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	<title>ayodhya Archives - आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</title>
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	<description>आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</description>
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		<title>&#8230;&#8230; लेकिन पुरुष प्रधान समाज में &#8216;जानकी&#8217; के लिए जय जयकार कौन करेगा? मिथिला में आज भी जानकियों की स्थिति  बेहतर नहीं है😢</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/shriram-temople-in-ayodhya-dedicated-to-nation</link>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 22 Jan 2024 13:42:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सीतामढ़ी / दरभंगा / नई दिल्ली : कई शताब्दी बाद नए तेवर में अयोध्या में राम आ गए। उनके आने से पूरा भारत राष्ट्र राम मय हो गया है। लोग कह रहे हैं कि रोगियों के रोग दूर होते दिख रहे हैं। अपाहिज भी लंगड़ाकर ही सही, चलने का यत्न कर रहा है। गूंगा-बहरा भी &#8216;राम [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>सीतामढ़ी / दरभंगा / नई दिल्ली : कई शताब्दी बाद नए तेवर में अयोध्या में राम आ गए। उनके आने से पूरा भारत राष्ट्र राम मय हो गया है। लोग कह रहे हैं कि रोगियों के रोग दूर होते दिख रहे हैं। अपाहिज भी लंगड़ाकर ही सही, चलने का यत्न कर रहा है। गूंगा-बहरा भी &#8216;राम राम&#8217; बोलने &#8211; सुनने की कोशिश कर रहा है। दिव्यांग भी उछलकर मंदिरों की घंटियों को बजने की कोशिश कर रहा है । दो पाया से लेकर चार पाया तक, सजीव से लेकर निर्जीव तक सभी के मुखमण्डलों पर प्रसन्नता दिख रही है &#8211; आखिर राम आ गए है। किसी के लिए राम बेटा हैं, तो किसी के लिए &#8216;जमाय&#8217;, किसी के लिए &#8216;आदर्श&#8217; हैं तो किसी की लिए &#8216;मर्यादा&#8217; &#8211; सभी अपने-अपने तरह से राम को अपना समर्पण दे  रहे हैं। लेकिन जानकी कहाँ चली गयी?</strong></p>
<p>विगत कई महीनों से, वर्षों से जब से राम के आने की सुगबुगाहट देश की राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक गलियारों में, देश के राजनीतिक मानचित्र पर लिखे जाने लगे, सबों का ध्यान राम की ओर अटक गया। लाखों शब्द लिखे गए &#8211; कुछ पक्ष में, कुछ विपक्ष में, कुछ सकारात्मक तो कुछ नकारात्मक &#8211; परन्तु &#8216;जानकी&#8217; को सभी भूल गए। जानकी के बारे में पूरब-पश्चिम-उत्तर-दक्षिण में रहने वाले भारत के लोग ही नहीं, जानकी के मायके मिथिला के लोग भी, मिथिला की महिलाएं भी &#8216;जानकी को याद&#8217; नहीं की।, एक बार भी नहीं। </p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/2-3.jpg"><img fetchpriority="high" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/2-3.jpg" alt="" width="1744" height="1188" class="aligncenter size-full wp-image-5256" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/2-3.jpg 1744w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/2-3-300x204.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/2-3-1024x698.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/2-3-768x523.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/2-3-1536x1046.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/2-3-218x150.jpg 218w" sizes="(max-width: 1744px) 100vw, 1744px" /></a></p>
<p>आज के पत्रकारों को, मिथिला के लोगों को (जो न्यूनतम 40 वर्ष के होंगे) शायद मालूम नहीं होगा कि तीन दशक पूर्व पटना के अख़बारों में प्रकाशित एक लेख मिथिला की महिलाओं को अश्रुपात कर दिया था। उस अखबार का कतरन काटकर लोग देवी-देवताओं के पास रख रहे थे &#8211; श्रद्धा स्वरुप। वैसे आज भी सुबह-सवेरे 10 . 30 बजे सहरसा-मनिहारी के बीच जानकी एक्सप्रेस छुक-छुक गाड़ी चलती हैं और इन दो स्थानों के बीच रहने वाले लोगों की सेवा करती हैं, पूर्व की तरह। लेकिन मुझे याद है कि नब्बे के दशक के उत्तरार्ध दरभंगा से आगे छोटी लाइन को बड़ी लाइन में बदलने के कारण मिथिला की जानकी एक्सप्रेस (इस ट्रेन का नाम माता सीता यानी जानकी के नाम पर है) के साथ जो व्यवहार हुआ था। ट्रेन को बंद कर दिया गया था, उसी तरह जिस तरह मिथिला में लड़कियों को स्वतंत्रता पूर्वं घर से बाहर नहीं निकलने दिया जाता है (अपवाद छोड़कर) । </p>
<p><strong>जानकी एक्सप्रेस के साथ हुए व्यवहार के मद्दे नजर पटना के एक वरिष्ठ पत्रकार श्री ज्ञानवर्धन मिश्र एक कहानी किये। वैसे कहानी जानकी एक्सप्रेस ट्रेन से सम्बंधित थी, लेकिन शब्दों का चुनाव और वाक्यों का विन्यास कुछ इस कदर था की पाठकों के ह्रदय को वेध दिया था, खास कर महिलाओं के ह्रदय को। पाठक &#8216;ट्रेन के साथ हुए व्यवहार&#8217; को &#8221;जानकी/सीता के साथ हुआ व्यवहार समझ रहे थे। </strong></p>
<p>उन दिनों जानकी ट्रेन के बहाने <strong>ज्ञानवर्धन मिश्र</strong> की कहानी मिथिला के लोगों को, खासकर मिथिला की महिलाओं को द्रवीभूत कर दिया था । मेरी माँ कभी कभार अखबार पढ़ती थी। संयोगवश उन दिनों गाँव में थी और उस कहानी को पढ़ी थी। कहानी की मार्मिकता कुछ ऐसी थी कि गाँव-घर के लोग, खासकर महिलाएं, अखबार के उस स्थान को काट काट, लई ,(आटा को गरम कर चिपकाने में इस्तेमाल किया जाता है) से कूट (मोटा गत्ता) में साटकर अपने इष्ट देवी-देवता के पास भी रहे थे &#8211; जानकी के सम्मानार्थ। लेकिन आज भी वही प्रश्न है क्या जानकी को वह सम्मान मिला जिसकी वह हकदार थी ? शायद नहीं।</p>
<figure id="attachment_5257" aria-describedby="caption-attachment-5257" style="width: 2560px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/jj-scaled.jpg"><img decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/jj-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1428" class="size-full wp-image-5257" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/jj-scaled.jpg 2560w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/jj-300x167.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/jj-1024x571.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/jj-768x428.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/jj-1536x857.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/jj-2048x1142.jpg 2048w" sizes="(max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5257" class="wp-caption-text">जानकी का जनकपुर</figcaption></figure>
<p>आज अयोध्या में राम अपने घर नए स्वरुप में आ गए। आश्चर्य की बात यह है कि आज भी मिथिला के लोग &#8216;जमाय&#8217; के नाम को भले जप रहे हैं, बेटी &#8216;जानकी&#8217; के लिए एक बार भी जयजयकार नहीं किये। मिथिला का प्रारब्ध यही है। हर घर में &#8216;जानकी&#8217; एक नहीं कई हैं, लेकिन सभी &#8216;राम&#8217; और &#8216;श्याम&#8217; की आराधना करते हैं। </p>
<p>वैसे &#8216;जानकी&#8217; भले &#8216;अयोध्या नरेश दशरथ की बहु हों, लेकिन मिथिला में जानकी तो बेटी थी, हैं भी, लेकिन  &#8216;जानकी को वह स्थान नहीं मिला जिसकी वे हकदार थी, हकदार हैं। वैसे आज भी उत्तर बिहार के इस क्षेत्र में रहने वाले माता-पिता की नज़रों में उनके घरों में पलने वाली &#8216;जानकियों&#8217; की स्थिति बहुत बेहतर नहीं है। विश्वास नहीं हो तो इस क्षेत्र में जितनी भी शैक्षणिक संस्थाएं हैं, स्वास्थ्य केंद्र हैं, सामाजिक दालान हैं, सांस्कृतिक गलियां हैं, कारावास में बंद पुरुषों के बंदी के कारण हैं &#8211; पड़ताल के लिए एक नजर घुमा लें। आप कल भी मूक-बधिर रहे, आगे भी रहेंगे। </p>
<figure id="attachment_5258" aria-describedby="caption-attachment-5258" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150955.jpg"><img decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150955.jpg" alt="" width="2200" height="1425" class="size-full wp-image-5258" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150955.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150955-300x194.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150955-1024x663.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150955-768x497.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150955-1536x995.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150955-2048x1327.jpg 2048w" sizes="(max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5258" class="wp-caption-text">PM at the Pran Pratishtha ceremony of Shree Ram Janmaboomi Temple in Ayodhya, Uttar Pradesh on January 22, 2024.</figcaption></figure>
<p>आइये वापस अयोध्या चलते हैं। भारत के राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को अयोध्या के ऐतिहासिक स्थान पर इतिहास लिखने के लिए बधाई देते कहती हैं कि &#8220;माननीय प्रधानमंत्री जी, अयोध्या धाम में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के पावन अवसर पर शुभकामनाओं के लिए आपका बहुत-बहुत आभार। मुझे विश्वास है कि यह ऐतिहासिक क्षण भारतीय विरासत एवं संस्कृति को और समृद्ध करने के साथ ही हमारी विकास यात्रा को नए उत्कर्ष पर ले जाएगा।&#8221; जानकी की चर्चा भारत के राष्ट्राध्यक्ष भी नहीं की। </p>
<p>प्रधानमंत्री को अपने शुभकामना सन्देश में उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ ने कहा कि &#8220;आज श्री राम जन्मभूमि अयोध्या की ऐतिहासिक नगरी में आयोजित, युगांतरकारी भव्य राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के शुभ अवसर की हार्दिक शुभकामनाएं ! हर्ष और उल्लास से सराबोर यह अवसर देश के गौरव के प्रति राष्ट्र की असीम जागृत चेतना का द्योतक है। अपने संकल्प को सफलतापूर्वक सिद्ध करने पर, प्रधानमंत्री का कोटिशः अभिनंदन !&#8221; </p>
<p>वे आगे कहते हैं कि &#8220;22 जनवरी का यह दिन, हमारी सभ्यता के इतिहास में &#8220;दिव्यता के साथ साक्षात्कार&#8221; के क्षण के रूप में परिभाषित रहेगा। आज के दिन प्रभु श्री राम के क्षमा, सत्यनिष्ठा, पराक्रम, शालीनता, दया और करुणा जैसे सद्गुणों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लें जिससे हमारे चतुर्दिक शांति, सौहार्द, शुचिता, शुभता और विद्वत्ता का प्रकाश फैले।&#8221; <strong>उपराष्ट्रपति भी जानकी को ध्यान नहीं दिए &#8211; जबकि जानकी के बिना राम अस्तित्वहीन थे, हैं। </strong></p>
<figure id="attachment_5259" aria-describedby="caption-attachment-5259" style="width: 1580px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150992-scaled.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150992-scaled.jpg" alt="" width="1580" height="2560" class="size-full wp-image-5259" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150992-scaled.jpg 1580w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150992-185x300.jpg 185w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150992-632x1024.jpg 632w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150992-768x1245.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150992-948x1536.jpg 948w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150992-1264x2048.jpg 1264w" sizes="auto, (max-width: 1580px) 100vw, 1580px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5259" class="wp-caption-text">PM at the Pran Pratishtha ceremony of Shree Ram Janmaboomi Temple in Ayodhya, Uttar Pradesh on January 22, 2024.</figcaption></figure>
<p>इतना ही नहीं, केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा है कि अयोध्या में राम मंदिर में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा का संकल्प पूरा होने पर 5 सदी की प्रतीक्षा और प्रतिज्ञा आज पूर्ण हुई है। उनके अनुसार “जय श्री राम…5 सदी की प्रतीक्षा और प्रतिज्ञा आज पूर्ण हुई। आज का दिन करोड़ों रामभक्तों के लिये कभी ना भूलने वाला दिन है। आज जब हमारे रामलला अपने भव्य मंदिर में विराजमान हुए हैं, तब असंख्य राम भक्तों की तरह मैं भी भाव विभोर हूँ। इस भावना को शब्दों में समेट पाना संभव नहीं है। इस पल की प्रतीक्षा में न जाने हमारी कितनी पीढ़ियां खप गईं, लेकिन कोई भी डर और आतंक रामजन्मभूमि पर फिर से मंदिर बनाने के संकल्प और विश्वास को डिगा नहीं पाया। आज माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में यह संकल्प सिद्ध हुआ है। इसके लिए मैं हृदय की गहराइयों से उनका आभार व्यक्त करता हूँ।“</p>
<p>केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि “आज के इस पावन दिन मैं सदियों तक इस संघर्ष और संकल्प को जीवित रखने वाले महापुरुषों को भी नमन करता हूँ, जिन्होंने अनेक अपमान और यातनाएँ सहीं, पर धर्म का मार्ग नहीं छोड़ा। विश्व हिंदू परिषद्, हजारों श्रेष्ठ संत और असंख्य नामी-गुमनामी लोगों के संघर्ष का आज सुखद व सुफल परिणाम आया है।यह विशाल श्री राम जन्मभूमि मंदिर युगों-युगों तक अविरल अविनाशी सनातन संस्कृति का अद्वितीय प्रतीक रहेगा।” <strong>सम्मानित गृहमंत्री भी जानकी की चर्चा नहीं किये। </strong></p>
<p>उधर, पीढ़ियों से, धार्मिक महत्व से जुड़ा होने के कारण अयोध्या, भगवान राम की जन्मस्थली के रूप में आराधना का स्‍थल रहा है और दुनिया भर में लाखों लोगों के लिए आध्यात्‍म के केन्‍द्र के रूप में कार्य करता रहा है। हालाँकि, हाल के वर्षों में एक असाधारण बदलाव देखने को मिला है, जिसमें शहर की तकदीर बदली और उसकी प्रगति और विकास का ताना-बाना विस्‍तार से बुना गया। विकास संबंधी पहलों की सावधानीपूर्वक तैयार की गई योजना और उनके कार्यान्वयन ने शहर के पुनरुत्थान का मार्ग प्रशस्त किया तथा संस्कृति और समृद्धि के प्रकाश स्‍तम्‍भ के रूप में इसकी कायाकल्प कर दी है।  &#8220;यह स्थान अब स्वर्ग है।&#8221;</p>
<p><strong>उधर प्राण-प्रतिष्ठा के बाद प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी कहते हैं &#8221;आज हमारे राम आ गए हैं! सदियों की प्रतीक्षा के बाद हमारे राम आ गए हैं। सदियों का अभूतपूर्व धैर्य, अनगिनत बलिदान, त्याग और तपस्या के बाद हमारे प्रभु राम आ गये हैं। इस शुभ घड़ी की आप सभी को, समस्त देशवासियों को, बहुत-बहुत बधाई।&#8221;</strong></p>
<figure id="attachment_5260" aria-describedby="caption-attachment-5260" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150988.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150988.jpg" alt="" width="2200" height="2482" class="size-full wp-image-5260" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150988.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150988-266x300.jpg 266w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150988-908x1024.jpg 908w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150988-768x866.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150988-1361x1536.jpg 1361w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150988-1815x2048.jpg 1815w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5260" class="wp-caption-text">PM at the Pran Pratishtha ceremony of Shree Ram Janmaboomi Temple in Ayodhya, Uttar Pradesh on January 22, 2024.</figcaption></figure>
<p>प्रधानमंत्री आगे कहते हैं कि &#8220;मैं अभी गर्भगृह में ईश्वरीय चेतना का साक्षी बनकर आपके सामने उपस्थित हुआ हूँ। कितना कुछ कहने को है&#8230; लेकिन कंठ अवरुद्ध है। मेरा शरीर अभी भी स्पंदित है, चित्त अभी भी उस पल में लीन है। हमारे रामलला अब टेंट में नहीं रहेंगे। हमारे रामलला अब इस दिव्य मंदिर में रहेंगे। मेरा पक्का विश्वास है, अपार श्रद्धा है कि जो घटित हुआ है इसकी अनुभूति, देश के, विश्व के, कोने-कोने में रामभक्तों को हो रही होगी। ये क्षण अलौकिक है। ये पल पवित्रतम है। ये माहौल, ये वातावरण, ये ऊर्जा, ये घड़ी&#8230; प्रभु श्रीराम का हम सब पर आशीर्वाद है। 22 जनवरी, 2024 का ये सूरज एक अद्भुत आभा लेकर आया है। 22 जनवरी, 2024, ये कैलेंडर पर लिखी एक तारीख नहीं। ये एक नए कालचक्र का उद्गम है।&#8221;</p>
<p>प्रधानमंत्री के अनुसार, राम मंदिर के भूमिपूजन के बाद से प्रतिदिन पूरे देश में उमंग और उत्साह बढ़ता ही जा रहा था। निर्माण कार्य देख, देशवासियों में हर दिन एक नया विश्वास पैदा हो रहा था। आज हमें सदियों के उस धैर्य की धरोहर मिली है, आज हमें श्रीराम का मंदिर मिला है। गुलामी की मानसिकता को तोड़कर उठ खड़ा हो रहा राष्ट्र, अतीत के हर दंश से हौसला लेता हुआ राष्ट्र, ऐसे ही नव इतिहास का सृजन करता है। आज से हजार साल बाद भी लोग आज की इस तारीख की, आज के इस पल की चर्चा करेंगे। और ये कितनी बड़ी रामकृपा है कि हम इस पल को जी रहे हैं, इसे साक्षात घटित होते देख रहे हैं। आज दिन-दिशाएँ&#8230; दिग-दिगंत&#8230; सब दिव्यता से परिपूर्ण हैं। ये समय, सामान्य समय नहीं है। ये काल के चक्र पर सर्वकालिक स्याही से अंकित हो रहीं अमिट स्मृति रेखाएँ हैं। &#8221;</p>
<p>त्रेता में राम आगमन पर तुलसीदास जी ने लिखा है- प्रभु बिलोकि हरषे पुरबासी। जनित वियोग बिपति सब नासी। अर्थात्, प्रभु का आगमन देखकर ही सब अयोध्यावासी, समग्र देशवासी हर्ष से भर गए। लंबे वियोग से जो आपत्ति आई थी, उसका अंत हो गया। उस कालखंड में तो वो वियोग केवल 14 वर्षों का था, तब भी इतना असह्य था। इस युग में तो अयोध्या और देशवासियों ने सैकड़ों वर्षों का वियोग सहा है। हमारी कई-कई पीढ़ियों ने वियोग सहा है। भारत के तो संविधान में, उसकी पहली प्रति में, भगवान राम विराजमान हैं। संविधान के अस्तित्व में आने के बाद भी दशकों तक प्रभु श्रीराम के अस्तित्व को लेकर कानूनी लड़ाई चली। मैं आभार व्यक्त करूंगा भारत की न्यायपालिका का, जिसने न्याय की लाज रख ली। न्याय के पर्याय प्रभु राम का मंदिर भी न्याय बद्ध तरीके से ही बना। आज गाँव-गाँव में एक साथ कीर्तन, संकीर्तन हो रहे हैं। </p>
<p>आज मंदिरों में उत्सव हो रहे हैं, स्वच्छता अभियान चलाए जा रहे हैं। पूरा देश आज दीवाली मना रहा है। अपने 11 दिन के व्रत-अनुष्ठान के दौरान मैंने उन स्थानों का चरण स्पर्श करने का प्रयास किया, जहां प्रभु राम के चरण पड़े थे। चाहे वो नासिक का पंचवटी धाम हो, केरला का पवित्र त्रिप्रायर मंदिर हो, आंध्र प्रदेश में लेपाक्षी हो, श्रीरंगम में रंगनाथ स्वामी मंदिर हो, रामेश्वरम में श्री रामनाथस्वामी मंदिर हो, या फिर धनुषकोडि&#8230; मेरा सौभाग्य है कि इसी पुनीत पवित्र भाव के साथ मुझे सागर से सरयू तक की यात्रा का अवसर मिला। सागर से सरयू तक, हर जगह राम नाम का वही उत्सव भाव छाया हुआ है। प्रभु राम तो भारत की आत्मा के कण-कण से जुड़े हुए हैं। </p>
<figure id="attachment_5261" aria-describedby="caption-attachment-5261" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150980.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150980.jpg" alt="" width="2200" height="1922" class="size-full wp-image-5261" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150980.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150980-300x262.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150980-1024x895.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150980-768x671.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150980-1536x1342.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150980-2048x1789.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5261" class="wp-caption-text">PM at the Pran Pratishtha ceremony of Shree Ram Janmaboomi Temple in Ayodhya, Uttar Pradesh on January 22, 2024.</figcaption></figure>
<p>प्रधानमंत्री कहते हैं कि &#8216;आज का ये अवसर उत्सव का क्षण तो है ही, लेकिन इसके साथ ही ये क्षण भारतीय समाज की परिपक्वता के बोध का क्षण भी है। हमारे लिए ये अवसर सिर्फ विजय का नहीं, विनय का भी है। दुनिया का इतिहास साक्षी है कि कई राष्ट्र अपने ही इतिहास में उलझ जाते हैं। ऐसे देशों ने जब भी अपने इतिहास की उलझी हुई गांठों को खोलने का प्रयास किया, उन्हें सफलता पाने में बहुत कठिनाई आई। बल्कि कई बार तो पहले से ज्यादा मुश्किल परिस्थितियां बन गईं। लेकिन हमारे देश ने इतिहास की इस गांठ को जिस गंभीरता और भावुकता के साथ खोला है, वो ये बताती है कि हमारा भविष्य हमारे अतीत से बहुत सुंदर होने जा रहा है। वो भी एक समय था, जब कुछ लोग कहते थे कि राम मंदिर बना तो आग लग जाएगी। ऐसे लोग भारत के सामाजिक भाव की पवित्रता को नहीं जान पाए।&#8221;</p>
<p>प्रधानमंत्री के अनुसार &#8216;रामलला के इस मंदिर का निर्माण, भारतीय समाज के शांति, धैर्य, आपसी सद्भाव और समन्वय का भी प्रतीक है। हम देख रहे हैं, ये निर्माण किसी आग को नहीं, बल्कि ऊर्जा को जन्म दे रहा है। राम मंदिर समाज के हर वर्ग को एक उज्जवल भविष्य के पथ पर बढ़ने की प्रेरणा लेकर आया है। मैं आज उन लोगों से आह्वान करूंगा&#8230; आईये, आप महसूस कीजिए, अपनी सोच पर पुनर्विचार कीजिए। राम आग नहीं है, राम ऊर्जा हैं। राम विवाद नहीं, राम समाधान हैं। राम सिर्फ हमारे नहीं हैं, राम तो सबके हैं। राम वर्तमान ही नहीं, राम अनंतकाल हैं।&#8217;</p>
<p>आज जिस तरह राममंदिर प्राण प्रतिष्ठा के इस आयोजन से पूरा विश्व जुड़ा हुआ है, उसमें राम की सर्वव्यापकता के दर्शन हो रहे हैं। जैसा उत्सव भारत में है, वैसा ही अनेकों देशों में है। आज अयोध्या का ये उत्सव रामायण की उन वैश्विक परम्पराओं का भी उत्सव बना है। रामलला की ये प्रतिष्ठा ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ के विचार की भी प्रतिष्ठा है। आज अयोध्या में, केवल श्रीराम के विग्रह रूप की प्राण प्रतिष्ठा नहीं हुई है। ये श्रीराम के रूप में साक्षात् भारतीय संस्कृति के प्रति अटूट विश्वास की भी प्राण प्रतिष्ठा है। ये साक्षात् मानवीय मूल्यों और सर्वोच्च आदर्शों की भी प्राण प्रतिष्ठा है। इन मूल्यों की, इन आदर्शों की आवश्यकता आज सम्पूर्ण विश्व को है। सर्वे भवन्तु सुखिन: ये संकल्प हम सदियों से दोहराते आए हैं। </p>
<figure id="attachment_5262" aria-describedby="caption-attachment-5262" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150960.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150960.jpg" alt="" width="2200" height="1316" class="size-full wp-image-5262" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150960.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150960-300x179.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150960-1024x613.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150960-768x459.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150960-1536x919.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240122150960-2048x1225.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5262" class="wp-caption-text">Glimpses of Pran Pratishtha ceremony of Shree Ram Janmaboomi Temple in Ayodhya, Uttar Pradesh on January 22, 2024. PM presents on the occasion.</figcaption></figure>
<p>प्रधानमंत्री के अनुसार, &#8216;आज उसी संकल्प को राममंदिर के रूप में साक्षात् आकार मिला है। ये मंदिर, मात्र एक देव मंदिर नहीं है। ये भारत की दृष्टि का, भारत के दर्शन का, भारत के दिग्दर्शन का मंदिर है। ये राम के रूप में राष्ट्र चेतना का मंदिर है। राम भारत की आस्था हैं, राम भारत का आधार हैं। राम भारत का विचार हैं, राम भारत का विधान हैं। राम भारत की चेतना हैं, राम भारत का चिंतन हैं। राम भारत की प्रतिष्ठा हैं, राम भारत का प्रताप हैं। राम प्रवाह हैं, राम प्रभाव हैं। राम नेति भी हैं। राम नीति भी हैं। राम नित्यता भी हैं। राम निरंतरता भी हैं। राम विभु हैं, विशद हैं। राम व्यापक हैं, विश्व हैं, विश्वात्मा हैं। और इसलिए, जब राम की प्रतिष्ठा होती है, तो उसका प्रभाव वर्षों या शताब्दियों तक ही नहीं होता।&#8217;</p>
<p>आज के युग की मांग है कि हमें अपने अंतःकरण को विस्तार देना होगा। हमारी चेतना का विस्तार&#8230; देव से देश तक, राम से राष्ट्र तक होना चाहिए। हनुमान जी की भक्ति, हनुमान जी की सेवा, हनुमान जी का समर्पण, ये ऐसे गुण हैं जिन्हें हमें बाहर नहीं खोजना पड़ता। प्रत्येक भारतीय में भक्ति, सेवा और समर्पण के ये भाव, समर्थ-सक्षम,भव्य-दिव्य भारत का आधार बनेंगे। और यही तो है देव से देश और राम से राष्ट्र की चेतना का विस्तार ! दूर-सुदूर जंगल में कुटिया में जीवन गुजारने वाली मेरी आदिवासी मां शबरी का ध्यान आते ही, अप्रतिम विश्वास जागृत होता है। मां शबरी तो कबसे कहती थीं- राम आएंगे। </p>
<p>प्रत्येक भारतीय में जन्मा यही विश्वास, समर्थ-सक्षम, भव्य-दिव्य भारत का आधार बनेगा।  और यही तो है देव से देश और राम से राष्ट्र की चेतना का विस्तार! हम सब जानते हैं कि निषादराज की मित्रता, सभी बंधनों से परे है। निषादराज का राम के प्रति सम्मोहन, प्रभु राम का निषादराज के लिए अपनापन कितना मौलिक है। सब अपने हैं, सभी समान हैं।  प्रत्येक भारतीय में अपनत्व की, बंधुत्व की ये भावना, समर्थ-सक्षम, भव्य-दिव्य भारत का आधार बनेगी। और यही तो है देव से देश और राम से राष्ट्र की चेतना का विस्तार!</p>
<p>प्रभु श्रीराम की हमारी पूजा, विशेष होनी चाहिए। ये पूजा, स्व से ऊपर उठकर समष्टि के लिए होनी चाहिए। ये पूजा, अहम से उठकर वयम के लिए होनी चाहिए। प्रभु को जो भोग चढ़ेगा, वो विकसित भारत के लिए हमारे परिश्रम की पराकाष्ठा का प्रसाद भी होगा। हमें नित्य पराक्रम, पुरुषार्थ, समर्पण का प्रसाद प्रभु राम को चढ़ाना होगा। इनसे नित्य प्रभु राम की पूजा करनी होगी, तब हम भारत को वैभवशाली और विकसित बना पाएंगे।</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/shriram-temople-in-ayodhya-dedicated-to-nation">&#8230;&#8230; लेकिन पुरुष प्रधान समाज में &#8216;जानकी&#8217; के लिए जय जयकार कौन करेगा? मिथिला में आज भी जानकियों की स्थिति  बेहतर नहीं है😢</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>अयोध्या में रामलला प्राण प्रतिष्ठा के संदर्भ में असत्यापित, भड़काऊ और फर्जी संदेशों के प्रसार को रोकने के लिए एडवाइजरी जारी की</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 20 Jan 2024 13:31:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कानून]]></category>
		<category><![CDATA[advisory]]></category>
		<category><![CDATA[anugag thakur]]></category>
		<category><![CDATA[ayodhya]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली : 22 जनवरी, 2024 को अयोध्या में राम लला प्राण प्रतिष्ठा के पूरे भारत में आगामी उत्सव के संदर्भ में, भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने पाया है कि विशेषकर सोशल मीडिया पर कुछ असत्यापित, भड़काऊ और फर्जी संदेश फैलाए जा रहे हैं जिससे सांप्रदायिक सद्भाव और सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ सकती [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली : 22 जनवरी, 2024 को अयोध्या में राम लला प्राण प्रतिष्ठा के पूरे भारत में आगामी उत्सव के संदर्भ में, भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने पाया है कि विशेषकर सोशल मीडिया पर कुछ असत्यापित, भड़काऊ और फर्जी संदेश फैलाए जा रहे हैं जिससे सांप्रदायिक सद्भाव और सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ सकती है।</strong></p>
<p>इसे देखते हुए, मंत्रालय ने आज, 20 जनवरी, 2024 को समाचार पत्रों, टेलीविजन चैनलों, डिजिटल समाचार प्रकाशकों और सोशल मीडिया प्लेटफार्मों को एक एडवाइजरी जारी की है, जिसमें उन्हें ऐसी किसी भी सामग्री जो गलत हो या जिसमें किसी तरह का हेरफेर किया जा सकता हो या जिससे देश में सांप्रदायिक सद्भाव या सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ने की संभावना हो, को प्रकाशित या प्रसारित करने से बचने की सलाह दी गई है। इसके अलावा, सोशल मीडिया प्लेटफार्मों को भी ऊपर उल्लिखित प्रकृति की सूचना को होस्ट, प्रदर्शित या प्रकाशित न करने के लिए उचित प्रयास करने की सलाह दी गई है।</p>
<p>एडवाइजरी केबल टेलीविजन नेटवर्क रेगुलेशन एक्ट, 1995 के तहत प्रोग्राम कोड के निम्नलिखित प्रावधानों और प्रेस काउंसिल एक्ट, 1978 के तहत प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा निर्धारित पत्रकारिता आचरण के मानदंडों पर ध्यान आकर्षित करती है, जिसका एक संदर्भ सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 में भी दिया गया है।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/1-1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/1-1.jpg" alt="" width="1275" height="1650" class="aligncenter size-full wp-image-5242" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/1-1.jpg 1275w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/1-1-232x300.jpg 232w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/1-1-791x1024.jpg 791w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/1-1-768x994.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/1-1-1187x1536.jpg 1187w" sizes="auto, (max-width: 1275px) 100vw, 1275px" /></a></p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/2-2.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/2-2.jpg" alt="" width="1275" height="1650" class="aligncenter size-full wp-image-5243" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/2-2.jpg 1275w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/2-2-232x300.jpg 232w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/2-2-791x1024.jpg 791w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/2-2-768x994.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/2-2-1187x1536.jpg 1187w" sizes="auto, (max-width: 1275px) 100vw, 1275px" /></a><br />
पत्रकारिता आचरण के मानदंड</p>
<p>सटीकता और निष्पक्षता: i) प्रेस को गलत, निराधार, भ्रामक या विकृत सामग्री के प्रकाशन से बचना चाहिए।</p>
<p>जाति, धर्म या समुदाय संदर्भ: vi) यह सुनिश्चित करना अखबार का कर्तव्य है कि प्रकाशित होने वाले लेख का स्वर, भावना और भाषा आपत्तिजनक, उत्तेजक, देश की एकता और अखंडता के खिलाफ, संविधान की भावना के खिलाफ, देशद्रोही और प्रकृति में भड़काऊ या सांप्रदायिक वैमनस्य को बढ़ावा देने के लिए न बनाया गया हो।</p>
<p>राष्ट्रीय हित सर्वोपरि: i) समाचार पत्र, सेल्फ रेग्युलेशन के रूप में, किसी भी समाचार, टिप्पणी या जानकारी, जिसमें राज्य और समाज के सर्वोपरि हितों को खतरे में डालने या नुकसान पहुंचाने की संभावना हो, या नागरिकों के अधिकार जिनके संबंध में भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 के खंड (2) के तहत भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार पर कानून द्वारा उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं, को प्रस्तुत करने में उचित संयम और सावधानी बरतेंगे।</p>
<p>प्रोग्राम कोड</p>
<p>नियम 6 (1) केबल सेवा में कोई भी प्रोग्राम नहीं चलाया जाना चाहिए जो:-</p>
<p>(सी) इसमें धर्मों या समुदायों पर हमला या धार्मिक समूहों के प्रति अपमानजनक दृश्य या शब्द शामिल हैं या जो सांप्रदायिक उत्तेजना पैदा कर सकते हैं;</p>
<p>(डी) इसमें कुछ भी अश्लील, अपमानजनक, जानबूझकर, झूठी और विचारोत्तेजक बयान और आधा सच शामिल है;</p>
<p>(ई) जिससे हिंसा को प्रोत्साहित करने या उकसाने की संभावना है या इसमें कानून और व्यवस्था बनाए रखने के खिलाफ कुछ भी शामिल है या जो राष्ट्र-विरोधी दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है।“</p>
<p>मंत्रालय ने समय-समय पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सहित टेलीविजन, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के लिए एडवाइजरी जारी की है, ताकि मीडिया पर लागू मानदंडों और विनियमों का पालन विशेष रूप से सार्वजनिक व्यवस्था, प्रकाशित या प्रसारित होने वाली जानकारी की तथ्यात्मक सटीकता और भारत के विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच सांप्रदायिक सद्भाव से संबंधित मामलों में बनाए रखा जा सके।</p>
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		<title>प्रिय राम🌺 अपने भक्त का चरण स्पर्श स्वीकार करें🙏</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 20 Jan 2024 12:51:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चुटकुलानन्द की चिठ्ठी]]></category>
		<category><![CDATA[adityanath]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>प्रिय राम,  अपने भक्त का चरण स्पर्श स्वीकार करें।  भगवान आप अपने जन्मस्थान पर आ रहे हैं कई शताब्दी बाद । आपकी यात्रा सुन्दर हो, सुखमय हो । इस पृथ्वी पर सभी जीव-निर्जीव भाग्यशाली हैं कि आपको अपने जन्म स्थान पर वापस होते देख रहे हैं, चश्मदीद गवाह बन रहे हैं। आइये राम !!! सभी [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>प्रिय राम, </p>
<p>अपने भक्त का चरण स्पर्श स्वीकार करें। </p>
<p>भगवान आप अपने जन्मस्थान पर आ रहे हैं कई शताब्दी बाद । आपकी यात्रा सुन्दर हो, सुखमय हो । इस पृथ्वी पर सभी जीव-निर्जीव भाग्यशाली हैं कि आपको अपने जन्म स्थान पर वापस होते देख रहे हैं, चश्मदीद गवाह बन रहे हैं। आइये राम !!! सभी प्रतीक्षा कर रहे हैं। </strong></p>
<p>भगवान, मैं क्या विश्व के लोग भी शायद ही आपसे साक्षात् हुए होंगे। आप एक मानव  कल्पना हैं और आपके प्रति लोगों की भक्ति, आस्था ही आपका साकार रूप है। भगवान, आप तो जगत पिता हैं। हमारे पिता के भी पिता हैं। उनके पिता के भी पिता हैं। लेकिन मेरे लिए मेरे पिता ही ब्रह्माण्ड थे और जननी माँ प्रकृति। आपके आशीष से मैं उनके छत्रछाया में पला।  उनको समझा, आपको समझने में वे मदद किये, खुद को समझने की चेष्टा अनवरत करता रहा हूँ, आज भी । </p>
<p>भगवान !! मेरे बाबूजी कहते थे &#8216;जो तुम  हो, उसे महसूस करो। जिसे तुम महसूस करोगे, वही निराकार सत्य है, ब्रह्म है, ईश्वर है, समय है। इसलिए प्रत्येक अदृश्य चीजों का सम्मान करना। क्या पता ईश्वर अदृश्य रूप में तुम्हें आंक रहे हों, परीक्षा ले रहे हों। पिता तो गलत नहीं होते भगवन, मेरे बाबूजी भी, माँ भी गलत नहीं थे ।  अभी तो दोनों आपके पास ही हैं भगवान।&#8221;</p>
<figure id="attachment_5234" aria-describedby="caption-attachment-5234" style="width: 526px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/ram.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/ram.jpg" alt="" width="526" height="787" class="size-full wp-image-5234" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/ram.jpg 526w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/ram-201x300.jpg 201w" sizes="auto, (max-width: 526px) 100vw, 526px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5234" class="wp-caption-text">हे राम !!!!!</figcaption></figure>
<p>मेरे बाबूजी आपके अनन्य भक्त थे भगवान। आपके मित्र शिव और देवी के प्रति उनकी भक्ति और आस्था को शब्दों में नहीं बांध सकता भगवान, आप तो जानते ही हैं । वे मानव कल्याण के लिए आप लोगों की बहुत तरीके से याचना करते थे। यह भी सत्य है कि आप कभी भी उन्हें निराश नहीं किये। </p>
<p>जब पहली बार बाबूजी कहे थे कि &#8216;ईश्वर को, शक्ति को, समय को महसूस करो, समझ नहीं पाया था। आज से कोई साढ़े पांच दशक पूर्व पटना में गंगा तट पर स्थित देवी काली की मंदिर में पूजा करते समय वे अपने धोती के पिछले हिस्से को मेरे नन्हे से पैर में बांधकर, जोड़ से दबाने कहा था और वे &#8216;आपकी&#8217;, &#8216;महादेव&#8217; की, &#8221;देवी दुर्गा&#8217; की और फिर &#8216;देवी काली&#8217; की पूजा-अर्चना करने लगे।  उस दिन &#8216;शक्ति&#8217; से रूबरू हुआ था भगवान् बाबूजी के माध्यम से । आपकी शक्ति को साक्षात् देखा था हे ईश्वर। देवी काली आज भी दरभंगा हॉउस के उस मंदिर में विराजमान हैं जो प्रथम द्रष्टा थीं।&#8221; </p>
<figure id="attachment_5235" aria-describedby="caption-attachment-5235" style="width: 2048px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/s1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/s1.jpg" alt="" width="2048" height="1365" class="size-full wp-image-5235" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/s1.jpg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/s1-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/s1-1024x683.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/s1-768x512.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/s1-1536x1024.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2048px) 100vw, 2048px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5235" class="wp-caption-text">हे राम !!!!!</figcaption></figure>
<p>उस शाम बाबूजी कहे थे &#8220;जब हम पूजा प्रारम्भ करेंगे तब तुम अपने सम्पूर्ण भार से घोती के इस हिस्से को दबाये रहना। एक क्षण ऐसा आएगा जब उस वस्त्र को कोई खोलने की कोशिश करेगा लेकिन तुम इस &#8221;नाम&#8221; का जप करते अपना सम्पूर्ण भार उस पर रखना। मैं बहुत छोटा था भगवान, आप तो देखे ही हैं। पिता का आदेश था और मैं उस क्षण उनका सेवक। पूजा के उपरान्त हम दोनों पिता-पुत्र शरीर से कमजोर दिख रहे थे, लेकिन बाबूजी के चेहरे पर जो तेज दिख रहा था, वह सिर्फ आपका ही था हे भगवान।&#8221; मेरे बाबूजी आपके बहुत बड़े उपासक थे हे प्रभु तभी तो जब इस पृथ्वी से उनकी जाने का समय आया, क्षण भर में वे आपमें विलीन हो गए। </p>
<p>भगवान मैं अपने माता-पिता का अनन्य भक्त हूँ, सेवक हूँ। आप दुःखी नहीं होंगे। लेकिन मेरे माता-पिता आपके अनन्य भक्त थे। स्वाभाविक है मैं भी आपका भक्त हुआ। माँ-बाबूजी कहते थे &#8220;राम&#8221; एक &#8220;कल्पना&#8221; हैं और उनके प्रति &#8216;भक्ति&#8217; उनका साकार रूप। मिथिला में वैसे भी &#8216;जमाय&#8217; को &#8216;विष्णु&#8217; तुल्य ही माना जाता है। और आप तो साक्षात् विष्णु ही हैं। आप ही ब्रह्म है, आप ही शिव हैं, आप ही समय हैं, आप ही आदि हैं, आप ही अंत हैं।  हम सभी मिथिला के हैं। आपके ससुराल के हैं। </p>
<p>आगामी विक्रम संवत 2080, शक संवत 1945 सोमवार पौष माह के शुक्ल पक्ष द्वादशी तिथि यानी 22 जनवरी 2024 को मेष लग्न में आप अपने जन्म स्थान पर मूर्ति स्वरूप में आ रहे हैं अपने भक्त जनों के लिए। बाबूजी कहते भी थे &#8216;न जाने किस भेष में नारायण मिल जाएँ,आज इस अवसर पर सभी मानव जाति भावुक हैं, जो स्वाभाविक भी है। भाव-विह्वल होना प्रकृति का नियम है। </p>
<figure id="attachment_5236" aria-describedby="caption-attachment-5236" style="width: 2048px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/s2.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/s2.jpg" alt="" width="2048" height="1365" class="size-full wp-image-5236" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/s2.jpg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/s2-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/s2-1024x683.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/s2-768x512.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/s2-1536x1024.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2048px) 100vw, 2048px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5236" class="wp-caption-text">हे राम !!!!!</figcaption></figure>
<p>आज भारतभूमि पर अथवा इस भूमि से दूर अपने – अपने जीवन यापन करने के लिए जेद्दोजेहद कर रहे करोड़ों आस्तिकों-नास्तिकों के लिए, जिन्हे राम से, मर्यादा से, पुरुषोत्तम से अगाध प्रेम और समर्पण है, पहली बार जीवन में कुछ अलग तरह के मनोभाव से गुजर रहे हैं । आज की तारीख में इस पृथ्वी पर जीवित सभी प्राणी भाग्यशाली हैं तो आपको आपके जन्म स्थान पर आते, स्थापित होने का चश्मदीद गवाह बन रहे हैं। आज के  बाद यह सभी बातें इतिहास के पन्नों में स्वर्णाक्षरों में जगज हो जायेंगे। </p>
<p>यह भी तो भगवान आपकी ही लीला है कि अपने स्वरुप को साकार करने और उसे स्थापित करने का कार्य भारत  के दो भक्तों को दिए। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जिन्हे ‘समय’ और उनका प्रारब्ध’ उन्हें सभी भारतवासियों का प्रतिनिधित्व करने का निमित्त बनाया है। ये एक बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है। हे राम !! हे मर्यादा !! ये मर्यादित !! हे पुरुषोत्तम !! हे दशरथ पुत्र।</p>
<p>श्याम प्रस्तर से बनी आपकी मूर्ति की पहली छवि से स्पष्ट है कि खड़ी मुद्रा में भगवान शैशव अवस्था में हैं आप । मैसूर के शिल्पकार अरुण योगीराज द्वारा बनाई गई 51 इंच की आपकी मूर्ति  मंत्रोच्चार के बीच गर्भगृह में स्थापित किया गया। विगत 16 जनवरी से 22 जनवरी की प्राण प्रतिष्ठा हेतु मंत्रोच्चार व शास्त्र-सम्मत नानाविध नियमों का पालन विशिष्ट पण्डितों का एक समूह कर रहा है भगवान । आश्चर्य है न भगवान आपमें दिव्य चेतना जागृत कर रहा है। भगवान !!! आप तो भगवान हैं, कितने धैर्यवान हैं प्रभु।  काश मनुष्य आप जैसा ही धैर्यवान होता। </p>
<p>श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट  द्वारा 11,000 से अधिक अतिथियों को सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया गया है । समारोह में मंदिर ट्रस्ट के सभी ट्रस्टी, लगभग 150 संप्रदायों के संत और मंदिर निर्माण से जुड़े 500 से अधिक लोग भी शामिल होंगे । उस दिन वैदिक मंत्रों की ध्वनि से वातावरण मंगलमय हो जायेगा । </p>
<figure id="attachment_5237" aria-describedby="caption-attachment-5237" style="width: 2048px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/s3.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/s3.jpg" alt="" width="2048" height="1365" class="size-full wp-image-5237" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/s3.jpg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/s3-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/s3-1024x683.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/s3-768x512.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/s3-1536x1024.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2048px) 100vw, 2048px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5237" class="wp-caption-text">हे राम !!!!!</figcaption></figure>
<p>देखिये न भगवान, आखिर मनुष्य तो मनुष्य ही है। कई भक्तों के मन में यह प्रश्न उठ रहा है कि जो भगवान् दशकों पहले जन्म स्थान पर प्रकट हुए थे, जिनकी आराधना अब तक एक तम्बू में होती रही, उनका क्या होगा? लेकिन वे यह नहीं जानते &#8216;वे भी आप ही हैं&#8217;, अतः 22 जनवरी को नई मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा विधि के सम्पन्न होते ही गर्भगृह के भीतर नई मूर्ति के सम्मुख ये मूर्तियाँ रख दी जाएंगी। </p>
<p>पांच वर्षीय शिशु राम की 51 इंच ऊँची काले पत्थर की मूर्ति के साथ कर्नाटक के प्रसिद्ध शिल्पकार ने जोगीराज मंदिर में स्थापित करने के लिए एक राम दरबार भी बनाया। योगीराज एक ऐसे परिवार से हैं जो पाँच पीढ़ियों से मूर्तियाँ बना रहे हैं । कहते हैं  परिवार एक समय मैसूरु के राजपरिवार के लिए काम करता था। योगीराज नई दिल्ली में इंडिया गेट की अमर जवान ज्योति के पीछे की छतरी में स्थापित नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 30 फुट ऊंची प्रतिमा और उत्तराखंड के केदारनाथ में आदि शंकराचार्य की 12 फुट ऊंची प्रतिमा अब तक बना चुके हैं।</p>
<p>देखिए न भगवान !! योगीराज की माँ सरस्वती अपने  बेटे से आशा नहीं थी कि उसी की कृति गर्भगृह के लिए चुनी जाएगी। यह भी तो आपकी ही लीला है न प्रभु। कुछ क्षण बाद हम उस ऐतिहासिक क्षण में प्रवेश कर रहे हैं जब गर्भ-गृह में श्रीराम लल्ला की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम पूर्ण होगा। विभिन्न राज्यों के लोग लगातार जल, मिट्टी, सोना, चांदी, मणियां, कपड़े, आभूषण, विशाल घंटे, ढोल, सुगंध इत्यादि के साथ आ रहे हैं। उनमें से सबसे उल्लेखनीय है माँ जानकी के मायके द्वारा भेजे गए भार (एक बेटी के घर स्थापना के समय भेजे जाने वाले उपहार) जो जनकपुर (नेपाल) और सीतामढ़ी (बिहार) के ननिहाल से अयोध्या आये हैं । रायपुर, दंडकारण्य क्षेत्र स्थित प्रभु के ननिहाल से भी विभिन्न प्रकार के आभूषणों आदि के उपहार भेजे गए हैं।  </p>
<figure id="attachment_5238" aria-describedby="caption-attachment-5238" style="width: 2048px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/s4.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/s4.jpg" alt="" width="2048" height="1365" class="size-full wp-image-5238" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/s4.jpg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/s4-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/s4-1024x683.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/s4-768x512.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/s4-1536x1024.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2048px) 100vw, 2048px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5238" class="wp-caption-text">हे राम !!!!!</figcaption></figure>
<p>भारत के इतिहास में पहली बार पहाड़ों, वनों, तटीय क्षेत्रों, द्वीपों आदि के वासियों द्वारा एक स्थान पर ऐसे किसी समारोह में प्रतिभाग किया जा रहा है जो अपने आप में अद्वितीय होगा। शैव, वैष्णव, शाक्त, गाणपत्य, पात्य, सिख, बौद्ध, जैन, दशनाम शंकर, रामानंद, रामानुज, निम्बार्क, माध्व, विष्णु नामी, रामसनेही, घिसापंथ, गरीबदासी, गौड़ीय, कबीरपंथी, वाल्मीकि, शंकरदेव (असम), माधव देव, इस्कॉन, रामकृष्ण मिशन, चिन्मय मिशन, भारत सेवाश्रम संघ, गायत्री परिवार, अनुकूल चंद्र ठाकुर परंपरा, ओडिशा के महिमा समाज, अकाली, निरंकारी, नामधारी (पंजाब), राधा स्वामी और स्वामीनारायण, वारकरी, वीर शैव इत्यादि कई सम्मानित परंपराएँ इसमें भाग लेंगी।  </p>
<p>भारतीय आध्यात्मिकता, धर्म, संप्रदाय, पूजा पद्धति, परंपरा के सभी विद्यालयों के आचार्य, 150 से अधिक परंपराओं के संत, महामंडलेश्वर, मंडलेश्वर, श्रीमहंत, महंत, नागा सहित 50 से अधिक आदिवासी, गिरिवासी, तातवासी, द्वीपवासी आदिवासी परंपराओं के प्रमुख व्यक्तियों की कार्यक्रम में उपस्थिति रहेगी, जो श्री राम मंदिर परिसर में प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के दर्शन हेतु पधारेंगे। प्राण प्रतिष्ठा भारत के आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूजनीय सरसंघचालक श्री मोहन भागवत जी, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल जी, उत्तर प्रदेश के आदरणीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी महाराज और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में होगी।  </p>
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		<title>प्रधानमंत्री ने श्री राम जन्मभूमि मंदिर को समर्पित छह स्मारक डाक टिकट जारी किए</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 18 Jan 2024 12:49:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[ayodhya]]></category>
		<category><![CDATA[history]]></category>
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		<category><![CDATA[ramjanmbhumi]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली : प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज श्री राम जन्मभूमि मंदिर को समर्पित छह विशेष स्मारक डाक टिकट जारी किए, साथ ही विश्व के अलग-अलग देशों में प्रभु श्रीराम से जुड़े जो डाक टिकट पहले जारी हुए हैं, उनका भी एक एल्बम आज जारी किया गया। उन्होंने इस अवसर पर भारत और विदेशों में प्रभु [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली : प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज श्री राम जन्मभूमि मंदिर को समर्पित छह विशेष स्मारक डाक टिकट जारी किए, साथ ही विश्व के अलग-अलग देशों में प्रभु श्रीराम से जुड़े जो डाक टिकट पहले जारी हुए हैं, उनका भी एक एल्बम आज जारी किया गया। उन्होंने इस अवसर पर भारत और विदेशों में प्रभु राम के सभी भक्तों को बधाई दी।</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि हम सभी जानते हैं कि पत्र या महत्वपूर्ण दस्तावेज भेजने के लिए लिफाफे पर ये टिकट चिपकाए जाते हैं। लेकिन वे एक अन्य उद्देश्य भी पूरा करते हैं। डाक टिकट ऐतिहासिक घटनाओं को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने के माध्यम के रूप में भी काम करते हैं। इसलिए जब भी आप किसी को डाक टिकट के साथ कोई पत्र या वस्तु भेजते हैं, तो आप उन्हें इतिहास का एक टुकड़ा भी भेज रहे होते हैं। ये टिकट सिर्फ कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि इतिहास की किताबों, कलाकृतियों और ऐतिहासिक स्थलों का सबसे छोटा रूप हैं।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि ये स्मारक टिकट हमारी युवा पीढ़ी को प्रभु राम और उनके जीवन के बारे में जानने में भी मदद करेंगे। उन्होंने कहा कि इन टिकटों पर कलात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से प्रभु राम के प्रति भक्ति व्यक्त की गई है और लोकप्रिय चौपाई &#8216;मंगल भवन अमंगल हारी&#8217; के उल्लेख के साथ राष्ट्र के विकास की कामना की गई है। इन टिकटों पर सूर्यवंशी राम के प्रतीक सूर्य की छवि है, जो देश में नए प्रकाश का संदेश भी देता है। इनमें पुण्य नदी सरयू का चित्र भी है, जो राम के आशीर्वाद से देश को सदैव गतिमान रहने का संकेत करती है। मंदिर के आंतरिक वास्तु के सौंदर्य को बड़ी बारीकी से इन डाक टिकटों पर प्रिंट किया गया है।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने उन संतों की भी प्रशंसा की, जिन्होंने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के साथ मिलकर स्मारक टिकट जारी करने में डाक विभाग का मार्गदर्शन किया।</p>
<figure id="attachment_5229" aria-describedby="caption-attachment-5229" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240118150316.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240118150316.jpg" alt="" width="2200" height="1508" class="size-full wp-image-5229" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240118150316.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240118150316-300x206.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240118150316-1024x702.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240118150316-768x526.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240118150316-1536x1053.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240118150316-2048x1404.jpg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240118150316-100x70.jpg 100w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240118150316-218x150.jpg 218w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5229" class="wp-caption-text">PM releases Commemorative Postage Stamps on Shri Ram Janmbhoomi Mandir &amp; a book of stamps, in New Delhi on January 18, 2023.</figcaption></figure>
<p>प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि भगवान श्रीराम, माता सीता और रामायण से संबंधित शिक्षाएं समय, समाज, जाति, धर्म और क्षेत्र की सीमाओं से परे, हर एक व्यक्ति से जुड़ी हैं। सबसे मुश्किल कालखंड में भी त्याग, एकता और साहस दिखाने वाली रामायण, अनेक मुश्किलों में भी प्रेम की जीत सिखाने वाली रामायण पूरी मानवता को खुद से जोड़ती है। यही कारण है, कि रामायण पूरे विश्व में आकर्षण का केंद्र रही है। आज जिन पुस्तकों का लोकार्पण हो रहा है, वो इन्हीं भावनाओं का प्रतिबिंब हैं कि कैसे पूरे विश्व में भगवान राम, माता सीता और रामायण को बहुत गौरव से देखा जाता है।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कंबोडिया, कनाडा, चेक गणराज्य, फिजी, इंडोनेशिया, श्रीलंका, न्यूजीलैंड, थाईलैंड, गुयाना, सिंगापुर उन कई देशों में से हैं, जिन्होंने भगवान राम के जीवन की घटनाओं पर बहुत रुचि के साथ डाक टिकट जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्री राम और माता जानकी की कहानियों के बारे में सम्‍पूर्ण जानकारी वाला जारी किया गया नया एल्बम हमें उनके जीवन के बारे में जानकारी देगा। यह हमें बताएगा कि भगवान राम किस तरह भारत से बाहर भी उतने ही महान आदर्श हैं, और कैसे विश्व की तमाम सभ्यताओं पर प्रभु राम का कितना गहरा प्रभाव रहा है।</p>
<figure id="attachment_5230" aria-describedby="caption-attachment-5230" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240118150321.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240118150321.jpg" alt="" width="2200" height="1693" class="size-full wp-image-5230" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240118150321.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240118150321-300x231.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240118150321-1024x788.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240118150321-768x591.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240118150321-1536x1182.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240118150321-2048x1576.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5230" class="wp-caption-text">PM releases Commemorative Postage Stamps on Shri Ram Janmbhoomi Mandir &amp; a book of stamps, in New Delhi on January 18, 2023.</figcaption></figure>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि महर्षि वाल्मिकी का वह आह्वान आज भी अमर है जिसमें उन्होंने कहा था: यावत् स्थास्यन्ति गिरयः, सरितश्च महीतले। तावत् रामायणकथा, लोकेषु प्रचरिष्यति॥ अर्थात्, जब तक पृथ्वी पर पर्वत हैं, नदियां हैं, तब तक रामायण की कथा, श्रीराम का व्यक्तित्व लोक समूह में प्रचारित होता रहेगा।</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/nation/pm-releases-commemorative-postage-stamps-on-shri-ram-janmbhoomi-mandir">प्रधानमंत्री ने श्री राम जन्मभूमि मंदिर को समर्पित छह स्मारक डाक टिकट जारी किए</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>श्री राम रामेति रामेति, रमे रामे मनोरमे 🌺 सहस्रनाम तत्तुल्यं, रामनाम वरानने 🙏</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 18 Jan 2024 05:22:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>* ऐसे अवसर पर भवुक होना स्वाभाविक है। भाव-विह्वल होना प्रकृति का नियम है। आज भारतभूमि पर अथवा इस भूमि से दूर अपने &#8211; अपने जीवन यापन करने के लिए जेद्दोजेहद कर रहे करोड़ों &#8216;आस्तिकों&#8217; के लिए, जिन्हे राम से, मर्यादा से, पुरुषोत्तम से अगाध प्रेम और समर्पण है, पहली बार जीवन में कुछ अलग [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>* ऐसे अवसर पर भवुक होना स्वाभाविक है। भाव-विह्वल होना प्रकृति का नियम है। आज भारतभूमि पर अथवा इस भूमि से दूर अपने &#8211; अपने जीवन यापन करने के लिए जेद्दोजेहद कर रहे करोड़ों &#8216;आस्तिकों&#8217; के लिए, जिन्हे राम से, मर्यादा से, पुरुषोत्तम से अगाध प्रेम और समर्पण है, पहली बार जीवन में कुछ अलग तरह के मनोभाव से गुजर रहे होंगे। खासकर भारत केव प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जिन्हे &#8216;समय&#8217; और उनका प्रारब्ध&#8217; उन्हें सभी भारतवासियों का प्रतिनिधित्व करने का निमित्त बनाया है। ये एक बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है। हे राम !! हे मर्यादा !! ये मर्यादित !! हे पुरुषोत्तम !! हे दशरथ पुत्र &#8230;&#8230;</p>
<p>* आज हम उस ऐतिहासिक क्षण में प्रवेश कर रहे हैं जब कुछ घंटों बाद गर्भ-गृह में श्रीराम लल्ला की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम पूर्ण होगा। विभिन्न राज्यों के लोग लगातार जल, मिट्टी, सोना, चांदी, मणियां, कपड़े, आभूषण, विशाल घंटे, ढोल, सुगंध इत्यादि के साथ आ रहे हैं। उनमें से सबसे उल्लेखनीय है माँ जानकी के मायके द्वारा भेजे गए भार (एक बेटी के घर स्थापना के समय भेजे जाने वाले उपहार) जो जनकपुर (नेपाल) और सीतामढ़ी (बिहार) के ननिहाल से अयोध्या आये हैं । रायपुर, दंडकारण्य क्षेत्र स्थित प्रभु के ननिहाल से भी विभिन्न प्रकार के आभूषणों आदि के उपहार भेजे गए हैं। </p>
<p>* भारत के इतिहास में पहली बार पहाड़ों, वनों, तटीय क्षेत्रों, द्वीपों आदि के वासियों द्वारा एक स्थान पर ऐसे किसी समारोह में प्रतिभाग किया जा रहा है जो अपने आप में अद्वितीय होगा। शैव, वैष्णव, शाक्त, गाणपत्य, पात्य, सिख, बौद्ध, जैन, दशनाम शंकर, रामानंद, रामानुज, निम्बार्क, माध्व, विष्णु नामी, रामसनेही, घिसापंथ, गरीबदासी, गौड़ीय, कबीरपंथी, वाल्मीकि, शंकरदेव (असम), माधव देव, इस्कॉन, रामकृष्ण मिशन, चिन्मय मिशन, भारत सेवाश्रम संघ, गायत्री परिवार, अनुकूल चंद्र ठाकुर परंपरा, ओडिशा के महिमा समाज, अकाली, निरंकारी, नामधारी (पंजाब), राधास्वामी और स्वामीनारायण, वारकरी, वीर शैव इत्यादि कई सम्मानित परंपराएँ इसमें भाग लेंगी। </p>
<p>* भारतीय आध्यात्मिकता, धर्म, संप्रदाय, पूजा पद्धति, परंपरा के सभी विद्यालयों के आचार्य, 150 से अधिक परंपराओं के संत, महामंडलेश्वर, मंडलेश्वर, श्रीमहंत, महंत, नागा सहित 50 से अधिक आदिवासी, गिरिवासी, तातवासी, द्वीपवासी आदिवासी परंपराओं के प्रमुख व्यक्तियों की कार्यक्रम में उपस्थिति रहेगी, जो श्री राम मंदिर परिसर में प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के दर्शन हेतु पधारेंगे। प्राण प्रतिष्ठा भारत के आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूजनीय सरसंघचालक श्री मोहन भागवत जी, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल जी, उत्तर प्रदेश के आदरणीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी महाराज और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में होगी। </p>
<figure id="attachment_5208" aria-describedby="caption-attachment-5208" style="width: 640px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/3-1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/3-1.jpg" alt="" width="640" height="960" class="size-full wp-image-5208" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/3-1.jpg 640w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/3-1-200x300.jpg 200w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5208" class="wp-caption-text">हे राम !! हे मर्यादा !! हे पुरुषोत्तम</figcaption></figure>
<p><strong>अयोध्या / नई दिल्ली : कहते हैं उत्तरा के गर्भ में जब अभिमन्यु थे, चक्रव्यूह तोड़ने के बारे में चर्चाएं हो रही थी। कुछ क्षण के लिए उत्तरा की आँखें लग गयी और अभिमन्यु चक्रव्यूह तोड़ने सम्बन्धी संवाद को नहीं सुन सका। समयांतराल महाभारत में अभिमन्यु का क्या हश्र हुआ, हम सभी जानते हैं। यही अभिमन्यु का प्रारब्ध था। ईश्वर की रचना भी कुछ वैसी ही थी। </p>
<p>लेकिन जब श्रीमती हीराबेन के गर्भ में एक बालक का अभ्युदय हुआ, हीराबेन का मातृहृदय ईश्वर के प्रति समर्पित था। वह सजग थी और ईश्वर तथा समय तो सजग थे ही। अन्यथा अगर ऐसा नहीं होता तो भारत के राजनीतिक मानचित्र पर जिस व्यक्ति को किनार-दरकिनार करने वालों की किल्लत नहीं थी, वह शनैः शनैः भारत ही नहीं, विश्व के मानचित्र पर भारत राष्ट्र का प्रतिनिधित्व कैसे करता। दशरथ पुत्र राम की जन्मभूमि पर अनंतकाल से हो रही राजनीति को उखाड़ फेंक कर मर्यादा पुरुषोत्तम राम को कैसे स्थापित करता। यही समय है। यही प्रारब्ध है और यही ईश्वर चाहते भी थे। </strong> </p>
<p>आप माने अथवा नहीं। यह भी संभव है कि इन शब्दों को पढ़ने के बाद आपके मन में अनेकानेक &#8216;नकारात्मक&#8217; सोच मेरे प्रति आने लगे। अनेकानेक &#8216;नकारात्मक शब्दों से मेरा अलंकरण आप करने लगें। लेकिन मेरे बाबूजी कहते थे कि &#8216;जीवन में ईश्वर और समय द्वारा लिखित किसी के प्रारब्ध को कोई बदल नहीं सकता है, छीन नहीं सकता है। आज ही नहीं आने वाले कई शताब्दियों तक जब भी &#8216;विष्णु और महेश&#8217; का नाम लिया जायेगा, जब भी बनारस और अयोध्या का उच्चरण लोग करेंगे, स्वतः वर्त्तमान काल के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ का नाम पर्यायवाची हो जायेगा । </p>
<p>इसे मैं अपना भी प्रारब्ध मानता हूँ कि आज मैं रामजन्म स्थान पर बने ऐतिहासिक मंदिर के बारे में कहानी लिख रहा हूँ। चौंतीस वर्ष पहले जब इसका बीजारोपरान हुआ था तत्कालीन नेता लालकृष्ण आडवाणी के हाथों सोमनाथ से, मैं चश्मदीद गवाह था धनबाद में। इस स्थान के बारे में कहानियों की श्रृंखला अनंत है, लेकिन जो तथ्य मेरे प्रारब्ध में थे, जो शब्द मुझे लिखना था, आज तक किसी ने नहीं लिखा। आज बाबूजी की बातें बहुत याद आ रही है। <strong>आज 2024 साल का जनवरी महीना का 18 तारीख है। आज से 75 वर्ष पहले अयोध्या में  जिस विवाद की शुरुआत हुई थी, उस विवाद का अंत आज से चार दिवस बाद हो जायेगा। कौशल्या-दशरथ पुत्र राम अपने जन्मस्थान पर विराजेंगे। </strong></p>
<p><strong>प्रारब्ध की बात देखिये। जिस दिन रामजन्म भूमि &#8211; बाबरी मस्जिद विवाद की शुरुआत हुई थी, यानी 22/23 दिसंबर, 1949, उस तिथि को श्रीमती हीराबेन मोदी के गर्भ में एक बालक का बीजारोपन हो गया था। सन 1949 की उस तारीख के नौ-माह बाद 17 सितम्बर, 1950 को हुआ नरेंद्र मोदी का जन्म हुआ। </strong></p>
<p>मनुष्य योनि में देवकी पुत्र कृष्ण का जन्म भी हुआ था &#8211; एक उद्येश्य की पूर्ति करने के लिए। कृष्ण तो विष्णु के अवतार थे। लेकिन मोदी मनुष्य योनि में एक ऐसे अवतार हैं जो भारत ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण विश्व में &#8216;राम के प्रति विश्वास और आस्था रखने वालों की ओर से दशरथ पुत्र राम को ससम्मान उनकी जन्मभूमि पर विराजने के लिए अपने जीवन उद्दैश्य को पूरा किया।  </p>
<figure id="attachment_5209" aria-describedby="caption-attachment-5209" style="width: 768px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/4-1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/4-1.jpg" alt="" width="768" height="960" class="size-full wp-image-5209" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/4-1.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/4-1-240x300.jpg 240w" sizes="auto, (max-width: 768px) 100vw, 768px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5209" class="wp-caption-text">हे दशरथ पुत्र  !! हम अपने कर्तब्य का निर्वहन करने को सज्ज हैं</figcaption></figure>
<p><strong>राजनीतिक दृष्टि से आधुनिक भारत के राजनेतागण चाहे इस सम्पूर्ण मामले को जिन रंगों में रंगे, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि इस स्थान के विवाद में आने के साथ ही एक बालक का गर्भ में अभ्युदय हो गया था जो राम को लाने का मार्ग प्रशस्त करेगा, किया। आज ही नहीं, आने वाले कई सदियों तक, जब भी भगवान् राम की बात होगी, अयोध्या की बात होगी, राम जन्मभूमि की बात होगी, देश के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी का नाम स्वतः लोगों के मुख पर आ जायेगा। आप माने अथवा नहीं। </strong> </p>
<p>विगत दिनों श्री राम जन्मभूमि मंदिर’ का शिलान्यास की गयी थी तो इसकी शुरुआत ‘‘सियावर रामचंद्र की जय’’ के उद्घोष से की गई । वह उद्घोष सिर्फ राम की नगरी में ही नहीं, बल्कि इसकी गूंज पूरे विश्व में सुनाई दे रही है, आज भी । देशवासियों को और विश्व में फैले करोड़ों राम भक्तों को उस ‘‘पवित्र’’ अवसर पर ‘‘कोटि कोटि’’ बधाई दी। </p>
<p>प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के अनुसार जिस प्रकार स्वतंत्रता दिवस लाखों बलिदानों और स्वतंत्रता की भावना का प्रतीक है, उसी तरह राम मंदिर का निर्माण कई पीढ़ियों के अखंड तप, त्याग और संकल्प का प्रतीक है। यह मंदिर राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रीय भावना का प्रतीक बनेगा तथा करोड़ों लोगों की सामूहिक शक्ति का भी प्रतीक बनेगा। यह आने वाली पीढ़ियों को आस्था और संकल्प की प्रेरणा देता रहेगा। राम मंदिर के लिए कई सदियों तक कई पीढ़ियों ने लगातार प्रयास किया और आज का यह दिन उसी तप, त्याग और संकल्प का प्रतीक है।’’ राम मंदिर के लिए चले आंदोलन में अर्पण भी था, तर्पण भी था, संघर्ष भी था, संकल्प भी था। </p>
<p>मोदी ने कहा था बरसों से टाट और टेंट के नीचे रह रहे ‘‘हमारे रामलला’’ के लिए अब एक भव्य मंदिर में रहेंगे। उनके अनुसार ‘‘टूटना और फिर उठ खड़ा होना, सदियों से चल रहे इस व्यतिक्रम से राम जन्मभूमि अब मुक्त होगा ‘जिनके त्याग, बलिदान और संघर्ष से आज ये स्वप्न साकार हो रहा है, जिनकी तपस्या राम मंदिर में नींव की तरह जुड़ी हुई है। मैं उन सबको आज 130 करोड़ देशवासियों की तरफ से नमन करता हूं। राम का मंदिर भारतीय संस्कृति का आधुनिक प्रतीक बनेगा, हमारी शाश्वत आस्था का प्रतीक बनेगा, राष्ट्रीय भावना का प्रतीक बनेगा। ये मंदिर करोड़ों-करोड़ों लोगों की सामूहिक शक्ति का भी प्रतीक बनेगा।</p>
<p>बहरहाल, प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने 22 जनवरी को अयोध्या धाम में मंदिर में श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के लिए 11 दिवसीय विशेष अनुष्ठान शुरू किया। उन्होंने कहा था कि “ये एक बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है। जैसा हमारे शास्त्रों में भी कहा गया है, हमें ईश्वर के यज्ञ के लिए, आराधना के लिए, स्वयं में भी दैवीय चेतना जागृत करनी होती है। इसके लिए शास्त्रों में व्रत और कठोर नियम बताए गए हैं, जिन्हें प्राण प्रतिष्ठा से पहले पालन करना होता है। </p>
<p>एक भावनात्मक संदेश में प्रधानमंत्री ने प्राण प्रतिष्ठा से पहले पूरे देश में राम भक्ति की भावना का उल्लेख किया। इस क्षण को ईश्वर का आशीर्वाद बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, मैं भावुक हूँ,भाव-विह्वल हूँ! मैं पहली बार जीवन में इस तरह के मनोभाव से गुजर रहा हूँ, मैं एक अलग ही भाव-भक्ति की अनुभूति कर रहा हूं। मेरे अंतर्मन की ये भाव-यात्रा, मेरे लिए अभिव्यक्ति का नहीं, अनुभूति का अवसर है। चाहते हुए भी मैं इसकी गहनता, व्यापकता और तीव्रता को शब्दों में बांध नहीं पा रहा हूं। आप भी मेरी स्थिति भली भाँति समझ सकते हैं।”</p>
<figure id="attachment_5210" aria-describedby="caption-attachment-5210" style="width: 1610px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240117150125-scaled.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240117150125-scaled.jpg" alt="" width="1610" height="2560" class="size-full wp-image-5210" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240117150125-scaled.jpg 1610w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240117150125-189x300.jpg 189w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240117150125-644x1024.jpg 644w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240117150125-768x1221.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240117150125-966x1536.jpg 966w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/H20240117150125-1288x2048.jpg 1288w" sizes="auto, (max-width: 1610px) 100vw, 1610px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5210" class="wp-caption-text">प्रारब्ध  और विश्वास</figcaption></figure>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर के लिए आभार व्‍यक्‍त किया, &#8221;मुझे उस सपने के पूरा होने के समय उपस्थित होने का सौभाग्य मिला है, जिस स्वप्न को अनेकों पीढ़ियों ने वर्षों तक एक संकल्प की तरह अपने हृदय में जिया, मुझे उसकी सिद्धि के समय उपस्थित होने का सौभाग्य मिला है। प्रभु ने मुझे सभी भारतवासियों का प्रतिनिधित्व करने का निमित्त बनाया है। ये एक बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है।”इस पवित्र अवसर पर ऋषियों, मुनियों, तपस्वियों और परमात्‍मा का आशीर्वाद मांगा और खुशी व्यक्त की कि वह नासिक धाम- पंचवटी से अनुष्ठान शुरू करेंगे जहां प्रभु श्रीराम ने काफी समय बिताया था।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा, “शरीर के रूप में, तो मैं उस पवित्र पल का साक्षी बनूंगा ही,  लेकिन मेरे मन में, मेरे हृदय के हर स्पंदन में, 140 करोड़ भारतीय मेरे साथ होंगे। आप मेरे साथ होंगे&#8230;हर राम भक्त मेरे साथ होगा। और वो चैतन्य पल, हम सबकी सांझी अनुभूति होगी। मैं अपने साथ राम मंदिर के लिए अपने जीवन को समर्पित करने वाले अनगिनत व्यक्तित्वों की प्रेरणा लेकर जाऊंगा। हम सब इस सत्य को जानते हैं कि ईश्वर निराकार है। लेकिन ईश्वर, साकार रूप में भी हमारी आध्यात्मिक यात्रा को बल देते हैं। जनता-जनार्दन में ईश्वर का रूप होता है, ये मैंने साक्षात देखा है, महसूस किया है। लेकिन जब ईश्वर रूपी वही जनता शब्दों में अपनी भावनाएं प्रकट करती है, आशीर्वाद देती है, तो मुझमें भी नई ऊर्जा का संचार होता है। आज, मुझे आपके आशीर्वाद की आवश्यकता है।” </p>
<p><strong>बहरहाल, 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम की तैयारियां जोरों पर है। राम मंदिर का गर्भगृह कुछ ऐसे बनाया गया है कि 25 फीट दूर से श्रद्धालु भगवान राम की छवि निहार सकेंगे। दीवारों पर देवी-देवताओं की मूर्तियां उकेरी हैं। तीन मंजिला राम मंदिर पारंपरिक नागर शैली में बनाया गया है। मुख्य गर्भगृह में श्रीराम लला की मूर्ति है और पहली मंजिल पर श्री राम दरबार होगा। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुसार, राम मंदिर में 5 मंडप (हॉल) होंगे। इसमें नृत्य मंडप, रंग मंडप, सभा मंडप, प्रार्थना और कीर्तन मंडप।</strong></p>
<figure id="attachment_5211" aria-describedby="caption-attachment-5211" style="width: 790px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/rsz_photo-2024-01-17-14-43-12_1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/rsz_photo-2024-01-17-14-43-12_1.jpg" alt="" width="790" height="675" class="size-full wp-image-5211" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/rsz_photo-2024-01-17-14-43-12_1.jpg 790w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/rsz_photo-2024-01-17-14-43-12_1-300x256.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/rsz_photo-2024-01-17-14-43-12_1-768x656.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 790px) 100vw, 790px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5211" class="wp-caption-text">रामलला का घर</figcaption></figure>
<p>देवताओं, देवी-देवताओं की मूर्तियां मंदिर के स्तंभों और दीवारों को सुशोभित करती हैं। 32 सीढ़ियां चढ़कर श्रद्धालु सिंहद्वार से प्रवेश कर सकेंगे। मंदिर के चारों तरफ आयताकार परकोटा रहेगा। मंदिर में दिव्यांग और बुजुर्ग तीर्थयात्री के लिए भी विशेष सुविधाएं हैं। रैंप और लिफ्ट भी हैं। मंदिर ट्रस्ट का कहना है कि मंदिर के पास एक ऐतिहासिक कुआं (सीता कूप) है, जो प्राचीन काल का है। इसके अलावा, 25,000 लोगों की क्षमता वाला एक तीर्थयात्री सुविधा केंद्र (पीएफसी) का निर्माण किया जा रहा है। यह तीर्थयात्रियों के लिए चिकित्सा सुविधाएं और लॉकर सुविधा प्रदान करेगा। </p>
<p>मंदिर का पारंपरिक नागर शैली में निर्माण हुआ है । मंदिर की लंबाई (पूर्व से पश्चिम) 380 फीट, चौड़ाई 250 फीट और ऊंचाई 161 फीट है। मंदिर तीन मंजिला है, जिसकी प्रत्येक मंजिल 20 फीट ऊंची है। इसमें कुल 392 खंभे हैं। 44 दरवाजे हैं। मुख्य गर्भगृह में भगवान श्रीराम का बचपन का स्वरूप (श्री राम लला की मूर्ति) है, जबकि पहली मंजिल पर श्रीराम का दरबार होगा। पांच मंडप (हॉल) &#8211; नृत्य मंडप, रंग मंडप, सभा मंडप, प्रार्थना और कीर्तन मंडप। मंदिर के चारों तरफ आयताकार परकोटा होगा। </p>
<p>चारों दिशाओं में इसकी कुल लंबाई 732 मीटर और चौड़ाई 14 फीट है। राम मंदिर परिसर के चारों कोनों पर चार मंदिर होंगे, इनमें सूर्य देव, देवी भगवती, गणेश भगवान और भगवान शिव को समर्पित होंगे। उत्तरी भुजा में मां अन्नपूर्णा का मंदिर, जबकि दक्षिणी भुजा में हनुमान जी का मंदिर है। अन्य मंदिर महर्षि वाल्मिकी, महर्षि वशिष्ठ, महर्षि अगस्त्य, महर्षि विश्वामित्र, निषाद राज, माता शबरी और देवी अहिल्या की पूज्य पत्नी को समर्पित रहेंगे। मंदिर में कहीं भी लोहे का इस्तेमाल नहीं किया गया है।</p>
<figure id="attachment_5212" aria-describedby="caption-attachment-5212" style="width: 854px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/PHOTO-2024-01-17-14-43-18.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/PHOTO-2024-01-17-14-43-18.jpg" alt="" width="854" height="1280" class="size-full wp-image-5212" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/PHOTO-2024-01-17-14-43-18.jpg 854w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/PHOTO-2024-01-17-14-43-18-200x300.jpg 200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/PHOTO-2024-01-17-14-43-18-683x1024.jpg 683w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/01/PHOTO-2024-01-17-14-43-18-768x1151.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 854px) 100vw, 854px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5212" class="wp-caption-text">रामलला का घर</figcaption></figure>
<p><strong>इतिहास </strong></p>
<p>* मीर बाक़ी बाबर के सिपहसलार 1528 &#8211; 29  में बाबरी मजदीद बनबाई। बाबर नाम में बाक़ी ताशकंडी के नाम से उल्लेख है। कुछ इतिहासकार कहते हैं कि 1529  में बाबर ने उसे सेना से निकाला था। जबकि बाबरनामा में ज़िक्र है कि उसे छुट्टी पर भेजा गया था। </p>
<p>* फ़्रांसीसी बुकानन एक ब्रिटिश सर्वेयर्थे जिन्होंने 1813 -14 में अपनी सर्वे रिपोर्ट में लिखी इसमें पहली बार ज़िक्र किया की अयोध्या में मस्जिद की दीवार पर शिलालेश मिला है जिसमे इसे बाबरी मस्जिद कहा गया है। </p>
<p>* 1885  में महंत  रहुबर दास ने पहली बार मंदिर निर्माण के लिए फैजाबाद सिविल कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका ख़ारिज हो गई लेकिन इससे मंदिर निर्माण की क़ानूनी लड़ाई का रास्ता खुल गया। </p>
<p>* 1949  में मूर्तियाँ प्रकट होने के साथ परमहंश रामचंद्र दास का नाम चर्चा में आया। तब वे हिंदू सभा के नगर अध्यक्ष थे। 1990  में अयोध्या में कार सेवकों को जुटाया। 31  जुलाई 2003  को92  वर्ष की आयु में निधन हो गया। </p>
<p>* 1949  मूर्तियाँ प्रकट होने के बाद दर्ज हुए fir में महंत अभिराम दस का भी नाम था। वे मूलतः बिहार के दरभंगा के थे। उन्होंने अपने शिष्यों से कहा था कि रामलला ने सपने में आकर अपने जन्म का सटीक स्थान बताया है। </p>
<p>* गोपाल सिंह विशारद ने रामलला के दर्शन और पूजन के व्यक्तिगत आधिकार पर 1950  में फैजाबाद कोर्ट में मुक़दमा दायर किया था। ये राम मंदिर विवाद के शुरुआती चार सिविल मुक़दमों में से एक था। 1986  में उनके निधन के बाद उनके बेटे  राजेंद्र सिंह केस की पैरवी करते रहे। </p>
<p>* के के नायर 1949  में मूर्तियाँ प्रकट होने के वक्त फैजाबाद के ज़िलाधिकारी थे। राज्य सरकार और पंडित नेहरू के कहने पर नायर ने मूर्तियाँ नहीं हटाई थी। 1952  में अवकाश  लेकर जनसंघ के टिकट पर बहराइच के सांसद बने। 7  सितंबर 1977  को उनका देहांत हो गया। </p>
<p>* मंदिर आंदोलन में सक्रिय महंत नृत्य गोपाल आंदोलन का जन्म 11  जून 1938  को मथुरा के कहौला में हुआ था। वे 1990  में कार सेवकों का नेतृत्व किए। ये श्री रामजन्मभूमि ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं। </p>
<p>* 1946 में यूपी के बिजनौर में जन्मे चंपत राय आरएसएस से जुड़े है। संगठन के प्रचारक के तौर पर मंदिर आंदोलन को खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई। आज वे रामजन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट के महासचिव हैं। </p>
<p>* 1986  में राजीव गांधी ने गर्भ गृह  का ताला खोलने का आदेश दिया था। सन 1991 में उनकी हत्या कर दी गई। </p>
<p>* 1990  में मुलायम सिंह यादव यूपी के मुख्यमंत्री थे। उन्हीं के आदेश पर 30  अक्तूबर  1990  को कार सेवकों पर गोलियाँ चली थी । अगले चुनाव में उनकी सरकार नहीं रही। विगत 10  अक्तूबर 2022  को उनका निधन हो गया। </p>
<p>* विश्व हिंदू परिषद के संस्थकों में एक थे अशोक सिंहल। बाबरी मस्जिद ढाँचे के टूटने पर दर्ज प्राथमिकी में इनका भी नाम था। विगत 17 नवम्बर 2015 को इनका निधन हो गया। </p>
<p>* सोमनाथ से लाल कृष्ण आडवाणी ने 25 सितम्बर 1989 को मंदिर के लिये रथ यात्रा शुरू की थी। प्राथमिकी में इनका भी नाम था। आज बीजेपी मार्गदर्शक मण्डल का हिस्सा हैं। आड़नी को पदयात्रा के बजाय रथयात्रा की सलाह प्रमोद महाजन ने थी। </p>
<p>* मुरली मनोहर जोशी मंदिर आंदोलन में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिये। </p>
<p>* नरसिम्हा राव के कार्यकाल में ही 6  दिसंबर 1992  को बाबरी मस्जिद का ढाँचा गिराया गया था। </p>
<p>* कल्याण सिंह उस समय प्रदेश के मुख्यमंत्री थे जब ढाँचा गिराया गया था। उनका नाम उन 13 लोगों में था । ढाँचा गिरने के बाद उनकी सरकार को बर्खास्त कर दी गई।21  अगस्त 2021  को इनका देहांत हो गया। </p>
<p>* मंदिर आंदोलन में उमा भारती मुख्य वक्ताओं में रहीं। </p>
<p>* बतौर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में ही राममंदिर मामले की सुनवाई में तेज़ी आयी और 2019 में सर्वोच्च न्यायालय ने राम मंदिर निर्माण को मंज़ूरी दे दी। </p>
<p>* सीबीआई कोर्ट के जज एस के यादव 30  सितंबर 2020  को बाबरी ढाँचा गिराए जाने वाले सभी 32  आरोपियों को बरी किया था। अवकाश के बाद वे उत्तर प्रदेश में उप लोकायुक्त बने। </p>
<p>* जस्टिस रंजन गोगाई ने आयोध्य मामले पर फ़ैसला देने वाली पाँच जजों वाली संविधान पीठ की अध्यक्षता की। 17 नबम्बर 2019 को अवकाश के बाद वे राज्य सभा में मनोनीत हुए। </p>
<p>* संविधान पीठ के सदस्य शरद अरविंद बोबडे जस्टिस गोगाई के बाद मुख्य न्यायाधीश बने। 23  अप्रैल 2021 को अवकाश के बाद वे महाराष्ट्र लॉ यूनिवर्सिटी नागपुर के चांसलर बने। </p>
<p>* अयोध्या पर बनी पीठ में जस्टिस धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ भी थे। आज वे मुख्य न्यायाधीश हैं। </p>
<p>* चौथे जज थे अशोक  भूषण। 2021  में अवकाश के बाद वे नेशनल कंपनी लॉ अपीलीय ट्रिब्यूनल का चेयरपर्सन हैं। और अंत में पीठ के पाँचवे जज थे एस अब्दुल नज़ीर । जनवरी 2023  में अवकाश के बाद उन्हें आंध्र प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया। </p>
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