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	<title>generation Archives - आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</title>
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	<description>आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</description>
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		<title>मोहब्बत के कई किस्से, अफ़साने लिखने वाला भारत के लोगों का घरों का छत अब सोलर पैनेल लगने/लगाने के लिए सज्ज हो रहे हैं</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 23 Jan 2024 05:11:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यापार]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली: यह अलग बात है कि आज़ादी के 76 वर्ष बाद आज भी तक़रीबन 1.77 मिलियन भारतीयों (मतदाता सहित) को अपना सर छुपाने के लिए &#8216;छत&#8217; नहीं है। लेकिन इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि &#8216;छत&#8217;, चाहे &#8216;कनस्तर से ढंका वाला हो या संगमरमर पत्थर से निर्मित चकचकाता, चमचमाता [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली: यह अलग बात है कि आज़ादी के 76 वर्ष बाद आज भी तक़रीबन 1.77 मिलियन भारतीयों (मतदाता सहित) को अपना सर छुपाने के लिए &#8216;छत&#8217; नहीं है। लेकिन इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि &#8216;छत&#8217;, चाहे &#8216;कनस्तर से ढंका वाला हो या संगमरमर पत्थर से निर्मित चकचकाता, चमचमाता हो; &#8216;मोहब्बत करने वालों को काफी मदद करते आया है मुद्दत से। मोहब्बत के कई किस्से और अफ़साने छत पर ही लिखे गए हैं। आज छत फिर से अपनी भूमिका निभाने के लिए सज्ज हो रहा है।</strong>   </p>
<p>नौ साल पहले जश्ने आज़ादी मनाने के तीसरे दिन जब कोचीन अंतराज्यीय हवाई अड्डा विश्व के लगभग 44000+ हवाई अड्डों में अपना नाम सबसे ऊपर लिखा, तो यह देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के साथ-साथ प्रधान मंत्री कार्यालय से जुड़े बड़े-बड़े वैज्ञानिकों के लिए कोचीन हवाई अड्डा का यह प्रयास एक &#8216;शोध&#8217; के विषय के साथ-साथ &#8216;क्रियान्वयन&#8217; का विषय भी हो गया।  </p>
<p>विगत 18 अगस्त, 2015 को कोचीन अंतराज्यीय हवाई अड्डा दुनिया का पहला सौर ऊर्जा संचालित हवाई अड्डा बना था। भारत ही नहीं, विश्व के कोने-कोने से प्रकाशित अख़बारों में, पत्रिकारों में यह प्रकाशित हुआ। टीवी चैनलों पर दिखाया गया। वैसे बिजली के मामले में, रौशनी के मामले में भारत का अपना एक अलग इतिहास है, लेकिन प्रधानमंत्री अयोध्या में श्रीराम की प्रतिमा स्थापित करने के बाद कल भारत के लोगों से आग्रह किया कि वे स्वहित में, राष्ट्र के सम्मानार्थ, बिजली उत्पादन के मामले में &#8216;स्वावलंबी&#8217; बनें। आह्वान &#8216;राजनीतिक&#8217; भी हो सकता है, लेकिन &#8216;राष्ट्रहित&#8217; में बेहतर लगता है। </p>
<figure id="attachment_5269" aria-describedby="caption-attachment-5269" style="width: 2039px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/2-4.jpg"><img fetchpriority="high" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/2-4.jpg" alt="" width="2039" height="1387" class="size-full wp-image-5269" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/2-4.jpg 2039w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/2-4-300x204.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/2-4-1024x697.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/2-4-768x522.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/2-4-1536x1045.jpg 1536w" sizes="(max-width: 2039px) 100vw, 2039px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5269" class="wp-caption-text">प्रधानमंत्री ने 22 जनवरी, 2024 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री सूर्योदय योजना लॉन्च करने के लिए एक बैठक की अध्यक्षता की।</figcaption></figure>
<p>एक और जहाँ देश में कोयला आधारित बिजली उत्पादन में पिछले कुछ वर्षों में तक़रीबन आठ से दस फीसदी की वृद्धि का दावा किया जा रहा, और यह भी दवा किया जा रहा है कि आज भी बिजली निर्माण का प्रमुख स्रोत कोयला ही है, जो कुल बिजली उत्पादन का 70 फीसदी से अधिक है; प्रधानमंत्री भगवान् राम की ऐतिहासिक मूर्ति को उनके जन्मभूमि अयोध्या में स्थापित करने के बाद भारत के लोगों से निवेदन किया है कि बिजली की बढ़ती खपत के मद्दे नजर अपने-अपने छतों पर सोलर पैनल लगाएं, बिजली का उत्पादन करें और बिजली के मालमे में स्वावलबी हो जाएँ। </p>
<p>अगर आंकड़े पर नजर दिया जाय तो भारत में कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता उपयोगिता क्षमता, कैप्टिव बिजली क्षमता और अन्य गैर-उपयोगिताओं का योग 31 मार्च 2022 तक 482.232 गीगावॉट था, जो स्वाभाविक रूप से बढ़ा ही होगा। खर्च के दृष्टिकोण से भारत में बिजली का खर्च विश्व के किसी भी देश से कम नहीं है। आंकड़ों के अनुसार, चीन दुनिया के किसी भी देश की तुलना में अब तक सबसे अधिक बिजली की खपत करता है। </p>
<p>बिजली के मामले में भारत के प्रत्येक घरों में रहने वाले लोगों को स्वावलंबी बनाने सम्बन्धी एक प्रयास &#8211; &#8216;प्रधानमंत्री सूर्योदय योजना&#8221; &#8211; वाली बैठक की अध्यक्षता करते प्रधानमंत्री ने सोलर बिजली उत्पादन पर अधिक बल दिया। अपने आवास पर 1 करोड़ घरों पर रूफटॉप सौर ऊर्जा स्थापित करने के लक्ष्य के साथ &#8220;प्रधानमंत्री सूर्योदय योजना&#8221; शुरू करने के लिए एक बैठक की अध्यक्षता की।</p>
<figure id="attachment_5270" aria-describedby="caption-attachment-5270" style="width: 1945px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122151057-scaled.jpg"><img decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122151057-scaled.jpg" alt="" width="1945" height="2560" class="size-full wp-image-5270" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122151057-scaled.jpg 1945w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122151057-228x300.jpg 228w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122151057-778x1024.jpg 778w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122151057-768x1011.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122151057-1167x1536.jpg 1167w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122151057-1556x2048.jpg 1556w" sizes="(max-width: 1945px) 100vw, 1945px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5270" class="wp-caption-text">प्रधानमंत्री ने 22 जनवरी, 2024 को अयोध्या में राम लला की &#8216;प्राण प्रतिष्ठा&#8217; के अवसर पर दिल्ली में अपने आवास पर &#8216;राम ज्योति&#8217; जलाई।</figcaption></figure>
<p><strong>प्रधानमंत्री ने बैठक के दौरान कहा कि सूर्य की ऊर्जा का उपयोग छत वाले प्रत्येक घर द्वारा अपने बिजली के बिल को कम करने और उन्हें अपनी बिजली की जरूरतों के लिए वास्तव में आत्मनिर्भर बनाने के लिए किया जा सकता है। प्रधानमंत्री सूर्योदय योजना का लक्ष्य निम्न और मध्यम आय वाले व्यक्तियों को रूफटॉप सौर ऊर्जा की स्थापना के माध्यम से बिजली उपलब्ध करना है, साथ ही अतिरिक्त बिजली उत्पादन के लिए अतिरिक्त आय का अवसर उपलब्ध करना है।</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि आवासीय क्षेत्र के उपभोक्ताओं को बड़ी संख्या में रूफटॉप सौर ऊर्जा अपनाने को लेकर प्रेरित करने के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय अभियान शुरू किया जाना चाहिए। वजह यह है कि देशभर में बिजली की खपत लगातार बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2022 में भारत में कुल सालाना बिजली खपत 1300 बिलियन किलोवाट घंटा (kWh) को पार कर गया। ये वित्त वर्ष 2012 के मुकाबले करीब 70 फीसदी ज्यादा है। एक स्टडी के अनुसार तेजी से बढ़ी बिजली खपत की वजह औद्योगिक और घरेलू क्षेत्र हैं। देशभर के घरों में बिजली का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।</p>
<p>बिजली मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार देशभर में सबसे ज्यादा बिजली खपत महाराष्ट्र में है। गुजरात दूसरे नंबर पर है। इसके बाद यूपी, तमिलनाडु और ओडिशा देश में सबसे ज्यादा बिजली खपत करने वाले राज्यों में आते हैं। बिजली मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि साल 2022 में भारत की सालाना बिजली खपत 2012 के मुकाबले 530 बिलियन यूनिट (BU) से ज्यादा बढ़ गया है। खपत के मामले में बिहार में सबसे तेजी देखी गई, यहां बिजली खपत 2012 में 6 बीयू से 27 बीयू हो गई। ये 10 साल में 350% बढ़ गई। </p>
<p>2022 में बिहार में मासिक बिजली खपत के मामले में 2012 की तुलना में 6 गुना बिजली की खपत की। इसके अलावा मध्य प्रदेश और ओडिशा में भी बिजली खपत दोगुनी हो गई है। जबकि केंद्र शासित राज्यों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 2012 और 2022 के बीच 200% की वृद्धि हुई है। गोवा में हर महीने एक परिवार करीब 267.3 kWh बिजली की खपत करता है, ये असम (48.5 kWh) की तुलना में पांच गुना ज्यादा है। भले ही पूर्वोत्तर राज्यों में 2012-2022 के दौरान अपनी घरेलू बिजली खपत को दोगुना से ज्यादा कर दिया। </p>
<p>साल 2012 से 2022 तक सालाना 7.1% की उच्चतम दर से बिजली की खपत में इजाफा हुआ है, इसमें उद्योगों का सबसे बड़ा योगदान है। बिजली खपत में औद्योगिक क्षेत्र की 39% हिस्सेदारी थी, घरेलू उपयोगकर्ताओं की हिस्सेदारी 32% थी और कृषि में बिजली की मांग का हिस्सा 16 फीसदी था। औद्योगिक बिजली खपत में गुजरात, ओडिशा, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और छत्तीसगढ़ सबसे ऊपर है। इन राज्यों में 2022 में इस क्षेत्र में की गई कुल खपत का 50% से ज्यादा हिस्सा लिया। भारत का कुल घरेलू बिजली खपत 2012-2022 के दौरान 171 BU से 340 BU में बढ़ गया।  कृषि के लिए, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना, महाराष्ट्र और यूपी ने उसी अवधि में लगभग 90 BU की ऊर्जा मांग की कुल वृद्धि का 75% का हिस्सा लिया।</p>
<p>बहरहाल, कलकत्ता में बिजली की रौशनी का पहला प्रदर्शन 24 जुलाई 1879 को पीडब्लू फ्लेरी एंड कंपनी द्वारा आयोजित किया गया था। 7 जनवरी 1897 को, किलबर्न एंड कंपनी ने इंडियन इलेक्ट्रिक कंपनी के एजेंट के रूप में कलकत्ता इलेक्ट्रिक लाइटिंग लाइसेंस हासिल किया, जो पंजीकृत था।कलकत्ता में बिजली की शुरूआत सफल रही और इसके बाद बंबई में बिजली की शुरुआत की गई। मुंबई में पहला विद्युत प्रकाश प्रदर्शन 1882 में क्राफर्ड मार्किट में हुआ था और बॉम्बे इलेक्ट्रिक सप्लाई और ट्रामवेज़ कंपनी ने 1905 में ट्रामवे के लिए बिजली प्रदान करने के लिए एक उत्पादन स्टेशन स्थापित किया था।</p>
<p>भारत में पहली जलविद्युत स्थापना 1897 में दार्जिलिंग नगर पालिका के लिए एक चाय बागान में स्थापित की गई थी। एशिया में पहली बिजली स्ट्रीट लाइट 5 अगस्त 1905 को बैंगलोर में जारी थी। देश में पहली इलेक्ट्रिक ट्रेन 3 फरवरी 1925 को बॉम्बे के विक्टोरिया टर्मिनस और कुर्ला के बीच हार्बर लाइन पर चली थी।  देश में  भारत की पहली हाई-वोल्टेज प्रयोगशाला सरकारी इंजीनियरिंग में स्थापित की गई थी 1947 में। 18 अगस्त 2015 को, कोचीन अंतराज्यीय हवाई अड्डा दुनिया का पहला सौर ऊर्जा संचालि हवाई अड्डा बन गया। </p>
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		<title>एक सूर्य, एक विश्व, एक ग्रिड की व्यवस्था होने पर किसी को भी बिजली के बिना नहीं रहना पड़ेगा:  ऊर्जा मंत्री श्री आर.के. सिंह</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 07 Sep 2023 10:42:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[electricity]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली में होने वाली 18 वें जी-20 शिखर सम्मेलन के क्रम में &#8220;एक सूर्य, एक विश्व, एक ग्रिड (ओएसओडबल्यूजी) के बारे में ट्रांसनेशनल ग्रिड इंटरकनेक्शन&#8221; पर केंद्रीय ऊर्जा और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री आर. के सिंह ने सम्मेलन को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि भारत ने पहले ही अपने पड़ोसियों के साथ सीमा पार संपर्क [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली में होने वाली 18 वें जी-20 शिखर सम्मेलन के क्रम में &#8220;एक सूर्य, एक विश्व, एक ग्रिड (ओएसओडबल्यूजी) के बारे में ट्रांसनेशनल ग्रिड इंटरकनेक्शन&#8221; पर केंद्रीय ऊर्जा और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री आर. के सिंह ने सम्मेलन को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि भारत ने पहले ही अपने पड़ोसियों के साथ सीमा पार संपर्क स्थापित कर लिया है और विभिन्न सीमा पार संपर्कों को मजबूत करने की प्रक्रिया चल रही है। श्री सिंह ने कहा, “एक सूर्य, एक विश्व, एक ग्रिड (ओएसओडबल्यूजी) सभी देशों को सूर्य से ऊर्जा का लाभ प्राप्त करने में सक्षम बनाएगा। </strong></p>
<p>इस सम्मेलन का आयोजन भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय के अधीन एक &#8216;महारत्न&#8217; कंपनी, पॉवर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (पावरग्रिड) द्वारा किया गया। श्री सिंह ने कहा कि यह आज के संदर्भ में बहुत प्रासंगिक है, विशेष रूप से जब हम नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बढ़ रहे हैं। इससे चौबीसों घंटे चलने वाली नवीकरणीय ऊर्जा काफी सस्ती हो जाएगी। इससे भंडार की आवश्यकता भी कम हो जाएगी। इससे आम जनता के लिए बिजली की लागत कम हो जाएगी और ऊर्जा उपयोग के परिवर्तन में सहायता मिलेगी।&#8221;</p>
<p>केंद्रीय विद्युत मंत्री ने कहा कि एक बार जब अंतरराष्ट्रीय ग्रिड इंटरकनेक्शन स्थापित हो जाएगा, तो इससे भंडारण पर निर्भरता समाप्त हो जाएगी, जो महंगा है और चौबीसों घंटे नवीकरणीय ऊर्जा के लिए आवश्यक है। श्री सिंह ने कहा, “एक बार जब हमारे पास एक सूर्य, एक विश्व, एक ग्रिड (ओएसओडबल्यूजी) की व्यवस्था हो जाएगी, तो किसी को भी बिजली के बिना नहीं रहना पड़ेगा। यह दुनिया को एकजुट करेगा और उन लाखों लोगों तक ऊर्जा पहुंच सुनिश्चित करेगा जिनके पास इसकी अभी तक पहुंच उपलब्ध नहीं है। यह आवश्यक है कि हम सभी इसे आगे बढ़ाएं, मुझे विश्वास है कि यह वास्तविकता बन जाएगी।” विद्युत मंत्री महोदय ने सेमिनार की अपार सफलता की कामना की।</p>
<p>विद्युत मंत्रालय में विशेष सचिव एवं वित्तीय सलाहकार श्री आशीष उपाध्याय; केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अध्यक्ष, श्री घनश्याम प्रसाद; विद्युत मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव, श्री अजय तिवारी और पावर ग्रिड कॉरपोरेशन के मुख्य प्रबंध निदेशक, श्री के. श्रीकांत ने सेमिनार के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया, जिसमें थिंक टैंक, उद्योग, शिक्षाविद, क्षेत्र के विशेषज्ञ और मीडिया ने भाग लिया।</p>
<p>सम्मेलन के पैनल में भारत और विदेश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञ शामिल थे। विश्व बैंक के श्री वलीद एस. अलसुरैह ने ट्रांसनेशनल ग्रिड इंटरकनेक्शन-मध्य पूर्व और अफ्रीका का परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि एक बार संपूर्ण अरब जगत में बिजली बाजार (पीएईएम) चालू हो जाने पर, यह जीसीसी, यूरोपियन यूनियन और अफ्रीका के माध्यम से दक्षिण एशिया के बीच अंतरक्षेत्रीय ग्रिड के एकीकरण और 5 क्षेत्रीय बिजली बाजारों के साथ व्यापार को सक्षम करेगा। परिकल्पित पीएईएम ग्रिड इसके 3 उप-क्षेत्रों को जोड़ता है और अन्य क्षेत्रीय बाजारों के साथ आगे एकीकरण की क्षमता को मजबूत करता है।</p>
<p><a href="https://twitter.com/i/status/1699351505541968120"></a></p>
<p>&#8220;दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क), बिम्सटेक और आसियान देशों की समानताओं को अंतरराष्ट्रीय अंतर्संबंधों के माध्यम से किया जा सकता है।&#8221;</p>
<p>विकास के लिए एकीकृत अनुसंधान एवं कार्रवाई (आईआरएडीई) के वरिष्ठ सलाहकार, श्री पंकज बत्रा ने आसियान के बारे में परिप्रेक्ष्य प्रदान करते हुए कहा कि सार्क, बिम्सटेक और आसियान देशों के ऊर्जा संसाधनों की समानताओं का उपयोग अंतरराष्ट्रीय अंतर्संबंधों के माध्यम से किया जा सकता है। सेंट्रल ट्रांसमिशन यूटिलिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सीटीयूआईएल) के उप मुख्य संचालन अधिकारी श्री अशोक पाल ने मौजूदा भारतीय सीमा पार इंटरकनेक्शन के तकनीकी विचारों और व्यापार मॉडल पर चर्चा की। क्षेत्रीय ग्रिड इंटरकनेक्शन के लिए सिस्टम ऑपरेशन पहलुओं को ग्रिड कंट्रोलर ऑफ इंडिया के मुख्य प्रबंध निदेशक श्री एस.आर. नरसिम्हन द्वारा साझा किया गया।</p>
<p>सेमिनार के दौरान, केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (सीईआरसी) के प्रमुख, डॉ. एस.के. चटर्जी ने क्षेत्रीय ग्रिड इंटरकनेक्शन के लिए नियामक और कानूनी पहलुओं पर जानकारी दी, जबकि सीमेंस एनर्जी के मुख्य प्रबंधक श्री निकेत जैन ने अंतरराष्ट्रीय इंटरकनेक्शन के लिए विभिन्न प्रौद्योगिकियों पर चर्चा की। एक सूर्य, एक विश्व, एक ग्रिड (ओएसओडबल्यूजी) पर सत्र का संचालन डेलॉइट इंडिया के श्री शुभ्रांशु पटनायक ने किया। पावरग्रिड के निदेशक (प्रोजेक्ट्स) श्री अभय चौधरी के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ सेमिनार का समापन हुआ।</p>
<figure id="attachment_5056" aria-describedby="caption-attachment-5056" style="width: 1024px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/rsz_shri_k_sreekant_chairman__managing_director.jpeg"><img decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/rsz_shri_k_sreekant_chairman__managing_director.jpeg" alt="" width="1024" height="1013" class="size-full wp-image-5056" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/rsz_shri_k_sreekant_chairman__managing_director.jpeg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/rsz_shri_k_sreekant_chairman__managing_director-300x297.jpeg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/rsz_shri_k_sreekant_chairman__managing_director-768x760.jpeg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/rsz_shri_k_sreekant_chairman__managing_director-24x24.jpeg 24w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/rsz_shri_k_sreekant_chairman__managing_director-48x48.jpeg 48w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/rsz_shri_k_sreekant_chairman__managing_director-96x96.jpeg 96w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5056" class="wp-caption-text">पावर ग्रिड कॉरपोरेशन के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक, श्री के. श्रीकांत</figcaption></figure>
<p>वैश्विक स्तर पर, नवीकरणीय ऊर्जा की क्षमता वृद्धि से प्रेरित ऊर्जा संक्रमण और ऊर्जा सुरक्षा स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। यह ध्यान में रखते हुए कि सूर्य कभी अस्त नहीं होता है और हर घंटे, आधा ग्रह धूप से परिपूर्ण रहता है, सूर्य, हवा और पानी से ऊर्जा का उपयोग करने से स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन करने में सहायता मिलेगी, जो पृथ्वी पर सभी लोगों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त होगी। हालाँकि, इसके लिए ग्रिड इंटरकनेक्शन के माध्यम से बिजली के अंतरराष्ट्रीय आदान-प्रदान की आवश्यकता होती है। इन प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय इंटरकनेक्शन के माध्यम से एक इंटर-कनेक्टेड वैश्विक बिजली ग्रिड की स्थापना करके समन्वित और पूरक बनाने की आवश्यकता है। यह स्थायी भविष्य के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में अंतरराष्ट्रीय ग्रिड कनेक्शन के विकास के माध्यम से एक सूर्य, एक विश्व, एक ग्रिड की एक परिकल्पना है।</p>
<p>जी20 सम्मेलन का विषय &#8220;वसुधैव कुटुंबकम्&#8221; यानी एक-पृथ्वी, एक-परिवार और एक-भविष्य का अनुसरण करते हुए, जी20 की अध्यक्षता में भारत ने ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने, आर्थिक विकास को प्रोत्साहन देने और सभी के लिए सार्वभौमिक ऊर्जा पहुंच की सुविधा प्रदान करने में अंतरराष्ट्रीय ग्रिड इंटरकनेक्शन के महत्व पर प्रकाश डाला गया, जो किफायती, विश्वसनीय और टिकाऊ तरीके से, बेहतर आसानी के साथ ऊर्जा परिवर्तन की दिशा में नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण को गति देगा।  </p>
<p>गोआ में हाल में ही संपन्न ऊर्जा परिवर्तन मंत्रिस्तरीय बैठक में, सभी जी20 देश एक ही पृष्ठ पर एक साथ आए और ईटीडब्ल्यूजी परिणाम दस्तावेज और अध्यक्ष सारांश के पैरा नंबर 5 में निम्नलिखित की घोषणा की।</p>
<p>&#8220;हम ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने, आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और किफायती, विश्वसनीय और टिकाऊ तरीके से सभी के लिए सार्वभौमिक ऊर्जा की पहुंच की सुविधा प्रदान करने में ग्रिड इंटरकनेक्शन, आसान ऊर्जा बुनियादी ढांचे और क्षेत्रीय / सीमा पार बिजली प्रणालियों के एकीकरण की भूमिका को भी पहचानते हैं। विशेष रूप से, हम मानते हैं कि नवीकरणीय सहित शून्य और कम कार्बन उत्सर्जन प्रौद्योगिकियों की तैनाती को बढ़ाने के लिए विस्तारित और आधुनिक बिजली नेटवर्क आवश्यक होंगे। इसमें समन्वित योजना, पारस्परिक रूप से सहमत सूचना साझाकरण, संयुक्त अनुसंधान और विकास, प्रौद्योगिकी में स्वैच्छिक अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, डिजाइन, योजना और सिस्टम संचालन के लिए सहायता, प्रौद्योगिकी विकास और नियामक ढांचे का सामंजस्य बढ़ाना शामिल है। इस संबंध में, हम नवीकरणीय ऊर्जा शक्ति को स्थानांतरित करने के लिए इंटरकनेक्शन के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रीय ग्रिडों को जोड़ने के लिए भारत की अध्यक्षता की पहल पर ध्यान देते हैं। हम सार्वजनिक और निजी निवेश बढ़ाने का आह्वान करते हैं। विकासशील देशों को क्षेत्रीय/सीमा पार अंतर्संबंधों का पूरा लाभ उठाने में सहायता करने में, जहां उचित समझा जाए, बहुपक्षीय विकास बैंकों (एमडीबी) सहित अंतर्राष्ट्रीय वित्त संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका है।&#8221;</p>
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