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	<title>party Archives - आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</title>
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	<description>आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</description>
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		<title>&#8216;गाय-बछड़ा&#8217; से मुक्त हुआ &#8216;कांग्रेस&#8217; पार्टी, अस्सी-वर्षीय &#8216;युवक&#8217; मल्लिकार्जुन खड़गे के हाथों पार्टी का कमान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 19 Oct 2022 12:39:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली : अंततः &#8216;तेरे कूचे से बाहर निकला।&#8221; लुट्यन्स दिल्ली के 10 जनपथ से कांग्रेस पार्टी को बहार निकलने में 26 साल लग गए, अगर दो साल राहुल गाँधी की अवधजी को जोड़ दिया जाय। 10-जनपथ से 24 अकबर रोड का सफर तय करने में आज कांग्रेस पार्टी &#8216;आज़ादी&#8217; के साथ-साथ &#8220;स्वराज&#8221; प्राप्ति भी समझ रही थी। आज &#8216;खड़गे&#8217; पर [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली : अंततः &#8216;तेरे कूचे से बाहर निकला।&#8221; लुट्यन्स दिल्ली के 10 जनपथ से कांग्रेस पार्टी को बहार निकलने में 26 साल लग गए, अगर दो साल राहुल गाँधी की अवधजी को जोड़ दिया जाय। 10-जनपथ से 24 अकबर रोड का सफर तय करने में आज कांग्रेस पार्टी &#8216;आज़ादी&#8217; के साथ-साथ &#8220;स्वराज&#8221; प्राप्ति भी समझ रही थी। आज &#8216;खड़गे&#8217; पर &#8216;वुध&#8217; का प्रभाव अच्छा निकला। वैसे चतुर्दिक लोगबाग कर रहे थे कि मल्लिकार्जुन खगड़े साहब को &#8216;आला-कमान&#8217; का &#8216;आशीष&#8217; था। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए। करीब 24 साल बाद गांधी परिवार के बाहर का कोई नेता देश की सबसे पुरानी पार्टी का अध्यक्ष चुना गया। बिहार के वरिष्ठ नेता और गैर-इंदिरा परिवार के सीताराम केसरी के बाद राष्ट्र भूल गया था कि कांग्रेस का कमान कोई और ले सकता है। </strong></p>
<p>कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए 17 अक्टूबर को मतदान हुआ था। इस बार मुकाबला वरिष्ठ पार्टी नेताओं मल्लिकार्जुन खड़गे और शशि थरूर के बीच था। कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव के लिए कुल 9,385 वोट डाले गए, जिनमें से 416 मतों को अवैध घोषित किया गया। 8,969 वैध मतों में मल्लिकार्जुन खड़गे को 7,897 वोट हासिल हुए, जबकि शेष 1,072 वोट शशि थरूर को मिले। थरूर ने अपनी हार को स्वीकार कर लिया है। कर्नाटक से 9 बार विधायक रहने और कई बार सांसद रहने वाले मल्लिकार्जुन खड़गे को गांधी परिवार के वफादार नेताओं में शुमार किया जाता है। वैसे यह भी &#8216;शोध&#8217; का ही विषय है कि 9385 वोट में 416 मतों का &#8216;अवैध&#8217; होना। </p>
<p>सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के करीब 9900 डेलीगेट पार्टी प्रमुख चुनने के लिए मतदान करने के पात्र थे। कांग्रेस मुख्यालय समेत लगभग 68 मतदान केंद्रों पर मतदान संपन्न हुआ। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और कई अन्य वरिष्ठ नेताओं समेत करीब 9500 डेलीगेट (निर्वाचक मंडल के सदस्यों) ने पार्टी के नए अध्यक्ष के चुनाव के लिए सोमवार को मतदान किया था। </p>
<p><strong>पार्टी सूत्रों के अनुसार कांग्रेस पार्टी के 137 साल के इतिहास में छठी बार अध्यक्ष पद के लिए चुनाव हुआ है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश के मुताबिक, अध्यक्ष पद के लिए अब तक 1939, 1950, 1977, 1997 और 2000 में चुनाव हुए हैं। इस बार पूरे 22 वर्षों के बाद अध्यक्ष पद के लिए चुनाव हुआ है। अकबर रोड कार्यालय में इस बात की भी चर्चाएं आम हो रही हैं कि मल्लिकार्जुन खगड़े के आने के बाद कांग्रेस पार्टी से रूठ कर जाने वाले कई जवान और बूढ़े नेता घर की ओर उन्मुख हो सकते हैं।</strong> </p>
<figure id="attachment_4618" aria-describedby="caption-attachment-4618" style="width: 1200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/li.jpeg"><img fetchpriority="high" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/li.jpeg" alt="" width="1200" height="900" class="size-full wp-image-4618" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/li.jpeg 1200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/li-300x225.jpeg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/li-1024x768.jpeg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/li-768x576.jpeg 768w" sizes="(max-width: 1200px) 100vw, 1200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-4618" class="wp-caption-text">कांग्रेस पार्टी के अन्य अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खगड़े</figcaption></figure>
<p>मल्लिकार्जुन खड़गे का कांग्रेस अध्यक्ष चुना जाना पार्टी में बड़े बदलाव की शुरुआत माना जा रहा है। उनके अध्यक्ष बनने के साथ ही गांधी परिवार बैकसीट पर पहुंच गया है, जो लगातार 24 सालों से कांग्रेस अध्यक्ष था।1998 से अब तक सोनिया गांधी ही कांग्रेस अध्यक्ष थीं, जबकि बीच में दो साल के लिए 2017 से 2019 के दौरान राहुल गांधी ने यह पद संभाला था। लोकसभा चुुनाव में हार के बाद राहुल गांधी ने पद से इस्तीफा दे दिया था। यही नहीं तभी उन्होंने साफ कर दिया था कि अब गांधी परिवार से कोई अध्यक्ष नहीं होगा। अंत तक वह इस जिद पर अड़े रहे और फिर चुनाव हुआ, जिसमें मल्लिकार्जुन खड़गे को चुना गया है।</p>
<p>खगड़े की जित के साथ ही राहुल गांधी ने कहा, &#8216;कांग्रेस अध्यक्ष ही सुप्रीम हैं. मैं अध्यक्ष को ही रिपोर्ट करूंगा। पार्टी के नए अध्यक्ष ही पार्टी में मेरी भूमिका तय करेंगे।&#8217;  राहुल ने खुद ही साफ कर दिया है कि पार्टी प्रमुख ही उनके काम का फैसला करेंगे। फिलहाल, वायनाड सांसद कन्याकुमारी से लेकर जम्मू-कश्मीर तक पदयात्रा की अगुवाई कर रहे हैं। उन्होंने पार्टी चीफ का चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था। बुधवार को राहुल ने यात्रा के दौरान आंध्र प्रदेश में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने अपनी भूमिका को लेकर कहा कि इसके बारे में पार्टी प्रमुख बताएंगे। उन्होंने कहा, &#8216;कांग्रेस अध्यक्ष पार्टी में सुप्रीम होता है।  हर सदस्य अध्यक्ष के पास जाता है&#8230; वे पार्टी में मेरी भूमिका तय करेंगें, प्लीज खड़गे जी और सोनिया गांधी जी से पूछें।&#8217;</p>
<p>इसी बीच, शशि थरूर की टीम ने पार्टी के मुख्य निर्वाचन प्राधिकारी को पत्र लिखकर उत्तर प्रदेश में चुनाव के दौरान “अत्यंत गंभीर अनियमितताओं” का मुद्दा उठाया और मांग की कि राज्य में डाले गए सभी मतों को अमान्य किया जाए। थरूर की प्रचार टीम ने पंजाब और तेलंगाना में भी चुनाव के संचालन में “गंभीर मुद्दे” उठाए थे। टीम ने कहा, पार्टी के केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण के अध्यक्ष मधुसूदन मिस्त्री को लिखे पत्र में थरूर के मुख्य चुनाव एजेंट सलमान सोज ने कहा है कि तथ्य “हानिकारक” हैं और उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रक्रिया में “विश्वसनीयता और प्रमाणिकता की कमी” है। </p>
<p>मिस्त्री को लिखे एक खत में थरूर की टीम की ओर से लिखा गया कि उत्तर प्रदेश में चुनाव के संचालन में अत्यंत गंभीर अनियमितताओं को ओर आपका ध्यान दिलाना चाहते हैं। आप देखेंगे कि यूपी में चुनाव प्रक्रिया  से जुड़े तथ्यों में और विश्वसनीयता से जुड़ी कमियां पाएंगे। पत्र में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश में जो हुआ वह &#8220;पूरी तरह से अलग स्तर पर हुआ है।&#8221; थरूर ने लिखा कि हम ये खास तौर पर रेखांकित करना चाहेंगे कि हमारे पास इस बात का कोई सबूत नहीं है कि मल्लिकार्जुन खड़गे जी को पता था कि उनके समर्थक यूपी में चुनाव के दौरान किस तरह अनाचार में लिप्त थे। हमें यकीन है कि अगर उन्हें पता होता तो वे यूपी में जो कुछ हुआ उसकी अनुमति नहीं देते। </p>
<p>बहरहाल, छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रभारी पीएल पुनिया ने इस मामले पर कहा कि हम किसी से मिलने के लिए आए थे और उनको अग्रिम बधाई भी दे दी। जगजीवन राम के बाद दलित और पिछड़े समुदाय से कांग्रेस अध्यक्ष बनने जा रहे हैं। इससे कांग्रेस को काफी मजबूती मिलेगी। </p>
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		<title>&#8220;कुछ तो हुआ है..कुछ हो गया है..दो चार दिन से.. लगता है जैसे..सब कुछ अलग है..सब कुछ नया है..कुछ तो हुआ है.. कुछ हो गया है&#8221;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 04 Oct 2022 11:07:27 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली: शायद सब कुछ अच्छा नहीं चल रहा है भारत के राजनीतिक &#8216;कर्तव्य पथ&#8217; पर। दिल्ली की भौगोलिक मानचित्र में &#8216;कर्तव्य पथ&#8217; और &#8216;लोक (कल्याण) मार्ग&#8217; के बीच की दूरी भले 3.3 किलोमीटर की हो, गूगल महाशय के अनुसार इस दूरी को भले सात से दस मिनट समय में मापा जा सके; परंतु दिल्ली की राजनीतिक [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली: शायद सब कुछ अच्छा नहीं चल रहा है भारत के राजनीतिक &#8216;कर्तव्य पथ&#8217; पर। दिल्ली की भौगोलिक मानचित्र में &#8216;कर्तव्य पथ&#8217; और &#8216;लोक (कल्याण) मार्ग&#8217; के बीच की दूरी भले 3.3 किलोमीटर की हो, गूगल महाशय के अनुसार इस दूरी को भले सात से दस मिनट समय में मापा जा सके; परंतु दिल्ली की राजनीतिक मानचित्र पर सब कुछ सामान्य नहीं दिख रहा है। कहने के लिए भले विश्व के श्रेष्ठतम प्रजातंत्र से अलंकृत किया जाता हो भारत को, यहाँ की राजनीतिक व्यवस्था को; लेकिन सत्तारूढ़ पार्टी के सम्मानित और शीर्षस्थ नेताओं से लेकर छोटे कद के नेताओं की विचारधाराएं &#8216;दो धाराओं&#8217; में बंटा दिख रहा है &#8211; आप माने या नहीं, आपकी मर्जी। </strong></p>
<p>सन 2014 से 2022 तक रायसीना हिल की ओर आने-जाने वाली हवाओं में &#8216;प्रजातान्त्रिक&#8217; नहीं, अपितु &#8216;कुछ और&#8217; &#8216;वादी&#8217; गंध बह रही हैं, यह भारत के लोग कहते हैं, मतदाता कहते हैं, गरीब-गुरबा कहते हैं &#8211; कुछेक कॉर्पोरेट घराने के मालिक-मोख्तार को छोड़कर । हवाओं का रुख परखने वाले आध्यात्मिक विद्वानों और विदुषियों का मानना है कि पार्टी के लोगबाग अन्तःमन से खुश नहीं हैं। वैसे सत्ता के गलियारे में &#8216;स्वदेशी रसगुल्ला&#8217; खाने वाले पार्टी के एक खास का मानना है कि 15 अगस्त, सन सैंतालीस के पूर्व और उसके बाद 2014 तक आज़ाद भारत में जो हुआ &#8216;वह भारत के विकास के लिए नहीं&#8217;, अपितु &#8216;स्वहित&#8217; के लिए, परिवार-परिजनों के हितार्थ था। देश की जनता की नजर में कोई मोल नहीं है उन कार्यों का। परन्तु सन 2014 से जो हो रहा है, वही राष्ट्रहित में है, भारत के लोगों के हितार्थ है। </p>
<p>कर्तव्य पथ से नीचे 28 राज्यों और आठ केंद्र शासित प्रदेशों की ओर उन्मुख होने वाली हवाएं भारत के मतदाताओं की नाकों से गुजर रही है जो विगत आठ वर्षों की &#8216;राजनीतिक चरित्र&#8217; को आधार मानकर हवाओं की जांच-पड़ताल कर रही है।  लोगों का रोजगार, लोगों का स्वास्थ्य, लोगों की शिक्षा, मेहनत-मजदूरी से मिलने वाली आय, रोजगार आदि को जांच-पड़ताल का अभिन अंग मान रहा है। अगर हवाओं की पड़ताल को आधार माना जाए तो संभव है आगामी आम चुनाब आते-आते देश की राजनीतिक गतिविधियों में एक भूचाल आने वाला है। </p>
<p><strong>यानी &#8220;एको अहम् द्वितीयो नास्ति&#8221;, अर्थात समस्त भारत में &#8216;वे&#8217; ही मात्र एक हैं, शेष सब मिथ्या है। लोक कल्याण की बात सिर्फ और सिर्फ लोक कल्याण मार्ग का निवासी ही सोच सकता है। यानी &#8216;विकास&#8217; का, &#8216;कल्याण&#8217; का &#8216;आरम्भ&#8217; और &#8216;अंत&#8217; वही हैं, दूसरा कोई भारत के लोगों के लिए सोच ही नहीं सकता। आखिर राजनीतिक चरित्र में कितनी भी गिरावट हुई हो, मतदाता आज भी चरित्रवान है, भले 10 फीसदी ही सही। और भारत का दस फीसदी आवाम तो अंग्रेजी हुकूमत को उखाड़ फेंकी थी, कांग्रेस को उखाड़ फेंकी थी। इतिहास गवाह है।</strong> </p>
<p><strong>एक रिपोर्ट</strong> का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता नितिन गडकरी पार्टी के वर्तमान सभी नेताओं से कहीं अधिक &#8216;विचारवान&#8217; &#8216;राजनीतिक चरित्रवान&#8217;, &#8216;शिक्षित&#8217; हैं और वे अनायास ही कुछ भी नहीं बोलते। वह अपने बेबाक बोल के लिए जाने जाते हैं। एक बार फिर नितिन गडकरी के एक बयान की चर्चा हो रही है जिसमें उन्होंने कहा है कि मैं राजनीति कब छोड़ दूं और कब नहीं । राजनीति के माहिर खिलाड़ी पूर्व में भी राजनीति के अंदाज पर सवाल उठा चुके हैं। ऐसे कोई उनके एक या दो बयान नहीं है। उनके बयान के इस बार भी मायने मतलब निकाले जा रहे हैं और पूर्व में भी निकाले गए। उनका यह मानना रहा है कि राजनीतिक दलों के नेताओं को सिद्धांतों से समझौता नहीं करना चाहिए। उन्होंने अलग-अलग मंचों से राजनीति (Politics) को लेकर ऐसी कई बातें कही हैं जिसकी समय-समय पर चर्चा होती है।</p>
<figure id="attachment_4528" aria-describedby="caption-attachment-4528" style="width: 1200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/nitin-gadkari-pm-modi_1548692709.jpg"><img decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/nitin-gadkari-pm-modi_1548692709.jpg" alt="" width="1200" height="810" class="size-full wp-image-4528" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/nitin-gadkari-pm-modi_1548692709.jpg 1200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/nitin-gadkari-pm-modi_1548692709-300x203.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/nitin-gadkari-pm-modi_1548692709-1024x691.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/nitin-gadkari-pm-modi_1548692709-768x518.jpg 768w" sizes="(max-width: 1200px) 100vw, 1200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-4528" class="wp-caption-text">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी</figcaption></figure>
<p>एक सवाल के जवाब में नितिन गडकरी ने कहा था: &#8220;मुझे लगता है कि मैं कब राजनीति छोड़ दूं और कब नहीं&#8230;क्योंकि जिंदगी में करने के लिए और भी कई चीजें हैं। एक निजी कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि यदि बारीकी से देखें तो राजनीति समाज के लिए है और इसका विकास करने के लिए है। वहीं मौजूदा वक्त में राजनीति को देखा जाए तो इसका इस्तेमाल शत प्रतिशत सत्ता पाने के लिए किया जा रहा है। गडकरी हंसते-हंसते गंभीर से गंभीर बात कह जाते हैं।&#8221;</p>
<p>आपको याद होगा पिछले साल की बात है जब एक कार्यक्रम में उन्होंने सत्ता के लालच पर चुटकी ली थी। गडकरी ने कहा था कि आपको शायद ही कोई नेता खुश मिलेगा। उन्होंने बतौर बीजेपी अध्यक्ष अपने कार्यकाल का हवाला देते हुए कहा था कि वह पार्टी अध्यक्ष थे तो कोई ऐसा नहीं मिला जो दुखी न हो। राजस्थान विधानसभा में &#8216;संसदीय प्रणाली और जन अपेक्षाएं&#8217; विषय पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही थी। गडकरी ने कहा कि इन दिनों राज्यों के मुख्यमंत्री इस बात को लेकर दुखी रहते हैं कि ना जाने उन्हें कब हटा दिया जाए। उनके इस बयान को उनकी ही पार्टी से जोड़कर देखा गया था क्योंकि उस वक्त कुछ ही महीनों में बीजेपी ने अपने कई मुख्यमंत्रियों को बदल डाला था।</p>
<p>ज्ञातव्य हो कि जनवरी 2019 की बात है जब केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि जो नेता लोगों को सपने दिखाते हैं लेकिन उन्हें पूरा नहीं कर पाते, जनता उनकी पिटाई करती है। गडकरी ने कहा कि वह काम करते हैं और अपने वादों को पूरा करते हैं। उन्होंने कहा लोग ऐसे नेताओं को पसंद करते हैं जो सपने दिखाते हैं। लेकिन अगर सपने सच नहीं हुए तो लोग उन नेताओं की पिटाई भी करते हैं। मैं सपने नहीं दिखाता बल्कि जो भी बात करता हूं उसे 100 प्रतिशत पूरा करके दिखाता हूं। गडकरी ने महाराष्ट्र में लोक निर्माण विभाग मंत्री रहते हुए अपने कार्यकाल की उपलब्धियां भी गिनाईं और कहा कि जब राज्य में 1995 से 99 तक शिवसेना-भाजपा की सरकार में था सब जानते हैं कि मैं किस तरह का व्यक्ति हूं।</p>
<p>एक वक्त महाराष्ट्र की राजनीति पर कहा था कि क्रिकेट और राजनीति में कुछ भी हो सकता है। उन्होंने कहा कि जो मैच हारता हुआ दिखाई देता है वास्तव में वह जीत भी सकता है। उन्होंने यह बात तब कही थी जब भाजपा से अलग हो चुकी शिवसेना कांग्रेस और एनसीपी की मदद से सरकार बनाने जा रही थी। महाराष्ट्र में बने राजनीतिक हालात के बारे में जब उनके सामने एक सवाल पर उन्होंने कहा कभी आपको लगता है कि आप मैच हार रहे हैं लेकिन परिणाम एकदम विपरीत होता है। इसी साल मार्च महीने की बात है जब नितिन गडकरी ने कहा था कि लोकतंत्र के लिए मजबूत कांग्रेस अहम है और यह उनकी ईमानदारी से इच्छा है कि पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत बने। </p>
<p>उन्होंने कहा था कि लोकतंत्र दो पहियों के सहारे चलता है जिनमें से एक पहिया सत्ताधारी पार्टी है जबकि दूसरा पहिया विपक्ष है। गडकरी ने कहा कि लोकतंत्र के लिए मजबूत विपक्ष की जरूरत है और इसलिए मै हृदय से महसूस करता हूं कि कांग्रेस को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत होना चाहिए। उन्होंने कहा चूंकि कांग्रेस कमजोर हो रही है, अन्य क्षेत्रीय पार्टियां उसका स्थान ले रही हैं। लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है कि अन्य क्षेत्रीय पार्टियां कांग्रेस का स्थान लें।</p>
<p>नितिन गडकरी ने कहा था कि &#8220;मुझे ऐसा लगता है कि नेताओं को स्पष्ट रूप से राजनीति का अर्थ समझना चाहिए। राजनीति महज सत्ता की राजनीति नहीं है। महात्मा गांधी, लोकमान्य तिलक, पंडित जवाहर लाल नेहरू और वीर सावरकर जैसे नेता सत्ता की राजनीति में शामिल नहीं थे। साल2019 में नितिन गडकरी ने नागपुर के एक कार्यक्रम में कहा कि मैं किसी प्रोजेक्ट में सरकार की मदद नहीं लेता। सरकार जहां हाथ लगाती है वहां सत्यानाश हो जाता है। गडकरी ने कहा कि एक संत ने कहा कि आप अपने सामाजिक आर्थिक जीवन को खुद बनाते हैं। तब से मैंने सरकार पर भरोसा रखना बंद कर दिया। ना मैं सरकार से मदद मांगता हूं न जाता हूं।&#8221;</p>
<figure id="attachment_4529" aria-describedby="caption-attachment-4529" style="width: 567px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/unnamed.jpeg"><img decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/unnamed.jpeg" alt="" width="567" height="750" class="size-full wp-image-4529" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/unnamed.jpeg 567w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/unnamed-227x300.jpeg 227w" sizes="(max-width: 567px) 100vw, 567px" /></a><figcaption id="caption-attachment-4529" class="wp-caption-text">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी</figcaption></figure>
<p>इसी तरह<strong> &#8220;दी प्रिंट&#8221; </strong>ने लिखा कि नितिन गडकरी दार्शनिक अंदाज में राजनीति को अलविदा कहने की बात क्यों कर रहे हैं ? भाजपा की राष्ट्रीय परिषद की जो बैठक 2010 में इंदौर में हुई थी उसे कई बातों के लिए आज भी याद किया जाता है। उसमें 52 वर्षीय नितिन गडकरी पार्टी के सबसे युवा अध्यक्ष बने थे। उस बैठक में गडकरी ने ‘सादगी’ के जो उपाय किए थे वे काफी चर्चा में आए थे। करीब 4400 पार्टी प्रतिनिधियों को तंबुओं में रहना पड़ा था। तंबुओं में सांप न घुसें इसके लिए सपेरों को तैनात किया गया था।असुविधाएं चाहे जो भी रही हों, नवनिर्वाचित पार्टी अध्यक्ष ‘हिट’ हो गए थे। कभी नागपुर में दीवारों पर पार्टी के पोस्टर चिपकाने और नारे लिखने वाले साधारण कार्यकर्ता गडकरी पार्टी के सर्वोच्च पद पर बैठे थे। परिषद के अंतिम दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम में गडकरी ने मन्ना डे का गाना ‘ज़िंदगी कैसी है पहेली हाए, कभी ये हंसाए, कभी ये रुलाए …’ गा कर सबका खूब मनोरंजन किया था। </p>
<p>लेकिन आज गडकरी ने अफसोस जाहिर करते हुए कहा कि &#8220;आज राजनीति का किस तरह ‘शत-प्रतिशत सत्ताकरण हो गया है। मैं इस पर बहुत सोच रहा हूं कि राजनीति से कब अलग हो जाऊं। ज़िंदगी में राजनीति के सिवा भी बहुत कुछ है करने के लिए।’<br />
राजनीति से संन्यास? वह भी मात्र 65 की उम्र में? यह विचार उनके मन में आया क्यों? अफसर लोग एक वाकये को याद करते हैं जब गडकरी के मंत्रालय के सचिव को ऊपर से यह फोन आया कि वे अपने मंत्री जी को कहें कि वे हर सप्ताह के अंत में नागपुर जाना बंद करें, जो कि आरएसएस का मुख्यालय है। सचिव ने यह अप्रिय काम संयुक्त सचिव को सौंप दिया। उसने जब गडकरी को हल्के से यह संदेश सुनाया तो वे हंस पड़े: ‘जिस किसी ने यह संदेश भेजा है उसे कह दीजिए कि नागपुर मेरा चुनाव क्षेत्र है। वहां हजारों लोग अपना काम करवाने के लिए मेरा इंतजार करते हैं। मैं उन्हें निराश नहीं कर सकता।’</p>
<p>जहां तक ‘सत्ताकरण’ की राजनीति को लेकर उनके आक्रोश का सवाल है, अगर वे भाजपा के मौजूदा नेतृत्व पर कटाक्ष न कर रहे हों तो इसे उनका सबसे गंभीर बयान माना जा सकता है। इसलिए, उनकी दार्शनिक जुगाली का क्या मतलब है? वे मोदी मंत्रिमंडल में गिनती के उन मंत्रियों में शुमार हैं जो अपना मंत्रालय खुद चलाते हैं। जब वे भाजपा अध्यक्ष थे तब कहा करते थे कि उनकी पार्टी को सत्ता हासिल करने के लिए बस 10 फीसदी और वोट चाहिए। तब उसे करीब 18 फीसदी वोट मिलते थे। एक सरकारी अधिकारी बताते हैं कि अब वे शायद ही दखल देते हैं। गडकरी रिपोर्टरों को कहते रहे हैं कि वे तो दिल्ली में एक ‘बाहरी’ व्यक्ति हैं। गडकरी जब भाजपा अध्यक्ष बने तब तथाकथित ‘डी-4’ या ‘दिल्ली-4’ के नाम से मशहूर चौकड़ी (अरुण जेटली, सुषमा स्वराज, वेंकैया नायडू, अनंत कुमार की) का बोलबाला था। बाहर वालों के लिए यह एक बड़ी चुनौती थी। आज कोई डी-4 नहीं है लेकिन मोदी-शाह के दरबार में भी गडकरी ‘बाहरी’ हैं। </p>
<p>इसी तरह <strong>&#8220;वायर&#8221;</strong> ने लिखा है कि &#8220;बीते दिनों भाजपा संसदीय बोर्ड से बाहर किए गए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मुंबई में आयोजित एक समारोह में भारत के बुनियादी ढांचे की मज़बूती पर बात करते हुए कहा कि समय सबसे बड़ी पूंजी है। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि सरकार समय पर फैसले नहीं ले रही है। एनडीटीवी की खबर के मुताबिक केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘आप चमत्कार कर सकते हैं… और क्षमता भी है… मेरा सुझाव यह है कि भारतीय बुनियादी ढांचे का भविष्य बहुत उज्जवल है। हमें दुनिया में और देश में अच्छी तकनीक, अच्छे नवाचार, अच्छे शोध और सफल प्रथाओं को अपनाने की जरूरत है।’</p>
<p>गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सरकार की सफलता को लेकर टिप्पणी की थी कि यह ‘अमृत काल’ चल रहा है, जिसमें बड़े मील के पत्थर पार किए गए हैं। हालांकि, भाजपा नेताओं का कहना है कि गडकरी के शब्द किसी विशेष सरकार के लिए नहीं, बल्कि सामान्य तौर पर सरकारों के लिए थे। गडकरी को पार्टी के नीति-निर्धारक भाजपा संसदीय बोर्ड से हटा दिया गया था। गडकरी भाजपा अध्यक्ष रह चुके हैं, इसलिए उनका बाहर किया जाना और भी आश्चर्यजनक था, क्योंकि पूर्व अध्यक्ष हमेशा पेनल में रहे हैं। इसके अलावा गडकरी पार्टी के वैचारिक संरक्षक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के करीबी रहे हैं और अतीत में अक्सर खुद को लेकर भी कटाक्ष करते रहे हैं। </p>
<p><strong>बहरहाल, गडकरी ने हाल में ही देश में बेरोजगारी, भूखमरी और महंगाई के मुद्दे पर बात करते हुए कहा कि हम मातृ भूमि को सुखी, समृद्ध और शक्तिशाली बनाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि देश तो धनवान हो गया पर जनता गरीब है, इसलिए देश के विकास के लिए गंभीरता से सोचना होगा की किस रास्ते जाना है। हमारा देश धनवान है पर जनता गरीब है, आज भी भारत की जनता भूखमरी, गरीबी, महंगाई, बेरोजगारी से त्रस्त है। भारत विश्व की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था है। इसके बावजूद देश की जनसंख्या भूखमरी, गरीबी, महंगाई, बेरोजगारी, जातिवाद और अपृश्यता का सामना कर रही है, जो कि देश की प्रगति के लिए ठीक नहीं है।&#8221; </strong></p>
<p>गडकरी ने आगे कहा कि देश में गरीब और अमीर के बीच गहरी खाई है, जिसे पाटने और समाज के बीच सामाजिक व आर्थिक समानता पैदा करना जरूरी है। समाज के इन दो हिस्सों के बीच खाई बढ़ने से आर्थिक विषमता और सामाजिक असामनता की तरह है।हमारे समाज मे दो विशेषरूप से वर्गों का अंतर बहुत ज्यादा है। जिससे सामाजिक विषमता है वैसे आर्थिक विषमता भी बढ़ी है। हमारे देश में 124 जिले ऐसे हैं, जो सामाजिक आर्थिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े हुए हैं। वहां, स्कूल, अस्पताल नहीं हैं, युवाओं के लिए रोजगार नहीं हैं और गांव जाने के लिए रास्त नहीं हैं, किसानों को फसलों के सही दाम नहीं मिल रहे।</p>
<p>हमारे देश में शहरी क्षेत्र में ज्यादातर हम काम करते हैं इसलिए वहां ज्यादा विकास हुआ है, लेकिन 1947 में 90 प्रतिशत आबादी ग्रामीण इलाकों में रहती थी। अब 25-30 प्रतिशत माइग्रेशन हुआ है। ये खुशी से नहीं मजबूरी से आए हैं क्योंकि गांवों में अच्छी शिक्षा, रोजगार नहीं हैं इस कारण लोग गांव छोड़कर शहरों में आए हैं, जिससे शहरों में भी समस्याओं का निर्माण हुआ है इसलिए भारत का विकास करने के लिए गंभीरता से सोचना होगा कि हमें किस मार्ग से जाना है।”  </p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/all-is-not-well-in-government">&#8220;कुछ तो हुआ है..कुछ हो गया है..दो चार दिन से.. लगता है जैसे..सब कुछ अलग है..सब कुछ नया है..कुछ तो हुआ है.. कुछ हो गया है&#8221;</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>श्वास केन्द्रीय खुफिया संस्थाओं में समाहित और &#8216;माया&#8217; का माया रायसीना हिल का लाल बंगला पर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Desk Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 29 Apr 2022 11:24:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मुखियाजी उवाच]]></category>
		<category><![CDATA[bsp]]></category>
		<category><![CDATA[mayavati]]></category>
		<category><![CDATA[new delhi]]></category>
		<category><![CDATA[party]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>द्वारा: के. विक्रम राव कुमारी, बहन, सुश्री मायावती अगली जुलाई में भारत का राष्ट्रपति बनने से  बचना चाहतीं हैं। हालांकि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का दावा है कि गत माह के विधानसभा चुनाव में अपनी बसपा के वोट भाजपा को ट्रांसफर कराने के एवज में मोदी सरकार मायावती को रामनाथ कोविंद के रिटायर होने पर [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>द्वारा: के. विक्रम राव </p>
<p>कुमारी, बहन, सुश्री मायावती अगली जुलाई में भारत का राष्ट्रपति बनने से  बचना चाहतीं हैं। हालांकि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का दावा है कि गत माह के विधानसभा चुनाव में अपनी बसपा के वोट भाजपा को ट्रांसफर कराने के एवज में मोदी सरकार मायावती को रामनाथ कोविंद के रिटायर होने पर राष्ट्रपति बनवा देगी।  लेकिन मायावती बोलीं कि : &#8221;प्रधानमंत्री अथवा मुख्यमंत्री वे बनना चाहेगी। राष्ट्रपति नहीं।&#8221; अर्थात भाजपा की पाली में गेंद है। मोदी—योगी को तय करना है। तो क्या वे तश्तरी में रखकर इन दो में से एक पद बहन जी को राखी के साथ पेश करेंगे?</strong></p>
<p>मायावती का एक और सपना है। दलित, गरीब, मुसलमान आदिवासी, पिछड़ा वर्ग आदि यदि बसपा से जुड़ जाये तो उनका स्वप्न पूरा हो जायेगा। इतने सब वर्गों के बाद, फिर बचा कौन ? यदि ऐसा हुआ भी तो बाकी पार्टियां क्या राजनीति तज कर परचून की दुकान खोलेंगी? संगम वास करेंगी? </p>
<p>मायावती को अभी भी बसपाई कार्यकर्ताओं के नारे की गूंज सुनाई पड़ती है : &#8221; यूपी की मजबूरी है, मायावती जरूरी है।&#8221; मगर यूपी अब बदल गया हे। सियासी मुहावरा भी नया है। माहौल भिन्न है। भाजपा अब पुरानी कल्याण सिंह वाली नहीं जिससे, मायावती छह महीनों के सीएम का करार कर, मुकर गई थीं। योगी—मोदी  खेला जानते है। खेलते भी हैं। </p>
<p>चार बार मुख्यमंत्री रहीं मायावती इस बार 202 विधायकों की कमी के कारण पांचवीं बार सीएम नहीं बन पायीं। बसपा का केवल एक ही विधायक जीता। सदन में बहुमत 203 से होता है। अजूबा देखिये।  बसपा अब तक सभी पार्टियों से चुनाव अभिसार कर चुकी है। लाभ नहीं हुआ। अब कोई बचा भी नहीं। तो किसका साथ पायेंगी ? लोकसभा चुनाव 2024 में है, फिर अगला विधानसभा 2027 में। बहुत देर है अभी। </p>
<p>इन सबसे पहले राज्यसभा की 11 सीटों का चुनाव 4 जुलाई 2022 को होना है। ढाई माह बाद। पंडित सतीश चन्द्र मिश्र भी तब तक भूतपूर्व सांसद हो जायेंगे। वे दशकों से राज्यसभा में रहे। अब केवल एक ही बसपा विधायक के बूते क्या कर पाएंगे ? नवनिर्मित संसद भवन से भी मरहूम रह जायेंगे। उसके बाद 2024 में प्रस्तावित लोकसभा चुनाव में भी बसपा शून्य ही रहेगी। संसदीय स्थान सिकुड़ता जायेगा। तो राष्ट्रपति क्या, उपराष्ट्रपति क्या, यूपी सीएम की संभावना वर्षों पीछे सरक गयी है। भाजपा में शामिल हो जाये तो मायावती शायद नामित हो सकती हैं। अर्थात अब छोर के अंत तक जा पहुंचीं हैं। आम राजनीतिक—इति साफ नजर आ रही है। </p>
<p>भूकंप आ जायेगा यदि मायावती के विरुद्ध मोदी कहीं ईडी, सीबीआई और अन्य केन्द्रीय एजेंसी को उपयोग में लाते हैं तो ? यूं भी फाइलों का अंबार लगा है। खुलने की देर है। स्टाइल वहीं इंदिरा गांधी वाली पुरानी है। भुक्तभोगी ही बतायेंगे। मायावती के इन्द्रजाल को तो उजागर होना ही पड़ेगा।  </p>
<p>यूं तो मायावती केन्द्र सरकार पर खुफिया एजेंसियों के राजनीतिक कारणों से दुरुपयोग का आरोप लगती रहीं हैं। इस संदर्भ में समाचारों में प्रकाशित कुछ रपट पर नजर डाले। वैसे खुद मायावती का आर्थिक विकास भी कम चमत्कारिक नहीं लगता है। &#8221;2004 के चुनावी हलफनामे में मायावती की संपत्ति 11 करोड़ रुपये थी। फिर 2007 के विधान परिषद चुनाव में दिये गये हलफनामे में 87.27 करोड़ हो चुकी थी। आगे 2012 के बाद मायावती ने कोई चुनाव नहीं लड़ा इसलिये 2012 के बाद व्यक्तिगत संपत्ति सार्वजनिक नहीं हुयी। 2012 की घोषणा में मायावती ने बादलपुर की पैतृक संपत्ति और घर का जिक्र नहीं किया था। हां,  तीन बंगलों को जोड़कर नयी दिल्‍ली के लुटियन जोन में एक बड़ा बंगला, कनॉट प्लेस में बी—34 में ग्राउंड और फर्स्ट फ्लोर में आठ हजार वर्ग मीटर से अधिक की वाणिज्यिक संपत्ति, नई दिल्ली में ही सरदार पटेल मार्ग पर  43 हजार वर्गफीट की संपत्ति, लखनऊ में नौ माल एवेन्यू में करीब 71 हजार वर्ग फीट में बना भवन और 11 करोड़ की नकदी का उल्लेख उनके हलफनामे में जरूर था। </p>
<p>अब एक नजर मायावती के भाई की संपत्ति में हुए इजाफे पर भी डाले। आयकर विभाग ने बसपा प्रमुख मायावती के भाई और भाभी का नोएडा स्थित 400 करोड़ रुपये कीमत का प्लॉट जब्त किया था। आधिकारिक आदेश के मुताबिक, मायावती के भाई आनंद कुमार और उनकी पत्नी विचित्र लता के लाभकारी मालिकाना हक वाले सात एकड़ प्लॉट को जब्त करने का अस्थायी आदेश आयकर विभाग की दिल्ली स्थित बेनामी निषेध इकाई ने 16 जुलाई को जारी किया था। </p>
<p>कार्रवाई में जब्त किया गया 28,328.07 वर्ग मीटर (सात एकड़) का प्लॉट नोएडा के सेक्टर 94 से 2ए से पंजीकृत है। इस जमीन पर पांच सितारा होटल और अन्य लग्जरी सुविधाओं का निर्माण किये जाने की योजना थी। जब्ती का आदेश बेनामी संपत्ति लेनदेन निषेध अधिनियम 1988 की धारा 24 (3) के तहत जारी किया गया। बेनामी कानून का उल्लंघन करने पर सात साल की कैद या बेनामी संपत्ति के बाजार भाव के हिसाब से 25 फीसदी जुर्माने का प्रावधान है। </p>
<p>मायावती के श्वास इन केन्द्रीय खुफिया संस्थाओं में समाहित हैं। लोकसभा निर्वाचन (2024) तक सब स्पष्ट हो जायेगा। तो राष्ट्रपति,प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री कैसे बन पायेंगी?</p>
<p><strong>लेखक एक वरिष्ठ पत्रकार हैं और इण्डियन फेडरेशन ऑफ़ वर्किंग जर्नलिस्ट के अध्यक्ष हैं। आप लेखक से यहाँ संपर्क कर सकते हैं : mailto:k.vikramrao@gmail.com</strong></p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/head-prowess/mayavati-and-politics-of-maya">श्वास केन्द्रीय खुफिया संस्थाओं में समाहित और &#8216;माया&#8217; का माया रायसीना हिल का लाल बंगला पर</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>लालू के &#8216;छोटका&#8217; ननकिरबा &#8216;दर्जनों&#8217; बच्चा के &#8216;बाबू&#8217; बने, मिथिला-पाग का हश्र &#8220;कांग्रेस&#8221; जैसा नहीं हो, क्योंकि तस्वीर बहुत कुछ कहती हैं</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 21 Dec 2021 13:27:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चुटकुलानन्द की चिठ्ठी]]></category>
		<category><![CDATA[bihar]]></category>
		<category><![CDATA[congress]]></category>
		<category><![CDATA[loksabha]]></category>
		<category><![CDATA[party]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली: बिहार विधान सभा से लेकर, विधान परिषद्, राज्य सभा और लोक सभा में कांग्रेस पार्टी के सम्मानित सदस्यों के संख्या को मद्दे नजर रखते, दिल्ली के 10-जनपथ सहित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राष्ट्रीय आला नेताओं के बीच इस तस्वीर की चर्चा है। चर्चा करने वाले एक ओर जहाँ लालू प्रसाद यादव के नवमी [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/chutkulanands-letter/may-god-bless-tejaswi-dozen-children">लालू के &#8216;छोटका&#8217; ननकिरबा &#8216;दर्जनों&#8217; बच्चा के &#8216;बाबू&#8217; बने, मिथिला-पाग का हश्र &#8220;कांग्रेस&#8221; जैसा नहीं हो, क्योंकि तस्वीर बहुत कुछ कहती हैं</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली: बिहार विधान सभा से लेकर, विधान परिषद्, राज्य सभा और लोक सभा में कांग्रेस पार्टी के सम्मानित सदस्यों के संख्या को मद्दे नजर रखते, दिल्ली के 10-जनपथ सहित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राष्ट्रीय आला नेताओं के बीच इस तस्वीर की चर्चा है। चर्चा करने वाले एक ओर जहाँ लालू प्रसाद यादव के नवमी कक्षा &#8216;उत्तीर्ण&#8217; कनिष्ठ पुत्र तेजस्वी यादव को उनके नवीन वैवाहिक जीवन पर अन्तःमन से बधाई दे रहे हैं, वही लोगों का यह भी कहना है कि प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की स्थिति ऐसी क्यों हुई, मिथिला के नेता के सामने &#8220;मिथिला-पाग&#8221; की यह दशा एक दृष्टान्त हैं। यह दशा न केवल पार्टी की भविष्य को &#8216;वर्त्तमान के रास्ते भूत से भविष्य की दिशा को दर्शा रहा है, बल्कि इस बात का भी जीता-जागता उदाहरण भी है कि मिथिला के लोग मिथिला की संस्कृति के नाम पर मिथिला के पाग का राजनीतिक में कैसे इस्तेमाल करते हैं। </strong></p>
<p>10-जनपथ से दस-कदम दूर स्थित एक सरकारी बंगला के मुख्य द्वार पर खड़े गैर-कांग्रेसी नेता आर्यावर्तइण्डियननेशन को कहते हैं: &#8220;पाग मिथिला का एक सम्मान है। मिथिला के प्रत्येक लोगों की इज्जत है। मिथिला का एक-एक बच्चा पाग के सांस्कृतिक गरिमा को समझता हैं। पाग के रंगों की महत्ता को समझता है। वह यह भी समझता है कि किस रंग का पाग किस अवसर पर कौन पहनता है। पाग किसे पहनाया जाय। पाग पहनाने का शाब्दिक अर्थ और वास्तविक अर्थ क्या है। परन्तु, तकलीफ इस बात कि है कि मिथिला में अब राजनीति होती है और उस राजनीति में मिथिला का पाग धरल्ले से इस्तेमाल होता है । अन्यथा आज मिथिला पाग की यह स्थिति नहीं होती। मिथिला की संस्कृति की यह स्थिति नहीं होती। </p>
<p>नेताजी मुस्कुराते कहते हैं : &#8220;कांग्रेस आला कमान अपनी राजनीतिक पार्टी के सबल (ध्यान रहे इसमें चापलूस, चाटुकार, जीहुजूरी इत्यादि करने वाले नेतागण शामिल नहीं हैं) नेताओं द्वारा खुले मन और आत्मा से अपनी पार्टी की दशा का मंथन करे तो प्रदेश के कांग्रेस पार्टी के ही आला अधिकारी के समक्ष मिथिला-पाग की वर्तमान स्थिति की &#8216;दशा&#8217; और &#8216;दिशा&#8217; सम्पूर्णता के साथ प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की स्थिति को बताता है। </p>
<p><strong>नेताजी आगे कहते हैं: मिथिला में तो करवा चौथ नहीं होता है, वहां की महिलाएं अपने पति के लिए मधुश्रावणी पूजा करती हैं; लेकिन हमारे इलाके की महिलाएं लोग करवा चौथ करती हैं। अगर कांग्रेस पार्टी की बुनियाद और वर्तमान स्थिति के साथ, पार्टी की भविष्य के साथ तुलनात्मक अध्ययन किया जाय, तो 10-जनपथ के अंदर बैठी मोहतरमा के अलावे कांग्रेस के राष्ट्रीय नेताओं से लेकर कानपुर, बनारस, दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन और बक्सर के रास्ते पाटलिपुत्र स्थित कांग्रेसी नेतागण के सामने बिहार में कांग्रेस की वर्तमान और भविष्य को कारवाँ-चौथ वाली छलनी से छना चन्द्रमा जैसा साफ़ दिखेगा। </strong></p>
<p><strong>बहरहाल, 243 सदस्यों वाली बिहार विधान सभा में कांग्रेसियों स्थिति का वास्तविक परिचय यह आंकड़ा करा रहा है। वर्तमान में कांग्रेस विधायकों की संख्या 19 है जबकि 75 संख्या वलिव विधान परिषद् में कांग्रेस 3 की संख्या पर टिमटिमा रही है। बिहार से दिल्ली के ऊपरी सदन यानी राज्य सभा में 16 सदस्यों की सख्या में 1 &#8216;सम्मानित&#8217; सांसद है और लोक सभा के 40 सदस्यों में भी अंक 1 ही है। </strong> </p>
<p>ज्ञातव्य को कि कुछ वर्ष पूर्व कांग्रेस के करीब 23 नेताओं ने, जिसमें पांच पूर्व मुख्यमंत्री, कई पूर्व केंद्रीय मंत्री मसलन गुलाम नवी आज़ाद, आनंद शर्मा, कपिल सिब्बल, मनीष तिवारी, शशि थरूर, मुकुल वासनिक, भूपिंदर हुडा, पृथ्वीराज चवण, राज बब्बर भी थे, सबों ने 10-जनपथ के साथ-साथ कांग्रेस पार्टी में आमूल परिवर्तन के लिए हल्ला बोले थे। </p>
<p>बहरहाल, महोदय हँसते कहते हैं: &#8220;लालू प्रसाद यादव के छोटका ननकिरबा और उसकी कनिया का वैवाहिक जीवन लड्डू जैसा मीठा हो, जीवन पर्यन्त। पिता के सभी गुणों को ग्राह्य करे छोटका ननकिरबा । राजनीतिक जीवन में उत्कर्ष पर पहुंचे (सजग मतदाता अधिक ज्ञानी हैं) । घर में दर्जनों बच्चों का सूर्योदय से अर्ध-रात्रि तक कलरव होता रहे। माता-पिता-दादा-दादी बच्चों की शोरगुल से अपने तत्कालीन युग में जियें, हँसे, आनंद लें। महादेव से प्रार्थना करुंगा । लेकिन सीता-विवाह भी तो कुछ दिन पहले ही मिथिला में संपन्न हुआ है। मिथिला के लोगों को ऐसे नेताओं से एक बित्ता की दूरी अवश्य रखना चाहिए जिन्होंने &#8220;पाग&#8221; को &#8220;मजाक&#8221; बना दिया है। यह तस्वीर जीता-जागता उदाहरण हैं।&#8221;</p>
<p>खैर, आज़ादी के बाद, या यूँ कहें कि महाराजा कामेश्वर सिंह की मृत्यु तक मिथिला की संस्कृति जितनी मजबूत और सुरक्षित थी, आज नहीं है। यानी अक्टूबर 1962 के बाद मिथिलाञ्चल में मिथिला की संस्कृति को संरक्षित रखने वाला नहीं रहा। आज भले हम मिथिला लोक-चित्रकला को विश्व में प्रचार-प्रसार के माध्यम से फैलाएं, लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि मिथिला लोकचित्रकला के कलाकार आज मृतप्राय हो गए हैं। समाज, सरकार अथवा मिथिलाञ्चल के जिला प्रमुखों से इस ऐतिहासिक लोकचित्रकला को उतना संरक्षण नहीं मिलता है जितने का वह हकदार हैं। </p>
<p>आज स्थिति ऐसी हो गयी है की मिथिलाञ्चल के लोग, विशेषकर पुरुष समुदाय, न केवल “पाग के वास्तविक महत्व” से अपरिचित हैं, बल्कि उसका सम्मान भी नहीं कर पाते हैं। अगर ऐसा नहीं होता तो इस पाग को “सब धन बाईस पसेरी” जैसा सबों के माथे पर सजाकर फोटो-सेशन नहीं करते, सोसल मीडिया पर या भारत की सड़कों पर “पाग का राजनीतिकरण नहीं होने देते, नहीं करते।” </p>
<p>‘मैथिल’ शब्द दरअसल एक सामुदायिक पहचान है, जिसका सीधा संबंध मिथिला की सांस्कृतिक अस्मिता से है, किसी जाति, धर्म, संप्रदाय से नहीं। हर क्षेत्र के नागरिकों की सामुदायिक, सांस्कृतिक और क्षेत्रीय पहचान के साथ-साथ उन सबकी अलग-अलग जातीय पहचान भी होती है। कोई भी सामुदायिक पहचान उस क्षेत्र की जातीय पहचान पर सवाल नहीं उठाती। पर मिथिला में ऐसा दिखता है। कहा जाता है कि भारत सहित विश्व में कोई चार करोड़ से अधिक मैथिल हैं।दरभंगा, मधुबनी, झंझारपुर और सुपौल में खासतौर पर, और इसके अलावा बिहार के कई जिलों और दूसरे राज्यों में भी मैथिल या मैथिली भाषी बसे हुए हैं। </p>
<p>अगर मिथिलांचल के लोग, विशेषकर जो “पाग की अहमियत” समझते हैं, अपने ही घरों में, अपने ही समाज में, टोले-मुहल्लों में एक सर्वे करें की किनके – किनके घरों में “वास्तविक पाग (सफ़ेद रंग का अथवा भटमैला रंग का) है ? हाल, पीला, हरा, ब्लू, रंग-बिरंगा, सतरंगी, लोकचित्रकला वाला नहीं; तो औसतन सैकड़े घरों की बात नहीं करें, हज़ार घरों में शायद दस अथवा बीस घरों में पाग की उपस्थिति दर्ज होगी। विस्वास नहीं तो हो आजमा कर देखिए। अब स्थिति यह है कि हम अपने घरोंमें, मिथिला के समाजों में पाग के महत्व को नहीं बता सके, वर्तमान पीढ़ी को नहीं बता सके, लेकिन देश के मुंबई, दिल्ली, कलकत्ता, चेन्नई, बंगलुरु, मंगलुरु, कानपूर, नागपुर, बराकर के अतिरिक्त देश के 718 जिलों में “पाग से अर्थ कमाने के लिए पाग का विपरण करने में जुटे हैं।” </p>
<p>देवशंकर नवीन का कहना है : इसके अतिरिक्त, क्या सर्वजन मैथिलों ने आम सहमति से अपने पारंपरिक प्रतीक ‘पाग’ के स्वरूप में यह फेरबदल स्वीकार कर लिया? अब तक पाग पर किसी तरह की चित्रकारी की मान्यता नहीं थी। कहीं ऐसा तो नहीं कि बाजार की चमक-दमक ने मैथिलों के सांस्कृतिक संकेत पर अपना कब्जा बना लिया! </p>
<p>दूसरा सवाल पाग की पारंपरिक मान्यता को लेकर है। बचपन से देखता आ रहा हूं कि अनेक शहरों में मैथिल जनता अपनी उपस्थिति दर्ज करने के लिए महाकवि विद्यापति की बरसी मनाती है। उन आयोजनों में आमंत्रित विशिष्ट जनों का पाग-डोपटा से सम्मान करते और अपने सांस्कृतिक उत्कर्ष का दावा करते हुए मैथिल आत्ममुग्ध होते हैं। गीत, कविता, चुटकुला, नाच-नौटंकी सब आयोजित करते हैं। आयोजन का नाम रहता है ‘विद्यापति स्मृति पर्व’, पर विद्यापति वहां सिरे से गायब रहते हैं। आयोजन का लक्ष्य शायद ही कहीं साहित्य और संस्कृति का उत्थान या अनुरक्षण रहता हो!  </p>
<p>सतही मनोरंजन के अलावा वहां ऐसा कुछ भी नहीं दिखता, जिसमें ‘मैथिल’ का कोई वैशिष्ट्य सिर उठाए। ‘पाग’ जैसे सांस्कृतिक प्रतीक की अधोगति भी ऐसे अवसरों पर भली-भांति हो जाती है। दरअसल, मिथिला में ‘पाग’ का विशष्ट महत्त्व है। पर उल्लेखनीय है कि यह पूरी मिथिला का सांस्कृतिक प्रतीक नहीं है। ‘पाग’ की प्रथा मिथिला में सिर्फ ब्राह्मण और कायस्थ में है। इन जातियों के भी ‘पाग’ की संरचना में एक खास किस्म की भिन्नता होती है, जिसे बहुत आसानी से लोग नहीं देख पाते। पाग के अगले भाग में एक मोटी-सी पट्टी होती है, वहीं इसकी पहचान-भिन्नता छिपी रहती है। इससे आगे की व्याख्या यह है कि इन दो जातियों में भी सारे लोग पाग नहीं पहनते। परिवार या समाज के सम्मानित व्यक्ति इसे अपने सिर पर धारण करते हैं। यह उनके ज्ञान और सामाजिक सम्मान का सूचक है। </p>
<p>समय के ढलते बहाव में धीरे-धीरे यह प्रतीक उन सम्मानित जनों के लिए भी विशिष्ट आयोजनों-अवसरों का आडंबरधर्मी प्रतीक बन गया। संरचना के कारण इसे धारण करना बहुत कठिन है। विनीत भाव से भी इसके धारक कहीं थोड़ा झुक जाएं, तो यह सिर से गिर जाता है। मैथिली में ‘पाग गिरना’ एक मुहावरा है, जिसका अर्थ है ‘पगड़ी गिरना’, ‘इज्जत गंवाना’। लिहाजा, संशोधित परंपरा में आस्था रखने वाले आधुनिक सोच के लोगों के सामने इसने बड़ी दुविधा खड़ी कर दी है। </p>
<p>दूसरा प्रसंग ‘लाल पाग’ का है। ‘लाल पाग’ विशुद्ध रूप से उक्त दोनों जातियों के लिए वैवाहिक प्रतीक है। इसे केवल विवाह या विवाह से संबद्ध लोकाचारों में दूल्हा पहनता है। लेकिन अब अपनी संरचनात्मक असुविधा के कारण दूल्हे भी इसे खानापूर्ति या रस्मअदायगी के लिए धारण करते हैं। ऐसे में ‘पाग’ को पूरी मिथिला की सांस्कृतिक पहचान मानना शायद सही नहीं होगा। उसमें पूरे मैथिल-समाज की भागीदारी नहीं होगी। </p>
<p>इसके अलावा, यह भी समझा जाएगा कि सिर्फ दो जातियां पूरे मिथिला की सभी जातियों पर अपनी परंपरा थोप रही हैं। सामुदायिक स्तर पर देखें तो इसका बेहतरीन विकल्प ‘मखाना’ है, जो मिथिला की जल-कृषि का प्रतीक है। मिथिला के उन्नायकों को जाति-विशेष की लकीर पर डटे रहने के बजाय इस दिशा में सोचना चाहिए। अपनी सांस्कृतिक धरोहरों पर गर्व करना अच्छी बात है, पर उन्हें जानना जरूरी है। परंपरा को जाने बगैर कोई उसका समुचित सम्मान नहीं कर सकता। </p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/chutkulanands-letter/may-god-bless-tejaswi-dozen-children">लालू के &#8216;छोटका&#8217; ननकिरबा &#8216;दर्जनों&#8217; बच्चा के &#8216;बाबू&#8217; बने, मिथिला-पाग का हश्र &#8220;कांग्रेस&#8221; जैसा नहीं हो, क्योंकि तस्वीर बहुत कुछ कहती हैं</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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