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	<title>darbhangaraj Archives - आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</title>
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	<description>आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</description>
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		<title>बनैली के राजाओं के वंशज तत्कालीन चौधरी-वंश के जमींदारों की भूमिका को कभी नहीं बिसरे, आज भी नहीं, विशेषकर टंकनाथ चौधरी को🙏(भाग-8)</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/he-descendants-of-banaily-raj-never-forgot-tanknath-chaudhary</link>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 14 Oct 2022 04:21:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
		<category><![CDATA[banaily]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>पूर्णियां / बनैली / चम्पानगर / दरभंगा : साल 1938 था और देश में बिहार और बंगाल के नेताओं के बीच कमर-कस उठापटक हो रहा था। बंगाल के अग्रणी नेता थे सुभाष चंद्र बोस। सुभाष बोस को बिहार के नेताओं के साथ ठन गई थी। दरभंगा के महाराजाधिराज डॉ सर कामेश्वर सिंह के अतिरिक्त कोई [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>पूर्णियां / बनैली / चम्पानगर / दरभंगा :  साल 1938 था और देश में बिहार और बंगाल के नेताओं के बीच कमर-कस उठापटक हो रहा था। बंगाल के अग्रणी नेता थे सुभाष चंद्र बोस। सुभाष बोस को बिहार के नेताओं के साथ ठन गई थी। दरभंगा के महाराजाधिराज डॉ सर कामेश्वर सिंह के अतिरिक्त कोई नहीं था जो बिहार के नेताओं और सुभाष बोस के बीच मध्यस्थता कर दोनों के चेहरों पर मुस्कान ला सकें। महाराजा डॉ सर कामेश्वर सिंह वह सभी पाठ पढ़े थे, जो तत्कालीन भारतीय समाज, बिहार के समाज और मिथिला के समाज के उन्नयन के लिए आवश्यक था। </strong></p>
<p>उधर, भारतीय राजनीतिक मानचित्र पर आज़ादी हासिल करने के लिए इन्किलाब-जिंदाबाद के नारे बुलंद हो रहे थे। तभी कलकत्ता के श्री एच.एन.गुहा रे को एक बात सूझी &#8211; क्यों न महाराजाधिराज दरभंगा को बिहार के नेताओं और सुभाष बोस के बीच की खाई को समतल करने के लिए लाया जाए । उन दिनों बिहार का नेता का वास्तविक अर्थ &#8216;देश का नेता&#8221; होना होता था, आज जैसा नहीं कि दो बार नुक्कड़ पर भाषण दे दिए और चार घुटने कद के नेता के साथ तस्वीरें खिंचा लिए और सोशल मीडिया पर अपने-अपने प्रोफ़ाइल&#8217; में &#8216;पॉलिटिशियन&#8217;, &#8216;पब्लिक फिगर&#8217; दर्ज कर दिए। आज तो सभी बिहारी नेता अपना-अपना मुंह फाड़े प्रदेश के पार्टी प्रमुख के भवन के प्रवेश द्वार के तरफ, उनकी गाड़ी के तरफ देखकर मन गदगद कर लेते हैं। अपनी सोच, समाज और राष्ट्र के प्रति अपना कर्तव्य बोध को पटना के गांधी मैदान में त्यागकर, सामाजिक सरोकार को तिलांजलि देकर, स्वहित में कारोबार करते हैं। अगर ऐसा नहीं होता तो आज बिहार का हश्र भी ऐसा नहीं होता। अभी क्या हुआ है, धीरज रखें &#8211; आने वाला समय बदतर होने वाला है।</p>
<p>बहरहाल, उस दिन बैसाख का अंतिम दिन था। श्री एच.एन. गुहा रे दिनांक 14 अप्रैल, 1938 को दरभंगा के महाराजाधिराज डॉ सर कामेश्वर सिंह को एक पत्र लिखे। पत्र में लिखा था:</p>
<p><strong>&#8220;Your Highness,<br />
My respectful Pronam to your Highness on the last day of Baishakh which falls on to-day. I pray to God for your Highness &#8216;long, healthy and peaceful life.&#8217;</p>
<p>I saw Boses &#8211; they have already spoken about the compromise to Behar leaders. Mr. Sarat Bose, who will proceed to Darjeeling for some time, asked me to get a copy of the terms of Compromise so that he may send me, with a letter of introduction to Behar leaders &#8211; if you approve of it kindly instruct.Awaiting the pleasure of hearing from you soon.</p>
<p>I remain,<br />
Your Highness&#8217;<br />
Most obedient servant&#8221;</strong></p>
<figure id="attachment_4590" aria-describedby="caption-attachment-4590" style="width: 1220px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/Letter-Guha.jpeg"><img fetchpriority="high" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/Letter-Guha.jpeg" alt="" width="1220" height="1600" class="size-full wp-image-4590" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/Letter-Guha.jpeg 1220w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/Letter-Guha-229x300.jpeg 229w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/Letter-Guha-781x1024.jpeg 781w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/Letter-Guha-768x1007.jpeg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/Letter-Guha-1171x1536.jpeg 1171w" sizes="(max-width: 1220px) 100vw, 1220px" /></a><figcaption id="caption-attachment-4590" class="wp-caption-text">श्री एच.एन. गुहा रे दिनांक 14 अप्रैल, 1938 को दरभंगा के महाराजाधिराज डॉ सर कामेश्वर सिंह को एक पत्र लिखे।</figcaption></figure>
<p>इस पत्र को प्रेषित किये चार साल बीत गए थे। उस दिन 11 अप्रैल था। शायद सं 1942 का साल रहा होगा। वह दिन दरभंगा राज और महाराजाधिराज डॉ सर कामेश्वर सिंह के लिए ऐतिहासिक था। श्री सुभाष चंद्र बोस के परिवार के सदस्यगण दरभंगा आये थे, महाराजाधिराज से मिलने। यह बात मैं नहीं, दस्तावेज कहता है। महाराजाधिराज की बड़ी पत्नी अपनी डायरी में इस बात का जिक्र की हैं। महारानी अपने जीवन के अंतिम समय तक अपने दिन चर्चा के बारे में लिखती थी। खैर। </p>
<p>इस डायरी में लिखे शब्दों के महत्व को दरभंगा राज की आज की पीढ़ी नहीं समझेगी &#8211; अगर समझती तो आज महाराजाओं की कीर्तियों का दस्तावेज, भारत के समाज में उनकी गाथाओं की गरिमा यूँ ही मिट्टी पलीद नहीं होता। लेकिन दरभंगा राज से दूर मिथिला का पूर्वी इलाके के तत्कालीन राजाओं की आज की पीढ़ियां दस्तावेजों का महत्व समझती है, अपने पूर्वजों की गाथाओं को पुरातत्व स्वरुप रखने की महत्ता समझती है । क्या महत्व हैं उन क्षणों का, अवसरों का जब इतिहास लिखा गया था उनके पूर्वजों के द्वारा। </p>
<figure id="attachment_4591" aria-describedby="caption-attachment-4591" style="width: 1126px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/rsz_1dairy.jpeg"><img decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/rsz_1dairy.jpeg" alt="" width="1126" height="1059" class="size-full wp-image-4591" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/rsz_1dairy.jpeg 1126w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/rsz_1dairy-300x282.jpeg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/rsz_1dairy-1024x963.jpeg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/rsz_1dairy-768x722.jpeg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/rsz_1dairy-24x24.jpeg 24w" sizes="(max-width: 1126px) 100vw, 1126px" /></a><figcaption id="caption-attachment-4591" class="wp-caption-text">महाराजाधिराज की बड़ी पत्नी अपनी डायरी में इस बात का जिक्र की हैं।</figcaption></figure>
<p>यह बात यहाँ इसलिए उद्धृत कर रहा हूँ कि पिछले दिनों साथ-सत्तर के दशक में जब मैं अपने बाबूजी के साथ पटना के मशहूर प्रकाशक और पुस्तक विक्रेता &#8216;नोवेल्टी एंड कंपनी&#8217; में कार्य करता था, दूकान के लोगों के लिए, ग्राहकों के लिए &#8216;पान&#8217;, &#8216;चाय&#8217; बीड़ी&#8217; &#8216;सिगरेट&#8217; या अन्य सामान दौड़कर लाने वाला एक छोटा बच्चा था। उस ज़माने में श्री योगनाथ झा (अब डाक्टर योगनाथ झा) भी वहां कार्य करते थे। विगत दिनों अपने एक ऐतिहासिक कार्य के सिलसिले में घर आये।  </p>
<p>डॉ. योगनाथ झा मिथिला के श्रोत्रिय समाज से सम्बन्धी जो आज मिथिला में हैं भी या फिर उनकी दूसरी, तीसरी, चौथी, पांचवी, पीढ़ियां एक अथवा अनेक कारणों से अपने मूल-स्थान से विस्थापित होकर कहीं अन्यत्र भी चले गए, उनके लिए &#8220;वंशावली&#8221; तैयार किये &#8211; बेहतरीन दस्तावेज है, ऐतिहासिक है । दो भागों में प्रकाशित (प्रथम भाग: 384 पृष्ठ और द्वितीय भाग: 428 पृष्ठ) यह ऐतिहासिक वंशावली इस समुदाय के लोगों के लिए महत्वपूर्ण इसलिए भी है क्योंकि 812 पृष्ठों में मिथिला के सभी उच्च कोटि के श्रोत्रियों का यह जीवंत किताब है, उनका &#8216;वजूद&#8217; इस किताब में समेटा हुआ है। </p>
<p>ऐसी कोशिश थी कि अगर मिथिला के सभी श्रोत्रिय ब्राह्मण इस पुस्तक को धरोहर स्वरुप भी अपने घरों में रखें तो आज ही नहीं आने वाली पीढ़ियों को यह मालूम रहेगा कि &#8216;वे कौन है&#8217;, उनकी उत्पत्ति कहाँ से हुई है।&#8217; डॉ योगनाथ झा, दरभंगा के मिश्रीगंज, पटेल चौक (कबड़ा घाट) में रहते हैं। परन्तु, आधुनिक पीढ़ी के लोगों ने उस पुस्तक की महत्ता को &#8216;नजर-अंदाज&#8217; कर दिए और यह कहते भी नहीं थके कि &#8216;आज के इस वैज्ञानिक युग में वंशावली का क्या काम?&#8217; &#8216;आज तो इंटरनेट पर विवाह से सम्बंधित अनेकानेक साइट्स हैं। वंशावली की आवश्यकता तो विवाह-काल में ही है, इत्यादि-इत्यादि ऐसी बातों का जिक्र किये जो &#8216;अपच्य&#8217; था। खैर। हम चाहे आज ही नहीं, आने वाले समय में भी कितने ही उत्कर्ष पर पहुँच जायँ, हमें अपनी उत्पत्ति का ज्ञान होना नितांत आवश्यक है, यह मेरी सोच है। </p>
<figure id="attachment_4592" aria-describedby="caption-attachment-4592" style="width: 2560px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG_6939-scaled.jpg"><img decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG_6939-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1920" class="size-full wp-image-4592" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG_6939-scaled.jpg 2560w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG_6939-300x225.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG_6939-1024x768.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG_6939-768x576.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG_6939-1536x1152.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG_6939-2048x1536.jpg 2048w" sizes="(max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></a><figcaption id="caption-attachment-4592" class="wp-caption-text">मिथिला समाज को डॉ. योगनाथ झा का ऐतिहासिक योगदान</figcaption></figure>
<p>बहरहाल, दस्तावेजों को खंघालने पूर्णियां चलते हैं मालद्वार-राजौर यानी चौधरी वंश के बारे में जाने के लिए, वह टंकनाथ चौधरी जिन्होंने मिथिला और मैथिली को साहित्य के मामले में एक नई दिशा दिए बाबू कीर्त्यानंद सिंह और बाबू कालिकानन्द सिंह से मिलकर । </p>
<p><strong>बनैली राज के गिरिजानंद सिंह</strong> कहते हैं कि &#8220;महीपति झा नामक एक मैथिल पंडित के पुत्र रामलोचन, मालद्वार के चौधरी-वंश के संस्थापक हुए । प्राचीन मालद्वार के अंतर्गत् पूर्वी दिनाजपुर का रजौर नामक एक परगना, जो अब बांग्लादेश में है, रामलोचन चौधरीको मालद्वार के तत्कालीन शासक से प्राप्त हुआ और उन्होंने वहीं अपना मुख्यालय बनाया जो रामगंज के नाम से जाना जाता था। रामलोचन ने राज सूचक चौधरी पद ग्रहण किया और एक स्थानीय राजा के रूप में जाने गये। रजौर की गद्दी पर बैठने के साथ ही वे मालद्वार के प्राचीन ‘श्याम राय’ के मंदिर के सेवायत-पद पर भी आसीन हुए । उनके पुत्र राजा दुर्गा प्रसाद और पौत्र राजा बुद्धिनाथ चौधरी के समय में इस ज़मीन्दारी का काफी विस्तार हुआ। सौरिया राज्य जिस समय पतनोन्मुख हुआ उस समय बुद्धिनाथ ने सूर्यास्त कानून के माध्यम से उसके पूर्वी भाग का अधिकांश खरीद लिया जिसके फलस्वरूप पूर्णियाँ जिले में मालद्वार इस्टेट की मिल्कियत बढ़ कर 23 वर्ग मील हो गई। इस भाग की देखरेख के लिये कदवा के निकट एक कचहरी स्थापित की गई जिसका नाम दुर्गागंज रखा गया।&#8221; </p>
<figure id="attachment_4557" aria-describedby="caption-attachment-4557" style="width: 974px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/Story4.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/Story4.jpg" alt="" width="974" height="1431" class="size-full wp-image-4557" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/Story4.jpg 974w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/Story4-204x300.jpg 204w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/Story4-697x1024.jpg 697w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/Story4-768x1128.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 974px) 100vw, 974px" /></a><figcaption id="caption-attachment-4557" class="wp-caption-text">गिरिजानंद सिंह</figcaption></figure>
<p>गिरिजानंद सिंह आगे कहते हैं कि &#8220;बुद्धिनाथ ने शालमारी के पास, गोरखपुर धाम का शिव मंदिर और तेघरा में काली मंदिर की स्थापना की। बुद्धिनाथ चौधरी के दो पुत्र हुए &#8211;  छत्रनाथ चौधरी और टंकनाथ चौधरी । टंकनाथ चौधरी रामगंज में रहे और छत्रनाथ चौधरी ने दुर्गागंज में अपना मुख्यालय बनाया। रामगंज में टंकनाथ चौधरी ने एक इंगलिश हाइ स्कूल की स्थापना की जिसमें दो सौ लड़कों के लिये एक छात्रावास का भी निर्माण किया गया। वे 1921 ई0 में विधान परिषद में जमींदारों के प्रतिनिधि सदस्य के रूप में चुने गये। कहते हैं कि 18 नवम्बर, 1925 को सरकार ने टंकनाथ चौधरीको ‘राजा’ की पदवी से सम्मानित किया। राजा टंकनाथ चौधरी लगातार सात वषों तक दिनाजपुर नगरपालिका के कमिश्नर और लगातार पंद्रह वषों तक दिनाजपुर जिला परिषद के चेयरमैन रहे। अपने मित्र, कुमार कालिकानंद सिंह और राजा कीर्त्यानंद सिंह के साथ मिलकर उन्होंने जिस प्रकार कलकत्ता विश्वविद्यालय में मैथिली भाषा की पढ़ाई आरंभ करवायी और उसका पोषण करने की दिशा में रजौर चेयर की स्थापना की वह सदैव प्रशंसनीय रहेगा।</p>
<p>आम जन-जीवन की उन्नति में हमेशा चौधरी-वंशका योगदान रहा जिसके साक्ष्य के रूप में इनके द्वारा स्थापित, न केवल दुर्गागंज का उच्च-विद्यालय बल्कि दुर्गागंज, सोनैली और चांदपुर के मघ्य- विद्यालय और सोनैली का गोशाला विद्यमान है। इतना ही नहीं, दुर्गागंज और सोनैली के अस्पताल भी उन्हीं की देन है। सन 1947 ई0 के हिन्दू-मुसलमान दंगों के समय रामगंज बुरी तरह प्रभावित हुआ और राजा टंकनाथ चौधरी के वंशज, पुर्वी पाकिस्तान में अपनी ज़मीन्दारी, सारी धन संपदा और अपने वंश के अधिष्ठाता श्याम-राय को वहीं छोड़कर, भारत में अपने कचहरी (सोनैली) में जा बसने पर बाध्य हुए । </p>
<p>इसी तरह, सूर्यपुर उर्फ़ सूरजपुर की जमींदारी सैयद जमींदारी सूर्यपुर उर्फ़ सुरजापुर परगने की जमींदार सैयद खान दस्तूर को मुग़ल बादशाह हुमायुँ से, शेरशाह के विरुद्ध मदद करने के पारितोषिक के रूप में मिली थी। दस्तूर खान के बाद उनके दामाद सैयद राय खान ने ज़मीन्दारी संभाली। दस्तूर के नवासे सैयद मुहम्मद जलालुद्दीन खान ने पूर्णियाँ की उत्तरी सीमावर्ती इलाकों से नेपाली भोटियों को मार भगाया और इस बहादुरी के एवज में कहलगाँव परगना के साथ नवाब का खिताब भी हासिल किया। बाद में उन्हीं के एक नौकर ने उनकी हत्या कर दी। </p>
<figure id="attachment_4594" aria-describedby="caption-attachment-4594" style="width: 2000px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/Bananily1.png"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/Bananily1.png" alt="" width="2000" height="1225" class="size-full wp-image-4594" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/Bananily1.png 2000w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/Bananily1-300x184.png 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/Bananily1-1024x627.png 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/Bananily1-768x470.png 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/Bananily1-1536x941.png 1536w" sizes="auto, (max-width: 2000px) 100vw, 2000px" /></a><figcaption id="caption-attachment-4594" class="wp-caption-text">चम्पानगर ड्योढ़ी</figcaption></figure>
<p>एक मत के अनुसार, जलालगढ़ का किला इसी जलालुद्दीन का बनवाया हुआ है। जलाल के बाद मोहिउद्दीन और उनके बहनोई नूर मुहम्मद, नवाब हुये। नूर मुहम्मद के मरने के बाद उनके बेटे सुल्तान, रौशन, रशीद और मकसूद ने क्रमशः गद्दी संभाली। मकसूद के बड़े बेटे जैनुद्दीन मुहम्मद के निसंतान मरने के बाद उनके दोनों भाइयों में उत्तराधिकार को लेकर झगड़ा हुआ मगर निपटारा न हो सका। दोनों चल बसे। अतः उनके दीवान मुहम्मद सैयद को, जमींदारी और कानूनगो दोनों सौंप दी गई। मुहम्मद सैयद के वारिस हुये सैयद मुहम्मद ज़लील। राजस्व चुकाने से इनकार करने की वजह से पूर्णियां के फौजदार सौलत जंग ने चढ़ाई करके ज़लील को गिरफ्तार कर लिया और उनकी ज़मीन्दारी भी छीन ली लेकिन गुलाम हुसैन की कोशिशों के फलस्वरूप ‘सौलत जंग’ के वारिस ‘शौकत जंग’ ने 1756 ई0 में ज़लील के बेटे, सैयद फ़क्रुद्दीन हुसैन को परगना लौटा दिया। सैयद फ़क्रुद्दीन हुसैन ने 1793 ई0 में लाॅर्ड काॅर्नवालिस के स्थायी प्रबंध के अंतर्गत अपने इलाकों का ज़मीन्दारी बंदोबस्त करवाया। </p>
<p>फ़क्रुद्दीन हुसैन के दो बेटों में बड़े, दीदार हुसैन का वंश खगड़ा-नवाब घराने के नाम से मशहूर हुआ। फ़क्रुद्दीन के छोटे बेटे अकबर हुसैन के निःसंतान होने की वजह से उनकी विधवा ने अपने भाई को ही वारिस बनाया। इनके वंशज किशनगंज-नवाब घराने के नाम से जाने गये। लेकिन किशनगंज वालों ने अपनी सारी संपदा गॅवा दी, जिसका मुख्य अंश नजरगंज के धरमचं लाल और उनके बेटे राजा पी0 सी0 लाल ने खरीदा। बाद में खगड़ा के नवाबों से वैवाहिक संबंध स्थापित करने के फलस्वरूप किशनगंज वाले एक बार फिर सुरजापुर परगने के हिस्सेदार बने। खगड़ा घराने में नवाब सैयद अता हुसैन, और किशनगंज घराने में नवाब सैयद दिलावर रज़ा प्रमुख हुए ।</p>
<p>गिरिजानंद सिंह आगे कहते हैं कि &#8220;महीपति झा नामक एक मैथिल पंडित के पुत्र रामलोचन, मालद्वार के चौधरी-वंश के संस्थापक हुए। प्राचीन मालद्वार के अंतर्गत् पूर्वी दिनाजपुर का रजौर नामक एक परगना, जो अब बांग्लादेश में हैं, रामलोचन चौधरी को मालद्वार के तत्कालीन शासक से प्राप्त हुआ और उन्होंने वहीं अपना मुख्यालय बनाया जो रामगंज के नाम से जाना जाता था। रामलोचन ने राज सूचक चौधरी पद ग्रहण किया और एक स्थानीय राजा के रूप में जाने गये।</p>
<p>सिंह जी के अनुसार, &#8220;रजौर की गद्दी पर बैठने के साथ ही वे मालद्वार के प्राचीन ‘श्याम राय’ के मंदिर के सेवायत-पर आसीन हुए । उनके पुत्र राजा दुर्गाप्रसाद और पौत्र राजा बुद्धिनाथ चौधरी के समय में इस ज़मीन्दारी का काफी विस्तार भी हुआ।सौरिया राज्य जिस समय पतनोन्मुख हुआ उस समय बुद्धिनाथ ने सूयास्त कानून के माध्यम से उसके पूर्वी भाग का अधिकांश भाग खरीद लिया जिसके फलस्वरूप पूर्णियाँ जिले में मालद्वार इस्टेट की मिल्कियत बढ़ कर 23 वर्गमील हो गई।  इस भाग की देखरेख के लिए कदवा के निकट एक कचहरी स्थापित की गई जिसका नाम दुर्गागंज रखा गया। बुद्धिनाथ चौधरी ने  शालमारी के पास, गोरखपुर धाम का शिव मंदिर और तेघरा में काली मंदिर की स्थापना की। </p>
<figure id="attachment_4595" aria-describedby="caption-attachment-4595" style="width: 1087px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/Tnath.png"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/Tnath.png" alt="" width="1087" height="1411" class="size-full wp-image-4595" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/Tnath.png 1087w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/Tnath-231x300.png 231w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/Tnath-789x1024.png 789w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/Tnath-768x997.png 768w" sizes="auto, (max-width: 1087px) 100vw, 1087px" /></a><figcaption id="caption-attachment-4595" class="wp-caption-text">राजा टंकनाथ चौधरी</figcaption></figure>
<p>बुद्धिनाथ चौधरीके दो पुत्र हुए &#8211;  <strong>छत्रनाथ चौधरी और टंकनाथ चौधरी</strong> । टंकनाथ चौधरी रामगंज में रहे और छत्रनाथ चौधरी ने दुर्गागंज में अपना मुख्यालय बनाया। रामगंज में टंकनाथ चौधरी ने एक इंगलिश हाइ स्कूल की स्थापना की जिसमें दो सौ लड़कों के लिए एक छात्रावास का भी निर्माण किया गया। वे 1921 ई0 में विधान परिषद में जमींदारों के प्रतिनिधि सदस्य के रूप में चुने गये। सरकार ने 18 नबम्बर, 1925 को टंकनाथ चौधरीको ‘राजा’ की पदवी से सम्मानित किया। राजा टंकनाथ चौधरी लगातार सात वषों तक दिनाजपुर नगरपालिका के कमिश्नर और लगातार पंद्रह वषों तक दिनाजपुर जिला परिषद् के चेयरमैन रहे। अपने मित्र, कुमार कालिकानंद सिंह और राजा कीर्त्यानंद  सिंह के साथ मिलकर उन्होंने जिस प्रकार कलकत्ता विश्वविद्यालय में मैथिली भाषा की पढ़ाई आरंभ करवायी और उसका पोषण करने की दिशा में रजौर चेयर की स्थापना की वह सदैव प्रशंसनीय रहेगा।</p>
<p>गिरिजानंद सिंह के अनुसार, &#8220;आम जन-जीवन की उन्नति में हमेशा चौधरी-वंश का योगदान रहा जिसके साक्ष्य के रूप में इनके द्वारा स्थापित, न केवल दुर्गागंज का उच्च-विद्यालय बल्कि दुर्गागंज, सोनैली और चांदपुर के ममध्य-विद्यालय और सोनौली का गोशाला गोशाला विद्यमान है। इतना ही नहीं, दुर्गागंज और सोनैली के अस्पताल भी उन्हीं की दें है। सं 1947 में सामुदायिक दंगों के समय रामगंज बुरी तरह प्रभावित हुआ और राजा टंकनाथ चौधरी के वंशज, पुर्वी पाकिस्तान में अपनी जमींदारी, सारी धन संपदा और अपने वंश के अधिष्ठाता श्याम-राय को वहीं छोड़कर, भारत में अपने कचहरी सोनैली में जा बसने पर बाध्य हुए । </p>
<figure id="attachment_4596" aria-describedby="caption-attachment-4596" style="width: 2000px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/Thakur-gaaon-Topnknath.jpeg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/Thakur-gaaon-Topnknath.jpeg" alt="" width="2000" height="1147" class="size-full wp-image-4596" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/Thakur-gaaon-Topnknath.jpeg 2000w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/Thakur-gaaon-Topnknath-300x172.jpeg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/Thakur-gaaon-Topnknath-1024x587.jpeg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/Thakur-gaaon-Topnknath-768x440.jpeg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/Thakur-gaaon-Topnknath-1536x881.jpeg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2000px) 100vw, 2000px" /></a><figcaption id="caption-attachment-4596" class="wp-caption-text">राजा टंकनाथ चौधरी का किला (वर्तमान में) फोटो: Robiulthg</figcaption></figure>
<p>बनैली राज के आज की पीढ़ी के वंशजों को अपने राज, अपने पूर्वजों, अपने राज्य की प्रजाओं, गाँव, कस्बों, तत्कालीन जमींदारों, समाज में उनका योगदान और अन्य बातें एक राज की सामाजिक-आर्थिक-सांस्कृतिक वंशावली जैसा धरोहर के रूप में सुरक्षित और संरक्षित है। जबकि दरभंगा राज, जिसने मिथिला के पूर्वी हिस्से को, वहां के लोगों को महत्व नहीं दिया, उम्मीद नहीं है कि आज की पीढ़ी को अपने पूर्वजों द्वारा किये कार्यों को। &#8230;. </p>
<p>इसी तरह, गिरिजानंद सिंह आगे कहते हैं कि &#8220;पूर्णियाँ सिटी के नज़रगंज इस्टेट के मालिक मूलतः महाजन थे। ये ‘कोठी वाले नकछेदलाल और महेशलाल’ के नाम से जाने जाते थे। 19वीं सदी के उत्तरार्ध में बाबू नकछेदलाल ने असजाह और श्रीपुर के कुछ अंश खरीदे और उनके पुत्र बाबू धर्मचंद लाल चौधरीने अपनी ज़मीन्दारी का नाम ‘नज़रगंज’ रखा। धर्मचंद लाल चौधरी ने बाबू प्रताप सिंह से हवेली परगना खरीद कर इस्टेट का विस्तार किया। बाद में उन्होंने सुरजापुर एवं पोआखाली के कुछ अंश भी हासिल किये। पूर्णियाँ के कलक्टर के सुझाव पर नकछेदलाल ने सौरा नदी पर एक पक्का पुल बनवाया जो पूर्णियाँ सिटी को नव निर्मित पूर्णियाँ शहर से जोड़ती थी। </p>
<p>गिरिजानंद बाबू आगे कहते हैं कि &#8220;सन 1899 ई0 में धर्मचंद लाल चौधरी की मृत्यु के पश्चात् उनके एकमात्र पुत्र पृथ्वीचंद लाल चौधरी मालिक हुए। ब्रिटिश सरकार द्वारा ‘राजा’ की पदवी से नवाज़े जाने के आद वे ‘राजा पी.सी.लाल चौधरी’ के नाम से प्रसिद्ध हुये। वे पूर्णियाँ पोलो क्लब के अध्यक्ष थे। गुलाब-बाग का मेला उन्हीं की देन है। आम जनता के मनोरंजनार्थ लगवाया गया यह मेला, लगभग सौ वषों तक इस प्रान्त के सबसे आकर्षक मेले में से एक माना जाता था। राजा पी.सी. लाल चौधरी, सी.बी.ई. ने नज़रगंज में अपने नाम पर एक हाइ-स्कूल खुलवाया और पूर्णियाँ रेलवे-स्टेशन के समीप, अपनी पहली पत्नी, भागवती प्रसाद चौधराइन की स्मृति में एक धर्मशाला भी बनवाया। इतना ही नहीं, पूर्णियाँ अस्पताल के भवन निर्माण में उन्होंने प्रचुर आर्थिक सहयोग दिया था। पृथ्वीचंद ने नज़रगंज को कई सुंदर इमारतों और उद्यानों से सजाया था जिनके भग्नावषेष आज भी मौजूद हैं। राजा की कुलदेवी, त्रिपुरसुंदरी का मंदिर आज भी विद्यमान है परंतु उसमें स्थापित अष्टधातु की मूर्ति की, कुछ वर्ष पूर्व चोरी हो गई।&#8221;</p>
<p>गिरिजानंद बाबू के अनुसार, &#8220;पुणियाँ में ब्रिटिश शासन कायम होने के कुछ ही महीनों के भीतर कई यूरोपियन यहाँ आकर रामबाग नामक मुहल्ले में बस गये। यहाँ पर एक चर्च और पादरियों के रहने के लिये कुछ मकान बनाये गये थे जिनके अवषेष 1934 ई0 तक विद्यमान थे। 1831 ई0 में जब वे लोग रामबाग से हट कर नए पुणियाँ शहर में अपने आवास कायम करने लगे तब रोमन कैथोलिक चर्च भी पुराने स्थान से हटा कर नये शहर में बनाया गया। 1882 ई0 में दार्जिलिंग के लाॅरेटो काॅनवेंन्ट की पादरिनों ने पुणियाँ में एक स्कूल और छात्रावास की शुरुआत की थी लेकिन बाद में जेसुइट मिशन चर्च की स्थापना के फलस्वरूप वह बंद पड़ गया और कापुचीन मिशन चर्च दार्जिलिंग लौट गया। प्रोटेेस्टेन्ट ईसाइयों द्वारा उन्नीसवीं सदी में स्थापित एंग्लिकम चर्च आज भी पुणियाँ के दर्शनीय स्थानों में से एक है और ब्रिटिश युग की याद दिलाता है। यह स्थान गिरजा-चौक के नाम से विख्यात है।&#8221;</p>
<p>गिरिजानंद जी के अनुसार, &#8220;पुणियाँ के युरोपियन ज़मीन्दारों और वाशिंदों में दो नाम प्रमुख हैं- एलेक्ज़ेन्डर जाॅन फोर्ब्स और पामर। रानी इन्द्रावती की ज़मीन्दारी की पतनावस्था में, पामर ने श्रीपुर, कुमारीपुर, कटिहार और फ़तेहपुर सिंघिया का लगभग 25 प्रतिशत अंश खरीदा था। पामर की एकमात्र बेटी, मिसेज डाउनिंग, उसकी उत्तराधिकारिणी हुई। मिसेज डाउनिंग के दो वारिस हुए &#8211; उसका बेटा सी.वाइ. डाउनिंग और बेटी मिसेज़ हेज़। कटिहार के निकट ‘मनशाही कोठी’ में इनका मुख्यालय था। आज हेज़ साहब का भव्य आवास, पुणियाँ काॅलेज के मुख्य भवन के रूप में पहचाना जाता है।&#8221;</p>
<figure id="attachment_4597" aria-describedby="caption-attachment-4597" style="width: 1094px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/bnanily-Durga.png"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/bnanily-Durga.png" alt="" width="1094" height="1461" class="size-full wp-image-4597" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/bnanily-Durga.png 1094w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/bnanily-Durga-225x300.png 225w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/bnanily-Durga-767x1024.png 767w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/10/bnanily-Durga-768x1026.png 768w" sizes="auto, (max-width: 1094px) 100vw, 1094px" /></a><figcaption id="caption-attachment-4597" class="wp-caption-text">चम्पानगर में दुर्गापूजा</figcaption></figure>
<p>1859 ई0 में मुर्शिदाबाद के महाजन बाबू प्रताप सिंह से सुल्तानपुर परगना खरीद कर एलेक्ज़ेन्डर जाॅन फोर्ब्स  ज़मीन्दार बना और उसी के नाम पर सुल्तानपुर परगने में फोर्ब्सगंज नामक शहर बसाया गया। एलेक्ज़ेन्डर जाॅन फोर्ब्स के बाद उसका बेटा आर्थर फोर्ब्स सुल्तानपुर परगने का ज़मीन्दार हुआ लेकिन कलकत्ते में अधिक रहने की वजह से वह अपनी ज़मीन्दारी के प्रति लापरवाह था। उसके मैनेजरों के अत्याचार ने आम जनता में आर्थर की छवि खराब कर दी थी। 1938 ई में आर्थर फोर्ब्स की मृत्यु हुई। आज फोर्ब्स साहब के आवासीय स्थान में पुणियाँ महिला काॅलेज का भवन खड़ा है।</p>
<p>पुणियाँ में नील की खेती सबसे पहले जाॅन केली ने शुरु की। बाद में कई यूरोपियनों ने यहाँ जोर शोर से नील की खेती की। इनमें शिलिंगफ़ोर्ड-वंश सबसे अग्रणी था जिन्होंने नीलगंज, महेन्द्रपुर, भवबाड़ा इत्यादि छःस्थानों में नील की फ़ैक्ट्रियाँ {नीलहा कोठी} स्थापित की। ‘जो’ और ‘जाॅर्ज’ शिलिंगफ़ोर्ड प्रख्यात शिकारी हुये। ‘जो’ शिलिंगफ़ोर्ड के हाथों मारा गया एक विशाल गेंडा कलकत्ते के संग्रहालय में आज भी मौजूद है। पुणियाँ में इस परिवार का भव्य आवास ‘मरंगा हाउस’ के नाम से विख्यात था। इस वंश के ए0 जे0 शिलिंगफ़ोर्ड के वारिस टेरी विलियम्स के आवास में वर्तमान डाॅन बाॅस्को स्कूल प्रांगण है। इस के अलावा चाल्र्स शिलिंगफ़ोर्ड और अमेलिया मारिया शिलिंगफ़ोर्ड का नाम प्रमुख रूप से जाना जाता है।  </p>
<p>कुर्सेला इस्टेट के नाम से विख्यात बाबू अयोध्या प्रसाद सिंह के परिवार के लोग बड़े ज़मीन्दार तो न थे पर अगाध भू संपत्ति {लगभग 32000 एकड़} के मालिक होने के कारण, ज़मीन्दारी इस्टेटों के समकक्ष समझे जाते थे। बाबू अयोध्या प्रसाद सिंह 1881 ई0 में पटना से आकर कुरसेला में बसे। उनके पुत्र रघुवंश प्रसाद सिंह को ब्रिटिश सरकार ने राय बहादुर की उपाधि देकर सम्मानित किया। इन्होंने कुरसेला में दो विद्यालय और एक अस्पताल बनवाया। पुणियाँ का सुख्यात ‘कलाभवन’ नामक सांस्कृतिक संस्थान इन्हीं की देन है। इनके तीन पुत्र हुये- अवधेश प्र. सिंह, अखिलेश प्र. सिंह और दिनेश प्र. सिंह।   पुणियाँ में बनमनखी के निकट विष्णुपुर के बाबू वीरनारायण चंद का घराना भी ज़मीन्दारी इस्टेटों के समकक्ष माना जाता था।</p>
<p><strong>क्रमशः &#8230;..✍️</strong></p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/he-descendants-of-banaily-raj-never-forgot-tanknath-chaudhary">बनैली के राजाओं के वंशज तत्कालीन चौधरी-वंश के जमींदारों की भूमिका को कभी नहीं बिसरे, आज भी नहीं, विशेषकर टंकनाथ चौधरी को🙏(भाग-8)</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>जी.एम.रोड, दरभंगा-बंगला नंबर-4: कौन मौसेरा-कौन चचेरा? आग की लपटें, मृत माँ, एमिकल कॉड से जुड़ा मृत बचा, मृत मामा और &#8216;मृत मानवता&#8217; (भाग-1)</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 17 Feb 2022 12:23:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
		<category><![CDATA[bihar]]></category>
		<category><![CDATA[darbhanga]]></category>
		<category><![CDATA[darbhangaraj]]></category>
		<category><![CDATA[humanity]]></category>
		<category><![CDATA[killing]]></category>
		<category><![CDATA[landgrabbing]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>दरभंगा / पटना / दिल्ली : कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा दरभंगा रेसिडुअरी इस्टेट के प्रबंधन की देखरेख करने हेतु नियुक्त तीन विशेष अधिकारीगण इधर अपनी नियुक्ति का पहला वर्षगांठ मना रहे थे, उधर दरभंगा के राजा बहादुर विश्वेश्वर सिंह के कनिष्ठ पुत्र कुमार शुभेश्वर सिंह (दिवंगत) की अपनी छोटी साली के बच्चे आग में झुलस रहे थे। बड़ी [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>दरभंगा / पटना / दिल्ली : कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा दरभंगा रेसिडुअरी इस्टेट के प्रबंधन की देखरेख करने हेतु नियुक्त तीन विशेष अधिकारीगण इधर अपनी नियुक्ति का पहला वर्षगांठ मना रहे थे, उधर दरभंगा के राजा बहादुर विश्वेश्वर सिंह के कनिष्ठ पुत्र कुमार शुभेश्वर सिंह (दिवंगत) की अपनी छोटी साली के बच्चे आग में झुलस रहे थे। बड़ी बेटी पिंकी झा के गर्भ में उसके एमिकल कॉड से जुड़ा उसका आठ-महीने का बच्चा, पृथ्वी पर जन्म लेने की आस में सांस ले रहा था। वह भी तड़प रहा था, क्योंकि माँ उपद्रवकारियों के गिरफ़्त में थी। वह घायल हो गयी थी। दरभंगा के ऐतिहासिक जी एम रोड स्थित बंगला नंबर 4 में मौत का तांडव हो रहा था। सहायता की आस में सबों की निगाहें अपने मौसेरे भाई सहित सभी सगे-संबंधियों की ओर उठ रही थी। लेकिन सबों का ह्रदय पत्थर हो गया था। यह घटना दरभंगा राज के इतिहास में काले अक्षर में &#8220;अमानुषिक घटना&#8221; के रूप में लिखा जायेगा। </strong></p>
<p>उस शाम माँ के एमिकल कॉड से जुड़ा वह बच्चा माँ की सांसों के साथ अपनी सांसों को जोड़ते पृथ्वी पर पदार्पित होने का इंतज़ार कर रहा था। कुछ ही दिन तो बचे थे। वह भी दुनिया देखना चाहता था। माँ के गर्भ में सुना करता था कि दिल्ली के लाल किले के तर्ज पर दरभंगा के अंतिम राजा महाराजाधिराज भी रामबाग पैलेस का निर्माण किये थे। उसके नाना रामबाग परिसर में गर्व से जाया करते थे। राम बाग़ पैलेस की मिट्टी में लोट-पोट कर वह भी अपना बचपन जीना चाहता था। अपनी नानी, मौसी, मामा के साथ वह भी क्रीड़ा-कलरव करना चाहता था। लेकिन अभिमन्यु की तरह वह नहीं जानता था कि उसके ननिहाल में माँ के गर्भ में पल रहे उस नौनिहाल की जन्म से पहले मृत्यु हेतु दरभंगा के &#8216;सम्मानित दबंगों&#8217; ने चक्रव्यूह रच दिया दिया था। कौन अपना, कौन पराया &#8211; वह पहचान नहीं रहा था। </p>
<figure id="attachment_3817" aria-describedby="caption-attachment-3817" style="width: 720px" class="wp-caption alignleft"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/5.jpeg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/5.jpeg" alt="" width="720" height="387" class="size-full wp-image-3817" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/5.jpeg 720w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/5-300x161.jpeg 300w" sizes="auto, (max-width: 720px) 100vw, 720px" /></a><figcaption id="caption-attachment-3817" class="wp-caption-text">मृत माँ, एमिकल कॉड से जुड़ा मृत बचा</figcaption></figure>
<p>माँ की ख़ुशी के साथ वह गर्भ में इस बात का एहसास किया था कि इस सप्ताह उसके दिवंगत बड़े नाना जी (कुमार शुभेश्वर सिंह) का, जिन्होंने उसके नानाजी (श्रीनाथ झा) को दरभंगा में रहने के लिए जगह दिए थे, जीवन जीने के लिए, परिवार का भरण-पोषण करने के किये नौकरी दिए थे; उनका 76 वां जन्म दिवस मनाया जाने वाला है। माँ की साँसों से वह यह भी एहसास किया था कि आज़ाद भारत अपनी स्वतंत्रता का 75 वां वर्षगाँठ पर अमृत महोत्सव मना रहा था। उसके बड़े नानाजी भी तो आज़ादी भारत में ही 20 फरबरी, 1946 को जन्म लिए थे। ज्ञातव्य हो कि कुमार शुभेश्वर सिंह की पत्नी (दिवंगत) और मृतक संजय झा और पिंकी झा की माँ अपनी सगी बहनें हैं। </p>
<p><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-1-601x1024.jpg" alt="" width="601" height="1024" class="aligncenter size-large wp-image-3810" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-1-601x1024.jpg 601w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-1-176x300.jpg 176w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-1-768x1308.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-1-902x1536.jpg 902w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-1-1202x2048.jpg 1202w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-1.jpg 1240w" sizes="auto, (max-width: 601px) 100vw, 601px" /></a></p>
<p><strong>लेकिन उसे क्या मालूम था कि बड़े नानाजी के जन्म दिन से एक सप्ताह पूर्व, कलकत्ता उच्च न्यायलय द्वारा दरभंगा रेसिडुअरी इस्टेट के ट्रस्टियों द्वारा महाराजाधिराज की सम्पत्तियों को कौड़ी के भाव में बिकती प्रथा को रोकथाम करने के लिए एक नहीं, दो नहीं, तीन-तीन अवकाश प्राप्त न्यायविदों, न्यायधीशों के रहते हुए भी; जिले में मुखिया (जिलाधिकारी) की उपस्थिति में भी, जिले के दो-दो बड़े कप्तान साहबों (पुलिस अधीक्षकों) की उपस्थिति में भी, सैकड़ों पुलिसकर्मियों की उपस्थिति में भी उसकी सांसे अधजली माँ की सांसों के साथ धीरे-धीरे बंद हो जायेगा और अंत में अपनी प्यारी माँ के साथ वह भी दुनिया से कूच कर जायेगा, जन्म लेने से पहले ही। ऐसा ही हुआ। बड़े-बड़े शहरों में, खासकर जब शहर &#8216;स्मार्ट&#8217; शहरों की गिनती में आ जाय, ऐसी बातें, घटनाएं समाज के संभ्रांतों, ठेकेदारों, मालिकों, मुख्तारों की नजर में कोई अहमियत नहीं रखता है। </strong></p>
<p><strong>आर्यावर्तइण्डियननेशन(डॉट)कॉम </strong>के पास उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार, जी एम रोड पर कुल 10-कोठी हैं जिसे &#8220;ए -टाइप&#8221; बंगला कहा गया है।  ये सभी बंगला कुल 19 बीघा, 9 कट्ठा में फैला है। दस्तावेज के अनुसार, बंगला नंबर 1 (2 बीघा 19 कट्ठा), बंगला नंबर-2 (2 बीघा 3 कट्ठा), बंगला नंबर &#8211; 3 (2 बीघा 12 कट्ठा), बंगला नंबर &#8211; 4 (1 बीघा 6 कट्ठा), बंगला नंबर-5 (2 बीघा 4 कट्ठा), बंगला नंबर &#8211; 7 (2 बीघा 14 कट्ठा), बंगला नंबर &#8211; 8 (1 बीघा 9 कट्ठा), बंगला नम्बर-9 (1 बीघा 6 कट्ठा) और बंगला नंबर &#8211; 10 (2 बीघा 16 कट्ठा) जमीन है। दस्तावेज के अनुसार, जी एम रोड स्थित सभी बंगलों (19 बीघा 9 कट्ठा जमीन सहित) की कीमत 01-01-1987 को 19,40,000 आँका गया था। और भारत के सर्वोच्च न्यायालय को भी इस तथ्य से अवगत करा दिया गया था। </p>
<p><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-2.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-2-617x1024.jpg" alt="" width="617" height="1024" class="aligncenter size-large wp-image-3811" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-2-617x1024.jpg 617w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-2-181x300.jpg 181w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-2-768x1276.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-2-925x1536.jpg 925w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-2-1233x2048.jpg 1233w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-2.jpg 1271w" sizes="auto, (max-width: 617px) 100vw, 617px" /></a></p>
<p>दस्तावेजों के अनुसार फेमिली सेटलमेंट के बाद बंगला नंबर 1 में राजकुमार जीवेश्वर सिंह की पुत्री अपने परिवार के साथ रहती हैं। यह हिस्सा उन्हें मिला था। बंगला नंबर &#8211; 2 महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह वेलफेयर ट्रस्ट को मिला। बंगला नंबर-3 वर्तमान महारानी को दिया गया। बंगला नंबर-4 कुमार शुभेश्वर सिंह के हिस्से आया। बंगला नंबर-5 चैरिटी का था। द्वारका नाथ झा को हस्तगत हुआ। बंगला नंबर-६ विश्वविद्यालय को चला गया। बंगला नंबर-7 में कुमार जीवेश्वर सिंह की पुत्री रहती हैं। बंगला नंबर &#8211; 8 में राम जानकी हॉस्पिटल है। बंगला नंबर &#8211; 9 में राजबहादुर विश्वेश्वर सिंह के पुत्र राजकुमार यग्नेश्वर सिंह (अब दिवंगत) की पत्नी, दो पुत्र कुमार रत्नेश्वर सिंह रहते हैं और अंत में बंगला नंबर-10 विश्वविद्यालय के पास चला गया। </p>
<p>इन तमाम बंगलों में एक सिर्फ बंगला नंबर-4 है जो फॅमिली सेटलमेंट के बाद कुमार शुभेश्वर सिंह को प्राप्त हुआ। महाराजाधिराज के समय इस बंगला में पहले यदु दत्त झा रहते थे। बाद में, यदु दत्त झा के बच्चे &#8211; धीरेन्द्र दत्त झा, जीवेन्द्र दत्त झा, नरेंद्र दत्त झा और आशु दत्त झा &#8211; उस बंगला के परिसर में ही कुछ जमीन खरीदकर अपना-अपना मकान बनाकर रहने लगे। अपने जीवन काल में ही कुमार शुभेश्वर सिंह अपने छोटे साढू श्रीनाथ झा, जो सरिसब-पाहि के रहने वाले थे, दरभंगा में रहने को कहा। श्रीनाथ झा आर्यावर्त-इण्डियन में प्रसार विभाग में निरीक्षक के पद पर कार्य भी करते थे। सूत्रों के अनुसार,  कुमार शुभेश्वर सिंह  अपने छोटे साढ़ू को सपरिवार रहने के लिए बंगला नंबर-4 में ही एक भूखंड दिए थे। वे अधिकांश समय दरभंगा में ही रहते थे।  </p>
<figure id="attachment_3818" aria-describedby="caption-attachment-3818" style="width: 225px" class="wp-caption alignright"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/4.jpeg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/4-225x300.jpeg" alt="" width="225" height="300" class="size-medium wp-image-3818" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/4-225x300.jpeg 225w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/4.jpeg 720w" sizes="auto, (max-width: 225px) 100vw, 225px" /></a><figcaption id="caption-attachment-3818" class="wp-caption-text">श्रीनाथ झा की छोटी बेटी </figcaption></figure>
<p><strong>बंगला नंबर 4 का भू-क्षेत्र एक बीघा 6 कट्ठा है। फैमिली सेटलमेंट के बाद बंगला नंबर 4 दरभंगा के अंतिम राजा महाराजाधिराज डॉ सर कामेश्वर सिंह के अनुज राजबहादुर विश्वेश्वर सिंह के सबसे छोटे पुत्र कुमार शुभेश्वर सिंह के हिस्से में है। कुमार शुभेश्वर सिंह की मृत्यु (22 मार्च 2006) के बाद उनके हिस्से का सम्पूर्ण सम्पत्तियों का मालिक उनके दो पुत्र &#8211; कुमार राजेश्वर सिंह और कुमार कपिलेश्वर सिंह &#8211; है। वर्तमान काल में बंगला नंबर 4 की शेष बची हुई जमीन और मुख्य भवन भी उन्ही के हिस्से में है/अथवा था। वैसे बंगला नंबर-4 में जमीन महज नाम मात्र बचा है। यह कहा जाता है कि श्रीनाथ झा समयांतराल कुमार शुभेश्वर सिंह के द्वारा दी गई जमीन से हटकर इस परिसर के मुख्य भवन में आ गए। यह भी कहा जाता है कि उस भवन को कुमार शुभेश्वर सिंह के पुत्रों &#8211; कुमार राजेश्वर सिंह और कुमार कपिलेश्वर सिंह &#8211; मधुबनी के शिव कुमार झा के हाथों बेच दिया था, जहाँ श्रीनाथ झा की विधवा अपने बाल-बच्चों के साथ रह रही थी। </strong></p>
<p><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-3.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-3-664x1024.jpg" alt="" width="664" height="1024" class="aligncenter size-large wp-image-3812" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-3-664x1024.jpg 664w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-3-195x300.jpg 195w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-3-768x1184.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-3-996x1536.jpg 996w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-3.jpg 1328w" sizes="auto, (max-width: 664px) 100vw, 664px" /></a></p>
<p>दरभंगा के लोगों का कहना है कि जिस घर में श्रीनाथ झा का परिवार रहता था, उस घर पर (यदि बेचा नहीं गया था) कुमार शुभेश्वर सिंह के पुत्रों का अधिकार था। लेकिन उस शाम उस घर पर जबरन अधिपत्य स्थापित करने के लिए कुछ लोग जबरन आधुनिक मशीनों और दर्जनों लोगों के साथ हमला बोल दिया। घर को बुल्डोजर से तोड़ना प्रारम्भ कर दिया। साथ ही, परिवार के सदस्यों को जिंदा जलाने का प्रयास करने लगा था। इस घटना में झुलस गए चार में से दो लोगों &#8211; पिंकी झा (जो गर्भवती थी) और उसके भाई संजय झा की मौत हो गई है। वैसे, श्रीनाथ झा की बेटी बार-बार कह रही है कि घर-जमीन का मामला न्यायालय के अधीन है। </p>
<p><strong>अब सवाल यह है कि क्या कुमार शुभेश्वर सिंह (अब दिवंगत) इस भवन को भी अपने साढू को दे दिए थे, लिख दिए थे ? अगर हां, तो फिर जिला प्रशासन के भूमि निबंधन शाखा में इससे सम्बंधित दस्तावेज होनी चाहिए। अगर भवन और जमीन श्रीनाथ झा के नाम से था, फिर न्यायालय जाने की बात क्या है?  इसी तरह, अगर शुभेश्वर सिंह के पुत्रों ने इस भवन को शिव कुमार झा के हाथों बेच दिया था, तो फिर इससे भी सम्बंधित दस्तावेज भी स्थानीय निबंधन कार्यालय में होनी चाहिए। लेकिन विडंबना यह है कि बंगला नंबर 4 के मुख्य मालिक (चाहे कुमार राजेश्वर सिंह हों या कुमार कपिलेश्वर सिंह या शिव कुमार झा या फिर श्रीनाथ झा) के तरफ से किसी भी प्रकार का आधिकारिक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया है। अगर है, तो फिर स्थानीय प्रशासन की ओर इस बात की पुष्टि अब तक क्यों नहीं की गयी है ?</strong></p>
<p><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-4.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-4-645x1024.jpg" alt="" width="645" height="1024" class="aligncenter size-large wp-image-3813" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-4-645x1024.jpg 645w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-4-189x300.jpg 189w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-4-768x1218.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-4-968x1536.jpg 968w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-4-1291x2048.jpg 1291w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-4.jpg 1400w" sizes="auto, (max-width: 645px) 100vw, 645px" /></a></p>
<p>सूत्रों के अनुसार इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि यह भवन आज भी कुमार राजेश्वर सिंह &#8211; कपिलेश्वर सिंह के स्वामित्व में हो, जिस पर उनकी अपनी मौसी और उसके बाल-बच्चे आधिपत्य जमाना चाह रहे हों। इस बात को भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि अगर यह भवन उनके स्वामित्व में है, तो फिर जबरन-कब्ज़ा के भय से उन्होंने स्थानीय उपद्रवकारियों का सहयोग लिया हो, ताकि मकान खाली हो सके। यह भी संभव है कि सिंह-भाइयों इस बात से अनभिज्ञ थे यह मामला इतना अधिक घृणित, अमानुषिक, अमानवीय हो जायेगा। और इन तमाम प्रश्नों का उत्तर सिर्फ और सिर्फ वे ही दे सकते हैं। सिंह-भाइयों के अपने मौसा श्रीनाथ झा की मृत्यु कुछ वर्ष पहले हो गई थी और घर में पुरुष के रूप में संजय (उनका मौसेरा भाई) ही था, जो मृत्यु को प्राप्त कर चुका है। शेष मौसी और अपनी दो मौसेरी बहनें ही थी, जिसमें एक की मृत्यु हो गई है। </p>
<p>बहरहाल, विगत 10 फरवरी को संध्याकाळ बांग्ला नंबर-4 में यह घटना हुई थी।  इस मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कांड से जुड़े 8 अपराधियों को सोमवार को गिरफ्तार कर लिया था. मामले में कुल 40 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है. अभी तक 13 अभियुक्तों की पहचान कर ली गई, जिसमें से 8 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया गया है. </p>
<p><strong>ज्ञातव्य हो कि पिछले साल 9 फरवरी को कलकत्ता उच्च न्यायालय ने दरभंगा रेसिडुअरी इस्टेट के तत्कालीन प्रबंध समिति को भंग कर दिया था । प्रबंध समिति के सभी सदस्यों के समस्त अधिकार को ‘समाप्त’ कर दिया था । साथ ही, दरभंगा रेसिडुअरी इस्टेट के बैंक अकाउंट को ‘जब्त’ कर लिया था और प्रबंधन समिति के एक सदस्य पर दस लाख का जुर्माना भी किया था । वजह था: कलकत्ता उच्च न्यायालय ने महाराजाधिराज सर कामेश्वर सिंह की सम्पत्तियों से लाभार्थियों द्वारा दायर एक याचिका पर निर्णय निर्णय लिया था। अपने निर्णय में न्यायमूर्ति देबांगसु बसाक ने कहा था कि “दरभंगा राज रेसिडुअरी ट्रस्ट” के क्रियाकलापों में अनियमितता, कुप्रबंध, ट्रस्ट की सम्पत्तियों को औने-पौने मूल्य पर बेचने, महाराजाधिराज और दरभंगा राज की गरिमा को नष्ट करने इत्यादि के कारण ट्रस्ट के ट्रस्टियों (प्रबंध समिति के सदस्य) – महारानी कामसुंदरी सहित, दिवंगत कुमार शुभेश्वर सिंह के दोनों पुत्रों – राजेश्वर सिंह और कपिलेश्वर सिंह – को दरभंगा राज रेसिडुअरी ट्रस्ट के ट्रस्टीशिप / प्रबंध समिति की सदस्यता से “बेदखल” किया जाता है। </strong></p>
<p><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-5.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-5-654x1024.jpg" alt="" width="654" height="1024" class="aligncenter size-large wp-image-3814" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-5-654x1024.jpg 654w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-5-192x300.jpg 192w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-5-768x1203.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-5-981x1536.jpg 981w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-5-1308x2048.jpg 1308w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-5.jpg 1408w" sizes="auto, (max-width: 654px) 100vw, 654px" /></a></p>
<p>साथ ही, न्यायालय ने तीन पूर्व न्यायमूर्तियों को “संयुक्त विशेष अधिकारी” के रूप में नियुक्त भी किया जो  दरभंगा राज रेसिडुअरी ट्रस्ट के पिछले दस वर्षों के सभी कार्यों की छानबीन करेंगे। न्यायालय ने संयुक्त विशेष अधिकारियों का प्रतिमाह दो लाख रुपये का पारिश्रमिक भुगतान निर्धारित किया । न्यायालय ने पश्चिम बंगाल न्यायिक सेवा के विरुद्ध “अवांछनीय” टिका-टिप्पणी करने पर दरभंगा राज रेसिडुअरी के प्रबंध समिति के एक सदस्य कपिलेश्वर सिंह को 10,00,000 रुपये का दंड देने का आदेश भी दिया था ।</p>
<p><strong>9 फरवरी, 2021, जिस दिन न्यायमूर्ति देबांगसु बसाक अपने 12-पृष्ठों का आदेश जारी किया था, शायद वह नहीं जानते थे की उस दिन के अगले दिवस को दरभंगा राज रेसिडुअरी ट्रस्ट की ही एक संपत्ति, जो दरभंगा राज के फेमिली सेटलमेंट के तहत लाभार्थी बने, उसी संपत्ति (4  रोड) में महाराजाधिराज डॉ सर कामेश्वर सिंह के अनुज राजबहादुर विश्वेश्वर सिंह के सबसे छोटे पुत्र कुमार शुभेश्वर सिंह (अब दिवंगत) के हिस्से आये भवन में उनकी अपनी पत्नी की सगी बहन का संतान, गर्भ में पलटा बच्चा जन्म से पहले अग्नि को सुपुर्द हो जायेगा। इतना ही नहीं, कुमार शुभेश्वर सिंह की अपनी साली के बिलखते, तड़पते संतानों को उसका मौसेरा भाई, बहन या परिवार के अन्य लोग देखने तक नहीं आये। </strong></p>
<p>न्यायमूर्ति देबांगसु बसाक ने कहा था कि  “The fact that the estate requires protection is ‘disputed’ by any of the appearing parties. They seek an appropriate mechanism so that the estate is administered properly. They seek a mechanism by which the entire litigation between the parties come to an end as expeditiously as possible. In view of the factual situation, it would be appropriate to discharge the present committee of management with immediate effect. They will not operate any bank account of the estate any further. In the facts and circumstances in the instant case, it would be appropriate that three Special Officers are appointed to administer the estate.”</p>
<p>कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति देबांगसु बसाक वीडियो कांफ्रेंसिंग द्वारा आयोजित न्यायालय में दरभंगा रेसिडुअरी इस्टेट के क्रिया-कलापों की छानबीन के लिए जिन तीन विशेष स्पेशल ऑफिसर्स की नियुक्ति किये हैं उनमें कलकत्ता उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति ज्योतिर्मय भट्टाचार्य, न्यायमूर्ति (श्रीमती) मधुमिता मित्रा (अवकाश प्राप्त) और साहिबगंज के प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज (अवकाश प्राप्त) न्यायमूर्ति गोपाल कुमार रॉय हैं। न्यायालय ने उन सभी पुलिस अधिकारियों, अधीक्षकों से अनुरोध भी किया है कि जिन-जिन स्थानों/क्षेत्रों में दरभंगा रेसिडुअरी इस्टेट की संपत्ति है, और जिसका इन्वेंट्री बनाया जायेगा, आवश्यकता पड़ने पर प्रशासनिक मदद करें।</p>
<p><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-6.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-6-651x1024.jpg" alt="" width="651" height="1024" class="aligncenter size-large wp-image-3815" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-6-651x1024.jpg 651w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-6-191x300.jpg 191w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-6-768x1208.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-6-976x1536.jpg 976w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-6-1302x2048.jpg 1302w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-6.jpg 1391w" sizes="auto, (max-width: 651px) 100vw, 651px" /></a></p>
<p>न्यायमूर्ति देबांगसु बसाक संयुक्त विशेष अधिकारियों को कहा है कि वे किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक में एक एकाउंट खोले जिसमें रजिस्ट्रार, ओरिजिनल साईड से मिलने वाली एक करोड़ रुपये को जमा कर दिया जायेगा। इस राशि का इस्तेमाल अधिकारियों के वेतन और जांच के दौरान होने वाले अन्य खर्च शामिल होंगे। संयुक्त विशेष अधिकारियों को यह भी स्वतंत्रता दी गयी है की दरभंगा रेसिडुअरी इस्टेट के बेहतर प्रबंधन के लिए वे किसी भी योग्य व्यक्ति अथवा व्यक्तियों की नियुक्ति कर सकते हैं और उन्हें उचित वेतन दे सकते हैं। ये तीनो अधिकारीगण न केवल दरभंगा राज के ट्रस्ट्स के क्रियाकलापों की जान करेंगे, बल्कि विशेष “ऑडिट टीम” को नियुक्त कर पिछले 10 वर्षों का लेखा-जोखा का भी जांच करेंगे। न्यायालय ने इन तीन संयुक्त स्पेशल अधिकारियों से निवेदन किया है कि वे किसी उच्च श्रेणी के चार्टड अकाउंटेंट अथवा चार्टर्ड एकाउंटेंट्स के फईम को नियुक्त कर विगत दस वर्षों का लेखा-जोखा की जांच कराई जाय। न्यायालय ने इन संयुक्त विशेष अधिकारियों को कहा है कि वे सर्वप्रथम इस्टेट के प्रशासन के लिए सभी सम्पत्तियों का एक इन्वेंटरी बनाएं । इस कार्य में वे किसी भी व्यक्ति का सहयोग ले सकते हैं। साथ ही उनका वेतन भी निर्धारित कर सकते हैं। </p>
<figure id="attachment_3819" aria-describedby="caption-attachment-3819" style="width: 720px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/3.jpeg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/3.jpeg" alt="" width="720" height="960" class="size-full wp-image-3819" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/3.jpeg 720w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/3-225x300.jpeg 225w" sizes="auto, (max-width: 720px) 100vw, 720px" /></a><figcaption id="caption-attachment-3819" class="wp-caption-text">जी एम रोड, दरभंगा-बंगला नंबर-4</figcaption></figure>
<p>न्यायमूर्ति बसाक अपने आदेश में यह तो स्पष्ट कर दिए थे कि &#8220;इस कार्य को निष्पादित करने में यदि आवश्यकता हो तो वे स्थानीय पुलिस की भी मदद ले सकते हैं। स्थानीय पुलिस अधीक्षक, जिसके क्षेत्राधिकार में यह इस्टेट आता है, से निवेदन है कि वे संयुक्त विशेष अधिकारियों को कार्य निष्पादन करने में मदद करें।&#8221; लेकिन विगत 10 फरवरी के शाम 4 रोड कोठी में जो घटना हुई और पिछले सात दिनों में स्थानीय पुलिस प्रशासन, जिलाधिकारी, दरभंगा राज के लोगों का, मृतक की माँ की बड़ी बहनों के संतानों का जो रवैय्या रहा, किसी भी दृष्टि से &#8220;मानवीय&#8221; नहीं कहा जा सकता है। यह &#8220;अमानुषिक घटना&#8221; के लिए निंदा शब्द उपयुक्त नहीं होगा। </p>
<p>कलकत्ता उच्च न्यायालय अपना आदेश जारी करते समय दरभंगा रेसिडुअरी एस्टेट के करता-धर्ताओं की आदतों से परिचित होने के कारण इस बात का विशेष ध्यान रखा था कि नव-नियुक्त पदाधिकारियों के लिए पहले ही पैसा मिला जाय। अदालत ने यह स्पष्ट किया था कि &#8220;चुकी पिछले विशेष पदाधिकारी को उनके कार्य के लिए महाराजाधिराज की सम्पत्तियों के लाभार्थियों ने भुगतान नहीं किया था, जबकि वे पांच बैठक किये थे और प्रत्येक बैठक के लिए उन्हें प्रारम्भ में एक लाख रुपये देने को तय हुआ था। वैसी स्थिति में नव-नियुक्त संयुक्त विशेष अधिकारियों से कहा गया है कि वे निवर्तमान विशेष अधिकारी को रजिस्ट्रार ओरिजिनल साईड द्वारा भुगतान प्राप्त करते ही 10,00, 000 (दस लाख) रुपये अंतिम भुगतान स्वरूप कर दें।न्यायालय ने आदेश दिया है कि दरभंगा राज के लेखा से इन स्पेशल ऑफिसर्स को प्रतिमाह 2,00,000/- (दो लाख) रुपये का भुगतान किया जायेगा। </p>
<p><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-7.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-7-746x1024.jpg" alt="" width="696" height="955" class="aligncenter size-large wp-image-3816" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-7-746x1024.jpg 746w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-7-218x300.jpg 218w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-7-768x1055.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-7-1118x1536.jpg 1118w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/02/RajProperty-7.jpg 1301w" sizes="auto, (max-width: 696px) 100vw, 696px" /></a></p>
<p>न्यायालय ने दरभंगा राज के ट्रस्ट्स के लोगों को आदेश दिया है कि वे न्यायालय द्वारा नियुक्त अधिकारियों को कार्य निष्पादन करने में पूर्णता के साथ सहयोग करें। न्यायालय सभी लाभार्थियों को स्पेशल अधिकारियों द्वारा आयोजित किसी भी बैठक में भाग लेने की पूर्ण स्वतंत्रता दी है। इतना ही नहीं, न्यायालय इस्टेट के बेहतर क्रिया-कलापों के लिए उनसे बेहतर राय की भी अपेक्षा किया है। उन्हें यह भी कहा गया है कि वे अपना ईमेल विशेष अधिकारियों को अवश्य दे दें ताकि वे क्रिया कलापों की सुचना उन्हें देते रहे। विशेष अधिकारियों के कार्यों में कोई दिक्कत ना हो, न्यायालय ने यह भी आदेश दिया है कि आवश्यकता पड़ने पर वे स्थानीय प्रशासन की मदद भी ले सकते हैं। न्यायालय ने यह स्पष्ट रूप से कहा है कि इस्टेट की सभी सम्पत्तियों की पहचान पहली बैठक में ही हो जानी चाहिए। साथ ही, इस्टेट के प्रशासन से सम्बंधित एक रोड-मैप भी तैयार होनी चाहिए। खैर, &#8220;रोड मैप&#8221; बना या नहीं, यह तो विशेष संयुक्त अधिकारीगण बताएँगे, लेकिन इतना अवश्य हुआ की पांच लोगों के परिवार में तीन की मौत हो गई।  </p>
<p><strong>फेसबुक पर दरभंगा के युवा नेता आदित्य मोहन लिखते हैं</strong> : &#8220;पिंकी मर गई। वो गर्भवती थी। भूमाफिया के मारपीट और लगाए आग में वो झुलस गई, पहले पेट मे पल रहे 8 महीने के बच्चे की मौत हुई और अब पिंकी भी नहीं बची। यह बिहार में अंधेरगर्दी की कहानी है। दरभंगा में भूमाफिया जमीन और मकान पर जबरन कब्जा के लिए बुलडोजर लेकर पहुंच गया। जब घरवालों ने इसका विरोध किया तो मारपीट किया, भूमाफिया के लोगों ने न केवल घर में आग लगा दी बल्कि परिवार के लोगों को भी आग में जलाने की कोशिश की। घटना में परिवार के चार सदस्य झुलस गए, गर्भवती पिंकी (अब मृतक) के अलावा एक युवक की हालत काफी गंभीर बताई जा रही है और उन्हें डीएमसीएच के बाद बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर कर दिया गया है। पूरी घटना सीसीटीवी में कैद है। मौके पर पहुंचे एसडीपीओ ने इस घटना की पुष्टि की है। बाकी घायल लोगों का डीएमसीएच में इलाज चल रहा है। वहीं मौके पर भूमाफिया के लोग जेसीबी छोड़कर फरार हो गए हैं। घटना दरभंगा नगर क्षेत्र अंतर्गत जीएम रोड की है।&#8221;</p>
<p><strong>भारतीय जनता पार्टी के नेता संजय सरोगी लिखते हैं:</strong> &#8220;जीएम रोड के आगजनी घटना में पीएमसीएच में ईलाजरत संजय झा एवं उनकी बहन पिंकी झा की मृत्यु बेहद ही दुःखद एवं हृदय विदारक है। भूमि विवाद में हमलावरों द्वारा इस तरह की शर्मनाक घटना को अंजाम देना कहीं से भी बर्दाश्त योग्य नहीं है। जिला प्रशासन एवं पुलिस अधिकारियों से लगातार मेरी बात हो रही है, घटना में संलिप्त दोषी किसी भी हालत में बख्शे नहीं जायेंगे। घटना में स्थानीय पुलिस प्रशासन की भूमिका भी संदेहास्पद है। घटना से पूर्व ही पीड़ित पक्ष लगातार स्थानीय पुलिस प्रशासन के समक्ष गुहार लगाते रहें। आखिर प्रशासन इतनी असंवेदनशील कैसी हो सकती है? अगर पुलिस सक्रिय रहती है, समय पीड़ित पक्ष के गुहार पर संज्ञान लेती तो हमलावर इस तरह के अपराध में कभी सफल नहीं हो पाते और पीड़ित पक्ष के तीन सदस्य आज जीवित होते।&#8221; </p>
<p><strong>क्रमशः </strong></p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/gmroad-darbhanga-three-dead">जी.एम.रोड, दरभंगा-बंगला नंबर-4: कौन मौसेरा-कौन चचेरा? आग की लपटें, मृत माँ, एमिकल कॉड से जुड़ा मृत बचा, मृत मामा और &#8216;मृत मानवता&#8217; (भाग-1)</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>दरभंगा राज के कुमार यज्ञेश्वर सिंह का पार्थिव शरीर अपने अनुज के बच्चों को देखने हेतु तरस रहा था, लेकिन वे नहीं आये</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/editorial/darbhanga-rajkumar-yagyeshwar-singh-is-no-more</link>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 17 Jan 2022 11:55:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[सम्पादकीय]]></category>
		<category><![CDATA[darbhanga]]></category>
		<category><![CDATA[darbhangaraj]]></category>
		<category><![CDATA[dead]]></category>
		<category><![CDATA[yagyeshwarsingh]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>दरभंगा के अंतिम राजा महाराजाधिराज डॉ सर कामेश्वर सिंह तीन-तीन पत्नियों के होते हुए &#8216;संतानहीन&#8217; मृत्यु को प्राप्त किये । लेकिन अपनी मृत्यु से पूर्व उन्होंने अपने छोटे भाई दरभंगा के राजा बहादुर विश्वेश्वर सिंह और उनके पुत्रों को किसी भी स्तर पर कमजोर नहीं होने दिए। संपत्ति की तो बात ही नहीं करें। कल, राजबहादुर [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/editorial/darbhanga-rajkumar-yagyeshwar-singh-is-no-more">दरभंगा राज के कुमार यज्ञेश्वर सिंह का पार्थिव शरीर अपने अनुज के बच्चों को देखने हेतु तरस रहा था, लेकिन वे नहीं आये</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>दरभंगा के अंतिम राजा महाराजाधिराज डॉ सर कामेश्वर सिंह तीन-तीन पत्नियों के होते हुए &#8216;संतानहीन&#8217; मृत्यु को प्राप्त किये । लेकिन अपनी मृत्यु से पूर्व उन्होंने अपने छोटे भाई दरभंगा के राजा बहादुर विश्वेश्वर सिंह और उनके पुत्रों को किसी भी स्तर पर कमजोर नहीं होने दिए। संपत्ति की तो बात ही नहीं करें। कल, राजबहादुर विश्वेश्वर सिंह के मझले पुत्र और राज दरभंगा के अंतिम राजकुमार यज्ञेश्वर सिंह इस संसार से अनंत यात्रा पर निकल गए। कल 78 वर्ष की आयु में उनके पार्थिव शरीर को अग्नि के रास्ते महादेव के पास भेजा गया। कोरोना काल होने के बावजूद दरभंगा के &#8216;संवेदनशील महामानव&#8217; आत्मा और शरीर के साथ राजकुमार यज्ञेश्वर सिंह की पार्थिव शरीर को अंतिम विदाई दिए। दरभंगा राज के कुमार यज्ञेश्वर सिंह का पार्थिव शरीर अपने अनुज के बच्चों को देखने हेतु तरस रहा था, लेकिन वे नहीं आये&#8230;. वैसे दरभंगा राज की संस्कृति को बचने की बात, गरिमा को बचने की बात करते नहीं थकते। </strong></p>
<p>राजकुमार यज्ञेश्वर सिंह महाराज सर कामेश्वर सिंह के मझले भतीजे थे। वे अपने पिता और माता प्रेम किशोरी के राज दुलारे थे। माधेश्वर परिसर में कल शाही सम्मान के साथ दाह संस्कार किया गया। राजबहादुर विशेश्वर सिंह की दूसरी पत्नी के एकमात्र पुत्र थे राजकुमार यज्ञेश्वर सिंह। मुखाग्नि बड़े पुत्र रत्नेश्वर सिंह ने दी। दरभंगा राज की परंपरा के अनुसार मुखाग्नि का कार्यक्रम 10 बजे के पूर्व संपन्न हुआ। दाह संस्कार के बाद 17 जनवरी से 13 दिनी कार्यक्रम माधेश्वर मंदिर परिसर में होगा। मौके पर दिवंगत यज्ञेश्वर सिंह के अनुज कुमार शुभेश्वर सिंह के पुत्रों को छोड़कर राज परिवार के कई सदस्य उपस्थित थे। </p>
<p>माधवेश्वर परिसर दरभंगा राज की श्मशान भूमि है और यहां उनके परिवार के लोगों के अंतिम संस्कार होते हैं। इस परिसर में दर्जन भर मंदिर हैं और उनमें से अधिकतर मंदिर किसी न किसी महाराजा या महारानी की चिता पर बने हैं। श्यामा मंदिर महाराजा रामेश्वर सिंह की चिता पर बना है। माधेश्वर मंदिर परिसर में दरभंगा राज परिवार के लोगों का दाह संस्कार इसके निर्माण के बाद से किया जा रहा है। सन 1775 में इसका निर्माण दरभंगा के तत्कालीन महाराज माधेश्वर सिंह ने कराया था। मंदिर निर्माण के बाद उनका निधन वाराणसी में हो गया। वहीं पर दाह-संस्कार किया गया। वहां से उनकी अस्थियां लाई गईं और मंदिर परिसर के एक स्थान पर रखी गईं। इसके बाद से यह परंपरा शुरू की गई कि जब भी राज परिवार में किसी का निधन होता तो अर्थी पहले इस अस्थि स्थल के पास रखी जाती है। फिर परिसर में स्थित श्मशान भूमि पर ले जाकर अंत्येष्टि की प्रक्रिया की जाती है। परिसर में पहला दाह संस्कार राजा रूद्र सिंह का 1850 में हुआ। इसके बाद से अब तक राज परिवार के करीब दो दर्जन सदस्यों का दाह संस्कार हो चुका है। इनमें सात महाराजाधिराज और उनके परिवार के अन्य सदस्य शामिल हैं।</p>
<p><strong>बहरहाल, दरभंगा के लेखक-पत्रकार और छायाकार संतोष कुमार कहते हैं: &#8220;यूं तो विश्वेश्वर सिंह के तीन संतान थे &#8211; राजकुमार जीवेश्वर सिंह, यज्ञेश्वर सिंह और राजकुमार शुभेश्वर सिंह । लोगों का ऐसा मानना रहा महाराजा कामेश्वर सिंह के देहांत के बाद अगर राजगद्दी के लिए सुयोग्य राजकुमार कोई तो वह थे राजकुमार जीवेश्वर सिंह क्योंकि राजकुमार जीवेश्वर सिंह हर क्षेत्र में निपूण थे। जीवेश्वर सिंह की पढ़ाई इंग्लैंड में हुई थी और वह ज्ञान, स्वभाव से काफी निपुण थे, उनमें प्रशासकीय क्षमता कूट कूट कर भरी हुई थी। परंतु 1962 में दरभंगा महाराज के आकस्मिक निधन के बाद राज परिवार बिखर सा गया। कारण जो भी रहा हो, 15 जनवरी 1988 में राजकुमार जीवेश्वर सिंह का निधन हो गया और 2006 में सबसे छोटे राजकुमार शुभेश्वर सिंह का निधन दिल्ली में हो गया।&#8221; </strong></p>
<p>राजकुमार यज्ञेश्वर सिंह का जन्म 5 जनवरी 1944 को विश्वेश्वर निवास महल जो कि वर्तमान में दरभंगा का पोस्टल ट्रेनिंग सेंटर, बेला है, में हुआ था। राजकुमार यज्ञेश्वर सिंह की प्रारंभिक, प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा यही इसी शहर दरभंगा से ग्रहण किया था । उन्हें किताबों के बीच रहना पसंद था। इनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण अंग किताबें ही थी । एक दार्शनिक रूप में इन्होंने अपने आप को अंतिम समय तक खड़ा कर लिया था । दरभंगा महाराज के गुजरने के बाद जहाँ पूरा राजपरिवार उथल-पुथल हो गया था, वही राजकुमार यज्ञेश्वर सिंह का 1962 से 1970 तक एक महत्वपूर्ण जीवन शैली में देखा गया जो इस राज परिवार के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।</p>
<p><strong>&#8220;एक था राजकुमार: स्मृति शेष&#8221;</strong> में संतोष कुमार लिखते हैं: &#8220;1965 में राजकुमार ने फिल्म डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी की स्थापना की । उस कंपनी का नाम था विजय सिचित्रा । उन्होंने इस कंपनी का नाम अपनी पत्नी के नाम पर रखा। उनकी पत्नी का नाम रानी विजय किशोरी है एवं चित्रा, जो मुंबई की एक कंपनी थी, दोनों ने मिलकर।  यह कंपनी बिहार, बंगाल, उड़ीसा, बांग्लादेश, भूटान तथा नेपाल में फिल्म डिस्ट्रीब्यूशन का जिम्मा लिया। इस कंपनी के द्वारा ही उन्होंने 1965 से लेकर 1969 तक की चार सुपरहिट फिल्मों का डिस्ट्रीब्यूशन भी किया। जिनमें से 1965 टार्जन और सर्कस, 1968 में झुक गया आसमां, 1968 में ही जुआरी और 1969 में शम्मी कपूर की सुपरहिट फिल्मों में शुमार प्रिंस थी।  </p>
<p>यह बात छुपी हुई नहीं है कि इन फिल्मों के द्वारा जहां शम्मी कपूर, राजेंद्र कुमार, शशि कपूर, सायरा बानो, वैजयंती माला आदि कलाकारों ने पूरे भारत में अपने अभिनय का परचम लहराया, वही इन फिल्मों के गाने लोगों की जुबान पर रटे जा चुके थे। महत्वपूर्ण यह है कि उत्तर भारत में मिथिलांचल के क्षेत्रों में भी इन फिल्मों का प्रकाशन का जिम्मा कुमार यज्ञेश्वर सिंह के कंधे पर ही था। सब कुछ बहुत बढ़िया चल रहा था परंतु जिस प्रकार इतिहास गवाह है कि राजे रजवाड़ों का सप्ताह में कई प्रकार के परिवेश बदलते रहते हैं, ठीक ऐसा ही बदलाव इस दरभंगा के राजघरानों में भी हुआ। </p>
<p><strong>संतोष कुमार आगे लिखते हैं : &#8220;बहुत सारी किवदंतियां इस राज परिवार में भी सुनने को मिली और उसका सबसे बड़ा प्रभाव राजकुमार यज्ञेश्वर सिंह पर ही पड़ा। राजकुमार यज्ञेश्वर सिंह को कई शौक थे जिसमें पशुओं के बीच रहना भी उनका एक शौक था। जानकारों की मानें तो पूरे विश्व के दर्जनों प्रकार के कुत्तों को उन्होंने विशेश्वर सिंह पैलेस में पाल हुआ था, जो शौक उनके पिताजी को भी था। साथ ही, एक भोजन प्रिय होने के साथ-साथ वह बेहतर बावर्ची का भी काम कर लेते थे। वह अपने जीवन के अंतिम दिनों तक मछली उनका सबसे प्रिय आहार रहा। राजकुमार यज्ञेश्वर सिंह एक बेहतर संगीतकार भी थे गायन के साथ साथ हारमोनियम तथा गिटार बजाने की कला में भी निपुण थे।</strong></p>
<p>पारिवारिक एवं राजनीतिक विविधताओं से हटकर उन्होंने अपने आप को एक कमरे में सीमित कर लिया और जीवन जीने के लिए दर्शनशास्त्र, इतिहास और राजनीति तथा सामाजिक विज्ञान के पुस्तकों का सहारा लिया। लोगों का ऐसा मानना है कि लगभग 35 वर्षों से वह एक कमरे में रहने के बावजूद भी अपने एक नौकर जो कि उनका भोजन तैयार करता था, के हाथों ही भोजन किया करते थे। </p>
<p>संतोष कुमार लिखते हैं: &#8220;मैं कई बार उनसे मिलने गया परंतु उनसे बात ना हो पायी। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि जब मैंने उनके कमरों को देखा जैसा कि मैंने कल भी उनके कमरे का निरीक्षण किया मुझे खिड़कियों, पलंगों कुर्सियों एवं यत्र तत्र कलम का गुच्छा ही दिखाई दिया जो की चीख चीख कर कह रहे थे कि उन्होंने कितनी सारी किताबें लिख डाली, सैकड़ों किताबें चीख चीख कर कह रही थी कि मैं इनका गवाह हूं और वह इंसान मेरे सामने आज सांस विहीन पड़ा हुआ है।&#8221;</p>
<p>उनके बड़े पुत्र कुमार रत्नेश्वर सिंह बताते है कि मेरे पिताजी का स्वभाव काफी सालिन रहा और वह पूरे दिन पठन-पाठन का कार्य करते रहते थे। लगातार 35 वर्षों से मैंने उनको कभी कोई ऐसा दिन ना देखा हो जब वह अपने किताबों से दूर रहे हो। रत्नेश्वर सिंह ने बताया कि मेरे पिताजी कई किताबें लिख चुके हैं परंतु यह दुर्भाग्य रहा कि उन किताबों का प्रकाशन ना हो सका। वह किताबें दर्शनशास्त्र राजनीति और सामाजिक विज्ञान से संबंधित है। निश्चित ही अगर आने वाले भविष्य में उनके द्वारा शोध एवं लिखे गए बहुमूल्य लेखों को प्रकाशित किया जाए तो दरभंगा के राजपरिवार के साथ-साथ यहां के नागरिकों का भी मार्गदर्शन बेहतर रूप से हो सकेगा। </p>
<p>राजा बहादुर विशेश्वर सिंह ने दो विवाह किया था। पहली पत्नी से दो पुत्र राजकुमार जीवेश्वर सिंह एवं राजकुमार शुभेश्वर सिंह हुए थे । दूसरी पत्नी रानी प्रेम किशोरी से मझले राजकुमार यज्ञेश्वर सिंह हुए थे। एक संयोग ही कह सकते हैं कि बड़े कुमार राजकुमार जीवेश्वर सिंह का देहांत 15 जनवरी 1988 को हुआ था और राजकुमार यज्ञेश्वर सिंह का देहावसान 15 जनवरी को ही हुआ। और यह भी महज संयोग ही कह सकते हैं कि 15 जनवरी 1934 को मिथिलांचल के क्षेत्र में जो भूकंप ने कोहराम मचाया उसके निशान आज भी देखने को मिलते हैं कि राजनगर से लेकर दरभंगा तक जो राजपरिवार के बहुमूल्य इमारतों को हिला दिया था। </p>
<p>राजकुमार यज्ञेश्वर सिंह के शरीर को पार्थिव होने के साथ सैकड़ों, हज़ारों, लाखों बातें उनके शरीर के साथ ही पार्थिव हो गया। कल उनके बड़े पुत्र रत्नेश्वर सिंह जी से बात भी हुई। बातचीत के दौरान यह मालूम हुआ कि राजकुमार यज्ञेश्वर सिंह दरभंगा राज के &#8220;पुरुषों&#8221; में शायद पहला व्यक्ति थे जो अपने जीवन का 78 वसंत बिना किसी बीमारी और बिना किसी पारिवारिक-सामाजिक द्वेष से जीवित रहे। इनके पिता कुमार विश्वेश्वर सिंह, दोनों भाई &#8211; कुमार जीवेश्वर सिंह और कुमार शुभेश्वर सिंह, इनके चाचा महाराजाधिराज डॉ सर कामेश्वर सिंह, इनके दादा महाराजा रामेश्वर सिंह, महाराजा लक्ष्मेश्वर सिंह और दरभंगा राज के अन्य महाराजाओं का शरीर अधिकतम 60-65 वर्ष आते-आते &#8220;पार्थिव&#8221; हो गया। कुमार यज्ञेश्वर सिंह के दो पुत्र &#8211; कुमार रत्नेश्वर सिंह और रजनेश्वर सिंह &#8211; हैं। रजनेश्वर सिंह को एक पुत्र है &#8211; ऋत्विक सिंह। </p>
<p>बहरहाल, जब दरभंगा के लोगों के मुख से, राजकुमार यज्ञेश्वर सिंह को चाहने वालों के मुख से, सगे-सम्बन्धियों से यह सुना कि राजकुमार यज्ञेश्वर सिंह के छोटे भाई कुमार शुभेश्वर सिंह के पुत्र अपने चाचा के अंतिम यात्रा में शरीक नहीं हुए, मन विचलित हो गया। दरभंगा के अख़बारों में यह पढ़ते आया हूँ कि कुमार शुभेश्वर सिंह के छोटे पुत्र दरभंगा राज की संस्कृति को, गरिमा को बरकरार रखना चाहते हैं। लेकिन कैसी गरिमा, कैसी संस्कृति &#8211; यह स्पष्ट नहीं हो सका। फिर सोचा, मुद्दत से दिल्ली-दरभंगा हवाई सेवा के लिए मारा-मारी हुई। सरकार की और से यह सुविधा भी बहाल किया गया। मिथिला के गरीब-से-गरीब लोग अपने माता-पिता-परिजनों की मृत्यु की सूचना पाकर उनके अंतिम यात्रा में शामिल हुए, अन्तःमन से श्रद्धांजलि दिए। लेकिन, कुमार शुभेश्वर सिंह के पुत्र नहीं आये। कहते हैं वे &#8216;दिल्ली में रहते हैं&#8217; &#8211; और दिल्ली तो अब दूर रही नहीं। अगर व्यक्ति दिल्ली से दरभंगा पहुंचना चाहता तो एक घंटा 30 मिनट &#8211; और राजकुमार यज्ञेश्वर सिंह का पार्थिव शरीर, उनका परिवार, दरभंगा के लोग जो उस शवयात्रा में शामिल हुए, राजकुमार यज्ञेश्वर सिंह के अनुज के छोटे पुत्र का इंतज़ार अवश्य करते &#8211; आखिर रक्त का सम्बन्ध है। लोगों का कहना है कि दाह संस्कार समय तक ऐसा लगता था कि कुमार यज्ञेश्वर सिंह का पार्थिव शरीर अपने अनुज के बच्चों को देखने हेतु तरसता रहा हो। &#8230;&#8230;.. </p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/editorial/darbhanga-rajkumar-yagyeshwar-singh-is-no-more">दरभंगा राज के कुमार यज्ञेश्वर सिंह का पार्थिव शरीर अपने अनुज के बच्चों को देखने हेतु तरस रहा था, लेकिन वे नहीं आये</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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