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	<title>abvp Archives - आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</title>
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		<title>जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में लाल सलाम: छात्रसंघ चुनाव, लेफ़्ट का दबदबा कायम, नीतीश चुनें गये अध्यक्ष</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 29 Apr 2025 04:52:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जनता की आवाज]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>पत्रकार कमलाकांत पांडेय लिखते हैं छात्रसंघ चुनाव, लेफ़्ट का दबदबा कायम, नीतीश चुनें गये अध्यक्ष : जेएनयू : वामपंथी राजनीति के बचे-खुचे किलों में एक दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष पद के चुनाव में फिर एक बार बिहार के बेटे ने जीत दर्ज कर इतिहास कायम रखा है। जेएनयू छात्रसंघ चुनाव में ऑल इंडिया [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>पत्रकार कमलाकांत पांडेय लिखते हैं छात्रसंघ चुनाव, लेफ़्ट का दबदबा कायम, नीतीश चुनें गये अध्यक्ष : जेएनयू : वामपंथी राजनीति के बचे-खुचे किलों में एक दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष पद के चुनाव में फिर एक बार बिहार के बेटे ने जीत दर्ज कर इतिहास कायम रखा है। जेएनयू छात्रसंघ चुनाव में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के छात्र नेता नीतीश कुमार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ परिवार के अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की शिखा स्वराज को हरा दिया। अध्यक्ष पद पर आइसा डीएसएफ गठबंधन के प्रत्याशी नीतीश कुमार की जीत हुई है। इस पद पर एबीवीपी उम्मीदवार शिखा स्वराज काफ़ी देर तक आगे चल रही थीं। इसके साथ ही जेएनयूएसयू के तीन प्रमुख पदों पर वामपंथी छात्र संगठनों के उम्मीदवारों की जीत हुई है। इसमें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और महासचिव का पद शामिल है, जबकि संयुक्त सचिव का पद एबीवीपी के खाते में गया है। </strong></p>
<p>इस बार के चुनावों में वाम दलों के छात्र संगठनों का पुराना गठबंधन काफ़ी हद तक बिखरा हुआ नज़र आया। पिछले क़रीब आठ साल से एक साथ रहे आइसा, एसएफआई और बाकी दल अलग-अलग चुनाव में उतरे हैं। वहां इस बार यानी साल 2024-25 के चुनावों में करीब 70 फीसदी वोटिंग हुई है। 7,906 वोटरों में से 5,500 वोटरों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया है। यह पिछले साल के चुनावों के मुकाबले थोड़ा कम है। </p>
<p>जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष एन साई बालाजी ने बताया कि इस बार चुनाव से पहले एसएफआई और आइसा अलग हो गए. आमतौर पर 2016 से वामदलों का गठबंधन एक साथ था और अलग-अलग पद पर अलग अलग छात्र संगठन के उम्मीदवार लड़ते थे।उन्होंने कहा कि साल 2016 में आइसा और एसएफआई एक साथ थे. साल 2017 में इस गठबंधन में डीएसएफ भी जुड़ गया और इसके अगले साल इसमें एआइएसएफ भी शामिल हो गया। पिछली बार छात्रसंघ के चार प्रमुख पदों पर वामदलों के छात्र संगठनों की जीत हुई थी, जिनमें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव और संयुक्त सचिव के पद शामिल हैं. जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष पद पर आइसा-डीएसएफ गठबंधन के नीतीश कुमार काउंटिंग के दौरान पीछे भी रहे, लेकिन जैसे-जैसे वोटों की गिनती आगे बढ़ी उन्होंने अपनी जीत पक्की कर ली। </p>
<p><strong>जीत हासिल करने के बाद नीतीश कुमार ने कहा कि हमें पहले उम्मीद थी कि हम चारों पदों पर जीत हासिल करेंगे। कैंपस एक भरोसे के साथ लगातार हम लोगों को चुन रहा है।गठबंधन में एक परेशानी हुई, लेकिन उसके बावजूद भी पहले दिन से हम परिषद (एबीवीपी) के सामने मजबूती से खड़े रहे हैं। कैंपस में पिछले दस साल से लगातार एबीवीपी हार रहा है और हम अपनी पुरानी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं । जेएनयू पर जिस तरह से चारों तरफ हमला हो रहा है और परिषद ने भाजपा का फुट सोल्जर बनकर कैंपस को बंद करवाने की कोशिश की है, यह चुनाव उसी पर एक तमाचा है। </strong></p>
<figure id="attachment_6404" aria-describedby="caption-attachment-6404" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/JNU-2.jpg"><img fetchpriority="high" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/JNU-2.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-6404" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/JNU-2.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/JNU-2-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/JNU-2-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/JNU-2-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/JNU-2-1536x1026.jpg 1536w" sizes="(max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6404" class="wp-caption-text">​मतदान करते छात्र-छात्राएं</figcaption></figure>
<p>एबीवीपी ने इस साल जेएनयू छात्रसंघ के चुनावों में कांटे की टक्कर दी है। तभी तो एबीवीपी की शिखा स्वराज काफी देर तक आगे रहने के बाद अध्यक्ष पद की रेस में दूसरे नंबर पर रही हैं। शिखा स्वराज ने चुनाव नतीजों के बाद कहा कि हम हर सीट पर मज़बूती से लड़े. हमने उनको कड़ी टक्कर दी। उनके बीच गठबंधन नहीं हो सका, हमें उसका भी फायदा मिला।  जेएनयू छात्रसंघ के उपाध्यक्ष पद की बात करें तो इस पद पर आइसा-डीएसएफ गठबंधन की मनीषा को जीत हासिल हुई है।  जबकि एबीवीपी की नीतू गौतम दूसरे नंबर पर रही हैं. वही महासचिव के पद पर आइसा-डीएसएफ उम्मीदवार मुंतेहा फातिमा ने कब्जा किया है, जबकि एबीवीपी के कुणाल राय दूसरे नंबर पर रहे हैं।  संयुक्त सचिव पद की बात करें तो इस पद पर एबीवीपी के उम्मीदवार वैभव मीणा को जीत मिली है।  वहीं आइसा-डीएसएफ के नरेश कुमार संयुक्त सचिव पद की लड़ाई में दूसरे नंबर पर रहे हैं।  जेएनयू में एबीवीपी के नेता विकास पटेल ने बताया कि हम ज्वाइंट सेक्रेटरी को छोड़कर तीनों पदों पर हार गए हैं।  लेकिन हमारी हार का अंतर काफी कम रहा है। उपाध्यक्ष पद पर नीतू गौतम को महज़ 36 वोटों से हार मिली है।  इधर, शिखा स्वराज ने बताया कि छात्रसंघ चुनाव में काउंसलर के 44 पदों में 23 पर एबीवीपी समर्थित उम्मीदवारों की जीत हुई है। </p>
<p>जेएनयू छात्रसंघ में सीमांचल के अररिया के किसान प्रदीप यादव के बेटे नीतीश कुमार जिन धनंजय कुमार की जगह लेंगे, वो भी बिहार के गया के रहने वाले हैं । नीतीश और धनंजय से पहले बिहार से गया के तनवीर अख्तर, कटिहार के शकील अहमद खान, सीवान के चंद्रशेखर और बेगूसराय के कन्हैया कुमार भी जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष रह चुके हैं। दरअसल, नीतीश कुमार बिहार के अररिया जिले के भरगामा प्रखंड के शेखपुरा गांव के निवासी हैं। उनके पिता प्रदीप यादव किसान हैं।  नीतीश ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष पद पर जीत हासिल कर एक बार फिर इस प्रतिष्ठित सेंट्रल यूनिवर्सिटी में बिहार का परचम बुलंद किया है।  आइसा और डीएसएफ गठबंधन से चुनाव लड़े नीतीश ने एबीवीपी की शिखा स्वराज को 272 वोटों के अंतर से हराया  । नीतीश को 1702 वोट मिले, जबकि शिखा को 1430 वोट प्राप्त हुए। </p>
<p><strong>नीतीश कुमार शेखपुरा गांव के किसान प्रदीप यादव के बेटे हैं।  26 वर्षीय नीतीश की मां पूनम देवी गृहणी हैं।  पिता प्रदीप यादव ने बताया कि 1999 में जन्मे नीतीश ने दसवीं की पढ़ाई फारबिसगंज के सरस्वती शिशु मंदिर से की है। 12वीं की पढ़ाई पूर्णिया कॉलेज से और स्नातक की पढ़ाई काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से की।  बीएचयू के बाद नीतीश जेएनयू गए और वहां पहले राजनीति विज्ञान में एमए किया और अब पॉलिटिकल साइंस में ही पीएचडी कर रहे हैं. नीतीश की दो बड़ी बहनें हैं जिनकी शादी हो चुकी है  । नीतीश के जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष बनने पर शेखपुरा में हर्ष का माहौल है। </strong></p>
<p>चुनाव जीतने के बाद नीतीश कुमार ने कैंपस की फंड कटौती का सवाल उठाते हुए कहा कि अब सरकारी खजाने से कैंपस का फंड खींचकर लाया जाएगा।  जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष के तौर पर अपने एजेंडा को रखते हुए नीतीश ने कहा है कि जेएनयू की गरिमा को बहाल किया जाएगा  । वामपंथी पैनल के बयान में कहा गया है कि फोर्ब्सगंज में सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में अपनी स्कूली शिक्षा के दौरान उन्होंने पहली बार शैक्षणिक संस्थानों में घुसपैठ करने वाले सांप्रदायिक फासीवाद की भयावह प्रकृति को देखा और समझा। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से पॉलिटिकल साइंस में बीए पूरा करने के बाद कुमार ने 2020 में मास्टर डिग्री के लिए जेएनयू में एंट्री की।  वह कोरोना काल के दौरान 2021 में जेएनयू को फिर से खोलने वाले आंदोलन के एक खास चेहरा रहे थे।  अगस्त 2023 में उन्होंने हॉस्टल संकट का हल निकालने की मांग करते हुए 16 दिनों की भूख हड़ताल की। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) जेएनयू इकाई के सचिव के तौर पर नीतीश कुमार ने फेलोशिप का अमाउंट बढ़ाने और एंट्रेस एग्जाम को बहाल करने का अभियान चलाया। </p>
<figure id="attachment_6405" aria-describedby="caption-attachment-6405" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/JNU-1.jpg"><img decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/JNU-1.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-6405" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/JNU-1.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/JNU-1-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/JNU-1-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/JNU-1-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/04/JNU-1-1536x1026.jpg 1536w" sizes="(max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6405" class="wp-caption-text">प्रतीक्षा और परिणाम</figcaption></figure>
<p>जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष एन साई बालाजी ने दावा किया है कि काउंसलर पद पर जीते चार निर्दलीयों को एबीवीपी अपनी जीत बता रही है, जबकि हक़ीकत में इन 44 सीटों में, बहुमत में जीत एबीवीपी विरोधियों का हुआ है  राष्ट्रीय जनता दल के छात्र संगठन के उम्मीदवार की स्कूल ऑफ़ इंटरनेशनल स्टडीज़ के काउंसलर पद पर जीत, जेएनयू छात्रसंघ चुनावों के लिए अब तक हुई मतगणना में सबसे ख़ास बात रही है।  छात्र राजद के काउंसलर पद के उम्मीदवार रवि राज ने भारी मतों से स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज में जीत दर्ज की है  । जिसको लेकर राजद की स्टूडेंट विंग में उत्साह का माहौल है। अध्यक्ष पद के उम्मीदवार अक्षय रंजन ने भी अपनी मेहनत और अध्यक्षीय भाषण से सबको प्रभावित किया. चंद वर्षों में छात्र राजद ने जेएनयू में अपनी विशेष पहचान बनाई है।  अभी हाल ही में दिल्ली विश्वविद्यालय अकादमिक काउंसिल चुनाव में राजद शिक्षक इकाई (राष्ट्रीय शिक्षक मोर्चा) के उम्मीदवार प्रो. विवेक रजक ने शानदार जीत दर्ज कर दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षकों के बीच अपनी बेहतरीन उपस्थिति दर्ज कराई थी। </p>
<p>एबीवीपी ने जेएनयू छात्रसंघ चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करते हुए विवि के 16 स्कूलों और विभिन्न संयुक्त केंद्रों के कुल 44 काउंसलर पदों में से 23 पदों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है।  स्कूल ऑफ सोशल साइंस, जिसे जेएनयू में वामपंथ का गढ़ माना जाता रहा है, वहां एबीवीपी ने 25 वर्षों बाद दो सीटों पर विजय प्राप्त कर बदलाव का संकेत दिया है।  यह किसी भी अन्य छात्र संगठन की तुलना में सर्वाधिक है। स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज, जो लंबे समय से वामपंथी प्रभाव का प्रमुख केंद्र रहा है, वहां भी एबीवीपी ने दो सीटों पर विजय हासिल कर नई राजनीतिक धारा को स्थापित किया है  । चुनाव प्रक्रिया की शुरुआत से एबीवीपी ने अपनी सशक्त उपस्थिति का परिचय दिया. विभिन्न स्कूलों के काउंसलर पदों पर परिषद के प्रत्याशियों ने निर्विरोध जीत दर्ज की है। <br />
 स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी की एकमात्र सीट पर सुरेंद्र बिश्नोई, स्कूल ऑफ संस्कृत एंड इंडिक स्टडीज की तीनों सीटों पर प्रवीण पीयूष, राजा बाबू और प्राची जायसवाल और स्पेशल सेंटर फॉर मॉलिक्यूलर मेडिसिन की एक सीट पर गोवर्धन सिंह निर्विरोध निर्वाचित हुए है।  इसके अतिरिक्त, केंद्रीय पैनल की चारों प्रमुख सीटों अध्यक्ष- शिखा स्वराज, उपाध्यक्ष- नितू गौतम, महासचिव- कुणाल राय और संयुक्त सचिव-वैभव मीणा शुरू से ही बढ़त बनाए हुए हैं. जिससे विद्यार्थी परिषद की जेएनयू में व्यापक स्वीकार्यता और छात्रों के विश्वास का प्रमाण मिलता है। </p>
<p><strong>एबीवीपी जेएनयू के इकाई अध्यक्ष राजेश्वर कांत दुबे ने कहा कि भारत विकास परिषद ने जेएनयूएसयू काउंसिल में 44 में से 23 सीटों पर विजय प्राप्त कर काउंसिल में पचास प्रतिशत से अधिक की उपस्थिति पर कब्जा कर इतिहास रच दिया है  । जिससे जेएनयूएसयू द्वारा किए जाने वाले फैसलों में अब अभाविप की अहम जगह प्राप्त हो सकेगी  । जो वामपंथ के गढ़ में बड़ी सेंध की तरह काम करेगा. यह विजय एबीवीपी के रूप में उस सकारात्मक बदलाव की विजय है. जिसे जेएनयू के छात्रों ने चुना है।  इस बदलाव की लहर लाने के लिए जेएनयू के सभी जागरूक छात्रों को अभाविप आभार ज्ञापित करता है। </strong></p>
<p>एबीवीपी, वाम-यूनाइटेड पैनल और वाम अंबेडकरराइट यूनाइटेड पैनल के अलावा बापसा और समाजवादी छात्र सभा के कार्यकर्ता भी मतदान केंद्रों पर अपने उम्मीदवारों का उत्साह बढ़ाते रहे. इस बार मुकाबला कड़ा और ध्रुवीकृत है। आठ साल बाद बने नए गठबंधन ने परिसर में पुरानी लड़ाई की रेखाओं को फिर से खींच दिया है। इस साल के चुनाव में बड़े पैमाने पर पुनर्गठन हुआ है और लंबे समय से चली आ रही वामपंथी गठबंधन बिखर गया। आल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स फेडरेशन के साथ गठबंधन किया है, जबकि स्टूडेंट्स फेडरेशन आफ इंडिया ने बिरसा अंबेडकर फुले स्टूडेंट्स एसोसिएशन, आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन और प्रोग्रेसिव स्टूडेंट्स एसोसिएशन के साथ मिलकर एक अलग मोर्चा बनाया है। </p>
<p>दरअसल, 2016 से लेकर अब तक आइसा, एसएफआइ, डीएसएफ, पीएसए सहित तमाम लेफ्ट आर्गेनाइजेशन यूनाइटेड लेफ्ट फ्रंट के बैनर तले गठबंधन में चुनाव लड़ते थे  । लेकिन इस बार यह गठबंधन टूट गया है. इस टूट का फायदा एबीवीपी को मिला है.2024 के चुनाव में 73 फीसद मतदान हुआ था । जोकि पिछले 12 वर्षों में सबसे अधिक था.2020 से 2023 तक जेएनयू में चुनाव नहीं हुए थे. जबकि जेएनयू में 2019 में 67.9 फीसद, 2018 में 67.8 फीसद, 2016-17 में 59 फीसद, 2015 में 55 फीसद, 2013-14 में 55 फीसद और 2012 में 60 फीसद मतदान हुआ था। इस बार चुनाव में 70 फीसद मतदान हुआ । पिछले साल की तुलना में इस बार तीन फीसद कम मतदान हुआ है। पिछले चुनाव में चारों सीटें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव और संयुक्त सचिव पर वामपंथी संगठनों ने जीत हासिल की थी। वहीं एबीवीपी को हार का सामना करना पड़ा था। 2973 वोट पाकर धनंजय छात्रसंघ अध्यक्ष बने थे। उन्होंने एबीवीपी के उमेश चंद्र अजमीरा से करीब तीन गुणे वोट मिले थे। उपाध्यक्ष पद पर अविजीत घोष ने एबीवीपी से लगभग दोगुणे वोट पाकर दीपिका शर्मा को हराया था. इसके अलावा सचिव पद पर वाम संगठन की प्रियांशी आर्य जीती थी। जबकि संयुक्त सचिव के पद पर वाम के ही मोहम्मद साजिद ने एबीवीपी के गोविंद दांगी को हरा कर सफलता पाई थी। </p>
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		<title>बिहार के अधिकांश पत्रकार सुशील मोदी के साथ यात्रा नहीं करना चाहते थे, क्योंकि वे &#8216;शाकाहारी&#8217; थे</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 14 May 2024 12:38:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[सम्पादकीय]]></category>
		<category><![CDATA[abvp]]></category>
		<category><![CDATA[bjp. sushil modi]]></category>
		<category><![CDATA[patna. bihar]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली: बिहार के लोग जब नरेंद्र मोदी का नाम नहीं सुने थे, बिहार में सुशील मोदी का नाम घरेलू हो गया था। अगर राजनीति नहीं हो और राज नेता के अनुयायी &#8216;निष्पक्ष निर्णय लेने लायक हो, तो आज ही नहीं, आने वाले काल खंडों में भी आधुनिक बिहार (जय प्रकाश नारायण आंदोलन के बाद) [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली: बिहार के लोग जब नरेंद्र मोदी का नाम नहीं सुने थे, बिहार में सुशील मोदी का नाम घरेलू हो गया था। अगर राजनीति नहीं हो और राज नेता के अनुयायी &#8216;निष्पक्ष निर्णय लेने लायक हो, तो आज ही नहीं, आने वाले काल खंडों में भी आधुनिक बिहार (जय प्रकाश नारायण आंदोलन के बाद) में अगर किसी भी &#8216;शिक्षित&#8217;, &#8216;तथ्यगत जानकारी रखने वाला&#8217;, &#8216;स्पष्टवक्ता&#8217; राजनेताओं का नाम लिया जाएगा तो वह नाम ‘एक वचन” से बहुवचन नहीं हो पाएगा और सुशील मोदी के नाम पर पूर्ण विराम भी लग जाएगा।</strong></p>
<p>आज बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गुलबंद बांधकर भले भारतीय जनता पार्टी के आला नेता के संग बैठकर कुर्सी का मज़ा लें, ठहाका-पर-ठहाका लगाएं, आला नेता भले यह स्वीकार नहीं करें, लेकिन हक़ीक़त यही है कि बिहार में सन् सत्तर के दशक के बाद पहले &#8216;दीपक&#8217; को &#8216;बुझने&#8217; से बचाये रखने, जलाये रखने और फिर कमल को खिलने-खिलाने में अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया तो वह पटना के राजेंद्र नगर रोड नंबर 8 के निवासी सुशील कुमार मोदी के अलावे कोई नहीं था। यहां तक कि भारतीय जनता पार्टी के वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जगत प्रकाश नड्डा भी सुशील मोदी के सामने बौने हैं। भले वे गोल-मटोल होकर, गोल-मटोल बातें कर सत्ता के सिंहासन पर विराजमान हों। </p>
<p>यह बात मैं ही नहीं, प्रदेश के &#8216;निष्पक्ष&#8217; पत्रकार, जिन्हें अख़बारों के लिए &#8216;विज्ञापन&#8217; एकत्रित नहीं करना होता है, मालिकों को राजनीतिक-लाभ दिलाने के लिए क्षण-प्रतिक्षण दण्ड बैठकी नहीं करना पड़ता है, स्वीकार करेंगे । इतना ही नहीं, इस बात पर पटना कॉलेज का यह विशाल मैदान, भले इस मैदान को सुशील मोदी किताब-कॉपी के साथ एक कक्षा से दूसरे कक्षा में जाने के क्रम में नहीं नापे हों, इस मैदान की मिट्टी प्रत्यक्ष गवाह है जहाँ सत्तर के दशक से सफ़ेद कमीज, खाकी हाफ पैंट, काली टोपी और अपने कद से अधिक ऊँचा डंडा लिए प्रत्येक रविवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ उपस्थित होते थे। पटना विश्वविद्यालय को अपने दिवंगत छात्र नेता के व्यक्तित्व पर नाज है। </p>
<p><strong>5 जनवरी, 1952 को पटना में जन्म लिए सुशील मोदी का 72 वर्ष की आयु में कल रात अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली में निधन हो गया। सुशील मोदी के निधन से सन 1974 की सम्पूर्ण क्रांति की उपज का पहला स्तंभ गिर गया। मोदी कैंसर से जूझ रहे थे और दिल्ली के एम्स अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। लोकसभा चुनाव के ऐलान के बाद सुशील मोदी ने अपनी बीमारी की जानकारी सार्वजनिक की थी। उन्होंने एक्स पर लिखा था, &#8221;मैं पिछले छह महीने से कैंसर से जंग लड़ रहा हूं। अब मुझे लगता है कि लोगों को इस बारे में बता देना चाहिए। मैं लोकसभा चुनाव में ज़्यादा कुछ नहीं कर पाऊंगा।&#8221; </strong></p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा है, &#8221;पार्टी में अपने मूल्यवान सहयोगी और दशकों से मेरे मित्र रहे सुशील मोदी जी के असामयिक निधन से अत्यंत दुख हुआ है। बिहार में भाजपा के उत्थान और उसकी सफलताओं के पीछे उनका अमूल्य योगदान रहा है। आपातकाल का पुरज़ोर विरोध करते हुए, उन्होंने छात्र राजनीति से अपनी एक अलग पहचान बनाई थी। वे बेहद मेहनती और मिलनसार विधायक के रूप में जाने जाते थे. राजनीति से जुड़े विषयों को लेकर उनकी समझ बहुत गहरी थी। उन्होंने एक प्रशासक के तौर पर भी काफ़ी सराहनीय कार्य किए. जीएसटी पारित होने में उनकी सक्रिय भूमिका सदैव स्मरणीय रहेगी. शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और समर्थकों के साथ हैं। &#8221; </p>
<p>सुशील मोदी जेपी आंदोलन की उपज माने जाते थे। जयप्रकाश आंदोलन से रामजनम सिन्हा, नीतीश कुमार, लालू प्रसाद यादव, नरेंद्र सिंह, सुशील मोदी, शिवानंद तिवारी जैसा राजनीतिक नेताओं का जन्म हुआ। सुशील मोदी की छात्र राजनीति की शुरुआत साल 1971 में हुई जब वे पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ की पांच सदस्यीय कैबिनेट के सदस्य निर्वाचित हुए।  1973 में वो महामंत्री चुने गए। उस वक़्त पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और संयुक्त सचिव रविशंकर प्रसाद चुने गए थे। भारतीय जनता पार्टी के सिद्धांतकार और संघ विचारक रहे केएन गोविंदाचार्य को सुशील कुमार मोदी का राजनीतिक गुरु माना जाता है। </p>
<p>श्रीमती रत्ना देवी &#8211; श्री मोती लाल मोदी के पुत्र सुशील मोदी अपने पीछे अपनी विधवा डॉ. जैसी सुशील मोदी और दो पुत्र उत्कर्ष तथागत और अक्षय अमृतांशु को छोड़ गए हैं। सुशील मोदी पटना के संत माइकल स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण किया। बाद में वे ​पटना साइंस कॉलेज से वनस्पति विज्ञान में स्नातक किये। जेपी आंदोलन के प्रभाव में आने के बाद उन्होंने स्नातकोत्तर कक्षा में दाखिला लेकर पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी। </p>
<div style="width: 480px;" class="wp-video"><video class="wp-video-shortcode" id="video-5480-1" width="480" height="864" preload="metadata" controls="controls"><source type="video/mp4" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/05/Modi.mp4?_=1" /><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/05/Modi.mp4">http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/05/Modi.mp4</a></video></div>
<p>तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा लागू  आपातकाल के दौरान मोदी बिहार की राजनीतिक वातावरण में उभर कर आए। अपनी वाक्पटुता, स्पष्ट विचार के कारण वे पटना के मजदूरों से लेकर शिक्षाविदों तक सभी के पसंदीदा रहे। आपातकाल के दौरान वे 19 महीने जेल में रहे। सन 1977 से 1986 तक वो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में महत्वपूर्ण पदों पर रहे। बिहार की राजनीति में सुशील मोदी अपना नाम अपने दम पर लिखा। सन 1968 में वे राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ से जुड़े और आजीवन आरएसएस के कार्यकर्त्ता बने रहे। सन 1974 आंदोलन के दौरान वे बिहार प्रदेश छात्र संघर्ष समिति के सदस्य बने। सन 1983 आते-आते वे विद्यार्थी परिषद् के राष्ट्रीय महासचिव के पद पर आसीन हुए। </p>
<p>1990 में सुशील कुमार मोदी ने पटना केन्द्रीय विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े और विधानसभा पहुंचे। 1995 और 2000 का भी चुनाव वो इसी सीट से जीते। साल 2004 में उन्होंने भागलपुर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव जीता था। साल 2005 में उन्होंने संसद सदस्यता से इस्तीफ़ा दिया और विधान परिषद के लिए निर्वाचित होकर उपमुख्यमंत्री बने। साल 2005 से 2013 और फिर 2017 से 2020 के दौरान वो बतौर उपमुख्यमंत्री अपनी भूमिका निभाते रहे। इस दौरान वो पार्टी में भी अलग-अलग दायित्व संभालते रहे। दिसंबर, 2020 में उन्हें पार्टी ने राज्यसभा भेजा। </p>
<p>नब्बे में जिस पटना केंद्रीय विधानसभा क्षेत्र (अब कुम्हरार विधानसभा क्षेत्र) से सुशील मोदी चुनाव जीते थे, कोई साढ़े तीन दशक बाद आज तक उस विधानसभा क्षेत्र में &#8216;मोदी के पग के निशान&#8217; दीखते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस स्थान से भारतीय जनता पार्टी का कोई भी अभ्यर्थी चुनावी मैदान में अपनी टोपी उछालेगा, वह सुशील मोदी के नाम से विजय हो जायेगा। राजनीतिक विचारधाराओं में विविधता के वावजूद इस विधानसभा क्षेत्र के सभी लोग सुशील मोदी का बहुत सम्मान करते हैं। जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से जन्म लिए किसी भी राजनेताओं को, यहाँ तक की वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार या अन्य केंद्रीय मंत्रियों को वह सम्मान नहीं प्राप्त हुआ। </p>
<p>सत्तर के दशक में जब देश में, खासकर बिहार और प्रदेश की राजधानी पटना में राजनीतिक परिवेश बदल रहा था, उन दिनों मैं पटना की सड़कों पर अखबार विक्रेता (1968-1975) था। जयप्रकाश नारायण की सम्पूर्ण क्रांति का प्रत्यक्षदर्शी रहा। उनके आंदोलन के कारण सड़कों पर अखबार -आर्यावर्त, इंडियन नेशन, सर्चलाइट और प्रदीप &#8211; खूब बेचते थे। उन दिनों मैं पटना कॉलेज के सामने सामने ननकूजी के होटल के ऊपर गली के कोने पर रहता था। सन 1974 में दसवीं कक्षा का परीक्षार्थी भी था। कलाई पर घड़ी नहीं थी, इसलिए सुवह-सुवह अशोक राजपथ पर (पटना कॉलेज प्रवेश द्वार के समीप) ब्रह्म स्थान के नीचे से जाने वाली बैलगाड़ी बैल की घंटी की आवाज से उठ जाया करता था। उस सुबह भी घंटी की आवाज से उठा। कुछ देर बाद साइकिल से गांधी मैदान स्थित बस अड्डे के तरफ निकला अखबार लिए &#8211; बांटने के लिए। </p>
<p>साइकिल पर बैठा ही था, इस वृक्ष के नीचे पटना विश्वविद्यालय के तत्कालीन सभी छात्र नेता जो जय प्रकाश नारायण के आंदोलन में सक्रीय थे, खड़े दिखाई दिए। बहुतों के पैर में चप्पल था, पैजामा &#8211; कुर्ता, बेलबॉटम पहने थे। क्रांति की तैयारी हो रही थी। सुशील मोदी, लालू यादव. नवल सिंह आदि छात्र नेताओं के साथ-साथ पटना के तत्कालीन छायाकार कृष्णमुरारी किशन भी उपस्थित थे। कुछ पल रुका।  सबों ने हाल-चाल पूछा। फिर मैं आगे निकल पड़ा। इस बृक्ष के नीचे दाहिने फुटपाथ पर एनीबेसेन्ट रोड के कोने पीपुल्स बुक हॉउस, चाय वाला, दास स्टूडियो इत्यादि दूकानों पर उस सुवह जो भी लोग बाग़ खड़े दिखे थे, वे बिहार सरकार में विराजमान हुए। </p>
<p><strong>बहरहाल, सुशील मोदी तत्कालीन नेताओं में सबसे &#8216;तेज&#8217; थे, &#8216;सभी मामलों&#8217; में। आज के भाजपा के नेता भले इस बात को स्वीकार नहीं करें (स्वहित में), हकीकत यह है कि अगर उन दिनों सुशील मोदी नहीं होते तो पहले जनसंघ और बाद में भाजपा समाप्त हो गया होता। </strong></p>
<p><strong>वरिष्ठ पत्रकार सुधाकर जी</strong> कहते हैं: &#8220;प्रदेश में भाजपा को जीवित रखने का सम्पूर्ण श्रेय सुशील मोदी को जाता है। सुशील मोदी राजेंद्र नगर रोड नंबर-8 में रहते हैं और मैं रोड नंबर- 11 में। दोनों पटना विश्वविद्यालय के छात्र रहे, समकक्ष। उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे पढ़ते बहुत थे। तथ्यों को दस्तावेजों के साथ प्रस्तुत करने की उनकी बहुत बेहतरीन आदत थी। वे हवा में आरोप-प्रत्यारोप की बात नहीं करते थे। राजनीतिक  विचार धाराएं अलग-अलग होने के बावजूद भी लोग सुशील मोदी के इस गुण के कायल थे। ऐसे गुण जयप्रकाश नारायण आंदोलन के बाद जो भी नेता जन्म लिए, उनमें पूर्णता के साथ अभाव था और है भी।&#8221;</p>
<p>सुधाकर जी आगे कहते हैं: &#8220;मैं सुशील  मोदी को पिछले साठ सालों से जानता हूँ, देखा हूँ, परिचित हम, मिला हूँ। वे एक चलंत पुस्तकालय थे। उनके पास दस्तावेजों का अम्बार था। जब बिहार में नेताओं के द्वारा भ्रष्टाचार में लिप्त होने की बात की शुरुआत हुयी, सुशील मोदी दस्तावेजों के साथ भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़े। जब भी विधायक फंड की बात होती थी विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए, वे खुलकर लोगों से कहते थे कि आप भी खर्च करें और हम भी खर्च करते हैं। दोनों मिलकर विकास का कार्य करते हैं। इतना ही नहीं, कई ऐसे अवसर आये जब प्रदेश के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उनसे सलाह लेते थे।&#8221;</p>
<p><strong>टाइम्स ऑफ़ इण्डिया के वरिष्ठ पत्रकार (अवकाश प्राप्त) श्री लवकुमार मिश्रा</strong> कहते हैं कि &#8220;सुशील जी का जीवन &#8216;जीवन-पर्यन्त&#8217; सादगी से बीता। पटना के पोलो रोड स्थित आधिकारिक आवास पर वे सुबह दस बजे से देर रात दो बजे तक कार्य करते थे। सोने के लिए वे अपने घर राजेंद्र नगर जाते थे। हम एक अच्छे मित्र को खो दिया।&#8221;</p>
<p>बहरहाल, सन् 1983 की बात है। कपिल देव की अगुवाई में क्रिकेट विश्व कप खेला जा रहा था। मैच अपने अंतिम चरण में तब। उन दिनों मैं पटना विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर करने के बाद इंडियन नेशन अख़बार के संपादकीय विभाग में आ गया था। विश्वकप फ़ाइनल मैच के आस-पास ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का आगरा में अधिवेशन होने जा रहा था। परिषद के न्योता पर हम तीन पत्रकार आगरा जाने के लिए तैयार हुए। देश में राजनीतिक वातावरण बदल रहा था। राजनीति की परिभाषा भी बदल रही थी। राजनीति में देश के युवा वर्ग आने को सज्ज हो रहे थे। उधर कांग्रेस पार्टी भी युवा कांग्रेस को मजबूत करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही थी। लेकिन इसकी जमीनी स्तर पर संगठन मजबूत नहीं हो पा रहा था। जबकि विद्यार्थी परिषद के एक एक कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर कैडर को मजबूत करने का अथक प्रयास कर रहा था। सुशील मोदी विद्यार्थी परिषद् के शीर्षस्थ पद पर विराजमान थे। </p>
<p>हम तीन &#8211; श्री त्रिवेदी अमरीश (अब दिवंगत), श्री ज्ञानवर्धन मिश्र और मैं &#8211; आगरा की और निकल पड़े। उन दिनों इण्डियन नेशन अख़बार के संपादक थे श्री दीननान्थ झा। उनका आदेश था कि कहानी में शब्दों का प्रयोग ठीक से करना, साथ ही, ऐसा लिखना जिससे प्रदेश के युवापीढ़ियों को राजनीति में सजग और अध्यनशील रहने का सन्देश हो। आगरा पहुँचने पर हम तीनों गंतव्य स्थान पर पहुँचने के लिए होटल से कुछ समय पहले निकले जिससे वक्ताओं के कोई शब्द छूटे नहीं। तभी सुशील मोदी और हेमंत शुक्ला एक जीप से आगे निकले।  लेकिन तक्षण रुके और उनके जीप में एक खली स्थान पर ज्ञानवर्धन जी को उठा लिए। जीप पर ज्ञानवर्धन जी को बिच का स्थान मिला। परिणाम यह हुआ कि गंतव्य तक पहुँचने के क्रम में सड़क के दोनों तरफ जो भी व्यक्ति माला पहना रहे थे, सुशील मोदी के गले में नहीं, बल्कि ज्ञानवर्धन जी के गले में शोभायमान हो रहा था। खैर। </p>
<p>वैसे बिहार के पत्रकार इस बात को भी स्वीकार करेंगे (खासकर जो शाकाहारी नहीं हैं) कि प्रदेश का बाहुल्य पत्रकार सुशील मोदी के साथ यात्रा नहीं करना चाहते थे। वजह यह था कि वे &#8216;शाकाहारी&#8217; थे और उस ज़माने में भी &#8216;मदिरा निषेध&#8217; नहीं होने के बाद भी सुशील से स्वच्छ जल पीने-पिलाने में अधिक विश्वास रखते थे &#8211; चाहे चुनाव का समय हो या अन्य। </p>
<p>बहरहाल, <strong>डा धनाकर ठाकुर</strong> का कहना है कि &#8220;मिथिला के समर्थक थे मेरे मित्र सुशील मोदी।&#8221; उन्होंने कहा कि बिहार के भूतपूर्व उपमुख्यमंत्री &#8216;सुशील कुमार मोदी नेता विपक्ष के रूप में मेरे मिथिल राज्य आन्दोलन की सफलता के लिए पत्र भेजा था । उन्हें &#8216;भारत का प्रधानमंत्री बनाना था &#8216; जब मैंने यह बात कुछ वर्ष पूर्व पटना में कही थी तो लोगों को आश्चर्य हुआ था । गुजराती भाषा  दादरा नगर हवेली दमन दीव और  विरार वाले  पश्चिमी मुम्बई के साथ 28 लोकसभा क्षेत्र केवल हैं जबकि बिहार- झारखंड के 54 के साथ 68 लोकसभा के  दूसरे प्रदेशों में क्षेत्र हैं जहां बिहारी मतदाता निर्णायक हैं विशेषत: मैथिल मतदाता। इतने प्रभावी क्षेत्र में किन्हीं की भी पकड़ मजबूत नहीं संभव। फिर सुशील कुमार मोदी बिहार के अपने बैच के 124 सर्वश्रेष्ठ बायलोजी छात्र में एक थे जिनका ही साइंस कॉलेज, पटना में प्रवेश हो  सकता था और आनर्स में प्रथम वर्ग में दूसरा स्थान प्राप्त किया। मनमोहन सिंह सरकार के समय जीएसटी पैनल के चेयरमैन बने जिनको अपने ही दल ने भारत का वित्त मंत्री भी नहीं बनाया जो दुखद हुआ।</p>
<p>1974 छात्र आन्दोलन के नेता अपने दल के अधिक विधायक रहते हुए भी बिहार के मुख्यमंत्री पद के लिए उन्होंने जोर नहीं दिया, इतना ही  नहीं उन्होंने कभी बहिरागत के लिए  विपक्षी दल का नेता पद भी छोड़ि दिया। अहंकारविहीन व्यक्ति सुशील कुमार मोदी थे। बंगलोर में 2006 में मिथिला के विकास के लिए प्रेजेंटेशन मैथिल आइ टी कर्मी साथ मैंने रखा थ। शिमोगा से गोरक्षा रैलीज्ञसे वे ओ लेट आए थे अतः बिहार भवन के कार्यक्रम के बाद बोले कि भोजन के बाद प्रेजेंटेशन हो तो मैंने डांटते हुए कहा नहीं आपका भोजन वहीं होगा, युवाकर्मिंयों को दूर जाना है और वही हुआ। टिफिन से वे खाते रहे और प्रेजेन्टेशन चलता  रहा। समय के वे पक्के थे। राजनेता के अवसान पर मिथिला की श्रद्धांजलि।</p>
<p><strong>बहरहाल, जिस अख़बारों में प्रकाशित होकर आप छात्र नेता से राष्ट्रीय नेता बने, प्रदेश के राजनीतिक गलियारे के रास्ते संसद तक विराजमान हुए और राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रीय अख़बारो में प्रकाशित हुए, उन्हीं अख़बारों संस्थापक, संरक्षक के सम्मानार्थ बने वेबसाइट का श्रद्धांजलि स्वीकार करें। पांच-छह दशक पूर्व अपने सभी पत्रकार मित्रों के तरफ से (जो जीवित हैं और जो मृत्यु को प्राप्त किये) उनके तरफ से श्रद्धांजलि स्वीकार करें। मुझे उम्मीद हैं कि आधुनिक बिहार में शायद आप पहला और अंतिम छात्र नेता होंगे जिनके बारे में लिखते समय अश्रुपूरित हूँ। </strong></p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/editorial/most-journalists-from-bihar-did-not-want-to-travel-with-sushil-modi-because-he-was-a-vegetarian">बिहार के अधिकांश पत्रकार सुशील मोदी के साथ यात्रा नहीं करना चाहते थे, क्योंकि वे &#8216;शाकाहारी&#8217; थे</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ का चुनाव कल, अभ्यर्थी भी तैयार, छात्र-छात्राएं भी तत्पर, दिल्ली पुलिस-प्रशासन भी मुस्तैद</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 21 Sep 2023 04:01:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
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<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/politics/dusu-election-tomorrow">दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ का चुनाव कल, अभ्यर्थी भी तैयार, छात्र-छात्राएं भी तत्पर, दिल्ली पुलिस-प्रशासन भी मुस्तैद</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>दिल्ली विश्वविद्यालय परिसर (दिल्ली) : चार वर्षों के बाद कल, 22 सितंबर 2023 को दिल्ली विश्वविद्यालय के करीब 52 महाविद्यालयों और संकायों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं अगले चुनाव तक के लिए छात्रसंघ के अपने-अपने प्रतिनिधि चुनेंगे। दिल्ली प्रशासन, दिल्ली पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से सुरक्षा बंदोबस्त पर्याप्त है। परिसर में चुनाव का माहौल अपने उत्कर्ष पर है। वैसे छात्र राजनीति में जो भी अभ्यर्थी रहे हैं अथवा हैं, सबों की निगाहें आगामी वर्ष होने वाली दिल्ली विधानसभा और लोकसभा चुनाव पर भी है। क्या पता किस वेश में नारायण (टिकट) मिला जाय ?</strong></p>
<p>उधर दिल्ली पुलिस की ओर से पुलिस कर्मियों को पूरी छूट दी गई है ताकि किसी भी प्रकार की कोई अप्रिय घटना न घटित हो। दिल्ली पुलिसकर्मी, अधिकारी अपनी पैनी निगाह वाहनों पर रखे हैं। पुलिसकर्मियों का कहना है कि &#8220;परिसर में तैनाती के कारण हमें इस बात पर विशेष ध्यान रखना है कि प्रचार-प्रसार के दौरान, चुनाव के दौरान बाहर से कोई अपराधी किस्म के लोग परिसर में दाखिल नहीं लें लें। उनका कहना है कि दिल्ली विश्वविद्यालय परिसर से अनेक सड़कें निकलती हैं, वैसी स्थिति में यह देखना, पड़ताल रखना कि कौन छात्र है और कौन अपराधी मुस्किल होता है। </p>
<p>विगत दिनों छात्र संघ के एक प्रत्याशी के समर्थक मिरांडा हाउस में गेट खोलकर प्रवेश कर गया। मिरांडा हाउस में ऐसी घटना पहले भी हो चुकी है। चार वर्षों के बाद होने वाली इस चुनाव में विभिन्न छात्र संगठनों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के सैकड़ों छात्र अपने-अपने संघों के प्रतिनिधियों के समर्थन में यहाँ डेरा डाले हैं। छात्रसंघ के चुनाव में प्रशासन के द्वारा चुनाव में खर्च की सीमा पांच हज़ार रुपये निर्धारित करने पर परिसर में कई लोग हंस रहे थे। उनका कहना था कि &#8220;यह प्रशासन की सोच को बताता है। भारत का चुनाव आयोग पंचायत से लोक सभा के प्रत्याशियों के लिए चुनाव खर्च निर्धारित कर रखा है, लेकिन क्या उन चुनावों के दौरान उतने ही खर्च होते हैं?&#8221;</p>
<figure id="attachment_5097" aria-describedby="caption-attachment-5097" style="width: 1684px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/Screenshot-2023-09-21-at-9.19.12-AM.png"><img decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/Screenshot-2023-09-21-at-9.19.12-AM.png" alt="" width="1684" height="951" class="size-full wp-image-5097" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/Screenshot-2023-09-21-at-9.19.12-AM.png 1684w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/Screenshot-2023-09-21-at-9.19.12-AM-300x169.png 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/Screenshot-2023-09-21-at-9.19.12-AM-1024x578.png 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/Screenshot-2023-09-21-at-9.19.12-AM-768x434.png 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/Screenshot-2023-09-21-at-9.19.12-AM-1536x867.png 1536w" sizes="(max-width: 1684px) 100vw, 1684px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5097" class="wp-caption-text">चुनाव का माहौल</figcaption></figure>
<p>नॉर्थ कैम्पस में चुनावी माहौल तो है ही, दिल्ली पुलिसकर्मियों की भी प्रचुर मात्रा में तैनाती है। विश्वविद्यालय के छात्र समुदाय एक दूसरे पार्टी के नेताओं पर दोषारोपण कर रहे हैं। स्वाभाविक भी है। कई अन्य संगठनों के कार्यकर्त्ता परिसर में मुस्तैद हैं। कोई सड़कों पर, कालेज परिसरों में पर्ची, पर्चा, तस्वीर, कागज आदि चतुर्दिक बिखरे होने पर आपत्ति जाता रहे हैं तो को यह कह रहे हैं की चुनाव जितने पर विश्विद्यालय की छात्रों के लिए सेनेटरी पैड उपलब्ध कराया जायेगा।  वे यह भी कह रहे हैं कि पीरियड के समय छात्रों को 15 दिनों का अवकाश देने की व्यवस्था होगी। </p>
<p><iframe loading="lazy" title="@अखबारवाला001(151) ✍ DUSU चुनाव में कहीं शिक्षण शुल्क कम करने की बात तो कोई सेनेटरी पैड की चर्चा" width="696" height="392" src="https://www.youtube.com/embed/tFpHUs8aZfg?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture; web-share" allowfullscreen></iframe></p>
<p>नार्थ कैम्पस में बड़ी-बड़ी चार-वाहनों पर मोटे, तगड़े, हठ्ठे-कठ्ठे लोगों की भीड़ है। वैसे दिल्ली पुलिस प्रशासन गंभीरता के मद्दे नजर बंदोबस्त करने में कोई कमी नहीं छोड़ी है &#8211; फिर भी। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में प्रचार तेज हो गया है। इसी क्रम में लिंगदोह कमेटी द्वारा तय अधिकतम पांच हजार रुपये की खर्च सीमा से कहीं अधिक एक दिन में गाड़ियों में पेट्रोल भराने में खर्च हो जा रहा है। इसके साथ ही सड़क से इंटरनेट मीडिया तक प्रचार में चुनाव प्रबंधन का खर्च करोड़ों में पहुंच रहा है। दिल्ली पुलिस गाड़ियों पर विशेष नजर रखी है। इस चुनाव में नाव में छात्र संगठनों ने चुनाव प्रचार में सारी ताकत झोंक दी है। </p>
<figure id="attachment_5098" aria-describedby="caption-attachment-5098" style="width: 1708px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/Screenshot-2023-09-21-at-9.18.44-AM.png"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/Screenshot-2023-09-21-at-9.18.44-AM.png" alt="" width="1708" height="940" class="size-full wp-image-5098" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/Screenshot-2023-09-21-at-9.18.44-AM.png 1708w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/Screenshot-2023-09-21-at-9.18.44-AM-300x165.png 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/Screenshot-2023-09-21-at-9.18.44-AM-1024x564.png 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/Screenshot-2023-09-21-at-9.18.44-AM-768x423.png 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2023/09/Screenshot-2023-09-21-at-9.18.44-AM-1536x845.png 1536w" sizes="auto, (max-width: 1708px) 100vw, 1708px" /></a><figcaption id="caption-attachment-5098" class="wp-caption-text">उमीदवारों का कार्ड और दिल्ली की सड़कें</figcaption></figure>
<p>डूसू के 2019 में हुए चुनाव में एबीवीपी ने चार में से तीन सीटें जीतीं। इस बार एबीवीपी की तरफ से तुषार डेढ़ा को अध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाया गया है। उन्होंने सत्यवती कॉलेज से स्नातक किया है और फिलहाल बौद्ध अध्ययन में स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर रहे हैं। वह 2015 में एबीवीपी से जुड़े थे। सुशांत धनखड़ उपाध्यक्ष पद के लिये लड़ेंगे। हरियाणा से आने वाले धनखड़ राज्य स्तरीय शूटिंग चैंपियन भी हैं। सचिव पद के लिए चुनाव लड़ रहीं अपराजिता उत्तर प्रदेश के जौनपुर की रहने वाली हैं। धनखड़ और अपराजिता भी बौद्ध अध्ययन में स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर रहे हैं। एबीवीपी ने सचिन बैसला को संयुक्त सचिव पद के लिये अपना उम्मीदवार बनाया है। वह भी बौद्ध अध्ययन में स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर रहे हैं।</p>
<p>जबकि, NSUI ने विधि अंतिम वर्ष के छात्र हितेश गुलिया को डूसू अध्यक्ष पद के लिये अपना उम्मीदवार बनाया गया है। अभी दहिया को एनएसयूआई ने उपाध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाया गया है। वह बौद्ध अध्ययन में स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर रहे हैं। एनएसयूआई की तरफ से 24 वर्षीय यक्षणा शर्मा सचिव पद के लिये उम्मीदवार होंगी। वह &#8216;कैंपस लॉ सेंटर&#8217; में विधि अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रही हैं। शुभम कुमार चौधरी एनएसयूआई के संयुक्त सचिव पद के उम्मीदवार होंगे। वह भी बौद्ध अध्ययन में स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर रहे हैं। </p>
<p>इसके अलावे पूर्वांचल की राजनीतिक लाभ उठाने वाले &#8216;आधुनिक&#8217; और &#8216;शहरी&#8217; नेताओं की गढ़ को तोड़ने के लिए बिहार के निशि हिमांशु राज इनसो की ओर से सचिव पद पर चुनाव लड़ रहे हैं। वे दिल्ली विश्वविद्यालय के लॉ फैकल्टी के छात्र हैं। पूर्वांचल से आने वाले निशि हिमांशु राज छात्रों की जमीनी जरूरतों को अच्छी तरह से जानते हैं। वे बिहार के सीवान जिला से हैं। </p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/politics/dusu-election-tomorrow">दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ का चुनाव कल, अभ्यर्थी भी तैयार, छात्र-छात्राएं भी तत्पर, दिल्ली पुलिस-प्रशासन भी मुस्तैद</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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