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	<title>dhankad Archives - आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</title>
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	<description>आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</description>
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		<title>&#8220;मैं ही सही हूँ, बाकी सब गलत है &#8211; यह लोकतंत्र नहीं है।​ यह अहंकार है। यह उद्दंडता है​&#8221;, अपने अंतिम भाषण में धनकड़ &#8216;प्रधानमंत्री का नाम तक नहीं लिया&#8221;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 22 Jul 2025 08:02:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
		<category><![CDATA[dhankad]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>रायसीना पहाड़, नई दिल्ली : ​रुद्राक्ष के माला में 108 दाना होता है, बहुत शुभ माना जाता है। लेकिन भारतीय संसद से पचास कदम दूर 108-चर्च रोड का नया आवास भारत के तत्कालीन उप-राष्ट्रपति जगदीप धनकड़ के लिए &#8216;खास&#8217; नहीं बन पाया। इस भवन में 110 दिन रहने के बाद धनकड़ &#8216;पूर्व-उप-राष्ट्रपति&#8217; हो गए। वास्तु [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/dhankar-did-not-even-take-the-name-of-the-prime-minister-in-his-last-speech">&#8220;मैं ही सही हूँ, बाकी सब गलत है &#8211; यह लोकतंत्र नहीं है।​ यह अहंकार है। यह उद्दंडता है​&#8221;, अपने अंतिम भाषण में धनकड़ &#8216;प्रधानमंत्री का नाम तक नहीं लिया&#8221;</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>रायसीना पहाड़, नई दिल्ली : ​रुद्राक्ष के माला में 108 दाना होता है, बहुत शुभ माना जाता है। लेकिन भारतीय संसद से पचास कदम दूर 108-चर्च रोड का नया आवास भारत के तत्कालीन उप-राष्ट्रपति जगदीप धनकड़ के लिए &#8216;खास&#8217; नहीं बन पाया। इस भवन में 110 दिन रहने के बाद धनकड़ &#8216;पूर्व-उप-राष्ट्रपति&#8217; हो गए। वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में भारत के कोई भी उपराष्ट्रपति अपना आवास बनाने से पूर्व 108 बार सोचेंगे अवश्य। जिस सम्मान के साथ इस आवास में धनकड़ आये थे, शायद उस सम्मान के साथ वे शायद नहीं निकले। यह बात धनकड़ तो जानते ही होंगे, &#8216;वे&#8217; भी &#8216;भिज्ञ&#8217; होंगे ही। </strong></p>
<p><em>रायसीना पहाड़ पर अभी ​भारतीय राजनीति के इतिहास का पन्ना गरम है। वजह भी है &#8216;क्षणभर में ​उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ का &#8216;पूर्व-उपराष्ट्रपति&#8217; होना। स्वतंत्र भारत के राजनीतिक इतिहास में धनकड़ तीसरे उपराष्ट्रपति हैं जो अपने कार्यकाल के दौरान ही राष्ट्रपति को अपना त्यागपत्र सौंपे। वैसे रायसीना पहाड़ पर &#8216;अचानक की इस घटना पर शोध जारी है &#8211; क्या हुआ? क्यों ऐसा निर्णय लिए? किसने उन्हें मजबूर किया? देखने में तो ऐसा नहीं लग रहा था कि त्यागपत्र का कारण उनका स्वास्थ्य हो सकता है? कहीं को फोन पर संवाद आया और वे निर्णय ले लिए? या फिर कोई &#8216;ऊपर से अपना संवाद वाहक भेजकर उन्हें ऐसा करने का आदेश दिया? अब कौन उपराष्ट्रपति होंगे? कौन-कौन लोग प्रबल दावेदार हैं ? क्या बिहार की राजनीति पर कब्ज़ा करने के लिए नीतीश कुमार को 108-चर्च रोड में आवास दिया जाएगा? क्या आदित्य योगीनाथ को उत्तर प्रदेश से यहाँ लाया जायेगा? क्या जम्मू कश्मीर से मनोज सिन्हा को बुलाया जायेगा? क्या महिला सशक्तिकरण के खातिर उपराष्ट्रपति के पद पर वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण को पदस्थापित किया जायेगा? मंत्रिमंडल का भी विस्तार होने का समय है। </em></p>
<blockquote><p>कई लोग यह कह रहे हैं कि सेन्ट्रल विस्टा क्षेत्र में महान स्वतंत्रता सेनानी, स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षामंत्री, जामिया मिलिया इस्लामिया, इंडियन काउन्सिल फॉर कल्चरल रिलेशंस के अलावे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान​, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के संस्थापक भारत रत्न मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के नाम से अंकित 6​-मौलाना आज़ाद ​मार्ग से 108-चर्च रोड का आवास वास्तु के हिसाब से गंवारा नहीं हुआ धनकड़ साहब को । विगत 3 अप्रैल को उपराष्ट्रपति संसद भवन परिसर के पास चर्च रोड स्थित अपने नए आधिकारिक आवास में ​आये थे। उनका सचिवालय भी &#8216;उपराष्ट्रपति एन्क्लेव&#8217; में स्थानांतरित हो गया ​था ।​ खैर। </p></blockquote>
<p><strong>आर्यवर्तइण्डियननेशन.कॉम अनेकों लोगों से गुफ्तगू किया। &#8220;स्वास्थ्य&#8221; कोई कारण नहीं हो सकता है &#8220;देश के शीर्षस्थ पदों में राष्ट्रपति के बाद उप-राष्ट्रपति के पद से इस्तीफा देना। कुछ तो &#8220;विशेष&#8221; कारण है, अथवा &#8220;कोई तो विशेष व्यक्ति है&#8221; जिसे शायद कोई तो है रायसीना पहाड़ पर जिन्हें धनकड़ के शब्द हजम नहीं हुए। ​त्यागपत्र से पांच घंटे पहले धनकड़ 23 जुलाई, 2025 को एक दिवसीय दौरे पर जयपुर, राजस्थान जाएंगे​ की जानकारी पत्र सूचना कार्यालय दिया। अपनी इस​यात्रा के दौरान, ​उपराष्ट्रपति​ जयपुर​ स्थित​ रामबाग पैलेस में ​कन्फेडरेशन ऑफ़ रियर एस्टेट डेवेलपर्स ऑफ़ इंडिया, राजस्थान की ​नव-निर्वाचित समिति​ के सदस्यों से संवाद करेंगे।​ ​पांच घंटे के बीच में ही अचानक ऐसा क्या हुआ कि उन्हें अपने पद से त्यागपत्र देना पड़ा वह भी &#8220;स्वास्थ्य को प्राथमिकता&#8221; देकर। उनके पत्र में लिखा था, &#8220;स्वास्थ्य सेवा को प्राथमिकता देने और चिकित्सीय सलाह का पालन करने के लिए, मैं भारत के उपराष्ट्रपति पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देता हूँ।&#8221; लेकिन इन विगत दिनों में धनकड़, जैसा कि सूत्रों का कहना है, किसी भी चिकित्सक से नहीं मिले हैं और ना ही उन्हें सलाह दिया गया है &#8211; कम काम करें। </strong> </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-7.jpg"><img fetchpriority="high" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-7.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-6991" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-7.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-7-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-7-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-7-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-7-1536x1026.jpg 1536w" sizes="(max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p>जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा था: &#8220;मैं सही समय पर, अगस्त 2027 में, ईश्वरीय कृपा के अधीन, सेवानिवृत्त हो जाऊँगा।&#8221;​ 14वें उपराष्ट्रपति के रूप में श्री धनखड़ का पाँच वर्षीय कार्यकाल 10 अगस्त, 2027 को समाप्त होना था।​ भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए द्वारा उपराष्ट्रपति चुने जाने से पहले, उन्होंने 2019 से 2022 तक पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में कार्य किया। वैसे यह भी कहा जाता है कि धनखड़ की हाल ही में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में एंजियोप्लास्टी हुई थी।​ </p>
<p>वीवी गिरि और आर वेंकटरमन के बाद धनकड़ अपने कार्यकाल के दौरान इस्तीफा देने वाले भारत के तीसरे उपराष्ट्रपति हैं। हालाँकि, गिरि और वेंकटरमन ने राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था।​ लेकिन धनकड़ के साथ बात कुछ और है। नियमों के अनुसार, उपराष्ट्रपति पद के लिए अगले छह महीनों के भीतर चुनाव कराना आवश्यक है। अपने &#8216;बेबाक बयानों&#8217; के कारण कई बार सुर्खियां में रहे। उन पर राज्यसभा में पक्षपात का आरोप भी लगाया गया था। </p>
<blockquote><p>चलिए कुछ शब्दों पर शोध करते हैं। अपने त्यागपत्र से तक़रीबन 48-घंटा पहले धनकड़ राज्यसभा के आठवें बैच के प्रतिभागियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते कहा था: “हमें दृढ़ रहना होगा। हमें अपने दृष्टिकोण पर विश्वास करना होगा। लेकिन हमें दूसरे के दृष्टिकोण का भी सम्मान करना होगा। अगर हम अपने दृष्टिकोण पर विश्वास करते हैं और सोचते हैं, &#8216;मैं ही सही हूँ और बाकी सब गलत हैं&#8217; &#8211; यह लोकतंत्र नहीं है। यह हमारी संस्कृति नहीं है। यह अहंकार है। यह उद्दंडता है। हमें अपने अहंकार पर नियंत्रण रखना होगा। हमें अपनी उद्दंडता पर नियंत्रण रखना होगा। हमें यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि दूसरा व्यक्ति अलग दृष्टिकोण क्यों रखता है &#8211; यही हमारी संस्कृति है।&#8221;</p></blockquote>
<p>&#8220;मैं ही सही हूँ, बाकी सब गलत है &#8211; यह लोकतंत्र नहीं है। यह हमारी संस्कृति नहीं है। यह अहंकार है। यह उद्दंडता है। हमें अपने अहंकार पर नियंत्रण रखना होगा। हमें अपनी उद्दंडता पर नियंत्रण रखना होगा,&#8221; &#8211; ये शब्द किसे ख़राब लग सकता है?  यह गहन शोध का विषय है आखिर धनकड़ अपने मस्तिष्क में किस मान्यवर या माननीया की तस्वीर को रखकर कहे थे। इससे भी बड़ी बिडम्बना यह है कि अपने कार्यकाल के दौरान शायद ही कोई भाषण रहा होगा जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार और मोदी के कार्यों का उल्लेख नहीं किया हो। जिस प्रकार भाजपा या मोदी के मंत्रिमंडल के अन्य सदस्य करते हैं। लेकिन राज्यसभा के आठवें बैच के प्रतिभागियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह भाषण में &#8216;एक शब्द भी प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी अथवा उनकी सरकार के कार्यों के बारे में जिक्र नहीं किया।</p>
<figure id="attachment_6992" aria-describedby="caption-attachment-6992" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6.jpg"><img decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-6992" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6-1536x1026.jpg 1536w" sizes="(max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6992" class="wp-caption-text">उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ग्रहण करते</figcaption></figure>
<p>धनकड़ टेलीविजन पर चर्चा कार्यक्रमों में झलकती राजनीतिक दलों की कटुता की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा था: “प्रत्येक राजनीतिक दल का नेतृत्व परिपक्व होता है। सभी राजनीतिक दल, चाहे वह बड़ा हो या छोटा, राष्ट्रीय विकास के लिए प्रतिबद्ध होता है और इसलिए युवाओं का कर्तव्य है कि वे इस मानसिकता को सुनिश्चित करें। यह विचार प्रक्रिया सोशल मीडिया में आनी चाहिए और एक बार जब आपको हमारी टेलीविजन चर्चाएं सुखदायक, सकारात्मक और आकर्षक लगेंगी, तो कल्पना कीजिए कि कितना बड़ा बदलाव आ सकता है &#8211; बस एक पल के लिए ध्यान दीजिए।&#8221; इन शब्दों में देश के उपराष्ट्रपति होने के नाते &#8216;प्रत्येक राजनीतिक दाल का नेतृत्व परिपक्क होता है&#8217;, किसके तरफ &#8216;इशारा था&#8217;, और &#8216;किसे इन शब्दों से नसीयत देना चाहते थे&#8217;, जिसका उन्हें &#8216;पदत्याग&#8217; करने से करना पड़ा। कोई तो है, कुछ तो है।  </p>
<p><strong>इस महाशय या माननीया के तरफ शब्दों से इशारा करते धनकड़ ने कहा कि &#8220;हम आमतौर पर क्या देखते हैं? हम क्या सुनते हैं? क्या यह कानों को थका नहीं देता? हमारे कान तो थक गए हैं ना? भाई, ऐसा क्यों है? हम एक महान संस्कृति से आते हैं। हमारी विचारधारा का एक आधार है। हमारे विचारों में मतभेद हो सकते हैं &#8211; हमारे विचारों में भिन्नता हो सकती है &#8211; लेकिन हमारे दिलों में कटुता कैसे हो सकती है? हम भारतीय हैं। हमारी संस्कृति हमें क्या सिखाती है? अनंतवाद &#8211; अंतहीन संवाद में विश्वास। अनंतवाद का क्या अर्थ है? इसका अर्थ है चर्चा और बहस। चर्चा और बहस का क्या अर्थ है? इसका अर्थ है अभिव्यक्ति। और अभिव्यक्ति का अर्थ है &#8211; अपने विचारों को खुलकर कहें, लेकिन अपनी ही राय पर इतना आश्वस्त न हो जाएँ कि आप उस पर विश्वास कर लें और यह मान लें कि अही अंतिम और पूर्ण सत्य है। यह मत मानिए कि किसी और का दृष्टिकोण आपसे अलग हो ही नहीं सकता।”</strong></p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-5.jpg"><img decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-5.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-6995" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-5.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-5-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-5-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-5-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-5-1536x1026.jpg 1536w" sizes="(max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p>उसी उद्घाटन संवाद में धनकड़ ने कहा था कि “हममें मर्यादा और परस्पर सम्मान की पूर्ण भावना होनी चाहिए — और यही हमारी संस्कृति की मांग है। अन्यथा हमारी विचार प्रक्रिया में एकता नहीं हो सकती… विश्वास कीजिए, अगर राजनीतिक संवाद उच्च स्तर पर हो, अगर नेता अधिक बार मिलते-जुलते रहें, वे आपस में अधिक संवाद करें। वे व्यक्तिगत स्तर पर विचारों का आदान-प्रदान करें — तो राष्ट्र हित की पूर्ति होगी… हमें आपस में क्यों लड़ना चाहिए? हमें अपने भीतर शत्रुओं की तलाश नहीं करनी चाहिए। मेरी जानकारी के अनुसार, प्रत्येक भारतीय राजनीतिक दल और प्रत्येक सांसद अंततः एक राष्ट्रवादी है। वह एक राष्ट्र की भावना में विश्वास करता है। वह राष्ट्र की प्रगति में विश्वास करता है… लोकतंत्र कभी ऐसा नहीं होता कि एक ही पार्टी सत्ता में आए।&#8221;</p>
<p>इतना ही नहीं, वे आगे भी कहे थे: “मित्रों, एक समृद्ध लोकतंत्र निरंतर कटुता का वातावरण सहन नहीं कर सकता&#8230; जब आप राजनीतिक कटुता, राजनीतिक वातावरण को अलग दिशा में पाते हैं, तो आपका मन विचलित हो जाता होगा। मैं देश के सभी लोगों से आग्रह करता हूँ कि राजनीतिक तापमान को कम किया जाए। राजनीति टकराव नहीं है, राजनीति कभी भी एकतरफा नहीं हो सकती। अलग-अलग राजनीतिक विचार प्रक्रियाएँ होंगी, लेकिन राजनीति का अर्थ है एक ही लक्ष्य को प्राप्त करना, लेकिन किसी न किसी तरह अलग-अलग माध्यमों से। मेरा दृढ़ विश्वास है कि इस देश में कोई भी व्यक्ति राष्ट्र के विरुद्ध नहीं सोचेगा। मैं किसी राजनीतिक दल को भारत की अवधारणा के विरुद्ध नहीं देख सकता। उनके अलग-अलग माध्यम, अलग-अलग सोच हो सकती है; लेकिन उन्हें एक-दूसरे के साथ चर्चा करना, एक-दूसरे के साथ संवाद करना सीखना होगा। टकराव कोई रास्ता नहीं है। जब हम आपस में लड़ते हैं, यहाँ तक कि राजनीतिक क्षेत्र में भी, तो हम अपने दुश्मन को मजबूत कर रहे होते हैं। हम उन्हें हमें विभाजित करने के लिए पर्याप्त सामग्री दे रहे होते हैं। इसलिए, युवा प्रतिभाओं एक बड़ा दबाव समूह है। आपके पास बहुत मजबूत शक्ति है। आपकी विचार प्रक्रिया राजनेता, आपके सांसद, आपके विधायक, आपके पार्षद को नियंत्रित करेगी। राष्ट्र के बारे में सोचें। विकास के बारे में सोचें।&#8221;</p>
<figure id="attachment_6993" aria-describedby="caption-attachment-6993" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6-1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6-1.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-6993" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6-1.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6-1-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6-1-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6-1-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-6-1-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6993" class="wp-caption-text">पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में शपथ ग्रहण करते</figcaption></figure>
<p><strong>एक उपराष्ट्रपति होने के नाते अगर उन्होंने इन शब्दों का प्रयोग करते कहा कि &#8220;जब राष्ट्रीय हित की बात हो तो हमें राजनीति नहीं करनी चाहिए, जब विकास की बात हो तो हमें राजनीति नहीं करनी चाहिए, जब राष्ट्र के विकास की बात हो तो हमें राजनीति नहीं करनी चाहिए। जब राष्ट्रीय सुरक्षा, राष्ट्रीय चिंता का विषय हो तो हमें राजनीति नहीं करनी चाहिए ​. &#8220;मैं राजनीतिक जगत के सभी लोगों से अपील करता हूँ कि कृपया परस्पर सम्मान रखें। कृपया टेलीविज़न पर या किसी भी पार्टी के नेतृत्व के विरुद्ध अभद्र भाषा का प्रयोग न करें। यह संस्कृति हमारी सभ्यता का सार नहीं है। हमें अपनी भाषा का ध्यान रखना होगा&#8230; व्यक्तिगत आक्षेपों से बचें। मैं राजनेताओं से अपील करता हूँ। अब समय आ गया है कि हम राजनेताओं को गालियाँ देना बंद करें। जब विभिन्न राजनीतिक दलों में लोग दूसरे राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं को गालियाँ देते हैं, तो यह हमारी संस्कृति के लिए अच्छा नहीं है।&#8221;</strong></p>
<p>अंत में, धनकड़ का कहना था की &#8220;भारत ऐतिहासिक रूप से किस लिए जाना जाता है? संवाद, वाद-विवाद, विचार-विमर्श। आजकल, हम संसद में यह सब होते नहीं देखते। मुझे लगता है कि आगामी सत्र एक महत्वपूर्ण सत्र होगा। मुझे पूरी आशा है कि सार्थक चर्चाएँ और गंभीर विचार-विमर्श होंगे जो भारत को नई ऊँचाइयों पर ले जाएँगे। ऐसा नहीं है कि सब कुछ सही है। हम कभी भी ऐसे समय में नहीं रहेंगे जहाँ सब कुछ सही हो। किसी भी समय कुछ क्षेत्रों में सदैव कुछ कमियाँ रहेंगी। इसके साथ ही सदैव सुधार की गुंजाइश है। अगर कोई किसी चीज़ में सुधार का सुझाव देता है, तो वह निंदा नहीं है। यह आलोचना नहीं है। यह केवल आगे के विकास के लिए एक सुझाव है। इसलिए, मैं राजनीतिक दलों से रचनात्मक राजनीति करने की अपील करता हूँ। और जब मैं यह कहता हूँ, तो मैं अपील करता हूँ &#8211; सत्ता पक्ष, सत्तारूढ़ दल और विपक्ष सभी दलों से अपील करता हूँ।”</p>
<figure id="attachment_6994" aria-describedby="caption-attachment-6994" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-8.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-8.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-6994" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-8.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-8-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-8-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-8-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/07/D-8-1536x1026.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6994" class="wp-caption-text">जगदीप धनखड़ 06 जून, 2023 को उप-राष्ट्रपति निवास, नई दिल्ली में भारतीय रक्षा संपदा सेवा (आईडीईएस) के परिवीक्षाधीन अधिकारियों से बातचीत करते हुए।</figcaption></figure>
<p>​ज्ञातव्य हो कि इससे पहले न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के आवास पर मिले जले हुए नकदी के बंडलों के मामले में उन्हें हटाने के लिए विपक्ष द्वारा प्रायोजित एक नोटिस उन्हें सौंपा गया था, और उन्होंने सदन में इसका उल्लेख किया और महासचिव से आगे आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब सत्तारूढ़ गठबंधन ने लोकसभा में इसी तरह का एक नोटिस प्रायोजित किया था और विपक्ष को भी इसमें शामिल किया था। </p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/dhankar-did-not-even-take-the-name-of-the-prime-minister-in-his-last-speech">&#8220;मैं ही सही हूँ, बाकी सब गलत है &#8211; यह लोकतंत्र नहीं है।​ यह अहंकार है। यह उद्दंडता है​&#8221;, अपने अंतिम भाषण में धनकड़ &#8216;प्रधानमंत्री का नाम तक नहीं लिया&#8221;</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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