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	<title>सम्पादकीय Archives - आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</title>
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		<title>ना भैय्या !!! जीवन में फिर कभी दरभंगा नहीं आऊंगा : छाया पत्रकार रवि बत्रा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 29 Jun 2025 04:15:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[सम्पादकीय]]></category>
		<category><![CDATA[darbhanga]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>दरभंगा / नई दिल्ली : भारत सरकार में भारतीय रेल को देखने के लिए तीन मंत्री हैं &#8211; अश्विनी वैष्णव और उनके दो सहयोगी &#8211; रावणीत सिंह तथा वी. सोमन्ना। मुझे उम्मीद है इन तीनों मंत्रियों में आज तक कोई दिल्ली से बिहार के शहरों की ओर यात्रा नहीं किये होंगे। अपवाद स्वरूप अगर &#8216;राजनीति&#8217; [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>दरभंगा / नई दिल्ली : भारत सरकार में भारतीय रेल को देखने के लिए तीन मंत्री हैं &#8211; अश्विनी वैष्णव और उनके दो सहयोगी &#8211; रावणीत सिंह तथा वी. सोमन्ना। मुझे उम्मीद है इन तीनों मंत्रियों में आज तक कोई दिल्ली से बिहार के शहरों की ओर यात्रा नहीं किये होंगे। अपवाद स्वरूप अगर &#8216;राजनीति&#8217; के लिए गए भी होंगे, तो रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष से लेकर भारतीय रेल के चपरासी तक, सभी स्टेशनों पर नतमस्तक रहे होंगे। आखिर सबकी नौकरी का सवाल है। यात्रा के दौरान दिल्ली के बाद उत्तर प्रदेश का भूभाग आता है और फिर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्य का चौहद्दी। उम्मीद है नीतीश कुमार भी शायद ही ट्रेन में सफर करते होंगे, खासकर भारत के मुख्यमंत्रियों की कार्यकाल की सूची में जबसे सबसे लम्बी अवधि के मुख्यमंत्री के रूप में दर्ज हुए। </strong></p>
<p>विगत दिनों दिल्ली के एक प्रख्यात छाया पत्रकार और मेरे इंडियन एक्सप्रेस के पुराने सहकर्मी रवि बत्रा को बिहार चुनाव के मद्देनजर, बिहार में विकास के दावे के मद्देनजर, एक विदेशी असाइनमेंट के सिलसिले में &#8216;आम मतदाता&#8217; के रूप में दिल्ली से दरभंगा सफर करना था। साथ ही, मिथिला क्षेत्र में विकास के मामले में दिल्ली के साथ-साथ बिहार विधानसभा में &#8216;बिना क्रिच टूटे वस्त्रों को धारण करने वाले सांसद से लेकर विधानसभा सदस्यों के वादे भी देखने थे &#8211; अपनी आखों से और फिर कैमरे से । </p>
<blockquote><p>भारतीय (मिथिला) मूल के एक विदेशी ने बत्रा साहब को यह कार्य सौंपा था और कहा था कि आप एक आम नागरिक बनकर, आम नागरिक वाले ट्रेन से दिल्ली से दरभंगा की यात्रा करेंगे, फिर शहर, खासकर दरभंगा लोक सभा क्षेत्र में आने वाले सभी छह विधानसभा क्षेत्रों का भ्रमण-सम्मेलन कैमरे की नजर से करेंगे, तस्वीरें खीचेंगे और तस्वीरों के आधार पर कहानियां लिखी जाएँगी। उनका कहना था कि &#8216;नेताओं की बोलती को तस्वीर ही बंद करेगी आगामी चुनाव में।&#8217;</p></blockquote>
<p>दिल्ली में ट्रेन पर बैठने और फिर वापस दरभंगा से दिल्ली की ओर यात्रा करने के क्रम में बत्रा साहब लगातार फोन से जुड़े थे। दिल्ली में ट्रेन पर बैठने के साथ ही उन्होंने जो कहा वह कहानी में शब्दबद्ध होंगे; लेकिन दिल्ली से दरभंगा बिहार के लोग कैसे जाते हैं, यह गहन शोध का विषय है। यह विषय भारतीय रेल, भारत के रेल मंत्रालय, ऊंची ऊंची कुर्सियों पर बैठे अधिकारियों के लिए &#8216;नकारात्मक टिपण्णी&#8217; है। प्रदेश के मुख्यमंत्री, पूर्व रेलमंत्री होने के बाद भी, अपने प्रदेश में चलने वाली या प्रदेश से गुजरने वाली ट्रेनों की दशा को शायद कभी नहीं देखते होंगे। यकीन मानिए, 65-वर्ष की आयु में पहली बार दरभंगा आया हूँ, और शायद जीवन में फिर कभी नहीं आऊंगा।&#8221;</p>
<p><strong>रवि बत्रा की बातों को सुनकर भारत रत्न शहनाई उस्ताद बिस्मिल्लाह खान याद आ गए। आज से कोई सैंतालीस वर्ष पूर्व सन 1974 में भारत के शहनाई सम्राट उस्ताद बिस्मिल्लाह खान दरभंगा किले के अंदर अपनी साँसों को रोकते, शहनाई की धुन को कुछ पल ‘वाधित’ करते दरभंगा राज के तत्कालीन सभी ‘धनाढ्यों’ के सम्मुख, वहां उपस्थित मिथिलाञ्चल के तथाकथित ज्ञानी-महात्माओं के सम्मुख बिना किसी भय के कहते हैं: “मैं राजा बहादुर (विश्वेश्वर सिंह) की शादी में शहनाई बजाया, मैं युवराज (राजकुमार जीवेश्वर सिंह) के विवाह में शहनाई से नई बहु का स्वागत किया। आज उसी शहनाई के धुन से युवराज की सबसे बड़ी बेटी की मांग में उसके शौहर द्वारा सुंदर भरते समय सुखमय जीवन का आशीर्वाद देता हूँ। और आज से यह प्रण लेता हूँ कि आज के बाद कभी दरभंगा राज परिसर में, इस लाल किले के अंदर नहीं आऊंगा, कभी शहनाई नहीं बजाऊंगा।&#8221;</strong></p>
<p>बिस्मिल्लाह खान ने कहा था: &#8220;आज महाराजाधिराज के लिए, राजा बहादुर के लिए मन व्याकुल हो रहा है। उनकी अनुपस्थिति खल रही है। आज उनके बिना रोने का मन कर रहा है। आज इस भूमि पर उन दो महारथियों की अनुपस्थिति ने संगीत की दुनिया को अस्तित्वहीन महसूस कर रहा हूँ। आज शहनाई का मंगल ध्वनि बिलख गया है। आज युवराज को देखकर दरभंगा राज का भविष्य देख रहा हूँ। इस लाल किले की दीवारों के ईंटों से सरस्वती जाती दिख रही हैं। इस दीवार का रंग और भी लाल होना इसका प्रारब्ध है। आज बड़ी महारानी को छोड़कर कोई भी बिस्मिल्लाह खान की शहनाई को देखने वाला, पूछने वाला, समझने वाला नहीं रहा …… और वे फ़ुफ़क फ़ुफ़क कर रोने लगे। उनकी साँसे जिस रफ़्तार से ”रीड” के रास्ते ”पोली” होते हुए ”शहनाई” तक पहुँच रही थी, और जिस प्रकार का धुन निकल रहा था, वह न केवल महाराजाधिराज, राजाबहादुर और युवराज के लिए समर्पण था, बल्कि जीवन में कभी फिर दरभंगा के उस लाल किले में पैर नहीं रखने का वादा भी था। मंगल ध्वनि बजाने वाला वह नायक अपने शब्दों पर जीवन पर्यन्त खड़ा उतरा – कभी पैर नहीं रखा।&#8221;</p>
<p><strong>आर्यावर्तइण्डियननेशन.कॉम से बात करते रवि बत्रा कहते हैं : मुझे 22 जून को सुबह 5.15 पर ट्रेन पकड़नी थी दरभंगा के लिए। लेकिन रात को ही मैसेज आ गया कि गाड़ी शाम 6.15 पर चलेगी फिर दोबारा मैसेज आया कि और देरी हुई है। अब ट्रेन 6.15 के स्थान पर रात को 9.15 पर चलेगी। आनंद बिहार स्टेशन से उसका पहुंचने का समय 23 तारीख रात 80 बजे के करीब था। यहाँ से ट्रेन की यात्रा शुरू हुई। यह ट्रेन 24 जून सुबह 2.42 AM पर दरभंगा स्टेशन पहुंची। दुर्भाग्य से ट्रेन में पानी नहीं, शौचालय का बुरा हाल था। ऐसा लग रहा था कि पुरे प्रदेश का दुर्गन्ध उसी ट्रेन में आ गयी हो।&#8221;</strong></p>
<p>बत्रा जी आगे कहते हैं: &#8220;इतना ही नहीं, उस ट्रेन में जो आधिकारिक एटेंडेंट चल रहे थे, वही चोरी भी कर रहे थे। चोरी के चार मामले हुए।  यात्रा के दौरान ही एक यात्री के हैंड बैग और मोबाइल उठाने का प्रयास किया, लेकिन यात्रियों ने उसे दबोच डाला। उस ट्रेन में जब पुलिस आई और बाद में स्टाफ की कोशिश से सब सामान मिल गया। मैं जिस काम के लिए दरभंगा गया था, निपटा कर फिर 26 की वापसी पर टिकट थी और 12.05 बजे का समय था। लेकिन फिर पता चला कि ट्रेन सुबह 5 बजे आयेगी। दुर्भाग्य से ट्रेन दिन के 2.42 मिनट पर आई और आनंद बिहार पहुंची 28 जून रात 1.33 पर।&#8221;</p>
<p>​बत्रा कहते हैं कि &#8220;वापसी के समय उस ट्रेन के 13 स्टेशन भी कैंसिल किए ओर रूट भी बदला via बनारस or lucknow के रास्ते, मगर फिर भी 36 घंटे का रास्ता। न ही पीने के पानी की व्यवस्था ऊपर से टॉयलेट के बुरे हाल ओर टॉयलेट में भी पानी नहीं था ओर तो ओर उसके दरवाजों पर कुंडिया नहीं साथ ही सफाई के लिए शॉवर टूटे हुए थे, यह हाल था A/C coach का, गरीब रथ स्पेशल ट्रेन का यह हाल देख करके दुख लगा। यात्री मुफ्त में नहीं जाते, उचित पैसे देते हैं, लेकिन उचित सुविधा नहीं मिलती, परिवेश नहीं मिलता।&#8221;</p>
<p>गरीब रथ एक्सप्रेस ट्रेनों का उद्घाटन 2006 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने किया था। पहली गरीब रथ ट्रेन सेवा को बिहार के सहरसा से पंजाब के अमृतसर तक हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया था। इन ट्रेनों को उन यात्रियों को किफायती वातानुकूलित यात्रा प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया था जो नियमित एसी कोचों का अधिक किराया वहन नहीं कर सकते थे। भारत में वर्तमान में 26 जोड़ी गरीब रथ एक्सप्रेस ट्रेनें चल रही हैं। ये ट्रेनें नियमित एसी-3 टियर किराए से कम किराए पर पूरी तरह से वातानुकूलित यात्रा प्रदान करती हैं। इन्हें यात्रियों की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए एसी यात्रा को अधिक किफायती बनाने के लिए शुरू किया गया था।</p>
<p><strong>​बत्रा का कहना है कि &#8220;खाने और पीने के लिए पानी की बहुत दिक्कत, क्योंकि कोच में कैंटीन नहीं, ऑनलाइन ऑर्डर पर जब स्टेशन आएगा तभी मिलेगा ट्रेन का कोई समय नहीं, मैंने ऑर्डर किया डिनर का 8 बजे​ के स्थान पर आया रात 1.30 बजाए तो भूखे ही सो गए, अकेल होने से समान की भी निगरानी रखनी पड़ती हैं क्योंकि की चोरी का डर, सेशन से नीचे उतरो तो तब भी खतरा, ऑनलाइन खाना भी बासा ओर बेस्वाद होने खाया नहीं जाता, ​प्लेटफॉर्म पर ताजा चाय और बिस्कुट के अलावा कुछ मिलता नहीं, कोई लोकल बेचने आता भी हैं तो भरोसा नहीं पता नहीं कब और कैसा बना ​है। </strong></p>
<p>​बहरहाल, बिहार के चालीस लोक सभा सांसदों में दरभंगा संसदीय क्षेत्र के वर्तमान सांसद सम्मानित गोपाल जी ठाकुर की स्थिति यशपाल की अख़बार में नाम कहानी के आस-पास ही भ्रमण करती है। दरभंगा संसदीय क्षेत्र के मतदाताओं, जिसमें विद्वान भी हैं, विदुषी भी, सब्जी वाला भी है, रेड़ी वाला भी, व्याख्याता भी हैं, पत्रकार भी, किसान भी हैं, जमींदार भी, निर्धन भी हैं, धनाढ्य भी, दो-टूक बोलने वाले भी हैं, चापलूस भी, बनिया भी हैं, दलाल भी, छात्र भी हैं, छात्राएं भी, स्मार्ट लोग भी हैं, स्मार्ट फोन धारक भी, सभी तबके के लोग सम्मिलित हैं। लेकिन सभी लोगों में एक बात ‘सामान्य’ है।</p>
<p>एक : सांसद महोदय को आम मतदाता नहीं जानता। आम मतदाताओं की समस्याओं से न तो अवगत हैं और ना ही अवगत होना चाहते हैं। दरभंगा राज के वंशजों की तरह चतुर्दिक चमचों और चापलूसों से घीरे हैं। संसदीय क्षेत्र में दीखते नहीं, परन्तु सोशल मीडिया पर, विशेषकर फेसबुक पर, 24x7x356 अवतरित रहते हैं। मतदाताओं से यहीं मिलन सम्मेलन होता है। समस्याएं भी उन्ही के लोग वहीँ लिखते हैं और समाधान भी वहीँ टिपण्णी पेटी में हो जाता है। एक बात और, शायद भयवश, सांसद साहेब स्थानीय पत्रकारों, विद्वानों, समाज सेवकों से रूबरू नहीं होते कहीं कोई गंभीर सवाल न पूछ ले।</p>
<p>दो: ‘अख़बार में नाम’ के लिए ये गुरुदास के बराबर हैं। अंतर सिर्फ इतना है कि यशपाल का गुरदास कहीं ‘ट्रिंग ट्रिंग’ नहीं करता था, लेकिन दरभंगा के सांसद साहेब स्थानीय अख़बारों में सुबह-सवेरे अपना नाम, अपनी तस्वीर नहीं देखते तो सीधा अखबार के संपादक को ‘ट्रिंग-ट्रिंग’ कर देते हैं। किसी भी राष्ट्रीय स्तर के पत्रकारों से बात नहीं करते। स्थानीय पत्रकारों को क्षेत्र की राजनीतिक स्थिति पर, मतदाताओं की आकांक्षाओं पर और सांसद द्वारा दुःख निवारण टीकाकरण पर किसी भी प्रकार की टीका-टिप्पणी करने की सख्त मनाही है। अगर कोई मुख खोले, तो कार्यालय मुख मोड़ लेता है ।</p>
<p><strong>दरभंगा के एक विद्वान कहते हैं कि &#8220;मैं किसी सांसद को नहीं जानता हूँ। अख़बारों में नित्य नाम पढता हूँ, बस इतना ही। आज तक मिला नहीं हूँ। बिहार इन दी आईज ऑफ़ ट्रैवेलर्स एंड पेंटर्स 1780-1850, बायोग्राफी ऑफ़ डॉ राजेंद्र प्रसाद के अलावे पांच बेहतरीन किताबों के लेखक, तेजकर कहते हैं: ‘दरभंगा के सांसद को मुझ जैसा पढ़ा लिखा मनुष्य के अलावे समाज के दबे-कुचले, उपेक्षित लोग भी नहीं जानते। इसका वजह यह है कि आम तौर पर लोक सभा का सांसद आम चुनाब में जीत कर भले संसद जाते हों, अपने संसदीय क्षेत्र में कभी आम नहीं होता है। दरभंगा संसदीय चुनाव क्षेत्र से जीतकर कोई अगर संसद तक पहुँच रहे हैं तो यह सिर्फ सम्बद्ध पार्टी अथवा उस पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व को ब्रांड होने के कारण। आज दरभंगा ही नहीं, बिहार के 40 संसदीय क्षेत्रों में शायद ही कोई क्षेत्र होगा जिसके उम्मीदवार अथवा विजय नेता की अपनी पहचान होगी। जनता ‘उन्हें’ चयनित की होगी। क्योंकि आज “ब्रांड की सेवा”, “ब्रांड का भजन” “ब्रांड की चापलूसी” ही मूल मंत्र हो गया है राजनीति में जीवित रहने के लिए। और सोशल मीडिया पर प्रचार-प्रसार स्थिति को और भी जटिल बना दिया है।&#8221;</strong></p>
<p>सन् 1990 ई.में पड़री भाजपा पंचायत अध्यक्ष से राजनीतिक सफ़र तय करते हुए सन् 1994 में दरभंगा जिला महामंत्री किसान मोर्चा का दायित्व निभाते हुए सन् 1996 में विरौल अनुमंडल संग़ठन प्रभारी बने। फ़िर बेनीपुर मंडल अध्यक्ष फिर सन 2003 ई.में काफी संघर्ष और कार्यकर्ताओं की माँग पर सर्वसम्मति से दरभंगा जिला अध्यक्ष पद पर नियुक्त हुए। साथ ही साथ पैक्स अध्यक्ष, समस्तीपुर रेलवे परामर्शदाता समिति सदस्य, ललित नारायण विश्वविद्यालय सीनेट सदस्य सहित कई सरकारी और सामाजिक पदों पर भी रहते हुए उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान दिया। सन 2010 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर जीत कर पहली बार विधायक बने और 2017 में उन्हें भारतीय जनता पार्टी के बिहार प्रदेश उपाध्यक्ष पद से नवाजा गया ।” </p>
<p>दरभंगा के सांसद गोपालजी ठाकुर और यशपाल की कहानी ‘अख़बार में नाम’ के मुख्य पात्र गुरुदास में एक समानता और है। गुरुदास की हमेशा इक्षा होती थी कि वर्ग में शिक्षक उसका भी नाम लें, उसकी ओर भी दिखें। अब अगर भारत के संसद  को ‘वर्ग’ माना जाय, गोपालजी ठाकुर को छात्र और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को शिक्षक – तो गोपालजी ठाकुर कोई अपनी जानकारी में कोई भी अवसर छोड़ते नहीं हैं जिससे वर्ग (संसद) में उनकी पूछ बनी रहे; शिक्षक (प्रधान मंत्री) उनके तरफ देखते रहें। गोपाल जी ठाकुर पहली बार लोकसभा पहुंचे हैं। स्वाभाविक है दूसरी और तीसरी बार पहुँचने के लिए (पहले टिकट प्राप्ति हेतु) शिक्षक की नजर में ‘विश्वासपात्र’ बने रहना होगा – चाहे उनकी हरकत, क्रिया-कलापों से संसदीय क्षेत्र दरभंगा के मतदाताओं की जीवन रेखा में कोई सकारात्मक परिवर्तन हो अथवा नहीं। </p>
<p><strong>मनोहर झा एक शिक्षक हैं। बच्चों को पढ़ाते हैं। कहते हैं: “माननीय सांसद महोदय एक प्रश्न लोक सभा में पूछे थे। वह यह था कि “दरभंगा,  उतर बिहार व मिथिला का केंद्र है एवं भौगोलिक दृष्टि से यह स्थान काफी महत्वपूर्ण है। दरभंगा का अतीत अत्यंत गौरवशाली है, यह विद्वानों की धरती रही है। पूर्व से ही दरभंगा के लिए सुरक्षा अत्यंत चिंता का विषय बना रहा है। यह क्षेत्र काफी शांतिप्रिय है एवं क्षेत्र के लोग मृदु भाषी होते है। दरभंगा का एक-एक नागरिक अपनी सुरक्षा, जिले की सुरक्षा, प्रदेश की सुरक्षा और राष्ट्र के सुरक्षा के लिए कटिबद्ध है, प्रतिबद्ध है।&#8221;</strong></p>
<p>मनोहर जी का कहना है कि &#8220;सवाल यह है कि यहाँ जो गिरोह कार्य कर रहा है, नित्य किसी न किसी को अपना शिकार बना रहा है जो भी उसके हित के विरुद्ध जाता है, चाहे पत्रकार अविनाश झा ही क्यों न हो; कभी ये सांसद महोदय स्थानीय प्रशासन के क्रिया-कलापों के विरुद्ध सड़क पर उतरे? नहीं। झा का कहना है कि “अपनी छवि को यत्र-तत्र-सर्वत्र फ़ैलाने के लिए एक खास नेकवर्क तैयार किये हुए हैं जो सोसल साइटों पर कार्य करते हैं। स्थानीय अख़बारों में सांसद के कार्यों का लेखा-जोखा नहीं प्रकाशित हो सकता है। लिखने की कोई हिम्मत नहीं कर सकता। उसे नौकरी से हाथ धोनी होगी। इनसे तो कई गुना बेहतर पूर्व सांसद कीर्ति आज़ाद थे जो जनता की बात सुनते तो थे। यह बात भी सत्य है कि किसी भी सांसदों ने स्थानीय लोगों के लिए कुछ भी नहीं किया जिसे आपको बता सकूँ। झा कहते हैं : “हां, एक बात अवश्य है कि गोपाल जी ठाकुर मृदुभाषी हैं। लेकिन, मौध (मधु) जनता को खाने का अवसर अभी तक नहीं मिला हैं।”  </p>
<p>​बहरहाल, दरभंगा लोकसभा क्षेत्र में छह विधानसभा क्षेत्र है &#8211; गौरा बौराम, बेनीपुर, अलीनगर, दरभंगा ग्रामीण, दरभंगा और बहादुरपुर। दरभंगा के विधाक है संजय सरोगी, बहादुरपुर के विधायक हैं मदन साहनी, गौरा बौरान की विधायिका है श्रीमती स्वर्ण सिंह, बेनीपुर के विनय कुमार चौधरी, अलीनगर के मिश्री लाल यादव, दरभंगा ग्रामीण के ललित कमर यादव विधायक हैं। दरभंगा से लगभग 214 ट्रेन गुजरती है। स्वाभाविक है कि भारतीय रेल के लिए याग मार्ग कितना महत्वपूर्ण है। लेकिन कितना उपेक्षित है यह न तो नेता मानेंगे, न भारतीय रेल के अधिकारी, न केंद्रीय मंत्री स्वीकार करेंगे और ना ही प्रदेश के मुख्यमंत्री। जनता में अपने-अपने नेताओं, राजनीतिक पार्टियों के अनुसार विभाजन है। </p>
<p>​विस्तार से कहानी आगे </p>
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		<title>दीनानाथ झा लिखित &#8216;आलू-बैगन की सब्जी कैसे बनायें&#8217; सम्पादकीय, &#8216;आपातकाल का 50 वर्ष&#8217; और &#8216;के.विक्रम राव को श्रद्धांजलि&#8217; </title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/editorial/how-to-make-potato-brinjal-vegetable-editorial-of-dinanath-jha-and-50-years-of-emergency</link>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Jun 2025 04:41:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[सम्पादकीय]]></category>
		<category><![CDATA[aryavarta]]></category>
		<category><![CDATA[edittorial]]></category>
		<category><![CDATA[indiajn nation]]></category>
		<category><![CDATA[newspapers]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>पटना / नई दिल्ली: जयप्रकाश नारायण की 18 मार्च, 1974 की क्रांति के अगले वर्ष उसी दिन पटना की सड़कों पर अखबार बेचते-बेचते अख़बार के दफ्तर में पहुंच गया, पत्रकारिता की सबसे निचली सीढ़ी पर। नौकरी मिल गई &#8216;कॉपी -होल्डर/प्रूफ रीडर&#8217; के पद पर।  करीब 69-दिन के बाद 25 जून, 1975 को मध्यरात्रि में आपातकाल [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/editorial/how-to-make-potato-brinjal-vegetable-editorial-of-dinanath-jha-and-50-years-of-emergency">दीनानाथ झा लिखित &#8216;आलू-बैगन की सब्जी कैसे बनायें&#8217; सम्पादकीय, &#8216;आपातकाल का 50 वर्ष&#8217; और &#8216;के.विक्रम राव को श्रद्धांजलि&#8217; </a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>पटना / नई दिल्ली: जयप्रकाश नारायण की 18 मार्च, 1974 की क्रांति के अगले वर्ष उसी दिन पटना की सड़कों पर अखबार बेचते-बेचते अख़बार के दफ्तर में पहुंच गया, पत्रकारिता की सबसे निचली सीढ़ी पर। नौकरी मिल गई &#8216;कॉपी -होल्डर/प्रूफ रीडर&#8217; के पद पर।  करीब 69-दिन के बाद 25 जून, 1975 को मध्यरात्रि में आपातकाल की घोषणा हुई। उस दिन बुधवार था। </strong></p>
<p>इंडियन नेशन के तत्कालीन संपादक श्री दीनानाथ झा, जिस सम्पादकीय को लिख कर गए थे और सम्पादकीय पृष्ठ पर अपने स्थान &#8211; बाएं पृष्ठ, बायां हाथ, सबसे ऊपर &#8211; पर लगा हुआ था, तत्काल हटा दिया गया। कुछ काल बाद वे स्वयं दफ्तर पहुंच गए थे। उनके आने का अर्थ था सम्पादकीय विभाग के सभी कर्मियों की उपस्थिति, वह भी प्रेस में। मशीन के आस-पास बाएं हाथ &#8216;इंडियन नेशन&#8217; और दाहिने हाथ &#8216;आर्यावर्त&#8217; अख़बारों का जहाँ पृष्ठ बन रहा था, मेला जैसा दिख रहा था। उन दिनों लोगों कह रहे थे कि प्रेस के अंदर ऐसी भीड़ शायद जंगे आज़ादी के बाद पहली बार हुई थी। </p>
<figure id="attachment_6825" aria-describedby="caption-attachment-6825" style="width: 552px" class="wp-caption alignleft"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/1-2.jpg"><img fetchpriority="high" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/1-2.jpg" alt="" width="552" height="837" class="size-full wp-image-6825" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/1-2.jpg 552w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/1-2-198x300.jpg 198w" sizes="(max-width: 552px) 100vw, 552px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6825" class="wp-caption-text">​दीनानाथ झा, तत्कालीन संपादक, इंडियन नेशन (अब दिवंगत)</figcaption></figure>
<p>दूसरे दिन अखबार का प्रातः संस्करण प्रकाशित हुआ। कितने अखबार प्रकाशित हुए थे, कितने बिके, न मुद्रक को मालूम था और ना ही मानदाता सिंह (अखबार के एजेंट थे) को। कुछ काल दोनों अख़बारों का सम्पादकीय विभाग खाली रहा, लेकिन जैसे ही घड़ी की सूई 10 की ओर बढ़ रही थी, लोगों का आना प्रारम्भ हो गया। सम्पूर्ण दफ्तर में सुई रखने का जगह नहीं था। पटना विश्वविद्यालय, मगध विश्वविद्यालय, बिहार विश्यविद्यालय, भागलपुर विश्वविद्यालय, मिथिला विश्वविद्यालय के छात्र नेताओं से लेकर शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के नेताओं का आना-जाना शुरू हो गया था। </p>
<blockquote><p>कोई साढ़े दस बजे रिक्शा पर बैठे, कागजों का अम्बार लिए दीना बाबू परिसर में पधारे। उनके चेहरे को देखकर ऐसा लग रहा था आज कुछ होने वाला है। इसी बीच, सरकारी प्रतिनिधि में अपनी-अपनी गाड़ियों से पटना से प्रकाशित सभी समाचार पत्रों के दफ्तरों में आना-जाना शुरू कर दिए थे &#8216;अधिसूचना&#8217; के साथ &#8211; कोई भी सामग्री बिना सरकारी मुलाजिमों को दिखाए अख़बार में प्रकाशित नहीं होगा। </p></blockquote>
<p>फिर क्या था। दीना बाबू, ज्वाला नंदन सिंह, गजेंद्र नारायण चौधरी, परिपूर्णानंद पांडे, दुर्गानाथ झा, मिथिलेश मैत्रा, केशव कुमार, सीता शरण झा और अन्य सभी सम्पादकीय विभाग के लोग कक्ष में उपस्थित थे। बीच-बीच में स्थानीय नेताओं की कतार लग रही थी, जो आम तौर पर संध्याकाळ आते थे, जून के महीने में तपती धुप में आ रहे थे। </p>
<blockquote><p>शाम में जब लाइनो विभाग के प्रमुख को दीना बाबू का &#8216;पहला सम्पादकीय&#8217; मिला तो उसे पढ़कर वह जोर से चिल्लाये, ठहाका लगाए, और सबों को अपने पास आने को कहे। अपने जीवनकाल में वे शायद पहली बार दीना बाबू लिखित ऐसे सम्पादकीय को पढ़े थे। सभी आश्चर्य चकित थे &#8211; लेकिन सभी उस सम्पादकीय में शब्दों के प्रयोग, वाक्यों के विन्यास और भाव से यह जान गए थे कि तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की इस हरकत के प्रति बिहार के लोगों की क्या राय है। </p></blockquote>
<p><strong>27 जून, 1975 का सम्पादकीय था &#8211; &#8216;आलू-बैगन की सब्जी कैसे बनाएं &#8211; क्योंकि लिखने के लिए कुछ था ही नहीं।  जो लिखते उसे सरकारी अधिकारी प्रकाशन में जाने ही नहीं देते। </strong></p>
<p>विगत अप्रैल माह में भारत के वरिष्ठ पत्रकार और नेशनल वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के कर्ताधर्ता के. विक्रम राव को, जिन्होंने पत्रकारिता के साथ-साथ देश के पत्रकारों को एकजुट करने में अपना जीवन अर्पित कर दिया, फोन किया था। उन्हें &#8216;आर्यावर्त&#8217; और &#8216;इंडियन नेशन&#8217; अखबरों के साथ-साथ पटना से प्रकाशित &#8216;सर्चलाइट&#8217;, &#8216;प्रदीप&#8217;, &#8216;कौमी आवाज&#8217; और अन्य छोटे-छोटे अख़बारों के एक-एक व्यक्तियों से विशेष लगाव था। </p>
<figure id="attachment_6826" aria-describedby="caption-attachment-6826" style="width: 2047px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/E-2.jpg"><img decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/E-2.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="size-full wp-image-6826" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/E-2.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/E-2-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/E-2-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/E-2-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/E-2-1536x1026.jpg 1536w" sizes="(max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6826" class="wp-caption-text">तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और उनके लोग</figcaption></figure>
<p>जिस दिन &#8216;आर्यावर्त-इंडियन नेशन&#8217; अख़बारों का वेबसाइट बना, वे बेहद खुश हुए थे।  साथ ही, समय-समय पर लिखकर भेजा भी करते थे। उस दिन जब फोन किया, वे तनिक अस्वस्थ थे, लेकिन उसी दिन प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलना तय था। कुछ काल बात करने के बाद उन्होंने कहा कि &#8220;आगामी जून के महीने में आपातकाल का 50-वर्ष होगा।  मुझे आज भी दिनाबाबू का आलू-बैगन सब्जी वाला सम्पादकीय का स्वाद आ रहा है। आप उस घटना को जोड़ते मेरी कहानी को अवश्य प्रकाशित करेंगे।&#8221;</p>
<p><strong>मैं नहीं जानता था आज उनसे अंतिम वार्तालाप कर रहा हूँ। वे 12 मई को अंतिम सांस लेकर अनंत यात्रा पर निकल गए। कल उनके पुत्र उस लेख को प्रेषित किये। यह लेख सम्मानित के. विक्रम राव को श्रद्धासुमन स्वरुप, दीना बाबू के आलू-बैगन की सब्जी कैसे बनायें सम्पादकीय की चर्चा करते आपातकाल के पचास वर्ष पर समर्पित है। </strong></p>
<p>इंदिरा गांधी द्वारा भारत पर थोपी गई फासिस्ट इमर्जेंसी की स्वर्ण जयंती है। स्वर्णिम कदापि नहीं। कालिखभरी। तारकोल से भी ज्यादा काली। वह सुबह (बृहस्पतिवार, 26 जून 1975, आषाढ़ मास) थी। तैमूर लंगड़े से उजबेकी डाकू बाबर तक कइयों ने दिल्ली को गुलाम बनाया था। तबाह किया था। रातों-रात इंदिरा गांधी ने भी कीर्तिमान रचा था। वह आजाद गणतंत्र की एकछत्र मालकिन बन गई। वह भयावह भोर काली और यादगार है। उस सुबह बड़ौदा में मैं दांडिया बाजार आया। यूएनआई ऑफिस। आकाशवाणी से आपातकाल लगने की घोषणा सुन ली थी। यूएनआई ऑफिस में पूरी रपट पढ़ी। मीडिया और प्रेस को क्लीव बनाने की साजिश। इन्दिरा सरकार ने तय कर लिया था कि सेंसर ही हमारी खबर की रपट की जांच करेगा, तब वह छपेगी।</p>
<p>मुझे एक चतुराई सूझी। मैंने वहीं यूएनआई ऑफिस में बैठे बैठे (26 जून 1975) IFWJ के उपाध्यक्ष के नाते एक बयान जारी किया। प्रधानमंत्री के तानाशाह बनने की भर्त्सना की, सेंसरशिप के खात्मे की मांग की। कैदी प्रतिपक्ष नेताओं को रिहा करने की अपील की थी। बयान तो देश भर में जारी हो गया। शायद सेंसर तब तक सो रहा था। कई प्रदेशीय दैनिकों में बयान छपा भी। मगर वह पहला और अंतिम रहा। फिर तो ताले लग गए थे। खुद सत्तर साल के बुड्ढे मियां फकरूद्दीनअली अहमद भी उस आधी रात हरकत में राष्ट्रपति भवन में रहे होंगे।</p>
<p>हालांकि मेरे बड़ौदा में रहते सितंबर 1975 में ऐतिहासिक घटना हुई। उस एक शाम हमारे प्रतापनगर रेलवे कॉलोनी के ऑफिसर्स क्लब में भजन गायक हरिओम शरण का कार्यक्रम था। तभी सुधा ने सूचना भेजी कि एक विशिष्ट अतिथि अकस्मात घर (78-B, प्रतापनगर रेलवे कॉलोनी) आए हैं। मुझे घर आना पड़ेगा। सिख के वेश में जॉर्ज फर्नांडिस थे। इमरजेंसी थोपे जाने के बाद जॉर्ज के आगमन की प्रतीक्षा मैं नित्य कर रहा था। </p>
<p><strong>अब प्रश्न था कि जॉर्ज को टिकाया कहां जाए ? क्योंकि हमारी रेलवे कॉलोनी का हर व्यक्ति अपने इस क्रांतिकारी नेता को पहचानता था। अतः इंडियन एक्स्प्रेस के साथी और यूनियन ऑफ बड़ौदा जर्नलिस्ट के अध्यक्ष साथी किरीट भट्ट की मदद से अलकापुरी में उद्योगपति भरत पटेल के गेस्ट हाउस ले गए। दूसरे दिन पता चला कि जॉर्ज ने स्वयं भरत पटेल से डायनामाइट के बारे में पूरी जानकारी पा ली है। आगे का सब पुलिस रिकॉर्ड में है क्योंकि ये उद्योगपति सरकारी गवाह बन गया था।</strong></p>
<p>इस बीच होली के त्यौहार पर लखनऊ गया। यह अवकाश पहले से ही अनुमोदित था। लखनऊ में कुछ दिन बाद ही &#8220;नेशनल हेरल्ड&#8221; के स्थानीय संपादक सी०एन० चितरंजन ने मुझे बताया कि लखनऊ पुलिस अधीक्षक एच०डी० पिल्लई मेरी खोज कर रहे हैं। गुजरात पुलिस का संदेशा आया था। यह पिल्लई साहब IPS अधिकारी थे जो इंदिरा गांधी के सुरक्षा अधिकारी रहे। मैंने संपादक चितरंजन को बताया कि मैं अहमदाबाद पहुंचकर स्वयं को पुलिस को सौंप दूंगा। क्योंकि परिवार के कारण मैं भूमिगत नहीं रह सकता। सुधा रेल अधिकारी हैं। पुलिस ने मोहलत दे दी। मैंने अहमदाबाद में पुलिस महानिरीक्षक पी०एम० पंत के समक्ष पेश किया। ये पंत साहब पत्रकार राजदीप सरदेसाई के नाना हैं। फिर तीस दिन की पुलिस रिमांड के बाद मुझे बडौदा सेंट्रल जेल में रखा गया। वहां छः अन्य साथियों के साथ। मुझे भी काल कोठरी के तन्हा सेल में रखा गया। डबल ताले में।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/E-3.jpg"><img decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/E-3.jpg" alt="" width="2047" height="1367" class="aligncenter size-full wp-image-6827" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/E-3.jpg 2047w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/E-3-300x200.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/E-3-1024x684.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/E-3-768x513.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/E-3-1536x1026.jpg 1536w" sizes="(max-width: 2047px) 100vw, 2047px" /></a></p>
<p>शुरू में बड़ौदा केंद्रीय कारागार में डाइनामाइट षड्यंत्र के हम केवल सात अभियुक्तों को अलग-अलग तन्हा कोठरी में कैद रखा गया। लोहे के दो छोटे फाटकनुमा दरवाजे डबल ताले में बंद होते थे। सुबह केवल एक घंटे के लिए खोलते थे। शौच-स्नान के लिए। कोठरी भी पिंजड़ानुमा, दस बाई दस फीट की थी। किसी से कोई संपर्क नहीं। अतः मौन व्रत जबरन रखना पड़ता था। जेल में सबसे ज्यादा पीड़ादायक समाचारपत्रों का न मिलना था। पर यह दुख एक स्वयंसेवक ने दूर कर दिया। वह जेलर मोहम्मद मलिक को एक समाचारपत्र बंडल मेरे लिए रोज दे जाता था। फिर दयादृष्टि अपनाकर जेलर उसे मेरी कोठरी में भिजवा देते थे। उस पुण्यात्मा युवा का नाम बाद में पता चला। वह था नरेंद्र दामोदरदास मोदी, आज प्रधानमंत्री है।</p>
<p>यह वाकया मुख्यमंत्री मोदीजी ने स्वयं पत्रकार श्रोताओं को बताया था। गांधीनगर में सांसद नरहरि अमीन के स्कूल सभागार में 2 जनवरी 2003 के दिन गुजरात जर्नलिस्ट यूनियन के द्वारा आयोजित में हमारे इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट  के अधिवेशन को गांधीनगर में बताया था। मेरी जेल यातनाओं का उल्लेख भी किया। मोदीजी तपाक से मिले थे। मैं अध्यक्षता कर रहा था। मेरे बारे में मोदी जी ने कहा : &#8220;जब बडौदा सेंट्रल जेल में विक्रम राव तन्हा कोठरी में नजरबंद था तो उन्होंने जेलर से अखबार देने की विनती की थी।&#8221; पत्रकार को समाचारपत्र न मिले जैसे जल बिन मछली ! फिर चंद दिनों बाद मुझे अखबार मिलने लगे।</p>
<p><strong>नरेंद्र भाई मोदी मेरे संकटत्रस्त तथा दुखद काल के सुहृद रहे। इसलिए ज्यादा भले लगते हैं। वर्ना इस वक्त तो प्रधानमंत्री के करोड़ों मित्र और समर्थक होंगे। यह बात मई 1976 की है। मोदीजी तब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कर्मठ कार्यकर्ता थे, तरुणाई में थे, आयु 26 वर्ष रही होगी।</strong></p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/E-4.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/E-4.jpg" alt="" width="1367" height="2047" class="aligncenter size-full wp-image-6828" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/E-4.jpg 1367w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/E-4-200x300.jpg 200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/E-4-684x1024.jpg 684w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/E-4-768x1150.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/E-4-1026x1536.jpg 1026w" sizes="auto, (max-width: 1367px) 100vw, 1367px" /></a></p>
<p>हमारी कैद के दौरान तानाशाही राज ने सारे कानून तोड़ डाले थे। उस निर्दयी आपातकालीन दौर में न्यायतंत्र पंगु हो गया था। इस त्रासद स्थिति का निजी अनुभव मुझे हुआ था जब मुझे बड़ौदा जेल से कर्नाटक पुलिस बेंगलुरु ले गई थी। मल्लीश्वरम थाने में हिरासत में रखा। न्यायाधीश के समक्ष पेश किया। मैंने कोर्ट में शिकायत की कि मुझे रात भर तेज रोशनी फेंक कर जगाए रखा गया। घुटने को मोड़ कर खड़ा रखा गया। पंखे से बांधने की धमकी दी। इसे पुलिसिया लहजे में हेलीकॉप्टर बनाना कहते हैं। मगर न्यायाधीश पुंसत्वहीन हो गए थे। मेरी याचना और इस जिरह के दौरान मुझे अपार जिल्लत भुगतनी पड़ी। गूंगे बने रहे थे जज साहब। मगर बाहर आकर पता चला कि था कि (COD) कोर ऑफ डिटेक्टिव क्रूरता के कारण हिटलर जर्मन गेस्टापों के समान मानी जाती है। पुलिसिया कठोरता ने मेरे दर्द को बढ़ाया, शारीरिक तथा मानसिक भी।</p>
<p>बहुधा हम भूमिगत कार्यकर्ताओं को मलाल रहता था कि एक लाख के करीब लोग जेल चले गये। यदि वे भूमिगत रहते तो हमारा संघर्ष तीव्र होता। रिहा होने के बाद जनता पार्टी के नवनियुक्त अध्यक्ष चन्द्रशेखर से मैंने पूछा भी था कि जेल के बाहर रह कर वे संघर्ष चलाते ? मगर उनका बेबसी भरा उत्तर था कि ‘‘जब सभी नेता कैद हो गये तो आन्दोलन कैसे चलाया जाता और फिर देश में विरोध मुखर था ही नहीं।’’</p>
<p><strong>कई पत्रकार साथियों मुझसे पूछते थे, कि डाइनामाइट के अतिरिक्त कोई अन्य रास्ता नहीं था। बहस को छोटा करने की मंशा से मैं यही जवाब देता कि सेन्ट्रल एसेम्ब्ली में बम फेंक कर भगत सिंह ने बहरे राष्ट्र को सुनाना चाहा था। डाइनामाइट की गूंज से गूंगे राष्ट्र को हमलोग वाणी देना चाहते थे। हम राजनेता तो थे नहीं कि सत्याग्रह करते और जेल में बैठ जाते। श्रमजीवी पत्रकार थे अतः कुछ तो कारगर कदम लेकर विरोध करना ही था।</strong></p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/E-5.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/E-5.jpg" alt="" width="1367" height="2047" class="aligncenter size-full wp-image-6829" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/E-5.jpg 1367w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/E-5-200x300.jpg 200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/E-5-684x1024.jpg 684w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/E-5-768x1150.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/06/E-5-1026x1536.jpg 1026w" sizes="auto, (max-width: 1367px) 100vw, 1367px" /></a></p>
<p>लेकिन मधुरतम घटना थी जब तिहाड़ जेल के सत्रह नम्बर वार्ड में उस रात के अन्तिम पहर में मेरे पाकेट ट्रांसिस्टर पर वाॅयस आॅफ अमरीका के समाचार वाचक की उद्घोषणा सुनी कि रायबरेली चुनाव क्षेत्र में कांग्रेसी उम्मीदवार के पोलिंग एजेन्ट (यशपाल कपूर) ने निर्वाचन अधिकारी से मांग की कि मतगणना फिर से की जाय। मै तुरन्त उछल पड़ा। जार्ज फर्नाण्डिस को जगाया और बताया कि,‘‘इन्दिरा गांधी पराजित हो गई।’’ पूरे जेल में बात फैल गई। तारीख 17 मार्च 1977 थी। लगा दीपावलि आठ माह पूर्व आ गई। पूरे जेल में लाइट जल उठीं। विजय रागिनी बज उठी। आखिर मतदाताओं द्वारा तानाशाह धराशायी कर ही गया।</p>
<p><strong>श्रीमती इंदिरा गांधी की सभी तस्वीरें: सम्मानित श्री रघु राय के सौजन्य से </strong></p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/editorial/how-to-make-potato-brinjal-vegetable-editorial-of-dinanath-jha-and-50-years-of-emergency">दीनानाथ झा लिखित &#8216;आलू-बैगन की सब्जी कैसे बनायें&#8217; सम्पादकीय, &#8216;आपातकाल का 50 वर्ष&#8217; और &#8216;के.विक्रम राव को श्रद्धांजलि&#8217; </a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>*पहले इस्तेमाल करें &#8211; फिर विश्वास करें* के तर्क पर श्रीमती निर्मला सीतारमण आज *पहले विश्वास करें &#8211; फिर जांच करें* आधारित 2025-26 का बजट पेश की</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/nation/smt-nirmala-sitharaman-today-presented-budget-2025-26-based-on-trust-first-test-later</link>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 01 Feb 2025 11:34:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[सम्पादकीय]]></category>
		<category><![CDATA[सरकार और अघोषित आपातकाल ]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली : भारत के सैकड़ों करोड़ लोगों का विश्वास जीतने वाला और सुन्दर, साफ़ धुलाई करने वाला &#8216;धड़ी&#8217; डिटर्जेंट पाउडर के विज्ञापन में जिस तरह यह कहा जाता है कि &#8220;पहले इस्तेमाल करें &#8211; फिर विश्वास करें&#8221;, केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण &#8220;पहले विश्वास करें, फिर जांच करें&#8221; के सिद्धांत पर आधारित [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली : भारत के सैकड़ों करोड़ लोगों का विश्वास जीतने वाला और सुन्दर, साफ़ धुलाई करने वाला &#8216;धड़ी&#8217; डिटर्जेंट पाउडर के विज्ञापन में जिस तरह यह कहा जाता है कि &#8220;पहले इस्तेमाल करें &#8211; फिर विश्वास करें&#8221;, केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण &#8220;पहले विश्वास करें, फिर जांच करें&#8221; के सिद्धांत पर आधारित और नरेंद्र मोदी सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते 2025-26 केंद्रीय बजट पेश की। साथ ही, मध्यम वर्ग पर भरोसा जताया है और आम करदाताओं को करों के बोझ से राहत दिलाने के रुझान को जारी रखा। श्रीमती निर्मला सीतारमण बजट पेश करते हुए सभी करदाताओं को लाभ पहुंचाने हेतु करों के स्लैब एवं दरों में व्यापक बदलाव का प्रस्ताव किया।</strong></p>
<blockquote><p>करदाताओं को खुशखबरी देते हुए, वित्त मंत्री ने कहा कि “नई कर व्यवस्था के तहत 12 लाख रुपये तक की आय (यानी पूंजीगत लाभ जैसी विशेष दर आय को छोड़कर एक लाख रुपये की औसत आय) पर कोई आयकर देय नहीं होगा। 75,000 रुपये की मानक कटौती के कारण वेतनभोगी आयकर दाताओं के लिए सीमा 12.75 लाख रुपये की होगी।” उन्होंने कहा कि स्लैब दरों में कटौती के कारण मिलने वाले लाभों के अलावा कर में छूट इस ढंग से प्रदान की जा रही है कि उनके द्वारा कर का कोई भुगतान नहीं किया जाएगा। </p></blockquote>
<p>श्रीमती सीतारमण ने कहा, “नई कर संरचना मध्यम वर्ग के लिए व्यापक रूप से करों के बोझ को कम करेगी और उनके हाथों में ज्यादा धन उपलब्ध कराएगी, जिससे घरेलू उपभोग, बचत और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।” नई कर व्यवस्था के तहत, वित्त मंत्री ने करों की दर संरचना में निम्नलिखित संशोधन का प्रस्ताव कियाः</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/1.png"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/1.png" alt="" width="689" height="361" class="aligncenter size-full wp-image-6121" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/1.png 689w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/1-300x157.png 300w" sizes="auto, (max-width: 689px) 100vw, 689px" /></a></p>
<p>कर सुधारों को विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण सुधारों में से एक के तौर पर रेखांकित करते हुए, श्रीमती सीतारमण ने कहा कि नया आयकर विधेयक ‘न्याय’ की भावना को आगे बढ़ाएगा। उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था करदाताओं एवं कर प्रशासन के लिए समझने की दृष्टि से सरल होगी, जिससे कर की सुनिश्चितता बढ़ेगी और मुकदमेबाजी में कमी आयेगी। थिरुक्कुरल के 542वें श्लोक को उद्धृत करते हुए वित्त मंत्री ने कहा, “जैसे जीवित प्राणी वर्षा की आशा में जीते हैं, वैसे ही नागरिक सुशासन की आशा में जीते हैं।” कर सुधार लोगों एवं अर्थव्यवस्था के लिए सुशासन हासिल करने का एक साधन हैं। सुशासन प्रदान करने की प्रक्रिया में मुख्य रूप से जवाबदेही का समावेश होता है। श्रीमती सीतारमण ने कहा कि कर संबंधी ये प्रस्ताव विस्तार से इस बात को दर्शाते हैं कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार ने नागरिकों द्वारा व्यक्त आवश्यककताओं को समझने और उन्हें पूरा करने के लिए किस प्रकार कदम उठाए हैं।</p>
<p><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/2.png"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/2.png" alt="" width="685" height="564" class="aligncenter size-full wp-image-6122" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/2.png 685w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/2-300x247.png 300w" sizes="auto, (max-width: 685px) 100vw, 685px" /></a></p>
<p>बजट पेश करते हुए उन्होंने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से लघु, मध्यम और बड़े उद्योगों को शामिल करते हुए राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन की स्थापना की जाएगी। यह केंद्रीय मंत्रालयों और राज्यों के लिए नीतिगत सहायता, निष्पादन कार्ययोजनाएं, शासन और निगरानी फ्रेमवर्क उपलब्ध कराएगा। राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन 5 महत्वपूर्ण क्षेत्रों अर्थात् व्यवसाय करने की सुगमता और लागत; मांग वाली नौकरियों के लिए भावी तैयार कार्यबल; जीवंत और गतिशील एमएसएमई क्षेत्र; प्रौद्योगिकी की उपलब्धता और गुणवत्ता युक्त उत्पाद पर बल देगा।</p>
<figure id="attachment_6123" aria-describedby="caption-attachment-6123" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176962.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176962.jpg" alt="" width="2200" height="1278" class="size-full wp-image-6123" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176962.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176962-300x174.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176962-1024x595.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176962-768x446.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176962-1536x892.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176962-2048x1190.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6123" class="wp-caption-text">केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री, श्रीमती निर्मला सीतारमण, वित्त राज्य मंत्री, श्री पंकज चौधरी और पूर्ण बजट टीम के साथ 31 जनवरी, 2025 को नई दिल्ली में अंतरिम केंद्रीय बजट 2025 को अंतिम रूप देने के बाद।</figcaption></figure>
<p>केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि यह मिशन स्वच्छ प्रौद्योगिकी विनिर्माण को भी सहायता प्रदान करेगा। इसका उद्देश्य घरेलू मूल्यवर्धन में पर्याप्त सुधार करना और सोलर पीवी सेल, ईवी बैटरी, मोटरों और कंट्रोलरों, इलेक्ट्रोलाइजरों, विंड टर्बाइनों, अत्यधिक वोल्टेज वाले ट्रांसमिशन उपकरण और ग्रिड स्केल बैटरियों का इकोसिस्टम तैयार करना होगा। वित्त मंत्री ने श्रम-सघन क्षेत्रों के लिए उपायों की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि सरकार श्रम-सघन क्षेत्रों में रोजगार और उद्यमशीलता के अवसरों को बढ़ावा देने के लिए विशिष्ट नीतिगत और सहायक उपाय करेगी।</p>
<p>केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि  भारत के फुटवियर और लेदर क्षेत्र की उत्पादकता, गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने हेतु फोकस उत्पाद स्कीम कार्यान्वित की जाएगी। केंद्रीय वित्त मंत्री ने जानकारी दी कि इस स्कीम में लेदर फुटवियर और उत्पादों के लिए सहायता के अलावा बिना लेदर वाले गुणवत्तापूर्ण फुटवियर के उत्पादन हेतु आवश्यक डिजाइन क्षमता, घटक विनिर्माण और मशीनों के लिए सहायता दी जाएगी। इस स्कीम से 22 लाख व्यक्तियों को रोजगार मिलने, `4 लाख करोड़ का कारोबार और `1.1 लाख करोड़ से अधिक का निर्यात होने की उम्मीद है।</p>
<p>संसद में केन्‍द्रीय बजट पेश करते हुए भारत की विकास यात्रा के लिए ‘कृषि को प्रथम इंजन’ की संज्ञा देते हुए अन्नदाताओं के लाभ के लिए कृषि क्षेत्र के विकास और उत्पादकता में वृद्धि के लिए कई उपायों की घोषणा की। बिहार में मखाना बोर्ड की स्थापना के सरकार के निर्णय की घोषणा करते हुए श्रीमती निर्मला सीतारमण ने कहा कि मखानों का उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन में सुधार लाने के लिए बिहार में मखाना बोर्ड स्थापित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन कार्यकलापों में लगे लोगों को एफपीओ में संगठित किया जाएगा। यह बोर्ड मखाना किसानों को पथ-प्रदर्शन और प्रशिक्षण सहायता उपलब्ध कराएगा और यह सुनिश्चित करने के लिए भी कार्य करेगा कि उन्हें सभी संगत सरकारी योजनाओं के लाभ मिले।</p>
<p>श्रीमती निर्मला सीतारमण ने कहा कि राष्ट्रीय उच्च पैदावार बीज मिशन का कार्यान्वयन किया जाएगा, जिसका उद्देश्य अनुसंधान परिवेश को बढ़ावा देना, उच्च पैदावार, कीट प्रतिरोधी और जलवायु अनुकूलन के गुणों से संपन्न बीजों का लक्षित विकास और प्रचार करना तथा जुलाई 2024 से जारी किए गए बीजों की 100 से अधिक किस्मों को वाणिज्यिक स्तर पर उपलब्ध कराना होगा।उन्होंने कहा कि भविष्य में खाद्य और पोषण सुरक्षा के लिए 10 लाख जर्मप्लाज्म लाइनों के साथ दूसरे जीन बैंक की स्थापना की जाएगी। यह सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों को अनुवांशिक अनुसंधान के लिए संरक्षण सहायता प्रदान करेगी।</p>
<p>कपास उत्पादकता के लिए अभियान की घोषणा करते हुए श्रीमती निर्मला सीतारमण ने कहा कि इस पंच-वर्षीय मिशन से कपास कृषि की उत्पादकता और वहनीयता में पर्याप्त सुधार लाने में मदद मिलेगी और कपास की अधिक लंबे रेशे वाली किस्मों को बढ़ावा मिलेगा। किसानों को विज्ञान और प्रौद्योगिकी की सर्वोत्तम सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। वस्त्र क्षेत्र के लिए हमारे 5एफ के समेकित विज़न के अनुरूप, इससे किसानों की आय बढ़ाने में सहायता मिलेगी और भारत के परंपरागत वस्त्र क्षेत्र में नई जान फूंकने के लिए गुणवत्तापूर्ण कपास की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित होगी।</p>
<figure id="attachment_6124" aria-describedby="caption-attachment-6124" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176964.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176964.jpg" alt="" width="2200" height="1368" class="size-full wp-image-6124" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176964.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176964-300x187.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176964-1024x637.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176964-768x478.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176964-1536x955.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176964-2048x1273.jpg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176964-356x220.jpg 356w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6124" class="wp-caption-text">केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री, श्रीमती निर्मला सीतारमण, वित्त राज्य मंत्री, श्री पंकज चौधरी और पूर्ण बजट टीम के साथ 31 जनवरी, 2025 को नई दिल्ली में अंतरिम केंद्रीय बजट 2025 को अंतिम रूप देने के बाद।</figcaption></figure>
<p>करीब 7.7 करोड़ किसानों, मछुआरों और डेयरी किसानों के लिए लघु अवधि ऋणों की सुविधा उपलब्ध कराने में किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) की महत्ता का उल्लेख करते हुए मंत्री महोदया ने संशोधित ब्याज सब्सिडी योजना के अंतर्गत किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से लिए जाने वाले ऋणों के लिए ऋण सीमा 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने की घोषणा की। श्रीमती निर्मला सीतारमण ने असम के नामरूप में 12.7 लाख मीट्रिक टन की वार्षिक क्षमता के साथ एक उर्वरक संयंत्र की स्थापना की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस संयंत्र के साथ-साथ पूर्वी क्षेत्र में निष्क्रिय पड़े तीन यूरिया संयंत्रों में उत्पादन को पुनः प्रारंभ करने से यूरिया की आपूर्ति को और अधिक बढ़ाने के साथ-साथ उर्वरक उत्पादन में आत्मनिर्भरता लाने में सहायता मिलेगी।</p>
<p>समुद्री खाद्य निर्यात के मामले में 60 हजार करोड़ रुपये मूल्य के मत्स्य उत्पादन और जलीय कृषि के क्षेत्र में विश्व में भारत के दूसरे सबसे बड़े उत्पादक देश का उल्लेख करते हुए केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि समुद्री क्षेत्र की अप्रयुक्त संभावनाओं के द्वार खोलने के लिए, हमारी सरकार अंडमान और निकोबार तथा लक्षद्वीप जैसे द्वीपों पर विशेष ध्यान देने के साथ भारतीय विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र और गहरे समुद्रों से सतत मछली पकड़ने को बढ़ावा देने के लिए अनुकूल फ्रेमवर्क लाएगी।</p>
<p>केन्द्रीय बजट 2025-26 में विकास को बढ़ावा के लिए सरकारी प्रयासों को जारी रखने, समग्र विकास को सुनिश्चित करने, निजी क्षेत्र में निवेश को बढ़ाने, परिवारिक भावनाओं को बढ़ाने और उभरते मध्यम वर्ग की व्यय क्षमता को बढ़ाने का वादा किया गया। इस बजट में प्रस्तावित विकास, उपाय गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी को ध्यान में रखकर किया गया है। बजट में भारत की विकास संभावनाओं और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में वृद्धि के लिए कराधान, ऊर्जा क्षेत्र, ग्रामिण विकास, खनन, वित्तीय क्षेत्र और नियामक में परिवर्तनकारी सुधारों का लक्ष्य रखा गया है। </p>
<p>केन्द्रीय बजट में रेखांकित किया गया है कि कृषि, एसएसएमई, निवेश और निर्यात विकसित भारत की यात्रा के ईंजन हैं। इसमें सुधार को ईंधन के रूप में और समावेशिता की भावना को पथप्रर्दशक के रूप में रखा गया है।</p>
<figure id="attachment_6125" aria-describedby="caption-attachment-6125" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176965.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176965.jpg" alt="" width="2200" height="1084" class="size-full wp-image-6125" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176965.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176965-300x148.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176965-1024x505.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176965-768x378.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176965-1536x757.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176965-2048x1009.jpg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176965-324x160.jpg 324w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6125" class="wp-caption-text">केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री, श्रीमती निर्मला सीतारमण, वित्त राज्य मंत्री, श्री पंकज चौधरी और पूर्ण बजट टीम के साथ 31 जनवरी, 2025 को नई दिल्ली में अंतरिम केंद्रीय बजट 2025 को अंतिम रूप देने के बाद।</figcaption></figure>
<p><strong>पहला ईंजनः कृषि</strong> : बजट में राज्यों की भागीदारी के साथ ‘प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना’की गई है। इसके अंतर्गत 100 जिलों को शामिल किया गया है जहां उत्पादन में वृद्धि, फसल विविधता अपनाने, फसल कटाई के बाद भंडारण बढ़ाने, सिंचाई की सुविधाओं में सुधार करने, दीर्घ-अवधि और लघु-अवधि, ऋण की उपलब्धता को सुविधाजनक बनाने का लक्ष्य रखा गया। राज्यों की भागीदारी से एक व्यापक बहु-क्षेत्रीय ‘ग्रामीण सम्पन्नता और अनुकूलन निर्माण’ कार्यक्रम प्रारम्भ किया जाएगा। इससे कौशल, निवेश, प्रौद्योगिकी के माध्यम से कृषि में कम रोजगार का समाधान होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई जान आएगी।इसका लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक अवसरों का सृजन करते हुए जिसमें विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं, युवा किसानों, ग्रामीण युवाओं, सीमांत और छोटे किसानों और भूमिहीन परिवारों पर ध्यान देना है। केन्द्रीय वित्त मंत्री ने घोषणा की कि सरकार तूर, उड़द और मसूर पर विशेष ध्यान के साथ दालों में आत्मनिर्भरता के लिए एक छह वर्षीय अभियान का शुभारंभ करेगी। केन्द्रीय एजेंसियां (नेफेड और एनसीसीएफ) अगले चार वर्षों के दौरान किसानों से मिलने वाली इन तीन दालों को अधिकतम स्तर पर खरीदने के लिए तैयार रहेंगे।बजट में सब्जियों और फलों के लिए व्यापक कार्यक्रम हेतु उपायों की भी अवधारणा तैयार की गई है। कृषि और इससे सम्बद्ध गतिविधियों को व्यापक स्तर पर प्रोत्साहन देने के लिए इसमें अन्य उपायों के साथ कपास उत्पादकता के लिए एक पांच वर्षीय अभियान और उच्च पैदावार करने वाले बीजों पर राष्ट्रीय मिशन शामिल हैं। श्रीमती निर्मला सीतारमण ने संशोधित ब्याज योजना के अंतर्गत किसान क्रेडिटों के माध्यम से मिलने वाले ऋण की सीमा को 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने की घोषणा की।</p>
<p><strong>दूसरा इंजनः एमएसएमई</strong> : वित्त मंत्री ने विकास के लिए एमएसएमई को दूसरा शक्तिशाली इंजन बताया, क्योंकि यह क्षेत्र हमारे निर्यात का 45 फीसदी है। एमएसएमई को व्यापक स्तर पर उच्चतर कुशलता, तकनीकी उन्नयन और पूंजी के लिए बेहतर पहुंच प्राप्त करने में सहायता देने के लिए सभी एमएसएमई के वर्गीकरण के लिए निवेश और कुल कारोबार सीमाओं को क्रमशः 2.5 और दोगुना बढ़ाया गया है। इसके अलावा गारंटी कवर के साथ ऋण उपलब्धता को बढ़ाने के लिए भी उपायों की घोषणा की गई है। वित्त मंत्री ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की पहली बार की उद्यमी पांच लाख महिलाओं के लिए एक नई योजना का शुभारंभ किया। यह अगले 5 वर्षों के दौरान करोड़ रुपए तक के ऋण प्रदान करेगी।</p>
<p><strong>तीसरा इंजनः निवेश</strong> : निवेश को वृद्धि का तीसरा इंजन बताते हुए वित्त मंत्री ने लोगों, अर्थव्यवस्था और अभिनव में निवेश को प्राथमिकता दी। लोगों में निवेश के अंतर्गत, उन्होंने घोषणा की कि अगले पांच वर्षों में सरकारी विद्यालयों में 50,000 अटल टिंकरिंग प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी। श्रीमती निर्मला सीतारमण ने घोषणा की कि भारतनेट परियोजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में सभी सरकारी माध्यमिक विद्यालयों और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों को ब्रॉडबेंड कनेक्टविटी प्रदान की जाएगी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारतीय भाषा पुस्तक योजना को विद्यालयों और उच्चतर शिक्षा के लिए भारतीय भाषाओं के डिजिटल स्वरूप को प्रदान करने के लिए कार्यान्वित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ‘मेक फॉर इंडिया, मेक फॉर दी वर्ड’ विनिर्माण के लिए आवश्यक कौशल से हमारे युवाओं को युक्त करने के लिए वैश्विक विशेषज्ञता और साझेदारी के साथ पांच राष्ट्रीय कौशल उत्कृष्टता केन्द्रों की स्थापना की जाएंगी। 500 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ शिक्षा के लिए आर्टिफिशिएल इंटेलीजेंस में एक उत्कृष्टता केन्द्र की स्थापना की जाएगी।</p>
<figure id="attachment_6126" aria-describedby="caption-attachment-6126" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176973.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176973.jpg" alt="" width="2200" height="1845" class="size-full wp-image-6126" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176973.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176973-300x252.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176973-1024x859.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176973-768x644.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176973-1536x1288.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176973-2048x1718.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6126" class="wp-caption-text">केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री, श्रीमती निर्मला सीतारमण, वित्त राज्य मंत्री, श्री पंकज चौधरी और उनकी बजट टीम/वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ 01 फरवरी, 2025 को नई दिल्ली में केंद्रीय बजट 2025 पेश करने के लिए संसद भवन पहुंचीं।</figcaption></figure>
<p>बजट में घोषणा की गई कि सरकार प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत स्वास्थ्य देखभाल, गिग श्रमिकों के पहचान पत्र बनाने के साथ-साथ ई-श्रम पोर्टल पर उनका रजिस्ट्रेशन करेंगी। अर्थव्यवस्था में निवेश के अंतर्गत श्रीमती सीतारमण ने कहा कि बुनियादी ढांचा-संबंधित मंत्रालय सार्वजनिक-निजी साझेदारी मोड में परियोजनाएं के तीन वर्ष की अवधि के साथ कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि राज्यों के लिए पूंजीव्यय और सुधारों के लिए प्रोत्साहन देने के लिए 50 वर्ष तक के ब्याज मुक्त ऋणों के लिए 1.5 लाख करोड़ रुपये के परिव्यय का प्रस्ताव दिया गया है।</p>
<p>उन्होंने नई परियोजनाओं में 10 लाख करोड़ रुपये की पूंजी का लाभ लेने के लिए दूसरी परिसम्पत्ती मौद्रिकरण योजना 2025-30 की भी घोषणा की। ‘जनभागीदारी’ के माध्यम से ग्रामीण पाइप के माध्यम से जलापूर्ति के बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता, संचालन और मरम्मत पर ध्यान देने के साथ वर्ष 2028 तक जल जीवन मिशन का विस्तार किया गया है। सरकार ‘विकास केन्द्रों के तौर पर शहरों, के रचनात्मक पुर्नविकास और जल एवं स्वच्छता’ के लिए प्रस्तावों को कार्यान्वित करने हेतु एक लाख करोड़ रुपये के शहरी चुनौती कोष का गठन करेंगी।</p>
<p>अभिनव में निवेश के अंतर्गत निजी क्षेत्र परख अनुसंधान, विकास और अभिनव पहल को कार्यान्वित करने के लिए 20,000 करोड़ रुपये के आवंटन की घोषणा की गई है। केन्द्रीय वित्त मंत्री ने शहरी योजना को लाभ देने हेतु बुनियादी भू-स्थैतिक बुनियादी ढांचे के विकास के लिए राष्ट्रीय भू-स्थैतिक अभियान का प्रस्ताव दिया। बजट में शैक्षणिक संस्थानों, संग्रहालयों, प्रयोगशालाओं और निजी संग्रहकर्ताओं के साथ एक करोड़ से ज्यादा पांडुलिपियों के सर्वेक्षण, दस्तावेजीकरण और संरक्षण के लिए ज्ञान भारतम् अभियान का प्रस्ताव दिया गया। ज्ञान साझेदारी के लिए भारतीय ज्ञान व्यवस्था के एक राष्ट्रीय डिजिटल कोष का भी प्रस्ताव दिया गया।</p>
<p><strong>चौथा इंजनः निर्यात</strong> : श्रीमती सीतारमण ने निर्यात को विकास का चौथा इंजन बताते हुए कहा कि क्षेत्रीय और मंत्रालयी लक्ष्यों के साथ एक निर्यात संवर्धन मिशन का शुभारंभ किया जाएगा, जिसे वाणिज्य मंत्रालय, एमएसएमई मंत्रालय और वित्त मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से चलाया जाएगा।उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए एक डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा, ‘भारत ट्रेडनेट (बीटीएन)’ का व्यापार दस्तावेज़ीकरण और वित्तपोषण समाधानों के लिए एक एकीकृत प्लेटफॉर्म का प्रस्ताव दिया गया है।</p>
<p>वित्त मंत्री ने उल्लेख किया कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के साथ अपनी अर्थव्यवस्था को जोड़े रखने के लिए घरेलू विनिर्माण क्षमताओं के विकास के लिए सहायता प्रदान की जाएंगी। उन्होंने यह भी घोषणा की कि सरकार उद्योग 4.0 से संबंधित अवसरों का लाभ उठाने के लिए घरेलू इलेक्ट्रॉनिक उपकरण उद्योग को सहायता प्रदान करेगी। उभरते हुए दूसरी श्रेणी के शहरों में वैश्विक क्षमता केन्द्रों को प्रोत्साहन देने के लिए एक राष्ट्रीय प्रारूप का भी प्रस्ताव दिया गया है। सरकार जल्द खराब होने वाले बागवानी उत्पाद सहित एयरकार्गों के लिए बुनियादी ढांचे और वेयरहाउसिंग के उन्नयन हेतु सुविधा प्रदान करेगी। </p>
<p><strong>ईंधन के रूप में सुधार</strong> : इंजन के लिए ईंधन के तौर पर सुधारों को स्पष्ट करते हुए श्रीमती निर्मला सीतारमण ने कहा कि पिछले दस वर्षों से ज्यादा समय में सरकार ने करदाताओं की सुविधा के लिए फेसलैस मूल्यांकन, करदाता चार्टर, त्वरित रिटर्न, लगभग 99 फीसदी रिटर्न स्वयं मूल्यांकन के आधार पर और विवाद से विश्वास योजना जैसे कई सुधारों को कार्यान्वित किया गया है। इन प्रयासों को जारी रखते हुए उन्होंने कर विभाग की ‘विश्वास प्रथम जांच बाद में’ वचनबद्धता को दोहराया।</p>
<p><strong>वित्तीय क्षेत्र सुधार और विकास</strong> : ‘कारोबार में आसानी’ की दिशा में सरकार की त्वरित वचनबद्धता की पुष्टि करते हुए केन्द्रीय वित्त मंत्री ने अनुपालन में आसानी, सेवाओं के विस्तार, मजबूत नियामक परिवेश को बनाने, अंतर्राष्ट्रीय और घरेलू निवेश को प्रोत्साहन देने और पुराने कानूनी प्रावधानों के गैर-अपराधीकरण को आगे बढ़ाते हुए भारत में सम्पूर्ण वित्तीय क्षेत्र की व्यापकता में संरचनात्मक बदलाव का प्रस्ताव दिया। केन्द्रीय वित्त मंत्री ने समूचे भारत में प्रीमियम निवेश करने वाली कम्पनियों के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा को 74 फीसदी से 100 फीसदी तक बढ़ाने का प्रस्ताव दिया।</p>
<p>राजकोषीय सुदृढ़ीकरण के मार्ग पर बने रहने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए केन्‍द्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि राजकोषीय घाटे को प्रत्‍येक वर्ष इस प्रकार से रखने का प्रयास किया जाएगा कि केन्‍द्रीय सरकार का ऋण, जीडीपी के प्रतिशत के रूप में गिरते क्रम में बना रहे। इसके साथ ही अगले 6 वर्षों के लिए रोडमैप का विस्‍तृत ब्‍यौरा एफआरबीएम विवरण में दिया गया है। श्रीमती सीतारमण ने कहा कि वर्ष 2024-25 के लिए राजकोषीय घाटे का संशोधित अनुमान जीडीपी का 4.8 प्रतिशत है जबकि बजट अनुमान 2025-26 में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है।</p>
<figure id="attachment_6128" aria-describedby="caption-attachment-6128" style="width: 1417px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176967-1.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176967-1.jpg" alt="" width="1417" height="1789" class="size-full wp-image-6128" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176967-1.jpg 1417w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176967-1-238x300.jpg 238w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176967-1-811x1024.jpg 811w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176967-1-768x970.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176967-1-1217x1536.jpg 1217w" sizes="auto, (max-width: 1417px) 100vw, 1417px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6128" class="wp-caption-text">केंद्रीय वित्त और कॉरपोरेट मामलों की मंत्री, श्रीमती निर्मला सीतारमण 01 फरवरी, 2025 को नई दिल्ली में केंद्रीय बजट 2025 पेश करने के लिए वित्त राज्य मंत्री, श्री पंकज चौधरी और उनकी बजट टीम/वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ नॉर्थ ब्लॉक से राष्ट्रपति भवन और संसद भवन के लिए प्रस्थान करती हुई।</figcaption></figure>
<p><strong>संशोधित अनुमान 2024-25</strong> : वित्त मंत्री ने बताया कि उधारियों के अलावा कुल प्राप्‍तियों का संशोधित अनुमान 31.47 लाख करोड़ रुपये है, जिसमें से निवल कर प्राप्तियां 25.57 लाख करोड़ रुपये है। उन्‍होंने ज्‍यादा जानकारी देते हुए बताया कि कुल व्‍यय का संशोधित अनुमान 47.16 लाख करोड़ रुपये है, जिसमें से पूंजीगत व्‍यय लगभग 10.18 लाख करोड़ रुपये है। </p>
<p>राष्ट्र निर्माण में मध्यमवर्ग की सराहनीय ऊर्जा और क्षमता में हमेशा विश्वास जताते हुए केन्‍द्रीय बजट 2025-26 में नई कर व्यवस्था के तहत कर दर संरचना को संशोधित करने का प्रस्ताव किया गया है। नई कर व्यवस्था के अंतर्गत प्रतिवर्ष 12 लाख रुपये तक की आय अर्थात विशिष्ट दर आय जैसे पूंजीगत लाभ को छोड़कर 1 लाख रुपये प्रतिमाह की औसत आय पर कोई आय कर देय नहीं होगा। वेतनभोगी करदाताओं के लिए यह सीमा 75,000 रुपये की मानक कटौती के कारण प्रतिवर्ष 12.75 लाख रुपये होगी। इन प्रस्तावों के परिणामस्वरूप नए कर संरचना के तहत सरकार को प्रत्यक्ष करों में लगभग 1 लाख करोड़ रुपये के राजस्‍व का परित्याग होगा।</p>
<p>प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्‍व में सरकार ने लोगों की जरूरतों को समझते हुए कई महत्‍वपूर्ण कदम उठाए हैं। प्रत्‍यक्ष कर प्रस्‍तावों में मध्‍यम वर्ग पर ध्‍यान केन्द्रित करते हुए व्‍यक्तिगत आयकर में सुधार, टीडीएस/टीसीएस को तर्कसंगत बनाना, अनुपालनों के बोझ को कम करते हुए स्‍वैच्छिक अनुपालनों को प्रोत्‍साहित करना, व्‍यवसाय करने की सुगमता और निवेश और रोज़गार बढ़ाने के लिए कुछ प्रोत्‍साहन शामिल हैं। स्‍वैच्छिक अनुपालन को अद्यतन करने की सुविधा को लेकर लगभग 90 लाख करदाताओं ने अतिरिक्‍त कर का भुगतान करते हुए स्‍वैच्छिक रूप से अपनी आय संबंधी ब्‍यौरों को अद्यतन किया। इस विश्‍वास को आगे बढ़ाते हुए, अब किसी भी कर-निर्धारण वर्ष के लिए अद्यतन विवरणी दाखिल करने की समय-सीमा को मौजूदा दो वर्ष से बढ़ाकर चार वर्ष करने का प्रस्‍ताव किया गया है। छोटे धर्मार्थ न्‍यासों/संस्‍थाओं की पंजीकरण अवधि को बढ़ाकर 5 वर्ष से 10 वर्ष करके ऐसी संस्‍थाओं के अनुपालन संबंधी बोझ को कम करने का प्रस्‍ताव है। </p>
<p>करदाताओं को स्वामित्व वाली सम्‍पत्तियों के लिए बिना किसी शर्त के ऐसी दो सम्‍पत्तियों के वार्षिक मूल्‍य के   लाभ की अनुमति प्रदान करने का प्रस्‍ताव किया गया है। पिछले बजट में प्रस्‍तुत की गई विवाद से विश्‍वास योजना को शानदार प्रतिक्रिया मिली है और इसके द्वारा लगभग 33,000 करदाताओं ने इस योजना का लाभ उठाते हुए अपने विवादों का निपटारा किया है। वरिष्‍ठ और अति वरिष्‍ठ नागरिकों को लाभ देते हुए 29 अगस्‍त, 2024 को या उसके पश्‍चात् राष्‍ट्रीय बचत योजना (एनएसएस) से किए गए आहरण पर छूट प्रदान करने का प्रस्‍ताव है। एनपीएस वात्‍सलय खातों के लिए भी ऐसी ही व्‍यवस्‍था का प्रस्‍ताव है। व्यवसाय करने की सुगमता के तहत, अंतरण मूल्‍य की प्रक्रिया को कारगर बनाने हेतु तीन वर्षों की ब्‍लॉक अवधि के लिए अंतरराष्‍ट्रीय लेन-देन के मामलों में आर्म्स लेन्थ मूल्‍य निर्धारण करने के लिए एक योजना शुरू करने का प्रस्‍ताव है। यह योजना सर्वोत्तम वैश्विक पद्धतियों के अनुरूप होगी। अंतरराष्‍ट्रीय कराधान में विवादों को कम करने और निश्चितता को बनाए रखने की दृष्टि से सेफ हार्बर नियमों के दायरे का विस्‍तार किया जा रहा है।</p>
<figure id="attachment_6129" aria-describedby="caption-attachment-6129" style="width: 2200px" class="wp-caption aligncenter"><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176975.jpg"><img loading="lazy" decoding="async" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176975.jpg" alt="" width="2200" height="2074" class="size-full wp-image-6129" srcset="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176975.jpg 2200w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176975-300x283.jpg 300w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176975-1024x965.jpg 1024w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176975-768x724.jpg 768w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176975-1536x1448.jpg 1536w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176975-2048x1931.jpg 2048w, http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2025/02/H20250201176975-24x24.jpg 24w" sizes="auto, (max-width: 2200px) 100vw, 2200px" /></a><figcaption id="caption-attachment-6129" class="wp-caption-text">केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री, श्रीमती निर्मला सीतारमण, वित्त राज्य मंत्री, श्री पंकज चौधरी और उनकी बजट टीम/वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ 01 फरवरी, 2025 को नई दिल्ली में केंद्रीय बजट 2025 पेश करने के लिए संसद भवन पहुंचीं।</figcaption></figure>
<p>रोजगार और निवेश को बढ़ावा देने हेतु उन अनिवासियों के लिए प्रकल्पित कराधान व्‍यवस्‍था का प्रस्‍ताव किया गया है, जो ऐसी निवासी कम्‍पनी को सेवाएं प्रदान करते हैं, जो इलेक्‍ट्रॉनिक विनिर्माण सुविधा स्‍थापित या संचालित कर रही है। देश में अन्तर्देशीय जल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए मौजूदा टन भार कर स्कीम के लाभों के अंतर्गत पंजीकृत अन्तर्देशीय जलयानों के लिए विस्तारित करने का प्रस्ताव किया गया है। भारतीय स्टार्ट-अप इको-सिस्टम में 5 वर्षों तक निगमन की अवधि का विस्तार करने का प्रस्ताव किया गया है। अवसंरचना क्षेत्र में निवेश को प्रोत्‍साहित करने के लिए बजट में सॉवरेन धन निधियों और पेंशन निधियों द्वारा अवसंरचना क्षेत्र में वित्तपोषण को बढ़ावा देने के लिए निवेश करने की तारीख को 5 वर्ष बढ़ाकर 31, मार्च, 2030 तक करने का प्रस्ताव किया गया है।</p>
<p>औद्योगिक वस्तुओं के लिए सीमा-शुल्क टैरिफ संरचना को युक्तिसंगत बनाने के लिए बजट में : (i) सात टैरिफ दरों को हटाने, (ii) प्रभावी शुल्क दायित्‍व बनाए रखने के लिए कुछ मदों प्रभावी शुल्क दायित्‍व बनाए रखने के लिए कुछ मदों को छोड़कर,  और (iii) एक से अधिक उपकर अथवा अधिभार नहीं लगाने का प्रस्ताव है। आयातित दवाईयों पर छूट देते हुए कैंसर, दुर्लभ बीमारियों और संचारी बीमारियों और 36 जीवन रक्षक दवाओं को बेसिक कस्‍टम ड्यूटी (बीसीडी) से पूरी तरह छूट दे दी गई है। पेटेंट असिस्‍टेंट प्रोग्राम के अंतर्गत 13 नई दवाओं सहित 37 दवाईयों को भी बेसिक कस्‍टम ड्यूटी से मुक्‍त कर दिया गया है, अगर ये दवाएं मरीज को मुफ्त दी जाती है।</p>
<p>घरेलू विनिर्माण और मूल्‍य संवर्धन, 25 विशेष खनिजों जिनकी घरेलू उपलब्‍धता नहीं है उन्‍हें भी सहायता देने के लिए जुलाई, 2025 से बीसीडी से मुक्‍त कर दिया गया है। 2025-26 के बजट में कोबाल्‍ट पाउडर और उसके कबाड़, लीथियम आयरन बैट्री के कबाड़, लैट, जिंक और 12 अन्‍य मुख्‍य खनिजों को भी छूट दी गई है। घरेलू कपड़ा उत्‍पादन को बढ़ावा देने के लिए कपड़ा मशीनरी में दो अन्‍य शटल लैस लूम्‍स को भी छूट दी गई है। बजट में आगे कहा गया है कि बुने हुए कपड़े जो 10 प्रतिशत से 20 प्रतिशत, जिन्‍हें 20 प्रतिशत कर दिया गया है या 115 किलोग्राम से जो ज्‍यादा है, जो 09 टैरिफ लाइन्‍स को कवर करती है, उनके बीसीडी में भी संशोधन किया गया है।</p>
<p>प्रतिलोम शुल्क संरचना को ठीक करने और मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के लिए इंटरेक्टिव फ्लेट पैनल डिस्‍पले (आईएफपीडी) को 20 प्रतिशत बढ़ाया गया है और ओपन सैल्‍स को 5 प्रतिशत कम किया गया है। ओपन सैल्‍स के उत्‍पादन को बढ़ावा देने के लिए ओपन स्‍टेंडस को बीसीडी के हिस्‍से के रूप में छूट दी गई है।</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/nation/smt-nirmala-sitharaman-today-presented-budget-2025-26-based-on-trust-first-test-later">*पहले इस्तेमाल करें &#8211; फिर विश्वास करें* के तर्क पर श्रीमती निर्मला सीतारमण आज *पहले विश्वास करें &#8211; फिर जांच करें* आधारित 2025-26 का बजट पेश की</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>बिहार के अधिकांश पत्रकार सुशील मोदी के साथ यात्रा नहीं करना चाहते थे, क्योंकि वे &#8216;शाकाहारी&#8217; थे</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 14 May 2024 12:38:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[सम्पादकीय]]></category>
		<category><![CDATA[abvp]]></category>
		<category><![CDATA[bjp. sushil modi]]></category>
		<category><![CDATA[patna. bihar]]></category>
		<category><![CDATA[politics]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली: बिहार के लोग जब नरेंद्र मोदी का नाम नहीं सुने थे, बिहार में सुशील मोदी का नाम घरेलू हो गया था। अगर राजनीति नहीं हो और राज नेता के अनुयायी &#8216;निष्पक्ष निर्णय लेने लायक हो, तो आज ही नहीं, आने वाले काल खंडों में भी आधुनिक बिहार (जय प्रकाश नारायण आंदोलन के बाद) [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली: बिहार के लोग जब नरेंद्र मोदी का नाम नहीं सुने थे, बिहार में सुशील मोदी का नाम घरेलू हो गया था। अगर राजनीति नहीं हो और राज नेता के अनुयायी &#8216;निष्पक्ष निर्णय लेने लायक हो, तो आज ही नहीं, आने वाले काल खंडों में भी आधुनिक बिहार (जय प्रकाश नारायण आंदोलन के बाद) में अगर किसी भी &#8216;शिक्षित&#8217;, &#8216;तथ्यगत जानकारी रखने वाला&#8217;, &#8216;स्पष्टवक्ता&#8217; राजनेताओं का नाम लिया जाएगा तो वह नाम ‘एक वचन” से बहुवचन नहीं हो पाएगा और सुशील मोदी के नाम पर पूर्ण विराम भी लग जाएगा।</strong></p>
<p>आज बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गुलबंद बांधकर भले भारतीय जनता पार्टी के आला नेता के संग बैठकर कुर्सी का मज़ा लें, ठहाका-पर-ठहाका लगाएं, आला नेता भले यह स्वीकार नहीं करें, लेकिन हक़ीक़त यही है कि बिहार में सन् सत्तर के दशक के बाद पहले &#8216;दीपक&#8217; को &#8216;बुझने&#8217; से बचाये रखने, जलाये रखने और फिर कमल को खिलने-खिलाने में अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया तो वह पटना के राजेंद्र नगर रोड नंबर 8 के निवासी सुशील कुमार मोदी के अलावे कोई नहीं था। यहां तक कि भारतीय जनता पार्टी के वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जगत प्रकाश नड्डा भी सुशील मोदी के सामने बौने हैं। भले वे गोल-मटोल होकर, गोल-मटोल बातें कर सत्ता के सिंहासन पर विराजमान हों। </p>
<p>यह बात मैं ही नहीं, प्रदेश के &#8216;निष्पक्ष&#8217; पत्रकार, जिन्हें अख़बारों के लिए &#8216;विज्ञापन&#8217; एकत्रित नहीं करना होता है, मालिकों को राजनीतिक-लाभ दिलाने के लिए क्षण-प्रतिक्षण दण्ड बैठकी नहीं करना पड़ता है, स्वीकार करेंगे । इतना ही नहीं, इस बात पर पटना कॉलेज का यह विशाल मैदान, भले इस मैदान को सुशील मोदी किताब-कॉपी के साथ एक कक्षा से दूसरे कक्षा में जाने के क्रम में नहीं नापे हों, इस मैदान की मिट्टी प्रत्यक्ष गवाह है जहाँ सत्तर के दशक से सफ़ेद कमीज, खाकी हाफ पैंट, काली टोपी और अपने कद से अधिक ऊँचा डंडा लिए प्रत्येक रविवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ उपस्थित होते थे। पटना विश्वविद्यालय को अपने दिवंगत छात्र नेता के व्यक्तित्व पर नाज है। </p>
<p><strong>5 जनवरी, 1952 को पटना में जन्म लिए सुशील मोदी का 72 वर्ष की आयु में कल रात अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली में निधन हो गया। सुशील मोदी के निधन से सन 1974 की सम्पूर्ण क्रांति की उपज का पहला स्तंभ गिर गया। मोदी कैंसर से जूझ रहे थे और दिल्ली के एम्स अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। लोकसभा चुनाव के ऐलान के बाद सुशील मोदी ने अपनी बीमारी की जानकारी सार्वजनिक की थी। उन्होंने एक्स पर लिखा था, &#8221;मैं पिछले छह महीने से कैंसर से जंग लड़ रहा हूं। अब मुझे लगता है कि लोगों को इस बारे में बता देना चाहिए। मैं लोकसभा चुनाव में ज़्यादा कुछ नहीं कर पाऊंगा।&#8221; </strong></p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा है, &#8221;पार्टी में अपने मूल्यवान सहयोगी और दशकों से मेरे मित्र रहे सुशील मोदी जी के असामयिक निधन से अत्यंत दुख हुआ है। बिहार में भाजपा के उत्थान और उसकी सफलताओं के पीछे उनका अमूल्य योगदान रहा है। आपातकाल का पुरज़ोर विरोध करते हुए, उन्होंने छात्र राजनीति से अपनी एक अलग पहचान बनाई थी। वे बेहद मेहनती और मिलनसार विधायक के रूप में जाने जाते थे. राजनीति से जुड़े विषयों को लेकर उनकी समझ बहुत गहरी थी। उन्होंने एक प्रशासक के तौर पर भी काफ़ी सराहनीय कार्य किए. जीएसटी पारित होने में उनकी सक्रिय भूमिका सदैव स्मरणीय रहेगी. शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और समर्थकों के साथ हैं। &#8221; </p>
<p>सुशील मोदी जेपी आंदोलन की उपज माने जाते थे। जयप्रकाश आंदोलन से रामजनम सिन्हा, नीतीश कुमार, लालू प्रसाद यादव, नरेंद्र सिंह, सुशील मोदी, शिवानंद तिवारी जैसा राजनीतिक नेताओं का जन्म हुआ। सुशील मोदी की छात्र राजनीति की शुरुआत साल 1971 में हुई जब वे पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ की पांच सदस्यीय कैबिनेट के सदस्य निर्वाचित हुए।  1973 में वो महामंत्री चुने गए। उस वक़्त पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और संयुक्त सचिव रविशंकर प्रसाद चुने गए थे। भारतीय जनता पार्टी के सिद्धांतकार और संघ विचारक रहे केएन गोविंदाचार्य को सुशील कुमार मोदी का राजनीतिक गुरु माना जाता है। </p>
<p>श्रीमती रत्ना देवी &#8211; श्री मोती लाल मोदी के पुत्र सुशील मोदी अपने पीछे अपनी विधवा डॉ. जैसी सुशील मोदी और दो पुत्र उत्कर्ष तथागत और अक्षय अमृतांशु को छोड़ गए हैं। सुशील मोदी पटना के संत माइकल स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण किया। बाद में वे ​पटना साइंस कॉलेज से वनस्पति विज्ञान में स्नातक किये। जेपी आंदोलन के प्रभाव में आने के बाद उन्होंने स्नातकोत्तर कक्षा में दाखिला लेकर पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी। </p>
<div style="width: 480px;" class="wp-video"><video class="wp-video-shortcode" id="video-5480-1" width="480" height="864" preload="metadata" controls="controls"><source type="video/mp4" src="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/05/Modi.mp4?_=1" /><a href="http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/05/Modi.mp4">http://www.aryavartaindiannation.com/wp-content/uploads/2024/05/Modi.mp4</a></video></div>
<p>तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा लागू  आपातकाल के दौरान मोदी बिहार की राजनीतिक वातावरण में उभर कर आए। अपनी वाक्पटुता, स्पष्ट विचार के कारण वे पटना के मजदूरों से लेकर शिक्षाविदों तक सभी के पसंदीदा रहे। आपातकाल के दौरान वे 19 महीने जेल में रहे। सन 1977 से 1986 तक वो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में महत्वपूर्ण पदों पर रहे। बिहार की राजनीति में सुशील मोदी अपना नाम अपने दम पर लिखा। सन 1968 में वे राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ से जुड़े और आजीवन आरएसएस के कार्यकर्त्ता बने रहे। सन 1974 आंदोलन के दौरान वे बिहार प्रदेश छात्र संघर्ष समिति के सदस्य बने। सन 1983 आते-आते वे विद्यार्थी परिषद् के राष्ट्रीय महासचिव के पद पर आसीन हुए। </p>
<p>1990 में सुशील कुमार मोदी ने पटना केन्द्रीय विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े और विधानसभा पहुंचे। 1995 और 2000 का भी चुनाव वो इसी सीट से जीते। साल 2004 में उन्होंने भागलपुर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव जीता था। साल 2005 में उन्होंने संसद सदस्यता से इस्तीफ़ा दिया और विधान परिषद के लिए निर्वाचित होकर उपमुख्यमंत्री बने। साल 2005 से 2013 और फिर 2017 से 2020 के दौरान वो बतौर उपमुख्यमंत्री अपनी भूमिका निभाते रहे। इस दौरान वो पार्टी में भी अलग-अलग दायित्व संभालते रहे। दिसंबर, 2020 में उन्हें पार्टी ने राज्यसभा भेजा। </p>
<p>नब्बे में जिस पटना केंद्रीय विधानसभा क्षेत्र (अब कुम्हरार विधानसभा क्षेत्र) से सुशील मोदी चुनाव जीते थे, कोई साढ़े तीन दशक बाद आज तक उस विधानसभा क्षेत्र में &#8216;मोदी के पग के निशान&#8217; दीखते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस स्थान से भारतीय जनता पार्टी का कोई भी अभ्यर्थी चुनावी मैदान में अपनी टोपी उछालेगा, वह सुशील मोदी के नाम से विजय हो जायेगा। राजनीतिक विचारधाराओं में विविधता के वावजूद इस विधानसभा क्षेत्र के सभी लोग सुशील मोदी का बहुत सम्मान करते हैं। जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से जन्म लिए किसी भी राजनेताओं को, यहाँ तक की वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार या अन्य केंद्रीय मंत्रियों को वह सम्मान नहीं प्राप्त हुआ। </p>
<p>सत्तर के दशक में जब देश में, खासकर बिहार और प्रदेश की राजधानी पटना में राजनीतिक परिवेश बदल रहा था, उन दिनों मैं पटना की सड़कों पर अखबार विक्रेता (1968-1975) था। जयप्रकाश नारायण की सम्पूर्ण क्रांति का प्रत्यक्षदर्शी रहा। उनके आंदोलन के कारण सड़कों पर अखबार -आर्यावर्त, इंडियन नेशन, सर्चलाइट और प्रदीप &#8211; खूब बेचते थे। उन दिनों मैं पटना कॉलेज के सामने सामने ननकूजी के होटल के ऊपर गली के कोने पर रहता था। सन 1974 में दसवीं कक्षा का परीक्षार्थी भी था। कलाई पर घड़ी नहीं थी, इसलिए सुवह-सुवह अशोक राजपथ पर (पटना कॉलेज प्रवेश द्वार के समीप) ब्रह्म स्थान के नीचे से जाने वाली बैलगाड़ी बैल की घंटी की आवाज से उठ जाया करता था। उस सुबह भी घंटी की आवाज से उठा। कुछ देर बाद साइकिल से गांधी मैदान स्थित बस अड्डे के तरफ निकला अखबार लिए &#8211; बांटने के लिए। </p>
<p>साइकिल पर बैठा ही था, इस वृक्ष के नीचे पटना विश्वविद्यालय के तत्कालीन सभी छात्र नेता जो जय प्रकाश नारायण के आंदोलन में सक्रीय थे, खड़े दिखाई दिए। बहुतों के पैर में चप्पल था, पैजामा &#8211; कुर्ता, बेलबॉटम पहने थे। क्रांति की तैयारी हो रही थी। सुशील मोदी, लालू यादव. नवल सिंह आदि छात्र नेताओं के साथ-साथ पटना के तत्कालीन छायाकार कृष्णमुरारी किशन भी उपस्थित थे। कुछ पल रुका।  सबों ने हाल-चाल पूछा। फिर मैं आगे निकल पड़ा। इस बृक्ष के नीचे दाहिने फुटपाथ पर एनीबेसेन्ट रोड के कोने पीपुल्स बुक हॉउस, चाय वाला, दास स्टूडियो इत्यादि दूकानों पर उस सुवह जो भी लोग बाग़ खड़े दिखे थे, वे बिहार सरकार में विराजमान हुए। </p>
<p><strong>बहरहाल, सुशील मोदी तत्कालीन नेताओं में सबसे &#8216;तेज&#8217; थे, &#8216;सभी मामलों&#8217; में। आज के भाजपा के नेता भले इस बात को स्वीकार नहीं करें (स्वहित में), हकीकत यह है कि अगर उन दिनों सुशील मोदी नहीं होते तो पहले जनसंघ और बाद में भाजपा समाप्त हो गया होता। </strong></p>
<p><strong>वरिष्ठ पत्रकार सुधाकर जी</strong> कहते हैं: &#8220;प्रदेश में भाजपा को जीवित रखने का सम्पूर्ण श्रेय सुशील मोदी को जाता है। सुशील मोदी राजेंद्र नगर रोड नंबर-8 में रहते हैं और मैं रोड नंबर- 11 में। दोनों पटना विश्वविद्यालय के छात्र रहे, समकक्ष। उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे पढ़ते बहुत थे। तथ्यों को दस्तावेजों के साथ प्रस्तुत करने की उनकी बहुत बेहतरीन आदत थी। वे हवा में आरोप-प्रत्यारोप की बात नहीं करते थे। राजनीतिक  विचार धाराएं अलग-अलग होने के बावजूद भी लोग सुशील मोदी के इस गुण के कायल थे। ऐसे गुण जयप्रकाश नारायण आंदोलन के बाद जो भी नेता जन्म लिए, उनमें पूर्णता के साथ अभाव था और है भी।&#8221;</p>
<p>सुधाकर जी आगे कहते हैं: &#8220;मैं सुशील  मोदी को पिछले साठ सालों से जानता हूँ, देखा हूँ, परिचित हम, मिला हूँ। वे एक चलंत पुस्तकालय थे। उनके पास दस्तावेजों का अम्बार था। जब बिहार में नेताओं के द्वारा भ्रष्टाचार में लिप्त होने की बात की शुरुआत हुयी, सुशील मोदी दस्तावेजों के साथ भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़े। जब भी विधायक फंड की बात होती थी विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए, वे खुलकर लोगों से कहते थे कि आप भी खर्च करें और हम भी खर्च करते हैं। दोनों मिलकर विकास का कार्य करते हैं। इतना ही नहीं, कई ऐसे अवसर आये जब प्रदेश के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उनसे सलाह लेते थे।&#8221;</p>
<p><strong>टाइम्स ऑफ़ इण्डिया के वरिष्ठ पत्रकार (अवकाश प्राप्त) श्री लवकुमार मिश्रा</strong> कहते हैं कि &#8220;सुशील जी का जीवन &#8216;जीवन-पर्यन्त&#8217; सादगी से बीता। पटना के पोलो रोड स्थित आधिकारिक आवास पर वे सुबह दस बजे से देर रात दो बजे तक कार्य करते थे। सोने के लिए वे अपने घर राजेंद्र नगर जाते थे। हम एक अच्छे मित्र को खो दिया।&#8221;</p>
<p>बहरहाल, सन् 1983 की बात है। कपिल देव की अगुवाई में क्रिकेट विश्व कप खेला जा रहा था। मैच अपने अंतिम चरण में तब। उन दिनों मैं पटना विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर करने के बाद इंडियन नेशन अख़बार के संपादकीय विभाग में आ गया था। विश्वकप फ़ाइनल मैच के आस-पास ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का आगरा में अधिवेशन होने जा रहा था। परिषद के न्योता पर हम तीन पत्रकार आगरा जाने के लिए तैयार हुए। देश में राजनीतिक वातावरण बदल रहा था। राजनीति की परिभाषा भी बदल रही थी। राजनीति में देश के युवा वर्ग आने को सज्ज हो रहे थे। उधर कांग्रेस पार्टी भी युवा कांग्रेस को मजबूत करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही थी। लेकिन इसकी जमीनी स्तर पर संगठन मजबूत नहीं हो पा रहा था। जबकि विद्यार्थी परिषद के एक एक कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर कैडर को मजबूत करने का अथक प्रयास कर रहा था। सुशील मोदी विद्यार्थी परिषद् के शीर्षस्थ पद पर विराजमान थे। </p>
<p>हम तीन &#8211; श्री त्रिवेदी अमरीश (अब दिवंगत), श्री ज्ञानवर्धन मिश्र और मैं &#8211; आगरा की और निकल पड़े। उन दिनों इण्डियन नेशन अख़बार के संपादक थे श्री दीननान्थ झा। उनका आदेश था कि कहानी में शब्दों का प्रयोग ठीक से करना, साथ ही, ऐसा लिखना जिससे प्रदेश के युवापीढ़ियों को राजनीति में सजग और अध्यनशील रहने का सन्देश हो। आगरा पहुँचने पर हम तीनों गंतव्य स्थान पर पहुँचने के लिए होटल से कुछ समय पहले निकले जिससे वक्ताओं के कोई शब्द छूटे नहीं। तभी सुशील मोदी और हेमंत शुक्ला एक जीप से आगे निकले।  लेकिन तक्षण रुके और उनके जीप में एक खली स्थान पर ज्ञानवर्धन जी को उठा लिए। जीप पर ज्ञानवर्धन जी को बिच का स्थान मिला। परिणाम यह हुआ कि गंतव्य तक पहुँचने के क्रम में सड़क के दोनों तरफ जो भी व्यक्ति माला पहना रहे थे, सुशील मोदी के गले में नहीं, बल्कि ज्ञानवर्धन जी के गले में शोभायमान हो रहा था। खैर। </p>
<p>वैसे बिहार के पत्रकार इस बात को भी स्वीकार करेंगे (खासकर जो शाकाहारी नहीं हैं) कि प्रदेश का बाहुल्य पत्रकार सुशील मोदी के साथ यात्रा नहीं करना चाहते थे। वजह यह था कि वे &#8216;शाकाहारी&#8217; थे और उस ज़माने में भी &#8216;मदिरा निषेध&#8217; नहीं होने के बाद भी सुशील से स्वच्छ जल पीने-पिलाने में अधिक विश्वास रखते थे &#8211; चाहे चुनाव का समय हो या अन्य। </p>
<p>बहरहाल, <strong>डा धनाकर ठाकुर</strong> का कहना है कि &#8220;मिथिला के समर्थक थे मेरे मित्र सुशील मोदी।&#8221; उन्होंने कहा कि बिहार के भूतपूर्व उपमुख्यमंत्री &#8216;सुशील कुमार मोदी नेता विपक्ष के रूप में मेरे मिथिल राज्य आन्दोलन की सफलता के लिए पत्र भेजा था । उन्हें &#8216;भारत का प्रधानमंत्री बनाना था &#8216; जब मैंने यह बात कुछ वर्ष पूर्व पटना में कही थी तो लोगों को आश्चर्य हुआ था । गुजराती भाषा  दादरा नगर हवेली दमन दीव और  विरार वाले  पश्चिमी मुम्बई के साथ 28 लोकसभा क्षेत्र केवल हैं जबकि बिहार- झारखंड के 54 के साथ 68 लोकसभा के  दूसरे प्रदेशों में क्षेत्र हैं जहां बिहारी मतदाता निर्णायक हैं विशेषत: मैथिल मतदाता। इतने प्रभावी क्षेत्र में किन्हीं की भी पकड़ मजबूत नहीं संभव। फिर सुशील कुमार मोदी बिहार के अपने बैच के 124 सर्वश्रेष्ठ बायलोजी छात्र में एक थे जिनका ही साइंस कॉलेज, पटना में प्रवेश हो  सकता था और आनर्स में प्रथम वर्ग में दूसरा स्थान प्राप्त किया। मनमोहन सिंह सरकार के समय जीएसटी पैनल के चेयरमैन बने जिनको अपने ही दल ने भारत का वित्त मंत्री भी नहीं बनाया जो दुखद हुआ।</p>
<p>1974 छात्र आन्दोलन के नेता अपने दल के अधिक विधायक रहते हुए भी बिहार के मुख्यमंत्री पद के लिए उन्होंने जोर नहीं दिया, इतना ही  नहीं उन्होंने कभी बहिरागत के लिए  विपक्षी दल का नेता पद भी छोड़ि दिया। अहंकारविहीन व्यक्ति सुशील कुमार मोदी थे। बंगलोर में 2006 में मिथिला के विकास के लिए प्रेजेंटेशन मैथिल आइ टी कर्मी साथ मैंने रखा थ। शिमोगा से गोरक्षा रैलीज्ञसे वे ओ लेट आए थे अतः बिहार भवन के कार्यक्रम के बाद बोले कि भोजन के बाद प्रेजेंटेशन हो तो मैंने डांटते हुए कहा नहीं आपका भोजन वहीं होगा, युवाकर्मिंयों को दूर जाना है और वही हुआ। टिफिन से वे खाते रहे और प्रेजेन्टेशन चलता  रहा। समय के वे पक्के थे। राजनेता के अवसान पर मिथिला की श्रद्धांजलि।</p>
<p><strong>बहरहाल, जिस अख़बारों में प्रकाशित होकर आप छात्र नेता से राष्ट्रीय नेता बने, प्रदेश के राजनीतिक गलियारे के रास्ते संसद तक विराजमान हुए और राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रीय अख़बारो में प्रकाशित हुए, उन्हीं अख़बारों संस्थापक, संरक्षक के सम्मानार्थ बने वेबसाइट का श्रद्धांजलि स्वीकार करें। पांच-छह दशक पूर्व अपने सभी पत्रकार मित्रों के तरफ से (जो जीवित हैं और जो मृत्यु को प्राप्त किये) उनके तरफ से श्रद्धांजलि स्वीकार करें। मुझे उम्मीद हैं कि आधुनिक बिहार में शायद आप पहला और अंतिम छात्र नेता होंगे जिनके बारे में लिखते समय अश्रुपूरित हूँ। </strong></p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/editorial/most-journalists-from-bihar-did-not-want-to-travel-with-sushil-modi-because-he-was-a-vegetarian">बिहार के अधिकांश पत्रकार सुशील मोदी के साथ यात्रा नहीं करना चाहते थे, क्योंकि वे &#8216;शाकाहारी&#8217; थे</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>वोट देने के लिए रिश्वत लेने पर सांसदों, विधायकों को अभियोजन से कोई छूट नहीं: न्यायालय</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 04 Mar 2024 12:35:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[सम्पादकीय]]></category>
		<category><![CDATA[bribe]]></category>
		<category><![CDATA[jharkhand]]></category>
		<category><![CDATA[jmm]]></category>
		<category><![CDATA[parliament]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने आज कहा कि सांसदों और विधायकों को सदन में वोट डालने या भाषण देने के लिए रिश्वत लेने के मामले में अभियोजन से छूट नहीं होती। प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली सात-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) रिश्वत मामले में पांच न्यायाधीशों की [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने आज कहा कि सांसदों और विधायकों को सदन में वोट डालने या भाषण देने के लिए रिश्वत लेने के मामले में अभियोजन से छूट नहीं होती। प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली सात-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) रिश्वत मामले में पांच न्यायाधीशों की पीठ द्वारा सुनाए गए 1998 के फैसले को सर्वसम्मति से पलट दिया। </strong><strong></strong></p>
<p>पांच न्यायाशीधों की पीठ के फैसले के तहत सांसदों और विधायकों को सदन में वोट डालने या भाषण देने के लिए रिश्वत लेने के मामले में अभियोजन से छूट दी गई थी।प्रधान न्यायाधीश ने फैसला सुनाते हुए कहा कि रिश्वतखोरी के मामलों में संसदीय विशेषाधिकारों के तहत संरक्षण प्राप्त नहीं है और 1998 के फैसले की व्याख्या संविधान के अनुच्छेद 105 और 194 के विपरीत है। अनुच्छेद 105 और 194 संसद और विधानसभाओं में सांसदों और विधायकों की शक्तियों एवं विशेषाधिकारों से संबंधित हैं। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने पीठ के लिए फैसले का मुख्य भाग पढ़ते हुए कहा कि रिश्वतखोरी के मामलों में इन अनुच्छेदों के तहत छूट नहीं है क्योंकि यह सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी को नष्ट करती है। </p>
<p>अभी तक निर्वाचित जनप्रतिनिधि वोट के बदले रिश्वतखोरी करने पर आपराधिक मुकदमे से बच जाते थे। इसकी वजह 1998 में आया सुप्रीम कोर्ट का पीवी नरसिम्हा राव बनाम संघ (1998) निर्णय था। तब पांच न्यायाधीशों की पीठ के फैसले में कहा गया था कि संसद में एक निश्चित तरीके से वोट देने के लिए रिश्वत लेने वाले सांसदों को संविधान द्वारा संरक्षित किया जाता है। अब सात न्यायाधीशों की पीठ ने अनुच्छेद 105 और अनुच्छेद 195 के तहत राज्य विधानमंडलों और संसद के सदस्यों को दी गई छूट को खत्म कर दिया है। बता दें कि अनुच्छेद 105 में संसद सदस्यों जबकि अनुच्छेद 195 में राज्य विधानमंडलों के सदस्यों के विशेषाधिकार दिए गए हैं। सांसद और विधायक को यह सुनिश्चित करने के लिए कुछ अधिकार और छूट दी जाती है कि वे सदन में अपने कर्तव्यों को प्रभावी ढंग से पूरा कर सकें। </p>
<p><a href="https://youtu.be/JW2YaZ7QQtU">वोट देने के लिए रिश्वत लेने पर सांसदों, विधायकों को अभियोजन से कोई छूट नहीं</a></p>
<p>1991 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल की थी और पीवी नरसिम्हा राव देश के प्रधानमंत्री बनाए गए थे। चुनाव के करीब दो साल बाद जुलाई 1993 में नरसिम्हा राव सरकार को अविश्वास मत का सामना करना पड़ा। हालांकि, सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव 14 वोटों से गिर गया जब पक्ष में 251 वोट और विरोध में 265 वोट पड़े। इसके बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (पीसीए) के तहत एक शिकायत दर्ज की गई जिसमें आरोप लगाया गया कि अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ वोट करने के लिए कुछ सांसदों को रिश्वत दी गई थी। </p>
<p>जब मामला देश की सर्वोच्च अदालत पहुंचा जिसमें रिश्वत लेने के आरोपी सांसदों ने दो अहम तर्क प्रस्तुत किए। सबसे पहला तर्क था कि उन्हें संसद में उनके द्वारा डाले गए किसी भी वोट और ऐसे वोट डालने से जुड़े किसी भी कार्य के लिए संविधान के अनुच्छेद 105 के तहत छूट प्राप्त थी। दूसरा तर्क यह था कि सांसद सार्वजनिक पद पर नहीं होते हैं और इसलिए उन्हें पीसीए के दायरे में नहीं लाया जा सकता। न्यायालय इन तर्कों से सहमत हुआ और अप्रैल 1998 में तीन-दो के बहुमत से फैसला सुनाया। इसमें कहा गया था कि सांसदों को न केवल संसद में उनके द्वारा दिए गए वोटों के लिए, बल्कि मतदान से जुड़े किसी भी कार्य के लिए भी अभियोजन (मुकदमे) से छूट है। फैसले का मतलब यह था कि यदि किसी सांसद को संसद में वोट देने के लिए किसी भी तरह से रिश्वत दी गई थी, तो इस रिश्वत लेने का कृत्य अनुच्छेद 105 (2) द्वारा संरक्षित किया जाएगा और वे पीसीए के दायरे में नहीं आएंगे।<br />
 <br />
देश की सर्वोच्च अदालत में मामला दोबारा पहुंचे के पीछे सीता सोरेन का केस था। दरअसल, 2012 में झारखंड मुक्ति मोर्चा की विधायक सीता सोरेन पर राज्यसभा चुनाव 2012 में एक उम्मीदवार को वोट देने के लिए रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया था। बाद में जब चुनाव आयोग ने पाया कि राज्यसभा चुनावों में समझौता किया गया था तो चुनावों को रद्द कर दिया। इसी मामले में उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया। सीता सोरेन विधायी छूट का दावा करते हुए झारखंड उच्च न्यायालय पहुंच गईं। सुनवाई के दौरान सीता सोरेन ने तर्क दिया था कि राज्य विधानमंडल के सदन में उनके द्वारा डाले गए किसी भी वोट के लिए उन्हें अनुच्छेद 194(2) के तहत छूट प्राप्त है। नरसिम्हा राव मामले के हवाले से जेएमएम विधायक ने तर्क दिया था कि अनुच्छेद 194(2) के तहत छूट न केवल विधायिका में उनके द्वारा डाले गए किसी भी वोट के लिए बल्कि ऐसे वोट डालने से जुड़े सभी कार्यों के लिए भी है। झारखंड उच्च न्यायालय ने विधायी छूट का दावा करने वाली सोरेन की याचिका खारिज कर दिया। </p>
<p>सीता सोरेन ने झारखंड उच्च न्यायालय के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। याचिका की सुनवाई करने वाली तीन जजों की बेंच ने माना कि मामले में उठाए गए मुद्दे व्यापक सार्वजनिक महत्व के हैं। लिहाजा मार्च 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने मामले को पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ को भेज दिया। सितंबर 2023 को मामले की सुनवाई कर रही पांच जजों की बेंच ने बताया कि झारखंड उच्च न्यायालय का फैसला और सीता सोरेन का बचाव दोनों नरसिम्हा राव वाले मामले पर निर्भर थे। इसके अलावा बेंच ने कहा कि नरसिम्हा राव मामले की फिर से जांच करनी पड़ सकती है। इस तरह से मामला सात न्यायाधीशों की पीठ को भेज दिया गया।</p>
<p>नोट के बदले वोट के इसी मामले में 4 मार्च 2024 को सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की संविधान पीठ ने बड़ा फैसला सुनाया है। पीठ में मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के अलावा जस्टिस ए एस बोपन्ना, जस्टिस एम एम सुंदरेश, जस्टिस पी एस नरसिम्हा, जस्टिस जेपी पारदीवाला, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस मनोज मिश्रा शामिल रहे। फैसला सुनाते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि पीठ के सभी जज इस मुद्दे पर एकमत हैं कि पीवी नरसिम्हा राव मामले मे दिए फैसले से हम असहमत हैं। नरसिम्हा राव मामले में अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने सांसदों-विधायकों को वोट के बदले नोट लेने के मामले में अभियोजन (मुकदमे) से छूट देने का फैसला सुनाया था। </p>
<p>मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि माननीयों को मिली छूट यह साबित करने में विफल रही है कि उन्हें अपने विधायी कार्यों में इस छूट की अनिवार्यता है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 105 और 194 में रिश्वत से छूट का प्रावधान नहीं है क्योंकि रिश्वतखोरी आपराधिक कृत्य है और ये सदन में भाषण देने या वोट देने के लिए जरूरी नहीं है। पीवी नरसिम्हा राव मामले में दिए फैसले की जो व्याख्या की गई है, वो संविधान के अनुच्छेद 105 और 194 के विपरीत है।</p>
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		<title>फैशन की लहर में नौसेना की पोशाक बह गई ! पसंदीदा हो गई ​कुर्ता पैजामा !!</title>
		<link>http://www.aryavartaindiannation.com/editorial/kurta-paijama-and-indian-navy</link>
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		<dc:creator><![CDATA[के. विक्रम राव]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 16 Feb 2024 13:40:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[सम्पादकीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>एक युगांतकारी निर्णय में भारतीय नौसेना ने अपने भोजन मैस में अफसरों को टाई कोट आदि के ब्रिटिश पोशाक को तजकर पैजामा कुर्ता पहनकर प्रवेश का नियम स्वीकारा है। मगर इस भारतीयकरण में सेना को 75 वर्ष लगे। प्रधानमंत्री का आह्वान था &#8220;गुलाम-मानसिकता से मुक्ति&#8221; का। कुर्ते पर बिना बाहों का जैकेट भी पहन सकेंगे। [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>एक युगांतकारी निर्णय में भारतीय नौसेना ने अपने भोजन मैस में अफसरों को टाई कोट आदि के ब्रिटिश पोशाक को तजकर पैजामा कुर्ता पहनकर प्रवेश का नियम स्वीकारा है। मगर इस भारतीयकरण में सेना को 75 वर्ष लगे। प्रधानमंत्री का आह्वान था &#8220;गुलाम-मानसिकता से मुक्ति&#8221; का। कुर्ते पर बिना बाहों का जैकेट भी पहन सकेंगे।</strong></p>
<p>याद आयी कोलकाता में गोरे साहबों के प्रिय ग्रेट ईस्टर्न होटल की वह घटना। बात आजादी के कुछ सालों बाद की है। स्वाधीनता सेनानी और कांग्रेस नेता पूर्वांचल के अलगू राय शास्त्री को इसी होटल में टांगे और बाहें पकड़ कर, झुला कर होटल से बाहर फुटपाथ पर फेंक दिया गया था। कारण यही कि शास्त्रीजी धोती कुर्ता पहनकर इस ब्रिटिश साम्राज्यवाद की आखिरी निशानी में गए थे। इस होटल में सूट और टाई अनिवार्य पोशाक थी।</p>
<blockquote><p>शास्त्री जी ने दिल्ली पहुँचकर प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को लिखा कि &#8220;इसी दिन के लिए क्या हम सब अंग्रेजों से लड़े थे।&#8221; खैर नेहरू ने टालने का प्रयास किया। पर मीडिया में बात खूब उछली। इसी परिवेश में नौसेना का वेश भूषा वाला नया नियम स्वागतयोग्य है।</p></blockquote>
<p>यूं राष्ट्रीय पोशाक हर स्वाधीन देश की होती। हर देश की राष्ट्रीयता का ही हिस्सा होती है। हाथ से बनी खादी का पैजामा कुर्ता भारत की जंगे-आजादी की कभी वर्दी हुआ करती थी। मगर अपने गत वर्ष के रायपुर अधिवेशन में सोनिया-कांग्रेस ने सदस्यों द्वारा खादी पहनने की अनिवार्यता समाप्त कर दी। बल्कि शराब पीने की पाबंदी हर कांग्रेसी के लिए खत्म कर दी। अर्थात गांधीवाद से तलाक पूरा हो गया। समाजवादी लोग अभी भी लाल टोपी में दिखते हैं। हालांकि डॉ. राममनोहर लोहिया ने कभी भी लाल टोपी नहीं पहनी। सफेद गांधी टोपी ही धारण करते थे। जयप्रकाश नारायण भी।</p>
<p>यूं हर देश में फैशन डिजाइनिंग, खासकर वस्त्रों के बारे में, काफी विविधता लिए विकसित हुआ है। यह कपड़ों पर डिज़ाइन और सौंदर्य को साकार करने की कला है। सांस्कृतिक और सामाजिक व्यवहार से फैशन प्रभावित होते हैं। कपड़े और उपसाधन डिज़ाइन करने में विभिन्न तरीकों से काम करते हैं। कुछ डिज़ाइनर अकेले या कुछ समूह में काम करते हैं। वे फैशन डिज़ाइनर बनाये हुए कपड़े सिर्फ उपयोगिता की दृष्टी से ही नहीं बल्कि दिखने में भी अच्छे लगें। उन्हें इस बात का ध्यान रखना पड़ता है। वह कपड़ा कौन पहनेगा और उसे किन मौकों पर पहना जायेगा ?</p>
<p>विविध पहनावे, विशेषकर सेना के लिए, परिधान की स्पष्ट रूपरेखा का इतिहास रहा। यह फैशन डिज़ाइन 19 वीं शताब्दी में चार्ल्स फ्रेडरिक वर्थ से शुरू हुआ था। अपने बनाये कपड़ों पर अपने नाम का लेबल लगाने वाला वह पहला डिज़ाइनर था। ड्रेपर, चार्ल्स फ्रेडरिक वर्थ द्वारा पेरिस में अपना मैसन कोचर (फैशन हाउस) स्थापित करने से पहले, कपड़ों का डिज़ाइन एवं निर्माण ज्यादातर अनाम दर्जियों द्वारा किया जाता था। फैशन की अवधारणा शाही दरबार के वस्त्रों से आती थी।<br />
 <br />
पोशाकों की फैशन का आजाद भारत में विकास खूब हुआ है। कभी नेहरू जैकेट और अचकन होती थी। फिर मोरारजी देसाई की तीखी नोकवाली सफेद टोपी आई। धोती भी मराठी और हिंदी प्रदेश की दिखती है। हालांकि राष्ट्रीय पोशाक कई आकर के होते हैं।</p>
<p>यह आम बात है कि पहनावे से उस व्यक्ति की राष्ट्रीयता का भान हो जाता है। भारत में तो प्रदेश का अंदाज भी लग जाता है। मगर यह परिचर्चा मात्र पुरुषों के पहनावे से है। महिलाओं की विविधता और आकर्षक को सीमाबद्ध नहीं किया जा सका है। इसीलिए भारतीय नौसेना का पजामा-कुर्ता वाला अब नये डिजाइन को खूब प्रोत्साहित करेगा।</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/editorial/kurta-paijama-and-indian-navy">फैशन की लहर में नौसेना की पोशाक बह गई ! पसंदीदा हो गई ​कुर्ता पैजामा !!</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>सांसदों के निष्कासन से रोष था ! सांसद की मिमिक्री से उड़ गया !!</title>
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		<dc:creator><![CDATA[के. विक्रम राव]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 22 Dec 2023 11:35:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[सम्पादकीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>तृणमूल कांग्रेस के 66-वर्षीय नेता कल्याण बनर्जी विगत पंद्रह वर्षों से लोकसभा सदस्य हैं। मगर इतनी चर्चा में कभी नहीं आए जितनी परसों (18 दिसंबर 2023) संसद के बरामदे पर उनकी जोकरी से। मसखरेपन से। उन्होंने 72-वर्षीय उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की मिमिक्री की। नकल उतार कर। बरामदे में जमा निष्कासित सांसदों की वाहवाही भी खूब [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>तृणमूल कांग्रेस के 66-वर्षीय नेता कल्याण बनर्जी विगत पंद्रह वर्षों से लोकसभा सदस्य हैं। मगर इतनी चर्चा में कभी नहीं आए जितनी परसों (18 दिसंबर 2023) संसद के बरामदे पर उनकी जोकरी से। मसखरेपन से। उन्होंने 72-वर्षीय उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की मिमिक्री की। नकल उतार कर। बरामदे में जमा निष्कासित सांसदों की वाहवाही भी खूब लूटी। मनोरंजन किया सो अलग। राहुल गांधी अपने मोबाइल से पूरी फिल्म उतार रहे थे।</strong></p>
<p>इस घटना का पहला परिणाम यह हुआ कि उनका नाम उनकी पार्टी नेता ममता बनर्जी ने प्रतिनिधिमंडल की सूची से काट दिया। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिली थीं। कल्याण बनर्जी के बिना। ममता बनर्जी ने कहा भी कि राहुल गांधी की फिल्म उतराने से ही सारी बात फैली।<br />
कल्याण बनर्जी यूं पेशे से वकील हैं। हाई कोर्ट जाते हैं। वे वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण को “काली नागिन” कह चुके हैं। बोले : “उनके काटने से लोग मर रहे हैं।”</p>
<p>कल्याण बनर्जी राम और सीता पर भी राय व्यक्त कर चुके हैं। अपने सोशल मीडिया पर उन्होंने लिखा था : “सीता ने भगवान राम से कहा कि यह सौभाग्य था कि उन्हें रावण द्वारा त्याग दिया गया। अगर मुझे आपके अनुयायियों द्वारा अपहरण कर लिया गया होता, जो अपने माथे पर भगवा लपेटते हैं और जय श्री राम के नारे लगाते हैं, तो मेरी हालत हाथरस पीड़िता की तरह होती।” हाथरस में 20 सितंबर 2020 में एक 19-वर्षीय दलित युवती के साथ सामूहिक बलात्कार हुआ था। मगर न्यायालय से सभी छूट गए थे। केवल एक को हत्या का दोषी पाया गया था।</p>
<p>कल्याण बनर्जी ने एक बार कोलकाता में आरबीआई क्षेत्रीय मुख्यालय के सामने विरोध सभा के दौरान प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को &#8216;चूहा&#8217; कह डाला था। कल्याण ने कहा था : “मोदी के समर्थक उन्हें शेर कहते हैं। लेकिन मैं कहता हूं कि वह समय दूर नहीं है जब मोदी को गुजरात में अपने घर लौटना होगा।&#8221;  </p>
<p>पश्चिम बंगाल के भाजपा नेता दिलीप घोष से कल्याण बनर्जी की तकरार चलती रहती है। एक बार कल्याण बोले : “हम दिलीप घोष से नहीं डरते। वह भाजपा नेताओं को बताएं कि हम चूड़ियां पहनकर घर पर नहीं बैठे हैं, हम मजबूत हैं और हम मैदान में मिलेंगे। यदि आप शारीरिक रूप से लड़ना चाहते हैं, तो हम पीछे नहीं हटेंगे। आप जो गंदी राजनीति कर रहे हैं, हम उसका उचित जवाब देंगे। मैं दिलीप घोष को चुप करा दूंगा और मैं देखना चाहता हूं कि वह कितने बहादुर हैं। दिलीप घोष जैसे व्यक्ति को, जिन्हें 18 सुरक्षा गार्ड की जरूरत है, उन्हें पुरुषों के कपड़े नहीं पहनने चाहिए, उन्हें साड़ी पहननी चाहिए। यहां तक कि साड़ी पहनने वाले लोग भी उनसे ज्यादा मजबूत हैं।&#8221; ऐसी थी इस सांसद की भाषा शैली !</p>
<p>मगर कल विवाद को व्यापक होते देखकर कल्याण बनर्जी ने तेवर ढीले किए। कोलकता में वे बोले : “मेरा इरादा किसी को भी ठेस पहुंचाने का नहीं था। मैं लोकसभा का सदस्‍य हूं और मैंने कभी राज्यसभा की कार्यवाही या राज्यसभा टीवी नहीं देखा। मैं धनखड़ जी की नकल कैसे कर सकता हूं ? मैं हैरान हूं। उन्होंने इसे व्यक्तिगत रूप से ले लिया। क्या इसका मतलब यह है कि वह इस तरह का व्यवहार करते हैं ? यह एक कला है, उन्हें इसे खेल के तौर पर लेना चाहिए।” </p>
<p>दरअसल कल्याण बनर्जी को राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ की नकल करने पर गंभीर आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। वे अपनी पार्टी और बंगाल भर में एक विचित्र घटना के लिए याद रखे जाते हैं। बात 2021 के विधानसभा चुनाव की है। पार्टी की प्रेस कॉन्फ्रेंस थी। सांसद साहब ने एक महिला के गाल सबके सामने खींच दिए। मगर बाद में माफी मांग ली।</p>
<p>कल्याण बनर्जी की फूहड़ हरकत से राष्ट्रपति द्रोपति मुर्मू ने अत्यंत दुख व्यक्त किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के व्यवहार पर निराशा जतायी, क्रोध भी। फिलहाल पुलिस पूरे प्रकरण की तहकीकात कर रही है।</p>
<p>हालांकि 143 सांसदों के सदन से निष्कासन पर पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार लोकतंत्र का गला घोट रही है। मगर जो भी जनाक्रोश इस घटना से उपजा वह कल्याण बनर्जी की इस मसखरीभरी हरकत से काफूर हो गया। मुद्दा अब यह बन गया कि क्या ऐसी अश्लीलता क्षम्य है ? वह भी एक वरिष्ठ सांसद-वकील द्वारा ? </p>
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		<title>सरकारी बलात्कारी, लुटेरे दंडित ! नन्हें गांव की महाविजय गाथा !!</title>
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		<dc:creator><![CDATA[के. विक्रम राव]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 04 Oct 2023 00:59:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[सम्पादकीय]]></category>
		<category><![CDATA[high court]]></category>
		<category><![CDATA[hope]]></category>
		<category><![CDATA[judgmenet]]></category>
		<category><![CDATA[justice]]></category>
		<category><![CDATA[lower court]]></category>
		<category><![CDATA[punishment]]></category>
		<category><![CDATA[rapists]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>दिया टकराये तूफान से ! न बुझे ? तो चमत्कार कहलाएगा। विस्मयजनक ! ठीक ऐसा ही हुआ (29 सितंबर 2023) गत सप्ताह। मद्रास हाईकोर्ट ने यही कर दिखाया। केवल 565 निर्धन अनुसूचित आदिवासी ग्रामीण जन तमिलनाडु के चार महाबली मुख्यमंत्रियों से 31 साल तक भिड़े। न्यायार्थ ! अंततः विजयी हुए। इन जुल्मी मुख्यमंत्री में हैं, [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>दिया टकराये तूफान से ! न बुझे ? तो चमत्कार कहलाएगा। विस्मयजनक ! ठीक ऐसा ही हुआ (29 सितंबर 2023) गत सप्ताह। मद्रास हाईकोर्ट ने यही कर दिखाया। केवल 565 निर्धन अनुसूचित आदिवासी ग्रामीण जन तमिलनाडु के चार महाबली मुख्यमंत्रियों से 31 साल तक भिड़े। न्यायार्थ ! अंततः विजयी हुए। इन जुल्मी मुख्यमंत्री में हैं, एमके स्टालिन, उनके पिता एम. करुणानिधि, स्व. जे. जयललिता, ओ. पन्नीरसेल्वम तथा ई. पलनिस्वामी। सभी हार गए। मगर इन सभी ने अपने अत्याचारी अफसरों का समर्थन किया, बेशर्मी से। न्याय पाया जनजाति वालों ने, 31 साल बाद। अनवरत संघर्ष के फलस्वरुप।</strong></p>
<p>यह शौर्यगाथा है तमिलनाडु के पूर्वी घाट के खंड में स्थित मनोरम चितेरी पहाड़ियों के वनाच्छादित गांव वचथी की। जनपद धर्मपुरी के इस नन्हे से गांव का किस्सा शुरू होता है 20 जून 1992 की शाम को। गोधूलि पर। पुलिसवाले कुख्यात तस्कर मुनिस्वामी वीरप्पन की तलाशी में आए थे। यह आतंकी और डाकू चंदन के पेड़ काटकर बेचने के अलावा, राजनेताओं का अपहरण करना और फिरौती बटोरने में लिप्त रहा। पुलिस और राजस्व अधिकारियों ने वाचथी गांव पर छापा मारा। घरों में अंधाधुंध तोड़फोड़ की। वृद्धों, महिलाओं और बच्चों को बेरहमी से पीटा गया। उनके घरेलू सामान और कृषि उपकरण नष्ट कर डाले। करीब 18 महिलाओं को एक सुनसान जगह पर ले जाया गया। उनके साथ बलात्कार किया गया। </p>
<p>“द हिंदू” दैनिक ने फोटो भी छापी थी। यह आदिवासी गांव तालुक मुख्यालय हरूर से 17 किमी दूर स्थित है। गांव की कुल जनसंख्या 1992 में 655 थी, केवल 12 लोग अन्य जाति के थे। केंद्र के एकीकृत ग्रामीण विकास कार्यक्रम के तहत बनाए गए 120 समूह आवास सहित लगभग 200 घर थे। गाँव में केवल 261.18 हेक्टेयर खेती योग्य क्षेत्र है। लगभग 190 लोगों के पास ज़मीन थी। बाकी 466 भूमिहीन मजदूर थे। पहाड़ियों की तलहटी में स्थित यह थोम्बक्कल रिजर्व फॉरेस्ट और पल्लीपट्टी रिजर्व फॉरेस्ट इसके निकट है। आदिवासी जंगलों से लघु वन उपज और जलाऊ लकड़ी भी एकत्र करते थे। गाँव में उपलब्ध भूमि पर वे मुख्य रूप से रागी, टैपिओका, चावल और अन्य अनाज की खेती करते थे। यहां कुल 250 परिवार रहते हैं। गाँव की जनसंख्या 1032 है, जिसमें 517 पुरुष हैं, जबकि 515 महिलाएँ हैं।</p>
<p><strong>वचथी का आपराधिक मामला 20 जून 1992 का है। एक आधिकारिक दल जिसमें 155 वनकर्मी, 108 पुलिसकर्मी और छह राजस्व अधिकारी शामिल थे चंदन की तस्करी और वीरप्पन के बारे में पता करने के लिए वचथी गाँव में दाखिल हुए थे। खोज के बहाने इस दल ने ग्रामीणों की संपत्ति की तोड़फोड़ की, उनके घरों को नष्ट कर दिया, मवेशियों तक को मार डाला, ग्रामीणों पर हमला किया और 18 महिलाओं के साथ बलात्कार किया</strong>।</p>
<p>राज्य विधानसभा में कई दफा मामला उठा, पर दबी आवाज से ही। फिर हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने इसकी जांच की थी। मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की जांच पड़ताल से भी गुज़रा। प्रदेश की एक विशेष अदालत ने 29 सितंबर 2011 को दलितों पर अत्याचार की सभी 269 आरोपी अधिकारियों को सजा सुनाई और बलात्कार के लिए 17 आरोपियों को सजा सुनाई। आरोपियों में से 54 लोगों की उस समय तक मृत्यु हो गई थी; शेष 215 आरोपियों को जेल की सजा सुनाई गई थी। </p>
<p><strong>निचली अदालत ने इन लोगों को दोषी ठहराया था। इस आदेश के खिलाफ आरोपियों ने मद्रास हाईकोर्ट में अपील की थी। शुक्रवार (29 सितंबर) को हाईकोर्ट ने निचली अदालत के कोर्ट का फैसला बरकरार रखा। पुलिस और सरकारी अधिकारियों ने गांव के लोगों को चंदन तस्कर वीरप्पन का समर्थक बताते हुए तीन दिन तक उनके साथ बर्बरता की थी। इन 269 दोषियों में से 126 फॉरेस्ट ऑफिसर, 84 पुलिसवाले और 5 रेवेन्यू अधिकारी थे। जब निचली कोर्ट का आदेश आया, तब तक 54 दोषियों की मौत हो चुकी थी।</strong></p>
<p>अपने फैसले में निचली कोर्ट ने सभी दोषियों को 1 से 10 साल तक की जेल की सजा सुनाई थी। इसके साथ ही हर दोषी को 10 लाख रुपए देने आदेश दिया गया था, जो 18 पीड़िताओं को दिए जाते। इनमें से हर दोषी पांच लाख रुपए जमा कर चुका है, जबकि पांच लाख बकाया है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में राज्य सरकार को निर्देश दिया कि पीड़ितों को नौकरी या उनके और उनके परिवारों को स्व-रोजगार के अवसर मुहैया कराए जाएं। कोर्ट ने सरकार को ये निर्देश भी दिया था कि तत्कालीन जिला कलेक्टर, सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस और डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर दोषियों के खिलाफ एक्शन ले क्योंकि उन्होंने आरोपियों के खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं कर थी।</p>
<p>मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति पी. वेलमुरुगन ने गत शुक्रवार को इस मामले में फैसला सुनाया। जज ने यह भी आदेश दिया कि जो बलात्कार के दोषी पाए गए हैं, उन सब से मुआवजे की 50 प्रतिशत रकम वसूली जाए। ऐतिहासिक निर्णय देने वाले हैं डिंडीगुलवासी न्यायमूर्ति पेरुमल वेलमुरुगन, जो एक पंचायत शिक्षक के पुत्र हैं। उनकी सहधर्मिणी डॉ. आर. सुधा, एमडी, त्रिची मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर हैं। </p>
<p>न्यायमूर्ति पी. वेलमुरुगन ने कहा : “सभी आपराधिक अपीलों को खारिज किया जाता है।” वाचथी गाँव के लोगों के खिलाफ तस्करी का जो आरोप लगाया गया था, मद्रास उच्च न्यायालय ने उसे भी खारिज कर दिया। पुलिस तीस साल तक मामले को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थी। तत्कालीन राज्य मंत्री केए सेनगोट्टैयन ने टिप्पणी की कि ग्रामीण चंदन की तस्करी में सहायता कर रहे थे। ग्रामीणों को लंबे समय तक मुआवजे से वंचित रखा गया था। अंततः विजय पीड़ितों और वंचितों की हुई।</p>
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		<title>✍ एक देश, एक तिरंगा 🇮🇳 एक संविधान 📙 फिर &#8216;एक सार्वभौमिक पुलिस अधिनियम&#8217;🪖क्यों नहीं ?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[शिवनाथ झा]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 05 Aug 2023 02:20:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[सम्पादकीय]]></category>
		<category><![CDATA[chief ministers]]></category>
		<category><![CDATA[governors]]></category>
		<category><![CDATA[home minister o india]]></category>
		<category><![CDATA[lok sabha speaker]]></category>
		<category><![CDATA[politicians]]></category>
		<category><![CDATA[prime minister o india]]></category>
		<category><![CDATA[state home ministers]]></category>
		<category><![CDATA[state police chief]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली : पिछले दिनों जब देश के गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोक सभा में एक लिखित प्रश्न का उत्तर देते यह कहा कि देश के कुल 17,535 कार्यरत थानों में से 63 पुलिस थानों में कोई वाहन नहीं है, तो सुनकर, पढ़कर कोई आश्चर्य नहीं लगा था। आज एक तरफ जहाँ देश के [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/editorial/one-country-one-tricolour-one-constitution-one-police-act">✍ एक देश, एक तिरंगा 🇮🇳 एक संविधान 📙 फिर &#8216;एक सार्वभौमिक पुलिस अधिनियम&#8217;🪖क्यों नहीं ?</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली : पिछले दिनों जब देश के गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोक सभा में एक लिखित प्रश्न का उत्तर देते यह कहा कि देश के कुल 17,535 कार्यरत थानों में से 63 पुलिस थानों में कोई वाहन नहीं है, तो सुनकर, पढ़कर कोई आश्चर्य नहीं लगा था। आज एक तरफ जहाँ देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी पूरे देश में तकनीकी और संचार के जगत में क्रांति लाने की बात कर रहे हैं, वहीँ उनके की मंत्रिमंडल के मंत्री यह भी स्वीकार किया कि देश में 628 पुलिस थानों में &#8216;संचार&#8217; की कोई व्यवस्था नहीं है, यानी 628 थानों में &#8216;टेलीफोन&#8217; की भी सुविधा नहीं है। अतः स्वाभाविक है कि ये सभी 628 थाने देश की पुलिसिंग की मुख्यधारा से कटे हैं। </strong></p>
<p>आगे सुनिए। मंत्री महोदय यह भी जवाब दिए कि देश के 285 पुलिस स्टेशनों में &#8216;वायरलेस सेट&#8217; या &#8216;मोबाइल फोन&#8217; भी नहीं है। अगर सरकारी आंकड़े सही हैं तो विगत 9 दिसंबर, 2022 तक दूरसंचार विभाग के डैशबोर्ड पर उपलब्ध कराए गए मोबाइल टावरों की संख्या के अनुसार, दूरसंचार नेटवर्क चलाने वाले चार ऑपरेटरों द्वारा नवंबर 2022 तक 7.37 लाख टावरों और 23.7 लाख बेस स्टेशनों का उपयोग किया जा रहा है। दिसंबर 2017 से टावरों और बीटीएस में क्रमशः लगभग 60 प्रतिशत की वृद्धि और 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। </p>
<p>सरकारी आंकड़े यह भी कहते हैं कि सालाना, टावरों को लगभग स्थिर दर पर जोड़ा जा रहा है, जिसमें साल-दर-साल 45,000-55,000 जोड़े जाते हैं। टेलीकॉम टावर की तरफ और बीटीएस की तरफ 50,000-65,000 नेट जुड़ता है। जबकि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने कहा कि 17,535 पुलिस स्टेशनों में से सिर्फ 14,834 पुलिस स्टेशनों में सीसीटीवी उपलब्ध हैं। झारखंड के 564 पुलिस स्टेशनों में से 47 में कोई वाहन नहीं है, 211 में कोई टेलीफोन कनेक्शन नहीं है और 31 बिना मोबाइल फोन या वायरलेस सेट के हैं।</p>
<p>यह तो आंकड़े की बात हुई। अब जरा पैसे की बात देख लें। सांख्यिकी के अनुसार केंद्र हर साल &#8216;पुलिस स्टेशनों के मॉडलाइजेशन के लिए राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को आर्थिक मदद करता है। 2019-20 में सरकार ने 781.12 करोड़ रुपये जारी किए। वहीं 2020-21 में 103.25 करोड़ रुपये और 2021-22 में 158.57 करोड़ रुपये जारी किए। यानी पैसा केंद्र से लें, और नियम अपना चलाएं। </p>
<p><a href="https://www.youtube.com/watch?v=8WnF10Bx5Jk&#038;t=39s"></a></p>
<p>विश्व में पहला केंद्रीय रूप से संगठित और वर्दीधारी पुलिस बल 1667 में किंग लुईस XIV की सरकार द्वारा पेरिस शहर, जो उस समय यूरोप का सबसे बड़ा शहर था, की निगरानी के लिए बनाया गया था। लॉर्ड कार्नवालिस (1786-1793) ने पुलिस सुधारों के एक भाग के रूप में दरोगा प्रणाली की शुरुआत की। प्रत्येक जिले की पुलिस को जिला न्यायाधीश के अधीन रखा गया। प्रत्येक जिले को थाने/पुलिस सर्किलों में विभाजित किया गया था, जिसका नेतृत्व एक भारतीय अधिकारी दरोगा करेगा, जिसकी सहायता कांस्टेबलों द्वारा की जाएगी। </p>
<p>देश की आज़ादी के लिए सन 1857 का विद्रोह तत्कालीन भारत की कानून व्यवस्था को झकझोड़ दिया। उस आंदोलन को कुचलने का सम्पूर्ण प्रयास किया गया। तत्कालीन वाइसराय वॉरेन हास्टिंग ने पुलिस व्यवस्था में सुधार की आवशयकता समझे इसलिए आज भी उन्हें पुलिस सुधार शुरू करने का श्रेय दिया जाता है। उन्होंने ही 1861 के पुलिस अधिनियम बनाया। आज भी स्वतंत्र भारत में पुलिस के मामले में जो अधिनियम है वह उसी 1861 अधिनियम पर आधारित है। उस पुलिस अधिनियम के तहत पुलिस को लोकतांत्रिक मूल्यों, मानवाधिकारों और कानून के शासन के सम्मान के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करने की परिकल्पना की गई है। </p>
<p>स्वतंत्र भारत में उक्त पुलिस अधिनियम की उपस्थिति में भी प्रत्येक राज्यों को यह अधिकार दिया गया कि वे अपने प्रदेश में कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिए अपने तरह से विधि-विधान बनायें। लेकिन 1861 का अधिनियम भी रहेगा। अब सवाल यह है कि 1861 अधिनियम के होते हुए अगर राज्य सरकार अपनी-अपनी सुविधा के अनुसार पुलिस नियम बनाये/बनाएंगे, वैसी स्थिति में 1861 अधिनियम का क्या औचित्य रह जायेगा।?</p>
<p>अब प्रश्न यह है कि अगर देश एक है, देश का राष्ट्रीय ध्वज एक है, देश का संविधान एक है जिसके तहत भारत का प्रत्येक नागरिक है &#8216;बराबर&#8217; है, वैसी स्थिति में पूरे राष्ट्र के लिए एक पुलिस अधिनियम क्यों नहीं है? कहने को तो वॉरेन हस्टिंग के कालखंड में निर्मित 1861 पुलिस अधिनियम है, लेकिन भारत के राज्यों में अपनी अलग-अलग पुलिस नियम हैं? ऐसा क्यों?  भारत के राष्ट्रपति, देश के प्रधानमंत्री, देश का संसद भारत के संविधान के अधीन एक ऐसी व्यवस्था करें जिससे भारत के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस &#8216;एक अधिनियम&#8217; के तहत आएं।</p>
<p>The post <a href="http://www.aryavartaindiannation.com/editorial/one-country-one-tricolour-one-constitution-one-police-act">✍ एक देश, एक तिरंगा 🇮🇳 एक संविधान 📙 फिर &#8216;एक सार्वभौमिक पुलिस अधिनियम&#8217;🪖क्यों नहीं ?</a> appeared first on <a href="http://www.aryavartaindiannation.com">आर्यावर्तइण्डियननेशन - aryavartaindiannation</a>.</p>
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		<title>ग्राहम बेल के टेलीफोन से आज के मोबाइल तक: यात्रा ट्रिंग-ट्रिंग, हेल्लो हेल्लो, रॉन्ग नंबर की</title>
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		<dc:creator><![CDATA[के. विक्रम राव]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 10 Mar 2023 13:11:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[सम्पादकीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सोचिए यदि टेलीफोन न होता तो ? दुनिया दूरियों में खो जाती। पृथकता गहराती। फासले लंबाते। मानवता बस चिंदी चिंदी ही रह जाती। मगर आज ही के दिन (10 मार्च) ठीक 146 साल पूर्व एक घटना ने सब कुछ बदल डाला। तभी 29-वर्षीय एलेक्जेंडर ग्राहम बेल ने टेलीफोन को इजाद किया। उनका तुक्का भिड़ गया। [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>सोचिए यदि टेलीफोन न होता तो ? दुनिया दूरियों में खो जाती। पृथकता गहराती। फासले लंबाते। मानवता बस चिंदी चिंदी ही रह जाती। मगर आज ही के दिन (10 मार्च) ठीक 146 साल पूर्व एक घटना ने सब कुछ बदल डाला। तभी 29-वर्षीय एलेक्जेंडर ग्राहम बेल ने टेलीफोन को इजाद किया। उनका तुक्का भिड़ गया। उनकी टोपी में तुर्रा तभी से लग गया। एकदा वे तार का एक सिरा पकड़े अलग कमरे में दूसरा छोर पकड़े मित्र से बोले : “वाटसन मैं मिलना चाहता हूं।” चंद लम्हों में ही वाटसन आ गए और हर शब्द दुहराये जो उन्होंने सुने थे। बस दूरभाष अवतीर्ण हो गया। वह आज के मोबाइल का पहला रूप था। ग्राहम बेल की विवशता थी कि उसकी मां और पुत्री बधिर थीं। एक वाणी चिकित्सक होने के नाते ग्राहम बेल बहरों से संकेतों द्वारा बातें करने का प्रयास करते थे। यही इस युगांतरकारी अविष्कार की जननी रही।</strong></p>
<p>ग्राहम ने “बेल कंपनी” स्थापित की। सफर मीलों चला। पेटेंट मिला। मगर अमेरिका के विधि अधिकारियों ने अड़चने पैदा की। अंततः कामयाबी मिल ही गई। तेरह साल की आयु में ही ग्रेजुएट बनने वाले ग्राहम बेल तीन साल बाद मशहूर संगीत अध्यापक भी बन गए। अर्थात ध्वनि, वाणी और संचार के निष्णात। उन्होंने कम्युनिकेशन तकनीक में भी दूरगामी और लाभकारी अविष्कार किए। संचार क्रांति के जनक कहलाये। उन्हें बधिरों पर दया आती थी। उनसे लगाव था। कारण ? उनकी मां, पत्नी और घनिष्ठ मित्र सभी कान की अपंगता से ग्रसित थे। पर ग्राहम बेल ने अपंगता को अभिशाप नहीं बनने दिया। दूरसंचार यंत्र उसी के परिणाम हैं।</p>
<p>ग्राहम बेल को न केवल टेलीफोन, बल्कि ऑप्टिकल-फाइबर सिस्टम, फोटोफोन, बेल और डेसिबॅल यूनिट, मेटल-डिटेक्टर आदि के आविष्कार का श्रेय भी जाता है। ये सभी ऐसी तकनीक पर आधारित हैं, जिसके बिना संचार-क्रंति की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। अलेक्जेंडर ग्राहम बेल को शायद अंदाजा नहीं रहा होगा जब उस जमाने की अपेक्षाकृत कम चर्चित उनकी दूसरी खोज मेटल डिटेक्टर आने वाले समय में आतंकवाद सहित अन्य प्रकार के अपराधों से लड़ने में कारगर उपकरण साबित होने वाली है। पुलिसिया जांच में आज बड़ी कारगर है। टेलीफोन की खोज के बाद बेल उसमें सुधार के लिए प्रयासरत रहे और 1915 में पहली बार टेलीफोन के जरिए हजारों किलोमीटर की दूरी से बात की। “न्यूयार्क टाइम्स” ने इस घटना को काफी प्रमुखता देते हुए इसका ब्यौरा प्रकाशित किया था। इसमें न्यूयार्क में बैठे बेल ने सैनफ्रांसिस्को में बैठे अपने सहयोगी वाटसन से बातचीत की थी। </p>
<p>उनकी विभिन्न खोजों पर उनके निजी अनुभवों का भी प्रभाव रहा। मसलन जब उनके नवजात पुत्र की सांस की समस्याओं के कारण मौत हो गयी तो उन्होंने एक मेटल वैक्यूम जैकेट तैयार किया जिससे सांस लेने में आसानी होती थी। उनका यह उपकरण 1950 तक काफी लोकप्रिय रहा और बाद के दिनों में इसमें और सुधार किया गया। अपने आसपास कई लोगों को बोलने एवं सुनने में कठिनाई होते देख उन्होंने इस दिशा में भी अपना ध्यान दिया और सुनने की समस्या के आकलन के लिए आडियोमीटर की खोज की। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों के अलावा वैकल्पिक ऊर्जा और समुद्र के पानी को मीठा बनाने की दिशा में भी काम किया।</p>
<p>ग्राहम बेल की जीवनी लिखने वाले कैरलोट ग्रे के अनुसार बेल के नाम 18 पेटेंट दर्ज हैं। इसके अलावा 12 पेटेंट उनके सहयोगियों के साथ दर्ज हैं। इन पेटेंटों में टेलीफोन, फोटोफोन, फोनोग्राफ और टेलीग्राफ शामिल हैं। उन्होंने आइसबर्ग का पता लगाने वाला एक उपकरण भी बनाया था। जिससे समुद्री यात्रा करने वाले नाविकों को खासकर अत्यधिक ठंडे प्रदेशों में विशेष मदद मिली।</p>
<p>अक्सर पत्रकारी नजरिए से हमें ख्याल आता है कि यदि ग्राहम बेल के ईजाद न होते तो मीडिया दुनिया ही विकलांग रहती। यही सवाल मेरी यांत्रिकी इंजीनियर बेटी (रेलवे बोर्ड में राष्ट्रीय धरोहर विभाग की कार्यकारी निदेशिका) विनीता ने वर्षों पूर्व मुझसे पूछा था : “पिताजी यदि ग्राहम बेल न होते तो ?” मेरा खरा जवाब था : “आज वैश्विक मीडिया गूंगी रहती।” मगर संचार क्रांति में निरंतर विकास देखकर आह्लादित होना हर पत्रकार के लिए स्वाभाविक है।  </p>
<p>एलेक्जेंडर ग्राहम बेल को सलाम। पेशेवर दृष्टि से टेलीफोन से जुड़े दो कार्टून याद आते हैं। एक में दिखा : दूसरी छोर से चोगा उठाने वाले का जवाब रहा : “गलत नंबर है।” तो फोन करने वाले ने पूछा : “आपने उठाया ही क्यों ?” (न्यूयार्क टाइम का कार्टून : 5 जून 1937)। दूसरा प्रसिद्ध कार्टून पत्रिका “पंच” (लंदन) का है। पति चोगा पकड़े पत्नी पर चिल्लाता है : “किसने इस टेबल की धूल पोछी ? मैंने उस पर एक नंबर नोट लिखा था।” फोन और अखबार का रिश्ता प्राचीन है, अटूट है। आज भी।</p>
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