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	<title>security Archives - आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</title>
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	<description>आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</description>
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		<title>सुब्रत रॉय सहारा की मृत्यु के 15 महीने बाद तिहाड़ के पूर्व अधिकारी का &#8216;बिस्फोटक&#8217; दावा, कारावास में &#8216;एयर होस्टेस&#8217; आती थी, केजरीवाल जानते थे, लेकिन &#8230;.</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/15-months-after-subrata-roy-saharas-death-former-tihar-official-makes-explosive-claim</link>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 28 Feb 2025 13:22:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
		<category><![CDATA[arvind kejrival]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली : ईस्ट लंदन विश्वविद्यालय से बिजनेस लीडरशिप में डॉक्टरेट की उपाधि से अलंकृत​ थे सुब्रत रॉय &#8216;सहारा&#8217;।​ भारत ही नहीं, विश्व के कोने-कोने में बसे कोई 11+ लाख बेरोजगार लोगों का नियोक्ता थे सुब्रत रॉय। भारतीय क्रिकेट को दुनिया में शिखर पर ले जाने का श्रेय था उन्हें। &#8216;भारत भावना&#8217; के माध्यम से [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/15-months-after-subrata-roy-saharas-death-former-tihar-official-makes-explosive-claim">सुब्रत रॉय सहारा की मृत्यु के 15 महीने बाद तिहाड़ के पूर्व अधिकारी का &#8216;बिस्फोटक&#8217; दावा, कारावास में &#8216;एयर होस्टेस&#8217; आती थी, केजरीवाल जानते थे, लेकिन &#8230;.</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली :  ईस्ट लंदन विश्वविद्यालय से बिजनेस लीडरशिप में डॉक्टरेट की उपाधि से अलंकृत​ थे सुब्रत रॉय &#8216;सहारा&#8217;।​ भारत ही नहीं, विश्व के कोने-कोने में बसे कोई 11+ लाख बेरोजगार लोगों का नियोक्ता थे सुब्रत रॉय। भारतीय क्रिकेट को दुनिया में शिखर पर ले जाने का श्रेय था उन्हें। &#8216;भारत भावना&#8217; के माध्यम से राष्ट्र भक्ति और राष्ट्रीय चेतना जगाने वाले व्यक्ति भी थे सुब्रत रॉय। अपने जीवन काल में प्रदेशों की सरकारी विभागों में कार्य करने वाले चपरासी से लेकर अधिकारी, पदाधिकारी तक, विधान सभाओं, विधान परिषदों, लोकसभा और राज्य सभा में बैठने वाले सम्मानित विधायकों और सांसदों में (अपवाद छोड़कर) बिरले ही कोई व्यक्ति थे जो सुब्रत रॉय से &#8216;उपकृत&#8217; नहीं थे। </strong></p>
<p>लेकिन​ जब समय करवट लिया और सुब्रत रॉय का &#8216;दुर्दिन&#8217; आया, तो सभी लोग कन्धा झुका दिए​, यह भी उतना ही सच है। यहाँ तक कि भय वश अपना पुत्र​ द्वय भी उन्हें मुखाग्नि नहीं दे पाया। भारत के गाँव के खेतों से देश के संसद तक​, अधिकारी से पदाधिकारी तक, नेता से अभिनेता तक, जो सहारा के चौखट पर ​&#8217;सहारा​&#8217; मांगने पहुँचते थे, जीवन के अंतिम दिन में 75-वर्षीय वृद्ध को अकेला छोड़ दिया &#8211; अंतिम सांस के लिए। ​इतना ही नहीं, कोई चोर कहा, कोई बेईमान कहा, कोई भ्रष्ट कहा, कोई वुमेनाइजर शब्द से ​भी अलंकृत किया। लेकिन ​कोई भी इस बात को कोई अस्वीकार नहीं कर सकता कि सुब्रत रॉय के पास बहुत पैसे थे (चोरी, बेईमानी से ही सही) और अपने जीवन काल में उस पैसे से करोड़ों लोग लाभान्वित हुए​ जो आज भी सांस ले रहे हैं।  </p>
<p>अपनी मृत्यु से दस वर्ष पूर्व जब सहारा के मुखिया के साथ सहारा के 11 लाख कर्मचारी 52 सेकेंड्स में समाप्त होने वाले राष्ट्रगान को 74 सेकेंड्स तक गाते रहे कीर्तिमान स्थापित करने के लिए​, उस दिन यह स्पष्ट हो गया था कि उनकी नज़रों में राष्ट्रगान का क्या मोल है? साल 2013 में सहारा के मुखिया की अगुआई में &#8216;भारत भावना दिवस&#8217; मनाया गया था। उस समय सहारा के मुखिया मंच से कहे कि यह एक विश्व रिकॉर्ड होगा। उनके अनुसार मैदान में उपस्थित कर्मचारी ​के साथ-साथ सहारा के दफ्तरों में उपस्थित ​सभी कर्मचारी एक साथ राष्ट्रगान गाकर विश्व कीर्तिमान स्थापित करेंगे। ​</p>
<p><strong>सुब्रत रॉय की मृत्यु के कोई पंद्रह महीने बाद एक तिहाड़ जेल के पूर्व जनसम्पर्क अधिकारी सुनील कुमार गुप्ता एक समाचार एजेंसी से बात करते हुए एक विस्फोटक दावा किया है कि सहारा एयरलाइंस की एयर होस्टेस जेल में सुब्रत रॉय के पास आती थीं और घंटों उनके साथ रहती थीं। साथ​ ही, कारावास के अंदर वे जो भी करते थे, उसकी जानकारी तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के साथ-साथ कई लोगों को थी, लेकिन वह कुछ नहीं किये। विगत दिनों नेटफ्लिक्स पर &#8216;ब्लैक वारंट&#8217; श्रृंखला के असली हीरो ​सुनील कुमार गुप्ता की तिहाड़ जेल की यात्रा 1981 में शुरू हुई जब उन्होंने खाकी वर्दी पहनने के अपने सपने को पूरा करने के लिए भारतीय रेलवे की एक स्थिर नौकरी छोड़ दी। उनकी मामूली पृष्ठभूमि और शारीरिक रूप से मजबूत न होने के कारण, जैसा कि श्रृंखला में दिखाया गया है, उन्हें भारत की सबसे कुख्यात जेल में जेलर बनने से नहीं रोका, हालांकि उस समय जेल अधिकारियों के लिए उनके गुणों पर पारंपरिक रूप से जोर नहीं दिया जाता था।</strong></p>
<figure id="attachment_6205" aria-describedby="caption-attachment-6205" style="width: 1280px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/sunil.jpg"><img fetchpriority="high" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/sunil.jpg" alt="" width="1280" height="720" class="size-full wp-image-6205" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/sunil.jpg 1280w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/sunil-300x169.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/sunil-1024x576.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/sunil-768x432.jpg 768w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6205" class="wp-caption-text">​सुनील कुमार गुप्ता (दाहिने) और नेटफ्लिक्स का हीरो बाएं</figcaption></figure>
<p>​उन्होंने मंच से वहां उपस्थित कर्मचारियों​ को &#8216;भावनात्मक भाषण&#8217; भी ​दिया। इस भारत भावना दिवस का प्रचार-प्रसार संवाद के विभिन्न माध्यमों में किया गया। उसी वर्ष बीबीसी विश्व सेवा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर एक सर्वेक्षण किया था। उस सर्वेक्षण में उस समय तक के सबसे ​प्रसिद्द दस गीतों का चयन करने के लिये विश्व के तक़रीबन 7000 गीतों को चुना गया था। इस सर्वेक्षण में विश्व के देशों के लोगों ने मतदान किया था। उस मतदान के बाद जो दस गीत चयनित हुए थे, दूसरे स्थान पर भारत का &#8216;राष्ट्रगीत&#8217; था। </p>
<blockquote><p>सहारा द्वारा आयोजित उस &#8216;भारत भावना दिवस&#8217; में लोगों ने बहुत उत्साह के साथ राष्ट्रगान गाये थे। लेकिन गाते समय राष्ट्रगान गाने के लिए जो अनुशासित समय सीमा निर्धारित है, उसे नजरअंदाज करते निकलते गए। जिस राष्ट्रगान को गाने के लिए समय सीमा 52 सेकेंड्स है, सहारा के सम्मानित मुखिया के साथ-साथ सहारा के लोग, कर्मचारी 74 सेकेंड्स पहुँच गए। वह तो अन्तिम शब्द &#8216;जय हे !!&#8221; हो गया, अन्यथा वे रुकने का नाम नहीं लेते। उस राष्ट्रगान से विश्व कीर्तिमान स्थापित कर पाया सहारा अथवा नहीं, यह तो कीर्तिमान की गणना करने वाले सम्मानित लोग ही बताएंगे, न तो &#8216;सेबी&#8217; डरा, न भारत सरकार के वित्तीय अन्वेषण विभाग, न अधिकारी, न न्यायालय।</p></blockquote>
<p>​<br />
<strong>मृत्योपरांत जो सुब्रत रॉय जीवन पर्यन्त दूसरों को, संस्था में कार्य करने वाले लोगों को, छोटे-बड़े सभी को &#8216;संस्कार&#8217;, चाहे पारिवारिक हो या सामाजिक, का पाठ पढ़ाये, ज्ञान बाँटें, लेकिन अपने दो-दो पुत्रों के होते हुए भी मरणोपरांत उनके पार्थिव शरीर को पुत्रों के हाथों मुखाग्नि नसीब नहीं हुआ। संस्कार देने-लेने में कहाँ चूक हुई ? मुंबई के एक निजी अस्पताल में लंबे समय से उनका इलाज चल रहा था। उस समय कंपनी के एक बयान में कहा गया है कि उनकी मृत्यु कार्डियोरेस्पिरेटरी अरेस्ट के कारण हुई। वे उच्च रक्तचाप और मधुमेह रोग से लंबे समय से जूझ रहे थे। तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें रविवार को मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।</strong></p>
<p>​उसी दौर में, कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया &#8216;सेबी&#8217; के अकाउंट में पड़ी 25163 करोड़ रुपये। &#8216;सेबी&#8217; ​कहा कि उनकी मृत्यु से जारी मुकदमों/अन्वेषण पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। सहारा की स्थापना 1978 में हुयी। यह कहा जाता है कि आज सहारा इंडिया की कुल शुद्ध संपति 2,59,900 करोड़ से भी अधिक है। कोई आठ वर्ष पहले 2015 में फोर्ब्स ने लिखा था &#8216;सुब्रत राय की नेटवर्थ करीब 10 अरब डॉलर&#8217; है। एक समय टाइम पत्रिका ने भारतीय रेलवे के बाद भारत में दूसरे सबसे बड़े नियोक्ता के रूप में प्रतिष्ठित किया था ​सहारा इंडिया को जिसमें बताया गया था कि लगभग 1.2 मिलियन लोग सहारा परिवार के साथ जुड़े हैं। सहारा समूह के पास 9 करोड़ से अधिक निवेशक हैं। </p>
<p>वैसे सुब्रत रॉय का जीवन कई उपलब्धियों के साथ साथ विवादों से भी भरा रहा। लोगों ने सहारा कंपनी की कई स्कीमों में अपना पैसा लगाया था, लेकिन लोगों के पैसों का भुगतान नहीं किया और मामला पटना हाईकोर्ट में चला गया। सहारा इंडिया के खिलाफ पटना हाईकोर्ट में मामला चल रहा था, लेकिन जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो सहारा प्रमुख को इस मामले में कोर्ट से राहत मिल गई। वे जमानत पर थे। सुब्रत रॉय को कई पुरस्कार और सम्मान प्राप्त भी मिले थे । उन्हें ईस्ट लंदन विश्वविद्यालय से बिजनेस लीडरशिप में डॉक्टरेट की उपाधि से भी अलंकृत किये गए थे।​ </p>
<p><strong>​बहरहाल, उनकी मृत्यु वर्ष में ही केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह केन्द्रीय पंजीयक – सहारा रिफंड पोर्टल का शुभारंभ किया। इस पोर्टल को सहारा समूह की 4 सहकारी समितियों – सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड, सहारायन यूनिवर्सल मल्टीपर्पज सोसाइटी लिमिटेड, हमारा इंडिया क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड और स्टार्स मल्टीपर्पज कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड के प्रामाणिक जमाकर्ताओं द्वारा दावे प्रस्तुत करने के लिए विकसित किया गया। अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि इस कार्यक्रम का महत्व इस दृष्टि से है कि जिन लोगों की गाढ़ी कमाई इन 4 सहकारी समितियों में फंसी है, उनके प्रति किसी का ध्यान नहीं गया। ऐसे मामलों में अक्सर मल्टी-ऐजेंसी सीज़र हो जाता है क्योंकि कोई ऐजेंसी निवेशक के बारे में नहीं सोचती। </strong></p>
<p>​शाह ने यह भी कहा कि इसके कारण कोऑपरेटिव सोसाटीज़ के प्रति बहुत बड़ी असुरक्षा और अविश्वास की भावना पैदा हो जाती है। कई बार घपले-घोटाले के आरोप लगते हैं और जो लोग इनमें निवेश करते हैं, उनकी पूंजी फंस जाती है, जैसे सहारा का उदाहरण सबके सामने है। कई सालों तक सुप्रीम कोर्ट में केस चला, ऐजेंसियों ने इनकी संपत्तियां और खाते सील कर दिए, और, ऐसा होने पर कोऑपरेटिव सोसायटीज़ की विश्वसनीयता समाप्त हो जाती है।​ शाह के अनुसार, पारदर्शी तरीके से निवेशकों को 5,000 करोड़ रूपए की राशि लौटाने की शुरूआत हो रही ​है। शाह ने कहा कि लगभग 1.78 करोड़ ऐसे छोटे निवेशकों, जिनका 30000 रूपए तक का पैसा फंसा है, को अपना पैसा वापस मिलेगा, ये एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।</p>
<p>​ज्ञातव्य हो कि माननीय उच्चतम न्यायालय ने 29 मार्च, 2023 के अपने आदेश में निर्देश दिया था कि सहारा समूह की सहकारी समितियों के प्रामाणिक जमाकर्ताओं के वैध बकाए के भुगतान के लिए “सहारा-सेबी रिफंड खाते” से 5000 करोड़ रुपये सहकारी समितियों के केन्द्रीय रजिस्ट्रार (सीआरसीएस) को हस्तांतरित किए जाएं। भुगतान की पूरी प्रक्रिया की निगरानी और इसका पर्यवेक्षण माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार माननीय सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर. सुभाष रेड्डी कर रहे हैं जिसमें उनकी सहायता के लिए वकील श्री गौरव अग्रवाल (Amicus Curiae) को नियुक्त किया गया है। इन चारों समितियों से संबंधित रिफंड प्रक्रिया में सहायता के लिए 4 वरिष्ठ अधिकारियों को ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (Officers on Special Duty) के रूप में नियुक्त किया गया है।</p>
<blockquote><p>​बहरहाल, सुब्रत रॉय की मृत्यु के कोई पंद्रह महीने बाद एक तिहाड़ जेल के पूर्व जनसम्पर्क अधिकारी सुनील कुमार गुप्ता एक समाचार एजेंसी से बात करते हुए एक विस्फोटक दावा किया है कि सहारा एयरलाइंस की एयर होस्टेस जेल में सुब्रत रॉय के पास आती थीं और घंटों उनके साथ रहती थीं। यह सहारा समूह के दिवंगत संस्थापक को जेल में रहने के दौरान दी जाने वाली कई सुविधाओं में से एक थी। एएनआई को दिए गए एक साक्षात्कार में गुप्ता ने दावा किया कि दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को इन सबकी जानकारी थी, लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। </p></blockquote>
<p>सुब्रत रॉय के साथ अपने अनुभव को याद करते हुए गुप्ता ने कहा कि जब रॉय जेल में थे, तो उन्हें पहले एक नियमित जेल में रखा गया था। लेकिन उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा की आवश्यकता थी ताकि वे अपने होटलों के खरीदारों से बातचीत कर सकें और उसके बाद वे उधार दाताओं को पैसे वापस कर सकें। गुप्ता ने कहा, &#8220;सुप्रीम कोर्ट के निर्देश में कहा गया था कि सब कुछ कानूनी तरीके से किया जाना चाहिए। लेकिन मैंने देखा कि बहुत सी अवैध चीजें हो रही थीं&#8230;इससे पहले, दिल्ली हाई कोर्ट ने मुझे बुलाया था और उसने कहा था कि जेल में रिश्वतखोरी और जबरन वसूली की कई शिकायतें हैं।&#8221; </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/tihar-jail-1200.jpg"><img decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/tihar-jail-1200.jpg" alt="" width="1200" height="667" class="aligncenter size-full wp-image-6206" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/tihar-jail-1200.jpg 1200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/tihar-jail-1200-300x167.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/tihar-jail-1200-1024x569.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/tihar-jail-1200-768x427.jpg 768w" sizes="(max-width: 1200px) 100vw, 1200px" /></a></p>
<p><strong>गुप्ता के अनुसार, &#8220;उन्होंने डीजी जेल की अध्यक्षता वाली बैठकों में इस मुद्दे को उठाया था, लेकिन डीजी को लगा कि गुप्ता उनके खिलाफ शिकायत कर रहे हैं। फिर गुप्ता ने केजरीवाल से संपर्क किया और उन्हें उन सुविधाओं के बारे में बताया जो उन्हें लगता था कि उन्हें अवैध रूप से दी जा रही हैं।&#8221; पूर्व जेल अधिकारी ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर वीवीआईपी को बचाने का आरोप भी लगाया। गुप्ता के अनुसार, सहारा प्रमुख की सेल में शराब की बोतलें भी मिली थीं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने इस बारे में तत्कालीन सीएम अरविंद केजरीवाल से शिकायत की थी। लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की।</strong></p>
<p>सुब्रत रॉय को तिहाड़ जेल में दी गई सुविधाओं का खुलासा करते हुए सुनील गुप्ता ने कहा, &#8220;सुब्रत रॉय को जेल में नहीं रखा गया, उन्हें कोर्ट परिसर में रखा गया था। उन्हें अपने निवेशकों का काफी पैसा लौटाना था। सुब्रत रॉय ने कोर्ट से कहा था कि उन्हें अपनी संपत्तियां बेचनी होंगी और उनके ज्यादातर खरीदार यूरोप या पश्चिमी देशों में हैं। सुब्रत रॉय ने कोर्ट से कहा था कि उन्हें ऐसी जगह रखा जाए जहां मैं अपने खरीदारों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात कर सकूं।&#8221;</p>
<p>उन्होंने कहा कि सुब्रत रॉय को रात में परिसर में बंद कर दिया जाता ​था। जबकि अन्य कैदियों को रात होते ही अपने सेल में बंद कर दिया जाता ​है। सुब्रत रॉय ने कहा था कि उन्हें रात में कोर्ट परिसर में बाहर से बंद रखा ​जाए। कोर्ट ने उनकी मांग मान ​ली थी। इसलिए सुब्रत रॉय को बंद नहीं किया ​गया। उन्हें खाने-पीने की पूरी सुविधा दी ​गई। कोर्ट ने सुब्रत रॉय को एक निजी सचिव रखने की भी अनुमति दी ​थी। सुब्रत रॉय ने एक महिला सचिव को अपना सचिव बना रखा ​था। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने सुब्रत रॉय को सचिवालय की सुविधाओं का लाभ उठाने की अनुमति दी ​थी। लेकिन अब वे एयर होस्टेस बुला रहे ​थे। </p>
<p><strong>सुनील गुप्ता ने कहा कि यह करीब छह महीने तक चलता रहा, लड़कियां आती ​रहीं। गुप्ता ने कहा, &#8220;मैं परेशान था और केजरीवाल के पास गया। मुझे इसकी कीमत चुकानी पड़ी। रॉय के खिलाफ कुछ नहीं किया गया और वे सुविधाओं का आनंद लेते रहे। उन्होंने कहा कि उन पर हमले भी हुए। गुप्ता ने कहा, &#8220;जब मैं सेवानिवृत्त हो रहा था, तो मुझे अनियमितताओं के संबंध में 15 पन्नों की चार्जशीट दी गई। चार-पांच साल बाद मुझे दोषमुक्त कर दिया गया, लेकिन मैं उन पांच सालों में बहुत परेशान रहा।&#8221; </strong></p>
<p>उसी हफ्ते मेरे खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी गई। भारत में ऐसा होता है। यह चार्जशीट वित्तीय अनियमितताओं के लिए थी।&#8221; सुब्रत रॉय सहारा मार्च 2014 से मई 2016 तक तिहाड़ जेल में रहे। निवेशकों के करीब 24,000 करोड़ रुपये न लौटाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उन्हें गिरफ्तार किया गया था। &#8220;अरविंद केजरीवाल ने मुझसे पूछा कि क्या मैं इसका वीडियो शूट कर सकता हूं। मैंने उनसे कहा कि यह मेरे लिए सही नहीं होगा और वह यहां आकर खुद इसकी जांच कर सकते हैं। फिर उन्होंने कहा कि डीजी जेल एक आईपीएस अधिकारी हैं जो केंद्र सरकार के अधीन आते हैं और हमें नहीं पता कि हम उनके बारे में कुछ कर सकते हैं या नहीं​।​&#8221;</p>
<p>पूर्व पीआरओ ने दावा किया कि केजरीवाल ने शुरू में छापे में अवैध गतिविधियों का पता चलने पर कार्रवाई करने पर सहमति जताई थी, लेकिन बाद में पीछे हट गए। उन्होंने आरोप लगाया, &#8220;दो दिन बाद, डीजी ने मुझसे कहा कि मेरे (तत्कालीन सीएम) से संपर्क करना अच्छा नहीं था, और मैंने एक &#8216;गरीब आदमी&#8217; को फंसाया&#8230; लेकिन इस बारे में कुछ नहीं किया गया।&#8221; उन्होंने आगे दावा किया कि जेल मंत्री ने जेल अधिकारियों को भविष्य में गलत व्यवहार के खिलाफ चेतावनी दी, &#8220;आखिरकार, कुछ भी ठोस नहीं किया गया। उन्होंने (सुब्रत रॉय सहारा) सुविधाओं का आनंद लेना जारी रखा। जेल प्रशासन उनके सामने झुक गया।&#8221; तिहाड़ जेल के पूर्व अधिकारी ने यह भी आरोप लगाया कि इन चिंताओं को उठाने के लिए उन्हें परेशान किया गया। उन्होंने कहा कि उन्होंने तत्कालीन उपराज्यपाल से संपर्क किया, जिन्होंने उन्हें अपने सचिव के पास जाने का निर्देश दिया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। </p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/15-months-after-subrata-roy-saharas-death-former-tihar-official-makes-explosive-claim">सुब्रत रॉय सहारा की मृत्यु के 15 महीने बाद तिहाड़ के पूर्व अधिकारी का &#8216;बिस्फोटक&#8217; दावा, कारावास में &#8216;एयर होस्टेस&#8217; आती थी, केजरीवाल जानते थे, लेकिन &#8230;.</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>महिला सुरक्षाकर्मियों को #मासिकधर्म के समय भी &#8216;अवकाश&#8217; नहीं, सेनेटरी पैड नहीं &#8211; लेकिन &#8216;बेटी बचाओ का नारा&#8217;</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/chutkulanands-letter/there-is-no-facility-for-women-security-personnel-even-during-menstruation</link>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 29 Sep 2023 06:22:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चुटकुलानन्द की चिठ्ठी]]></category>
		<category><![CDATA[administration]]></category>
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		<category><![CDATA[justice]]></category>
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		<category><![CDATA[social]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>बाबूजी कहते थे कि &#8220;ठेस तभी लगेगी, जब चलोगे। गिरोगे तब, जब दौड़ोगे। कभी देखा हैं बैठे-बैठे, सोये-सोये ठेस लगते, गिरते किसी को?&#8221; बाबूजी का यह शब्द मुझ जैसा अज्ञानी के लिए अनमोल है। धनाढ्य या फिर वे जिन्हें बपौती में संपत्ति मिलती है, मेरे बाबूजी की बात नहीं समझेंगे। अगर समझते तो दरभंगा के [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/chutkulanands-letter/there-is-no-facility-for-women-security-personnel-even-during-menstruation">महिला सुरक्षाकर्मियों को #मासिकधर्म के समय भी &#8216;अवकाश&#8217; नहीं, सेनेटरी पैड नहीं &#8211; लेकिन &#8216;बेटी बचाओ का नारा&#8217;</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>बाबूजी कहते थे कि &#8220;ठेस तभी लगेगी, जब चलोगे। गिरोगे तब, जब दौड़ोगे। कभी देखा हैं बैठे-बैठे, सोये-सोये ठेस लगते, गिरते किसी को?&#8221;</strong></p>
<p>बाबूजी का यह शब्द मुझ जैसा अज्ञानी के लिए अनमोल है। धनाढ्य या फिर वे जिन्हें बपौती में संपत्ति मिलती है, मेरे बाबूजी की बात नहीं समझेंगे। अगर समझते तो दरभंगा के महाराजाधिराज डॉ. सर कामेश्वर सिंह की संपत्ति और उनका नामोनिशान इतनी जल्दी मिट्टी में नहीं मिल जाती। </p>
<p>बाबूजी को यह बात कहे कोई चार दशक से अधिक हो गया और उन्हें अनंत यात्रा पर निकले तीन दशक एक साल। आज ही के दिन (आज 29 सितम्बर) है, सन 2010 में माँ, बाबूजी के पास पहुँचने के लिए अनंत यात्रा पर निकली थी। </p>
<p>लेकिन आज अचानक बाबूजी का यह अनमोल शब्द उस समय याद आया जब महाराजाधिराज डॉ. सर कामेश्वर सिंह के नाम को, उनकी गरिमा को अपने सामर्थ्यभर यथासाध्य जीवित रखने के लिए आर्यावर्तइण्डियननेशन(डॉट)कॉम और इसी वेबसाइट का यूट्यूब चैनेल #अख़बारवाला001 के लिए एक कहानी के क्रम में दक्षिण दिल्ली के क़ुतुब मीनार स्थित दिल्ली सल्तनत का वास्तविक संस्थापक और शासक (1210-1236) इल्तुतमिश के दरगाह पर खड़ा था। </p>
<p>इल्तुतमिश का यह दरगाह कोई 787 वर्ष पुराना है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, भारत सरकार का संस्कृति/पर्यटन मंत्रालय के अधीन है। इससे भी बड़ी बात यह यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साईट की सूची में भी अंकित है। </p>
<p>आश्चर्य तो यह है कि दरभंगा के महाराजाओं द्वारा निर्मित भवनों, किलों और दीवारों की हालत तो सौ साल आते-आते दम तोड़ दिया। आज इल्तुतमिश का दरगाह भले दो-फांक में टूट रहा है, लेकिन आज भी यह इतिहास जीवित है। और यही कारण है कि विश्व के लगभग सभी देशों के लोग इस ऐतिहासिक स्थल को जीते-जी देखने आते हैं। </p>
<p>यह अलग बात है कि भारत के स्कूली पाठ्यक्रमों में इतिहास के बहुत सारे पन्ने राजनीतिक नेताओं और सरकारी अधिकारियों, पदाधिकारियों, चापलूसों, चाटुकारों के हाथों मृत्यु को प्राप्त किया और कर रहा है। लेकिन दरभंगा के महाराजाधिराज का किला या तो अपना अस्तित्व समाप्त कर दिया है या फिर सहस्त्र फांक हो गया है। बाबूजी कहते थे &#8216;सब प्रारब्ध का खेल है।&#8217;</p>
<p>पिछले ही दिन तो देश के लोग भारत का 76 वां जश्ने आज़ादी मनाये हैं। क़ुतुब मीनार के परिसर में एक कोने में बैठकर सोच रहा था कि आज़ाद भारत में जब भी किसी राजनेता की मृत्यु हुई हैं तो दूसरे राजनेता को उनके राजनीतिक जीवन में इजाफा हुआ है &#8211; इतिहास गवाह है। इसी विषय पर कहानी कर रहा था। इतिहास कहता है कि यह स्थान विश्व को &#8216;स्लेवरी&#8217; और &#8216;स्लेव डाइनेस्टी&#8217; का जीवंत दृष्टान्त देता है। </p>
<p><strong>दिल्ली सल्तनत में जितने भी ऐतिहासिक स्थल हैं अधिकांशतः आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इण्डिया के अधीन हैं और उन परिसरों में बिहार के पूर्व राज्य सभा के सांसद श्री आर के सिन्हा के स्वामित्व वाला SIS सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। वैसे देश में करीब छः मिलियन निजी क्षेत्र में काम करने वाले सुरक्षाकर्मी हैं। आम तौर पर इन स्थानों पर तैनात सुरक्षा कर्मियों को यह कान में फूंक दिया गया है कि मोबाईल फोन/कैमरा से तस्वीर ले सकते हैं/वीडियो भी बना सकते हैं। लेकिन उसमें आधा इंच का भी माइक नहीं लगा सकते क्योंकि यह गैर क़ानूनी है। परिसर में किसी भी प्रकार से अपनी बात रिकार्ड नहीं कर सकते, गैर क़ानूनी है। खैर !!! &#8216;कानून&#8217; का तो हम बहुत &#8216;स्वागत&#8217; करते हैं। </strong></p>
<p>समझ में नहीं आ रहा था की देश को आज़ाद हुए 76 वर्ष हो गए और एक स्वतंत्र देश का नागरिक होने के नाते कोई 787 वर्ष पूर्व के इस परिसर में जो स्लेवरी का प्रतिक रहा है, आज भी आज़ादी का कोई मोल नहीं है। तभी सिन्हा साहब के कंपनी के SIS सुरक्षाकर्मी वहां उपस्थित हुए। उनका कहना था कि &#8216;यह आदेश है और वे नौकरी करते हैं।&#8217; </p>
<p>मैं तो ठहरा रिपोर्टर, और विगत दिनों ही सुरक्षाकर्मियों की दशा पर कहानी भी किया था &#8216;कर्तव्य पथ&#8217; से। वहां उपस्थित सुरक्षा कर्मी से पूछे कि क्या आपको 30 दिनों की तनख्वाह मिलती है या 26 दिनों की?</p>
<p><strong>मेरी बात सुनते ही वे अपना गर्दन नीचे कर 26 दिनों की स्वीकृति दिए और &#8216;स्लेव डाइनेस्टी&#8217; के समय जो मिट्टी-पत्थर इस परिसर में फेके गए थे, इसके निर्माण के समय, उसे निहारते कहते हैं: &#8217;26 दिन का ही मिलता है सर। कोई आवाज भी नहीं उठा सकता है। बोलने पर नौकरी चली जाएगी। यह पूछ भी नहीं सकते कि सरकार कम्पनी को एक सुरक्षाकर्मी के लिए कितना पैसा देती है? हमलोगों से कपड़ा जूता टोपी का भी पैसा लेती है कंपनी। हमलोगों को कोई छुट्टी नहीं। बीमार पड़ने पर दवा-दारू के लिए कोई भी सुविधा नहीं है। माँ-बाबूजी अगर मर भी जायेंगे तो तन्खाह काटकर ही उनका संस्कार करने जाना होगा।&#8221;</strong></p>
<p>76-वर्ष आज़ादी के बाद आज दिल्ली सल्तनत ही नहीं, देश में कोई छः लाख करोड़ वाला निजी क्षेत्र का सुरक्षा व्यवस्था &#8216;स्लेवरी&#8217; और &#8216;स्लेव डाइनेस्टी&#8217; का जीता-जागता दृष्टान्त हैं। </p>
<p>वैसे भारतीय संविधान की धारा 498 के अनुसार पत्नी को भी घरेलू हिंसा (पति के विरुद्ध भी) के खिलाफ पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करने का हक है। किसी भी महिला आरोपी को सूर्यास्त यानी शाम 6 बजे के बाद या सूर्योदय यानि सुबह 6 बजे से पहले गिरफ्तार किया जाता है तो वह भी कानून के खिलाफ है। धारा 160 के अनुसार अगर किसी महिला से पूछताछ भी करनी है तो उसके लिए एक महिला कांस्टेबल या उस महिला के परिवार के सदस्यों की मौजूदगी होना जरूरी है। इतना ही नहीं, अगर किसी महिला का उसके ऑफिस में या किसी भी कार्यस्थल पर शारीरिक उत्पीड़न या यौन उत्पीड़न किया जाता है तो उत्पीड़न करने वाले आरोपी के खिलाफ महिला शिकायत दर्ज कर सकती है। </p>
<p>इतना ही नहीं, अब तो लोकसभा और राज्य सभा भी महिला आरक्षण विधेयक 2023 (128वाँ संवैधानिक संशोधन विधेयक) यानी नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित कर दिया। यह विधेयक लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिये एक-तिहाई सीटें आरक्षित करता है। लेकिन यह 2024 के लोकसभा चुनाव में लागू नहीं होगा। संविधान (एक सौ अट्ठाईसवां) संशोधन विधेयक, 2023 को विधेयक के पारित होने के बाद आयोजित नवीनतम जनगणना के आंकड़ों का उपयोग करके, परिसीमन अभ्यास पूरा होने के बाद ही लागू किया जा सकता है। </p>
<p>अगला परिसीमन अभ्यास, या निर्वाचन क्षेत्र की सीमाओं का पुनर्निर्धारण, 2026 में होने वाला है। प्रभावी रूप से, इसका मतलब है कि लोकसभा में महिलाओं के कोटा का जल्द से जल्द कार्यान्वयन अगले साल के चुनावों के बजाय 2029 के आम चुनाव में हो सकता है। यानी &#8216;सैद्धांतिक रूप से 2029 चुनाव का आईना दिखा दिया गया है। वैसे भी महिला मतदाता भारत में कम थोड़े हैं। </p>
<p>इसी सोच-विचार में था ही कि वहां एक महिला सुरक्षाकर्मी दिखीं। वे भी हाँ-में-हाँ मिला रही थीं। उनके चेहरे पर भी उदासी थी। यह देखते मैं एक प्रश्न उनसे किया और पूछा: &#8220;मोहतरमा एक प्रश्न पूछें आपसे? </p>
<p>वे सहर्ष स्वीकारते हामी भरीं। </p>
<p><strong>मैंने पूछा: &#8220;क्या जब उन्हें माहवारी का समय होता है तो उस कठिन पांच दिनों में कंपनी के तरफ से कोई सुविधा उपलब्ध है अथवा नहीं है? मसलन &#8216;छुट्टी की व्यवस्था, जहाँ आप काम करती हैं वहां सेनेटरी पैड की व्यवस्था? या इस परिसर में आम महिला पर्यटकों के लिए सेनेटरी पैड की व्यवस्था?&#8221; </strong></p>
<p>मेरा प्रश्न सुनते ही उनका चेहरा लाल हो गया। मुझे उम्मीद हैं ऐसी प्रश्न कोई पुरुष पत्रकार नहीं करते होंगे। वजह भी था कि पिछले दिनों जब &#8216;माहवारी&#8217; पर एक कहानी कर रहा था तो कनॉट प्लेस में कुछ नवयुवतियां प्रश्नों को सुनकर &#8216;तिलमिलाने के जगह फक्र से कहीं कि महिलाएं स्वयं अपनी समस्याओं को समाप्त करने में आगे नहीं आती हैं। यह दुखद है। </p>
<p>SIS की महिला सुरक्षाकर्मी 787 साल पुराने &#8216;स्लेव डाइनेस्टी&#8217; के प्रतिक चिन्ह के सामने खड़ी थीं और आज़ाद भारत में विधि-विधानों के साथ-साथ भारत के तथाकथित &#8216;संभ्रांतों&#8217;, &#8216;व्यापारियों&#8217;, व्यवसायिओं&#8217;, &#8216;नेताओं&#8217;, &#8216;अभिनेताओं&#8217; का चेहरा दिख रहा था। </p>
<p>तभी मोबाईल पर घंटी बजी। नंबर अनजान था। </p>
<p>हेल्लो!!! कहा ही था कि दूसरे छोड़ से आवाज आयी &#8216;शिवनाथ जी !!&#8221; </p>
<p>मैं &#8216;हुकुम&#8217; शब्द से उनका अभिनन्दन किया। उनकी आवाज से उम्र का अंदाजा लग रहा था। कोई 80 वर्ष के अवश्य थे। </p>
<p><strong>फिर कहते हैं: &#8220;आप शायद मुझे पहचान जायेंगे। मैं आपको नब्बे के दशक से जानता हूँ जब आपकी कहानी संडे पत्रिका में पढ़ा था। वह कहानी संडे पत्रिका का कवर था और विषय था &#8216;फूलन देवी&#8217; FROM DACOIT QUEEN TO CELEBRITY आपने लिखा था: She is better known than Madhuri Dixit, attracts bigger crowds than Sri Devi, has more political clout than Maneka Gandhi, and has a higher international media profile than Medha Patekar.&#8221;  मैं आपको जानता हूँ। आपसे मेरी बात भी हुई हैं।&#8221;</strong></p>
<p>उनकी बातें मानस पटल पर राजधानी एक्सप्रेस जैसे दौड़ रही थी। अचानक क्षमा याचना करते प्रणाम किया। वे फोन पर ही हंसने लगे। मैं फिर क्षमा याचना किया। </p>
<p>वे कहते हैं: &#8220;मैं आपको फूलन देवी की उस कहानी के बाद से लगातार पढ़ते आया हूँ। आप जिन-जिन अख़बारों में काम किये जानता हूँ, पढता आया हूँ। आपकी एक कहानी ऑस्ट्रेलिया के रेडियो पर भी सुना था। फिर आपके बारे में वॉइस ऑफ़ अमेरिका, बीबीसी पर भी सुना। मेरा आशीष है आपको। आप दरभंगा के महाराजा द्वारा स्थापित अख़बार, जो कई वर्ष पहले बंद हो गया, वेबसाइट भी बनाये हैं।&#8221; </p>
<p>उनकी बातों को सुनकर मैं स्तब्ध था। वे भारतीय पत्रकारिता के साथ-साथ मुंबई बॉलीवुड का एक हस्ताक्षर हैं, वर्षों से। वे बॉलीवुड में अभिनेता भी नहीं हैं, अभिनेता बनाते हैं।&#8221;</p>
<p>फिर कहते हैं: &#8220;आपके आर्यावर्तइण्डियननेशन वेबसाइट पर अभी एक कहानी देखा हूँ । बहुत बेहतरीन लिखा है आपने। मुद्दत बाद पढ़ा हूँ ऐसी कहानी, सत्यता के उत्कर्ष की। बहुत अच्छी कहानी है। बहुत अच्छा लिखें हैं। मैं एक फिल्म निर्माता हूँ। स्वाभाविक है मैं कहानी को उस नजर से देखूंगा। यह एक बेहतरीन फिल्म स्क्रिप्ट है। इसे आप डेवेलप करें। इस कहानी से सम्बंधित अपनी नजर से उन सभी बातों को एकत्रित करें, शोध करें। आप स्क्रिप्ट लिखें। मैं सुधार दूंगा। इस पर काम करें। एक बेहतरीन फिल्म बनाएंगे।&#8221; </p>
<p>इल्तुतमिश के इस दरगाह पर जहाँ एक ओर आज़ादी के 76 साल बाद भी निजी क्षेत्र के सुरक्षा एजेंसियों का मालिक महिलाओं को मासिक धर्म के समय भी &#8216;अधर्मी&#8217; होकर &#8216;अवकाश&#8217; नहीं देते, छुट्टी नहीं देते, सेनेटरी पैड उपलब्ध नहीं कराते, वे भी बेटी बचाओ का नारा देते हैं &#8211; वहीँ दूर से कोई सत्यता को उजागर करने के लिए खुलकर लिखने को कहते हैं। ओह !!!!! </p>
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		<title>मोदी: &#8216;अपने मुख्यमंत्री (चन्नी) को थैंक्यू कहना कि मैं बठिंडा एयरपोर्ट तक जिंदा लौट पाया&#8217;, आज जांच समिति ने कहा: &#8220;पुलिस अधिकारी अपने कर्तव्य का निर्वहन नहीं कर सके</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/sc-committee-finds-ferozepur-ssp-failed-to-discharge-duty</link>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 25 Aug 2022 12:34:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
		<category><![CDATA[committe]]></category>
		<category><![CDATA[government]]></category>
		<category><![CDATA[judiciary]]></category>
		<category><![CDATA[justice indu malhotra]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली : उस दिन बठिंडा एयरपोर्ट लौटते समय तंज कसते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंजाब के अफसरानों को कहा था कि वे अपने मुख्यमंत्री (चरणजीत सिंह चन्नी) को थैंक्यू कहना कि मैं बठिंडा एयरपोर्ट तक जिंदा लौट पाया। जिस समय प्रधानमंत्री का काफिला उपरगामी पथ पर फंसा था उस वक्त पंजाब के मुख्यमंत्री [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली : उस दिन बठिंडा एयरपोर्ट लौटते समय तंज कसते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंजाब के अफसरानों को कहा था कि वे अपने मुख्यमंत्री (चरणजीत सिंह चन्नी) को थैंक्यू कहना कि मैं बठिंडा एयरपोर्ट तक जिंदा लौट पाया। जिस समय प्रधानमंत्री का काफिला उपरगामी पथ पर फंसा था उस वक्त पंजाब के मुख्यमंत्री ने फोन नहीं उठाया था। </p>
<p>आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनवरी में पंजाब यात्रा के दौरान हुई सुरक्षा चूक मामले की जांच करने के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त समिति ने पाया है कि फिरोज़पुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) पर्याप्त बल उपलब्ध होने के बावजूद अपने कर्तव्य का निर्वहन करने में नाकाम रहे। न्यायालय ने कहा कि वह शीर्ष अदालत की पूर्व न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय समिति की रिपोर्ट को उचित कार्रवाई के लिए केंद्र के पास भेजेगा।</strong></p>
<p>पांच जनवरी को फिरोजपुर में प्रदर्शनकारियों की नाकेबंदी के कारण प्रधानमंत्री का काफिला एक फ्लाईओवर पर फंस गया था जिसके बाद वह एक रैली समेत किसी भी कार्यक्रम में शिरकत किए बिना ही लौट आए थे।</p>
<p>प्रधानमंत्री उस सुबह पंजाब में बठिंडा पहुंचे, जहां से वह हेलीकॉप्टर से हुसैनीवाला स्थित राष्ट्रीय शहीद स्मारक जाने वाले थे। बारिश और खराब दृश्यता के कारण वे  करीब 20 मिनट तक मौसम साफ होने का इंतजार किया। मौसम में सुधार नहीं हुआ तो निर्णय लिया गया कि पीएम सड़क मार्ग से जाएंगे, जिसमें दो घंटे से अधिक समय लगता। हुसैनीवाला स्थित राष्ट्रीय शहीद स्मारक से करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर, जब प्रधानमंत्री का काफिला एक फ्लाईओवर पर पहुंचा, तो यह पाया गया कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने सड़क को जाम कर दिया है। प्रधानमंत्री 15-20 मिनट तक फ्लाईओवर पर फंसे रहे। इस सुरक्षा चूक के बाद, बठिंडा एयरपोर्ट पर वापस लौटने का निर्णय लिया गया।</p>
<figure id="attachment_4338" aria-describedby="caption-attachment-4338" style="width: 1200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/2.jpg"><img decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/2.jpg" alt="" width="1200" height="900" class="size-full wp-image-4338" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/2.jpg 1200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/2-300x225.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/2-1024x768.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/08/2-768x576.jpg 768w" sizes="(max-width: 1200px) 100vw, 1200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-4338" class="wp-caption-text">प्रधानमंत्री का काफिला उपरगामी पथ पर फंसा था</figcaption></figure>
<p>उस दिन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा ने कहा था कि &#8220;पंजाब की सरकार का यह रवैया लोकतांत्रिक सिद्धांतों में विश्वास करने वाले सभी लोगों को टीस देने वाला है।&#8221; इसी तरह केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी कही थी कि &#8220;पीएम की सुरक्षा में चूक पर कांग्रेस जोश का जश्न मना रही है। उनके बयान आ रहे हैं कि हाउज द जोश मोदीजी।&#8221;</p>
<p>बहरहाल, प्रधान न्यायाधीश एनवी रमण की अगुवाई वाली पीठ ने समिति की रिपोर्ट को पढ़ते हुए कहा, “ फिरोजपुर के एसएसपी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के अपने कर्तव्य का निर्वहन करने में विफल रहे। पर्याप्त बल उपलब्ध होने के बावजूद और प्रधानमंत्री के मार्ग पर प्रवेश की सूचना दो घंटे पहले देने के बावजूद वह ऐसा करने में विफल रहे।” इस पीठ में न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली भी हैं।</p>
<p><strong>मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एन वी रमन की बेंच ने 12 जनवरी 2022 को पूर्व न्यायाधीश जस्टिस इंदु मल्होत्रा ​​की अध्यक्षता में एक जांच समिति नियुक्त की थी। यह समिति 5 जनवरी 2022 को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की पंजाब यात्रा के दौरान सुरक्षा उल्लंघन की जांच कर रही थी। 5 जनवरी 2022 को फिरोजपुर में प्रदर्शनकारियों द्वारा नाकेबंदी के कारण पीएम का काफिला फ्लाईओवर पर फंस गया था। जस्टिस इंदु मल्होत्रा कमेटी ने पंजाब के कुछ नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों को पीएम की सुरक्षा में चूक के लिए दोषी ठहराते हुए रिपोर्ट दायर की है, जिसके कारण उनका काफिला 5 जनवरी को फिरोजपुर-मोगा रोड पर एक फ्लाईओवर पर फंस गया था।</strong> </p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को प्रधानमंत्री के दौरे के लिए पंजाब सरकार द्वारा किए गए सुरक्षा इंतजामों से संबंधित सभी जब्त दस्तावेज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था।चरणजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व वाली तत्कालीन पंजाब सरकार ने जांच करने के लिए सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति मेहताब सिंह गिल और प्रधान सचिव, गृह मामलों और न्याय अनुराग वर्मा की एक समिति गठित की थी।</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/sc-committee-finds-ferozepur-ssp-failed-to-discharge-duty">मोदी: &#8216;अपने मुख्यमंत्री (चन्नी) को थैंक्यू कहना कि मैं बठिंडा एयरपोर्ट तक जिंदा लौट पाया&#8217;, आज जांच समिति ने कहा: &#8220;पुलिस अधिकारी अपने कर्तव्य का निर्वहन नहीं कर सके</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>सरहदी इलाकों में पदस्थापित सेना के जवान और सुरक्षाकर्मी गायब हो रहे हैं, चिन्ता का विषय</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 26 Sep 2018 12:10:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[border]]></category>
		<category><![CDATA[India]]></category>
		<category><![CDATA[security]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली : देश के सरहदी-क्षेत्रों में भारत के सुदूर इलाकों से पदस्थापित जवानों और सुरक्षाकर्मियों का लापता होना एक चिन्ता का विषय है। वैसे भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय और गृह मंत्रालय के आला-अधिकारियों की पैनी निगाहें, खासकर जो देश के सरहदी क्षेत्रों में अमन-शान्ति के लिए जिम्मेदार हैं; अवश्य ही इस दिशा में [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली : देश के सरहदी-क्षेत्रों में भारत के सुदूर इलाकों से पदस्थापित जवानों और सुरक्षाकर्मियों का लापता होना एक चिन्ता का विषय है। वैसे भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय और गृह मंत्रालय के आला-अधिकारियों की पैनी निगाहें, खासकर जो देश के सरहदी क्षेत्रों में अमन-शान्ति के लिए जिम्मेदार हैं; अवश्य ही इस दिशा में पड़ताल करते होंगे; परन्तु यदि ऐसा होता आया है अथवा हो रहा है, वैसी स्थिति में सरकार को &#8220;विशेष पहल&#8221; करने की आवश्यकता है। </strong></p>
<p>गृह मंत्रालय के सूत्र के अनुसार इन लापता सुरक्षाकर्मियों की पड़ताल समय-समय पर होती आ रही है और अन्य सम्बंधित विभागों और अधिकारीयों को भी सचेत किया जाता रहा है; परन्तु यह कहना बहुत मुश्किल है कि जो लापता हुए हैं अथवा लापता हो रहे हैं उसका क्या कारण है? </p>
<p>​कुछ दिन पूर्व भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने एक सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत एकत्रित की गयी जानकारी में भी इस स्थिति को संवेदनशील बताया था। सूत्रों के अनुसार भारत की सरहदों की रक्षा में तैनात 20 से अधिक रणबांकुरे वर्षों से लापता हैं और आज तक उनका कोई सुराग नहीं मिला है। इन रणबांकुरों के साथ क्या हुआ, इसका जवाब अनुत्तरित है।</p>
<p>विदेश मंत्रालय ने सूचना का अधिकार अधिनियम ​(आरटीआई​) के तहत दायर आवेदन के जवाब में बताया है कि वर्ष 1996 से लेकर वर्ष 2010 तक सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात 20 सैनिक लापता हुए हैं।</p>
<p>आवेदन के जवाब में बताया गया है कि दिल्ली के शालीमार बाग निवासी और 11 इंजीनियर रेंजीमेंट के कैप्टन अविनाश कुमार शर्मा 16 अगस्त 1996 को जम्मू कश्मीर के अखनूर सेक्टर से लापता हो गए थे। वहीं, नेपाल के गंडकी अंचल निवासी एवं भारतीय सेना की गोरखा राइफल्स के हवलदार भूपेंद्र बहादुर थापा 12 अगस्त 1996 को जम्मू कश्मीर में पुंछ जिले की कृष्णाघाटी से लापता हुए थे।</p>
<figure id="attachment_748" aria-describedby="caption-attachment-748" style="width: 300px" class="wp-caption alignleft"><a href="http://www.sundaypost.in/wp-content/uploads/2018/09/1.jpeg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.sundaypost.in/wp-content/uploads/2018/09/1-300x168.jpeg" alt="सीमा पर तैनात सुरक्षाकर्मी" width="300" height="168" class="size-medium wp-image-748" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2018/09/1-300x168.jpeg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2018/09/1-768x430.jpeg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2018/09/1-696x390.jpeg 696w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2018/09/1-750x420.jpeg 750w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2018/09/1.jpeg 800w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></a><figcaption id="caption-attachment-748" class="wp-caption-text">सीमा पर तैनात सुरक्षाकर्मी</figcaption></figure>
<p>इसी तरह भारत की सरहदों की रक्षा में तैनात गोरखा राइफल्स के ही नेपाल निवासी नेत्र बहादुर थापा भी 12 अगस्त 1996 को पुंछ जिले की कृष्णाघाटी से ही लापता हैं। नेपाल के लुंबिनी अंचल निवासी एवं गोरखा राइफल्स के ही नायक हर्क बहादुर राणा भी 12 अगस्त 1996 को कृष्णाघाटी से लापता हुए थे। </p>
<p>देहरादून निवासी एवं गोरखा राइफल्स के जवान लांस नायक राजू गुरूंग भी 12 अगस्त 1996 से ही कृष्णाघाटी से लापता हैं। </p>
<p>मंत्रालय ने आरटीआई के जवाब में बताया है कि गोरखा राइफल्स के पुणे निवासी कैप्टन संजीत भट्टाचार्जी 27 अप्रैल 1997 को कच्छ के रण से लापता हुए थे। गोरखा राइफल्स के ही लांस नायक राम बहादुर थापा भी 27 अप्रैल 1997 से कच्छ के रण से लापता हैं।</p>
<p>राजस्थान के अलवर निवासी एवं 286 मीडियम रेजीमेंट के जीएनआर वीरेंद्र सिंह 17 अक्तूबर 1998 को काकसर सेक्टर (निरिल मोर चौकी) से लापता हो गए थे। </p>
<p>जम्मू कश्मीर के कठुआ निवासी एवं 8 जम्मू एंड कश्मीर लाइट इन्फैंट्री के गोपाल दास 20 अगस्त 2000 को जम्मू कश्मीर के पुंछ सेक्टर से लापता हुए, वहीं केरल के कोट्टायम निवासी एवं 5131 एएससी बीएन के लांस नायक जोस जेम्स 15 जून 2003 को करगिल (शिंगरो नदी) से लापता हैं।</p>
<p>तिरूवल्लूर, तमिलनाडु के निवासी एवं 6 इंजीनियर रेजीमेंट के कृष्ण कुमार 8 अगस्त 2003 को उरी सेक्टर से लापता हैं।पश्चिम बंगाल के हावड़ा निवासी एवं 539 एएससी बीएन के महेश पात्र 8 जुलाई 2005 को जम्मू कश्मीर से लापता हैं।</p>
<p>उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद निवासी और 539 एएससी बीएन के लांस नायक शैलेश कुमार शुक्ला भी 8 जुलाई 2005 से जम्मू कश्मीर से ही लापता हैं। </p>
<p>रूद्रप्रयाग (उत्तराखंड) निवासी एवं 234 एईआर यूनिट के नायक संदीप सिंह 26 अप्रैल 2006 से जम्मू कश्मीर से लापता हैं।</p>
<p>आरटीआई आवेदन के जवाब के अनुसार उत्तराखंड के हल्द्वानी निवासी और 17 महार रेजीमेंट के विक्रम सिंह 5 अगस्त 2006 को बटालिक से लापता हुए थे। इसी रेजीमेंट के पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग निवासी सिपाही बिष्णु राय 5 अगस्त 2006 को ही बटालिक सेक्टर से लापता हुए थे। </p>
<p>आरटीआई के जवाब के अनुसार हवलदार रंजीत कुमार (15 बिहार रेजीमेंट) 6 अगस्त 2010 से सियाचिन से लापता हैं। वह पटना के रहने वाले थे। इसी रेजीमेंट के राकेश कुमार भी 6 अगस्त 2010 से ही सियाचिन से लापता हैं। वह भी पटना के रहने वाले थे।</p>
<p>लद्दाख स्काउट्स रेजीमेंट सेंटर के राइफलमैन सेवांग दोरजई और राइफलमैन करमा नामागिल 6 अगस्त 2010 को लेह से लापता हो गए थे। दोनों लेह के ही रहने वाले थे।जवाब में इन फौजियों के लापता होने का कारण और वर्तमान स्थिति के बारे में नहीं बताया गया है। ​(भाषा के नेत्रपाल शर्मा ​के रिपोर्ट के साथ)</p>
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