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	<title>AIIMS Archives - आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</title>
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	<description>आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</description>
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		<title>​क्या प्रस्तावित एम्स, दरभंगा के निदेशक सहित नेताओं ने &#8216;भूमि&#8217;, &#8216;जल&#8217;, &#8216;अग्नि&#8217; &#8216;आकाश&#8217; को साक्षी मानकर भी झूठ बोले 😢</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 16 Nov 2024 13:07:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>दरभंगा / नई दिल्ली : दरभंगा के &#8220;दिल्ली मोड़&#8221; पर चर्चाएं आम हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तो सोहन इलाके में प्रस्तावित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की स्थापना हेतु &#8220;भूमि पूजन&#8221; किये ही नहीं, फिर स्थानीय समाचार पत्र, पत्रिकाओं से लेकर प्रादेशिक और राष्ट्रीय टीवी पर यह कैसे कहा गया, दिखाया गया कि प्रधानमंत्री [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/prime-minister-performed-bhoomi-pujan-for-the-establishment-of-aiims-in-darbhanga">​क्या प्रस्तावित एम्स, दरभंगा के निदेशक सहित नेताओं ने &#8216;भूमि&#8217;, &#8216;जल&#8217;, &#8216;अग्नि&#8217; &#8216;आकाश&#8217; को साक्षी मानकर भी झूठ बोले 😢</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>दरभंगा / नई दिल्ली : दरभंगा के &#8220;दिल्ली मोड़&#8221; पर चर्चाएं आम हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तो सोहन इलाके में प्रस्तावित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की स्थापना हेतु &#8220;भूमि पूजन&#8221; किये ही नहीं, फिर स्थानीय समाचार पत्र, पत्रिकाओं से लेकर प्रादेशिक और राष्ट्रीय टीवी पर यह कैसे कहा गया, दिखाया गया कि प्रधानमंत्री दरभंगा एम्स स्थापना के लिए भूमि पूजन किये? </strong></p>
<p>अगर तस्वीर झूठ नहीं बोलती तो 13 नवम्बर को दरभंगा के सोहन इलाके में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, दरभंगा के निदेशक डॉ. माधवानंद कार के अलावे दरभंगा के सांसद गोपाल जी ठाकुर, भाजपा नेता संजय सराब जी, मंगल पांडेय भूमि पूजन में उपस्थित ही नहीं, बल्कि &#8216;भूमि&#8217;, &#8216;जल&#8217;, &#8216;अग्नि&#8217; और &#8216;आकाश&#8217; को साक्षी मानकर &#8216;पूजन&#8217; और एक-एक ईंट रखने का इतिहास भी अंकित किये । भूमि पूजन करने हेतु दरभंगा के नेताओं सहित स्थानीय प्रशासन के लोगों ने कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति और ज्योतिषी श्री रामचंद्र झा को लाये थे। </p>
<p>भूमि पूजन के आधे घंटे बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार और उसके आधे घंटे बाद प्रधान मंत्री का आना था। भूमि पूजन से कुछ दूर हटकर प्रधानमंत्री को सम्बोधन करना था, किये, जहाँ उन्होंने इस बात का जिक्र भी किया कि &#8220;हमारी सरकार देश की सेवा के लिए, लोगों के कल्याण के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रही है। सेवा की इसी भावना से यहां विकास से जुड़े 12,000 करोड़ रुपए के एक ही कार्यक्रम में 12,000 करोड़ रुपए का अलग-अलग प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है। इसमें रोड, रेल और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े अनेक प्रोजेक्ट्स हैं। और सबसे बड़ी बात दरभंगा में एम्स का सपना साकार होने की तरफ एक बड़ा कदम उठाया गया है। </p>
<blockquote><p>प्रधानमंत्री ने कहा भी कि &#8220;दरभंगा एम्स के निर्माण से बिहार के स्वास्थ्य क्षेत्र में बहुत बड़ा परिवर्तन आएगा। इससे मिथिला, कोसी और तिरहुत क्षेत्र के अलावा पश्चिम बंगाल और आसपास के कई क्षेत्र के लोगों के लिए सुविधा होगी। नेपाल से आने वाले मरीज भी इस एम्स अस्पताल में इलाज करा सकेंगे। एम्स से यहां रोजगार-स्वरोजगार के अनेक नए अवसर बनेंगे। मैं दरभंगा को, मिथिला को, पूरे बिहार को इन विकास कार्यों के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।&#8221; बिलकुल सत्य है। </p></blockquote>
<p>मंच पर उपस्थित बिहार के राज्यपाल राजेन्द्र अर्लेकर, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी, केंद्रीय मंत्रिमंडल में उनके सहयोगीगण, बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा और श्री सम्राट चौधरी, दरभंगा के सांसद गोपाल जी ठाकुर, अन्य सभी सांसदगण, विधायकगण, अन्य महानुभाव, मिथिला के प्यारे भाइयों और बहनों को प्रणाम भी किया। यह समस्त बातें भूमि पूजन के बाद की है। फिर आधिकारिक रूप से यह कैसे कहा गया कि &#8220;स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढांचे को इस क्षेत्र में बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री ने दरभंगा में 1,260 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाले एम्स की आधारशिला रखी है।&#8221; </p>
<figure id="attachment_5871" aria-describedby="caption-attachment-5871" style="width: 2048px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/Pandit.jpg"><img fetchpriority="high" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/Pandit.jpg" alt="" width="2048" height="1366" class="size-full wp-image-5871" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/Pandit.jpg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/Pandit-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/Pandit-1024x683.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/Pandit-768x512.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/Pandit-1536x1025.jpg 1536w" sizes="(max-width: 2048px) 100vw, 2048px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5871" class="wp-caption-text">भूमि पूजन संपन्न करते ज्योतिषी और संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति  श्री रामचंद्र झा<br /></figcaption></figure>
<p><strong>जबकि प्रधानमंत्री आधारशिला रखे ही नहीं। अब अगर श्री गोपाल जी ठाकुर, मंगल पाण्डे, एम्स के निदेशक डॉ. कार और संजय सरबजी एम्स की स्थापना हेतु संकल्प लेकर, शताब्दी से खाली पड़े उस भूमि को स्पर्श कर, अग्नि, वायु, आकाश को साक्षी मानकर पूजन करने के बाद अपने हिस्से का &#8216;कर्म&#8217; प्रधानमंत्री के नाम लिख दिए, तो इसे ही राजनीति कहते हैं। वैसी स्थिति में भूमि पूजन के बाद अगर ज्योतिष श्री रामचंद्र झा एक सामान्य ब्राह्मण की तरह अपने सम्मान को बचाते भूमि पूजन वाले स्थान से चुपचाप निकल गए &#8211; यह भी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सबक देता है । लोग माने अथवा नहीं &#8220;यह एक प्रकार का तिरस्कार था। जिस सम्मान के साथ एम्स की स्थापना हेतु उन्हें ले जाया गया था, प्रशासन और नेताओं का अहंकारी चरित्र उसे पांव-पैदल चुपचाप निकलने पर मजबूर कर दिया। यह कुछ अच्छा नहीं हुआ, जहाँ तक ज्योतिष विद्या का सवाल है। </strong></p>
<figure id="attachment_5876" aria-describedby="caption-attachment-5876" style="width: 830px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/1-1.jpg"><img decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/1-1.jpg" alt="" width="830" height="960" class="size-full wp-image-5876" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/1-1.jpg 830w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/1-1-259x300.jpg 259w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/1-1-768x888.jpg 768w" sizes="(max-width: 830px) 100vw, 830px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5876" class="wp-caption-text">भूमि पूजन &#8211; ईंट रखते संजय सराब जी</figcaption></figure>
<p>दरभंगा के संतानहीन महाराजा डॉ. कामेश्वर सिंह 1 अक्टूबर, 1962 को अंतिम साँस लिए। अपनी मृत्यु के कुछ दिन पूर्व अपने हृदय के टुकड़े स्वरूप भवन को प्रदेश में संस्कृत शिक्षा के विकास हेतु दान कर दिये थे। जनवरी के 26 तारीख और वर्ष 1961 को कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना हुई थी । हाथ में एक झोला, धोती-कुर्ता पहने यह टीक धारी महज़ एक ब्राह्मण नहीं, अपितु कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति हैं और ज्योतिषी की दुनिया में, भविष्य को देखने में अपना हस्ताक्षर रखता है । राजनीति और राजनेताओं की मानसिकता में पतन इस बात का गवाह है कि हम अपनी राजनीतिक उद्देश्य की पूर्ति में शिक्षा की गरिमा को पीछे धकेल देते हैं। दरभंगा के इस वीरान सड़क पर उठने वाला इस महामानव का प्रत्येक पग प्रदेश की राजनीतिक भविष्य को लिख रहा है। </p>
<p>महाराज डॉ. कामेश्वर सिंह की दानवीरता की चर्चा देश के प्रधानमंत्री कल भले किये हों (उनका जिक्र करना स्वाभाविक भी है, जिक्र के बिना अधूरा होगा), लेकिन दरभंगा के रामबाग पैलेस के मुख्य द्वार पर दरभंगा राज के पूर्व के 20 राजा-महाराजाओं सहित डॉ. कामेश्वर सिंह की आत्मा बिलखती अवश्य होगी। सोचती अवश्य होगी कि जिस द्वारा पर मिथिला के विद्वानों के पाग और सम्मान के रक्षार्थ शास्त्रार्थ होता था, विद्वानों और ब्राह्मणों को उनकी शिक्षा के कारण दरभंगा राज का भी मस्तिष्क हमेशा ऊपर रहता था, कल उनके द्वारा ही दान किया गया भवन जिसमें संस्कृत विश्वविद्यालय है, के कुलपति का इस तरह अपमान होना &#8211; मानवीयता ही नहीं, बल्कि राजनीति और राजनेताओं की मानसिकता का पतन माना जाय। ज्योतिषी जी का प्रत्येक पग से दरभंगा एम्स परिसर की ओर जाने वाली मिट्टी भी बिलखती होगी &#8211; मिथिला में शिक्षा और शिक्षितों का कोई मोल नहीं रहा। </p>
<figure id="attachment_5872" aria-describedby="caption-attachment-5872" style="width: 1414px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/Screenshot-2024-11-16-at-4.23.34-PM.png"><img decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/Screenshot-2024-11-16-at-4.23.34-PM.png" alt="" width="1414" height="780" class="size-full wp-image-5872" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/Screenshot-2024-11-16-at-4.23.34-PM.png 1414w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/Screenshot-2024-11-16-at-4.23.34-PM-300x165.png 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/Screenshot-2024-11-16-at-4.23.34-PM-1024x565.png 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/Screenshot-2024-11-16-at-4.23.34-PM-768x424.png 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/Screenshot-2024-11-16-at-4.23.34-PM-696x385.png 696w" sizes="(max-width: 1414px) 100vw, 1414px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5872" class="wp-caption-text">भूमि पूजन संपन्न कराने के बाद श्री रामचंद्र झा</figcaption></figure>
<p>वैसे <strong>आर्यावर्तइण्डियननेशन(डॉट)कॉम</strong> से बात करते <strong>पूर्व कुलपति और ज्योतिषी श्री रामचंद्र झा</strong> कहते हैं: &#8220;दरभंगा में एम्स आना, इसका भूमि पूजन करवाने में हिस्सेदार होना मेरे लिए फक्र की बात है। मुझे इस कार्य के लिए कहा गया था। भूमि पूजन के आधा घंटा बाद माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार को आना था और उसके आधे घंटे बाद सम्मानित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को आना था। भूमि पूजन के बाद स्वाभाविक है की प्रदेश और देश के दो बड़े नेताओं का दरभंगा में आना अपने आप में एकमहोत्सव जैसा था।&#8221;</p>
<p>झा साहब आगे कहते हैं: &#8220;आज से करीब 115 वर्ष पहले सं 1910 में बलभद्रपुर में अखिल भारतीय मैथिली महासभा के लिए सात कठ्ठा जमीन महाराजा ने दिया था। उस महासभा के कार्यकारिणी सभा के अध्यक्ष हैं श्री संजय झा और मैं महासचिव हूँ। संयोग से उस भूमि पर सबों के सहयोग से एक घर बनाया गया है जो समाज के लिए बहुत उपयोगी है। बड़ा-बड़ा कमरा, हॉल और अन्य सुख-सुविधा उपलब्ध है ताकि किसी भी अवसर पर समाज के लोगों को लाभ मिल सके। उस भवन का गृह प्रवेश एक बजे अपरान्ह में निश्चित था। मैं कह दिया था कि मैं ऐम्स के लिए भूमि पूजन कराने के बाद अपने समय पर यहाँ उपस्थित हो जाऊंगा। तथापि यदि एक बजे तक नहीं आ पाया तो 1.30 बजे तक आप सभी प्रवेश अवश्य ले लेंगे।&#8221;</p>
<blockquote><p>झा साहब फिर कहते हैं: &#8220;जहाँ एम्स के लिए भूमि पूजन हुआ है, वहां आवागमन का कोई साधन नहीं है अभी। चारो तरफ खेत-चर है। मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के आगमन के कारण सुरक्षा व्यवस्था बहुत मजबूत था।​ मैं भूमि पूजन करा रहा था, मंत्रोच्चारण के साथ। वहां श्री गोपाल जी ठाकुर, श्री मंगल पांडेय, श्री संजय सरबजी और एम्स के निदेशक डॉ. कार उपस्थित थे। सभी भूमि पूजन के हिस्सेदार थे। उन्हें ही भूमि पूजन करना था। जब  मेरा कार्य संपन्न हो गया था और वहां उपस्थित सभी लोग अन्य कार्यों में लग गए थे। मैं बहुत सम्मान के साथ पूजा-अर्चना कराया, दक्षिणा और अन्य सभी बातों पर उन लोगों ने ध्यान रखा। इसी बीच मैं अपने अन्य कार्य को निष्पादित करने के लिए चुपचाप निकल गया।  कुछ दूर पैदल अवश्य चला पड़ा, लेकिन गृह प्रवेश के स्थान पर समय पर पहुंचा गया। </p></blockquote>
<p>बहरहाल, नेपाल सीमा से कोई 106 किलोमीटर दूर, मधुबनी से कोई 37 किलोमीटर और दरभंगा शहर से कोई 10 किलोमीटर दूर, पूर्व में &#8216;मब्बी&#8217;, पश्चिम में विशालकाय चर, उत्तर में राष्ट्रीय राजमार्ग और दक्षिण में एक्मी घाट से घिरा एम्स अस्पताल के लिए प्रस्तावित है। राजनीतिक दृष्टिकोण से दिल्ली मोड़ पर लोगों का कहना है कि बिहार में जनता दल यूनाइटेड और उनके नेताओं को आगामी विधानसभा के चुनाव में मुंह के बल न गिरना पड़े। इस बात से भी लोग इंकार नहीं कर रहे हैं कि इस सम्पूर्ण कार्य में मिथिला का ही कोई ब्राह्मण, जो वर्तमान सत्ता के बहुत करीब है, अहम् भूमिका अदा करे। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान तो महज एक बहाना बनेगा। राजनीति गजब की चीज होती है। कौन क्या सोचा रहा है, कौन क्या कर रहा है, कौन क्या करना चाहता है &#8211; सत्ता पर आधिपत्य के लिए, यह गंगा मैय्या भी नहीं जानती तभी तो गंगा की धारा पाटलिपुत्र की पवित्र भूमि से मीलों दूर चली गयी हैं। </p>
<figure id="attachment_5873" aria-describedby="caption-attachment-5873" style="width: 2048px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/PM-1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/PM-1.jpg" alt="" width="2048" height="941" class="size-full wp-image-5873" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/PM-1.jpg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/PM-1-300x138.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/PM-1-1024x471.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/PM-1-768x353.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/PM-1-1536x706.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2048px) 100vw, 2048px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5873" class="wp-caption-text">मंच पर प्रधानमंत्री और उनके साथ अन्य नेतागण<br /></figcaption></figure>
<p>चलिए, अगर एम्स की स्थापना हेतु भूमिपूजन वाला वायरस उतर गया हो, नीतीश कुमार जिंदाबाद &#8211; जिंदाबाद, नरेंद्र मोदी जिंदाबाद &#8211; जिंदाबाद बोलते-बोलते अवरुद्ध गला &#8216;गुनगुना पानी से गार्गिल&#8217; कर ठीक हो गया हो, शहर और दूर-दरस्त इलाके से सोहन चर पहुँचने और फिर पैदल घर वापस आने में पैर का दर्द समाप्त हो गया हो तो बैठकर सोचिये जरूर की इस प्रस्तावित अस्पताल में आप जीते-जी अपना इलाज करा पाएंगे अथवा नहीं (ईश्वर न करे आप या आपके परिवार के लोग कभी अस्वस्थ हों) या आपकी अगली और उसकी अगली पीढ़ी तक प्रदेश के नेता अपने-अपने पक्ष में मतदान करने हेतु मार्ग प्रसस्त कर लिए हैं। </p>
<p>सन 2024 से 2029 तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने द्वारा निर्मित संसद भवन में (भले दिल्ली की पहली बरसात में ही चुने लगा हो या फिर संसद परिसर में ठेघुना भर पानी का जमाव हो गया हो, प्रधानमंत्री कार्यालय में बैठने के लिए निश्चिंत हो गए। राजनेताओं के अनुसार इस &#8216;ऐतिहासिक अस्पताल&#8217; के निर्माण के लिए वर्तमान मुद्रास्फीति के आधार पर 1261 करोड़ रुपये का बजट रखा गया ​है। लेकिन जिस कदर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मुद्रा के मोल में राजनीतिक पार्टियों और नेताओं के चरित्र के अनुसार उठापटक हो रहा है, भारतीय मुद्रा का मोल का लुढ़कना स्वाभाविक है।</p>
<figure id="attachment_5874" aria-describedby="caption-attachment-5874" style="width: 1679px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/H20241113170169.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/H20241113170169.jpg" alt="" width="1679" height="1849" class="size-full wp-image-5874" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/H20241113170169.jpg 1679w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/H20241113170169-272x300.jpg 272w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/H20241113170169-930x1024.jpg 930w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/H20241113170169-768x846.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/H20241113170169-1395x1536.jpg 1395w" sizes="auto, (max-width: 1679px) 100vw, 1679px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5874" class="wp-caption-text">प्रधानमंत्री के साथ संजय सराबजी<br /></figcaption></figure>
<p>स्पष्ट है कि 1261 करोड़ रुपये का प्रावधान दोगुना या तीन गुना भी हो सकता है। क्योंकि भूमि पूजन और अस्पताल में पहला मरीज आने के बीच न्यूनतम तीन और अधिकम बार आम चुनाब और विधानसभा का चुनाब होना निश्चित है। नीतीश कुमार अलग ही दंड पेल रहे हैं कि उनके कालखंड में उनकी सरकार इस ऐतिहासिक अस्पताल के निर्माण हेतु 188 एकड़ ​भूमि दी है और यह भी कहते नहीं थक रहे हैं कि लहभग 2.25 लाख वर्ग मीटर में ​अस्पताल का निर्माण किया जायेगा। नीतीश बाबू !!!! संभल कर। आपके समीप वाला ही आपकी ;कुर्सी हिलायेगा &#8211; लिख लीजिये। </p>
<p>उधर, भूमि पूजन के साथ ही पटना से लेकर दिल्ली तक, एँड़ी कद के नेता से लेकर, घुटने कद के नेता के रास्ते, गर्दन और कपार तक के नेता आठो-पहर राजनितिक समीक्षा में लगे हैं। मिनट-दर-मिनट प्रधानमंत्री कार्यालय में सूचना प्रेषित करने में तनिक भी कोताही नहीं कर रहे हैं कि आने वाले विधान सभा चुनाव में किस कदर जनता दल यूनाइटेड को टुकड़े-टुकड़े में क्षत-विक्षत कर राष्ट्रीय लोकतान्त्रिक गठबंधन के अग्रणी भारतीय जनता पार्टी की जीवन-मृत्यु वाला इच्छा पूरा किया जाय। प्रदेश में मुख्यमंत्री कार्यालय में भारतीय जनता पार्टी का अपना नेता पूर्ण बहुमत के साथ का कुर्सी पर विराजमान हो। </p>
<p>बड़े-बड़े राजनितिक विद्वान और विश्लेषक तो यहाँ तक चीड़-फाड़ कर सिलाई कर रहे है कि मिथिलांचल में लोकसभा की एक दर्जन सीटें हैं और लगभग 100 से अधिक विधानसभा सीट है। उनका मानना है कि इन सभी स्थानों पर &#8216;आधुनिक राजनीतिक युवकों, युवतियों के कारण, बेरोजगारों के कारण राष्ट्रीय लोकतान्त्रिक गठबंधन का कब्जा है जो शनैः शनैः भारतीय जनता पार्टी और नरेंद्र मोदी की ओर चिपक रही है। कल तक जनता दल यूनाइटेड के ध्रुब के तरफ जो आकर्षण था, अब विकर्षण में बदल रहा है। </p>
<figure id="attachment_5875" aria-describedby="caption-attachment-5875" style="width: 2004px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/H20241113170172.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/H20241113170172.jpg" alt="" width="2004" height="1790" class="size-full wp-image-5875" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/H20241113170172.jpg 2004w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/H20241113170172-300x268.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/H20241113170172-1024x915.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/H20241113170172-768x686.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/H20241113170172-1536x1372.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2004px) 100vw, 2004px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5875" class="wp-caption-text">प्रधानमंत्री के साथ गोपाल जी ठाकुर<br /></figcaption></figure>
<p>इस क्षेत्र में प्रदेश के 40 लोकसभा सीटों में एक दर्जन लोकसभा सीट, मसलन झंझारपुर, मधुबनी, दरभंगा, मधेपुरा, शिवहर, सीतामढ़ी, सुपौल, समस्तीपुर, बेगूसराय, उजियारपुर, मुजफ्फरपुर और हाजीपुर है पर भाजपा का कब्ज़ा है।  उसी तरह दरभंगा की 10 विधानसभा सीटों में से 6 बीजेपी के पास, तीन जनता दल यूनाइटेड के पास और एक राष्ट्रीय जनता दल के पास है। मधुबनी की 10 विधानसभा सीटों में बीजेपी के पास 5 और जेडीयू के पास 3 सीटें हैं, जबकि आरजेडी के पास केवल दो सीट ​है।मुजफ्फरपुर की 11 विधानसभा सीटों की बात करें तो बीजेपी के पास 5 और जेडीयू के पास एक सीटे है, जबकि 5 सीट पर महागठबंधन के पास ​है। इनमें आरजेडी के 4 और कांग्रेस के एक विधायक ​है। </p>
<p>उसी तरह समस्तीपुर की 10 विधानसभा सीटों में जेडीयू और बीजेपी के 5, आरजेडी के 4 और माले के एक विधायक ​है। शिवहर लोकसभा क्षेत्र में कुल 6 विधानसभा सीटें ​हैं जिसमें 4 पर भाजपा का और दो पर राजद का कब्जा ​है। सीतामढ़ी की पांच में से तीन विधानसभा सीटों पर बीजेपी-जेडीयू गठबंधन को जीत मिली ​है। राजद ने दो सीटों पर कब्जा जमाया ​है।  मिथिलांचल में दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी, शिवहर, मुजफ्फरपुर, वैशाली जैसे अहम जिले ​हैं। मिथिलांचल की इन 6 जिलों में 60 सीटें हैं 2020 में एनडीए को 40 सीटों पर जीत हासिल हुई ​थी।</p>
<p>वैसे स्थानीय प्रशासन से लेकर पटना और दिल्ली के वातानुकूलित कक्षों में बैठे हकीमों का मानना है कि &#8220;दरभंगा का एम्स बिहार में भाजपा के लिए, नरेंद्र मोदी के लिए बहुत पर कारण हो सकता है राजनीतिक खेल को बदलने में। पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री श्री ज्योति बसु (अब दिवंगत), दिल्ली के मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित (अब दिवंगत) जैसा गुरुर बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल नेता नीतीश कुमार को भी हो गया है। उनके गुरुर को टूटने का समय आ गया है। कहते हैं एम्स का निर्माण कार्य 36 महीने में<br />
एनबीसीसी लि. की सहायक कंपनी एचएससीसी इंडिया लिमिटेड के द्वारा किया जायेगा जिसमें 750 बिस्तर होंगे और सभी आधुनिक साज-सज्जा भी उपलब्ध होंगे जिससे मिथिलांचल के अलावे नेपाल की तराई वाले इलाके से भी मरीजों की देखभाल की जा सकेगी। </p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/prime-minister-performed-bhoomi-pujan-for-the-establishment-of-aiims-in-darbhanga">​क्या प्रस्तावित एम्स, दरभंगा के निदेशक सहित नेताओं ने &#8216;भूमि&#8217;, &#8216;जल&#8217;, &#8216;अग्नि&#8217; &#8216;आकाश&#8217; को साक्षी मानकर भी झूठ बोले 😢</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>यौ प्रधान मंत्री जी !!! अपने &#8216;कलाकार&#8217; छियै, मैथिल आब मैथिली नै बजैत छथिन, अपनेक मुँह सें मैथिली सुनि मतदाता प्रसन्न भेलाह, मंच पर समूह फोटो में भी स्वयंभू &#8216;दरभंगा कुमार&#8217;के स्थान नहि शोधक विषय</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 14 Nov 2024 03:31:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष कहानी]]></category>
		<category><![CDATA[AIIMS]]></category>
		<category><![CDATA[darbhanga]]></category>
		<category><![CDATA[health]]></category>
		<category><![CDATA[maharaja]]></category>
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		<category><![CDATA[mithila]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>दरभंगा / पटना / नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित उनके कार्यालय से जुड़े सभी आला हुकुम लोग और वे जो प्रधानमंत्री का भाषण लिखते हैं, इस बात से अवगत हैं कि बिहार के उत्तरी क्षेत्र मिथिला और उसमें भी दरिभंगा में रहने वाले लोग (अपवाद छोड़कर) अब अपने-अपने घरों में, अपने बाल-बच्चों के [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/not-only-in-mithila-maithils-in-any-corner-of-the-world-do-not-speak-maithili-prime-minister-sir">यौ प्रधान मंत्री जी !!! अपने &#8216;कलाकार&#8217; छियै, मैथिल आब मैथिली नै बजैत छथिन, अपनेक मुँह सें मैथिली सुनि मतदाता प्रसन्न भेलाह, मंच पर समूह फोटो में भी स्वयंभू &#8216;दरभंगा कुमार&#8217;के स्थान नहि शोधक विषय</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>दरभंगा / पटना / नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित उनके कार्यालय से जुड़े सभी आला हुकुम लोग और वे जो प्रधानमंत्री का भाषण लिखते हैं, इस बात से अवगत हैं कि बिहार के उत्तरी क्षेत्र मिथिला और उसमें भी दरिभंगा में रहने वाले लोग (अपवाद छोड़कर) अब अपने-अपने घरों में, अपने बाल-बच्चों के साथ, सम्बन्धी और परिजनों के साथ भी मैथिली भाषा में नहीं बोलते। प्रधानमंत्री यह भी जानते हैं कि मिथिला में बोलचाल की भाषा में मैथिली पर हिंदी भाषा की पकड़ मजबूत हो गई है। नरेंद्र मोदी यह भी जानते हैं कि दरभंगा के अंतिम राजा के घर में भी अब &#8216;संस्कृति विरासत के रूप में नहीं रही।&#8217; साथ ही, दरभंगा के लाल किला के अंदर भी मैथिली भाषा कमजोर हो गयी है। मिथिला की संस्कृति यत्र-तत्र-सर्वत्र अपनी अस्तित्व की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ रही है । निर्जीव है, बोल नहीं सकती और लोग स्वहित के लिए उसे बाज़ार में खड़े कर दिये हैं।</strong></p>
<p>इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री भले महाराजा डॉ. कामेश्वर सिंह के योगदान की चर्चा करें, वे यह भी जानते हैं कि महाराजा की मृत्यु के बाद दरभंगा राज का प्रदेश, देश की आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, वौद्धिक क्षेत्रों में योगदान &#8220;शून्य&#8221; है। इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री यह भी जानते हैं कि नई दिल्ली के साथ-साथ देश के अन्य महत्वपूर्ण शहरों में दरभंगा राज का नामोनिशान उनके लोगों, सगे सम्बन्धियों ने समाप्त कर दिए हैं। जो बचे हैं, उसे कलकत्ता उच्च न्यायालय के सम्मानित न्यायमूर्ति समय-समय पर देखते हैं। यह सभी बातें देश के सम्मानित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जानते हैं। </p>
<blockquote><p>अब इन प्रचुर विशेषताओं (हम इसे मिथिला और मैथिलों की कमजोरी मानते हैं) के होते प्रधान मंत्री कैसे उस अवसर को छोड़ सकते हैं जिसका आने वाले दिनों में मतदान में इस्तेमाल होने वाला है। बस क्या था अवसर का लाभ उठाते देश के प्रधानमंत्री माइक पर उवाचे: &#8220;राजा जनक, सीता मैया कविराज विद्यापति के ई पावन मिथिला भूमि के नमन करें छी। ज्ञान-धान-पान-मखान&#8230;ये समृद्ध गौरवशाली धरती पर अपने सबके अभिनंदन करे छी।&#8221; </p></blockquote>
<p>आश्चर्य की बात तो यह है कि महाराजा, जिनकी चर्चा उन्होंने की, उनके अनुज राजबहादुर विश्वेश्वर सिंह के परिवार कीवर्तमान पीढ़ियों के लोग तस्वीरों में मंच के एक किलोमीटर की दूरी में भी नजर नहीं आये। जो मंच पर दिखे सभी नेता थे, जिनका मिथिला के उन्नयन, विकास में शून्य का भी योगदान नहीं रहा है। यह वे भी जानते हैं और उपस्थित गणमान्य तो जानते ही हैं। दुर्भाग्य यह है कि प्रधान मंत्री जिन जिन शब्दों से मिथिला भूमि को अलंकृत किये &#8211; ज्ञान, धान, पान &#8211; माखन &#8211; वह आज़ादी के पहले की बात थी, अब नहीं है। अब सभी &#8216;राजनीति&#8217; और &#8216;व्यवसाय&#8217; का अहम् हिस्सा बन गया है । अब पाग के लिए शास्त्रार्थ नहीं होता। मछलियां दक्षिण भारत से आयातित होती है क्योंकि अब मिथिला में पोखर है ही नहीं। खैर। </p>
<p>दरभंगा में विभिन्न परियोजनाओं के शिलान्यास, उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि &#8220;हमारी सरकार देश की सेवा के लिए, लोगों के कल्याण के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रही है। सेवा की इसी भावना से यहां विकास से जुड़े 12,000 करोड़ रुपए के एक ही कार्यक्रम में 12,000 करोड़ रुपए का अलग-अलग प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है। इसमें रोड, रेल और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े अनेक प्रोजेक्ट्स हैं। और सबसे बड़ी बात दरभंगा में एम्स का सपना साकार होने की तरफ एक बड़ा कदम उठाया गया है। दरभंगा एम्स के निर्माण से बिहार के स्वास्थ्य क्षेत्र में बहुत बड़ा परिवर्तन आएगा। इससे मिथिला, कोसी और तिरहुत क्षेत्र के अलावा पश्चिम बंगाल और आसपास के कई क्षेत्र के लोगों के लिए सुविधा होगी। नेपाल से आने वाले मरीज भी इस एम्स अस्पताल में इलाज करा सकेंगे। एम्स से यहां रोजगार-स्वरोजगार के अनेक नए अवसर बनेंगे। मैं दरभंगा को, मिथिला को, पूरे बिहार को इन विकास कार्यों के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।&#8221;</p>
<p><figure id="attachment_5862" aria-describedby="caption-attachment-5862" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/3.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/3.jpg" alt="" width="2200" height="1144" class="size-full wp-image-5862" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/3.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/3-300x156.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/3-1024x532.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/3-768x399.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/3-1536x799.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/3-2048x1065.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5862" class="wp-caption-text">दरभंगा में प्रधानमंत्री को देखने आते लोग</figcaption></figure><br />
<strong>प्रधानमंत्री कहते हैं कि &#8220;हमारे सांस्कृतिक समृद्धि के दर्शन यहां दरभंगा में मिथिलांचल में कदम-कदम पर होते हैं। माता सीता के संस्कार इस धरती को समृद्ध करते हैं।&#8221; परन्तु  मैं नहीं समझाता हूँ कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस वाहन से दरभंगा आये और मंच तक पहुंचे, गिनती से भी पांच सौ कदम चले होंगे। अगर कुछ कदम चले भी होंगे तो जिस सुरक्षा कवच में उनके कदम उठे होंगे, मिथिला की सांस्कृतिक समृद्धि दृष्टिगोचित नहीं हुआ होगा। वह तो धन्यवाद के पात्र के उनके भाषण को शब्दवद्ध करने वाले तो इस बात से वाकिफ हैं कि मिथिला में लोग ताली कब ठोकते हैं।</strong></p>
<p>इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री यह भी कहते नहीं रुके कि &#8220;आपसे बात करते हुए आज मैं दरभंगा स्टेट के महाराजा कामेश्वर सिंह जी के योगदान को भी याद कर रहा हूं। आजादी के पहले और बाद में भारत के विकास में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। मेरे संसदीय क्षेत्र काशी में भी उनके कार्यों के बहुत चर्चा होती है। महाराजा कामेश्वर सिंह के समाज कार्य दरभंगा का गौरव है, हम सभी के लिए प्रेरणा है।&#8221; काश !!!! संतानहीन महाराजाधिराज के परिवार के लोग इस कदर होते तो प्रधानमंत्री उनका भी नाम लेते गर्व महसूस करते। </p>
<p>नरेंद्र मोदी कहते हैं कि &#8220;दिल्ली में केंद्र में मेरी सरकार और यहां बिहार में नीतीश जी की सरकार मिलकर बिहार के हर सपने को पूरा करने के लिए काम कर रही हैं। हमारी विकास और जनकल्याण योजनाओं का ज्यादा से ज्यादा लाभ बिहार के लोगों को मिले यही हमारा प्रयास है। अब प्रधान मंत्री जी को कौन कहे कि &#8216;जिस नीतीश कुमार का पीठ थोक रहे हैं, उनकी पार्टी की दशा भी उत्तरोत्तर वही हो रही है बिहार में (आने वाले विधान सभा चुनाव में आप भी देख लेंगे) जो कभी कांग्रेस के साथ हुई थी। </p>
<p><strong>कहते भी हैं कि इतिहास खुद दुहरता है। कोई 108-साल पहले सं 1912 में बांकीपुर कांग्रेस (अविभाजित बिहार का पटना शहर) अधिवेशन में 20-वर्षीय पंडित जवाहरलाल नेहरू राजनीति में अपना &#8220;टोपी&#8221; उछाले थे और आज़ाद भारत में प्रधान मन्त्री भी बने, उसी बिहार में आज काँग्रेस पार्टी का क्रमशः नामोनिशान मिटते जा रहा था और इसके लिए जितना दोषी दिल्ली का आला-कमान है, उससे कहीं अधिक दोषी प्रदेश में पूर्व के मुख्य मन्त्रियों, नेताओं से लेकर वर्तमान के नेतागण है &#8211; जिनका &#8216;राजनीतिक चरित्र&#8217; प्रदेश की राजनीति से सैकड़ों गुना &#8220;बदत्तर&#8221; है। </strong></p>
<p>कहा जाता है कि पंडित नेहरू महज 20 वर्ष की उम्र में बैरिस्टर की उपाधि लेकर 1912 में भारत लौटे थे। वे वकालत नहीं करना चाहते थे। वे वकालत को तवज्जो न देकर देश की आजादी की मुहिम में भाग लेना बेहतर समझा। यहां अंग्रेजी हुकूमत की तानाशाही देखकर नेहरू ने सोचा कि कचहरी में एक व्यक्ति के मुकदमे की पैरवी करने के बदले संपूर्ण भारत की पैरवी करना कहीं बेहतर है। उन्हें देश की स्वतंत्रता के लिए चल रही क्रान्ति में हिस्सा लेने के लिए एक मंच की आवश्यकता थी। उन दिनों कांग्रेस एक खुले मंच में राजनीति कर रही थी। इसके चलते वे कांग्रेस के सदस्य बन गए और 1912 में प्रतिनिधि के रूप में पटना के बांकीपुर में कांग्रेस के अधिवेशन में पहली बार शामिल हुए। नेहरू का राजनीतिक सफर बांकीपुर कांग्रेस से ही हुआ था जो चार बार 1947, 1951, 1957 और 1962 तक देश के प्रधानमंत्री का पद संभाला।</p>
<figure id="attachment_5863" aria-describedby="caption-attachment-5863" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/2.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/2.jpg" alt="" width="2200" height="1060" class="size-full wp-image-5863" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/2.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/2-300x145.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/2-1024x493.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/2-768x370.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/2-1536x740.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/2-2048x987.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5863" class="wp-caption-text">13 नवंबर, 2024 को बिहार के दरभंगा में लगभग 12,100 करोड़ रुपये की कई विकास परियोजनाओं का शुभारम्भ<br /></figcaption></figure>
<p>आज़ादी के बाद बिहार में लगभग 32 वर्ष तक, यानि 1972 तक अर्थात पांचवीं विधान सभा तक जब तक श्रीकृष्ण सिन्ह, दीपनारायण सिंह, विनोदानंद झा, के बी सहाय, भोला पासवान शास्त्री, हरिहर सिंह मुख्य मंत्री रहे, ठीक ठाक था। पार्टी की पकड़ मतदाताओं के साथ-साथ विकास पर भी था। लेकिन पार्टी और नेताओं की पकड़ दारोगा प्रसाद राय, केदार पांडेय और अब्दुल ग़फ़ूर के मुख्य मंत्री बनने के बाद खिसकने लगी थी। प्रदेश में अनेकानेक कारणों से सकता के प्रति आवाज उठने लगी थी। सं 1975 में जगन्नाथ मिश्र के मुख्य मंत्री बनने के साथ ही कांग्रेस समाप्ति के रास्ते पर अग्रसर हो गयी थी।जगन्नाथ मिश्र प्रदेश में मुख्य मंत्री तीन बार बने और अपने समय काल में उनसे प्रदेश को और कांग्रेस पार्टी को जितना आघात पहुंचा, शायद किसी भी कांग्रेसी नेता से नहीं हुआ होगा, मजबूती के साथ सत्ता में रही कांग्रेस संपूर्ण क्रांति, क्षेत्रीय दलों का उभार, वामपंथ का प्रभाव और कथित खेमाबंदी के कारण धीरे-धीरे कमजोर होती चली गई।</p>
<p>आजादी के बाद बिहार में वर्ष 1952 में 276 सीटों के लिए हुए पहले विधानसभा चुनाव में 239 यानी 86.55 प्रतिशत सीटें हासिल करने वाली कांग्रेस महज 38 साल बाद 1990 में 324 सीटों के लिए हुए विधानसभा चुनाव में 71 यानी लगभग 22 प्रतिशत सीटों के आंकड़े पर ही सिमट कर रह गई। इतना ही नहीं, आने वाले वर्षों में इसके कमजोर पड़ते जनाधार को पूरे देश ने देखा। 1995 के चुनाव में तो इसकी सीट का गणित 29 सीट यानी लगभग नौ प्रतिशत सीट पर रुक गया। 2010 में 243 सीटों पर हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को महज चार सीटें यानी 1.65 प्रतिशत सीट ही मिल पाई।</p>
<p>दरअसल, कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार के विरोध में वर्ष 1975 में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में बिहार की धरती से शुरू हुई &#8220;संपूर्ण क्रांति&#8221; को दबाने के लिए वर्ष 1977 में लागू राष्ट्रपति शासन में बिहार में सातवीं विधानसभा का चुनाव कराया गया। 318 सीटों पर हुए इस चुनाव में 214 सीटें जीतने वाली जनता पार्टी ने पहली बार कांग्रेस के वर्चस्व को चुनौती दी। जनता पार्टी ने कांग्रेस के विजय रथ को महज 57 सीटों पर ही रोक दिया। इस चुनाव में निर्दलीय को 25 और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) को 21 सीटें मिली थीं। </p>
<p>ऐसा नहीं है कि इतने खराब प्रदर्शन के बाद कांग्रेस हमेशा के लिए धराशायी हो गई। और आज जनता दल (यूनाइटेड) यानी नीतीश कुमार &#8216;स्वहित&#8217; के लिए शनैः शनैः अपनी पार्टी के लोगों को भाजपा को सौंप रहे हैं। कहते हैं पार्टी में विभाजन के बावजूद कांग्रेस के एक गुट कांग्रेस (आई) के बैनतर तले डॉ. जगन्नाथ मिश्रा के नेतृत्व में वह वर्ष 1980 के विधानसभा चुनाव में पूरी ताकत से फिर से उठ खड़ी हुई। 324 सीटों के लिए हुए इस चुनाव में कांग्रेस (आई) को 169 सीटें मिलीं जबकि जनता दल (एस) चरण ग्रुप को 42 और भाकपा को 23 सीटें मिलीं।</p>
<p>कांग्रेस का कारवां यहीं नहीं रुका 1985 के चुनाव में उसने और बेहतर प्रदर्शन किया और 196 सीटों पर जीत दर्ज की वहीं लोक दल को 46 और आईएनडी को 29 सीटें मिलीं। लेकिन, इसके बाद के चुनावों में जो हुआ उसने कांग्रेस को पूरी तरह से कमजोर कर दिया और वह फिर उठ नहीं पाई। यही हश्र बाबू नीतीश कुमार का है और आने वाले दिनों में और ख़राब होने वाला है। राजनीतिक विशेषज्ञों के अलावे प्रदेश का मतदाता अधिक जानता हैं।  और यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तो जानते ही हैं। </p>
<p><strong>आज, कोई 243 सदस्यों वाली विधान सभा में 2005 में जनता दल (यु) विधायकों की संख्या 88 थी जो 2010 विधान सभा में बढ़कर 115 हुई। 2005 में सुशील मोदी (अब दिवंगत) की अगुआई में भाजपा की संख्या 55 थी जो 2010 में 91 हो गई।  राष्ट्रीय जनता दल के विधायकों की संख्या 2005 में 54 थी, जो 2010 में घटकर 22 हो गई। पांच साल बाद 2015 विधान सभा में भाजपा 53 पर आ गयी, जनता दल (यु) 71 पर, कांग्रेस 27 पर और राष्ट्रीय जनता दल 80 पर पहुँच गयी। इसके अगले विधान सभा में आरजेडी 80 से 75 पर आयी, जबकि भाजपा 53 से 74 पर और जनता दल (यु) 71 से 43 पर। कांग्रेस 27 से लुढकर 19 पर पहुंची।</strong></p>
<p>पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा उन्ही स्थानों पर कब्ज़ा की जो नीतीश कुमार का था। इसी तरह 2019 लोक सभा में जनता दल(यु) को 17 स्थान, भाजपा को 17 स्थान, कांग्रेस को 5 और लोक जनशक्ति पार्टी को 6 स्थान मिला था। लेकिन 2024 लोक सभा में जनता दल (यु) को 12, भाजपा को 12, आरजेडी को 4, कांग्रेस को 3, एलजेआरआरवी को 5 तथा अन्य 2 स्थान पर रहे।</p>
<figure id="attachment_5864" aria-describedby="caption-attachment-5864" style="width: 1458px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/5.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/5.jpg" alt="" width="1458" height="682" class="size-full wp-image-5864" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/5.jpg 1458w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/5-300x140.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/5-1024x479.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/5-768x359.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1458px) 100vw, 1458px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5864" class="wp-caption-text">नीतीश​ जी अब बस करें &#8211; अगला मुख्यमंत्री भाजपा का<br /></figcaption></figure>
<p><strong>आतंरिक सूत्र का कहना है कि &#8220;नीतीश कुमार का पीठ ठोकना यानी &#8216;बस करो नीतीश&#8217; वाली बात है। नीतीश कुमार &#8216;लंगड़ाकर, वैशाखी लेकर, जैसे-जैसे भारतीय राजनीतिक ओलम्पिक में कीर्तिमान बना लिए हैं। नौ बार प्रदेश के मुख्य मंत्री की कुर्सी पर विराजे। दो बार अपने अनुज मंत्री/सहयोगी पार्टी को धोखा दिए। कभी भाजपा से मुंह फुलाये तो कभी फुलल मुंह लेकर भाजपा का, प्रधानमंत्री का पैर पकड़ लिए। पेअर पकड़ने की परम्परा राजनीति में, खासकर बिहार में बहुत पुराणी है। </strong></p>
<p>इसलिए इस बात यह तय है कि किसी भी हालत में नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री के कार्यालय से साढ़े तीन किलोमीटर दूर रखा जाय। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाय कि अन्य वर्षों की भांति फिर चाचा-भतीजा लपककर कुर्सी की ओर नहीं बढ़ें। इसका अर्थ यह है कि मंच पर चाहे जो भी बोलें, यथार्थ में प्रधानमंत्री और भाजपा नीतीश कुमार से अपना पिंड छुड़ाना चाहते हैं। यहाँ एक और बात है कि प्रदेश में सुशील मोदी की मृत्यु के बाद भाजपा को &#8216;नेता की कमी&#8217; खलेगी। आज बिहार में भाजपा की जो भी स्थिति है उसमें सुशील मोदी का योगदान महत्वपूर्ण हैं। </p>
<p>चलिए प्रधानमंत्री की भाषण  की ओर बढ़ते हैं। लेकिन यहाँ उनके भाषण को लिखने वाले इस बात को उद्धृत करने में चूक गए कि महाराजाधिराज डॉ. सर कामेश्वर सिंह की मृत्यु के विगत 62 वर्षों में संतानहीन राजा के परिवार के लोगों ने उनकी कीर्तियों को किस कदर मिट्टी पलीद कर दिए। महाराजा ने भारत के जिन जिन शैक्षिक संस्थाओं को खड़ा करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान किये, चापलूसी, चाटुकारों ने राजनीति में उन्हें पीछे ढकेलते चले गए। जिन जिन विश्वविद्यालयों के सीनेट और सिंडिकेट में &#8216;दरभंगा सीट&#8217; था, आज उनके परिवारों में सोच की किल्लत के कारण सब समाप्त हो गया। </p>
<p>प्रधानमंत्री तो यह भी नहीं पूछे जी जिस प्रदेश के लोगों को आज से 90 वर्ष पहले मुख में आवाज देने के लिए दी इंडियन नेशन और आर्यावर्त अखबार का प्रकाशन प्रारम्भ किया गया, मिथिला के लोगों के साथ-साथ, प्रदेश के राजनेताओं, अधिकारियों और सबसे महत्वपूर्ण महाराजा के परिवार के लोगों ने ही नेश्तोनाबूद कर मिट्टी में मिला दिए। कोई दो दशक पहले सैकड़ों लोगों, परिवारों को सड़क पर मरने के लिए छोड़ दिया गया। आज भी प्रदेश के श्रमिक न्यायालय में, निचली अदालत में, उच्च न्यायलय में कर्मचारियों का भविष्य लॉक कपडे में बंद हैं। कितने मृत्यु को प्राप्त किये, कितने मृत्यु के दरवाजे पर बैठे हैं। यह सभी बातें नितीश कुमार, जिनके पीठ थपथपाये मोदी जी, जानते हैं, लेकिन ये सभी बातें कुमार साहब अगर बताएँगे तो उनकी बदनामी ही होगी। वैसे प्रधान मंत्री न्याय और अदालत की बात किये, अगर मालुम होगा की दो दशक से मुकदमें लंबित है।</p>
<p>प्रधान मंत्री कहे कि कोई परिवार नहीं चाहता कि उसके घर में कोई बीमार पड़े शरीर स्वस्थ रहे इसके लिए लोग आयुर्वेद, पोषक खान-पान का महत्व लोगों को बताया जा रहा है। फिट इंडिया मूवमेंट चलाया जा रहा है। ज्यादातर सामान्य बीमारियों की वजह गंदगी, दूषित खान-पान, खराब जीवनशैली होती है। इसलिए स्वच्छ भारत अभियान, हर घर शौचालय, नल से जल जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं। ऐसे आयोजनों से शहर तो स्वच्छ बनता ही है बीमारियां फैलने की गुंजाइश भी कम होती है। बेहतर आरोग्य का हमारा चौथा कदम है-छोटे शहरों में भी इलाज की बेहतरीन सुविधाएं पहुंचाना, डॉक्टरों की कमी को दूर करना। प्रधान मंत्री ने कहा कि &#8220;आजादी के 60 सालों तक देश में सिर्फ एक ही एम्स था और वो भी दिल्ली में। हर गंभीर बीमारी के लोग दिल्ली एम्स का रुख करते थे। कांग्रेस की सरकार के समय जो चार-पांच एम्स और बनाने की घोषणा हुई उनमें कभी ठीक से इलाज ही शुरू नहीं हो पाया। </p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि &#8220;दरभंगा एम्स से भी हर वर्ष बिहार के अनेक युवा डॉक्टर बनकर सेवा के लिए निकलेंगे। और एक महत्वपूर्ण काम हुआ है, पहले डॉक्टर बनना हो तो अंग्रेजी आना जरूरी था। अब मध्यम वर्ग गरीब परिवार के बच्चे अंग्रेजी में पढ़ाई कहां करेंगे स्कूल में, इतना पैसा कहां से लाएंगे और इसलिए हमारी सरकार ने तय किया अब डॉक्टर पढ़ना है या इंजीनियरिंग पढ़ना है, वो अपनी मातृभाषा में डॉक्टर बन सकता है, अपनी मातृभाषा में पढ़कर के इंजीनियर बन सकता है। और एक प्रकार से मेरा ये काम कर्पूरी ठाकुर जी को सबसे बड़ी श्रद्धांजलि हैं, वो यही सपना हमेशा देखते थे।&#8221; </p>
<p>प्रधान मंत्री कहते है: &#8220;नीतीश बाबू के नेतृत्व में बिहार ने सुशासन का जो मॉडल विकसित करके दिखाया वो अद्भुत है। बिहार को जंगल राज से मुक्ति दिलाने में उनकी भूमिका उसकी जितनी सराहना की जाए वह काम है। एनडीए की डबल इंजन की सरकार बिहार में विकास को गति देने के लिए प्रतिबद्ध है। बिहार का तेज विकास, यहां का बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर और यहां के छोटे किसानों, छोटे उद्योगों को प्रोत्साहन देने से ही संभव होने वाला है। एनडीए सरकार इसी रोड मैप पर काम कर रही हैं। आज बिहार की पहचान यहां बनने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण, एयरपोर्ट, एक्सप्रेस-वे से मजबूत हो रही है। दरभंगा में उड़ान योजना के तहत एयरपोर्ट शुरू हुआ है, जिससे दिल्ली-मुंबई जैसे शहरों तक सीधी उड़ान की सुविधा मिलने लगी है। बहुत जल्द यहां से रांची के लिए भी उड़ान शुरू हो जाएगी। साढ़े पांच हजार करोड़ रुपए के लागत से तैयार होने वाले आमस दरभंगा एक्सप्रेस वे पर भी काम चल रहा है। आज 3,400 करोड़ रुपए की लागत से सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन के काम का शिलान्यास भी हुआ है। और घर में जैसे नल से जल आता है ना, वैसे ही नल से गैस आना शुरू हो जाएगा और वो सस्ता भी होगा। विकास का ये महायज्ञ बिहार में इंफ्रास्ट्रक्चर को एक नई ऊंचाई पर ले जा रहा है। इससे यहां पर बड़ी संख्या में रोजगार के भी अवसर भी पैदा हो रहे हैं।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/6.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/6.jpg" alt="" width="1681" height="1094" class="aligncenter size-full wp-image-5865" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/6.jpg 1681w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/6-300x195.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/6-1024x666.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/6-768x500.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/6-1536x1000.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1681px) 100vw, 1681px" /></a></p>
<p>प्रधानमंत्री कहते हैं: &#8220;दरभंगा के बारे में कहा जाता है- पग-पग पोखरी माच मखान, मधुर बोल मुस्की मुख पान।&#8221; अब प्रधानमंत्री को कैसे कहा जाय कि &#8220;जिस महामहोपाध्याय ने मिथिला का चित्रण ‘पग-पग पोखर, माँछ, मखान, मधुर बोल मुस्की मुख पान । विद्या, वैभव, शांति प्रतीक, सरस नगर मिथिला थींक’ इन शब्दों में किये थे, वे बहुत दूरदर्शी थे। उन्हें ज्ञात था कि आने वाले समय में मिथिला के लोग उनकी कविता को मिथिला के चौराहों पर ‘पाठ’ करके, मिथिला का गुणगान करके अपने-अपने हिस्से की मिथिला अपने नाम लिखाएँगे। मिथिला के किसी भी स्थान पर खड़े होकर मिथिला के बाबू, बबुआइन और बौआसिन लोग अगर “पग पग पोखर माछ मखान, मधुर बोल मुस्की मुख पान । विद्या वैभव शांति प्रतीक, सरस नगर मिथिला थींक” कविता पाठ करते मिल जायँ, तो समझ लीजिये वे ‘सरेआम झूठ’ बोल रहे हैं। अपने-अपने हितों के रक्षार्थ वे स्थानीय लोगों को बरगला रहे हैं।</p>
<p>इस बात से भी इंकार नहीं कर सकते हैं कि वे राजनीति में प्रवेश करने के लिए मिथिला की कविता पाठ करना प्रारम्भ कर दिए हों जो उनके अनेकानेक प्रयासों में, एक यह भी प्रयास हो। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि जिस समय इस कविता की रचना हुई होगी, उस कवि के नजर में मिथिला और उसकी गरिमा अपने उत्कर्ष पर रहा होगा। मिथिला के सभी क्षेत्रों में, प्रत्येक कदम पर, प्रत्येक घरों के सामने-पीछे छोटा-बड़ा पोखर रहा होगा। तत्कालीन राजा-महाराजा-महाराजाधिराज स्थानीय लोगों के सम्मानार्थ, तत्कालीन पानी की समस्याओं के निदानार्थ अपने खर्च पर पोखर, तालाब बनबाये होंगे। यह सच भी है।</p>
<p>लेकिन तकलीफ इस बात की है कि आज भी हम उसी कविता पाठ को दोहरा रहे हैं और कहते थक भी नहीं रहे है कि “पग पग पोखर माछ मखान, मधुर बोल मुस्की मुख पान । विद्या वैभव शांति प्रतीक, सरस नगर मिथिला थींक” – खासकर तब जब बिहार के ग्रामीण इलाकों में शैक्षिक दर पुरुषों में 57 फीसदी और महिलाओं में 29 फीसदी है। बिहार का यह ग्रामीण इलाका, चाहे गंगा के उस पार का हो या गंगा के इस पार का। मिथिला भी इसी आकंड़े के अधीन है। पूरे प्रदेश में औसतन शैक्षिक दर 69 फीसदी है। इसमें पुरुषों के हिस्से 70 फीसदी और महिलाओं के हिस्से 53 फीसदी है। यानी दोनों के बीच आज भी 17 फीसदी का फासला है और यही 17 फीसदी का फासला, चाहे मिथिला में पंचायत का चुनाव हो, दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय, भागलपुर, मुंगेर, आदि शहरों में जिला परिषद् का चुनाव हो या बिहार के विधान सभा और विधान परिषद का चुनाव हो – निर्णायक होता है। ‘वे’ विजय ‘घोषित’ हो जाते हैं और ‘आप’ अपनी किस्मत को कोसते जीवन पर्यन्त ‘हार’ का सामना करते “पग-पग पोखर माछ मखान, मधुर बोल मुस्की मुख पान । विद्या वैभव शांति प्रतीक, सरस नगर मिथिला थींक” कविता पाठ सुनते रहते हैं। </p>
<p>सबसे महत्वपूर्ब बात तो माँछ (मछली) से सम्बंधित है। माँछ की कथा-व्यथा बनारसी पान जैसी है। बनारस में पान की खेती नहीं होती, लेकिन हज़ारों-हज़ार पान की दुकानें हैं। प्रत्येक चार दुकान या चार मकान के बाद पान की दुकानें मिलेंगी। लगभग सभी किस्मों के पान यहाँ, जगन्नाथ जी, गया और कलकत्ता आदि स्थानों से आते हैं। पान का जितना बड़ा व्यावसायिक केन्द्र बनारस है, शायद उतना बड़ा केन्द्र विश्व का कोई नगर नहीं है। काशी में इसी व्यवसाय के नाम पर दो मुहल्ले बसे हुए हैं। केवल शहर के पान विक्रेता ही नहीं, बल्कि दूसरे शहरों के विक्रेता भी इस समय इस जगह पान खरीदने आते हैं। </p>
<p>बस इतना ही समझ लें कि आज मिथिला में माँछ का उपलब्धता जितना है वह मिथिला के दो फीसदी लोगों की आवश्यकता पूरी नहीं कर सकता। मिथिला के बाज़ारों में जो माँछ आप देख रहे हैं वह सन 1911 से पहले देश की राजधानी जिस प्रदेश में थी, वहां से और आंध्र प्रदेश से आती है। मिथिला में महज ‘ठप्पा’ लगता है। अब सोचिये खाते हैं बंगाल की – आंध्र की मछली और आज भी कविता पाठ किये हैं “पग-पग पोखर माँछ ,,,,” जब इस कविता की रचना की गयी थी माछ, पान और मखान मिथिला की शान, पहचान अवश्य थी। लेकिन समय के साथ मिथिला अपनी इस पहचान को न सिर्फ खो दिया है, बल्कि इन सभी चीजों पर अब दूसरे प्रदेशों द्वारा कब्जा भी हो गया है। इस दृष्टि से मिथिला की पहचान खतरे में है और लोग बाग़ है कि इस खतरे में भी खतरा उठाना चाहते हैं ‘मिथिला को अलग राज्य का दर्जा दो” – गजब है। </p>
<figure id="attachment_5866" aria-describedby="caption-attachment-5866" style="width: 1080px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/7.jpeg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/7.jpeg" alt="" width="1080" height="1080" class="size-full wp-image-5866" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/7.jpeg 1080w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/7-300x300.jpeg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/7-1024x1024.jpeg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/7-150x150.jpeg 150w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/7-768x768.jpeg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/7-24x24.jpeg 24w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/7-48x48.jpeg 48w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/11/7-96x96.jpeg 96w" sizes="auto, (max-width: 1080px) 100vw, 1080px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5866" class="wp-caption-text">चच्चा अबकी बार </figcaption></figure>
<p>पूरे मिथिला में स्थित पोखरों की संख्या को अगर तनिक बाद में अध्ययन करें तो सिर्फ दरभंगा के महाराजा के साम्राज्य में तक़रीबन 9113 पोखर और तालाब थे। इसमें दरभंगा शहर में ही 350 के आस-पास थे। आज अगर अवकाश है (वैसे मिथिला के लोग वेवजह व्यस्त होते हैं। मोबाईल पर घंटी आज बजायेंगे तो तीसरे दिन हेल्लो ट्यून सुनाई देदा) तो शहर में धूम लें और पोखरों, तालाबों की संख्या, उसकी स्थिति, उसमें दौड़ती मछलियों से, खिलते माखन से, महारों पर लगे पानों की खेती की स्थिति से अवगत हो लें। यकीन मानिए ‘भोकार’ नहीं, ‘चीत्कार’ मारकर रोने लगेंगे, अगर आखों में पानी होगा तो। </p>
<p>वास्तविकता यह है कि मिथिला की पहचान पर, माँछ पर, पान पर, मखान पर ग्रहण लग गया है और ‘अवसरवादी’ लोगों का हाल यह है कि दिन-रात-सुबह-शाम अपने-अपने हितों के लिए ‘पग-पग पोखर, पान , मखान ..” कविता पाठ करते थक नहीं रहे हैं। इन कविता वाचकों को शायद यह मालूम भी नहीं होगा कि पान की खेती करने के लिए दो-रस मिट्टी की जरूरत होती है। न ज्यादा पानी और न ज्यादा धूप की जरूरत होती। पानी इतना हमेशा चाहिए, ताकि मिट्टी में नमी बनी रहे। यहां तो लोगों की आखों में नमी नहीं है, बेचारी मिट्टी क्या करे। यही कारण है कि कलकत्तिया पान दरभंगिया बनाकर मिथिला के बाज़ार पर अधिपत्य जमा लिया है, कब्ज़ा कर लिया है यानी ‘सुतल छी आ वियाह होईत अछि’ वाली कहावत सिद्ध हो रही है और कविता वाचक पाठ करते नहीं थक रहे हैं “पग पग पोखर माछ मखान, मधुर बोल मुस्की मुख पान । विद्या वैभव शांति प्रतीक, सरस नगर मिथिला थींक” – पूरी मिथिला की सांख्यिकी आप निकालें, यहाँ दरभंगा जिले में रोज तकरीबन 8 टन मछली की खपत है, लेकिन दरभंगा ज़िले से मात्र 500 किलो तक भी मछली बाजार में नहीं पहुंच पाती है। </p>
<p>खैर, प्रधानमंत्री ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना से अब तक देश में 4 करोड़ से अधिक गरीब मरीजों का इलाज हो चुका है। अगर आयुष्मान भारत योजना ना होती तो इनमें से ज्यादातर लोग अस्पताल में भर्ती ही नहीं हो पाते। मुझे इस बात का संतोष है कि इनके जीवन के बहुत बड़ी चिंता एनडीए सरकार की योजना से दूर हुई। और इन गरीबों का इलाज सरकारी अस्पतालों के साथ ही प्राइवेट अस्पतालों में भी हुआ है। आयुष्मान योजना से करोड़ों परिवारों को करीब सवा लाख करोड़ रुपए की बचत हुई है, ये सवा लाख करोड़ रूपया अगर सरकार ने देने की घोषणा की होती तो महीने भर हेडलाइन पर चर्चा चली रहती कि एक योजना से देश के नागरिकों के जेब में सवा लाख करोड़ रूपए बचे हैं। चुनाव के समय मैंने आपको गारंटी दी थी कि 70 साल के ऊपर के जो बुजुर्ग हैं उन सबको भी आयुष्मान योजना के दायरे में लाया जाएगा। मैंने अपनी ये गारंटी पूरी कर दी है। बिहार में भी 70 साल से ऊपर के जितने भी बुजुर्ग हैं, परिवार की कमाई कुछ भी हो, उनके लिए मुफ्त इलाज की सुविधा शुरू हो गई है। बहुत जल्द सभी बुजुर्गों के पास आयुष्मान वय वंदना कार्ड होगा। आयुष्मान के साथ-साथ जन औषधि केंद्रों पर बहुत ही कम कीमत में दवाइयां दी जा रही हैं।</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/special-story/not-only-in-mithila-maithils-in-any-corner-of-the-world-do-not-speak-maithili-prime-minister-sir">यौ प्रधान मंत्री जी !!! अपने &#8216;कलाकार&#8217; छियै, मैथिल आब मैथिली नै बजैत छथिन, अपनेक मुँह सें मैथिली सुनि मतदाता प्रसन्न भेलाह, मंच पर समूह फोटो में भी स्वयंभू &#8216;दरभंगा कुमार&#8217;के स्थान नहि शोधक विषय</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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