<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>society Archives - आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</title>
	<atom:link href="http://www.aryavartaindiannation.com/tag/society/feed" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.aryavartaindiannation.com/tag/society</link>
	<description>आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</description>
	<lastBuildDate>Fri, 27 Dec 2024 04:47:54 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=7.0.7</generator>
	<item>
		<title>भारत में वेश्यावृति &#8220;कलंकित&#8221; है 😢 लेकिन उन महिलाओं का मत विधायकों और सांसदों का भविष्य निर्धारित करता है ✍</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/politics/prostitutes-and-battle-of-ballots</link>
					<comments>http://www.aryavartaindiannation.com/politics/prostitutes-and-battle-of-ballots#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 27 Dec 2024 04:47:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[government]]></category>
		<category><![CDATA[illegal]]></category>
		<category><![CDATA[India]]></category>
		<category><![CDATA[legal]]></category>
		<category><![CDATA[priostitutes]]></category>
		<category><![CDATA[society]]></category>
		<category><![CDATA[women]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.aryavartaindiannation.com/?p=5977</guid>

					<description><![CDATA[<p>रायसीना हिल (नई दिल्ली) : सन 1950 में भारत का संविधान लागू होने और स्वतंत्र भारत को एक गणराज्य घोषित होने के बाद विगत सितम्बर, 2024 तक संविधान में कुल 106 संशोधन किये गए हैं और उम्मीद है कि आने वाले दिनों में संविधान के पन्नों में कुछ और नए संशोधन किये जायेंगे। लेकिन, अगर सर्वोच्च न्यायालय [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/politics/prostitutes-and-battle-of-ballots">भारत में वेश्यावृति &#8220;कलंकित&#8221; है 😢 लेकिन उन महिलाओं का मत विधायकों और सांसदों का भविष्य निर्धारित करता है ✍</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>रायसीना हिल (नई दिल्ली) : सन 1950 में भारत का संविधान लागू होने और स्वतंत्र भारत को एक गणराज्य घोषित होने के बाद विगत सितम्बर, 2024 तक संविधान में कुल 106 संशोधन किये गए हैं और उम्मीद है कि आने वाले दिनों में संविधान के पन्नों में कुछ और नए संशोधन किये जायेंगे। लेकिन, अगर सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय देश में लगभग 30 लाख वेश्याओं के सामने चट्टान के तरह नहीं खड़ा हुआ होता, तो आज़ादी के 78 साल बाद भी देश के नेताओं की नजर में वेश्याओं का जीवन मूक-बधिर जानवरों के जीवन बराबर ही होता। वैसे सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद आज भी समाज के इन उपेक्षित महिलाओं का जीवन नारकीय जीवन से कम नहीं है, लेकिन न्यायालय का आदेश कुछ हद तक इन महिलाओं को &#8216;सांस लेने का संरक्षण&#8217; अवश्य दिया हैं। </strong></p>
<p>विगत दिनों एक महत्वपूर्ण आदेश में सर्वोच्च न्यायालय ने वेश्यावृत्ति को एक ‘पेशा’ के रूप में मान्यता दी है और कहा है कि इसके व्यवसायी कानून के तहत सम्मान और समान सुरक्षा के हकदार हैं। न्यायालय ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल किया। अनुच्छेद 142 सर्वोच्च न्यायालय को विवेकाधीन शक्ति प्रदान करता है, क्योंकि इसमें कहा गया है कि सर्वोच्च न्यायालय अपने अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करते हुए ऐसा आदेश पारित कर सकता है या ऐसा आदेश दे सकता है जो उसके समक्ष लंबित किसी मामले या मामले में पूर्ण न्याय करने के लिए आवश्यक हो। चार वर्ष पूर्व 2020 में, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने यौनकर्मियों को अनौपचारिक श्रमिकों के रूप में मान्यता दी थी ।</p>
<p>सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय की मुख्य बातें यह थी कि वेश्यावृत्ति में लिप्त महिलाएं कानून के समान संरक्षण के हकदार हैं और आपराधिक कानून सभी मामलों में ‘आयु’ और ‘सहमति’ के आधार पर समान रूप से लागू होना चाहिए। जब यह स्पष्ट हो जाता है कि सेक्स वर्कर वयस्क है और सहमति से भाग ले रही है, तो पुलिस को हस्तक्षेप करने या कोई आपराधिक कार्रवाई करने से बचना चाहिए। न्यायालय ने यह भी कहा कि अनुच्छेद 21 घोषित करता है कि कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही किसी व्यक्ति को उसके जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित किया जाएगा। यह अधिकार नागरिकों और गैर-नागरिकों दोनों को उपलब्ध है। न्यायालय का आदेश था कि जब भी किसी वेश्यालय पर छापा मारा जाता है, तो सेक्स वर्कर को “गिरफ्तार या दंडित या परेशान या पीड़ित” नहीं किया जाना चाहिए, “क्योंकि स्वैच्छिक सेक्स वर्क अवैध नहीं है और केवल वेश्यालय चलाना ही अवैध है”।</p>
<blockquote><p>न्यायालय ने यह भी स्वीकार किया कि वेश्याओं के बच्चे को केवल इस आधार पर माँ से अलग नहीं किया जाना चाहिए कि वह देह व्यापार में है। मानव शालीनता और गरिमा की बुनियादी सुरक्षा वेश्याओं और उनके बच्चों के लिए भी है। इसके अलावा, अगर कोई नाबालिग वेश्यालय में या वेश्याओं के साथ रहता हुआ पाया जाता है, तो यह नहीं माना जाना चाहिए कि बच्चे की तस्करी की गई है। अगर वेश्या दावा करता है कि वह उसका बेटा/बेटी है, तो यह निर्धारित करने के लिए परीक्षण किए जा सकते हैं कि क्या दावा सही है और अगर ऐसा है, तो नाबालिग को जबरन अलग नहीं किया जाना चाहिए। चिकित्सा देखभाल: यौन उत्पीड़न के शिकार सेक्स वर्करों को तत्काल चिकित्सा-कानूनी देखभाल सहित हर सुविधा प्रदान की जानी चाहिए। मीडिया की भूमिका: मीडिया को गिरफ्तारी, छापेमारी और बचाव अभियान के दौरान सेक्स वर्करों की पहचान उजागर न करने के लिए “अत्यंत सावधानी बरतनी चाहिए, चाहे वे पीड़ित हों या आरोपी और ऐसी कोई भी तस्वीर प्रकाशित या प्रसारित न करें जिससे ऐसी पहचान उजागर हो। </p></blockquote>
<p>यह तो संवैधानिक बातें हैं। अब राजनीतिक और प्रशासनिक बातों के लिए देश की राजधानी दिल्ली के कर्तव्य पथ के रास्ते रायसीना हिल पर चलते हैं और इस बात पर विचार करते हैं कि आज़ाद भारत में देश के लगभग 2.63 लाख पंचायतों, 787 जिलों, 28 राज्यों और आठ केंद्र शासित प्रदेश के रास्ते भारत के लोकसभा और राज्य सभा में बैठने वाले विधायक अथवा सांसद इन वेश्याओं के बारे में सोचे हैं कभी? शायद नहीं। </p>
<p>गृह मंत्री, प्रधानमंत्री और राष्ट्रूपति कार्यालय को जोड़ने वाली रायसीना हिल सड़क के बीचो बीच खड़े एक वरिष्ठ राजनेता कहते हैं: &#8220;मैं पांचवी लोक सभा से अठारहवीं लोकसभा तक आम चुनाव के साथ-साथ राज्यों के विधान सभाओं का चुनाव देखा हूँ। सन 1971 में संपन्न लोक सभा के कुल 518 सदस्यों की संख्या में तत्कालीन कांग्रेस पार्टी को 352 स्थान मिले थे और श्रीमती इंदिरागांधी प्रधानमंत्री कार्यालय में विराजमान हुई। करीब 53-साल बाद विगत 18 वें लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी संसद के कुल 543 स्थानों में 240 स्थान जीतकर प्रधानमंत्री कार्यालय तीसरे बार पहुंचे। लेकिन, पांचवीं लोक सभा से आज 18वीं लोक सभा के साथ साथ राज्यों के विधान सभाओं अथवा ने निर्वाचित निकायों में चुनकर आने वाले प्रतिनिधियों को कभी मैं इन वेश्याओं के दरवाजे पर मत मांगने जाते नहीं देखा। यह अलग बात है कि वर्षों तक काले अक्षरों वाली निर्वाचन सूचियों में इनका नाम दिखा नहीं।&#8221;</p>
<blockquote><p>कोई अस्सी बसंत की राजनीतिक हवाओं का अनुभव रखने वाले नेताजी आगे कहते हैं: &#8220;कभी उनके बच्चों को अपने गोद में उठाकर प्यार करते, तस्वीर खिंचवाते नहीं देखा। कभी इन महिलाओं या उनके बच्चों के कल्याणार्थ संसद अथवा विधान सभाओं में आवाज उठाते नहीं देखा, सुना। जो कल भी सत्ता में थे, आज भी सत्ता में हैं, जो कल भी नौकरशाह थे, जो आज नौकरशाह हैं, अधिकारी है, पदाधिकारी हैं &#8211; इन वेश्याओं और उनके परिवार, बच्चों के लिए नहीं सोचे हैं।”“अगर भारत का न्यायालय नहीं होता, अगर न्यायालय में बैठे सम्मानित न्यायमूर्ति संवेदनशील नहीं होते, समाज का एक खास संवेदनशील वर्ग उन वेश्याओं के जीवन के प्रति विवेकहीन होता, तो शायद इन वेश्याओं का हाल आज और भी बद्तर होता। सांख्यिकी कितना सही है यह तो सरकार के विभाग बताएंगे, लेकिन मेरा मानना है कि भारत में आज भी 30 + लाख वेश्याएं देहव्यापार के क्षेत्र में कार्यरत हैं। सभी के पास आधार कार्ड है।  सभी के पास मतदान का पहचान पत्र है जो भारत का निर्वाचन आयोग द्वारा जारी है।&#8221;</p></blockquote>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.29.52-PM.png"><img fetchpriority="high" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.29.52-PM.png" alt="" width="1255" height="707" class="alignright size-full wp-image-5979" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.29.52-PM.png 1255w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.29.52-PM-300x169.png 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.29.52-PM-1024x577.png 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.29.52-PM-768x433.png 768w" sizes="(max-width: 1255px) 100vw, 1255px" /></a></p>
<p>वे आगे कहते हैं: &#8220;अब सवाल यह है कि जब इन वेश्याओं का नाम निर्वाचन सूची में नहीं छपता था, उस कालखंड की बात छोड़ भी दें, आज अगर ये सभी 30+ लाख वेश्याएं सामाजिक प्रथा के तहत मान्य नहीं हैं तो इनके मत कैसे मान्य हो सकते हैं जो इन नेताओं के भविष्य का निर्माण करते हैं? नेता लोग, मंत्री लोग, अधिकारी लोग इन विषयों के दरवाजे तक, कोठों पर जाना अपने व्यक्तित्व और पुरुषार्थ के विरुद्ध समझते हैं।”“आपने कभी राजनेताओं को इन मतदाताओं के घरों में खाना खाते देखा है ? इनके बच्चों को गोदी उठाते देखा है ? बीमार, बिलखती, कलपती इन महिलाओं को सांत्वना देते देखा है ? फिर इनके मतों का इतना मोल क्यों ? कभी यह नहीं सोचते कि उनके जय-विजय में इन 30+ लाख वेश्याओं के मतों का भी मोल है। इस दृष्टि से अगर वेश्या कलंकित है, तो इन नेताओं का जय-विजय होना भी कलंक के दायरे में ही है।&#8221; वर्तमान में देश के 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के विधान सभाओं और परिषदों के कुल 4557 विधायक (विधानसभा: 4131 + विधान परिषद: 245) और 788 सांसद (लोकसभा: 543 + राज्यसभा: 245) हैं। आज़ादी के बाद से पहला और अठाहरवीं लोकसभा / विधानसभाओं के बीच सदस्यों की गणना कर लें। </p>
<p>सरकारी आंकड़ों के अनुसार आंध्र प्रदेश- 320024, अरुणाचल प्रदेश- 2750, असम- 52625, बिहार- 161321, छत्तीसगढ़- 12500, गोवा- 5375, गुजरात- 146950, हरयाणा- 15500, हिमाचल प्रदेश- 5375, जम्मू एवं कश्मीर- 15500, झारखंड- 20000, कर्नाटक- 200701, केरल- 68750, मध्य प्रदेश- 144338, महाराष्ट्र- 401300, मणिपुर- 4875, मेघालय- 4250, नागालैंड- 6000, उड़ीसा- 45066, पंजाब- 45000, राजस्थान-167305, सिक्किम- 425, तमिलनाडु- 303750, त्रिपुरा- 1375, उत्तर प्रदेश- 271868, उत्तराखंड- 8125, पश्चिम बंगाल- 367058, चंडीगढ़- 10750, दमन और दीव- 493, दिल्ली- 16785 और पुडुचेरी- 1400 कुल : 2827534 वेश्याएं थी दस वर्ष पूर्व। जबकि UNAIDS का आंकड़ा यह कहता है कि भारत में 2016 तक 657829 वेश्याएं हैं। </p>
<p>बहरहाल, पिछले दशक में युवा लड़कियों की तस्करी में वृद्धि सरकारी और गैर सरकारी संगठन दोनों हलकों में चिंता का कारण बन रही है। नेपाल में STOP और MAITI जैसे गैर सरकारी संगठनों की रिपोर्ट है कि भारत में (सीमा पार और देश के अंदर) सबसे अधिक तस्करी वेश्यावृत्ति के लिए होती है। और वेश्यावृत्ति में तस्करी करने वालों में से 60 प्रतिशत 12 से 16 वर्ष की आयु वर्ग की किशोर लड़कियाँ हैं। इन आंकड़ों की पुष्टि महिला एवं बाल विभाग द्वारा उत्तर प्रदेश के 13 संवेदनशील जिलों में किए गए एक अध्ययन से होती है। इससे पता चलता है कि इस सर्वेक्षण का हिस्सा बनने वाली सभी यौनकर्मियों ने युवा लड़कियों के रूप में इस पेशे में प्रवेश किया था। कई ट्रांससेक्सुअल यौनकर्मी हैं। उन्हें जनता के विरोध का सामना करना पड़ता है, और रोजगार से वंचित होने पर वे भीख मांगते हैं और फिर सेक्स बाजार में प्रवेश करते हैं।बालिका वेश्याएं मुख्य रूप से निम्न-मध्यम आय वाले क्षेत्रों और व्यावसायिक जिलों में स्थित हैं और अधिकारी उन्हें जानते हैं। वेश्यालय चलाने वाले नियमित रूप से युवा लड़कियों को भर्ती करते हैं। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.31.05-PM.png"><img decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.31.05-PM.png" alt="" width="1264" height="705" class="alignleft size-full wp-image-5980" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.31.05-PM.png 1264w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.31.05-PM-300x167.png 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.31.05-PM-1024x571.png 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.31.05-PM-768x428.png 768w" sizes="(max-width: 1264px) 100vw, 1264px" /></a></p>
<p>बालिका वेश्याओं को सामान्य वेश्याओं, गायिकाओं और नर्तकियों, कॉल गर्ल, धार्मिक वेश्याओं या देवदासी और पिंजरे में बंद वेश्यालय वेश्याओं के रूप में वर्गीकृत किया गया है। महाराष्ट्र और कर्नाटक की सीमा से लगे जिले, जिन्हें &#8220;देवदासी बेल्ट&#8221; के रूप में जाना जाता है, में विभिन्न स्तरों पर तस्करी संरचनाएं संचालित होती हैं। यहां महिलाएं या तो वेश्यावृत्ति में हैं क्योंकि उनके पतियों ने उन्हें छोड़ दिया है, या फिर जबरदस्ती और धोखे से उनकी तस्करी की जाती है। कई देवदासियां देवी येल्लम्मा के लिए वेश्यावृत्ति में समर्पित हैं।बालिका वेश्याओं को सामान्य वेश्याओं, गायिकाओं और नर्तकियों, कॉल गर्ल, धार्मिक वेश्याओं या देवदासी और पिंजरे में बंद वेश्यालय वेश्याओं के रूप में वर्गीकृत किया गया है। महाराष्ट्र और कर्नाटक की सीमा से लगे जिले, ह्यूमन राइट्स वॉच के अनुसार, भारत में लगभग 15 मिलियन वेश्याएँ हैं। एशिया के सबसे बड़े सेक्स उद्योग केंद्र बॉम्बे में 100,000 से अधिक महिलाएं वेश्यावृत्ति में हैं। भारत, पाकिस्तान और मध्य पूर्व में वेश्यावृत्ति में लड़कियों को प्रताड़ित किया जाता है, आभासी कारावास में रखा जाता है, यौन शोषण किया जाता है और बलात्कार किया जाता है।</p>
<p>जिन्हें &#8220;देवदासी बेल्ट&#8221; के रूप में जाना जाता है, में विभिन्न स्तरों पर तस्करी संरचनाएं संचालित होती हैं। यहां महिलाएं या तो वेश्यावृत्ति में हैं क्योंकि उनके पतियों ने उन्हें छोड़ दिया है, या फिर जबरदस्ती और धोखे से उनकी तस्करी की जाती है। कई देवदासियां देवी येल्लम्मा के लिए वेश्यावृत्ति में समर्पित हैं।ह्यूमन राइट्स वॉच के अनुसार, भारत में लगभग 15 मिलियन वेश्याएँ हैं। एशिया के सबसे बड़े सेक्स उद्योग केंद्र बॉम्बे में 100,000 से अधिक महिलाएं वेश्यावृत्ति में हैं। भारत, पाकिस्तान और मध्य पूर्व में वेश्यावृत्ति में लड़कियों को प्रताड़ित किया जाता है, आभासी कारावास में रखा जाता है, यौन शोषण किया जाता है और बलात्कार किया जाता है। बालिका वेश्याएं मुख्य रूप से निम्न-मध्यम आय वाले क्षेत्रों और व्यावसायिक जिलों में स्थित हैं और अधिकारी उन्हें जानते हैं। </p>
<p><strong>भारत में यौन कार्य की वैधता पर सवाल उठाते हुए नैतिकता, किसी के शरीर पर स्वायत्तता, गरिमा, शालीनता, बेरोजगारी, गरीबी और हताशा के सवाल उठाए गए हैं। एक पक्ष का तर्क है कि चूंकि यौन कार्य अपरिहार्य है, इसलिए इसे कानूनी पवित्रता प्रदान की जानी चाहिए ताकि अन्य कारकों के अलावा महिला यौनकर्मियों के लिए सुरक्षित कामकाजी परिस्थितियों, न्यायसंगत मुआवजा और गरिमा के सम्मान के लिए एक आचार संहिता स्थापित की जा सके। विरोधी दृष्टिकोण इसे &#8216;वैध दुरुपयोग&#8217; कहता है और तर्क देता है कि सरकार को इस तरह के काम के खिलाफ कड़ा रुख अपनाना चाहिए क्योंकि यह मानवीय गरिमा को कम करता है, मानसिक स्वास्थ्य को कमजोर करता है और व्यक्तियों को वित्तीय लाभ के लिए अपने शरीर का उपयोग करने के लिए मजबूर करता है। महिला यौनकर्मी अपने उच्च जोखिम वाले यौन व्यवहार (जैसे, कंडोम के बिना सेक्स, कई भागीदारों के साथ सेक्स) और मादक द्रव्यों के सेवन के कारण एड्स, एसटीआई और सर्वाइकल कैंसर जैसी बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं। </strong></p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.31.22-PM.png"><img decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.31.22-PM.png" alt="" width="1265" height="709" class="alignright size-full wp-image-5981" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.31.22-PM.png 1265w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.31.22-PM-300x168.png 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.31.22-PM-1024x574.png 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.31.22-PM-768x430.png 768w" sizes="(max-width: 1265px) 100vw, 1265px" /></a></p>
<p>जो लोग ऐसे वातावरण में काम करते हैं उन्हें शारीरिक, भावनात्मक और मानसिक आघात का अनुभव होने की अधिक संभावना होती है, जिसका प्रभाव न केवल उन पर पड़ता है, बल्कि उनकी आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ता है। <br />
यह कहा जाता है कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने एक पायलट परियोजना शुरू की है, जिसे राष्ट्रीय महिला संसाधन केंद्र और राज्य महिला संसाधन केंद्र के साथ निकट समन्वय में सामुदायिक संगठनों, वकालत एवं अनुसंधान केंद्र (सीएफएआर) द्वारा संयुक्त रूप से क्रियान्वित किया जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक राज्यों में कमजोर और हाशिए पर पड़े समुदायों के लिए सामाजिक समावेश योजना की प्रक्रिया तैयार करना और यौनकर्मियों तथा यौन अल्पसंख्यकों को मुख्यधारा में लाना है। भारत सरकार को देह व्यापार के पेशे को वैध बनाने और यौनकर्मियों तथा उनके बच्चों के कल्याण के लिए ठोस कदम उठाने का सुझाव मिला है। भारतीय दंड संहिता द्वारा अनुपूरित अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम, 1956 वेश्यावृत्ति के उद्देश्य से बच्चों सहित मानव तस्करी को प्रतिबंधित करता है और प्रक्रियाएं निर्धारित करता है।</p>
<p>महिला एवं बाल विकास मंत्रालय &#8220;उज्जवला&#8221; को क्रियान्वित कर रहा है &#8211; तस्करी की रोकथाम और वाणिज्यिक यौन शोषण के लिए तस्करी के पीड़ितों के बचाव, पुनर्वास, पुनः एकीकरण और प्रत्यावर्तन के लिए एक व्यापक योजना। आज तक, इस योजना के तहत 151 सुरक्षात्मक और पुनर्वास गृहों सहित 273 परियोजनाओं को सहायता दी गई है। इन पुनर्वास केंद्रों को आश्रय और भोजन, कपड़े, चिकित्सा देखभाल, कानूनी सहायता, पीड़ितों के बच्चों के मामले में शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने के साथ-साथ पीड़ितों को वैकल्पिक आजीविका विकल्प प्रदान करने के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण और आय सृजन गतिविधियों को शुरू करने के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है। </p>
<p>भारत में वेश्यावृत्ति स्वयं &#8216;अवैध&#8217; या &#8216;कानूनी&#8217; नहीं है। इससे जुड़ी कुछ गतिविधियाँ हैं जिन्हें अनैतिक तस्करी (रोकथाम) अधिनियम, 1956 [आईटीपीए] के तहत अवैध घोषित किया गया है, जैसे दलाली करना, दलाली करना, वेश्यालय चलाना आदि। 2011 में, बुद्धदेव कर्मस्कर बनाम पश्चिम बंगाल राज्य का मामला सामने आया। सुप्रीम कोर्ट (एससी) ने माना कि यौनकर्मियों को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सम्मान का अधिकार है, जो जीवन और आजीविका का अधिकार सुनिश्चित करता है। इस फैसले के माध्यम से, भारत में यौनकर्मियों के अधिकारों से संबंधित एक रिपोर्ट का मसौदा तैयार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक पैनल का गठन किया गया था। केंद्र ने 2016 में सुप्रीम कोर्ट को बताया कि पैनल की सिफारिशों को मसौदा कानून में शामिल किया गया था। हालाँकि, तब से कोई कानून नहीं बनाया गया है।</p>
<p>वेश्यावृत्ति से संबंधित मौजूदा कानून यौनकर्मियों के अधिकारों के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियां पैदा करते हैं। यह पुलिस अधिकारियों और मजिस्ट्रेटों को यौनकर्मियों को बचाने और पुनर्वास करने की व्यापक शक्तियां प्रदान करता है, जिसका पुलिस अक्सर असंवेदनशील और अपमानजनक तरीके से दुरुपयोग करती है। भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) का उपयोग अक्सर यौनकर्मियों पर &#8220;सार्वजनिक अभद्रता&#8221; या &#8220;सार्वजनिक उपद्रव&#8221; जैसे अस्पष्ट अपराधों का आरोप लगाने के लिए किया जाता है, बिना स्पष्ट रूप से परिभाषित किए कि इनमें क्या शामिल है। यहां तक कि व्यक्तियों की तस्करी (रोकथाम, देखभाल और पुनर्वास) पर मसौदा विधेयक में समुदाय-आधारित पुनर्वास, पुनर्वास घरों के लिए धन और एक मशीनीकृत बचाव प्रोटोकॉल पर स्पष्ट दिशानिर्देश शामिल नहीं हैं।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.31.56-PM.png"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.31.56-PM.png" alt="" width="1261" height="705" class="alignright size-full wp-image-5982" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.31.56-PM.png 1261w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.31.56-PM-300x168.png 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.31.56-PM-1024x572.png 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-26-at-6.31.56-PM-768x429.png 768w" sizes="auto, (max-width: 1261px) 100vw, 1261px" /></a></p>
<p><strong>2022 में, संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत प्रदत्त अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए, सुप्रीम कोर्ट की तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने दस दिशानिर्देश जारी किए, जिन्होंने यौन कार्य को एक पेशे के रूप में मान्यता दी और कहा कि यौनकर्मी कानून के तहत सम्मान और समान सुरक्षा के हकदार हैं। हालाँकि, ये दिशानिर्देश अस्थायी हैं और केंद्र द्वारा किसी भी समय इन्हें खारिज किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा, &#8221;यह कहने की जरूरत नहीं है कि पेशे के भारत में पहचानी गई 8.25 लाख महिला यौनकर्मियों (एफएसडब्ल्यू) में से आधे से अधिक पांच दक्षिणी राज्यों &#8211; आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और तेलंगाना से हैं। आंध्र प्रदेश में 1.33 लाख यौनकर्मी हैं जबकि कर्नाटक में 1.2 लाख हैं। उत्तर प्रदेश में 22,060 और नई दिल्ली में 46,787 एफएसडब्ल्यू हैं।</strong></p>
<p>बावजूद, इस देश में प्रत्येक व्यक्ति को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सम्मानजनक जीवन का अधिकार है। इस देश में सभी व्यक्तियों को जो संवैधानिक सुरक्षा दी गई है, उसे उन अधिकारियों द्वारा ध्यान में रखा जाएगा जिनका अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम, 1956 के तहत कर्तव्य है। भारत की तरह दुनिया भी वेश्यावृत्ति को कानूनी पेशे के रूप में मान्यता देने को लेकर बंटी हुई है। उरुग्वे, नीदरलैंड, जर्मनी, तुर्की और हंगरी जैसे कुछ देशों में, यौन कार्य न केवल कानूनी है बल्कि संगठित और विनियमित है। जबकि ईरान जैसे कुछ देशों में बार-बार अपराध करने वालों को फाँसी भी दी जा सकती है।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/5.png"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/5.png" alt="" width="1250" height="700" class="alignright size-full wp-image-5983" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/5.png 1250w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/5-300x168.png 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/5-1024x573.png 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/12/5-768x430.png 768w" sizes="auto, (max-width: 1250px) 100vw, 1250px" /></a></p>
<p>शीर्ष अदालत ने अब कहा है कि यौनकर्मी कानून के समान संरक्षण के हकदार हैं, पुलिस से उन मामलों में हस्तक्षेप करने या कोई आपराधिक कार्रवाई करने से बचने की अपेक्षा की जाती है जहां यह स्पष्ट है कि यौनकर्मी वयस्क है और सहमति से भाग ले रही है। शीर्ष अदालत के आदेश में कहा गया है कि यौनकर्मियों को पुलिस द्वारा परेशान, गिरफ्तार, दंडित या प्रताड़ित नहीं किया जाना चाहिए। सरकार भी, कठिन समय के दौरान यौनकर्मियों के समुदाय के बचाव में आई है। उदाहरण के लिए, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, सरकार ने कोविड-19 महामारी के दौरान यौनकर्मियों को सूखा राशन वितरित किया। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली पीठ के ताजा आदेश से इस पेशे से जुड़े लोगों को कई अन्य सुरक्षाएं दी गई हैं। पीठ ने कहा है कि यौनकर्मियों के बच्चों को जबरन उनसे अलग नहीं किया जाना चाहिए और यौनकर्मियों के साथ रह रहे किसी नाबालिग को तस्करी का शिकार नहीं माना जाना चाहिए।</p>
<p>अदालत ने पुलिस को यह भी निर्देश दिया कि यदि यौनकर्मी अपने खिलाफ हुए किसी यौन अपराध के बारे में शिकायत दर्ज करना चाहती हैं तो उनके साथ भेदभाव न किया जाए। इसने मीडिया से गिरफ्तारी, छापेमारी और बचाव कार्यों के दौरान यौनकर्मियों की पहचान उजागर न करने के लिए अत्यधिक सावधानी बरतने को कहा। इसने प्रशासन को यौन अपराध की शिकार किसी भी यौनकर्मी को तत्काल चिकित्सा-कानूनी देखभाल प्रदान करने का निर्देश दिया। इस बीच, वेश्यावृत्ति को एक पेशे के रूप में पहचानने और यौनकर्मियों को गरिमापूर्ण जीवन देने का निर्देश देने वाला सुप्रीम कोर्ट का आदेश पिछले चार वर्षों में दूसरा बड़ा फैसला है जो संविधान पीठ के बाद बड़ी संख्या में लोगों को समाज की मुख्यधारा में शामिल करने में मदद कर सकता है। शीर्ष अदालत ने 6 सितंबर, 2018 को फैसला सुनाया कि आईपीसी की धारा 377 के प्रावधान असंवैधानिक थे क्योंकि वे भारत में LGBTQIA+ समुदाय की स्वायत्तता, अंतरंगता और पहचान के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते थे।</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/politics/prostitutes-and-battle-of-ballots">भारत में वेश्यावृति &#8220;कलंकित&#8221; है 😢 लेकिन उन महिलाओं का मत विधायकों और सांसदों का भविष्य निर्धारित करता है ✍</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>http://www.aryavartaindiannation.com/politics/prostitutes-and-battle-of-ballots/feed</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पूरा विश्व &#8216;अमन&#8217; चाहता है और जब &#8216;अमन-शांति-सद्भाव&#8217; की बात होती है तो विश्व भारत की ओर देखने लगता है, गांधी को पढ़ने-समझने लगता है : फाबिन</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/education/when-there-is-talk-of-peace-harmony-then-the-world-starts-looking-towards-india</link>
					<comments>http://www.aryavartaindiannation.com/education/when-there-is-talk-of-peace-harmony-then-the-world-starts-looking-towards-india#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[नीना झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 13 Nov 2023 03:17:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[शिक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[education]]></category>
		<category><![CDATA[ghaziabad]]></category>
		<category><![CDATA[loni]]></category>
		<category><![CDATA[orthodox]]></category>
		<category><![CDATA[sahibada]]></category>
		<category><![CDATA[school]]></category>
		<category><![CDATA[society]]></category>
		<category><![CDATA[st thomas]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.aryavartaindiannation.com/?p=5161</guid>

					<description><![CDATA[<p>इंदिरापुरम (गाजियाबाद) : विगत 7 नवम्बर को गाज़ियाबाद के इंदिरापुरम स्थित संत थॉमस विद्यालय में वार्षिक उत्सव था। कोई दो दशक से अधिक पुराना है यह विद्यालय। जब दिल्ली से सटे इंदिरापुरम इलाके को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में काम करने वाले मध्यम श्रेणी के लोगों के लिए आवासीय क्षेत्र बनाया जा रहा था, संत थॉमस [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/education/when-there-is-talk-of-peace-harmony-then-the-world-starts-looking-towards-india">पूरा विश्व &#8216;अमन&#8217; चाहता है और जब &#8216;अमन-शांति-सद्भाव&#8217; की बात होती है तो विश्व भारत की ओर देखने लगता है, गांधी को पढ़ने-समझने लगता है : फाबिन</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>इंदिरापुरम (गाजियाबाद) : विगत 7 नवम्बर को गाज़ियाबाद के इंदिरापुरम स्थित संत थॉमस विद्यालय में वार्षिक उत्सव था। कोई दो दशक से अधिक पुराना है यह विद्यालय। जब दिल्ली से सटे इंदिरापुरम इलाके को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में काम करने वाले मध्यम श्रेणी के लोगों के लिए आवासीय क्षेत्र बनाया जा रहा था, संत थॉमस सोसाइटी के लोगों ने सबसे पहले इस क्षेत्र में आने वाले लोगों के बच्चों के लिए शिक्षा के महत्व को सोचा &#8211; एक विद्यालय स्थापित किया गया। समयांतराल अनेक विद्यालय यहाँ आये लेकिन संत थॉमस सोसाइटी द्वारा संचालित इस विद्यालय की बात कुछ अलग है। इस विद्यालय में कला, विज्ञान, वाणिज्य, गणित, भूगोल, इतिहास, भौतिकी, रसायन शास्त्र, जीव विज्ञान आदि की पढ़ाई तो होती ही है; लेकिन यहाँ बच्चे को &#8216;मनुष्य&#8217; से &#8216;इंसान&#8217; बनने की शिक्षा दी जाती है &#8211; चाहे छात्र हों या छात्राएं । क्योंकि आज के इस बदलते समय में समाज में इंसानों की किल्लत हो रही है। </strong></p>
<p>इस वार्षिक उत्सव में विद्यालय के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों, अधिकारियों, सोसाइटी के लोगों ने जो &#8216;थीम&#8217; बनाया था वह था <strong>&#8216;NEXUS &#8211; THE MODERN ARK OF HUMANITY&#8217;</strong> &#8211; एक बेहतरीन सोच। </p>
<p>यह थीम इस बात का गवाह था कि हम मनुष्य से इंसान तभी बन सकते हैं, हमारी शिक्षा में पूर्णता तभी आ सकती है, हम मानवीय तभी हो सकते हैं, समाज के प्रति अपनी वेदना और संवेदना को तभी दिखा सकते हैं जब हम अपने जीवन काल में समाज के सभी तबकों के लोगों से परस्पर जुड़े रहे। जो शिक्षा और ज्ञान हम अर्जित कर रहे हैं, उसे बांटे। दूसरों के प्रति करुणा अवश्य रखें। अगर ऐसा नहीं है तो हमारा जीवन, हमारी शिक्षा सभी व्यर्थ है। यह बात विद्यालय के शिक्षक, शिक्षिका, प्रशासन के लोग सभी बच्चों को बता रहे थे। </p>
<figure id="attachment_5163" aria-describedby="caption-attachment-5163" style="width: 2048px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/11/1.jpeg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/11/1.jpeg" alt="" width="2048" height="1365" class="size-full wp-image-5163" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/11/1.jpeg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/11/1-300x200.jpeg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/11/1-1024x683.jpeg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/11/1-768x512.jpeg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/11/1-1536x1024.jpeg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2048px) 100vw, 2048px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5163" class="wp-caption-text">इंदिरापुरम (गाजियाबाद) स्थित संत थॉमस स्कूल के वार्षिक समारोह में दीप प्रज्वलित करते भारतीय विदेश सेवा के वरिष्ठ (अवकाश प्राप्त) अधिकारी और पूर्व एम्बेस्डर के.पी. फाबिन।  साथ में चेयरमैन फ़ादर साजी अब्राहम, फादर चेरियन जोसेफ, विद्यालय के प्राचार्य वी. के. कोरियाकोज, उप-प्राचार्य रेचल रेज़ी, हेडमिस्ट्रेस विनीता वर्ग़िज</figcaption></figure>
<p>हज़ारों की संख्या में बच्चे, अभिभावक, समाज के अन्य गणमान्य व्यक्ति इस अवसर पर उपस्थित थे। मंच पर मुख्य अथिति थे भारतीय विदेश सेवा के वरिष्ठ (अवकाश प्राप्त) अधिकारी और पूर्व एम्बेस्डर के.पी. फाबिन।फाबिन साहब भारतीय विदेश सेवा में सं 1964 से 2000 तक तक़रीबन 36-वर्ष विश्व के अनेकों देशों में, मसलन ईरान, ऑस्ट्रिया, श्री लंका, कनाडा, फ़िनलैंड, कतार में भारत का प्रतिनिधित्व किये हैं। इतना ही नहीं, वे विश्व के पटल पर विश्व के अनेकानेक संस्थानों में, वैश्विक कार्यक्रमों में भारत का प्रतिनिधित्व कर भारत का मान-सम्मान बढ़ाये &#8211; चाहे ऊर्जा का क्षेत्र हो, खाद्यान का क्षेत्र हो, कृषि का क्षेत्र हो। विश्व को भारत की बात बताते रहे।  </p>
<p>श्री फाबिन अपनी सेवा के दौरान विश्व में घटित कई युद्धों का भी चश्मदीद गवाह रहे। लेकिन इस वार्षिक समारोह में उन्होंने कहा कि <strong>&#8216;युद्ध&#8217; किसी भी प्रकार की &#8216;शांति&#8217; का निवारण नहीं है। परिवार ही नहीं, समाज ही नहीं, किसी भी राष्ट्र और विश्व में &#8216;शांति&#8217; सिर्फ और सिर्फ &#8216;अहिंसा&#8217; और सद्भावना&#8217; से लाई जा सकती हैं।</strong> उनके अनुसार, मोहनदास करम चंद गांधी को जन्म लिए आज 154 वर्ष हो रहा है, साथ ही, उन्हें अंतिम सांस लिए 75-वर्ष; लेकिन आज ही नहीं, आने वाले कई दशकों तक गांधी का सिद्धांत जीवित रहेगा। </p>
<figure id="attachment_5164" aria-describedby="caption-attachment-5164" style="width: 2048px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/11/3.jpeg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/11/3.jpeg" alt="" width="2048" height="1365" class="size-full wp-image-5164" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/11/3.jpeg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/11/3-300x200.jpeg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/11/3-1024x683.jpeg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/11/3-768x512.jpeg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/11/3-1536x1024.jpeg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2048px) 100vw, 2048px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5164" class="wp-caption-text">इंदिरापुरम (गाजियाबाद) स्थित संत थॉमस स्कूल के वार्षिक समारोह में रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत करती छात्राएं</figcaption></figure>
<p>आज के बदलते समय में हम भले गांधी की बातों से सहमत नहीं हों, हम भले भगत सिंह की बातों को, उनकी सिद्धांतों को तबज्जो दें; लेकिन सच यही है कि गांधी की विचारधारा अमर कहेगा। वहां उपस्थित हज़ारों छात्रों और अभिभावकों, शिक्षकों को सम्बोधित करते उन्होंने कहा कि भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में महात्मा गांधी की &#8216;अहिंसावाद सिंद्वातों&#8217; के आधार पर ही &#8216;अमन&#8217; और &#8216;शांति&#8217; कायम की जा सकती है। आज भारत ही नहीं, पूरा विश्व अमन चाहता है। और जब भी अमन की बात होती है विश्व के लोग भारत की ओर टकटकी निगाहों से देखने लगते हैं। गांधी को सुनने और समझने लगते हैं। </p>
<p><strong>उन्होंने कहा कि &#8220;आज विचारधारा भले अलग-अलग हो, लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि महात्मा गांधी के नेतृत्व में अहिंसक तरीके से संघर्ष कर भारत को आज़ादी मिली थी। कुछ लोगों का तर्क था कि भगत सिंह के विचारधारा का अनुसरण करना चाहिए था। यह गलत था और आज भी गलत है । क्योंकि उन दिनों अंग्रेजों को भारतीय को गोली मारने के लिए बहुसंख्यक में भारतीय मिल गए थे और इसका ज्वलंत उदाहरण है अमृतसर कांड जो जालियांवाला कांड के रूप में जाना जाता है। वहां एक भारतीय ने ही दूसरे भारतीय पर गोली चलाये थे। आदेश अंग्रेज का था।&#8221;</strong></p>
<figure id="attachment_5166" aria-describedby="caption-attachment-5166" style="width: 2048px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/11/7.jpeg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/11/7.jpeg" alt="" width="2048" height="1365" class="size-full wp-image-5166" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/11/7.jpeg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/11/7-300x200.jpeg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/11/7-1024x683.jpeg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/11/7-768x512.jpeg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/11/7-1536x1024.jpeg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2048px) 100vw, 2048px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5166" class="wp-caption-text"><br />इंदिरापुरम (गाजियाबाद) स्थित संत थॉमस स्कूल के वार्षिक समारोह में रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत करते छात्र-छात्राएं</figcaption></figure>
<p>फाबिन का कहना था कि आज के इस वैज्ञानिक और दिन-प्रतिदिन के बदलते समय में युवाओं को आगे बढ़ने के लिए, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, बौद्धिक दृष्टि से देश को आगे ले जाने के लिए अनेकानेक अवसर हैं और होंगे; परन्तु वहां उपस्थित छात्र-छात्राओं की ओर देखते अस्सी वर्षीय भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी ने कहा कि &#8220;आप सभी बच्चे भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए मेहनत करें। आज इस शाम आप सभी शपथ लें कि भारत के वर्तमान और भविष्य में मानवता की बुनियाद को मजबूत करेंगे। हमें अमन-शांति का मार्ग चुनना होगा क्योंकि युद्ध में सबसे अधिक बच्चे की मृत्यु होती है।&#8221; </p>
<p>अपने सन्देश में संत थॉमस के चेयरमैन फ़ादर साजी अब्राहम ने कहा कि &#8216;जूनून और उत्साह&#8217; से हम अपने लक्ष्य को प्राप्त का सकते हैं। उन्होंने कहा कि &#8216;उत्साह&#8217; का अर्थ है &#8216;अपने अंदर ईश्वर को रखना, यानी शांति अउ सद्भाव को रखना।&#8221; </p>
<figure id="attachment_5167" aria-describedby="caption-attachment-5167" style="width: 2048px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/11/2.jpeg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/11/2.jpeg" alt="" width="2048" height="1365" class="size-full wp-image-5167" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/11/2.jpeg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/11/2-300x200.jpeg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/11/2-1024x683.jpeg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/11/2-768x512.jpeg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/11/2-1536x1024.jpeg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2048px) 100vw, 2048px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5167" class="wp-caption-text">इंदिरापुरम (गाजियाबाद) स्थित संत थॉमस स्कूल के वार्षिक समारोह में पुरस्कृत करते फाबिन, चेयरमैन फ़ादर साजी अब्राहम, फादर चेरियन जोसेफ, विद्यालय के प्राचार्य वी. के. कोरियाकोज और अन्य</figcaption></figure>
<p>विद्यालय के शिक्षकों, छात्रों, शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के अतिरिक्त फादर चेरियन जोसेफ, विद्यालय के प्राचार्य वी. के. कोरियाकोज, उप-प्राचार्य रेचल रेज़ी, हेडमिस्ट्रेस विनीता वर्ग़िज उपस्थित थे। इस दौरान रंगारंग कार्यक्रम भी किया गया और विजेता छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत भी किया गया। </p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/education/when-there-is-talk-of-peace-harmony-then-the-world-starts-looking-towards-india">पूरा विश्व &#8216;अमन&#8217; चाहता है और जब &#8216;अमन-शांति-सद्भाव&#8217; की बात होती है तो विश्व भारत की ओर देखने लगता है, गांधी को पढ़ने-समझने लगता है : फाबिन</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>http://www.aryavartaindiannation.com/education/when-there-is-talk-of-peace-harmony-then-the-world-starts-looking-towards-india/feed</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>लोक सभा में बहुराज्‍य सहकारी सोसाइटी (संशोधन) विधेयक, 2022 चर्चा के बाद पारित</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/nation/lok-sabha-passed-the-multi-state-co-operative-societies-amendment-bill-2022-after-discussion</link>
					<comments>http://www.aryavartaindiannation.com/nation/lok-sabha-passed-the-multi-state-co-operative-societies-amendment-bill-2022-after-discussion#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 26 Jul 2023 06:39:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[co-operative]]></category>
		<category><![CDATA[corruption]]></category>
		<category><![CDATA[election]]></category>
		<category><![CDATA[parliament]]></category>
		<category><![CDATA[sahara]]></category>
		<category><![CDATA[society]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.aryavartaindiannation.com/?p=5019</guid>

					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली : केन्द्रीय सहकारिता मंत्री ने विधेयक पर लोक सभा में हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटी में पारदर्शिता, जवाबदेही और उसका मुनाफा बढ़ाने के लिए इस विधेयक को मंज़ूरी दी है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक में [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/nation/lok-sabha-passed-the-multi-state-co-operative-societies-amendment-bill-2022-after-discussion">लोक सभा में बहुराज्‍य सहकारी सोसाइटी (संशोधन) विधेयक, 2022 चर्चा के बाद पारित</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली : केन्द्रीय सहकारिता मंत्री ने विधेयक पर लोक सभा में हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटी में पारदर्शिता, जवाबदेही और उसका मुनाफा बढ़ाने के लिए इस विधेयक को मंज़ूरी दी है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक में स्वतंत्र चुनाव करवाने के लिए निर्वाचन सुधार लागू करने के लिए निर्वाचन प्राधिकरण का प्रावधान किया गया है जो लगभग निर्वाचन आयोग के बराबर शक्तिशाली होगा और इसमें सरकारी दखल नहीं होगा। इसके अलावा, अगर निदेशक मंडल की एक-तिहाई संख्या खाली हो जाती है तो फिर चुनाव करवाने की व्यवस्था की गई है। साथ ही, बोर्ड की बैठकों में अनुशासन, सहकारी समितियों के कार्यकलाप सुचारू रूप से चलाने के भी प्रावधान इसमें हैं। समितियों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों को 3 महीने में बोर्ड मीटिंग बुलानी आवश्यक होगी। उन्होंने कहा कि सहकारी समिति के शासन में पारदर्शिता लाने के लिए इक्विटी शेयरधारक को बहुमत का प्रावधान रखा गया है।</strong></p>
<p>श्री शाह ने कहा कि इस विधेयक में समितियों में एक अनुसूचित जाती, या अनुसूचित जनजाति और एक महिला को आरक्षण देने का काम किया गया है जिससे समितियों में इन वर्गों का प्रतिनिधित्व बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि विभिन्न संवैधानिक अपेक्षाओं का अनुपालन ना करने पर बोर्ड के सदस्यों को अयोग्य घोषित किया जा सकता है। श्री शाह ने कहा कि कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया में किसी के भी ब्लड रिलेशन या डिस्टेंट रिलेशन में नौकरी नही दी जा सकेगी। उन्होंने कहा कि इस विधेयक में सूचना के अधिकार को भी शामिल किया गया है। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि इस सदन द्वारा ये बिल पारित करने के साथ ही देश के सहकारिता आंदोलन में एक नए युग की शुरूआत होगी। </p>
<p>केन्द्रीय सहकारिता मंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में सहकरिता मंत्रालय द्वारा देश में सहकारिता को मज़बूत करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी लोक सभा को दी। उन्होंने कहा कि आज़ादी के बाद से देश में सहकारिता क्षेत्र से जुड़े सभी लोग चाहते थे कि सहकारिता को केन्द्र सरकार द्वारा तवज्जो दी जाए और एक अलग सहकारिता मंत्रालय का गठन हो। श्री शाह ने कहा कि दशकों पुरानी इस मांग को पूरा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने देश में एक अलग सहकारिता मंत्रालय की स्थापना की।</p>
<p>श्री अमित शाह ने कहा कि भारत में सहकारिता आंदोलन लगभग 115 साल पुराना है और इस आंदोलन ने कई महत्वपूर्ण उपक्रम देश को दिए हैं जो आज लाखों लोगों को रोज़गार दे रहे हैं, जैसे अमूल, कृभको, इफ्को। उन्होंने कहा कि पिछले 75 सालों में सहकारिता पर कोई ध्यान नहीं दिया गया और ना देश की संसद में राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर इस पर किसी प्रकार का कोई मंथन किया गया। श्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा अलग सहकारिता मंत्रालय के गठन के बाद आने वाले 25 सालों में, देश की आज़ादी की शताब्दी के समय, सहकारिता क्षेत्र एक बार फिर पुरजोर तरीके से देश के विकास में अपना योगदान देगा।</p>
<p>केन्द्रीय सहकारिता मंत्री ने कहा कि मोदी जी के नेतृत्व में पिछले 2 सालों में देश में सहकारिता क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन हुए हैं। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ने पैक्स को पुनर्जीवित करने, इन्हें वायबल और बहुआयामी बनाने के लिए कई प्रयास किए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने देश के 63000 पैक्स को 2500 करोड़ रूपए की लागत से कम्प्यूटराइज़्ड करने का काम किय़ा है, इससे PACS, ज़िला सहकारी बैंकों, राज्य सहकारी बैंकों और नाबार्ड के साथ जुड़ जाएंगे। श्री शाह ने कहा कि कम्प्यूटराइज़्ड हो जाने पर पैक्स के ऑडिट की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन हो जाएगी और ये कई प्रकार के नए व्यवसाय कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने पैक्स के लिए मॉडल बायलॉज़ बनाकर सभी राज्यों को भेजे और बंगाल और केरल को छोड़कर सभी राज्यों ने इन्हें स्वीकार कर लिया है और आज देशभर के पैक्स एक ही कानून से चल रहे हैं। श्री शाह ने कहा कि अब PACS, FPO का भी काम कर सकेंगे और 1100 पैक्स एफपीओ के रूप में रजिस्टर्ड हो चुके हैं।</p>
<figure id="attachment_5021" aria-describedby="caption-attachment-5021" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/07/H20230725135764.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/07/H20230725135764.jpg" alt="" width="2200" height="1452" class="size-full wp-image-5021" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/07/H20230725135764.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/07/H20230725135764-300x198.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/07/H20230725135764-1024x676.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/07/H20230725135764-768x507.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/07/H20230725135764-1536x1014.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/07/H20230725135764-2048x1352.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5021" class="wp-caption-text">लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला लोक सभा के पूर्व अध्यक्ष (दिवंगत) सोमनाथ चटर्जी को श्रद्धांजलि देते PHOTO: PIB</figcaption></figure>
<p>श्री अमित शाह ने कहा कि मोदी जी ने देश के करोड़ों लोगों को गैस सिलिंडर दिए हैं और अब पैक्स एलपीजी वितरण का काम भी कर सकेंगे। इसी प्रकार, मोदी जी देश के करोड़ों लोगों को मुफ्त अनाज दे रहे हैं और अब इस रिटेल आउटलेट पर भी पैक्स का अधिकार होगा। अब पैक्स जनऔषधि केन्द्र भी चला सकेंगे और पानी समिति बनकर जल वितरण का काम भी कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि मोदी जी ने पैक्स को भंडारण क्षमता के साथ जोड़ने का भी काम किया है और अब ये भंडारण का भी काम करेंगे। श्री शाह ने कहा कि इस बजट में मोजी जी ने सालों से सहकारिता के साथ हो रहे अन्याय को समाप्त करने और कोऑपरेटिव और कॉर्पोरेट के टैक्स को एक ही प्लेटफार्म पर लाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश के किसान अपने गन्ने को कोऑपरेटिव मिलों में बेचते हैं, लेकिन इस पर 30 प्रतिशत इन्कम टैक्स लगाया जाता था। उन्होंने कहा कि मोदी जी ने किसानों को दिए जाने वाले मुनाफे पर से टैक्स को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है और इतना ही नहीं, पहले चुकाए गए टैक्स को भी वापस लौटाने का प्रावधान भी मोदी जी ने किया है।</p>
<p>केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार ने सहकारिता को मज़बूत करने के लिए 3 नई बहुराज्यीय सोसायटी बनाने का निर्णय लिया। पहली सोसायटी, किसान की उपज को निर्यात करने के प्लेटफार्म के रूप में काम करेगी। दूसरी सोसायटी, बीजों के उत्पादन के साथ छोटे किसानों को जोड़ेगी और इससे 1 एकड़ भूमि वाले किसान भी बीज उत्पादन के साथ जुड़ सकेंगे। तीसरी सोसायटी, ऑर्गेनिक खेती के उत्पादों की देश औऱ दुनिया में मार्केटिंग कर किसानों को उनकी उपज का उचित दाम दिलाएगी। श्री शाह ने कहा कि इसके अलावा मोदी जी ने सहकारी शिक्षण के लिए आने वाले दिनों में सहकारिता विश्वविद्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया है। राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस की शुरूआत भी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के हाथों से जल्द होगी। उन्होंने कहा कि देश में 2003 से 2020 के बीच कभी भी राष्ट्रीय सहकारी नीति नहीं थी, लेकिन मोदी जी के नेतृत्व में इस वर्ष दीपावली से पहले नई राष्ट्रीय सहकारी नीति देशवासियों के सामने आ जाएगी, जो अगले 25 सालों का सहकारिता का मानचित्र देश के सामने रखेगी।</p>
<p>श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने देश के करोड़ो लोगों को 9 सालों में गरीबी से मुक्त करने का बहुत बड़ा यज्ञ किया है। उन्होंने कहा कि देश में रोज़ग़ार पैदा करने का एकमात्र ज़रिया कृषि और सहकारिता है और इसके लिए ही प्रधानमंत्री जी ने अलग सहकारिता मंत्रालय का गठन किया है। लोक सभा द्वारा आज पारित किए गए बहुराज्‍य सहकारी सोसाइटी (संशोधन) विधेयक, 2022 में, सदस्यों की निर्वाचन प्रक्रिया में सुधार, सोसायटी में पारदर्शिता लाने, निगरानी प्रणाली को सुदृढ़ करने, व्यापार में सुगमता जैसे विषयों के लिए विस्तृत प्रावधान किए गए हैं। विधेयक में सोसायटी के सदस्यों में अनुशासन, निदेशक बोर्ड में कमज़ोर और सीमांत वर्गों के प्रतिनिधित्व और प्रोफेशनलिज़्म के संबंध में भी प्रावधान किए गए हैं। इसके अलावा, विधेयक में कर्मचारियों की भर्ती की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने, केन्‍द्रीय पंजीयक द्वारा स्‍वीकृत Panel से Auditor की नियुक्ति करने और Audit और Accounts के निर्धारित मानकों के माध्यम से वित्‍तीय अनुशासन लाने जैसे विषयों के बारे में प्रावधान किए गए हैं।</p>
<p>लोक सभा में प्रस्तुत विधेयक में, Concurrent Audit से त्‍वरित सुधारात्‍मक कार्रवाई, केन्‍द्रीय पंजीयक द्वारा कपटपूर्ण और अवैध गतिविधियों में लिप्‍त समिति के गठन, कार्यकरण और वित्तीय स्थिति की जांच पड़ताल से अनुशासन के अनुपालन पर भी बल दिया गया है। इसके साथ ही, व्यापार में सुगमता लाने के लिए पंजीकरण प्रक्रियाओं में संशोधन, आवेदन के त्वरित निपटान, इलेक्‍ट्रॉनिक तरीके से आवेदन, दस्‍तावेज, जांच आदि अपलोड करने के प्रावधान भी विधेयक में किए गए हैं। विधेयक में सरकार की पूर्वानुमति से सरकारी शेयरों के redemption, बहुराज्य सहकारी समिति को सुनवाई का अवसर प्रदान करने के बाद liquidation और सहकारी बैंकों पर BR अधिनियम, 1949 लागू करने जैसी व्यवस्थाएं भी की गई हैं।</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/nation/lok-sabha-passed-the-multi-state-co-operative-societies-amendment-bill-2022-after-discussion">लोक सभा में बहुराज्‍य सहकारी सोसाइटी (संशोधन) विधेयक, 2022 चर्चा के बाद पारित</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>http://www.aryavartaindiannation.com/nation/lok-sabha-passed-the-multi-state-co-operative-societies-amendment-bill-2022-after-discussion/feed</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>&#8220;हमारी बेटियां आपकी &#8216;पुरुषार्थ&#8217; को अपने दोनों पैरों के बीच रख लेती है, आपको सुकून मिलता है; लेकिन उसे &#8216;वेश्या&#8217; और &#8216;रंडी&#8217; भी आप ही कहते हैं&#8230;.&#8221;</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/prostitution-india-needs-changes-in-law</link>
					<comments>http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/prostitution-india-needs-changes-in-law#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 04 May 2022 12:30:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
		<category><![CDATA[kolkata]]></category>
		<category><![CDATA[law]]></category>
		<category><![CDATA[leaders]]></category>
		<category><![CDATA[lucknow]]></category>
		<category><![CDATA[newdelhi]]></category>
		<category><![CDATA[Patna]]></category>
		<category><![CDATA[politics]]></category>
		<category><![CDATA[prostitution]]></category>
		<category><![CDATA[society]]></category>
		<category><![CDATA[vote]]></category>
		<category><![CDATA[votebank]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.aryavartaindiannation.com/?p=3996</guid>

					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली/कोलकाता/लखनऊ : नाम का हमारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। कई लोग अपने नाम का &#8216;अर्थ&#8217; भी नहीं समझते। फिर उसे &#8216;सार्थक&#8217; या &#8216;निरर्थक&#8217; सिद्ध करने में उनकी भूमिका का &#8216;गौण&#8217; होना भी स्वाभाविक है। समाज का औसतन पचास से अधिक फीसदी महिला-पुरुष अपने नाम की सार्थकता जीवन पर्यन्त सिद्ध और सार्थक नहीं कर [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/prostitution-india-needs-changes-in-law">&#8220;हमारी बेटियां आपकी &#8216;पुरुषार्थ&#8217; को अपने दोनों पैरों के बीच रख लेती है, आपको सुकून मिलता है; लेकिन उसे &#8216;वेश्या&#8217; और &#8216;रंडी&#8217; भी आप ही कहते हैं&#8230;.&#8221;</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली/कोलकाता/लखनऊ : नाम का हमारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। कई लोग अपने नाम का &#8216;अर्थ&#8217; भी नहीं समझते। फिर उसे &#8216;सार्थक&#8217; या &#8216;निरर्थक&#8217; सिद्ध करने में उनकी भूमिका का &#8216;गौण&#8217; होना भी स्वाभाविक है। समाज का औसतन पचास से अधिक फीसदी महिला-पुरुष अपने नाम की सार्थकता जीवन पर्यन्त सिद्ध और सार्थक नहीं कर पाते। अगर ऐसा होता तो शायद भारतवर्ष की स्थिति आज ऐसी नहीं होती। लेकिन जब समाज के लोग अपने हित में किसी और का नाम खुले बाजार में बेच देते हैं, फिर उसे अपना नाम अपभ्रंश कर समाज में जीना होता है। दुर्भाग्य यह है कि उस अपभ्रंशित नाम, शाब्दिक से व्यावहारिक अर्थ तक, अपनी सार्थकता सिद्ध करता है फिर उसे समझने के लिए हमारे समाज में शायद शून्य दशमलव एक फ़ीसदी लोग भी नहीं होते हैं।</strong> </p>
<p>यह बात मैं नहीं कह रहा हूँ। यह बात आज से कोई पैंतीस वर्ष पहले लखनऊ के हज़रतगंज और चारबाग, पटनासिटी के मालसलामी, मुजफ्फरपुर के चतुर्भुज स्थान, दिल्ली के जी बी रोड (अब श्रद्धानन्द मार्ग), कलकत्ता के सोनागाछी क्षेत्रों में उन दिनों उम्र से बूढी तंग गलियों में जीवन की सांस गिनने वाली समाज से उपेक्षित बेटियों की मौसी, बाज़ारों में बेचीं गई बेटियों की मौसी, कूड़े-कचरों के ढ़ेरों से उठाई-पोसी गई बेटियों की मौसी, पैसे के लालच में अपनी बेटियों-पत्नियों को बेचने वाले भारतीय मर्दों की पत्नियों की मौसी कही थी &#8211; वह भी फ़क्र के साथ, सर उठाकर। </p>
<p><strong>वह तो यह भी कही थी कि &#8220;अगर हमारी बेटियां अपना जिस्म बेचना बंद कर दे तो आपके समाज की बहु-बेटियां चौराहों पर नग्न हो जाएँगी। समाज के संभ्रांतों की इज्जत बड़े-बड़े शहरों की सड़कों पर बेपर्द हो जाएगी। तमीज और तहजीव तो हमारी बेटियों में है जो &#8216;आदाब&#8217; और &#8216;खुदहाफिज़&#8217; कहकर आपका सम्मान भी करती है और आपकी पुरुषार्थ को, आपकी इज्जत को अपने दोनों पैरों के बीच कुछ देर रख लेती है। आप उसमें ही खुश हो जाते हैं। आपको जीवन के उत्कर्ष वाली शांति प्राप्त होती है। उस &#8216;शांति&#8217; की बात आप अपने-अपने घरों की &#8216;शांति&#8217; से नहीं करते। लेकिन उसे, मुझे &#8216;वेश्या&#8217;, &#8216;रंडी&#8217;, &#8216;बदचलन&#8217; भी आप ही कहते हैं।&#8221;</strong></p>
<p>मौसी फिर कहती है: &#8220;मेरी बेटियों को देखकर समाज की औरतें अपने-अपने बच्चों को खींचकर दरवाजे के अंदर इस कदर खींचती हैं जैसे हमारी बेटियां &#8221;एयर-बोर्न डिजीज&#8217; लेकर चल रही हों। हमारी बेटियां कभी &#8216;चूं&#8217; भी नहीं करती। लेकिन आपके घरों की &#8216;शांति&#8217; को देखकर &#8216;मुस्कुराती&#8217; जरूर है।&#8221;</p>
<p>मैं तो महज उस श्रद्धेय मौसी की बातों को आज दोहरा रहा हूँ। पैंतीस वर्ष पहले कलकत्ता से प्रकाशित &#8216;आनंद बाजार पत्रिका&#8217; का &#8216;संडे&#8217; पत्रिका एक कवर स्टोरी कर रही थी। हम सभी छोटे से बड़े संवाददाता भारत के विभिन्न &#8216;लालरंगी क्षेत्रों&#8217; में स्थित संकीर्ण गलियों की कहानी, उन गलियों में रहने वाली मौसियों, उनकी बेटियों की रुदन को शब्दबध्द कर कलकत्ता भेज रहे थे। उद्देश्य था &#8216;समाज के संभ्रांतों की सोच बदले &#8211; क्योंकि अपने-अपने नजरों में नंगे सभी हैं और उसी नंग आखों से दूसरों की नंग्नता को आंकते हैं। <br />
जो &#8216;समाज के अंदर&#8217; है, उन्हें &#8216;संभ्रांतों&#8217; के रूप में अलंकृत करते हैं; जो समाज की तंग-गलियों में सांस ले रही हैं, जो समाज के संभ्रांतों की पुरुषार्थ को शांत कर रही हैं, उसे &#8216;वेश्या&#8217;, &#8216;रंडी&#8217; &#8216;बदचलन&#8217; शब्दों से अलंकृत किया जाता है। हाँ, सामाजिक, बौद्धिक और चारित्रिक बाजार में वे भले &#8216;चरित्रहीन&#8217; हों; लेकिन भारत के राजनीतिक बाजार में उनका और समाज के संभ्रातों का मोल &#8216;बराबर&#8217; होता है &#8211; एक वोट &#8211; जो स्थानीय राजनेताओं के राजनीतिक चरित्र का निर्माण करता है। इससे बड़ा &#8216;बिडम्बना&#8217; और क्या हो सकता है। लेकिन भारत में &#8216;वेश्यावृति&#8217; आज भी क़ानूनी तौर पर अपराध है। </p>
<figure id="attachment_3998" aria-describedby="caption-attachment-3998" style="width: 940px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/05/gbrd.jpeg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/05/gbrd.jpeg" alt="" width="940" height="1410" class="size-full wp-image-3998" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/05/gbrd.jpeg 940w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/05/gbrd-200x300.jpeg 200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/05/gbrd-683x1024.jpeg 683w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/05/gbrd-768x1152.jpeg 768w" sizes="auto, (max-width: 940px) 100vw, 940px" /></a><figcaption id="caption-attachment-3998" class="wp-caption-text">दिल्ली का जी बी रोड यानी श्रद्धानन्द मार्ग : तस्वीर: मीडियम के सौजन्य से</figcaption></figure>
<p>कल मुद्दत बाद गंगूबाई फिल्म देखा। जब तक वह &#8216;गंगा&#8217; थी, समाज के लोग उसकी &#8216;पवित्रता&#8217; को ठग कर शरीर खरीद-बिक्री के बाजार में बेच दिया। गंगा अपभ्रंशित होकर &#8216;गंगू&#8217; हो गई। लेकिन &#8216;गूंगी&#8217; नहीं हुई। कोई कहता है यह फिल्म मशहूर लेखक हुसैन जैदी की किताब ‘माफिया क्वीन्स ऑफ मुंबई’ पर आधारित है। कोई कहता है गंगूबाई 60 के दशक में मुंबई माफिया का बड़ा नाम थीं। उसके पति ने महज पांच सौ रुपए के लिए बेच दिया था और इसके बाद से ही वे वेश्यावृत्ति में लिप्त हो गई थी। <br />
लेकिन संजय लीला भंसाली ने भारतीय वेश्यावृति समाज की पीढ़ी-दर-पीढ़ी से लेकर वर्त्तमान काल तक की स्थिति को गंगूबाई के माध्यम से जिस कदर पेश किया है, काबिले तारीफ है। यह इस बात को भी उजागर करता है कि आज भी समाज में वेश्याओं को अपनी आवाज खुद बननी होगी क्योंकि समाज में मानसिकता का महज दो फांक नहीं, सहस्र फांक है और सभी अपना-अपना राग अलाप रहे हैं। इस फिल्म में गंगूबाई का किरदार आलिया भट्ट ने जिस कदर निभाई हैं, वह उनके समाज के बाहर के समाज को &#8220;गूंगा&#8221; बना दी हैं। </p>
<p>एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के इतिहास में कई ऐसी महिलाएं रहीं जिनका रुतबा और शान विश्व प्रख्यात रहा। ये महिलाएं केवल सिनेमा, राजनीति और खेल जगत तक ही सीमित नहीं रहीं बल्कि समाज सेवा जैसे कई ऐसे क्षेत्रों से जुड़कर उन्होंने विश्व भर में अपना नाम बनाया। लेकिन उन महिलाओं के जीवन के विषय में लोग कम ही जानते हैं। कहा जाता है कि गंगा हरजीवनदास यानी गंगूबाई गुजरात की एक पढ़ी-लिखी और संपन्न परिवार से ताल्लुक रखती थीं। उनका जन्म गुजरात के काठियावाड़ में 1939 में हुआ था। जब गंगूबाई छोटी थीं तब वो बॉलीवुड की अभिनेत्री बनने का ख्वाब रखती थीं और अपना सपना पूरा करने मुंबई आना चाहती थीं।</p>
<p>16 साल की आयु में जब गंगू पढ़ाई करने कॉलेज पहुंची तो उनके जीवन में एक बड़ी घटना ने दस्तक दी। गंगू को 16 वर्ष की आयु में ही प्यार हो गया था और उस शख्स का नाम था रमणीक लाल। रमणीक गंगू के पिता के लिए बतौर एक अकाउंटेंट का कार्य करते थे। जब गंगू का प्यार परवान चढ़ा तो उन्होंने रमणीक से शादी करने का मन बनाया और उसके साथ भागकर मुंबई आ गईं। लेकिन ये प्यार उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल साबित हुआ क्योंकि रमणीक ने गंगू को केवल 500 रूपयों के लिए कोठे पर बेच दिया।</p>
<p>बहरहाल, <strong>&#8216;मायइण्डिया</strong>&#8216; के एक लेख के अनुसार सन 1956 में, अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम द्वारा यौनकर्मियों की स्थिति के बारे में एक अत्यधिक महत्वपूर्ण कानून पारित किया गया था। जिसे एसआईटीए के नाम से भी जाना जाता है। यह कानून बताता है कि वेश्याओं को उनके निजी व्यापार को चलाने की पूरी अनुमति है, लेकिन वे इस व्यवसाय को सार्वजनिक रुप से या खुलेआम बिल्कुल भी नहीं चला सकती हैं। बीबीसी में एक लेख प्रकाशित किया गया था, जिसमें कहा गया है कि भारत में वेश्यावृत्ति अवैध है। हालांकि भारतीय कानून, वेश्यावृत्ति के रूप में पैसों के बदले वेश्याओं के साथ सेक्स सम्बन्ध बनाने की अनुमति नहीं देता है। कानून के अनुसार, यदि वे सार्वजनिक रूप से किसी भी यौन गतिविधियों में शामिल होती हैं, तो उनके ग्राहकों को गिरफ्तार भी किया जा सकता है। यदि एक व्यक्ति अपनी व्यक्तिगत क्षमता के आधार पर पैसे देकर अगर किसी वेश्या से उसके बदले में सेक्स की अनुमति मांगता है, तो कोई भी वेश्या सार्वजनिक स्थान से लगभग 200 गज की दूरी के अंदर यह काम नहीं कर सकती है। देखा जाए, तो ये यौनकर्मी सामान्य श्रम कानूनों के दायरों में नहीं आती है। हालांकि, उनके पास वे सभी अधिकार हैं जो एक आम नागरिक के पास होते हैं, लेकिन आम लोग उनसे केवल आनंद ही लेना चाहते हैं, अगर वे इस दलदल से बचना चाहती हैं, तो उनका पुनर्वास भी करवाया जा सकता हैं। </p>
<p>हालांकि, एसआईटीए के रूप में उसका प्रयोग इस तरह नहीं किया जाता है। कभी-कभी आईपीसी के विभिन्न वर्गों को यौनकर्मियों के खिलाफ उनकी सार्वजनिक अश्लीलता, आपराधिक कृत्यों और आरोपों के विरुद्ध नियोजित किया जाता है। उनके ऊपर सार्वजनिक रुप से बाधाएं उत्पन्न करने के भी आरोप लगाए जा सकते हैं। अब समस्या यह है कि क्या इन अपराधों की कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं है क्योंकि कुछ सनकी अधिकारियों द्वारा यौनकर्मियों का शोषण करने के बाद उन्हें छोड़ दिया जाता है, वही यौनकर्मी बाद में उनके खिलाफ आरोप लगाती हैं। ‘एसआईटीए’ को हाल ही में ‘पीआईटीए’ या अनैतिक व्यापार (रोकथाम) के अधिनियम द्वारा बदल दिया गया है। इस कानून को बदलने के कई अथक प्रयास किये जा रहे हैं जिससे कि समाज में विस्तृत समूह में फैले हुए वेश्यावृत्ति और वेश्याओं के ग्राहकों पर लगे दोषों पर रोक लगाई जा सके। हालांकि, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने वेश्यावृत्ति में निरन्तर हो रहे विकास का विरोध किया है। लेकिन इन दिनों, कई बीमा कंपनियां यौनकर्मियों का बीमा करने के लिए आगे आ रही हैं। </p>
<figure id="attachment_3999" aria-describedby="caption-attachment-3999" style="width: 2560px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/05/aajtak-sonagachi-scaled.jpeg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/05/aajtak-sonagachi-scaled.jpeg" alt="" width="2560" height="1686" class="size-full wp-image-3999" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/05/aajtak-sonagachi-scaled.jpeg 2560w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/05/aajtak-sonagachi-300x198.jpeg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/05/aajtak-sonagachi-1024x674.jpeg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/05/aajtak-sonagachi-768x506.jpeg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/05/aajtak-sonagachi-1536x1012.jpeg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/05/aajtak-sonagachi-2048x1349.jpeg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></a><figcaption id="caption-attachment-3999" class="wp-caption-text">कलकत्ता का सोनागाछी : तस्वीर &#8216;आजतक&#8217; के सौजन्य से</figcaption></figure>
<p>आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत में लगभग 30 लाख यौनकर्मी रहते हैं। भारत में जिन महिलाओं को पैसे की अत्यधिक आवश्कता है और उनके पास धन कमाने का कोई रास्ता नही है तो वे विवश होकर इस पेशे को अपना लेती हैं। हालांकि, बहुत से ऐसे लोग भी होते हैं जो इन महिलाओं को वेश्यावृत्ति के पेशे को अपनाने के लिए मजबूर करते हैं। ऑल इंडिया नेटवर्क ऑफ यौनकर्मी के अध्यक्ष, भारती डे का कहना है कि महिलाएं खुद के हालातों से समझौता करके, अन्त में वेश्या बन जाती हैं, मगर हमें उन वेश्याओं को दूसरों के समान अधिकार देने की आवश्यकता है। पिछले कुछ सालों में, वेश्यावृत्ति के उद्योग में भारी बढोत्तरी हुई है और नए यौनकर्मी में से अधिकांश महिलाएं ग्रामीण क्षेत्रों की हैं, जिनमें बहुत ही कम महिलाएं ऐसी हैं जो कम या बिल्कुल भी शिक्षित नहीं है। उनमें से कुछ महिलाएं ऐसी हैं जो कम रुपयों में ही कोई छोटा और अच्छा काम करने का रास्ता चुनती हैं, जबकि कुछ महिलाएं अधिक रुपयों के लालच में यौनकर्मी का काम चुनती हैं। </p>
<p>वास्तव में, डे की अध्यक्षता वाला समूह, वेश्यावृत्ति में लिप्त महिलाओं को बाहर निकालना चाहता है। अप्रैल 2015 के दौरान, महिलाओं के खिलाफ अपराधिक मामलों पर एक बैठक बुलाई गई थी और जिसमें ऐसा कहा गया था कि अगर भारत यौनकर्मियों की संख्या को कम करने में सफल रहा, तो देश में महिलाओं की स्थिति काफी बेहतर हो जाएगी। 2009 में, सुप्रीम कोर्ट ने यह सुझाव दिया था कि वेश्यावृत्ति के लिए कानून बनाया जाए। महिलाओं के लिए राष्ट्रीय आयोग, एक राष्ट्रीय-सरकारी संगठन ने इस मुद्दे को नजरअदांज कर दिया। इसकी प्रमुख ललिता कुमारमंगलम ने कहा था कि अगर वेश्यावृत्ति को पूर्ण रूप से नियन्त्रित करना है, तो हमारे देश के उच्च अधिकारियों को विशेष रूप से बच्चों की तस्करी पर रोक लगाने के लिए जल्द से जल्द कोई बेहतर कदम उठाने होगें। </p>
<p>यह उन बुरे हालातों में सुधार करने में मदद करेगा, जिसमें ग्राहक और यौनकर्मी के शरीर में एचआईवी-एड्स के प्रसार के साथ किसी अन्य बीमारी भी एक-दूसरे में पहुँचती हैं। 8 नवंबर को उन्होंने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में विशेष पैनल के रूप में प्रस्तुत किया, जो कानून बदलना चाह रहे थे। ‘मयंक ऑस्टेन सूफी’ जीबी रोड पर स्थिति वेश्यालय के बारे में लिखते रहे हैं और उनके अनुसार, सभी यौनकर्मी से बातचीत करने पर पता चला है कि वे सभी कानूनी दर्जा प्राप्त करने की इच्छा रखती है। वे लोग डॉक्टरों के पास बार-बार जाकर थक गई है और हमेशा पुलिस द्वारा परेशान किये जाने का डर भी उन्हें लगा रहता है। वे अपने मालिकों के घर भी एक डर की संभावना के साथ रहती हैं कि पता नहीं कब उनका मालिक उनको उस घर से निकाल दें, वे सब जीवित रहने के लिए वेश्यावृत्ति करने को मजबूर हैं। </p>
<p>जबकि इसके विपक्ष में विचार देने वालों का मानना है कि यह निश्चित रूप से सच है, हम केवल मजबूरी में की जाने वाली वेश्यावृत्ति को तुरंत बंद कर सकते है न कि ऐसी किसी भी गतिविधियों को जो स्वेच्छा से हो रही है। ‘अपने आप’ नाम का एक गैर-तस्करी समूह का कहना है कि तस्कारों के दलालों द्वारा गांवों में युवा लड़कियों और बच्चियों के माता-पिता को कम कीमत देकर खरीदते हैं, वह उन लड़कियों को दुगनी कीमत पर बेचते है, इसलिए इन मासूम लड़कियों को मजबूरी में अपने साथ हो रहे बलात्कार को सहना पड़ता है। अक्सर, पुलिस और एनजीओ के संगठनों ने इन पर छापा भी मारा है और लड़कियों को बचाने में मदद भी की है, लेकिन इससे कोई खास फायदा नहीं हुआ क्योंकि जैसे ही लड़कियां उनके चंगुल से छूट कर आती है, उनके परिवार वाले फिर से उन्हीं दलालों के हाथ बेच देते है। ‘अपने आप’ के अनुसार, भारत में लगभग 30% से अधिक यौनकर्मी 18 साल की आयु से कम की हैं।</p>
<p>स्पष्ट रूप से यह समूह वेश्यावृत्ति को कानूनी दर्जा देने के खिलाफ है। इनका कहना है कि सेक्स के लिए अधिक मांग के साथ, केवल तस्करी की मात्रा में वृद्धि होगी। इनकी ऐसी मांगों को कम करने के लिए “कूल मैन डू नॉट बाय सेक्स” नामक अभियान भी चलाया जा रहा था। इस अभियान को देखते हुए, वास्तव में इस कार्यक्रम को सफलता नहीं मिली, क्योंकि वह अब तक वेश्यावृत्ति के कम होने या वैध होने की संभावना की उम्मीद कर रहे थे।बीजेपी (भाजपा) एक रूढ़िवादी पार्टी के रूप में जानी जाती है और यह अप्रत्याशित है कि यह पार्टी यौन व्यापार के अनुमोदन के लिए अपना टिकट प्रदान करेगी, जिससे कि वेश्यावृत्ति में शामिल महिलाओं को राहत मिल सकें।</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/prostitution-india-needs-changes-in-law">&#8220;हमारी बेटियां आपकी &#8216;पुरुषार्थ&#8217; को अपने दोनों पैरों के बीच रख लेती है, आपको सुकून मिलता है; लेकिन उसे &#8216;वेश्या&#8217; और &#8216;रंडी&#8217; भी आप ही कहते हैं&#8230;.&#8221;</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/prostitution-india-needs-changes-in-law/feed</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>सुलभ द्वारा &#8220;विधवा&#8221; ​विनीता का विवाह ​राजा राममोहन रॉय और ईश्वरचन्द विद्यासागर के विचारों का पुनःस्थापना है।</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/nation/remarriage-of-uttarakhand-widow-by-sulabh</link>
					<comments>http://www.aryavartaindiannation.com/nation/remarriage-of-uttarakhand-widow-by-sulabh#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 22 May 2018 10:21:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[ishwarchand vidyasagar]]></category>
		<category><![CDATA[raja rammohum roy]]></category>
		<category><![CDATA[remarriage]]></category>
		<category><![CDATA[shivnath jha]]></category>
		<category><![CDATA[society]]></category>
		<category><![CDATA[Sulabh]]></category>
		<category><![CDATA[tradition]]></category>
		<category><![CDATA[widow marriage]]></category>
		<category><![CDATA[widows]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://www.sundaypost.in/?p=606</guid>

					<description><![CDATA[<p>गुप्तकाशी (उत्तराखण्ड) आपदा की पीड़िता विनीता महज एक विधवा नहीं थी बल्कि राजा राममोहन रॉय और ईश्वरचन्द विद्यासागर ​का एक &#8220;विषय&#8221; भी थी, जिसका बीजारोपण राममोहन रॉय और विद्यासागर कोई दो से अधिक शताब्दी पूर्व समाज, विशेषकर महिलाओं के उत्थान के लिए किया था &#8211; महिलाओं का सर्वांगीण विकास और विधवा विवाह की शुरुआत। आज [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/nation/remarriage-of-uttarakhand-widow-by-sulabh">सुलभ द्वारा &#8220;विधवा&#8221; ​विनीता का विवाह ​राजा राममोहन रॉय और ईश्वरचन्द विद्यासागर के विचारों का पुनःस्थापना है।</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>गुप्तकाशी (उत्तराखण्ड) आपदा की पीड़िता विनीता महज एक विधवा नहीं थी बल्कि राजा राममोहन रॉय और ईश्वरचन्द विद्यासागर ​का एक &#8220;विषय&#8221; भी थी, जिसका बीजारोपण राममोहन रॉय और विद्यासागर कोई दो से अधिक शताब्दी पूर्व समाज, विशेषकर महिलाओं के उत्थान के लिए किया था &#8211; महिलाओं का सर्वांगीण विकास और विधवा विवाह की शुरुआत। आज राजाराम मोहन रॉय का २४६ वां जन्मदिन है। ​</p>
<p>​दुष्यन्त कुमार ने कहा था : &#8220;कैसे आकाश में सूराख़ नहीं हो सकता &#8211; एक पथ्थर तो तबियत से उछालो यारो।&#8221; चौदह शब्द और जीवन की पूरी दास्तान। लेकिन उनके लिए जिन्हे अपनी परिश्रम, सोच और विस्वास पर नाज़ है और जो समाज में आमूल परिवर्तन लाना चाहते हैं।</p>
<p>शायद आज की पीढ़ी महान दार्शनिक और समाजसेवी राजा राममोहन रॉय और ​ईश्वरचन्द विद्यासागर को नहीं जानता हो या उनके नामों से परिचित नहीं हो, लेकिन इतिहास साक्षी है कि आज से कोई १६२ साल पूर्व, इधर जब मेरठ में मातृभूमि की स्वतन्त्रता के लिए क्रान्तिकारियों ने अंग्रेजी हुकूमत के  खिलाफ बिगुल बजाया था; उधर भारतीय सामाजिक व्यवस्था में एक महान परिवर्तन के लिए ईश्वरचन्द विद्यासागर भारत में एक उच्च जाति की विधवा महिला की दोबारा विवाह कराया था। वर्ष था १८५६ और तारीख ७ दिसंबर।</p>
<p>​इससे पहले भारतीय समाज में उच्च जातियों में विधवा को पुनर्विवाह की अनुमति नहीं थी।  </p>
<p>​पश्चिम मिदनीपुर के बिरसिंघा गांव में 26 सितंबर 1820 जन्म लिए ईश्वरचंद विद्यासागर के प्रयासों से 26 जुलाई 1856 को विधवा विवाह को कोलकाता (तब कलकत्ता) के तत्कालीन गवर्नर जनरल ने मंजूरी दी थी। उनकी उपस्थिति में 7 दिसम्बर 1856 को उनके मित्र राजकृष्ण बनर्जी के घर में पहला विधवा विवाह सम्पन्न हुआ ​था । </p>
<p>कहा जाता है कि १८५३ में हुए एक सर्वे के ​अनुमान कलकत्ता में लगभग १२ हज़ार से भी अधिक ​वेश्याएं रहती थीं। ईश्वरचन्द विद्यासागर उनकी इस हालत को परिमार्जित करने के लिए हमेशा प्रयासरत रहते थे। अक्षय कुमार दत्ता के सहयोग से ईश्वर चंद्र विद्यासागर ने विधवा विवाह को हिन्दू  समाज में स्थान दिलवाने का कार्य प्रारंभ किया। उनके प्रयासों द्वारा १८५६ में अंग्रेजीसरकार ने विधवा पुनर्विवाह अधिनियम पारित कर इस अमानवीय मनुष्य प्रवृत्तिपर लगाम लगाने की कोशिश की। </p>
<p>विद्यासागर नारी शिक्षा के समर्थक थे और उनके प्रयास से ही कलकत्ता में लड़कियों के लिए कई जगह स्कूलों की स्थापना ​हुयी थी ​। उन्हें सुधारक के रूप में राजा राममोहन राय का उत्तराधिकारी माना जाता ​है। इतिहास साक्षी है कि 1856-60 के बीच इन्होंने 25 विधवाओं का पुनर्विवाह ​कराये थे। </p>
<p>उस समय हिन्दू समाज में विधवाओं की स्थिति बहुत ही शोचनीय थी। विधवा-पुनर्विवाह कानून पारित तो हुआ था ​लेकिन समाज में इसे लागू कराना आसान नहीं ​था। तब विद्यासागर ने अपने इकलौते पुत्र का विवाह एक विधवा से करवाया ​था। </p>
<p>इतने वर्षों में इतनी सामाजिक क्रांति के बाद आज भी समाज में विधवाओं को वो दर्जा नहीं मिलता, जिनकी वे हकदार ​हैं। आम औरतों के तरह वे समाज में चैन से नहीं रह ​पातीं। ​बहरहाल, राजाराम मोहन रॉय और ​ईश्वरचन्द विद्यासागर को प्रवर्तक मानने वाले आधुनिक भारत में विधवाओं के मशीहा और सुलभ संस्था के संस्थापक डॉ बिन्देश्वर पाठक भी इस क्रांति के प्रवल समर्थक हैं और अगर ऐसा नहीं होता हो केदारनाथ की आपदा में पति को खो चुकी 24 वर्षीय विनीता की जिन्दगी में नया उजाला ​नहीं आया होता। ​पिछले वर्ष विनीता एक नए जीवनसाथी के साथ एक बार फिर सात फेरे लेकर १६१ साल बाद भी ईश्वरचन्द विद्यासागर के प्रयास को पुनः जीवित की ।  </p>
<p>2013 में केदारनाथ त्रासदी में उत्तराखंड के भनीग्राम पंचायत में गुप्तकाशी के पास देवली नामक गांव के रहने वाले 32 नौजवान भी बाढ़ में बह गए थे। ये सभी आजीविका कमाने निकले थे। इनमें विनीता का पति महेशचंद्र भी था। विनीता की छह महीने पहले ही शादी हुई थी। रुद्रप्रयाग जिले के गांव तिलवाड़ा निवासी टैक्सी ड्राइवर राकेश की विनीता से मुलाकात हुई। इसके बाद दोनों ने शादी करने का फैसला किया। राकेश ने बताया कि 26 अगस्त 2014 को उन्होंने कोर्ट मैरिज कर ली। अब दोनों के दो बच्चे भी हैं। </p>
<p>डॉ पाठक कहते हैं : इस युवक द्वारा लिया गया यह कदम आज के लोगों के लिए एक सन्देश भी है और प्रेरणा भी। आम तौर पर हमारे समाज में विधवाओं को एक तरह से अलग-थलग कर दिया जाता है। यहां तक कि उन्हें किसी शुभ समारोह में भी शामिल नहीं किया जाता। </p>
<p>​उनका जीवन दूभर हो जाता है। कभी-कभी तो उनके बच्चे बनारस-मथुरा-वृन्दावन की तंग गलियों में मरने के लिए भी छोड़ आते हैं। और अगर ऐसा नहीं होता तो आज बनारस-मथुरा-वृन्दावन में ऐसी विधवाएं नहीं होतीं। हम और हमारा संस्थान ऐसे हज़ारों विधवाओं का परवरिश कर रहे हैं।&#8221;</p>
<p>डॉ पाठक फिर कहते हैं : &#8220;विनीता का विवाह होना ईश्वरचन्द विद्यासागर और राजा राममोहन रॉय के प्रयासों को जीवित रखना है ताकि समय के साथ-साथ समाज की सोच में बदलाव आये। सम्पूर्ण वैदिक और सामाजिक रीती-रिवाजों के साथ विनीता का विवाह करवाना एक देशव्यापी अभियान है और ​हमें उम्मीद है यह अभियान समाज में एक क्रांति अवश्य लाएगा, ​इसे पूरे देश में जारी रखा जाएगा।​&#8221;​ </p>
<p>सामाजिक कुरीतियों को दूर करने के दिशा में अपनी तरह से सुलभ ऐसे सकारात्मक कदम उठा रहा है। सदियों से अंधेरी जिंदगी गुजार रहीं विधवाओं की जिंदगी रोशन करने की कोशिश संस्था पिछले तीन साल से लगातार कर रही है। </p>
<p>​उस विवाह के ​मौके पर सुलभ संस्था द्वारा विधवाओं को गिफ्ट के तौर पर साड़ियां भी दी गईं। विधवाओं ने मंदिर में रंगों से रंगोली सजाई, साथ ही दीये भी जलाए। उत्सव में शामिल हुईं सभी वृद्ध विधवाओं के चेहरे से खुशी झलक रही थी।   </p>
<figure id="attachment_608" aria-describedby="caption-attachment-608" style="width: 850px" class="wp-caption aligncenter"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.sundaypost.in/wp-content/uploads/2018/05/blessing-to-vinita-and-rakesh.jpg" alt="विनीता और राकेश को आशीष देते लोग" width="850" height="540" class="size-full wp-image-608" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2018/05/blessing-to-vinita-and-rakesh.jpg 850w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2018/05/blessing-to-vinita-and-rakesh-300x191.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2018/05/blessing-to-vinita-and-rakesh-768x488.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2018/05/blessing-to-vinita-and-rakesh-696x442.jpg 696w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2018/05/blessing-to-vinita-and-rakesh-661x420.jpg 661w" sizes="auto, (max-width: 850px) 100vw, 850px" /><figcaption id="caption-attachment-608" class="wp-caption-text">विनीता और राकेश को आशीष देते लोग</figcaption></figure>
<p>​विनीता की न केवल धूम-धाम से शादी कराई गई ​थी ​बल्कि उसमें 500 से भी अधिक विधवाओं ने भाग लिया और दांपत्य जीवन की सफलता के लिए दंपती को आशीर्वाद भी दिया। खास बात यह थी कि विवाह में सारी रस्में विधवा महिलांओं ने ही संपन्न कराई। इस आयोजन में मेहंदी, हल्दी तेल की रस्म के साथ गीतों का आयोजन भी विधवाओं द्वारा हुआ । मंदिर प्रांगण में सजे मंडप में विनीता ने अपने जीवन साथी के साथ सात फेरे लेकर अपना नए वैवाहिक जीवन की शुरुआत की। </p>
<figure id="attachment_609" aria-describedby="caption-attachment-609" style="width: 850px" class="wp-caption aligncenter"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.sundaypost.in/wp-content/uploads/2018/05/mehendi-ceremony-of-vinita.jpg" alt="मेंहन्दी लगवाती विनीता" width="850" height="540" class="size-full wp-image-609" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2018/05/mehendi-ceremony-of-vinita.jpg 850w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2018/05/mehendi-ceremony-of-vinita-300x191.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2018/05/mehendi-ceremony-of-vinita-768x488.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2018/05/mehendi-ceremony-of-vinita-696x442.jpg 696w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2018/05/mehendi-ceremony-of-vinita-661x420.jpg 661w" sizes="auto, (max-width: 850px) 100vw, 850px" /><figcaption id="caption-attachment-609" class="wp-caption-text">मेंहन्दी लगवाती विनीता</figcaption></figure>
<p>​​​विधवाविवाह अधिनियम १८५६ ब्रिटिश भारत में ब्राह्मण, राजपूतों, बनिया और कायस्थ जैसे कुछ अन्यजातियों के बीच मुख्य रूप से विधवापन अभ्यास पर रोक लगाने हेतु पारित किया गया था| यह कानून बच्चे और विधवाओं के लिए एक राहत के रूप में तैयार किया गया था जिसके पति की समय से पहले मृत्यु हो गई हो|</p>
<p>विधवा पुनर्विवाह अधिनियम 1856 हिंदू जाति में जो पूर्व की विवाह परंपरा थी उसमें विवाह अधिनियम १८५६ के अधिनियम के द्वारा सभी अड़चने द्वेष आदि को इस अधिनियम के तहत समाप्त कर दिया गया और इसमें नवीन पद्धतियों को जन्म दिया गया उस समय भारत ब्रिटिश अधीन था इसलिए भारत को ब्रिटिश भारत कहा जाता था यह सुधार हिंदू विवाह के विधवाओं केलिए सबसे बड़ा सुधार था पुरातन समय में किसीऔरत के पति की मृत्यु हो जाने पर उसे उसकी चिता के साथ जलना होता था या सरमुंडवाना होता था आदि ऐसी जटिल प्रक्रियाएं थी लेकिन इस अधिनियम के तहत कुछ प्रमुख सुधार लाए गएमसलन यदि किसी स्त्री के पति की मृत्यु हो जाती हैतो वह पुनर्विवाह कर सकती हैं।  </p>
<p>इस विवाह में उसके सगे संबंधी अर्थात माता पिता भाई दादा नाना नानी आदि संबंधियों के द्वाराबात करके दूसरे विवाह को मंजूरी दी जा सकती है यथा पुनर्विवाह करने वाली महिला अल्पवयस्क ​है। ​</p>
<p>जिस घर कि वह पहले बहु थी अर्थात उसके मृत्यु वाले पति का घर उस पर उसका कोई संपत्ति के तौर पर अधिकार नहीं होगा जहां वह पुनर्विवाह के बाद जाएगी वहां उसका अधिकार माना जाएगा</p>
<p>निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि हिंदू जाति कि जो पुरातन समय के अनुसार जोविवाह की परंपरा थी वह कई रूप से आज की अपेक्षा बिखरी हुई थी जिससे कि उस मेंकई बंधित नियम थे जिसमें एक पति की मृत्यु होने के पश्चात उसकी पत्नी को उसकी चिता पर जिंदा जलना या बाल मुंडवा देना या दूसरी शादी ना करना आदि कई<br />
​ ​<br />
सारी परंपराएं सम्मिलित थी जिसके अनुसार १८५६ में ब्रिटिश इंडिया हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम बनाया गया जिसमें कई सुधार लाए ​गए। </p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/nation/remarriage-of-uttarakhand-widow-by-sulabh">सुलभ द्वारा &#8220;विधवा&#8221; ​विनीता का विवाह ​राजा राममोहन रॉय और ईश्वरचन्द विद्यासागर के विचारों का पुनःस्थापना है।</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>http://www.aryavartaindiannation.com/nation/remarriage-of-uttarakhand-widow-by-sulabh/feed</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
