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	<title>britain Archives - आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</title>
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	<description>आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</description>
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		<title>महारानी एलिजाबेथ द्वितीय एक ऐसी कद्दावर हस्ती थीं, जिन्होंने अपने देश और लोगों को प्रेरणादायी नेतृत्व प्रदान किया: मोदी ने कहा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 09 Sep 2022 05:54:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
		<category><![CDATA[britain]]></category>
		<category><![CDATA[elizabeth-II]]></category>
		<category><![CDATA[London]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि महारानी एलिजाबेथ द्वितीय एक ऐसी कद्दावर हस्ती थीं, जिन्होंने अपने देश और लोगों को प्रेरणादायी नेतृत्व प्रदान किया। वर्ष 2015 और 2018 में महारानी के साथ अपनी ‘यादगार’ मुलाकातों का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि महारानी एलिजाबेथ द्वितीय एक ऐसी कद्दावर हस्ती थीं, जिन्होंने अपने देश और लोगों को प्रेरणादायी नेतृत्व प्रदान किया। वर्ष 2015 और 2018 में महारानी के साथ अपनी ‘यादगार’ मुलाकातों का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि महारानी एलिजाबेथ द्वितीय सार्वजनिक जीवन में गरिमा और शालीनता की प्रतिमूर्ति रहीं।</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने महामहिम महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए ट्वीट किया कि: &#8220;महामहिम महारानी एलिजाबेथ द्वितीय को हमारे समय के एक दिग्गज के रूप में याद किया जाएगा। उन्होंने अपने राष्ट्र और लोगों को प्रेरक नेतृत्व प्रदान किया। उन्होंने सार्वजनिक जीवन में गरिमा और शालीनता का परिचय दिया। उनके निधन से आहत हूं। इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और ब्रिटेन के लोगों के साथ हैं।” &#8220;2015 और 2018 में ब्रिटेन की अपनी यात्राओं के दौरान मेरी महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के साथ यादगार भेंट हुईं। मैं उनकी गर्मजोशी और उदारता को कभी नहीं भूल सकता हूं। मैं उनके उत्साह पूर्ण भाव और सहृदयता को कभी नहीं भूलूंगा। एक बैठक के दौरान उन्होंने मुझे वह रूमाल दिखाया जो महात्मा गांधी ने उन्हें  उनके विवाह में उपहार में दिया था। मैं उस भावपूर्ण क्षण को हमेशा संजो कर रखूंगा।&#8221;</p>
<figure id="attachment_4445" aria-describedby="caption-attachment-4445" style="width: 650px" class="wp-caption alignleft"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/8.jpeg"><img fetchpriority="high" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/8.jpeg" alt="" width="650" height="547" class="size-full wp-image-4445" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/8.jpeg 650w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/8-300x252.jpeg 300w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></a><figcaption id="caption-attachment-4445" class="wp-caption-text">भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एलिजाबेथ II के साथ</figcaption></figure>
<p>उधर, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री लिज ट्रस ने कहा कि ब्रिटेन महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के निधन से ‘टूट गया’ है और दिवंगत सम्राज्ञी ‘वह चट्टान थीं, जिस पर आधुनिक ब्रिटेन का निर्माण हुआ था।’ एलिजाबेथ द्वितीय ने ट्रस को अपने निधन से महज 48 घंटे पहले प्रधानमंत्री नियुक्त किया था। ट्रस ने कहा, “महारानी के निधन की खबर से हम सब टूट गए हैं। यह देश और दुनिया के लिए एक बहुत बड़ा झटका है।”</p>
<p>ट्रस ने महारानी को वह चट्टान बताया, जिस पर आधुनिक ब्रिटेन का निर्माण हुआ था। उन्होंने कहा, “ब्रिटेन आज महारानी की वजह से एक महान देश बन पाया है। महारानी उनके साथ-साथ कई ब्रिटिश नागरिकों के लिए प्रेरणास्रोत थीं।” 10 डाउनिंग स्ट्रीट की ओर से जारी बयान के मुताबिक, ट्रस ने कहा, “कर्तव्य के प्रति उनका समर्पण हम सभी के लिए एक उदाहरण है।”</p>
<figure id="attachment_4446" aria-describedby="caption-attachment-4446" style="width: 647px" class="wp-caption alignright"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/7.jpeg"><img decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/7.jpeg" alt="" width="647" height="839" class="size-full wp-image-4446" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/7.jpeg 647w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/7-231x300.jpeg 231w" sizes="(max-width: 647px) 100vw, 647px" /></a><figcaption id="caption-attachment-4446" class="wp-caption-text">भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एलिजाबेथ II के साथ</figcaption></figure>
<p>एक रिपोर्ट के आधार पर ब्रिटेन में सबसे लंबे समय तक राज करने वाली महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का स्कॉटलैंड के बालमोरल कैसल में निधन हो गया। वह 96 वर्ष की थीं। महारानी ने 70 साल तक शासन किया। उनके निधन के साथ ही ब्रिटेन के इतिहास में किसी शासक के सबसे लंबे समय तक किए गऐ शासन का अंत हो गया है। बृहस्पतिवार को सुबह उनके स्वास्थ्य के बारे में चिंताएं बढ़ने के बाद उनका परिवार एबरडीनशायर में उनके स्कॉटिश इस्टेट में इकट्ठा होने लगा। वेल्स के पूर्व राजकुमार चार्ल्स (73) अब ब्रिटेन के नए सम्राट हैं। नए राजा को आधिकारिक तौर पर किंग चार्ल्स तृतीय के रूप में जाना जाएगा। इसकी आधिकारिक पुष्टि हो गई है। </p>
<p>बकिंघम पैलेस ने एक बयान में कहा, &#8216;महारानी का आज दोपहर बालमोरल में निधन हो गया।&#8217; बयान में कहा गया, &#8216;द किंग एंड द क्वीन कंसोर्ट (चार्ल्स एंड कैमिला) आज शाम बालमोरल में रहेंगे और कल (शुक्रवार) लंदन लौटेंगे।&#8217; शाही परिवार द्वारा जारी एक बयान में नए सम्राट चार्ल्स ने कहा, &#8216;मेरी प्यारी मां, महामहिम महारानी का निधन, मेरे और मेरे परिवार के सभी सदस्यों के लिए गहरे दुख का क्षण है। मुझे पता है कि उनके जाने के दुख को देश और राष्ट्रमंडल तथा दुनिया भर के अनगिनत लोगों द्वारा गहराई से महसूस किया जाएगा।&#8217; चार्ल्स (73) ने कहा, &#8216;हम महारानी और प्यारी मां के निधन पर बेहद शोक संतप्त हैं।&#8217; </p>
<figure id="attachment_4447" aria-describedby="caption-attachment-4447" style="width: 2048px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/4.jpeg"><img decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/4.jpeg" alt="" width="2048" height="1365" class="size-full wp-image-4447" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/4.jpeg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/4-300x200.jpeg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/4-1024x683.jpeg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/4-768x512.jpeg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/4-1536x1024.jpeg 1536w" sizes="(max-width: 2048px) 100vw, 2048px" /></a><figcaption id="caption-attachment-4447" class="wp-caption-text">एलिजाबेथ II</figcaption></figure>
<p>ब्रिटेन की नवनियुक्त प्रधानमंत्री लिज ट्रस ने महारानी के निधन की खबर पर कहा, &#8216;हम सभी गहरी पीड़ा में हैं। देश और दुनिया के लिए यह एक बड़ा झटका है।&#8217; उन्होंने महारानी को &#8216;एक चट्टान बताया, जिस पर आधुनिक ब्रिटेन बनाया गया&#8217;। उन्होंने कहा, &#8216;ब्रिटेन आज महान देश है वो उनकी वजह से है।&#8217; उन्होंने कहा कि महारानी उनके साथ-साथ कई ब्रितानियों के लिए एक व्यक्तिगत प्रेरणा थीं। ट्रस ने 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर एक बयान में कहा, &#8216;कर्तव्य के प्रति उनका समर्पण हम सभी के लिए एक उदाहरण है।&#8217; महारानी 1952 में गद्दी पर बैठी थीं और वह अभूतपूर्व सामाजिक परिवर्तन की गवाह रहीं।</p>
<p>उनके निधन के बाद उनके सबसे बड़े बेटे और उत्तराधिकारी चार्ल्स 14 राष्ट्रमंडल क्षेत्रों के प्रमुख के रूप में उनके अंतिम संस्कार और श्रद्धांजलि कार्यक्रम का नेतृत्व करेंगे। डॉक्टरों द्वारा महारानी को चिकित्सकीय देखरेख में रखने के बाद चार्ल्स और महारानी के करीबी परिवार के सदस्य एबरडीन के पास बालमोरल पहुंचे। उनके पोते प्रिंस विलियम, उनके भाई प्रिंस हैरी के साथ रास्ते में हैं।</p>
<figure id="attachment_4448" aria-describedby="caption-attachment-4448" style="width: 630px" class="wp-caption alignleft"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/2.jpeg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/2.jpeg" alt="" width="630" height="422" class="size-full wp-image-4448" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/2.jpeg 630w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/2-300x201.jpeg 300w" sizes="auto, (max-width: 630px) 100vw, 630px" /></a><figcaption id="caption-attachment-4448" class="wp-caption-text">भारत यात्रा के दौरान तत्कालीन राष्ट्रपति वेंकट रमण और एलिजाबेथ II </figcaption></figure>
<p>महारानी की बेटी राजकुमारी ऐनी पहले से ही स्कॉटिश महल में उनके साथ थीं और उनके अन्य बच्चे &#8211; प्रिंस एंड्रयू और प्रिंस एडवर्ड &#8211; बाद में उनके साथ शामिल हुए। एक परमार्थ कार्यक्रम के लिए लंदन में मौजूद प्रिंस हैरी और मेगन (ड्यूक एंड डचेस ऑफ ससेक्स) भी महारानी के ग्रीष्मकालीन निवास पर पहुंचे।</p>
<p>विलियम की पत्नी केट (डचेस ऑफ कैम्ब्रिज) विंडसर में हैं क्योंकि उनके बच्चों &#8211; प्रिंस जॉर्ज, प्रिंसेस चार्लोट और प्रिंस लुइस का बृहस्पतिवार को वहां एक नए स्कूल में पहला दिन था। आगामी दिनों में क्या होगा, इसके बारे में कोई आधिकारिक विवरण जारी नहीं किया गया है, लेकिन अनुमान है कि महारानी का पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा, जैसा कि एक सम्राट की निधन के बाद परंपरा रही है। यह भी उम्मीद है कि जनता के अंतिम दर्शन के लिए उनका पार्थिव शरीर को रखा जाए। किंग चार्ल्स तृतीय आने वाले दिनों में अंतिम योजनाओं पर हस्ताक्षर करेंगे। 96 वर्षीय महारानी उम्र संबंधी समस्याओं से पीड़ित थीं और उन्होंने इस सप्ताह की शुरुआत में स्कॉटलैंड में नयी प्रधानमंत्री लिज ट्रस की नियुक्ति सहित अपनी यात्रा में कटौती की थी।</p>
<figure id="attachment_4449" aria-describedby="caption-attachment-4449" style="width: 1790px" class="wp-caption alignleft"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/1.jpeg"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/1.jpeg" alt="" width="1790" height="1350" class="size-full wp-image-4449" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/1.jpeg 1790w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/1-300x226.jpeg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/1-1024x772.jpeg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/1-768x579.jpeg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2022/09/1-1536x1158.jpeg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1790px) 100vw, 1790px" /></a><figcaption id="caption-attachment-4449" class="wp-caption-text">एलिजाबेथ II </figcaption></figure>
<p>‘बीबीसी’ के अनुसार, ब्रिटिश साम्राज्य के अंतिम वर्षों से सोशल मीडिया के युग में राजशाही का नेतृत्व करते हुए, वह दुनिया की सबसे अधिक मान्यता प्राप्त और सम्मानित शख्सियतों में से एक बन गईं। एलिजाबेथ द्वितीय छह फरवरी 1952 को अपने पिता किंग जॉर्ज षष्ठम की मृत्यु के बाद महारानी बनीं। अगले वर्ष वेस्टमिंस्टर एबे में उनका राज्याभिषेक हुआ। उनका 70 वर्षों का शासन महारानी विक्टोरिया के शासन काल से सात वर्ष अधिक था। (पीटीआई/भाषा की अदिति खन्ना के सौजन्य से) </p>
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		<title>माफ़ी तो भारत के १२५ करोड़ लोगों को भी माँगना चाहिए उधम सिंह से, जल्लिआंवाला बाग़ में मारे गए निहथ्थे लोगों के आज के परिजनों से</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/nation/100-year-of-jallianwala-bagh-no-apology</link>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Apr 2019 10:13:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[100 year of jallianwala bagh]]></category>
		<category><![CDATA[amritsar]]></category>
		<category><![CDATA[britain]]></category>
		<category><![CDATA[India]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>अमृतसर/नई दिल्ली : पिछले दिनों ब्रिटेन की प्रधान मंत्री थेरेसा मे ने सौ वर्ष पूर्व अमृतसर शहर के बीचोबीच जलियाँवाला बाग़ में हुए हत्याकांड को ब्रिटिश भारतीय इतिहास पर ‘शर्मसार करने वाला धब्बा’ बताया लेकिन उन्होंने इस मामले में औपचारिक माफी नहीं मांगी। उन्होंने इस घटना पर ‘खेद’ जताया जो ब्रिटिश सरकार पहले ही जता [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>अमृतसर/नई दिल्ली : पिछले दिनों ब्रिटेन की प्रधान मंत्री थेरेसा मे ने सौ वर्ष पूर्व अमृतसर शहर के बीचोबीच जलियाँवाला बाग़ में हुए हत्याकांड को ब्रिटिश भारतीय इतिहास पर ‘शर्मसार करने वाला धब्बा’ बताया लेकिन उन्होंने इस मामले में औपचारिक माफी नहीं मांगी। </p>
<p>उन्होंने इस घटना पर ‘खेद’ जताया जो ब्रिटिश सरकार पहले ही जता चुकी है। उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘1919 के जलियांवाला बाग नरसंहार की घटना ब्रिटिश भारतीय इतिहास पर शर्मसार करने वाला धब्बा है। जैसा कि महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने 1997 में जलियांवाला बाग जाने से पहले कहा था कि यह भारत के साथ हमारे अतीत के इतिहास का दुखद उदाहरण है।’’ </p>
<p>2010 से 2016 तक ब्रिटेन के प्रधानमंत्री पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने भी 2013 में भारत दौरे पर इसे इतिहास की बेहद शर्मनाक घटना बताया था। हालांकि, उन्होंने भी माफी नहीं मांगी थी। </p>
<p><strong>माफ़ी मंगवाने की राजनीति </strong></p>
<p>इस साल फरवरी में इस नरसंहार की जिम्मेदार ब्रिटिश सरकार से माफी मंगवाने के लिए पंजाब सरकार ने विधानसभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया था। इस प्रस्ताव के जरिए केंद्र सरकार से कहा गया था कि वह ब्रिटिश सरकार पर माफी मांगने का दबाव बनाए। अमृतसर में 13 अप्रैल 1919 को हुए जलियांवाला बाग कांड में ब्रिटिश सैनिकों ने खुलेआम शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर गोलियां चला दी थीं। आंकड़ों के अनुसार, इस हत्याकांड में 400 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों की मौत हुई थी। हालांकि, दावा है कि इसमें 1000 से ज्यादा लोग मारे गए थे। मरने वालों में औरतें और बच्चे भी शामिल थे। </p>
<p><strong>एक सवाल</strong> </p>
<p>अब सवाल यह है कि सन १९१९ में अविभाजित भारत की आवादी 250737,0 थी। आज सौ साल बाद विभाजित भारत की वर्तमान आवादी 1304263,0 है। अगर ब्रिटेन की प्रधान मन्त्री जालियांवाल बाग हत्याकांड पर सिर्फ अफसोस जाहिर किया और इसे तत्कालीन ब्रिटिश शासन के लिए शर्मनाक धब्बा करार दिया है और किसी प्रकार की कोई माफी नहीं मांगी तो इसमें अचरज़ क्या है और राजनीति क्यों?</p>
<p><strong>आज भारत के कितने लोग जल्लियाँवाला बाग़ से परिचित हैं ? उस हत्याकाण्ड से अवगत है? कितने दादा-दादी, नाना-नानी, माता-पिता अपने-अपने संतानों को जलियाँवाला बाग़ के बारे में बताये हैं ? कितने लोग उधम सिंह के बारे में बताये हैं ? कितने लोग उधम सिंह या उस हत्याकाण्ड में मारे गए आज के उनके वंशजों की पड़ताल किये हैं ? ​उनके वंशज भी ​भूखे नहीं सोएं, उनके बच्चे भी शिक्षित हों, अब्बल हो​, उन्हें भी सुलभ स्वास्थ की सुविधाएँ मिलें, उन्हें भी समाज में सम्मानित जीवन जीने का सम्पूर्ण अवसर मिले, उन्हें भी राष्ट्रीय त्योहारों में न केवल अमृतसर बल्कि सम्पूर्ण भारत में ससम्मान आमंत्रण मिले, उन्हें भी भारत का ऐतिहासिक परिवार मन जाय​ -कितने लोग उन​ ​तक पहुंचे हैं? </strong></p>
<p>कोई नहीं। </p>
<p>इतनी बड़ी आवादी वाले देश में उधम सिंह जैसा क्रान्तिकारी या अन्य क्रान्तिकारियों, जिन क्रान्तिकारियों ने मातृभूमि की स्वतन्त्रता के लिए शहीद हो गए, उनके आज के परिवार या उनके वंशजों को देखने वाला है क्या कोई? </p>
<p>कोई नहीं। </p>
<p>इतना ही नहीं, जल्लिआंवाला मेमोरियल ट्रस्ट को देखने वाले सुकुमार मुखर्जी, जो इस हत्याकांड के बाद और मेमोरियल ट्रस्ट बनने के बाद अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी है, उन्हें भी पदच्युत करने की चतुर्दिक प्रयास जारी है। </p>
<p><strong>माफ़ी तो हरेक भारतीय को माँगना चाहिए उधम सिंह से, उनके परिवार-परिजनों से, उस हत्याकांड ​में मारे गए प्रत्येक निर्दोष लोगों ​के जीवित परिवारों को ढूंढकर उन परिवारों से, उनके परिजनों से जो इसी देश में, उसी राज्य में, उसी शहर में साँस ले रहे हैं  &#8211; लेकिन हमने ऐसा किया क्या? </strong></p>
<p>कभी नहीं। </p>
<p><figure id="attachment_985" aria-describedby="caption-attachment-985" style="width: 817px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.sundaypost.in/wp-content/uploads/2019/04/Jeet-Singh.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.sundaypost.in/wp-content/uploads/2019/04/Jeet-Singh.jpg" alt="2011- एक किताब जिसने जीत सिंह का जीवन बदला " width="817" height="768" class="size-full wp-image-985" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2019/04/Jeet-Singh.jpg 817w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2019/04/Jeet-Singh-300x282.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2019/04/Jeet-Singh-768x722.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2019/04/Jeet-Singh-320x301.jpg 320w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2019/04/Jeet-Singh-640x602.jpg 640w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2019/04/Jeet-Singh-360x338.jpg 360w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2019/04/Jeet-Singh-720x677.jpg 720w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2019/04/Jeet-Singh-800x752.jpg 800w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2019/04/Jeet-Singh-696x654.jpg 696w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2019/04/Jeet-Singh-447x420.jpg 447w" sizes="auto, (max-width: 817px) 100vw, 817px" /></a><figcaption id="caption-attachment-985" class="wp-caption-text">2011- एक किताब जिसने जीत सिंह का जीवन बदला</figcaption></figure><br />
नौ साल पहले की बात है। साल 2010 और महीना जून। अपने प्रयास के तहत अब तक 18 वंशजों को ढूंढा था । पैसे की जरुरत वैसे सबों को होती है, लेकिन जीत सिंह के झुर्री वाले चमड़े से छोड़ती हड्डियों को देखकर अपना सम्पूर्ण फैसला जीत सिंह के लिए लिया और यह भी निर्णय लिया की इस किताब से जीत सिंह और उनके परिवार को  एक नया जीवन, दो वक्त की रोटी, तन पर अच्छा कपडा और चेहरे पर खुशियां जरूर लाऊंगा। </p>
<p>यह स्थिति सिर्फ उधम सिंह जैसे शहीदों आय उनके वंशजों की नहीं है; यह स्थिति भारत के उन हज़ारों गुमनाम क्रांतिकारियों, शहीदों और उनके वंशजों के साथ है।  जीवित तो सिर्फ वह शहीद या उनके वंशज हैं जिनका राजनितिक बाज़ार में आज भी मोल है। </p>
<p>उस समय और आज भी मैं 125 करोड़ भारत के लोगों में महज एक कीड़े-मकोड़े की तरह था। मेरी औकात भिखारियों से भी बदतर था, आज भी है अपने प्रयास के लिए। सुनते हैं यहाँ राष्ट्रभक्तों की बाढ़ है। चार की संख्या वाले प्रत्येक घरों में न्यूनतम दो व्यक्ति नेताजी अवश्य हैं। राष्ट्रभक्तों की तो बात ही नहीं करें &#8211; यत्र-तत्र-सर्वत्र। </p>
<p>धुरी, लहरागागा, मालकोटला, मूनक, अहमदगढ़, भवानीगढ़, संगरूर और सुनाम शहरों वाला पंजाब का संगरूर जिला। दिल्ली से कोई 260 किलोमीटर दूर। यहाँ नेतालोग पांच साल पर ही आते हैं वह भी जरुरत पड़ने पर;  नहीं तो चंडीगढ़ में बैठे-बैठे अपने सम्पोषित नेताओं के माध्यम से अपनी-अपनी राजनीतिक करते हैं। हाँ प्रत्येक चुनाब के समय चाहे पंचायत का हो या संसद का &#8211; इस भूमि को राजनितिक बाज़ार में बेचने में तनिक भी लज्जा नहीं दिखाते। सम्पूर्ण निर्लज्जता के साथ इस भूमि को जिसने उधम सिंह जैसे वीर योद्धा को जन्म दिया, बेचते थकते नहीं &#8211; भले ही शेर सिंह @ उधम सिंह का वंशज मरने के लिए जीते जी स्वतंत्र भारत में एक-एक सांस गिनता हो।  </p>
<p>जीत सिंह महज एक आदमी नहीं बल्कि उस योद्धा के परिवार का वंशज है जिसके पूर्वज हज़ारों लोगों की निर्दोष हत्या का बदला अकेले लिए थे। 26 दिसम्बर 1899 को इसी गाँव में कम्बोज परिवार में जन्मे शेर सिंह @ उधम सिंह के पिता 1901 में और माता 1907 ईश्वर के पास चले गए थे। फिर आम बच्चों की तरह वह बच्चा भी अनाथालय का शरण लिए वह भी वाहे गुरु के शहर अमृतसर में। सन  1917 में उनके बड़े भाई का भी देहांत हो गया। वह पूरी तरह अनाथ हो गए। 1919 में उन्होंने अनाथालय छोड़ दिया और क्रांतिकारियों के साथ मिलकर आजादी की लड़ाई में शमिल हो गए।</p>
<p>उधमसिंह 13 अप्रैल 1919 को घटित जल्लियांवाला बाग़ हत्याकांड के प्रत्यक्षदर्शी थे। इस घटना से उधमसिंह तिलमिला गए और उन्होंने जलियाँवाला बाग की मिट्टी हाथ में लेकर माइकल ओ डायर को सबक सिखाने की प्रतिज्ञा ले ली। माईकल ओ&#8217; डायर (सर माईकल फ्राँसिस ओ&#8217; डायर) उस हत्याकांड के समय पंजाब के गर्वनर जनरल थे।</p>
<p>उधम सिंह को अपने सैकड़ों भाई-बहनों की मौत का बदला लेने का मौका 1940 में मिला। जलियांवाला बाग हत्याकांड के 21 साल बाद 13 मार्च 1940 को रायल सेंट्रल एशियन सोसायटी की लंदन के काक्सटन हाल में बैठक थी जहां माइकल ओ&#8217; डायर भी वक्ताओं में से एक थे। उधम सिंह ने माइकल ओ डायर पर गोलियां दाग दीं। दो गोलियां माइकल ओ डायर को लगीं जिससे उसकी तत्काल मौत हो गई। उधम सिंह ने वहां से भागने की कोशिश नहीं की और अपनी गिरफ्तारी दे दी। उन पर मुकदमा चला। 4 जून 1940 को उधम सिंह को हत्या का दोषी ठहराया गया और 31 जुलाई 1940 को उन्हें पेंटनविले जेल में फांसी दे दी गई। </p>
<p>इन विगत वर्षों में जल्लिआंवाला बाग़ का, उधम सिंह के नाम का भारतीय राजनीतिक बाज़ार में भरपूर विपरण किया गया लेकिन न कोई उधम सिंह के परिजनों के पास पहुंचे और न कोई इस हत्याकांड में मारे गए गुमनाम मृतकों के आज के जीवित परिवारों को ढूंढा। तो बात तो वहीँ आकर रुकी न &#8211; माफ़ी तो आखिर हम भारतियों को भी उधम सिंह से या उन मृतकों से, उनके आज के परिवार-परिजनों से मांगनी चाहिए न ?</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/nation/100-year-of-jallianwala-bagh-no-apology">माफ़ी तो भारत के १२५ करोड़ लोगों को भी माँगना चाहिए उधम सिंह से, जल्लिआंवाला बाग़ में मारे गए निहथ्थे लोगों के आज के परिजनों से</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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