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	<title>nation Archives - आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</title>
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	<description>आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</description>
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		<title>आज रात 8.30 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी​ &#8216;संभवतः&#8217; राष्ट्र को सम्बोधित करेंगे, यह पिछले 12 साल में &#8217;13 वां&#8217; संबोधन होगा </title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 18 Apr 2026 12:40:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 18 अप्रैल​:​ संसद में महिला आरक्षण अधिनियम से संबंधित ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’ पास नहीं होने के कारण ​संभवतः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ​आज रात 8:30 बजे राष्ट्र को संबोधित करने वाले हैं। यह संबोधन ऐसे समय में हो रहा है जब सरकार को एक बड़ा विधायी झटका लगा है और भू-राजनीतिक चिंताएं [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/nation/prime-minister-narendra-modi-will-likely-address-the-nation-tonight-at-830-pm">आज रात 8.30 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी​ &#8216;संभवतः&#8217; राष्ट्र को सम्बोधित करेंगे, यह पिछले 12 साल में &#8217;13 वां&#8217; संबोधन होगा </a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली, 18 अप्रैल​:​ संसद में महिला आरक्षण अधिनियम से संबंधित ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’ पास नहीं होने के कारण ​संभवतः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ​आज रात 8:30 बजे राष्ट्र को संबोधित करने वाले हैं। यह संबोधन ऐसे समय में हो रहा है जब सरकार को एक बड़ा विधायी झटका लगा है और भू-राजनीतिक चिंताएं बढ़ रही हैं। इस बहुप्रतीक्षित प्रसारण को सरकार के राजनीतिक और नीतिगत संदेश के लिए एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।​ संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 विधेयक लंबे समय से चर्चा में रहे &#8216;महिला आरक्षण&#8217; के ढांचे से जुड़ा था, लेकिन इसे लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका।</strong></p>
<blockquote><p>प्रधानमंत्री द्वारा यह संभावित सम्बोधन पिछले 12 वर्षों (2014-2026) में लगभग तेरहवां संबोधन होगा।  8 नवंबर, 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक टेलीविज़न संबोधन में घोषणा की कि आधी रात से ₹500 और ₹1,000 के नोट अब वैध मुद्रा नहीं रहेंगे; इसका उद्देश्य काले धन, भ्रष्टाचार और जाली मुद्रा पर लगाम लगाना था। नोटबंदी को घोषणा के बाद 31 दिसंबर 2016 को नए साल की पूर्व संध्या पर नरेंद्र मोदी राष्ट्र को संबोधित किये थे। 27 मार्च 2019 को एंटी-सैटेलाइट मिसाइल टेस्ट के अवसर पर, फिर 8 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35A का निष्प्रभावी होने के बाद, मार्च-मई 2020 में जनता कर्फ्यू (19 मार्च), लॉकडाउन (24 मार्च, 3 अप्रैल) और आत्मनिर्भर भारत अभियान (12 मई) की घोषणाएं किये थे। </p></blockquote>
<p>इस विधेयक में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रस्ताव था। इसके साथ ही, इसमें एक &#8216;परिसीमन&#8217; प्रक्रिया का भी प्रावधान था, जिससे लोकसभा (निचले सदन) की सदस्य संख्या बढ़कर 816 हो जाती। हालांकि, एक तीखी और ध्रुवीकृत बहस के बाद यह विधेयक पारित नहीं हो सका, क्योंकि विपक्षी दलों ने इसे अपना समर्थन नहीं दिया।​ हालांकि प्रधानमंत्री कार्यालय ने आधिकारिक तौर पर इस संबोधन का एजेंडा स्पष्ट नहीं किया है, लेकिन सरकारी सूत्रों ने संकेत दिया है कि प्रधानमंत्री अपने भाषण में इस अटके हुए विधेयक, महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े व्यापक सवालों और भविष्य के लिए सरकार के &#8216;रोडमैप&#8217; पर बात कर सकते हैं।</p>
<p>यह घटना एक दुर्लभ उदाहरण है, जिसमें एक उच्च-स्तरीय संवैधानिक संशोधन अपने अंतिम चरण में आकर विफल हो गया। यह घटना सत्ताधारी गठबंधन और विपक्षी दलों के बीच बढ़ती हुई गहरी दरारों को भी उजागर करती है।​ सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने संकेत दिया कि मोदी इस मंच का उपयोग सीधे जनता से अपील करने के लिए कर सकते हैं। वे इस विधेयक को &#8216;लैंगिक समानता&#8217; की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम के रूप में प्रस्तुत कर सकते हैं, जिसे &#8216;राजनीतिक स्वार्थों&#8217; के चलते बाधित किया गया।</p>
<p><strong>हालांकि, इस विधेयक को &#8216;परिसीमन&#8217; प्रक्रिया से जोड़ने का मुद्दा एक विवाद का विषय बन गया। विपक्षी दलों ने तर्क दिया कि इस तरह की क्रमबद्धता के कारण विधेयक के कार्यान्वयन में देरी हो सकती है, और इससे विभिन्न राज्यों के बीच राजनीतिक संतुलन भी बिगड़ सकता है। बिल के पास न हो पाने से जो राजनीतिक असर पड़ा है, उसके प्रधानमंत्री के भाषण में हावी रहने की उम्मीद है, खासकर तब जब सरकार आने वाले चुनावों से पहले अपनी बात को मज़बूती से रखना चाहती है। जानकारों का कहना है कि यह भाषण सरकार के सुधार एजेंडे का बचाव करने और लोगों की सोच को बदलने की एक सोची-समझी कोशिश, दोनों का काम कर सकता है। संसदीय मामलों के जानकार एक राजनीतिक विश्लेषक ने कहा, &#8220;ऐसे हालात में देश के नाम संबोधन शायद ही कभी सामान्य होता है—इसका मकसद अक्सर अपनी बात को नए सिरे से रखना और लोगों का समर्थन जुटाना होता है।&#8221;</strong></p>
<p>इस संबोधन को और भी ज़्यादा ज़रूरी बनाने वाली बात संसद के बाहर हो रहे घटनाक्रम हैं। दिन की शुरुआत में, मोदी ने सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति और आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति की बैठकें कीं, जहाँ कथित तौर पर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और भारत की ऊर्जा आपूर्ति, खाद्य सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर इसके संभावित असर पर चर्चा हुई। वैश्विक बाज़ारों में उतार-चढ़ाव के संकेत दिख रहे हैं, ऐसे में प्रधानमंत्री इस संबोधन का इस्तेमाल नागरिकों को यह भरोसा दिलाने के लिए भी कर सकते हैं कि सरकार बाहरी झटकों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।</p>
<p>घरेलू राजनीतिक उथल-पुथल और अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितता के मेल ने इस भाषण को लेकर उत्सुकता और बढ़ा दी है, और सरकार के अगले कदमों के संकेतों का इंतज़ार उसके समर्थक और आलोचक, दोनों ही कर रहे हैं। यह देखना होगा कि क्या यह संबोधन आम सहमति बनाने के मकसद से सुलह का रास्ता अपनाता है, या विपक्ष के खिलाफ ज़्यादा आक्रामक रुख अपनाता है; आने वाले हफ़्तों में देश की राजनीतिक चर्चा का रुख इसी बात से तय हो सकता है।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/Bill-1.jpg"><img fetchpriority="high" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/Bill-1.jpg" alt="" width="2125" height="1159" class="aligncenter size-full wp-image-7632" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/Bill-1.jpg 2125w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/Bill-1-300x164.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/Bill-1-1024x559.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/Bill-1-768x419.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/Bill-1-1536x838.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/Bill-1-2048x1117.jpg 2048w" sizes="(max-width: 2125px) 100vw, 2125px" /></a></p>
<p><strong>​ज्ञातव्य हो कि कल केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों पर महिला आरक्षण का विरोध करने का आरोप लगाते हुए लोकसभा में कहा कि देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनके ‘‘रास्ते का रोड़ा’’ कौन है और विपक्ष के नेताओं को चुनाव में महिलाओं के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा। शाह ने महिला आरक्षण अधिनियम से संबंधित ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’, ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ पर सदन में चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि जो लोग परिसीमन का विरोध कर रहे हैं, वे कहीं न कहीं अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (एससी-एसटी) के लिए आरक्षित सीटों में बढ़ोतरी का विरोध कर रहे हैं।</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन के सभी सदस्यों ने ‘‘अगर-मगर, किंतु-परंतु का उपयोग करके स्पष्ट रूप से महिला आरक्षण का विरोध किया है। यह दिखाने का प्रयास किया गया कि विरोध हमारे क्रियान्वयन के तरीके पर है। मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि यह विरोध क्रियान्वयन का नहीं, बल्कि केवल महिला आरक्षण का विरोध है।’’​ नरेन्द्र मोदी सरकार महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देकर रहेगी। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रधानमंत्री मोदी का उद्देश्य महिला सशक्तीकरण करने वाले इस संविधान सुधार को समयबद्ध तरीके से लागू करके 2029 का चुनाव महिला आरक्षण के साथ करने का है।</p>
<p>शाह ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि अगर ये (विपक्ष) वोट नहीं देंगे तो संविधान संशोधन विधेयक सदन में गिर जाएगा, लेकिन विपक्षी दलों के नेताओं को चुनाव में महिलाओं के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा। चुनाव में वे जब जाएंगे तब मातृशक्ति हिसाब मांगेगी।’’​ शाह के जवाब के बाद, मत विभाजन में महिला आरक्षण और परिसीमन से संबंधित ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’ गिर गया। इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े।​ लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है।​ संविधान संशोधन विधेयक गिरने के बाद इससे संबंधित दोनों विधेयकों परिसीमन विधेयक, 2026 और संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 को आगे नहीं बढ़ाया जा सका।</p>
<p>इससे पहले, शाह ने अपने जवाब में कहा कि कांग्रेस ने सत्ता में रहते हुए भी विधायिका में महिलाओं के 33 प्रतिशत आरक्षण को बार-बार रोका और अब विपक्ष में रहते हुए भी इसे रोक रही है।​ उन्होंने कहा, ‘‘2023 में प्रधानमंत्री मोदी जानबूझकर महिला आरक्षण विधेयक लाए क्योंकि 2024 का चुनाव था और उन्हें पता था कि कांग्रेस विरोध नहीं कर पाएगी। तब पहली बार इसे सर्वसम्मति से पारित किया गया। हमें लगता था कि तब हो गया तो अब भी पारित हो जाएगा, लेकिन ये (विपक्ष) ‘किंतु-परंतु, अगर-मगर’ करके पांचवीं बार फिर विरोध कर रहे हैं।’’</p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी के सभी कामों का विरोध करने की ठान रखी है और उसने अनुच्छेद 370 को समाप्त करने का, राम मंदिर (निर्माण) का, तीन तलाक को समाप्त करने का, जीएसटी का विरोध किया। उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस ने नये संसद भवन का, सहकारिता मंत्रालय का विरोध किया, सर्जिकल स्ट्राइक का, एयर स्ट्राइक का और ऑपरेशन सिंदूर तक का विरोध किया।’’​ शाह ने कहा कि महिला आरक्षण से कांग्रेस के पीछे हटने का कारण यह है कि वह इसका श्रेय प्रधानमंत्री मोदी को नहीं देना चाहती।</p>
<figure id="attachment_7634" aria-describedby="caption-attachment-7634" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/Nitish-2-1.jpg"><img decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/Nitish-2-1.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-7634" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/Nitish-2-1.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/Nitish-2-1-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/Nitish-2-1-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/Nitish-2-1-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2026/04/Nitish-2-1-1536x1026.jpg 1536w" sizes="(max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-7634" class="wp-caption-text">​सन्नाटा विजय चौक पर &#8211; तस्वीर: संजय शर्मा</figcaption></figure>
<blockquote><p>गृह मंत्री ने कहा कि इन विधेयकों का उद्देश्य संविधान की ‘एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य (वैल्यू)’ की भावना को लागू करना भी है।​ उन्होंने कहा कि देश में 127 से अधिक लोकसभा क्षेत्र 20 लाख से अधिक मतदाताओं वाले हैं, और कुछ सीटों पर 28 लाख से 48 लाख तक मतदाता हैं, ऐसे में जन प्रतिनिधि के रूप में सांसद कैसे अच्छी तरह जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकते हैं।​ उन्होंने कहा कि इसे देखते हुए संविधान में समय-समय परिसीमन का प्रावधान किया गया है और उसी से एससी, एसटी की सीटें भी बढ़ने का प्रावधान है।​ उन्होंने कहा, ‘‘इस तरह परिसीमन का विरोध करने वाले एक तरह से एससी-एसटी सीटें बढ़ने का विरोध कर रहे हैं।’’</p></blockquote>
<p>उन्होंने 2026 में संविधान संशोधन विधेयक लाने के विपक्ष के सवालों पर कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम (2023) में जिक्र है कि 2026 के बाद होने वाली जनगणना के बाद जो परिसीमन होगा, उसमें महिला आरक्षण सुनिश्चित करेंगे।​ शाह ने कहा कि 1976 में कांग्रेस की सरकार के समय से 2026 तक, 50 वर्षों तक देश में लोकसभा सीटों की संख्या ‘फ्रीज’ थी और जनता को जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व नहीं मिला। उन्होंने कहा, ‘‘2026 में यह सीमा समाप्त हो गई। अब परिसीमन करते हैं तो 2029 से पहले समाप्त नहीं हो सकता। इसलिए 2029 का चुनाव नारी शक्ति वंदन अधिनियम की भावना से करना चाहते हैं और आधी आबादी को 33 प्रतिशत आरक्षण देना चाहते हैं तो इसे अभी लाना होगा।’’​ उन्होंने कहा कि 140 करोड़ जनता के मन में किसी तरह की भ्रांति, भ्रम नहीं हो, इसलिए ‘‘मैं फिर से स्पष्ट करना चाहता हूं कि प्रधानमंत्री मोदी की कैबिनेट ने जाति जनगणना का जो निर्णय लिया है वह 2026 की जनगणना के साथ कराने का है।’’</p>
<p>शाह ने 2011 की जनगणना के अनुसार परिसीमन के साथ महिला आरक्षण लागू होने से दक्षिणी राज्यों के साथ अन्याय होने के विपक्ष के दावों को खारिज करते हुए दोहराया कि दक्षिणी राज्यों का इस सदन पर उतना ही अधिकार है जितना उत्तर के राज्यों का।​ उन्होंने कहा, ‘‘हम उत्तर-दक्षिण का भेद नहीं होने देंगे।’’​ गृह मंत्री ने विपक्षी नेताओं को आड़े हाथ लेते हुए कहा, ‘‘आप ऐसी धारणा पैदा करके लोकप्रिय नहीं हो पाओगे, बाल सफेद हो जाएंगे लेकिन यहां (सत्तापक्ष में) नहीं बैठ पाओगे।’’ </p>
<p><strong>शाह ने कहा कि दक्षिणी राज्यों &#8212; कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना और केरल की इस समय लोकसभा में 129 सीटें हैं जिनका (वर्तमान में) कुल 543 सीटों में प्रतिशत 23.76 है। उन्होंने कहा कि सीटों में 50 प्रतिशत वृद्धि के साथ इन पांचों राज्यों में सीटें 195 हो जाएंगी जो कुल 816 सीटों में 23.87 प्रतिशत होंगी।​ उन्होंने यह भी कहा कि यदि विधेयक में सीटों की संख्या 50 प्रतिशत बढ़ाने का लिखित उल्लेख नहीं होने के कारण विपक्षी दल विरोध कर रहे हैं तो एक घंटे का समय दें, वह इस बारे में तत्काल संशोधन ले आएंगे।​ शाह ने महिला आरक्षण में मुस्लिम आरक्षण की समाजवादी पार्टी की मांग पर कहा कि संविधान के तहत धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता।</strong></p>
<p>उन्होंने ओबीसी महिलाओं के आरक्षण की मांग के संबंध में कहा कि जाति जनगणना के बाद रिपोर्ट आएगी और उस पर इस सदन में विचार करने के बाद जो भी सामूहिक मत बनेगा, उस बारे में आगे बढ़ा जा सकता है।​ शाह ने कांग्रेस पर लंबे अरसे तक ओबीसी का आरक्षण रोकने का आरोप लगाया।​ उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस ने बार-बार ओबीसी आरक्षण को रोका और अब, जब वे चुनाव हारते जा रहे हैं तो ओबीसी के हितैषी बनने आए हैं। कांग्रेस ने अब तक एक भी ओबीसी प्रधानमंत्री नहीं दिया, वहीं भाजपा ने अति पिछड़े समाज के मोदी जी को प्रधानमंत्री बनाया।’’</p>
<p>शाह ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर सदन में प्रधानमंत्री के लिए असंसदीय शब्दों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए कहा, ‘‘विपक्ष के नेता का व्यवहार किस प्रकार का है। उनकी भाषा किस प्रकार की है, देश भी सुन रहा है। आप अपने वरिष्ठों से सीख लें, नहीं तो अपनी बहन प्रियंका जी से सीख लें कि सदन में कैसे बोलते हैं।’’<br />
​&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;</p>
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		<title>बिहार चुनाव 👁 ​बेटा-बेटी,​ बहु-दामाद, साला-साली, सास-ससुर, मौसा-मौसी, फूफा-फूफी कुछ नहीं तो पहले &#8216;नेता&#8217; और फिर &#8216;मंत्री&#8217;, &#8216;मुख्यमंत्री&#8217;  जरूर बन जायेंगे</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 06 Oct 2025 07:17:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
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		<category><![CDATA[election]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>पटना / नई दिल्ली : जय प्रकाश नारायण की संपूर्ण क्रांति की ललकार पर सन 1974 के अगस्त महीने तक रंग चढ़ रहा था। आज बिहार की राजनीतिक गलियारे में जितने भी &#8216;तथाकथित मठाधीश&#8217; बैठे हैं, पटना के साथ-साथ प्रदेश की गलियों, सड़कों पर चप्पल घिस रहे थे। उधर सचिवालय और मंत्रिमंडल की कुर्सीयों पर &#8216;शातिर राजनेता&#8217; [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/political-dynasticism-in-india">बिहार चुनाव 👁 ​बेटा-बेटी,​ बहु-दामाद, साला-साली, सास-ससुर, मौसा-मौसी, फूफा-फूफी कुछ नहीं तो पहले &#8216;नेता&#8217; और फिर &#8216;मंत्री&#8217;, &#8216;मुख्यमंत्री&#8217;  जरूर बन जायेंगे</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>पटना / नई दिल्ली : जय प्रकाश नारायण की संपूर्ण क्रांति की ललकार पर सन 1974 के अगस्त महीने तक रंग चढ़ रहा था। आज बिहार की राजनीतिक गलियारे में जितने भी &#8216;तथाकथित मठाधीश&#8217; बैठे हैं, पटना के साथ-साथ प्रदेश की गलियों, सड़कों पर चप्पल घिस रहे थे। उधर सचिवालय और मंत्रिमंडल की कुर्सीयों पर &#8216;शातिर राजनेता&#8217; बैठे थे। </strong></p>
<p>जंगे आज़ादी के दौरान &#8216;अगस्त क्रांति&#8217; भी 32-वर्ष पुराना हो गया था। 8-अगस्त 1942 को महात्मा गाँधी की अगुवाई में तत्कालीन बम्बई गावलिया टैंक मैदान से उठा &#8216;भारत छोड़ो आंदोलन&#8217; में, जिसमें पटना के सचिवालय के सामने युवकों ने अपने प्राणों की आहुति देकर एक अध्याय जोड़ा था, के सम्मान में 8 अथवा 9-अगस्त को प्रभात फेरी भी निकलना बंद हो गया था। </p>
<blockquote><p>लेकिन 9 अगस्त को दो घटनाएं महत्वपूर्ण घटी &#8211; एक: भारत में घटी और दूसरी: अमेरिका में। संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के 37 वें राष्ट्रपति रिचर्ड एम. निक्सन को ऐतिहासिक राजनीतिक घोटाले के कारण उन पर महाभियोग लगा और उन्हें अपने कार्यकाल के मध्य में ही सिंहासन को छोड़ना पड़ा। आज भी वह घटना न केवल अमेरिका के इतिहास में, बल्कि विश्व के राजनीतिक इतिहास में काला अध्याय के रूप में अंकित है और पूरा विश्व उसे &#8216;वॉटरगेट घोटाला&#8217; के नाम से जानता है। उसकी शुरुआत 17 जून 1972 की रात को हुई थी जब पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया था।</p></blockquote>
<p>वजह था कि वाटरगेट कॉम्प्लेक्स में स्थित डेमोक्रेटिक नेशनल कमेटी के कार्यालयों में जासूसी उपकरण स्थापित करने का प्रयास किया था। इन लोगों पर जासूसी का आरोप लगाया गया था निक्सन पुनर्निर्वाचन समिति से जुड़ें। उस वाटरगेट घोटाला को वाशिंगटन पोस्ट के पत्रकार बॉब वुडवर्ड और कार्ल बर्नस्टीन ने खोजा था। कहते हैं कि निक्सन का इस्तीफा महाभियोग के चार दिन बाद देना पड़ा और फिर उनकी जगह उप-राष्ट्रपति गेराल्ड फोर्ड राष्ट्रपति का शपथ लिए। </p>
<p>उधर भारत में, 9 अगस्त को भारत में आई.एस. जौहर के निर्माण और निर्देशन में एक फिल्म भारत के सिनेमा घरों के पर्दों पर आया। नाम था 5-राइफल्स। इस सिनेमा में राजेश खन्ना, शशि कपूर के अलावे आई.एस. जौहर स्वयं अभिनय किये थे। इस सिनेमा में एक गीत था गीतकार नाज़ा शोलापुरी का, जिसके संगीतकार थे अजीज नाजां और गायक भी अजीज नाज़ां ही थे।  वह गीत भारत की नहीं विश्व के लोगों बहुत पसंद आया था। पचास वर्ष बाद आज भी संगीत की दुनिया में वह गीत बादशाह बनकर, लोगों के होठों पर मौजूद है। </p>
<blockquote><p>आज अंगूर की बेटी से मोहब्बत कर ले<br />
शैख़ साहेब की नसीहत से बग़ावत कर ले</p>
<p>उस की बेटी ने उठा रक्खी है सर पर दुनिया<br />
ये तो अच्छा हुआ अंगूर को बेटा न हुआ</p></blockquote>
<p>लेकिन यह पचास साल पहले की बात है। आज तो बिहार ही नहीं, पूरे भारत में एक तरफ जहाँ राजनीतिक गलियारे में राजनेताओं के बेटा-बेटियों का साम्राज्य स्थापित हो रहा है, वहीं कुछ राज्यों में नेताओं ने &#8216;मधु&#8217; की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। लेकिन कहते हैं न पानी के बहाव को कौन रोक सकता है। शराब भी तो पानी का ही स्वरुप है। वैसे, राज्य ही नहीं, देश में जो भी प्रतिबंधित है, जो भी गैर क़ानूनी है, जो भी असंवैधानिक है, उन घटनों और क्रियाओं की सांख्यिकी भी बहुत अधिक है। और वही प्रतिबन्ध &#8216;बदलाव&#8217; भी लाया है, चाहे आपातकाल ही क्यों न हो। </p>
<p>घोटालों, चाहे आर्थिक हो या राजनीति की गिनती करना मुश्किल नहीं तो नामुमकिन है। अपराध, चाहे हत्या हो या बलात्कार, की गिनती नहीं की जा सकती है। इन तमाम वारदातों के बीच एक बात राजनीतिक क्षितिज पर हावी हो गया है &#8211; नाना-नानी, दादा-दादी, माँ-बाबूजी, बेटा-बेटी, भाई-बहन, साला-साली, मौसा-मौसी, फूफा-फूफी के बाल बच्चों का राजनीति में प्रवेश, वह भी ताल ठोककर। और चुनावी मौसम की तो बात ही नहीं करें। &#8216;वंशवाद&#8217; तो चुनाव के समय ताड़ का पेड़ जैसा हो जाता है। </p>
<p>हालांकि, वंशवाद पर बहस में नेहरू-गांधी परिवार पर अधिक तंज कस्ते हैं लोग, लेकिन यह संस्कृति उत्तर से दक्षिण, पश्चिम से पूर्व तक, सभी राजनीतिक दलों और क्षेत्रों में पनप कर एक वृक्ष का रूप धारण कर लिया है। वंशवादी राजनीति इस हद तक है कि कुछ परिवारों के सदस्य न केवल राजनीतिक विभाजन से परे, बल्कि राज्य की सीमाओं से भी परे हैं।</p>
<p><strong>राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि वंशवादी राजनीति की शुरुआत देश के सबसे उत्तरी राज्य जम्मू-कश्मीर से होती है, जहाँ दो परिवार &#8211; अब्दुल्ला और मुफ़्ती से प्रारम्भ हुआ। इन दोनों में से ज़्यादा प्रमुख अब्दुल्ला परिवार रहा, जिनके परिवार से तीन पीढ़ियों में कम से कम चार मुख्यमंत्री बने हैं। वर्तमान नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) नेता उमर अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री रह चुके हैं, जबकि उनके पिता फारूक अब्दुल्ला कई बार राज्य की सत्ता संभाल चुके हैं और 2009 से 2014 के बीच यूपीए-2 सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रहे हैं। उमर के दादा शेख अब्दुल्ला, जिन्हें लोकप्रिय रूप से &#8216;शेर-ए-कश्मीर&#8217; (कश्मीर का शेर) कहा जाता है। </strong></p>
<p>राज्य के शीर्ष पद से परिवार का नाता यहीं खत्म नहीं होता। फारूक के बहनोई गुलाम मोहम्मद शाह 1980 के दशक में मुख्यमंत्री रहे। इसके अलावा, शेख अब्दुल्ला के भाई शेख मुस्तफा कमाल राज्य में मंत्री रहे, जबकि फारूक के चचेरे भाई शेख नजीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के सबसे लंबे समय तक महासचिव रहे और लगभग तीन दशकों तक इस पद पर रहे। 2015 में उनका निधन हो गया। मुफ्ती परिवार के मुखिया मुफ्ती मोहम्मद सईद, जो पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के संस्थापक थे, और उनकी बेटी महबूबा मुफ्ती राज्य की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। सईद के बेटे, तस्सदुक मुफ्ती, जो एक सिनेमैटोग्राफर हैं, मुफ्ती परिवार से राजनीति में आने वाले नए चेहरे हैं।</p>
<p>पंजाब में, बादल परिवार दशकों से राजनीति पर हावी रहा है, जिसमें शिरोमणि अकाली दल के संस्थापक और चार बार मुख्यमंत्री रहे प्रकाश सिंह बादल अग्रणी भूमिका में हैं। उनके बेटे सुखबीर सिंह बादल 2009 से 2017 के बीच राज्य के उप-मुख्यमंत्री रह चुके हैं। सुखबीर लोकसभा सांसद भी रहे हैं और 1998 में मात्र 13 महीने की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में कुछ समय के लिए केंद्रीय मंत्री भी रहे थे। सुखबीर की पत्नी हरसिमरत कौर बादल लोकसभा सांसद और मोदी सरकार में मंत्री हैं। हरसिमरत के भाई, विवादास्पद बिक्रम सिंह मजीठिया, भी अकाली दल के नेता हैं और अकालियों के सत्ता में रहने के दौरान राज्य के कैबिनेट मंत्री थे।</p>
<p>प्रकाश सिंह बादल के भाई, गुरदास सिंह बादल, हालांकि अब अलग हो चुके हैं, भी सांसद रह चुके हैं। गुरदास के बेटे मनप्रीत सिंह बादल, परिवारों के बीच रिश्तों में खटास आने से पहले, अकाली दल में बड़े पदों पर पहुँचने के लिए तैयार दिख रहे थे। वर्तमान मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के परिवार के अन्य सदस्य भी राजनीति में हैं। उनकी पत्नी प्रीनीत कौर तीन बार लोकसभा सांसद रह चुकी हैं और यूपीए-2 सरकार में मनमोहन सिंह मंत्रिमंडल में शामिल थीं, जबकि उनके बेटे रणइंदर सिंह भी कांग्रेस पार्टी में हैं।</p>
<p>राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे प्रमुख राज्यों में राजनीतिक राजवंशों का अपना एक अलग, मज़बूत समूह है। राजस्थान के उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट, दिवंगत राजेश पायलट के पुत्र हैं – जो एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता, केंद्रीय मंत्री, लोकसभा सांसद और एक शक्तिशाली गुर्जर नेता थे। सचिन की माँ रमा पायलट हिंडोली से विधायक और दौसा से सांसद रही हैं। मूल रूप से मध्य प्रदेश के ग्वालियर के रहने वाले सिंधिया परिवार का राजनीतिक वंश न केवल पार्टी विभाजन से परे, बल्कि राज्य की सीमाओं से भी जुड़ा है।</p>
<p>कुलमाता विजया राजे सिंधिया जनसंघ और भाजपा की एक प्रमुख नेता थीं। उनकी बेटियाँ यशोधरा और वसुंधरा राजे उनके नक्शेकदम पर चलते हुए प्रमुख भाजपा नेताओं के रूप में उभरी हैं। वसुंधरा राजे दो बार राजस्थान की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं, जबकि उनके बेटे दुष्यंत भाजपा सांसद हैं। विजया राजे के बेटे माधवराव और पोते ज्योतिरादित्य ने एक अलग रास्ता अपनाया है। पिता और पुत्र वरिष्ठ कांग्रेस नेता होने के साथ-साथ केंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे हैं। माधवराव सिंधिया की 2001 में एक विमान दुर्घटना में मृत्यु हो गई।</p>
<p>हरियाणा राजनीतिक परिवारों से भरा पड़ा है। इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के संरक्षक और पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला और उनके छोटे बेटे अभय चौटाला, उनके बड़े बेटे अजय सिंह चौटाला और अजय के बेटों दुष्यंत और दिग्विजय सभी राजनीति में गोलबंद हैं। अजय चौटाला की पत्नी नैना हरियाणा के डबवाली से विधायक हैं। हालांकि, ओम प्रकाश पहली पीढ़ी के राजनेता नहीं हैं। उनके पिता देवीलाल 1989 से 1991 के बीच भारत के उप-प्रधानमंत्री रहे और हरियाणा के मुख्यमंत्री भी रहे। ओम प्रकाश के छोटे भाई रणजीत सिंह भी हरियाणा विधानसभा के सदस्य रहे हैं।</p>
<p>हरियाणा के हुड्डा परिवार भी शक्तिशाली राजनेताओं का एक समूह है। कांग्रेस के नेता रणबीर सिंह हुड्डा भारत के स्वतंत्रता संग्राम में शामिल थे और संविधान सभा के सदस्य भी। उनके बेटे भूपेंद्र सिंह हुड्डा, जो एक प्रभावशाली जाट नेता हैं, राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं, जबकि उनके पोते दीपेंद्र हुड्डा कांग्रेस के सांसद हैं। उद्योगपति ओ.पी. जिंदल एक वरिष्ठ राजनेता थे, जिन्होंने राज्य में मंत्री के रूप में कार्य किया, जबकि उनकी पत्नी सावित्री जिंदल भी मंत्री रही हैं। उनके बेटे नवीन जिंदल कुरुक्षेत्र से पूर्व लोकसभा सांसद हैं।हरियाणा के शक्तिशाली परिवारों से पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल का भी संबंध रहा है। उनके बेटे कुलदीप बिश्नोई राज्य में विधायक हैं और कुलदीप की पत्नी रेणुका भी। 2017 में, बिश्नोई ने अपनी पार्टी, हरियाणा जनहित कांग्रेस का कांग्रेस में विलय कर दिया। </p>
<p><strong>बिहार में नेता के बेटा-बेटी और राजनीति </strong></p>
<p>बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री लालू यादव की भी राजनीतिक पृष्ठभूमि समाजवाद और 1970 के दशक के &#8216;जेपी आंदोलन&#8217; (जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में) से जुड़ी है। अपनी बुद्धिमता, भाषा के आकर्षक प्रयोग, कुशाग्र राजनीतिक बुद्धि और कुख्यात चारा घोटाले के लिए जाने जाने वाले लालू के अलावा अब उनके चार रक्त संबंधी भी राजनीति में हैं। उनकी पत्नी राबड़ी देवी मुख्यमंत्री रह चुकी हैं, जबकि उनके बेटे तेजस्वी बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं। बड़े बेटे तेज प्रताप राज्य में मंत्री थे। बेटी मीसा भारती सांसद हैं। ससुराल के लोगों की तो बात ही नहीं करें। सभी राजनेता हैं। </p>
<p>बिहार की राजनीति में चाचा-भतीजे की लड़ाई सभी ने देखी। कैसे रामविलास पासवान के निधन के बाद उनके भाई पशुपति पारस ने चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी के दो फाड़ कर लिए और पार्टी के सभी सांसदों को अपने खेमे में मिलाकर खुद मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री बन गए थे। हालांकि चिराग पासवान ने राजनीति का गुण अपने पिता से सीखा था, जिसका इस्तेमाल उन्होंने किया और अपने चाचा से बदला ले लिया। चिराग पासवान के नेतृत्व में उनकी पार्टी ने पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा और 100 फीसदी स्ट्राइक रेट के साथ उन्होंने सभी 5 सीटों पर जीत हासिल की। अब वो मोदी सरकार 3.0 में केंद्रीय मंत्री हैं। चिराग भी अपने पिता रामविलास पासवान की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।</p>
<p>जीतन राम मांझी भी परिवारवाद की मिसाल हैं। उनके बेटे संतोष सुमन मंत्री हैं, बहू दीपा मांझी सक्रिय राजनीति में हैं और समधन ज्योति देवी भी चुनाव लड़ चुकी हैं। कोसी की राजनीति पर पकड़ शकुनी चौधरी लंबे समय तक मंत्री रहे। आज उनके बेटे सम्राट चौधरी भाजपा में प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और अब डिप्टी सीएम पद तक पहुंच चुके हैं। उनकी पत्नी पार्वती देवी भी विधायक रह चुकी हैं। डॉ. अनुग्रह नारायण सिन्हा, जो बिहार के पहले उपमुख्यमंत्री रहे, उनके परिवार ने भी राजनीति में गहरी पकड़ बनाई। उनके बेटे सत्येंद्र नारायण सिन्हा मुख्यमंत्री बने। बहू किशोरी सिन्हा राजनीति में सक्रिय रहीं और पौत्र निखिल कुमार राज्यपाल व सांसद रह चुके हैं।</p>
<p>मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा का परिवार भी राजनीति में सक्रिय रहा। उनके बेटे नीतीश मिश्रा मंत्री बने और पौत्र ऋषि मिश्रा विधायक रहे। पिछड़े वर्ग की पकड़ रामलखन सिंह यादव का परिवार भी राजनीति में मजबूत रहा। उनके पौत्र जयवर्धन यादव आज राजनीति में सक्रिय चेहरा हैं।दलित राजनीति का राष्ट्रीय चेहरा उपप्रधानमंत्री रहे बाबू जगजीवन राम की बेटी मीरा कुमार लोकसभा अध्यक्ष तक बनीं। उनके नाती अंशुल अविजीत भी राजनीति में हाथ आजमा रहे हैं। समाजवादी आंदोलन की धरोहर पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर का परिवार भी राजनीति में सक्रिय रहा है। उनके बेटे रामनाथ ठाकुर वर्तमान में राज्यसभा सांसद हैं।</p>
<p>राजनीति में लगातार उपस्थिति रामानंद तिवारी के बेटे शिवानंद तिवारी लंबे समय तक मंत्री रहे और पौत्र राहुल तिवारी विधायक बने। वित्त मंत्री से लेकर विधायक तक तुलसीदास मेहता के बेटे आलोक मेहता मंत्री बने, जबकि बेटी सुहेली मेहता भी राजनीति में हैं। लालू के करीबी पूर्व मंत्री जगदानंद सिंह के बेटे सुधाकर सिंह वर्तमान में सांसद हैं। सीमांचल की राजनीति पूर्व केंद्रीय मंत्री तस्लीमुद्दीन के बेटे सरफराज आलम सांसद बने, जबकि दूसरे बेटे शाहनवाज आलम मंत्री रहे। भाजपा से जुड़ा परिवार पूर्व सांसद मदन प्रसाद जायसवाल के बेटे डॉ. संजय जायसवाल भाजपा सांसद रहे हैं और प्रदेश अध्यक्ष भी रहे। बाहुबली से सियासी ताकत तक बाहुबली नेता आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद सांसद हैं और बेटा चेतन आनंद राजद से विधायक है। राजनीति और खेल का संगम पूर्व केंद्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह की बेटी श्रेयसी सिंह राजनीति में उतरीं और अब विधायक हैं।</p>
<p><strong>उत्तर प्रदेश की तो बात ही नहीं करें </strong></p>
<p>यहाँ समाजवादी पार्टी (सपा) के यादव वंश सबसे प्रसिद्ध वंश हैं, लेकिन भारत के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के वंश जैसे अन्य वंश भी हैं। चौधरी चरण सिंह के पुत्र, अजीत सिंह ने राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) की स्थापना की (दोनों दिवंगत) &#8211; पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक प्रभावशाली पार्टी है। उनके पुत्र, जयंत चौधरी, एक सक्रिय राजनीतिज्ञ हैं और 2009 से 2014 के बीच मथुरा से सांसद रहे।</p>
<p>उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी नेता मुलायम सिंह (दिवंगत) के बेटे अखिलेश यादव, जो स्वयं पूर्व मुख्यमंत्री हैं, ने समाजवादी पार्टी (सपा) की कमान लिए हैं। अखिलेश यादव के चाचा राम गोपाल यादव और शिवपाल यादव सभी राजनीति में हैं। इतना ही नहीं, अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव कन्नौज से लोकसभा सांसद हैं, जबकि उनके छोटे बेटे प्रतीक की पत्नी अपर्णा यादव भी राजनीति में अपना स्थान बनाने की कोशिश कर रहीं हैं। कल के उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा के बेटे विजय बहुगुणा भारतीय जनता पार्टी के नेता हैं। बहन रीता बहुगुणा जोशी, उत्तर प्रदेश की भाजपा की वरिष्ठ नेता नहीं। विजय के बेटे, साकेत और सौरभ, भी राजनीति में सक्रिय हैं।</p>
<p>देवेगौड़ा परिवार को अक्सर कर्नाटक का अप्पा-मक्कल पक्ष (पिता-पुत्रों की पार्टी) कहा जाता है। उनके बेटों &#8211; वर्तमान मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी और लोक निर्माण मंत्री एच.डी. रेवन्ना ने भी आगे बढ़ाया है। उधर, रेवन्ना और कुमारस्वामी के दोनों बेटे &#8211; प्रज्वल और निखिल &#8211; भी सक्रीय राजनीति में कुस्ती लड़ रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा के बेटे &#8211; बी.वाई. राघवेंद्र और बी.वाई. विजयेंद्र सक्रिय राजनीति में हैं। </p>
<p>महाराष्ट्र की सियासत में शिवसेना की तूती बोलती थी, हालांकि बाल ठाकरे का ये सिद्धांत था कि उनके परिवार का कोई भी सदस्य खुद राजनीति में नहीं उतरेगा। पार्टी की राजनीति में उनका परिवार चुनाव नहीं लड़ेगा। हालांकि उनके बेटे उद्धव ठाकरे ने अपने पिता के इस सिद्धांत को तोड़ दिया और वो महाराष्ट्र के सीएम बन गए और उन्होंने अपनी सरकार में अपने ही बेटे आदित्य ठाकरे को मंत्री पद सौंप दिया। अब बाल ठाकरे की शिवसेना दो फाड़ में बंट चुकी है, एक की कमान उद्धव के हाथ में है और दूसरे के कर्ता एकनाथ शिंदे हैं। शरद पवार की बेटी बेटी सुप्रिया अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे ले जा रही हैं।</p>
<p>नंदमुरी तारक राम राव (एनटीआर) 1982 में तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) की स्थापना की थी, लेकिन अब उनके दामाद और मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने राजनीतिक बागडोर संभाली है। नायडू ने 1995 में एक तख्तापलट के ज़रिए पार्टी की कमान संभाली, लेकिन एनटीआर के बेटे हरिकृष्णा और एक अन्य दामाद डी. वेंकटेश्वर राव को विधायक और डी. वेंकटेश्वर राव को मंत्री बनाकर उन्हें अपने साथ शामिल कर लिया। एनटीआर के बेटे नंदमुरी बालकृष्णा भी राजनीति में हैं। तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के बेटे के.टी. रामा राव और बेटी के. कविता निज़ामाबाद भी राजनीति में हैं।</p>
<p>इतना ही नहीं, एनटीआर की बेटी दग्गुबाती पुरंदेश्वरी परिवार की सबसे सफल राजनेताओं में से एक हैं। बापटला और विशाखपत्तनम लोकसभा क्षेत्रों से दो बार कांग्रेस सांसद रहीं दग्गुबाती तेलंगाना राज्य के गठन के तुरंत बाद भाजपा में शामिल हो गईं। उधर, नायडू के बेटे नारा लोकेश अपने पिता की राजनीतिक विरासत संभालने के लिए सज्ज हो रहे हैं। आंध्र प्रदेश के दिवंगत मुख्यमंत्री वाई. राजशेखर रेड्डी की पत्नी भी राजनीति में रही है और उनके बच्चे &#8211; वाई.एस. जगनमोहन रेड्डी और शर्मिला &#8211; पिता की राजनीतिक विरासत को बढ़ा रहे हैं।</p>
<p>1968 से पाँच बार मुख्यमंत्री रहे द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के मुखिया करूणानिधि की राजनीतिक विरासत पुत्र एम.के. स्टालिन, बेटी कनिमोझी, परपोते दयानिधि मारन के रूप में जीवित है। सुष्मिता देव, असम के वरिष्ठ कांग्रेस नेता संतोष मोहन देव और सिलचर से विधायक रहीं बिथिका देव की बेटी हैं। त्रिपुरा के किरीट बिक्रम देब बर्मन, श्रीमती बिभु कुमारी देबी का राजनीतिक वंश प्रद्योत देब बर्मन के रूप में है। भारतीय सियासत के इतिहास को खंगाला जाए, तो ऐसी सूची बड़ी लंबी होगी जिसमें बड़े-बड़े दिग्गज नेताओं ने अपने बेटे या बेटी के हाथों में राजनीतिक विरासत सौंप दी।</p>
<p><strong>पटना से कमला कान्त पाण्डे लिखते हैं: बेटे को टिकट दिलाने के लिए पटना से दिल्ली तक लॉबिंग कर रहे हैं ये BJP के 10 दिग्गज नेता</strong></p>
<p>बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का बिगुल बजने से पहले ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर एक नई सियासी हलचल शुरू हो गई है। जिस पार्टी ने हमेशा वंशवाद की राजनीति का मुखर विरोध किया है, अब उसी के कई कद्दावर नेता &#8216;पुत्र मोह&#8217; में घिरे नजर आ रहे हैं। 70 साल की उम्र पार कर चुके ये दिग्गज नेता, जिनके अपने टिकट कटने की प्रबल संभावना है, अब दिल्ली से पटना तक अपने बेटों के लिए विधानसभा टिकट सुनिश्चित करने की जोर-आजमाइश में जुट गए हैं। यह स्थिति भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है, जहां उन्हें वरिष्ठ नेताओं के अनुभव और पार्टी के युवा चेहरे पेश करने के संतुलन के बीच पुत्र मोह की इस नई लहर से निपटना होगा। </p>
<p>नंदकिशोर यादव &#8211; बिहार विधानसभा के वर्तमान अध्यक्ष और पटना साहिब से नौ बार विधायक रहे नंदकिशोर यादव (70+ वर्ष) का नाम भी टिकट कटने वालों की सूची में हैं। वे अपने बेटे नितिन कुमार &#8216;रिंकू&#8217; को पटना साहिब से टिकट दिलाने को प्रयासरत हैं। पार्टी के कद्दावर नेता और वर्तमान में बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह भी अपने बेटे सुशांत रंजन और प्रशांत रंजन को राजनीति में स्थापित करना चाहते हैं। उनका पसंदीदा विधानसभा क्षेत्र आरा है। इसी तरह, पूर्व केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव के बेटे अभिमन्यु यादव अपने संगठन &#8216;टीम अभिमन्यु&#8217; के नाम से फतुहा क्षेत्र में सक्रिय हैं। रामकृपाल यादव अपने बेटे के लिए फतुहा से टिकट चाहते हैं, जहां पिछली बार भाजपा के सत्येन्द्र सिंह चुनाव लड़कर हार गए थे। केंद्रीय मंत्री रह चुके अश्विनी चौबे के पुत्र अर्जित शाश्वत भी भागलपुर से टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। एक बार भागलपुर से चुनाव लड़कर हार चुके हैं। अर्जित 2018 की भागलपुर सांप्रदायिक घटना में भी चर्चा में रहे थे और हाल ही में सनातन महाकुंभ में काफी सक्रिय थे। </p>
<p>भाजपा के वरिष्ठ नेता और सांसद रहे आरके सिन्हा के बेटे ऋतुराज सिन्हा पहले पटना साहिब से लोकसभा का टिकट चाहते थे। अब चर्चा है कि वे पटना की किसी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। वे अमित शाह के बेहद करीबी माने जाते हैं और संगठन में अभी राष्ट्रीय सचिव की भूमिका निभा रहे हैं। आरा विधानसभा से लगातार जीतते रहे कद्दावर नेता अमरेंद्र प्रताप सिंह (70+ वर्ष) भी अपनी विरासत अपने बेटे को सौंपने की तैयारी में हैं और आरा विधानसभा से अपने बेटे को टिकट दिलाना चाहते हैं। मधुबनी से विधायक रहे विनोद नारायण झा, जो पूर्व में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री भी रहे, अब अपने बेटे डॉ. विभय झा को राजनीति में उतारना चाहते हैं। हालांकि, डॉ. विभय झा वर्तमान में चिराग पासवान की पार्टी लोजपा (रामविलास) में सक्रिय हैं। </p>
<p>कुम्हरार विधानसभा क्षेत्र से लगातार (2005-2020) जीतते रहे विधायक अरुण कुमार सिन्हा (70+ वर्ष) भी अपने बेटे अशीष सिन्हा के लिए कुम्हरार विधानसभा से टिकट चाह रहे हैं। अशीष सिन्हा पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष रह चुके हैं और वर्तमान में भाजपा युवा मोर्चा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसी सीट से भाजपा नेता और स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय चुनावी मैदान में उतरने के लिए तैयार बैठे हैं। इसी सीट पर पहले सम्राट चौधरी चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन अब मन डोल रहा है। बिहार सरकार में पूर्व पीएचईडी मंत्री और मधुबनी के राजनगर से विधायक रामप्रीत पासवान भी अपने बेटे दीपक कल्याण को टिकट दिलाने के लिए पैरवी कर रहे हैं। दीपक कल्याण क्षेत्र में काफी सक्रिय हैं और अपनी राजनीतिक जमीन तैयार कर रहे हैं। गया शहर से 8 बार लगातार विधायक रहे और वर्तमान में सहकारिता मंत्री प्रेम कुमार (70 वर्ष) भी अपने बेटे के लिए गया शहर से टिकट चाह रहे हैं। उनकी लोकप्रियता के बावजूद, उम्र का फैक्टर उनके लिए चुनौती बन सकता है। </p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/political-dynasticism-in-india">बिहार चुनाव 👁 ​बेटा-बेटी,​ बहु-दामाद, साला-साली, सास-ससुर, मौसा-मौसी, फूफा-फूफी कुछ नहीं तो पहले &#8216;नेता&#8217; और फिर &#8216;मंत्री&#8217;, &#8216;मुख्यमंत्री&#8217;  जरूर बन जायेंगे</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जानते हैं &#8216;एनडीए गठबंधन कमजोर&#8217; हो गया है, &#8216;संख्या का अभाव&#8217; है, परन्तु &#8216;एक राष्ट्र &#8211; एक चुनाव&#8217; ब्रह्मास्त्र बना रहे हैं भाजपा के लिए</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 19 Sep 2024 12:30:35 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>विजय चौक (नई दिल्ली) : इंडिया गेट से कर्तव्य पथ के रास्ते रायसीना पहाड़ी और संसद की ओर जाने वाली सड़कों की मिलन स्थल पर बहुत तरह की चर्चाएं आम हो रही है। अन्य बातों के अलावे देश के दूरदरस्त इलाकों से रायसीना पहाड़ी पर स्थित भारत के प्रथम नागरिक के आवास से लेकर प्रधानमंत्री, गृह [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/politics/prime-minister-narendra-modi-knows-that-nda-alliance-has-become-weak-there-is-lack-of-numbers">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जानते हैं &#8216;एनडीए गठबंधन कमजोर&#8217; हो गया है, &#8216;संख्या का अभाव&#8217; है, परन्तु &#8216;एक राष्ट्र &#8211; एक चुनाव&#8217; ब्रह्मास्त्र बना रहे हैं भाजपा के लिए</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>विजय चौक (नई दिल्ली) : इंडिया गेट से कर्तव्य पथ के रास्ते रायसीना पहाड़ी और संसद की ओर जाने वाली सड़कों की मिलन स्थल पर बहुत तरह की चर्चाएं आम हो रही है। अन्य बातों के अलावे देश के दूरदरस्त इलाकों से रायसीना पहाड़ी पर स्थित भारत के प्रथम नागरिक के आवास से लेकर प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, वित्त मंत्री, रक्षा मंत्री जैसे देश के शीर्षस्थ नेताओं के कार्यालयों और नव-निर्मित संसद भवन देखने आने वाले सैकड़ों, हज़ारों भारतीय मतदाता कुछ क्षण के लिए लिए सही, चर्चाएं अवश्य करते हैं कि क्या भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए &#8216;प्रवक्ता&#8217; बन गए हैं? क्या मोदी जी 75 वर्ष आयु के बाद भी प्रधानमंत्री की कुर्सी पर विराजमान रहेंगे? क्या एक राष्ट्र-एक चुनाव विधेयक को कानून बनते ही प्रधानमंत्री संसद भंग कर देंगे आम चुनाव के लिए? आप क्या सोचते हैं कि 240 अंक से मोदी जी प्रसन्न हैं? क्या मोदी जी, उनके मंत्रिमंडल और नेतृत्व के प्रति भारत के मतदाताओं के मन में कोई शंका हो गई है? </strong></p>
<p>राष्ट्रीय राजधानी में भ्रमण-सम्मेलन करने वाले लोगों का मानना है कि नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भाजपा 2014 के चुनाव में 282 अंक प्राप्त करती है। उस कालखंड में चुनावी मैदान में न तो अटल बिहारी वाजपेयी थे, न लालकृष्ण आडवाणी थे और न अन्य भाजपा के अधिष्ठाता। उस चुनाव में जो भी अंक आये थे वह नरेंद्र मोदी के नाम पर आया था। 2019 के चुनाव में वह अंक 303 तक चढ़ा। लोगों का मानना है कि जिस कदर 282 से अंक 303 चढ़े, भाजपा के नेताओं के तेवर भी चढ़ने लगे, जो अप्रत्यक्ष रूप से मतदाताओं के हितों के विपरीत था। परिणाम यह हुआ कि 2024 के चुनाव में भाजपा सांसदों की संख्या 240 पर लुढ़क गयी। भाजपा की संख्या का कम होना और विपक्ष की संख्या का बढ़ना, राजनीतिक दृष्टिकोण से सत्तारूढ़ पार्टी, खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और कार्य शैली पर प्रश्नचिन लगा दिया। सत्ता के गलियारे में इस बात की चर्चाएं हैं कि प्रधानमंत्री इस &#8216;धब्बा&#8217; को मिटाना चाहते हैं और अब तक के लोकसभा के चुनाव में 404 की संख्या से ऊपर चढ़ा जाय। </p>
<p>लोगों का कहना है कि &#8211; &#8216;एक राष्ट्र &#8211; एक चुनाव&#8217; की बात बेहद सुन्दर है। इससे समय, अर्थ दोनों का बचत होगा। यह भी कहते हैं कि &#8216;सिफारिश&#8217; को मानना इस बात का द्योतक है कि इस दिशा में कार्य बहुत शीघ्रता से होंगी। इन सिफारिशों के आधार पर अब विधेयक का प्रारूप बनेगा जिसे राज्य सभा और लोक सभा में पेश किया जायेगा। भले आगामी सत्र में इसलिए पेशी न हो सके, लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि बजट सत्र आते-आते देश में कुछ राजनीतिक सरगर्मी शुरू हो जाएगी । जैसे ही विधेयक कानून का रूप ले लेता है, तो इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि 2029 लोकसभा चुनाव से पूर्व देश को आम चुनाव के साथ-साथ राज्यों के विधानसभाओं को भी चुनाव में झोंक दिया जाय।  </p>
<p><strong>उन मतदाताओं, जिसमें अवकाश प्राप्त नौकरशाहों के अलावे अनुभवी राजनीतिक विशेषज्ञ भी अपने-अपने परिवारों के साथ भ्रमण-सम्मेलन करने आते हैं, यह भी स्पष्ट किये कि पिछले दिनों केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह सार्वजनिक रूप से कहे थे: &#8220;मैं अरविंद केजरीवाल एंड कंपनी और इंडिया ब्लॉक से यह कहना चाहता हूं कि बीजेपी के संविधान में ऐसा कुछ भी (75 साल पुरानी सीमा नियम का) उल्लेख नहीं है। पीएम मोदी न केवल यह कार्यकाल पूरा करने जा रहे हैं बल्कि पीएम मोदी भविष्य में भी नेतृत्व करना जारी रखेंगे। देश में इसे लेकर कोई भ्रम नहीं है।” वैसी स्थिति में अगर अमित शाह की बात सत्य है तो आगामी कई चुनाव ही नहीं, आने वाले सभी चुनावों में, जब तक परदेश भाजपामय नहीं हो जाएगा, नरेंद्र मोदी भाजपा का प्रधानमंत्री पद के  लिए दावेदार बने रहेंगे, नेतृत्व करेंगे। </strong></p>
<p>राष्ट्रीय राजधानी में भ्रमणकारी मतदाताओं का मानना है कि अगले वर्ष, यानी 2025 में सिर्फ दिल्ली और बिहार में विधानसभा का चुनाव होना है। जबकि 2026 में चार राज्यों &#8211; असम, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और केरल में विधानसभा का चुनाव निश्चित है। उसके अगले साल, यानी 2027 में भारत के राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति के अलावे सात राज्यों &#8211; गोवा, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और गुजरात में विधानसभा चुनाव होना निश्चित है। वैसी स्थिति में इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अधिक दिनों तक &#8216;अन्य राजनीतिक पार्टियों की सहयोग से केंद्र में सरकार नहीं चलना पसंद करेंगे। उनकी नज़रों में संख्या का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है, खासकर जब अपने दूसरे कालखंड में ही उन्होंने अपने बलबूते पर ऐतिहासिक संख्या को प्राप्त किया था। </p>
<figure id="attachment_5768" aria-describedby="caption-attachment-5768" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/MODI.jpg"><img decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/MODI.jpg" alt="" width="2200" height="1730" class="size-full wp-image-5768" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/MODI.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/MODI-300x236.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/MODI-1024x805.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/MODI-768x604.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/MODI-1536x1208.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/MODI-2048x1610.jpg 2048w" sizes="(max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5768" class="wp-caption-text">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी</figcaption></figure>
<p>यह अलग बात है कि वर्त्तमान संसद और सरकार में, उन्हें किसी भी सहयोगी राजनीतिक पार्टियों से कोई मनमुटाव नहीं है, कोई भी अब तक उनके कार्यों में दखलंदाजी नहीं किये हैं, लेकिन संख्या का होना अलग बात है। वजह यह है कि 2014 में जब पहली बार नरेंद्र मोदी को भारतीय जनता पार्टी प्रधानमंत्री के रूप में प्रस्तुत कर चुनाव लड़ा गया था, भाजपा को 282 अंक प्राप्त हुए थे। साथ ही अन्य सहयोगी पार्टियों के भी अच्छे अंक थे। विपक्ष में कांग्रेस का हश्र सोचनीय हो गया था। 2019 के चुनाव में देश के मतदाता नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी को जबरदस्त विजयश्री दिया। 282 के अंक बढ़कर 303 हो गया। वैसे यह अंक लोक सभा चुनाव में भाजपा के लिए बहुत अधिक था, लेकिन राजीव गाँधी की अगुआई में कांग्रेस की संख्या इससे बहुत अधिक थी। </p>
<p>2019 चुनाव में 303 का अंक ऐतिहासिक था। लेकिन 2024 आम चुनाव में एक ओर जहाँ भाजपा या उसकी सहयोगी पार्टी की संख्या लुढ़की, विपक्ष, खासकर कांग्रेस पार्टी की संसद में संख्या में अप्रत्यासित इजाफा हुआ। विगत 2024 आम चुनाव में भाजपा का 303 से लुढ़क कर 240 पर आना, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनितिक पुरुषत्व को एक चुनौती दे दिया। लोगों का मानना है कि भले नरेंद्र मोदी और उनके मंत्रिमंडल के लोग पिछले दस वर्षों में मोदी की अगुआई में कार्य सम्पादित, निष्पादित करने के आंकड़े बनायें, हकीकत यह है कि लोगों का उनमें, उनकी सरकार में विश्वास डगमगा गया। और यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अंदर से भयभीत हो गए हैं, टूट गए हैं। वे चाहते हैं कि देश के मतदाताओं का विश्वास पुनः जीता जाय, वह भी उनके मतों से, चुनाव से। इसी बहाने एक राष्ट्र एक चुनाव का मुद्दत बाद परीक्षण भी हो जायेगा पोकरण की तरह। </p>
<p><strong>भ्रमणकारी मतदाता इस बात पर भी चर्चा करते हैं कि देश के उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि बनाने और निखारने में कभी कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं । कल की ही तो बात है। उपराष्ट्रपति ने गांधीनगर (गुजरात) में चौथे ग्लोबल री-इन्वेस्ट, 2024 के समापन समारोह में इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में आशा और संभावना का माहौल पैदा किया है। </strong></p>
<p>चौथे ग्लोबल री-इन्वेस्ट, 2024 के समापन समारोह को संबोधित करते हुए, श्री धनखड़ ने कहा, “मैं श्री नरेन्द्र मोदी की यात्रा का वर्णन तीन पहलुओं में करता हूँ। पहला, 2014 में वे एक रॉकेट की तरह थे जिसने उड़ान भरी। बहुत प्रयास की आवश्यकता थी। देश निराशा के मूड में था। उनका उद्देश्य आशा और संभावना का माहौल पैदा करना था। अंतर बहुत बड़ा था। 2019 में आशा और संभावना का माहौल पैदा करके यह गुरुत्वाकर्षण बल से से परे चला गया। 2024 में, छह दशकों के बाद पहली बार लगातार तीसरे कार्यकाल में प्रधान मंत्री बनकर इतिहास रचने के बाद, रॉकेट अब गुरुत्वाकर्षण बल के प्रभाव में नहीं है। रॉकेट अंतरिक्ष में है और इसलिए उपलब्धियां खगोलीय होनी चाहिए।”</p>
<figure id="attachment_5769" aria-describedby="caption-attachment-5769" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/Dhankhar.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/Dhankhar.jpg" alt="" width="2200" height="1238" class="size-full wp-image-5769" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/Dhankhar.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/Dhankhar-300x169.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/Dhankhar-1024x576.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/Dhankhar-768x432.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/Dhankhar-1536x864.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/Dhankhar-2048x1152.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5769" class="wp-caption-text">उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़</figcaption></figure>
<p>घनखड़ ने तो यहाँ तक कहा कि &#8220;यह गर्व की बात है कि बहुत लंबे समय के बाद भारत का कोई नेता वैश्विक विमर्श में छाया हुआ है। हम इस समय सौभाग्यशाली हैं कि इस देश से बहुत लंबे समय के बाद, इस देश का कोई नेता वैश्विक चर्चा में छाया हुआ है। उनकी आवाज हर जगह सुनी जाती है, वे मानवता और वैश्विक हित के मुद्दों पर बात करते हैं और इसलिए मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि इस देश ने पिछले एक दशक में उन क्षेत्रों में सफलता की जो गाथा देखी है, वह तीन दशक और उससे भी पहले चौंका देने वाली थी।&#8221; </p>
<p>इतना ही नहीं, &#8220;भारत को विश्व में सद्भाव लाने का केंद्र बिंदु बताते हुए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हैसियत को बताते हुए श्री धनखड़ ने कहा,  कि वे इस ग्रह पर व्याप्त संकटों का समाधान कर सकते हैं, &#8220;अगर भारत नेतृत्व करता है, अगर भारत के नेता प्रधानमंत्री मोदी कोई आह्वान करते हैं, तो वे इसे पूरा करके दिखाते हैं। पिछले 10 वर्षों में उन्होंने जो कुछ भी कहा है, वह जमीनी हकीकत है, यहां एक ऐसा व्यक्ति है जो न केवल आधारशिला रखता है बल्कि उनका उद्घाटन भी करता है, वह हमेशा समय से आगे की सोचता है&#8230; भारतीय नेता की आवाज को विश्व स्तर पर सम्मान के साथ सुना जाता है। उन्हें ग्रह पर एक ऐसे व्यक्तित्व के रूप में देखा जाता है जो इस समय ग्रह पर व्याप्त संकटों का समाधान कर सकता है।&#8221; </p>
<p><strong>उधर, X प्लेटफॉर्म पर पोस्ट्स की एक श्रंखला में केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत परिवर्तनकारी सुधारों का साक्षी बन रहा है। उन्होंने कहा कि आज, इस दिशा में, केन्द्रीय मंत्रिमंडल द्वारा One Nation One Election पर उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों को स्वीकार करने के साथ भारत ने ऐतिहासिक चुनाव सुधारों की तरफ एक बड़ा कदम उठाया है। श्री शाह ने कहा कि यह निर्णय स्वच्छ और वित्तीय रूप से कुशल चुनावों के माध्यम से हमारे लोकतंत्र को मजबूत करने और संसाधनों के अधिक उत्पादक आवंटन के माध्यम से आर्थिक विकास में तेजी लाने की प्रधानमंत्री मोदी की दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाता है।</strong></p>
<figure id="attachment_5771" aria-describedby="caption-attachment-5771" style="width: 1417px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/Amit-Shah-1-1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/Amit-Shah-1-1.jpg" alt="" width="1417" height="1462" class="size-full wp-image-5771" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/Amit-Shah-1-1.jpg 1417w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/Amit-Shah-1-1-291x300.jpg 291w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/Amit-Shah-1-1-992x1024.jpg 992w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/Amit-Shah-1-1-768x792.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/Amit-Shah-1-1-24x24.jpg 24w" sizes="auto, (max-width: 1417px) 100vw, 1417px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5771" class="wp-caption-text">केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह</figcaption></figure>
<p>बहरहाल, कैबिनेट ने कल एक देश एक चुनाव के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी । अब देश की 543 लोकसभा सीट और सभी राज्यों की कुल 4130 विधानसभा सीटों पर एक साथ चुनाव कराने की राह खुल गई। एक देश एक चुनाव पर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में गठित कमेटी की रिपोर्ट के बाद प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दी है। एक देश एक चुनाव का विचार कम से कम 1983 से ही चला आ रहा है, जब चुनाव आयोग ने पहली बार इस पर विचार किया था। हालांकि, 1967 तक, भारत में एक साथ चुनाव कराना एक आदर्श नियम था। </p>
<p>वर्तमान में, राज्य विधानसभाओं और लोकसभा के चुनाव अलग-अलग आयोजित किए जाते हैं। इससे उत्पन्न होने वाली समस्याओं के कारण, चुनाव आयोग ने एक प्रणाली के गठन का सुझाव दिया ताकि राज्य विधानसभा और लोकसभा के चुनाव एक साथ हो सकें।एक साथ चुनाव कराने का विचार 2016 में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा फिर से पेश किया गया था। तब से सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने एक साथ चुनाव कराने के लिए एक मजबूत तर्क दिया है। 2017 में नीति आयोग द्वारा एक साथ चुनाव पर वर्किंग पेपर तैयार किया गया था। यहां तक कि कानून आयोग भी 2018 में एक वर्किंग पेपर लेकर आया था और कहा था कि एक साथ चुनाव कराने की संभावना के लिए कम से कम पांच संवैधानिक बदलावों की आवश्यकता होगी। यह कहा जाता है कि एक साथ चुनाव सम्पन्न कराने पर चुनाव माध में खर्च होने वाली राशि में न्यूनतम 30 फीसदी की कमी होगी।</p>
<p>लेकिन, <strong>वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक समीक्षक राजीव रंजन नाग</strong> कहते हैं कि &#8220;बीजेपी के पास पिछले दो कार्यकालों के विपरीत लोकसभा में इस दफा बहुमत नहीं है। विधेयकों को पारित करवाने के लिए उसे एनडीए के सहयोगियों और मित्र दलों पर निर्भर रहना होगा। लोकसभा में संख्या बल के लिहाज से, ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ प्रस्ताव का समर्थन करने वाली पार्टियों के निचले सदन में 271 सांसद हैं, जिनमें 240 बीजेपी से हैं। समिति को अपनी राय देते हुए एक साथ चुनाव का विरोध करने वाली 15 पार्टियों के 205 लोकसभा सांसद हैं। इसमें विपक्षी दल इंडिया ब्लॉक का प्रतिनिधित्व करने वाले 203 सांसद शामिल हैं। कुल मिलाकर, इंडिया ब्लॉक और वे पार्टियाँ जिन्होंने पैनल के समक्ष अपनी राय नहीं रखी, उनके 234 लोकसभा सांसद हैं।&#8221;</p>
<figure id="attachment_5772" aria-describedby="caption-attachment-5772" style="width: 370px" class="wp-caption alignleft"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/Nag-fotor-20240919173412.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/Nag-fotor-20240919173412.jpg" alt="" width="370" height="359" class="size-full wp-image-5772" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/Nag-fotor-20240919173412.jpg 370w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/Nag-fotor-20240919173412-300x291.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/Nag-fotor-20240919173412-24x24.jpg 24w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/Nag-fotor-20240919173412-48x48.jpg 48w" sizes="auto, (max-width: 370px) 100vw, 370px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5772" class="wp-caption-text">वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक समीक्षक राजीव रंजन नाग</figcaption></figure>
<p>नाग आगे कहते हैं कि &#8220;एनडीए, जिसमें टीडीपी और अन्य दल शामिल हैं, जो अब तक एक साथ चुनावों पर तटस्थ रहे हैं, के पास लोकसभा में 293 सांसदों की ताकत है। हालांकि, अगर मोदी सरकार को 543 की पूरी ताकत मिलती है, तो उसे बिलों को पारित कराने के लिए लोकसभा में 362 वोट (सांसदों) या दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी। इस प्रकार बिलों को दो-तिहाई बहुमत तभी मिल सकता है, जब 100 से अधिक सांसद मतदान से दूर रहें, जिससे लोकसभा की ताकत कम हो जाए।&#8221;</p>
<p>जहाँ तक राज्य सभा के आंकड़े का प्रश्न है, नाग का कहना है कि &#8220;मोदी सरकार राज्य सभा में बेहतर स्थिति में है, लेकिन बिलों को पारित कराने के लिए संख्या पर्याप्त नहीं है। बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास राज्य सभा में 115 सांसद हैं। इसके अलावा छह मनोनीत सदस्य भी हैं, जिससे एनडीए के पास उच्च सदन में 121 सांसद हैं। राज्य सभा में इंडिया ब्लॉक के 85 सांसद हैं। यह हमारे लोकतंत्र को और भी अधिक जीवंत और सहभागी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि मतदान के दौरान राज्य सभा के सभी 250 सदस्य मौजूद हों, तो साधारण बहुमत 125 होगा और दो-तिहाई बहुमत 164 सांसद होंगे। वर्तमान में, राज्य सभा में 234 सांसद हैं। उनकी स्थिति को देखते हुए, यह स्पष्ट है कि मोदी सरकार के लिए संसद के आगामी सत्रों में &#8216;एक राष्ट्र, एक चुनाव&#8217; प्रस्ताव को लागू करने वाला विधेयक पारित करना आसान नहीं होगा।</p>
<p><strong>लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं के लिए पहला आम चुनाव 1951-52 में एक साथ आयोजित किया गया था। यह प्रथा 1957, 1962 और 1967 में हुए तीन आम चुनावों में भी जारी रही। हालांकि, 1968 और 1969 में कुछ विधानसभाओं के समय से पहले भंग होने के कारण यह चक्र बाधित हो गया।इंदिरा गांधी ने साल 1970 में लोकसभा भंग करवा दी थी और तय समय से 15 महीने पहले ही 1971 में आम चुनाव करवा दिए थे। इंदिरा अल्पमत सरकार चला रही थीं और पूर्ण सत्ता चाहती थीं। उनके इस फैसले ने राज्य विधानसभा चुनावों को आम चुनाव से अलग कर दिया था। अलग-अलग समय में चुनाव करने से सरकार और अन्य हितधारकों द्वारा बहुत अधिक व्यय, ऐसे निर्वाचनों में लगाए गए सुरक्षा बलों और अन्य निर्वाचन अधिकारियों की उनकी महत्वपूर्ण रूप से लंबी कालावधि के लिए अपने मूल कर्तव्यों से भिन्न अन्यत्र तैनाती, आदर्श आचार संहिता, आदि के लंबी अवधि तक लागू रहने के कारण, विकास कार्य में दीर्घ अवधियों के लिए व्यवधान के रूप में होता है।</strong></p>
<p>ज्ञातव्य हो कि भारत के विधि आयोग ने निर्वाचन विधियों में सुधार पर अपनी 170 वीं रिपोर्ट में यह संप्रेक्षण किया है कि  &#8220;प्रत्येक वर्ष और बिना उपयुक्त समय के निर्वाचनों के चक्र का अंत किया जाना चाहिए। हमें उस पूर्व स्थिति का फिर से अवलोकन करना चाहिए जहां लोक सभा और सभी विधान सभाओं के लिए निर्वाचन साथ-साथ किए जाते हैं। यह सत्य है कि हम सभी स्थितियों या संभाव्यताओं के विषय में कल्पना नहीं कर सकते हैं या उनके लिए उपबंध नहीं कर सकते हैं, चाहे अनुच्छेद 356 के प्रयोग के कारण (जो उच्चतम न्यायालय के एस. आर. बोम्मई बनाम भारत संघ के विनिश्चय के पश्चात् सारवान् रूप से कम हुआ है) या किसी अन्य कारण से उत्पन्न हो सकेंगी, किसी विधान सभा के लिए पृथक निर्वाचन आयोजित करना एक अपवाद होना चाहिए न कि नियम नियम यह होना चाहिए कि &#8216;लोकसभा और सभी विधानसभाओं के लिए पांच वर्ष में एक बार में एक निर्वाचन&#8217; ।&#8221; </p>
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		<title>&#8230;&#8230; लेकिन पुरुष प्रधान समाज में &#8216;जानकी&#8217; के लिए जय जयकार कौन करेगा? मिथिला में आज भी जानकियों की स्थिति  बेहतर नहीं है😢</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 22 Jan 2024 13:42:07 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>सीतामढ़ी / दरभंगा / नई दिल्ली : कई शताब्दी बाद नए तेवर में अयोध्या में राम आ गए। उनके आने से पूरा भारत राष्ट्र राम मय हो गया है। लोग कह रहे हैं कि रोगियों के रोग दूर होते दिख रहे हैं। अपाहिज भी लंगड़ाकर ही सही, चलने का यत्न कर रहा है। गूंगा-बहरा भी &#8216;राम [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/shriram-temople-in-ayodhya-dedicated-to-nation">&#8230;&#8230; लेकिन पुरुष प्रधान समाज में &#8216;जानकी&#8217; के लिए जय जयकार कौन करेगा? मिथिला में आज भी जानकियों की स्थिति  बेहतर नहीं है😢</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>सीतामढ़ी / दरभंगा / नई दिल्ली : कई शताब्दी बाद नए तेवर में अयोध्या में राम आ गए। उनके आने से पूरा भारत राष्ट्र राम मय हो गया है। लोग कह रहे हैं कि रोगियों के रोग दूर होते दिख रहे हैं। अपाहिज भी लंगड़ाकर ही सही, चलने का यत्न कर रहा है। गूंगा-बहरा भी &#8216;राम राम&#8217; बोलने &#8211; सुनने की कोशिश कर रहा है। दिव्यांग भी उछलकर मंदिरों की घंटियों को बजने की कोशिश कर रहा है । दो पाया से लेकर चार पाया तक, सजीव से लेकर निर्जीव तक सभी के मुखमण्डलों पर प्रसन्नता दिख रही है &#8211; आखिर राम आ गए है। किसी के लिए राम बेटा हैं, तो किसी के लिए &#8216;जमाय&#8217;, किसी के लिए &#8216;आदर्श&#8217; हैं तो किसी की लिए &#8216;मर्यादा&#8217; &#8211; सभी अपने-अपने तरह से राम को अपना समर्पण दे  रहे हैं। लेकिन जानकी कहाँ चली गयी?</strong></p>
<p>विगत कई महीनों से, वर्षों से जब से राम के आने की सुगबुगाहट देश की राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक गलियारों में, देश के राजनीतिक मानचित्र पर लिखे जाने लगे, सबों का ध्यान राम की ओर अटक गया। लाखों शब्द लिखे गए &#8211; कुछ पक्ष में, कुछ विपक्ष में, कुछ सकारात्मक तो कुछ नकारात्मक &#8211; परन्तु &#8216;जानकी&#8217; को सभी भूल गए। जानकी के बारे में पूरब-पश्चिम-उत्तर-दक्षिण में रहने वाले भारत के लोग ही नहीं, जानकी के मायके मिथिला के लोग भी, मिथिला की महिलाएं भी &#8216;जानकी को याद&#8217; नहीं की।, एक बार भी नहीं। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/2-3.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/2-3.jpg" alt="" width="1744" height="1188" class="aligncenter size-full wp-image-5256" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/2-3.jpg 1744w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/2-3-300x204.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/2-3-1024x698.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/2-3-768x523.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/2-3-1536x1046.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/2-3-218x150.jpg 218w" sizes="auto, (max-width: 1744px) 100vw, 1744px" /></a></p>
<p>आज के पत्रकारों को, मिथिला के लोगों को (जो न्यूनतम 40 वर्ष के होंगे) शायद मालूम नहीं होगा कि तीन दशक पूर्व पटना के अख़बारों में प्रकाशित एक लेख मिथिला की महिलाओं को अश्रुपात कर दिया था। उस अखबार का कतरन काटकर लोग देवी-देवताओं के पास रख रहे थे &#8211; श्रद्धा स्वरुप। वैसे आज भी सुबह-सवेरे 10 . 30 बजे सहरसा-मनिहारी के बीच जानकी एक्सप्रेस छुक-छुक गाड़ी चलती हैं और इन दो स्थानों के बीच रहने वाले लोगों की सेवा करती हैं, पूर्व की तरह। लेकिन मुझे याद है कि नब्बे के दशक के उत्तरार्ध दरभंगा से आगे छोटी लाइन को बड़ी लाइन में बदलने के कारण मिथिला की जानकी एक्सप्रेस (इस ट्रेन का नाम माता सीता यानी जानकी के नाम पर है) के साथ जो व्यवहार हुआ था। ट्रेन को बंद कर दिया गया था, उसी तरह जिस तरह मिथिला में लड़कियों को स्वतंत्रता पूर्वं घर से बाहर नहीं निकलने दिया जाता है (अपवाद छोड़कर) । </p>
<p><strong>जानकी एक्सप्रेस के साथ हुए व्यवहार के मद्दे नजर पटना के एक वरिष्ठ पत्रकार श्री ज्ञानवर्धन मिश्र एक कहानी किये। वैसे कहानी जानकी एक्सप्रेस ट्रेन से सम्बंधित थी, लेकिन शब्दों का चुनाव और वाक्यों का विन्यास कुछ इस कदर था की पाठकों के ह्रदय को वेध दिया था, खास कर महिलाओं के ह्रदय को। पाठक &#8216;ट्रेन के साथ हुए व्यवहार&#8217; को &#8221;जानकी/सीता के साथ हुआ व्यवहार समझ रहे थे। </strong></p>
<p>उन दिनों जानकी ट्रेन के बहाने <strong>ज्ञानवर्धन मिश्र</strong> की कहानी मिथिला के लोगों को, खासकर मिथिला की महिलाओं को द्रवीभूत कर दिया था । मेरी माँ कभी कभार अखबार पढ़ती थी। संयोगवश उन दिनों गाँव में थी और उस कहानी को पढ़ी थी। कहानी की मार्मिकता कुछ ऐसी थी कि गाँव-घर के लोग, खासकर महिलाएं, अखबार के उस स्थान को काट काट, लई ,(आटा को गरम कर चिपकाने में इस्तेमाल किया जाता है) से कूट (मोटा गत्ता) में साटकर अपने इष्ट देवी-देवता के पास भी रहे थे &#8211; जानकी के सम्मानार्थ। लेकिन आज भी वही प्रश्न है क्या जानकी को वह सम्मान मिला जिसकी वह हकदार थी ? शायद नहीं।</p>
<figure id="attachment_5257" aria-describedby="caption-attachment-5257" style="width: 2560px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/jj-scaled.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/jj-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1428" class="size-full wp-image-5257" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/jj-scaled.jpg 2560w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/jj-300x167.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/jj-1024x571.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/jj-768x428.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/jj-1536x857.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/jj-2048x1142.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5257" class="wp-caption-text">जानकी का जनकपुर</figcaption></figure>
<p>आज अयोध्या में राम अपने घर नए स्वरुप में आ गए। आश्चर्य की बात यह है कि आज भी मिथिला के लोग &#8216;जमाय&#8217; के नाम को भले जप रहे हैं, बेटी &#8216;जानकी&#8217; के लिए एक बार भी जयजयकार नहीं किये। मिथिला का प्रारब्ध यही है। हर घर में &#8216;जानकी&#8217; एक नहीं कई हैं, लेकिन सभी &#8216;राम&#8217; और &#8216;श्याम&#8217; की आराधना करते हैं। </p>
<p>वैसे &#8216;जानकी&#8217; भले &#8216;अयोध्या नरेश दशरथ की बहु हों, लेकिन मिथिला में जानकी तो बेटी थी, हैं भी, लेकिन  &#8216;जानकी को वह स्थान नहीं मिला जिसकी वे हकदार थी, हकदार हैं। वैसे आज भी उत्तर बिहार के इस क्षेत्र में रहने वाले माता-पिता की नज़रों में उनके घरों में पलने वाली &#8216;जानकियों&#8217; की स्थिति बहुत बेहतर नहीं है। विश्वास नहीं हो तो इस क्षेत्र में जितनी भी शैक्षणिक संस्थाएं हैं, स्वास्थ्य केंद्र हैं, सामाजिक दालान हैं, सांस्कृतिक गलियां हैं, कारावास में बंद पुरुषों के बंदी के कारण हैं &#8211; पड़ताल के लिए एक नजर घुमा लें। आप कल भी मूक-बधिर रहे, आगे भी रहेंगे। </p>
<figure id="attachment_5258" aria-describedby="caption-attachment-5258" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150955.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150955.jpg" alt="" width="2200" height="1425" class="size-full wp-image-5258" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150955.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150955-300x194.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150955-1024x663.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150955-768x497.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150955-1536x995.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150955-2048x1327.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5258" class="wp-caption-text">PM at the Pran Pratishtha ceremony of Shree Ram Janmaboomi Temple in Ayodhya, Uttar Pradesh on January 22, 2024.</figcaption></figure>
<p>आइये वापस अयोध्या चलते हैं। भारत के राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को अयोध्या के ऐतिहासिक स्थान पर इतिहास लिखने के लिए बधाई देते कहती हैं कि &#8220;माननीय प्रधानमंत्री जी, अयोध्या धाम में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के पावन अवसर पर शुभकामनाओं के लिए आपका बहुत-बहुत आभार। मुझे विश्वास है कि यह ऐतिहासिक क्षण भारतीय विरासत एवं संस्कृति को और समृद्ध करने के साथ ही हमारी विकास यात्रा को नए उत्कर्ष पर ले जाएगा।&#8221; जानकी की चर्चा भारत के राष्ट्राध्यक्ष भी नहीं की। </p>
<p>प्रधानमंत्री को अपने शुभकामना सन्देश में उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ ने कहा कि &#8220;आज श्री राम जन्मभूमि अयोध्या की ऐतिहासिक नगरी में आयोजित, युगांतरकारी भव्य राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के शुभ अवसर की हार्दिक शुभकामनाएं ! हर्ष और उल्लास से सराबोर यह अवसर देश के गौरव के प्रति राष्ट्र की असीम जागृत चेतना का द्योतक है। अपने संकल्प को सफलतापूर्वक सिद्ध करने पर, प्रधानमंत्री का कोटिशः अभिनंदन !&#8221; </p>
<p>वे आगे कहते हैं कि &#8220;22 जनवरी का यह दिन, हमारी सभ्यता के इतिहास में &#8220;दिव्यता के साथ साक्षात्कार&#8221; के क्षण के रूप में परिभाषित रहेगा। आज के दिन प्रभु श्री राम के क्षमा, सत्यनिष्ठा, पराक्रम, शालीनता, दया और करुणा जैसे सद्गुणों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लें जिससे हमारे चतुर्दिक शांति, सौहार्द, शुचिता, शुभता और विद्वत्ता का प्रकाश फैले।&#8221; <strong>उपराष्ट्रपति भी जानकी को ध्यान नहीं दिए &#8211; जबकि जानकी के बिना राम अस्तित्वहीन थे, हैं। </strong></p>
<figure id="attachment_5259" aria-describedby="caption-attachment-5259" style="width: 1580px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150992-scaled.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150992-scaled.jpg" alt="" width="1580" height="2560" class="size-full wp-image-5259" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150992-scaled.jpg 1580w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150992-185x300.jpg 185w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150992-632x1024.jpg 632w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150992-768x1245.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150992-948x1536.jpg 948w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150992-1264x2048.jpg 1264w" sizes="auto, (max-width: 1580px) 100vw, 1580px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5259" class="wp-caption-text">PM at the Pran Pratishtha ceremony of Shree Ram Janmaboomi Temple in Ayodhya, Uttar Pradesh on January 22, 2024.</figcaption></figure>
<p>इतना ही नहीं, केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा है कि अयोध्या में राम मंदिर में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा का संकल्प पूरा होने पर 5 सदी की प्रतीक्षा और प्रतिज्ञा आज पूर्ण हुई है। उनके अनुसार “जय श्री राम…5 सदी की प्रतीक्षा और प्रतिज्ञा आज पूर्ण हुई। आज का दिन करोड़ों रामभक्तों के लिये कभी ना भूलने वाला दिन है। आज जब हमारे रामलला अपने भव्य मंदिर में विराजमान हुए हैं, तब असंख्य राम भक्तों की तरह मैं भी भाव विभोर हूँ। इस भावना को शब्दों में समेट पाना संभव नहीं है। इस पल की प्रतीक्षा में न जाने हमारी कितनी पीढ़ियां खप गईं, लेकिन कोई भी डर और आतंक रामजन्मभूमि पर फिर से मंदिर बनाने के संकल्प और विश्वास को डिगा नहीं पाया। आज माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में यह संकल्प सिद्ध हुआ है। इसके लिए मैं हृदय की गहराइयों से उनका आभार व्यक्त करता हूँ।“</p>
<p>केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि “आज के इस पावन दिन मैं सदियों तक इस संघर्ष और संकल्प को जीवित रखने वाले महापुरुषों को भी नमन करता हूँ, जिन्होंने अनेक अपमान और यातनाएँ सहीं, पर धर्म का मार्ग नहीं छोड़ा। विश्व हिंदू परिषद्, हजारों श्रेष्ठ संत और असंख्य नामी-गुमनामी लोगों के संघर्ष का आज सुखद व सुफल परिणाम आया है।यह विशाल श्री राम जन्मभूमि मंदिर युगों-युगों तक अविरल अविनाशी सनातन संस्कृति का अद्वितीय प्रतीक रहेगा।” <strong>सम्मानित गृहमंत्री भी जानकी की चर्चा नहीं किये। </strong></p>
<p>उधर, पीढ़ियों से, धार्मिक महत्व से जुड़ा होने के कारण अयोध्या, भगवान राम की जन्मस्थली के रूप में आराधना का स्‍थल रहा है और दुनिया भर में लाखों लोगों के लिए आध्यात्‍म के केन्‍द्र के रूप में कार्य करता रहा है। हालाँकि, हाल के वर्षों में एक असाधारण बदलाव देखने को मिला है, जिसमें शहर की तकदीर बदली और उसकी प्रगति और विकास का ताना-बाना विस्‍तार से बुना गया। विकास संबंधी पहलों की सावधानीपूर्वक तैयार की गई योजना और उनके कार्यान्वयन ने शहर के पुनरुत्थान का मार्ग प्रशस्त किया तथा संस्कृति और समृद्धि के प्रकाश स्‍तम्‍भ के रूप में इसकी कायाकल्प कर दी है।  &#8220;यह स्थान अब स्वर्ग है।&#8221;</p>
<p><strong>उधर प्राण-प्रतिष्ठा के बाद प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी कहते हैं &#8221;आज हमारे राम आ गए हैं! सदियों की प्रतीक्षा के बाद हमारे राम आ गए हैं। सदियों का अभूतपूर्व धैर्य, अनगिनत बलिदान, त्याग और तपस्या के बाद हमारे प्रभु राम आ गये हैं। इस शुभ घड़ी की आप सभी को, समस्त देशवासियों को, बहुत-बहुत बधाई।&#8221;</strong></p>
<figure id="attachment_5260" aria-describedby="caption-attachment-5260" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150988.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150988.jpg" alt="" width="2200" height="2482" class="size-full wp-image-5260" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150988.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150988-266x300.jpg 266w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150988-908x1024.jpg 908w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150988-768x866.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150988-1361x1536.jpg 1361w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150988-1815x2048.jpg 1815w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5260" class="wp-caption-text">PM at the Pran Pratishtha ceremony of Shree Ram Janmaboomi Temple in Ayodhya, Uttar Pradesh on January 22, 2024.</figcaption></figure>
<p>प्रधानमंत्री आगे कहते हैं कि &#8220;मैं अभी गर्भगृह में ईश्वरीय चेतना का साक्षी बनकर आपके सामने उपस्थित हुआ हूँ। कितना कुछ कहने को है&#8230; लेकिन कंठ अवरुद्ध है। मेरा शरीर अभी भी स्पंदित है, चित्त अभी भी उस पल में लीन है। हमारे रामलला अब टेंट में नहीं रहेंगे। हमारे रामलला अब इस दिव्य मंदिर में रहेंगे। मेरा पक्का विश्वास है, अपार श्रद्धा है कि जो घटित हुआ है इसकी अनुभूति, देश के, विश्व के, कोने-कोने में रामभक्तों को हो रही होगी। ये क्षण अलौकिक है। ये पल पवित्रतम है। ये माहौल, ये वातावरण, ये ऊर्जा, ये घड़ी&#8230; प्रभु श्रीराम का हम सब पर आशीर्वाद है। 22 जनवरी, 2024 का ये सूरज एक अद्भुत आभा लेकर आया है। 22 जनवरी, 2024, ये कैलेंडर पर लिखी एक तारीख नहीं। ये एक नए कालचक्र का उद्गम है।&#8221;</p>
<p>प्रधानमंत्री के अनुसार, राम मंदिर के भूमिपूजन के बाद से प्रतिदिन पूरे देश में उमंग और उत्साह बढ़ता ही जा रहा था। निर्माण कार्य देख, देशवासियों में हर दिन एक नया विश्वास पैदा हो रहा था। आज हमें सदियों के उस धैर्य की धरोहर मिली है, आज हमें श्रीराम का मंदिर मिला है। गुलामी की मानसिकता को तोड़कर उठ खड़ा हो रहा राष्ट्र, अतीत के हर दंश से हौसला लेता हुआ राष्ट्र, ऐसे ही नव इतिहास का सृजन करता है। आज से हजार साल बाद भी लोग आज की इस तारीख की, आज के इस पल की चर्चा करेंगे। और ये कितनी बड़ी रामकृपा है कि हम इस पल को जी रहे हैं, इसे साक्षात घटित होते देख रहे हैं। आज दिन-दिशाएँ&#8230; दिग-दिगंत&#8230; सब दिव्यता से परिपूर्ण हैं। ये समय, सामान्य समय नहीं है। ये काल के चक्र पर सर्वकालिक स्याही से अंकित हो रहीं अमिट स्मृति रेखाएँ हैं। &#8221;</p>
<p>त्रेता में राम आगमन पर तुलसीदास जी ने लिखा है- प्रभु बिलोकि हरषे पुरबासी। जनित वियोग बिपति सब नासी। अर्थात्, प्रभु का आगमन देखकर ही सब अयोध्यावासी, समग्र देशवासी हर्ष से भर गए। लंबे वियोग से जो आपत्ति आई थी, उसका अंत हो गया। उस कालखंड में तो वो वियोग केवल 14 वर्षों का था, तब भी इतना असह्य था। इस युग में तो अयोध्या और देशवासियों ने सैकड़ों वर्षों का वियोग सहा है। हमारी कई-कई पीढ़ियों ने वियोग सहा है। भारत के तो संविधान में, उसकी पहली प्रति में, भगवान राम विराजमान हैं। संविधान के अस्तित्व में आने के बाद भी दशकों तक प्रभु श्रीराम के अस्तित्व को लेकर कानूनी लड़ाई चली। मैं आभार व्यक्त करूंगा भारत की न्यायपालिका का, जिसने न्याय की लाज रख ली। न्याय के पर्याय प्रभु राम का मंदिर भी न्याय बद्ध तरीके से ही बना। आज गाँव-गाँव में एक साथ कीर्तन, संकीर्तन हो रहे हैं। </p>
<p>आज मंदिरों में उत्सव हो रहे हैं, स्वच्छता अभियान चलाए जा रहे हैं। पूरा देश आज दीवाली मना रहा है। अपने 11 दिन के व्रत-अनुष्ठान के दौरान मैंने उन स्थानों का चरण स्पर्श करने का प्रयास किया, जहां प्रभु राम के चरण पड़े थे। चाहे वो नासिक का पंचवटी धाम हो, केरला का पवित्र त्रिप्रायर मंदिर हो, आंध्र प्रदेश में लेपाक्षी हो, श्रीरंगम में रंगनाथ स्वामी मंदिर हो, रामेश्वरम में श्री रामनाथस्वामी मंदिर हो, या फिर धनुषकोडि&#8230; मेरा सौभाग्य है कि इसी पुनीत पवित्र भाव के साथ मुझे सागर से सरयू तक की यात्रा का अवसर मिला। सागर से सरयू तक, हर जगह राम नाम का वही उत्सव भाव छाया हुआ है। प्रभु राम तो भारत की आत्मा के कण-कण से जुड़े हुए हैं। </p>
<figure id="attachment_5261" aria-describedby="caption-attachment-5261" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150980.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150980.jpg" alt="" width="2200" height="1922" class="size-full wp-image-5261" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150980.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150980-300x262.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150980-1024x895.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150980-768x671.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150980-1536x1342.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150980-2048x1789.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5261" class="wp-caption-text">PM at the Pran Pratishtha ceremony of Shree Ram Janmaboomi Temple in Ayodhya, Uttar Pradesh on January 22, 2024.</figcaption></figure>
<p>प्रधानमंत्री कहते हैं कि &#8216;आज का ये अवसर उत्सव का क्षण तो है ही, लेकिन इसके साथ ही ये क्षण भारतीय समाज की परिपक्वता के बोध का क्षण भी है। हमारे लिए ये अवसर सिर्फ विजय का नहीं, विनय का भी है। दुनिया का इतिहास साक्षी है कि कई राष्ट्र अपने ही इतिहास में उलझ जाते हैं। ऐसे देशों ने जब भी अपने इतिहास की उलझी हुई गांठों को खोलने का प्रयास किया, उन्हें सफलता पाने में बहुत कठिनाई आई। बल्कि कई बार तो पहले से ज्यादा मुश्किल परिस्थितियां बन गईं। लेकिन हमारे देश ने इतिहास की इस गांठ को जिस गंभीरता और भावुकता के साथ खोला है, वो ये बताती है कि हमारा भविष्य हमारे अतीत से बहुत सुंदर होने जा रहा है। वो भी एक समय था, जब कुछ लोग कहते थे कि राम मंदिर बना तो आग लग जाएगी। ऐसे लोग भारत के सामाजिक भाव की पवित्रता को नहीं जान पाए।&#8221;</p>
<p>प्रधानमंत्री के अनुसार &#8216;रामलला के इस मंदिर का निर्माण, भारतीय समाज के शांति, धैर्य, आपसी सद्भाव और समन्वय का भी प्रतीक है। हम देख रहे हैं, ये निर्माण किसी आग को नहीं, बल्कि ऊर्जा को जन्म दे रहा है। राम मंदिर समाज के हर वर्ग को एक उज्जवल भविष्य के पथ पर बढ़ने की प्रेरणा लेकर आया है। मैं आज उन लोगों से आह्वान करूंगा&#8230; आईये, आप महसूस कीजिए, अपनी सोच पर पुनर्विचार कीजिए। राम आग नहीं है, राम ऊर्जा हैं। राम विवाद नहीं, राम समाधान हैं। राम सिर्फ हमारे नहीं हैं, राम तो सबके हैं। राम वर्तमान ही नहीं, राम अनंतकाल हैं।&#8217;</p>
<p>आज जिस तरह राममंदिर प्राण प्रतिष्ठा के इस आयोजन से पूरा विश्व जुड़ा हुआ है, उसमें राम की सर्वव्यापकता के दर्शन हो रहे हैं। जैसा उत्सव भारत में है, वैसा ही अनेकों देशों में है। आज अयोध्या का ये उत्सव रामायण की उन वैश्विक परम्पराओं का भी उत्सव बना है। रामलला की ये प्रतिष्ठा ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ के विचार की भी प्रतिष्ठा है। आज अयोध्या में, केवल श्रीराम के विग्रह रूप की प्राण प्रतिष्ठा नहीं हुई है। ये श्रीराम के रूप में साक्षात् भारतीय संस्कृति के प्रति अटूट विश्वास की भी प्राण प्रतिष्ठा है। ये साक्षात् मानवीय मूल्यों और सर्वोच्च आदर्शों की भी प्राण प्रतिष्ठा है। इन मूल्यों की, इन आदर्शों की आवश्यकता आज सम्पूर्ण विश्व को है। सर्वे भवन्तु सुखिन: ये संकल्प हम सदियों से दोहराते आए हैं। </p>
<figure id="attachment_5262" aria-describedby="caption-attachment-5262" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150960.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150960.jpg" alt="" width="2200" height="1316" class="size-full wp-image-5262" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150960.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150960-300x179.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150960-1024x613.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150960-768x459.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150960-1536x919.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150960-2048x1225.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5262" class="wp-caption-text">Glimpses of Pran Pratishtha ceremony of Shree Ram Janmaboomi Temple in Ayodhya, Uttar Pradesh on January 22, 2024. PM presents on the occasion.</figcaption></figure>
<p>प्रधानमंत्री के अनुसार, &#8216;आज उसी संकल्प को राममंदिर के रूप में साक्षात् आकार मिला है। ये मंदिर, मात्र एक देव मंदिर नहीं है। ये भारत की दृष्टि का, भारत के दर्शन का, भारत के दिग्दर्शन का मंदिर है। ये राम के रूप में राष्ट्र चेतना का मंदिर है। राम भारत की आस्था हैं, राम भारत का आधार हैं। राम भारत का विचार हैं, राम भारत का विधान हैं। राम भारत की चेतना हैं, राम भारत का चिंतन हैं। राम भारत की प्रतिष्ठा हैं, राम भारत का प्रताप हैं। राम प्रवाह हैं, राम प्रभाव हैं। राम नेति भी हैं। राम नीति भी हैं। राम नित्यता भी हैं। राम निरंतरता भी हैं। राम विभु हैं, विशद हैं। राम व्यापक हैं, विश्व हैं, विश्वात्मा हैं। और इसलिए, जब राम की प्रतिष्ठा होती है, तो उसका प्रभाव वर्षों या शताब्दियों तक ही नहीं होता।&#8217;</p>
<p>आज के युग की मांग है कि हमें अपने अंतःकरण को विस्तार देना होगा। हमारी चेतना का विस्तार&#8230; देव से देश तक, राम से राष्ट्र तक होना चाहिए। हनुमान जी की भक्ति, हनुमान जी की सेवा, हनुमान जी का समर्पण, ये ऐसे गुण हैं जिन्हें हमें बाहर नहीं खोजना पड़ता। प्रत्येक भारतीय में भक्ति, सेवा और समर्पण के ये भाव, समर्थ-सक्षम,भव्य-दिव्य भारत का आधार बनेंगे। और यही तो है देव से देश और राम से राष्ट्र की चेतना का विस्तार ! दूर-सुदूर जंगल में कुटिया में जीवन गुजारने वाली मेरी आदिवासी मां शबरी का ध्यान आते ही, अप्रतिम विश्वास जागृत होता है। मां शबरी तो कबसे कहती थीं- राम आएंगे। </p>
<p>प्रत्येक भारतीय में जन्मा यही विश्वास, समर्थ-सक्षम, भव्य-दिव्य भारत का आधार बनेगा।  और यही तो है देव से देश और राम से राष्ट्र की चेतना का विस्तार! हम सब जानते हैं कि निषादराज की मित्रता, सभी बंधनों से परे है। निषादराज का राम के प्रति सम्मोहन, प्रभु राम का निषादराज के लिए अपनापन कितना मौलिक है। सब अपने हैं, सभी समान हैं।  प्रत्येक भारतीय में अपनत्व की, बंधुत्व की ये भावना, समर्थ-सक्षम, भव्य-दिव्य भारत का आधार बनेगी। और यही तो है देव से देश और राम से राष्ट्र की चेतना का विस्तार!</p>
<p>प्रभु श्रीराम की हमारी पूजा, विशेष होनी चाहिए। ये पूजा, स्व से ऊपर उठकर समष्टि के लिए होनी चाहिए। ये पूजा, अहम से उठकर वयम के लिए होनी चाहिए। प्रभु को जो भोग चढ़ेगा, वो विकसित भारत के लिए हमारे परिश्रम की पराकाष्ठा का प्रसाद भी होगा। हमें नित्य पराक्रम, पुरुषार्थ, समर्पण का प्रसाद प्रभु राम को चढ़ाना होगा। इनसे नित्य प्रभु राम की पूजा करनी होगी, तब हम भारत को वैभवशाली और विकसित बना पाएंगे।</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/shriram-temople-in-ayodhya-dedicated-to-nation">&#8230;&#8230; लेकिन पुरुष प्रधान समाज में &#8216;जानकी&#8217; के लिए जय जयकार कौन करेगा? मिथिला में आज भी जानकियों की स्थिति  बेहतर नहीं है😢</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>वाइस एडमिरल अतुल आनंद ने नौसेना संचालन के महानिदेशक (डीजीएनओ) का पदभार संभाला</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 01 Apr 2023 10:57:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[atul anand]]></category>
		<category><![CDATA[India]]></category>
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		<category><![CDATA[navy]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली: वाइस एडमिरल अतुल आनंद, एवीएसएम, वीएसएम ने 01 अप्रैल 2023 को नौसेना संचालन महानिदेशक के रूप में पदभार ग्रहण किया। रियर एडमिरल अतुल आनंद को भारतीय नौसेना की कार्यकारी शाखा में 01 जनवरी 1988, को कमीशन किया गया था। वह नेशनल डिफेंस एकेडमी, (71वां कोर्स, डेल्टा स्क्वाड्रन), डिफेंस सर्विसेज कमांड एंड स्टाफ कॉलेज, [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली: वाइस एडमिरल अतुल आनंद, एवीएसएम, वीएसएम ने 01 अप्रैल 2023 को नौसेना संचालन महानिदेशक के रूप में पदभार ग्रहण किया।</strong></p>
<p>रियर एडमिरल अतुल आनंद को भारतीय नौसेना की कार्यकारी शाखा में 01 जनवरी 1988, को कमीशन किया गया था। वह नेशनल डिफेंस एकेडमी, (71वां कोर्स, डेल्टा स्क्वाड्रन), डिफेंस सर्विसेज कमांड एंड स्टाफ कॉलेज, मीरपुर (बांग्लादेश) और नेशनल डिफेंस कॉलेज, नई दिल्ली के पूर्व छात्र हैं। उन्होंने अमेरिका के हवाई स्थित एशिया पैसिफिक सेंटर फॉर सिक्योरिटी स्टडीज में प्रतिष्ठित एडवांस सिक्योरिटी को-ऑपरेशन कोर्स में भी भाग लिया है। उनकी शैक्षणिक योग्यता में एमफिल, एमएससी (डिफेंस एंड स्ट्रेटेजिक स्टडीज), मास्टर्स इन डिफेंस स्टडीज और बीएससी की डिग्री शामिल है।</p>
<p>वाइस एडमिरल अतुल आनंद को कर्मठता से सेवा करने के लिए अतिविशिष्ट सेवा पदक और विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया गया है। उन्होंने अपने नौसैनिक जीवन में कई महत्वपूर्ण नियुक्तियों पर काम किया है, जिनमें टीआरवी ए72 में टारपीडो रिकवरी पोत, मिसाइल बोट भारतीय नौसेना पोत चटक, कार्वेट भारतीय नौसेना पोत खुकरी और विध्वंसक भारतीय नौसेना पोत मुंबई की कमान शामिल हैं। उन्होंने भारतीय नौसेना जहाजों शारदा, रणविजय और ज्योति के नेविगेटिंग ऑफिसर के रूप में भी काम किया है। इसके अलावा वह सी हैरियर स्क्वाड्रन आईएनएएस 300 के डायरेक्शन ऑफिसर और विध्वंसक भारतीय नौसेना पोत दिल्ली के कार्यकारी अधिकारी थे। </p>
<p>उनकी महत्वपूर्ण स्टाफ नियुक्तियों में संयुक्त निदेशक स्टाफ रिक्वायरमेंट्स, डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन में डायरेक्टिंग स्टाफ, डायरेक्टर नेवल ऑपरेशंस और डायरेक्टर नेवल इंटेलिजेंस (ऑप्स) शामिल हैं। उन्होंने रक्षा मंत्रालय (नौसेना) के एकीकृत मुख्यालय में प्रधान निदेशक नौसेना संचालन और प्रधान निदेशक रणनीति, अवधारणाओं और परिवर्तन के रूप में भी काम किया है। फ्लैग ऑफिसर के रूप में, उन्होंने नौसेना स्टाफ के सहायक प्रमुख (विदेशी सहयोग और इंटेलिजेंस), राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, खडकवासला में डिप्टी कमांडेंट और मुख्य प्रशिक्षक, महाराष्ट्र नौसेना क्षेत्र के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग और कर्नाटक नौसेना क्षेत्र के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग के रूप में कार्य किया है।</p>
<p>उन्होंने श्रीमती गोलरुख से शादी की है। उनकी पुत्री रश्मी मुंबई में काम करने वाली एक डिजिटल मार्केटिंग उद्यमी हैं और पुत्र रोहन डबलिन, आयरलैंड में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं।</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/nation/vice-admiral-atul-anand-takes-over-as-the-director-general-of-naval-operations-dgno">वाइस एडमिरल अतुल आनंद ने नौसेना संचालन के महानिदेशक (डीजीएनओ) का पदभार संभाला</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>प्रधानमंत्री ने पहले स्वदेशी विमान वाहक पोत &#8216;आईएनएस विक्रांत&#8217; को राष्ट्र की सेवा में समर्पित किया</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/nation/pm-commissions-the-first-indigenous-aircraft-carrier-as-ins-vikrant</link>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 02 Sep 2022 11:53:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[dedicates]]></category>
		<category><![CDATA[defence]]></category>
		<category><![CDATA[government]]></category>
		<category><![CDATA[INS Vikrant]]></category>
		<category><![CDATA[kochchi]]></category>
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		<category><![CDATA[technology]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>कोची (केरल) : भारतीय नौसेना की अपनी संस्था वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा तैयार किया गया तथा पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र की शिपयार्ड कंपनी, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित आईएनएस विक्रांत को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज राष्ट्र की सेवा में समर्पित किया। इस कार्यक्रम के दौरान औपनिवेशिक अतीत से अलग तथा समृद्ध भारतीय सामुद्रिक [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/nation/pm-commissions-the-first-indigenous-aircraft-carrier-as-ins-vikrant">प्रधानमंत्री ने पहले स्वदेशी विमान वाहक पोत &#8216;आईएनएस विक्रांत&#8217; को राष्ट्र की सेवा में समर्पित किया</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कोची (केरल) : भारतीय नौसेना की अपनी संस्था वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा तैयार किया गया तथा पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र की शिपयार्ड कंपनी, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित आईएनएस विक्रांत को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज राष्ट्र की सेवा में समर्पित किया। इस कार्यक्रम के दौरान औपनिवेशिक अतीत से अलग तथा समृद्ध भारतीय सामुद्रिक विरासत के अनुरूप प्रधानमंत्री ने नौसेना के नये ध्वज (निशान) का भी अनावरण किया।</strong></p>
<p>विक्रांत का निर्माण अत्याधुनिक स्वचालित विशेषताओं से लैस है और वह भारत के सामुद्रिक इतिहास में अब तक का सबसे विशाल निर्मित पोत है। स्वदेशी वायुयान वाहक का नाम उसके विख्यात पूर्ववर्ती और भारत के पहले विमान वाहक पोत के नाम पर रखा गया है, जिसने 1971 के युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यह पोत तमाम स्वदेशी उपकरणों और यंत्रों से लैस है, जिनके निर्माण में देश के प्रमुख औद्योगिक घराने तथा 100 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम संलग्न थे। विक्रांत के लोकार्पण के साथ भारत के पास दो सक्रिय विमान वाहक पोत हो जायेंगे, जिनसे देश की समुद्री सुरक्षा को बहुत बल मिलेगा।</p>
<figure id="attachment_4434" aria-describedby="caption-attachment-4434" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/4.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/4.jpg" alt="" width="2200" height="2243" class="size-full wp-image-4434" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/4.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/4-294x300.jpg 294w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/4-1004x1024.jpg 1004w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/4-768x783.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/4-1507x1536.jpg 1507w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/4-2009x2048.jpg 2009w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/4-24x24.jpg 24w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/4-48x48.jpg 48w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-4434" class="wp-caption-text">PM visits at the first indigenous aircraft carrier INS Vikrant, in Kochi, Kerela</figcaption></figure>
<p>उपस्थितजनों को सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज यहां केरल के समुद्री तट पर भारत, हर भारतवासी, एक नये भविष्य के सूर्योदय का साक्षी बन रहा है। आईएनएस विक्रांत पर हो रहा यह आयोजन विश्व क्षितिज पर भारत के बुलंद होते हौसलों की हुंकार है। उन्होंने कहा कि आज हम सब स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों को सच होता देख रहे हैं, जिसमें उन्होंने सक्षम और शक्तिशाली भारत की परिकल्पना की थी। प्रधानमंत्री ने कहा, “विक्रांत विशाल, विराट और विहंगम है। विक्रांत विशिष्ट है, विक्रांत विशेष भी है। विक्रांत केवल एक युद्धपोत नहीं है। यह 21वीं सदी के भारत के परिश्रम, प्रतिभा, प्रभाव और प्रतिबद्धता का प्रमाण है। यदि लक्ष्य दूरंत हैं, यात्राएं दिगंत हैं, समंदर और चुनौतियां अनन्त हैं- तो भारत का उत्तर है विक्रांत। आजादी के अमृत महोत्सव का अतुलनीय अमृत है विक्रांत। आत्मनिर्भर होते भारत का अद्वितीय प्रतिबिंब है विक्रांत।”</p>
<p>राष्ट्र के नये माहौल पर टिप्पणी करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज के भारत के लिये कोई भी चुनौती मुश्किल नहीं रही। उन्होंने कहा, “आज भारत विश्व के उन देशों में शामिल हो गया है, जो स्वदेशी तकनीक से इतने विशाल एयरक्राफ्ट कैरियर का निर्माण करते हैं। आज आईएनएस विक्रांत ने देश को एक नये विश्वास से भर दिया है, देश में एक नया भरोसा पैदा कर दिया है।” प्रधानमंत्री ने नौसेना, कोचीन शिपयार्ड के इंजीनियरों, वैज्ञानिकों और खासतौर से उन कामगारों के योगदान की सराहना की, जिन्होंने इस परियोजना पर काम किया है। उन्होंने कहा कि ओणम के आनन्ददायी और पवित्र अवसर ने आज के इस अवसर को और अधिक आनन्ददायी बना दिया है।</p>
<figure id="attachment_4435" aria-describedby="caption-attachment-4435" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/5.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/5.jpg" alt="" width="2200" height="1554" class="size-full wp-image-4435" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/5.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/5-300x212.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/5-1024x723.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/5-768x542.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/5-1536x1085.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/5-2048x1447.jpg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/5-100x70.jpg 100w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-4435" class="wp-caption-text">PM visits at the first indigenous aircraft carrier INS Vikrant, in Kochi, Kerela</figcaption></figure>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि आईएनएस विक्रांत के हर भाग की अपनी एक खूबी है, एक ताकत है, अपनी एक विकासयात्रा भी है। उन्होंने कहा कि यह स्वदेशी सामर्थ्य, स्वदेशी संसाधन और स्वदेशी कौशल का प्रतीक है। इसके एयरबेस में जो इस्पात लगा है, वह इस्पात भी स्वदेशी है, जिसे डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने विकसित किया है तथा भारतीय कंपनियों ने निर्मित किया है। विमान वाहक पोत की विशालता का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह एक तैरते हुए शहर की तरह है। यह इतनी बिजली पैदा करता है जो 5000 घरों के लिये पर्याप्त होगी और इसमें जितने तार का इस्तेमाल हुआ है, उसे फैलाया जाये, तो वह कोच्चि से काशी पहुंच जायेगा। उन्होंने यह भी कहा कि आईएनएस विक्रांत पांच प्रणों की भावना का समुच्चय है, जिसका उद्घोष उन्होंने लाल किले की प्राचीर से किया था।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने भारतीय सामुद्रिक परंपरा और नौसैन्य क्षमताओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि छत्रपति वीर शिवाजी महाराज ने इस समुद्री सामर्थ्य के दम पर ऐसी नौसेना का निर्माण किया, जो दुश्मनों की नींद उड़ाकर रखती थी। जब अंग्रेज भारत आये, तो वे भारतीय जहाजों और उनके जरिये होने वाले व्यापार की ताकत से घबराये रहते थे, इसलिये उन्होंने भारत के समुद्री सामर्थ्य की कमर तोड़ने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि कैसे उस समय ब्रिटिश संसद में कानून बनाकर भारतीय जहाजों और व्यापारियों पर कड़े प्रतिबंध लगा दिये गये थे।</p>
<figure id="attachment_4436" aria-describedby="caption-attachment-4436" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/3.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/3.jpg" alt="" width="2200" height="1221" class="size-full wp-image-4436" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/3.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/3-300x167.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/3-1024x568.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/3-768x426.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/3-1536x852.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/3-2048x1137.jpg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/3-696x385.jpg 696w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-4436" class="wp-caption-text">PM inspecting the Guard of Honour during the commissions of the first indigenous aircraft carrier as INS Vikrant, in Kochi</figcaption></figure>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि आज 2 सितंबर, 2022 वह ऐतिहासिक तारीख है, जब भारत ने गुलामी के एक निशान, गुलामी के एक बोझ को सीने से उतार दिया है। आज से भारतीय नौसेना को एक नया ध्वज मिला है। उन्होंने कहा कि अब तक भारतीय नौसेना के ध्वज पर गुलामी की पहचान बनी हुई थी, लेकिन अब आज से छत्रपति शिवाजी से प्रेरित, नौसेना का नया ध्वज समंदर और आसमान में लहरायेगा।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि विक्रांत जब हमारे समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा के लिये उतरेगा, तो उस पर नौसेना की अनेक महिला सैनिक भी तैनात रहेंगी। समंदर की अथाह शक्ति के साथ असीम महिला शक्ति, ये नये भारत की बुलंद पहचान बन रही है। अब भारतीय नौसेना ने अपनी सभी शाखाओं को महिलाओं के लिये खोलने का फैसला किया है। जो पाबंदियां थीं, वे अब हट रही हैं। जैसे समर्थ लहरों के लिये कोई दायरे नहीं होते, वैसे ही भारत की बेटियों के लिये भी अब कोई दायरा या बंधन नहीं होंगे।प्रधानमंत्री ने कहा कि बूंद-बूंद जल से विराट समंदर बन जाता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस बार स्वतंत्रता दिवस पर स्वदेशी तोपों से सलामी दी गई थी। इसी तरह भारत का एक-एक नागरिक ‘वोकल फॉर लोकल’ के मंत्र को जीना प्रारंभ कर देगा, तो देश को आत्मनिर्भर बनने में अधिक समय नहीं लगेगा।</p>
<figure id="attachment_4437" aria-describedby="caption-attachment-4437" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/7.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/7.jpg" alt="" width="2200" height="1209" class="size-full wp-image-4437" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/7.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/7-300x165.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/7-1024x563.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/7-768x422.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/7-1536x844.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/7-2048x1125.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-4437" class="wp-caption-text">PM being welcomed by people, in Mangaluru, Karnataka</figcaption></figure>
<p>बदलती भू-रणनीतिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले समय भारत-प्रशांत क्षेत्र और हिंद महासागर में सुरक्षा चिंताओं को लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाता रहा, लेकिन आज ये क्षेत्र हमारे लिये देश की बड़ी रक्षा प्राथमिकता हैं। इसलिये हम नौसेना के लिये बजट बढ़ाने से लेकर उसकी क्षमता बढ़ाने तक हर दिशा में काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि शक्तिशाली भारत शांतिपूर्ण और सुरक्षित विश्व का मार्ग प्रशस्त करेगा।</p>
<p>इस अवसर पर केरल के राज्यपाल श्री आरिफ मुहम्मद खान, मुख्यमंत्री श्री पिनराई विजयन, केंद्रीय मंत्री श्री राजनाथ सिंह, श्री सर्बानन्द सोनोवाल, श्री वी. मुरलीधरन, श्री अजय भट्ट, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार श्री अजीत डोभाल, नौसेनाध्यक्ष एडमिरल आर हरि कुमार तथा अन्य उपस्थित थे।</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/nation/pm-commissions-the-first-indigenous-aircraft-carrier-as-ins-vikrant">प्रधानमंत्री ने पहले स्वदेशी विमान वाहक पोत &#8216;आईएनएस विक्रांत&#8217; को राष्ट्र की सेवा में समर्पित किया</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>#भारतकीसड़कों से #भारतकीकहानी (12) ✍️ &#8216;तिरंगा&#8217; उत्पादक और विक्रेता तिरंगे का व्यापार करते हैं 😢</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 28 Aug 2022 11:40:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
		<category><![CDATA[business]]></category>
		<category><![CDATA[flag foundation]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>#कतरन&#8217; पर आपका स्वागत है। &#8216;तिरंगा&#8217; उत्पादक और विक्रेता तिरंगा के कल्पनाकार को नहीं जानता, नहीं पहचानता, क्रेताओं को नहीं बताता उनके बारे में, वह तो महज मुनाफ़ा के लिए तिरंगा बेचता है। &#8216;बेचना और खरीदना&#8217; व्यापार का एक अहम् हिस्सा है और तिरंगा का व्यापार हो, यह शुभ संकेत नहीं है। इस कहानी के [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>#कतरन&#8217; पर आपका स्वागत है। &#8216;तिरंगा&#8217; उत्पादक और विक्रेता तिरंगा के कल्पनाकार को नहीं जानता, नहीं पहचानता, क्रेताओं को नहीं बताता उनके बारे में, वह तो महज मुनाफ़ा के लिए तिरंगा बेचता है। &#8216;बेचना और खरीदना&#8217; व्यापार का एक अहम् हिस्सा है और तिरंगा का व्यापार हो, यह शुभ संकेत नहीं है। इस कहानी के माध्यम से मैं देश के प्रधानमंत्री सम्मानित श्री नरेंद्र दामोदर मोदीजी से निवेदन करता हूँ कि वे भारत के लोगों को आह्वान करें कि अगले वर्ष 2023 में और आगे, जब आज़ाद भारत के लोग जश्ने आज़ादी का वर्ष मनाएं, वे अपने-अपने घरों में, माँ के साथ, दादा-दादी के साथ, नाना-नानी के साथ, बहनों के साथ, घर-समाज के बड़े-बुजुर्गों के साथ बैठकर तिरंगा के नियमों का ह्रदय से पालन करते अपने-अपने हाथों से तिरंगा बनायें, लहरायें, फहराएं &#8211; लेकिन बाजार में न तो तिरंगा बेचें और ना ही बाज़ार से तिरंगा खरीदें। क्योंकि देश के बच्चे ही नहीं, युवक और वुजूर्ग भी,  न तो आज तिरंगा की जीवन-यात्रा को जानते हैं, न अपनी अगली पीढ़ियों को बताते हैं। यही कारण है कि आज इस तिरंगा के कल्पनाकार सम्मानित पिंगली वेंकैय्या साहब को नहीं जानते और सम्मानित पिंगले साहब के बारे में न तो तिरंगा उत्पादक बताता है और ना ही बाजार में तिरंगा बेचने वाला ही। </strong></p>
<p>फ्लैग फाउंडेशन ऑफ़ इण्डिया देश में अब तक लगभग 100 विशालकाय ध्वज देश में लगा चुका है, जिसमें 13 झंडे 207 फुट से ऊंचे हैं। फ्लैग फाउण्डेशन के संस्थापक यह मानते हैं कि उनकी पहल के बाद पुरे देश में अनेक संस्थाएं आगे आईं और अभी तक 500 से अधिक विशालकाय ध्वज पुरे देश में लगाए जा चुके हैं। वे यह भी मानते है कि किसी भी देश में इतने विशालकाय झंडे नहीं हैं, जितने हमारे देश भारत में हैं। वे यह भी स्वीकार करते हैं कि : &#8220;हालांकि यह सत्य है कि सिर्फ तिरंगा प्रदर्शित करने से कोई देशभक्त नहीं बन जाता। यह प्रतीकात्मक है लेकिन किसी भी काम में सफलता के लिए हम इसे प्रेरणा स्रोत अवश्य बना सकते हैं। मेरा मानना है कि हम सभी अपने-अपने काम राष्ट्रहित में ईमानदारी दे करते रहें तो कोई भी ताकत भारत को खुशहाल राष्ट्र बनने से नहीं रोक सकती। तिरंगा हमारा राष्ट्रीय ध्वज है, जो देश की संप्रभुता और स्वाभिमान का सर्वोच्च प्रतीक है ही, राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए मर-मिटने वालों के बलिदान का भी प्रतीक है। हमें इसका मान-सम्मान बनाए रखना है। हमें सदैव याद रखना है, झंडा ऊंचा रहे हमारा। &#8221;</p>
<p><iframe loading="lazy" title="#भारतकीसड़कों से #भारतकीकहानी (12) ✍️ &#039;तिरंगा&#039; उत्पादक और विक्रेता तिरंगे का व्यापार करते हैं" width="696" height="392" src="https://www.youtube.com/embed/SSARE8LHHQg?start=140&#038;feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture" allowfullscreen></iframe></p>
<p>विगत 13, 14 और 15 अगस्त, 2022 को आज़ादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के आह्वान पर &#8216;हर घर तिरंगा&#8217; लहराने का कार्य लोगों ने बहुत उत्साह से संपन्न किया। प्रधानमंत्री के वेबसाइट पर कोई पांच लाख से अधिक तिरंगे के साथ सेल्फी भी प्रेषित किया भारत के लोगों ने। सरकार द्वारा निर्धारित से 9/- रुपये, 18/- रुपये और 25/- रुपये में बाजार से तिरंगा खरीदकर हर घर तिरंगा लहरा कर, फहरा कर स्वतंत्रता दिवस की ख़ुशी ज़ाहिर किये। शायद स्वतंत्र भारत में पहली बार लोगों ने इस कदर आस्था और विश्वास दिखाया है। </p>
<p>लेकिन क्या तिरंगे के इतिहास को कितने लोग जानते हैं? </p>
<p>कहते हैं भारत के राष्ट्रीय ध्वज में 1906 से लेकर साल 1947 तक अलग-अलग बदलाव आए हैं। 1857 में पहली बार क्रांतिकारियों ने एक हरे रंग का झंडा, जिसके ऊपर कमल था, स्वीकारे। बाद में 1906 में कलकत्ता के पारसी बागान चौक पर तिरंगा फहराया गया था जिसे हरे, पीले और लाल रंग से बनाया गया था जिसके बीच में &#8216;वंदे मातरम&#8217; लिखा था। सन 1907 में मैडम कामा द्वारा पेरिस में यह ध्वज फहराया गया। इसमें सबसे ऊपर लाल पट्टी का रंग केसरिया का और कमल के बजाय सात तारे थे जो सप्त ऋषि का प्रतीक था। उसमें आखिरी पट्टे पर सूरज और चांद भी अंकित किए गए थे। इसके दस साल बाद 1917 में एक तीसरा झंडा आया। होमरूल आंदोलन के तहत एक ध्वज को डॉ. एनी बेसेंट और लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने फहराया। उस ध्वज में पांच लाल और चार हरी क्षितिज पट्टियां थीं और यूनियन जैक भी मौजूद था। साल 1921 में दो रंगों का ध्वज था &#8211; लाल-हरा पट्टी का। महात्मा गाँधी के सुझाव पर एक सफेद पट्टी और राष्ट्र की प्रगति का संकेत देने के लिए एक चलता हुआ चरखा सम्मिलित किया गया, फिर चरखा जोड़ा गया । इसी बीच में नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने जर्मनी में एक ध्वज फहराया जिसमें ऊपर केसरिया, बीच में सफेद, नीचे हरा और बीच में एक टाइगर मौजूद था। सन 1931 में ध्वज को केसरिया, सफेद और हरे रंग के साथ, मध्य में गांधी जी के चलते हुए चरखे का साथ मिला। तत्पश्चात अशोक चक्र का सफर आता है। सन 1947 में सावरकर ने चरखे की कमेटी को एक टेलीग्राम भेजा और कहा कि तिरंगे के बीच में मध्य अशोक चक्र होना चाहिए.” उनके विचार को सहर्ष स्वीकार किया गया। 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा ने उसे आजाद भारतीय राष्‍ट्रीय ध्‍वज के रूप में वरण किया। अशोक चक्र होने का अर्थ &#8216;अखंड भारत&#8217;, एक बड़ा भारत, एक दिव्य भारत का प्रतिक। इस ध्वज की कल्पना पिंगली वेंकैय्या ने की थी &#8230;&#8230;</p>
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