवाड़’’ कर रहा है क्योंकि उन्हें चुनावी बॉण्ड की जानकारियों का खुलासा करने में कोई दिक्कत नहीं है। इस मामले में याचिकाकर्ता गैर लाभकारी संगठन (एनजीओ) की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने दावा किया कि प्रमुख राजनीतिक दलों ने दानदाताओं का विवरण नहीं दिया है, केवल कुछ दलों ने दिया है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दावा किया कि ये प्रायोजित एनजीओ ‘‘आंकड़ों में हेरफेर’’ कर रहे हैं।</p>
<p>उच्चतम न्यायालय ने चुनावी बॉण्ड विवरण का खुलासा करने संबंधी उसके फैसले की समीक्षा करने का अनुरोध करने वाले ‘सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन’ (एससीबीए) के अध्यक्ष व वरिष्ठ अधिवक्ता आदेश सी अग्रवाल के पत्र पर विचार करने से भी इनकार कर दिया।</p>
<p>सीजेआई ने कहा, ‘‘एक वरिष्ठ अधिवक्ता होने के अलावा, आप एससीबीए के अध्यक्ष हैं। आप प्रक्रिया जानते हैं। आपने मेरी स्वत: संज्ञान संबंधी शक्तियों को लेकर पत्र लिखा है। इसका उल्लेख करने का औचित्य क्या है? ये सभी प्रचार संबंधी चीजें हैं। हम इसकी अनुमति नहीं देंगे।’’ सीजेआई ने अग्रवाल से कहा, ‘‘मुझे और कुछ कहने के लिए मजबूर न करें।’’</p>
<p>सॉलिसिटर जनरल मेहता ने केंद्र सरकार की ओर से कहा, ‘‘अग्रवाल ने जो भी लिखा है, मैं अपने आप को पूरी तरह उससे अलग करता हूं। इसकी बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं है।’’</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि चुनावी बॉण्ड पर उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद ‘‘केवल सरकारी स्तर पर ही नहीं बल्कि दूसरे स्तर पर भी बेबुनियादी बयानबाजी शुरू हो गयी हैं। मेहता ने कहा कि अदालत में पेश लोगों ने प्रेस को साक्षात्कार देना, अदालत को ‘‘जानबूझकर शर्मिंदा’’ करना शुरू कर दिया है और इससे असमानता का माहौल पैदा हो गया है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट्स का भी उल्लेख किया और कहा कि ये शर्मिंदा करने के उद्देश्य से किए गए। उन्होंने कहा कि केंद्र का कहना यह है कि वे काले धन पर रोक लगाना चाहते हैं।</p>
<p>इस पर सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा, ‘‘श्रीमान सॉलिसिटर, हम सिर्फ निर्देशों के क्रियान्वयन को लेकर चिंतित हैं। न्यायाधीश होने के नाते हम संविधान के अनुसार फैसला करते हैं। हम कानून के अनुसार काम करते हैं। हम पर भी सोशल मीडिया और प्रेस में टिप्पणियां की जाती हैं।’’</p>
<p>उच्चतम न्यायालय ने एक मार्च 2018 से 11 अप्रैल 2019 तक बेचे गए चुनावी बॉण्ड की जानकारियों का खुलासा करने का अनुरोध करने वाली याचिका पर सुनवाई करने से भी इनकार कर दिया।</p>
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		<title>ईवीएम और वीवीपैट के आंकड़ों का 100 फीसदी मिलान करने की मांग वाली याचिका खारिज</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/law/sc-rejects-evm-vvpat-petition</link>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 21 May 2019 13:03:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कानून]]></category>
		<category><![CDATA[court]]></category>
		<category><![CDATA[petition]]></category>
		<category><![CDATA[supreme]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने देश में हुए आम चुनावों के लिए 23 मई को होने वाली मतों की गिनती के दौरान वीवीपैट मशीनों की पर्ची का इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के आंकड़ों के साथ शत प्रतिशत मिलान करने की मांग वाली जनहित याचिका मंगलवार को खारिज कर दी । न्यायमूर्ति अरूण मिश्र की अगुवाई [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने देश में हुए आम चुनावों के लिए 23 मई को होने वाली मतों की गिनती के दौरान वीवीपैट मशीनों की पर्ची का इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के आंकड़ों के साथ शत प्रतिशत मिलान करने की मांग वाली जनहित याचिका मंगलवार को खारिज कर दी ।</p>
<p>न्यायमूर्ति अरूण मिश्र की अगुवाई वाली अवकाश पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई करने से इंकार कर दिया । यह याचिका चेन्नई के एक गैर सरकारी संगठन ‘टेक फार आल’ की ओर से दायर की गयी थी ।</p>
<p>अवकाश पीठ ने कहा कि प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली अदालत की वृहद पीठ इस मामले में सुनवाई कर आदेश पारित कर चुकी है।</p>
<p>शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘प्रधान न्यायाधीश इस मामले का निस्तारण कर चुके हैं । दो न्यायाधीशों की अवकाश पीठ के समक्ष आप जोखिम क्यों ले रहे हैं।’’ </p>
<p>न्यायमूर्ति मिश्र ने कहा, ‘‘हम प्रधान न्यायाधीश के आदेश की अवहेलना नहीं कर सकते हैं&#8230;.. यह बकवास है। यह याचिका खारिज की जाती है।’’ </p>
<p>इससे पहले सात मई को शीर्ष अदालत ने 21 विपक्षी दलों की ओर से दायर समीक्षा याचिका खारिज कर दी थी। </p>
<p>आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू की अगुवाई में विपक्षी दलों की ओर से दायर याचिका में वीवीपैट पर्चियों के साथ ईवीएम के आंकड़ों का मिलान बढ़ा कर 50 फीसदी किये जाने की मांग की गयी थी ।</p>
<p>उच्चतम न्यायालय ने आठ अप्रैल को अपने फैसले में निर्वाचन आयोग को मतगणना के दिन प्रत्येक विधानसभा के पांच मतदान केंद्रों के ईवीएम और वीवीपैट का मिलान करने का निर्देश दिया था ।  </p>
<p>​उधर, लोकसभा चुनाव के एग्जिट पोल में राजग को बहुमत मिलने के पूर्वानुमान के बीच भाजपा ने अपनी अगुवाई वाले इस गठबंधन को और अधिक मजबूती देने तथा सरकार गठन के बारे में विचार विमर्श के लिये मंगलवार की शाम को गठबंधन के सहयोगी दलों के नेताओं की बैठक बुलाई है । </p>
<p>सूत्रों ने बताया कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने राजग के शीर्ष नेताओं को मंगलवार को रात्रि भोज पर आमंत्रित किया है। इससे पहले भाजपा मुख्यालय में केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा के शीर्ष नेताओं की बैठक होगी जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद रहेंगे। </p>
<p>राजग की बैठक में बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के पलानीसामी तथा लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान भी मौजूद रहेंगे। इस बैठक में शिरोमणि अकाली दल का प्रतिनिधित्व पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और पार्टी नेता सुखबीर सिंह बादल करेंगे । हरसिमरत कौर बादल केंद्रीय मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेंगी ।</p>
<p>केंद्रीय मंत्रियों की बैठक शाम को भाजपा मुख्यालय में होगी ।</p>
<p>सूत्रों ने बताया कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के बैठक में शामिल होने की अभी पुष्टि नहीं हो पायी है क्योंकि वह विदेश यात्रा पर थे ।  ​(भाषा के सौजन्य  से)​</p>
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		<title>देश की सीमा पर या आतंकवादी हमलों में मारे गए लोगों की संख्या से अधिक लोग सड़क-दुर्घटनाओं में ढ़ेर होते हैं</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/crime/more-people-killed-on-roads-than-in-attacks</link>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 06 Dec 2018 11:31:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अपराध]]></category>
		<category><![CDATA[accidents]]></category>
		<category><![CDATA[court]]></category>
		<category><![CDATA[road]]></category>
		<category><![CDATA[supreme]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नयी दिल्ली​: ​देश की सड़कों पर पर गड्ढों की वजह से पिछले पांच साल के दौरान हुई दुर्घटनाओं में 14,926 लोग​ मृत्यु को प्राप्त किये जो ​शायद देश की सीमा पर या आतंकवादियों द्वारा की गई हत्याओं से ज्यादा ​है। भारत का सर्वोच्च न्यायालय इस भयावह स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुये इसे ‘अस्वीकार्य’ बताया। [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नयी दिल्ली​:   ​देश की सड़कों पर पर गड्ढों की वजह से पिछले पांच साल के दौरान हुई दुर्घटनाओं में 14,926 लोग​  मृत्यु को प्राप्त किये जो ​शायद देश की सीमा पर  या आतंकवादियों द्वारा की गई हत्याओं से ज्यादा ​है। भारत का सर्वोच्च न्यायालय इस भयावह स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुये इसे ‘अस्वीकार्य’ बताया। </p>
<p>न्यायमूर्ति मदन बी. लोकूर, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की पीठ ने कहा कि सड़कों पर गड्ढों के कारण होने वाली मौतों का आंकड़ा ‘‘संभवत: सीमा पर या आतंकवादियों द्वारा की गई हत्याओं से ज्यादा है।’’ </p>
<p>पीठ ने कहा कि 2013 से 2017 के बीच सड़कों पर गड्ढों के कारण हुई मौतों का आंकड़ा यही दिखाता है कि संबंधित प्राधिकारी सड़कों का रखरखाव सही तरीके से नहीं कर रहे हैं।</p>
<p>न्यायालय ने भारत में सड़कों के गड्ढों के कारण होने वाली मौतों के मामले में शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश के. एस. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली उच्चतम न्यायालय की सड़क सुरक्षा समिति की रिपोर्ट पर केन्द्र से जवाब मांगा है।​न्यायालय ने इस मामले को जनवरी में सुनवाई के लिये सूचीबद्ध किया है।</p>
<p>शीर्ष अदालत ने 20 जुलाई को इस तरह की मौतों पर चिंता व्यक्त करते हुये टिप्पणी की थी ऐसी दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु के आंकड़े आतंकी हमलों में मारे गये लोगों की संख्या से अधिक हैं।​ पीठ ने इस स्थिति को भयावह बताते हुये शीर्ष अदालत की समिति से इस मामले में सड़क सुरक्षा के बारे में गौर करने का अनुरोध किया था।</p>
<figure id="attachment_859" aria-describedby="caption-attachment-859" style="width: 960px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.sundaypost.in/wp-content/uploads/2018/12/Mathura-road.jpg"><img fetchpriority="high" decoding="async" src="http://www.sundaypost.in/wp-content/uploads/2018/12/Mathura-road.jpg" alt="​अधिकांश भारतीय सड़कों की स्थिति ​- फोटो: एच.टी. " width="960" height="619" class="size-full wp-image-859" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2018/12/Mathura-road.jpg 960w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2018/12/Mathura-road-300x193.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2018/12/Mathura-road-768x495.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2018/12/Mathura-road-910x587.jpg 910w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2018/12/Mathura-road-696x449.jpg 696w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2018/12/Mathura-road-651x420.jpg 651w" sizes="(max-width: 960px) 100vw, 960px" /></a><figcaption id="caption-attachment-859" class="wp-caption-text">​अधिकांश भारतीय सड़कों की स्थिति ​- फोटो: एच.टी.</figcaption></figure>
<p>न्यायालय ने कहा था कि यह सर्वविदित है कि इस तरह के हादसों में बड़ी संख्या में लोगों की मृत्यु होती है और वे प्राधिकारी, अपना काम ठीक तरह से नहीं कर रहे हैं जिनकी जिम्मेदारी सड़कों के रखरखाव की है ।​ देश में सड़क सुरक्षा से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई के दौरान सड़कों पर गड्ढों का मुद्दा उठा था।   </p>
<p>​विशेषज्ञों का मानना है कि ​सड़कों का बुनियादी ढांचा देश के विकास का प्रतीक है और नागरिकों की सुरक्षा और संतुष्टि के लिए बेहद महत्वपूर्ण ​है। परन्तु इसकी चिन्ता किसे है।<br />
वर्ल्ड इको़नॉमिक फोरम के सर्वेक्षण सर्वेक्षण के मुताबिक भारतीय सड़कों की स्थिति 51 वें स्थान पर ​है।   </p>
<p>सिंगापुर एशिया ​में सड़क बुनियादी ढांचे के मामले में एशिया में शीर्ष स्थान पर है और विश्व स्तर पर दूसरे नंबर पर ​है। इसके बाद जापान और ताइवान आते हैं जो दुनिया में  क्रमशः 5वें और 11वें स्थान पर ​हैं। थाईलैंड और पाकिस्तान से क्रमश: 60 और 77 पर हैं जो भारत से काफी पीछे​ हैं। ​बेहतरीन सड़कों के मामले में चीन का दुनिया में 39 वां स्थान ​है। </p>
<p>भारत में मोटर गाड़ियों से चलने वाले यात्री, पैदल चलने वालों के अलावा साइकिल व दुपहिया की सवारी करने वाले यात्रियों के अधिकारों का सम्मान नहीं करते और अक्सर गलत जगह गाड़ियां खड़ी कर दिए जाने से भी पैदल यात्रियों को सड़कों पर चलना पड़ता है जिससे दुर्घटनाएं होती ​है। भारत में सड़कों की कुल लंबाई 46 लाख किलोमीटर है​ और सड़कों के घनत्व (प्रति 100 किलोमीटर के क्षेत्र में रोड की लंबाई, किलोमीटर में)  भारत में यह 143 है। (भाषा के सहयोग से) </p>
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		<title>नन्दन नीलेकणी का &#8220;आधार&#8221; &#8220;निराधार&#8221; नहीं हुआ, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा संवैधानिक वैध्यता</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/law/supreme-court-declares-aadhaar-constitutionally-valid</link>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 26 Sep 2018 13:43:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कानून]]></category>
		<category><![CDATA[aadhar]]></category>
		<category><![CDATA[constitution]]></category>
		<category><![CDATA[court]]></category>
		<category><![CDATA[supreme]]></category>
		<category><![CDATA[valid]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली : सर्वोच्च न्यायालय ​द्वारा &#8220;आधार​&#8221;​ को संवैधानिक रूप से वैध करार ​करने के साथ ही, आधार &#8220;निराधार&#8221; नहीं हुआ और 28 जनबरी, 2009 में इन्फोसिस के सह-संस्थापक नन्दन नीलेकणी द्वारा प्रारम्भ किये गए केन्द्र की महत्वाकांक्षी योजना भी अपने &#8220;अस्तित्व&#8221; पर &#8220;दाग़&#8221; नहीं लगने दिया। यह अलग बात है कि विगत वर्षों में [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/law/supreme-court-declares-aadhaar-constitutionally-valid">नन्दन नीलेकणी का &#8220;आधार&#8221; &#8220;निराधार&#8221; नहीं हुआ, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा संवैधानिक वैध्यता</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली : सर्वोच्च न्यायालय ​द्वारा &#8220;आधार​&#8221;​ को संवैधानिक रूप से वैध करार ​करने के साथ ही, आधार &#8220;निराधार&#8221; नहीं हुआ और 28 जनबरी, 2009 में इन्फोसिस के सह-संस्थापक नन्दन  नीलेकणी  द्वारा प्रारम्भ किये गए केन्द्र की महत्वाकांक्षी योजना भी अपने &#8220;अस्तित्व&#8221; पर &#8220;दाग़&#8221; नहीं लगने दिया। </strong></p>
<p>यह अलग बात है कि विगत वर्षों में &#8220;आधार&#8221; को कई न्यायालयों का चक्कर लगाना पड़ा और सबों ने आधार की गँगा में हाथ भी धोये, मैले भी किये और आज स्वयं जीत का सेहरा भी बाँध रहे हैं। चाहे कोई भी आधार के तले अपना आधार मजबूत करे, सच तो यही रहेगा की नीलेकणी ने ही 2010 में आधार का लोगो देश को समर्पित किये थे। देश में अब 122 करोड़ लोगों के पास आधार संख्या है  </p>
<p><strong>प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने अपने फैसले में कहा कि आधार का लक्ष्य कल्याणकारी योजनाओं को समाज के वंचित तबके तक पहुंचाना है और वह ना सिर्फ व्यक्तिगत बल्कि समुदाय के दृष्टिकोण से भी लोगों के सम्मान का ख्याल रखती है।​ शीर्ष अदालत ने कहा कि आधार जनहित में बड़ा काम कर रहा है और आधार का मतलब है अनोखा और सर्वश्रेष्ठ होने के मुकाबले अनोखा होना बेहतर है।</strong></p>
<p>उच्चतम न्यायालय ने कहा कि हिंदी शब्द ‘आधार’ का उपयोग अब इसके शब्दकोश वाले अर्थ के लिए ही नहीं किया जाता बल्कि सभी लोग इसे व्यक्ति की पहचान वाले उस पत्र से पहले जोड़ कर देखते हैं जो एक तरह से डिजिटल अर्थव्यवस्था का प्रतीक बन गया है।​ आधार हर घर में पहचान बन गया है और ‘जंगल की आग’ की तरह यह प्रसारित हुआ है।​ न्यायालय ने कहा, ‘‘सर्वश्रेष्ठ होने से अच्छा अनूठा होना है क्योंकि सर्वश्रेष्ठ होने से आप पहले नंबर पर आ जाते हैं लेकिन अनूठे होने से आप इकलौते हो जाते हैं।’’ </p>
<p>इधर, भारत विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने आधार को संवैधानिक रूप से वैध बताने के उच्चतम न्यायालय के फैसले को अपनी जीत बताया है। यूआईडीएआई के मुख्य कार्यकारी अजय भूषण ​पांडे के अनुसार: ‘‘ यह फैसला 4-1 से आधार के पक्ष में है। न्यायालय ने आधार को संवैधानिक दृष्टि से वैध ठहराया है। यह गरीबों और हाशिये पर रह रहे वर्ग को सशक्त करता है। आधार का इस्तेमाल सब्सिडी और सरकारी योजनाओं में होगा जिससे सरकारी कोष का दुरुपयोग नहीं हो सकेगा। इसका इस्तेमाल आयकर के लिए होगा और कर चोरी तथा कालेधन पर अंकुश लगेगा।’’ </p>
<p>प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि ‘आधार’ को भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ‘विशिष्ट पहचान’ कहता है। प्राधिकरण दावा करता है कि यह न केवल किसी व्यक्ति की पहचान का पुख्ता तरीका है बल्कि एक ऐसा उपकरण है जहां कोई व्यक्ति अन्य किसी दस्तावेज के बिना कोई लेनदेन कर सकता है।</p>
<figure id="attachment_753" aria-describedby="caption-attachment-753" style="width: 800px" class="wp-caption alignleft"><a href="http://www.sundaypost.in/wp-content/uploads/2018/09/nandan.jpg"><img decoding="async" src="http://www.sundaypost.in/wp-content/uploads/2018/09/nandan.jpg" alt="नन्दन नीलेकणी" width="800" height="600" class="size-full wp-image-753" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2018/09/nandan.jpg 800w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2018/09/nandan-300x225.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2018/09/nandan-768x576.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2018/09/nandan-80x60.jpg 80w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2018/09/nandan-265x198.jpg 265w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2018/09/nandan-696x522.jpg 696w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2018/09/nandan-560x420.jpg 560w" sizes="(max-width: 800px) 100vw, 800px" /></a><figcaption id="caption-attachment-753" class="wp-caption-text">नन्दन नीलेकणी</figcaption></figure>
<p>पीठ ने कहा, ‘‘आधार पिछले कुछ साल में न केवल भारत में बल्कि अन्य कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सबसे अधिक चर्चा वाला शब्द बन गया है। हिंदी शब्दकोश में मौजूद इस शब्द का महत्व दोयम हो गया है। आज कोई ‘आधार’ शब्द बोलेगा तो उसका अर्थ सुनने वाला इसके शब्दकोश में अंकित अर्थ से नहीं लगाता।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसके बजाय ‘आधार’ शब्द का उल्लेख करने से ही कोई व्यक्ति उस कार्ड के बारे में सोचेगा जो किसी को पहचान के लिए दिया जाता है।’’  </p>
<p>संविधान पीठ ने आधार योजना संबंधी कानून और इसे वित्त विधेयक के रूप में पारित कराने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की थी। इस मामले में तीन अलग अलग फैसले सुनाये गये।​ पहला निर्णय संविधान पीठ के सदस्य न्यायमूर्ति ए के सीकरी ने न्यायमूर्ति सीकरी ने प्रधान न्यायाधीश, न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर और अपनी ओर से फैसला पढ़ा।​ न्यायमूर्ति सीकरी ने कहा कि जितनी जल्दी संभव हो आंकड़ों/सूचनाओं की सुरक्षा के लिए मजबूत रक्षा प्रणाली विकसित की जाए।</p>
<p>उन्होंने कहा कि आधार के खिलाफ याचिकाकर्ताओं के आरोप संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन पर आधारित हैं, जिनके कारण राष्ट्र शासकीय निगरानी वाले राज्य में बदल जायेगा।​ न्यायालय ने कहा कि आधार के लिए यूआईडीएआई ने न्यूनतम जनांकीकीय और बायोमिट्रिक आंकड़े एकत्र किये हैं। साथ ही आधार योजना के सत्यापन के लिए पर्याप्त रक्षा प्रणाली है।​ पीठ ने कहा कि आधार समाज के वंचित तबके को सशक्त बनाता है और उन्हें पहचान देता है।</p>
<p>पीठ ने निजी कंपनियों को आधार के आंकड़े एकत्र करने की अनुमति देने वाले आधार कानून के प्रावधान 57 को रद्द कर दिया है।​ न्यायालय ने कहा कि सीबीएसई, नीट, यूजीसी आधार को अनिवार्य नहीं कर सकते हैं और स्कूलों में दाखिले के लिए भी यह अनिवार्य नहीं है।​ पीठ ने सरकार को निर्देश दिया कि वह अवैध आव्रजकों को आधार नंबर नहीं दे।</p>
<p>न्यायमूर्ति सीकरी ने कहा, किसी भी बच्चे को आधार नंबर नहीं होने के कारण लाभ/सुविधाओं से वंचित नहीं किया जा सकता है।​ न्यायालय ने लोकसभा में आधार विधेयक को धन वियेयक के रूप में पारित करने को बरकरार रखा और कहा कि आधार कानून में ऐसा कुछ भी नहीं है जो किसी व्यक्ति की निजता का उल्लंघन करता हो।</p>
<p>इस निर्णय के अनुसार आधार कार्ड/नंबर को बैंक खाते से लिंक/जोड़ना अनिवार्य नहीं है। इसी तरह टेलीकॉम सेवा प्रदाता उपभोक्ताओं को अपने फोन से आधार नंबर को लिंक कराने के लिये नहीं कह सकते।​ पीठ ने कहा कि आयकर रिटर्न भरने और पैन कार्ड बनवाने के लिए आधार अनिवार्य है।​ संविधान पीठ के सदस्य न्यायमूर्ति धनन्जय चन्द्रचूड़ और न्यायमूर्ति अशोक भूषण भी शामिल थे और इस दोनों न्यायाधीशों ने अपने फैसले अलग-अलग लिखे हैं​ (भाषा के सहयोग से)​ </p>
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		<title>सर्वोच्च न्यायालय : धार्मिक परम्पराएं और रीति -रिवाज संविधान के सिंद्धान्तो के अनुरूप होनी चाहिए</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Jul 2018 11:21:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कानून]]></category>
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		<category><![CDATA[court]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम से १७५ किमी की दूरी ​पर पम्पा है और वहाँ से चार किमी की दूरी पर पश्चिम घाट से सह्यपर्वत श्रृंखलाओं के घने वनों के बीच, समुद्रतल से लगभग १००० मीटर की ऊंचाई पर​ प्रसिद्द शबरीमला मंदिर है। ​इस मंदिर में 10-50 साल के आयुवर्ग की महिलाओं का प्रवेश वर्जित ​है। [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम से १७५ किमी की दूरी ​पर पम्पा है और वहाँ से चार किमी की दूरी पर पश्चिम घाट से सह्यपर्वत श्रृंखलाओं के घने वनों के बीच, समुद्रतल से लगभग १००० मीटर की ऊंचाई पर​ प्रसिद्द शबरीमला मंदिर है। ​इस मंदिर में 10-50 साल के आयुवर्ग की महिलाओं का प्रवेश वर्जित ​है। लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि प्रवेश वर्जित ​करने जैसे रीति रिवाज अथवा धार्मिक प्रथाओं को संविधान के सिद्धांतों के अनुरूप होना होगा।</strong> </p>
<p>प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 का हवाला देते हुये कहा कि किसी भी व्यक्ति को सिर्फ &#8220;सार्वजनिक स्वास्थ,सार्वजनिक व्यवस्था और नैतिकता&#8221; के आधार पर रोका जा सकता है। </p>
<p>संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति आर एफ नरिमन, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ भी शामिल हैं। पीठ ने टिप्पणी की कि 1950 में संविधान लागू होने के बाद सभी कुछ संविधान के दायरे में है।</p>
<p>कंब रामायण, महाभागवत के अष्टम स्कंध और स्कंदपुराण के असुर कांड में जिस शिशु शास्ता का जिक्र है, अयप्पन उसी के अवतार माने जाते हैं। कहते हैं, शास्ता का जन्म मोहिनी वेषधारी विष्णु और शिव के समागम से हुआ था। उन्हीं अयप्पन का मशहूर मंदिर पूणकवन के नाम से विख्यात 18 पहाडि़यों के बीच स्थित इस धाम में है, जिसे सबरीमला श्रीधर्मषष्ठ मंदिर कहा जाता है। यह भी माना जाता है कि परशुराम ने अयप्पन पूजा के लिए सबरीमला में मूर्ति स्थापित की थी। कुछ लोग इसे रामभक्त शबरी के नाम से जोड़कर भी देखते हैं।​ मक्का-मदीना के बाद यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तीर्थ माना जाता है, जहां हर साल करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं।​ शबरीमला शैव और वैष्णवों के बीच की अद्भुत कड़ी है। </p>
<p>न्यायालय ने यह टिप्पणी उस वक्त की जब 800 साल पुराने भगवान अय्यप्पा मंदिर का संचालन करने वाले त्रावंकोर देवास्वम बोर्ड की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि न्यायालय को यह परखना होगा कि क्या यह प्रथा सही विश्वास पर आधारित है जो एक समुदाय में सदियों से चली आ रही है। लोगों का मानना है श्री अयप्पन ब्रह्माचारी थे। इसलिए यहां वे छोटी बच्चियां आ सकती हैं, जो रजस्वला न हुई हों या बूढ़ी औरतें, जो इससे मुक्त हो चुकी हैं। </p>
<p>उन्होंने कहा कि देश की मस्जिदों में महिलाओं को प्रवेश की अनुमति नहीं है और आस्था पर आधारित इन परंपराओं के परखने से मुद्दों का पिटारा खुल जायेगा। पीठ ने सिंघवी से कहा कि देवस्वाम बोर्ड को यह स्थापित करना होगा कि एक निश्चित आयु वर्ग की महिलाओं का प्रवेशन वर्जित करना धार्मिक परपंरा का आवश्यक और अनिवार्य हिस्सा है। </p>
<p>पीठ ने केरल उच्च न्यायालय में बोर्ड के कथन में अंतर्विरोध की ओर ध्यान आकर्षित किया और कहा कि यह स्वीकार्य स्थिति थी कि तीर्थयात्रा शुरू होने पर पहले पांच दिन सबरीमला मंदिर में सभी आयु वर्गो की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति होती थी और इसके बाद भीड़ बढ़ने की वजह से उनके प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया था। </p>
<figure id="attachment_688" aria-describedby="caption-attachment-688" style="width: 300px" class="wp-caption alignnone"><img decoding="async" src="http://www.sundaypost.in/wp-content/uploads/2018/07/rsz_1c-300x164.jpg" alt="शबरीमला मंदिर परिसर में श्रद्धालुगण " width="300" height="164" class="size-medium wp-image-688" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2018/07/rsz_1c-300x164.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2018/07/rsz_1c-768x420.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2018/07/rsz_1c-1024x561.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2018/07/rsz_1c-910x498.jpg 910w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2018/07/rsz_1c-696x381.jpg 696w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2018/07/rsz_1c-1068x585.jpg 1068w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2018/07/rsz_1c-767x420.jpg 767w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2018/07/rsz_1c-1920x1051.jpg 1920w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><figcaption id="caption-attachment-688" class="wp-caption-text">शबरीमला मंदिर परिसर में श्रद्धालुगण</figcaption></figure>
<p>इससे पहले, 19 जुलाई को सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने केरल के इस प्राचीन ऐतिहासिक मंदिर में 10-50 आयु वर्ग की महिलाओं का प्रवेश वर्जित करने के औचित्य पर सवाल उठाया था। पीठ का कहना था कि महिलाओं में दस वर्ष की आयु से पहले भी मासिक धर्म शुरू हो सकता है।  इस मामले में न्याय मित्र की भूमिका में वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचन्द्रन का कहना था कि एक विशेष आयु वर्ग की महिलाओं को अलग करना उन्हें अछूत मानने जैसा है जो संविधान के अनुच्छेद 17 में निषिद्ध है। </p>
<p>पीठ इस तर्क से सहमत नहीं थी और उसका कहना था कि संविधान का अनुच्छेद 17 इस मामले में शायद लागू नहीं हो सके क्योंकि मंदिर में प्रवेश से वंचित की जा रही महिलाओं में सवर्ण वर्ग की भी हो सकती हैं और यह प्रावधान सिर्फ अनुसूचित जातियों से संबंधित है। केरल सरकार ने पहले न्यायालय से कहा था कि वह इस मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश के पक्ष में है। </p>
<p>सबरीमला मंदिर में दस से पचास आयु वर्ग की महिलाओं का प्रवेश वर्जित होने की व्यवस्था को &#8216;इंडियन यंग लायर्स एसोसिएशन’ और अन्य ने चुनौती दे रखी है। </p>
<p>बहरहाल, कुछ लोगों का कहना है कि करीब 700-800 साल पहले दक्षिण में शैव और वैष्णवों के बीच वैमनस्य काफी बढ़ गया था। तब उन मतभेदों को दूर करने के लिए श्री अयप्पन की परिकल्पना की गई। दोनों के समन्वय के लिए इस धर्मतीर्थ को विकसित किया गया। आज भी यह मंदिर समन्वय और सद्भाव का प्रतीक माना जाता है। यहां किसी भी जाति-बिरादरी का और किसी भी धर्म का पालन करने वाला व्यक्ति आ सकता है। यह मंदिर स्थापत्य के लिहाज से तो खूबसूरत है ही, यहां एक अजीब किस्म की शांति का अहसास भी होता है। जिस तरह यह 18 पहाडि़यों के बीच स्थित है, उसी तरह मंदिर के प्रांगण में पहुंचने के लिए भी 18 सीढि़यां पार करनी पड़ती हैं। मंदिर में अयप्पन के अलावा मालिकापुरत्त अम्मा, गणेश और नागराजा जैसे उप देवताओं की भी मूर्तियां हैं।</p>
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