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	<title>narendr modi Archives - आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</title>
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		<title>यौ प्रधान मंत्री जी !!! अपने &#8216;कलाकार&#8217; छियै, मैथिल आब मैथिली नै बजैत छथिन, अपनेक मुँह सें मैथिली सुनि मतदाता प्रसन्न भेलाह, मंच पर समूह फोटो में भी स्वयंभू &#8216;दरभंगा कुमार&#8217;के स्थान नहि शोधक विषय</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/not-only-in-mithila-maithils-in-any-corner-of-the-world-do-not-speak-maithili-prime-minister-sir</link>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 14 Nov 2024 03:31:29 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>दरभंगा / पटना / नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित उनके कार्यालय से जुड़े सभी आला हुकुम लोग और वे जो प्रधानमंत्री का भाषण लिखते हैं, इस बात से अवगत हैं कि बिहार के उत्तरी क्षेत्र मिथिला और उसमें भी दरिभंगा में रहने वाले लोग (अपवाद छोड़कर) अब अपने-अपने घरों में, अपने बाल-बच्चों के [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/not-only-in-mithila-maithils-in-any-corner-of-the-world-do-not-speak-maithili-prime-minister-sir">यौ प्रधान मंत्री जी !!! अपने &#8216;कलाकार&#8217; छियै, मैथिल आब मैथिली नै बजैत छथिन, अपनेक मुँह सें मैथिली सुनि मतदाता प्रसन्न भेलाह, मंच पर समूह फोटो में भी स्वयंभू &#8216;दरभंगा कुमार&#8217;के स्थान नहि शोधक विषय</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>दरभंगा / पटना / नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित उनके कार्यालय से जुड़े सभी आला हुकुम लोग और वे जो प्रधानमंत्री का भाषण लिखते हैं, इस बात से अवगत हैं कि बिहार के उत्तरी क्षेत्र मिथिला और उसमें भी दरिभंगा में रहने वाले लोग (अपवाद छोड़कर) अब अपने-अपने घरों में, अपने बाल-बच्चों के साथ, सम्बन्धी और परिजनों के साथ भी मैथिली भाषा में नहीं बोलते। प्रधानमंत्री यह भी जानते हैं कि मिथिला में बोलचाल की भाषा में मैथिली पर हिंदी भाषा की पकड़ मजबूत हो गई है। नरेंद्र मोदी यह भी जानते हैं कि दरभंगा के अंतिम राजा के घर में भी अब &#8216;संस्कृति विरासत के रूप में नहीं रही।&#8217; साथ ही, दरभंगा के लाल किला के अंदर भी मैथिली भाषा कमजोर हो गयी है। मिथिला की संस्कृति यत्र-तत्र-सर्वत्र अपनी अस्तित्व की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ रही है । निर्जीव है, बोल नहीं सकती और लोग स्वहित के लिए उसे बाज़ार में खड़े कर दिये हैं।</strong></p>
<p>इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री भले महाराजा डॉ. कामेश्वर सिंह के योगदान की चर्चा करें, वे यह भी जानते हैं कि महाराजा की मृत्यु के बाद दरभंगा राज का प्रदेश, देश की आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, वौद्धिक क्षेत्रों में योगदान &#8220;शून्य&#8221; है। इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री यह भी जानते हैं कि नई दिल्ली के साथ-साथ देश के अन्य महत्वपूर्ण शहरों में दरभंगा राज का नामोनिशान उनके लोगों, सगे सम्बन्धियों ने समाप्त कर दिए हैं। जो बचे हैं, उसे कलकत्ता उच्च न्यायालय के सम्मानित न्यायमूर्ति समय-समय पर देखते हैं। यह सभी बातें देश के सम्मानित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जानते हैं। </p>
<blockquote><p>अब इन प्रचुर विशेषताओं (हम इसे मिथिला और मैथिलों की कमजोरी मानते हैं) के होते प्रधान मंत्री कैसे उस अवसर को छोड़ सकते हैं जिसका आने वाले दिनों में मतदान में इस्तेमाल होने वाला है। बस क्या था अवसर का लाभ उठाते देश के प्रधानमंत्री माइक पर उवाचे: &#8220;राजा जनक, सीता मैया कविराज विद्यापति के ई पावन मिथिला भूमि के नमन करें छी। ज्ञान-धान-पान-मखान&#8230;ये समृद्ध गौरवशाली धरती पर अपने सबके अभिनंदन करे छी।&#8221; </p></blockquote>
<p>आश्चर्य की बात तो यह है कि महाराजा, जिनकी चर्चा उन्होंने की, उनके अनुज राजबहादुर विश्वेश्वर सिंह के परिवार कीवर्तमान पीढ़ियों के लोग तस्वीरों में मंच के एक किलोमीटर की दूरी में भी नजर नहीं आये। जो मंच पर दिखे सभी नेता थे, जिनका मिथिला के उन्नयन, विकास में शून्य का भी योगदान नहीं रहा है। यह वे भी जानते हैं और उपस्थित गणमान्य तो जानते ही हैं। दुर्भाग्य यह है कि प्रधान मंत्री जिन जिन शब्दों से मिथिला भूमि को अलंकृत किये &#8211; ज्ञान, धान, पान &#8211; माखन &#8211; वह आज़ादी के पहले की बात थी, अब नहीं है। अब सभी &#8216;राजनीति&#8217; और &#8216;व्यवसाय&#8217; का अहम् हिस्सा बन गया है । अब पाग के लिए शास्त्रार्थ नहीं होता। मछलियां दक्षिण भारत से आयातित होती है क्योंकि अब मिथिला में पोखर है ही नहीं। खैर। </p>
<p>दरभंगा में विभिन्न परियोजनाओं के शिलान्यास, उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि &#8220;हमारी सरकार देश की सेवा के लिए, लोगों के कल्याण के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रही है। सेवा की इसी भावना से यहां विकास से जुड़े 12,000 करोड़ रुपए के एक ही कार्यक्रम में 12,000 करोड़ रुपए का अलग-अलग प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है। इसमें रोड, रेल और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े अनेक प्रोजेक्ट्स हैं। और सबसे बड़ी बात दरभंगा में एम्स का सपना साकार होने की तरफ एक बड़ा कदम उठाया गया है। दरभंगा एम्स के निर्माण से बिहार के स्वास्थ्य क्षेत्र में बहुत बड़ा परिवर्तन आएगा। इससे मिथिला, कोसी और तिरहुत क्षेत्र के अलावा पश्चिम बंगाल और आसपास के कई क्षेत्र के लोगों के लिए सुविधा होगी। नेपाल से आने वाले मरीज भी इस एम्स अस्पताल में इलाज करा सकेंगे। एम्स से यहां रोजगार-स्वरोजगार के अनेक नए अवसर बनेंगे। मैं दरभंगा को, मिथिला को, पूरे बिहार को इन विकास कार्यों के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।&#8221;</p>
<p><figure id="attachment_5862" aria-describedby="caption-attachment-5862" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/3.jpg"><img fetchpriority="high" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/3.jpg" alt="" width="2200" height="1144" class="size-full wp-image-5862" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/3.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/3-300x156.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/3-1024x532.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/3-768x399.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/3-1536x799.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/3-2048x1065.jpg 2048w" sizes="(max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5862" class="wp-caption-text">दरभंगा में प्रधानमंत्री को देखने आते लोग</figcaption></figure><br />
<strong>प्रधानमंत्री कहते हैं कि &#8220;हमारे सांस्कृतिक समृद्धि के दर्शन यहां दरभंगा में मिथिलांचल में कदम-कदम पर होते हैं। माता सीता के संस्कार इस धरती को समृद्ध करते हैं।&#8221; परन्तु  मैं नहीं समझाता हूँ कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस वाहन से दरभंगा आये और मंच तक पहुंचे, गिनती से भी पांच सौ कदम चले होंगे। अगर कुछ कदम चले भी होंगे तो जिस सुरक्षा कवच में उनके कदम उठे होंगे, मिथिला की सांस्कृतिक समृद्धि दृष्टिगोचित नहीं हुआ होगा। वह तो धन्यवाद के पात्र के उनके भाषण को शब्दवद्ध करने वाले तो इस बात से वाकिफ हैं कि मिथिला में लोग ताली कब ठोकते हैं।</strong></p>
<p>इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री यह भी कहते नहीं रुके कि &#8220;आपसे बात करते हुए आज मैं दरभंगा स्टेट के महाराजा कामेश्वर सिंह जी के योगदान को भी याद कर रहा हूं। आजादी के पहले और बाद में भारत के विकास में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। मेरे संसदीय क्षेत्र काशी में भी उनके कार्यों के बहुत चर्चा होती है। महाराजा कामेश्वर सिंह के समाज कार्य दरभंगा का गौरव है, हम सभी के लिए प्रेरणा है।&#8221; काश !!!! संतानहीन महाराजाधिराज के परिवार के लोग इस कदर होते तो प्रधानमंत्री उनका भी नाम लेते गर्व महसूस करते। </p>
<p>नरेंद्र मोदी कहते हैं कि &#8220;दिल्ली में केंद्र में मेरी सरकार और यहां बिहार में नीतीश जी की सरकार मिलकर बिहार के हर सपने को पूरा करने के लिए काम कर रही हैं। हमारी विकास और जनकल्याण योजनाओं का ज्यादा से ज्यादा लाभ बिहार के लोगों को मिले यही हमारा प्रयास है। अब प्रधान मंत्री जी को कौन कहे कि &#8216;जिस नीतीश कुमार का पीठ थोक रहे हैं, उनकी पार्टी की दशा भी उत्तरोत्तर वही हो रही है बिहार में (आने वाले विधान सभा चुनाव में आप भी देख लेंगे) जो कभी कांग्रेस के साथ हुई थी। </p>
<p><strong>कहते भी हैं कि इतिहास खुद दुहरता है। कोई 108-साल पहले सं 1912 में बांकीपुर कांग्रेस (अविभाजित बिहार का पटना शहर) अधिवेशन में 20-वर्षीय पंडित जवाहरलाल नेहरू राजनीति में अपना &#8220;टोपी&#8221; उछाले थे और आज़ाद भारत में प्रधान मन्त्री भी बने, उसी बिहार में आज काँग्रेस पार्टी का क्रमशः नामोनिशान मिटते जा रहा था और इसके लिए जितना दोषी दिल्ली का आला-कमान है, उससे कहीं अधिक दोषी प्रदेश में पूर्व के मुख्य मन्त्रियों, नेताओं से लेकर वर्तमान के नेतागण है &#8211; जिनका &#8216;राजनीतिक चरित्र&#8217; प्रदेश की राजनीति से सैकड़ों गुना &#8220;बदत्तर&#8221; है। </strong></p>
<p>कहा जाता है कि पंडित नेहरू महज 20 वर्ष की उम्र में बैरिस्टर की उपाधि लेकर 1912 में भारत लौटे थे। वे वकालत नहीं करना चाहते थे। वे वकालत को तवज्जो न देकर देश की आजादी की मुहिम में भाग लेना बेहतर समझा। यहां अंग्रेजी हुकूमत की तानाशाही देखकर नेहरू ने सोचा कि कचहरी में एक व्यक्ति के मुकदमे की पैरवी करने के बदले संपूर्ण भारत की पैरवी करना कहीं बेहतर है। उन्हें देश की स्वतंत्रता के लिए चल रही क्रान्ति में हिस्सा लेने के लिए एक मंच की आवश्यकता थी। उन दिनों कांग्रेस एक खुले मंच में राजनीति कर रही थी। इसके चलते वे कांग्रेस के सदस्य बन गए और 1912 में प्रतिनिधि के रूप में पटना के बांकीपुर में कांग्रेस के अधिवेशन में पहली बार शामिल हुए। नेहरू का राजनीतिक सफर बांकीपुर कांग्रेस से ही हुआ था जो चार बार 1947, 1951, 1957 और 1962 तक देश के प्रधानमंत्री का पद संभाला।</p>
<figure id="attachment_5863" aria-describedby="caption-attachment-5863" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/2.jpg"><img decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/2.jpg" alt="" width="2200" height="1060" class="size-full wp-image-5863" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/2.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/2-300x145.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/2-1024x493.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/2-768x370.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/2-1536x740.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/2-2048x987.jpg 2048w" sizes="(max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5863" class="wp-caption-text">13 नवंबर, 2024 को बिहार के दरभंगा में लगभग 12,100 करोड़ रुपये की कई विकास परियोजनाओं का शुभारम्भ<br /></figcaption></figure>
<p>आज़ादी के बाद बिहार में लगभग 32 वर्ष तक, यानि 1972 तक अर्थात पांचवीं विधान सभा तक जब तक श्रीकृष्ण सिन्ह, दीपनारायण सिंह, विनोदानंद झा, के बी सहाय, भोला पासवान शास्त्री, हरिहर सिंह मुख्य मंत्री रहे, ठीक ठाक था। पार्टी की पकड़ मतदाताओं के साथ-साथ विकास पर भी था। लेकिन पार्टी और नेताओं की पकड़ दारोगा प्रसाद राय, केदार पांडेय और अब्दुल ग़फ़ूर के मुख्य मंत्री बनने के बाद खिसकने लगी थी। प्रदेश में अनेकानेक कारणों से सकता के प्रति आवाज उठने लगी थी। सं 1975 में जगन्नाथ मिश्र के मुख्य मंत्री बनने के साथ ही कांग्रेस समाप्ति के रास्ते पर अग्रसर हो गयी थी।जगन्नाथ मिश्र प्रदेश में मुख्य मंत्री तीन बार बने और अपने समय काल में उनसे प्रदेश को और कांग्रेस पार्टी को जितना आघात पहुंचा, शायद किसी भी कांग्रेसी नेता से नहीं हुआ होगा, मजबूती के साथ सत्ता में रही कांग्रेस संपूर्ण क्रांति, क्षेत्रीय दलों का उभार, वामपंथ का प्रभाव और कथित खेमाबंदी के कारण धीरे-धीरे कमजोर होती चली गई।</p>
<p>आजादी के बाद बिहार में वर्ष 1952 में 276 सीटों के लिए हुए पहले विधानसभा चुनाव में 239 यानी 86.55 प्रतिशत सीटें हासिल करने वाली कांग्रेस महज 38 साल बाद 1990 में 324 सीटों के लिए हुए विधानसभा चुनाव में 71 यानी लगभग 22 प्रतिशत सीटों के आंकड़े पर ही सिमट कर रह गई। इतना ही नहीं, आने वाले वर्षों में इसके कमजोर पड़ते जनाधार को पूरे देश ने देखा। 1995 के चुनाव में तो इसकी सीट का गणित 29 सीट यानी लगभग नौ प्रतिशत सीट पर रुक गया। 2010 में 243 सीटों पर हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को महज चार सीटें यानी 1.65 प्रतिशत सीट ही मिल पाई।</p>
<p>दरअसल, कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार के विरोध में वर्ष 1975 में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में बिहार की धरती से शुरू हुई &#8220;संपूर्ण क्रांति&#8221; को दबाने के लिए वर्ष 1977 में लागू राष्ट्रपति शासन में बिहार में सातवीं विधानसभा का चुनाव कराया गया। 318 सीटों पर हुए इस चुनाव में 214 सीटें जीतने वाली जनता पार्टी ने पहली बार कांग्रेस के वर्चस्व को चुनौती दी। जनता पार्टी ने कांग्रेस के विजय रथ को महज 57 सीटों पर ही रोक दिया। इस चुनाव में निर्दलीय को 25 और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) को 21 सीटें मिली थीं। </p>
<p>ऐसा नहीं है कि इतने खराब प्रदर्शन के बाद कांग्रेस हमेशा के लिए धराशायी हो गई। और आज जनता दल (यूनाइटेड) यानी नीतीश कुमार &#8216;स्वहित&#8217; के लिए शनैः शनैः अपनी पार्टी के लोगों को भाजपा को सौंप रहे हैं। कहते हैं पार्टी में विभाजन के बावजूद कांग्रेस के एक गुट कांग्रेस (आई) के बैनतर तले डॉ. जगन्नाथ मिश्रा के नेतृत्व में वह वर्ष 1980 के विधानसभा चुनाव में पूरी ताकत से फिर से उठ खड़ी हुई। 324 सीटों के लिए हुए इस चुनाव में कांग्रेस (आई) को 169 सीटें मिलीं जबकि जनता दल (एस) चरण ग्रुप को 42 और भाकपा को 23 सीटें मिलीं।</p>
<p>कांग्रेस का कारवां यहीं नहीं रुका 1985 के चुनाव में उसने और बेहतर प्रदर्शन किया और 196 सीटों पर जीत दर्ज की वहीं लोक दल को 46 और आईएनडी को 29 सीटें मिलीं। लेकिन, इसके बाद के चुनावों में जो हुआ उसने कांग्रेस को पूरी तरह से कमजोर कर दिया और वह फिर उठ नहीं पाई। यही हश्र बाबू नीतीश कुमार का है और आने वाले दिनों में और ख़राब होने वाला है। राजनीतिक विशेषज्ञों के अलावे प्रदेश का मतदाता अधिक जानता हैं।  और यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तो जानते ही हैं। </p>
<p><strong>आज, कोई 243 सदस्यों वाली विधान सभा में 2005 में जनता दल (यु) विधायकों की संख्या 88 थी जो 2010 विधान सभा में बढ़कर 115 हुई। 2005 में सुशील मोदी (अब दिवंगत) की अगुआई में भाजपा की संख्या 55 थी जो 2010 में 91 हो गई।  राष्ट्रीय जनता दल के विधायकों की संख्या 2005 में 54 थी, जो 2010 में घटकर 22 हो गई। पांच साल बाद 2015 विधान सभा में भाजपा 53 पर आ गयी, जनता दल (यु) 71 पर, कांग्रेस 27 पर और राष्ट्रीय जनता दल 80 पर पहुँच गयी। इसके अगले विधान सभा में आरजेडी 80 से 75 पर आयी, जबकि भाजपा 53 से 74 पर और जनता दल (यु) 71 से 43 पर। कांग्रेस 27 से लुढकर 19 पर पहुंची।</strong></p>
<p>पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा उन्ही स्थानों पर कब्ज़ा की जो नीतीश कुमार का था। इसी तरह 2019 लोक सभा में जनता दल(यु) को 17 स्थान, भाजपा को 17 स्थान, कांग्रेस को 5 और लोक जनशक्ति पार्टी को 6 स्थान मिला था। लेकिन 2024 लोक सभा में जनता दल (यु) को 12, भाजपा को 12, आरजेडी को 4, कांग्रेस को 3, एलजेआरआरवी को 5 तथा अन्य 2 स्थान पर रहे।</p>
<figure id="attachment_5864" aria-describedby="caption-attachment-5864" style="width: 1458px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/5.jpg"><img decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/5.jpg" alt="" width="1458" height="682" class="size-full wp-image-5864" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/5.jpg 1458w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/5-300x140.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/5-1024x479.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/5-768x359.jpg 768w" sizes="(max-width: 1458px) 100vw, 1458px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5864" class="wp-caption-text">नीतीश​ जी अब बस करें &#8211; अगला मुख्यमंत्री भाजपा का<br /></figcaption></figure>
<p><strong>आतंरिक सूत्र का कहना है कि &#8220;नीतीश कुमार का पीठ ठोकना यानी &#8216;बस करो नीतीश&#8217; वाली बात है। नीतीश कुमार &#8216;लंगड़ाकर, वैशाखी लेकर, जैसे-जैसे भारतीय राजनीतिक ओलम्पिक में कीर्तिमान बना लिए हैं। नौ बार प्रदेश के मुख्य मंत्री की कुर्सी पर विराजे। दो बार अपने अनुज मंत्री/सहयोगी पार्टी को धोखा दिए। कभी भाजपा से मुंह फुलाये तो कभी फुलल मुंह लेकर भाजपा का, प्रधानमंत्री का पैर पकड़ लिए। पेअर पकड़ने की परम्परा राजनीति में, खासकर बिहार में बहुत पुराणी है। </strong></p>
<p>इसलिए इस बात यह तय है कि किसी भी हालत में नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री के कार्यालय से साढ़े तीन किलोमीटर दूर रखा जाय। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाय कि अन्य वर्षों की भांति फिर चाचा-भतीजा लपककर कुर्सी की ओर नहीं बढ़ें। इसका अर्थ यह है कि मंच पर चाहे जो भी बोलें, यथार्थ में प्रधानमंत्री और भाजपा नीतीश कुमार से अपना पिंड छुड़ाना चाहते हैं। यहाँ एक और बात है कि प्रदेश में सुशील मोदी की मृत्यु के बाद भाजपा को &#8216;नेता की कमी&#8217; खलेगी। आज बिहार में भाजपा की जो भी स्थिति है उसमें सुशील मोदी का योगदान महत्वपूर्ण हैं। </p>
<p>चलिए प्रधानमंत्री की भाषण  की ओर बढ़ते हैं। लेकिन यहाँ उनके भाषण को लिखने वाले इस बात को उद्धृत करने में चूक गए कि महाराजाधिराज डॉ. सर कामेश्वर सिंह की मृत्यु के विगत 62 वर्षों में संतानहीन राजा के परिवार के लोगों ने उनकी कीर्तियों को किस कदर मिट्टी पलीद कर दिए। महाराजा ने भारत के जिन जिन शैक्षिक संस्थाओं को खड़ा करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान किये, चापलूसी, चाटुकारों ने राजनीति में उन्हें पीछे ढकेलते चले गए। जिन जिन विश्वविद्यालयों के सीनेट और सिंडिकेट में &#8216;दरभंगा सीट&#8217; था, आज उनके परिवारों में सोच की किल्लत के कारण सब समाप्त हो गया। </p>
<p>प्रधानमंत्री तो यह भी नहीं पूछे जी जिस प्रदेश के लोगों को आज से 90 वर्ष पहले मुख में आवाज देने के लिए दी इंडियन नेशन और आर्यावर्त अखबार का प्रकाशन प्रारम्भ किया गया, मिथिला के लोगों के साथ-साथ, प्रदेश के राजनेताओं, अधिकारियों और सबसे महत्वपूर्ण महाराजा के परिवार के लोगों ने ही नेश्तोनाबूद कर मिट्टी में मिला दिए। कोई दो दशक पहले सैकड़ों लोगों, परिवारों को सड़क पर मरने के लिए छोड़ दिया गया। आज भी प्रदेश के श्रमिक न्यायालय में, निचली अदालत में, उच्च न्यायलय में कर्मचारियों का भविष्य लॉक कपडे में बंद हैं। कितने मृत्यु को प्राप्त किये, कितने मृत्यु के दरवाजे पर बैठे हैं। यह सभी बातें नितीश कुमार, जिनके पीठ थपथपाये मोदी जी, जानते हैं, लेकिन ये सभी बातें कुमार साहब अगर बताएँगे तो उनकी बदनामी ही होगी। वैसे प्रधान मंत्री न्याय और अदालत की बात किये, अगर मालुम होगा की दो दशक से मुकदमें लंबित है।</p>
<p>प्रधान मंत्री कहे कि कोई परिवार नहीं चाहता कि उसके घर में कोई बीमार पड़े शरीर स्वस्थ रहे इसके लिए लोग आयुर्वेद, पोषक खान-पान का महत्व लोगों को बताया जा रहा है। फिट इंडिया मूवमेंट चलाया जा रहा है। ज्यादातर सामान्य बीमारियों की वजह गंदगी, दूषित खान-पान, खराब जीवनशैली होती है। इसलिए स्वच्छ भारत अभियान, हर घर शौचालय, नल से जल जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं। ऐसे आयोजनों से शहर तो स्वच्छ बनता ही है बीमारियां फैलने की गुंजाइश भी कम होती है। बेहतर आरोग्य का हमारा चौथा कदम है-छोटे शहरों में भी इलाज की बेहतरीन सुविधाएं पहुंचाना, डॉक्टरों की कमी को दूर करना। प्रधान मंत्री ने कहा कि &#8220;आजादी के 60 सालों तक देश में सिर्फ एक ही एम्स था और वो भी दिल्ली में। हर गंभीर बीमारी के लोग दिल्ली एम्स का रुख करते थे। कांग्रेस की सरकार के समय जो चार-पांच एम्स और बनाने की घोषणा हुई उनमें कभी ठीक से इलाज ही शुरू नहीं हो पाया। </p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि &#8220;दरभंगा एम्स से भी हर वर्ष बिहार के अनेक युवा डॉक्टर बनकर सेवा के लिए निकलेंगे। और एक महत्वपूर्ण काम हुआ है, पहले डॉक्टर बनना हो तो अंग्रेजी आना जरूरी था। अब मध्यम वर्ग गरीब परिवार के बच्चे अंग्रेजी में पढ़ाई कहां करेंगे स्कूल में, इतना पैसा कहां से लाएंगे और इसलिए हमारी सरकार ने तय किया अब डॉक्टर पढ़ना है या इंजीनियरिंग पढ़ना है, वो अपनी मातृभाषा में डॉक्टर बन सकता है, अपनी मातृभाषा में पढ़कर के इंजीनियर बन सकता है। और एक प्रकार से मेरा ये काम कर्पूरी ठाकुर जी को सबसे बड़ी श्रद्धांजलि हैं, वो यही सपना हमेशा देखते थे।&#8221; </p>
<p>प्रधान मंत्री कहते है: &#8220;नीतीश बाबू के नेतृत्व में बिहार ने सुशासन का जो मॉडल विकसित करके दिखाया वो अद्भुत है। बिहार को जंगल राज से मुक्ति दिलाने में उनकी भूमिका उसकी जितनी सराहना की जाए वह काम है। एनडीए की डबल इंजन की सरकार बिहार में विकास को गति देने के लिए प्रतिबद्ध है। बिहार का तेज विकास, यहां का बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर और यहां के छोटे किसानों, छोटे उद्योगों को प्रोत्साहन देने से ही संभव होने वाला है। एनडीए सरकार इसी रोड मैप पर काम कर रही हैं। आज बिहार की पहचान यहां बनने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण, एयरपोर्ट, एक्सप्रेस-वे से मजबूत हो रही है। दरभंगा में उड़ान योजना के तहत एयरपोर्ट शुरू हुआ है, जिससे दिल्ली-मुंबई जैसे शहरों तक सीधी उड़ान की सुविधा मिलने लगी है। बहुत जल्द यहां से रांची के लिए भी उड़ान शुरू हो जाएगी। साढ़े पांच हजार करोड़ रुपए के लागत से तैयार होने वाले आमस दरभंगा एक्सप्रेस वे पर भी काम चल रहा है। आज 3,400 करोड़ रुपए की लागत से सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन के काम का शिलान्यास भी हुआ है। और घर में जैसे नल से जल आता है ना, वैसे ही नल से गैस आना शुरू हो जाएगा और वो सस्ता भी होगा। विकास का ये महायज्ञ बिहार में इंफ्रास्ट्रक्चर को एक नई ऊंचाई पर ले जा रहा है। इससे यहां पर बड़ी संख्या में रोजगार के भी अवसर भी पैदा हो रहे हैं।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/6.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/6.jpg" alt="" width="1681" height="1094" class="aligncenter size-full wp-image-5865" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/6.jpg 1681w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/6-300x195.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/6-1024x666.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/6-768x500.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/6-1536x1000.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1681px) 100vw, 1681px" /></a></p>
<p>प्रधानमंत्री कहते हैं: &#8220;दरभंगा के बारे में कहा जाता है- पग-पग पोखरी माच मखान, मधुर बोल मुस्की मुख पान।&#8221; अब प्रधानमंत्री को कैसे कहा जाय कि &#8220;जिस महामहोपाध्याय ने मिथिला का चित्रण ‘पग-पग पोखर, माँछ, मखान, मधुर बोल मुस्की मुख पान । विद्या, वैभव, शांति प्रतीक, सरस नगर मिथिला थींक’ इन शब्दों में किये थे, वे बहुत दूरदर्शी थे। उन्हें ज्ञात था कि आने वाले समय में मिथिला के लोग उनकी कविता को मिथिला के चौराहों पर ‘पाठ’ करके, मिथिला का गुणगान करके अपने-अपने हिस्से की मिथिला अपने नाम लिखाएँगे। मिथिला के किसी भी स्थान पर खड़े होकर मिथिला के बाबू, बबुआइन और बौआसिन लोग अगर “पग पग पोखर माछ मखान, मधुर बोल मुस्की मुख पान । विद्या वैभव शांति प्रतीक, सरस नगर मिथिला थींक” कविता पाठ करते मिल जायँ, तो समझ लीजिये वे ‘सरेआम झूठ’ बोल रहे हैं। अपने-अपने हितों के रक्षार्थ वे स्थानीय लोगों को बरगला रहे हैं।</p>
<p>इस बात से भी इंकार नहीं कर सकते हैं कि वे राजनीति में प्रवेश करने के लिए मिथिला की कविता पाठ करना प्रारम्भ कर दिए हों जो उनके अनेकानेक प्रयासों में, एक यह भी प्रयास हो। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि जिस समय इस कविता की रचना हुई होगी, उस कवि के नजर में मिथिला और उसकी गरिमा अपने उत्कर्ष पर रहा होगा। मिथिला के सभी क्षेत्रों में, प्रत्येक कदम पर, प्रत्येक घरों के सामने-पीछे छोटा-बड़ा पोखर रहा होगा। तत्कालीन राजा-महाराजा-महाराजाधिराज स्थानीय लोगों के सम्मानार्थ, तत्कालीन पानी की समस्याओं के निदानार्थ अपने खर्च पर पोखर, तालाब बनबाये होंगे। यह सच भी है।</p>
<p>लेकिन तकलीफ इस बात की है कि आज भी हम उसी कविता पाठ को दोहरा रहे हैं और कहते थक भी नहीं रहे है कि “पग पग पोखर माछ मखान, मधुर बोल मुस्की मुख पान । विद्या वैभव शांति प्रतीक, सरस नगर मिथिला थींक” – खासकर तब जब बिहार के ग्रामीण इलाकों में शैक्षिक दर पुरुषों में 57 फीसदी और महिलाओं में 29 फीसदी है। बिहार का यह ग्रामीण इलाका, चाहे गंगा के उस पार का हो या गंगा के इस पार का। मिथिला भी इसी आकंड़े के अधीन है। पूरे प्रदेश में औसतन शैक्षिक दर 69 फीसदी है। इसमें पुरुषों के हिस्से 70 फीसदी और महिलाओं के हिस्से 53 फीसदी है। यानी दोनों के बीच आज भी 17 फीसदी का फासला है और यही 17 फीसदी का फासला, चाहे मिथिला में पंचायत का चुनाव हो, दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय, भागलपुर, मुंगेर, आदि शहरों में जिला परिषद् का चुनाव हो या बिहार के विधान सभा और विधान परिषद का चुनाव हो – निर्णायक होता है। ‘वे’ विजय ‘घोषित’ हो जाते हैं और ‘आप’ अपनी किस्मत को कोसते जीवन पर्यन्त ‘हार’ का सामना करते “पग-पग पोखर माछ मखान, मधुर बोल मुस्की मुख पान । विद्या वैभव शांति प्रतीक, सरस नगर मिथिला थींक” कविता पाठ सुनते रहते हैं। </p>
<p>सबसे महत्वपूर्ब बात तो माँछ (मछली) से सम्बंधित है। माँछ की कथा-व्यथा बनारसी पान जैसी है। बनारस में पान की खेती नहीं होती, लेकिन हज़ारों-हज़ार पान की दुकानें हैं। प्रत्येक चार दुकान या चार मकान के बाद पान की दुकानें मिलेंगी। लगभग सभी किस्मों के पान यहाँ, जगन्नाथ जी, गया और कलकत्ता आदि स्थानों से आते हैं। पान का जितना बड़ा व्यावसायिक केन्द्र बनारस है, शायद उतना बड़ा केन्द्र विश्व का कोई नगर नहीं है। काशी में इसी व्यवसाय के नाम पर दो मुहल्ले बसे हुए हैं। केवल शहर के पान विक्रेता ही नहीं, बल्कि दूसरे शहरों के विक्रेता भी इस समय इस जगह पान खरीदने आते हैं। </p>
<p>बस इतना ही समझ लें कि आज मिथिला में माँछ का उपलब्धता जितना है वह मिथिला के दो फीसदी लोगों की आवश्यकता पूरी नहीं कर सकता। मिथिला के बाज़ारों में जो माँछ आप देख रहे हैं वह सन 1911 से पहले देश की राजधानी जिस प्रदेश में थी, वहां से और आंध्र प्रदेश से आती है। मिथिला में महज ‘ठप्पा’ लगता है। अब सोचिये खाते हैं बंगाल की – आंध्र की मछली और आज भी कविता पाठ किये हैं “पग-पग पोखर माँछ ,,,,” जब इस कविता की रचना की गयी थी माछ, पान और मखान मिथिला की शान, पहचान अवश्य थी। लेकिन समय के साथ मिथिला अपनी इस पहचान को न सिर्फ खो दिया है, बल्कि इन सभी चीजों पर अब दूसरे प्रदेशों द्वारा कब्जा भी हो गया है। इस दृष्टि से मिथिला की पहचान खतरे में है और लोग बाग़ है कि इस खतरे में भी खतरा उठाना चाहते हैं ‘मिथिला को अलग राज्य का दर्जा दो” – गजब है। </p>
<figure id="attachment_5866" aria-describedby="caption-attachment-5866" style="width: 1080px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/7.jpeg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/7.jpeg" alt="" width="1080" height="1080" class="size-full wp-image-5866" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/7.jpeg 1080w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/7-300x300.jpeg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/7-1024x1024.jpeg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/7-150x150.jpeg 150w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/7-768x768.jpeg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/7-24x24.jpeg 24w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/7-48x48.jpeg 48w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/7-96x96.jpeg 96w" sizes="auto, (max-width: 1080px) 100vw, 1080px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5866" class="wp-caption-text">चच्चा अबकी बार </figcaption></figure>
<p>पूरे मिथिला में स्थित पोखरों की संख्या को अगर तनिक बाद में अध्ययन करें तो सिर्फ दरभंगा के महाराजा के साम्राज्य में तक़रीबन 9113 पोखर और तालाब थे। इसमें दरभंगा शहर में ही 350 के आस-पास थे। आज अगर अवकाश है (वैसे मिथिला के लोग वेवजह व्यस्त होते हैं। मोबाईल पर घंटी आज बजायेंगे तो तीसरे दिन हेल्लो ट्यून सुनाई देदा) तो शहर में धूम लें और पोखरों, तालाबों की संख्या, उसकी स्थिति, उसमें दौड़ती मछलियों से, खिलते माखन से, महारों पर लगे पानों की खेती की स्थिति से अवगत हो लें। यकीन मानिए ‘भोकार’ नहीं, ‘चीत्कार’ मारकर रोने लगेंगे, अगर आखों में पानी होगा तो। </p>
<p>वास्तविकता यह है कि मिथिला की पहचान पर, माँछ पर, पान पर, मखान पर ग्रहण लग गया है और ‘अवसरवादी’ लोगों का हाल यह है कि दिन-रात-सुबह-शाम अपने-अपने हितों के लिए ‘पग-पग पोखर, पान , मखान ..” कविता पाठ करते थक नहीं रहे हैं। इन कविता वाचकों को शायद यह मालूम भी नहीं होगा कि पान की खेती करने के लिए दो-रस मिट्टी की जरूरत होती है। न ज्यादा पानी और न ज्यादा धूप की जरूरत होती। पानी इतना हमेशा चाहिए, ताकि मिट्टी में नमी बनी रहे। यहां तो लोगों की आखों में नमी नहीं है, बेचारी मिट्टी क्या करे। यही कारण है कि कलकत्तिया पान दरभंगिया बनाकर मिथिला के बाज़ार पर अधिपत्य जमा लिया है, कब्ज़ा कर लिया है यानी ‘सुतल छी आ वियाह होईत अछि’ वाली कहावत सिद्ध हो रही है और कविता वाचक पाठ करते नहीं थक रहे हैं “पग पग पोखर माछ मखान, मधुर बोल मुस्की मुख पान । विद्या वैभव शांति प्रतीक, सरस नगर मिथिला थींक” – पूरी मिथिला की सांख्यिकी आप निकालें, यहाँ दरभंगा जिले में रोज तकरीबन 8 टन मछली की खपत है, लेकिन दरभंगा ज़िले से मात्र 500 किलो तक भी मछली बाजार में नहीं पहुंच पाती है। </p>
<p>खैर, प्रधानमंत्री ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना से अब तक देश में 4 करोड़ से अधिक गरीब मरीजों का इलाज हो चुका है। अगर आयुष्मान भारत योजना ना होती तो इनमें से ज्यादातर लोग अस्पताल में भर्ती ही नहीं हो पाते। मुझे इस बात का संतोष है कि इनके जीवन के बहुत बड़ी चिंता एनडीए सरकार की योजना से दूर हुई। और इन गरीबों का इलाज सरकारी अस्पतालों के साथ ही प्राइवेट अस्पतालों में भी हुआ है। आयुष्मान योजना से करोड़ों परिवारों को करीब सवा लाख करोड़ रुपए की बचत हुई है, ये सवा लाख करोड़ रूपया अगर सरकार ने देने की घोषणा की होती तो महीने भर हेडलाइन पर चर्चा चली रहती कि एक योजना से देश के नागरिकों के जेब में सवा लाख करोड़ रूपए बचे हैं। चुनाव के समय मैंने आपको गारंटी दी थी कि 70 साल के ऊपर के जो बुजुर्ग हैं उन सबको भी आयुष्मान योजना के दायरे में लाया जाएगा। मैंने अपनी ये गारंटी पूरी कर दी है। बिहार में भी 70 साल से ऊपर के जितने भी बुजुर्ग हैं, परिवार की कमाई कुछ भी हो, उनके लिए मुफ्त इलाज की सुविधा शुरू हो गई है। बहुत जल्द सभी बुजुर्गों के पास आयुष्मान वय वंदना कार्ड होगा। आयुष्मान के साथ-साथ जन औषधि केंद्रों पर बहुत ही कम कीमत में दवाइयां दी जा रही हैं।</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/not-only-in-mithila-maithils-in-any-corner-of-the-world-do-not-speak-maithili-prime-minister-sir">यौ प्रधान मंत्री जी !!! अपने &#8216;कलाकार&#8217; छियै, मैथिल आब मैथिली नै बजैत छथिन, अपनेक मुँह सें मैथिली सुनि मतदाता प्रसन्न भेलाह, मंच पर समूह फोटो में भी स्वयंभू &#8216;दरभंगा कुमार&#8217;के स्थान नहि शोधक विषय</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>क्या श्री जगदम्बिका पाल साहब !! &#8216;प्रतिवेदन&#8217; शीतकालीन सत्र में या &#8216;मामला&#8217; प्रशीतित कक्ष (डीप फ्रीज़र) में, क्या कहते हैं ?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 28 Sep 2024 12:31:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>विजय चौक (नई दिल्ली) से : एक-चौथाई दशक पहले सन 1998 में एक दिन के लिए अविभाजित उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने और एक-चौथाई दशक बाद तीन-तीन राजनीतिक पार्टियों में कूदते-फांदते भारतीय जनता पार्टी का शरणागत हुए; उर्दू, फ़ारसी भाषाओँ में &#8216;कमजोर&#8217; लोक सभा के सांसद और वक़्फ़ संशोधन विधेयक पर बने संयुक्त संसदीय समिति [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/report-in-winter-session-or-case-in-deep-freezer">क्या श्री जगदम्बिका पाल साहब !! &#8216;प्रतिवेदन&#8217; शीतकालीन सत्र में या &#8216;मामला&#8217; प्रशीतित कक्ष (डीप फ्रीज़र) में, क्या कहते हैं ?</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>विजय चौक (नई दिल्ली) से : एक-चौथाई दशक पहले सन 1998 में एक दिन के लिए अविभाजित उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने और एक-चौथाई दशक बाद तीन-तीन राजनीतिक पार्टियों में कूदते-फांदते भारतीय जनता पार्टी का शरणागत हुए; उर्दू, फ़ारसी भाषाओँ में &#8216;कमजोर&#8217; लोक सभा के सांसद और वक़्फ़ संशोधन विधेयक पर बने संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष जगदम्बिका पाल क्या संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत कर सकेंगे? सैद्धांतिक दृष्टि से &#8216;हां&#8217; कह सकते हैं, लेकिन &#8216;व्यावहारिक दृष्टि&#8217; से &#8216;नहीं&#8217; यह पक्का है । वैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की निगाहें समिति के प्रतिवेदन पर टिकी है। </strong></p>
<p>रायसीना पहाड़ी के सूत्रों के अनुसार &#8216;यह असंभव&#8217; है। <strong>https://www.aryavartaindiannation.com</strong> से बात करते हुए सूत्रों का कहना है कि &#8220;यह राजनीति है और राजनीति में वैसे कुछ भी हो सकता है। परन्तु इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर संसदीय संयुक्त समिति का नेतृत्व करने वाले सांसद सम्मानित जगदम्बिका पाल का उर्दू, फ़ारसी से दूर-दूर तक कोई बहुत बेहतर नाता नहीं है। विगत लोक सभा के चुनाव में 78 मुसलमान अभ्यर्थी चुनावी मैदान में थे जिसमें 24 उम्मीदवार ही जीतकर संसद पहुँच सके। इस 24 में 21 सांसद विपक्षी इंडिया गठबंधन के दलों &#8211; 9 सांसद कांग्रेस, 5 तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), 4 समाजवादी पार्टी, 3 इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग और एक नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के सांसद हैं। एआईएमआईएम के एक हैं। इसके अलावा और दो मुस्लिम सांसद भी हैं जो निर्दलीय जीते हैं। दुर्भाग्य से सत्तारूढ़ एनडीए का एक भी मुस्लिम सांसद नहीं है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे पारी में। यह अलग बात है कि देश की कुल आबादी में मुसलमानों की संख्या लगभग 15 फीसदी है।&#8221; </p>
<p>सूत्रों का कहना है कि संयुक्त समिति के अध्यक्ष जगदम्बिका पाल ने आम जनता से इस संशोधन विधेयक पर राय मांगी थी और ऐसी उम्मीद की जा रही है कि देश भर से अब तक करीब 1.2 करोड़ प्रतिक्रियाएं ई-मेल के जरिए संयुक्त समिति को प्राप्त हो चुकी है। इसके अलावा 75,000 प्रतिक्रियाएं दस्तावेज के रूप में संयुक्त समिति के संसद भवन स्थित कार्यालय में पहुंची है। संसद के इतिहास में किसी कानून के संशोधन के लिए आम जनता की इतनी बड़ी संख्या में प्रतिक्रियाएं शायद इससे पहले किसी कानून के लिए नहीं आई थी। प्रतिक्रिया की भाषा भी अनेकानेक हैं ,हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, फ़ारसी में भी प्रतिक्रियाएं आयी है। यही कारण है कि समिति के अध्यक्ष ने दर्जनों से अधिक लोगों को इन सुझावों को अलग-अलग करने, पढ़ने, मुख्य बातों को लिखने, टिपण्णी बनाने में लगाए हैं। इतना ही नहीं, कई भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को, दस्तावेजों वाली भाषाओँ के विद्वानों और विदुषियों को भी संभवतः अलग से न्यौता देने की बात हो रही है। इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि समिति के अध्यक्ष को लोकसभा सचिवालय से और अधिक कर्मचारियों की मांग करनी पड़े। सवा-करोड़ प्रतिक्रियाओं के एक-एक शब्दों को पढ़ना, उसका भाव-भंगिमा समझना, टिपण्णी लिखना &#8211; यह आसान नहीं है।&#8221;</p>
<p>सूत्रों का कहना है कि &#8220;आखिर ऐसा क्या हुआ कि सरकार इस विकट समस्या को छेड़ दी, खासकर उस समय जब संसद के शीतकालीन सत्र के आसपास महाराष्ट्र विधान सभा का चुनाव होना है। महाराष्ट्र चुनाव के बाद अगले वर्ष (2025) में दिल्ली और बिहार विधान सभा का चुनाव होना है। सन 2026 में पांच राज्यों &#8211; असम, पुडुचेरी, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल &#8211; में चुनाव होना है। ये सभी राज्य मुस्लिम मतदाताओं वाला राज्य है। किसी भी प्रकार की गलती इन आठ राज्यों के विधानसभा चुनावों में सत्तारूढ़ केंद्रीय सरकार के लिए घातक हो सकता है। वैसे यह समझ के परे है कि आखिर ऐसी विषम परिस्थिति में किस महानुभाव या राजनीतिक विशेषज्ञों ने प्रधानमंत्री को यह सुझाव दिया। ऐसी स्थिति में इस बात से भी इंकार नहीं कर सकते हैं कि यह मुस्लिम मतदाताओं में एक रुझान जागृत करने के लिए संयुक्त संसदीय समिति का यह जांच-पड़ताल, उसका प्रतिवेदन प्रशीतित कक्ष (डीप फ्रीज़र) में रख दिया जाय। राजनीती है, कुछ भी हो सकता है।&#8221;</p>
<p><a href="https://www.youtube.com/watch?v=xLSMk_-osm4&#038;t=1154s" rel="noopener" target="_blank">@अखबारवाला001(219) ✍ &#8216;सशक्तिकरण और दक्षता&#8217; के नाम पर सरकार &#8216;वक्फ&#8217; को नियंत्रित करना चाह रही है क्या?</a></p>
<p>बहरहाल, पिछले वर्ष दिसंबर महीने में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार लोक सभा को बताई की सर्वोच्च न्यायालय सहित देश के उच्च न्यायालयों और निचली अदालतों में करीब पांच करोड़ से अधिक मुकदमा मुद्दत से लंबित है, तो मुद्दई और मुद्दालयों के साथ-साथ देश के मतदाताओं, समाचार पत्र-पत्रिकाओं के पाठकों और टीवी के दर्शकों को कोई आश्चर्य नहीं हुआ। उस समय केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल अपने चेहरे पर बिना किसी सिकन के साथ लोक सभा को बताये कि देश के 25 उच्च न्यायालयों में तक़रीबन 61.7 लाख और जिला, सत्र तथा अन्य निचली अदालतों में कोई 4.4 करोड़ मुकदमा लंबित है। उन्होंने यह भी कहा कि पूरे न्यायिक व्यवस्था में कोई पांच करोड़ से अधिक मुक़दमा लंबित है। उस मंत्रिमंडल में किरण रिजूजी क़ानून राज्य मंत्री थे। </p>
<p>पिछले वर्ष तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली वर्तमान सत्तारूढ़ सरकार को सत्ता में आये कोई 9 वर्ष हो चुके थे। कानून मंत्री इन लंबित मुकदमों का शीघ्रातिशीघ्र निष्पादन कैसे हो, इस विषय पर कोई व्याख्यान नहीं दिए। अलबत्ता, लंबित मुकदमों के आंकड़े को बताकर संसद में बैठ गए। ऐसा लगा जैसे इन लंबित मुकदमों के प्रति, मुद्दई और मुद्दालय के प्रति, इस क्षेत्र के रखरखाव पर सरकारी कोष से निकलने वाली राशि के प्रति, न्यायिक व्यवस्था के प्रति देश के आम लोगों के विश्वास के प्रति उनके चेहरे पर, कपाल पर, मुख पर कोई शिकन नहीं देखा गया। आप चाहें तो संसद की कार्यवाही का टीवी फुटेज देख सकते हैं। </p>
<figure id="attachment_5782" aria-describedby="caption-attachment-5782" style="width: 1200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/kiren-rijiju.jpeg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/kiren-rijiju.jpeg" alt="" width="1200" height="675" class="size-full wp-image-5782" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/kiren-rijiju.jpeg 1200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/kiren-rijiju-300x169.jpeg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/kiren-rijiju-1024x576.jpeg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/kiren-rijiju-768x432.jpeg 768w" sizes="auto, (max-width: 1200px) 100vw, 1200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5782" class="wp-caption-text">अल्पसंख्यक मंत्रालय के मंत्री किरेन रिजिजू,</figcaption></figure>
<p>लेकिन नौ महीने बाद जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी तीसरी पारी की सरकार बनाये, उनके मंत्रिमंडल में अल्पसंख्यक मंत्रालय के मंत्री किरेन रिजिजू, जो पहले कानून मंत्री भी रह चुके हैं, ने जब कहा कि &#8220;वक्फ बोर्ड के अंदर में 12,792 मुकदमे आज लंबित है। अधिकरणों (ट्रिब्यूनल) में कुल 19,207 मुक़दमे लंबित हैं । क्यों इसको हम खत्म नहीं कर सकते हैं। समय-सीमा (टाइमलाइन) बहुत जरूरी है, न्याय मिलना चाहिए लेकिन समय पर न्याय मिलना चाहिए। अब हमने टाइमलाइन सेट कर दिया है। अपील 90 दिन के अंदर, 6 महीने के अंदर डिस्पोजल होना चाहिए।&#8221; इतना ही नहीं, मंत्री महोदय अपने भाषण के दौरान शोर करने वाले विपक्षी सांसदों से कहा, &#8220;अगर सुनना नहीं चाहते हैं तो इतना सवाल क्यों पूछा। आप सवाल पूछकर भाग जाना चाहते हो, ऐसा नहीं होने देंगे।&#8221;</p>
<p>किरण रिजिजू वक्फ संशोधन विधेयक के बारे में बोल रहे थे जो लोकसभा में पेश हो गया था। रिजिजू ने कहा कि वक्फ संशोधन बिल पहली बार इस सदन में पेश नहीं किया जा रहा है। आजादी के बाद 1954 में कानून  लाया गया। उसके बाद कानून में कई संशोधन हुए। हम 1995 के कानून में संशोधन के लिए विधेयक  ला रहे हैं क्योंकि 2013 में ऐसे प्रावधान लाए गए, जिसने वक्फ कानून 1995 का स्वरूप बदल दिया है। आज जो विधेयक लाया जा रहा है वह सच्चर समिति की रिपोर्ट (जिसमें सुधार की बात कही गई थी) पर आधारित है, जिसे आपने (कांग्रेस ने) बनाया था। करीब एक घंटा बोलने के बाद रिजिजू ने बिल को संयुक्त संसदीय समिति को भेजने की बात कही, प्रस्ताव स्वीकार हुआ। किरण रिजूजीजब पिछले  मंत्रिमंडल में कानून मंत्री थे, इतनी व्याकुलता देश के न्यायालयों में लंबित मुकदमों के निष्पादन के बारे में नहीं दिखाये थे, वजह चाहे जो भी हो । वर्तमान मंत्रिमंडल में वे अल्पसंख्यक मंत्रालय के मंत्री तो हैं ही, संसदीय कार्य मंत्रालय का जिम्मा भी उठाये हुए हैं। खैर। </p>
<p>पिछले 8 अगस्त, 2024 को दो विधेयक, वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 और मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक, 2024 , लोकसभा में पेश किए गए, जिनका उद्देश्य वक्फ बोर्ड के काम को सुव्यवस्थित करना और वक्फ संपत्तियों का कुशल प्रबंधन सुनिश्चित करना है। सरकार का कहना है कि वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 का उद्देश्य वक्फ अधिनियम, 1995 में संशोधन करना है, ताकि वक्फ संपत्तियों के विनियमन और प्रबंधन में आने वाली समस्याओं और चुनौतियों का समाधान किया जा सके। संशोधन विधेयक का उद्देश्य भारत में वक्फ संपत्तियों के प्रशासन और प्रबंधन में सुधार करना है। इसका उद्देश्य पिछले अधिनियम की कमियों को दूर करना और अधिनियम का नाम बदलने, वक्फ की परिभाषाओं को अद्यतन करने, पंजीकरण प्रक्रिया में सुधार करने और वक्फ रिकॉर्ड के प्रबंधन में प्रौद्योगिकी की भूमिका बढ़ाने जैसे बदलाव करके वक्फ बोर्डों की दक्षता बढ़ाना है । </p>
<p>इतना ही नहीं, मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक, 2024 का प्राथमिक उद्देश्य मुसलमान वक्फ अधिनियम, 1923 को निरस्त करना है, जो औपनिवेशिक युग का कानून है जो आधुनिक भारत में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन के लिए पुराना और अपर्याप्त हो गया है। निरसन का उद्देश्य वक्फ अधिनियम, 1995 के तहत वक्फ संपत्तियों के प्रशासन और प्रबंधन में एकरूपता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है, इस प्रकार इस निरर्थक कानून के निरंतर अस्तित्व के कारण होने वाली विसंगतियों और अस्पष्टताओं को समाप्त करना है। वर्तमान में वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 को संसद की संयुक्त समिति गहराई से अध्ययन कर रही है। </p>
<p>सरकार ने संसद में वक्फ संशोधन विधेयक पेश करते समय जो जानकारी दी, उसके अनुसार देश का वक्फ बोर्ड दुनिया का एकमात्र ऐसा वक्फ बोर्ड है, जिसके पास सबसे अधिक संपत्तियां हैं। विश्व में कुल 57 इस्लामिक राष्ट्रों में भारत ही एकमात्र ऐसा देश है, जो देश में 9.4 लाख एकड़ में फैली 8.7 लाख संपत्तियों को नियंत्रित करता है, जिसका अनुमानित मूल्य 1.2 लाख करोड़ रुपये है। भारत में दुनिया की सबसे बड़ी वक्फ होल्डिंग है। इसके अलावा, सशस्त्र बलों और भारतीय रेलवे के बाद वक्फ बोर्ड भारत में सबसे बड़ा भूस्वामी है। सरकारी आकंड़ों के मुताबिक, वक्फ बोर्ड के अंतर्गत 356,051 वक्फ एस्टेट पंजीकृत हैं। वक्फ बोर्ड के अंतर्गत 872,328 अचल और 16,713 चल संपत्तियां पंजीकृत हैं। इसके पास अब तक 330000 डिजिटाइज्ड रिकॉर्ड हैं। कहते हैं तुर्की, लीबिया, मिस्त्र, सूडान, लेबनान, सीरिया, जॉर्डन, ट्यूनीशिया और इराक जैसे इस्लामिक राष्ट्रों में वक्फ बोर्ड की कोई परंपरा नहीं है। यह भी कहा जाता है कि इन संपत्तियों के कारण वक्फ बोर्ड में भ्रष्टाचार और मनमाने तौर तरीकों का बोलबाला है। सरकार मानती है कि इसे खत्म करके इन वक्फ संपत्तियों के बेहतर रखरखाव की मांग मुस्लिम समाज के कई समुदायों से पिछले कई सालों से उठती रही है। </p>
<p>सरकार यह भी कहती है कि मंत्रालय को मुसलमानों और गैर-मुसलमानों से वक्फ भूमि पर जानबूझकर अतिक्रमण और वक्फ संपत्तियों के कुप्रबंधन जैसे मुद्दों पर बड़ी संख्या में शिकायतें और अभ्यावेदन प्राप्त हुए हैं। मंत्रालय ने प्राप्त शिकायतों की प्रकृति और मात्रा का विश्लेषण किया है और पाया है कि अप्रैल, 2023 से प्राप्त 148 शिकायतें ज्यादातर अतिक्रमण, वक्फ भूमि की अवैध बिक्री, सर्वेक्षण और पंजीकरण में देरी और वक्फ बोर्डों और मुतवल्लियों के खिलाफ शिकायतों से संबंधित हैं। मंत्रालय ने अप्रैल, 2022 से मार्च, 2023 तक सीपीजीआरएएमएस (केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली) पर प्राप्त शिकायतों का भी विश्लेषण किया है और पाया है कि 566 शिकायतों में से 194 शिकायतें वक्फ भूमि पर अतिक्रमण और अवैध रूप से हस्तांतरण से संबंधित थीं और 93 शिकायतें वक्फ बोर्ड/मुतवल्लियों के अधिकारियों के खिलाफ थीं।</p>
<figure id="attachment_5783" aria-describedby="caption-attachment-5783" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/H20230330129309.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/H20230330129309.jpg" alt="" width="2200" height="1444" class="size-full wp-image-5783" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/H20230330129309.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/H20230330129309-300x197.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/H20230330129309-1024x672.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/H20230330129309-768x504.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/H20230330129309-1536x1008.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/H20230330129309-2048x1344.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5783" class="wp-caption-text">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी</figcaption></figure>
<p>लेकिन डीएमके सांसद कनिमोझी करुणानिधि ने कहा कि इस बिल के पास होने के बाद गैर मुसलमान भी बोर्ड के सदस्य बन सकेंगे, जो गलत है। उन्होंने कहा कि कोई पसंद नहीं करेगा कि जो आपके धर्म का नहीं है, वो आपके धर्म में हस्तक्षेप करे। इस बिल के माध्यम से विशेष समुदाय को टारगेट किया जा रहा है। यह बिल मुस्लिम और अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ है। इसी तरह, टीएमसी सांसद सुदीप बंदोपाध्याय ने भी इस बिल को धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों के विरुद्ध बताया। उन्होंने कहा कि यह बिल संविधान विरोधी है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 पर कहा कि मैं इस विधेयक का विरोध करता हूं। विधेयक के जरिए संविधान की धज्जियां उड़ाने की कोशिश की जा रही है। वक्फ बोर्ड की संपत्ति को खत्म करके आप डीएम राज लाकर बोर्ड की संपत्ति को नष्ट कर रहे हैं।</p>
<p>कहते हैं कि वक्फ इस्लामी कानून के तहत धार्मिक या धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए समर्पित संपत्तियों को संदर्भित करता है, और संपत्ति का कोई अन्य उपयोग या बिक्री निषिद्ध है। वक्फ का मतलब है कि संपत्ति का स्वामित्व अब वक्फ करने वाले व्यक्ति से छीन लिया गया है और अल्लाह द्वारा हस्तांतरित और हिरासत में लिया गया है। &#8216;वाकिफ&#8217; वह व्यक्ति होता है जो लाभार्थी के लिए वक्फ बनाता है। चूंकि वक्फ संपत्तियां अल्लाह को दी जाती हैं, इसलिए भौतिक रूप से मूर्त इकाई की अनुपस्थिति में, वक्फ का प्रबंधन या प्रशासन करने के लिए वक्फ या किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा एक &#8216;मुतवल्ली&#8217; नियुक्त किया जाता है। एक बार वक्फ के रूप में नामित होने के बाद, स्वामित्व वक्फ (वाकिफ) करने वाले व्यक्ति से अल्लाह को हस्तांतरित हो जाता है, जिससे यह अपरिवर्तनीय हो जाता है। </p>
<p>भारत में, वक्फ का इतिहास दिल्ली सल्तनत के शुरुआती दिनों से जुड़ा हुआ है, जब सुल्तान मुइज़ुद्दीन सैम ग़ौर ने मुल्तान की जामा मस्जिद के पक्ष में दो गाँव समर्पित किए और इसका प्रशासन शेखुल इस्लाम को सौंप दिया। जैसे-जैसे दिल्ली सल्तनत और बाद में इस्लामी राजवंश भारत में फले-फूले, भारत में वक्फ संपत्तियों की संख्या बढ़ती गई। 19वीं सदी के आखिर में भारत में वक्फ को खत्म करने का मामला तब उठाया गया था जब ब्रिटिश राज के दिनों में वक्फ संपत्ति को लेकर एक विवाद लंदन की प्रिवी काउंसिल में पहुंचा था। इस मामले की सुनवाई करने वाले चार ब्रिटिश जजों ने वक्फ को “ सबसे खराब और सबसे घातक किस्म की शाश्वतता ” बताया और वक्फ को अमान्य घोषित कर दिया। हालांकि, चारों जजों के फैसले को भारत में स्वीकार नहीं किया गया और 1913 के मुसलमान वक्फ वैधीकरण अधिनियम ने भारत में वक्फ संस्था को बचा लिया। तब से, वक्फ पर अंकुश लगाने का कोई प्रयास नहीं किया गया। </p>
<p>सरकार का मानना है कि वक्फ अधिनियम, 1954 &#8211; स्वतंत्रता के बाद से वक्फ को और मजबूत किया गया है। 1954 के पारित वक्फ अधिनियम ने वक्फों के केंद्रीकरण की दिशा में एक मार्ग प्रदान किया। 1954 के वक्फ अधिनियम के तहत भारत सरकार द्वारा 1964 में एक वैधानिक निकाय, सेंट्रल वक्फ काउंसिल ऑफ इंडिया की स्थापना की गई थी। यह केंद्रीय निकाय विभिन्न राज्य वक्फ बोर्डों के तहत काम की देखरेख करता है, जिन्हें वक्फ अधिनियम, 1954 की धारा 9(1) के प्रावधानों के तहत स्थापित किया गया था। वक्फ अधिनियम, 1995 को भारत में वक्फ संपत्तियों (धार्मिक बंदोबस्ती) के प्रशासन को संचालित करने के लिए अधिनियमित किया गया था। यह वक्फ परिषद, राज्य वक्फ बोर्डों और मुख्य कार्यकारी अधिकारी की शक्ति और कार्यों और मुतवल्ली के कर्तव्यों का भी प्रावधान करता है। </p>
<figure id="attachment_5784" aria-describedby="caption-attachment-5784" style="width: 1200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/jagdambika-pal-artiste-raju-srivastava-join-bjp.webp"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/jagdambika-pal-artiste-raju-srivastava-join-bjp.webp" alt="" width="1200" height="900" class="size-full wp-image-5784" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/jagdambika-pal-artiste-raju-srivastava-join-bjp.webp 1200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/jagdambika-pal-artiste-raju-srivastava-join-bjp-300x225.webp 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/jagdambika-pal-artiste-raju-srivastava-join-bjp-1024x768.webp 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/09/jagdambika-pal-artiste-raju-srivastava-join-bjp-768x576.webp 768w" sizes="auto, (max-width: 1200px) 100vw, 1200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5784" class="wp-caption-text">संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष जगदम्बिका पाल</figcaption></figure>
<p>यह अधिनियम वक्फ न्यायाधिकरण की शक्ति और प्रतिबंधों का भी वर्णन करता है जो अपने अधिकार क्षेत्र के तहत एक सिविल कोर्ट के बदले में कार्य करता है। वक्फ न्यायाधिकरण को एक सिविल कोर्ट माना जाता है और उन्हें सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के तहत एक सिविल कोर्ट द्वारा प्रयोग की जाने वाली सभी शक्तियों और कार्यों का प्रयोग करना आवश्यक है। न्यायाधिकरण का निर्णय अंतिम और पक्षों पर बाध्यकारी होगा। कोई भी मुकदमा या कानूनी कार्यवाही किसी भी सिविल कोर्ट के अधीन नहीं होगी। इस प्रकार, वक्फ न्यायाधिकरण के निर्णय किसी भी सिविल कोर्ट से ऊपर हैं। वक्फ प्रबंधन को और अधिक कुशल और पारदर्शी बनाने के लिए वर्ष 2013 में अधिनियम के कुछ प्रावधानों में संशोधन किया गया था। हालांकि, अधिनियम के कार्यान्वयन के दौरान यह महसूस किया गया कि अधिनियम वक्फ के प्रशासन को बेहतर बनाने में प्रभावी साबित नहीं हुआ। </p>
<p>जबकि, हितधारकों ने कई मामले उठाये &#8211; मसलन, वक्फ बोर्ड और केंद्रीय वक्फ परिषद के गठन में सीमित विविधता, मुतवल्लियों द्वारा शक्ति का दुरुपयोग, मुतवल्लियों द्वारा संपत्तियों के उचित खातों का रखरखाव न करना, स्थानीय राजस्व अधिकारियों के साथ प्रभावी समन्वय की कमी, अतिक्रमण हटाने के मुद्दे, वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण और शीर्षक की घोषणा, संपत्तियों का दावा करने के लिए वक्फ बोर्डों को व्यापक शक्ति जिसके परिणामस्वरूप विवाद और मुकदमेबाजी होती है, सीमा अधिनियम की गैर-प्रयोज्यता जिसके परिणामस्वरूप समुदायों के बीच वैमनस्य पैदा होता है, वक्फ संपत्तियों से कम और नगण्य आय आदि। उनका यह भी मानना है कि इसमें न्यायाधिकरण के निर्णयों पर कोई न्यायिक निगरानी नहीं है, जिससे वक्फ प्रबंधन और भी जटिल हो जाता है। उच्च न्यायिक निकाय में अपील करने की संभावना के बिना, न्यायाधिकरण द्वारा लिए गए निर्णय वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही को कमजोर कर सकते हैं।</p>
<p>इतना ही नहीं, सर्वेक्षण आयुक्त द्वारा वक्फ संपत्तियों के सर्वेक्षण का कार्य असंतोषजनक पाया गया। साथ ही, यह देखा गया कि राज्य वक्फ बोर्डों ने अधिनियम के कुछ प्रावधानों का दुरुपयोग किया है, जिससे समुदायों के बीच वैमनस्य और असंतोष पैदा हुआ है। संपत्ति को वक्फ संपत्ति के रूप में अधिगृहीत करने और घोषित करने के लिए वक्फ अधिनियम की धारा 40 का व्यापक रूप से दुरुपयोग किया गया। इससे न केवल बड़ी संख्या में मुकदमेबाजी हुई है, बल्कि समुदायों के बीच वैमनस्य भी पैदा हुआ है। यह भी कहा जाता है कि वैधानिक वैधता: वक्फ अधिनियम देश के केवल एक धर्म की धार्मिक संपत्तियों के लिए एक विशेष अधिनियम है, जबकि किसी अन्य धर्म के लिए ऐसा कोई कानून मौजूद नहीं है। </p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/report-in-winter-session-or-case-in-deep-freezer">क्या श्री जगदम्बिका पाल साहब !! &#8216;प्रतिवेदन&#8217; शीतकालीन सत्र में या &#8216;मामला&#8217; प्रशीतित कक्ष (डीप फ्रीज़र) में, क्या कहते हैं ?</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>मंत्री जी सुन रहे हैं🦻&#8217;राम&#8217; के लिए &#8216;अयोध्या&#8217; में मंदिर, लेकिन &#8216;सीता&#8217; के जन्मस्थान सीतामढ़ी के लोगों के लिए एक ट्रेन भी नहीं 😢</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 21 Sep 2023 05:42:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चुटकुलानन्द की चिठ्ठी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली: धार्मिक दृष्टि से भारत में &#8216;सीतामढ़ी&#8217; का जो भी महत्व हो, देश की राजनीतिक गलियारे में इस ऐतिहासिक स्थल का राजनेता जिस कदर &#8216;इस्तेमाल&#8217; करते हों अपनी-अपनी राजनीतिक सिद्धि के लिए; लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि आज़ादी के 76-साल बाद भी कोई 4,380,000+ आवादी वाले जिले को, जहाँ [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली: धार्मिक दृष्टि से भारत में &#8216;सीतामढ़ी&#8217; का जो भी महत्व हो, देश की राजनीतिक गलियारे में इस ऐतिहासिक स्थल का राजनेता जिस कदर &#8216;इस्तेमाल&#8217; करते हों अपनी-अपनी राजनीतिक सिद्धि के लिए; लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि आज़ादी के 76-साल बाद भी कोई 4,380,000+ आवादी वाले जिले को, जहाँ शिक्षा का प्रकाश &#8216;आधी आवादी&#8217; तक भी नहीं पहुंची, रोजी-रोजगार की तो बात ही नहीं करें, इस जिले को जो हक़ मिलना चाहिए थे, नहीं मिला। कहते हैं &#8211; कुछ लोहे में दोष तो कुछ लोहार में। </strong></p>
<p>अगर ऐसा नहीं होता तो 60:42 का अनुपात पुरुष और महिला शिक्षा में रखने वाले इस जिले से रोजी रोटी की तलाश में यहाँ के लोगों को, मतदाताओं को, सीतामढ़ी की सीमा लांघकर कोई 34+ घंटे की सफर तय कर 1858 किलोमीटर की दूरी तय नहीं करना पड़ता। इससे प्रदेश के मुख्यमंत्री सम्मानित नीतीश कुमार को क्या या फिर इस संसदीय क्षेत्र से अब तक लोकसभा और प्रदेश के विधानसभा तक जाने वाले, कुर्सियों को तोड़ने वाले नेताओं को क्या फर्क पड़ता है ?</p>
<p>कहते हैं सीतामढ़ी में ही राजा जनक की पुत्री और भगवान् राम की पत्नी सीता का जन्म हुआ था। यह भी कहा जाता है कि सीतामढ़ी के पुनौरा नामक स्थान पर जब राजा जनक ने खेत में हल जोत रहे थे, तो उस समय धरती से सीता का जन्म हुआ था। सीता जी के जन्म के कारण इस नगर का नाम पहले सीतामड़ई, फिर सीतामही और कालांतर में सीतामढ़ी पड़ा। प्राचीन काल में सीतामढ़ी तिरहुत का अंग रहा है। इस क्षेत्र में मुस्लिम शासन आरंभ होने तक मिथिला के शासकों यहाँ शासन किया। 1908 ईस्वी में तिरहुत मुजफ्फरपुर का हिस्सा रहा। स्वतंत्रता पश्चात 11 दिसंबर 1972 को सीतामढ़ी को स्वतंत्र जिला का दर्जा मिला, जिसका मुख्यालय सीतामढ़ी को बनाया गया।</p>
<p>बहरहाल, सीतामढ़ी के सांसद सुनील कुमार पिंटू केन्द्रीय रेल मंत्री को एक पत्र लिखे हैं । वे मुंबई में रहने वाले मिथिला से प्रवासित, श्रमिक, मजदूर, शिक्षित, अशिक्षित सभी तबके के लोगों से मिले। वैसे मुंबई में जब भी कोई केन्द्रीय मंत्रिमंडल के मंत्री आते हैं, मुंबई में रखने वाले लोग अपने गाँव, प्रदेश की त्रादसी के निवारण हेतु मिलते जरूर हैं। पिछले दिनों बिहार के मिथिला धाम के अनेकों संस्थाएं अपने सांसद के साथ साथ केन्द्रीय  रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव से मिले और याचना पत्र भी दिया। मंत्री महोदय उसे मुस्कुराते &#8216;स्वीकार&#8217; भी किये, लेकिन सवाल यह है कि क्या मंत्री महोदय इस समस्या का निवारण करने में सफल हो पाएंगे ?</p>
<figure id="attachment_5104" aria-describedby="caption-attachment-5104" style="width: 1200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/e5ec25b0-eabd-4725-8215-350546033795.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/e5ec25b0-eabd-4725-8215-350546033795.jpg" alt="" width="1200" height="1600" class="size-full wp-image-5104" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/e5ec25b0-eabd-4725-8215-350546033795.jpg 1200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/e5ec25b0-eabd-4725-8215-350546033795-225x300.jpg 225w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/e5ec25b0-eabd-4725-8215-350546033795-768x1024.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/e5ec25b0-eabd-4725-8215-350546033795-1152x1536.jpg 1152w" sizes="auto, (max-width: 1200px) 100vw, 1200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5104" class="wp-caption-text">सीतामढ़ी के सांसद सुनील कुमार पिंटू के साथ मुंबई के मिथिला संगठन के नेता राजेश झा</figcaption></figure>
<p>पत्र में लिखा है: &#8220;महोदय, जैसा की हम सब जानते हैं मिथिला-बिहार के लोग रोजगार ढूंढने हेतु अपने राज्य से बाहर जाते हैं। मुंबई में ज्यादातर लोग कार्य करते हैं। मिथिलांचल के लोगों को अपने घर आने-जाने के लिए मात्र एक ट्रेन पवन एक्सप्रेस हैं जो दरभंगा से लोकमान्य तिलक के बीच चलती है। जहाँ एक तरफ आप देश में वन्दे भारत सुपरफास्ट जैसी ट्रेन चला रहे हैं, वहीँ दूसरी तरफ हम मिथिला वासी को मुंबई से अपने घर आने जाने के लिए ऐसी कोई सुविधा नहीं है।&#8221;</p>
<p>पत्र में त्रादसी की स्थिति देखिये। पत्र में लिखा है: &#8220;इस रूट पर यात्री ज्यादा होने के कारण पवन एक्सप्रेस ट्रेन में साल के 365 दिन सीट पूरा बुक रहता है और पर्व त्यौहार में तो इस ट्रेन में टिकट मिलता ही नहीं। यात्रियों की संख्या उत्तरोत्तर बढ़ रही है और ट्रेन सभी यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुँचाने में असफल हो रही है। महाशय, मुंबई से दरभंगा के लिए पवन एक्सप्रेस को &#8216;सुपरफास्ट&#8217; करने की आवश्यकता है, साथ ही, मुंबई से रक्सौल. विजय दरभंगा-सीतामढ़ी होते हुए नई ट्रेनों की शुरुआत आवश्यक है जिससे बिहार के सभी लोगों को आने-जाने में सहूलियत हो सके। हम तो निवेदन ही कर सकते हैं, निर्देश तो आपका ही होगा।&#8221;</p>
<p>अब सवाल यह है कि अगले वर्ष चुनाव होने वाला है। केंद्र का बिहार के नेताओं से 36 का आंकड़ा है। चुनाव से पूर्व रेल बजट और आम बजट दोनों है। अगर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने मंत्रिमंडल के रेलमंत्री वैष्णव जी की बातें सुन भी लेते हैं तो रेल बजट में ऐलान तो हो जायेगा &#8211; परन्तु अनुवादित होगा अथवा नहीं, यह कई करोड़ का प्रश्न है। क्योंकि विगत 76 वर्षों में बिहार में रेल-परिचालन व्यवस्था दुरुस्त हो, लोगों को सुख-सुविधा मिले, सैकड़ों योजनाएं, परियोजनाएं लागू हुए। कई शुरू होने से पहले मृत्यु को प्राप्त किये, कई शुरू होते ही दम तोड़ दिए।  </p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/chutkulanands-letter/temple-in-ayodhya-for-ram-but-not-even-a-train-for-the-people-of-sitamarhi-the-birthplace-of-sita">मंत्री जी सुन रहे हैं🦻&#8217;राम&#8217; के लिए &#8216;अयोध्या&#8217; में मंदिर, लेकिन &#8216;सीता&#8217; के जन्मस्थान सीतामढ़ी के लोगों के लिए एक ट्रेन भी नहीं 😢</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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