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	<title>changes Archives - आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</title>
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	<description>आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</description>
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		<title>बिहार में आने वाले &#8216;स्टार्टअप&#8217; के &#8216;उद्यमियों&#8217; की बातों को लिखने, गाँव-गाँव तक पहुँचाने के लिए &#8216;आर्यावर्तइण्डियननेशन.कॉम&#8217; से बेहतर कौन हो सकता है (स्टार्टअप-1)</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 16 Jun 2025 05:43:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यापार]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>पटना / नई दिल्ली: बिहार की संस्कृति की शहर मधुबनी के एक सज्जन, जो वर्तमान में न्यूयॉर्क में सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में कार्य करते हैं, कल अचानक मोबाइल पर घंटी बजाये। महाशय लिंक्डइन से लेकर सोशल मीडिया के कई प्लेटफार्म सहित, आर्यावर्तइण्डियननेशन(डॉट)कॉम की गतिविधियों पर पैनी निगाह रखते हैं। न्यूयॉर्क से फोन की घंटी बजना एक [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>पटना / नई दिल्ली: बिहार की संस्कृति की शहर मधुबनी के एक सज्जन, जो वर्तमान में न्यूयॉर्क में सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में कार्य करते हैं, कल अचानक मोबाइल पर घंटी बजाये। महाशय लिंक्डइन से लेकर सोशल मीडिया के कई प्लेटफार्म सहित, आर्यावर्तइण्डियननेशन(डॉट)कॉम की गतिविधियों पर पैनी निगाह रखते हैं। न्यूयॉर्क से फोन की घंटी बजना एक सुखद आश्चर्य था। बहुत तरह की बातें हुई और अंत में निचोड़ यह था कि आज बिहार में जन्म लिए और देश-विदेश में रहने वाले शिक्षित युवक-युवती अपने प्रदेश के विकास के लिए अनेकानेक क्षेत्रों में स्टार्टअप खोल रहे हैं, ताकि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को पुनः परिभाषित किया जा सके; इंटरनेट मीडिया में पारम्परिक मीडिया से अलग हटकर आर्यावर्तइण्डियननेशन(डॉट)कॉम को स्टार्टअप का स्वरुप क्यों नहीं दिया जा सकता है?</strong></p>
<p>उनका कहना था कि &#8220;आप लिखते बहुत बेबाक है और यही बेबाकीपन कल भी इन अख़बारों की ताकत थी, और आज आप उसकी गुणवत्ता को जीवित रखने का अथक प्रयास कर रहे हैं।&#8221; उन्होंने यह भी कहा कि &#8216;आज अपने प्रदेश में एक तो अपना मीडिया नहीं है, जो हैं सभी आयातित हैं और पैसे कमाने के लिए ही बिहार को बाजार बनाये हैं। खुल कर भले लोग स्वीकार नहीं करें, लेकिन आज भी &#8216;आर्यावर्त&#8217; और &#8216;इण्डियन नेशन&#8217; अख़बार-द्वय बिहार के लोगों के डीएनए में है।&#8217; इण्डियन नेशन (1930) और आर्यावर्त (1940) में स्थापित हुआ बिहार के लोगों की आवाज के रूप में। </p>
<p><strong>उनका कहना था कि &#8220;इस बात से भी कोई इंकार नहीं कर सकता है कि अपने जीवनकाल में यह दोनों समाचार पत्र प्रदेश की राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, औद्योगिक, कृषि कोई भी क्षेत्र ऐसा नहीं था, जहाँ शब्दों से यह नहीं पहुंचा था। आज प्रदेश की सत्ता के गलियारे में जो भी महात्मन बैठे हैं, उन्हें इन अख़बारों ने सड़क से विधानसभा और संसद तक पहुँचाया है। आज प्रदेश में जितने भी युवक, युवतियां स्टार्टअप के क्षेत्र में आ रहे हैं, उनकी सोच को सकारात्मक स्वरूप देने के लिए एक ऐसी इंटरनेट मीडिया की जरूरत है जो उनकी बातों को सुनें, समझें, उनके बारे में लिखें और मोबाइल के सहारे प्रदेश के प्रत्येक लोगों तक पहुंचे। इसका कारण यह है कि प्रदेश में भले देश-विदेश से लोगों का आवागमन हो रहा हो स्टार्टअप के क्षेत्र में, लेकिन उनकी बातों को सुनकर, उनके बारे में सकारात्मक लिखने वालों की किल्लत है।&#8221;</strong></p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-1.jpg"><img fetchpriority="high" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-1.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-6761" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-1.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-1-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-1-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-1-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-1-1536x1026.jpg 1536w" sizes="(max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p>कई विदेशी राष्ट्रों का दृष्टान्त देते कहते हैं कि &#8220;हम इसे टीवी की तरह, या यूट्यूब के सहारे, प्रदेश के एक-एक नए स्टार्टअप करने वाले व्यक्तियों की सोच और उनके कार्यों को 130,725,310 लोगों तक प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से पहुंचा सकते हैं। बिहार ही नहीं, वैश्विक स्तर पर भी आज स्थिति यह है कि लोग अख़बार पढ़ें अथवा नहीं, टीवी देखें अथवा नहीं, व्हाट्सएप पर आये ख़बरों को जरूर खोलते हैं। चलते-फिरते विभिन्न प्रकार के स्टार्टअप समाचार को देखते, पढ़े जरूर है। आज सांख्यिकी चाहे जो भी कह ले, प्रदेश की आबादी का बहुत बड़ा हिस्सा प्रदेश के ग्रामीण और श्री क्षेत्रों में रहता है जो अच्छे ख़बरों के लिए लालायित है।&#8221; उनकी बातों में दम तो था।   <br />
 <br />
वैसे पिछले वर्ष बिहार की निवेश संभावनाओं को प्रदर्शित करने वाले वैश्विक निवेशक शिखर सम्मेलन के दूसरे संस्करण से पहले यह कहा गया था कि बिहार में पिछले पांच वर्षों में डेटा खपत में 15 गुना वृद्धि देखी गई है। बिहार के मुख्य सचिव अमृत लाल मीणा ने कहा था कि 2019 में दूरसंचार क्षेत्र में लगभग छह करोड़ मोबाइल उपयोगकर्ता थे, आज 7.25 करोड़ हैं। 2019 में, हमारे पास प्रति माह औसत डेटा उपयोग 1.67 गीगाबाइट था, लेकिन अब यह 27 गीगाबाइट हो गया है। बिहार में 45,000 से अधिक मोबाइल टावर स्थापित किए हैं। राज्य की सभी पंचायतें अब ऑप्टिकल फाइबर केबल से जुड़ गई हैं। सभी गाँव नेटवर्क से जुड़ गए हैं। बिहार में पिछले पांच वर्षों में डेटा की खपत में 15 गुना उछाल आया है।</p>
<p>इतना ही नहीं, बिहार ने बुनियादी ढांचे के विकास में अभूतपूर्व वृद्धि देखी है, इसकी सड़क घनत्व देश में तीसरा सबसे बड़ा है जो व्यापार और परिवहन को सुविधाजनक बनाता है। इसका बिजली उत्पादन 700 मेगावाट से बढ़कर 7,000 मेगावाट हो गया है। पिछले दो दशकों में बुनियादी ढांचे के निर्माण में भारी निवेश होने के कारण बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। पिछले दशक के दौरान, राष्ट्रीय और राज्य दोनों राजमार्ग नेटवर्क ने बिहार में जबरदस्त वृद्धि देखी है। आज हमारे पास 1.2 लाख किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का नेटवर्क है।&#8221; पिछले साल के बजट में राज्य सरकार ने राज्य में चार एक्सप्रेस हाईवे बनाने की घोषणा की थी। </p>
<p><strong>अभियंता साहब आगे कहते हैं कि इस वेबसाइट की सबसे बड़ी ताकत यह है कि &#8216;इसे अपनी पहचान की किल्लत नहीं है।&#8217; आज भले इन अख़बारों को स्थापित करने वाले दरभंगा के महाराजा डॉ. सर कामेश्वर सिंह के परिवार और परिजनों को इस अख़बारों के प्रति, इसके नामों के प्रति संवेदना नहीं हो (अगर होता तो पारम्परिक अख़बारों का यह हश्र नहीं होता), लेकिन बिहार के लोग, यहाँ तक कि युवापीढ़ी, उद्योग के क्षेत्र से, शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े लोग, नेता सभी ऋणी हैं। यह अख़बार कल भी सच लिखता था, लोगों के घरों में सुख-दुःख में साथ था, आज भी हो सकता है। हम कुछ लोग इस पर विचार कर रहे हैं ताकि इस वेबसाइट को बिहार का नंबर-1 विश्वसनीय प्लेटफॉर्म बनाया जाय और प्रदेश में आने वाले सभी नए स्टार्टअप शुरू करने वाले लोगों के लिए अपना दोस्त बन सके। </strong></p>
<figure id="attachment_6762" aria-describedby="caption-attachment-6762" style="width: 2043px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Nitish-Mishra.jpg"><img decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Nitish-Mishra.jpg" alt="" width="2043" height="1270" class="size-full wp-image-6762" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Nitish-Mishra.jpg 2043w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Nitish-Mishra-300x186.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Nitish-Mishra-1024x637.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Nitish-Mishra-768x477.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Nitish-Mishra-1536x955.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Nitish-Mishra-356x220.jpg 356w" sizes="(max-width: 2043px) 100vw, 2043px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6762" class="wp-caption-text">उद्योग मंत्री नीतीश मिश्रा</figcaption></figure>
<p><strong>बहरहाल, उद्योग मंत्री नीतीश मिश्रा के अनुसार, सरकार युवाओं के नवाचार को समर्थन देने के लिए हर संभव कदम उठा रही है। स्टार्टअप प्रस्तावों का गहन विश्लेषण कर उन्हें आर्थिक और तकनीकी सहायता दी जाती है। इससे राज्य में आत्मनिर्भरता और आर्थिक समृद्धि की नई इबारत लिखी जा रही है। बिहार सरकार की स्टार्टअप योजना सभी वर्ग और समुदाय के लोगों को स्वरोजगार प्रदान कर इन्हें स्वावलंबी बनाने में बेहद सहायक साबित हो रही है। इसके प्रति तेजी से आकर्षण बढ़ता जा रहा है। </strong></p>
<p>उद्योग विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं कि <strong>कल्पना और उमा झा</strong> ने एक जीवंत व्यवसाय शुरू किया है जो अपने घर के बने अचार के माध्यम से मिथिला के प्रामाणिक स्वादों को दुनिया तक पहुंचाता है। तीस से अधिक वर्षों से, वे अपने स्वादिष्ट उत्पादों को नई दिल्ली से न्यूयॉर्क तक भेजकर मित्रों और परिवार को प्रसन्न करते रहे हैं। <strong>&#8220;जस नौकरी&#8221;</strong> एक गतिशील भर्ती मंच है जो भारत और विदेशों में कॉर्पोरेट्स, प्लेसमेंट एजेंसियों और नौकरी चाहने वालों को जोड़ता है। यह सभी हितधारकों के लिए भर्ती प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए एक व्यापक रिज्यूमे डेटाबेस, जॉब लिस्टिंग और उन्नत प्रतिक्रिया प्रबंधन टूल तक पहुंच सहित कई प्रकार की सेवाएं प्रदान करता है। </p>
<p><strong>&#8220;लिटिगेटर&#8221;</strong> कानूनी पेशेवरों के लिए नेटवर्क बनाने और उद्योग समाचारों पर अपडेट रहने के लिए अंतिम मंच के रूप में कार्य करता है। यह सुरक्षित स्थान अधिवक्ताओं को जुड़ने, सहयोग करने और मामलों पर चर्चा करने में सक्षम बनाता है, जिससे उनकी कानूनी विशेषज्ञों को आगे बढ़ाने और पेशेवर संबंधों को बढ़ाने के लिए समर्पित एक सहायक समुदाय को बढ़ावा मिलता है।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-4.jpg"><img decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-4.jpg" alt="" width="2043" height="1270" class="aligncenter size-full wp-image-6763" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-4.jpg 2043w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-4-300x186.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-4-1024x637.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-4-768x477.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-4-1536x955.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-4-356x220.jpg 356w" sizes="(max-width: 2043px) 100vw, 2043px" /></a></p>
<p>इसी तरह, <strong>&#8220;नेटिवक्लैप&#8221;</strong> एक ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म है जो आपके राज्य में चुने हुए विक्रेताओं, निर्माताओं और ब्रांडों से प्रामाणिक, पारंपरिक और अनन्य उत्पाद प्रदान करता है। ऑनलाइन खरीदारी करते समय अनूठे उत्पादों की खोज करें और स्थानीय कारीगरों का समर्थन करें। &#8220;श्री&#8221; खुले में शौच को खत्म करने के लिए समुदायों के साथ भागीदारी करता है, जो स्वास्थ्य समानता की लड़ाई में एक आवश्यक कदम है। साथ मिलकर, वे सभी के लिए एक स्वस्थ वातावरण बनाने के लिए काम करते हैं। </p>
<p>बिहार के मुजफ्फरपुर में एक भारतीय ऑप्टिकल रिटेल चेन, <strong>&#8220;जस-लेंस&#8221;</strong>, रोबोटिक तकनीक के साथ सटीक प्रिस्क्रिप्शन आईवियर प्रदान करती है। उनकी विनिर्माण सुविधा 3 दशमलव स्थानों तक सटीकता सुनिश्चित करती है। स्पष्ट दृष्टि और गुणवत्ता वाले उत्पाद प्रदान करते हुए, जस-लेंस आईवियर उद्योग में क्रांति ला रहा है।</p>
<p><strong>&#8220;शादी करें&#8221;</strong> एक आधुनिक वैवाहिक सेवा वेबसाइट है जहाँ उपयोगकर्ता अपने जीवन साथी को खोजने के लिए पंजीकरण कर सकते हैं। दुनिया के सबसे किफ़ायती पैकेज पेश करते हुए, कंपनी का उद्देश्य ज़रूरतमंद लोगों की मदद करना है। &#8220;इंग्लिशयारी&#8221; एक अभिनव भाषा सीखने का प्लेटफ़ॉर्म है जो शिक्षार्थियों को व्यक्तिगत एक-पर-एक सत्रों के लिए प्रमाणित ट्यूटर्स से जोड़ता है। किफ़ायती मूल्य निर्धारण, लचीले शेड्यूलिंग और अनुकूलित पाठ योजनाओं के साथ, यह व्यक्तियों को बोली जाने वाली अंग्रेजी में उत्कृष्टता प्राप्त करने, भाषा सीखने को सुलभ और व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने में मदद करने के लिए समर्पित है। </p>
<p><strong>&#8220;जस जॉलीज&#8221;</strong> एक गतिशील मनोरंजन, सामग्री निर्माण और विज्ञापन मीडिया कंपनी है। पूर्णकालिक सेवाओं में विशेषज्ञता रखने वाली यह कंपनी ग्राहकों के लिए आकर्षक और उच्च गुणवत्ता वाले मनोरंजन विकल्प प्रदान करती है। &#8220;न्यू एज न्यूज़ पोर्टल&#8221; उपयोगकर्ताओं को राजनीति, खेल, ज्योतिष, शिक्षा, नौकरी, वैश्विक मामले, व्यापार, भारत और प्रौद्योगिकी सहित विभिन्न क्षेत्रों में नवीनतम समाचार और अवसर प्रदान करता है। यह प्लेटफ़ॉर्म उपयोगकर्ताओं को उनके लिए महत्वपूर्ण विविध विषयों से अवगत और संलग्न रखता है। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-3.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-3.jpg" alt="" width="2043" height="1270" class="aligncenter size-full wp-image-6764" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-3.jpg 2043w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-3-300x186.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-3-1024x637.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-3-768x477.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-3-1536x955.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-3-356x220.jpg 356w" sizes="auto, (max-width: 2043px) 100vw, 2043px" /></a></p>
<p><strong>&#8220;देहात&#8221;</strong> एक आईसीटी आधारित प्लेटफ़ॉर्म और किसानों का बाज़ार है जो छोटे किसानों के लिए सभी कृषि पेशकशों को एक छत के नीचे लाता है। यह छोटे किसानों को उनकी विभिन्न ज़रूरतों &#8211; बीज, उर्वरक, उपकरण, फसल सलाह और बाज़ार से जोड़ता है। देहात का उपयोग अंतिम मील कृषि सेवा प्रदाताओं जैसे सूक्ष्म उद्यमियों, छोटे इनपुट खुदरा विक्रेताओं, कृषि व्यवसाय क्लीनिकों और किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) द्वारा किया जाता है। पेंट और कोटिंग उद्योग में एक अग्रणी नाम &#8220;मैक्स पेंट्स&#8221; ने खुद को उच्च गुणवत्ता वाले दीवार उत्पादों के शीर्ष निर्माता के रूप में स्थापित किया है। बिहार सरकार की स्टार्टअप योजना राज्य में आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो रही है। यह योजना सभी वर्गों को स्वरोजगार के अवसर प्रदान कर रही है। </p>
<p><strong>बहरहाल, प्रदेश में तेजी से स्टार्टअप की संख्या बढ़ने की वजह से बिहार की कृषि प्रधान राज्य की छवि से हटकर नवाचार और उद्यमिता के नए कलेवर वाली छवि भी बनती जा रही है। ग्रामीण इलाकों में भी स्टार्ट अप की संख्या तेजी से बढ़ रही है। उद्योग विभाग की इस योजना की वजह से युवाओं में उद्यमशीलता की भावना को प्रोत्साहन मिला है। विभाग के स्तर से स्टार्टअप बिहार के तहत एक समग्र तंत्र का निर्माण किया गया है, जो स्टार्ट-अप को उनकी शुरुआत से लेकर इसकी स्थापना और व्यवसाय के विस्तार तक सभी चरणों में सहयोग प्रदान करता है। खासकर युवाओं, महिलाओं और पारंपरिक रूप से उपेक्षित कुछ समुदायों की भागीदारी में भी इसमें बढ़ोतरी हुई है। यह राज्य के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य में परिवर्तन का संकेतक भी है। </strong></p>
<p>बिहार सरकार ने 2016 में बिहार स्टार्टअप नीति को तैयार कर इसकी अधिसूचना जारी की थी। इस पॉलिसी का मूल उद्देश्य राज्य के स्टार्टअप्स को फलने-फूलने का एक मौका देना है। 2017 में बिहार स्टार्टअप नीति में संशोधन किया गया।इस योजना के लिए सरकार ने 500 करोड़ का शुरुआती बजट रखा है। इसके जरिए बिहार सरकार युवाओं को खुद का स्टार्टअप शुरू कर आगे बढ़ने का मौका दे रही है। इस योजना के जरिए न सिर्फ स्टार्टअप्स को फायदा पहुंचेगा बल्कि बिहार राज्य में नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। इस नीति का मुख्य उद्देश्य राज्य के युवाओं की प्रतिभा का उपयोग करते हुए स्टार्टअप के लिए एक अनुकूल माहौल बनाना है। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-6.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-6.jpg" alt="" width="2043" height="1270" class="aligncenter size-full wp-image-6765" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-6.jpg 2043w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-6-300x186.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-6-1024x637.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-6-768x477.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-6-1536x955.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-6-356x220.jpg 356w" sizes="auto, (max-width: 2043px) 100vw, 2043px" /></a></p>
<p>बिहार को स्टार्टअप, निवेशकों और अन्य हितधारकों की पहली पसंद बनाना है। ताकि राज्य के समग्र विकास को गति मिल सके। उद्योग विभाग इससे संबंधित विभिन्न कार्यक्रमों, पुरस्कारों और अभियानों को आयोजित करके नवाचार की संस्कृति को सशक्त बना रही है।बदलते उद्घमी परिदृश्य और स्थानीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इसमें बदलाव किया और बिहार स्टार्टअप नीति 2022 लागू की। नई नीति अधिक समावेशी, प्रभावी और तेज क्रियान्वयन करने वाली है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य राज्य के युवाओं की प्रतिभा का उपयोग करते हुए स्टार्टअप के लिए एक अनुकूल माहौल बनाना है। </p>
<p><strong>उद्योग मंत्री नीतीश मिश्रा का कहना है कि स्टार्ट-अप को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न स्तर पर प्रोत्साहन से लेकर सभी तरह के सहयोगात्मक कार्य किए जा रहे हैं। युवाओं के नवाचार को बढ़ावा देने से लेकर इसके तहत आने वाले सभी प्रस्तावों पर मंथन करने के बाद इसके क्रियान्वयन के लिए हर तरह से सहायता प्रदान की जाती है। इससे स्वरोजगार को बढ़ावा मिल रहा है। युवाओं को अपने सार्थक कल्पना को आकार प्रदान करने में मदद मिल रही है। </strong></p>
<blockquote><p>बिहार में अब तक 1522 स्टार्टअप पंजीकृत हो चुके हैं। इसके तहत 62 करोड़ 50 लाख रुपये की राशि वितरित की जा चुकी है। इसमें महिला उद्यमियों के अलावा अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के उद्यमियों की संख्या भी काफी है। कुछ स्टार्टअप को अतिरिक्त सहायता भी दी गयी है। बिहार सरकार राज्य की अर्थव्यवस्था को बढ़ाने के लिए लगातार और केंद्रित प्रयास कर रही है। इस पहल के तहत, बिहार सरकार ने बिहार स्टार्टअप नीति 2022 पेश की है। यह नई नीति विशेष रूप से राज्य भर में उद्यमिता को प्रोत्साहित करने और बढ़ावा देने के लिए बनाई गई है। </p></blockquote>
<p>बिहार स्टार्टअप नीति का मुख्य लक्ष्य बिहार के भीतर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र के विकास और विस्तार में उल्लेखनीय रूप से तेज़ी लाना है, जिससे एक अधिक स्वस्थ और गतिशील आर्थिक वातावरण को बढ़ावा मिले। वैसे तो स्टार्टअप की सफलता या असफलता के लिए कई कारक जिम्मेदार होते हैं, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण कारक फंडिंग है। स्टार्टअप की सफलता या असफलता में वित्त एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बिहार स्टार्टअप नीति 2022 में राज्य सरकार द्वारा स्टार्टअप संस्थापकों को वित्तीय सहायता प्रदान करने का प्रावधान है। </p>
<p>बिहार स्टार्टअप नीति 2022 के अनुसार, सीड फंडिंग के लिए बिहार में उभरते उद्यमियों को 10 साल की अवधि के लिए 10 लाख रुपये का ब्याज मुक्त ऋण मिलेगा। महिला उद्यमियों को 10.50 लाख रुपये मिलेंगे, जबकि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और शारीरिक रूप से विकलांग व्यक्तियों को 11.50 लाख रुपये दिए जाएंगे। महिला उद्यमियों को 5% प्रोत्साहन का लाभ मिलेगा, तथा उत्पाद संवर्धन और वित्तीय प्रशिक्षण में संलग्न व्यवसायों को 3 लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा। इतना ही नहीं, सरकार इनक्यूबेटरों द्वारा जुटाए गए निवेश के लिए भारत सरकार और बहुपक्षीय दाता एजेंसियों से 1:1 के आधार पर मिलान निधि उपलब्ध कराएगी। नीति में साझा कार्यालय स्थान और अतिरिक्त सुविधाओं के साथ-साथ सह-कार्य स्थानों के विकास के प्रावधान शामिल हैं। सरकार का मानना है कि ह नीति देश भर में स्टार्टअप्स और एन्जेल निवेशकों के बीच संपर्क को सुगम बनाएगी। यह नीति स्टार्टअप्स को त्वरण कार्यक्रमों में नामांकन और भागीदारी करने में सहायता करेगी। इतना ही नहीं, स्टार्टअप्स को निःशुल्क मूल्यांकन सेवाएं प्रदान की जाएंगी।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-5.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-5.jpg" alt="" width="2043" height="1270" class="aligncenter size-full wp-image-6766" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-5.jpg 2043w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-5-300x186.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-5-1024x637.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-5-768x477.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-5-1536x955.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/Bihar-5-356x220.jpg 356w" sizes="auto, (max-width: 2043px) 100vw, 2043px" /></a></p>
<p><strong>उद्योग विभाग ने इस नीति के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए एक स्टार्ट-अप सहायता इकाई (SSU) की भी स्थापना की है। SSU को राज्य के स्टार्ट-अप पारिस्थितिकी तंत्र के निरंतर विकास को बढ़ावा देने के लिए एक सहायक नीति वातावरण को बढ़ावा देने का काम सौंपा गया है। यह पारिस्थितिकी तंत्र के हितधारकों, जिसमें मेंटर, इनक्यूबेटर, एंजेल निवेशक और उद्यम पूंजीपति शामिल हैं, के साथ जुड़ने के लिए प्राथमिक संपर्क बिंदु है। SSU के संचालन की देखरेख के लिए, उद्योग विभाग विभाग के भीतर से कर्मियों को नियुक्त कर सकता है या किसी परियोजना प्रबंधन एजेंसी (PMA) के साथ सहयोग कर सकता है। </strong></p>
<p>ज्ञातव्य हो कि बिहार के तीन स्टार्ट-अप को केंद्र सरकार द्वारा नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित स्टार्टअप महाकुंभ कार्यक्रम में प्रतिष्ठित महारथी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था और EY डेल्टा, लेडीफेयर और भोजपट्टा को प्रत्येक को एक-एक लाख रुपये नकद पुरस्कार दिया गया था।  लेडी केयर ब्यूटी कॉन्सेप्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को उसके अद्वितीय सौंदर्य-आधारित व्यवसाय मॉडल के लिए सम्मानित किया गया था। डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) स्टार्ट-अप का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को उनके घर के दरवाजे पर सैलून सर्विस देना और साथ ही आजीविका के अवसर पैदा करना है। कहते हैं कि इस पहल के तहत अब तक 150 से अधिक महिलाओं को ब्यूटीशियन की ट्रेनिंग दी गई है, जो 12 से अधिक शहरों में सेवाएं दे रही है। ये महिलाएं सामूहिक रूप से सालाना 1.5 करोड़ रुपये से अधिक पैसे कमा पा रही है। </p>
<p>भोजपत्ता एक कृषि आधारित स्टार्टअप है, जिसे भोजपत्ता एग्रीप्रेन्योर प्राइवेट लिमिटेड द्वारा चलाया जाता है। इसे महज़ 4 लाख रुपये के शुरुआती निवेश के साथ लॉन्च किया गया था। 2021 में स्थापित, भोजपत्ता एक नया स्टार्टअप है जो ज़ीरो-कार्बन उत्सर्जन वाले सौर ड्रायर का उपयोग करके फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करता है। भोजपत्ता ग्रामीण सशक्तिकरण, हरित नवाचार और टिकाऊ जीवन को बढ़ावा देते हुए प्रकृति और संस्कृति को एकीकृत करता है। बिहार स्थित प्रौद्योगिकी स्टार्ट-अप ईवाई डेल्टा को उसके उत्कृष्ट योगदान के लिए रक्षा और अंतरिक्ष श्रेणी में महारथी पुरस्कार मिला था। </p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/business/startups-change-bihar-economy">बिहार में आने वाले &#8216;स्टार्टअप&#8217; के &#8216;उद्यमियों&#8217; की बातों को लिखने, गाँव-गाँव तक पहुँचाने के लिए &#8216;आर्यावर्तइण्डियननेशन.कॉम&#8217; से बेहतर कौन हो सकता है (स्टार्टअप-1)</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>&#8220;देते न आप साथ तो मर जाते हम कभी के &#8230; अपनी जुबान से आपके जज्बात कहेंगे&#8221; : ​मोदी जी से आरिफ मोहम्मद खान🙏</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/bihar-gets-new-governor-arif-mohammad-khan</link>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Jan 2025 06:20:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
		<category><![CDATA[assembly]]></category>
		<category><![CDATA[bihar]]></category>
		<category><![CDATA[changes]]></category>
		<category><![CDATA[election]]></category>
		<category><![CDATA[governor]]></category>
		<category><![CDATA[politics]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>पटना / नई दिल्ली : जिस वर्ष पटना के वीणा सिनेमा गृह में मनोज कुमार द्वारा निर्देशित और निर्मित &#8220;शोर&#8221; सिनेमा का प्रदर्शन प्रारम्भ हुआ, साल 1972 था। उस वर्ष बिहार के वर्तमान लाट साहब आरिफ मोहम्मद खान की आयु 21 वर्ष रही होगी और वे भारत के निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित मतदान करने हेतु न्यूनतम [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>पटना / नई दिल्ली : जिस वर्ष पटना के वीणा सिनेमा गृह में मनोज कुमार द्वारा निर्देशित और निर्मित &#8220;शोर&#8221; सिनेमा का प्रदर्शन प्रारम्भ हुआ, साल 1972 था। उस वर्ष बिहार के वर्तमान लाट साहब आरिफ मोहम्मद खान की आयु 21 वर्ष रही होगी और वे भारत के निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित मतदान करने हेतु न्यूनतम आयु को प्राप्त किये होंगे। मनोज कुमार, जाया भादुड़ी, प्रेमनाथ, नंदा, कामिनी कौशल, मदनपुरी, असरानी और अन्य कलाकारों द्वारा अभिनीत कोई दो घंटा पचास मिनट के उस सिनेमा में एक गीत था:</strong></p>
<p><em>पानी रे पानी, <br />
पानी रे पानी तेरा रंग कैसा, <br />
पानी रे पानी तेरा रंग कैसा, <br />
जिसमें मिला दो लगे उस जैसा</em></p>
<p>इस गीत को लिखा था इंद्रजीत सिंह तुलसी और संगीत दिया था लक्ष्मीकांत प्यारेलाल तथा गाया था मुकेश और लता मंगेशकर। आज सुबह-सवेरे रेडियो पर इस गीत को सुनकर बिहार के लाट साहब याद आ गए। अस्सी के दशक के उत्तरार्ध से दिल्ली की सड़कों पर, राजनेताओं के घरों में, कार्यालयों में उनका आना-जाना याद आ गया। नब्बे के दशक में ऐतिहासिक हवाला काण्ड याद आ गया जिसे मैं इंडियन एक्सप्रेस अखबार के लिए कवर करता था। </p>
<p><strong>&#8216;शोर&#8217;</strong> सिनेमा का वह गीत <strong>&#8220;पानी रे पानी&#8221;</strong> जैसे ही समाप्त हुआ, रेडियो पर सन 1970 में असित सेन द्वारा निर्देशित और मुशीर रियाज़ द्वारा निर्मित <strong>&#8220;सफर&#8221;</strong>, जिसमें शर्मीला टैगोर, राजेश खन्ना, अशोक कुमार, फिरोज खान जैसे कलाकार काम किये थे, का गीत जिसके गीतकार थे इंदीवर, संगीतकार कल्याण जी आनंद जी और गायक मुकेश बजने लगा। क्या इत्तिफाक था। गीत के बोल थे:</p>
<p><em>जो तुमको हो पसंद, वही बात करेंगे, <br />
तुम दिन को अगर रात कहो, रात कहेंगे, <br />
जो तुमको हो पसंद। </p>
<p>चाहेंगे, निभाएंगे, सराहेंगे आप ही को,<br />
आँखों में दम है जब तक, देखेंगे आप ही को,<br />
अपनी जुबान से आपके जज्बात कहेंगे <br />
तुम दिन को अगर रात कहो, रात कहेंगे <br />
जो तुमको </p>
<p>देते न आप साथ तो मर जाते हम कभी के <br />
पुरे हुए हैं आप से, अरमान जिंदगी के <br />
हम जिंदगी को आपकी सौगात कहेंगे <br />
तुम दिन को अगर रात कहो, रात कहेंगे <br />
जो तुमको हो पसंद</em> </p>
<p>बहरहाल, कोई तीन दशक तक &#8216;बेरोजगार&#8217; रहने के बाद 68-वर्ष की आयु में अंततः आरिफ मोहम्मद खान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह का आशीर्वाद मिल गया था। देश में 18 और अधिक वर्ष के कई करोड़ मतदाता आसमान की ओर टकटकी निगाह से आज भी देख रहे हैं कि मोदी जी की निगाह उनकी ओर भी हो। उनके शहर में, प्रदेश में कल-कारखाने खुले ताकि उन्हें भी रोजगार मिले, चाहे 58 या 60 वर्ष तक ही हो। वजह भी है जब 70 और अधिक वर्ष के लोग अंतिम साँस तक कुर्सी से चिपके रहना चाहते हैं तो युवकों को, युवतियों का क्या होगा? ख़ैर। </p>
<figure id="attachment_6000" aria-describedby="caption-attachment-6000" style="width: 2048px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/Aarif-1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/Aarif-1.jpg" alt="" width="2048" height="1536" class="size-full wp-image-6000" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/Aarif-1.jpg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/Aarif-1-300x225.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/Aarif-1-1024x768.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/Aarif-1-768x576.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/Aarif-1-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2048px) 100vw, 2048px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6000" class="wp-caption-text">आप का आभारी हूँ प्रधानमंत्री जी</figcaption></figure>
<p>साल था 2019 और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिल्ली सल्तनत में आए पाँच वर्ष हो गये थे। उनके इर्द गिर्द वाले रहने वाले लोग नेताओं के बारे में उनका जीवन वृत्त और राजनीतिक चरित्र का विवरण प्रधान मंत्री कार्यालय तक पहुँचा चुके थे। तहक़ीक़ात के बाद रायसीना हिल से फरमान जारी हुआ। 6 सितम्बर, 2019 को आरिफ़ मोहम्मद ख़ान को वामपंथी के गढ़ केरल का राज्यपाल बनाकर भेज दिया गया। पांच वर्ष 117 दिन राज्यपाल भवन में रहने के बाद उन्हें चाणक्य-चन्द्रगुप्त-बुद्ध की नगरी में लाटसाहब बनाकर प्रेषित कर दिया गया। 73-वर्ष की आयु में नियोजन काल में बढ़ोत्तरी हो, इससे बेहतर और क्या हो सकता है। </p>
<p><strong>बुद्ध की नगरी में इस बात की चर्चाएं आम हैं कि लाटसाहब का पद उन्हें प्रधानमंत्री का प्रसाद है, अन्यथा बिहार जैसे प्रदेश में बुलंदशहर में जन्म लिए व्यक्ति का क्या काम है? लोग तो यह भी कहते हैं कि बिहार में शायद अब ऐसा कोई शिक्षित, विचारवान, विवेकशील, दक्ष, सक्षम, दूरदर्शी व्यक्ति का अभाव ही नहीं, बल्कि किल्लत भी है जो प्रधानमंत्री की बैगनी रंग वाली आँखों का तारा हो। वैसे अपवाद छोड़कर आजादी के बाद से राजनीतिक पार्टियों ने, चाहे कांग्रेस हो, जनता पार्टी हो, एनडीए हो, यूपीए हो, भाजपा हो, सबों ने अपने-अपने कालखंडों में राजनीतिक दृष्टि से बिहार को नेताओं के लिए डंपिंग ग्राउंड या आराम कक्ष बनाकर ही रखा है। लाट साहब के अलावे कई ऐसे नेता हैं जिन्हे प्रदेश के विधानसभा, विधान परिषद और  राज्यसभा  में कुर्सी देकर उनके राजनीतिक गुरुओं ने ऋण मुक्त होने का प्रयास किया है। चलिए, यह शोध का विषय है।</strong> </p>
<p>पटना के डाकबंगला चौराहे से लेकर दिल्ली के कर्तव्य पथ तक लोग इस बात पर बारंबार चर्चा करते नहीं थक रहे हैं कि खान साहब को उनकी नौकरी में विस्तार और बिहार का लाट साहब आगामी चुनाब के मद्दे नजर किया गया है। वैसे ‘आलाकमान’ शब्द कांग्रेस के लिए इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन ‘सोच बदलो-देश बदलेगा’ नारा के तहत अब भाजपा में भी इस्तेमाल होने लगा है। तदनुसार भाजपा आलाकमान का मानना है कि खान साहब आगामी विधानसभा चुनाव में ब्रह्मास्त्र हो सकते हैं। बिहार में करीब 17+ फ़ीसदी मुसलमानों को आगामी चुनाब में वर्तमान राजनीतिक पार्टियों से काटकर भारतीय जनता पार्टी अपने पक्ष में लाने के लिए भेजी है ताकि मुसलंमान मतदाताओं को यह विश्वास हो कि मोदी सरकार उनके समुदाय के लोगों को भी लाट साहब बनाती हैं। </p>
<blockquote><p>बिहार में 2011 जनगणना के अनुसार करीब 17557809 + मुसलमानों की आवादी है । अन्य राज्यों के अलावे किशनगंज, अररिया, पूर्णिया और कोशी का क्षेत्र मुस्लमान  बाहुल्य जिला है। सांख्यिकी के अनुसार विगत ढ़ाई दशकों में बिहार में मुसलमानों की विभिन्न जाति आवादी औसतन 35 फीसदी बढ़ी है मसलन पसमंदा, शेख, अन्सारी सुरजापुरी, धुनिया और मन्सूरी। खैर।</p></blockquote>
<p>मैं पटना के टीके घोष विद्यालय में पढ़ता था। उस विद्यालय के पुस्तकालय के दक्षिणी दीवार पर सामने डॉ. ज़ाकिर हुसैन की तस्वीर लगी थी। डॉ. हुसैन की तस्वीर के साथ प्रदेश के उन सभी राजनेताओं की तस्वीर पंक्तिबद्ध थी जिनका न केवल देश के स्वाधीनता आंदोलन में अमूल्य योगदान रहा था, बल्कि स्वतंत्र भारत में प्रदेश की आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक, बौद्धिक विकास में अनवरत योगदान हो रहा था। साल था 1968 और देश को आज़ाद हुए महज 21 वर्ष हुए थे। डॉ. जाकिर हुसैन सन् 1957 से 1962 तक बिहार के लाट साहब थे। जो तस्वीर हमारे  विद्यालय के दीवार पर लटकी थी, वह तस्वीर उनके लाट साहब कार्यकाल वाली ही थी। हम सभी बच्चे उनकी कर्मठता, योग्यता के कारण नित्य नमन अवश्य करते थे। राज्यपाल की अवधि पूरा करने के पाँच साल बाद डॉ. जाकिर हुसैन देश का तीसरा राष्ट्रपति बने थे । डॉ. जाकिर हुसैन एक साल 355 दिन राष्ट्रपति कार्यालय में विराजमान रहे और कार्यालय में ही अंतिम सांस लिए। </p>
<figure id="attachment_6001" aria-describedby="caption-attachment-6001" style="width: 2048px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/Arif-5.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/Arif-5.jpg" alt="" width="2048" height="1536" class="size-full wp-image-6001" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/Arif-5.jpg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/Arif-5-300x225.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/Arif-5-1024x768.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/Arif-5-768x576.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/Arif-5-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2048px) 100vw, 2048px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6001" class="wp-caption-text">चलिए बिहार में जाकर काम सभालें </figcaption></figure>
<p>वैसे, मैं नहीं समझता हूँ आज बिहार के किसी भी विद्यालय में (अपवाद छोड़कर) प्रदेश में राष्ट्रपति के प्रतिनिधित्व करने वाले राज्यपाल की तस्वीर दीवारों पर लटकती दिखती होंगी। वजह भी है। जयरामदास दौलतराम, माधवश्रीहरी अन्ने, रंगनाथ रामचंद्र दिवाकर, जाकिर हुसैन, माड़भूषि अनन्तसायनम अय्यंगार, नित्यानंद कानूनगो (1971 का कालखंड तक) के बाद ऐसे प्रभावशाली व्यक्तित्व वाले कोई भी व्यक्ति राज्यपाल के कार्यालय में नहीं आये जिनका प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से प्रदेश के विकास से कोई भावनात्मक सम्बद्ध रहा हो। </p>
<blockquote><p>स्वाभाविक है विद्यालयों में सन 1971 के बाद अपने प्रदेश के प्रथम नागरिक की तस्वीर का नहीं लटकना। इसके अलावे सत्तर के दशक के बाद से देश ही नहीं, बिहार में भी, जिस तरह कुकुरमुत्तों की तरह घर-घर, गली-गली, मोहल्ले-मोहल्ले नेताओं का अभ्युदय हुआ, शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षा और शिक्षण पतन हुआ, शिक्षित और विचारवान व्यक्ति उन राजनेताओं के भय के कारण या तो प्रदेश की मिट्टी से पृथक हो गए, या फिर मिट्टी पलीद होने से बचने के लिए अपने सिद्धांतों के साथ स्वयं मिट्टी में मिल गए।</p></blockquote>
<p> <br />
देवकांत बरुआ, आरडी भंडारे, जगन्नाथ कौशल, ए आर किदवई, पी वेंकट सुब्बैया, गोविन्द नारायण सिंह, रामचंद्र दत्तारे प्रधान, जगन्नाथ पहाड़िया, मोहम्मद यूनुस सलीम, मोहम्मद सफी कुरैशी, सुन्दर सिंह भंडारे, विनोद चंद्र पांडे, न्यायमूर्ति (सेवा निवृत) मंदगड़े रामा जॉइस, वेद प्रकाश मारवाह, बूटा सिंह, आर. एस. गवई, आर. एल. भाटिया, देवानंद कुंवर, डॉ. डी वाई पाटिल, केशरी नाथ त्रिपाठी, रामनाथ कोविंद, सत्यपाल मालिक, लालजी टंडन, फागु चौहान या फिर राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर, जो बिहार के लाट साहब की कुर्सी पर बैठे, प्रदेश के विकास में उनका क्या योगदान रहा, यह बात या तो वे स्वयं जानते होंगे अथवा राजभवन की कुर्सियां। प्रदेश के मतदाताओं को कुछ लेना देना नहीं है, चाहे शिक्षित हों या अशिक्षित। </p>
<p><strong>सांख्यिकी कहता है कि बिहार का शैक्षिक दर 61.80 फीसदी है जिसमें पुरुषों की साक्षरता दर 71.20 फीसदी और महिलाओं की 51.50 फीसदी। वैसे प्रदेश की शैक्षिक पुस्तिका इस बात का दावा करती है कि विगत 20 वर्षों में बिहार का शैक्षिक दर जो 2001 में 47.00 फीसदी था, बढ़कर 61.80 फीसदी हुआ है। लेकिन वहीँ बाबू लोग यह भी कहते हैं कि इन सांख्यिकी में वे सभी अंक भी शामिल हैं जिनके बाल-बच्चे बिहार के बाहर के शैक्ष्णिक संस्थानों में शिक्षा ग्रहण करते हैं, शिक्षित हुए हैं। इतना ही नहीं, प्रदेश में शहरी और ग्रामीण शिक्षा दर में जो फासला है वही प्रदेश के राजनीतिक पार्टियों के नेताओं का भविष्य निर्धारित करता है। आंकड़े के अनुसार, शहरी क्षेत्र की साक्षरता जहाँ 71.9 फीसदी हैं, वहीँ ग्रामीण इलाके का 43.9 फीसदी है। यानी दोनों के बीच 28 फीसदी का फर्क है।</strong> </p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि 3 &#8211; 4 फीसदी मतों के इधर-उधर से सरकार का गठन और सरकार का पतन हो जाता है, यहाँ तो 28 फीसदी अशिक्षित, अनपढ़ मतदाता सभी राजनीतिक पार्टियों का केंद्र बिंदु होता है। इतना ही नहीं, शहरी क्षेत्रों में जहाँ पुरुषों की साक्षरता दर 79.9 फीसदी है, वहीँ शहरी क्षेत्र के महिलाएं 62.6 फीसदी है। जबकि, ग्रामीण क्षेत्रों में पुरुष 57.1 फीसदी साक्षर है और महिलाएं 29.6 फीसदी ही साक्षर है। अशिक्षा में अल्पसंख्यकों का दर सबसे अधिक है। स्वाभाविक है इन अशिक्षित मतदाताओं को लुभाने के लिए, अल्पसंख्यकों के मतों को जाति के आधार पर काटने, बांटने, छांटने के लिए आला नेता तो उपाय ढूंढेंगे ही। अब परजीवी नेताओं को देखें। आज देश की अर्थव्यवस्था अच्छी स्थिति में नहीं है, बिहार में दागी और जेल में सजा काट रहे विधायकों समेत पूर्व विधायकों की मौज चल रही है, क्योंकि नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली राज्य सरकार 991 विधायकों के पेंशन पर हर महीने 4.94 करोड़ रुपये खर्च कर रही है, यह अनुत्पादक है। यह बात मैं नहीं शिव  प्रकाश राय की आरटीआई के जवाब में हुआ है।<br />
 <br />
चलिए डॉ. श्रीकृष्ण सिंह पथ, टेलर रोड, राजबंशी नगर में विचरण करते हैं। कहते हैं कि बिहार के वर्तमान लाट साहब उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर की पैदाइश है। दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया और लखनऊ विश्वविद्यालय से शिक्षा ग्रहण किये हैं। सं 1972-1973 के कालखंड में जब देश में राजनीतिक भूचाल लाने की व्यूह रचना बन रही थी, जय प्रकाश नारायण तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के खिलाफ मोर्चे बना रहे थे, आरिफ मोहम्मद खान अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्र संघ के अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे। इससे पहले वे छात्र संघ  का सचिव थे। सत्तर के कालखंड में ही वे अपने गृह जिला के सियाना विधानसभा क्षेत्र से भारतीय क्रांति दल के टिकट पर चुनाव लड़े, लेकिन जीत नहीं सके। </p>
<p>जीत हासिल 1977 में हुई और 26 वर्ष की आयु में उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य बने। राजनीति में प्रवेश के लिए हरी झंडी से स्वागत हो गया। छब्बीस वर्ष की आयु में विधायक होना, वह भी उस समय जब देश में स्वतंत्र भारत के तत्कालीन राजनेताओं द्वारा सत्ता के गलियारे में अपनी पैठ ज़माने के लिए राजनीतिक  आज़ादी के लिए दूसरी लड़ाई लड़े जाने के लिए बीजारोपण हो रहा था।दिल्ली पर सत्ता हासिल करने के लिए देश में उभरते नेताओं का एक विशाल समूह मन ही मन राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कविता &#8216;सिंहासन खाली करो की जनता आ रही है&#8217; का पाठ कर रहे थे। देश में कोहराम मच गया था। आंदोलन को नेतृत्व का अभाव था और उस अवसर पर जयप्रकाश नारायण का अभ्युदय हुआ। </p>
<p>जयप्रकाश नारायण भी कभी कांग्रेस में थे, लेकिन समयान्तराल कांग्रेस के विपक्षी हो गए। उसी राजनीतिक उथल-पुथल में खान साहब कांग्रेस के हो गए। वर्तमान राजनीतिक परिपेक्ष में भाजपा के लिए आरिफ़ मोहम्मद खान सबसे दक्ष दिखे मोदी को, खासकर जब बिहार में विधानसभा का चुनाब होने वाला है। वैसे भी आरिफ मोहम्मद खान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा द्वारा पोषित, सम्पोषित नहीं होने के बाद भी समय को ध्यान में रखकर उनकी ही बातों को देश के सामने रखते चले गए। स्वाभाविक है जब एक अल्पसंख्यक समुदाय का आदमी उनकी (भाजपा और आरएसएस) बातों को परोसेगा तो आकर्षण तो होगा ही।</p>
<figure id="attachment_6002" aria-describedby="caption-attachment-6002" style="width: 480px" class="wp-caption alignleft"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/anil-tyagi.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/anil-tyagi.jpg" alt="" width="480" height="480" class="size-full wp-image-6002" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/anil-tyagi.jpg 480w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/anil-tyagi-300x300.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/anil-tyagi-150x150.jpg 150w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/anil-tyagi-24x24.jpg 24w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/anil-tyagi-48x48.jpg 48w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/anil-tyagi-96x96.jpg 96w" sizes="auto, (max-width: 480px) 100vw, 480px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6002" class="wp-caption-text">अनिल त्यागी, संपादक जी-फाइल</figcaption></figure>
<p>देश के जाने माने <strong>पत्रकार और जी-फाइल के संपादक अनिल त्यागी</strong> कहते हैं कि &#8220;आरिफ मोहम्मद खान अच्छा वक्ता है, अच्छा अधिवक्ता है, लेकिन जब राजनीति में जीवित रहने का प्रश्न उठता है तो उनके पास विकल्प क्या है? कोई दो दशक तक राजनीति में बेरोजगार रहने के बाद &#8221;बुद्धम शरणम् गच्छामि&#8221; के जगह &#8221;कमलम शरणम गच्छामि&#8221; कर आरिफ मोहम्मद खान राजनीति में जीवित हो गए। कांग्रेस में जा नहीं सकते, जनता दल या बहुजन समाज पार्टी से निकले हुए हैं, समाजवादी में देख नहीं सकते या देश के अन्य राजनीतिक पार्टियां उन्हें स्थान क्यों दे? वैसी स्थिति में भाजपा का टोपी पहन लिए। जहाँ तक बिहार का राज्यपाल होने का सवाल है, चुनाव सर पर है, आरिफ मोहम्मद खान मुसलमान हैं और बिहार में मुसलमानों की संख्या सरकार बनाने और सरकार गिराने में अपना भूमिका अदा करने की क्षमता रखता है। स्वाभाविक है कि भाजपा को लाभ होगा।&#8221;</p>
<p><strong>त्यागी आगे कहते हैं कि बिहार में &#8220;नीतीश कुमार को मनोभ्रंश (डेमेन्सिया) की बीमारी हो गयी है। बिहार की राजधानी पटना की गलियों से लेकर राज्य के सबसे बाहरी जिलों के खेतों तक, लोग अपने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कथित रहस्यमयी बीमारी के बारे में बात कर रहे हैं। यह एक ऐसी बीमारी है जिसके बारे में कोई नहीं जानता, लेकिन हर कोई इसके बारे में अटकलें लगाता है। चिकित्सा विशेषज्ञ भी हैरान हैं। वे चिकित्सा की सीमाओं को पार करने और वैज्ञानिक अनिश्चितता के क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए तैयार नहीं हैं। लेकिन जब दबाव डाला गया और जांच की गई, तो उनमें से कुछ ने तर्क दिया कि मुख्यमंत्री संभवतः कुछ बीमारियों से पीड़ित हैं जो अंततः तंत्रिका कोशिकाओं के विनाश और मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा सकती हैं या पहुंचा रही हैं। आम बोलचाल में इसे डिमेंशिया कहा जाता है। लेकिन स्पष्ट निष्कर्ष पर न पहुंचें।&#8221;</strong></p>
<figure id="attachment_6004" aria-describedby="caption-attachment-6004" style="width: 640px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/aaa.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/aaa.jpg" alt="" width="640" height="360" class="size-full wp-image-6004" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/aaa.jpg 640w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/aaa-300x169.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6004" class="wp-caption-text">मुझे भेज दिए तो मैं आ गया</figcaption></figure>
<p>&#8220;राजनीतिक पंडितों का मानना है कि बिहार पर राज्य के एक पूर्व मुख्य सचिव और बिहार कैडर के एक आईएएस अधिकारी का शासन है, जो केंद्र में प्रधानमंत्री कार्यालय के मैट्रिक्स और भूलभुलैया के भीतर तैनात हैं। बिहार पर दिल्ली का शासन है, पटना पर नई दिल्ली का। नीतीश बाबू के कथित असामान्य व्यवहार पर भी विचार करें- पटना रैली और राज्य विधानसभा के सेंट्रल हॉल में पीएम नरेंद्र मोदी के पैर छूना। उनके पार्टी के सदस्य उनके अपरंपरागत व्यवहार के बारे में बात करते हैं। चूंकि यह मुख्यमंत्री की आलोचना करने या उनके बारे में बुरा बोलने का गलत समय है, इसलिए कोई भी उंगली या हाथ नहीं उठा रहा है। जेडीयू के अलावा, यह भाजपा के लिए भी अनुकूल है, यहां तक कि तेजस्वी यादव को भी, जिनकी नजर राज्य की गद्दी पर है।&#8221; स्वाभाविक है इस मनोभ्रंश का इस्तेमाल तो कोई करेगा ही। </p>
<p>उधर देश के जाने माने <strong>पत्रकार और राजनीतिक समीक्षक उमाकांत लखेड़ा</strong> कहते हैं कि &#8220;यह आज की बात नहीं है। आरिफ़ मोहम्मद पहले युवा कांग्रेस वाले समूह में आये। अरुण नेहरू, सत्यपाल मालिक, अरुण सिंह आदि थे। अस्सी के दशक में कांग्रेस में शामिल हुए और शामिल होते ही 1980 में कानपुर और 1984 में बहराइच से लोकसभा के लिए चुने गए। राजीव गांधी के मंत्रिमंडल में मंत्री भी बने। अच्छे वक्ता तो शुरू से रहे, समय को परखने की कला भी जानते थे, जानते हैं। सन 1986 में, उन्होंने मुस्लिम पर्सनल लॉ बिल के पारित होने पर मतभेदों के कारण भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस छोड़ दी, जिसे राजीव गांधी ने लोकसभा में पेश किया था। वह मुस्लिम पुरुषों को कुरान के अनुसार इद्दत अवधि के बाद अपनी तलाकशुदा पत्नी या पत्नियों को कोई रखरखाव देने से बचने में सक्षम बनाने वाले कानून के खिलाफ थे और इस मुद्दे पर राजीव गांधी के साथ मतभेदों के कारण उन्होंने इस्तीफा दे दिया।&#8221; </p>
<figure id="attachment_6005" aria-describedby="caption-attachment-6005" style="width: 1177px" class="wp-caption alignright"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/lakhera.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/lakhera.jpg" alt="" width="1177" height="1167" class="size-full wp-image-6005" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/lakhera.jpg 1177w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/lakhera-300x297.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/lakhera-1024x1015.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/lakhera-150x150.jpg 150w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/lakhera-768x761.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/lakhera-24x24.jpg 24w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/lakhera-48x48.jpg 48w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/lakhera-96x96.jpg 96w" sizes="auto, (max-width: 1177px) 100vw, 1177px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6005" class="wp-caption-text">वरिष्ठ पत्रकार उमाकांत लखेड़ा</figcaption></figure>
<p>यह सब तब शुरू हुआ जब 62 वर्षीय मुस्लिम महिला शाह बानो ने अप्रैल 1978 में अपने तलाकशुदा पति मोहम्मद अहमद खान, जो कि मध्य प्रदेश के इंदौर में एक प्रसिद्ध वकील थे, से भरण-पोषण की मांग करते हुए अदालत में याचिका दायर की। शाह बानो के पति खान ने नवंबर में बाद में तीन तलाक बोलकर उसे तलाक दे दिया और कहा कि वह उसे कोई भरण-पोषण देने के लिए बाध्य नहीं है क्योंकि वह इस्लामी कानून के तहत उसकी पत्नी नहीं है। दोनों की शादी 1932 में हुई थी और उनके पाँच बच्चे थे &#8211; तीन बेटे और दो बेटियाँ। शाह बानो के पति ने खान और उनकी दूसरी पत्नी के साथ रहने के बाद तीन साल पहले उसे घर से बाहर जाने के लिए मजबूर किया था। शाह बानो, जो अपने पति के खिलाफ अदालत गई थी, ने दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 123 के तहत अपने और अपने पांच बच्चों के लिए भरण-पोषण का दावा दायर किया। अगस्त 1979 में, शाह बानो ने स्थानीय अदालत में भरण-पोषण का मामला जीत लिया, जिसने खान को उसे भरण-पोषण प्रदान करने का आदेश दिया। हालांकि, खान ने इस आधार पर दावे का विरोध किया कि भारत में मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार पति को तलाक के बाद केवल इद्दत अवधि के लिए भरण-पोषण प्रदान करना आवश्यक है। कई साल बाद शाह बानो ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में संशोधित भरण-पोषण भत्ते की मांग करते हुए एक और याचिका दायर की। अप्रैल 1985 में, एक ऐतिहासिक फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने शाह बानो के पक्ष में फैसला सुनाया और उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा, जिसमें कहा गया कि वह अपने पति से भरण-पोषण पाने की हकदार है।</p>
<p>जबकि सुप्रीम कोर्ट ने मामले में गुजारा भत्ता पाने के अधिकार को बरकरार रखा, इस फैसले ने मुस्लिम पर्सनल लॉ से जुड़े मामलों में न्यायिक अतिक्रमण के दावे को लेकर एक राजनीतिक विवाद को जन्म दिया। ऐतिहासिक फैसला, जिसने नियमित अदालतों में विवाह और तलाक के मामलों में समान अधिकारों के लिए मुस्लिम महिलाओं की लड़ाई की नींव रखी थी, मुस्लिम समुदाय के भीतर अच्छा नहीं रहा। 1984 में चुनी गई तत्कालीन राजीव गांधी सरकार पर मुस्लिम महिला (तलाक पर संरक्षण अधिनियम), 1986 पारित करने के लिए दबाव डाला। इस कानून ने शाहबानो मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट दिया। 1986 के मुस्लिम महिला (तलाक के अधिकारों पर संरक्षण) अधिनियम ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को कमजोर कर दिया और तलाकशुदा महिला को केवल इद्दत की अवधि के दौरान या तलाक के 90 दिनों बाद तक भरण-पोषण देने की अनुमति दी।</p>
<p>राजीव गांधी के मुस्लिम तुष्टीकरण के सबसे मुखर विरोधी आरिफ मोहम्मद खान के रूप में अपनी सरकार के भीतर से प्रतिरोध का सामना करना पड़ा था। राजीव गांधी सरकार में राज्य मंत्री रहे आरिफ मोहम्मद खान ने संसद के पटल पर शाह बानो मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का जोरदार बचाव किया था। हालांकि, जब मुस्लिम कट्टरपंथियों ने राजीव गांधी पर दबाव डालना शुरू किया, तो सरकार ने शाह बानो मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को दरकिनार करने के लिए एक कानून लाने के लिए यू-टर्न ले लिया। जब राजीव गांधी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने के लिए मौलवियों के दबाव में आकर हार मान ली, तो निराश आरिफ मोहम्मद खान ने राजीव गांधी मंत्रिमंडल से बाहर निकलने और कांग्रेस पार्टी छोड़ने का फैसला किया। </p>
<p>फिर बाबरी मस्जिद का ताला खुलने की बात आयी। साल था 1986 और उस घटना में भी आरिफ मोहम्मद खान घटनाओं के केंद्र में थे। आरिफ मोहम्मद का मानना था कि बाबरी मस्जिद का ताला खुलना हिंदू समुदाय की मांगों को पूरा करने के लिए एक संतुलनकारी कार्य था, क्योंकि राजीव गांधी सरकार ने तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं के लिए भरण-पोषण पर शाहबानो मामले में सुप्रीम कोर्ट में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) की मांगों के आगे घुटने टेक दिए थे। खान का मानना था कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले (शाह बानो मामले) को पलटने और ताले हटाने की घोषणा दो सप्ताह के भीतर हुई। अधिकांश लोगों को यह एक संतुलनकारी कदम लगा और उन्हें उम्मीद थी कि अब दोनों आंदोलनकारी पक्ष संतुष्ट होंगे। </p>
<figure id="attachment_6006" aria-describedby="caption-attachment-6006" style="width: 2048px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/Arif-2.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/Arif-2.jpg" alt="" width="2048" height="1536" class="size-full wp-image-6006" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/Arif-2.jpg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/Arif-2-300x225.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/Arif-2-1024x768.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/Arif-2-768x576.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/Arif-2-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2048px) 100vw, 2048px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6006" class="wp-caption-text">मायावती, कांशीराम और आरिफ मोहम्मद खान (तस्वीर के लिए आभार)</figcaption></figure>
<p>1986 में ताले खोलने के पीछे की राजनीति पर बोलते हुए खान ने कहा था कि &#8220;एआईएमपीएलबी ने जोर देकर कहा कि शाह बानो मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला &#8216;मिल्ली तशक्खुस&#8217; के लिए खतरा है, जो एक अलग और विशिष्ट सामुदायिक पहचान है, और उन्होंने आंदोलन के दौरान बहुत आक्रामक और धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल किया&#8230; लेकिन 15 जनवरी, 1986 को इस आशय की घोषणा ने एक गंभीर झटका दिया और एक सप्ताह के भीतर सरकार को शाह बानो मामले से ध्यान हटाने के लिए कुछ करने की आवश्यकता महसूस हुई।&#8221; उन्होंने कहा था कि, &#8220;उस समय अयोध्या काम आया और स्थानीय प्रशासन &#8211; यानी जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक &#8211; व्यक्तिगत रूप से जिला न्यायालय (फैजाबाद) के समक्ष पेश हुए और कहा कि विवादित ढांचे के मुख्य द्वार से ताला हटाने से कोई कानून और व्यवस्था की समस्या पैदा नहीं होगी।&#8221;फरवरी 1986 में फैजाबाद जिला न्यायालय के आदेश पर बाबरी मस्जिद के ताले खोले गए। खैर। </p>
<p>इस घटना के बाद आरिफ मोहम्मद खान जनता दल में शामिल हो गए और 1989 में फिर से लोकसभा के लिए चुने गए। जनता दल के शासन के दौरान खान ने नागरिक उड्डयन और ऊर्जा मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री के रूप में कार्य किया। जनता दल को भी उन्होंने नमस्कार किया और फिर कांशीराम-मायावती वाली बहुजन समाज पार्टी में शामिल हो गए। शायद यह सब इसलिए किये होंगे कि कांग्रेस छोड़ने के बाद कांग्रेस उन्हें टिकट देने की बात सोचती भी नहीं। फिर जनता दल में भी उनके सम्बन्ध अच्छे नहीं रहे। संसद में बैठन के लिए बहुजन समाज पार्टी के अलावे दूसरा कोई विकल्प नहीं था। सन 1998 में बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर बहराइच से लोकसभा में प्रवेश किया। खान ने 1984 से 1990 तक मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। यानी सन 1990 के बाद राजनीतिक दृष्टि से &#8216;बेरोजगार&#8217; रहे। देश की बदलती राजनीतिक व्यवस्था, स्वरूप और नेतृत्व को भांपते  2004 में आरिफ मोहम्मद खान भारतीय जनता पार्टी। कहते हैं उस वर्ष कैसरगंज निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। </p>
<figure id="attachment_6007" aria-describedby="caption-attachment-6007" style="width: 1316px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/Arif-3-fotor-2025010311475.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/Arif-3-fotor-2025010311475.jpg" alt="" width="1316" height="1535" class="size-full wp-image-6007" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/Arif-3-fotor-2025010311475.jpg 1316w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/Arif-3-fotor-2025010311475-257x300.jpg 257w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/Arif-3-fotor-2025010311475-878x1024.jpg 878w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/Arif-3-fotor-2025010311475-768x896.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1316px) 100vw, 1316px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6007" class="wp-caption-text">का गवर्नर साहब !!!!! आइये&#8230; आइये</figcaption></figure>
<p><strong>अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की राजनीतिक कालखंड से लेकर 2000 के दशक वाले राजनीतिक कालखंड तक, देश में न केवल गंगा सफाई योजना और नामानि गंगे योजनाओं के तहत गंगा का पानी और प्रवाह बढ़ता गया, बदलता गया; देश में राजनीतिक नेतृते के साथ-साथ विचारधारों में में आमूल परिवर्तन आये। &#8216;सोच बदलो&#8217; और &#8216;देश बदलेगा&#8217; का नारा भी बुलंद हुआ।  वैसे में बुलंदशहर का वह व्यक्ति राजनीति में जीवित रहने के लिए भाजपा के शरण में आ गया। </strong></p>
<p>वरिष्ठ <strong>पत्रकार और भारतीय प्रेस पूर्व सदस्य राजीव रंजन नाग</strong> का कहना है कि &#8220;आरिफ मोहम्मद खान हिन्दू, हिन्दुत्वा, संस्कृति, धार्मिक सभी ग्रंथों को पढ़ लिए हैं, कंठस्थ कर लिए हैं जो अंततः भाजपा और नरेंद्र मोदी, अमित शाह की बोली में निहित होता है। अपनी वाक्पटुता के कारण खान किसी को भी दस मिनट में प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। अन्यथा औसतन राजनीतिक पार्टियों में उनका कालखंड पांच साल से अधिक नहीं होता है चाहे कांग्रेस हो, जनता दल हो, बहुजन समाज पार्टी हो। आज भाजपा में है। कल अगर बिहार में भाजपा की सरकार नहीं बन पाई (जिसके निमित्त उन्हें भेजा गया है ताकि मुसलमानों का मत भाजपा के पक्ष में किया जा सके) तो इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि उन्हें उठाकर कर्तव्य पथ पर रख दिया जाय। ये किरण बेदी जैसा व्यक्तित्व तो रखते नहीं।&#8221;</p>
<figure id="attachment_6008" aria-describedby="caption-attachment-6008" style="width: 720px" class="wp-caption alignright"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/Naag.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/Naag.jpg" alt="" width="720" height="689" class="size-full wp-image-6008" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/Naag.jpg 720w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/Naag-300x287.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/01/Naag-24x24.jpg 24w" sizes="auto, (max-width: 720px) 100vw, 720px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6008" class="wp-caption-text">वरिष्ठ पत्रकार राजीव रंजन नाग</figcaption></figure>
<p>बहरहाल, शायद देश के मतदाता भूल गए हों, लेकिन न्यायालय के दस्तावेजों में आरिफ मोहम्मद खान का भी नाम ऐतिहासिक हवाला खंड में उद्धृत था। हवाला मामले में सीबीआई का तर्क था कि वे रिश्वत के तीन प्राप्तकर्ताओं में से एक थे। वैसे न्यायालय सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया था। </p>
<p><strong>अब सवाल यह है कि नीतीश कुमार और लालू यादव दिखाने के लिए पटना के गांधी मैदान में जितना कबड्डी-कबड्डी खेलें, कुस्ती लड़ें, पटना से दिल्ली और मुंबई तक अखबारवाले, टीवी वाले जो भी कहें, लिखें, दिखाएं &#8211; इतना गाँठ बाँध लीजिये भाजपा की सरकार के नाम पर, भाजपा का मुख्यमंत्री के नाम पर दोनों &#8220;सहोदर भाइयों से भी बढ़कर हैं। अब सुशिल मोदी हैं नहीं और बिहार में भाजपा का कोई भी ऐसा नेता नहीं है जो प्रदेश में भाजपा के लिए ब्रह्मास्त्र बनकर खड़ा रहे। हम तो कहेंगे कि आरिफ मोहम्मद खान को यहाँ से निवृत होने के बाद आजीवन पेंशन की व्यवस्था कर दिए हैं मोदी जी।</strong> </p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/bihar-gets-new-governor-arif-mohammad-khan">&#8220;देते न आप साथ तो मर जाते हम कभी के &#8230; अपनी जुबान से आपके जज्बात कहेंगे&#8221; : ​मोदी जी से आरिफ मोहम्मद खान🙏</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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