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	<title>shifting Archives - आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</title>
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	<description>आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</description>
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		<title>​गृह मंत्रालय के सभी निर्जीव ईंट, पत्थर, टेबल, कुर्सी, खम्भे, खिड़कियां &#8216;बिलख रहे&#8217; हैं, भवन छोड़कर &#8216;सजीव&#8217; जा रहे हैं एक नए भवन में</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 24 Jul 2025 13:46:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली: देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 14 अगस्त, 1947 को तमिल पुजारियों के हाथों &#8216;सेंगोल&#8217; स्वीकार किया था। 76-वर्ष बाद 28 मई, 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु के अधीनम मठ से फिर सेंगोल स्वीकार किया और उसे अपने कालखंड में निर्मित नए संसद भवन में लोकसभा अध्यक्ष के आसन के पास [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/nation/home-ministry-begings-moving-out">​गृह मंत्रालय के सभी निर्जीव ईंट, पत्थर, टेबल, कुर्सी, खम्भे, खिड़कियां &#8216;बिलख रहे&#8217; हैं, भवन छोड़कर &#8216;सजीव&#8217; जा रहे हैं एक नए भवन में</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली: देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 14 अगस्त, 1947 को तमिल पुजारियों के हाथों &#8216;सेंगोल&#8217; स्वीकार किया था। 76-वर्ष बाद 28 मई, 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु के अधीनम मठ से फिर सेंगोल स्वीकार किया और उसे अपने कालखंड में निर्मित नए संसद भवन में लोकसभा अध्यक्ष के आसन के पास स्थापित किया।भारत का नया संसद भवन भारतीयों द्वारा डिज़ाइन और निर्मित, यह वास्तुशिल्पीय चमत्कार पूरे देश की संस्कृति, गौरव और भावना को दर्शाता है। साथ ही, आने वाले समय में सीटों और सांसदों की संख्या में वृद्धि के साथ, भारतीय लोकतंत्र की लंबे समय से चली आ रही विशाल संसद की आवश्यकता को पूरा करने के लिए तत्पर है। सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के एक भाग के रूप में विकसित किया गया यह नया संसद भवन, संसदीय कार्य में आने वाली बुनियादी ढांचे संबंधी बाधाओं का समाधान करता है। </strong></p>
<blockquote><p>सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत अब बारी आ गयी मुद्दत से स्थापित गृह मंत्रालय के स्थानांतरण का। नार्थ ब्लॉक स्थित गृह मंत्रालय में सरदार वल्लभ भाई पटेल, जो पंडित नेहरू के मंत्रिमंडल में उप-प्रधानमंत्री तो थे ही, गृह मंत्री के रूप में 15 अगस्त, 1947 से अपनी अंतिम सांस तक पद पर आसीन रहे । आज जब अमित शाह के कार्यकाल में गृह मंत्रालय अपने नए परिसर की ओर अग्रमुख है, वहां के सभी निर्जीवों को, ईंट, पत्थर, दीवार, सीढियाँ, दरवाजे, खिड़कियां अब तक के सभी 29 पूर्व गृह मंत्रियों के पैरों के निशान याद कर विकल हो रहे हैं। देश के 30 वे गृहमंत्री अमित शाह के कालखंड में यह परिसर अब गृह मंत्रालय नहीं, बल्कि किसी और नाम से जाना जायेगा। </p></blockquote>
<p>गृह मंत्रालय का सेंट्रल विस्टा में एक नए, अत्याधुनिक कार्यालय परिसर में स्थानांतरण कार्य प्रगति पर है, जिसमें अधिकांश कार्यालय पहले ही स्थानांतरित हो चुके हैं। अधिकांश वरिष्ठ अधिकारी पहले ही इस नई सुविधा में स्थानांतरित हो चुके हैं। सीएसएस परिसर, महत्वाकांक्षी सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना का एक प्रमुख घटक है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी में सरकारी बुनियादी ढांचे का केंद्रीकरण और आधुनिकीकरण करना है। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/North-2.jpg"><img fetchpriority="high" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/North-2.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-7003" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/North-2.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/North-2-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/North-2-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/North-2-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/North-2-1536x1026.jpg 1536w" sizes="(max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p>नया परिसर उन्नत सुविधाओं, बेहतर सुरक्षा और टिकाऊ डिज़ाइन सुविधाओं से सुसज्जित है, जो सरकारी अधिकारियों के लिए अधिक कुशल कार्य वातावरण सुनिश्चित करता है। उम्मीद है इस सप्ताह के अंत तक या अगले सप्ताह तक अपने नवनिर्मित अत्याधुनिक कार्यालय परिसर में स्थानांतरित हो जाएगा जो भारत की केंद्र सरकार के प्रशासनिक परिदृश्य में एक ऐतिहासिक बदलाव होगा।&#8221; </p>
<p><strong>सेंट्रल विस्टा परियोजना, भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य नई दिल्ली के प्रशासनिक केंद्र का पुनर्विकास करना है, जिसमें एक नए संसद भवन, केंद्रीय सचिवालय भवनों का निर्माण और राजपथ से कर्तव्य पथ तक का नवीनीकरण शामिल है। नए भवन को गृह मंत्रालय के अंतर्गत विभिन्न विभागों को समायोजित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिनमें आंतरिक सुरक्षा, सीमा प्रबंधन, जम्मू और कश्मीर मामले और आपदा प्रबंधन आदि शामिल हैं। अधिकारियों का मानना है कि केंद्रीकृत स्थान और आधुनिक बुनियादी ढांचा समन्वय, दक्षता और सेवा वितरण में सुधार करेगा।</strong></p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/North-4.jpg"><img decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/North-4.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-7004" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/North-4.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/North-4-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/North-4-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/North-4-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/North-4-1536x1026.jpg 1536w" sizes="(max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p>1911 में दिल्ली को ब्रिटिश भारतीय साम्राज्य की राजधानी बनाए जाने के बाद नई दिल्ली की योजना गंभीरता से शुरू हुई। लुटियंस को नगर नियोजन और वायसराय हाउस के निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई हर्बर्ट बेकर, जिन्होंने 1892-1912 तक दो दशकों तक दक्षिण अफ्रीका में प्रैक्टिस की थी, दूसरे नंबर के कमांडर के रूप में शामिल हुए। बेकर ने अगली सबसे महत्वपूर्ण इमारत, सचिवालय, का डिजाइन तैयार किया, जो वायसराय हाउस के अलावा रायसीना हिल पर स्थित एकमात्र इमारत थी। </p>
<p>दिल्ली नगर नियोजन समिति की स्थापना 1912 में वायसराय भवन, सचिवालय भवन जैसी प्रमुख इमारतों और नए शहर के सौंदर्य से जुड़े अन्य संरचनात्मक कार्यों की योजना, विकास और डिजाइन तैयार करने के लिए की गई थी। एडविन लुटियंस मार्च 1912 में इस समिति के सदस्य बने। इस परियोजना का ठेका सरदार बहादुर बसाखा सिंह संधू और सरदार बहादुर सर शोभा सिंह ने लिया था।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/North-8.jpg"><img decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/North-8.jpg" alt="" width="1814" height="1153" class="aligncenter size-full wp-image-7005" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/North-8.jpg 1814w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/North-8-300x191.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/North-8-1024x651.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/North-8-768x488.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/North-8-1536x976.jpg 1536w" sizes="(max-width: 1814px) 100vw, 1814px" /></a></p>
<p>भारत की राजधानी दिल्ली आने के बाद, 1912 में उत्तरी दिल्ली में कुछ ही महीनों में एक अस्थायी सचिवालय भवन का निर्माण किया गया। नई राजधानी के अधिकांश सरकारी कार्यालय पुरानी दिल्ली स्थित &#8216;पुराने सचिवालय&#8217; से यहाँ स्थानांतरित हो गए। कई कर्मचारियों को ब्रिटिश भारत के दूर-दराज के इलाकों, जिनमें बंगाल प्रेसीडेंसी और मद्रास प्रेसीडेंसी शामिल थे, से नई राजधानी में लाया गया था। इसके बाद, गोल मार्केट क्षेत्र के आसपास उनके लिए आवास विकसित किए गए। पुराने सचिवालय भवन में अब दिल्ली विधान सभा स्थित है। संसद भवन का निर्माण 1921 में शुरू हुआ था और भवन का उद्घाटन 1927 में हुआ था।</p>
<p>दिल्ली नगर नियोजन समिति ने एक खाका तैयार किया, जिसमें नई राजधानी को तीन मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया गया था। पहली श्रेणी में वे इमारतें शामिल थीं जो सरकार नए शहर के सरकार का मुख्यालय बनने से पहले उपलब्ध कराएगी, दूसरी श्रेणी में वे इमारतें शामिल थीं जिन्हें सरकार बाद में नए शहर में जोड़ सकती थी और तीसरी श्रेणी में वे इमारतें शामिल थीं जिनका निर्माण निजी एजेंसियों द्वारा किया जाना था। </p>
<p><strong>इसका उद्घाटन 1931 में हुआ था और इसमें राष्ट्रपति भवन, संसद भवन, उत्तर और दक्षिण ब्लॉक और अभिलेख कार्यालय (जिसे बाद में राष्ट्रीय अभिलेखागार नाम दिया गया) के साथ-साथ इंडिया गेट स्मारक और राजपथ के दोनों ओर स्थित नागरिक उद्यान शामिल थे। इस योजना को पारंपरिक शहरी नियोजन उपकरणों का उपयोग करके डिज़ाइन किया गया था, जिसमें एक मजबूत अक्ष, एक प्रमुख केंद्र बिंदु, महत्वपूर्ण नोड्स का निर्माण और एक निश्चित समापन बिंदु शामिल थे। उस समय, यह दुनिया में अपनी तरह की सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक थी, जिसकी कल्पना और डिज़ाइन भारत की भावना, प्रगति और वैश्विक महत्व को प्रतिबिंबित करने के लिए की गई थी।</strong></p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/North-7.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/North-7.jpg" alt="" width="1814" height="1153" class="aligncenter size-full wp-image-7006" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/North-7.jpg 1814w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/North-7-300x191.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/North-7-1024x651.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/North-7-768x488.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/North-7-1536x976.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1814px) 100vw, 1814px" /></a></p>
<p>सेंट्रल विस्टा के समग्र डिजाइन में भारतीय प्रभावों की झलक मिलती है। इसमें लाल और बेज बलुआ पत्थर का उपयोग शामिल था, जिसका उपयोग 13वीं शताब्दी से दिल्ली की स्मारकीय वास्तुकला के लिए किया जाता रहा है; सांची के महान स्तूप पर वायसराय हाउस के गुंबद की मॉडलिंग; सचिवालय ब्लॉकों के बीच स्थित डोमिनियन के स्तंभों के लिए प्राचीन भारतीय घंटा-शीर्ष; और भारतीय वास्तुकला की अनगिनत विशेषताएं &#8211; जालियां (छेदित पत्थर की स्क्रीन), छज्जा (उभरे हुए ओवरहैंग), छतरियां (स्तंभित गुंबद), और बहुत कुछ। </p>
<p>जब कार्यालय दोनों ब्लॉकों से हट जाएँगे, तो इन्हें एक संग्रहालय में बदल दिया जाएगा। &#8216;युगे युगीन भारत राष्ट्रीय संग्रहालय&#8217; नामक इस संग्रहालय में अनुमानित 25,000-30,000 कलाकृतियाँ प्रदर्शित की जाएँगी और यह दुनिया के सबसे बड़े संग्रहालयों में से एक होने की संभावना है। ज्ञातव्य हो कि 17 जुलाई को, गृह मंत्रालय द्वारा हिंदी में जारी एक आदेश में कहा गया था कि नॉर्थ ब्लॉक स्थित सभी कार्यालयों को सेंट्रल विस्टा-3 में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और इस सुचारू स्थानांतरण के लिए नोडल अधिकारियों को नियुक्त किया गया है।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Picture-285-scaled.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Picture-285-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1696" class="aligncenter size-full wp-image-7007" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Picture-285-scaled.jpg 2560w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Picture-285-300x199.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Picture-285-1024x678.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Picture-285-768x509.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Picture-285-1536x1017.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/Picture-285-2048x1356.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></a></p>
<p>पहले तीन कार्यालय भवन लगभग पूरे हो चुके हैं। गृह मंत्रालय को नए परिसर में 347 कमरे आवंटित किए गए हैं। आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के अनुसार, &#8220;स्वतंत्रता के बाद भारत के लोगों ने इन शाही इमारतों पर निर्विवाद रूप से भारत सरकार की सीट होने का दावा किया था। सभी केंद्र सरकार के कार्यालयों को सीसीएस भवनों में स्थानांतरित करने से विभिन्न मंत्रालयों/विभागों या उनके संबद्ध/अधीनस्थ कार्यालयों को किराए के आवास खाली करने में मदद मिलेगी, जिससे प्रति वर्ष लगभग ₹1,000 करोड़ की बचत होगी।&#8221;</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/nation/home-ministry-begings-moving-out">​गृह मंत्रालय के सभी निर्जीव ईंट, पत्थर, टेबल, कुर्सी, खम्भे, खिड़कियां &#8216;बिलख रहे&#8217; हैं, भवन छोड़कर &#8216;सजीव&#8217; जा रहे हैं एक नए भवन में</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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