<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>parlaiment Archives - आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</title>
	<atom:link href="http://www.aryavartaindiannation.com/tag/parlaiment/feed" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.aryavartaindiannation.com/tag/parlaiment</link>
	<description>आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</description>
	<lastBuildDate>Thu, 25 May 2023 12:35:39 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=7.0.7</generator>
	<item>
		<title>दिल्ली सल्तनत में राजनीतिक उठापटक के बीच &#8216;दो घूंट शीतल जल के लिए तरस रहे हैं लोकमान्य बालगंगाधर तिलक&#8217;</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/head-prowess/neglected-statue-of-tilak</link>
					<comments>http://www.aryavartaindiannation.com/head-prowess/neglected-statue-of-tilak#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 25 May 2023 12:35:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मुखियाजी उवाच]]></category>
		<category><![CDATA[centre]]></category>
		<category><![CDATA[delhi government]]></category>
		<category><![CDATA[dilli]]></category>
		<category><![CDATA[kejrivaal]]></category>
		<category><![CDATA[lokmany]]></category>
		<category><![CDATA[new delhi]]></category>
		<category><![CDATA[parlaiment]]></category>
		<category><![CDATA[tilak]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.aryavartaindiannation.com/?p=4916</guid>

					<description><![CDATA[<p>कल की ही तो बात है। कल का प्रगति मैदान और आज का सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन से पैदल सर्वोच्च न्यायालय की ओर चल रहा था। सूर्यदेव सर पर विराजमान थे। मेट्रो स्टेशन से बाहर निकलते ही दिल्ली सल्तनत के ऑटो वाला, जिन्होंने भारतीय राजस्व सेवा के एक अधिकारी को &#8216;आम आदमी&#8217; का नेता मानकर [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/head-prowess/neglected-statue-of-tilak">दिल्ली सल्तनत में राजनीतिक उठापटक के बीच &#8216;दो घूंट शीतल जल के लिए तरस रहे हैं लोकमान्य बालगंगाधर तिलक&#8217;</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कल की ही तो बात है। कल का प्रगति मैदान और आज का सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन से पैदल सर्वोच्च न्यायालय की ओर चल रहा था। सूर्यदेव सर पर विराजमान थे। मेट्रो स्टेशन से बाहर निकलते ही दिल्ली सल्तनत के ऑटो वाला, जिन्होंने भारतीय राजस्व सेवा के एक अधिकारी को &#8216;आम आदमी&#8217; का नेता मानकर दिल्ली सचिवालय में बैठा दिया, चारो तरफ से टूट पड़ा । पूछने लगा &#8211; कहाँ जाओगे? कहाँ जाओगे? वैसे आज ये सभी ऑटो वाले यह कहते नहीं थकते कि उनका वह नेता उन्हें ठग लिया। ऑटो के पीछे पार्टी का पोस्टर से लेकर उनकी तस्वीरों को दिल्ली के एक-एक मतदाताओं तक पहुँचाया, नेत्रहीन भी देखने लगे, विश्वास करने लगे। लेकिन अंततः छले गए। जितना आश्वासन था, पूरा नहीं हुआ। </strong></p>
<p>स्टेशन के दाहिने हाथ फुटपाथ पर कुछ दुकानें लगी थी। काला-सफ़ेद वस्त्रों में कई लोग आपस में विचार-विमर्श कर रहे थे। इस स्थान पर कई लोगों के, खासकर महिलाओं के लिए, &#8221;ऑटो&#8217; निश्चित होते हैं ताकि समय पर उन्हें दफ्तर या न्यायालय के परिसर तक पहुँचाया जा सके। उधर कुछ नवयुवक और नवयुवतियां, कोई जंघा पर फटा पतलून, तो कोई कंधे से लटकते वस्त्र पहने आपस में मिलन कर रहे थे। कई महिलाओं की शरीर की ऊपरी वस्त्रों की लम्बाई उतनी ही थी कि जैसे ही वह पीने के लिए पानी के बोतल ऊपर की, वस्त्र का आकार और भी छोटा हो गया। हवा तेज चल रही थी और वस्त्र भी बहुत &#8216;फैला&#8217; था। ऐसा लग रहा था कि किसी मोटे आदमी का वस्त्र पहन ली है। एक सज्जन कह भी दिए &#8211; आजकल फैशन में यही चल रहा है। खैर। </p>
<p>एक नजर अपनी कलाई पर बंधी घड़ी की और गई। कलाई पर बंधी घड़ी में छोटी सूई 12 पर विश्राम कर रही थी, जबकि बड़ी सूई तनिक आगे बढ़कर दो और तीन के बीच मटरगस्ती कर रही थी। कई वर्षों के बाद दिल्ली सल्तनत में सूर्यदेव का इस कदर प्रचंड आगमन हुआ है। सूर्यदेव को भी ज्ञात रहता है कि अगले वर्ष उनके आगमन से पूर्व देश में आम चुनाव होगा। मैं अपने बाएं हाथ दिल्ली पुलिस के  आदेश के अनुसार किनारे-किनारे चल रहा था। यह रास्ता तिलक मार्ग में प्रवेश के लिए अपने अंतिम छोड़ से &#8216;छोटा रास्ता&#8217; लेता है जो मेट्रो स्टेशन से आने वाली उपर गामी पथ के नीचे से आगे बढ़ते तिलक मार्ग में मिलता है। </p>
<p>तभी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की आदम कद प्रतिमा की ओर नजर गई। दिल्ली सल्तनत में सड़कों पर चलने वाले, या यूँ कहें कि मथुरा रोड और तिलक मार्ग पर लाखों-करोड़ों की संख्या में चलने वाले लोगों से अगर पूछा जाए कि तिलक मार्ग पर तिलक की प्रतिमा कहाँ स्थापित है &#8211; विश्वास कीजिए अधिकांश लोग नहीं बता पाएंगे। हां, उस क्षेत्र में, उस स्थान पर दिल्ली की सड़कों पर अपना जीवन यापन करने वाले लोग शायद बता दें। </p>
<p>प्रतिमा के दाहिने हाथ सड़क के नुक्कड़ पर एक महिला बोतल वाला पानी बेच रही थी। वहीँ दिल्ली से प्रकाशित सभी अख़बारों को बेचते हुए एक हॉकर भी दिखा। मैं कुछ क्षण वहां रुका।  कुछ तस्वीरें ली। फिर पानी का बोतल लेकर आगे बढ़ा। </p>
<p>हाथ में पानी का बोतल लिए जैसे ही सम्मानित तिलक साहेब के चेहरे को देखा, उनके आगे एनडीएमसी द्वारा बनाये गए &#8216;तालाब&#8217; को देखा &#8211; मन दुखी हो गया। फिर स्वयं को संभालते, महामहिम तिलक साहेब को &#8216;सांत्वना&#8217; देते कहा: &#8220;हुकुम, जब दिल्ली आपकी थी, दिल्ली के नलों में और लोगों की आखों में पानी था। आज नल भी सुख गए हैं या उन स्थानों पर विस्थापित कर दिए गए हैं जहाँ से सत्ताधारियों की गलियां निकलती है, जुड़ती है। आखों में पानी की तो बात ही नहीं करें।&#8221;</p>
<p>फिर कहा: &#8220;वैसी स्थिति में आपके सामने एनडीएमसी द्वारा बनाये गए इस तालाब में पानी नहीं है तो आप व्यथित नहीं हों। मैं अभी-अभी एक बोतल पानी ख़रीदा हूँ &#8211; कुछ घूंट पहले आप ग्रहण कर अपनी प्यास को बुझाएं। आपके शरीर को भी पक्षी दूषित कर दिया है। मेरी ऊंचाई आप जैसी नहीं है। मैं एक अदना सा आदमी हूँ, पत्रकार हूँ। आप भी पत्रकार थे। जो पत्रकार चापलूस नहीं होते उनकी क्या गति होती है, मुझसे बेहतर आप जानते हैं। मैं चाहता था कि इस तपती गर्मी में आपको पानी से स्नान कराऊँ। लेकिन ऐसा नहीं कर सकता। मेरी पहुँच भी उतनी नहीं है कि किसी को फोन कर बुलाऊँ। मुझे क्षमा कर दें। लेकिन इस दीन पत्रकार के हाथों दो घूंट पानी पीकर गले तो गीला कर लें। आप स्वीकार करेंगे तो इस अखबारवाला पर आपका एहसान होगा।&#8221;</p>
<p>निवेदन इसलिए कर रहा हूँ कि दिल्ली के मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल में उठापटक हो रहा है। केंद्र में सभी मंत्रीगण, अधिकारीगण &#8216;संसद के नए भवन&#8217; के उद्घाटन में किसे बुलाया जाए, किसे नहीं बुलाया जाय &#8211; लगे हैं। उधर दर्जनों राजनीतिक पार्टियां, नेतागण सार्वजनिक रूप से ऐलान कर रहे हैं, कुस्ती लड़ रहे हैं, कह रहे हैं कि वे उद्घाटन समारोह में नहीं जायेगे। उनका कहना है कि संसद का उद्घाटन तो राष्ट्रपति महोदया के हाथों होनी चाहिए। कोई कहते हैं कि संसद प्रधानमंत्री का निजी आवास नहीं है कि वे स्वयं उद्घाटन करें। बहुत तरह की बातें हैं। चपरासी से लेकर केंद्रीय मंत्रिमंडल के आला मंत्री तक सभी दौड़-भाग कर रहे हैं।  सभी भयभीत है कहीं प्रधानमंत्री गुस्सा नहीं हो जाएँ। </p>
<p>इस चिलचिलाती धूप में आपकी ओर किसी का ध्यान नहीं जायेगा। अब तो सभी भूलते भी जा रहे हैं आपको। इस गरीब अखबारवाला की विनती स्वीकार करें। आपका यह आदमकद प्रतिमा भले भारत के सर्वोच्च न्यायालय के पास स्थापित हो, लेकिन आप भी कभी इस बात पर ध्यान नहीं दिए कि आप सर्वोच्च न्यायालय के दीवार से बाहर हैं। पीछे जंगल नुमा झाड़ी है। किसी की भी नजर आप पर नहीं पड़ेगी। </p>
<p><strong>तभी, तिलक साहब की नजर मेरी नजर से मिली। अन्तःमन से दो आत्मों का मिलन हुआ।  वे मेरी मूंछ की ओर देखे, फिर मुस्कुरा दिए। इससे से पहले कि मैं कुछ कहूं, वे मेरे हाथों से पानी का बोतल लिए, दो घूंट पिए, फिर कहते हैं : &#8216;आप मन और आत्मा से जीवित हैं इस पत्थर के लिए भी, महादेव आप पर अपनी कृपा बनाये रखें और फिर आत्मा अदृश्य हो गयी। </strong></p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/head-prowess/neglected-statue-of-tilak">दिल्ली सल्तनत में राजनीतिक उठापटक के बीच &#8216;दो घूंट शीतल जल के लिए तरस रहे हैं लोकमान्य बालगंगाधर तिलक&#8217;</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>http://www.aryavartaindiannation.com/head-prowess/neglected-statue-of-tilak/feed</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
